True Crime Story. जावेद और गौहर अच्छे दोस्त ही नहीं, बल्कि साझे में जरदोजी का बिजनैस भी करते थे. इसी दौरान जावेद की बहन रुखसाना से गौहर की आंखें चार हो गईं. एक रात जावेद ने गौहर और रुखसाना को आपत्तिजनक हालत में देख लिया. फिर…

जिला फर्रूखाबाद के थाना  मउ दरवाजा क्षेत्र में एक गांव है हथियापुर. इस के पास कायमगंज रोड पर एक भट्ठा है, जिस का नाम है बजरंग भट्ठा. सुनसान जगह पर खेतों के बीच होने की वजह से भट्ठे के पास जरूरतमंद लोग ही आतेजाते हैं. भट्टे का मुनीम अरविंद कुमार सुबह को भट्ठे पर जाता है और कामकाज के बाद शाम को घर लौट आता है.

21 जुलाई 2014 को सुबह साढ़े 7 बजे जब अरविंद कुमार भट्ठे पर जा रहा था तो उस ने भट्ठे के पास के एक खेत में सिर कटी एक लाश पड़ी देखी. मृतक के शरीर पर केवल कच्छा बनियान था. अलबत्ता पास ही कुछ कपड़े जरूर पड़े थे. लाश देख कर अरविंद डर गया. उस ने उसी समय अपने मोबाइल से फोन कर के उस लाश से संबंधित सूचना थाना मउ दरवाजा को दे दी.

उस दिन सोमवार था, गंगा स्नान का दिन. थाना मउ दरवाजा के थानाप्रभारी राघवन सिंह पुलिस टीम के साथ घटियाघाट पर ड्यूटी के लिए गए हुए थे. थाने से उन के सीयूजी नंबर पर बजरंग भट्ठे के पास सिर कटी लाश पड़ी होने की सूचना दी गई.

खबर मिलते ही थानाप्रभारी राघवन सिंह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. सिर कटी लाश लगभग 30 वर्षीय व्यक्ति की थी. उस के शरीर पर केवल कच्छा बनियान था. जबकि लाश के पास ही कुछ कपड़े पड़े हुए थे. पुलिस ने उन कपड़ों को देखा, तो लगा उन में एक जोड़ी कपड़े मृतक के रहे होंगे. बाकी कपड़ों को देख कर लग रहा था जैसे उन्हें किसी बैग वगैरह से निकाल कर वहां डाले गए हों.

राघवन सिंह ने अनुमान लगाया कि हत्यारों ने वे कपड़े मृतक के बैग से निकाल कर वहां डाल दिए होंगे और मय बैग के उस में रखा कीमती सामान अपने साथ ले गए होंगे.

पुलिस ने उन कपड़ों की तलाशी ली तो एक एटीएम कार्ड के अलावा कुछ नहीं मिला. एटीएम कार्ड आईसीआईसीआई बैंक का था और उस पर धारक का नाम गौहर अली लिखा था. पुलिस ने आसपास के खेतों में मृतक का कटा सिर खोजने की काफी कोशिश की, लेकिन वह कहीं नहीं मिला.

प्राथमिक जांच के बाद पुलिस ने एटीएम कार्ड और कपड़े कब्जे में ले लिए और लाश का पंचनामा कर के उसे पोस्टमार्टम के लिए फर्रूखाबाद मोर्चरी भिजवा दिया.

एटीएम कार्ड से मृतक का पता चल सकता था, इसलिए थाने लौट कर राघवन सिंह ने सब से पहले एटीएम कार्ड की जांच कराई. पता चला कि वह कार्ड जयपुर के मोहल्ला बदनापुरा निवासी गौहर अली के नाम पर था. बदनापुरा जयपुर के थाना गलता गेट क्षेत्र में आता था. राघवन सिंह ने थाना गलता गेट की पुलिस  से रिक्वेस्ट कर के गौहर अली के परिवार से संपर्क करने को कहा.

स्थानीय पुलिस ने मोहल्ला बदनापुरा जा कर संपर्क किया तो गौहर अली के पिता शौकत अली घर पर ही मिल गए. उन्हें फर्रूखाबाद की घटना के बारे में बता दिया गया. उन का बेटा गौहर अली फर्रूखाबाद गया हुआ था. हत्या की बात सुन कर पूरा परिवार सन्न रह गया. शौकत अली दूसरे बेटे अनवर अली और कुछ लोगों के साथ अगले दिन यानी 22 जुलाई को फर्रूखाबाद पहुंच गए.

शौकत अली ने लाश के कपड़े और मृतक के शरीर पर तिल व अन्य निशानों को देख कर उस की शिनाख्त अपने बेटे गौहर अली के रूप में कर दी. पूरा माजरा समझने के बाद उन्होंने थाने में एक लिखित तहरीर दी, जिस में उन्होंने पैसों के लेनदेन के विवाद की वजह से बेटे की हत्या का आरोप उस के दोस्त जावेद पर लगाया. जावेद फर्रूखाबाद के ही मोहल्ला खटकपुरा इज्जत खां में रहता था.

तहरीर के मुताबिक जावेद ने ही गौहर को फोन कर के फर्रूखाबाद बुलाया था. वह 19 जुलाई की सुबह पहुंचा था. उस दिन रात को वह जावेद के घर रुका.

अगले दिन 20 जुलाई को वह जावेद के साथ थाना फर्रूखाबाद की असगर रोड पर रहने वाले अपने मामा आफाक उर्फ हद्दू के यहां भी गया. उस के बाद ही रात में किसी वक्त जावेद ने किन्हीं लोगों के साथ मिल कर गौहर की हत्या की होगी.

थाना प्रभारी राघवन सिंह ने शौकत अली की लिखित तहरीर के आधार पर जावेद के खिलाफ भादंवि की धाराओं 302 व 201 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया.

पोस्टमार्टम हो चुका था. लिखापढ़ी कर के पुलिस ने गौहर की लाश उस के पिता शौकत को सुपुर्द कर दी. शौकत अली बेटे की लाश ले कर अपने पैतृक गांव राजापुर जनपद कन्नौज चले गए.

जावेद को अपने खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की बात पता चली तो वह अपनी सफाई देने खुद मऊ दरवाजा थाने जा पहुंचा. थानाप्रभारी राघवन सिंह ने जावेद को हिरासत में ले कर पूछताछ की तो उस ने बताया कि 20 जुलाई रविवार की रात 8 बजे वह गौहर को बाइक पर बस अड्डे ले गया था. उस के साथ उस के मोहल्ले का ही कासिम भी था. उन्होंने गौहर को आगरा जाने वाली बस में बैठा दिया था.

बस रवाना होने से पहले ही गौहर ने उन दोनों को वापस भेज दिया था. गौहर भट्ठे के पास कैसे पहुंचा और उस की हत्या कैसे हुई, उसे नहीं पता. उस ने यह भी बताया कि जो बाइक उस के पास है वह उस ने जयपुर में गौहर के नाम से ली थी, लेकिन उस की किस्तें वह खुद भर रहा है. पैसे के लेनदेन के बारे में उस ने बताया कि गौहर के उस पर 5 हजार रुपए बाकी हैं. जावेद के अनुसार गौहर का असगर रोड निवासी कल्लू से किसी बात को ले कर विवाद चल रहा था.

थानाप्रभारी ने कल्लू से पूछताछ की, लेकिन उस की घटना में संलिप्तता का कोई सुराग नहीं मिला. उस क्षेत्र के लोगों से पूछताछ की गई तो पता चला कि घटना वाले दिन गौहर को जावेद व कासिम के साथ देखा गया था.

इस का मतलब यह था कि जावेद पुलिस को बरगलाने की कोशिश कर रहा था. यह पता चलने के बाद जावेद से कई चरणों में सख्ती के साथ पूछताछ की गई. अंतत: उस ने सारा सच उगल दिया.

जावेद से हुई पूछताछ के बाद जो कहानी पता चली वह कुछ इस तरह थी. शौकत अली उत्तर प्रदेश की इत्र नगरी कन्नौज के थाना सौरिख क्षेत्र के गांव राजापुर के रहने वाले थे. उन के परिवार में पत्नी रफीका बेगम के अलावा 2 बेटे और 3 बेटियां थीं.

उन के सब से बड़े बेटे अनवार का निकाह शहाना परवीन से हो चुका था. दोनों की कोई संतान नहीं थी. गौहर उर्फ रिंकू अभी अविवाहित था. बेटियों में शफीका, जरीना और निशात थीं. इन में केवल शफीका ही विवाहित थी.

शफीका की शादी लखनऊ निवासी रिजवान से हुई थी. वह जयपुर में रह कर जरदोजी का काम करता था.

शौकत के पास खेती की जमीन तो थी, लेकिन उस में खेती करने से कोई फायदा नहीं होता था. यह देख कर शौकत ने कुछ और करने की ठानी. उन के दोनों बेटे भी जवान और अपने पैरों पर खड़े होने लायक थे.

उन का दामाद रिजवान पहले से ही जयपुर में था और जरदोजी के काम में अच्छाभला कमा लेता था. शौकत ने जयपुर जा कर जरदोजी के काम में अपनी किस्मत आजमाने की सोची. 10 साल पहले वह जयपुर चले गए और वहीं दामाद के साथ रह कर जरदोजी का काम करने लगे.

उन्होंने दोनों बेटों को भी इस काम में लगा दिया. इस तरह पूरा परिवार जयपुर में रहने लगा. पहले यह परिवार किराए के मकान में रहता था, बाद में शौकत ने गाल्टा गेट थाना क्षेत्र के बदनापुरा मोहल्ले में अपना मकान बनवा लिया.

जब अच्छी आमदनी होने लगी तो गौहर ने अपना खुद का जरदोजी का कारखाना खोल लिया. लगभग 5 महीने से जावेद उसी के कारखाने में काम करता था. जावेद फर्रूखाबाद के मोहल्ला खटकपुरा इज्जत खां में रहता था. उस के परिवार में पिता नियामतुल्ला के अलावा मां शाहीन बेगम, 3 भाई अजहर, आवेद व उबैद और 4 बहनें थीं. 3 बहनों का निकाह हो चुका था. जबकि सब से छोटी बहन रुखसाना (परिवर्तित नाम) अविवाहित थी.

जावेद ने अपने काम और व्यवहार से जल्द ही गौहर का विश्वास हासिल कर लिया. दोनों के बीच जल्द ही अच्छीभली दोस्ती हो गई. जावेद ने फर्रूखाबाद में जरदोजी का काम कराने की बात गौहर के दिमाग में डाली तो उसे उस की बात जम गई. वैसे भी फर्रूखाबाद में जरदोजी का काम बड़े पैमाने पर होता था. यह काम करने वालों की वहां कोई कमी नहीं थी.

समय पर अच्छा काम होने की लालसा में गौहर ने जावेद को फर्रूखाबाद में जरदोजी का काम कराने का जिम्मा सौंप दिया. इस के लिए उस ने अपनी होंडा बाइक भी जावेद को दे दी.

इस के बाद जावेद जयपुर से गौहर से जरदोजी का काम ले कर फर्रूखाबाद में करने वालों को बांटने लगा. काम पूरा होने पर जावेद पूरा माल जयपुर पहुंचवा देता था. काम पूरा हो जाता तो गौहर कारीगरों को देने वाली रकम उसे दे देता. काम अच्छा चलने लगा, तो गौहर और जावेद की उम्मीदों को नए पंख लग गए.

काम के चक्कर में गौहर भी फर्रूखाबाद आनेजाने लगा. वह जावेद के घर पर ही रुकता था. हालांकि उस के मामा आफाक उर्फ हद्दू फर्रूखाबाद में असगर रोड पर रहते थे. वह उन के घर जा कर मामा व ननिहाल वालों से मिल तो आता था लेकिन वहां रुकता नहीं था.

गौहर करीबकरीब हर हफ्ते ही फर्रूखाबाद आता था. जावेद के घरवालों से उस की खूब पटती थी. वैसे भी उसी की वजह से जावेद का काम अच्छा चल रहा था. घर पर जावेद की छोटी बहन रुखसाना ही ऐसी थी जो मेहमानों की खातिरतवज्जो करती थी.

गौहर के बारबार आने से उस से रुखसाना का ही ज्यादा वास्ता पड़ता था. इसी वजह से रुखसाना उस से काफी खुल गई थी. वह उस से बात करते मुसकराती रहती थी. उस की मुसकराहट और अल्हड़ता गौहर को मन भाने लगी थी. कामधंधे के चक्कर में गौहर की शादी की उम्र भले ही निकल गई थी, लेकिन वह था तो कुंवारा ही.

रुखसाना को देख कर उस के अरमान मचल उठे थे. अचानक ही उसे सारी दुनिया उसे अच्छी लगने लगी थी. धीरेधीरे रुखसाना उस की चाहत बन गई.

रुखसाना जब भी उस के सामने आती तो वह उसे एकटक निहारता रह जाता. वह क्या बोलती क्या कहती, उसे सुध ही नहीं रहती थी. जब रुखसाना ने उसे इस स्थिति में देखा तो वह झेंपने लगी. लेकिन जल्द ही उसे गौहर की इस हालत की असलियत पता चल गई.

धीरेधीरे वह भी गौहर की चाहत के बारे में जान गई. गौहर कोई बात कहता या उस के साथ शरारत करता, तो वह शर्म से दोहरी हो जाती थी. मुंह से शब्द नहीं निकलते थे और वह वहां से मंदमंद मुसकराते हुए चली जाती थी.

रुखसाना भी दिल से गौहर को अपना मान चुकी थी. इस बात को गौहर भी महसूस करने लगा था कि रुखसाना भी उसे दिल से चाहने लगी है.

दोनों एकदूसरे से दूर होते तो उन के दिल तड़प उठते और पास होते तो दिल को सुकून मिलता, आंखों को ठंडक पहुंचती. दोनों एकदूसरे से अपने दिल की बात कहने को आतुर थे, लेकिन पहल नहीं कर पा रहे थे.

इस बार जब गौहर आया तो उसे मौका भी मिल गया. उस दिन घर में कम लोग थे, वे भी दोपहर का खाना खाने के बाद सो गए थे. जबकि गौहर ऊपरी मंजिल पर टीवी देख रहा था. उसे अकेला बैठा देख रुखसाना भी वहां पहुंच गई. वह भी गौहर के साथ बेड पर बैठ कर टीवी देखने लगी. उस समय गौहर एक रोमांटिक फिल्म देख रहा था. फिल्म में कोई रोमांटिक सीन आता तो दोनों कनखियों से एकदूसरे को देखने लगते, उन के होंठ मुसकरा उठते. यह क्रम काफी देर यूं ही चलता रहा.

कुछ देर बाद गौहर ने बेड पर लेट कर अपना सिर रुखसाना की गोद में रख दिया. उस की इस अप्रत्याशित हरकत से वह पल भर के लिए चौंकी, लेकिन जब उस ने गौहर की आंखों में प्यार का सागर उमड़ते देखा तो वह विरोध न कर सकी. इस शरारत पर उस ने गौहर से पूछा, ‘‘तुम ने किस अधिकार से मेरी गोद में अपना सिर रख दिया?’’

गौहर उस की आंखों की गहराइयों में उतरते हुए बोला, ‘‘यह सवाल तुम अपने दिल से क्यों नहीं पूछतीं, जवाब खुद ब खुद मिल जाएगा.’’

‘‘अधिकार तुम जता रहे हो, और पूछूं मैं अपने दिल से?’’ रुखसाना थोड़ा रुक कर बोली, ‘‘कोई जबरदस्ती है, मैं क्यों पूछूं अपने दिल से? तुम्हें बताना हो तो बताओ, नहीं तो मेरे ठेंगे से.’’ रुखसाना गौहर को ठेंगा दिखा कर दूसरी ओर देखने लगी.

गौहर जानता था कि रुखसाना नाराजगी का नाटक कर रही है, जबकि हकीकत में वह अपने दिल का हाल बयां कर देना चाहती है. गौहर यह भी जानता था कि इस के लिए पहल उसे ही करनी होगी. इसलिए वह उस का हाथ अपने हाथों में ले कर बोला, ‘‘रुखसाना, मैं तुम से प्यार करता हूं, अपनी जान से भी ज्यादा प्यार. मुझे यह भी मालूम है कि तुम भी मुझे दिल से चाहती हो, लेकिन कह नहीं पा रही हो. इसी प्यार के नाते मैं तुम पर अधिकार जता रहा था.’’

गौहर ने रुखसाना के जिस हाथ को अपने हाथों में ले रखा था, वह उस हाथ को उस के हाथों सहित अपने सीने पर रखती हुई बोली, ‘‘मैं जानती हूं, तुम ने प्यार के अधिकार से ही ऐसा किया है, लेकिन तुम प्यार की बात जुबां पर नहीं ला रहे थे. तुम से प्यार का इजहार करवाने के लिए ही मैं ने तुम्हें उकसाया था ताकि तुम अपने दिल की बात बेहिचक कह सको. गौहर… आई लव यू टू.’’

रुखसाना ने उस के प्यार को स्वीकार कर के जवाब में प्यार के मीठे बोल बोले तो गौहर ने उसे अपनी बांहों में भर लिया. दोनों एकदूसरे के इतना करीब आ कर खुशी से झूम उठे. प्यार की खुशी में दोनों के तनमन मिले तो तन की गरमी का वेग बढ़ गया. नतीजतन वे उस राह पर उतर गए जो सामाजिक नजरिए से सही नहीं होती. लेकिन उन दोनों को इस की फिक्र नहीं थी.

दुनिया से बेपरवाह हो कर दोनों प्यार की उस नदी में बह गए जिस का कोई छोर नहीं होता.

मन के साथ तन का मिलन हुआ तो उन के चेहरों पर अजीब सी खुशी झलकने लगी. उस दिन के बाद तो यह खुशी अकसर उन के चेहरों पर नजर आने लगी. रात में सब के सो जाने के बाद रुखसाना गौहर के पास उस के कमरे में आ जाती और दोनों मनचाही करते. मस्ती का खजाना लुटाने के बाद वह अपने कमरे में चली जाती. इस की किसी को कानोेंकान खबर तक नहीं होती.

18 जुलाई को जावेद ने फोन कर के गौहर को जयपुर से फर्रूखाबाद बुलाया. वह 19 जुलाई की सुबह फर्रूखाबाद पहुंच गया. काम के सिलसिले में दोनों पूरे दिन भागदौड़ करते रहे. गौहर ने चौक क्षेत्र स्थित एक एटीएम से कई बार में 50 हजार रुपए निकाले. उसे इन पैसों की किसी काम के लिए जरूरत थी.

रात में गौहर हमेशा की तरह जावेद के घर रुका. रात में सब के सो जाने के बाद रुखसाना गौहर के कमरे में पहुंच गई और रोजाना की तरह दोनों मस्ती के खेल में डूब गए.

रात में जावेद बाथरूम जाने के लिए उठा तो उसे जावेद के कमरे से आवाजें आती सुनाई दीं. उस ने अंदर झांक कर देखा तो उस की आंखें हैरत से फटी रह गईं. उस का दोस्त गौहर उस के घर की इज्जत से खेल रहा था.

यह देख कर वह गुस्से से भर उठा. लेकिन किसी तरह उस ने खुद पर काबू पाया और वहां से अपने कमरे में चला आया. उसे दोस्ती में इतना बड़ा धोखा मिलने की कतई उम्मीद नहीं थी. इस धोखे से जावेद इतना तिलमिला उठा कि उस ने गौहर की हत्या करने की ठान ली. इसी उधेड़बुन में वह पूरी रात नहीं सो सका.

अगले दिन यानी 20 जुलाई की सुबह वह उठ कर बाइक से बाजार गया और 70 रुपए में एक छुरी खरीद कर अपनी बाइक की डिक्की में डाल ली. इस के अलावा उस ने नींद की गोलियां भी खरीद कर, पीसने के बाद जेब में रख लीं. दिन में गौहर और जावेद काम के सिलसिले में घूमते रहे. इसी बीच गौहर ने एटीएम से कई बार पैसे निकाले. अब कुल मिला कर उस के पास एक लाख रुपए की रकम हो गई थी.

जावेद के मोहल्ले में ही कासिम नाम का एक युवक रहता था. वह फर्रूखाबाद थाना कोतवाली के पास बूरा वाली गली में स्थित एक होटल में काम करता था. जावेद उस होटल में जाता रहता था. कासिम उसी के मोहल्ले में रहता था. जावेद उसे चेले के रूप में अपने साथ रखने लगा था. वह शराब पीता या होटल में खाता था तो कासिम को भी शामिल कर लेता था.

20 जुलाई को जब जावेद गौहर के साथ था तो कासिम उसे मिल गया. उस ने कासिम को भी अपनी बाइक पर बैठा लिया. रात में गौहर को जयपुर वापस जाना था, इसलिए उस ने अपना बैग साथ में ले रखा था. बैग में उस के कपड़े व एटीएम से निकाले गए एक लाख रुपए थे.

कासिम को साथ लेने के बाद जावेद और गौहर असगर रोड गए. गौहर को जाने से पहले अपने मामा आफाक से मिलना था. वहां जा कर कासिम बाहर रोड पर ही उतर गया. जबकि गौहर जावेद के साथ मामा के घर चला गया. वहां से दोनों देर शाम निकले. कासिम बाहर ही उन का इंतजार कर रहा था. वह फिर बाइक पर उन के साथ हो लिया.

रात 8 बजे जावेद दोनों को ले कर चौक स्थित एक जूस के स्टाल पर गया. वहां उस ने गौहर के गिलास में नींद की गोलियों का पाउडर मिला दिया. जूस पीने के बाद वह कासिम के साथ गौहर को बाइक पर बैठा कर कायमगंज रोड पर ले गया. तब तक गौहर अर्द्धमूर्छित हो गया था. जावेद ने सारी योजना पहले ही बना रखी थी. वह बाइक सड़क से 300 मीटर दूर बजरंग ईंट भट्ठे के पास एक खेत में ले गया. वहां उस ने गौहर को धक्का दे कर जमीन पर गिरा दिया.

जब जावेद ने डिक्की से छुरी निकाली तो उस की मंशा भांप कर कासिम उस का साथ देने से मना कर के जाने लगा. इस पर जावेद ने उसे धमकाया कि अगर वह उस का साथ नहीं देगा तो वह गौहर के साथसाथ उसे भी जान से मार देगा.

जावेद ने कासिम के साथ मिल कर गौहर को दबोच लिया. इस के बाद जावेद गौहर के सीने पर बैठ गया और साथ लाई तेज धारदार छुरी से गौहर का गला काटने लगा. अर्द्धमूर्छित होने की वजह से गौहर अपने बचाव में कुछ नहीं कर सका. जावेद ने गौहर के सिर को काट कर धड़ से अलग कर दिया. इस के बाद उस ने गौहर की कमीज और पैंट उस के शरीर से निकाल कर वहीं डाल दी.

उधर कासिम ने गौहर के बैग में रखे कपड़े निकाल कर जमीन पर फेंक दिए. बैग में रखे पैसे निकाल कर कुछ रुपए कासिम ने जावेद की आंख बचा कर अपने जेब में ठूंस लिए, बाकी पैसे उस ने जावेद को दे दिए.

जावेद ने गौहर के कपड़ों की तलाशी ली तो उस का मोबाइल मिल गया. जावेद ने खाली बैग में गौहर के कटे सिर को रखने के बाद उसी में हत्या में इस्तेमाल की गई छुरी और गौहर का मोबाइल डाला और बैग बंद कर दिया.

इस के बाद जावेद कासिम के साथ घटियाघाट पुल पर गया. वहां उन्होंने बैग से सिर, छुरी और मोबाइल निकाल कर गंगा नदी में फेंक दिए, साथ ही खाली बैग भी उसी नदी में फेंक दिया. तत्पश्चात दोनों अपने घर लौट आए.

लाश की शिनाख्त न हो पाए, इसी वजह से जावेद और कासिम ने गौहर का सिर काट कर गंगा नदी में फेंका था, लेकिन उन की एक गलती उन्हें भारी पड़ गई. तलाशी में वह गौहर का एटीएम कार्ड नहीं देख पाए, उसी एटीएम कार्ड से पुलिस लाश की शिनाख्त कर के उन तक पहुंच गई.

यह सच है कि गुनहगार कितनी सफाई से भी अपराध को अंजाम दे, कोई न कोई सुबूत छोड़ ही देता है, जो उस के गले का फंदा बन जाता है. यही जावेद और कासिम के साथ हुआ.

पुलिस ने जावेद से पूछताछ के बाद गौहर से लूटे गए 65 हजार रुपए और गौहर की होंडा बाइक उस के घर से बरामद कर ली.

गौहर के सिर की बरामदगी के लिए कई बार गोताखोरों को गंगा नदी में उतारा गया, लेकिन सिर बरामद नहीं हो सका.

थानाप्रभारी राघवन सिंह ने 26 जुलाई की शाम 4 बजे कासिम को उस के घर से गिरफ्तार कर लिया. उस के घर से लूटे गए 15 हजार रुपए भी बरामद कर लिए.

बाद में पुलिस ने इस केस में भादंवि की धारा 404/34 और बढ़ा दी. साथ ही केस में जावेद के साथ ही कासिम को भी नामजद कर दिया गया. इस के बाद दोनों आरोपियों को अदालत पर पेश कर के न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.  True Crime Story

— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.

—  2014 में प्रकाशित

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