RTI Activist Murder Mystery. आरटीआई एक्टिविस्ट चंद्रमोहन शर्मा ने खुद को मरा साबित करने के लिए फूलप्रूफ साजिश रच कर एक विक्षिप्त को अपनी कार में जला डाला. इस के बाद वह बेंगलुरू में अपनी पहचान छिपा कर प्रेमिका नीलम के साथ नई जिंदगी जीने लगा. लेकिन एक छोटी सी चूक से वह पुलिस के चंगुल में फंस गया.
चंद्रमोहन शर्मा की एक आरटीआई एक्टिविस्ट के रूप में पूरे क्षेत्र में पहचान थी. नोएडा और दिल्ली में सरकारी जमीनों पर माफियाओं द्वारा अवैध कब्जा किए जाने पर उस ने अनेक आरटीआई दाखिल की थीं. इस के अलावा जनहित के कामों को ले कर वह संबंधित विभागों में 300 से अधिक आरटीआई दाखिल कर चुका था. जिस की वजह से लोग उसे समाजसेवी के रूप में जानते थे.
आरटीआई दाखिल करने पर कुछ लोग उस के काम की तारीफ करते थे तो वहीं उस के इस काम से जिन लोगों के काले चिट्ठे खुलते थे, वे उस से नाराज रहते थे. उन से उस की जान को खतरा बना रहता था.
30 अप्रैल, 2014 को चंद्रमोहन शर्मा ग्रेटर नोएडा के कासना थाने में पहुंचा और तत्कालीन थानाप्रभारी प्रवीण यादव को बताया कि आज परी चौक के पास कासना क्षेत्र के ही ब्रजेश कुमार, उस के 2 भाइयों ज्ञानी व राजकुमार और बेटों आनंद व प्रवीण ने उसे घेर कर जान से मारने की धमकी दी है.
कासना गांव में मंदिर की जमीन को ले कर चंद्रमोहन शर्मा का नामजद लोगों से विवाद चल रहा था. थानाप्रभारी ने उस की तहरीर ले कर उचित काररवाई का आश्वासन दिया. तहरीर की रिसीविंग प्रति ले कर चंद्रमोहन घर पहुंचा और वह प्रति पत्नी सविता शर्मा को देते हुए अपने साथ घटी घटना की जानकारी दे दी.
इस के 2 दिनों बाद ही चंद्रमोहन शर्मा के साथ ऐसी घटना घटी जिस से सविता शर्मा के जीवन में भूचाल सा आ गया और ग्रेटर नोएडा पुलिस की नींद हराम हो गई. हुआ यह कि 2 मई, 2014 को ग्रेटर नोएडा को एल्डेको क्रौसिंग के पास एक जली हुई कार मिली. उस कार में एक आदमी की झुलसी हुई लाश पड़ी थी.
सूचना मिलने पर थाना कासना पुलिस मौके पर पहुंच गई. पुलिस ने कार का निरीक्षण किया तो उस की अगली सीट पर एक आदमी की लाश पड़ी थी. वह लाश इतनी झुलसी हुई थी कि उसे पहचाना नहीं जा सकता था.
थाना पुलिस ने यह खबर अपने उच्चाधिकारियों को दी तो एसएसपी भी मौके पर पहुंच गए. फोरेंसिक टीम को भी बुला लिया गया. कार की चैसिस और नंबर से पता चला कि वह शेवरले कार कासना क्षेत्र के अल्फा-2 के रहने वाले समाजसेवी चंद्रमोहन शर्मा की थी.
पुलिस ने खबर उस की पत्नी सविता शर्मा को दी तो उस ने बताया कि उस के पति कल से गायब हैं. सविता ने जब सुना कि पति की कार में एक लाश भी है तो उस के पैरों तले से जमीन खिसक गई. वह तुरंत उस जगह के लिए निकल पड़ी, जहां पति की जली हुई कार खड़ी थी.
कार की अगली सीट पर पड़ी लाश देख कर वह जोरजोर से रोने लगी. क्योंकि वह लाश कदकाठी में उस के पति की ही लग रही थी. पति के हाथ पर उस के और बच्चों के नाम के टैटू गुदे हुए थे. सविता ने जब हाथ देखा तो उस पर टैटू नहीं था. उस ने सोचा कि झुलसने से टैटू भी जल गया होगा. वह कार पति की थी तो वह मान बैठी कि यह लाश उन्हीं की होगी. सविता ने लाश की शिनाख्त पति चंद्रमोहन शर्मा के रूप में कर दी.
चंद्रमोहन शर्मा कोई मामूली आदमी नहीं था. आरटीआई एक्टिविस्ट के अलावा वह आम आदमी पार्टी से भी जुड़ा था. उस की पत्नी सविता शर्मा भी आम आदमी पार्टी की पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सचिव थी. जैसे ही उस के समर्थकों को पता चला कि चंद्रमोहन शर्मा को किसी ने उन की कार में ही जला दिया है तो सैकड़ों की संख्या में वे एल्डेको क्रौसिंग पहुंच गए.
सविता और उस के समर्थकों का कहना था कि चंद्रमोहन शर्मा की किसी ने हत्या की है. वे लोग आक्रोशित हो कर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे.
सविता ने आरोप लगाया कि उस के पति की हत्या पुलिस की लापरवाही की वजह से हुई है. 2 दिन पहले ही उन्हें कासना गांव के ही कई लोगों ने परी चौक पर घेर कर जान से मारने की धमकी दी थी. इस की सूचना उन्होंने थाने में भी दी थी, इस के बावजूद भी पुलिस ने कोई काररवाई नहीं की. यदि पुलिस काररवाई करती तो शायद उन की जान बच जाती.
भीड़ को आक्रोशित होते देख वहां भारी तादाद में पुलिस पहुंच गई. पुलिस अधिकारियों ने भीड़ को जैसेतैसे समझाया और जल्दीजल्दी आवश्यक काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
चंद्रमोहन शर्मा एक राजनैतिक पार्टी से जुड़ा हुआ था. उस की हत्या का मामला तूल पकड़ सकता था, इसलिए कासना के थानाप्रभारी ने इस की जल्द जांच करनी शुरू कर दी. उस की हत्या जितनी निर्दयता से की गई थी. उस से ऐसा लगा कि यह काम उसी ने किया होगा, जिस से उस की व्यक्तिगत रंजिश रही होगी.
30 अप्रैल, 2014 को चंद्रमोहन शर्मा ने थाने जा कर जिन लोगों पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था, वे सभी कासना गांव के रहने वाले थे. सविता ने भी आरोप लगाया था कि उन्हीं लोगों ने उस के पति की हत्या की है. सविता की तहरीर पर पुलिस ने ब्रजेश, ज्ञानी, राजू उर्फ राजकुमार, आनंद और प्रवीण के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कर ली.
जिन लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट लिखवाई गई थी, भनक लगते ही वे फरार हो गए. वे उस समय अपने खेतों में गेहूं की फसल काट कर मशीन से गेहूं की निकासी कर रहे थे. एक तरफ पुलिस आरोपियों को तलाश रही थी तो वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने चंद्रमोहन शर्मा की हत्या के विरोध में जिला मुख्यालय पर धरनाप्रदर्शन करने शुरू कर दिए. बाद में उन्होंने कैंडिल मार्च भी निकाला.
पुलिस प्रशासन पर नामजद लोगों की गिरफ्तारी का दबाव बढ़ता जा रहा था. पुलिस की कई टीमें नामजद लोगों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिशें डाल रही थीं. उन के रिश्तेदारों से भी उन के बारे में पूछताछ की जा रही थी.
काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने नामजद आरोपियों को उन के एक रिश्तेदार के यहां से गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर पुलिस ने उन से चंद्रमोहन शर्मा की हत्या के बारे में पूछताछ की. सख्ती से पूछताछ करने के बाद भी वे लोग खुद को बेकुसूर बताते रहे. उन्होंने कहा कि 30 अप्रैल को उन्होंने न ही चंद्रमोहन को किसी तरह की धमकी दी थी और न ही उन्होंने उस की हत्या की थी. इस मामले में उन्हें झूठा फंसाया जा रहा है.
चूंकि रिपोर्ट नामजद लिखी हुई थी, इसलिए पुलिस ने आरोपियों की एक न सुनी और चंद्रमोहन की हत्या के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.
पूछताछ के दौरान पुलिस को भी लग रहा था कि नामजद आरोपी शायद बेकुसूर हैं. इस बारे में पुलिस ने मृतक की पत्नी सविता को बताया भी. लेकिन सविता अपनी जिद पर अड़ी रही. वह पुलिस पर आरोप लगा रही थी कि वह आरोपियों से सांठगांठ कर उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है. अपने ऊपर शक की अंगुली उठने के बाद पुलिस को मजबूरन आरोपियों को जेल भेजना पड़ा था.
चंद्रमोहन शर्मा ग्रेटर नोएडा स्थित होंडा सिएल कंपनी में नौकरी करता था. कंपनी को जब पता चला कि चंद्रमोहन की हत्या हो गई है तो कंपनी ने इंश्योरेंस आदि के 20 लाख रुपए उस की पत्नी सविता को दे दिए. इस के अलावा चंद्रमोहन ने 3 लाख रुपए का अपना जीवनबीमा भी करा रखा था. जीवनबीमा के भी पैसे उस की नौमिनी सविता को मिल गए थे.
चूंकि पति की हत्या के आरोपी जेल जा चुके थे, इसलिए सविता अपने दोनों बच्चों पर ज्यादा ध्यान दे कर पति की मौत से मिले दुख से उबरने की कोशिश कर रही थी.
पुलिस इस केस की तफ्तीश में लगी हुई थी. इसी दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि चंद्रमोहन का पड़ोस में रहने वाली नीलम नाम की एक लड़की से प्यार का चक्कर चल रहा था. इस वजह से पत्नी से उस की नोकझोंक होती रहती थी.
2 मई को चंद्रमोहन की लाश मिलने के करीब 1 महीने बाद 7 जून को उस की प्रेमिका नीलम भी अचानक घर से लापता हो गई थी. जवान बेटी के गायब होने पर उस के मांबाप परेशान हो गए. उन्होंने उसे सभी संभावित जगहों पर ढूंढा, लेकिन वह नहीं मिली तो उन्होंने इस की सूचना कासना पुलिस को दे दी.
22 वर्षीया नीलम का चंद्रमोहन के साथ ही चक्कर चल रहा था. उस की हत्या हो चुकी थी तो नीलम कहां चली गई, पुलिस यह जानने की कोशिश में लगी थी.
पुलिस ने नीलम के फोन की काल डिटेल्स निकाली. उस से पता चला कि वह अपने फोन में अलगअलग 2 सिम प्रयोग करती थी. एक सिम उस के नाम पर खरीदा हुआ था और दूसरा सिम उस के प्रेमी चंद्रमोहन शर्मा के नाम पर.
दोनों सिमों से उस की किनकिन से बात होती थी, पुलिस इस की जांच करने लगी. इस जांच में पुलिस को एक खास जानकारी मिली कि चंद्रमोहन के नाम से खरीदे गए सिमकार्ड से नीलम अकसर रात में ही किसी से बातें करती थी. जिस नंबर से उस की बातें होती थीं, वह बेंगलुरू का था.
नीलम जिस दिन से लापता हुई थी, उस का फोन भी स्विच्ड औफ आ रहा था. पुलिस यही मान कर चल रही थी कि वह जहां भी गई है, अपनी मरजी से गई है.
नीलम के गायब होने के करीब 3 महीने बाद उस के पिता के मोबाइल पर किसी की काल आई. काल करने वाले ने उन्हें अपना नाम नहीं बताया. उस ने कहा, ‘‘आप की बेटी तिरुपति बालाजी के पास देखी गई है.’’ इतना कह कर उस ने काल डिसकनेक्ट कर दिया था.
नीलम के पिता ने यह बात पुलिस को बता दी. जिस नंबर से उन के फोन पर काल आई थी, पुलिस ने उस नंबर का पता लगाया. वह नंबर बेंगलुरू के एक पीसीओ का था. बेंगलुरू का नाम सामने आते ही थानाप्रभारी चौंके, क्योंकि नीलम की कालडिटेल्स में बेंगलुरू का फोन नंबर आया था, जिस पर वह अकसर रात में बातें करती थी. वह समझ गए कि नीलम का बेंगलुरू से कोई न कोई चक्कर जरूर है.
इसी बीच 12 और 13 अगस्त को भी नीलम के पिता के मोबाइल फोन पर किसी ने फिर से फोन कर के कहा कि नीलम तिरुपति बालाजी के पास घूमती रहती है, उसे ले जाएं.
नीलम के पिता ने यह बात भी पुलिस को बता दी. जांच में पुलिस को पता चला कि यह फोन भी बेंगलुरू के अलगअलग पीसीओ से किए गए थे.
पुलिस के दिमाग में एक बात आ रही थी कि नीलम के पिता के पास जो व्यक्ति फोन कर रहा है, वह कौन है? इन का नंबर उसे कैसे मिला और उस व्यक्ति के फोन करने का मकसद क्या है?
जाहिर है, फोन करने वाला व्यक्ति नीलम और उस के पिता को अच्छी तरह जानता रहा होगा. उस व्यक्ति का पता बेंगलुरू जा कर ही लग सकता था. थानाप्रभारी ने नीलम के पिता के फोन पर बेंगलुरू से काल आने वाली बात एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह को बता दी.
तब एसएसपी ने एसआई विनय शर्मा के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बेंगलुरू रवाना कर दी. स्थानीय पुलिस को ले कर ग्रेटर नोएडा पुलिस की टीम सब से पहले उन्हीं पीसीओ पर पहुंची, जहां से नीलम के पिता को फोन किए गए थे.
2 पीसीओ पर पुलिस को पता नहीं लग सका कि फोन करने वाला कौन था. लेकिन आर.के. पुरम (बेंगलुरू) के एक पीसीओ में सीसीटीवी कैमरा लगा था, जहां से उस अनजान आदमी ने फोन किया था.
ग्रेटर नोएडा पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की. फुटेज में पीसीओ मालिक ने उस शख्स की शिनाख्त कर ली, जिस ने उस के यहां से फोन किया था. वह शख्स किसी कंपनी की वरदी पहने हुए था.
पीसीओ संचालक ने वह वरदी पहचानते हुए बताया कि यह तो होंडा सिएल कंपनी की वरदी है. होंडा सिएल कंपनी वहां से करीब 50 किलोमीटर दूर थी. पुलिस टीम होंडा कंपनी पहुंची.
पुलिस ने वहां के कर्मचारियों को सीसीटीवी फुटेज दिखाई. फुटेज में चेहरा ज्यादा साफ नहीं था. इस के बावजूद कर्मचारियों ने कदकाठी से उसे पहचान लिया. उन्होंने बताया कि यह फोटो नितिन शर्मा का है.
फुटेज की पहचान होने के बाद पुलिस को नीलम वाले केस के हल होने की उम्मीद दिखी. उस से पूछताछ के बाद नीलम के बारे में कुछ पता चल सकता था.
कंपनी के अधिकारियों ने जब नितिन शर्मा को बुलाया तो उस का चेहरा पुलिस को कुछ पहचाना हुआ सा लगा. वह कार में जला कर मर चुके चंद्रमोहन शर्मा की तरह लग रहा था. उस की दाढ़ीमूंछ और सिर के बाल नहीं थे. जबकि चंद्रमोहन शर्मा सिर के बाल के अलावा मूंछें भी रखता था.
पुलिस को देख कर नितिन शर्मा कुछ घबरा रहा था. पुलिस को उस पर शक होने लगा. पूछताछ में नितिन ने बताया कि वह हरियाणा के हिसार जिले के नलवा गांव का रहने वाला है.
उस के बातचीत करने के अंदाज से विनय शर्मा उसे अच्छी तरह पहचान गए कि यह नितिन शर्मा नहीं, बल्कि चंद्रमोहन शर्मा है. उसी समय उन के दिमाग में यह बात आई कि जब चंद्रमोहन शर्मा जिंदा है तो 3 महीने पहले कार में जली हुई जो लाश मिली थी, वह किस की थी.
उन्होंने अपने मन की बात नितिन शर्मा नाम बताने वाले उस शख्स से जाहिर नहीं होने दी. वह पुख्ता सुबूत हासिल करने के लिए उस के कमरे पर जाना चाहते थे. विनय शर्मा ने उस से कहा, ‘‘नितिन, हमें आप से एकांत में कुछ बातें करनी है. कुछ बातें ऐसी हैं, जो हम यहां नहीं कर सकते.’’
‘‘जी सर, बिलकुल मैं तैयार हूं. लेकिन यह तो बता दीजिए कि आप पूछताछ किस सिलसिले में करना चाहते हैं. आप उत्तर प्रदेश पुलिस से हैं और मैं हरियाणा का रहने वाला हूं. आप बात तो बता दीजिए?’’ नितिन शर्मा ने पूछा.
‘‘कोई खास बात है, यूपी का एक मामला है. उसी बारे में आप से बात करनी है.’’ एसआई विनय शर्मा ने कहा.
‘‘मामला यूपी का है तो उस का मुझ से क्या मतलब?’’
‘‘देखिए, नोएडा की जो लड़की गायब है उस के मोबाइल फोन पर यहीं के पीसीओ से आप की बात होती थी. पीसीओ के फुटेज में आप की फोटो है. अब आप ज्यादा होशियारी मत दिखाइए, चुपचाप हमारे साथ चलिए.’’ विनय शर्मा ने थोड़ा सख्त होते हुए कहा.
नितिन शर्मा समझ रहा था कि शायद पुलिस उसे पहचान चुकी है. लेकिन उस समय पुलिस से बचने का उस के पास कोई रास्ता नहीं था. फिर भी खुद को निडर दिखाते हुए वह बोला, ‘‘चलिए सर, आप जहां कहते हैं मैं चलने के लिए तैयार हूं.’’ कहते हुए वह पुलिस के साथ चल दिया.
‘‘आप हमें अपने कमरे पर ले चलिए. वहीं बात करेंगे.’’ एसआई विनय शर्मा ने कहा.
नितिन पुलिस को अपने कमरे पर ले जाना नहीं चाहता था, इसलिए उस ने कहा, ‘‘सर, कमरे पर ही क्यों? आप किसी भी थाने या कहीं और चल कर बात कर सकते हैं.’’
विनय शर्मा समझ रहे थे कि नितिन अब अपने जाल में फंस चुका है. वह चकमा दे कर कहीं फरार न हो जाए, इसलिए उन्होंने साथ में मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों को इशारा कर के उसे चारों तरफ से घेर लिया. उन्होंने उसे अपने कमरे पर ले जाने के लिए मजबूर कर दिया. स्थानीय पुलिस के साथ नोएडा पुलिस नितिन शर्मा के कमरे पर पहुंची तो वह इस तरह खुश हुई, जैसे उसे कोई गड़ा हुआ खजाना मिल गया हो.
नीलम नाम की जिस युवती को वह पिछले ढाई महीने से ढूंढ रहे थे, वह नितिन के कमरे पर मिल गई. नीलम के मिलते ही नोएडा पुलिस के दिमाग में चंद्रमोहन शर्मा की रची हुई सारी कहानी उन के दिमाग में घूमने लगी.
एसआई विनय शर्मा को एक बात याद आ गई कि सविता ने बताया था कि उस के पति की बांह पर उस का और बच्चों के नाम का टैटू गुदा हुआ था. विनय शर्मा ने नितिन का हाथ देखा तो वास्तव में पत्नी और बच्चों के नाम का टैटू था. इस से उन्हें इस बात की पुष्टि हो गई कि यह नितिन शर्मा नहीं, बल्कि चंद्रमोहन शर्मा है.
पुलिस ने नीलम को भी हिरासत में ले लिया. पुलिस ने नितिन उर्फ चंद्रमोहन शर्मा से पूछताछ की तो उस ने स्वीकार कर लिया कि उस का असली नाम चंद्रमोहन शर्मा है.
एसआई विनय शर्मा ने चंद्रमोहन शर्मा और नीलम को गिरफ्तार करने की जानकारी मौजूदा थानाप्रभारी समरजीत सिंह को फोन द्वारा दे दी. नोएडा पुलिस के लिए यह बहुत बड़ी सफलता थी. जिस चंद्रमोहन शर्मा को पुलिस व अन्य लोग मरा समझ रहे थे, अचानक उसे जीवित गिरफ्तार करना काफी चौंकाने वाली बात थी.
बेंगलुरू के स्थानीय न्यायालय में दोनों को पेश करने के बाद नोएडा पुलिस उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर कासना थाने ले आई. चंद्रमोहन शर्मा और उस की प्रेमिका के गिरप्तार होने की बात जैसे ही क्षेत्र में फैली, उसे देखने के लिए सैकड़ों लोग थाने के बाहर जमा हो गए. चंद्रमोहन की हत्या के आरोप में जो लोग जेल जा चुके थे, उन के परिवार के सदस्य उस के जिंदा मिलने पर बहुत खुश थे. उन्हें अब यह आस बंध गई कि हत्या की जो झूठी रिपोर्ट लिखाई गई थी, वह निरस्त हो जाएगी और जेल में बंद उन के अपने जल्द रिहा हो जाएंगे.
पुलिस ने चंद्रमोहन शर्मा और नीलम से पूछताछ की तो उन्होंने प्रेम और अपराध के पीछे की जो कहानी बताई, वह रहस्य और रोमांच से सराबोर निकली.
उत्तर प्रदेश के शहर ग्रेटर नोएडा के सेक्टर अल्फा-2 में रहने रहा चंद्रमोहन मूलरूप से गुड़गांव के गांधीनगर का रहने वाला था. करीब 10 साल पहले उस ने सविता नाम की लड़की के साथ प्रेम विवाह किया था. इस शादी से उस के घर वाले नाराज हो गए थे, लेकिन जैसेजैसे समय बीतता गया, घर वालों के मतभेद दूर हो गए.
वह ग्रेटर नोएडा स्थित होंडा के मेंटनेंस डिपार्टमेंट में काम करता था. जहां से उसे 40 हजार रुपए प्रति महीना सैलरी मिलती थी.
चंद्रमोहन शर्मा अपनी घरगृहस्थी में खुश था. इसी बीच वह एक बेटी और एक बेटे का बाप बन गया. आरटीआई (सूचना का अधिकार) एक्ट सरकार द्वारा लागू करने के बाद आम लोगों में भी जागरूकता आई. लोगों ने आरटीआई एक्ट के तहत विभिन्न सरकारी विभागों से अनेक तरह की जानकारियां लेनी शुरू कर दीं. कुछ लोगों ने जनहित से जुड़े मामलों की सूचनाएं इस एक्ट के तहत मांगनी शुरू कीं. चंद्रमोहन शर्मा भी उन में से एक था.
नोएडा और दिल्ली में माफियाओं द्वारा सरकारी जमीनों पर किए हुए अवैध कब्जे की जानकारी उस ने आरटीआई एक्ट के तहत मांगी थी. वह विभिन्न विभागों में करीब 300 आरटीआई दाखिल कर चुका था. इस तरह क्षेत्र में आरटीआई एक्टिविस्ट के रूप में उस की पहचान हो गई थी.
क्षेत्र में जब उस की पहचान बढ़ी तो उस का झुकाव राजनीति की तरफ हो गया. सन 2004 में वह शिवसेना से जुड़ गया. उस की पहचान का दायरा बढ़ा और वह शहर की हर गतिविधि में भाग लेने लगा.
चंद्रमोहन अपनी बीवी सविता को विधायक बनाना चाहता था. इसलिए उस ने उत्तर प्रदेश में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में पत्नी को जेवर विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़वाया. लेकिन वह चुनाव हार गईं.
सन 2011 में समाजसेवी अन्ना हजारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के विरोध में जो आंदोलन हुआ, उस में भी चंद्रमोहन ने बढ़चढ़ कर भाग लिया. बाद में वह अरविंद केजरीवाल द्वारा बनाई गई आम आदमी पार्टी में शामिल हो गया. उस के साथ सविता शर्मा ने भी आप की सदस्यता हासिल कर ली. बाद में सविता को पार्टी का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सचिव बना दिया गया.
ग्रेटर नोएडा के भट्टा पारसौल आंदोलन में भी चंद्रमोहन शर्मा ने भाग लिया. इस आंदोलन में वह जेल भी गया. जनहित से जुड़े अन्य कई आंदोलनों में उसे कई बार जेल जाना पड़ा.
सेक्टर अल्फा-2 में ही नीलम नाम की एक युवती रहती थी. एक आंदोलन के दौरान चंद्रमोहन की उस से मुलाकात हुई. नीलम चंद्रमोहन से बहुत प्रभावित हुई. दोनों के बीच दोस्ती हुई. उन के बीच फोन पर भी बातें होने लगीं.
दोस्ती के दौरान ही 2 बच्चों का पिता चंद्रमोहन अपने दिल पर नियंत्रण नहीं रख सका. वह नीलम की बातों और रूप में ऐसा फंसा कि उस का झुकाव उस की तरफ हो गया. वह नीलम से प्यार करने लगा. एक दिन उस ने नीलम से अपने प्यार का इजहार कर दिया. नीलम ने भी उस के प्यार को स्वीकार कर लिया. इस के बाद उन के बीच एकांत में भी मुलाकातें होने लगीं. एकांत की मुलाकातें उन के दिलों को और करीब ले आईं.
नीलम से प्यार होने के बाद चंद्रमोहन पत्नी को विधायक बनाने का सपना भूल गया. वह अब आम आदमी पार्टी की गतिविधियों में भी कम उत्साह दिखा रहा था. उस के जेहन में उस की प्रेमिका ही रहती थी.
सविता को इस बात की तो जानकारी थी कि पति की दोस्ती नीलम के साथ है, लेकिन उसे यह पता नहीं था कि उस की दोस्ती ने कोई दूसरा रूप ले लिया है. वह पति पर विश्वास करती थी. इसलिए उस ने उन के संबंधों को गंभीरता से नहीं लिया.
लेकिन वह संबंध ज्यादा दिनों तक छिपे नहीं रह सके. सविता को पति की असलियत पता चल गई. इस के बाद तो घर में भूचाल सा आ गया. क्योंकि कोई भी औरत हरगिज नहीं चाहेगी कि उस के जीते जी पति के अंतरंग संबंध किसी दूसरी औरत से बनें. वह सब कुछ बरदाश्त कर लेगी, लेकिन इस बात को बरदाश्त नहीं कर सकती.
सविता लड़झगड़ कर पति को लाख समझाती थी कि वह नीलम से न मिले, परंतु वह नीलम को छोड़ने को तैयार नहीं था. अकसर रोजाना ही उन के बीच कलह रहने लगी. रोजरोज की कलह से चंद्रमोहन भी परेशान हो गया था. उस ने तय कर लिया था कि पत्नी को भले ही छोड़ दे, प्रेमिका को नहीं छोड़ेगा. अब वह ऐसा उपाय खोजने लगा कि पत्नी बच्चों भी साथ रहें और प्रेमिका भी.
कई सप्ताह तक वह तरहतरह की योजनाएं बनाता रहा. हर योजना में अपराध शामिल हो रहा था. अंत में प्रेमिका के लिए वह अपराध तक करने के लिए तैयार हो गया. वह अपराध का ऐसा तरीका खोजने लगा, जिस से सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे.
एक दिन उस ने ग्रेटर नोएडा के ही परी चौक के पास मानसिक रूप से विक्षिप्त एक आदमी को देखा. वह विक्षिप्त उस की ही कदकाठी का था. वह काफी दिनों से वहीं आसपास घूमता रहता था.
उसे देखते ही उस के दिमाग में एक आइडिया आ गया. उस ने सोचा कि यदि इसे मार दिया जाए तो इस का कोई नामलेवा भी नहीं होगा और उस का मकसद भी पूरा हो जाएगा. अपने आइडिया से उस ने अपने साले विदेश को भी अवगत करा दिया. उस ने साले से कहा कि योजना के सफल हो जाने पर उस की कंपनी और इंश्योरेंस से जो रकम मिलेगी, उस से सविता और बच्चों की जिंदगी आराम से कट जाएगी.
योजना के अनुसार, उस ने अपने विरोधियों ब्रजेश, राजकुमार, ज्ञानी, प्रवीण व आनंद को फंसाने के लिए 30 अप्रैल को थाने में लिखित तहरीर दे दी. उस ने आरोप लगाया कि इन लोगों ने उसे जान से मारने की धमकी दी. ऐसा कर के वह एक तीर से दो शिकार करना चाहता था.
योजना के अनुसार चंद्रमोहन ने पहली मई को अपने औफिस के फोन से साले विदेश को फोन किया और उसे परी चौक पहुंचने को कहा. शाम के समय चंद्रमोहन ग्रेटर नोएडा के एल्डेको क्रौसिंग पर अपनी शेवरले कार से पहुंच गया. उधर योजना के अनुसार विदेश किसी बहाने से उस विक्षिप्त को परी चौक से अपनी मोटरसाइकिल पर बैठा कर एल्डेको चौक ले गया. उन्होंने उस विक्षिप्त को कार में बैठा कर उस का गला घोंट कर मार दिया.
उसे मारने के बाद चंद्रमोहन ने उसे अपने कपड़े पहना दिए. खुद उस ने बैग में मौजूद दूसरे कपड़े पहन लिए. फिर उसे कार की ड्राइविंग सीट पर बैठा कर उस के ऊपर पहले से खरीद कर लाया हुआ पैट्रोल डाल दिया और कार में आग लगा दी.
कार में आग लगाने के बाद वह विदेश की बाइक पर बैठ कर एच्छर मार्केट होता हुआ नालेज पार्क पहुंचा. वहां से विदेश ने उसे एक्सप्रेसवे पर छोड़ दिया. अपने बहनोई को एक्सप्रेसवे पर छोड़ कर विदेश घर चला गया. वहां से किसी से लिफ्ट ले कर चंद्रमोहन दिल्ली चला गया. फिर दिल्ली से ट्रेन द्वारा बेंगलुरू चला गया. खर्च के लिए उस ने अपने एक दोस्त से 30 हजार रुपए उधार ले लिए थे. हालांकि चंद्रमोहन के खाते में इस से ज्यादा पैसे थे, लेकिन उसे पता था कि अगर अपनी मौत का ड्रामा रचने के बाद वह एटीएम का प्रयोग करेगा तो पकड़ा जाएगा.
अगले दिन कार में मिली लाश की शिनाख्त सविता ने अपने पति चंद्रमोहन शर्मा के रूप में की और उस की हत्या की नामजद रिपोर्ट कासना गांव के ब्रजेश, ज्ञानी, राजकुमार, आनंद और प्रवीण के खिलाफ दर्ज करा दी. क्योंकि इन के खिलाफ चंद्रमोहन ने 30 अप्रैल को कासना थाने में शिकायत दी थी.
ग्रेटर नोएडा के लोग चंद्रमोहन को मरा समझ चुके थे, लेकिन चंद्रमोहन ने खुद को मरा दिखा कर प्रेमिका के साथ नई जिंदगी जीने की पूरी योजना बना ली थी. बेंगलुरू पहुंचते ही उस ने अपने बाल और मूंछ कटवा ली. यहां तक उस ने अपनी चोटी तक कटवा दी. वह पहले तिलक लगाता था, वह भी लगाना बंद कर दिया. पूरी पहचान बदल कर नए नाम से नई जिंदगी शुरू करना चाहता था.
नितिन शर्मा पुत्र आर.सी. शर्मा के नाम से उस ने अपने फरजी शैक्षणिक प्रमाणपत्र बनवा लिए. उन के सहारे उस ने बेंगलुरू के नरसापुर में स्थित होंडा कंपनी में नौकरी भी हासिल कर ली. ग्रेटर नोएडा की होंडा कंपनी में वह पहले काम कर चुका था. अनुभव की वजह से उसे बेंगलुरू में नौकरी मिल गई.
उस ने इंटरव्यू में यह नहीं बताया था कि वह होंडा की ग्रेटर नोएडा इकाई में काम कर चुका है, बल्कि यह भी बताया कि वह इस तरह के काम जानता है.
ग्रेटर नोएडा में 40 हजार रुपए की पगार लेने वाले चंद्रमोहन को बेंगलुरू की होंडा कंपनी में केवल 9 हजार रुपए प्रति महीने की पगार पर नौकरी करनी पड़ी.
चंद्रमोहन पहली मई को अपने साथ ही प्रेमिका नीलम को बेंगलुरू ले जाना चाहता था, लेकिन नीलम ने उस समय उस के साथ जाने से इसलिए मना कर दिया, क्योंकि सविता उस के प्रेम संबंधों से वाकिफ थी.
दोनों के साथसाथ गायब हो जाने पर लोगों को शक हो जाता. लोग समझ जाते कि दोनों भाग गए होंगे. तब चंद्रमोहन की योजना पर पानी फिर जाता. इसलिए वह उसे अपने साथ नहीं ले गया और अकेला ही चला गया.
ग्रेटर नोएडा छोड़ने से पहले चंद्रमोहन ने अपनी प्रेमिका को अपने नाम से एक सिमकार्ड खरीद कर दे दिया था. बेंगलुरू पहुंचने के 3 दिनों बाद ही वह प्रेमिका के उसी सिम पर बात करने लगा.
बेंगलुरू में सुरक्षित ठिकाना बनाने के बाद चंद्रमोहन ने नीलम से कहा कि वह दिल्ली आ जाए. वहां से वह उसे बेंगलुरू ले आएगा. लेकिन नीलम अकेली दिल्ली आने के लिए तैयार नहीं हुई.
तब 6 जून, 2014 को चंद्रमोहन अपने चेहरे पर कपड़ा लपेट कर ग्रेटर नोएडा पहुंचा. वह अपनी प्रेमिका से मिला और बच्चों की झलक पाने के लिए अपने घर की तरफ भी गया, लेकिन बच्चों के दीदार नहीं हो सके. इस के बाद वह प्रेमिका को ले कर बेंगलुरू चला गया. वहां दोनों नई जिंदगी जीने लगे.
दोनों बेंगलुरू में मजे की जिंदगी जी रहे थे. कुछ दिनों बाद ही चंद्रमोहन को आर्थिक समस्या महसूस होने लगी. दोस्त के पास से वह जो पैसे उधार ले गया था, वह भी धीरेधीरे खत्म होने लगे थे. पगार भी इतनी नहीं मिल रही थी, जिस से दोनों का गुजारा आराम से चल सके. लिहाजा वह प्रेमिका से पीछा छुड़ाने की सोचने लगा. वह प्रेमिका को अपने पास से जाने को सीधे कह भी नहीं सकता था.
मीडिया में उस के बारे में क्याक्या खबरें आ रही हैं, जानने के लिए वह शाम के समय साइबर कैफे जाता था और इंटरनेट पर खबरें पढ़ता था. इंटरनेट द्वारा उसे यह भी पता चल गया कि नीलम के पिता ने बेटी की गुमशुदगी की सूचना थाने में दर्ज करा दी है और वह उसे तलाश रहे हैं. इसलिए उस ने 9 अगस्त, 2014 को नीलम के पिता के मोबाइल पर एक पीसीओ से फोन किया कि उन की बेटी तिरुपति बालाजी के पास देखी गई है. इसी तरह की 2 काल्स उस ने 12 और 13 अगस्त को भी कीं.
इस के पीछे की उस की सोच यह थी कि फोन सुनने के बाद उस के पिता बेटी को ढूंढने तिरुपति जरूर आएंगे. वह भी नीलम को तिरुपति बालाजी के पास घुमाने ले जाएगा और जैसे ही उसे नीलम के पिता दिखेंगे, वहां नीलम को छोड़ कर इधरउधर हो जाएगा. तब उस के पिता उसे अपने साथ ले जाएंगे.
फोन करने के बाद वह कई दिनों तक नीलम के साथ तिरुपति बालाजी के आसपास घूमता रहा, लेकिन उसे नीलम के पिता नहीं मिले. जिन पीसीओ से चंद्रमोहन ने नीलम के पिता को फोन किए थे, उन पीसीओ के फोन नंबरों के सहारे पुलिस बहुरुपिया चंद्रमोहन तक पहुंच गई और वह पुलिस के चंगुल में आ ही गया.
चंद्रमोहन को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उसे गौतमबुद्ध नगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुमित चंद्रा की अदालत में पेश कर 3 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया.
रिमांड अवधि में उस से घटनास्थल की तस्दीक कराई. पुलिस ने नीलम उस के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201, 202, 120बी के तहत रिपोर्ट दर्ज कर उसे अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (प्रथम) इंदिरा सिंह की कोर्ट में पेश किया. वहीं पर उस के सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराए.
चूंकि नीलम को चंद्रमोहन की रची गई साजिश, विक्षिप्त की हत्या करने आदि की जानकारी थी, उस ने यह सारी जानकारी पुलिस से छिपाए रखी, इसलिए न्यायालय ने उसे जेल भेज दिया. उधर चंद्रमोहन को भी पूछताछ करने के बाद गौतमबुद्ध नगर जेल भेज दिया था.
उधर सविता का कहना था कि चंद्रमोहन ने जो अपराध किया है, उस की सजा उसे अवश्य मिलनी चाहिए. उस ने 2 मई को ही पति को मरा समझ लिया था. उस के लिए वह मर चुका है. वह उस के नाम का सिंदूर हरगिज नहीं लगाएगी. 5 लोगों के खिलाफ उस ने हत्या की जो रिपोर्ट लिखाई थी, उसे वापस ले कर बेगुनाहों को जेल से छुड़वाने का प्रयास करेगी.
चंद्रमोहन के साले विदेश की तलाश में पुलिस ने अनेक जगह दबिशें दीं, वह नहीं मिल सका. चंद्रमोहन शर्मा ने अपनी मौत की फूलप्रूफ साजिश रचने के लिए जिस मानसिक विक्षिप्त आदमी को बलि का बकरा बनाया था, उस की शिनाख्त नहीं हो सकी है. पुलिस ने उस का डीएनए सुरक्षित रखवा लिया है. पुलिस को उम्मीद है कि डीएनए रिपोर्ट के सहारे उस की पहचान हो जाएगी. RTI Activist Murder Mystery
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. नीलम परिवर्तित नाम है.
— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.
— मनोहर कहानियां, 2014 में प्रकाशित






