Surat Safe Vault Theft. सूरत में अलगअलग जगहों पर महेश दियोरा के सेफ वौल्ट की 4 शाखाएं थीं. इन शाखाओं के लौकर्स में लोग अपनी ज्वैलरी व महत्त्वपूर्ण कागजात रखते थे. इन सेफ वौल्ट का संचालन महेश दियोरा अपने दोनों बेटों के साथ करता था. एक दिन महेश दियोरा ने अपने दोनों बेटों की मदद से कुछ लौकर्स से लगभग साढ़े 3 करोड़ रुपए की ज्वैलरी निकाल ली. आखिर ये लोग क्यों बने अपने ही लौकर्स के लुटेरे?
सूरत शहर हीरे और कपड़ा, उस में खासकर साड़ी उद्योग की चमक से जगमगाता महानगर है. यहां करोड़ों रुपए का सोना और हीरा रखने वाले लोग बैंकों से अधिक भरोसा निजी सेफ वौल्ट पर करते हैं. इन्हीं भरोसेमंद नामों में एक था ‘नक्षत्र सेफ वौल्ट’.
सूरत में इस की 4 शाखाएं थीं, 2 महिधरपुरा में, एक वराछा में और एक सिंगणपोर काजवे रोड पर. हजारों लोगों ने अपनी जीवन भर की कमाई, शादीब्याह के गहने और पारिवारिक विरासत इन के यहां लौकरों में सुरक्षित रख छोड़ी थी.
इन के यहां लौकरों में सामान रखने वालों ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस व्यक्ति को वे अपने खजाने का रखवाला समझ रहे हैं, वही एक दिन सारा माल लूट लेगा.
एक रोज सवेरेसवेरे डभोली रोड पर रहने वाले जानेमाने बिल्डर रमेशभाई जीवराजभाई वाघाणी अपनी पत्नी के साथ सिंगणपोर स्थित नक्षत्र सेफ वौल्ट पहुंचे, क्योंकि उसी रोज सवेरे उन की पत्नी ने कहा था, ”2 महीने बाद भतीजी की शादी है. चलो, आज सारे गहने निकाल लाते हैं, क्योंकि आज आप खाली हो. फिर पता नहीं आप को कब फुरसत मिले.’’
सेफ वौल्ट पहुंच कर रमेशभाई ने अपना लौकर खोला. लौकर के अंदर का नजारा देखते ही उन के चेहरे का रंग उड़ गया. उन के मुंह से एकदम से निकला, ”यह क्या… ऐसा कैसे हो सकता है?’’
पत्नी ने घबरा कर पूछा, ”क्या हुआ?’’
रमेशभाई कांपती आवाज में बोले, ”लौकर तो खाली है. इस में कुछ भी नहीं है. सारा सामान गायब है.’’
रमेशभाई के लौकर में रखे 63 तोला सोने के गहने, जिन की कीमत लाखों रुपए थी, गायब थे. पत्नी की चीख पूरे वौल्ट में गूंज उठी, ”हमारे सारे गहने कहां चले गए? कौन निकाल ले गया?’’
रमेशभाई ने वौल्ट के संचालक महेश दियोरा को फोन किया. क्योंकि सिक्योरिटी गार्ड और कर्मचारियों से बात करने का कोई मतलब नहीं था. कुछ ही देर में वौल्ट के संचालक महेश दियोरा और उस के दोनों बेटे हर्ष दियोरा व हरिकृष्ण दियोरा वहां आ पहुंचे. रमेशभाई गुस्से से बोले, ”मेरे गहने कहां गए?’’
महेश ने सामान्य बनने की कोशिश करते हुए कहा, ”शायद कोई गलतफहमी हो रही है. दोबारा देखिए, गहने लौकर में ही होंगे.’’
”गलतफहमी?’’ रमेशभाई चिल्लाए, ”लाखों रुपए के गहने हवा हो गए और आप कह रहे हैं कि गलतफहमी हो रही है?’’
हर्ष बोला, ”सर, हम सीसीटीवी फुटेज देख लेते हैं. सब पता चल जाएगा. गहने इस तरह लौकर से कैसे गायब हो सकते हैं?’’
लेकिन कुछ ही मिनट बाद उस का सुर बदल गया. उस ने कहा, ”सर, हार्डडिस्क बहुत गर्म हो गई है. सिस्टम काम नहीं कर रहा है. आप कल आइए.’’
उस की इस बात से रमेशभाई को आग लग गई. गुस्से में वह बोले, ”मेरे गहने गायब हैं और आप कह रहे हैं कल आइए. अचरज की बात तो देखो, इतने बड़े सेफ वौल्ट का सीसीटीवी ही नहीं चल रहा?’’
महेश ने बात संभालने की कोशिश करते हुए कहा, ”सिस्टम अपडेट हो रहा है तो सीसीटीवी कैसे चलेगा?’’
रमेशभाई समझ गए कि कहीं न कहीं बड़ा खेल हुआ है. इसलिए कल का इंतजार करना ठीक नहीं है. वह उसी दिन सीधे थाना सिंगणपोर पहुंचे और पूरी घटना बता कर शिकायत दर्ज करा दी.
बेटे ने उगला सच इंसपेक्टर पी.एम. चौधरी ने रमेशभाई की बात ध्यान से सुनी और अपने साथियों की ओर देख कर कहा, ”यह मामला साधारण चोरी का नहीं है.’’
एक सबइंसपेक्टर ने कहा, ”सर, इस मामले में अंदर का आदमी शामिल हो सकता है, वरना बंद लौकर से सामान कैसे गायब हो जाएगा.’’
इंसपेक्टर चौधरी ने गंभीर स्वर में कहा, ”अगर ऐसा है तो कोई भी बच नहीं पाएगा. चलो, सब से पहले मालिक को ही पकड़ा जाए.’’
कुछ ही देर में पुलिस टीम नक्षत्र सेफ वौल्ट पहुंच गई. महेश दियोरा और उस के दोनों बेटे वहीं थे. उन से पूछताछ शुरू हुई. तीनों एक ही बात दोहरा रहे थे कि उन्हें कुछ नहीं पता. लेकिन अनुभवी पुलिस अधिकारी उन के चेहरे पढ़ रहे थे, क्योंकि पुलिस को लगता था कि बिना उन की जानकारी के यहां कुछ भी नहीं हो सकता.
पूछताछ बढ़ती गई. सवाल कठिन होते गए. वही सवाल बारबार अलगअलग तरह से पूछे जाते रहे, जिस में महेश और उन के बेटे फंसते जा रहे थे.
आखिरकार देर रात हर्ष अपने ही जवाबों में फंस गया. उस ने पुलिस के सवालों के आगे सिर झुका लिया. महेश ने बेटे की ओर देखा. उस की आंखों में आंसू थे. वह धीमे से बोला, ”सर, चोरी किसी बाहर वाले ने नहीं की…’’
इंसपेक्टर चौधरी ने पूछा, ”तब चोरी किस ने की है?’’
हर्ष ने कांपती आवाज में कहा, ”चोरी हम ने ही की है.’’
यह सुन कर कमरे में मौजूद सभी पुलिस अधिकारी हैरान रह गए. जिन लोगों के भरोसे हजारों लोगों ने करोड़ों रुपए की अपनी जमापूंजी इन के यहां रखी थी, उन्हीं लोगों ने लौकर तोड़ कर उन्हें लूट लिया था.
महेश दियोरा और उस का छोटा बेटा हरिकृष्ण पुलिस अधिकारियों के सामने सिर झुकाए बैठा था, क्योंकि हर्ष ने स्वीकार कर लिया था कि चोरी किसी बाहरी गिरोह ने नहीं, बल्कि उन्होंने स्वयं की थी.
इंसपेक्टर पी.एम. चौधरी ने महेश की ओर देखते हुए कहा, ”इतना बड़ा विश्वासघात करने की वजह क्या थी? तुम लोगों को करोड़ों रुपए के गहने चुराने की नौबत क्यों आई?’’
हर्ष ने गहरी सांस लेते हुए कहा, ”सर, मेरी एक गलती ने पूरे परिवार को अपराधी बना दिया.’’
”आखिर ऐसी कौन सी गलती कर दी तुम ने कि दूसरों के गहने तुम्हें चोरी करने पड़े?’’
हर्ष ने रुआंसी आवाज में कहना शुरू किया, ”सर, मैं औनलाइन ट्रेडिंग करता था. शुरुआत में खूब फायदा हुआ. लगा कि शेयर बाजार से जल्दी ही अमीर बन जाऊंगा, लेकिन धीरेधीरे एक के बाद एक गलत सौदे होते गए. घाटा होने लगा, जो बढ़ता ही गया. नुकसान पूरा करने के लिए और पैसा लगाया. लेकिन जब नुकसान होने लगा तो हर बार नुकसान ही होता रहा.’’
वह कुछ क्षण चुप रहा. फिर आगे बोला, ”सर, देखते ही देखते मैं ने 3 करोड़ रुपए गंवा दिए.’’
”इतने सारे पैसे आए कहां से?’’ इंसपेक्टर चौधरी ने पूछा.
”दोस्तों से, रिश्तेदारों से उधार लिया. उस के बाद ब्याज पर भी पैसे लिए और जब लौटाने का समय आया, तब मेरे पास कुछ भी नहीं बचा था.’’ हर्ष ने बताया.
हर्ष ने इतना कहा था कि हरिकृष्ण बोला, ”पैसे लेने वालों के रोज फोन आते. लोग धमकी देते थे, कोई घर आने की बात कहता था.’’
तब महेश दियोरा ने कहा, ”सर, हर्ष की वजह से पूरा परिवार बरबाद होने की कगार पर पहुंच गया था.’’
इस पर इंसपेक्टर चौधरी ने तीखे स्वर में कहा, ”खुद को बरबाद होने से बचाने के लिए तुम लोगों ने अपने ही ग्राहकों को लूटने का फैसला कर लिया? अपनी बरबादी बचाने के लिए दूसरों को बरबाद कर दिया.’’
चोरी का बना प्लान
महेश की नजरें झुक गईं. फिर उस ने कहा, ”जी सर, एक रात हम तीनों बापबेटे वौल्ट के औफिस में बैठे थे. तब हर्ष ने कहा कि अगर किसी तरह 3 करोड़ रुपए मिल जाएं तो सारी परेशानी खत्म हो जाए.’’
तब महेश ने कहा कि इतने सारे रुपए आएंगे कहां से? कुछ देर बाद हर्ष की नजर सामने रखी लौकरों की सूची पर पड़ी. उस की आंखों में एक खतरनाक चमक उभर आई. उस ने कहा, ”पापा, हमारे पास तो करोड़ों का सोना रखा है.’’
महेश चौंका, ”तुम कहना क्या चाहते हो?’’
”कुछ लौकर ऐसे हैं, जो महीनों और सालों से नहीं खुले हैं. अगर उन में से थोड़ाथोड़ा सोना निकाल लिया जाए तो किसी को महीनों तक पता नहीं चलेगा.’’ हर्ष ने कहा.
हरिकृष्ण ने भयभीत हो कर कहा, ”लेकिन पकड़े गए तो?’’
हर्ष बोला, ”हम कैसे पकड़े जाएंगे, क्योंकि हम ही तो वौल्ट के मालिक हैं और मालिक कहीं पकड़ा जाता है.’’
इसी के बाद उस खौफनाक साजिश ने जन्म लिया, जिस ने सैकड़ों परिवारों की नींद उड़ा दी.
नक्षत्र सेफ वौल्ट की 4 शाखाएं थीं— एक वराछा में, 2 महिधरपुरा में और एक सिंगणपोर काजवे रोड पर. चारों शाखाओं का बारीकी से अध्ययन करने के बाद महेश ने कहा, ”वराछा और महिधरपुरा में चोरी करना तो आत्महत्या होगी.’’
हर्ष ने पूछा, ”क्यों?’’
महेश समझाने लगा, ”वहां हीरा व्यापारी, दलाल और रत्न कलाकार रोज अपने लौकर खोलते हैं. कई लोग तो दिन में 2-2 बार आते हैं. अगर एक भी लौकर तोड़ा गया तो उसी दिन पता चल जाएगा.’’
तब हरिकृष्ण ने पूछा, ”फिर?’’
महेश ने कहा, ”सिंगणपोर शाखा ठीक रहेगी.’’
हर्ष ने मुसकरा कर कहा, ”वहां ज्यादातर परिवार वाले हैं. वे शादीब्याह, त्यौहार या किसी खास मौके पर ही लौकर खोलते हैं. कई लोग तो 6 महीने या साल भर तक लौकर देखने भी नहीं आते.’’
”यही हमारी सब से बड़ी सुरक्षा होगी.’’ महेश बोला.
तीनों ने तय किया कि चोरी केवल सिंगणपोर शाखा में ही की जाएगी. कई दिनों तक कंप्यूटर रिकौर्ड खंगाले गए. ऐसे लौकरों की सूची तैयार की गई, जो लंबे समय से नहीं खोले गए थे.
तभी महेश ने कहा, ”इन लौकरों में परिवारों के पुराने गहने होंगे. उन्हें उन गहनों की जरूरत कम पड़ती होगी. ऐसे लौकरों में चोरी करने पर महीनों तक चोरी का पता नहीं चलेगा.’’
सूची तो तैयार हो गई. अब समस्या यह थी कि बिना चाबी के लौकर कैसे खोले जाएं? हर्ष सोच कर बोला, ”इस के लिए हमें ऐसा आदमी चाहिए, जिसे ताले तोडऩे में महारत हासिल हो.’’
महेश कुछ देर सोचता रहा. फिर अचानक बोला, ”मुझे एक ऐसा आदमी याद आ गया. उस का नाम है मणीभाई राजाभाई चौहान. सूरत के पुणागाम में रहने वाला यह 59 साल का आदमी चाबी बनाने और किसी भी तरह का ताला खोलने में माहिर माना जाता है.’’
मणीभाई मूलरूप से आणंद जिले के सोजित्रा तहसील के विरोल गांव का रहने वाला था, लेकिन सालों से वह सूरत के पुणागाम इलाके में रह कर चाबी बनाने का काम करता था. शहर में उस की पहचान ऐसे कारीगर की थी, जो किसी भी तरह के ताले की डुप्लीकेट चाबी बना सकता था और मुश्किल से मुश्किल ताला भी खोल सकता था.
एक रोज शाम को महेश दियोरा ने उसे फोन किया, ”मणीभाई, एक खास काम है.’’
”कैसा काम?’’ ”कुछ लौकर्स की चाबी बनानी हैं.’’
”मालिक की अनुमति है?’’ महेश ने कहा, ”मैं ही मालिक हूं.’’
यह सुन कर मणीभाई निश्चिंत हो गया. 1,200 प्रति लौकर की चाबी बनाने की बात तय कर के रात को सेफ वौल्ट बंद होने के बाद मणीभाई वहां पहुंचा. महेश ने कहा, ”हर लौकर को खोलने और उस की डुप्लीकेट चाबी बनाने के लिए तुम्हें 1,200 रुपए मिलेंगे.’’
मणीभाई ने पूछा, ”इतने सारे लौकर क्यों खोलने हैं?’’
हर्ष ने कहा, ”कुछ पुराने लौकर बदलने हैं. ग्राहक महीनों से नहीं आए हैं.’’
मणीभाई को कोई शक नहीं हुआ. उस ने काम स्वीकार कर लिया.
उसे क्या पता था कि वह अनजाने में देश की सब से बड़ी निजी लौकर चोरियों में से एक का हिस्सा बनने जा रहा है.
एआई से ली हेल्प
रोज की तरह शाम को शाखा बंद हो जाती थी. सभी कर्मचारी चले जाते थे. इस के बाद शुरू होता था चोरी का असली खेल. महेश मुख्य दरवाजा भीतर से बंद कर देता था. हर्ष सूची निकालता था और हरिकृष्ण निगरानी करता था.
उस के बाद मणीभाई अपने औजार निकालता और कुछ ही मिनटों में मास्टर चाबी और विशेष उपकरणों की मदद से लौकर खोल देता. तब महेश धीरे से कहता, ”सिर्फ सोने के गहने निकालो. चांदी, दस्तावेज या दूसरे सामान को मत छूना.’’
हर्ष सावधानी से केवल सोने के आभूषण निकालता. हार, चूडिय़ां, कंगन, मंगलसूत्र, झुमके, जो भी सोना मिलता, अलग बैग में रख दिया जाता.
इस के बाद मणीभाई फिर उस लौकर को इस तरह बंद कर देता कि बाहर से देखने पर कोई पहचान ही न सके कि उसे कभी खोला गया था. यह प्रक्रिया एकएक कर के कई लौकर्स के साथ दोहराई गई.
महेश ने पहले ही हर्ष से कहा था कि ऐसे लौकर चुनना, जो 6 महीने या एक साल से न खोले गए हों. हर्ष कंप्यूटर रिकौर्ड देख कर ऐसे ही ग्राहकों की सूची तैयार करता था, जो सालों से लौकर खोलने नहीं आए थे. उस का तर्क था कि जब तक ग्राहक आएगा, तब तक सोना बिक चुका होगा और उस का कर्ज भी उतर चुका होगा. यही गणित इस पूरे षडयंत्र की सब से बड़ी ताकत थी.
लेकिन चोरी करना जितना जरूरी था, उस से कहीं ज्यादा जरूरी था सबूत मिटाना. हर्ष ने कहा, ”अगर किसी ने सीसीटीवी फुटेज देख ली तो..?’’
महेश सोचने लगा. वह कुछ कहता, उस के पहले ही हरिकृष्ण बोला, ”आजकल हर सवाल का जवाब इंटरनेट पर मिल जाता है.’’
यहीं से उन्होंने तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया. उन्हें नहीं मालूम था कि बाद में यही तकनीक उन के खिलाफ सब से बड़ा सबूत बनेगी.
कुछ दिनों बाद एक ग्राहक अपने लौकर में कुछ देखने आया. उसे लौकर के लौक में हलका सा अंतर महसूस हुआ. उस ने कर्मचारियों से कहा, ”मुझे सीसीटीवी फुटेज दिखाइए.’’
महेश तुरंत बोला, ”आज सिस्टम में कुछ तकनीकी खराबी है. फिर कभी आ कर देख लेना.’’
ग्राहक चला गया, लेकिन महेश समझ गया कि अगर सीसीटीवी फुटेज बचे रहे तो सारा खेल खत्म हो जाएगा. उसी रात हर्ष ने अपना मोबाइल उठाया और गूगल जेमिनी खोल कर ऐसा सवाल पूछा, जो आगे चल कर पूरे देश में चर्चा का विषय बनने वाला था.
हर्ष ने गूगल जेमिनी पर सवाल टाइप किया कि कैमरे की रिकौर्डिंग और हार्डडिस्क का डेटा स्थाई रूप से कैसे डिलीट करें. इस के बाद उस ने एक और सवाल पूछा कि डीवीआर से डेटा कैसे हटाया जाए कि फोरैंसिक जांच में भी रिकवर न हो सके?
एआई से मिले मार्गदर्शन के आधार पर दोनों भाइयों ने डीवीआर और हार्डडिस्क से रिकौर्डिंग हटाने का प्रयास किया. उन का मकसद साफ था कि अगर कभी पुलिस या कोई ग्राहक फुटेज मांगे तो उन के लौकर खोलने और अंदरबाहर आनेजाने का कोई डिजिटल सबूत न मिले. इस के बाद महेश ने राहत की सांस लेते हुए कहा, ”अब कोई सबूत नहीं बचा.’’
उन्हें विश्वास था कि उन्होंने अपने अपराध के सभी निशान मिटा दिए हैं, लेकिन वे यह नहीं जानते थे कि डिजिटल दुनिया में हर गतिविधि अपने पीछे कोई न कोई सुराग छोड़ जाती है. क्योंकि डिजिटल दुनिया में जो एक बार टाइप हो गया, उसे मिटाया नहीं जा सकता.
पिघला कर बेचा सोना
अब अगला सवाल था कि चुराए गए गहनों का क्या किया जाए? अगर उन्हें उसी तरह बेचा गया तो ज्वैलर्स या पुलिस आसानी से पहचान सकती है. इसलिए महेश ने निर्णय लिया कि गहनों को उसी तरह बेचने के बजाय सभी गहनों को भट्ठी में पिघला कर सिल्लियों का रूप दे दिया जाए.
फिर वही किया गया और उन सिल्लियों को सूरत के कुछ सर्राफा व्यापारियों को बेच दिया गया. मिलने वाले पैसे सीधे हर्ष के बैंक खातों में जमा होने लगे.
उस की योजना थी कि पहले शेयर बाजार और ब्याजखोरों का कर्ज चुकाया जाए. उस के बाद धीरेधीरे सब सामान्य हो जाएगा. लेकिन संयोग ने साथ नहीं दिया. जिस बात से वे सब से ज्यादा बचना चाहते थे, वही हो गई. डभोली रोड निवासी बिल्डर रमेशभाई जीवराजभाई वाघाणी अपने लौकर से गहने निकालने पहुंचे.
जैसे ही उन्होंने लौकर खोला, उन के 63 तोला सोने के गहने गायब थे.
उन्होंने तुरंत महेश दियोरा से जवाब मांगा. महेश ने फिर वही पुराना बहाना बनाया कि शायद कोई तकनीकी गड़बड़ी है. इसलिए सिस्टम काम नहीं कर रहा, लेकिन इस बार सामने वाला व्यक्ति सामान्य ग्राहक नहीं था.
रमेशभाई सीधे थाना सिंगणपोर पहुंचे और अपनी शिकायत दर्ज करा दी.
यहीं से वह जांच शुरू हुई, जिस ने पूरे परिवार के अपराध का परदाफाश कर दिया. पूछताछ में टूट गए बापबेटे महेश दियोरा, हर्ष और हरिकृष्ण को हिरासत में ले कर गहन पूछताछ की गई.
जैसे ही मीडिया में यह खबर फैली कि ‘नक्षत्र सेफ वौल्ट’ के मालिक ही अपने ग्राहकों के लौकर लूटते रहे, पूरे सूरत शहर में सनसनी फैल गई.
अगली सुबह सिंगणपोर, वराछा और महिधरपुरा स्थित नक्षत्र सेफ वौल्ट की चारों शाखाओं के बाहर सैकड़ों लोगों की भीड़ लग गई.
हर किसी के चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही थी. कोई अपनी पत्नी के साथ आया था, कोई बूढ़े पेरेंट्स को ले कर. महिलाएं तो रो रही थीं.
एक महिला रोते हुए कह रही थी कि 6 महीने बाद उस की बेटी की शादी है. अगर उस के गहने नहीं मिले तो क्या होगा? एक बुजुर्ग व्यक्ति बुदबुदा रहा था कि पूरी जिंदगी की कमाई इसी लौकर में रखी थी.
पुलिस ने व्यवस्था संभाली और एकएक कर के लोगों को लौकर खोलने की अनुमति दी गई. शुरुआत में पुलिस के पास केवल एक शिकायत थी कि 63 तोला सोना गायब है.
लेकिन जांच आगे बढ़ी तो एकएक कर के नए मामले सामने आने लगे. सब से पहले डाह्या दुला अणघण अपनी पत्नी काशीबेन के साथ पहुंचे. उन्होंने कांपते हाथों से लौकर खोला. लौकर के अंदर देखते ही काशीबेन की चीख निकल गई. उन के करीब 29 तोला सोने के गहने गायब थे. उन्होंने ये गहने अपनी बहू और बेटियों के लिए संभाल कर रखे थे, जो गायब हो चुके थे. उन की आंखों से आंसू निकल आए थे.
उस के बाद विपुल चोवटिया का नंबर आया. उन्होंने लौकर खोला. उन के 27.5 तोला सोने के गहने भी गायब थे. वह गुस्से में बोले, ”जिन के भरोसे गहने रखे, वही चोर निकले.’’
इस के बाद सब से बड़ा झटका राजेश मालविया को लगा. उन के लौकर से 60 तोला सोने के गहने गायब मिले. राजेश ने सिर पकड़ लिया. उन की 3 पीढिय़ों की यह जमापूंजी थी. राजेशभाई का 49 तोला, रमेशभाई का 3 तोला, जीतेंद्रभाई का 13 तोला, चिरागभाई का 62 तोला, उत्सवभाई का 16 तोला.
अब तक चोरी का कुल आंकड़ा बढ़ कर लगभग 4 करोड़ रुपए तक पहुंच गया था, लेकिन पुलिस का अनुमान था कि यह अंतिम आंकड़ा नहीं है. अभी कई लौकरधारक शहर से बाहर हैं तो कुछ लोगों को घटना की जानकारी ही नहीं मिली थी.
इस का मतलब चोरी की रकम बढ़ सकती है. उसी दिन डीसीपी राघव जैन ने प्रैस कौन्फ्रेंस कर के मीडिया को बताया कि लौकर की चोरी के मामले का खुलासा हो गया है और इस मामले से जुड़े सारे अपराधी पकड़े जा चुके हैं.
यह चोरी वौल्ट के मालिक महेश दियोरा और उस के बेटों हर्ष और हरिकृष्ण ने की थी. हर्ष को शेयर मार्केट में 3 करोड़ का घाटा हो गया था, जिस की भरपाई के लिए यह चोरी की गई थी.
पूछताछ में हर्ष ने स्वीकार किया था कि चोरी के गहने को पिघला कर उन की सिल्लियां बनाई गई थीं. उस के बाद उन्हें सूरत के 2 सर्राफा व्यापारियों मितेष पारेख और कौशल सुपेडा को बेचा गया था. पुलिस ने तुरंत काररवाई करते हुए दोनों ज्वैलर्स को हिरासत में ले लिया था.
जांच में पुलिस को पता चला था कि हर्ष ने चोरी का सोना बेच कर मिले पैसे अपने बैंक खातों में जमा किए थे. इसलिए इंसपेक्टर चौधरी ने तुरंत उस के बैंक खाते सीज करा दिए. बैंक की जमा पर्चियां, पासबुक और लेनदेन से जुड़े दस्तावेज भी पुलिस ने जब्त कर लिए थे.
आरोपियों के कब्जे से 15 लाख रुपए नकद भी बरामद किए थे. पुलिस यह भी पता लगा रही है कि चोरी की रकम कहां खर्च की गई और इस पूरे खेल में कोई और भी शामिल था. चाबी बनाने वाले मणीभाई राजाभाई चौहान को भी गिरफ्तार कर लिया गया है.
पुलिस ने महेश दियोरा, उस के दोनों बेटों हर्ष और हरिकृष्ण तथा मणीलाल को अदालत में पेश कर के पुलिस रिमांड पर भी लिया था. पूछताछ के बाद सभी को फिर से अदालत में पेश किया गया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया था. Surat Safe Vault Theft






