True Crime International. जर्मनी की मशहूर गायिका नाडजा बेनैसा जब कम उम्र थी, तभी उसे फुटबौल प्लेयर अब्दू मबोदजी से प्यार हो गया था. मबोदजी ने उसे धोखा दिया तो उस के संबंध कई युवकों से बन गए और उन्हीं में से वह किसी की वजह से एचआईवी पौजिटिव बन गई. इस के बदले उस ने यह तोहफा अपने एक प्रेमी को दे दिया…

मोरक्को मूल के मोहम्मद बेनैसा और जर्मनी की रहने वाली सबीना ने सन 1980 में प्रेम विवाह किया था. इन की दूसरी संतान के रूप में एक सुंदर सी बेटी ने जन्म लिया, जिस का नाम रखा गया नाडजा बेनैसा. बेनैसा दंपत्ति का जर्मनी के हेसे स्थित फैं्रकफुर्त शहर में केटरिंग का व्यवसाय है.

नाडजा सुंदर ही नहीं बल्कि चंचल भी थी. उसे गाने सुनने का शौक था, वह अपनी तुतलाती जुबान में उल्टेसीधे शब्द गुनगुनाती तो उस के मांबाप को हंसी आती थी, पर उन्हें यह नहीं मालूम था कि उन की यह बेटी एक दिन इतनी मशहूर गायिका बन जाएगी कि जर्मनी में ही नहीं, दुनिया भर में उस का नाम होगा.

नाडजा जब महज 9 साल की थी, तो उस ने वाद्य यंत्रों के साथ खेलना शुरू कर दिया था. यही नहीं, उस उम्र में ही उस ने पियानो बजाना भी सीख लिया था. उस की इस प्रतिभा को देख कर लोग उसे पियानो का उस्ताद कहते थे. स्कूल के हर संगीत कार्यक्रम में वह हिस्सा लेती थी. उस की परफार्मेंस देख कर लोग आश्चर्यचकित रह जाते थे.

जब नाडजा महज 11 साल की थी तभी उस ने गाने लिखने शुरू कर दिए थे. अपने लिखे गाने वह खुद गाती थी. 13 साल की उम्र में नाडजा ने फैं्रकफुर्त में एक बड़े बैंड की मौजूदगी में अपना प्रोग्राम पेश किया. उस प्रोग्राम में और भी कई प्रतिभाओं ने भाग लिया. नाडजा ने वहां जो परफार्मेंस दी उस पर न केवल उसे प्रशंसा मिली, बल्कि दूसरे नंबर की विजेता का खिताब भी दिया गया.

मांबाप को बेटी की काबिलियत पर फख्र था. वह उसे प्रोत्साहित भी करते थे. संगीत के साथसाथ वह बड़ी होते हुए अपनी पढ़ाई पर भी ध्यान दे रही थी. उसी दौरान उस के दिल के दरवाजे पर किसी ने दस्तक दे दी. दरअसल, नाडजा जब एक कार्यक्रम में अपना प्रोग्राम पेश कर रही थी, तो वहीं स्टेज पर बतौर मेहमान मशहूर फुटबाल खिलाड़ी अब्दू मबोदजी भी बैठा था.

वह नाडजा की खूबसूरती, अदा और सुरीली आवाज के जादू में इस तरह बंध गया कि प्रोग्राम के बाद उस ने नाडजा को डिनर के लिए आमंत्रित कर डाला.

नाडजा अब्दू मबोदजी की फैन थी. उस  के आमंत्रण पर नाडजा को नाज हुआ. वह बन संवर कर डिनर पर गई, तो मबोदजी उस की निखरी खूबसूरती को देख फिर से ठगा सा हर गया. उस का दिल अपनी बात कहने के लिए थामे नहीं थम रहा था, पर मजबूरी यह थी कि दोनों की यह पहली मुलाकात थी. इसी कारण उसे अपने अरमानों का गला घोंट देना पड़ा. खुद को इस तरह घूरते देख नाडजा शरमा गई. वह उस से पूछ बैठी, ‘‘ऐसे क्या देख रहे हो?’’

‘‘दुनिया की सब से खूबसूरत बला मेरे सामने बैठी है तो कम से कम उसे जी भर कर निहार तो सकता ही हूं.’’ मबोदजी ने चाहत भरी नजरों से नाडजा की तारीफ करते हुए कहा. नाडजा ने भी उसे नाउम्मीद नहीं किया.’’

नाडजा उस की नजरों की भाषा पढ़ चुकी थी. वह भी इठलाते हुए बोली, ‘‘ऐसा नहीं है, दुनिया में मुझ से भी ज्यादा खूबसूरत लड़कियां हैं.’’

‘‘होंगी, लेकिन मुझे नहीं दिखी. तभी तो तुम्हारी परफार्मेंस ने मेरे दिल पर ऐसा जादू किया कि वह अब आपे से बाहर हुए जा रहा है. सच बात तो यह है कि मैं तुम्हें बेहद प्यार करता हूं,’’ मबोदजी ने अपने दिल की बात उसे बता दी.

खूबसूरत और जवान नाडजा ने मुसकरा कर मशहूर खिलाड़ी का प्यार स्वीकार कर लिया. इस के बाद काफी देर तक दोनों के बीच बातचीत होती रही. दोनों ने न केवल साथ डिनर किया, बल्कि देर तक साथ घूमे भी.

वैसे तो उस दिन सुबह से ही मौसम सुहावना था, लेकिन शाम होतेहोते और भी हसीन हो गया था. नाडजा और मबोदजी इस का पूरा फायदा उठाते हुए शहर से दूर एक हसीन वादी में जा पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी हसरतें पूरी कीं.

नाडजा और मबोजी के बीच जिस्मानी संबंध की शुरूआत हुई, तो फिर यह आम बात हो गई. दोनों अकसर हर दिन मिलने लगे. नाडजा को मबोदजी का साथ अच्छा लगता था. उस के साथ प्यार की डोर में बंधने के बाद भी वह अपने शौक को भूली नहीं थी. वह गाने लिखती और जब तब प्रोग्रामों में अपनी आवाज का जादू बिखेरती रहती. इस तरह काफी लंबा समय गुजर गया.

नाडजा महज 17 साल की ही थी कि उस के पेट में मबोदजी के प्यार की निशानी अंगड़ाई लेने लगी. उसे इस का पता तब चला, जब अचानक एक दिन उस की तबीयत खराब हो गई और उसे उबकाई के साथसाथ उल्टियां भी आने लगीं. नाडजा के घरवालों को पता नहीं था कि उन की बेटी प्यार के खेल में कितनी ऊंची उड़ान भर चुकी है.

बेटी की तबीयत बिगड़ने पर मां सबीना एकदम घबरा गई. वह उसे तुरंत लेडी डाक्टर के पास ले गईं. पर जब डाक्टर ने नाडजा का चेकअप करने के बाद उस की बिगड़ी तबीयत का राज खोला, तो सबीना के पांव तले से जमीन ही खिसक गई. डाक्टर ने बताया कि उन की बेटी गर्भवती है.

मां ने पूछा, तो नाडजा ने कुछ भी नहीं छुपाया. उस ने साफ तौर पर कह दिया कि वह अपने प्यार की निशानी को जन्म देगी, उस की हत्या नहीं करने देगी. बेटी की इस जिद के आगे मांबाप को झुकना पड़ा. गर्भवती होने के बावजूद नाडजा ने मबोदजी पर शादी करने के लिए कोई दबाव नहीं डाला. मबोदजी भी इस मामले में चुप रहा.

इस की वजह यह थी कि दोनों ही शादी के बंधन का बोझ वहन नहीं करना चाहते थे. उन का मानना था कि शादी से व्यक्तिगत आजादी खत्म हो जाएगी, जो उन्हें मंजूर नहीं था. दोनों का प्यार पहले की तरह बरकरार रहा. नाडजा दिन गिनने लगी और उस पल का इंतजार करने लगी, जब उस के प्यार की निशानी उस की गोद में आ कर किलकारी भरे.

आखिर वह दिन भी आ ही गया. 25 अक्टूबर, 1999 को नाबालिग नाडजा ने अपनी तरह ही प्यारी सी एक बेटी को जन्म दिया, जिस का नाम लैला जमीला रखा गया. बेटी का जन्म नाडजा और मबोजी के लिए खुशी भरा था, पर इस के बाद दोनों के प्यार को जैसे किसी की नजर लग गई. दोनों के बीच पहले जैसी बात नहीं रही, दूरी बढ़ने लगी.

इस का कारण भी नाडजा की बेटी लैला ही थी. क्योंकि अब नाडजा अपना अधिक तर समय बेटी की परवरिश में लगा रही थी. ऐसे में वह अपने प्रेमी को समय नहीं दे पा रही थी. नतीजा यह निकला कि उस के मन से भी नाडजा का खयाल निकलता चला गया. नाडजा ने भी इस की कोई परवाह नहीं की. फिर जल्दी ही वह दिन भी आ गया, जब दोनों पूरी तरह एकदूसरे से जुदा हो गए.

इस के बाद नाडजा ने पूरी तरह अपना ध्यान बेटी की देखभाल और खुद के कैरियर पर लगाना शुरू कर दिया. उस ने रात्रिकालीन क्लास ज्वाइन कर ओ लेबल सर्टिफिकेट के लिए पढ़ाई शुरू कर दी. साथ ही गाने लिखने और गाने की प्रैक्टिस भी वह जी जान से कर रही थी.

सन 2000 में जर्मनी रियल्टी टेलीविजन प्रोग्राम ‘पोप स्टार’ के लिए फैं्रकफुर्त में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. जिस में करीब एक हजार गायिकाओं ने हिस्सा लिया. इन में टौप 5 गायिकाओं का चयन किया जाना था. इस की जिम्मेदारी 3 जजों सिमोन एंजल, इनर भोसलेंजर और मारियो एम को सौंपी गई थी. नाडजा ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया. उस ने प्रोग्राम में अपनी आवाज का ऐसा जादू चलाया कि वह टौप 30 फाइनल प्रतिभागियों में शुमार हो गई.

आयोजकों की ओर से उन तीसों प्रतिभागियों को माजोरका, स्पेन आदि देशों की सैर करवाई गई, जहां इन के लिए वर्कशाप का आयोजन किया गया था. उन 30 प्रतिभागियों में से 10 का चुनाव होना था. इस राउंड में प्रतिभागियों को गाने के अलावा डांस का हुनर भी दिखलाना था. नाडजा डांस करना नहीं जानती थी लेकिन उस ने दिनरात डांस की पे्रक्टिस की.

इस का परिणाम अच्छा ही रहा, नाडजा का उन 10 लड़कियों में चयन हो गया जिन्हें 30 में से चुना गया था.

सेमीफाइनल के बाद अब फाइनल राउंड की बारी थी. फाइनल राउंड में इन 10 लड़कियों में से 5 ऐसी लड़कियों का चुनाव होना था जिन्होंने अपनी आवाज और डांस से जजों का मन मोह लिया हो.

नवंबर 2000 में इस प्रतियोगिता की जो 5 फाइनलिस्ट चुनी गईं उन में नाडजा बेनैसा का नाम भी शामिल था. इतनी बड़ी उपलब्धि पर नाडजा फूली नहीं समा रही थी. उन 5 लड़कियों में नाडजा का प्रदर्शन अव्वल दर्जे का था.

यहीं से जरमन में पहली बार 5 लड़कियों के एक बैंड की शुरूआत हुई. जिस का नाम रखा गया, ‘नो एंजल्स’. चूंकि यह पांचों लड़कियां बहुत अच्छी सिंगर थी, इसलिए उन्होंने अपने प्रोग्रामों के जरिए पूरे जरमन में धूम मचा दी. उन्होंने एक एलबम भी बनाई, उस एलबम की इतनी डिमांड हुई कि वह लाखों की संख्या में बिकीं.

इस के बाद तो संगीत की दुनिया का जैसे नक्शा ही बदल गया. पूरी जर्मनी में इस बैंड की ही चर्चा होने लगी. इस बैंड ने कई देशों की यात्रा कर के वहां अपने संगीत का लोहा मनवाया. वर्ष 2001 इस गर्ल बैंड के लिए नई सौगात ले कर आया. इसे कई अवार्ड मिले. बैंड की सभी लड़कियां लोगों की आंखों का तारा बन गईं, तो युवाओं के दिल की धड़कन.

अभी यह बैंड अपनी उपलब्धियों के शिखर पर पहुंचा ही था कि अचानक बैंड की सदस्यों के कुछ आपसी मतभेद इस तरह उभरे कि पूरा ग्रुप बिखर गया. फिर भी नाडजा ने संगीत से नाता नहीं तोड़ा. उस ने अकेले ही कई प्रोग्राम किए और अपनी एलबम भी बनाई. लेकिन अकेले में उसे उतनी सफलता नहीं मिल रही थी, जितनी गु्रप के साथ मिल सकती थी.

नाडजा ने फिर से ग्रुप की लड़कियों से मिल कर एक साथ काम करने को कहा. उस की कोशिश रंग लाई और टूटे ग्रुप की 3 लड़कियां जेसिका वेहल, बक्सी डायकोवसका और सेंडी मोली उस के साथ आ गईं. इन में से एक जेसिका वेहल तो इस दौरान एक बेटी की मां भी बन गई थी.

इन तीनों ने मिल कर ‘नो एंजल्स’ गर्ल बैंड को पुनर्जीवित किया. इस बैंड ने पहले की तरह फिर से धूम मचा दी. यह बैंड कामर्शियल तौर पर पूरी तरह सफल रहा. अपार कामयाबी की वजह से इस गर्ल बैंड को 2004 में बेस्ट बैंड का अवार्ड भी मिला.

सन 2005-2006 का दौर ‘नो एंजेल्स’ बैंड के लिए स्वर्णिम काल था. इसी दौरान इस बैंड ने सोलो कैरियर की शुरुआत की, जो बेहद सफल रही. नो एंजल्स बैंड ने अरबन म्यूजिक के साथ जरमन भाषा के गानों को बुलंदियों के शिखर तक पहुंचाया.

नाडजा ने संगीत को महज अपने शौक और दौलत कमाने तक ही सीमित नहीं रखा था. उस ने ग्रुप के साथ कई तरह की सामाजिक सेवाएं भी कीं. लोगों की सहायतार्थ कई प्रोग्राम पेश कर के बैंड की लड़कियों ने अपनी जिंदादिल और समाज सेवा के माद्दे का बेहतरीन उदाहरण पेश किया. इस ग्रुप ने सन 2006 में बिना कोई फीस लिए जर्मनी में आयोजित फुटबौल के फीफा वर्ल्ड कप में भी कार्यक्रम पेश किया.

सन 2007 और 2008 में इस बैंड ने जर्मनी के कई मशहूर म्यूजिक डाइरेक्टरों और प्रोड्यूसरों के साथ मिल कर कई एलबम तैयार किए, जो सभी सुपर हिट रहे. इस के बाद तो जहां देखो, ‘नो एंजल्स’ ग्रुप की ही चर्चा सुनाई देने लगी. सन 2008 में ही सोलो प्रोजेक्ट के तहत नाडजा बेनैसा ने इंट्रेड बरलिन रिकौर्डिंग स्टूडियो में एक नया रिकौर्ड कायम करते हुए 15 नए डैमो गानों का एलबम तैयार किया.

सब कुछ ठीक चल रहा था कि तभी नाडजा बेनैसा के जीवन में अचानक जैसे एक धमाका सा हो गया. 11 अप्रैल, 2009 को जरमन पुलिस ने नाडजा को फ्रैंकफुर्त से उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वह एक सोलो प्रोग्राम देने जा रही थी.

नाडजा पर आरोप था कि उस ने सन 2004 से 2006 के बीच अपने 3 प्रेमियों के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे, जिस के कारण उन में से एक को एड्स जैसे भयानक रोग ने जकड़ लिया. दरअसल, माजिद नाम के एक शख्स ने  आरोप लगाया था कि नाडजा से शारीरिक संबंध बनाने के बाद उसे एड्स हुआ है. इसी शिकायत पर पुलिस ने नाडजा को गिरफ्तार कर लिया.

मामला एक फेमस प्ले सिंगर से जुडा था इस लिए मीडिया के जरिए यह खबर पूरे देश में फैल गई. सुन कर लोग हैरत में रह गए. वैसे भी यह अपने आप में एक अलग तरह का मामल था. इस खबर के बाद ही लोगों को पता लगा कि नाडजा अय्याश भी हैं.

दरअसल प्रसिद्ध फुटबाल खिलाड़ी अब्दू मबोदजी से प्रेम और जिस्मानी संबंधों के बाद नाडजा बिनब्याही मां बन गई थी. बाद में मबोदजी से जब उस की दूरियां बढ़ गईं तो उस ने अपना पूरा ध्यान अपनी बेटी की परवरिश में लगा दिया. बेटी कुछ बड़ी हो गई तो वह फिर से अपना कैरियर बनाने में जुट गई थी. थोड़ी मेहनत करने के बाद उस का कैरियर फिर से बुलंदियों पर पहुंच गया था.

बेटी की मुसकराहट और दर्शकों की प्रशंसा भरी तालियों की गूंज से नाडजा के दिल को बेहद सुकून मिल रहा था. दौलत भी वह खूब आ रही थी, पर बिस्तर पर सोते समय उसे लगता था कि उस के जीवन में कहीं कुछ अधूरा है. तभी नाडजा का दिल माजिद पर आ गया. माजिद उस का बहुत बड़ा फैन था. एक दिन उस ने माजिद को दावत पर बुला लिया.

इतनी बड़ी स्टार के साथ दावत का औफर मिल ने से माजिद बहुत खुश हुआ. वह खुद को खुशनसीब समझ रहा था. दावत के दौरान नाडजा ने माजिद को आंखों के इशारे से अपनी चाहत का अहसास करा दिया.

नाडजा का मतलब समझ कर माजिद हक्काबक्का रह गया. वह समझ नहीं पा रहा था कि इतनी बड़ी स्टार आखिर उस के साथ वह सब क्यों करना चाहती है. नाडजा उस की झिझक को समझ गई, इसलिए उस ने खुद ही पहल करते हुए उस के साथ शारीरिक संबंध बनाए.

इस के बाद तो अकसर ही नाडजा की रातें माजिद के साथ रंगीन होने लगीं. कुछ दिनों बाद नाडजा का माजिद से मन भर गया तो उस ने कुछ अन्य युवकों से दोस्ती कर ली और उन के साथ मौजमस्ती करने लगी. लेकिन 2 साल बाद उस ने उन युवकों से भी दूरी बना ली. उस ने शायद नए प्रेमी ढूंढ लिए थे.

इसी दौरान अचानक माजिद की तबीयत खराब हो गई, तो उसे डाक्टर को दिखाया गया. डाक्टर ने जांच के बाद उसे बताया कि वह एचआईवी पौजीटिव है. यानी उसे एड्स हो गया था. सुन कर वह घबरा गया. तब उस ने 11 अप्रैल, 2009 को फैंकफुर्त पुलिस स्टेशन में नाडजा के खिलाफ रिपोर्ट लिखवा दी कि उसी के कारण उसे एड्स हुआ है.

उस ने पुलिस को दी गई तहरीर में कहा था कि पहले नाडजा जिस्मानी संबंध बनाते समय खुद कंडोम का इस्तेमाल करने को कहती थी, फिर उसी ने कंडोम लगाने को मना कर दिया था.

माजिद ने इस पर नाडजा से पूछा भी था कि उसे कोई गुप्त रोग तो नहीं है. पर नाडजा ने मना कर दिया था. जबकि वह एचआईवी पौजीटिव थी. उस ने न केवल यह बात छुपा कर उसे धोखा दिया, बल्कि एक ऐसी बीमारी भी दे दी, जो समय से पहले ही उसे मौत के करीब ले आई है.

माजिद की रिपोर्ट पर पुलिस ने नाडजा बेनैसा को गिरफ्तार कर 21 अप्रैल, 2009 तक के लिए जेल भेज दिया. नाडजा के वकील ने कोर्ट में कहा कि उस की क्लाइंट पर झूठा आरोप लगाया गया है. माजिद को यह साबित करना होगा कि नाडजा एड्स पीडि़त है और उस के साथ माजिद के जिस्मानी संबंध रहे थे. बगैर सुबूत के नाडजा को कुसूरवार नहीं ठहराया जा सकता.

वकील की इस जिरह के आधर पर कोर्ट ने नाडजा को जमानत दे दी. इस दौरान कोर्ट के आदेश पर नाडजा की जांच कराई गई तो वह वह एचआईवी पौजीटिव पाई गई.

12 मार्च, 2010 को पुलिस ने कोर्ट में इस मामले की चार्जशीट पेश कर दी. आखिर 16 अगस्त, 2010 को नाडजा को अदालत के सामने सच बोलना पड़ा. उस ने कोर्ट में स्वीकार कर लिया कि वह 17 साल की उम्र से ही एड्स पीडि़त है और उस ने माजिद के साथ अनेक बार संबंध बनाए थे. उस ने कहा कि उसे इस का अफसोस है. इस आरोप में नाडजा को 6 महीने से लेकर 10 साल तक की सजा हो सकती थी.

26 अगस्त, 2010 को सजा सुनाने का दिन मुकर्रर हो गया. नाडजा डर रही थी कि पता नहीं उसे क्या सजा सुनाई जाएगी. अब उस का काम में भी मन नहीं लग रहा था. उस का पूरा दिमाग आने वाले 26 अगस्त पर ही जमा हुआ था. उस का एकएक दिन बड़ी बेचैनी से कट रहा था. 26 अगस्त 2010 का दिन आया तो वह अपने वकील के साथ कोर्ट पहुंची. माजिद और उस का वकील भी कोर्ट में मौजूद थे. चूंकि मामला एक फेमस स्टार का था इसलिए तमाम वकील और अन्य लोग भी कोर्ट में जमा थे. सभी की नजरें जज की ओर लगी थीं.

जैसे ही जज ने फैसला सुनाना शुरू किया नाडजा की धड़कनें बढ़ने लगीं. जज ने नाडजा बेनैसा को माजिद को जानबूझ कर नुकसान पहुंचाने के आरोप में 2 साल की सजा सुना दी. नाडजा को जेल भेज दिया गया.

23 मार्च, 2011 को इस केस में नया मोड़ तब आया, जब सुधार के बाद एक नोट्स प्रकाशित हुआ कि ऐसे मामलों के लिए देश में कोई कानून है ही नहीं. इस आधार पर नाडजा को फिर से जमानत मिल गई, पर उस पर प्रश्न एक्ट के तहत शारीरिक नुकसान पहुंचाने का मामला फिर भी चलता रहा. यह मामला अभी भी कोर्ट में चल रहा है.  True Crime International

— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.

— 2014 में प्रकाशित

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