High-Profile Property Fraud . दिल्ली का अमृता शेरगिल मार्ग वीवीआईपी क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, क्योंकि यहीं पर प्रधानमंत्री आवास, संसद भवन और अनेक दूतावास स्थित हैं. यहीं पर स्थित बंगला नंबर 9 को बेचने के नाम पर मोहित गोगिया और उस के सिंडिकेट ने करोड़ों रुपए का फ्रौड किया. इस सिंडिकेट ने सब से पहले शिकार बनाया रियल एस्टेट कारोबारी यूनिटी ग्रुप के कोफाउंडर कृष्ण कुमार अग्रवाल की बेटी सोनाक्षी बंसल को. आप भी जानें कि यह सिंडिकेट किस तरह रियल एस्टेट कारोबारियों को अपने जाल में फांस कर करोड़ों का फ्रौड करता था.
लुटियंस दिल्ली के अमृता शेरगिल मार्ग पर घर बनाने का सपना हर अमीर इंसान देखता है. क्योंकि इस के आसपास प्रधानमंत्री आवास, विदेशी दूतावास और संसद भवन स्थित है. इस बेहद सुरक्षित इलाके की संपत्ति का खुले बाजार में बिकना नामुमकिन सा माना जाता है. इस इलाके में जो एक बार घर बना कर बस जाता है, समझो यहीं का हो कर रह जाता है. इस इलाके में जो बंगले जैसे घर बने हैं, उन के पते बेहद खास और वीवीआईपी माने जाते हैं. इस इलाके में छोटे से छोटा और साधारण सा घर भी 50 करोड़ की अविश्वसनीय कीमत का होता है. इस के बावजूद हर अमीर इंसान यहां बसना चाहता है.
बस रईसजादों की यही चाहत दिल्ली में प्रौपर्टी का फ्रौड करने वाले जालसाजों के एक सिंडिकेट के लिए मिशन बन गई. पिछले कुछ सालों में जब से दिल्ली के पौश और वीवीआईपी इलाकों में प्रौपर्टी के रेट बेतहाशा बढ़ गए हैं और बेची जाने वाली संपत्तियां कम रह गई हैं, तब से प्रौपर्टी का फ्रौड करने वालों की पौ बारह हो गई है.
दिल्ली के सब से पौश और वीवीआईपी इलाके अमृता शेरगिल मार्ग पर स्थित कोठी नंबर 9 एक ऐसा ही बंगला है, जिस की आड़ में प्रौपटी का फ्रौड करने वाले सिंडिकेट ने ऐसा जाल बिछाया कि उस में वे लोग फंस गए, जो खुद रियल एस्टेट के धंधे में थे और जिन को समझ थी कि प्रौपर्टी के धंधे में गलत और सही क्या है. करीब 200 करोड़ के इस फ्रौड की शुरुआत हुई थी साल 2024 में.
सब से पहले उन लोगों के बारे में जानना जरूरी है, जो इस फ्रौड के शिकार हुए हैं. दिल्ली एनसीआर में एक नामचीन रियल एस्टेट ग्रुप है यूनिटी ग्रुप, जो रियल एस्टेट के अलावा हौस्पिटैलिटी, एजूकेशन व दूसरे व्यवसायों से जुड़ा है. इस ग्रुप में ज्यादातर दिल्ली के वैश्य समाज के धनिक वर्ग के लोग जुड़े हैं.
इसी यूनिटी ग्रुप के एक कोफाउंडर हैं कृष्ण कुमार अग्रवाल जो दिल्ली-एनसीआर की प्रमुख रियल एस्टेट डेवलपर कंपनी यूनिटी ग्रुप के सह-संस्थापक और निदेशक हैं. वह यूनिटी ग्रुप में फाइनैंस विभाग के प्रमुख की जिम्मेदारी संभालते हैं. यूनिटी ग्रुप में नरेश अग्रवाल, हर्षवर्धन बंसल भी सह-संस्थापक हैं.
यह समूह दिल्ली और गुरुग्राम जैसे क्षेत्रों में कमर्शियल, रिटेल, होटल और लग्जरी आवासीय प्रोजेक्ट्स (जैसे दिल्ली का अमरवंती और गुरुग्राम में द काउंटी वाक) के लिए जाना जाता है.
कृष्णा कुमार अग्रवाल की बेटी सोनाक्षी बंसल अपने पारिवारिक व्यवसाय (यूनिटी ग्रुप) और रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ी हुई हैं. सोनाक्षी यूनिटी ग्रुप में डायरेक्टर के रूप में कार्य कर रही हैं. सोनाक्षी बंसल और उन के पति गोविंद बंसल दोनों मिल कर यूनिटी ग्रुप के प्रमुख प्रोजेक्ट्स और नई पहलों को संभालते हैं. यूं कहें तो गलत न होगा कि सोनाक्षी बंसल यूनिटी ग्रुप में अगली पीढ़ी के नेतृत्व का हिस्सा हैं.
ऐसे फांसा जाल में
इस कहानी का सब से अहम किरदार है दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में रहने वाला मोहित गोगिया. गोगिया दिल्ली-एनसीआर के उन रईस लोगों में गिना जाता है, जो पेज थ्री की पार्टियों में और अपनी लाइफस्टाइल के लिए जाना जाता है.
40 साल का मोहित गोगिया और उस की पत्नी श्वेता गोगिया दिल्ली के सोशलाइट सर्किल में जानामाना नाम है. साल 2024 में मोहित गोगिया ने यूनिटी ग्रुप के सह-संस्थापक कृष्ण कुमार अग्रवाल की बेटी और रियल एस्टेट डेवलपर सोनाक्षी बंसल से एक पार्टी में मुलाकात के बाद जानपहचान बढ़ाई.
इस के कुछ दिन बाद उन्हें झांसा दिया कि अमृता शेरगिल मार्ग पर 9 नंबर का बंगला स्टेट बैंक औफ इंडिया के पास गिरवी थी, लेकिन लोन नहीं चुकाए जाने पर बैंक द्वारा इसे जब्त कर लिया गया है और वह इसे बैंक नीलामी के जरिए अपनी सेटिंग से करीब 75 करोड़ रुपए में खरीदवा सकता है.
अमृता शेरगिल मार्ग पर कोई बंगला बिक्री के लिए उपलब्ध होना अपने आप में लौटरी लगने जैसा था. सोनाक्षी बंसल ने अपनी कंपनी के लोगों को भेज कर पता कराया तो जानकारी मिली कि वास्तव में यह बंगला बैंक के पास गिरवी रखा है और इसे बैंक द्वारा औक्शन पर बेचा जाना है.
यह जानकारी मिलते ही इस बंगले में सोनाक्षी की दिलचस्पी बढ़ गई. उन्होंने मोहित गोगिया से संपर्क किया और इसे खरीदने में अपनी दिलचस्पी दिखाई तो मोहित ने उस संपत्ति से जुड़े दस्तावेज दिखा दिए, जिन में बैंक के पास गिरवी रखे पेपर व नीलामी के लिए उसे लिस्टेड करने के पेपर भी थे.
मोहित गोगिया ने जो पेपर सोनाक्षी को दिखाए थे, उन्हें उन्होंने अपने एक्सपर्ट से जांच कराने के बाद सही पाया तो उस का भरोसा मोहित गोगिया पर और बढ़ गया.
सोनाक्षी ने अपने स्तर पर जब उस संपत्ति की जांच कराई तो पता चला कि ओपन मार्केट में अमृता शेरगिल मार्ग पर एक बंगले की कीमत 100 करोड़ रुपए तक हो सकती है. गोगिया ने सोनाक्षी को यह भी औफर दे दिया कि 9 नंबर बंगले के अलावा उस के साथ लगी 9ए नंबर की कोठी को मिला कर वह 75 करोड़ रुपए में दोनों बंगले उन के नाम करवा देगा.
मोहित गोगिया ने सोनाक्षी को बैंक के अधिकारियों से अपनी सांठगांठ और अपने ऊंचे रसूखों के ऐसे किस्से सुनाए कि सोनाक्षी बंसल को लगा कि 75 करोड़ में उसे 200 करोड़ की संपत्ति मिल जाएगी तो रातोंरात एक बड़ा कारनामा हो जाएगा.
गोगिया ने सोनाक्षी और उन के परिवार वालों के साथ जब डील को आगे बढ़ाने के लिए मीटिंग की तो उन्हें भरोसा दिलाया कि बैंक की नीलामी प्रक्रिया तक उस की पहुंच है और वह इसे ओपन मार्केट में आने से पहले सुरक्षित कर सकता है.
उस ने यह भी साफ कर दिया कि वह इस डील की भनक किसी को न लगने दें, वरना ओपन मार्केट में बात खुलते ही नीलामी में रियल एस्टेट कंपनियों के दूसरे ग्रुप भी शामिल हो जाएंगे और उस की कीमत बढ़ जाएगी.
सोनाक्षी बंसल ने बात को आगे बढ़ाने से पहले एक बार फिर बंगले के बारे में गुप्त छानबीन कराई तो वहां तैनात सुरक्षा गार्ड ने भी उन्हें बताया था कि प्रौपर्टी स्टेट बैंक औफ इंडिया के पास है. कई तरह के माध्यमों से जांच के बाद सोनाक्षी बसंल ने यह जानकारी तो हासिल कर ली थी कि अमृता शेरगिल मार्ग का बंगला नंबर 9 एसबीआई के पास लोन के बदले गिरवी रखा गया था.
इस के बाद शुरू हुआ सोनाक्षी और उस के परिजनों के साथ मोहित गोगिया, उस की पत्नी और मोहित के साथियों की मीटिंग का सिलसिला. सोनाक्षी किसी भी कीमत पर इस प्रौपर्टी को अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहती थीं, इसलिए वह मोहित से प्रौपर्टी के जो दस्तावेज मांगतीं और डील की डिटेल मांगतीं, वह उसे उपलब्ध करा देता.
जब सोनाक्षी पूरी तरह संतुष्ट हो गईं तो उन्होंने बैंक से प्रौपर्टी का औक्शन अपने नाम कराने के लिए मोहित गोगिया को जितनी रकम वह मांगता, उतना भुगतान करने लगीं.
अक्तूबर, 2024 तक वह 75 करोड़ में से 43 करोड़ रुपए का भुगतान कर चुकी थीं. बाकी रकम के लिए उन्हें एसबीआई से लोन मिलने का भरोसा दिया गया था.
लेकिन इसी दौरान एक नया खेल शुरू हो गया. सोनाक्षी बंसल और उन के पति गोविंद बंसल से कई मीटिंग के दौरान मोहित गोगिया की मुलाकात परिवार के दूसरे लोगों से भी हो चुकी थी. परिवार के अधिकांश लोग और रिश्तेदार या तो रियल एस्टेट के बिजनैस में थे या बड़े कारोबारी. इसी दौरान एक मीटिंग में मोहित की मुलाकात सोनाक्षी के चचेरे भाई मृणाल मित्तल से हुई और यह मुलाकात जल्द ही घनिष्ठता में बदल गई.
ठगे 135 करोड़ रुपए
दरअसल, मोहित गोगिया इतना चालाक और शातिर था कि वह एक ही मुलाकात में भांप लेता था कि किस अमीर इंसान को किस तरह की डील का औफर देना है. ताकि वह खुद ही उस के जाल में फंस सके. थोड़ी घनिष्ठता होने के बाद मोहित गोगिया ने सोनाक्षी बंसल के चचेरे भाई मृणाल मित्तल को भी गुरुग्राम के सेक्टर 63 का एक विकसित प्लौट 60 करोड़ रुपए में बेचने का वादा कर लिया.
इस तरह सोनाक्षी की 75 करोड की डील और मृणाल मित्तल की 60 करोड़ की डील को मिला कर मोहित एक ही परिवार को दोनों सौदों से लगभग 135 करोड़ रुपए ऐंठने का प्लान तैयार कर चुका था. उस ने इस पर अमल भी कर दिया. सेक्टर 63 के प्लौट के पेपर देने के बाद मृणाल ने मोहित को रकम भी दे दी.
दिसंबर, 2024 पूरा हो चुका था, लेकिन मोहित गोगिया सोनाक्षी और मृणाल मित्तल को उन की प्रौपर्टी ट्रांसफर कराने में कोई न कोई आनाकानी कर रहा था. गोगिया के वादे अब हर बार नए बहानों में बदलने लगे.
गोगिया ने पहले नवंबर 2024 में इनकम टैक्स छापों का हवाला दिया था और मार्च 2025 तक दोनों संपत्तियों का कब्जा सौंपने का वादा किया. लेकिन इनकम टैक्स की रेड में उस की संपत्ति और कमाई गई रकम अधिकारियों के हाथ लग गई.
मोहित गोगिया से 2 महीने बाद भी कब्जा नहीं मिला तो सोनाक्षी और उस के परिवार ने उस पर दबाव बनाना शुरू कर दिया. तब उस ने एक नई कहानी सुना दी. गोगिया ने कहा कि उस के ऊपर बैंक का 1.3 करोड़ रुपए का एक कर्ज बकाया है, जब तक वह कर्ज पूरा नहीं हो जाता, बैंक प्रौपर्टी ट्रांसफर नहीं करेगा. वह जल्द ही बैंक में जमा कराने के लिए रकम का इंतजाम कर लेगा.
सोनाक्षी व उन का परिवार अब देर नहीं करना चाहता था. गोविंद बंसल ने इस रकम को चुकाने के लिए अपने पास से इस रकम का एक चैक जारी कर दिया, ताकि मोहित गोगिया रकम अदा कर ट्रांसफर की काररवाई को आगे बढा सके. कुछ रोज बाद मोहित गोगिया ने सोनाक्षी को वे कागजात और चाबियां दे दीं, जो उन की प्रौपर्टी की थीं.
गोगिया ने जिन दस्तावेजों को संपत्ति के असली कागजात बताया था, उन्हें ले कर जब वे संबंधित 9 और 9ए बंगले पर पहुंचे तो उन्हें वहां कब्जा नहीं मिला. करोड़ों की रकम देने के बावजूद भी जब उन्हें कब्जा नहीं मिला तो उन्होंने मई में गोगिया से आमनेसामने बात की.
सोनाक्षी ने साफ कह दिया कि अगर वह प्रौपर्टी पर कब्जा नहीं दिला सकता है तो उन की रकम वापस कर दे. लिहाजा गोगिया ने भुगतान की गई रकम के बदले पोस्टडेटेड चैक थमा दिए और कहा कि अगर इस महीने के अंत तक कब्जा न मिले तो इन्हें भुना लेना.
मई का महीना भी पूरा हो गया, लेकिन सोनाक्षी को अमृता शेरगिल मार्ग की प्रौपर्टी का कब्जा नहीं मिला. उन्होंने जब दिए गए चैक बैंक में डाले तो चैक भी बाउंस हो गए.
बंसल व अग्रवाल परिवार समझ गया कि उन के साथ बहुत बड़ा फ्रौड हुआ है. क्योंकि काफी प्रयास करने के बाद भी उन्हें मोहित गोगिया कहीं नहीं मिल रहा था.
आखिरकार बंसल परिवार ने दिल्ली के पुलिस आयुक्त से जून 2025 में संपर्क किया और सारी बात बता कर मोहित गोगिया के खिलाफ जालसाजी करने की एक शिकायत दी. चूंकि यह मामला जिस तरह का था, उस की जांच आर्थिक अपराध शाखा करती है, लिहाजा पुलिस आयुक्त ने यह मामला ईओडब्लू को ट्रांसफर कर दिया.
एक तेजतर्रार एसीपी की निगरानी में जांच दल का गठन भी कर दिया गया. जांच दल ने सारे दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद अमृता शेरगिल मार्ग पर हरेभरे नीम और गुलमोहर के पेड़ों के बीच बनी कोठी नंबर 9 और उस के बगल में स्थित 9ए का भौतिक निरीक्षण किया.
सोनाक्षी बंसल को बेचने के लिए औफर की गई कोठी नंबर 9 खाली पड़ी थी, जबकि 9ए में नेमप्लेट और बाहर खड़ी एसयूवी गाडिय़ां साफतौर पर वहां किसी के रहने का संकेत दे रही थीं.
पुलिस टीम को बाहर तैनात सुरक्षा गार्ड शंभू ने बताया कि मालिक की कुछ साल पहले मौत हो चुकी है और अब उन की पत्नी, बेटी व परिवार के अन्य लोग रहते हैं. खुद को मालिक की बेटी बताने वाली एक महिला ने संपत्ति की बिक्री के बारे में कुछ भी जानकारी होने से साफ इनकार किया और कहा कि ये बंगला बरसों से उन के परिवार के पास है.
लूटे लोगों के सपने
पुलिस टीम जब सोनाक्षी द्वारा बताए गए मोहित गोगिया के पते पर राजेंद्र नगर पहुंची तो मोहित और उस की पत्नी श्वेता गोगिया वहां नहीं मिले. आसपास के लोगों से पूछताछ हुई तो बताया गया कि उस इमारत की तीसरी मंजिल पर बने इस भव्य घर में लग्जरी गाडिय़ों से आनेजाने वाले लोगों का तांता हमेशा लगा रहता है. इन्हें देख कर हर कोई हैरान रहता था.
पुलिस टीम समझ गई कि गिरफ्तारी के डर से मोहित गोगिया फरार हो गया है. जिस वक्त ईओडब्लू की टीम मोहित को इधरउधर तलाश रही थी, उस वक्त मोहित गुरुग्राम में जालसाजी के एक और कारनामे को अंजाम दे रहा था.
दरअसल, दिल्ली की ठंडी रातों में जब शहर सो रहा था, तब कागजों पर एक ऐसी कहानी रची जा रही थी, जो कई लोगों के सपनों को लूटने वाली थी. गुरुग्राम के आलीशान डीएलएफ कैमेलियास की एक ऐसी प्रौपर्टी, जो थी ही नहीं, उसी के नाम पर 12 करोड़ रुपए की ठगी का खेल खेला गया. यह कोई मामूली धोखाधड़ी नहीं थी, बल्कि एक संगठित अपराध, जिस में जाली दस्तावेज, फरजी बैंक नीलामी और करोड़ों का काला खेल शामिल था.
इस साजिश का सूत्रधार भी मोहित गोगिया था. वही नाम, जो कहने को कारोबारी था, लेकिन अंदर से ठगों की पूरी फौज का सेनापति था. उस के साथ थे ऐसे चेहरे, जो बैंक खातों को हथियार और भरोसे को शिकार बनाते थे.
शिकायतकर्ता को दिखाए गए एसबीआई के नीलामी कागज, सेल सर्टिफिकेट और कवरिंग लेटर सब कुछ नकली होता था. लेकिन पेशकश इतनी लुभावनी होती थी कि शक की गुंजाइश ही नहीं बचती थी.
हुआ यूं कि दिल्ली की रहने वाली बबीता मित्तल ने दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के डीसीपी आदित्य गौतम से मिल कर 13 जून, 2025 को एक शिकायत दर्ज कराई.
उन्होंने शिकायत में बताया कि अगस्त 2024 में भरत छाबड़ा नाम के उन के एक जानकार ने उन की मुलाकात मोहित गोगिया और उस की पत्नी श्वेता गोगिया से कराई थी, जो मैसर्स एमजी लीजिंग ऐंड फाइनैंस नाम की एक फर्म चलाते हैं. जानपहचान के कुछ समय बाद गोगिया दंपति ने बबीता मित्तल के पति से संपर्क किया और उन्हें औफर दिया कि वे बैंकों द्वारा नीलाम की गई संपत्तियों को खरीदने में उन की मदद कर सकते हैं.
चूंकि मित्तल दंपति खुद भी रियल एस्टेट के धंधे में हैं, लिहाजा अच्छे पैसे कमाने के चक्कर में वे गोगिया दंपति की बातों में आ गए. मोहित गोगिया ने बताया कि उन की फाइनैंस कंपनी ने लगभग 27 करोड़ रुपए में गुडग़ांव के सेक्टर 42, डीएलएफ गोल्फ कोर्स कैमेलियास के टावर 2 की 20वीं मंजिल पर 220 नंबर वाली संपत्ति बैंक से खरीदी थी.
उन्होंने कहा कि बबीता मित्तल को सह-खरीदार के रूप में जोड़ा जाएगा और बाद में बैंक द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र के माध्यम से उन्हें एकमात्र खरीदार बना दिया जाएगा.
अगस्त, 2024 और अक्तूबर, 2024 के बीच बबीता मित्तल ने आरटीजीएस ट्रांजैक्शन और डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से मोहित की फर्म मैसर्स एमजी लीजिंग ऐंड फाइनैंस के बैंक खाते में 12.04 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए.
भरोसा दिलाने के लिए बबीता को कई दस्तावेज दिए गए थे, जिन में मालिकाना हक का सबूत, नीलामी का विवरण, कब्जा पत्र, भुगतान की रसीदें और संपत्ति की चाबियां शामिल थीं, जो बाद में जाली और मनगढ़ंत पाए गए.
मोहित गोगिया ने बबीता के साथ 21 मई, 2025 को एक समझौता किया और लगभग 12.19 करोड़ रुपए का चैक जारी किया, लेकिन इस के बावजूद मोहित गोगिया ने बबीता को चैक बैंक में लगाने से यह कहते हुए मना कर दिया कि उस में फंड नहीं है.
इसी के बाद बबीता ने क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई. बबीता की शिकायत के आधार पर डीसीपी आदित्य गौतम ने क्राइम ब्रांच थाने में अपराध संख्या 322 पर बीएनएस की धारा 318(4) /336(3) /338/ 340(2) /61(2) /3(5) पर मामला दर्ज करवा कर तेजतर्रार एसीपी रमेश लांबा के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन कर दिया.
मोहित गोगिया व दूसरे आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसीपी रमेश लांबा ने एक विशेष टीम का गठन कर दिया, जिस में इंसपेक्टर सतेंद्र पूनिया और सोहन लाल की अगुवाई में एसआई नीरज चौधरी, राकेश कुमार, राकेश शर्मा, मुकेश कुमार, संजय, एएसआई विनय, हैडकांस्टेदबल सतेंद्र, रविंदर, आशीष, दलबीर, सुरेंद्र, विक्रम और कांस्टेबल अंकित कुमार, रवि व अमित कुमार को शामिल किया गया.
गोगिया हुआ अरेस्ट
पुलिस टीम ने तेजी के साथ अपनी जांच शुरू कर दी. जांच के दौरान बैंकों से जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि आरोपियों द्वारा दिखाए गए सभी दस्तावेज, जिन में सेल सर्टिफिकेट, कवरिंग लेटर और नीलामी की रसीदें, जाली थे.
बैंक स्टेटमेंट से पुष्टि हुई कि 12.04 करोड़ आरोपी की प्रोप्राइटरशिप फर्म के नाम वाले बैंक अकाउंट में अगस्त और अक्तूबर 2024 के बीच आरटीजीएस और डिमांड ड्राफ्ट के जरिए जमा किए गए थे.
एसीपी रमेश लांबा की टीम मोहित गोगिया व दूसरे आरोपियों की टेक्निकल सर्विलांस और मैनुअल इंटेलिजेंस के आधार पर पीछा करने लगी. इसी के आधार पर दिल्ली-एनसीआर, भोपाल और मुंबई में कई बार छापेमारी की गई, लेकिन वे हर जगह से पहले ही फरार हो गए.
आरोपी मोहित गोगिया का पता तब चला, जब वह मुंबई से उत्तराखंड की ओर भाग रहा था. 22 नवंबर, 2025 को उत्तराखंड में ऋषिकेश-देहरादून रोड पर डोईवाला के पास टीम ने उसे पकड़ लिया.
आरोपी ने अपने साथियों अभिनव पाठक, भरत छाबड़ा, विशाल मल्होत्रा, सचिन गुलाटी, राम सिंह उर्फ बाबाजी और अन्य की मिलीभगत का खुलासा किया तो पुलिस टीम ने तकनीकी विश्लेषण के आधार पर छापेमारी की और 4 सहआरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया.
सहआरोपी विशाल मल्होत्रा और सचिन गुलाटी ने जानबूझ कर अपने बैंक खातों का इस्तेमाल धोखाधड़ी के पैसे को इधरउधर करने (मनी लौंड्रिंग) के लिए करने दिया था.
सहआरोपी अभिनव पाठक ने मुख्य आरोपी मोहित गोगिया का परिचय बबीता मित्तल से कराया था और धोखाधड़ी वाली डील में मदद की थी. उसे ठगी गई रकम का कुछ हिस्सा भी मिला था.
सहआरोपी भरत छाबड़ा ने जाली दस्तावेज तैयार करने में मदद की थी. वह जाली दस्तावेज बनाने का एक्सपर्ट है. पुलिस जांच के दौरान ठगी गई रकम पाने वाले कई अकाउंट, फर्म और लोगों की पहचान की गई है.
पूरे देश में फैले इस नेटवर्क की जांच चल रही है. गिरफ्तार किए गए लोगों ने जानबूझ कर ठगी गई रकम का लेनदेन किया. एक बड़ी आपराधिक साजिश के तहत उन्होंने इस रकम को वांटेड आरोपी राम सिंह और उस की फर्म बाबाजी फाइनैंस के जरिए ऊंचे ब्याज पर घुमाया.
पूछताछ में पता चला कि पूरा गैंग बहुत कम कीमत पर प्रीमियम प्रौपर्टी देने का वादा कर के लोगों को फंसाता था. शिकार के फंसने पर उन्हें नकली दस्तावेज, फरजी अलौटमेंट लेटर और बोगस रजिस्ट्रैशन ड्राफ्ट दिखाए जाते थे.
पार्टी का भरोसा जीतने के बाद उन से पैसे को अलगअलग खातों में ट्रांसफर करवाया जाता था और उस के बाद फ्रौड नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों में रकम को ट्रांसफर किया जाता था.
मुनाफा दिखाने के लिए इस फंड को कई शेल कंपनियों के खातों में घुमाया जाता था. लोगों को ज्यादा ब्याज पर कैश के लेनदेन के लिए ‘बाबाजी फाइनैंस’ का इस्तेमाल करने का औफर दिया जाता था.
इस मामले में गिरफ्तार विशाल मल्होत्रा (42) पेशे से प्रौपर्टी डीलर है. उस ने जानबूझ कर अपने बैंक अकाउंट का इस्तेमाल करने दिया, जिस के एवज में कमीशन लिया. उसे सभी गैरकानूनी गतिविधियों की जानकारी थी. उस के साथ पकड़ा गया सचिन गुलाटी (40) राम सिंह के कहने पर जानबूझ कर लेयरिंग और कैश निकालने में मदद करता था.
पकड़े गए दवा वितरक अभिनव पाठक (35) ने बबीता की पहचान भरत छाबड़ा से करवाई, जिस ने मोहित से डील करवाने में मदद की. जबकि भरत छाबड़ा (33) ने दस्तावेजों में हेराफेरी (फरजीवाड़ा) करने में मदद की थी.
मोहित गोगिया से पूछताछ के बाद पश्चिम दिल्ली के एक मजबूत फाइनैंसर 49 वर्षीय राम सिंह की भूमिका की भी जांच कर रही है, जो इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. आठवीं तक पढ़े राम सिंह ने अपनी पत्नी के साथ मिल कर 2005 में सुभाष नगर में ‘बाबाजी फाइनैंस’ नाम से एक निजी ऋण फर्म शुरू की थी, जो अनसिक्योर्ड लोन देने और प्रौपर्टी ब्रोकरेज का काम करती थी.
सिंडिकेट ऐसे करता काम
पुलिस के सामने दिए बयानों में गोगिया ने दावा किया कि वह 2022 में राम सिंह से मिला था और अच्छे रिटर्न के लिए उस ने अपना पैसा बाबाजी फाइनैंस में लगाया था. गोगिया ने पुलिस को बताया कि जुलाई-अगस्त 2023 में राम सिंह ने सुझाव दिया कि हमें बाजार से बड़ी मात्रा में पैसा इकट्ठा करना चाहिए और विवादित व बैंकों के पास गिरवी रखी गई संपत्तियों को बेचने के नाम पर एडवांस पैसे वसूलने की योजना बनाई.
एक तरफ जहां मोहित गोगिया सार्वजनिक बैंक रिकौर्ड से जब्त संपत्तियों की पहचान करता, संभावित शिकार तलाशता और फरजी दस्तावेज तैयार करता था, वहीं अन्य लोग फरजी खाते दिलाने में मदद करते थे. इस काम के बदले गोगिया को ठगी गई कुल रकम का 40 प्रतिशत हिस्सा मिलता था.
गोगिया ने पुलिस को यह भी बताया कि अगर कोई उन के खिलाफ पुलिस में शिकायत करता या कोर्ट केस दर्ज करता तो वे किसी नए व्यक्ति को फंसा कर उस के पैसों से पुराने वाले का हिसाब चुका देते थे.
वैसे गिरोह के लोग अपने खिलाफ काररवाई करने वाले लोगों को इस तरह से कानूनी दांवपेंचों में फंसा देते थे कि अपना पैसा भूल कर लोग केवल सालों तक चलने वाली कानूनी लड़ाई में ही उलझ जाते थे.
विवेक गोगिया और उस की कंपनी एमजी लीजिंग एंड फाइनैंस पर 2024 में पड़े इनकम टैक्स छापों ने इस पूरे खेल पर पानी फेर दिया. गोगिया को कुछ बकाया चुकाने के लिए 3.5 करोड़ रुपए देने पड़े, जिस से वह पूरी तरह कंगाल हो गया और यह स्थिति ऐसे वक्त में आई, जब वह अपने सब से बड़े ग्राहक यानी यूनिटी ग्रुप के परिवार को फंसाने की कोशिश कर रहा था.
उस ने पुलिस को बताया कि इस के बाद लोगों ने पैसे लौटाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया और आपराधिक मामले दर्ज होने लगे. गोगिया की गिरफ्तारी के कुछ दिनों बाद दिल्ली पुलिस ने राम सिंह को जांच में शामिल होने को कहा, लेकिन उस ने 5 महीने तक समन को ही नजरअंदाज कर दिया.
इस के बाद कोर्ट ने गैरजमानती वारंट जारी कर दिया. हालांकि राम सिंह अभी गिरफ्तार नहीं हुआ है, लेकिन पूछताछ के दौरान उस ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया कि उस ने गोगिया को केवल उस के प्रौपर्टी बिजनैस में निवेश के लिए पैसे ट्रांसफर किए थे.
क्राइम ब्रांच की टीम इस पूरे नेटवर्क में शामिल लोगों के साथ मास्टरमाइंड राम सिंह उर्फ बाबाजी का पता लगाने की कोशिश में जुटी है. High-Profile Property Fraud






