Punjab Crime Story. नवनीत कौर महत्त्वाकांक्षी औरत थी. उस ने पहला प्रेम विवाह किया तो उस की खर्चीली आदतों से आजिज आ कर पति घर छोड़ कर चला गया और जब दूसरा प्रेम विवाह किया तो उस ने खुद ही उसे ठिकाने लगवा दिया.

थाना रायकोट पुलिस की टीम युद्धस्तर पर 32 वर्षीय जगविंदर सिंह की तलाश में जुटी थी. जहांजहां उस के मिलने की संभावना थी, वहांवहां तो उस के बारे में पता किया ही गया, साथ ही उस के अपहरण की आशंका  के चलते तमाम नएपुराने अपराधियों को भी थाने बुला कर पूछताछ की गई. लेकिन 2 दिन बीत जाने के बाद भी उस का कोई सुराग नहीं मिला. मुखबिर भी उस के बारे में कुछ नहीं बता सके.

जगविंदर सिंह की गुमशुदगी उस की 29 वर्षीया पत्नी नवनीत कौर ने दर्ज कराई थी. उस ने थानाप्रभारी को जो बताया था, उस के अनुसार, वह थाना रायकोट सिटी के वार्ड नंबर 8 की प्रोफैसर कालोनी में पति जगविंदर सिंह और 5 साल की बेटी के साथ रहती थी. रायकोट के ही मेन बाजार में ‘एवर शाइन’ नाम से उस का ब्यूटीपार्लर था.

करीब 9 साल पहले जगविंदर सिंह से उस की शादी हुई थी. उन दोनों की 5 साल की एक बेटी भी थी.

16 फरवरी, 2016 की सुबह 9 बजे नवनीत कौर अपनी स्कूटी ले कर ब्यूटीपार्लर के लिए निकली तो उस समय उस का पति घर पर ही था. इस की वजह यह थी कि नईपुरानी कारों का बिजनैस करने वाले जगविंदर के घर कुछ लोग कार देखने आने वाले थे. दोपहर 3 बजे के आसपास नवनीत ने पति के मोबाइल पर फोन किया तो उस ने बताया कि कुछ लोग कार देखने आए हैं, अभी वह व्यस्त है.

नवनीत अपने काम में लग गई. शाम 5 बजे वह घर पहुंची तो जगविंदर ने उस की स्कूटी ले कर जाते हुए कहा कि वह अमरनाथ की दुकान पर जा रहा है, थोड़ी देर में आ जाएगा. अमरनाथ का सड़क पर पानबीड़ी का खोखा था.

कुछ देर बाद जगविंदर लौटा तो नवनीत ने चाय बनाई और दोनों ने पी. चाय पी कर नवनीत दुकान पर चली गई. रात 9 बजे के आसपास नवनीत घर आई तो मकान का मुख्य गेट खुला था. स्कूटी खड़ी कर के वह अंदर दाखिल हुई तो सारे कमरों के दरवाजे खुले थे. उस ने जगविंदर को आवाज दी तो वह घर में नहीं था. वह स्कूटी से अमरनाथ की दुकान पर गई. वह वहां भी नहीं था.

नवनीत ने जगविंदर को फोन किया. फोन की घंटी तो बज रही थी, पर फोन नहीं उठ रहा था. उस ने संभावित स्थानों पर पति की तलाश की, पर उस का कहीं पता नहीं चला. तब तक रात के साढ़े 11 बज गए थे. एक बार उस ने फिर जगविंदर को फोन किया, इस बार उस का फोन बंद हो चुका था.

इस के बाद नवनीत ने हैबोवाल निवासी अपने देवर हरिंदर सिंह को फोन कर के सारी बात बताई. इस पर उस ने भाभी को सांत्वना दे कर सो जाने को कहा.

अगले दिन सुबह देवर आ गया तो नवनीत देवर के साथ पति की गुमशुदगी दर्ज कराने थाने पहुंची. गुमशुदगी दर्ज कराते समय उस ने शंका व्यक्त की थी कि उस के पति का अपहरण किया गया है. क्योंकि कोई भी आदमी अपनी मरजी से घर के दरवाजे खुले छोड़ कर नहीं जा सकता.

मुंशी जगदीश सिंह ने नवनीत कौर द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर जगविंदर सिंह की गुमशुदगी दर्ज कर ली. चूंकि अपहरण की शंका व्यक्त की गई थी, इसलिए इस बात की जानकारी थानाप्रभारी एवं डीएसपी को देने के साथ जगविंदर की तलाश तेजी से शुरू कर दी गई. पुलिस को जगविंदर के बारे में कुछ पता चलता, उस के पहले ही किसी से नवनीत को जगविंदर की इंडिका कार के बारे में बताया कि उस की कार गुरुद्वारा राड़ा साहिब के पास नहर किनारे खड़ी है.

सूचना मिलते ही नवनीत कौर सरपंच परमजीत सिंह, देवर हरिंदर सिंह, पान की दुकान वाले अमरनाथ और राजविंदर सिंह को साथ ले कर नहर किनारे वहां जा पहुंची, जहां कार के खड़ी होने के बारे में बताया गया था. कार जगविंदर की ही थी. नजदीक से देखने पर पता चला कि कार के अंदर जगविंदर सीट पर बाईं ओर लुढ़का पड़ा है. कार के शीशे और दरवाजे अंदर से लौक थे.

जगविंदर के शरीर में कोई हरकत नहीं थी. तुरंत इस बात की सूचना थाना सिटी रायकोट पुलिस को दी गई.

सूचना मिलते ही पुलिस वहां पहुंच गई, लेकिन समस्या यह खड़ी हो गई कि जगविंदर की गुमशुदगी तो थाना रायकोट में दर्ज थी, जबकि उस की लाश और कार थाना पायल के अंतर्गत पाई गई थी. वह थाना जिला खन्ना के अंतर्गत आता था. इसलिए आगे की काररवाई के लिए थाना रायकोट पुलिस ने थाना पायल पुलिस को सूचना दी. सूचना मिलते ही थाना पायल के थानाप्रभारी जगदीश सिंह पुलिस बल के साथ वहां पहुंच गए.

जगदीश सिंह ने लाश और कार को कब्जे में ले लिया. मिस्त्री को बुलवा कर कार के दरवाजे खुलवा कर उस का बारीकी से निरीक्षण किया गया. वहां ऐसा कोई सबूत हाथ नहीं लगा, जिस से अंदाजा लगता कि जगविंदर कार से यहां कैसे पहुंचा और उस की मौत कैसे हुई?

घटनास्थल और लाश का निरीक्षण कर जगदीश सिंह ने लाश पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भिजवा दी. जगदीश सिंह ने नवनीत कौर से पूछताछ की तो उस ने उन्हें भी वही सब बताया, जो वह गुमशुदगी दर्ज कराते समय थाना रायकोट पुलिस को बता चुकी थी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, जगविंदर की मौत दम घुटने से हुई थी. थानाप्रभारी की गैरमौजूदगी में थाने का कार्यभार जगदीश सिंह देख रहे थे. एसएसपी सतिंदर सिंह ने थाने का चार्ज बिट्टन कुमार को सौंपा तो वह इस मामले को सुलझाने में लग गए.

बिट्टन कुमार ने नवनीत कौर के बयान पर गौर किया तो उन्हें लगा कि जगविंदर की हत्या की गई है. रायकोट जा कर उन्होंने एक बार फिर नवनीत कौर, मृतक के खास दोस्तों और पान वाले अमरनाथ से पूछताछ की. इस पूछताछ में और पहले की पूछताछ में उन्हें काफी अंतर नजर आया.

जगविंदर की पारिवारिक पृष्ठभूमि जानने के लिए उन्होंने उस के भाई हरिंदर सिंह को थाने बुला कर पूछताछ की तो पता चला कि उन के पिता दर्शन सिंह का पुश्तैनी मकान और जमीन थाना बस्सी पठाना सरहिंद के गांव कलेड़ में था.

जगविंदर और नवनीत कौर ने प्रेम विवाह किया था. नवनीत पहले से शादीशुदा थी और पति को छोड़ कर मायके में रह रही थी. उसी बीच जगविंदर से उस के प्रेमसंबंध बन गए तो आपसी सहमति से दोनों परिवारों की मौजूदगी में उन की शादी हो गई. शादी के बाद दोनों रायकोट आ कर रहने लगे.

हरिंदर ने यह भी बताया था कि उस की भाभी काफी तेजतर्रार और उच्चमहत्त्वाकांक्षी थी. रायकोट आने के बाद उस ने अपना ब्यूटीपार्लर खोल लिया था. उस का काम खूब चल रहा था. कई औरतें उस के यहां काम करती थी.

हरिंदर की बातों से यही लगा कि उस की भाभी का चरित्र ठीक नहीं था. उस ने शंका भी व्यक्त की थी कि उस के भाई की मौत के पीछे उस की भाभी नवनीत का हाथ हो सकता है.

बिट्टन कुमार का संदेह विश्वास में बदल गया तो उन्होंने उसी दिन एसएसपी सतिंदर सिंह और डीएसपी दविंदर सिंह खिंद के आदेश पर विसरा की रिपोर्ट के आधार पर जगविंदर की हत्या का मुकदमा दर्ज कर अपने मुखबिरों को नवनीत कौर पर नजर रखने के लिए कह दिया.

मुखबिर के बताए अनुसार, बिट्टन कुमार ने 17 मई, 2016 को नवनीत कौर को पूछताछ के लिए थाने बुला लिया. सख्ती से की गई पूछताछ में नवनीत कौर ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि बलजिंदर सिंह उर्फ मिंटू, हरप्रीत सिंह उर्फ सोनू और कुलदीप के साथ मिल कर उस ने अपने पति जगविंदर की हत्या की थी.

इस के बाद बिट्टन कुमार ने नवनीत कौर की निशानदेही पर बलजिंदर, हरप्रीत और कुलदीप को उन के घरों से गिरफ्तार कर लिया. सभी को थाने ला कर अलगअलग पूछताछ की गई तो जगविंदर सिंह की हत्या की जो कहानी प्रकाश में आई, वह इस प्रकार थी—

नवनीत कौर भले ही साधारण परिवार की युवती थी, लेकिन उसे अच्छे खानेपहनने, खूब पैसा उड़ाने और दूसरों पर धाक जमा कर रहने का बड़ा शौक था. उम्र के साथ उस का यह शौक बढ़ता ही गया. अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए वह पढ़ाई के नाम पर घर में झूठ बोल कर पैसे लेती रहती थी. लेकिन साधारण हैसियत वाले उस के मातापिता ने जल्दी ही हाथ खड़े कर दिए.

मातापिता ने पैसे देने बंद किए तो उस ने एक लड़के से प्रेम कर के उस से शादी कर ली. लेकिन स्वार्थ की नींव पर टिके रिश्ते ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाते. फिजूलखर्ची और तरहरतह की मांगो से तंग आ कर जल्दी ही उस का प्रेमी पति बना वह लड़का घर छोड़ कर चला गया. इस के बाद नवनीत मायके आ कर रहने लगी.

नवनीत कौर की जगविंदर से मुलाकात एक शादी समारोह में हुई थी. नवनीत कौर तो खूबसूरत थी ही, इसलिए जगविंदर को पहली नजर में ही पसंद आ गई. जबकि नवनीत को जगविंदर इसलिए पसंद आया था, क्योंकि स्मार्ट होने के साथसाथ वह मालदार भी था.

उस के पिता के पास अच्छीखासी उपजाऊ जमीन थी, इस के अलावा उस का पुरानी कारों का अच्छाखासा व्यवसाय था.

कुछ ही मुलाकातों के बाद नवनीत कौर और जगविंदर के संबंध इतने प्रगाढ़ हो गए कि वे शादी के बारे में सोचने लगे. इस के बाद दोनों के घर वालों की उपस्थिति में उन की शादी हो गई. यह 9 साल पहले सन 2007 की बात है. शादी के कुछ दिनों बाद नवनीत कौर के कहने पर जगविंदर रायकोट आ कर रहने लगा. वहीं नवनीत एक बच्ची की मां बनी, जो इस समय 5 साल की है.

चूंकि नवनीत दिनभर घर में अकेली रहती थी, इसलिए टाइम पास करने के लिए उस ने मेन बाजार में दुकान ले कर ‘एवर शाइन’ नाम से ब्यूटीपार्लर खोल लिया. उस का यह ब्यूटीपार्लर बढि़या चलने लगा. उस का समय तो पास होने ही लगा, आमदनी भी होने लगी.

पतिपत्नी अपनेअपने काम में व्यस्त रहने लगे तो उन के बीच निकटता कम होने लगी. नवनीत कौर के ब्यूटीपार्लर में 3 लड़कियां भी काम कर रही थीं, इन के अलावा कुछ लड़कियां काम सीखने भी आती थीं. उन्हीं में एक गुरमीत कौर थी.

गुरमीत कौर शादीशुदा थी. उस के पति का नाम बलजिंदर सिंह था, जो रोज सुबह उसे ब्यूटीपार्लर छोड़ जाता था और शाम को ले जाता था. बलजिंदर जाट सिख था. लंबीचौड़ी कदकाठी, गोरा रंग, गठीला कसरती शरीर और सुंदर चेहरा, जो किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर सकता था.

नवनीत कौर भी धीरेधीरे उस की ओर आकर्षित होने लगी. इस की वजह यह थी कि बलजिंदर हर तरह से जगविंदर से 21 था. फिर अय्याशी करना नवनीत की फितरत में था. वह पति, बेटी और ससुराल वालों की इज्जत को ताक पर रख कर बलजिंदर को पाने के उपाय सोचने लगी.

समस्या यह थी कि बलजिंदर पत्नी को ले कर आता था और बाहर ही उतार कर चला जाता था. जबकि दूसरी ओर बलजिंदर को भी नवनीत पसंद थी. लेकिन पत्नी के साथ होने की वजह से वह उसे ठीक से देख भी नहीं पाता था.

अचानक एक दिन ऐसा संयोग बना कि उन की अकेले में मुलाकात हो गई. उस दिन गुरमीत को बुखार था. उस ने बलजिंदर से कहा कि जाते समय वह ब्यूटीपार्लर पर बताता जाए कि बुखार होने की वजह से वह नहीं आ पाएगी. बलजिंदर को ऐसे ही मौके की तलाश थी. वह पार्लर पर पहुंचा तो उसे अकेला देख नवनीत ने पूछा, ‘‘गुरमीत कहां है?’’

‘‘जी, मैं यही तो बताने आया हूं कि बुखार की वजह से वह आज नहीं आ सकती.’’

‘‘कोई बात नहीं, आइए बैठिए, चाय मंगाती हूं, पी कर जाइए.’’ नवनीत ने कहा.

चाय पीने के बाद नवनीत कौर ने कहा, ‘‘मुझे बिजली के औफिस जाना था. मेरी स्कूटी खराब है. अगर आप उधर जा रहे हों तो…?’’

‘‘जी मैं भी बिजली के औफिस ही जा रहा हूं. मुझे वहां थोड़ा काम है.’’ बलजिंदर ने कहा, ‘‘चलिए, मैं आप को अपनी मोटरसाइकिल से छोड़ दूंगा.’’

दोनों ही एकदूसरे से झूठ बोल कर बिजली औफिस पहुंचे और बिना मतलब इधरउधर काउंटरों पर पूछताछ करने के बाद बोले, ‘‘एक बार फिर आना पड़ेगा.’’

लौटते समय बलजिंदर एक रेस्तरां के सामने मोटरसाइकिल रोक कर बोला, ‘‘नवनीतजी, आज ठंड बहुत है. अगर बुरा न मानें तो एकएक कौफी हो जाए?’’

नवनीत क्यों बुरा मानती. उसे भी तो बातें करने का बहाना चाहिए था और इस से अच्छा न बहाना मिल सकता था, न मौका. कौफी पीते हुए बातचीत के दौरान अचानक बलजिंदर ने कहा, ‘‘नवनीतजी, आप बहुत खूबसूरत हैं.’’

औरतें अपनी तारीफ सुन कर वैसे ही खुश हो जाती हैं. नवनीत भी खुश हो गई. उस ने चाहत भरी नजरों से बलजिंदर को ताका तो उस ने अपना हाथ नवनीत के हाथ पर रख कर कहा, ‘‘मेरा मन करता है कि तुम्हें ले कर कहीं दूर घूमने निकल जाऊं, जहां हम दोनों के अलावा कोई और न हो.’’

‘‘तो चलो न, मैं ने कब मना किया.’’

नवनीत का जवाब सुन कर बलजिंदर खिलखिला कर हंस पड़ा. इस तरह दोनों में दोस्ती हो गई. फिर जल्दी ही यह दोस्ती अवैध संबंधों में बदल गई. उन्हें जब कभी मौका मिलता शरीर की प्यास बुझाने लगे.

इस के बाद नवनीत को बेटी और पति बोझ लगने लगा, इसलिए वह अपना ज्यादा समय बलजिंदर के साथ गुजारने लगी. जब इस बात की जानकारी गुरमीत को हुई तो नवनीत ने उसे कीमती उपहार दे कर चुप करा दिया. कहीं से इस बात की जानकारी जगविंदर को हुई तो उस ने इस बारे में नवनीत से पूछा. उस ने त्रियाचरित्र दिखाते हुए कहा, ‘‘जलन की वजह से किसी ने झूठमूठ तुम से कह दिया है. ऐसा कुछ भी नहीं है.’’

लेकिन जब एक दिन दोपहर को जगविंदर ने नवनीत और बलजिंदर को रंगेहाथों पकड़ लिया तो सच्चाई सामने आ गई. इस के बाद तो कोई बहाना भी नहीं बनाया जा सकता था.

जगविंदर पत्नी पर अंकुश लगा पाता, उस के पहले ही नवनीत और बलजिंदर ने उसे रास्ते से हटाने की योजना बना डाली. यह काम वे इतनी होशियारी से करना चाहते थे कि किसी को उन पर शक न हो. यही वजह थी कि इस के लिए नवनीत ने बलजिंदर को 1 लाख रुपए भी दिए.

जगविंदर की हत्या करने की जिम्मेदारी बलजिंदर ने अपने विश्वसनीय हरप्रीत सिंह और कुलदीप सिंह को सौंपी और एडवांस के रूप में उन्हें 60 हजार रुपए दे भी दिए.

जगविंदर की हत्या करने के लिए चारों ने तरहतरह की योजनाएं बनाईं. लेकिन इन में उन्हें कहीं न कहीं फंसने का खतरा दिखाई देता था. अंत में नवनीत कौर ने एक ऐसी योजना बनाई, जो सभी को पसंद आ गई.

नवनीत कौर द्वारा बनाई गई योजना के अनुसार, 16 फरवरी, 2016 की रात उस ने दूध में नींद की गोलियां मिला कर जगविंदर को पिला दिया. इस के बाद वह गहरी नींद सो गया तो नवनीत ने फोन कर के बलजिंदर और उस के साथियों को बुला लिया.

इस के बाद जगविंदर की गला दबा कर हत्या कर के लाश को उसी की इंडिका कार में डाल कर कोटली गांव के निकट राड़ा साहिब गुरुद्वारे के पास नहर की ओर जाने वाले रास्ते पर ले गए. जगविंदर को ड्राइविंग सीट पर बैठा कर सभी वापस आ गए. योजना के अनुसार, अगले दिन नवनीत ने जगविंदर के लापता होने और ढूंढ़ने का नाटक करते हुए उस की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

पूछताछ के बाद बिट्टन कुमार ने नवनीत कौर, बलजिंदर सिंह, हरप्रीत सिंह और कुलदीप सिंह को मैट्रोपौलिटन मजिस्ट्रैट पायल रछपाल सिंह की अदालत में पेश कर के 2 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड के दौरान चारों अभियुक्तों से घटनास्थल और घटनाक्रम की निशानदेही कराई गई. इस के बाद उन्हें पुन: अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.  Punjab Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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