Madhya Pradesh Crime. शादी के 5 साल बाद ही उर्मिला सैनी का पति अखिलेश सैनी उस के चरित्र को ले कर संदेह करने लगा था. इस बात को ले कर वह आए दिन उस से झगड़ा तो किया करता ही था, साथ ही मारपीट भी करने लगा था. शक के नासूर के चलते गुस्से में इंसान से हैवान बने 45 वर्षीय अखिलेश ने अपनी 38 वर्षीय पत्नी उर्मिला को ऐसी सजा दी कि…
40 वर्षीय अखिलेश मूलरूप से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के टीला जमालपुरा का रहने वाला था. उस के पिता सीताराम सैनी एक साधारण आदमी थे, फिर भी उन्होंने अपने बेटे को खूब पढ़ायालिखाया था.
पढ़ाई पूरी करने के बाद अखिलेश ने सरकारी नौकरी के लिए काफी प्रयास किया, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली. ऐसी स्थिति में उस ने घर से ही औनलाइन सामान बेचने और अगरबत्ती की ट्रेडिंग का काम शुरू कर दिया. उस के पेरेंट्स बेटे के कारोबार में लग जाने से बेहद खुश थे. हालांकि उन्हें किसी बात की चिंता थी तो बस अखिलेश की शादी की. अब उन्होंने उस के योग्य लड़की की तलाश शुरू कर दी थी.
एक करीबी रिश्तेदार ने उन्हें खंडवा निवासी सत्य नारायण मालाकार की बेटी उर्मिला के बारे में बताया. उर्मिला उस वक्त भोपाल के पोस्ट आफिस में कार्यरत थी.
उर्मिला के सरकारी नौकरी में लगे होने से अखिलेश और उस के परिवार को उर्मिला पसंद आ गई. उर्मिला के पापा ने भी अपने समाज के सोशल मीडिया ग्रुप पर अखिलेश का बायोडाटा देखने के बाद शादी के लिए अपनी सहमति दे दी.
क्योंकि अखिलेश भोपाल का रहने वाला था और उर्मिला भी भोपाल में अकेले रह कर नौकरी करती थी. लड़कालड़की की दिखाई की सारी रस्म पूरी होने के बाद अखिलेश की शादी खंडवा के गणेश तलाई में रहने वाले सत्यनारायण मालाकार की बेटी उर्मिला के साथ बड़ी धूमधाम से हिंदू रीतिरिवाज से हो गई.
नौकरीपेशा सुंदर पत्नी पा कर अखिलेश बेहद खुश था. गोरे रंग और अपने शरमीले स्वभाव की उर्मिला जब अपनी ससुराल पहुंची तो उस ने अपने व्यवहार से सब का मन मोह लिया. एक कुशल गृहिणी की तरह उर्मिला नौकरी करने के साथ ही परिवार को कैसे खुश रखा जाए, घर की जरूरतें कैसे पूरी हों, पति के साथ परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ सामाजिक मानमर्यादा का किस तरह निर्वाह किया जाए, इस बात का काफी खयाल रखती थी.
ससुराल में उर्मिला की सभी तारीफ करते थे. इस से उर्मिला काफी खुश थी. उर्मिला ने शादी से पहले अपने दिल में ढेरों सपने संजो रखे थे. वह दुनिया की वो सब खुशियां पाना चाहती थी, जो हर लड़की चाहती है.
शादी के बाद अखिलेश और उर्मिला के दांपत्य जीवन की शुरुआत हुई. दोनों ही बेहद खुश थे. वक्त अपनी गति से चल रहा था. शुरुआत में अखिलेश और उर्मिला के बीच किसी तरह का कोई विवाद नहीं था. घरेलू काम भी दोनों मिलजुल कर किया करते थे.
शादी के 5 साल कब और कैसे बीत गए, इस का उन्हें एहसास नहीं हुआ. इस बीच उन्होंने अपना संतुलित परिवार बना लिया. वे 2 बच्चों के मातापिता बन गए. उन की बड़ी बेटी और छोटा बेटा सेंट अर्नाल्ड पब्लिक स्कूल में पढ़ते थे. दोनों ही पढ़ाई में होशियार थे.
शादी के 5 साल गुजरने के बाद का समय उर्मिला के लिए सुखद नहीं रहा. उस के शंकालु और सनकी पति के कारण उस का दांपत्य जीवन तहसनहस हो गया था. क्योंकि अब उस के पति का व्यवहार पूरी तरह बदल गया था.
वह उस के चरित्र को ले कर आए दिन तूतूमैंमैं करने लगा था. बात शुरू होती थी उर्मिला के शनिवार को भी ड्यूटी पर जाने को ले कर, फिर उस का पति उल्टे उस के चरित्र को ले कर उस पर तरहतरह के भद्दे कमेंट करने के साथ ही अनर्गल आरोप लगाने लगता था.
कोई भी दिन ऐसा नहीं बीतता था, जब अखिलेश की अपनी पत्नी से तूतूमैंमैं न होती हो. दोनों बच्चों के साथ पड़ोसी भी उन दोनों के झगड़े से परेशान रहते थे. हद तो तब हो जाती थी, जब अखिलेश उस के चरित्र को ले कर आरोप लगाने के साथ मारपीट करने लगता.
आए दिन होने वाली तकरार के दौरान जब भी अखिलेश की नाबालिग बेटी अपनी मम्मी का पक्ष ले कर बीचबचाव करने आती तो वह झुंझलाहट में उस की मां पर बदचलन और बेहया होने का आरोप लगा कर उस पर भी हाथ छोड़ देता.
यही नहीं, एक बार तो उस ने बेटी के सिर पर भगवान का सिंहासन तक फेंक कर मार दिया, जिस से उस का माथा चोटिल हो गया था. उधर अखिलेश की हरकतों को देख कर उर्मिला के पापा ने अपनी बेटी से कहा कि वह अपने शंकालु और सनकी पति से तलाक ले ले, लेकिन उर्मिला ने यह कह कर तलाक लेने से मना कर दिया कि अभी दोनों बच्चे छोटे हैं. रही बात पति की तो उन्हें पति देरसबेर कभी तो समझ आ जाएगी कि मैं चरित्रहीन नहीं हूं.
विवाद बढऩे पर जब कभी सत्यनारायण मालाकर अपने बेटे राजकुमार के साथ दामाद को समझाने खंडवा से भोपाल आते तो अखिलेश अपने ससुर और साले से लिखित में माफीनामा लिख कर माफी मांग लेता था.
अखिलेश की बेटी ने अपने पापा के द्वारा मम्मी के साथ की जाने वाली हरकतों से परेशान हो कर भोपाल वाले घर के बगीचे में एक पेड़ पर लिखा था कि यदि अब पापा ने मम्मी के चरित्र को ले कर ऊलजुलूल टिप्पणी की तो वह खुदकुशी कर लेगी. बेटी की इस धमकी का अखिलेश पर लेशमात्र भी असर नहीं हुआ.
आखिरकार पति की हरकतों से परेशान हो कर उर्मिला ने भोपाल में अपनी पोस्टिंग के दौरान निशातपुरा थाने में मारपीट और प्रताडऩा की शिकायत दर्ज करा दी. लेकिन हर बार की तरह इस बार भी अखिलेश के फेमिली वालों ने उर्मिला को समझाबुझा कर समझौता करा दिया था.
इस के बाद अखिलेश कुछ दिन तक शांत रहा, लेकिन सुलह के कुछ दिनों बाद ही वह उर्मिला के चरित्र पर फिर से शक कर आए दिन झगड़ा और मारपीट करने लगा. पति के इस रुख से उर्मिला को अपने साथसाथ अपनी बेटी और बेटे की सुरक्षा को ले कर चिंता होने लगी थी. अत: वह काफी तनाव में रहने लगी थी.
वह अपनी परेशानी अपने पेरेंट्स और भाई को बताने का साहस नहीं कर पा रही थी, क्योंकि उस के मायके पक्ष के लोग उस पर तलाक देने के लिए दबाव डालते थे. बच्चों के भविष्य को ध्यान में रख कर उर्मिला तलाक देने के लिए तैयार नहीं थी. सिर्फ उस की इंदौर में रहने वाली बहन पूजा को ही उस की परेशानी के बारे में पता था, इसलिए उस ने पूजा की सलाह पर अपना ट्रांसफर मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के एम.जी. मार्ग स्थित डाक विभाग के डिवीजन औफिस में करा कर अपने दोनों बच्चों को भोपाल से साथ ले कर बहन के घर पर रहने इंदौर आ गई थी.
पत्नी के बच्चों सहित इंदौर चले जाने से तिलमिलाए अखिलेश ने इंदौर आ कर उर्मिला की बहन के घर पर ही उर्मिला के साथ अभद्रता करते हुए भद्दे कमेंट्स तक किए, उर्मिला को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे?
तब उर्मिला ने हिम्मत कर पति के खिलाफ इंदौर के जूनी थाने में रिपोर्ट लिखवा दी. तब अखिलेश ने अपने ससुर और पत्नी के पैरों में गिर कर माफी मांग ली थी तो उर्मिला ने उसे माफ कर दिया. और प्रयास कर नवरत्न बाग के निकट बनी डाक विभाग की कुंज कालोनी में अपने लिए सरकारी आवास आवंटित करवा लिया था.
सरकारी आवास आवंटित होते ही उर्मिला अपने बच्चों को ले कर अपनी बहन के घर से डाक विभाग की कुंज कालोनी में रहने के लिए आ गई. उर्मिला भावुक और संवेदनशील महिला थी, अत: उस ने अपने पति को अपने साथ सरकारी आवास में रहने की अनुमति दे दी. यही उर्मिला की सब से बड़ी भूल थी, क्योंकि अभी तक अखिलेश के शक्की स्वभाव और सनकीपन में लेशमात्र भी बदलाव नहीं आया था.
भोपाल की तरह ही इंदौर आने के कुछ दिनों बाद ही उस ने सारी मर्यादा को ताक पर रख कर इंदौर में भी उर्मिला के चरित्र को ले कर आए दिन उस से झगड़ा और मारपीट करना शुरू कर दिया था. यहां तक मोबाइल फोन में पत्नी को वाट्सऐप और इंटरनेट भी नहीं चलाने देता था.
यहां भी भोपाल की तरह पड़ोस में रहने वाले लोगों को उर्मिला के घर से रोनेपीटने की आवाजें आने लगी थीं. पति के द्वारा उस के साथ किए जाने वाले झगड़े और चरित्र पर शक किए जाने से उस का माथा ठनका. उर्मिला को अपने पति पर गुस्सा तो बहुत आता, लेकिन वह किसी तरह अपने गुस्से को काबू कर लेती थी.
10 जुलाई, 2026 की शाम को हद तो तब हो गई, जब अखिलेश ने उर्मिला के आफिस से लौट कर आते ही उस के चरित्र को ले कर कुछ इस तरह हंगामा खड़ा किया कि आसपड़ोस में रहने वालों के होश उड़ गए.
उन्होंने उर्मिला के घर आ कर उस के पति को समझाने की भरसक कोशिश की, लेकिन अखिलेश चुप नहीं हुआ. वह चिल्लाचिल्ला कर कहने लगा, ”हरामजादी, वकील के साथ गुलछर्रे उड़ाती है और मेरे खिलाफ पुलिस में शिकायत करती है.’’
पति की इस हरकत से उर्मिला का मूड इतना खराब हुआ कि उस ने गुस्से में खाना नहीं बनाया तो अखिलेश ने औनलाइन चिकन और रोटी मंगवा ली और अपने दोनों बच्चों को अपने हाथों से खाना खिला कर सोने चला गया.
11 जुलाई, 2026 की दोपहर बाद इंदौर के संयोगितागंज थाने के अंतर्गत आने वाली डाक कुंज कालोनी में उर्मिला सैनी के कत्ल की वजह से क्या प्रिंट और क्या इलैक्ट्रौनिक मीडिया और सोशल मीडिया की सुर्खियों में आ गई थी. उधर मृतका के परिजनों और डाक महकमे के कर्मचारियों का गुस्सा सोमवार को उबाल पर आ गया था.
मृतका के रिश्तेदारों, स्थानीय रहवासियों और डाक विभाग के कर्मचारी सगठनों ने एकजुट हो कर संयोगितागंज थाने का घेराव कर आरोपी की जल्द से जल्द गिरफ्तारी को ले कर एसएचओ के.पी. यादव को ज्ञापन सौंपा.
मामला डाक विभाग की 38 वर्षीय पोस्टल असिस्टेंट उर्मिला सैनी के कत्ल का था. उर्मिला के साथ उस का पति अखिलेश (45 वर्ष) 14 वर्षीय बेटी और 8 वर्षीय बेटा रहते थे.
उर्मिला के घर से 11 जुलाई शनिवार को दोपहर के वक्त अचानक बच्चों के रोने की आवाजें सुन कर आसपड़ोस में रहने वाले लोग दौड़ कर उर्मिला के घर की तरफ पहुंचे तो वहां का मंजर बड़ा ही खौफनाक था. इस बीच उर्मिला की बेटी ने लडख़डाती आवाज में अपने नाना को खंडवा फोन कर पापा द्वारा मम्मी की हत्या किए जाने की सूचना दे दी थी.
यह सुन कर सत्यनारायण को जैसे अपने कानों पर यकीन ही नहीं हुआ. उन के पैरों के नीचे से एकाएक मानो जमीन ही खिसक गई थी. वे धेवती से बोले, ”कमीने दामाद ने आखिरकार मेरी बेटी को मार ही दिया. बेटा, तुम अपना और छोटे भैया का खयाल रखना, मैं तेरी नानी को साथ ले कर जल्द तुम्हारे पास पहुंचता हूं. तेरे राजकुमार मामा को भी फोन कर तत्काल तुम्हारे पास पहुंचने के लिए कहता हूं.’’
लोगों ने जो कुछ देखा, वह उन की कल्पनाओं से परे था. कमरे में उर्मिला सैनी खून से लहूलुहान मृत पड़ी थी. जबकि उस के पति अखिलेश का वहां कुछ पता नहीं था.
मौके पर जमा लोगों में से किसी ने फोन कर इस जघन्य वारदात की सूचना पुलिस को दे दी.
इस हत्याकांड की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. थाना संयोगितागंज के प्रभारी के.पी. यादव पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.
इस घटना की सूचना मिलने पर एसीपी निधि दंडोतिया और एफएसएल टीम भी वहां पहुंच गई. पुलिस अधिकारी ने मौकामुआयना किया, वहीं एफएसएल टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए मृतका के सिर पर किसी भारी वस्तु से प्रहार किए गए थे. साथ ही शरीर पर भी चाकू से अनगिनत वार किए जाने के घाव थे.
हैरानी की बात यह थी कि आसपड़ोस में किसी को इस खौफनाक वारदात का पता तक नहीं चला था. इस घटना का पता स्कूल से लौट कर आने पर सब से पहले उर्मिला की बेटी और बेटे को चला था.
पुलिस ने मृतका की बेटी से पूछताछ की तो उस ने घर में आए दिन कलह होने की बात पुलिस को बता दी.
पुलिस ने उस के बयान को गंभीरता से सुन कर नोट कर लिया. बेटी के बयानों में सच्चाई थी. हत्या का शक मृतका के पति अखिलेश सैनी पर था. क्योंकि वह लापता था. सब से बड़ा सवाल यह था कि यदि अपनी पत्नी की हत्या वाकई में अखिलेश ने की थी तो फिर इस की आखिर वजह क्या थी?
बहरहाल, पुलिस ने मौके पर काररवाई पूरी कर उर्मिला का शव पोस्टमार्टम के लिए एमवाई अस्पताल भिजवा दिया. वहीं पुलिस ने लाश के पड़ा चाकू अपने कब्जे में ले लिया. साथ ही अखिलेश के खिलाफ उस की बेटी की तहरीर पर हत्या का मामला दर्ज कर लिया.
पुलिस अखिलेश की तलाश में जुट गई, लेकिन इस कहानी के लिखे जाने तक भी पुलिस उसे पकड़ नहीं सकी थी, वह फरार बना हुआ था.
पुलिस टीमें वारदात वाले दिन से ही अखिलेश की तलाश में लगी हुई थीं. उस की नातेदारियों में भी पुलिस द्वारा दबिश दी गई. अखिलेश का लंबे समय तक पता नहीं चलने पर पुलिस ने उस के ऊपर 20 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया था. अखिलेश पुलिस के लिए एक तरह से चुनौती बन चुका था.
पुलिस द्वारा मृतका की बेटी अन्य लोगों से की गई पूछताछ के बाद उर्मिला की हत्या की ऐसी कहानी निकल कर सामने आई कि पुलिस भी सोचने पर मजबूर हो गई. चौंकाने वाली बात यह थी कि अखिलेश ऐसा हैवान था, जिसे अपने परिवार को उजाडऩे का जरा भी अफसोस नहीं था.
अखिलेश घर से ही औनलाइन अगरबत्ती की ट्रेडिंग का काम करता था. इस काम से उसे इतनी कमाई नहीं होती थी कि वह अपनी गृहस्थी का खर्च उठा सके. ऐसी स्थिति में शादी होने के बाद उर्मिला ही घरगृहस्थी की सारी जिम्मेदारी उठा रही थी. वह दोनों बच्चों को स्कूल भेजने के बाद पति और बच्चों के लिए खाना बनाने के बाद अपना लंच बौक्स ले कर औफिस के लिए निकल जाती थी.
पुलिस का मानना है कि यह घटना पतिपत्नी के बीच अचानक हुए विवाद का नतीजा नहीं, बल्कि सोचीसमझी योजना के तहत अंजाम दी गई है. उर्मिला की बेटी ने पुलिस को बताया कि हत्या करने के बाद आरोपी बिलकुल सामान्य व्यवहार करता रहा.
उर्मिला की हत्या करने के बाद सब से पहले खून से सने अपने कपड़े घर के पास बने चैंबर में फेंक दिए थे. और फिर घर जा कर नहाया और फटाफट साफ कपड़े पहने, इतना ही नहीं उस ने बालों में तेल तक लगाया और माथे पर टीका भी.
फिर वह बिना किसी हिचकिचाहट के अपने बच्चों के स्कूल पहुंचा. स्कूल में उस ने बेटी को उर्मिला का कीमती नेकलेस, घर की चाबी और एटीएम कार्ड सौपने के साथ उस का पिन नंबर भी बताया और कुछ रुपए भी दिए और कहा कि स्कूल की छुट्टी होने के बाद अपने छोटे भाई को ले कर पूजा मौसी के घर चली जाना, क्योंकि मैं और तुम्हारी मम्मी जरूरी काम से भोपाल जा रहे हैं. सोमवार की सुबह तक वापस लौट आएंगे.
इतना कह कर अखिलेश वहां से चला गया. उर्मिला की बेटी ने पुलिस को यह बताया कि दोपहर एक बजे के बाद जब वह स्कूल से अपने छोटे भाई के साथ घर पहुंची तो घर का मुख्य दरवाजा खुला हुआ था और घर के भीतर तेज आवाज में टीवी चल रहा था.
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने टीवी की की आवाज फुल कर रखी थी, ताकि हत्या करते समय पत्नी की चीखपुकार घर से बाहर किसी को सुनाई न दे. उर्मिला के दोनों बच्चों ने स्कूल से लौट कर जैसे ही घर के भीतर कदम रखा तो कमरे में उन की मम्मी उन्हें खून से लथपथ हालत में पड़ी हुई दिखाई दी.
जांच के दौरान घर से एक 7 लेयर वाला मैडिकल चाकू मय बौक्स के पुलिस ने बरामद किया. परिजनों का कहना है कि आरोपी ने यह विशेष चाकू कुछ समय पहले औनलाइन मंगाया था.
इस चाकू का इस्तेमाल बड़े औपरेशन या डिलीवरी के दौरान गहरे चीरे लगाने के लिए डौक्टरों द्वारा किया जाता है. कहा जा रहा है कि इसी चाकू से हत्यारे ने वारदात को अंजाम दिया था.
पुलिस घर से बरामद चाकू की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हत्या में इसी चाकू का इस्तेमाल हुआ है अथवा नहीं.
उर्मिला सैनी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के मुताबिक आरोपी ने सब से पहले उर्मिला के सिर पर जोरदार प्रहार किया, जिस से वह स्वयं का बचाव नहीं कर सकी.
इस के बाद उस के शरीर पर निरंतर चाकू से 22 वार किए गए. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उर्मिला का जबड़ा और 4 दांत टूटने की बात भी सामने आई है. गरदन पर गहरे घाव मिले हैं और चेहरे पर भी कई बार चाकू से वार किया गया है. इन तथ्यों से साफ है कि हमला बेहद बेरहमी से किया गया था.
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि अखिलेश ने उर्मिला की हत्या करने से पहले भगाने का प्लान पहले से तय कर रखा था. इंदौर रेलवे स्टेशन और सरवटे बसस्टैंड के आसपास लगे कुछ सीसीटीवी कैमरों में उस की गतिविधियां कैद हुई हैं, लेकिन इस के बाद वह ऐसे रास्ते से निकला, जहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हुए थे.
पुलिस का कहना है कि आरोपी अपने साथ सिर्फ एक डेबिट कार्ड ले कर गया है और अपना मोबाइल फोन घर पर ही छोड़ गया है. पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहा, जिस से पुलिस को उस की गिरफ्तारी में मुश्किलें आ रही थीं. पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की तलाश तेज कर दी थी.
पुलिस की आधा दरजन टीमें अलगअलग स्थानों पर दबिश दे रही थी. सीसीटीवी फुटेज साइबर सेल और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से अखिलेश की तलाश जारी थी.
संयोगितागंज थाने के एसएचओ के.पी. यादव ने बताया कि हर पहलू से मामले की जांच कर रही है. उर्मिला के दोनों बच्चे ओंकारेश्वर में अपनी मम्मी उर्मिला की चिता को मुखाग्नि देने के बाद खंडवा में अपने नानानानी के घर पर हैं.
मृतका उर्मिला सैनी की बेटी की पुलिस से यह मांग है कि उस के पापा का एनकाउंटर न किया जाए, बल्कि उन्हें उसी तरह आखिरी सांस तक तड़पाया जाए, जिस तरह उन्होंने उस की मम्मी को तड़पा कर बेरहमी से मौत के घाट उतारा था.
वहीं उर्मिला की बेटी और परिजनों ने सांसद शंकर लालवनी से मुलाकात कर अखिलेश को अभी तक पुलिस द्वारा गिरफ्तार न किए पर आक्रोश व्यक्त किया था. इस के बाद लालवनी ने पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह से फोन पर चर्चा कर उन से उर्मिला के हत्यारे को जल्द से जल्द धर दबोचे जाने के लिए कहा था.
पत्नी की हत्या करने के ठीक 9 दिन बाद अपने अपराध का प्रायश्चित करने के लिए अखिलेश सैनी ने गंजबासौदा और पवई के बीच रेलवे ट्रैक के पोल नंबर 925 के पास ट्रेन के आगे कूद कर आत्महत्या कर ली.
काश! इस मामले में उर्मिला के पति ने समझदारी से काम लिया होता और अपनी पत्नी के चरित्र को ले कर कीचड़ न उछाली होती तो परिवार उजडऩे से बच जाता.Madhya Pradesh Crime






