Ghaziabad crime. हर तरह से सुखी और संपन्न धीरज पत्नी प्रीति को बहुत प्यार करता था. इसीलिए उस ने उस की बेवफाई को भी माफ कर दिया था. इस के बावजूद प्रीति ने खुद को नहीं संभाला और वरुण के प्यार में पड़ कर पति को मरवा कर अपनी गृहस्थी तो बरबाद की ही, बच्चों को भी अनाथ कर दिया.

विश्वास की डोर मजबूत हो तो पतिपत्नी के रिश्तों में प्यार और समर्पण बढ़ जाता है. यह एक ऐसा बंधन है, जिसे कई बार एकदूसरे की गलतियों को नजरअंदाज कर के भी निभाया जाता है. जब 2 दिल रिश्ते की खुशी से लबरेज होते हैं तो इस से गृहस्थी के आंगन में खुशियों के फूल अपनी खुशबू बिखेरते हैं.

धीरज और उस की पत्नी प्रीति का रिश्ता भी कुछ ऐसा ही था. कभी उन के विश्वास की कश्ती लड़खड़ाई तो उन्होंने कोशिश कर के उसे संभाल लिया. समाज की नजर में धीरज और प्रीति भौतिक सुविधाओं के बीच सरल और खुशहाल जिंदगी जी रहे थे. लेकिन कई बार जो दिखता है, वैसा होता नहीं, और जो होता है, वह प्रत्यक्ष दिखाई नहीं देता. किस के मन में क्या चल रहा है, इस बात को कोई नहीं जानता.

एक दिन शाम को धीरज घर आया तो वह शराब तो पिए हुए ही था, काफी परेशान भी था. यह कोई नई बात नहीं थी. प्रीति उस की इस आदत से भी वाकिफ थी और परेशानी से भी. 37 वर्षीय धीरज उत्तर प्रदेश के जिला गाजियाबाद शहर से सटे गांव सदरपुर के रहने वाले जगबीर सिंह का बेटा था. उस ने शहर के पौश एरिया संजयनगर में फ्लैट ले रखा था, जिस में पत्नी और 3 बच्चों के साथ रहता था.

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