RTI Activist Murder Mystery. आरटीआई एक्टिविस्ट चंद्रमोहन शर्मा ने खुद को मरा साबित करने के लिए फूलप्रूफ साजिश रच कर एक विक्षिप्त को अपनी कार में जला डाला. इस के बाद वह बेंगलुरू में अपनी पहचान छिपा कर प्रेमिका नीलम के साथ नई जिंदगी जीने लगा. लेकिन एक छोटी सी चूक से वह पुलिस के चंगुल में फंस गया.
चंद्रमोहन शर्मा की एक आरटीआई एक्टिविस्ट के रूप में पूरे क्षेत्र में पहचान थी. नोएडा और दिल्ली में सरकारी जमीनों पर माफियाओं द्वारा अवैध कब्जा किए जाने पर उस ने अनेक आरटीआई दाखिल की थीं. इस के अलावा जनहित के कामों को ले कर वह संबंधित विभागों में 300 से अधिक आरटीआई दाखिल कर चुका था. जिस की वजह से लोग उसे समाजसेवी के रूप में जानते थे.
आरटीआई दाखिल करने पर कुछ लोग उस के काम की तारीफ करते थे तो वहीं उस के इस काम से जिन लोगों के काले चिट्ठे खुलते थे, वे उस से नाराज रहते थे. उन से उस की जान को खतरा बना रहता था.
30 अप्रैल, 2014 को चंद्रमोहन शर्मा ग्रेटर नोएडा के कासना थाने में पहुंचा और तत्कालीन थानाप्रभारी प्रवीण यादव को बताया कि आज परी चौक के पास कासना क्षेत्र के ही ब्रजेश कुमार, उस के 2 भाइयों ज्ञानी व राजकुमार और बेटों आनंद व प्रवीण ने उसे घेर कर जान से मारने की धमकी दी है.
कासना गांव में मंदिर की जमीन को ले कर चंद्रमोहन शर्मा का नामजद लोगों से विवाद चल रहा था. थानाप्रभारी ने उस की तहरीर ले कर उचित काररवाई का आश्वासन दिया. तहरीर की रिसीविंग प्रति ले कर चंद्रमोहन घर पहुंचा और वह प्रति पत्नी सविता शर्मा को देते हुए अपने साथ घटी घटना की जानकारी दे दी.






