Meerut Murder Case. ऊंची हसरतों वाली आजाद खयाल नेहा का पति से अलगाव हुआ तो वह आधुनिकता की चकाचौंध में जिंदगी को अपने अंदाज में जीने लगी. इसी बीच वह आपराधिक प्रवृत्ति के वसीम के प्रेम जाल में फंस गई. जब वसीम की तरह उस की जिंदगी में करीम आया तो यह बात वसीम को बरदाश्त न हुई और उस ने…
रात के 12 बजे मेरठ के पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि जिमखाना मैदान के पास किसी ने एक युवती को गोली मार दी है.
वह इलाका कोतवाली क्षेत्र में आता था. कंट्रोल रूम ने यह सूचना थाना कोतवाली पुलिस को दे दी. सूचना पा कर थानाप्रभारी सुभाषचंद राणा सीनियर सबइंसपेक्टर प्रभाकर केंतुरा और कुछ सिपाहियों के साथ मौके पर पहुंच गए.
सूचना सही थी. 26-27 वर्षीय एक खूबसूरत युवती सुनसान सड़क के किनारे खून से लहूलुहान पड़ी थी. उस के सीने में बाईं तरफ गोली मारी गई थी. उस के बाल बिखरे हुए थे और कान में ईयरफोन की लीड लगी हुई थी. युवती ने नीले रंग की जींस और छींटदार गुलाबी टौप पहन रखा था. मौके पर काफी खून भी बिखरा हुआ था. पहनावे और शक्लसूरत से वह किसी संपन्न घर की लग रही थी. क्या पता किसी तरह युवती की जान बच जाए, यह सोच कर पुलिस उसे जीप में डाल कर जिला अस्पताल ले गई. लेकिन डाक्टरों ने उसे देख कर मृत घोषित कर दिया.
पुलिस ने युवती की लाश का मुआयना किया तो उस की बाईं कलाई पर ब्लेड जैसी किसी चीज से काटने के 20 से ज्यादा निशान मिले. लेकिन ये सभी निशान पुराने थे. आशंका थी कि उस ने कुछ दिन पहले आत्महत्या का प्रयास किया होगा. युवती के पास मोबाइल की ईयरफोन लीड तो थी, लेकिन उस का मोबाइल गायब था.
इस का मतलब कातिल उस का मोबाइल अपने साथ ले गए थे. पुलिस ने उस की जेबों की तलाशी ली, तो 4 सौ रुपए के अलावा कुछ नहीं मिला. डाक्टरों ने लाश देख कर बताया कि गोली मृतका के सीने से हथियार सटा कर मारी गई थी, जो उस के दिल को बेधते हुए पार निकल गई थी. इस के अलावा उस के शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं था.
इस मामले की सूचना पा कर एसएसपी ओंकार सिंह, एसपी सिटी ओमप्रकाश व सीओ रूपेश कुमार भी मौके पर जा पहुंचे थे. उन्होंने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया, लेकिन वहां कोई ऐसा सुबूत नहीं मिला जो हत्या के रहस्य से परदा हटाने में सहायक होता.
हत्यारे ने बेखौफ हो कर जिस तरह युवती को गोली मारी थी, उस से यह बात साफ थी कि यह मामला लूट का नहीं था. वैसे भी युवती की नाक की लौंग, कान की बालियां और हाथ की अंगूठी सलामत थीं. इस से यही लग रहा था कि कातिल मृतका का कोई जानकार रहा होगा और वह अपनी मरजी से उस के साथ किसी वाहन में वहां तक आई होगी.
दूसरे कातिल यह भी जानता होगा कि रात में वह रास्ता सुनसान रहता है. जिस तरह युवती को गोली मारी गई थी उस से लगता था कि कातिल उसे किसी भी हाल में जिंदा नहीं छोड़ना चाहता था. इसीलिए उस ने उस के दिल को निशाना बनाया था.
हत्या पूर्व नियोजित थी और कातिल ने मौके पर कोई सुबूत नहीं छोड़ा था. पुलिस ने अनुमान लगाया कि हत्या की वजह प्रेमप्रसंग या फिर कोई रंजिश रही होगी. बहरहाल, सही नतीजे पर पहुंचने के लिए सब से पहले युवती की शिनाख्त जरूरी थी.
पुलिस ने लाश के फोटो करा लिए और शिनाख्त के लिए उसे पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिया. इस के साथ ही सबइंसपेक्टर जितेंद्र कुमार की तरफ से अज्ञात हत्यारों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया. यह 17 अप्रैल, 2014 की बात है.
जिस जगह मृतका की लाश मिली थी, वह पूरी तरह आबादी वाली जगह नहीं थी. अगले दिन पुलिस ने घटनास्थल से कुछ दूरी पर रहने वाले लोगों से पूछताछ की, लेकिन किसी ने भी गोली चलने या चीखपुकार की आवाज नहीं सुनी थी. युवती की पहचान भी नहीं हो सकी. पुलिस ने मृतका के फोटो सहित इश्तिहार छपवा कर जिले के सभी थानों को भिजवा दिए. आसपास के जिलों के थानों से भी गुमशुदा युवतियों की सूची मंगाई गई, लेकिन इस का कोई फायदा नहीं हुआ.
अज्ञात युवती की इस तरह हुई हत्या पुलिस के लिए चुनौती बन गई थी. क्योंकि न तो उस की पहचान हो पा रही थी और न कोई चश्मदीद या सुबूत मिल पा रहा था. घटना को 2 दिन बीत गए. इस बीच दिल्ली व बुलंदशहर से 2 परिवार मृतका को देखने आए भी, लेकिन वह उन की सगीसंबंधी नहीं निकली.
चौंकाने वाली बात यह थी कि समाचार पत्रों में फोटो छपने के बावजूद भी मृतका की शिनाख्त नहीं हो पा रही थी. इस से यह बात साफ हो गई थी कि वह मेरठ की नहीं, बल्कि कहीं बाहर की रहने वाली थी. तीसरे दिन यानी 20 अप्रैल की शाम को मधु वर्मा नाम की एक महिला कुछ लोगों के साथ कोतवाली पहुंची. उस के साथ उस का दामाद विपिन वर्मा भी था. मधु वर्मा ने बताया कि उस की बेटी नेहा 3 दिन से लापता है. वह अखबार में खबर पढ़ने के बाद गाजियाबाद से यहां आई थी.
अज्ञात युवती की लाश की पहचान पुलिस के लिए सिरदर्द बनी हुई थी. थानाप्रभारी ने युवती के फोटो मधु वर्मा और विपिन को दिखाए, तो मधु बिलखबिलख कर रोने लगी. उस ने बताया कि मृतका उस की बेटी नेहा वर्मा ही थी. तब तक मृतका का पोस्टमार्टम हो चुका था, लेकिन अंतिम संस्कार नहीं किया गया था.
शिनाख्त में कोई चूक न हो इसलिए पुलिस ने मधु वर्मा और विपिन को पोस्टमार्टम हाउस ले जा कर मृतका के शव की ठीक से पहचान कराई. उन दोनों ने पुष्टि कर दी कि मृतका मधु ही थी. प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि 27 वर्षीय नेहा अपनी मां के साथ गाजियाबाद के भूड़भरत, विजयनगर इलाके में रहती थी. अपने पति विपिन से उस का तलाक का मुकदमा चल रहा था.
पता चला कि नेहा और विपिन के बीच 2 साल से किसी भी तरह की बातचीत या संबंध नहीं थे. नेहा के 2 और 4 साल के 2 बच्चे थे. दोनों बच्चे पति के पास ही रहते थे. शिनाख्त तो हो गई पर पुलिस के सामने सब से बड़ा सवाल यह था, कि मधु मेरठ कैसे और क्यों पहुंची?
सीओ रूपेश सिंह ने तह में जाने की कोशिश की, तो मधु ने बताया कि नेहा 17 अप्रैल को कुछ देर में लौट आने की बात कह कर सुबह करीब साढ़े 10 बजे घर से निकली थी. इस के बाद उस का कोई पता नहीं चला. शाम को उसे फोन किया गया तो उस का मोबाइल स्विच्ड औफ था.
‘‘तीन दिन तक पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी?’’ रूपेश सिंह के पूछने पर मधु वर्मा बोली, ‘‘नेहा जिद्दी स्वभाव की थी, इसलिए मैं उस के मामले में ज्यादा दखल नहीं देती थी. वैसे भी ऐसा पहली बार नहीं हुआ था. वह अपनी मरजी में एकदो दिनों के लिए कहीं भी चली जाती थी.’’
पहली नजर में पुलिस का शक नेहा के पति विपिन पर गया क्योंकि दोनों के बीच तलाक का मुकदमा चल रहा था. हो न हो नेहा को रास्ते से हटाने के लिए यह काम विपिन ने ही किया हो. उस की लाश गाजियाबाद से दूर मेरठ में मिलना भी शक पैदा कर रहा था.
इसी के मद्देनजर पुलिस ने विपिन से भी पूछताछ की, तो उस ने बताया कि 2 साल से नेहा से उस के संबंध ही नहीं थे. वह कहां आतीजाती थी, इस से भी उसे कोई मतलब नहीं था. आजाद खयालों वाली नेहा की इसी आदत ने दोनों के रास्ते अलग कर दिए थे. यहां तक कि वह अपने बच्चों से भी कभी नहीं मिलती थी. इस जानकारी के बाद पुलिस के लिए पेचीदगियां और भी बढ़ गईं.
अगर विपिन ने यह काम नहीं किया था तो फिर वह कौन था जिस के साथ नेहा उस सुनसान जगह तक पहुंची थी. बहरहाल, पुलिस ने विपिन और नेहा का मोबाइल नंबर ले लिया क्योंकि दोनों की काल डिटेल्स से जांच की कोई दिशा मिल सकती थी. नेहा का शव उस की मां और पति के हवाले कर दिया गया. वे शव ले कर चले गए.
मधु वर्मा हालांकि काफी कुछ बता चुकी थी. फिर भी उस से और गहराई से पूछताछ करने के लिए अगले दिन एक पुलिस टीम गाजियाबाद भेज दी गई. इस बीच थाना पुलिस को सेलुलर कंपनी से विपिन व नेहा की काल डिटेल्स मिल गईं. काल डिटेल्स की जांच में विपिन की भूमिका पाक साफ नजर आ रही थी.
नेहा के नंबर की काल डिटेल्स की जांच हुई, तो पता चला कि वह अपने मोबाइल में अदलबदल कर 3 सिमकार्ड इस्तेमाल कर रही थी. उस के नंबरों में एक नंबर ऐसा मिला जिस पर उस की अकसर बातचीत होती थी. लापता होने वाले दिन भी उस नंबर पर उस की बातचीत हुई थी. उस नंबर से काल आने के बाद ही वह घर से निकली थी.
जांच को दिशा मिलनी शुरू हुई तो पुलिस ने उस संदिग्ध नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई. पता चला वह नंबर मेरठ के ही कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला पुरवा अब्दुल निवासी नूर इलाही के बेटे वसीम इलाही का था. गोपनीय रूप से जांच कराई गई, तो पता चला कि वसीम इलाही आवारा किस्म का युवक है और घर से लापता है.
वसीम अटैची चोर गिरोह का सरगना था. उस के गिरोह में 6 से ज्यादा युवक थे, जो लूटपाट भी करते थे. इसी बीच गाजियाबाद गई टीम ने लौट कर बताया कि नेहा वसीम को जानती थी. पुलिस को यह बात मधु वर्मा ने ही बताई थी.
पुलिस ने वसीम के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स की पड़ताल की तो पुलिस को एक ऐसा नंबर मिल गया जिस से घटना वाली शाम उस की बातचीत हुई थी. दोनों नंबरों की लोकेशन भी घटनास्थल के आसपास पाई गई. थाना प्रभारी के निर्देशन में एसएसआई प्रभाकर केंतुरा, एसआई जितेंद्र कुमार, कांस्टेबल सोनू, विवेक चौहान और ओमबीर सिंह संयुक्त रूप से इस मामले की जांच में लगे थे.
पुलिस ने उसी संदिग्ध नंबर को आधार बना कर 22 अप्रैल को खैरनगर निवासी लेडीज टेलर आसिफ उर्फ बुरसी पुत्र अमीरुद्दीन को हिरासत में ले लिया.
पुलिस ने आसिफ से पूछताछ की, तो उस ने पुलिस को बरगलाने का प्रयास किया. लेकिन जब उस से सख्ती से पूछताछ हुई, तो उस ने इस मामले का राजफाश कर दिया. उस ने बताया कि नेहा की हत्या वसीम ने उस के एक अन्य दोस्त के साथ मिल कर की थी. वसीम नेहा का प्रेमी था.
पुलिस ने आसिफ का मोबाइल चेक किया, तो उस के मोबाइल में पिकनिक स्पाट के कई ग्रुप फोटो मिले. उन फोटो में नेहा भी थी. दरअसल वसीम के आवारा दोस्तों की पूरी मंडली थी, जो लड़कियों से दोस्ती कर के मौजमस्ती करती थी.
प्रेमी होते हुए भी वसीम ने नेहा को क्यों मारा, इस का सही जवाब आसिफ भी नहीं दे पाया. आसिफ से पूछताछ करने के बाद पुलिस टीम वसीम की तलाश में जुट गई. पुलिस ने उस के घर दबिश दी, लेकिन वह घर से फरार था. उस के घर से पुलिस ने एक दरजन से ज्यादा खाली अटैचियां और लैपटौप के कई बैग बरामद किए. यह सब चोरी का सामान था. अगले दिन पुलिस ने आसिफ को अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया.
24 अप्रैल को वसीम आखिर उस वक्त पुलिस के शिकंजे में आ गया जब वह भागने की तैयारी कर रहा था. पूछताछ में उस ने अपने जुर्म का इकबाल कर लिया. पुलिस ने उस से विस्तृत पूछताछ की, तो बेलगाम हसरतों वाली आजाद खयाल लड़की और एक दिलजले प्रेमी की चौंकाने वाली प्रेम कहानी सामने आई.
खूबसूरत नेहा अपने मातापिता की इकलौती संतान थी. उस की मां मधु वर्मा का जीवन कठिनाइयों भरा रहा था. करीब 22 साल पहले उस का अपने पति बलराज वर्मा से तलाक हो गया था. तलाक के बाद वह बेटी को ले कर पति से अलग हो गई. एक स्कूल में अध्यापिका की नौकरी कर के मधु वर्मा ने किसी तरह बेटी की परवरिश की, उसे पढ़ायालिखाया.
नेहा जिद्दी स्वभाव की थी. पिता का साया सिर पर नहीं था, मां के लाड़प्यार ने उस की जिद को और ज्यादा बढ़ावा दिया. नेहा मधु की न केवल इकलौती संतान थी बल्कि जीवन का सहारा भी थी. वह नहीं चाहती थी कि बेटी को किसी भी तरह की परेशानी हो.
सन 2007 में एक दिन नेहा की मुलाकात विपिन वर्मा से हुई. विपिन की सोनेचांदी के गहनों की दुकान थी और वह गाजियाबाद के नंदग्राम इलाके का रहने वाला था. विपिन 3 भाइयों में सब से छोटा था. सुंदर भी और आर्थिक रूप से संपन्न भी. नेहा पहली ही नजर में आंखों के रास्ते विपिन के दिल में उतर गई. उन दिनों वह बीकौम की पढ़ाई कर रही थी.
नेहा को भी विपिन पसंद आया. फलस्वरूप जल्दी ही दोनों के बीच दोस्ती हो गई. यह दोस्ती कब प्यार में बदल गई, दोनों को पता ही नहीं चला. अकसर दोनों की मुलाकातें बाहर होने लगीं.
नेहा को घूमनाफिरना और मनमरजी से कहीं भी आनाजाना पसंद था. कुछ ही महीनों में उसे लगने लगा कि विपिन से प्यार कर के उस ने कोई गलती नहीं की है. दोनों को ही एकदूसरे में भविष्य की खुशियां नजर आने लगीं, तो उन्होंने साथ जीनेमरने की कसमें खा लीं. फिर जल्दी ही दोनों ने अपनी दुनिया बसाने का फैसला कर लिया.
नेहा ने इस मुद्दे पर अपनी मां से बात की. मधु तो पहले ही चाहती थी कि जवान हो चुकी बेटी का घर बस जाए. यह काम खुद नेहा की मरजी से हो रहा था यह और भी अच्छी बात थी. विपिन को देखने के बाद मधु ने अपनी रजामंदी दे दी. उधर विपिन ने भी अपने घरवालों को शादी के लिए तैयार कर लिया. फलस्वरूप सन 2008 में खुशी के माहौल के बीच दोनों का विवाह हो गया.
शादी के बाद नेहा और विपिन का वैवाहिक जीवन खुशीखुशी गुजरने लगा. शादी के एक साल बाद नेहा एक बेटी की मां बन गई. पतिपत्नी ने बेटी का नाम रखा खुशी. धीरेधीरे एक साल और बीत गया. पहले कुछ भी रहा हो, लेकिन शादी के बाद हर आदमी चाहता है कि उस की पत्नी न सिर्फ मर्यादा में रहे बल्कि उस का कहा भी माने.
विपिन भी यही चाहता था जबकि आजाद खयाल नेहा को विवाह और बच्चे के बाद जिंदगी बंधन सी लगने लगी थी. वह घर की मर्यादाओं से बाहर निकलना चाहती थी. इस के लिए उस ने कोचिंग कर के कंप्यूटर सीखने की इच्छा जाहिर की तो विपिन ने इनकार नहीं किया. इस के बाद नेहा अपना ज्यादातर वक्त बाहर व मोबाइल पर बिताने लगी. मायके में वह अपनी मरजी से जिंदगी जीती आई थी और ससुराल में भी यही चाहती थी.
नेहा का आजादपंछी की तरह घूमनाफिरना विपिन को पसंद नहीं आया. जबकि नेहा को न टोकाटाकी पसंद थी और न जवाबदेही. इस बात को ले कर दोनों के बीच विवाद रहने लगा. इसी दौरान विपिन को पता चला कि नेहा की दोस्ती एक युवक से हो गई है. यह बात पतिपत्नी के बीच आए दिन तकरार का मुद्दा बनने लगी. इस बीच नेहा दोबारा गर्भवती हो चुकी थी. दांपत्य में आई दरार कभी अच्छी नहीं होती. ऐसी दरार को वक्त रहते समझदारी से भर दिया जाए तो अच्छा होता है. नासमझी और अड़े रहने की जिद अकसर बिखराव का काम करती है.
मनमुटाव को रहरह कर चिंगारियां मिलीं, तो नेहा नाराज हो कर अपनी मां के पास चली गई. इसी दौरान उस ने आत्महत्या की कोशिश करने के लिए अपनी कलाई को कई जगह से ब्लेड से काट लिया. गनीमत यह रही कि उसे समय रहते बचा लिया गया. बाद में विपिन ने उसे बेटी का वास्ता दे कर समझाया और अपने साथ घर ले आया.
नेहा एक बार फिर ससुराल आ गई. कुछ दिनों तक तो सब ठीक रहा, लेकिन फिर से दोनों में झगड़ा होने लगा. बात बढ़ी तो नेहा ने खुद को बदलने के बजाए विपिन से अलग होने का मन बना लिया. इसी बीच नेहा ने एक बेटे को जन्म दिया. इसे नादानी कहें या निष्ठुरता कि बेटे के जन्न्म के 15 दिन बाद ही दोनों बच्चों को पति के पास छोड़ कर वह हमेशा के लिए मां के पास चली गई.
बेटी एक बार फिर मायके आ गई थी. मधु ने जिंदगी में बहुत उतारचढ़ाव देखे थे. वह नहीं चाहती थी कि बेटी किसी तरह का दुख झेले. उस ने नेहा को समझाया, लेकिन उस ने कोई भी सलाह मानने से साफ इनकार कर दिया. विपिन ने भी अब उस से दूर ही रहने का निर्णय कर लिया था.
नेहा और विपिन के बीच सुलह की कोशिशें तो की गईं पर कामयाब नहीं हो सकीं. नेहा ने न दुधमुंहे बच्चे को अपनाया न विपिन को. ससुराल से निकल कर नेहा पूरी तरह आजाद हो गई थी. वह हर बंधन से दूर रह कर आधुनिकता और चकाचौंध भरी जिंदगी जीना चाहती थी. कुछ दिन बाद उस की दोस्ती बुरी संगत वाली कुछ लड़कियों से हो गई.
इस का नतीजा यह हुआ कि कभी वह डिस्को या हुक्का बार जाती तो कभी सैरसपाटे पर. नेहा अब सिगरेट और शराब भी पीने लगी थी. उसे लगता था कि बेलगाम हसरतों के साथ अपने अंदाज में जिंदगी जीने का अलग ही मजा है. मधु वर्मा बेटी को टोकती थी, तो वह कभी भी सीधा जवाब नहीं देती थी.
नेहा बिना बताए कहीं भी चली जाती थी. मधु उसे समझाने से ज्यादा कुछ कर भी नहीं सकती थी. उस ने कई जगह नौकरियां कीं. वह नौकरी करती और जब मन होता छोड़ देती. कोई भी बंधन या टोकाटाकी उसे बिलकुल पसंद नहीं थी. नेहा के दोस्तों में गाजियाबाद की ही एक युवती निशा भी थी. निशा और वह अकसर साथसाथ घूमतीफिरती थीं. इसी बीच विपिन से उस का तलाक का मुकदमा शुरू हो गया था.
अक्टूबर, 2013 में एक दिन नेहा जब गाजियाबाद के एक मौल में टहल रही थी, तो उस की मुलाकात वसीम से हो गई. नेहा खूबसूरत तो थी ही, वसीम उस पर फिदा हो गया. बातचीत हुई, तो दोनों ने एकदूसरे की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया. इस मुलाकात ने इतनी गहरी छाप छोड़ी कि उस दिन दोनों न सिर्फ साथ घूमे बल्कि खाना भी साथसाथ खाया. वसीम ने खूब खरचा कर के नेहा के सामने खुद को पैसे वाला साबित करने की कोशिश की. पहनावे वगैरह से भी वह रईस लग रहा था. उस ने नेहा को बताया कि मेरठ में उस का काफी बड़ा कारोबार है.
वसीम शातिर किस्म का युवक था. उस के रईसी अंदाज ने नेहा का दिल जीत लिया. जबकि हकीकत कुछ और ही थी. वसीम के अब्बा का प्लास्टिक की शीशियां बनाने का छोटा सा कारोबार था, जिस में इतनी कमाई नहीं होती थी कि उस के महंगे शौक पूरे हो सकें.
हकीकत में वसीम आपराधिक किस्म का युवक था. वह बसों व भीड़भाड़ वाली जगहों पर अटैची, लैपटौप और बैग पार कर के चोरी का सामान बेच देता था. इस के बदले उसे जो पैसा मिलता था उस से वह नएनए कपड़े खरीदता था और खुले हाथ से खर्च करता था.
वसीम अपने आवारा दोस्तों के साथ अकसर दिल्ली और गाजियाबाद के डिस्को बार में जाता रहता था. डिस्को बार का रास्ता उसे दो नंबर की कमाई ने दिखाया था. अपनी इस जीवनशैली में वह लड़कियों को अपने जाल में फंसाने का कोई मौका नहीं चूकता था.
नेहा पर भी उस ने यही दांव आजमाया था. वसीम के कई नाम थे. मसलन अली, मैक, डौन और सलमान. बहरहाल, पहली मुलाकात के बाद नेहा और उस के बीच मोबाइल पर बातें होने लगीं.
नेहा खुले विचारों वाली युवती थी. उसे वसीम से दोस्ती या दिल्लगी से कोई परहेज नहीं था. उस ने वसीम से अपने विवाहित और 2 बच्चे की मां होने की बात पूरी तरह छिपा ली थी. वसीम ने एक दिन नेहा के सामने डिस्को क्लब चलने का प्रस्ताव रखा, तो वह तैयार हो गई. उस रात दोनों ने आनंद विहार स्थित एक डिस्को बार में साथसाथ डांस किया और शराब भी पी.
वसीम ने मन ही मन ठान लिया था कि वह नेहा को पूरी तरह अपने चंगुल में फंसा कर रहेगा. बातोंबातों में उस ने नेहा से प्यार का इजहार किया तो वह बहुत खुश हुई. उस ने भी प्यार का जवाब प्यार से दिया.कुछ दिन बाद वसीम के बुलावे पर नेहा उस से मिलने मेरठ गई. वसीम उसे एक होटल में ले गया जहां दोनों ने कई घंटे एकदूसरे की बांहों में बिताए.
कुछ ही महीनों में दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा. मेलमुलाकातें आम बात हो गईं. नेहा के महंगे शौकों का खर्चा वसीम उठाने लगा था. वह नेहा की हर मांग पूरी करता था. लेकिन नेहा यह नहीं जानती थी कि उस का प्रेमी उस पर लुटाने वाला पैसा कहां से लाता है. नेहा ने वसीम पर अपने प्यार को जाहिर करने के लिए अपना नाम सना खान रख लिया था. वसीम उसे सना के नाम से ही पुकारता था.
वसीम का प्यार कितना सच्चा था, यह तो वह खुद भी नहीं जानता था. अलबत्ता नेहा पर वह अपना पूरा हक समझने लगा था. उस ने उस से निकाह का वादा भी किया था. इस के एवज में वह नेहा का मनचाहा इस्तेमाल कर रहा था. नेहा का सारा खरचा चूंकि वसीम ही उठाता था, इसलिए वह उस के अहसानों के तले दब कर उस के हाथों की कठपुतली बन गई थी.
वसीम के आवारा दोस्तों की मंडली में आसिफ और सुहैब भी शामिल थे. उस ने नेहा से उन की भी मुलाकात करा दी थी. ये सब कई बार नेहा के साथ डिस्को बार गए थे. 18 जनवरी, 2014 को इन सब ने मसूरी घूमने की योजना बनाई. इस टुअर में नेहा, निशा, वसीम, आसिफ, सुहैब, प्रदीप व एक दो अन्य दोस्त भी शामिल थे. ये लोग 2 दिन मसूरी में रुके.
दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ के होटलों में नेहा और वसीम की मुलाकातें अकसर होती रहती थीं. नेहा के कदम कितनी बुरी तरह डगमगा चुके थे, इस का उसे खुद भी अंदाजा नहीं था. उस का हर एक कदम उसे पतन की ओर ले जा रहा था.
एक दिन वसीम ने नेहा की मुलाकात मेरठ के ही अपने एक परिचित युवक करीम (परिवर्तित नाम) से कराई. करीम वसीम से बेहतर आर्थिक हैसियत वाला था. नेहा पहली ही मुलाकात में उस से प्रभावित हो गई. दोनों ने एकदूसरे का फोन नंबर ले लिया था. बाद में दोनों में अकसर बातें होने लगीं.
इस बीच नेहा के दोस्तों का दायरा इतना बढ़ गया था कि वह अपने फोन में 3-3 नंबर इस्तेमाल करने लगी थी. उस के फोन के खरचे उस के दोस्त ही उठाते थे. अभी तक उस के घनिष्ठ संबंध वसीम से रहे थे. लेकिन जब करीम ने नेहा को एक महंगा मोबाइल फोन खरीद कर दिया तो उस का झुकाव करीम की तरफ हो गया.
उधर वसीम नेहा को फोन करता था तो उस का फोन अकसर बिजी मिलता था. वजह पूछने पर नेहा कोई न कोई बहाना बना देती थी. जबकि हकीकत कुछ और ही थी. वसीम को शक था कि नेहा अपनी ऊंची हसरतों को पूरा करने के लिए उसे भी किनारे कर सकती है. इस के बावजूद वह उस से सीधे बात करने से कतरा रहा था.
एक दिन वह नेहा के साथ डिस्को पहुंचा तो उस की नजर उस के नए मोबाइल पर पड़ गई. वह समझ नहीं पा रहा था कि उसे इतना महंगा मोबाइल किस ने दिलाया. नेहा बाथरूम गई, तो वसीम ने एक जरूरी फोन करने के बहाने उस का मोबाइल मांग लिया.
नेहा के जाते ही वसीम ने उस के फोन पर आई और की गईं काल चेक करनी शुरू कर दीं. उन में एक ऐसा नंबर मिला जिस पर नेहा की कई बार बात हुई थी और कई एसएमएस भी भेजे गए थे. वसीम ने वह नंबर अपने मोबाइल में फीड कर लिया. मेरठ आ कर उस ने पता लगाया तो पता चला वह नंबर करीम का था. वसीम नेहा के नए मोबाइल का राज भी समझ गया और यह भी कि उस का नंबर क्यों बिजी रहता है.
हकीकत जानने के बाद वसीम ने नेहा को करीम से दूर रहने को कहा. नेहा ने यह बात करीम को बताई, तो उस ने उसे वसीम के अटैची चोर होने की हकीकत बता दी. अपने प्रेमी की असलियत जान कर नेहा को झटका लगा. लेकिन वह इस मामले में इसलिए चुप रही क्योंकि उस का खरचा उसी से चल रहा था.
एक दिन जब वसीम गाजियाबाद में नेहा के साथ था, तो नेहा के मोबाइल पर करीम का फोन आ गया. नेहा ने फोन आते ही वसीम को नजरंदाज कर दिया और बेफिक्री से बातें करने लगी. जबकि वसीम मन ही मन कुढ़ रहा था. उस दिन दोनों के बीच काफी नोंकझोंक हुई.
वसीम को करीम पर भी गुस्सा आ रहा था. उस ने मेरठ लौट कर इस मुद्दे पर करीम से बात की तो उस ने दावे से कहा कि नेहा से उस के संबंध हैं. इतना ही नहीं उस ने अपने मोबाइल में नेहा की अंतरंग फोटो भी दिखाईं. करीम दबंग था, हिस्ट्रीशीटर का बेटा. वसीम मन ही मन खौल कर रह गया.
इस घटनाक्रम के बाद वसीम ने नेहा से धमकी भरे लहजे में कहा, ‘‘तुम सुधर जाओ नेहा, वरना मुझ से बुरा कोई नहीं होगा.’’
‘‘क्यों, मैं ने ऐसा क्या किया है जो इस तरह भड़क रहे हो?’’ नेहा ने पूछा तो वसीम गुस्से में बोला, ‘‘मुझे तुम्हारी हकीकत पता है. करीम ने अपने मोबाइल में तुम्हारी फोटो भी दिखाई हैं. मेरे साथ ऐसा गेम मत खेलो, वरना किसी लायक नहीं रहोगी. मेरी हो तो मेरी ही बन कर रहो.’’
‘‘करीम तुम्हारा दोस्त है, तुम ने ही मुझे उस से मिलवाया था.’’ नेहा ने सफाई दी तो वसीम ने उसे झिड़क दिया, ‘‘सिर्फ मिलवाया था, इस का मतलब ये नहीं है कि तुम मुझे छोड़ कर उस की बांहों में चली जाओ.’’
नेहा ने सफाई देने की कोशिश की, लेकिन वसीम पर कोई असर नहीं हुआ. इस का नतीजा यह निकला कि नेहा ने वसीम से बात करनी बंद कर दी. वसीम के लिए यह एक तरह से अप्रत्यक्ष जवाब था कि वह उस की बात नहीं मानेगी. नेहा की इस हरकत पर वसीम अंदर ही अंदर सुलग कर रह गया. वह नेहा का नंबर मिलाता था, तो या तो व्यस्त होता था या वह बात ही नहीं करती थी.
वसीम के पास नेहा की मां मधु वर्मा का नंबर था. 11 अप्रैल को उस ने नेहा की मां को फोन कर के कहा कि वह नेहा से प्यार करता है और उस से शादी करना चाहता है. लेकिन नेहा की हररकतें ठीक नहीं हैं. उस ने अप्रत्यक्ष रूप से धमकी भी दी कि नेहा अगर अपनी हरकतों से बाज नहीं आई तो उसे उस के बारे में सोचना पड़ेगा.
मधु वर्मा ने वसीम को आश्वासन दिया कि वह नेहा को समझाएगी. इसी बातचीत में वसीम को पहली बार पता चला कि नेहा न केवल शादीशुदा है बल्कि 2 बच्चों की मां भी है. इस से उसे और भी बड़ा झटका लगा.
यह जानने के बाद वसीम ने नेहा से शादी का खयाल दिमाग से निकाल दिया और तय कर लिया कि उसे अपने कब्जे से नहीं निकलने देगा. जब नेहा करीम से मिलती थी तो वसीम को पता चल जाता था. उस की बेवफाई उस के लिए नाकाबिले बरदाश्त थी.
उस ने मन ही मन नेहा को सबक सिखाने का फैसला कर लिया. इस के लिए उस ने अपने एक दोस्त के माध्यम से अप्रैल के पहले सप्ताह में 315 बोर के एक तमंचे का इंतजाम भी कर लिया.
17 अप्रैल को वसीम ने नेहा को फोन कर के मेरठ आने को कहा तो वह इनकार करने लगी. इस पर वसीम ने उस की मानमनुहार की. अंतत: लालच में आ कर वह आने के लिए तैयार हो गई.
वसीम की बात मान कर नेहा घर से निकल कर आटो रिक्शा से बस अड्डे पहुंची और वहां से करीब डेढ़ घंटे में मेरठ पहुंच गई, 12 बजे मेरठ के भैंसाली रोडवेज बस अड्डे पर उतर कर उस ने वसीम को फोन किया. वसीम अपनी एक्टिवा स्कूटी ले कर वहां पहुंच गया.
नेहा को साथ ले कर वसीम आबूलेन स्थित उसी होटल में जा पहुंचा जहां अकसर जाया करता था. होटल के रिसेप्शन पर उस ने पहचान के तौर पर अपने वोटर आई कार्ड की फोटोकापी जमा करा कर एंट्री रजिस्टर भर दिया. शाम तक वसीम और नेहा गिलेशिकवे भूल कर एकदूसरे की बांहों में सिमटे रहे. वसीम उस दिन नेहा से हर बात साफ कर लेना चाहता था.
इस सिलसिले में उस ने करीम को ले कर बात की, तो दोनों के बीच बहस शुरू हो गई. वसीम ने जब गुस्से में उसे बताया कि वह इस हकीकत को जान गया है कि वह शादीशुदा और 2 बच्चों की मां है, तो नेहा भड़कते हुए बोली, ‘‘वह मेरा बीता हुआ कल था जिसे मैं भूल चुकी हूं. लेकिन तुम ही कौन से दूध के धुले हो. एक अटैची चोर की औकात क्या हो सकती है, मैं अच्छी तरह जानती हूं. तुम से अच्छा तो करीम है. वह कम से कम उलटेसीधे काम तो नहीं करता.’’
काफी देर की तकरार के बाद दोनों शांत हो गए, लेकिन बातों में तल्खी बनी रही.
शाम ढल चुकी थी. वसीम ने अपने दोस्त आसिफ और सुहैब को मिलने के लिए होटल बुलाया. वह दोनों मोटरसाइकिल से होटल पहुंच गए. उस समय भी नेहा और वसीम में झगड़ा हो रहा था. वे दोनों तकरार की वजह जानते थे. वसीम ने अपने दोस्तों को अलग ले जा कर कहा, ‘‘यह मेरी बात नहीं मान रही, लगता है इसे सबक सिखाना ही पड़ेगा.’’
‘‘जैसी तेरी मरजी.’’ दोनों ने एकसाथ कहा. ‘‘ठीक है, तुम लोग मेरे साथ रहना, बाकी मैं देख लूंगा.’’
अब तक वसीम को इस बात का अंदाजा हो चुका था कि नेहा उस के हाथ से निकल चुकी है और भविष्य में शायद ही उस के बुलाने पर आए. उस ने मन ही मन फैसला कर लिया कि नेहा उस की बन कर नहीं रह सकती, तो वह उसे किसी और की भी नहीं होने देगा. रात घिर आई थी. नेहा और वसीम दोनों ही उखड़े हुए थे.
आखिर नेहा ने वसीम से कहा, ‘‘तुम मुझे बस अड्डे छोड़ आओ, अब मैं तुम्हारे पास एक पल भी नहीं रुकना चाहती.’’
तब तक करीम फैसला कर चुका था. इसलिए शांत भाव से बोला, ‘‘चलो, छोड़ आता हूं.’’
चारों होटल से निकल आए. वसीम ने नेहा को अपनी स्कूटी पर बैठा लिया, जबकि आसिफ और सुहैब मोटरसाइकिल पर सवार हो गए. बस अड्डे जाने के बजाए वसीम नेहा को ले कर शहर में घूमने लगा. नेहा ने पूछा, तो वह बोला, ‘‘थोड़ा घूमने का दिल कर रहा है, तुम्हें घूमा कर छोड़ दूंगा.’’
दरअसल, वसीम उस की हत्या का इरादा तो कर चुका था, लेकिन समझ नहीं पा रहा था कि उसे गोली कहां ले जा कर मारे. वह उसे ले कर काफी देर घूमता रहा. तब तक सड़कें सुनसान होने लगी थीं. इसी बीच करीब सवा 11 बजे लाइट चली गई. वसीम को यह मौका अच्छा लगा. वह अपनी स्कूटी को जिमखाना मैदान वाली रोड पर ले गया. उधर वाहनों की आवाजाही बिलकुल नहीं थी.
एक जगह वसीम ने स्कूटी रोक कर नेहा से उतरने को कहा तो आसिफ और सुहैब भी रुक गए. नेहा उतर कर खड़ी हो गई. उस ने सोचा कि सुनसान जगह पर वसीम लघुशंका के लिए रुका होगा. उस ने वसीम से पूछा, ‘‘क्या हुआ, रुक क्यों गए?’’
‘‘कुछ नहीं, तुम्हें सबक सिखाना है.’’ सुन कर नेहा सकपका गई. एकाएक उस की कुछ समझ में नहीं आया.
‘‘बहुत आग है न तेरे दिल में किसी गैर के लिए. आज मैं तेरी इस आग को ठंडा कर देता हूं.’’ वसीम ने उसे खा जाने वाली नजरों से घूरते हुए कहा. नेहा को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था वसीम जान लेने की हद तक भी जा सकता है. वह कुछ समझ पाती, इस से पहले ही वसीम ने अपनी अंटी से तमंचा निकाला और पलक झपकते ही उस के दिल पर गोली दाग दी. गोली लगते ही नेहा जमीन पर गिर कर छटपटाने लगी.
वसीम को पूरा विश्वास था कि नेहा किसी भी सूरत में जिंदा नहीं बचेगी. उस ने उस की जेब से मोबाइल निकाल कर स्विच औफ कर के जेब में रखा और उस के गले से सोने की चेन निकाल कर आसिफ को दे दी. इस के बाद तीनों अपने वाहनों पर वहां से भाग खड़े हुए. वसीम अखबारों के जरिए पुलिस काररवाई पर नजर रखे हुए था. नेहा की शिनाख्त न हो पाने से वह खुश था, लेकिन बाद में पकडे़ जाने के डर से वह फरार हो गया था.
पुलिस ने वसीम का मोबाइल चेक किया, तो पता चला कि वह कई और लड़कियों के संपर्क में भी था. मोहब्बत के नाम पर लड़कियों से मौजमस्ती करना उस की फितरत थी. वसीम की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त स्कूटी और तमंचा भी बरामद कर लिया. लेकिन नेहा का मोबाइल बरामद नहीं हो सका. आसिफ से भी पुलिस ने सोने की चेन बरामद कर ली थी.
बाद में पुलिस ने सुहैब को भी गिरफ्तार कर लिया. विस्तृत पूछताछ के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक किसी की भी जमानत नहीं हो सकी थी. नेहा की बेलगाम जीवनशैली ने न सिर्फ उस के बच्चों को मां के साए से महरूम कर दिया बल्कि वह खुद भी जिंदगी से हाथ धो बैठी. Meerut Murder Case
— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.
— 2014 में प्रकाशित






