Missing Woman Investigation. घर वालों ने अज्ञात लाश की शिनाख्त वैशाली की लाश के रूप में क्यों की, यह तो वही जानें. लेकिन वैशाली को उस के प्रेमी के घर से जीवित बरामद कर के पुलिस ने सचमुच कमाल कर दिया.
उत्तर प्रदेश के जिला गोरखपुर की कोतवाली शाहपुर की आवास विकास कालोनी में रहने वाले वीरेंद्र सिंह के परिवार में पत्नी मंजूबाला श्रीवास्तव के अलावा 7 बेटियां थीं. बेटे की चाहत में उन के यहां इतनी बेटियां पैदा हो गई थीं. वह विद्युत विभाग में नौकरी करते थे, लेकिन अब रिटायर हो चुके हैं.
समय गति के पहिए पर अपनी रफ्तार से आगे बढ़ता रहा. सयानी होती बेटियों की शादियां वीरेंद्र सिंह करते गए. उन की छठे नंबर की बेटी वैशाली उर्फ ब्यूटी कुछ ज्यादा ही खूबसूरत थी. उस की खूबसूरती की वजह से घर वाले उसे ब्यूटी कहने लगे थे. वह खूबसूरत ही नहीं, बेहद खुशमिजाज भी थी और पढ़ाई में भी ठीकठाक थी. वह शिक्षाशास्त्र से एमए कर रही थी.
3 मई, 2014 को उसे कालेज में प्रैक्टिकल की फीस जमा करनी थी, इसलिए जल्दीजल्दी घर के काम निबटा कर दोपहर 11 बजे के करीब घर से निकलते समय उस ने मां से कहा कि वह दोपहर 2 बजे तक लौट आएगी. लेकिन शाम के 4 बज गए और वह घर नहीं लौटी तो मां को चिंता हुई. मंजूबाला ने उसे फोन किया तो उस का फोन बंद मिला.
मंजूबाला को यह बात अजीब लगी, क्योंकि घर के बाहर होने पर फोन बंद करने का कोई मतलब नहीं था. उन्होंने कई बार फोन मिलाया, हर बार फोन बंद होने का मैसेज सुनने को मिला. इस के बाद जवान बेटी को ले कर उन के मन में तरहतरह के खयाल आने लगे.
वैशाली के घर न लौटने की बात मंजूबाला ने फोन कर के बड़ी बेटी प्रियांशु को बता कर उस के कालेज जा कर पता लगाने को कहा.
मां की बात सुन कर प्रियांशु भी परेशान हो उठी. उस ने भी वैशाली को फोन किया. फोन बंद होने का मैसेज सुन कर वह दीवान बाजार स्थित चंद्रकांति रामावती देवी आर्य महिला महाविद्यालय गई तो वहां उसे एक चपरासी मिला, जो वैशाली के बारे में कुछ नहीं बता सका.
दीवान बाजार में ही वैशाली की एक सहेली रंजना रहती थी. प्रियांशु ने उस के घर जा कर वैशाली के बारे में पूछा तो उस ने कहा कि परीक्षा की तैयारी में लगी होने की वजह से वह आज कालेज गई ही नहीं थी.
वहां से प्रियांशु सीधे घर पहुंची. अब तक वीरेंद्र सिंह भी घर आ गए थे. उन्होंने अपने कुछ नातेरिश्तेदारों के यहां फोन कर के बेटी के बारे में पूछा. लेकिन उस का कहीं कुछ पता नहीं चला.
अंधेरा घिर आया था. वैशाली का कुछ पता नहीं चल रहा था, इसलिए पूरा घर परेशान था. किसी तरह रात बिता कर सुबह होते ही वीरेंद्र सिंह अपने कुछ रिश्तेदारों और हिंदू युवा वाहिनी के नेता गुड्डन श्रीवास्तव के साथ कोतवाली शाहपुर पहुंचे. थानाप्रभारी रमाकर यादव को उन्होंने बेटी के गायब होने की बात बताई तो उन्होंने वैशाली की गुमशुदगी दर्ज करा कर उस की तलाश शुरू कर दी. लेकिन उन्हें भी कोई सफलता नहीं मिली.
5 मई, 2014 की दोपहर करीब ढाई बजे वीरेंद्र सिंह के लैंडलाइन फोन पर एक फोन आया. प्रियांशु ने फोन उठाया तो दूसरी ओर से वैशाली के बारे में पूछा गया कि वह घर पहुंची या नहीं? वैशाली का नाम सुनते ही प्रियांशु चौंकी. उस ने फोन करने वाले से उस का नाम पूछा तो उस ने अपना नाम बताए बगैर ही फोन काट दिया.
किसी अनजान आदमी ने फोन कर के वैशाली के बारे में क्यों पूछा? यह बात घर वाले समझ नहीं पाए. लैंडलाइन फोन में कौलर आईडी नहीं लगी थी, इसलिए उस नंबर का पता भी नहीं लग सका. घर वालों को लगा कि किसी ने वैशाली का अपहरण कर लिया है. अपहर्त्ता दोबारा फोन करेगा, यह सोच कर वीरेंद्र सिंह ने कौलर आईडी खरीद कर लैंडलाइन फोन में लगा दिया.
इस के बाद वह दोबारा फोन के आने का इंतजार करते रहे, लेकिन फिर उस का फोन नहीं आया. लोकसभा चुनाव होने की वजह से पुलिस भी वैशाली को तलाशने में सक्रिय भूमिका नहीं निभा पा रही थी.
6 मई की रात ठीक 12 बजे वीरेंद्र के लैंडलाइन पर फोन आया. फोन उठाने पर दूसरी ओर से कहा गया, ‘‘मैं विश्व हिंदू परिषद लखनऊ से राहुल शुक्ला बोल रहा हूं. वैशाली जिला महरागंज में परवेज अहमद के साथ देखी गई है. उसे बचा लीजिए. उस की जान खतरे में है.’’
इस बात से प्रियांशु सन्न रह गई. उस ने यह बात मातापिता को बताई तो सभी परेशान हो उठे. प्रियांशु के पति विनय ने कौलर आईडी पर आए नंबर को देखा. फोन लैंडलाइन नंबर से किया गया था. एसटीडी कोड से पता चला कि वह फोन लखनऊ से नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के जिला छिंदवाड़ा से किया गया था.
7 मई की सुबह वीरेंद्र सिंह ने थाने जा कर थानाप्रभारी रमाकर यादव को वह नंबर दे कर सारी बात बताई. लेकिन पुलिस ने उस नंबर के बारे में जांच करने के बजाय उन से वैशाली की गुमशुदगी के पैंफ्लेट छपवा कर लाने को कहा. वीरेंद्र ने पैंफ्लेट छपवा कर दिए तो पुलिस ने उन्हें जिले के सभी थानों और पब्लिक प्लेस पर चस्पा करा दिए.
9 मई, 2014 को सुबह बसस्टैंड के प्रतीक्षालय के बाहर सीमेंट से बनी बेंच के नीचे एक काले रंग का बड़ा संदूक रखा मिला. संदूक से तेज दुर्गंध आ रही थी. लोग उस के आसपास जमा हो गए. किसी ने इस की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी. वह इलाका थाना कैंट के अंतर्गत आता था, इसलिए थाना कैंट पुलिस को इस की सूचना दी गई. थानाप्रभारी सुजीत राय फोर्स के साथ बसस्टैंड पर पहुंच गए.
पुलिस ने सीट के नीचे रखे संदूक का ताला तोड़ कर खोला तो उस में एक युवती की लाश रखी थी. युवती का चेहरा किसी कैमिकल से झुलसा दिया गया था. अब तक वह काफी फूल चुका था. मृतका लाल रंग की छींटदार नई नाइटी पहने थी. गले में एक काले रंग का धागा बंधा था, जिस में किसी देवी की तसवीर का लौकेट पड़ा था.
एक पेटीकोट उस की कमर के ऊपर रखा था, जिस में नाड़ा नहीं था. पुलिस का अनुमान था कि हत्यारों ने युवती के साथ मुंह काला कर के उस की हत्या की थी. लाश की पहचान न हो सके, इस के लिए उस के चेहरे को किसी कैमिकल से झुलसा दिया था. पुलिस ने वहां मौजूद लोगों से लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश की, लेकिन कोई उसे पहचान नहीं सका.
जरूरी काररवाई कर के पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए बाबा राघवदाव मैडिकल कालेज भिजवा दिया. अगले दिन अखबारों में उस अज्ञात लाश के बारे में खबर छपी तो वीरेंद्र सिंह ने भी वह खबर पढ़ी. उन के दिल की धड़कन बढ़ गई. लाश की कदकाठी उन की बेटी वैशाली की कदकाठी से काफी मिलतीजुलती थी.
वीरेंद्र सिंह तुरंत अपनी बेटी और दामाद विनय के साथ थाना कैंट पहुंचे. थानाप्रभारी सुजीत राय ने उन्हें बरामद कपड़े और फोटो दिखाए तो प्रियांशु दहाड़ मार कर रोने लगी. उस ने लाश के गले से मिले काले धागे को देख कर कहा कि यह धागा वैशाली का ही है. उन्हें बाबा राघवदास मैडिकल कालेज ले जाया गया, जहां सभी ने लाश की पहचान वैशाली के रूप में कर दी.
लाश की शिनाख्त होने के बाद थानाप्रभारी सुजीत राय ने अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया. चूंकि वैशाली की गुमशुदगी की सूचना कोतवाली शाहपुर में दर्ज थी, इसलिए थानाप्रभारी सुजीत राय ने इस मामले की फाइल 11 मई, 2014 को कोतवाली शाहपुर भिजवा दी.
वैशाली की हत्या की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद थानाप्रभारी रमाकर यादव ने जांच आगे बढ़ाने के लिए वीरेंद्र सिंह को थाने बुला कर पूछा कि उन्हें किसी पर शक तो नहीं है? तब उन्होंने बताया कि 2-3 साल पहले उन के बगल में बंगाली बाबू के मकान में अनुपम श्रीवास्तव अपने परिवार के साथ किराए पर रहता था. उस के 2 छोटेछोटे बच्चे थे. अनुपम के कहने पर वैशाली उस के दोनों बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने जाती थी.
एक दिन वैशाली ट्यूशन पढ़ा कर लौट रही थी तो अनुपम ने उस का हाथ पकड़ लिया था. तब वैशाली ने उसे झिड़क दिया था और हाथ छुड़ा कर भाग आई थी. घर पर उस ने मां से पूरी बात बताई तो उसी रात कोलकाता में रह रहे बंगाली बाबू को फोन कर के उन्होंने उन के किराएदार अनुपम की शिकायत की. इस के बाद अगले दिन उन्होंने अनुपम को फोन कर के मकान खाली करने को कह दिया.
इस बात से अनुपम बौखला गया. अपने किए की माफी मांगने के बजाय उस ने वीरेंद्र सिंह को धमकी दी कि वह उस की बेटियों का ऐसा हाल करेगा कि वे शादी लायक नहीं रहेंगी. इस के बाद अनुपम श्रीवास्तव मकान खाली कर के चला गया.
वीरेंद्र सिंह की इस बात से थानाप्रभारी रमाकर यादव को भी लगा कि बदला लेने के लिए अनुपम ने ही वैशाली की हत्या की होगी. उन्होंने अनुपम की तलाश के लिए एक टीम गठित की. 12 मई को गोरखपुर में लोकसभा चुनाव होने वाला था, इसलिए पुलिस का सारा ध्यान उसी ओर था.
चूंकि यह मामला मीडिया द्वारा काफी चर्चित हो चुका था, इसलिए गोरखपुर सदर के सांसद योगी आदित्यनाथ वीरेंद्र सिंह के घर पहुंचे. उन्होंने पुलिस को आड़े हाथों लेते हुए 2 दिनों के अंदर मामले का खुलासा करने को कहा. ऐसा न करने पर उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी.
13 मई को जिला पंचायत अध्यक्ष चिंता यादव वीरेंद्र सिंह के घर पहुंचीं और गिरती कानून व्यवस्था पर चिंता जताते हुए पुलिस पर घटना के पर्दाफाश के लिए दबाव बनाया. कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष मार्कंडेय सिंह ने मृतका के साथ दुष्कर्म होने की आशंका जताते हुए कहा कि अगर पुलिस निष्पक्ष जांच करे तो मामले की असलियत जल्द सामने आ सकती है.
पुलिस के ढीले रवैये पर विभिन्न पार्टियों के नेताओं ने नाराजगी जताई. आम लोगों ने कैंडल जला कर शांति मार्च निकाला और वैशाली को श्रद्धांजलि दी. इस तरह समाज का हर तबका पुलिस के विरोध में उठ खड़ा हुआ. तब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आकाश कुलहरि ने पुलिस अधीक्षक परेश पांडेय के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बना कर जल्द से जल्द मामले के खुलासे के निर्देश दिए. आईजी एस.के. माथुर और डीआईजी संजीव कुमार भी पूरी काररवाई पर नजर रखे हुए थे.
जिस अनुपम श्रीवास्तव पर वीरेंद्र ने शक जताया था, पुलिस ने उसे खोज निकाला. पुलिस ने उसे जबलपुर से तथा एक अन्य आदमी को गोरखपुर से हिरासत में ले कर पूछताछ की. उन्हें जब वैशाली की लाश की फोटो दिखाई गई तो वे चौंके.
उन्होंने कहा कि यह फोटो वैशाली की नहीं है. उन की बात से थानाप्रभारी रमाकर यादव को भी हैरानी हुई. उन्होंने यह बात अपने अधिकारियों को बताई.
इस के बाद आईजी एस.के. माथुर ने थानाप्रभारी को आदेश दिया कि वैशाली के मोबाइल को आईएमईआई नंबर के आधार पर सर्विलांस पर लगवा दें. सर्विलांस पर लगवाने के बाद थानाप्रभारी को पता चला कि उस मोबाइल सेट में एक नया सिम लगा है, जो दीपक सिंह पुत्र सोनपाल सिंह, निवासी रकाबगंज, थाना मऊदरवाजा, जिला फर्रुखाबाद के नाम लिया गया है.
तत्काल एक पुलिस टीम 19 मई, 2014 को फर्रुखाबाद के लिए रवाना हो गई. 20 मई को टीम ने थाना मऊदरवाजा पुलिस की मदद से रकाबगंज गांव के रहने वाले दीपक के घर छापा मारा तो वैशाली वहां मिल गई.
पुलिस के पास वैशाली का फोटो था ही, इसलिए पुलिस को उसे पहचानने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई. अंतर सिर्फ इतना था कि अब वैशाली की मांग में सिंदूर था.
पूछने पर पता चला कि उस ने दीपक से कोर्टमैरिज कर लिया था. वैशाली के जीवित बरामद होने पर थानाप्रभारी रमाकर यादव ने उसी समय अपने मोबाइल से वैशाली की फोटो खींच कर एसएसपी आकाश गुलाटी के मोबाइल पर भेज दिया.
इस के बाद एसएसपी के निर्देश पर पुलिस टीम वैशाली और उस के पति दीपक सिंह को हिरासत में ले कर उसी दिन गोरखपुर के लिए रवाना हो गई. यह पुलिस टीम 21 मई की सुबह करीब 10 बजे गोरखपुर पहुंच गई.
वैशाली के जिंदा होने की सूचना घर वालों तथा आंदोलन करने वालों को मिली तो वे अवाक रह गए. उसी दिन दोपहर में एसएसपी ने पुलिस मनोरंजन कक्ष में प्रैस कौन्फ्रैंस कर के पिछले 20 दिनों से रहस्यमय बने इस मामले का खुलासा करने के लिए वैशाली और उस के प्रेमी से पति बने दीपक सिंह को पत्रकारों के सामने पेश किया.
पुलिस को संदूक में जो लाश मिली थी, कहीं उस की हत्या वैशाली और दीपक ने तो नहीं की थी, यह पता करने के लिए प्रैस कौन्फ्रैंस के बाद जब पुलिस ने उन से पूछताछ की तो उन दोनों ने साफ मना कर दिया. उन्होंने कहा कि हत्या करने की कौन कहे, उन्हें यह भी पता नहीं कि वह लड़की कौन थी.
वैशाली का कहना था कि अनुपम श्रीवास्तव उस से एकतरफा प्रेम करता था. उस ने ट्यूशन पढ़ाते समय चोरी से उस की फोटो खींच ली थी. वह उस का एमएमएस बना कर नेट पर डालने की धमकी दे रहा था. उस की धमकी से डर कर वह दीपक के साथ भाग गई थी. इस के बाद उस ने दीपक और अपने प्यार की जो कहानी सुनाई, वह कुछ इस प्रकार थी.
वैशाली उर्फ ब्यूटी वीरेंद्र सिंह की छठे नंबर की बेटी थी. वह बेहद खूबसूरत थी. उसे अपनी सुंदरता पर नाज था. उस की सुंदरता को देख कर ही घर वाले उसे ब्यूटी नाम से पुकारते थे. वह अपनी बहनों की भी लाडली थी. इस समय वह दीवान बाजार स्थित चंद्रकांति रामावती देवी आर्य महिला महाविद्यालय से शिक्षाशास्त्र से एमए कर रही थी.
दिसंबर महीने में वैशाली के मोबाइल पर एक फोन आया. वह फोन उठाती, तब तक फोन कट गया. चूंकि फोन नंबर से था, इसलिए उस ने सोचा कि पता नहीं किस ने फोन किया है. उस ने पलट कर फोन किया तो दूसरी ओर से एक लड़के की आवाज आई. उस ने बताया कि उस का नाम दीपक है और वह फर्रुखाबाद में रहता है.
वैशाली ने अनजान जान कर तुरंत फोन काट दिया. इस के बाद दीपक फोन कर के वैशाली से इस बात की माफी मांगने लगा कि गलती से उस का नंबर लग गया था. दोनों के बीच बातचीत हुई तो उन्होंने एकदूसरे को अपना परिचय दे दिया. वैशाली को दीपक का बातचीत का तरीका अच्छा लगा.
इस के बाद अकसर दीपक और वैशाली में बातें होने लगीं. बातचीत होतेहोते ही दोनों में प्यार हो गया. जबकि उन्होंने एकदूसरे को देखा भी नहीं था. वैशाली के घर वालों को इस की भनक नहीं लग पाई कि उस का किसी ऐसे लड़के से चक्कर चल रहा है, जिस की सूरत भी उस ने नहीं देखी है.
दूसरी ओर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने वाली वैशाली पर अनुपम डोरे डाल रहा था. वैशाली ने उसे झिड़क दिया तो वह चोरी से खींचे गए उस के फोटो की एमएमएस बना कर नेट पर डालने की धमकी देने लगा. इस से वैशाली डर गई. वह उस से निजात पाना चाहती थी. इसी बीच वीरेंद्र सिंह ने अपनी चौथे नंबर की बेटी अर्पिता की शादी पक्की कर दी और शादी की तैयारियों में जुट गए.
वैशाली रहती तो अपने घर में थी, लेकिन उस का मन दीपक के पास रहता था. वह अपने प्यार की बाहों में जा कर समा जाना चाहती थी. वह दीपक पर मिलने के लिए दबाव बनाने लगी तो दोनों ने 3 मई को गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर मिलने का प्रोग्राम बनाया.
2 मई को दीपक फर्रुखाबाद से ट्रेन से गोरखपुर के लिए चल पड़ा. 3 मई को वह गोरखपुर पहुंचा. रेलवे स्टेशन पर उतर कर उस ने वैशाली को फोन किया कि वह गोरखपुर पहुंच गया है. इधर वैशाली जल्दीजल्दी घर के काम निबटा कर मां से यह कह कर घर से निकली कि प्रैक्टिकल की फीस जमा करने वह कालेज जा रही है.
वैशाली के कहने पर दीपक गीता वाटिका मंदिर के गेट के सामने पहुंच गया. अपनी पहचान, हुलिया उस ने पहले ही फोन पर बता दी थी.
वैशाली कालेज जाने के बजाय गीता वाटिका मंदिर के पास पहुंची. वहां दोनों ने एकदूसरे को देखा तो बहुत खुश हुए. वहां से दोनों एक टैक्सी में सवार हो कर रेलवे स्टेशन पहुंचे, जहां से दीपक उसे ट्रेन से फर्रुखाबाद ले गया. दीपक ने वैशाली से प्यार की बात अपने घर वालों को बता रखी थी. इसलिए जब दीपक वैशाली को ले कर अपने घर पहुंचा तो वहां उस का भव्य स्वागत हुआ.
5 मई, 2014 को दीपक और वैशाली ने एक मंदिर में विवाह कर लिया. उन्होंने मंदिर में शादी करने के बाद कोर्ट में पंजीकृत भी करा लिया. अब वे कानूनी रूप से पतिपत्नी हो गए थे. गोरखपुर से चलते समय वैशाली ने अपने मोबाइल से सिम निकाल कर रास्ते में फेंक दिया था, ताकि घर वाले उस के पास तक पहुंच न पाएं. बाद में दीपक ने अपनी आईडी पर एक सिम खरीद कर वैशाली को दे दिया था. वह दीपक के साथ हंसीखुशी से रह रही थी.
उधर वैशाली के रहस्यमय तरीके से गायब होने की खबर से पूरा शहर जलने लगा था. 8 मई को संदूक से मिली लाश ने लोगों के दिलों में पुलिस के प्रति आक्रोश भर दिया था. लेकिन अनुपम श्रीवास्तव ने पुलिस द्वारा दिखाए गए फोटो से उस के जिंदा होने की बात कह कर सब को चौंका दिया.
लेकिन बाद में पुलिस ने वैशाली को जिंदा और सहीसलामत बरामद कर के अपने ऊपर लगी बदनामी की कालिख को धो दिया. इस के बाद हिरासत में लिए गए अनुपम श्रीवास्तव और उस युवक को पुलिस ने छोड़ दिया. वैशाली के घर के लैंडलाइन फोन पर राहुल शुक्ला नाम के जिस युवक ने फोन कर के वैशाली के बारे में पूछा था, उस का पता नहीं चल सका. पुलिस का मानना है कि वह जो भी रहा होगा, वैशाली के पति दीपक सिंह का साथी रहा होगा. घर वालों और पुलिस को गुमराह करने के लिए उस ने फोन किया था.
बेटे और बहू को गोरखपुर पुलिस द्वारा साथ ले जाने से दीपक के घर वाले भी 22 मई को गोरखपुर पहुंच गए थे. 6 जून, 2014 को दोनों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया. वैशाली ने खुद को बालिग बता कर पति दीपक सिंह के साथ रहने की इच्छा जाहिर की. दीपक की मां ने भी वैशाली को बहू बताते हुए उसे अपने घर ले जाने की विनती की.
कोर्ट में पेशी के दौरान वैशाली के घर का कोई भी सदस्य मौजूद नहीं था. मजिस्ट्रेट के आदेश पर वैशाली को उस के पति दीपक के साथ भेज दिया गया. 7 जून को दीपक वैशाली को साथ ले कर फर्रुखाबाद लौट गया.
लाश वाला संदूक जिस जगह मिला था, वह थाना कैंट इलाके में आता था, इसलिए थानाप्रभारी रमाकर यादव ने उस मामले की विवेचना कैंट थाने को लौटा दी. कथा लिखे जाने तक थाना कैंट पुलिस उस लाश की शिनाख्त नहीं करा पाई थी.
अब यहां यह सवाल उठता है कि घर वालों ने उस लाश की शिनाख्त वैशाली की लाश के रूप में क्यों की? जब इस बारे में उन से पूछा गया तो उन लोगों ने कोई जवाब नहीं दिया. उन की चुप्पी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शायद उन्होंने अपनी इज्जत बचाने के लिए ऐसा किया था कि उन की बेटी की हत्या हो गई है. लेकिन संयोग देखो, जिस इज्जत को बचाने के लिए उन्होंने इतना बड़ा नाटक किया, वह बच नहीं सकी. शायद इसीलिए गोरखपुर आने पर वे उस से मिलने नहीं गए.
इस पुलिसिया काररवाई से वैशाली और दीपक के बीच तनाव पैदा हो गया. इस के बाद दीपक की मां और परिवार के अन्य सदस्य वैशाली का शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न करने लगे. इस तरह शादी के डेढ़ महीने बाद ही वैशाली के सिर से प्यार का भूत उतर गया.
परेशान हो कर वैशाली 17 जून, 2014 को अपनी बड़ी बहन की ससुराल कानपुर आ गई. अब उस का ससुराल से मोह भंग हो चुका है. वैशाली के रिश्तेदारों को जब उस के उत्पीड़न की जानकारी हुई तो उन्होंने दीपक और उस के घर वालों के खिलाफ कानूनी काररवाई करने की धमकी दी. इस का नतीजा यह निकला कि वैशाली की ससुराल वाले डर गए और वैशाली से वापस आने की गुजारिश करने लगे. कथा लिखे जाने तक वैशाली ससुराल नहीं गई थी. Missing Woman Investigation
— 2014 में प्रकाशित






