Death Mystery. नवीन थौमस और उस की पत्नी देवी आयुर्वेदिक डौक्टर थे. इस के अलावा देवी जरमन भाषा की टीचर भी थी. देवी की एक फ्रेंड थी आर्या, जोकि एक स्कूल में फ्रेंच की टीचर थी. उच्चशिक्षित होने के बावजूद तीनों अंधविश्वास के ऐसे चक्रव्यूह में फंस गए थे कि वह मृत्यु के बाद की दुनिया का सच जानना चाहते थे. इस के लिए उन्होंने एक होटल में कलाई की नस काट कर सामूहिक रूप से सुसाइड कर लिया. क्या यह उन की सनक थी या फिर कोई मानसिक बीमारी?

हम सभी के मन में अकसर यह सवाल उठता है कि हम से पहले की दुनिया कैसी रही होगी? हमारे पूर्वज कैसे रहे होंगे, वे कैसे रहते रहे होंगे, क्या करते रहे होंगे, उन की मौत के बाद उन का क्या हुआ होगा? हम मरेंगे तो हमारा क्या होगा? इस दुनिया के अलावा और भी कोई दुनिया है? अगर कोई और दुनिया है तो वह कैसी है? आसमान के ऊपर और जमीन के नीचे भी कोई दुनिया है? अगर है तो वह कैसी है? इंसान मरने लगता है तो उसे कैसा लगता है, वह क्या सोचता है? आदमी मर जाता है तो उस का क्या होता है?

ये सवाल हैं तो बहुत आसान, लेकिन कुछ लोग इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं. काला जादू, तंत्रमंत्र और अंधविश्वास को आमतौर पर इस तरह के लोग मानते हैं, जो कम पढ़ेलिखे होते हैं. लेकिन सच पूछो तो ऐसा नहीं है. समयसमय पर यह बात गलत साबित होती रही है. कभीकभी कुछ ऐसे भी लोग इन चीजों के चक्कर में फंस जाते हैं, जो काफी पढ़ेलिखे और बुद्धिमान होते हैं.

यह कहानी भी ऐसे ही लोगों की है, जिस की शुरुआत तो केरल के तिरुवनंतपुरम से होती है, जबकि खत्म होती है अरुणाचल प्रदेश में. केरल के तिरुवनंतपुरम की रहने वाली 29 साल की आर्या बी. नायर वहीं एक स्कूल में फ्रेंच पढ़ाती थी. टीचर होने का मतलब था कि आर्या काफी पढ़ीलिखी थी. वही नहीं, उस का पूरा परिवार काफी पढ़ालिखा था और परिवार के सभी लोग अच्छीअच्छी नौकरियों में थे, अच्छाभला सुखीसंपन्न परिवार था उस का.

27 मार्च, 2024 की शाम को जब आर्या घर नहीं लौटी तो घर वालों को चिंता हुई. घर का कोई आदमी गायब हो जाए तो घर वालों को चिंता होगी ही. फिर आर्या तो लड़की थी, वह भी जवान. एक महीने बाद उस की शादी होने वाली थी, इसलिए फेमिली वाले और ज्यादा परेशान थे.

विवाह भी उस की मरजी से हो रहा था. यह भी नहीं था कि उस का किसी से लव अफेयर रहा हो और फेमिली वाले जबरदस्ती उस का किसी अन्य से विवाह करा रहे थे, जिस की वजह से वह प्रेमी के साथ भाग गई हो. यह जो कुछ भी हो रहा था, परिवार और आर्या की मरजी और सहमति से हो रहा था.

आर्या इस विवाह से खुश थी, लेकिन विवाह से एक महीने पहले जब आर्या गायब हो गई तो फेमिली वाले परेशान हो उठे थे. उन्होंने उस की तलाश शुरू की. उस के स्कूल में पता किया, दोस्तों से पूछा, लेकिन उस का कुछ पता नहीं चला. थकहार कर उन्होंने रात को आर्या के गायब होने की सूचना थाना वट्टियुरकावु पुलिस को दी.

आर्या की गुमशुदगी दर्ज करने के बाद पुलिस ने आर्या का पता लगाने के लिए उस के मोबाइल की लोकेशन निकलवाई. इस से पुलिस को पता चला कि वह तिरुवनंतपुरम में नहीं, बल्कि असम के गुवाहाटी में है. क्योंकि उस के मोबाइल फोन की लोकेशन गुवाहाटी की मिली थी.

यह जान कर आर्या के पापा अनिल कुमार और मम्मी लता चिंता में पड़ गईं कि आर्या गुवाहाटी कैसे पहुंच गई? वह वहां किस के साथ गई?

यह पता करने के लिए पुलिस ने आर्या की कौल डिटेल्स निकलवा कर जांच की. कौल डिटेल्स की जांच से पता चला कि जाने वाले दिन आर्या की 2 नंबरों पर बहुत बातें हुई थीं, लेकिन मजे की बात यह थी कि गुवाहाटी पहुंचने के बाद उन नंबरों पर आर्या की बिलकुल बात नहीं हुई थी.

पुलिस ने जब उन नंबरों के बारे में पता किया तो उन नंबरों में एक नंबर था 33 साल के नवीन थौमस का और दूसरा नंबर था उस की पत्नी देवी बी. थौमस का.

उन दोनों की शादी हुए करीब 13 साल हो चुके थे. दोनों हंसीखुशी से अपना दांपत्य जीवन बिता रहे थे. दोनों के ही परिवार बहुत अच्छे थे. देवी के पापा बालन माधवन केरल के जानेमाने वन्यजीव फोटोग्राफर थे. समाज में उन की अच्छीखासी इज्जत थी.

नवीन और देवी भी आयुर्वेद के अच्छे डौक्टर थे. इस के अलावा देवी उसी स्कूल में जरमन भाषा पढ़ाती थी, जिस स्कूल में आर्या बी. नायर फ्रेंच पढ़ाती थी.

एक ही स्कूल में पढ़ाते हुए देवी और आर्या में दोस्ती हुई तो जल्दी ही दोनों बहुत अच्छी सहेली बन गईं. इस के बाद दोनों एकदूसरे के घर भी आनेजाने लगी थीं.

अकसर घर आने की वजह से नवीन थौमस भी आर्या को जाननेपहचानने लगा था, क्योंकि वह उस की पत्नी देवी की बहुत अच्छी सहेली थी. फिर जल्दी ही तीनों में खूब पटने लगी थी. तीनों ही बहुत अच्छे घरों से थे और उन का पढ़ालिखा और सुखीसंपन्न परिवार था. इसलिए किसी तरह की कोई शंका की बात नहीं थी. तीनों अकसर बैठ कर घंटोंघंटों बातें किया करते थे.

पुलिस ने जब नवीन और देवी की कौल डिटेल्स निकलवा कर चैक की तो नवीन की तो नहीं, लेकिन देवी की कौल डिटेल्स से पता चला कि उस की आर्या से बहुत बातें होती थीं. जब इस बारे में देवी के फेमिली वालों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि आर्या और देवी पक्की सहेलियां थीं.

पुलिस ने जब नवीन और देवी के फोन की लोकेशन पता कराई थी तो उन के फोन की लोकेशन भी गुवाहाटी की पाई गई थी, लेकिन अब उन सभी के फोन भी बंद थे.

लेकिन यहां एक बात सभी को परेशान कर रही थी कि ये तीनों लोग यानी आर्या, नवीन और देवी बिना बताए गुवाहाटी क्यों चले गए? लेकिन फिर यह सोच कर संतोष कर लिया कि घूमने गए होंगे, घूमटहल कर 2-4 दिन में वापस आ जाएंगे.

यही सोचतेविचारते और ऊहापोह में रात बीत गई. अगले दिन भी आर्या का कोई समाचार नहीं मिला. उस ने फेमिली वालों को फोन भी नहीं किया. फेमिली वाले फोन कर नहीं सकते थे, क्योंकि उस का फोन स्विच्ड औफ था.

पता चला कि 27 मार्च को आर्या, नवीन थौमस और देवी थौमस तिरुवनंतपुरम से शाम को हवाई जहाज से गुवाहाटी गए थे. मोबाइल से उन्होंने औनलाइन टिकट बुक कराए थे. वहां पहुंच कर तीनों एक होटल में ठहरे थे. तीनों थोड़ाबहुत गुवाहाटी में घूमे, उस के बाद कमरे पर आ गए थे.

रात उसी होटल में बिता कर 28 मार्च की शाम को तीनों अरुणाचल प्रदेश चले गए थे, जहां जिला सुबनसिरी के थाना हापोली के होटल ब्लू पाइन में एक ही कमरे में एक्स्ट्रा बैड डलवा कर तीनों ठहर गए थे. होटल में आर्या को नवीन और देवी ने अपनी बेटी बताया था. होटल में ठहरने के लिए नवीन ने अपने दस्तावेज जमा कराए थे.

अगले दिन यानी 29 मार्च को नाश्ता कर के आर्या, देवी और नवीन शहर घूमने के लिए निकले तो रात को लौट कर आए थे. दोपहर का खाना उन्होंने बाहर ही खाया था, जबकि रात का खाना होटल लौट कर खाया था. ऐसा ही उन तीनों ने 30 और 31 मार्च को भी किया था.

एक अप्रैल को उस कमरे से कोई नहीं निकला. सुबह सफाई कर्मचारी कमरा साफ करने गया तो उन लोगों ने दरवाजा नहीं खोला. सफाई वाला बेल बजा कर लौट आया था कि शायद वे लोग सो रहे होंगे, इसलिए डिस्टर्ब करना ठीक नहीं है. उस पूरे दिन न तो उस कमरे से कोई बाहर निकला और न ही खानेपीने के लिए कोई चीज मंगाई. होटल स्टाफ ने भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया.

अगले दिन यानी 2 अप्रैल को जब सुबह 10 बजे के करीब कमरे की साफसफाई करने के लिए लड़का गया तो उस ने बेल बजाई. कई बार बेल बजाने के बावजूद जब कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो उसे याद आया कि उस ने कल भी जब बेल बजाई थी तो कमरे का दरवाजा नहीं खुला था. उस ने यह बात रिसैप्शन पर बैठे कर्मचारी को बताई तो रिसैप्शनिस्ट ने तुरंत यह बात होटल के मैनेजर को बता दी.

मैनेजर ने भी आ कर बेल बजाई, दरवाजा खटखटाया, लेकिन जब तमाम प्रयास के बावजूद कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो सभी को कुछ गड़बड़ी की आशंका हुई. मैनेजर ने डुप्लीकेट चाबी मंगा कर कमरे का दरवाजा खोला. दरवाजा खोल कर होटल का मैनेजर और अन्य स्टाफ कमरे के अंदर घुसा तो अंदर का दृश्य देख कर सभी के मुंह से चीख निकल गई.

अंदर बेड पर नवीन की लाश पड़ी थी तो फर्श पर देवी की लाश थी. 2 लाशें देख कर सभी ने इधरउधर देखा, क्योंकि कमरे में 3 लोग ठहरे थे. आर्या कहीं दिखाई नहीं दे रही थी. सभी लोग सोच में पड़ गए कि आर्या कहां गई? उस समय सभी को यही लगा कि आर्या इन दोनों की हत्या कर के चुपके से होटल से भाग गई है.

लेकिन जब सभी थोड़ा और आगे बढ़े तो देखा कि पूरे कमरे में खून ही खून फैला था, जो अब तक सूख चुका था. खून के दाग कमरे के बाथरूम के दरवाजे तक दिखाई दिए तो होटल स्टाफ के एक आदमी ने बाथरूम का दरवाजा खोल कर देखा तो वह चीख कर बोला, ”तीसरी लाश यहां बाथरूम में पड़ी है.’’

आर्या की लाश बाथरूम में पड़ी थी. आर्या की लाश देख कर यह शंका खत्म हो गई कि दोनों हत्याएं आर्या ने की थीं. होटल स्टाफ ने तुरंत इस की सूचना थाना हापोली पुलिस को दी.

सूचना मिलने के थोड़ी देर बाद स्थानीय थाना पुलिस होटल पहुंच गई. 3 हत्याओं का सनसनीखेज मामला था, इसलिए पुलिस अधिकारी भी होटल पहुंच गए थे.

पुलिस ने आते ही अपना काम शुरू कर दिया. लाशों और कमरे का निरीक्षण शुरू किया. तीनों की मौतें लगभग एक जैसी हुई थीं. सभी की कलाई पर कट के निशान थे. देखने से ही लग रहा था कि तीनों की कलाई पर किसी तेज धार वाली चीज से कट मारा गया था.

कमरे के निरीक्षण से ऐसा बिलकुल नहीं लग रहा था कि तीनों पर किसी ने जबरदस्ती हमला किया था, क्योंकि कमरे का सामान जिस तरह व्यवस्थित होना चाहिए था, वैसा ही था. हर सामान अपनी जगह पर व्यवस्थित रखा था. इस के अलावा कमरा अंदर से बंद था, इसलिए कोई अंदर आ भी नहीं सकता था.

हालांकि डुप्लीकेट चाबी एक विकल्प थी, लेकिन यह काम कोई अकेला आदमी नहीं कर सकता था. फिर भी पुलिस को संभावना तो हर चीज की होती है. पुलिस ने देखा कि तीनों कत्ल एक ही तरीके से किए गए थे.

पुलिस सूत्र की तलाश में बारीकी से कमरे का निरीक्षण कर रही थी, तभी उस की नजर टेबल पर रखी एक प्लेट पर पड़ी, जिस में बालों का एक गुच्छा और काले रंग की चूडिय़ां रखी थीं. प्लेट में रखे बालों के गुच्छे और चूडिय़ों को देख कर पुलिस चौंकी. क्योंकि उस की समझ में नहीं आया कि बालों का गुच्छा और चूडिय़ां प्लेट में क्यों रखी हैं.

इन चीजों को देख कर पुलिस का माथा ठनका. इस के बाद पुलिस ने और गहनता से कमरे की तलाशी ली कि शायद कोई सबूत मिल जाए. इस तलाशी में पुलिस को बेड के पास रखी टेबल से एक नोट मिला, जिस में लिखा था, ‘हम लोगों ने अपनी जिंदगी बहुत अच्छे से जी, अब हम जा रहे हैं.’

इस के अलावा एक और नोट मिला, जिसे नवीन ने अपनी मम्मी को भावुक हो कर लिखा था. नोट में नीचे तीनों के दस्तखत थे.

पुलिस अधिकारियों ने इस मामले की जांच की जिम्मेदारी एसएचओ जे. डोए को सौंप दी थी. कमरे में मिले नोट को देख कर सभी को यही लगा था कि यह मामला सुसाइड का है, लेकिन पुलिस यह कैसे सुनिश्चित करती कि यह नोट इन्हीं तीनों में से किसी एक ने लिखा है.

इस के बाद पुलिस ने रिसैप्शन से तीनों के बारे में वह पूरी जानकारी निकलवाई, जो होटल में आने वालों से होटल के रिसैप्शन पर ली जाती है. इस से उन लोगों के बारे में पता चला कि ये लोग केरल के तिरुवनंतपुरम के रहने वाले थे. तीनों के नाम और पते भी उन की आईडी से मिल गए थे.

पुलिस को कमरे से 2 लाइन का जो सुसाइड नोट मिला था, उस में नीचे एक मोबाइल नंबर लिखा था, पुलिस ने जब उस नंबर पर फोन किया तो पता चला कि वह नंबर देवी के पापा बालन माधवन का था.

पूछने पर उन्होंने बताया कि देवी उन की बेटी है और नवीन उन का दामाद. इतना बता कर उन्होंने पूछा कि वे उन की बेटी और दामाद के बारे में क्यों पूछ रहे हैं?

इस पर पुलिस ने उन्हें पूरी बात बता कर कहा कि उन दोनों के साथ एक लाश और मिली है, जिस का नाम आर्या है. देवी के पिता ने कहा, ”मैं आर्या को भी जानता हूं. वह तो मेरी बेटी देवी की सहेली है.’’

चूंकि आर्या की गुमशुदगी केरल के तिरुवनंतपुरम के थाना वट्टियुरुकावु में दर्ज कराई जा चुकी थी. इसलिए आर्या की सुसाइड की बात केरल पुलिस को और उस के फेमिली वालों को दे कर सभी को अरुणाचल प्रदेश आने को कहा गया.

अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने नवीन, देवी और आर्या की लाशें कब्जे में ले कर फोरैंसिक जांच के लिए भिजवा दी थीं. यही नहीं, फोरैंसिक विशेषज्ञों के साथ मिल कर कमरे की भी तलाशी ली गई और साक्ष्य इकट्ठा किए गए.

मामले की जांच करने वाले पुलिस इंसपेक्टर जे. डोए ने स्थानीय थाने में सीआरपीसी की धारा 174 के अंतर्गत 3 मामले दर्ज किए.

इस के बाद जब आर्या और देवी के फेमिली वाले अरुणाचल प्रदेश पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें होटल के कमरे से मिला सुसाइड नोट दिखाया. तब देवी के पापा ने उसे पहचान कर कहा, ”सुसाइड नोट की राइटिंग नवीन थौमस की है.’’

लेकिन उस सुसाइड नोट पर हस्ताक्षर तीनों के थे. अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने उस सुसाइड नोट को जांच के लिए राइटिंग एक्सपर्ट के पास भेज दिया था.

इतना सब करने के बाद अभी भी अरुणाचल प्रदेश पुलिस के मन में एक सवाल घूम रहा था कि मरने वालों ने सुसाइड नोट में सिर्फ इतना ही लिखा था कि ‘हम ने बहुत अच्छी जिंदगी जी. अब हम जा रहे हैं.’ इस के अलावा कमरे में रखी प्लेट में बालों के गुच्छे तथा उन काली चूडिय़ों का क्या रहस्य है?

इसे जानने के लिए अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने तीनों के घर वालों से तो लंबी पूछताछ की ही, उन के परिचितों, जानने वालों तथा दोस्तों से भी फोन द्वारा विस्तार से पूछताछ की.

इस पूछताछ में देवी के पापा ने बताया कि इधर कुछ दिनों से उन की बेटी देवी और दामाद न जाने क्यों समाज से ही नहीं, उन लोगों से भी कटेकटे रहते थे. दामाद और बेटी आयुर्वेदिक डौक्टर थे. इस के अलावा देवी जरमन भाषा की टीचर थी. दामाद आयुर्वेदिक डौक्टर तो था ही, ट्रेडिंग का काम करने के साथ पार्टटाइम एक स्कूल में फ्रेंच पढ़ाता था.

दोनों अच्छा पैसा कमा रहे थे. सब कुछ बढिय़ा चल रहा था. दोनों में बहुत प्यार था. 13 साल की शादीशुदा जिंदगी में दोनों में कभी झगड़ा नहीं हुआ. देवी की जो सहेली आर्या थी, उस से भी उन का बहुत अच्छा रिश्ता था.

देवी के पापा ने पुलिस को जो बताया था, इस से पुलिस की समझ में यह नहीं आया कि जब सब कुछ ठीक था तो इन लोगों ने सुसाइड क्यों किया? पुलिस अपने इस सवाल का जवाब जानना चाहती थी.

इस सवाल के जवाब के लिए पुलिस ने बहुत लोगों से पूछताछ की. इतना ही नहीं, पुलिस ने इस सवाल के जवाब के लिए पता लगाना शुरू किया कि आर्या, नवीन और देवी की औनलाइन एक्टिविटीज क्या थीं? सोशल मीडिया पर ये तीनों कैसी पोस्ट करते थे? किनकिन बातों पर ये चर्चा करते थे? ये इंटरनेट पर क्याक्या सर्च करते थे?

पुलिस ने जब यह देखा कि ये लोग इंटरनेट पर क्याक्या सर्च कर रहे थे तो जो पता चला उसे जान कर दंग रह गई. आर्या, देवी और नवीन ने इंटरनेट पर बड़ी अजीबोगरीब चीजें सर्च की थीं. यह सब इन्होंने इधर एक, डेढ़ महीने में ही सर्च किया था. तीनों यानी आर्या, देवी और नवीन ने इंटरनेट पर जो सर्च किया था, उस में कौमन था, मौत के बाद का जीवन, क्या एलियन हैं और ब्रह्मांड की यात्रा यानी क्या ब्रह्मांड है या ब्रह्मांड में क्या हो सकता है?

अलगअलग दुनिया यानी पहले की दुनिया, उस के पहले की दुनिया, आने वाली दुनिया, हमारे पूर्वजों ने क्या किया आदि. पुलिस की जांच में जब ये बातें सामने आईं और पुलिस ने इसे उन के उस सुसाइड नोट से जोड़ कर देखा तो पुलिस को समझते देर नहीं लगी कि इन तीनों ने खुद अपनी जान ली है.

जब इस बात को केंद्र में रख कर पुलिस ने देवी और आर्या के फेमिली वालों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि इधर ये लोग काला जादू, इस दुनिया के बाहर की दुनिया, मौत के बाद क्या होता है, क्या इस धरती के बाहर भी कोई दुनिया है, की बातें ज्यादा करते थे.

यही नहीं, तीनों ने खुद को स्वयं में समेट लिया था. लोगों से मिलनाजुलना लगभग बंद कर दिया था. न ये किसी से मिलते थे और न ही इन से कोई मिलने आता था. बस, यही तीनों आपस में मिलतेजुलते थे और बातें करते थे. ये तीनों जब भी फ्री होते थे, घंटों बैठ कर आपस में बातें किया करते थे.

जब इंटरनेट द्वारा इन की सच्चाई सामने आई तो पता चला कि यह सर्च करते थे कि जिंदगी के बाद की मौत, मौत के बाद की जिंदगी, मौत के बाद की कहानी, एलियंस की मौजूदगी, ब्रह्मांड का सफर, पूर्वजों की जिंदगी और मौत.

इन सभी चीजों में तीनों का एक ही सवाल होता था कि वे जो जिंदगी देख रहे हैं, इस के समाप्त होने यानी मरने के बाद क्या होता है? मौत के बाद की जिंदगी कैसी होती है? मौत के बाद क्या होता है और कैसे होता है?

यहां सोचने की बात यह थी कि 3 लोग, पति, पत्नी और उन की एक दोस्त, जो काफी पढ़ेलिखे और बेहद बुद्धिमान थे. बच्चों को स्कूल में विदेशी भाषा पढ़ाते थे, एक नहीं कम से कम 4 भाषाओं का उन्हें अच्छाखासा ज्ञान था, साथ ही आयुर्वेद में विशेषज्ञता प्राप्त थी. इतने पढ़ेलिखे और बुद्धिमान लोग इस तरह के सवालों में उलझ गए कि जिंदगी क्या है और इस जिंदगी के बाद क्या होता है, उस का सच क्या है?

पुलिस सोच रही थी कि इंसान है और पढ़ालिखा है तो वह सोचेगा भी, मन में तरहतरह के सवाल आएंगे, जिन के वह जवाब तलाशना चाहेगा.

लेकिन जब ऐसे सवालों के जवाब तलाशने के लिए जिस में खुद की ही जिंदगी सवाल बन जाए, तब ऐसी सवालों का क्या महत्त्व रह जाएगा.

अरुणाचल प्रदेश पुलिस को अपनी जांच में जो सबूत मिले, उस से उस का मानना था कि आर्या, देवी और नवीन यहां इसीलिए आए थे कि पहले तीनों 5-6 दिनों तक यहां रह कर इंजौय करेंगे. उस के बाद वे यह जानने की कोशिश करेंगे कि मौत के बाद क्या होता है, कैसा लगता है? यह जानने के लिए मरना जरूरी था, इसीलिए तीनों ने जान दे दी.

इंसपेक्टर जे. डोए ने अब तक की जांच में जो पाया है, उस के अनुसार उन का कहना है कि आर्या, देवी और नवीन भले ही पढ़ेलिखे थे, लेकिन उन्हें काले जादू और तंत्रमंत्र में रुचि थी. वे अंधविश्वासी थे, इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता. उन के कमरे से काले पत्थरों से सजी जो चूडिय़ां मिली थीं, वे भी इसी ओर संकेत करती थीं.

सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि आर्या, देवी और नवीन अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर से ढाई घंटे की दूरी पर जीरो टाउन भी गए थे. वहां आबादी बहुत कम है और वहां ज्यादातर आदिवासी समुदाय के लोग रहते है, जो शैतान की पूजा करते हैं. कहीं ये लोग भी तो शैतान की पूजा करने के लिए वहां नहीं गए थे.

केरल पुलिस अपने हिसाब से इस मामले की जांच कर रही थी. जांच में क्या निष्कर्ष निकल कर सामने आएगा, यह तो समय बताएगा. जांच में कुछ भी निकल कर सामने आए, अब उस से आर्या, देवी और नवीन तो जीवित होने वाले नहीं हैं और न ही दुनिया को बताने वाले हैं कि मरते समय कैसा लगता है? मरने के बाद क्या होता है? तीनों ने अंधविश्वास में अपनी जान दे दी, बस यही सत्य है. जीवन अनमोल है, इसे इस तरह गंवाना मूर्खता ही कहा जाएगा.

क्या कहता है मनोविज्ञान

जांच अधिकारियों का कहना है कि आर्या, देवी और नवीन ने आत्महत्या मौत के बाद के जीवन के बारे में जानने के अंधविश्वास के कारण की थी. समाचारों में भी बताया गया है कि तीनों ने दूसरे ग्रहों पर रहने और मौत के बाद के जीवन की संभावनाओं के बारे में डार्क वेब पर औनलाइन खोज की थी.

पर लोगों का कहना है कि इतने पढ़ेलिखे और बुद्धिमान होने के बावजूद ये अंधविश्वास के जाल में कैसे फंस गए? कहीं वे किसी मानसिक बीमारी का शिकार तो नहीं हो गए?

इस बारे में मनोचिकित्सक डा. राजेश सिंह का कहना है कि यह विश्वास करना कि जो अनुष्ठान किए जाते हैं, उन से लाभ होता है, यह हमारी संस्कृति का एक हिस्सा बन चुके हैं. चाहे वह धर्म के माध्यम से हो या किसी अन्य माध्यम से. विश्वास लगभग हर कोई करता है, तरीके अलगअलग होते हैं, कोई ज्यादा विश्वास करता है तो कोई कम.

कभीकभी यही विश्वास की तीव्रता बीमारी बन जाती है, जिस के आगे सभी तर्क फेल हो जाते हैं. ऐसे लोग न मरने से डरते हैं और न किसी का कहना मानते हैं. वे अपने तर्कों से सभी को हराने की कोशिश करते हैं.

डौक्टर का कहना है कि आर्या, देवी और नवीन के मामले में सच में क्या हुआ, अब कुछ भी कहना ठीक नहीं है, पर जब कोई अनुष्ठान करने की हद पार कर जाता है, यानी शरीर को तकलीफ देने लगता है तो समझ लीजिए कि उस का विश्वास मानसिक बीमारी में बदल गया है. जबकि हर मामला अलगअलग हो सकता है. ये क्रियाएं इंसान के अंदर भ्रम की स्थिति पैदा करती हैं.

इस तरह के भ्रमित लोगों को लगता है कि लोग उन के विचारों से सहमत नहीं हैं, इसलिए इस तरह के लोग खुद को लोगों से अलगथलग कर लेते हैं. इन की बीमारी का यह भी एक लक्षण है.

डौक्टर का आगे कहना है कि अंधविश्वास हमारे समाज के लिए कोई नई बात नहीं है. लेकिन लोग इस बात से हैरान जरूर होते हैं कि युवा अपना खून बहा कर मौत को गले लगाने का साहस कैसे कर लेते हैं?

दरअसल, भ्रमित लोग उस के अनुसार काम करने के लिए उत्साहित होते हैं, अच्छी तरह योजना बनाते हैं, जैसे इस मामले में किया था कि खून को रोकने के लिए खून का थक्का बनाने वाली दवा ली थी. फिर उत्तेजना में कोई भी दर्द या पीड़ा महसूस नहीं होती. वह एक आत्मघाती हमलावर की स्थिति में आ जाता है, वरना कौन खुद को मारने को तैयार होगा.

तीनों ने की शैतान की पूजा

अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने इस घटना की जांच के लिए 5 सदस्यीय टीम बनाई थी. अब तक की जांच से अरुणाचल प्रदेश पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची कि तीनों की मौत के पीछे शैतान की पूजा थी.

अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर के एसपी केनी बागरा का कहना है कि प्राप्त सबूतों से पता चलता है कि खुद को मारने से पहले नवीन ने ही पहले देवी और आर्या को घाव दे कर मारा था.

एसपी केनी बागरा ने आगे बताया कि मोबाइल फोन से मिले साक्ष्यों से पता चलता है कि नवीन थौमस और देवी वर्षों से मौत के बाद के जीवन के बारे में जानकारी जुटा रहे थे. नवीन ऐसा पहला आदमी था, जिस ने परवर्ती जीवन और अलौकिक जीवन के बारे में सीखना शुरू किया था. बाद में उस ने देवी और आर्या को भी अपने साथ ले लिया था.

जिस कमरे में तीनों मरे हुए मिले थे, उस में एक प्लेट में बाल और काले रंग की चूडिय़ां मिली थीं. इन चीजों और मरने के लिए अपनाए गए तरीके, मौत के लिए चुने गए दिन से पुलिस के संदेह को बल मिलता है कि ईस्टर के सप्ताह में ईस्टर के दिन जीरो गांव जा कर तीनों ने शैतान की पूजा की थी.

नवीन और देवी ने डेढ़ साल पहले भी जीरो की यात्रा की थी. गूगल मैप की जांच से पुलिस को इस बारे में जानकारी मिली है. पुलिस को संदेह है कि वह आदिवासी बाहुल्य इलाका है, वहां शैतान की पूजा कराने वालों और काला जादू करने वालों के गैंग भी हो सकते हैं.

7 मई को आर्या की शादी होने वाली थी. उस के फेमिली वालों ने उस की शादी के लिए कपड़े और गहने भी खरीद लिए थे. आर्या के पेरेंट्स का कहना है कि उन की बेटी को धमका कर दोनों साथ ले गए थे. Death Mystery

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