Family Crime Story. रीता से तीसरी शादी करने के बाद अमर सिंह एक तरह से हरामखोर हो गया था. उस ने नौकरी तक छोड़ दी. वह शराब का भी आदी हो गया था. इस तरह उस पर दोस्तों का लाखों रुपए का कर्ज हो गया. आर्थिक तंगी को ले कर घर में पत्नी से भी कलह रहने लगी. इस कर्ज को उतारने के लिए उस ने पत्नी रीता को ऐसा जरिया बनाया कि…

शाम के यही कोई 7 बजे का वक्त था. अमर सिंह कुछ ज्यादा ही परेशान था. उस ने एक के बाद एक कई पैग लगाए, फिर भी उस की व्याकुलता बढ़ती ही जा रही थी. उस की पत्नी रीता अपने मायके गई हुई थी. उस ने कई बार अपनी पत्नी को फोन लगाया, लेकिन वह उस की कौल रिसीव ही नहीं कर रही थी. इस बात से कुढ़ कर वह फिर से पैग बनाने लगा. तभी उस की मोबाइल की रिंग बज उठी.

अमर सिंह ने बड़ी ही उत्सुकता के साथ यह सोच कर कौल रिसीव की कि पत्नी की ही होगी, लेकिन दूसरी तरफ से पुष्पेंद्र सोनी की आवाज आई, ”कैसा है मेरा दोस्त?’’

‘इस मनहूस को भी चैन नहीं, टाइम बेटाइम किसी भी समय फोन कर बैठता है,’ अमर सिंह मन ही मन बुदबुदाया, ”अरे मेरा क्या होना है भाई, पत्नी मायके गई हुई है. घर में खानेपीने का कोई इंतजाम नहीं. सोचा कि थोड़ा मूड ही बना लूं.’’

”पुष्पेंद्र भाई, मेरी तो किस्मत ही खराब है. 3-3 शादियां कीं, लेकिन कोई भी पत्नी सुख नहीं दे पाई, शादी करने के चक्कर में बरबाद और हो गया. रीता से उम्मीद की थी कि यह मेरी जीवनसंगिनी बन कर मेरा साथ देगी, लेकिन यह तो आए दिन अपने मायके में ही पड़ी रहती है.’’

”अरे यार इतना खर्च करने के बाद भी बीवी अगर कोई सुख न दे पाए तो ऐसी बीवी का क्या फायदा?’’

शायद पुष्पेंद्र भी शराब पी कर मूड बना कर बैठा हुआ था. वह बोला, ”अब यार, जब गले में यह सांप लटका ही लिया तो उसे झेलना तो पड़ेगा ही.’’ अमर सिंह ने अपना गिलास उठाया और फिर से दारू मुंह में उड़ेल ली.

”अरे यार, क्यों परेशान होता है? तुझे तो वैसे भी पत्नी बदलने की पुरानी आदत है. रीता से पटरी नहीं बैठ रही तो उसे भी रास्ते से हटा दे, कोई और तेरा इंतजार कर रही होगी.’’

”कैसी बात कर रहे हो पुष्पेंद्र भाई, मोहल्ले में मैं पहले से ही बदनाम हूं. अगर रीता के साथ कुछ ज्यादती की तो आगे को मोहल्ले में कोई मेरा साथ भी देने के लिए खड़ा नहीं होगा. वैसे भी रीता से मैं बुरी तरह से परेशान हूं, आए दिन वह कोई न कोई नई डिमांड करती रहती है. मैं तो पहले से ही कंगाल हुआ बैठा हूं. कामधाम कुछ है नहीं, ऊपर से आप जैसे भाइयों का लाखों का कर्जदार हूं.’’

”अमर सिंह, एक तो तेरे में सब से बड़ी बुराई यह है कि तू किसी की बात नहीं मानता. तुझे पहले ही रीता से शादी करने से मना किया था, लेकिन तू किसी की बात मानता ही नहीं.’’

”जो हो चुका है, उसे छोड़, अब मुझे कोई ऐसा रास्ता दिखा, जिस से मैं इस लाखों के कर्ज से मुक्त हो सकूं,’’ अमर सिंह ने पुष्पेंद्र के सामने अपना दुखड़ा रोते हुए कहा.

”तो बेच दे रीता को और चिंता मुक्त हो जा.’’

”अरे यार, कैसी बात करता है, उस चुड़ैल को कौन खरीदेगा और कितने पैसे दे देगा. उस से मेरी कौन सी जिंदगी कट जाएगी. इस के अलावा कोई और रास्ता हो तो बता, जिस से सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे. देख तेरे पास कोई तरीका हो तो बता, वरना जले पर नमक मत छिड़क.’’

”ठीक है, तू ऐसा कर कल हमारे खानेपीने का इंतजाम कर के रखना, कल तेरे घर पर ही बैठ कर कोई रास्ता निकालेंगे, जिस से सब कुछ ठीक हो जाएगा.’’ इतना कह कर पुष्पेंद्र ने कौल डिसकनेक्ट कर दी.

अगले दिन पुष्पेंद्र अपने साथ अपने दोस्त अमित गुप्ता को ले कर अमर सिंह के घर पहुंच गया. उस दिन अमर सिंह ने पहले से ही शराब की एक बोतल ला कर रख रखी थी. दोनों दोस्त उस के घर पहुंचे तो उस ने सामने से गरमगरम पकौडिय़ां मंगा ली थीं. फिर तीनों ने उस दिन जम कर पी.

उस के बाद जब नशा सिर चढ़ कर बोलने लगा तो पुष्पेंद्र  बोला, ”अमर सिंह मेरे दोस्त, बता तू चाहता क्या है?’’

”यार, इस रीता ने तो मेरी जिंदगी नरक बना कर रख दी. आप लोग मुझे कोई ऐसा रास्ता बताओ, जिस से मैं इस से छुटकारा पा सकूं.’’

पुष्पेंद्र सोनी ने उसे सलाह देते हुए कहा, ”यार, एक ऐसा रास्ता तो है, लेकिन उस के लिए पहले कुछ खर्च करना पड़ेगा. मेरा एक दोस्त है. वह बीमा एजेंट है. तू उस से मिल कर रीता का बीमा करा दे. कुछ दिन बाद हम रीता को किसी तरह से एक्सीडेंट दिखा कर मृत घोषित कर उस का क्लेम कंपनी से ले लेंगे. फिर उस के बाद तू राजा जैसी जिंदगी काटना मेरे दोस्त.’’

उस वक्त तीनों दोस्तों पर दारू का नशा हावी हो चुका था. इसी कारण पुष्पेंद्र की यह बात जल्दी ही अमर सिंह के दिल में उतर गई.

”क्या आइडिया दिया है, मेरे दोस्त पुष्पेंद्र तूने, तेरे दिमाग का भी कोई जवाब नहीं. यह तो बहुत ही आसान तरीका है. उस के बाद अमर सिंह भी मालामाल हो जाएगा और हमारे कर्ज से भी इसे मुक्ति मिल जाएगी.’’

”लेकिन यार मेरे पास तो जहर खाने तक के लिए पैसे नही हैं, फिर उस बीमे का प्रीमियम भरने के लिए पैसे कहां से आएंगेï?’’

”यार, तू उस की चिंता मत कर. हम लोग तेरी पत्नी का बड़ी धनराशि का बीमा कराएंगे, उस पर जो भी खर्च आएगा, उसे मैं स्वयं ही भरूंगा, लेकिन क्लेम मिलने के बाद तुझे मुझे 15 लाख रुपए देने होंगे, बाकी तू अपने पास रख लेना.’’

पुष्पेंद्र की बात सुनते ही अमर सिंह के चेहरे पर चमक आ गई.

”पुष्पेंद्र, यार तू तो बहुत ही शातिर दिमाग रखता है, इस के बारेे में तो मैं ने कभी सोचा भी नहीं था. ठीक है भाई, आप लोग जैसा कहोगे, मैं वेसा ही करने को तैयार हूं. लेकिन इस शुभ काम में बिलकुल भी देरी नहीं होनी चाहिए. किंतु ध्यान रखना इस बात की किसी को भी कानोकान खबर नहीं लगनी चाहिए, वरना हम सभी बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं.’’

उस दिन कर्ज से मुक्ति पाने की पूरी योजना बनी और उस की सारी जिम्मेदारी भी पुष्पेंद्र को सौंप दी गई.

फिर अगले दिन से ही रीता के जीवन बीमा कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी.

26 जून, 2026 को रीता के नाम से 44 लाख रुपए की एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस पौलिसी भी करा दी गई, जिस की 2 लाख 6 हजार का सालाना प्रीमियम भी पुष्पेंद्र ने अपने पास से ही जमा किया था.

इस बीमे में अमर सिंह को ही नौमिनी बनाया गया था, ताकि रीता के खत्म होने के बाद कंपनी से मिलने वाली धनराशि उस के बैंक खाते में आसानी से आ सके. रीता के नाम इंश्योरेंस पौलिसी पक्की होते ही तीनों दोस्तों ने हर रोज पार्टी करनी शुरू कर दी थी.

उसी पार्टी के दौरान योजना बनी कि कुछ ही दिनों बाद रीता का एक्सीडेंट कर के इंश्योरेंस कंपनी से मिलने वाली रकम को आपस में बांट लेंगे.

उस के बाद तो अमर सिंह रीता के साथ प्यारदुलार लुटाने लगा था. हालांकि रीता अपना बीमा होने से काफी खुश थी, लेकिन फिर भी रीता अमर सिंह पर अभी भी कम भरोसा करती थी.

उस के बाद तीनों दोस्त हर रोज मिल कर रीता की हत्या को अंजाम देने के लिए रूपरेखा तैयार करने लगे. पुष्पेंद्र के पास अर्टिगा कार थी. उसी कार को रीता का एक्सीडेंट करने के लिए इस्तेमाल करना था.

कहने को अमर सिंह और रीता पतिपत्नी थे, लेकिन वर्षों से दोनों के बीच अनबन चली आ रही थी. फिर भी रीता का बीमा होने के बाद वह अमर सिंह से ज्यादा वैरभाव नहीं रखती थी.

20 जुलाई, 2026 को शाम के वक्त अचानक अमर सिंह ने सिर में दर्द होने का बहाना बनाते हुए रीता से उसे दवा दिलाने के लिए कहा. पति की तबियत खराब होने वाली बात सुनते ही वह उस के साथ दवा दिलाने के लिए तैयार हो गई.

29 जुलाई, 2026 की शाम को दोनों एक साथ घर से निकले. अमर सिंह तो देर रात अपने घर पहुंच गया, लेकिन रीता उस के साथ नहीं आई थी.

गांव के लोगों ने उस से रीता के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि वह रात उसे दवा दिलाने उस के साथ ही घर से गई थी, लेकिन वह शौच करने के बहाने रात का फायदा उठा कर फरार हो गई.

अगले दिन 30 जुलाई, 2026 को सुबह ही अमर सिंह सुमेरपुर थाने पहुंचा. अमर सिंह ने थाने पहुंचते ही पुलिस को बताया कि कल रात से उस की पत्नी रीता अचानक गायब हो गई. उस ने उसे हर जगह पर तलाश किया, लेकिन उस का कहीं भी अतापता न चल सका.

उसी दौरान ललपुरा थाना से सुमेरपुर थाने को सूचना मिली कि कल रात राठ-हमीरपुर मार्ग पर पौधिया गांव के पास सड़क किनारे एक महिला का शव प्राप्त हुआ है, जिस को ललपुरा थाना पुलिस ने अपनी काररवाई करते हुए मोर्चरी में रखवा दिया था.

इस जानकारी के मिलते ही सुमेरपुर थाने के एसएचओ पवन पटेल ने अमर सिंह को एक डैडबौडी मिलने वाली बात कहते हुए अमर सिंह को शिनाख्त करने के लिए ललपुरा थाना भेज दिया.

अमर सिंह ललपुरा थाने पहुंचते ही एसएचओ राकेश कुमार सरोज से मिला और अपनी पत्नी के गायब होने वाली बात बताई. शव को देखते ही अमर सिंह ने उस की पहचान अपनी पत्नी रीता के रूप में कर दी. रीता के खत्म होने की जानकारी मिलते ही अमर सिंह ने यह सूचना अपनी ससुराल वालों को भी दे दी.

अपनी बेटी की मौत की सूचना पाते ही रीता के पापा सर्वेश कुमार गुप्ता अपने फेमिली वालों के साथ मोर्चरी जा पहुंचे.

उन्होंने ललपुरा थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उन की बेटी का एक्सीडेंट नहीं हुआ, बल्कि उस को किसी साजिश के तहत मारा गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि अमर सिंह ने ही अपने साथियों के साथ मिल कर उन की बेटी की हत्या की और फिर उसे दुर्घटना का रूप देने के लिए उसे सड़क पर फेंक दिया.

सर्वेश कुमार ने पुलिस को बताया कि इस से पहले भी अमर सिंह 2 शादियां कर चुका है, लेकिन दोनों ही पत्नियों की संदिग्ध रूप से मौत हो गई थी.

इस सब जानकारी के मिलते ही पुलिस ने घटनास्थल पर जा कर पुन: निरीक्षण किया. घटना की जानकारी मिलते ही एडीशनल एसपी अरविंद कुमार भी घटनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने घटनास्थल पर पहुंचते ही पूरी जानकारी ली और शीघ्र ही पुलिस को इस केस का खुलासा करने के निर्देष दिए.

फील्ड यूनिट और डौग स्क्वायड की सहायता से आवश्यक साक्ष्य इकट्ठे किए. उस के बाद पुलिस ने मृतका के शव का पोस्टमार्टम कराया. 2 डौक्टरों के पैनल ने करीब एक घंटे तक पोस्टमार्टम किया.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के शरीर पर 12 से अधिक चोटों के निशान पाए गए, जबकि किडनी को छोड़ कर उस के शरीर के अधिकांश अंग गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त पाए गए. जिसे देख कर पुलिस ने अनुमान लगाया कि एक साधारण एक्सीडेंट में किसी भी इंसान के शरीर की इतनी बुरी हालत नहीं हो पाती.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ जाने के बाद पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले, जिस में उस रात घटनास्थल की ओर एक अर्टिगा कार जाती दिखाई दी. उस के बाद पुलिस ने अमर सिंह के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगा दिया.

पुलिस ने अमर सिंह के मोबाइल फोन की कौल डिटेल्स निकलवाई तो उस शाम उस के मोबाइल पर पुष्पेंद्र, अमित गुप्ता व अन्य लोगों की कौल भी पाई गईं.

पुलिस ने जब उस अर्टिगा कार की डिटेल्स निकाली तो वह कार पुष्पेंद्र सोनी के फादर के नाम पर पाई गई. जिस की जानकारी करने पर पता चला कि वह कार स्वयं पुष्पेंद्र ही चलाता है और उस की अमर सिंह से अच्छी दोस्ती भी है.

यह सब जानकारी जुटाने के बाद पुलिस ने अमर सिंह, उस के साथी पुष्पेंद्र सोनी और उस के अन्य 2 साथियों को पौथिया कुंडौरा मार्ग स्थित साईंदाता आश्रम के पास से धर दबोचा. पुलिस ने मौके पर आरोपियों के पास से एक अर्टिगा कार और एक एयरटेल का सिम भी बरामद किया.

इन चारों को अपनी हिरासत में लेते ही पुलिस ने इन से सख्ती से पूछताछ की तो आरोपियों ने सब कुछ साफसाफ उगल दिया. अमर सिंह और उस के साथियों ने पुलिस को बताया कि ये सभी लोग पुष्पेंद्र के भारी कर्ज में डूबे हुऐ थे, जिस को चुकाना मुश्किल हो रहा था.

अमर सिंह अपनी बीवी से पहले ही परेशान था. अमर सिंह और उस के साथियों ने कर्ज मुक्ति पाने के लिए रीता को मोहरा बनाया और उस का 44 लाख का जीवन बीमा करा कर उस की हत्या कर डाली. उस के बाद उस की हत्या को एक्सीडेंट दिखाने के लिए सड़क पर कई बार कुचला. रीता को मौत की नींद सुलाने के बाद चारों लोग मौके से फरार हो गए थे.

इस केस के खुलते ही पुलिस ने मृतका रीता के फादर सर्वेश कुमार गुप्ता की लिखित तहरीर के आधार पर ललपुरा थाने में बीएनएस की धारा 103(1) के तहत अमर सिंह, अमित गुप्ता, पुष्पेंद्र सोनी और अभय सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली.

पुलिस पूछताछ व मृतका के परिजनों के आधार पर मिली जानकारी के बाद अमर सिंह और उस की पत्नी रीता के साथ उलझे रिश्तों की जो कहानी सामने उभर कर आई, वह इस प्रकार थी—

उत्तर प्रदेश के जिला हमीरपुर के जनपद मौदहा के अंतर्गत पड़ता है एक गांव बमरौली. अमर सिंह इसी गांव का रहने वाला था. अमर सिंह अपने बाप का दुलारा था, लेकिन उस में एक सब से बड़ा ऐब था कि वह हमेशा ही कामधंधे से मन चुराता था. यही कारण रहा कि वह बेरोजगार बन कर रह गया था. फिर भी उस के पापा रामगोपाल ने जैसेतैसे कर उस की शादी अपनी रिश्तेदारों की सहायता से कमलेश (काल्पनिक नाम) के साथ करा दी थी.

शादी के बाद भी उस ने अपनी जिम्मेदारी नहीं समझी और पूरी तरह से कामचोर बना रहा. घर में खाने के लाले पडऩे लगे तो पतिपत्नी में खर्च को ले कर मनमुटाव रहने लगा. काफी समय बाद तक अमर सिंह की पत्नी मां नहीं बन सकी, लेकिन उसी दौरान संदिग्ध रूप से उस की पत्नी की मौत हो गई.

पत्नी की मौत के बाद वह इधरउधर आवारा इधरउधर घूमने लगा. उसी दौरान उस की जानपहचान पुष्पेंद्र सोनी से हुई. पुष्पेंद्र सोनी की अपनी एक ज्वैलरी की दुकान थी. दोनों के बीच जानपहचान हुई तो पुष्पेंद्र सोनी ने उसे अपने पास काम पर रख लिया, लेकिन इतने पैसों में अमर सिंह का खर्च नहीं चल पा रहा था.

फिर वह अपना गांव छोड़ कर सुमेरपुर में एक किराए का कमरा ले कर रहने लगा. वहीं पर पुष्पेंद्र ने उस की परेशानी को देख कर उस की शादी अपने एक परिचित की बेटी से करा दी.

फिर वह उसे साथ ले कर उसी किराए के मकान में रहने लगा. शादी के बाद अमर सिंह के खर्च भी बढ़ गए थे. ऊपर से उस का अपना भी खर्च था, जिस से महीने की पगार में उस का अपना खर्च भी नहीं चल पाता था. उस की पत्नी जब कभी भी उस से खर्च के लिए पैसे मांगती तो वह उल्टे उस से ही गालीगलौज करने लगता था.

जिस कारण उस की पत्नी उस से बुरी तरह से चिढऩे लगी थी. शादी के बाद उस के अरमान दब कर रह गए तो उस ने कई बार पुष्पेंद्र से अपने मन की बात कही.

पुष्पेंद्र सोनी अमर सिंह को ठीक से जान चुका था तो उस ने घर की जरूरतों के लिए धीरेधीरे कर पुष्पेंद्र से काफी पैसा उधार ले लिया था. इस के बावजूद पत्नी की नईनई फरमाइशें बढऩे लगीं. उन के पूरा न होने पर उस की पत्नी उस से परेशान सी रहने लगी थी.

एक दिन ऐसा भी आया कि अमर सिंह की दूसरी पत्नी भी अचानक घर से लापता हो गई. अमर सिंह ने पुष्पेंद्र की सहायता से उसे हरसंभव स्थान पर ढूंढा, लेकिन उस का कहीं भी पता नहीं चला.

दूसरी पत्नी के गायब हो जाने के बाद अमर सिंह फिर से अकेला पड़ गया. फिर वह इधरउधर आवारों की तरह से भटकने लगा. उस वक्त भी वह जितना कमाता था, उसे शराब में उड़ा देता था.

अब से लगभग ढाई साल पहले उस की मुलाकात रीता से हुई. रीता भी पहले से ही शादीशुदा थी. उस की शादी वर्ष 2002 में मैनपुरी निवासी राजीव के साथ हुई थी, लेकिन कुछ ही समय बाद उस के पति राजीव गुप्ता की किसी बीमारी के चलते मौत हो गई.

पति की मौत के बाद रीता पर 4 बच्चों के परवरिश की जिम्मेदारी आ गई थी. अब रीता के सामने अपने बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी आ पड़ी थी, जिस को निभाना उस की मजबूरी बन गई थी.

वह नौकरी करने के लिए कानपुर चली गई. फिर वह बच्चों को अपने पापा सर्वेश के पास छोड़ कर कानपुर में नौकरी करने लगी.

उसी दौरान उस की मुलाकात अमर सिंह से हुई. पहली मुलाकात के दौरान दोनों ने एकदूसरे के मोबाइल नंबर ले लिए थे. उन के बीच फोन पर बात करने का सिलसिला शुरू हो गया जो प्यार में बदल गया. बात शादी तक जा पहुंची.

रीता देखनेभालने में सुंदर थी. अमर सिंह ने उस से अपनी हकीकत छिपाते हुए बताया कि उस ने अभी तक शादी ही नहीं की. इस बात को सुन कर रीता ने अमर सिंह के साथ शादी करने का पक्का मन बना लिया.

यह बात उस ने अपनी फेमिली वालों से पूरी तरह से छिपा रखी थी, क्योंकि उसे पता था कि उस के पापा किसी भी सूरत में अमर सिंह के साथ उस की शादी करने के लिए तैयार नहीं होंगे.

इसी झंझट से बचने के लिए उस ने एक दिन अपने फेमिली वालों को बिना बताए ही कानपुर के एक मंदिर में अमर सिंह के साथ सात फेरे ले लिए.

रीता के साथ शादी करने के बाद अमर सिंह उसे ले कर सुमेरपुर किराए के मकान में रहने लगा. शादी करने के तुरंत बाद उस ने पहली वाली नौकरी छोड़ दी, फिर वह एक आटा चक्की पर काम करने लगा, जहां पर उसे पहले से ज्यादा सैलरी मिलने लगी.

शादी के कुछ दिन बाद ही अमर सिंह का  रीता के प्रति व्यवहार बदल गया. उसे रीता का घर पर खाली रहना खलने लगा. वह चाहता था कि जैसे वह पहले कानपुर में नौकरी करती थी, उसी तरह से वह उस के साथ रहते हुए भी करे.

चाहती तो रीता भी यही थी, लेकिन नई जगह पर जा कर उसे नौकरी नहीं मिल पा रही थी. ऊपर से अमर सिंह भी कभी भी काम छोड़ कर घर बैठ जाता था. अमर सिंह के साथ शादी करने के बाद रीता को उस की हकीकत पता चली तो उसे बहुत दुख हुआ.

उस के बाद उसे फिर से अपने मायके वाले याद आने लगे थे, लेकिन उस के पापा सर्वेश ने पहले ही उसे चेतावनी दे डाली थी कि अगर तूने अमर सिंह के साथ शादी की तो कभी भी हमें अपना मुंह दिखाने मत आना. इसी कारण वह अपने घर वापस जाने की हिम्मत भी नहीं कर पा रही थी.

रीता को दुख इस बात का था कि जिस के सहारे वह अपने मायके वालों को छोड़ कर चली आई थी, वह पक्का शराबी था. वह जो भी कमाता, उसे शराब और आवारागर्दी में उड़ा देता था.

शादी के 2 साल उस ने अमर सिंह के साथ जैसेतैसे कर के काटे. मेहनतमजदूरी कर के वह जो कमा कर लाती, शाम को अमर सिंह उस से दारू पीने के लिए पैसे मांगने लगा. पैसे न देने पर वह उस के साथ मारपीट पर उतर आता था.

रीता जब अमर सिंह की हरकतों से बुरी तरह से परेशान हो गई तो उस ने फिर से नौकरी तलाशनी शुरू की. वह पति के घर से निकलते ही नौकरी की तलाश में निकल जाती थी, लेकिन उसे कहीं भी काम नहीं मिल रहा था.

तभी किसी ने अमर सिंह के रीता के प्रति कान भर दिए. बताया कि रीता उस की अनुपस्थिति में घर से निकल जाती है, जिस से लगता है कि उस का चालचलन ठीक नहीं है.

इस के बाद अमर सिंह और रीता के बीच आए दिन विवाद रहने लगा था. उस वक्त तक अमर सिंह पुष्पेंद्र से काफी पैसा ले कर खा चुका था. पुष्पेंद्र जब कभी भी उस से अपने पैसे वापस करने की बात करता तो वह उस के सामने अपनी पत्नी का ही रोना रोने लगता था.

अमर सिंह की बात सुन कर पुष्पेंद्र समझ चुका था कि अमर सिंह और रीता के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा. पुष्पेंद्र सोनी पहले से ही शातिरदिमाग का था.

यही कारण रहा कि जिस दिन अमर सिंह की उस से बात हुई थी, उस ने उसी दिन सोच लिया था कि वह शराब पीने का आदी है और वह पैसे के लिए अपनी बीवी को मौत के मुंह में भी ढकेल सकता है.

उस ने उसे पैसों का लालच देते हुए उस की बीवी का जीवन बीमा करा कर नया गेम खेलने की बात कही तो वह बात जल्दी ही उस के मनोमष्तिष्क पर छा गई.

इस मामले को अमलीजामा पहनाने के लिए पुष्पेंद्र ने अपने साथ अभय सिंह और अमित गुप्ता को भी शामिल कर लिया था. अमित गुप्ता हालांकि रीता का चचेरा भाई था, लेकिन पैसों के लालच में वह भी अपनी बहन को मौत के घाट उतारने के लिए तैयार हो गया था.

पूर्व नियोजित योजना के अनुसार 29 जुलाई, 2026 को अमर सिंह ने अपने सिर में दर्द होने का बहाना कर के दवा दिलाने के बहाने अपने साथ लिया. उस वक्त रात के कोई 10 बजे का समय था.

अमर सिंह ने घर से निकलते ही अपने सभी साथियों को अलर्ट कर दिया कि वह रीता को साथ ले कर घर से निकल चुका है. इस मामले में बिलकुल भी चूक नहीं होनी चाहिए.

अमर सिंह की बात सुनते ही तीनों दोस्त पुष्पेंद्र की अर्टिगा कार से निर्धारित स्थान पर उन के वहां पर पहुंचने से पहले ही पहुंच गए थे.

निर्धारित स्थान पर पहुंचते ही अमर सिंह ने शौच के बहाने रीता को सड़क के किनारे पर छोड़ दिया, फिर मौका पाते ही पुष्पेंद्र ने अपनी अर्टिगा कार से रीता को टक्कर मार दी. कार की टक्कर लगते ही रीता बेहोश हो गई.

उस के बाद चारों ने उसे वहां से उठा कर सड़क पर ला कर डाल दिया. फिर पुष्पेंद्र ने अपनी कार को आगेपीछे करते हुए उस को बुरी तरह से रौंद दिया.

रीता को खत्म करने के बाद चारों आरोपी अपनेअपने मोबाइल फोन बंद कर के वहां से फरार हो गए.

29 जुलाई, 2026 देर रात ही अपने खेतों की रखवाली कर घर लौट रहे एक किसान की नजर सड़क किनारे मृत पड़ी रीता पर नजर पड़ी. उस ने तुरंत 112 नंबर डायल कर पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी. सूचना पाते ही ललपुरा पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और रात अधिक हो जाने के कारण उस लाश को मोर्चरी में भेज दिया.

मृत महिला की जेब से एक बैंक खाते की परची मिली थी, जिस के आधार पर ही रीता की पहचान हो सकी थी.

अमर सिंह इतना चालाक था कि उसे पता था कि रीता की लाश अभी भी सड़क पर ही पड़ी हुई होगी, यही सोच कर वह प्रात: ही सुमेरपुर थाने पहुंचा और अपनी पत्नी के अचानक गायब होने की सूचना पुलिस को दे दी. जबकि पुलिस ने अज्ञात महिला की लाश मिलने की सूचना पहले ही आसपास के थानों में प्रसारित कर चुकी थी.

इस मामले में पुलिस ने अभियुक्तों के पास से घटना में प्रयुक्त एक अर्टिगा कार नंबर यूपी78 जेए 8448 व एक एयरटेल का एक सिम बरामद किया था.

इस केस को खोलने में एसएचओ राकेश कुमार सरोज, एसआई सिद्धनाथ राय, हैडकांस्टेबल विपिन मिश्रा, कांस्टेबल अनुराग सिंह, शुभम दुबे, सूरज यादव, मान सिंह, महिला कांस्टेबल निधि व एसओजी के एसआई कृष्णदेव त्रिपाठी, सचिन शर्मा, हैडकांस्टबल शिवेंद्र सिंह, कांस्टेबल अतुल कुमार, सुरेंद्र मिश्रा और कृष्ण कुमार की भूमिका रही.

कथा लिखे जाने तक सभी आरोपी जेल की सलाखों के पीछे जा चुके थे, लेकिन कर्ज मुक्ति का इन सब आरोपियों ने जो रास्ता चुना था, वही उन के लिए जिंदगी की सब से बड़ी मुसीबत भरा पल बन गया.Family Crime Story

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