Kanpur Chemist Murder Case. कानपुर का चर्चित दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड महज एक जुर्म नहीं, बल्कि रिश्तों के कत्ल की खौफनाक दास्तान है. घर संभालने की जिम्मेदारी के लिए शालिनी उर्फ शालू नाम की जिस बहू को विनीत मिनोचा अपने घर लाए थे, उसी की खौफनाक साजिश का वह शिकार हो गए. लालच, बेवफाई में अंधी और स्वच्छंद विचारों वाली बहू शालू ने अपने ससुर की मौत की प्लानिंग तो फुलप्रूफ की थी, लेकिन पुलिस जांच में वह ऐसी फंसी कि उस ने हत्या की पूरी कहानी बयां कर दी. इस केस की हर परत ने रूह कंपा देने वाला ऐसा सच उजागर किया कि

शालिनी उर्फ शालू करोड़पति दवा व्यापारी विनीत मिनोचा की बहू थी. आलीशान फ्लैट में रहती थी. घर में सभी भौतिक सुखसुविधाएं भी थीं. इस के बावजूद वह खुश नहीं थी. वह जिस तरह की खुशहाल जिंदगी जीना चाहती थी, वैसी जी नहीं पा रही थी. उस की खुशहाल जिंदगी में बाधक थे उस के ससुर विनीत मिनोचा. वह शालू को आर्थिक व मानसिक रूप से टौर्चर करते रहते थे. ससुर की टोकाटाकी से शालू परेशान रहती थी. कभी कहते यह मत पहनो, कभी कहते पार्टी में मत जाया करो. ससुर के कमेंट्स से शालू तिलमिला उठती थी.

दरअसल, शालू खुले विचारों की महिला थी. उसे बंदिशों में रहना पसंद न था. पति सुब्रत के साथ किटी पार्टी में जाना, वहां डांस करना, शराब पीना तथा देर रात घर वापस आना उस के शौक में शामिल था, जबकि विनीत मिनोचा को यह सब पसंद न था. वह चाहते थे कि बहू मर्यादा में रहे.

शालिनी उर्फ शालू को यह भी मलाल था कि ससुर विनीत मिनोचा उस के पति सुब्रत के साथ भी नौकरों जैसा व्यवहार करते हैं. करोड़ों का व्यापार था. कानपुर शहर के बिरहाना रोड स्थित दवा मार्केट में ‘फार्मा ट्रेडर्स’ नाम से दवा फर्म थी. 50-60 करोड़ का सालाना टर्न ओवर था, लेकिन अपने ही काम में पति सुब्रत को 40 हजार रुपए वेतन मिलता था. घर खर्च के लिए उसे मात्र 15 हजार रुपए मिलते थे. उस का भी पाईपाई का हिसाब ससुर विनीत मिनोचा मांगते थे. अतिरिक्त पैसा मांगने पर जलील करते थे.

एक रोज रुपयों की डिमांड को ले कर शालू और विनीत के बीच बात बढ़ गई. विनीत ने शालू को रुपए तो दिए, लेकिन जलील भी खूब किया. शालू तब तिलमिला उठी.

उस का गुस्सा अभी चरम पर था, तभी उस से मिलने विशाल गौतम आ गया. वह उस के ससुर की दवा फर्म में काम करता था, लेकिन 4 साल पहले विनीत मिनोचा ने उसे चोरी के आरोप में नौकरी से निकाल दिया था. शालू और उस के पति घर के काम के लिए उसे जबतब बुला लेते थे.

शालू को गुस्से में देखा तो विशाल ने पूछा, ”शालू भाभी, आप बेहद परेशान लग रही हो. क्या सुब्रत भैया से झगड़ा हुआ है या फिर कोई और बात है?’’

शालू बोली, ”विशाल, तुम्हारे भैया से मेरा कोई झगड़ा नहीं हुआ है. मेरे ससुर ने मेरा जीना दूभर कर दिया है. हर समय टोकाटाकी और जलील करते रहते हैं. उन्हें मेरा घूमनाफिरना, खानापहनना, उठनाबैठना कुछ भी अच्छा नहीं लगता. घर खर्च देने में भी कंजूसी करते हैं. अतिरिक्त खर्च मांगने पर जलील करते हैं. आज भी इसी बात को ले कर बात बिगड़ी, जिस से मैं बेहद परेशान हूं. समझ में नहीं आता कि क्या करूं, क्या न करूं.’’

”भाभी, जो दर्द तुम्हारा है, वही मेरा भी है. 4 साल पहले बड़े साहब (विनीत) ने मुझे चोरी के आरोप में नौकरी से निकाल दिया था, तब से मैं बेरोजगार हूं. दरदर भटक रहा हूं. 2 लाख रुपए का कर्ज चढ़ गया है. वह तो आप और भैया छोटेमोटे काम के बदले आर्थिक मदद करते रहते हैं, वरना चूल्हा जलाना भी दूभर हो जाए. मैं भी बड़े साहब के कारण परेशान रहता हूं,’’ विशाल बोला.

इस के बाद विशाल कुछ देर मौन रहा, फिर बोला, ”भाभी, हमारे तुम्हारे दर्द का कोई उपाय नहीं है?’’

तभी शालू ने गंभीर हो कर कहा, ”एक उपाय है..?’’

”वह क्या भाभी?’’ विशाल ने पूछा.

”यही कि मेरे ससुर विनीत मिनोचा को मार डालो. चाहे एक्सीडेंट में मारो या फिर सोते समय तकिया से मुंह दबा कर उन की सांसें बंद कर दो.’’

”शालू भाभी, आप यह क्या कह रही हैं?’’ विशाल के माथे पर पसीना आ गया.

”मैं जो कह रही हूं, वह सच कह रही हूं. ससुर की मौत के बाद मैं आजाद पंछी की तरह उड़ान भरूंगी और खुशहाल जिंदगी जीऊंगी. तुम्हें भी नौकरी पर रख लूंगी और सैलरी भी दुगनी दूंगी. तुम दरदर भटकोगे नहीं और आराम से रहोगे.’’

”लेकिन भाभी, जिस  अपार्टमेंट में आप रहती हैं, वह बेहद सेफ जगह है. चौबीस घंटे गार्ड रहते हैं. ऐसे में उन की हत्या करना आसान नहीं है. पकड़े जाने का डर रहेगा. वैसे भी अकेला आदमी उन्हें काबू में नहीं कर सकता, किसी साथी को तलाशना होगा.’’

शालू ने विशाल को टूटते देखा तो बोली, ”तुम घबराओ नहीं, मैं तुम्हारे साथ हूं. दोनों मिल कर मर्डर का प्लान बनाएंगे. कोई कुछ नहीं जान पाएगा. तुम साथी की तलाश करो या फिर किसी सुपारी किलर को हायर करो. 4-6 लाख रुपए जो भी खर्च होगा, वह भी दूंगी.’’

इस के बाद दोनों मिल कर विनीत मिनोचा के मर्डर का प्लान बनाने लगे. दोनों के बीच कौल व वाट्सऐप पर बात होने लगी. इन के बीच चैटिंग भी होने लगी.

शालू अपने पति सुब्रत व मासूम बेटे के साथ गुमटी नंबर 5 शौपिंग के लिए कार से जाती थी. यहीं पर फोन कर वह विशाल गौतम को भी बुला लेती थी. पति सुब्रत बेटे के साथ कार में बैठा रहता और शालू विशाल के साथ सामान खरीदती. विशाल थैले में सामान रखता और कार तक पहुंचाता था.

शौपिंग के दौरान ही शालू ने विशाल को फ्लैट की चाबी दी और डुप्लीकेट चाबी बनवाने को कहा. चाबी बनवाने के लिए उस ने विशाल को 1,200 रुपए भी दिए. विशाल ने तब गुमटी स्थित कंप्यूटरीकृत शौप से डुप्लीकेट चाबी बनवाई और दुकानदार को 1,200 रुपए दिए.

डुप्लीकेट चाबी को विशाल ने अपने पास सुरक्षित रख लिया. गुमटी मार्केट में ही शालू ने ससुर के मर्डर का प्लान ‘ए’ व ‘बी’ बनाया.

प्लान ‘ए’ के तहत शालू ने विशाल को बताया कि उस के ससुर विनीत मिनोचा कार से आतेजाते हैं. रास्ते में उन का एक्सीडेंट कर दो, लेकिन इस प्लान पर विशाल राजी नहीं हुआ.

उस ने कहा कि टक्कर मारने से उस की जान भी जा सकती है. मौके पर पकड़ा गया तो लोग उसे पीट भी सकते हैं.

प्लान ‘ए’ पर सहमति न बनने पर शालू ने प्लान ‘बी’ बताया. उस ने कहा कि 5 सितंबर, 2026 को पति सुब्रत के साथ उसे कपल किटी पार्टी में जाना है. उस के जाने के बाद वह डुप्लीकेट चाबी से फ्लैट का दरवाजा खोल कर अंदर दाखिल हो जाए और उस के कमरे में छिप कर बैठ जाए. ससुर विनीत मिनोचा जब अपने कमरे में सो जाएं, तब तकिया से मुंह दबा कर उन की सांसें बंद कर देना.

पार्टी से जब वह देर रात लौटेगी तब शोर मचा देगी कि ससुर की हार्ट अटैक से मौत हो गई है. इस से किसी को शक भी नहीं होगा. पुलिस एंट्री का तो सवाल ही नहीं उठेगा.

इस के बावजूद यदि वह पकड़ा जाए तो उस का नाम न ले कर वह पति सुब्रत का नाम बताए कि हत्या की साजिश उन्हीं ने रची थी.

विशाल को शालू का ‘बी’ प्लान पसंद आ गया और वह विनीत मिनोचा का मर्डर करने को राजी हो गया. इस के बाद शालू और विशाल के बीच हत्या की सुपारी की डील 6 लाख रुपए में तय हुई. शालू ने विशाल से वादा किया कि वह 2 लाख रुपए ससुर की हत्या के दूसरे दिन तथा 4 लाख रुपए 15 दिन बाद देगी. विशाल इस पर राजी हो गया.

हत्या की सुपारी लेने के बाद विशाल गौतम अपने दोस्त राजकिशोर से मिला और 30 हजार रुपए का लालच दे कर उसे वारदात में शामिल होने को राजी कर लिया. राजकिशोर अपराधी किस्म का था. विभिन्न थानों से वह कई बार जेल जा चुका था. विशाल मथुरी मोहल्ले में रहता था.

राजकिशोर उस के पड़ोस में ही रहता था. दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी. दोनों चाकूबाज थे और अपनी सुरक्षा के तौर पर सदैव चाकू साथ में रखते थे.

5 सितंबर, 2026 को शालू के पति सुब्रत मिनोचा ने तिलक नगर स्थित कास्मोजिन लाउंज में कपल किटी पार्टी बुक की थी. इसी दिन मर्डर का प्लान भी बना था. शालू और विशाल सुबह से ही मोबाइल फोन के जरिए संपर्क में थे. सुब्रत भी विशाल के संपर्क में था.

शालू ने रात 8 बजे विशाल को फोन किया और कहा कि उसे रात साढ़े 9 बजे पार्टी में जाना है. अत: वह उस के लिए गजरा ले कर आ जाए. गेट पर तैनात गार्ड को वह अपना नाम विशाल के बजाय शिवम बताए.

रात 9 बजे विशाल गौतम गजरा ले कर अपने दोस्त राजकिशोर के साथ इंदिरा नगर (कल्याणपुर) स्थित रतन आर्बिट अपार्टमेंट पहुंचा. गार्ड ने उसे गेट पर ही रोक लिया और नाम तथा आने का मकसद पूछा.

इस पर विशाल ने कहा कि उस का नाम शिवम है और फ्लैट नंबर सी-104 में रहने वाली शालू मेमसाहब को गजरा देने आया है.

इस पर गार्ड ने शालू से बात की तो उस ने कहा शिवम गजरा ले कर आया है, उसे आने दो, उस की गेट पर एंट्री मत करना. इस के बाद गार्ड ने उसे जाने की इजाजत दे दी.

विशाल तब अपने दोस्त राजकिशोर के साथ गेट के अंदर चला गया. राजकिशोर तो लौबी में टहलता रहा, लेकिन विशाल गजरा देने शालू के पास पहुंच गया. वहां उन दोनों के बीच लगभग 5 मिनट तक गुपचुप बातें होती रहीं. उस के बाद विशाल भी नीचे आ गया और राजकिशोर से बतियाने लगा.

रात करीब साढ़े 9 बजे शालू अपने पति सुब्रत व मासूम बेटे के साथ किटी पार्टी के लिए फ्लैट से निकल गई. उस के जाने के बाद करीब पौने 10 बजे विशाल अपने दोस्त राजकिशोर के साथ शालू के फ्लैट पर पहुंचा. उस ने डुप्लीकेट चाबी से फ्लैट का दरवाजा खोला और दोस्त राजकिशोर के साथ फ्लैट के अंदर दाखिल हो गया. दोनों शालू के कमरे में जा कर छिप गए और लाइट बंद कर दी.

विशाल और राजकिशोर ने दवा कारोबारी विनीत मिनोचा के आने का लगभग सवा घंटे तक इंतजार किया.

रात लगभग 11 बजे विनीत मिनोचा फ्लैट में दाखिल हुए. उन्होंने अपने कमरे में जा कर कपड़े बदले. फिर वह किचन में गए, खाना खाया फिर फ्रिज से निकाल कर मिठाई खाई और वापस अपने कमरे में आते समय उन की नजर बहू शालू के कमरे पर पड़ी. वहां अंधेरा था. वह कमरे में गए और लाइट जला दी.

लाइट जलते ही उन की निगाह विशाल और उस के दोस्त पर पड़ी. उन्होंने आंखें तरेर कर विशाल से पूछा, ”तू यहां क्या कर रहा है? तेरे साथ यह दूसरा कौन है?’’

इतना सुनते ही विशाल और राजकिशोर विनीत मिनोचा पर टूट पड़े. दोनों ने उन्हें दबोच लिया और घसीट कर उन के कमरे में ले आए. इसी समय विशाल ने चाकू निकाल लिया और पीठ में वार कर दिया. विनीत मिनोचा विशाल का इरादा समझ गए, अत: वह जान बचा कर कमरे में इधर उधर भागने लगे, लेकिन असफल रहे.

हमलावरों ने उन्हें फिर से दबोच लिया और चाकू से ताबड़तोड़ प्रहार कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया.

विनीत मिनोचा की हत्या के बाद विशाल और राजकिशोर ने बाथरूम में जा कर खून से सने हाथपांव धोए, उस के बाद रात करीब साढ़े 11 बजे फ्लैट से बाहर आ गए. वहां से  निकलते समय दोनों सीसीटीवी कैमरे की जद में आ गए. जीने से उतर कर दोनों मेन गेट से बाहर नहीं गए, क्योंकि उन के कपड़ों पर खून के दाग नजर आ रहे थे.

गार्ड के द्वारा पकड़े जाने के डर से वे पार्क की दीवार फांद कर बाहर आ गए. इसी समय विशाल ने शालू को मैसेज किया, ‘हम घर से निकल रहे हैं.’

शालू समझ गई कि ससुर का काम तमाम हो गया है. उस समय शालू नशे के सुरूर में कपल पार्टी में पति सुब्रत के साथ थिरक रही थी. उस ने सुब्रत को आभास नहीं होने दिया कि उस के बाप का कत्ल हो गया है और लाश फ्लैट में पड़ी है.

रात 3 बजे पार्टी समाप्त हुई, तब वह पति के साथ वापस घर आई. फ्लैट का दरवाजा खुला था. शालू अपने बच्चे के साथ गेस्टरूम में पड़े सोफे पर बैठ गई. इसी बीच शालू ने पति से पानी मांगा.

पानी लेने किचन में गए सुब्रत ने अपने पापा विनीत के कमरे के बाहर खून देखा तो वह चीख पड़ा. चीख सुन कर शालू आ गई. कमरे में गए तो पापा विनीत की फर्श पर लहूलुहान लाश पड़ी थी. उन के गले, सीने, सिर और चेहरे से खून बह रहा था.

सुब्रत ने पापा की हत्या की सूचना सब से पहले पड़ोसी पंकज तिवारी, परिजनों फिर थाना कल्याणपुर पुलिस को दी. शालू ने भी ससुर की हत्या की सूचना अपने  पापा नरेश अरोड़ा को दे दी.

सूचना पाते ही कल्याणपुर थाने के एसएचओ केशव कुमार तिवारी पुलिस बल के साथ इंदिरा नगर स्थित रतन आर्बिट अपार्टमेंट पहुंच गए. चूंकि हत्या का यह मामला करोड़पति दवा कारोबारी का था, अत: इंसपेक्टर केशव कुमार तिवारी ने मर्डर की सूचना पुलिस के आला अधिकारियों को दी.

कुछ ही देर बाद पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल, जौइंट सीपी विपिन ताडा, डीसीपी (पश्चिम) एस.एम. कासिम आबिदी तथा एसीपी दिलीप सिंह घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुला लिया.

पुलिस अधिकारियों ने बड़ी बारीकी से घटनास्थल का निरीक्षण किया. मृतक विनीत मिनोचा की लाश उन के कमरे में फर्श पर पड़ी थी. उन की हत्या बड़ी बेरहमी से की गई थी. उन्हें चाकू से गोदा गया था. शरीर पर 20 से ज्यादा घाव थे. गले, सीने, सिर व चेहरे से खून रिस रहा था. बेड पर बिछी चादर व फर्श खून से लाल था.

मृतक की उम्र 63 वर्ष के आसपास थी. घर का सारा सामान सुव्यवस्थित था. लूटपाट नहीं की गई थी. हत्यारों का मकसद केवल हत्या करना था. उन्होंने हत्या की और फरार हो गए. फोरैंसिक टीम ने भी जांच की और साक्ष्य जुटाए. उस के बाद मौके की काररवाई पूरी कर शव पोस्टमार्टम के लिए हैलट अस्पताल भिजवा दिया.

इधर सूर्य की पौ फटते ही दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या की खबर कानपुर शहर में जंगल की आग की तरह फैल गई. बिरहाना रोड स्थित दवा की दुकानों के शटर गिर गए. दवा व्यापारी व कर्मचारी मृतक के घर की ओर दौड़ पड़े. कुछ समय बाद वहां भीड़ जुट गई.

अपार्टमेंट के लोग भी उमड़ पड़े. वह इस बात से सकते में थे कि इतनी हाईफाई सिक्योरिटी के बावजूद दवा कारोबारी की हत्या कैसे हो गई?

चूंकि हत्या का मामला हाई प्रोफाइल था, इसलिए पुलिस अधिकारियों ने बड़ी सावधानी से जांच शुरू की. डीसीपी (पश्चिम) एस.एम. कासिम आबिदी ने सब से पहले मृतक के बेटे सुब्रत से पूछताछ की.

उस ने बताया कि वह पत्नी शालू के साथ कपल पार्टी में रात पौने 10 बजे गया था. रात 3 बजे के बाद वापस आया तो फ्लैट का दरवाजा खुला था. पापा की उन के कमरे में लाश पड़ी थी. उन की हत्या किस ने और क्यों की, वह नहीं बता सकता.

मृतक के छोटे भाई पुनीत ने बताया कि वह नवाबगंज में रहते हैं. उन्हें भाई की हत्या के संबंध में कोई जानकारी नहीं है.

मृतक की पत्नी पुनीता ने बताया कि वह एक महीने से गाजियाबाद में थी. वह जब घर से गई थी, तब सब कुछ सामान्य था. पति की हत्या किस ने और क्यों की, उन्हें पता नहीं है.

शालू के पिता नरेश अरोड़ा ने बताया कि उन की बेटी शालू ने फोन पर समधी की हत्या की जानकारी दी थी. उस के बाद वह लखनऊ से कानपुर आए. समधी की हत्या किन परिस्थितियों में हुई, वह नहीं बता सकते.

परिजनों से पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने मृतक विनीत मिनोचा के फ्लैट के अंदर बाहर लगे खुफिया कैमरों को खंगाला तो 2 युवक फ्लैट के अंदर जाते, फिर बाहर निकलते नजर आए. उन की पहचान के लिए पुलिस अधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज मृतक के बेटे सुब्रत को दिखाए, लेकिन सुब्रत ने उन दोनों को पहचानने से इंकार कर दिया.

पुलिस अधिकारियों के जोर देने पर सुब्रत ने बताया कि फुटेज में दिखने वाला एक युवक विशाल गौतम है, जो मथुरी मोहाल में रहता है. विशाल उस के पापा की दवा फर्म में काम करता था, लेकिन 4 साल पहले पापा ने चोरी के आरोप में उसे नौकरी से निकाल दिया था. हालांकि वह घर पर आताजाता था. घर के छोटेमोटे काम भी करता था. दूसरे युवक को वह नहीं जानता.

विशाल गौतम व उस के साथी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधिकारियों ने एसीपी दिलीप सिंह की अगुवाई में एक पुलिस टीम बनाई, जिस में कल्याणपुर इंसपेक्टर केशव कुमार तिवारी सहित तेजतर्रार पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया.

पुलिस की इस टीम ने सब से पहले विशाल के मथुरी मोहाल स्थित घर पर छापा मारा. विशाल घर से फरार था. घर पर उस की मम्मी सुशीला तथा भाई आकाश था. पुलिस ने उन दोनों से सख्ती से पूछताछ की तो सुशीला ने बताया कि विशाल बीती रात 8 बजे घर से निकला था, तब से वह घर वापस नहीं आया. पुलिस टीम तब हताश हो कर लौट आई.

रात 8 बजे पुलिस टीम को इलेक्ट्रौनिक साक्ष्य व सर्विलांस के जरिए विशाल के मोबाइल फोन की लोकेशन पहले पनकी मंदिर फिर जवाहरपुरम की मिली.

इसी लोकेशन के आधार पर पुलिस टीम जवाहरपुरम पहुंची और घेराबंदी की. इस के बाद मुठभेड़ में विशाल व उस के साथी को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस टीम ने विशाल की निशानदेही पर खून से सने कपड़े व आलाकत्ल चाकू भी बरामद कर लिया. विशाल ने हत्या में शामिल अपने साथी का नाम राजकिशोर बताया.

मुठभेड़ के दौरान पुलिस की गोली से दोनों आरोपी जख्मी हो गए थे. उन्हें उपचार के लिए पहले हैलट अस्पताल ले जाया गया, फिर प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें पूछताछ के लिए थाना कल्याणपुर लाया गया.

रात करीब 10 बजे पुलिस कमिश्नर  रघुवीर लाल व डीसीपी (पश्चिम) एस.एम. कासिम आबिदी ने विशाल गौतम व उस के साथी राजकिशोर से पूछताछ की.

पूछताछ में विशाल गौतम ने जो खुलासा किया उस से पुलिस अधिकारी भौचक्के रह गए. उन्होंने दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली—

विशाल गौतम मथुरी मोहाल का निवासी है. 4 साल पहले दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की फर्म में वह काम करता था. लेकिन उन्होंने साल 2022 में चोरी का इलजाम लगा कर उसे नौकरी से निकाल दिया था. कुछ दिन तक उस ने दूसरी जगह पर काम किया, लेकिन 4 साल से बेरोजगार था. कभीकभार उन के बेटे सुब्रत छोटेमोटे काम के लिए उसे बुला लेते थे. आर्थिक तंगी से जूझते हुए विशाल पर 2 लाख रुपए का कर्ज हो गया था.

विशाल ने पुलिस को बताया कि एक दिन वह काम के सिलसिले में सुब्रत भैया के घर गया. तब शालू भाभी घर पर थी. उन्होंने उस से कहा कि वह अपने ससुर विनीत मिनोचा की हरकतों से परेशान है. बहुत रोकटोक करते हैं. निगरानी के लिए घर में सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए हैं. शालू भाभी ने उसे पैसों का लालच दे कर उन की हत्या करने को कहा. पैसों के लालच में उस ने अपने दोस्त राजकिशोर के साथ मिल कर चाकू से गोद कर उन की हत्या कर दी.

पुलिस अधिकारी मृतक कारोबारी की बहू शालू के खिलाफ कुछ और सबूत जुटाना चाहते थे, अत: उन्होंने शालू और विशाल के मोबाइल नंबरों की कौल डिटेल्स निकलवाई, जिस में चौंकाने वाली जानकारी हासिल हुई. पता चला कि शालू और विशाल के बीच पिछले 3 माह में 309 बार बात की गई. इस में वाट्सऐप कौल भी थी.

इस के साथ ही दोनों के मोबाइल पर वाट्सऐप चैट मिली, जिन की संख्या 49 थी. यह सभी चैट डिलीट कर दी गई थीं. पुलिस ने किसी तरह एक चैट रिकवर की. यह चैट मैसेज शालू ने विशाल को भेजा था. मैसेज में उस ने लिखा था, ‘तुम यार हो तो स्मार्ट. तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं. अभी तक तुम ने शादी क्यों नहीं की?’

पुलिस ने अनुमान लगाया कि इसी तरह के मैसेज भेज कर शालू ने विशाल को हत्या के लिए राजी किया होगा. घटना वाले दिन भी शालू और विशाल के बीच 12 बार मोबाइल पर बात हुई थी.

पुलिस ने शालू के पति सुब्रत के मोबाइल फोन की कौल डिटेल्स निकलवाई, जिस से पता चला कि सुब्रत भी विशाल से मोबाइल फोन पर बात करता था. वह उसे वाट्सऐप कौल भी करता था.

22 अगस्त, 2026 से 5 सितंबर, 2026 तक दोनों के बीच 25 बार बात हुई. डिटेल्स में उस ने भी 3 मैसेज डिलीट किए थे. पुलिस के शक के घेरे में अब सुब्रत भी आ गया था.

विशाल के कबूलनामा तथा मैसेज देखने के बाद महिला पुलिस अधिकारी ने 7 सितंबर, 2026 की सुबह शालू को हिरासत में ले लिया और उसे पूछताछ के लिए थाना कल्याणपुर लाया गया. फेमिली वालों के सामने इंसपेक्टर केशव कुमार तिवारी ने शालू से कहा, ”विशाल गौतम ने बताया है कि उस ने तुम्हारे कहने पर ही तुम्हारे ससुर की हत्या की है.’’

”नहीं सर, विशाल झूठ बोल रहा है.’’ शालू ने जवाब दिया.

”विशाल ने बताया कि डुप्लीकेट चाबी बनवाने के लिए तुम्हीं ने उसे ओरिजनल चाबी दी थी.’’ इंसपेक्टर ने कहा.

”मैं ने उसे कोई चाबी नहीं दी.’’

”तुम झूठ बोल रही हो. विशाल व राजकिशोर ने बताया कि 6 लाख रुपए में तुम ने ससुर की हत्या की सुपारी दी थी.’’

”सुपारी दी थी तो रुपए भी दिए होंगे. क्या वे रुपए बरामद हुए?’’

”तो तुम यह कहना चाहती हो कि तुम ने ससुर विनीत की हत्या की सुपारी नहीं दी?’’

”बिल्कुल नहीं सर, वे दोनों झूठ बोल रहे हैं.’’

”तुम यह बताओ कि विशाल को शिवम बता कर सोसाइटी में एंट्री कराने के लिए तुम ने सिक्योरिटी गार्ड को फोन किया था?’’

”नहीं सर, मैं ने गार्ड को कोई फोन नहीं किया.’’

”तुम अभी भी झूठ बोल रही हो. तुम्हारे फोन की कौल डिटेल्स हमारे पास है और गार्ड मदन सिंह राणा ने भी हमें सब कुछ बता दिया है.’’

शालू चुप रही, उस ने कोई जवाब नहीं दिया.

”हमें यह भी पुख्ता जानकारी मिल चुकी है कि गुमटी मार्केट में 3 बार तुम विशाल से मिली. इस बात को तुम नकार नहीं सकती, क्योंकि इस के सीसीटीवी फुटेज हमारे पास हैं.’’ इंसपेक्टर केशव कुमार ने कहा तो शालू ने कोई जवाब नहीं दिया.

उन की नजर शालू की बौडी लैंग्वेज पर थी. कुछ सेकेंड की शांति के बाद वह बोले, ”विशाल से तुम्हारी लगातार बात होती थी. तुम्हारे दोनों के फोन नंबरों की डिटेल्स हमारे पास है.’’

चूंकि पुलिस के पास शालू के खिलाफ अहम सबूत थे, इसलिए उस ने पुलिस के सामने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. उस के बाद पुलिस ने शालू को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ कि जिस समय करोड़पति दवा व्यापारी विनीत मिनोचा के शरीर को कातिल चाकू से गोद रहे थे, उस समय उन की बहू शालू किटी पार्टी में पति सुब्रत के साथ मस्ती में ठुमके लगा रही थी.

पुलिस जांच करने के लिए तिलक नगर स्थित कास्मोजिन लाउंज पहुंची तो वहां पुलिस को स्टाफ ने 2 वीडियो मुहैया कराए. एक वीडियो 39 सेकेंड का, जबकि दूसरा वीडियो 17 सेकेंड का था.

पहले वीडियो में शालू पति सुब्रत के साथ ‘तुम तो धोखेबाज हो, वादा कर के भूल जाते हो…’ गीत पर नशे के सुरूर में ठुमके लगाती दिखी. जबकि दूसरे वीडियो में वह अपनी महिला मित्रों के गले में हाथ डाल कर ‘जुम्मे के दिन किया चुम्मे का वादा…’ गीत पर मस्ती में झूम रही थी.

पुलिस ने पार्टी के बारे में लाउंज संचालक लवी मिश्रा व जनरल मैनेजर सौरभ त्रिपाठी से पूछताछ की. सौरभ ने बताया कि 5 सितंबर, 2026 की रात दवा व्यापारी सुब्रत ने पार्टी बुक की थी. पार्टी का बिल 80 हजार का बना था, जिसे रतनपुर निवासी उन के साथी दवा व्यापारी ने अदा किया था. पार्टी में करीब 35 गेस्ट आए थे.

सौरभ ने बताया कि पार्टी रात करीब साढ़े 11 बजे से शुरू होनी थी, लेकिन सुब्रत और उस की पत्नी शालू एक घंटा पहले साढ़े 10 बजे ही आ गए थे. करीब सवा 11 बजे सुब्रत के गेस्ट आने लगे थे. पार्टी शुरू होने के बाद शालू और सुब्रत अपने मेहमानों के साथ गेम खेलने लगे.

इस दौरान उन्हें ड्रिंक्स सर्व की गई. सुुब्रत और शालू ने भी खूब शराब पी. इस के बाद सभी डीजे फ्लोर पर पहुंचे और डांस शुरू हुआ. शालू भी पति के साथ पुराने गानों पर थिरकती रही. रात करीब 3 बजे पार्टी समाप्त हुई. उस के बाद सभी चले गए.

अब तक पुलिस ने हत्या का खुलासा कर दिया था और आलाकत्ल सहित कातिलों को भी गिरफ्तार कर लिया था. साथ ही साजिशकर्ता बहू भी गिरफ्त में थी. अत: एसएचओ केशव कुमार तिवारी ने मृतक विनीत के बेटे सुब्रत की तहरीर पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत विशाल गौतम, राजकिशोर व शालिनी उर्फ शालू के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया और उन्हें विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस जांच एवं आरोपियों के बयानों से एक ऐसी कलयुगी बहू की कहानी सामने आई, जिस ने अपनी खुशहाल जिंदगी के लिए रिश्तों का खून कर दिया.

उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर के कल्याणपुर थाना अंतर्गत एक पौश इलाका है— इंदिरा नगर. इसी इंदिरा नगर में स्थित है रतन आर्बिट अपार्टमेंट. इस बड़े अपार्टमेन्ट में 1056 फ्लैट और 27 बंगले हैं. यहां लगभग 5 हजार लोग रहते हैं. एक एंट्री व एक एग्जिट गेट है. पूरे परिसर में 45 सुुरक्षाकर्मी है. परिसर के अंदर स्कूल, डौक्टर का क्लीनिक तथा 30 दुकानें हैं. परिसर के अंदरबाहर जाने वालों की गार्ड रजिस्टर में एंट्री दर्ज करते हैं.

इसी रतन आर्बिट अपार्टमेंट के सी-104 फ्लैट में विनीत मिनोचा परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी पुनीता के अलावा एक बेटा सुब्रत तथा एक बेटी सुरभि थी. विनीत स्वयं तो दवा व्यापारी थे, जबकि उन की पत्नी पुनीता गाजियाबाद में मैरिज काउंसलर थीं. विनीत अपनी इंजीनियर बेटी सुरभि की शादी कर चुके थे. वह अपने इंजीनियर पति के साथ गुरुग्राम में सुखपूर्वक रह रही थी.

विनीत मिनोचा कानपुर शहर के बड़े दवा कारोबारी थे. उन की बिरहाना रोड पर थोक दवा मार्केट में ‘फार्मा ट्रेडर्स’ के नाम फर्म थी. फर्म में 20-22 कर्मचारी काम करते थे. वह दवा के थोक विक्रेता थे. कानपुर शहर के अलावा तमाम शहरों के मैडिकल स्टोर संचालक उन के यहां दवा खरीदने आते थे. उन का सालाना टर्न ओवर 50-60 करोड़ के ऊपर का था.

विनीत मिनोचा का एकलौता बेटा सुब्रत जब पढ़लिख कर जवान हुआ तो उन्होंने उसे भी अपने व्यापार में लगा लिया. इस के बाद उन्होंने सुब्रत का विवाह लखनऊ के ठाकुरगंज निवासी बेकरी व्यापारी नरेश अरोड़ा की छोटी बेटी शालिनी उर्फ शालू से कर दिया. शादी 23 नवंबर, 2020 को नैनीताल में हुई थी.

शादी के बाद शालू ससुराल आई तो बेहद खुश थी, क्योंकि वह करोड़पति व्यापारी की बहू थी. संपन्न घर था. घर में नौकरचाकर थे. पढ़ालिखा और स्मार्ट कारोबारी पति था. उस ने घर की जिम्मेदारियां भी संभाल ली थीं.

शालू की सास पुनीता मैरिज काउंसलर थीं. वह अधिकतर घर के बाहर रहती थीं. अत: घर की कमान शालू के हाथ में ही थी. शादी के एक साल बाद शालू ने एक बेटे को जन्म दिया. बेटे के जन्म के बाद परिवार की खुशियां और भी बढ़ गईं.

लगभग 2 साल तक शालू ससुराल में खुश रही. उस के बाद उस की खुशियों को ग्रहण लगना शुरू हो गया. कारण उस के ससुर विनीत मिनोचा उस की खुशियों में बाधक बनने लगे थे. शालू को पति के साथ घूमना, किटी पार्टी में जाना, आधुनिक फैशन के कपड़े पहनना, सजधज कर रहना पसंद था, जबकि ससुर इन्हीं सब को ले कर टोकाटाकी करने लगे थे.

वह कहते कि यह मत पहनो, किटी पार्टी मत जाया करो. खर्च पर कंट्रोल करो. कभीकभी तो इतना जलील कर देते कि शालू आंसू बहाने लगती. पति से कुछ कहती तो वह चुप्पी साध जाता, क्योंकि वह खुद अपने ही पिता की फर्म में नौकर था और उसे 40 हजार रुपए सैलरी के तौर पर मिलते थे.

शालू को भी घर खर्च के लिए 15 हजार रुपए मिलते थे. उस का भी पाईपाई का हिसाब देना पड़ता था. अतिरिक्त खर्च के लिए उसे ससुर के सामने हाथ फैलाने पड़ते थे. इन सब के कारण शालू परेशान रहने लगी थी. वह समझ नहीं पा रही थी कि इस समस्या से वह कैसे निजात पाए.

विनीत मिनोचा की फर्म में विशाल गौतम नाम का एक कर्मचारी था. वह मथुरी मोहाल में रहता था. उस का शालू के फ्लैट पर भी आनाजाना था. सुब्रत को वह भैया और शालू को भाभी कहता था. सुब्रत और शालू का वह चहेता था, लेकिन वर्ष 2022 में विनीत मिनोचा ने उसे चोरी के आरोप में नौकरी से निकाल दिया था.

नौकरी से निकाले जाने के बावजूद विशाल का शालू के घर आनाजाना लगा रहता था. सुब्रत और शालू उस से घरेलू काम करा लेते थे और उस की आर्थिक मदद कर देते थे. वे दोनों मोबाइल के जरिए भी विशाल के संपर्क में रहते थे.

शालू परेशान तो रहती ही थी, लेकिन उस की परेशानी तब और बढ़ गई, जब विनीत मिनोचा ने फ्लैट के अंदरबाहर सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए. शालू को लगा कि उन्होंने कैमरे उस की निगरानी के लिए ही लगवाए हैं, अत: वह ससुर से नफरत करने लगी.

इस के बाद उस ने ससुर विनीत मिनोचा की हत्या का प्लान तैयार किया और 6 लाख की सुपारी अपने पूर्व नौकर विशाल गौतम को दी. विशाल गौतम ने शालू की योजना के तहत अपने साथी राजकिशोर को साथ मिला कर शालू के ससुर विनीत मिनोचा की 5 सितंबर, 2026 की रात उन के ही फ्लैट में हत्या कर दी और फरार हो गए, लेकिन पुलिस की जांच में वे बच नहीं पाए और पकड़े गए. साजिश रचने वाली शालू ने भी शुरुआत में रोनेधोने का खूब नाटक किया, लेकिन उस की साजिश का भी परदफाश हो गया और वह पकड़ी गई.

घटना के 5 दिन बाद शालू का भाई धीरज अरोड़ा व बड़ी बहन सोनिया शालू की ससुराल कानपुर आए, लेकिन परिजनों ने उन्हें बहनोई सुब्रत से मिलने नहीं दिया. उस के बाद उन्होंने प्रैसवार्ता की और मीडिया को बताया कि उन की बहन शालू पर हत्या की साजिश रचने का आरोप गलत है.

धीरज ने कहा कि जो लड़की चींटी तक नहीं मार सकती, वह हत्या की साजिश कैसे रच सकती है. विशाल ने शालू का नाम किसी के कहने पर लिया था या फिर धन के लालच में लिया. यह पुलिस जांच का विषय है. उन्हें इस बात का भी आश्चर्य है कि सुब्रत अभी तक शालू से मिलने क्यों नहीं गया.

बड़ी बहन सोनिया ने बताया कि उन की छोटी बहन शालू घर को अच्छी तरह संभालती थी. उस के ससुर विनीत मिनोचा शुगर रोगी थे. शालू ही उन के खानपान का ध्यान रखती थी. उस ने घर खर्च या ससुर की टोकाटोकी की शिकायत कभी हम लोगों से नहीं की. सुब्रत ने ही शालू को विशाल का मोबाइल नंबर दिया था. बहनोई की जानकारी में ही शालू विशाल से बात करती थी और घरेलू काम करने को बुलाती थी. सोनिया ने शालू पर लगे हत्या के आरोपों को सिरे से नकार दिया.

8 सितंबर, 2026 को पुलिस ने आरोपी विशाल गौतम, राजकिशोर तथा शालिनी उर्फ शालू को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन को जिला जेल भेज दिया गया.

पुलिस को बेटे पर शक, लेकिन ठोस सबूत नहीं

करोड़पति दवा व्यापारी विनीत मिनोचा की हत्या के मामले में पुलिस को उन के बेटे सुब्रत पर भी शक है, लेकिन ठोस सबूत न होने से पुलिस असहज है. पुलिस की जांच में कुछ अहम जानकारियां सामने आईं, जिस से उस पर शक गहराया.

सुब्रत के घर 2 नौकर व एक मेड काम करती थी, फिर सुब्रत और शालू हत्यारोपी विशाल गौतम को हर काम के लिए घर क्यों बुलाते थे? वह भी तब जब विनीत मिनोचा उसे पसंद नहीं करते थे. उन्होंने उसे चोरी के आरोप में नौकरी से निकाल दिया था. आखिर सुब्रत का विशाल से ऐसा क्या याराना था, जो सुब्रत हर काम के लिए विशाल को ही बुलाता था?

हत्या के पहले शालू 3 बार गुमटी मार्केट गई. तब शालू के साथ सुब्रत भी गया. हर बार सुब्रत और विशाल मिले. गुमटी मार्केट में ही शालू और विशाल ने हत्या का प्लान बनाया. फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी भी यहीं बनवाई गई. ऐसा कैसे संभव है कि हत्या जैसी साजिश रची जाए और सुब्रत को भनक न लगे.

विनीत मिनोचा की हत्या के बाद पुलिस ने सुब्रत को सीसीटीवी फुटेज दिखाए और फुटेज में दिख रहे हत्यारों को पहचानने के लिए कहा, लेकिन उस ने उन्हें पहचानने से इंकार कर दिया. पुलिस के जोर देने पर ही विशाल का नाम बताया. आखिर सुब्रत ने विशाल को पहचानने से इंकार क्यों किया? क्या दोनों के बीच कोई राज था?

सुब्रत अपनी पत्नी शालू से ज्यादा विशाल के संपर्क में रहता था. सर्विलांस सेल की जांच के अनुसार सुब्रत ने विशाल से 300 से अधिक बार मोबाइल फोन से बात की तथा वाट्सऐप कौल की. घटना वाले दिन शालू जहां सुबह से रात तक विशाल के संपर्क में रही, वहीं सुब्रत भी 29 अगस्त से 5 सितंबर तक विशाल के संपर्क में रहा. इन 6 दिनों में सुब्रत ने विशाल को 25 बार कौल व वाट्सऐप कौल की.

शालू ने जहां 49 मैसेज डिलीट किए, वहीं सुब्रत ने भी 3 मैसेज डिलीट किए. तो क्या डिलीट मैसेज हत्या के राजदार थे? क्या सुब्रत को हत्या की पूरी जानकारी थी?

इन्हीं सब कारणों से सुब्रत शक के दायरे में है. पुलिस ने उसे क्लीन चिट नहीं दी है. ठोस सबूत हाथ लगा तो पुलिस उस के खिलाफ भी काररवाई करेगी.

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