Web Series. वेब सीरीज ‘ग्लोरी’ की कहानी हरियाणा के बौक्सिंग और खेल परिवेश में गहराई से रचीबसी है. कहानी 2 भाइयों के इर्दगिर्द घूमती है, जो अपनी बहन के साथ हुई एक ङ्क्षहसक घटना का बदला लेने और सच्चाई सामने लाने के लिए निकल पड़ते हैं. इस के साथ ही यह सीरीज बौक्सिंग ङ्क्षरग की राजनीति और सरकारी साजिशों के जालों को भी उजागर करती हे.

निर्देशक: कनिष्क वर्मा और करण अंशुमन, निर्माता: आरिफ मीर, निशांत पांडे, करण अंशुमन और मोहित शाह

लेखक: वैभव विशाल, करण अंशुमन और कर्मण्य आहूजा, ओटीटी: नेटफ्लिक्स

कलाकार: दिव्येंदु शर्मा, पुलकित सम्राट, आशुतोष राणा, यशपाल शर्मा, सिकंदर खेर, सुविंदर विक्की, सयानी गुप्ता, कश्मीरा परदेशी, जाकिर हुसैन, विशाल वशिष्ठ, कुणाल ठाकुर, मंजू शर्मा, रेनजी पाणिकर, युगम सूद, कमलजीत राणा, विक्की दत्त, अंकित मोहन, अभिषेक ठाकुर, सागर तुगनैट आदि.

वैसे देखा जाए तो अब तक बौक्सिंग विषय पर कई फिल्में भी बन चुकी हैं, लेकिन वहां पर बात सिर्फ बौक्सिंग पर ही हुई है. वेब सीरीज ‘ग्लोरी’ में बौक्सिंग के साथसाथ 2-2 कत्ल भी जुड़े हैं.

वेब सीरीज ‘ग्लोरी’ की कहानी हरियाणा बौक्सिंग क्लब के कोच रघुवीर सिंह के भारत के लिए ओलिंपिक गोल्ड मेडल जीतने की जिद की है. करण अंशुमन और कनिष्क वर्मा द्वारा निर्देशित यह वेब सीरीज बौक्सिंग की पृष्ठभूमि पर आधारित है.

7 एपिसोड की यह वेब सीरीज पहली मई, 2026 को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है. इस सीरीज में 2 हत्याएं हुईं. असल में कौन है इन दोनों हत्याओं का मास्टरमाइंड? और क्या होता है रघुवीर सिंह के ग्लोरी पाने के सपने का हश्र? यह सब आप को इस सीरीज की कहानी पढ़ कर ही पता लग सकता है.

एपिसोड नंबर 1

पहले एपिसोड का नाम ‘केओ’ रखा गया है. एपिसोड की शुरुआत देवेंद्र सिंह (दिव्येंदु शर्मा) से होती है, जिसे देव भी कहा जाता है. वह एक सपना देखता है, जहां एक कोच ने उस की टांग ही तोड़ डाली थी. डर के मारे जब अचानक से उस की नींद खुल जाती है.

तभी वह देखता है कि टीवी पर न्यूज आ रही थी कि बौक्सिंग कोच (रघुवीर सिंह) ने अपने एक शागिर्द निहाल सिंह (युगम सूद) को पूरे 10 साल ट्रेनिंग दी थी, जिस के फलस्वरूप वह इंटरनैशनल लेवल पर खेलने के लिए विदेश पहुंचा है.

वहां उस का मुकाबला ओलिंपिक के सेमीफाइनल में उज्बेकिस्तान के खिलाड़ी हजामत के साथ होता है. शक्तिगढ़, हरियाणा का छोरा निहाल सिंह अगले ही पल अपने प्रतिद्वंदी खिलाड़ी पर पंच मार कर उसे रिंग में गिरा देता है और उस की जीत हो जाती है.

अब हम भारत के एक स्टेडियम में निहाल सिंह और उस की प्रेमिका गुडिय़ा (जन्नत जुबैर रहमानी) को देखते हैं. वे दोनों आपस में प्रेम करते हैं, लेकिन अभी गुडिय़ा प्रेगनेंट है, इसलिए वे दोनों वहां से दिल्ली भागने का प्लान बनाते हैं. वे भागने लगते हैं तभी वहां पर मास्क लगाए हुए बहुत से गुंडे उन्हें घेर कर बुरी तरह चाकू और तलवारों से हमला कर देते हैं. दोनों घायल हो कर गिर जाते हैं.

अगले दृश्य में हम गुडिय़ा को अस्पताल के आईसीयू में देखते हैं, जहां यह खबर सुन कर उस के दोनों भाई देवेंद्र सिंह उर्फ देवू और रविंदर सिंह उर्फ रवि (पुलकित सम्राट) उसे देखने अस्पताल आते हैं.

वे दोनों गुडिय़ा की हालत देख कर जाते हैं, क्योंकि गुडिय़ा का पूरा शरीर चाकू से छलनी था और वह अभी भी बेहोश हालत में थी. उधर हम कोच रघुवीर सिंह को देखते हैं, जो हौस्पिटल में निहाल सिंह की लाश के सामने दुखी खड़ा था.

असल में मास्क वाले गुंडों ने निहाल को स्टेडियम में ही जान से मार डाला था. तभी वहां पर अरविंद शेखावत (विशाल वशिष्ट) नाम का पुलिस वाला आ कर रघुवीर सिंह से पूछताछ करने लगता है.

दूसरी तरफ स्टेडियम में हम देखते हैं कि एक पत्रकार जिस का नाम जोयना हजारिका (सयानी गुप्ता) है. वह विजू सांगवान (आशुतोष राणा) नाम के दूसरे कोच से निहाल सिंह मर्डर के बारे में काफी प्रश्न पूछती है, लेकिन विजू सांगवान केवल एक ही उत्तर देता है कि निहाल सिंह की मौत का काफी दुख है.

यहां पर हमें यह पता चलता है कि देव, रवि और गुडिय़ा इन तीनों का पिता कोच रघुवीर सिंह है, तभी पिता को देख कर देव गुस्से से रघुवीर से पूछता है कि भारती शेखावत (कश्मीरा परदेशी) की ऐसी हालत क्यों हुई है.

लेकिन तभी गुडिय़ा की हालत काफी खराब हो जाती है तो डौक्टर उसे औक्सीजन लगा कर दवाइयां देने लगता है. ये सभी अब हौस्पिटल से बाहर निकलते हैं तो वहां मृतक निहाल सिंह के मम्मीपापा और भाई खड़े होते हैं.

निहाल के पापा तो सब जानते थे कि कोच रघुवीर सिंह ने उस के बेटे को अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक भेजने के लिए कड़ी मेहनत की थी, लेकिन निहाल का छोटा भाई हुकुम सिंह (तनिष्क चौधरी) रघुवीर से बहुत नाराज था और हुकुम वहीं पर रघुवीर सिंह को काफी बुराभला कहने लगता है. इस पर देव को गुस्सा आ जाता है और वह हुकुम से भिड़ जाता है, लेकिन तभी रवि आ कर उन्हें छुड़ा लेता है.

दूसरे दिन सुबह इंसपेक्टर अरविंद शेखावत स्टेडियम में आ कर कोच से पूछताछ करता है तो कोच उसे निहाल सिंह के क्लासमेट से मिलवाता है तो क्लासमेट इंसपेक्टर को निहाल सिंह के कमरे में ले कर जाता है.

इधर देव और रवि अपने पापा रघुवीर के कोचिंग इंस्टीट्यूट में जाते हैं, जहां रघुवीर अपने स्टूडेंट को ट्रेनिंग दे रहा होता है. यह देख कर देव अपने पापा पर गुस्सा हो जाता है कि एक तरफ तुम्हारी बेटी हौस्पिटल में मृत्यु से संघर्ष करने में लगी है, दूसरी तरफ तुम बेफिक्र हो कर कोचिंग देने में लगे हुए हो.

इस पर रघुवीर कहता है कि कुछ दिनों बाद इन का फाइनल ट्रायल होने वाला है, इसीलिए इन्हें कोचिंग देनी जरूरी है. फिर भी देव गुस्से से वहां पर ट्रेनिंग कर रहे ट्रेनियों को वहां से भगा देता है, लेकिन राका नाम का ट्रेनी वहां से नहीं जाता तो देव गुस्से से उसे मारने लगता है तो रघुवीर आ कर दोनों को छुड़ा लेता है.

अगली सुबह देव और रवि गुडिय़ा से मिलने हौस्पिटल पहुंचते हैं तो तब तक गुडिय़ा को होश आ जाता है. जब दोनों भाई गुडिय़ा से हादसे के बारे में पूछताछ करते हैं तो वह कहती है कि वे काफी लोग थे, लेकिन सब ने मुंह पर मास्क पहने हुए थे.

गुडिय़ा फिर बताती है कि मैं ने फिर भी उन गुंडों में से एक गुंडे की आंख फोड़ डाली थी. जैसे ही गुडिय़ा यह बताती है तो देव और रवि इस क्लू को ढूंढने अस्पताल से बाहर निकल जाते हैं.

तभी बाहर उन्हें पत्रकार जोयना हजारिका मिल जाती है और वह कहती है कि यदि इस केस में मीडिया को शामिल कर लिया जाए तो इनवैस्टीगेशन में तेजी लाई जा सकती है, लेकिन देव उसे भगा देता है. फिर भी जोयना जातेजाते रवि को अपना विजिटिंग कार्ड देते हुए कहती है कि यदि मेरी जरूरत हो तो मुझे कभी भी कौल कर सकते हो.

देव और रवि अब क्राइम सीन पर पहुंचते हैं तो वहां स्टेडियम में कुछ दूरी पर कुछ बच्चे बैठे होते हैं, जिन में से एक बच्चे ने मास्क पहना होता है. देव और रवि दौड़ कर उस बच्चे को पकड़ कर उस से मास्क छीन लेते हैं. अब उन्हें यह पता चल जाता है कि उन गुंडों ने भी इसी तरह का मास्क पहना होगा.

शाम होतेहोते देव और रवि को यह खबर मिलती है कि हौस्पिटल में उन की बहन गुडिय़ा की मृत्यु हो चुकी है. उस के बाद यहीं पर पहला एपिसोड समाप्त हो जाता है.

पहले एपिसोड की बात करें तो कई जगहों पर सीन को कट कर दूसरा सीन करता दिखाया गया है, जो स्टोरी की रोचकता को कम करता है. इस कहानी में पारिवारिक दुश्मनी, बौक्सिंग, मर्डर मिस्ट्री के साथसाथ राजनीति को भी एक साथ दिखाने की कोशिश की गई है, जिस के कारण कहानी की रफ्तार कई जगहों पर धीमी पड़ जाती है.

एपिसोड नंबर 2

47 मिनट की अवधि के दूसरे एपिसोड का नाम ‘काउंटर पंच’ रखा गया है. दूसरे एपिसोड की शुरुआत फ्लैशबैक से होती है, जहां गुडिय़ा ने उस नकाबपोश पर हमला कर उस की आंख फोड़ डाली थी.

बाकी के सारे गुंडे तो पहले ही भाग चुके थे. मगर जब इस की आंख में गुडिय़ा घातक वार करती है तो वह किसी तरह अपनी गाड़ी में बैठ कर अपने अंकल कूकी यादव (सिकंदर खेर) के पास किसी तरह घायल अवस्था में पहुंच जाता है, जहां कूकी यादव उस की जान बचा लेता है.

अब कहानी वर्तमान में आ जाती है, जहां देव और रवि दोनों भाई अपनी मृतका बहन के अस्थिकलश के साथ अपनी बहन के साथ बिताए दिनों को याद कर रहे थे.

अब इंसपेक्टर अरविंद शेखावत जब इनवैस्टीगेशन करने स्टेडियम जाता है तो वहां उसे पता चलता है कि निहाल सिंह का सेमीफाइनल मैच देखने के लिए कोच विजू सांगवान, डांडा (यशपाल शर्मा) जो मुखिया है, कूकी यादव (सिकंदर खेर) और डीसीपी फोगाट (जाकिर हुसैन) जोकि पुलिस के एक बड़े अधिकारी थे, ये चारों वहां पर थे, इसलिए अब इंसपेक्टर अरविंद के शक के घेरे में ये चारों आ गए थे.

अब डीसीपी फोगाट डांडा से मिलने उस के घर पर जाता है तो डांडा (यशपाल शर्मा) उसे निहाल मर्डर केस को तुरंत बंद करने को कहता है.

इस पर डीसीपी फोगाट उसे कहता है कि निहाल का केस इतने जल्दी बंद करना अब आसान काम नहीं है. इस केस को अब देश के अलावा सारी दुनिया भी जान चुका है. इस के बाद डीसीपी फोगाट अपने औफिस में आ कर इंसपेक्टर अरविंद शेखावत को किसी दूसरे केस में उलझा देता है. अब डीसीपी फोगाट प्रैस कौन्फ्रेंस के दौरान बताता है कि निहाल और गुडिय़ा का मर्डर लूट के लिए किया गया था.

जब इस प्रैस कौन्फ्रैंस को देव और रवि देखते हैं तो वे दोनों तुरंत अरविंद को बुलाते हैं. अरविंद वहां पर आ कर दोनों भाइयों को बता देता है कि उसे अब इस से निकाल दिया गया है.

लेकिन तभी इंसपेक्टर अरविंद को एक खबरी से उस डौक्टर की खबर मिल जाती है जिस डौक्टर ने एक मरीज की एक आंख का इलाज किया था. अरविंद ये बात देव और रवि को बता देता है.

यह जानने के बाद देव और रवि तुरंत उस डौक्टर के पास जा कर उसे बुरी तरह से टौर्चर करते हैं तो डौक्टर डर के मारे बता देता है कि जिस मरीज की आंख का उस ने इलाज किया था, उस का असली नाम सन्नी भुल्लर (अभिषेक ठाकुर) था और उस मरीज को कूकी यादव (सिकंदर खेर) मेरे पास ले कर आया था.

अब देव और रवि हरियाणा क्लब आ कर अपने पिता रघुवीर सिंह से पूछते हैं कि हमें सन्नी भुल्लर और कूकी यादव कहां मिल सकते हैं और उन का टूनामेंट कहां पर चलता है?

तब रघुवीर सिंह उन्हें बताता है कि वहां पर ओपन बौक्सिंग चलती है. इस बौक्सिंग में कोई नियम नहीं होते, कोई किसी को भी कूट सकता है. वहां पर सट्टा भी लगता है, वैसे वहां पर जाना आसान काम नहीं है क्योंकि वहां पर जाने के लिए पहले से सेटिंग बनानी पड़ती है.

अब रवि और देव उस जगह पर पहुंच जाते हैं और अपनी एंट्री करा कर अपनीअपनी पर्चियां ले लेते हैं. रवि वहां पर फाइट करने के लिए जाता है तो देव दर्शक बन कर वहां एंट्री लेता है. रवि अपनी फाइट करता है और जीत भी जाता है.

उधर देव वहां पर नजरें रख रहा होता है, तभी देव की नजर सन्नी भुल्लर पर पड़ जाती है तो अब देव और रवि सन्नी के पीछे लग जाते हैं. सन्नी जब दोनों को देखता है तो वहां से भागने लगता है तो देव और रवि उस का पीछा करते हैं.

तभी सन्नी भागतेभागते एक बड़ी क्रेन के पास पहुंच जाता है, लेकिन तभी अचानक से के्रन ऊपर से घूमती है और उस के ऊपर लदा लोहे का पूरा भार आ कर सन्नी के ऊपर गिर जाता है, जिस से सन्नी की कुचल कर मौत हो जाती है.

देव तुरंत वहां पर आ कर सन्नी की जेबों की तलाशी लेता है तो उसे सन्नी की जेब से एक ब्लैक कलर की अंगूठी और उस का पर्स मिलता है.

तभी हम ऊपर देखते हैं कि जिस आदमी ने क्रेन से सन्नी भुल्लर पर लोहा गिरा कर उसे मार डाला था, वह क्रेन से उतर कर भाग चुका था. इस के बाद यहां पर दूसरा एपिसोड समाप्त हो जाता है.

दूसरे एपिसोड में भी कहानी काफी भटकी सी नजर आ रही है, एक बौक्सिंग कोच अपनी बेटी की मृत्यु के अंतिम संस्कार में तक शामिल नहीं होता दिखाया गया है. सन्नी भुल्लर का क्रेन से मारा जाना भी एक कल्पना मात्र लग रहा है. दर्शक यह दृश्य देख कर सचमुच ढगा सा महसूस करते हैं.

एपिसोड नंबर 3

तीसरे एपिसोड का नाम ‘स्पैरिंग पार्टनर’ रखा गया है, जिस की अवधि एक घंटे की है. एपिसोड की शुरुआत में पुलिस सभी मर्डर के स्पौट पर इनवैस्टीगेशन के लिए पहुंचती है तो वहां की स्थिति देख कर इंसपेक्टर अरविंद तुरंत देव को फोन कर के कहता है कि ये कांड तुम दोनों ने ही किया है.

देव और रवि दोनों साफसाफ बता देते हैं कि जब वे सन्नी के पास पहुंचे थे तो वह मर चुका था. दोनों ने उस अपराधी को भी पकडऩे की कोशिश की थी, जिस ने के्रन से सन्नी को मारा था, लेकिन वह वहां से भाग चुका था.

इस के बाद देव और रवि निहाल के घर आ कर निहाल के छोटे भाई हुकुम की जम कर पिटाई करते हैं. दरअसल, हुकुम ने ही क्रेन से सन्नी का मर्डर किया था, क्योंकि वह अपने भाई की मौत का बदला लेना चाहता था.

इधर कोच विजू सांगवान स्पोट्र्स के हैड संजय मिश्रा (विजेंद्र काला) के पास जाता है और उसे रिश्वत की पेशकश करते हुए अपने क्लब के बच्चे को सिलेक्ट करने को कहता है, लेकिन तभी वहां पर कोच रघुवीर सिंह आता है और ऐसा फैसला लेने के लिए संजय मिश्रा को मना करता है.

दरअसल, निहाल ओलिंपिक खेलने जाने वाला था, लेकिन उस की मौत हो चुकी थी. अब संजय मिश्रा दोनों बौक्सिंग क्लबों के बीच एक प्रतियोगिता का प्रस्ताव रखता है और कहता है कि जो भी जीतेगा, वह निहाल सिंह के स्थान पर ओलिंपिक खेलने के लिए जाएगा.

इस बीच इंसपेक्टर अरविंद देव और रवि से सन्नी मर्डर केस की चर्चा के लिए मिलता है. वह दोनों को बताता है कि जिस रात निहाल की हत्या हुई थी, उस रात को फोन कौल राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनएसआई) के लैंडलाइन से आया था.

अब जोयना अगले दिन एनएसआई मुख्यालय में कोच केशव पणिकर (रेनजी पणिकर) से मिल कर वहां के भ्रमण करने की परमिशन ले लेती है. तब जोयना को वहां पर वह लैंडलाइन फोन मिल जाता है.

उसी रात रघुवीर, अरविंद, रवि, देव और जोयना हरियाणा स्पोट्र्स क्लब में मिलते हैं और इस मामले पर चर्चा करते हैं कि सन्नी को किस ने फोन किया था, यह पता लगाने के लिए किसी को ओलिंपिक में भाग लेने एनएसआई में प्रवेश लेना होगा. इस के लिए रघुवीर रवि को चुनता है और आगामी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए मेहनत करने को कहता है. रवि अब बौक्सिंग मैच जीतने के लिए कड़ी ट्रेनिंग करने लगता है.

उधर राका (कुणाल ठाकुर) भी नोटिस करने लगता है कि अब उस की बजाए रवि को तवज्जो दी जाने लगी है, इसलिए वह रघुवीर सिंह से पूछता है कि उसे अब ट्रेनिंग के लिए क्यों नहीं भेजा जा रहा है, लेकिन रघुवीर उस का कोई जवाब नहीं देता क्योंकि अब वह ओलिंपिक में अपने बेटे रवि को भेजने वाला था.

इधर इंसपेक्टर अरविंद की पत्नी भारती शेखावत (कश्मीरा परदेशी) अब रवि के काफी करीब आने लगती है. राका अब जा कर दूसरे बौक्सिंग कोच विजू सांगवान से हाथ मिला लेता है तो विजू राका से कहता है कि वह उसे अपने बौक्सिंग क्लब में शामिल कर लेगा और उसे ओलिंपिक तक ले जाएगा.

फाइट वाले दिन रघुवीर रवि को रिंग में भेजता है, जबकि विजू सांगवान अर्जुन के भाई धर्म को अपनी ओर से रिंग में भेजता है. असल में एक बार रवि और अर्जुन की फाइट के दौरान अर्जुन की बौक्सिंग रिंग में ही मौत हो गई थी.

विजू धर्म को अपने भाई अर्जुन की मौत का बदला लेने को उकसाता है. रघुवीर रवि को शांत करने की कोशिश करता है और उसे उस की बहन गुडिय़ा का बदला लेने के अपने मिशन की याद दिलाता है.

रवि और धर्म के बीच फाइट शुरू हो जाती है, लेकिन रवि अभी भी अपने अर्जुन के साथ हुए मुकाबले की यादों से परेशान है, क्योंकि अर्जुन की मौत के बाद रवि ने बौक्सिंग करनी ही छोड़ दी थी. ब्रेक के दौरान रघुवीर की याद आता है कि कैसे विजू सांगवान ने जजों को रिश्वत दी थी और फिर रघुवीर ने रवि को अर्जुन के गले पर वार करने को कहा था. रवि अपनी पुरानी यादों में खोया रहता है तो दूसरी तरफ धर्म रवि पर वार कर के उसे नौकआउट कर देता है. यहीं पर तीसरा एपिसोड समाप्त हो जाता है.

तीसरे एपिसोड में भी नाटकीयता का पुट काफी अधिक दिखाई दे रहा है, रघुवीर और उस के बेटे गुडिय़ा और निहाल के कातिल का पता लगाने के लिए काफी लंबा रास्ता अपना रहे हैं. उन सब को यह पता है कि इस केस में डीसीपी फोगाट का निश्चित रूप से हाथ रहा है, लेकिन वे सभी अपना फोकस फोगाट की ओर नहीं लगा रहे हैं.

एपिसोड नंबर 4

49 मिनट की अवधि वाले चौथे एपिसोड का नाम ‘रोप-ए-डोप’ रखा गया है. चौथे एपिसोड की शुरुआत वहीं से शुरू होती है, जहां तीसरा एपिसोड खत्म हुआ था. रघुवीर रवि को हौसला देता है, जिस के कारण रवि अपने आप को मजबूत करता है और फिर से अपना ध्यान खेल पर केंद्रित कर के विपक्षी बौक्सर धर्म को नौकआउट कर राष्ट्रीय खेल संस्थान में अपना प्रवेश सुरक्षित कर लेता है.

अगली सुबह रवि इंसपेक्टर अरविंद के घर बात करने जाता है तो अरविंद घर पर नहीं था. रवि की मुलाकात फिर अरविंद की पत्नी भारती से होती है, जो उसे कहती है कि अरविंद आज घर पर नहीं है, इसलिए वह उस के साथ रात बिता सकता है. रवि पहले हिचकिचाता है फिर घर में प्रवेश कर लेता है.

सुबह उठते ही रवि एनएसआई जाने के लिए निकल जाता है. इधर दूसरी तरफ जोयना कहीं जा रही होती है तो सड़क पर कुछ गुंडे आ कर उस से छेडख़ानी कर गिरा देते हैं. तभी भारती उसे देख लेती है और जोयना को हौस्पिटल इलाज के लिए ले जाती है.

इधर रवि एनएसआई में पहुंच जाता है तो वहां पर उस की मुलाकात निहाल के रूममेट अधिराज पूनिया (सार्थक दास) से होती है. रवि और अधिराज अब अच्छे दोस्त बन जाते हैं.

अधिराज रवि को शमशेर कुठियाला (अंकित मोहन) के बारे में बताता है कि शमशेर ही निहाल का सब से बड़ा दुश्मन और प्रतिद्वंदी था.

इधर देव अस्पताल में अपने पैर का इलाज कराने जाता है तो डौक्टर देव को बताता है कि उस के पैर में संक्रमण हो गया है, लेकिन तभी कूकी यादव के गुंडे हौस्पिटल में आ कर देव को उठा ले जाते हैं और उस के शरीर में डायनामाइट लगा कर उसे कूकी के पास पेश करते हैं.

कूकी देव से पूछता है कि सन्नी को किस ने मारा? तो देव बताता है कि जब मैं सन्नी के पास पहुंचा तो वह पहले से ही मर चुका था. देव कूकी से पूछता है कि क्या तुम ने गुडिय़ा को मारने के लिए सन्नी को भेजा था तो कूकी इस से इनकार कर देता है. कूकी अब अपने आदमियों से देव को डायनामाइट से मारने को कहता है. गुंडे डायनामाइट में आग लगा कर वहां से चले जाते हैं, लेकिन तभी अरविंद पुलिस टीम ले कर वहां पहुंच कर देव को बचा लेता है.

इस दौरान हम देखते हैं कि एनएसआई में शमशेर रवि के सामने आ कर उसे धमकाने लगता है तो दोनों की लड़ाई होने वाली ही थी कि तभी सोनिका (तनीषा शर्मा) बीच में आ कर उन्हें रोक लेती है.

सोनिका और रवि की दोस्ती हो जाती है. उस रात देव और जोयना खाना खाने एक रेस्टोरेंट में जाते हैं. वहां दोनों आपस में बातें करने लगते हैं.

जोयना जब उस के पैर के बारे में पूछती है तो देव बताता है कि उस के पिता ने बचपन से ही उसे कुश्ती में उतार दिया, मगर उसे बौक्सिंग करना नहीं आता था, जबकि उस का छोटा भाई रवि अच्छी बौक्सिंग करता था. जब मैं अच्छी बौक्सिंग नहीं कर पाता था तो मेरे बापू मेरी जम कर पिटाई करते थे.

एक दिन बापू ने मेरे पैर पर कुछ भारी चीज से मार दिया, मैं गुस्से में बिना इलाज कराए घर से निकल गया. मेरे पैर का इंफैक्शन बढ़ता गया और फिर न चाहते हुए भी मेरे बापू ने मेरा पैर कटवा दिया. तभी से ले कर आजतक मैं बौक्सिंग से नफरत करता हूं. जोयना उसे सांत्वना देती है, अब देव और जोयना एकदूसरे के करीब आने लगते हैं.

अब हम एक रात का सीन देखते हैं, जहां रवि शमशेर के कमरे से कुछ चीजें चुरा लेता है, जिन में एक प्रतिबंधित दवाई भी होती है.

सुबह रवि शमशेर को ब्लैकमेल कर के कहता है कि वह इस दवाई को हैड कोच को दिखा देगा, इसलिए सब सच बता दे. शमशेर डर के मारे बता देता है कि उस ने लैंडलाइन से कोई कौल नहीं की थी, बल्कि वह तो उस रात कैंप से बंक मार कर होटल में कमरा ले कर लड़कियों के साथ मौजमस्ती कर रहा था.

रवि अब गुस्से में आ कर उस लैंडलाइन टेलीफोन बूथ को ही तोड़ देता है, तभी रवि को देव का फोन आता है. वह बताता है कि सन्नी के पास जो ब्लैक रिंग मिली थी, वह रिंग नहीं बल्कि एक डिवाइस है, जिस का रजिस्ट्रैशन एनएसआई की लड़की सोनिका के नाम से रजिस्टर्ड है.

उस रात अब रवि सोनिका पर सन्नी को फोन कर के निहाल का ठिकाना बताने का सीधा आरोप लगाता है और गुडिय़ा की मौत के लिए भी सोनिका को दोषी ठहराता है.

सोनिका इस इलजाम से इंकार करते हुए बताती है कि हां, वह सन्नी से प्यार करती थी. वह खुलासा करती है कि सनी और उस का दोस्त कपिला (मोधिस्त्व शर्मा) निहाल की हत्या में शामिल थे.

इधर रवि अब अपने भाई देव को फोन कर के कपिल की मर्डर में संलिप्तता के बारे में बताता है और रवि अब खुद भी एनएसआई कैंपस से छिप कर बाहर निकल कर देव के साथ चला जाता है. यहीं पर चौथा एपिसोड समाप्त हो जाता है.

चौथे एपिसोड की बात करें तो इस एपिसोड में कहानी फिल्मी बना दी गई है, जिस में कूकी यादव का देव के साथ व्यवहार और अत्याचार दिखाना काफी पुराना फिल्मी तरीका लगता है, जिसे दर्शक फिल्मों में कई बार देख भी चुके हैं. किरदार लिखने में भी लेखक ने काफी गलतियां की हैं.

एपिसोड नंबर 5

पांचवें एपिसोड का नाम ‘लो-ब्लो’ रखा गया है, जिस की अवधि 48 मिनट है. इस एपिसोड की शुरुआत में देव और रवि डांडा के घर पहुंच कर उस के घर में घुस जाते हैं. लेकिन डांडा के गुंडों को इस की भनक लग जाती है और वे सब दोनों के पीछे पड़ जाते हैं.

इधर देव और रवि कपिल को ले कर रघुवीर के पास आते हैं और देव प्रेस से कपिल का हाथ कुचल देता है. देव कपिल से पूछता है कि वह तीसरा नकाबपोश कौन था, जिस ने उन्हें निहाल और गुडिय़ा को मारने के पैसे दिए थे.

कपिल बताता है कि उन्हें निहाल को नहीं बल्कि गुडिय़ा को मारने के पैसे मिले थे. कपिल आगे बताता है कि तीसरा नकाबपोश डीनो (विक्की दत्त) था, जिस ने उन्हें एक महिला से मिलवाया था, उसी महिला ने गुडिय़ा की हत्या का आदेश देने वाले व्यक्ति की तरफ से उन्हें पैसे दिए थे.

देव अब कपिल के सिर को प्रेस से कुचलने की धमकी दे कर उस से डीनो की लोकेशन पूछता है, तब कपिल बताता है कि डीनो हिसार में रहता है, लेकिन तभी वहां पर पुलिस आ जाती है.

रघुवीर, देव और रवि वहां से भागते हैं, लेकिन पुलिस पीछा कर के रघुवीर और देव को गिरफ्तार कर लेती है, जबकि रवि वहां से पुलिस को चकमा दे कर भाग जाता है.

पुलिस रघुवीर और देव को जेल भेज देती है. वे दोनों एक ही सेल मे बंद थे. रवि तब रघुवीर से अतीत की बातें करता है. इस बीच भारती रवि को अपना गुस्सा काबू करने में मदद करती है. दोनों में और भी नजदीकियां बढऩे लगती हैं.

इधर पुलिस को शक होता है कि रवि अरविंद के घर में छिपा हो सकता है तो पुलिस उस के घर रेड डाल कर रवि को गिरफ्तार कर लेती है. डीसीपी फोगाट अरविंद को एक अपराधी की मदद करने के जुर्म में निलंबित कर देता है.

इस बीच संजय मिश्रा रवि के स्थान पर एनएसआई में ओलिंपिक खेलने के लिए धर्म ठाकुर (कमलजीत राणा) का चयन कर लेता है, जिस से राका अपने को फिर से नजरअंदाज किए जाने पर गुस्सा हो कर धर्म ठाकुर की बाइक को पुल से नीचे गिरा कर धर्म की हत्या कर देता है.

दूसरी ओर जोयना रघुवीर सिंह और देव को जेल से रिहा कराने के लिए विजू सांगवान से सौदा करती है. उधर जेल में कूकी यादव एक जेल गार्ड के परिवार का अपहरण कर जेल गार्ड को धमकी देता है, जिस से वह गार्ड कूकी के आदमियों को, जो जेल में बंद थे, उन की कोठरी का ताला खोल कर रघुवीर और देव की कोठरी में घुसने देता है.

वे सब रघुवीर और देव को मारने के लिए आगे बढ़ते हैं, तभी देव की नींद खुल जाती है तो वह गुंडों से फाइट करने लगता है, लेकिन वे कैदी काफी अधिक संख्या में होने के कारण देव और रघुवीर के ऊपर भारी पड़ते जा रहे थे.

लेकिन तभी उन दोनों को छुड़ाने के लिए पुलिस आयुक्त समय रहते जेल में पहुंच जाते हैं और रघुवीर और देव को रिहा कर दिया जाता है.

उधर पुलिस वाले रवि को पुलिस जीप में बांध कर घसीटते हुए ले जाते हैं, लेकिन तभी पुलिस वालों को एक कौल आता है, जिस से रवि को भी रिहा कर दिया जाता है. इन सब के पीछे जोयना थी.

एपिसोड का अंत इस बात पर होता है कि रवि अपने पापा रघुवीर सिंह से वादा करता है कि वह ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीत कर अपने परिवार का नाम रोशन करेगा. इस पर देव को रवि के ऊपर मन ही मन बहुत गुस्सा आ जाता है.

पांचवें एपिसोड में भी काफी बेतुके सीन नजर आ रहे हैं. अभिनय की बात करें तो कलाकारों का अभिनय दर्शकों को प्रभावित करने में असफल नजर आ रहा है.

एपिसोड नंबर-6

छठें एपिसोड का नाम ‘अंडरडौग’ यानी कि कम क्षमता का व्यक्ति या समूह रखा गया है, जिस की अवधि 51 मिनट की है. एपिसोड की शुरुआत रघुवीर सिंह द्वारा एक लाश के टुकड़े करने और उसे ठिकाने लगाने से होती है.

अब हम देखते हैं कि रघुवीर सिंह और रवि अपना हरियाणा बौक्सिंग क्लब और अपना घर विजू सांगवान को बेच कर जेल से रिहाई पाने के बाद वहां से जा रहे होते हैं. क्लब के सारे मुक्केबाज रघुवीर के जाने से काफी दुखी नजर आ रहे हैं.

रास्ते में रवि एनएसई मुख्यालय में जा कर कोच पणिकर से रिक्वेस्ट करता है कि उसे एक बार फिर से एनएसआई से आने की परमिशन दे दी जाए. लेकिन कोच पणिकर कहता है कि तुम ने अपनी मरजी से कैंप छोड़ कर बहुत बड़ी गलती की है. तुम ने नियमों को तोड़ा है, इसलिए तुम्हें अब माफ नहीं किया जा सकता.

रवि को पता चलता है कि भारती गांव की भोलीभाली लड़कियों को बाजार में बेचने का धंधा करती है.

इस पर रवि उस से नाराज हो जाता है तो भारती बताती है कि उसे इस तरह का शौक है, जिसे अरविंद कभी भी पूरा नहीं कर सकता.

वह आगे बताती है कि वह एक एजेंट के रूप में काम करती है. वह लड़कियों से दुव्र्यवहार करने वाले घरों से भागने में मदद करती है और वह यह काम कर के आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना चाहती है. इस पर रवि शांत हो जाता है और भारती को उस के घर छोड़ देता है.

दूसरे दिन सुबह देव और जोयना रवि के दौडऩे जाने का इंतजार करते हैं. रवि के घर से निकलते ही देव और जोयना गुडिय़ा के कमरे में जा कर उस के सामान की तलाशी करने लगते हैं. वहां पर जोयना को एक ड्राइंग बुक मिलती है, जिस में निशी नाम लिखा होता है. फिर उस में कई चित्र भी मिलते हैं.

अब देव उस बुक को ले कर रवि की कार चला कर अरविंद को उस के घर से बुला लेता है. वे दोनों कार में बैठ कर आगे जाते हैं, तभी अरविंद को कार में भारती की पायल मिलती है.

वह देव से इस बारे में पूछताछ करता है तो देव को इस बारे में कुछ पता ही नहीं था. देव कहता है कि यह गाड़ी तो रवि की है. उसे ही पता होगा कि ये पायल किस की हो सकती है. अब अरविंद वह पायल हाथ में ले कर गाड़ी से उतर जाता है और पैदल ही अपने घर निकल जाता है.

अब देव और जोयना अब एक नाव में बैठ कर उस टापू तक पहुंचते हैं, जहां पर उन्हें एक वेश्यालय मिलता है. देव अब ग्राहक बन कर वेश्यालय में जाता है और डीनो का पता करता है.

वह एक महिला के कमरे में जाता है तो वह देखता है कि उसी कमरे में डीनो भी मौजूद था. लेकिन देव जैसे ही उस के पास जाता है तो डीनो अचानक जमीन पर गिर कर खून की उल्टी करता है और तत्काल ही प्राण त्याग देता है.

देव अब उस कमरे में मौजूद महिला से पूछताछ करता है तो वह अपना नाम निशी (आइका कुमावत) बताती है और कहती है कि किसी ने उसे पैसे दे कर डीनो को कुछ गोलियां पिलाने को दी थीं.

निशी गुडिय़ा से भी मिल चुकी थी. उन दोनों की आवाजें सुन कर कुछ गार्ड उस कमरे का दरवाजा तोड़ कर अंदर घुस जाते हैं और अंधाधुंध फायङ्क्षरग करने लग जाते हैं, लेकिन देव किसी तरह अपने आप को बचाता हुआ वहां से निकल जाता है. उधर अरविंद अपने घर पहुंच कर भारती के सामने पायल रखते हुए सवालजवाब करने लगता है.

इस पर भारती कहती है कि वह केवल तुम से ही प्यार करती है तो अरविंद गुस्से में आ कर उस का गला दबा देता है. तभी भारती मरने का नाटक करती है तो अरविंद तुरंत रवि को कौल कर के बताता है कि रवि जल्दी से मेरे घर पर आओ, देखो न भारती को न जाने क्या हो गया है.

अरविंद रवि के आते ही उसे मारने की तैयारी करता है, लेकिन तभी भारती को होश आ जाती है और वह अरविंद पर अचानक हमला कर के उस के चेहरे को गर्म लोहे से दाग देती है. उस के बाद वह उस की बेरहमी से हत्या कर देती है. रवि अपने पिता रघुवीर को अरविंद का शव ठिकाने लगाने के लिए मदद के लिए कौल कर तुरंत बुला लेता है.

रघुवीर जब वहां पर पहुंचता है, तभी एनएसआई कोच पणिकर का कौल आता है. कोच रवि को एनएसआई में आने की स्वीकृति देते हुए कहता है कि तुम्हें अभी जौइन करना पड़ेगा.

दूसरी ओर देव चुपके से अरविंद के घर में घुस जाता है और भारती के सामान की तलाशी लेता है तो वहां पर उसे वह मुखौटा मिल जाता है, जो निहाल और गुडिय़ा पर हमला करने वाले गुंडों ने पहन रखा था. यानी कि उन में से एक भारती भी एक थी, लेकिन तभी भारती देव के ऊपर पिस्टल तान देती है और इसी के साथ छठा एपिसोड यहीं पर समाप्त हो जाता है.

छठें एपिसोड की बात करें तो इस में भी नाटकीयता दिखने वाले कई सीन दिखाए गए हैं. अरविंद के घर पर उस की पत्नी भारती बुरी तरह से हमला करती है. काफी शोरशराबा होता है, यहां तक कि गोली भी मार देती है परंतु उसी घर में रहने वाली अरविंद की मां को न तो कुछ पता चलता है न ही गोली की आवाज सुनाई पड़ती है.

एपिसोड नंबर 7

सातवें एपिसोड का नाम ‘सकरपंच’ रखा गया है, जिस की अवधि 55 मिनट है. इस एपिसोड की शुरुआत निहाल और गुडिय़ा की बातचीत के फ्लैशबैक से शुरू होती है. गुडिय़ा अपना गर्भपात कराना चाहती है, क्योंकि निहाल को अपना ध्यान ओलिंपिक पर केंद्रित करना है. निहाल चला जाता है, तभी निशा का कुछ लोग पीछा करते हैं तो वह गुडिय़ा से मदद मांगती है.

उस के बाद गुडिय़ा उसे अपने घर ले कर आ जाती है, जहां उसे पता चलता है कि निशा भारती से भाग रही थी, जो उसे किसी स्थानीय परिवार को बेचना चाहती थी. उधर रवि ओलिंपिक खेलने के लिए कड़ी मेहनत करने लग जाता है.

इधर देव को भारती ने एक जगह बांध कर रखा था. वह देव को जोयना की तसवीर दिखाती है, जहां एक जगह जोयना को बांध कर रखा गया था. वह कहती है कि वह जोयना को छोड़ देगी, लेकिन इस के लिए देव को पुलिस स्टेशन जा कर यह बयान देना होगा कि देव और अरविंद के बीच झड़प हुई और गुस्से में आ कर फिर देव ने अरविंद की हत्या कर दी.

देव मान जाता है और पुलिस के समक्ष यही बयान दे देता है. देव की गिरफ्तारी के बाद अब भारती देव से आखिरी बार मिलती है कि गुडिय़ा को मारने का प्लान उस का नहीं था, जिस ने यह प्लान किया था उस का नाम वह चुपके से देव के कान के पास आ कर बता देती है.

अब डीसीपी फोगाट देव को कूकी यादव के पास भेज देता है. कीकू ने वहां पर हुकुम को पकड़ कर रखा था. देव कूकी यादव से उसे छोडऩे को कहता है, मगर कीकू  तभी हुकुम के सिर पर हथौड़े से वार कर उसे मार डालता है.

इस के बाद कूकी देव पर हमला कर उसे जान से मारने की कोशिश करता है. देव उस पर तुरंत पलटवार कर उस का कान काट लेता है और कूकी से उस की पिस्टल छीन कर वहां से भाग जाता है.

इधर एनएसआई में रवि ने शमशेर को भी हरा दिया था. उस का बस अब एक फाइनल मैच ही रह गया था. मैच के बाद रवि बाथरूम में शावर ले रहा होता है, तभी एक नकाबपोश पीछे से आ कर रवि की पीठ पर छुरा मार कर वहां से भाग जाता है.

रवि वहीं पर बेहोश हो कर गिर जाता है. दूसरी ओर देव अब उसी टापू पर पहुंच जाता है, जहां जोयना को कैद कर के रखा हुआ था. देव वहां पर जा कर वहां की महिला बौस को पिस्टल से कवर कर सीधे अंदर घुस जाता है और वहां जा कर जोयना को छुड़ा लेता है.

अब रघुवीर को जैसे ही पता चलता है कि किसी ने चाकू मार कर रवि को घायल कर दिया है तो वह पहला शक विजू सांगवान पर करता है. लेकिन विजू साफ इंकार कर देता है.

देव अब टापू से जोयना और निशी को छुड़ा लेता है और खुद एनएसआई पहुंच जाता है, क्योंकि वह इस मैच को बंद कराना चाहता था.

लेकिन जब देव रवि से बात करता है तो रवि का बौक्सिंग के प्रति जुनून देख कर वह अब अपना विचार बदल देता है और रवि से कहता है कि जा भाई, तू अब जीत कर ही लौटना.

देव अब अपने पिता रघुवीर को एकांत में ले कर जाता है और उसे पिस्टल दिखा कर सच उगलवाता है. यहां पर पता चलता है कि भारती जिस के साथ ये सब लड़कियों वाले धंधे कर रही थीं, उस का दूसरा साथी रघुवीर सिंह ही था.

रघुवीर बताता है कि उसे पहले से ही पता था कि निहाल और गुडिय़ा आपस में प्रेम करते हैं. गुडिय़ा की ऐसी हालत देख कर निहाल का ध्यान कहीं भटक न जाए, इसलिए गुडिय़ा को रास्ते से हटाना जरूरी हो गया था. इस के लिए रघुवीर ने भारती को चुना, क्योंकि भारती एक ऐसी महिला थी, जिस के कौन्टैक्ट बड़े लोगों और बड़े अपराधियों के साथ थे.

इस दौरान रवि अपनी चोट के बावजूद अपना हौसला नहीं छोड़ता और राका का दिलेरी से सामना करते हुए राका को पराजित कर देता है और इस तरह रवि को ओलंपिक में भारत का प्रथम प्रतिनिधित्व करने वाले मुक्केबाज के रूप में चयन कर लिया जाता है.

रवि के विजेता होते ही रघुवीर खुशी से जश्न मनाने लगता है और वह देव से सारी पिछली कड़वी यादें भूलने का निवेदन करता है. लेकिन देव अपने पिता पर गोली चलाने को तैयार हो जाता है.

तभी वहां पर डीसीपी फोगाट अपनी पुलिस टीम के साथ रघुवीर को गिरफ्तार करने पहुंच जाता है. डीसीपी फोगाट ने भी रघुवीर की तरफ पिस्टल तान रखी थी.

उधर देव ने रघुवीर के ऊपर पिस्टल तान रखी थी, फिर हमें सिर्फ गोली की आवाज सुनाई देती है. यह गोली किस ने चलाई, इस बात का पता नहीं चल पाता और इस के बाद वेब सीरीज ‘ग्लोरी’ का सातवां और अंतिम एपिसोड यहीं पर समाप्त हो जाता है.

सातवें एपिसोड की बात करें तो इस एपिसोड में काफी बेतुके से सीन दिखाए गए हैं, जो दर्शकों की समझ से काफी दूर लगते हैं. देव को गिफ्तार करने के बाद डीसीपी स्तर का अधिकारी उसे गुंडे कूकी यादव को सौंप देता है, यह निरर्थक सा लगता है.

रघुवीर ने निहाल के मर्डर के बाद फिर भी गुडिय़ा जोकि उस की अपनी बेटी थी, उस को गला दबा कर मार दिया. यह दृश्य भी समझ से परे है.

इस पूरी सीरीज की बात करें तो देव को रवि की जगह पर दिखाया जाता तो कहानी में और रोचकता लाई जा सकती थी. अब दर्शकों को ‘ग्लोरी’ के दूसरे सीजन का इंतजार है, जो शायद इस कहानी को आगे काफी घुमाफिरा कर पेश करने वाला है.

पुलकित सम्राट

अभिनेता पुलकित सम्राट का जन्म 29 दिसंबर 1983 को दिल्ली में हुआ था. पुलकित ने मानव स्थली स्कूल और मोंटफोर्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, अशोक विहार दिल्ली से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की था. इस के बाद उस ने दिल्ली के एपीजे इंस्टीट्यूट औफ डिजाइन में विज्ञापन कोर्स में दाखिला ले लिया.

Pulkit Samrat

बाद में जब उसे मौडलिंग का काम मिलने लगा तो अपनी डिजाइनिंग की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी.

इस के बाद वह मुंबई चला गया, जहां पर मशहूर ऐक्टिंग गुरु किशोर नामित कपूर से अभिनय की बारीकियां सीखीं.

पुलकित ने टीवी सीरियल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ से अपने अभिनय की शुरुआत की और फिल्म ‘बिट्टू बौस’ से फिल्मों में पदार्पण किया.

पुलकित को पहली व्यावसायिक सफलता फिल्म ‘फुकरे’ से मिली. इस के अलावा पुलकित फिल्म ‘जय हो’, ‘ओ तेरी’, ‘बेगिस्तान’, ‘सनम रे’, ‘जुनूनियत’, ‘फुकरे की वापसी’, ‘वीरे की शादी’, ‘3 मंजिल’, ‘पागलपंथी’, ‘ताइश’, ‘हाथी मेरे साथी’, ‘फोन भूत’, ‘फुकरे 3’, ‘राहु केतु’ और ‘सुस्वागतम खुशामदीद’ जैसे अन्य कई फिल्मों में भी काम कर चुका है.

पुलकित को वर्ष 2006 में टीवी सीरियल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ के लिए ‘इंडियन टेली अवाड्र्स’ (नया चेहरा-पुरुष) से भी सम्मानित किया जा चुका है.

पुलकित सम्राट ने 3 नवंबर, 2014 को अपनी प्रेमिका श्वेता रोहिरा से विवाह किया, जो अभिनेता सलमान खान की राखी बहन है, लेकिन पुलकित और श्वेता रोहिरा का 2015 में तलाक हो गया.

इस के बाद पुलकित ने अभिनेत्री यामी गौतम को डेट किया जो ‘सनम रे’ फिल्म में उस की सह कलाकार थी, लेकिन यह जोड़ा 2018 में अलग हो गया.

उस के बाद पुलकित की मुलाकात 2018 में कृति खरबंदा से हुई. उन्होंने 2019 में डेटिंग शुरू की. इस प्रेमी जोड़ी ने ‘वीरे की वेडिंग’, ‘पागलपंथी’ और ‘तैश’ जैसी फिल्मों में एक साथ काम भी किया है.

5 साल रिश्ते में रहने के बाद इस जोड़े ने 2024 में सगाई कर ली. उस के बाद पुलकित ने 15 मार्च, 2024 को मानेसर (हरियाणा) में एक पारंपरिक हिंदू समारोह में अपनी प्रेमिका कृति खरबंदा के साथ विवाह कर लिया.

सयानी गुप्ता

अभिनेत्री सयानी गुप्ता का जन्म 9 अक्तूबर 1985 को कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में एक बंगाली परिवार में हुआ था. इस के पापा का नाम कमल गुप्ता था, जो आल इंडिया रेडियो में एक संगीतकार और एफएम रेडियो के अग्रदूत थे. सयानी की मां का नाम मैत्रेयी गुप्ता है.

Syani gupta

सयानी गुप्ता की प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता में ही हुई थी. स्कूली पढ़ाई के बाद वह दिल्ली आ गई. उस ने वर्ष 2004 से 2007 तक दिल्ली यूनिवर्सिटी के मशहूर कालेज लेडी श्री राम कालेज औफ वीमन से इतिहास विषय में ग्रैजुएशन की डिग्री प्राप्त की.

कालेज के दिनों में वह डांस, ड्रामा, डिबेट और म्यूजिक जैसी कई सांस्कृतिक सोसायटियों का सक्रिय हिस्सा रही थी.

अभिनय के प्रति अपने जुनूनी स्वभाव के कारण सयानी गुप्ता ने भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई) पुणे में दाखिला लिया. यहां से उस ने 3 साल तक ऐक्टिंग की प्रोफेशनल ट्रेनिंग के साथ स्नातक भी किया. इस के अलावा सयानी भरत नाट्यम, मौडर्न डांस बैले और भारतीय मार्शल आर्ट कलारीपयट्टू में भी प्रशिक्षित है.

सयानी गुप्ता ने वर्ष 2012 में ‘सेकेंड मैरिज डौट कौम’ से अपने फीचर फिल्म करिअर की शुरुआत की. इस के अलावा सयानी फिल्म ‘ताशेर देश’ (बांग्ला), ‘स्ट्रा के साथ मार्गरीटा’, ‘सूखा’, ‘पंखा’, ‘बारबार देखो’, ‘जौली एलएलबी 2’, ‘भूखा’, ‘जग्गा जासूस’, ‘जब हैरी मेट सेजल’, ‘फुरके की वापसी’, ‘पोशम पा’, ‘ज्विगाटो’, ‘ख्वाबों का झमेला’ जैसी फिल्मों में भी काम कर चुकी है.

सयानी गुप्ता अभी अविवाहित है. वह अपने काम और स्वतंत्रता को बहुत महत्त्व देती है और उसे फिलहाल शादी के बंधन में बंधने में कोई दिलचस्पी नहीं है. सयानी अपने परिवार में इकलौती बेटी है.

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