Family story . सना जब नईनवेली दुलहन बन कर मुबीन के घर आई तभी से मुबीन ने उस की भावनाओं को नहीं समझा. वह हमेशा अपने बिजनैस को तवज्जो देता था. इसी अनदेखी से सना के पैर ससुर रियाजुद्दीन की तरफ बहक गए. इस के बाद घर में ऐसा खूनखराबा हुआ कि…
अवैध संबधों के परिणाम सामाजिक बदनामी के रूप में बेहद दुखद अंजाम तक पहुंचते हैं. मुबीन को केवल शक ही नहीं बल्कि पूरा यकीन हो गया था कि उस के पिता और उस की पत्नी के बीच में अवैध संबंध हैं. उस ने दोनों को कई बार समझाया, पंचायत भी बुलाई, लेकिन दोनों अपनी हरकतों से बाज नहीं आए. अंतत: उस ने दोनों को ऐसी खौफनाक मौत दे डाली, जिस से पूरे घर में ही हमेशाहमेशा के लिए मातम पसर गया.
उस दिन घर पहुंचतेपहुंचते मुबीन को काफी देर हो गई थी. दुकान में काफी भीड़भाड़ होने के कारण वह दिन भर व्यस्त रहा था. उस के बाद उस का एक दोस्त कई दिनों के बाद उस से मिलने आया तो मुबीन ने मार्केट से एक व्हिस्की की बोतल मंगा ली. स्नैक्स ले कर उस का दोस्त आया ही था तो दोनों काफी देर तक बचपन की बातें करतेकरते शराब की घूंट भरते रहे.
जब मुबीन अपने घर पर बाइक से आया तो रात के 10 बजे चुके थे. मुबीन ने जैसे ही कमरे में प्रवेश किया तो उस ने देखा कि उस की बीवी सना और अब्बू रियाजुद्दीन हंसहंस कर बेतकल्लुफी से बातें कर रहे थे. यह देखते ही मुबीन की आंखों में तो जैसे खून ही उतर आया था.
बेटे पर नजर पड़ते ही रियाजुद्दीन उस के कमरे से तुरंत बाहर निकल गया. तभी मुबीन बीवी पर गरजते हुए बोला, ”देख सना, मैं तुझे काफी समझा चुका हूं. मगर कहते हैं कि कुत्ते की दुम को चाहे कितना ही सीधा क्यों न कर लो, वह हमेशा टेढ़ी की टेढ़ी ही रहती है. अब मैं यह बिल्कुल भी बरदाश्त नहीं करूंगा कि तू मेरे ही कमरे में अपने आशिक के साथ गुलछर्रे उड़ाती फिरे,’’ कहते हुए मुबीन ने एक जोर का थप्पड़ सना के गालों पर जड़ दिया था.
थप्पड़ पड़ते ही सना पर भी जैसे बदला लेने का जुनून सवार हो गया और वह भी उसे धक्का देने लगी और हाथापाई करने लगी. गुस्से में सना ने मुबीन को जोर का धक्का दिया. नशे में होने के कारण वह अपने को संभाल नहीं पाया और सीधे कमरे की दीवार से टकरा कर फर्श पर गिर पड़ा.
सना का पति फर्श पर गिर गया था, मगर उस ने उस की बिलकुल भी परवाह नहीं की और घर का यह वाकया बढ़ाचढ़ा कर अपने मायके में बता दिया और अपने अब्बूअम्मी से उसे मायके ले जाने के लिए कहने लगी. उस ने कहा कि अम्मी किसी दिन तुम्हारा ये दामाद मुझे जान से मार डालेगा, इसलिए तुम कल आ कर मुझे यहां से ले जाओ.
उस के बाद सना गुस्से से अपने छोटे बच्चे को गोदी में उठा कर कमरे से बाहर निकल गई और ड्राइंगरूम में जा कर इत्मीनान के साथ सोफे पर सो गई.
उधर दूसरी तरफ मुबीन फर्श पर गिरे हुए सना की एकएक हरकत को गौर से देख रहा था. वह सोच रहा था कि यह कैसी बीवी है, जो अपने पति को फर्श पर गिरा कर चैन से सारी बातें नमकमिर्च लगा कर अपने मायके वालों को बता रही थी और फिर कमरे से ही बाहर चली गई थी. उसे उस वक्त अपनी किस्मत पर बड़ा रोना भी आ रहा था.
अब वह यह बात अच्छी तरह से समझ चुका था कि उस की बीवी सना के दिल में उस के प्रति न तो प्रेम बचा है और न ही सम्मान, उसे अब यकीन होता जा रहा था कि सना उसे कभी भी मार सकती है या आशिक बने ससुर के साथ मिल कर मरवा भी सकती है. वह उन के हाथों मरना नहीं चाहता था और न ही इस तरह की जिल्लत भरी जिंदगी जीना चाहता था, इसलिए अब उस ने मन ही मन दोनों को हटाने का निर्णय ले लिया था.
मुबीन अब धीरे से फर्श से उठा, उस ने अपने जूते और सौक्स निकाल कर अपने कपड़े बदले और बाथरूम में तसल्ली से अपने हाथपांव धोए. उस के बाद जब उस ने शीशे में अपना चेहरा देखा तो उसे अपनी दोनों आंखें सुर्ख अंगारों की तरह लाल दिखाई दे रही थीं.
मुबीन ने उसी पल इस समस्या के समाधान का हल खोज कर मन ही मन एक कठोर और अंतिम निर्णय ले लिया था. उस के बाद वह बिस्तर पर लेट कर अपने अंतिम निर्णय को अमल में लाने के लिए प्लान बनाने लगा. तभी उस के मन में एक अच्छा प्लान आया तो वह जैसे खुशी से उछल ही पड़ा था. उस के बाद वह आराम से सो गया था.
सुबहसुबह घर में जब काफी शोरशराबा हुआ तो मुबीन की नींद खुल गई. असल में बीती रात सना ने अपने परिवार वालों को फोन किया था, जिस के कारण सना के अम्मीअब्बू, भाई व अन्य कुछ रिश्तेदार सुबह 8 बजे गांव भौरा से मुबीन के घर पहुंच गए थे.
दोनों पक्ष के लोग आमनेसामने बैठ कर इस समस्या को सुलझाने का प्रयास करने लगे. इस के बाद मुबीन, उस का भाई रेहान, बहन अर्शी और अम्मी किश्वर एक साथ मिल कर रियाजुद्दीन से लडऩे लगे थे. जब मामला आगे बढऩे लगा तो सना के ताऊ, अब्बू और भाई सुहैल आगे आ कर उन्हें रोकने लगे.
थोड़ी देर बाद जब झगड़ा थोड़ा शांत हुआ तो मुबीन अपने ससुर खलील अहमद और उन के बड़े भाई अफरोज (परिवर्तित नाम) के पास आ कर बोला, ”पापाजी, आप लोग अब यहां से अपने घर चले जाइए, यह हमारे घर का पारिवारिक मामला है. हम अब समझौता कर लेंगे और यह मामला आपस में निपटा लेंगे.’’
यह सुन कर मुबीन के ससुर खलील अहमद अपने बड़े भाई अफरोज और अपने बेटे सुहैल के साथ गाड़ी में बैठ कर अपने गांव भौरा वापस चले गए, जबकि सना की अम्मी शहनाज वहीं पर रही, क्योंकि वह सना की डिलीवरी से ही उस के साथ रही थी.
अभी भी सना रोजमर्रा के काम तबीयत खराब होने के कारण नहीं कर पा रही थी, इसलिए सना की मां शहनाज अभी भी सना के घर पर ही उस के साथ रह रही थी.
इधर जैसे ही मुबीन के ससुर लोग गाड़ी में बैठ कर अपने गांव की ओर गए, मुबीन के पिता रियाजुद्दीन अपने पिता मकबूल के साथ बाजार से बकरे का गोश्त लाने चले गया.
मुबीन रात की बातों को याद कर के मन ही मन कुढ़ रहा था. फिर उठ कर वह अपने पिता के कमरे में गया और उस ने उन की अलमारी खोली तो उस की नजर जैसे ही सामने पड़ी तो उस की आंखें तो जैसे खुशी से चमक ही उठी थीं, क्योंकि सामने उस के अब्बा की लाइसेंसी पिस्टल रखी थी.
वैसे अमूमन रियाजुद्ïदीन अपनी पिस्टल अपने ही साथ ले जाया करता था, लेकिन उस सुबह घर में पहले ही बड़ा बखेड़ा शुरू हो गया था. इसलिए ऐसे ही बाजार चला गया था.
मुबीन को जैसे मुंहमांगी मुराद ही मिल गई थी. वैसे भी जब पानी सिर के ऊपर से गुजरने लगे तो फिर कोई भी इंसान अपना अंतिम निर्णय बना लेता है, उस के बाद वह फिर परिणाम के बारे में बिल्कुल भी नहीं सोचता. जब किसी इंसान की परिस्थितियां उस की सहनशक्ति और धैर्य से बाहर निकल जाती हैं तो उस के मन से भय ही खत्म हो जाता है. ऐसे समय में किसी भी व्यक्ति का ध्यान छोटीमोटी बातों से हट कर केवल एक समस्या पर केंद्रित हो जाता है. मुबीन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था, उस ने अब बीवी और अब्बू दोनों को सदासदा के लिए दुनिया से विदाई करने का मन बना लिया था.
रियाजुद्दीन जब बाजार से गोश्त ले कर अपने गांव के पास पहुंचा तो उस के पिता मकबूल ने कहा, ”बेटा रियाज, मुझे इस दुकान के पास उतार दे, यहां पर मैं अपने बचपन के दोस्त अकरम के साथ थोड़ी गुफ्तगू कर लेता हूं.’’
तब रियाजुद्दीन ने उन्हें अकरम की दुकान के सामने उतार दिया और अपने घर पहुंच कर उस ने सामान तख्त पर रखा और अपने कमरे में चला गया.
इधर मुबीन तो इसी मौके की तलाश में था. उस के पास अब अपने पिता की पिस्टल भी हाथ लग चुकी थी, जिस में उस ने पहले से ही गोलियां लोड कर ली थीं. वह बिना पल गंवाए सीधे अपने पिता के पास जा पहुंचा और उस की कनपटी से सटा कर गोली मार दी.
रियाजुद्दीन जमीन पर गिर गया तो उस ने फिर एक गोली रियाजुद्दीन को मार दी, जिस के कारण थोड़ी ही देर में उस ने वहीं पर दम तोड़ दिया.
जब मुबीन को यकीन हो गया कि उस के पिता की मौत हो चुकी है तो वह सना को ढूंढने लगा. तभी उसे सना बाथरूम से निकलती दिखाई दी.
गोली की आवाज सुनते ही सना ने देखा कि मुबीन अब उस की ओर आ रहा है तो उस ने भागने की कोशिश की, लेकिन मुबीन ने उसे भागने का मौका नहीं दिया और सना के सीने और पेट पर निशाना बना कर 2 गोलियां उतार डालीं. गोलियां लगते ही सना फर्श पर गिर कर तड़पने लगी. उस के बाद मुबीन ने पिस्टल अपनी कमर में खोंस ली और घर से बाहर निकल गया. यह बात 24 मई, 2026 कर है.
उत्तर प्रदेश के जिला बुलंदशहर की खुर्जा कोतवाली के एसएचओ रामफल सिंह औफिस में बैठे थे कि तभी उन के फोन पर एक अनजान नंबर से कौल आई, ”आप एसएचओ रामफल साहब बोल रहे हैं न?’’ उधर से आवाज आई.
”जी बताएं, आप कौन हैं और कहां से बात कर रहे हैं?’’ एसएचओ ने कहा.
”साहब, मैं कलंदर गढ़ी गांव से अशरफ बोल रहा हूं. हमारे गांव में एक युवक ने अभीअभी अपने पिता और अपनी बीवी को गोली मार दी है. यहां पर काफी भीड़ जमा है. दोनों की हालत नाजुक है. कृपया आप जल्दी यहां पर आ जाइए,’’ कह कर दूसरी ओर से कौल डिसकनेक्ट कर दी.
2-2 कत्ल की खबर मिलते ही एसएचओ चौंक गए. उन्होंने इस वारदात की सूचना तुरंत अपने आला अफसरों को दे दी और अपनी पुलिस टीम के साथ घटनास्थल की ओर निकल गए.
एसएचओ रामफल रास्ते में थे, तभी उन के मोबाइल पर एक और फोन आया.
”आप कौन बोल रहे हैं?’’ एसएचओ ने अपना मोबाइल फोन उठाते हुए कहा.ï
”देखिए आप खुर्जा कोतवाली के कोतवाल हैं न! एक जरूरी बात करनी थी,’’ उधर से किसी व्यक्ति की आवाज आई.
”देखिए, अभी मैं एक सीरियस केस के सिलसिले में कहीं जा रहा हूं. अगर आप का काम अधिक गंभीर नहीं है तो आप बाद में कोतवाली आ जाएं या कुछ देर बाद फोन कर सकते हैं. अभी मैं काफी व्यस्त हूं.’’ एसएचओ ने उसे समझाते हुए कहा.
”एसएचओ साहब, आप कलंदर गढ़ी गांव ही जा रहे हैं न, मैं ने ही मारा है दोनों को. मेरा नाम मुबीन है,’’ उधर से जब एक युवक ने यह कहा तो एसएचओ रामफल तो एक बार सीट से उछल ही पड़े थे.
”अरे, तुम हो कातिल? तुम ने ही अपने पिता और अपनी पत्नी का मर्डर कर डाला. अभी तुम कहां पर हो?’’ एसएचओ ने उस से पूछा.
”देखो साहब, मेरे अब्बा और बीवी के बीच में काफी लंबे समय से नाजायज संबंध चल रहा था. इसलिए मैं ने दोनों को मौत दे कर यह किस्सा हमेशाहमेशा के लिए खत्म कर दिया.’’
उधर से वह युवक बात कर ही रहा था कि एसएचओ ने उस की बात बीच में काट कर फिर उसे सरेंडर करने के लिए समझाया, लेकिन मुबीन ने दूसरी ओर से फोन काट दिया.
एसएचओ ने तुरंत वह मोबाइल फोन नंबर अपने एसआई को सर्विलांस में रखने और उस पर नजर रख कर उसे तुरंत गिरफ्तार करने का आदेश दे दिया.
घटनास्थल पर कोतवाल रामफल सिंह और उन की टीम के साथसाथ एसएसपी (बुलंदशहर) दिनेश कुमार सिंह, एसपी (खुर्जा देहात) अंतरिक्ष जैन और सीओ शोभित कुमार भी पहुंच चुके थे.
पुलिस के आला अधिकारियों ने पहले रियाजुद्दीन और सना के शरीर की जांचपड़ताल की. एक ओर जहां रियाजुद्दीन की मौत हो चुकी थी, वहीं दूसरी ओर सना की सांसें अभी भी चल रही थीं. पुलिस ने तुरंत बुरी तरह से घायल सना को एंबुलेंस से सरकारी अस्पताल भेजा. वहां पर प्राथमिक उपचार के बाद उस की गंभीर स्थिति को देखते हुए खुर्जा के कैलाश अस्पताल में उपचार के लिए भेजा गया, जहां इलाज के दौरान सना ने भी दम तोड़ दिया.
पुलिस ने मौके से गोलियों के खोखे, खून के नमूने और अन्य डिजिटल व फिजिकल सबूत यानी कि मोबाइल फोन वगैरह जब्त कर लिए और दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
अब तक पुलिस की दूसरी टीम मुख्य आरोपी मुबीन को भी उस की मोबाइल लोकेशन के आधार पर गिरफ्तार कर चुकी थी.
पुलिस ने मुबीन के कब्जे से हत्या में इस्तेमाल की गई रियाजुद्दीन की लाइसेंसी पिस्टल भी बरामद कर ली थी. एसएसपी और जांच अधिकारियों ने इस खौफनाक मामले की कडिय़ां जोडऩे के लिए कई पक्षों से विस्तृत पूछताछ की.
पुलिस को इस बात का भी पता चला कि मुबीन को अपने अब्बा और पत्नी के बीच नाजायज संबंधों का शक था, जिस के कारण काफी समय पहले दोनों परिवारों के बीच पंचायत भी हुई थी. इस के अलावा मर्डर वाली घटना के दिन भी सना के मायके से उस की फेमिली के लोग इस रोजरोज के झगड़े को सुलझाने आए थे, लेकिन उस दौरान मुबीन बहुत गुस्से में आ गया था और उस ने अपने ससुर आदि को घर जाने को कह दिया था.
पुलिस ने इस खौफनाक मर्डर की तहकीकात के लिए पड़ोसियों के अलावा मुबीन के दादादादी (मकबूल और जैबुन), अम्मी (मृतक रियाजुद्दीन की पत्नी किश्वर), उस के दूसरे बेटे रिहान और बेटी अर्शी से भी विस्तृत बातचीत की.
इस के अलावा पुलिस ने गांव के लोगों से भी बातचीत की, ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना के वक्त घर से लड़ाईझगड़ा होने या चीखनेचिल्लाने की आवाजें आ रही थीं.
मुबीन की मां किश्वर ने बताया कि उन के शौहर रियाजुद्दीन का बहू सना के साथ एक साल से गलत संबंध चल रहा था. मैं ने और मेरे बेटे मुबीन ने उन्हें कई बार समझाया भी था. मुबीन ने उन से कहा भी था कि पापा मान जाओ, यह रिश्ता बिल्कुल भी जायज नहीं है. लेकिन वे दोनों नहीं माने, इसीलिए गुस्से में आ कर मुबीन ने दोनों को मार डाला.
पुलिस ने जब मुख्य आरोपी मुबीन से विस्तृत बातचीत की तो उस ने बताया कि उसे अपने पिता और पत्नी के बीच अवैध संबधों की खबर सितंबर, 2025 में ही हो गई थी.
उस ने आगे बताया कि पहले तो उसे इस अवैध संबंध पर विश्वास ही नहीं हुआ था, लेकिन जब मैं ने अपनी अम्मी के कहने पर सना पर कड़ी नजरें रखनी शुरू कर दीं तो मुझे सारा सच दिखाई देने लगा, क्योंकि मैं ने खुद उन्हें आपत्तिजनक अवस्था में देख लिया था. उस के बाद मेरी मां ने भी इस रिश्ते का विरोध करना शुरू किया तो घर में मरनेमारने और घर छोडऩे की स्थिति भी आ गई थी.
उस के बाद जब मैं ने सना के मोबाइल के वाट्सऐप चैट को पढ़ा तो मुझे दोनों से बहुत नफरत हो गई थी. और मैं ने दोनों को सजा देने का आखिरी मन बना लिया था.
मुबीन ने पुलिस को सना के वाट्सऐप के चैट भी दिखाए.
24 मई, 2026 की देर रात को पोस्टमार्टम के बाद रियाजुद्दीन और सना के शव खुर्जा पहुंचे, जहां से परिजन रियाजुद्दीन का शव कलंदरगढ़ी गांव ले गए, जबकि सना के परिजन सना का शव ले कर अपने भौरा गांव ले गए थे. देर रात को पुलिस की मौजूदगी में शवों को सुपुर्दएखाक कर दिया गया.
सना के पिता खलील अहमद की तहरीर पर खुर्जा कोतवाली में आरोपी मुबीन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103 (हत्या) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया.
उत्तर प्रदेश के जिला बुलंदशहर के कस्बा खुर्जा में हुआ यह डबल मर्डर केस वास्तव में चर्चा का विषय बन गया. पुलिस जांच और आरोपी मुबीन के कुबूलनामे से स्पष्ट हुआ है कि इस दोहरे हत्याकांड की मुख्य वजह ससुर और बहू के बीच कथित अवैध रिश्ते ही थे.
रियाजुद्ïदीन (55 वर्ष) खुर्जा नगर कोतवाली क्षेत्र के कलंदरगढ़ी गांव का रहने वाला था. उस के परिवार में पिता मकबूल और मां जैबुन के अलावा बीवी किश्वर, 2 बेटे मुबीन और रेहान व एक बेटी अर्शी थे.
रियाजुद्दीन पहले वेल्डिंग का काम करता था. बाद में वह प्रौपर्टी डीलिंग के धंधे में उतर गया. उसे इस काम में काफी फायदा होने लगा था. अब उस ने वेल्डिंग के काम करने के लिए कारीगर रख लिए और अधिकतर समय प्रौपर्टी का काम करने लगा था.
किस्मत ने रियाजुद्दीन का साथ दिया और प्रौपर्टी के काम से उस के घर में जैसे धन तो अब बरसने ही लग गया था. रियाजुद्दीन ने सब से पहले अपना एक आलीशान दुमंजिला घर बनवाया, कार, बाइक और जमीनें खरीदने लगा, जिस से उस का शुमार आसपास के गांवों में एक धनाढ्य और प्रतिष्ठित व्यक्ति के रूप में होने लगा था.
एक बार रियाजुद्दीन अपने किसी मित्र के बेटे की शादी में ककोड़ गया थे तो वहां पर किसी एक मित्र ने उस की मुलाकात भौरा गांव के खलील अहमद से करा दी. मित्र यह बात जानते थे कि खलील अहमद का परिवार पढ़ालिखा और सुसंस्कृत है और उन की बेटी सना बीएड की पढ़ाई कर रही थी. खलील अहमद किसी अच्छे रिश्ते की तलाश में थे.
इधर दूसरी और रियाजुद्दीन भी अपने बड़े बेटे मुबीन के लिए रिश्ता तलाश रहा था, क्योंकि मुबीन की उम्र भी तब 25 वर्ष की हो चुकी थी.
जब खलील अहमद को पता चला कि रियाजुद्दीन का परिवार धनाढ्य और खुशहाल है तो वह तुरंत इस रिश्ते के लिए राजी हो गए थे.
इधर दोनों घरों में शादी की तैयारियां होने लगी थीं. रियाजुद्दीन ने मुबीन से कहा कि अब तुम्हारी शादी होने वाली है तो तुम वेल्डिंग का काम देख लो या फिर मेरे साथ प्रौपर्टी का काम देखने आया करो, लेकिन मुबीन अपने लिए एक अच्छा शोरूम और बड़ा कारोबार खुलवाना चाहता था.
रियाजुद्दीन को पता था कि मुबीन ने किस तरह से कई साल में इंटर की परीक्षा पास की थी, इसलिए रियाजुद्दीन चाहता था कि पहले मुबीन धंधे के बारे में अच्छी तरह से सीख ले, एकदम से पहले यदि कोई बड़ा धंधा खोल दिया गया तो काफी बड़ा नुकसान हो सकता था. इसलिए रियाजुद्दीन ने अपने पास के गांव सुदेशपुर में एक अच्छी जगह किराए पर ले कर एक मैडिकल की दुकान मुबीन के लिए खोल दी.
उस ने अपने बेटे मुबीन से साफसाफ कह दिया कि अब तुम खुद कमाओ और अपनी और अपनी होने वाली बीवी का गुजारा भी इसी से करो. घर से अब तुम्हें कोई जेब खर्च नहीं मिलेगा.
धीरेधीरे मुबीन की दुकान चलने लगी और वह गांव के लोगों को उन की बीमारी के आधार पर दवाइयां भी देने लगा था. लोगों का विश्वास भी धीरधीरे मुबीन पर बढ़ता जा रहा था.
14 फरवरी, 2025 को रियाजुद्दीन अपने बड़े बेटे मुबीन की बारात ले कर गांव भौरा थाना क्षेत्र ककोड़ पहुंचा, जहां धूमधाम से खलील अहमद की बेटी सना का विवाह मुबीन के साथ संपन्न हो गया.
खलील अहमद के परिवार में बीवी शहनाज के अलावा बेटी सना और बेटा सुहैल थे. खलील अहमद की गांव में पुश्तैनी जमीन थी और उस के साथ वह एक फैक्टरी में भी काम करता था. सना उन की इकलौती बेटी थी. वह बीएड की पढ़ाई कर चुकी थी और अब एक सुखीसंपन्न परिवार में उस का निकाह होने जा रहा था, इसलिए खलील अहमद और शहनाज ने बारातियों की आवभगत से कोई कमी महसूस नहीं होने दी’ इस के साथसाथ दहेज में कार भी दी.
सना जब अपनी ससुराल आई तो उस ने कुछ ही समय में ससुराल में सभी के साथ अच्छे संबंध बना लिए. वह घर के प्रत्येक सदस्य का खयाल अच्छे ढंग से रखने लगी थी, जिस से वह परिवार के सभी सदस्यों की चहेती बन गई थी.
सना अपने शौहर मुबीन के साथ जब कभी वह किसी के विवाह समारोह में जाती या खरीदारी करने जाती थी तो सभी इस खूबसूरत जोड़ी की बड़ी तारीफ करते थे.
धीरेधीरे मुबीन अपनी दुकान में व्यस्त होता चला गया, क्योंकि शादी के बाद उस से सना रोज नईनई फरमाइश करती थी, इसलिए पैसे अधिक कमाने के चक्कर में वह अब दुकान में काफी देर तक बैठा रहता था.
वहां उस के कुछ ऐसे 2-4 दोस्त भी बन गए थे, जिन के साथ वह अकसर पेग भी ले लिया करता था. जब वह देर से घर आता तो उस की सना से भी तकरार हो जाया करती थी.
इधर सना अपने घर की इकलौती बेटी होने के कारण बचपन से ही काफी जिद्दी और गुस्सैल स्वभाव की थी, जिस चीज को खरीदने की इच्छा होती थी, कुछ काम करने की वह ठान लेती थी तो वह अपनी इस जिद को पूरा करवा कर ही दम लेती थी.
अब उस की गृहस्थी मुबीन के साथ चलने लगी तो एक महीने के बाद से ही दोनों में अनबन सी रहने लगी थी. इस का प्रमुख कारण यह था कि मुबीन सना को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहा था.
सना को सजनेसंवरने के साथ अच्छे कपड़े, गहने पहनने का शौक बचपन से ही रहा था.
एक बार उस के मायके में उस की एक सहेली ने उसे अपनी शादी में बुलाया तो वह इस पर बहुत खुश हुई. जब उस ने रात को मुबीन से अपनी सहेली के निकाह के बारे में बताते हुए साथ चलने को कहा तो मुबीन ने दुकान का हर्जा हो जाएगा, कह कर सना के साथ के चलने से इंकार कर दिया. जब सना ने नए कपड़े सिलाने और किराए व अन्य सामान लेने के लिए पैसे मांगे तो यहां पर भी मुबीन ने एकदम इंकार कर दिया. उस रात काफी देर तक दोनों के बीच लड़ाई होती रही. सना रात भर अपनी किस्मत पर रोती रही.
दूसरे दिन सुबह सना ने गुस्से के मारे नाश्ता नहीं बनाया तो मुबीन भी उस दिन वक्त से पहले ही अपनी दुकान पर बाइक ले कर निकल गया. वह भी सना की रोजरोज की फरमाइशों और झगड़ों से परेशान हो चुका था. उस ने सोचा नाश्ता और लंच दुकान के आसपास किसी ढाबे या रेस्टोरेंट में खा लेगा.
इधर सना भी मुबीन के रवैए से खासी नाराज थी कि उस के मांबाप ने भी उसे किस नालायक और गरीब शौहर के पल्ले में बांध कर उस की जिंदगी बरबाद कर के रख डाली है. सना ने भी उस दिन नाश्ता नहीं किया और नहाधो कर छत पर टहल कर अपना दुख दूर करने की कोशिश करने लगी.
मुबीन के साथ जो उस की लड़ाई रात को हुई थी, उसी को सोचसोच कर वह दुखी हो रही थी. गुस्से का जो गुबार उस के मन में रात से बैठा हुआ था, वह आंसुओं के रूप में बहने लगा था. वह अब छत के एक कोने से सिसकसिसक कर रोने लगी थी.
तभी रियाजुद्दीन नहाधो कर अपना तौलिया डालने छत पर आया तो उस की नजर बहू सना पर पड़ी जो सिसक रही थी. सना की नजर अब तक अपने ससुर पर नहीं पड़ी थी वह तो अपने ही खयालों में रोए जा रही थी. तभी रियाजुद्दीन उस के पास आ कर बोला, ”क्या बात है सना, तुम सुबहसुबह अकेले छत पर क्यों रो रही हो? क्या मायके की याद आ रही है? मायके जाना चाहती हो तो बताओ, हम भिजवा देंगे.’’
ससुर की बात सुन कर सना एकदम से घबरा गई. पर तभी उस के मन में न जाने क्या खयाल आया, वह एकदम से रियाजुद्दीन के सीने से जा लगी और सिसकसिसक कर रोने लगी. रियाजुद्दीन को भी बड़ा अजीब सा लगा. सना ने उस की छाती को पीठ से जोर से जकड़ लिया था.
कुछ देर बाद रियाजुद्दीन ने भी अपने दोनों हाथ उस की पीठ पर रख लिए और उसे अपने सीने से चिपटा लिया. दोनों को एक अनजाना स्पर्श उस वक्त बड़ा सुकून दे रहा था. काफी देर तक वे दोनों आपस में यूं ही लिपटेचिपटे रहे. उस के बाद सना ने अपनी सहेली की शादी में जाने की बात बताई और मुबीन के दुव्र्यवहार की बात भी रोते हुए बताई.
”अरे, बस इतनी सा बात थी. तुम इस तरह मत रो सना, मुझे तुम्हारी आंखों में आंसू अच्छे नहीं लगते. मुझे तुम्हारा हंसतामुसकराता और खिलता चेहरा ही अच्छा लगता है.’’ रियाजुद्दीन ने अपने हाथों से सना के आंसू पोछते हुए कहा.
उस के बाद तुरंत रियाजुद्दीन ने अपने पर्स से 5 हजार रुपए निकाले और सना के हाथों में देते हुए कहा, ”सना, तुम्हें जब भी कोई जरूरत हो या कोई परेशानी हो तो मुझे बताना. चाहो तो तुम मेरा मोबाइल नंबर भी सेव कर सकती हो.’’
सना ने तुरंत अपने ससुर रियाजुद्दीन का मोबाइल नंबर अपने मोबाइल में सेव कर लिया था.
”देखो सना, तुम अब दिल खोल कर अपनी खरीदारी कर लो. इस के अलावा भी अगर तुम्हारी कुछ और जरूरतें हैं तो मुझे बताना. अब मुझे यह बताओ कि तुम्हें तुम्हारे मायके कब छोड़ कर आना है.’’ रियाजुद्दीन ने सना की पीठ थपथपाते हुए कहा.
”जी, मैं खरीदारी करने के बाद आज शाम को ही अपने मायके जाना चाहती हूं, आप मुझे छोड़ देंगे न?’’ सना ने पूछा.
”ठीक है सना, तुम ये सब खरीदारी करने के बाद शाम को 5 बजे तैयार रहना, मैं गाड़ी में तुम्हें तुम्हारे मायके छोड़ आऊंगा.’’ यह कहते हुए वह वहां से चला गया.
सना पैसे पा कर बहुत खुश हो गई थी. उस ने अपनी मनपसंद की चीजें और कपड़े खरीद लिए और तैयार हो कर उस ने ससुर के वाट्सऐप पर मैसेज डाल दिया कि मैं अब तैयार हूं, मुझे मेरे मायके छोड़ दीजिए.
उधर रियाजुद्दीन तो बारबार अपना वाट्सऐप मैसेज देख रहा था. जैसे ही उसे सना का मैसेज मिला, वह तुरंत घर चला आया. घर पर आ कर उस ने अपनी बीवी किश्वर से कहा, ”किश्वर, देखो सना बहू अपने किसी रिश्तेदार की बेटी के निकाह में शामिल होने 2-3 दिन के लिए अपने मायके जाना चाहती है. मुबीन तो आजकल दिनरात अपनी दुकान में बिजी रहता है. ऐसा करते हैं, हम दोनों सना को उस के मायके छोड़ आते हैं. वहां पर समधीसमधन जी से भी मुलाकात कर आएंगे.’’
”देखिए जी, घर में मेरा अभी बहुत काम है. मेरा आना संभव नहीं है. ऐसा करो, आप ही सना को उस के मायके छोड़ दीजिएगा,’’ किश्वर ने कहा.
उस के बाद रियाजुद्ïदीन अकेले ही सना को ले कर चला गया तो उस ने सना को आगे वाली सीट पर बिठा दिया. रियाजुद्दीन जानबूझ कर गाड़ी आराम से धीरेधीरे चलाने लगा और वे दोनों आपस में अब बेतकल्लुफी से दोस्तों की तरह खूब हंसीमजाक करने लगे थे. कभी अनजाने तो कभी जानबूझ कर दोनों के शरीर आपस में टकराने लगते तो दोनों को एक अजीब सी सिहरन और हलचल सी महसूस होने लग जाती थी.
तभी सना का मायका आ गया तो रियाजुद्ïदीन ने ने गाड़ी रोक कर सना का सामान उतार दिया. सामान कुछ ज्यादा भी नहीं था.
”अच्छा सना, अब तुम आराम से अपनी सहेली की शादी में मौजमस्ती करो, आज मैं ने प्रौपर्टी के काम से बाहर जाना है, इसलिए अगली बार तुम्हारे अब्बूअम्मी से मिलूंगा. तुम फोन पर मैसेज करते रहना, कोई भी परेशानी हो तो बता देना. जब वापस आना हो तो मुझे बता देना, मैं तुम्हें लेने आ जाऊंगा,’’ रियाजुद्दीन ने कहा.
”जी, ठीक है, मैं आप को अब बराबर मैसेज भेजती रहूंगी. आप से आज इतनी बातें हुईं कि मजा ही आ गया. दोस्ती जैसा लगा, ऐसा लगा जैसे हम दोनों बहुत पुराने दोस्त हों,’’ सना ने मुसकराते हुए रियाजुद्दीन के चेहरे को देखा.
रास्ते भर रियाजुद्दीन अब सना के बारे में ही सोचता रहा, तभी उस के मोबाइल पर मैसेज की घंटी बजी. रियाजुद्दीन ने गाड़ी किनारे खड़ी कर मैसेज खोला तो सना ने वाट्सऐप मैसेज में ‘हाय’ लिख कर लव की इमोजी भेजी थी, जैसे प्रेमिका अपने प्रेमी को भेजती है. उस के बाद तो ससुर और बहू दोनों नियमित रूप से वाट्सऐप पर चैट करने लगे थे.
जब सना ने वापस ससुराल आना था तो उस ने रियाजुद्दीन को मैसेज कर दिया, इस बार जब रियाजुद्दीन सना को गाड़ी से वापस लाया तो दोनों के बीच में शारीरिक छेड़छाड़ भी शुरू हो गई थी.
फिर एक दिन जब किश्वर अपनी बेटी के साथ किसी रिश्तेदारी में सुबहसुबह गई तो सना ने रियाजुद्दीन को मैसेज दे कर घर पर बुलवा लिया. मुबीन सुबह ही अपनी दुकान पर चला गया था और उस समय घर पर कोई भी सदस्य मौजूद नहीं था. रियाजुद्दीन तुरंत घर पर आ गया और फिर दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं यानी उन के बीच अवैध संबंध स्थापित हो गए.
एक बार मर्यादा तारतार हुई तो दोनों मौका मिलने पर हसरतें पूरी कर लेते.
किश्वर को कई दिनों से रियाजुद्दीन और सना के संबंधों पर शक होने लगा था, इसलिए उस ने उन दोनों पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी.
सितंबर 2025 में किश्वर ने यह बात अपने बेटे मुबीन को बता दी थी. उस के बाद मुबीन ने भी दोनों पर नजर रखनह शुरू कर दी और फिर एक दिन मुबीन और किश्वर ने ससुर और बहू को आपत्तिजनक अवस्था में पकड़ भी लिया, लेकिन उस के बाद किश्वर के डर और चुप्पी के कारण यह मामला और अधिक गंभीर हो गया था.
दरअसल, शुरुआत में जब यह मामला उजागर हुआ तो किश्वर ने घर में काफी हंगामा खड़ा कर दिया था. उस समय किश्वर ने घर छोडऩे और रियाजुद्दीन से तलाक का मन भी बना लिया था. उस समय किश्वर ने रियाजुद्दीन से साफसाफ कह दिया था कि यदि तुम्हें सना के साथ रहना है तो घर छोड़ कर बाहर जाना होगा.
किश्वर की इस धमकी पर रियाजुद्दीन आगबबूला हो गया और फिर उस ने मकान अपने नाम बता कर सभी सदस्यों को घर से बाहर निकलने की चेतावनी दे डाली थी.
इस के बाद किश्वर को अपनी बेटी और बेटों के साथ बाहर निकाले जाने का भय सताने लगा और फिर उस ने उन के अवैध संबंधों का विरोध नहीं किए और चुपचाप यह सब सहती रही.
दूसरी ओर मुबीन ने इन संबंधों के विरोध में हार नहीं मानी और अब उस ने वाट्सऐप वेब के माध्यम से सना के मोबाइल का वाट्सऐप अपने लैपटाप पर चालू कर दिया. वह अपनी दुकान में लैपटाप पर बीवी सना और पिता रियाजुद्दीन के चैट पढ़ता रहता था. इन सभी चीजों को देख कर अपनी अम्मी की दयनीय हालत देख कर उसे अपनी बीवी और अब्बा से नफरत हो गई थी.
तब मुबीन ने दोनों को ही सजा देने का मन बना लिया और फिर 24 मई, 2026 को अपने पिता की लाइसेंसी पिस्टल से दोनों की हत्या कर दी थी.
मृतक रियाजुद्दीन के वालिद ने कहा है कि मेरे बेटे की हत्या में मुबीत के साथसाथ उस के ससुराल वाले भी शामिल थे, उन्हें भी सजा मिलनी चाहिए.
मृतका सना के अब्बा खलील अहमद ने पुलिस और मीडिया को बताया कि असल में मुबीन कमाताधमाता नहीं था. मेरी बेटी को कभी बाजार या किसी शादी में रिश्तेदार के घर जाना होता था, उसे उस का ससुर रियाजुद्दीन ले कर जाता थ. इसी बात पर मुबीन सना और रियाजुद्दीन के चरित्र पर बेवजह शक करने लगा था.
मुबीन इतना सनकी हो गया था कि उस ने अपना बेटा होने पर उस का डीएनए टेस्ट कराया था. जब डीएनए टेस्ट में यह बात साबित हुई, तब ही उस ने मोहल्ले में मिठाइयां बाटी थीं और पटाखे फोड़े थे.
दोनों ही पक्षों ने पुलिस में एकदूसरे के खिलाफ तहरीर दी है. पुलिस दोनों पक्षों की रिपोर्ट दर्ज कर जांच भी शुरू कर दी है. पुलिस के लिए भी यह केस खासा पेचीदा हो गया है क्योंकि लड़की पक्ष की ओर से सना के अब्बा खलील अहमद ने तहरीर दी है कि दामाद के साथ मिल कर ससुराल वालों ने मेरी बेटी का मर्डर किया है, जबकि मुबीन के परिवार से उस के दादा मकबूल ने तहरीर दी है कि उन के पोते मुबीन के साथ मिल कर इन के बेटे और पोते की बहू को मारा है. अब देखना होगा कि साक्ष्यों के आधार पर पुलिस किसे दोषी ठहराती है? Family story






