Double Murder Mystery. बागपत डूडा विभाग में सिटी मिशन मैनेजर विक्रांत सिंह अचानक कहीं गुम हो गए. गुमशुदगी की सूचना उन की पत्नी प्राची ने थाने में लिखाते वक्त राखी कश्यप पर शंका जाहिर की थी. इसी बीच नहर से एक व्यक्ति की लाश मिली, जिस की शिनाख्त विक्रांत के रूप में हुई. इस घटना के 10 दिन बाद ही जंगल में एक महिला की लाश मिली, जिस का गला रेता गया था. जंगल में मिली लाश राखी कश्यप की थी. यानी विक्रांत की हत्या की मुख्य संदिग्ध खुद कत्ल हो चुकी थी. फिर पुलिस ने कैसे इस सनसनीखेज डबल मर्डर मिस्ट्री को सुलझाया?

राखी और विक्रांत के 3 साल पुराने रिश्ते में अब कड़वाहट घुलने लगी थी. वजह थी मथुरा का एक कीमती प्लौट. राखी चाहती थी कि विक्रांत वह प्लौट उस के नाम कर दे, लेकिन विक्रांत लगातार टालमटोल कर रहा था. इसी खींचतान के बीच एंट्री हुई सुधारस चौहान की.

सुधारस राखी को लिवइन रिलेशनशिप में उसी तरह अपने साथ रखना चाहता था, जैसे कि विक्रांत रख रहा था. उस ने राखी के गुस्से और असुरक्षा की भावना को भांप लिया. एक शाम, सुधारस ने राखी के दिमाग में जहर घोलते हुए कहा, ”जो मर्द 3 साल साथ रहने के बाद भी एक प्लौट तेरे नाम नहीं कर सकता, वो तुझे कभी भी धोखा दे सकता है राखी. तू जिस के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा रही है, वो तुझे इस्तेमाल कर रहा है.’’

राखी ने परेशान हो कर पूछा, ”तो फिर मैं क्या करूं?’’

सुधारस ने उस की आंखों में आंखें डाल कर बड़े ही विश्वास के साथ उस का हाथ थामा और कहा, ”मैं तेरा साथ दूंगा वह भी जिंदगी भर. लेकिन उस के लिए हमें विक्रांत को हमेशा के लिए रास्ते से हटाना होगा. पर हां, उसे ठिकाने लगाने से पहले, जितनी रकम उस से ऐंठी जा सकती है, निकाल लो. जिस से भविष्य में कोई कानूनी अड़चन पड़ी तो पैसा काम आए.’’

सुधारस की बातों ने राखी के दिल में लगी आग में घी का काम किया. इस तरह योजना का पहला हिस्सा शुरू हुआ.

अगले कुछ दिनों में विक्रांत से जो मनमुटाव चल रहा था, सब सामान्य दिखने लगा. विक्रांत अब भी राखी पर भरोसा करता था. उसे लगता था झगड़े खत्म हो जाएंगे, लेकिन खेल दूसरा शुरू हो चुका था. वैसे भी विक्रांत में अब पहले जैसी मर्दानगी व जोश नहीं रह गया था, जबकि राखी कश्यप अब सुधारस चौहान के साथ ज्यादा आनंद महसूस कर रही थी.

राखी ने विक्रांत पर पैसों के लिए दबाव बनाना शुरू किया. मौत के फंदे से बेखबर विक्रांत ने अपनी जान छुड़ाने और राखी को शांत करने के लिए, लापता होने से ठीक 2 दिन पहले अपने बैंक खाते से 4 लाख रुपए नकद निकाले और राखी के हवाले कर दिए.

विक्रांत को निपटाया

14 अप्रैल, 2026 की रात बागपत के उस बंद कमरे में सन्नाटा पसरा था, लेकिन अंदर एक खौफनाक खेल खेला जाने वाला था. सुधारस की योजना के मुताबिक एक पार्टी रखी गई थी. मेज पर शराब की बोतलें सजी थीं. विक्रांत को अंदाजा भी नहीं था कि यह उस की जिंदगी की आखिरी रात है.

सुधारस अपने साथी कपिल चौहान के साथ पार्टी में शामिल था. राखी के इन दोनों से संबंधों के बारे में विक्रांत को पहले से ही जानकारी थी. उस ने बता रखा था कि वह इन के साथ बिजनैस करेगी. राखी उसी पुराने अंदाज में विक्रांत के साथ मौजमस्ती कर रही थी. पैग बनाए जा रहे थे और सभी जम कर शराब का आनंद ले रहे थे.

नशे का खुमार चढ़ते ही राखी कश्यप को अपनी योजना दिमाग में आ गई, लेकिन वह विक्रांत पर गोली चलाने का साहस नहीं कर पा रही थी. सुधारस चौहान ने आंखों के इशारे से राखी को काम को अंजाम देने के लिए कहा. उस ने एक पैग अपने लिए और एक विक्रांत के लिए और बनाया. वह उसे एक सांस में ही गटक गई.

विक्रांत घूंटघूंट कर के शराब को गले से नीचे उतार रहा था. राखी उस के पहलू में लिपटी हुई बैठी थी. वह विक्रांत के पहलू से एक झटके के साथ उठी, थोड़ा आगे चली. उस ने अचानक रिवौल्वर निकाल कर विक्रांत पर गोली चला दी.

लेकिन गोली चलाते वक्त राखी के हाथ कांप गए. आखिर 3 साल का रिलेशनशिप जो था. राखी का निशाना चूक गया. गोली विक्रांत की टांग में लगी. गोली लगते ही विक्रांत सोफे से नीचे गिर गया और पूरे फर्श पर खून बहने लगा.

वह कराहते हुए राखी की तरफ देखने लगा, उस की आंखों में अविश्वास और खौफ था. वह अपनी प्रेमिका से रहम की भीख मांग रहा था, ”मैं ने तेरे लिए क्या नहीं किया. अपनी बीवी को छोड़ा, बच्चों को छोड़ा. मथुरा का प्लौट भी तेरे नाम कर दूंगा, लेकिन मेरी जान बख्श दे.’’

वह उठने की कोशिश कर रहा था. राखी को उस पर तरस आया. विक्रांत को उठाने के लिए राखी उस की तरफ लपकी. सुधारस चौहान यह देख कर घबरा गया. उसे लगा कि कहीं राखी अपना इरादा न बदल दे.

इस से पहले कि राखी विक्रांत तक पहुंच पाती, सुधारस चौहान ने रिवौल्वर निकाल कर विक्रांत के सीने में दनादन 3 गोलियां दाग दीं. एक के बाद एक कई गोलियों की आवाज कमरे की दीवारों में गूंजती हुई विक्रांत के सीने में धंस गईं.

कुछ ही सेकेंड में विक्रांत का शरीर शांत हो गया. कमरे में सिर्फ बारूद की गंध और भारी सांसों की आवाजें बची थीं. राखी सहमी हुई खड़ी थी. सुधारस ने उस की तरफ देखा, पिस्टल की नली से अब भी धुआं निकल रहा था.

कुछ सेकेंड तक तीनों के बीच मौत जैसी खामोशी छाई रही. फिर सुधारस ने राखी की तरफ देखा.

”अब कोई धोखा नहीं देगा,’’ राखी कांपते हुए विक्रांत की लाश को देखती रही.

जिस आदमी के साथ उस ने जिंदगी बिताने के सपने देखे थे, आज उसी की सांसें उस के सामने खत्म हो चुकी थीं. उस ने विक्रांत की लाश की तरफ इशारा करते हुए कहा, ”लो, हो गया तुम्हारा मथुरा का प्लौट हमेशा के लिए आजाद. अब यह लाश यहां से गायब करनी होगी.’’

आधी रात के बाद लाश को कंबल में लपेटा गया. एसयूवी कार नीचे इंतजार कर रही थी. शहर सो रहा था, लेकिन एक साजिश अपनी मंजिल तक पहुंच चुकी थी.

कमरे में पसरी बारूद की गंध अभी थमी भी नहीं थी कि विक्रांत की लाश को एक बोरे में ठूंस दिया गया. बाहर खड़ी गाड़ी की डिक्की बंद हुई और शुरू हुआ बागपत से सहारनपुर का वह सफर, जो राखी कश्यप की जिंदगी का सब से लंबा और डरावना सफर बनने वाला था.

गाड़ी की रफ्तार के साथ राखी के दिल की धड़कनें भी भाग रही थीं. डिक्की से आने वाली हर हल्की सी खटपट उस के जिस्म में सिहरन पैदा कर रही थी. गाड़ी में गहरा सन्नाटा था, जिसे सिर्फ स्टीयरिंग थामे कपिल की सांसें और बगल में बैठे सुधारस की ठंडी आहें काट रही थीं.

लाश लगाया ठिकाने

कपिल ने गाड़ी बंद की. हेडलाइट्स बंद होते ही चारों तरफ अंधेरा छा गया. सुधारस ने राखी की तरफ देखा और भारी आवाज में कहा, ”गाड़ी के अंदर ही बैठो.’’

राखी ने खिड़की का शीशा थोड़ा नीचे गिराया. ठंडी हवा के झोंके के साथ पानी और कीचड़ की गंध अंदर आई. उस ने देखा कि कपिल और सुधारस ने मुस्तैदी से डिक्की खोली. दोनों ने मिल कर भारी बोरे को बाहर खींचा.

गाड़ी की पिछली सीट पर बैठी राखी उस वक्त एक अजीब से उन्माद और खौफ के दोराहे पर खड़ी थी. जिस विक्रांत के साथ उस ने 3 साल बिताए थे, जिस से वह 2 दिन पहले तक लड़ रही थी, प्यार कर रही थी, वह अब कुछ ही फीट की दूरी पर एक प्लास्टिक के बोरे में बंद था. उस का दिमाग यह मानने को तैयार नहीं था कि सब कुछ इतनी जल्दी खत्म हो गया. पहली गोली भले ही उस ने चलाई थी, लेकिन सुधारस का वो खूनी रूप देख कर उस की रूह कांप गई थी.

उस ने देखा कि सुधारस और कपिल बिना किसी पछतावे के बड़ी बेरहमी से लाश को घसीट रहे हैं तो पहली बार उस के भीतर एक ठंडी दहशत ने जन्म लिया. उसे अहसास हुआ कि वह जिन लोगों के साथ खड़ी है, वे कितने खतरनाक हैं.

डर के साथसाथ उस के दिमाग के एक कोने में सुधारस की वो बातें भी गूंज रही थीं, ”मैं तेरा साथ दूंगा जिंदगी भर.’’

बाहर सुधारस और कपिल बोरे को खींच कर नहर की ढलान तक ले गए. कपिल ने बोरे का एक सिरा पकड़ा और सुधारस ने दूसरा. दोनों ने अपनी पूरी ताकत लगाई और 1…2…3… कहते हुए शव को नीचे पानी में फेंक दिया.

शांत पानी में एक जोरदार छपाक की आवाज हुई, लहरें उठीं और विक्रांत का वजूद हमेशा के लिए उस नहर के हवाले हो गया.

गाड़ी के भीतर बैठी राखी ने उस ‘छपाक’ की आवाज को अपने सीने के भीतर महसूस किया. उस ने कस कर अपनी आंखें बंद कर लीं और अपने दोनों हाथों से कान ढक लिए. उसे लगा जैसे वह पानी विक्रांत को नहीं, बल्कि उस के अपने बचेखुचे सुहाग और सुकून को निगल गया है. क्योंकि 2-4 दिन में ही वह विक्रांत के साथ शादी के बंधन में बंधने जा रही थी. बात तय हो चुकी थी. इसलिए उस ने बैंक खाते से पैसे निकाल कर राखी को दे दिए थे.

जब सुधारस ने वापस आ कर गाड़ी का दरवाजा खोला तो उस के हाथों में नहर की गीली मिट्टी लगी थी. उस ने राखी की तरफ देख कर कहा, ”चलो, अब तुम्हारा रास्ता साफ है.’’

राखी ने सिर्फ हां में सिर हिलाया. वह नहीं जानती थी कि जिस नहर में उस ने विक्रांत को दफन किया है, ठीक ऐसी ही एक नहर के किनारे उस की अपनी लाश का भी इंतजार हो रहा है.

राखी लगने लगी कांटा

सुधारस चौहान और उस के साथी कपिल चौहान के चेहरों पर हवाइयां उड़ रही थीं. जब उन्हें खबर मिली कि पुलिस ने राखी को विक्रांत वाले मामले में पूछताछ के लिए थाने बुलाया है. डर का साया उन के दिमाग पर इस कदर हावी हो गया कि उन्हें अपनी जान बचाने का सिर्फ एक ही रास्ता सूझा राखी की मौत.

विक्रांत की लाश को नहर के पानी में सौंपने के बाद राखी को लगा था कि उस ने अपने हिस्से का गुनाह दफन कर दिया है. वह नहीं जानती थी कि गुनाह कभी किसी का सगा नहीं होता और जिसे वह अपना हमसफर समझ रही थी, वह उस की मौत का कफन बुन रहा था.

उसे पता था कि राखी भले ही चालाक है, लेकिन पुलिस की सख्ती के आगे वह ज्यादा देर टिक नहीं पाएगी. वह टूटेगी तो सुधारस का रसूख, उस की सियासत और उस की जिंदगी हमेशा के लिए सलाखों के पीछे दफन हो जाएगी.

कपिल की तरफ देखते हुए सुधारस की आवाज कांपी, ”अगर राखी ने मुंह खोला तो हम दोनों नहीं बचेंगे कपिल. अगर गवाह ही नहीं रहेगी तो सबूत कहां से आएगा?’’

उसी पल दोनों ने मिल कर राखी को भी हमेशा के लिए खामोश करने का खौफनाक प्लान तैयार कर लिया.

सुधारस ने राखी को फोन किया. उस की आवाज में वही पुराना झूठा अपनापन था. उस ने कहा, ”राखी, पुलिस की इस टेंशन को दिमाग से निकालो. चलो, आज इस तनाव को भुलाने के लिए एक दारू पार्टी करते हैं.’’

सुधारस के एक सुनसान ठिकाने पर महफिल सजी. सुधारस और कपिल ने राखी के गिलास में चुपके से जानलेवा जहर मिला दिया. वे इंतजार कर रहे थे कि राखी उस प्याले को उठा कर पिए, जहर उस के जिस्म में फैले और बिना किसी शोर के कहानी खत्म हो जाए.

लेकिन उस दिन शायद राखी की किस्मत उस के साथ थी. उस ने गिलास को देखा, उस का मन कुछ अशांत था. उस ने सिर हिलाते हुए कहा, ”नहीं सुधारस, आज मेरा मूड नहीं है. पुलिस की वजह से मेरा दम घुट रहा है, मैं आज नहीं पीऊंगी.’’

सुधारस और कपिल ने एकदूसरे को देखा. दोनों के माथे पर पसीना था. मौत का पहला तीर खाली निकल चुका था.

प्लान ‘ए’ फेल हो चुका था. अब दोनों को जल्दबाजी में कुछ करना था, क्योंकि वक्त रेत की तरह हाथ से फिसल रहा था. दोनों ने प्लान ‘बी’ पर काम करना शुरू कर दिया.

एक दिन सुधारस ने कहा, ”राखी, सूचना  मिली है कि आज पुलिस पकडऩे के लिए छापा मार सकती है. चलो, कहीं 1-2 दिन किसी सुनसान जगह पर काटते हैं.’’

राखी अपने इस प्रेमी पर पूरा विश्वास कर रही थी और वह उस के प्लान के झांसे में आ गई. वह साथ चलने को तैयार हो गई. कपिल ने गाड़ी स्टार्ट की और वे राखी को ले कर कपिल के अपने फार्महाउस सहारनपुर पहुंचे.

सन्नाटा पसरा था. सुधारस ने जेब में रखे चाकू पर हाथ टिकाया, लेकिन ऐन वक्त पर कपिल की हिम्मत जवाब दे गई. उस ने सुधारस को इशारे से रोका. कपिल को लगा कि उस के अपने फार्महाउस पर हत्या करना खुद को सीधे पुलिस के हवाले करने जैसा होगा. यहां सबूत मिटाना नामुमकिन हो जाता.

लगाया राखी को ठिकाने

दोनों की घबराहट अब चरम पर थी. राखी गाड़ी की पिछली सीट पर बैठी खिड़की से बाहर देख रही थी, इस बात से पूरी तरह बेखबर कि मौत उस के कितने करीब मंडरा रही है.

वहां से गाड़ी फिर मुड़ी. इस बार ठिकाना बदल गया. गाड़ी मिर्जापुर इलाके के रजापुर नौगांवा की तरफ बढऩे लगी, जहां एक दूसरा सुनसान फार्महाउस था, जो कपिल के ही किसी मिलने वाले का था. वहां पर एक चौकीदार के अलावा और कोई नहीं रहता था.

दूसरे फार्महाउस पर पहुंचतेपहुंचते रात गहरी हो चुकी थी. राखी बेहद थक चुकी थी और डर के साए में सुधारस के और करीब आ गई थी. वह जिसे अपनी ढाल समझ रही थी, वही उस की जिंदगी का सब से बड़ा जल्लाद बनने वाला था.

जैसे ही राखी ने राहत की सांस ली, सुधारस ने अपना असली रंग दिखाया. उस ने बिना कोई मौका दिए राखी को दबोच लिया. राखी की आंखों में अचानक अविश्वास और खौफ का सैलाब उमड़ पड़ा.

”सुधारस, यह क्या कर रहे हो? तुम ने तो कहा था कि तुम मेरा साथ दोगे.’’ राखी की आवाज गले में ही घुट गई.

”साथ तो दे दिया राखी, पर अब तुम्हारी जुबान मेरा साथ छोड़ देगी,’’ सुधारस ने ठंडी आवाज में कहा.

राखी ने छटपटाने की कोशिश की. उस ने कपिल की तरफ देखा, लेकिन वहां सिर्फ पत्थरों जैसी खामोशी थी. सुधारस और कपिल ने मिल कर उस के जिस्म पर चाकुओं से वार करना शुरू कर दिया. राखी घायल हो कर जमीन पर गिर गई तो उस का गला रेत दिया.

Double Murder Mystery

वह लड़की, जो कुछ दिनों पहले तक अपनी जिंदगी के सपने बुन रही थी, जिस ने 4 लाख रुपए और मथुरा के प्लौट के लिए अपने 3 साल के प्यार (विक्रांत) का कत्ल कर दिया था, आज खुद अपनों के ही हाथों लहूलुहान हो रही थी.

चीखें धीरेधीरे शांत हो गईं. उस दूसरे फार्महाउस की दीवारों ने एक और खौफनाक राज अपने भीतर दफन कर लिया. मिर्जापुर के उस सुनसान फार्महाउस की रात अब और भी काली हो चुकी थी. फर्श पर बिखरा खून और हवा में तैरती चीखें इस बात की गवाही दे रही थीं कि एक और खौफनाक गुनाह को अंजाम दिया जा चुका है.

फार्महाउस बड़ा था और उस के मुख्य गेट पर एक बूढ़ा चौकीदार तैनात था. पार्टी शुरू होने से पहले ही कपिल ने चौकीदार को खुश करने के बहाने उस की मनपसंद शराब की एक बोतल और खाना थमा दिया था.

कपिल गाड़ी की डिक्की से पहले से खरीद कर लाया गया मोटा प्लास्टिक और जूट का एक बड़ा बोरा उठा लाया.

उन्होंने राखी के बेजान जिस्म को पहले प्लास्टिक में अच्छी तरह लपेटा ताकि गाड़ी में ले जाते समय कहीं भी खून की एक बूंद न टपके.

इस के बाद लाश को बोरे के अंदर ठूंस कर उस के मुंह को नायलौन की मजबूत रस्सी से कस कर बांध दिया गया. कुछ ही मिनटों में एक हंसतीखेलती लड़की का वजूद महज एक लावारिस पार्सल बन कर रह गया.

बाथरूम में रखे फिनाइल, तेजाब और वाशिंग पाउडर का इस्तेमाल किया गया. जहांजहां खून फैला था, उसे कई बार रगडऱगड़ कर धोया गया.

जिन कपड़ों, तौलियों और पोछों का इस्तेमाल हुआ था और खुद के भी खून से सने कपड़े एक अलग बैग में रख लिए गए ताकि उन्हें दूर कहीं जलाया जा सके. कमरे को इस तरह चमका दिया गया, जैसे वहां कोई आया ही न हो. सुधारस और कपिल ने मिल कर भारी बोरे को उठाया और दबे पांव फार्महाउस के पिछले दरवाजे से निकले.

चौकीदार अब भी अपनी कोठरी में घोड़े बेच कर सो रहा था. उन्होंने लाश को गाड़ी की डिक्की में डाला. गाड़ी स्टार्ट हुई और रजापुर नौगांवा के घने जंगलों की तरफ बढ़ गई, जहां एक सूखी नहर (रजबहे) के पास वे इस लाश को फेंक कर बागपत वापस आ गए.

राखी की उलझी जिंदगी

उत्तर प्रदेश के जिला बागपत के तहसील बड़ौत का एक गांव है राजपुर खानपुर. राखी कश्यप का जन्म इसी गांव में हुआ था. राखी के पिता का नाम है शेरदीन, बड़ा भाई है राजीव जो चाऊमीन की रेहड़ी लगाता है, छोटे भाई विकास की पढ़ाई चल रही है.

राखी की जवानी ने पूरे गांव के लड़कों की धड़कनों को बढ़ा रखा था. राखी का गोरा रंग और उस की कजरारी आंखें किसी ठंडी हवा के झोंके की तरह थीं. जब वह अपनी बड़ीबड़ी आंखों से अनजाने में भी किसी की तरफ देख लेती तो सामने वाले का दिल थाम लेना लाजमी था. उस की आंखों में एक अजीब सी मासूमियत और गहरा सन्नाटा था, जो देखने वाले को सम्मोहित कर देता. लेकिन गांव का कोई लड़का इतनी हिम्मत नहीं जुटा पाता था कि राखी के सामने जा कर अपने दिल की बात कह सके.

उस माहौल में राखी गांव के लड़कों के लिए किसी हकीकत से ज्यादा एक खूबसूरत ख्वाब जैसी थी. हालात को भांप कर राखी के मम्मीपापा ने उस की शादी मेरठ के एक गांव में कर दी.

राखी का अपने ससुराल वालों से विवाद हो गया. बात बढ़ती गई. एक दिन अचानक ससुराल छोड़ कर वह मायके में आ गई. राखी कश्यप का गुस्सैल रवैया देख ससुराल वालों ने फैसला करना ही उचित समझा. इस फैसले में दान दहेज के अलावा कुछ अतिरिक्त रकम भी राखी के परिजनों के हाथ लग गई.

उस के बाद राखी को गांव के ही एक लड़के से मोहब्बत हो गई. आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी. फलस्वरूप उस ने उस लड़के से शादी कर ली. परिवार वालों को इस शादी से कोई ऐतराज नहीं नहीं था, लेकिन यहां भी ससुराल वालों से विवाद हो गया.

अब राखी गांव की एक साधारण लड़की नहीं थी, बल्कि हालात के थपेड़ों से लड़ कर बहादुर लड़की बन चुकी थी. यहां विवाद के बाद वह अपने घर वापस लौट कर आ गई. लेकिन ससुराल वालों से मोटी रकम ले कर ही उन का पीछा छोड़ा. परिवार वालों ने इस बात पर ऐतराज किया तो उस की उन से कहासुनी हो गई. अब राखी कश्यप ने मांबाप का घर भी छोड़ दिया.

तलाक के बाद राखी खेकड़ा और फिर बागपत की अर्जुनपुरम कालोनी में रहने लगी. उस ने खुद को डूडा (डिस्ट्रिक्ट अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी) में संविदाकर्मी बता कर किराए पर कमरा लिया था. कमरा लेने के बाद वह नौकरी की तलाश में लग गई.

दोनों ससुरालों से मिली रकम ले कर वह बागपत आई थी. यहां लड़कियों के रंगढंग देख कर वह भी आधुनिक माहौल में ढलने लगी. यूं कहिए खरबूजे को देख कर खरबूजा रंग बदलने लगा.

विक्रांत से हुई मुलाकात

नौकरी की तलाश में औफिसों के चक्कर काटने के दौरान उस की मुलाकात नगर पालिका परिषद के एक अधिकारी से हुई. शादीशुदा अधिकारी से उस की नजदीकियां बढऩे लगीं. उस की पत्नी को जब यह बात पता चली तो उस ने खूब हंगामा किया. पत्नी के आक्रामक रवैए, विभाग और समाज में बदनामी से बचने के लिए उस अफसर ने राखी से दूरी बनाने का फैसला कर लिया. यहां भी अच्छीखासी रकम राखी के हाथ लगी.

अधिकारी अपना ट्रांसफर करा कर दूसरे जिले में चला गया. स्थानीय लोगों और पुलिस जांच के अनुसार, राखी पर कई लोगों से विवाद और ठगी के आरोप भी थे. वह लोगों को प्रेम जाल में फंसा कर पैसे ऐंठती थी.

राखी की सब से बड़ी खासियत उस का आत्मविश्वास था. वह हमेशा बेहद सलीके से तैयार होती थी. महंगे कपड़े, स्टाइलिश हैंडबैग, मैचिंग ज्वैलरी और परफ्यूम की हलकी खुशबू उस की मौजूदगी को अलग बना देती थी. वह अकसर ऐसे कपड़े पहनती थी, जिस में ग्लैमर साफ नजर आता था. 2 शादियों और एक शादीशुदा प्रेमी से जुदा होने के बाद भी उस की खूबसूरती में सिर्फ ग्लैमर नहीं था, एक रहस्य भी था.

वह सोशल मीडिया में भी रुचि लेने लगी थी और अपनी उपस्थिति दर्ज कर रही थी. वह सोशल मीडिया पर हमेशा बेहद सजधज कर तस्वीरें डालती थी. महंगी लोकेशन, कैफे, कारें, होटल उस की लाइफस्टाइल किसी मौडल जैसी दिखाई देती थी. लेकिन जो लोग करीब आए, उन्होंने महसूस किया कि उस चमक के पीछे बेचैनी भी थी.

इस शहर में एक सीनियर अधिकारी थे विक्रांत. विक्रांत का रुतबा, बड़ी गाड़ी और आलीशान बंगला देख कर कोई भी कह सकता था कि उन के पास जिंदगी की हर खुशी है. लेकिन इस चमकदमक के पीछे एक गहरा सन्नाटा छिपा था. विक्रांत सिंह ने साल 2018 में अपना गांव अपना घर छोड़ा और घर छोडऩे के बाद उत्तर प्रदेश के बागपत में डूडा विभाग में सीएमएम यानी कि सिटी मिशन मैनेजर बन गए.

उन की शादी प्राची सिंह नाम की एक युवती से हुई. प्राची सिंह भी सरकारी विभाग में काम करती हैं. सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग नोएडा में वे कुछ दिन साथ रहे. बाद में दोनों बागपत के चमरावल रोड पर गर्ग एनक्लेव में रहने लगे. विक्रांत और प्राची सिंह दंपति को एक बेटी पैदा हुई.

जिंदगी एकदम बढिय़ा चल रही थी. कभी प्राची सिंह नोएडा में रहती तो कभी प्रयागराज चली जाती. कभी अपने पति के साथ बागपत में रहती. जिंदगी में सब कुछ ठीकठाक चल रहा था. अचानक प्राची का रवैया बदलने लगा. विक्रांत को लगा कि प्राची सिंह अब कहीं और दिल लगा रही है. दोनों के बीच दूरियां और खटास बढ़ती चली गई. प्राची सिंह बागपत अपने पति के पास न आ कर अपनी छुट्टी में प्रयागराज ज्यादा जाने लगी. विक्रांत को मुलाकात का वक्त ही नहीं देती.

पतिपत्नी के बीच तनातनी और कड़वाहट के बीच राखी कश्यप का पदार्पण हुआ. अचानक एक दिन राखी की मुलाकात विक्रांत सिंह से हुई. शुरुआती दौर किसी हसीन ख्वाब जैसा था. दोनों घंटों फोन पर बातें करते, लंबी मुलाकातों के दौर चलते और धीरेधीरे राखी विक्रांत की जिंदगी का केंद्र बन गई.

राखी को लगने लगा था कि विक्रांत के रूप में उसे एक ऐसा इंसान मिल गया है, जो उस की हर ख्वाहिश पूरी कर सकता है. दोनों ने साथ जीनेमरने और शादी करने के वादे भी कर लिए. 3 साल तक यह रिश्ता चलता रहा.

विक्रांत ने राखी के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया था. उस ने अपने दोस्तों से दूरी बना ली, परिवार से झगड़े होने लगे, लेकिन वह राखी के बिना खुद को अधूरा समझने लगा था. दूसरी ओर राखी भी उस के प्यार में डूब चुकी थी.

खटपट की हुई शुरुआत

लेकिन समय के साथ इस प्यार में हक जताने और मांग पूरी करने का सिलसिला शुरू हो गया. इन्हीं दिनों राखी कश्यप ने डिमांड कर के शस्त्र लाइसेंस बनवाया और एक रिवौल्वर भी खरीद लिया. अपनी जींस पैंट के साथ रिवौल्वर ले कर घूमना उस के शौक में शामिल हो गया था.

वाट्सऐप और फेसबुक पर वह रिवौल्वर के साथ रीलें पोस्ट करने लगी. उसे रिवौल्वर वाली लड़की का खिताब मिल चुका था. राखी की छवि किसी फिल्म की दबंग हीरोइन जैसी शहर में हो गई थी.

2025 के अंत की बात है. कोई डिमांड पूरी न होने पर राखी कश्यप को इतना गुस्सा आया कि घर के बाहर खड़ी विक्रांत की कार को आग के हवाले कर दिया.

लपटें उठती देख विक्रांत की रूह कांप गई. उस रात विक्रांत को पहली बार अहसास हुआ कि उस ने किसी महबूबा से नहीं, बल्कि एक बारूद के ढेर से दिल लगा लिया है. इस घटना के बाद विक्रांत के दिल में प्यार से ज्यादा राखी का खौफ बैठ गया था.

अब विक्रांत और राखी के रिश्ते में दरारें आ चुकी थीं, इन दरारों के आने से पहले ही सुधारस चौहान की एंट्री हुई. सुधारस इलाके में भारतीय जनता पार्टी के नेता के रूप में पहचाना जाता था. वह राजनीतिक रसूख रखने वाला शख्स था और उस की नजर राखी पर थी.

सुधारस दिखने में बेहद शांत और सभ्य आदमी था. वह राखी के करीब पहले सहारे की तरह आया. राखी जब विक्रांत से लड़ कर रोती थी तो सुधारस उसे समझाता. धीरेधीरे उस ने राखी के दिल में अपनी जगह बना ली.

राखी मिली सुधारस से

राखी को सुधारस के रसूख और पैसों में अपना नया भविष्य दिखने लगा. सुधारस ने भी राखी की खूबसूरती और उस की महत्त्वाकांक्षाओं का फायदा उठाने के लिए उस से नजदीकियां बढ़ानी शुरू कर दीं. राखी अब एक साथ 2 नावों पर सवार थी.

एक तरफ वह विक्रांत को अपनी अंगुलियों पर नचा रही थी तो दूसरी तरफ सुधारस के साथ मोहब्बत का नया खेल खेल रही थी. एक तरफ 3 साल का पागलपन भरा प्यार था, दूसरी ओर सुधारस का सुकून भरा साथ. मगर सच यह था कि दोनों पुरुष अब प्यार से ज्यादा राखी को हासिल करना चाहते थे.

धीरेधीरे राखी को महसूस होने लगा कि वह किसी प्रेम कहानी में नहीं, बल्कि एक ऐसे खेल में फंस चुकी है, जहां हर आदमी अपने हिसाब से उसे इस्तेमाल कर रहा है. इस के बाद घटनाएं और खतरनाक हो गईं.

एक शाम विक्रांत सिंह पर फायरिंग हुई. गोली उस की बांह छू कर निकल गई. पुलिस जांच में कई नाम सामने आए, मगर कोई सबूत नहीं मिला.

गोली शायद राखी कश्यप ने ही चलाई थी. सुधारस बेहद शातिर था. उस ने राखी के दिमाग में यह बात पूरी तरह बिठा दी कि विक्रांत उसे सिर्फ इस्तेमाल कर रहा है.

सुधारस की शह पा कर राखी ने विक्रांत पर पैसों के लिए दबाव बनाना शुरू किया. अपनी कार जलने के बाद से सहमा हुआ विक्रांत राखी को शांत करने के लिए मजबूर हो गया. उस ने लापता होने से ठीक 2 दिन पहले अपने बैंक खाते से 4 लाख रुपए निकाल कर दिए थे. वैसे भी 25 अप्रैल, 2026 को दोनों शादी करने वाले थे.

15 अप्रैल, 2026 की यह बात है. विक्रांत औफिस नहीं पहुंचा तो औफिस के लोगों ने उसे फोन किया. विक्रांत का फोन स्विच्ड औफ आ रहा था. यह बात औफिस के साथी ने उस की पत्नी प्राची सिंह को बताया कि विक्रांत औफिस भी नहीं आया है और उस का फोन भी स्विच्ड औफ है.

पत्नी को जब यह पता चला कि विक्रांत का नंबर स्विच्ड औफ आ रहा है, तब उस ने भी उसे फोन किया, लेकिन उस का फोन अभी भी स्विच्ड औफ था. कई दिनों तक उस ने अपने रिश्तेदारों को, विक्रांत के मिलने वालों को फोन कर कर के पूछा कि विक्रांत को देखा है? उस का फोन स्विच्ड औफ आ रहा है.

कहीं से भी विक्रांत के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली तो वह बागपत कोतवाली में पहुंच गई. यह 22 अप्रैल, 2026 की बात है. प्राची सिंह की पूरी बात सुनने के बाद पुलिस ने विक्रांत की गुमशुदगी दर्ज कर ली. प्राची सिंह ने पुलिस के सामने राखी कश्यप नाम की महिला पर शक जताया.

Double Murder Mystery

पुलिस ने राखी कश्यप को 23 अप्रैल, 2026 की शाम को हिरासत में ले कर पूछताछ की. फिर 24 अप्रैल, 2026 को उसे पूछताछ के लिए दोबारा बुलाया गया. पूछताछ में उस ने बताया कि साहब यह बात सच है कि विक्रांत सिंह के साथ मेरे नजदीकी रिश्ते हैं. हम दोनों ने यह फैसला लिया था कि आने वाली 25 अप्रैल, 2026 को तिरुवनंतपुरम जाएंगे. वहां पर शादी करेंगे और अपनी आगे की जिंदगी बिताएंगे. लेकिन वह बुजदिल किस्म का इंसान निकला. वह मुझे छोड़ कर न जाने कहां चला गया. कहीं जा कर छिप गया. वह शादी से बचना चाह रहा है.

पुलिस ने उस की बात सुनी और उसे इस हिदायत के साथ घर वापस जाने दिया कि जब भी तुम्हें पुलिस बुलाएगी, तुम्हें आना पड़ेगा. पुलिस को जांच के क्रम में लगा कि विक्रांत शायद जानबूझ कर गायब हो गया है.

उधर प्राची सिंह अपने पति विक्रांत सिंह को ले कर बहुत परेशान थी. बारबार थाने के चक्कर काट रही थी. इसी बीच किसी ने सलाह दी कि 17 अप्रैल, 2026 को यूपी के सहारनपुर जिले में थाना बडग़ांव क्षेत्र में नहर में एक लाश मिली थी. हो सकता है कि वह आप के पति की हो.

प्राची सिंह सीधा वहां पहुंच गई. बरामद लाश के कपड़े और फोटो पुलिस ने उन्हें दिखाए. सारी चीजें देखने के बाद उन्होंने तसदीक की कि यह लाश तो उन के पति की है. यानी विक्रांत की हत्या हो चुकी थी. यहां भी पुलिस के सामने प्राची सिंह ने जोर दे कर कहा कि मेरे पति की हत्या राखी कश्यप ने की है. पोस्टमार्टम से पता चला कि उस की गोली मार कर हत्या की गई थी और लाश को नहर में फेंक दिया गया था.

इस अज्ञात लाश की शिनाख्त विक्रांत सिंह के रूप में हो गई तो पुलिस आगे की जांच में जुट गई. इसी बीच 27 अप्रैल को मिर्जापुर के रजापुर नौगांवा के जंगलों में एक और अज्ञात महिला की लाश मिली, जिस का गला रेता हुआ था.

सहारनपुर के एसएसपी अभिनंदन सिंह ने इसे एक बड़ी आपराधिक साजिश मानते हुए स्वाट, सर्विलांस और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें गठित कीं. जब सहारनपुर पुलिस ने राज्य भर के लापता लोगों के डेटा से मिलान किया तो कडिय़ां आपस में जुडऩे लगीं. नहर से मिला युवक बागपत का लापता विक्रांत था और जंगल में मिली लाश कोई और नहीं, बल्कि राखी कश्यप की थी.

जैसे ही यह साफ हुआ कि विक्रांत की हत्या की मुख्य संदिग्ध राखी खुद कत्ल हो चुकी है, सहारनपुर और बागपत पुलिस ने हाथ मिला लिया. अब यह केस एक साधारण मर्डर से बदल कर उत्तर प्रदेश का सब से सनसनीखेज ‘डबल मर्डर मिस्ट्री’ बन चुका था.

सहारनपुर के एसएसपी अभिनंदन सिंह के निर्देशन में सर्विलांस टीम ने राखी कश्यप के मोबाइल की आखिरी लोकेशंस खंगालनी शुरू की. यहीं पर कातिलों की सब से बड़ी चूक सामने आई.

26 अप्रैल की रात को राखी का मोबाइल बागपत से चल कर सहारनपुर के मिर्जापुर इलाके में ऐक्टिव था. उसी समय, उसी टावर लोकेशन पर 2 और मोबाइल नंबर लगातार चल रहे थे. वे नंबर थे सुधारस चौहान और उस के साथी कपिल चौहान के.

इस के अलावा पुलिस ने टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज खंगाले. आधी रात को एक संदिग्ध गाड़ी बागपत से सहारनपुर की तरफ जाती दिखी, जिस में सुधारस और कपिल सवार थे. उधर, फोरैंसिक टीम ने उस फार्महाउस पर धावा बोल दिया, जहां कत्ल हुआ था.

भले ही सुधारस और कपिल ने फर्श को एसिड और फिनाइल से चमका दिया था, लेकिन फोरैंसिक एक्सपट्र्स ने ल्यूमिनोल टेस्ट के जरिए दीवारों के कोनों और फर्श की दरारों से खून के वो कतरे ढूंढ निकाले, जिन्हें कातिल नहीं मिटा पाए थे. फार्महाउस के चौकीदार से भी पुलिस ने पूछताछ की. उस की जानकारी में कुछ न होने के कारण उसे छोड़ दिया था.

पुलिस के पास अब पुख्ता वैज्ञानिक सबूत थे. बागपत और सहारनपुर पुलिस की स्वाट टीमों ने सुधारस और कपिल के ठिकानों पर एक साथ दबिश दी. खुद को घिरता देख दोनों ने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर के दोनों को दबोच लिया.

थाने के बंद कमरे में जब पुलिस ने सुधारस के सामने फोरैंसिक रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन की फाइल पटकी तो राजनीति और रसूख की हनक दिखाने वाले सुधारस के चेहरे का रंग उड़ गया. वह पुलिस की सख्ती और सबूतों के आगे ज्यादा देर टिक नहीं पाया.

उस ने रोते हुए कुबूल किया, ”हां साहब, पहले हम ने राखी के साथ मिल कर विक्रांत को मारा और लाश बडग़ांव नहर में फेंक दी. लेकिन जब पुलिस ने राखी को उठाया तो मैं डर गया कि वह मेरा नाम ले लेगी. इसलिए मैं ने और कपिल ने उसे रास्ते से हटाने के लिए मिर्जापुर के फार्महाउस पर बुलाया. चौकीदार को खाना और शराब दिया और राखी का गला रेत कर उसे भी ठिकाने लगा दिया.’’

स्थानीय लोगों और पुलिस जांच के अनुसार, राखी पर कई लोगों से विवाद और ठगी के आरोप भी थे. वह लोगों को प्रेम जाल में फंसा कर पैसे ऐंठती थी. कई प्रभावशाली लोगों, यहां तक कि कुछ नेताओं से भी उस के संपर्क थे. सुधारस ने यह भी आरोप लगाया है कि उस की भी आपत्तिजनक वीडियो राखी के पास थी, जिसे वायरल करने की धमकी दे कर वह उसे ब्लैकमेल करती थी.

2 मई, 2026 की सुबह सहारनपुर पुलिस लाइन में आयोजित एक प्रैस कौन्फ्रेंस में जब एसएसपी अभिनंदन सिंह ने इस सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड का खुलासा किया तो पूरी मीडिया हैरान रह गई. पुलिस की मुस्तैदी, सटीक तालमेल और आधुनिक फोरैंसिक जांच की बदौलत यह ब्लाइंड मर्डर केस महज कुछ ही दिनों में सुलझ गया.

सुधारस और कपिल को हथकडिय़ों में जकड़ कर जब जेल की वैन में बैठाया जा रहा था, तब उन के चेहरों पर रसूख का घमंड नहीं, बल्कि सलाखों के पीछे कटने वाली जिंदगी का खौफ साफ देखा जा सकता था. पुलिस की इस मुस्तैद काररवाई ने साफ कर दिया कि गुनहगार कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून की नजरों से बच नहीं सकता.

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