Indore Kidnapping Case. लिवइन रिलेशन में साथ रह रहे जेसी और इशांत ने कमाई की जो योजना बनाई थी, उस का रास्ता जेल की ओर जाता था. फिर भी वे उस रास्ते पर चल पड़े.
5 मई, 2014 की बात है. ‘मेहराना’ नाम से होम इंटीरियर का कारोबार करने वाले अनिल राजगुरु अपने भतीजे अभिजीत की शादी में व्यस्त थे. शादी का कार्यक्रम एक मैरेज गार्डन में था. करीब साढ़े 3 बजे उन के मोबाइल की घंटी बजी तो उन्होंने स्क्रीन पर फोन करने वाले का नंबर देखा. फोन उन के बेटे आशीष का था. उन्होंने फोन रिसीव कर के पूछा, ‘‘हां बेटा, कहो क्या बात है?’’
लेकिन दूसरी तरफ से एक अपरिचित आवाज आई, ‘‘तुम्हारा बेटा आशीष हमारे कब्जे में है. अगर उसे छुड़ाना चाहते हो तो 2 करोड़ रुपए का इंतजाम कर लो, वरना उस की लाश भी नहीं मिलेगी. हम फिर फोन करेंगे.’’
दूसरी ओर से फोन काट दिया गया तो अनिल ने फिर से नंबर चेक किया. नंबर उन के बेटे आशीष का ही था. फोन करने वाले की बात सुन कर वह विचलित तो हुए, पर उन्होंने सोचा कि शायद कोई मजाक कर रहा होगा.
अनिल ने मजाक समझ कर बात को भले ही उतनी गंभीरता से नहीं लिया, पर आशीष की खोज शुरू कर दी. वह मैरेज गार्डन में कहीं नहीं था. जरा सी देर में यह बात वहां सब के बीच फैल गई. सभी आशीष को खोजने लगे. जब शाम 6 बजे तक आश्ीष की कोई खबर नहीं मिली तो अनिल अपने घर वालों के साथ क्षेत्रीय थाना राजेंद्रनगर पहुंचे. उन्होंने थानाप्रभारी को बेटे के अपहरण और फिरौती मांगने की बात बता कर रिपोर्ट लिखा दी.






