True Crime Story. शक की फांस इतनी खतरनाक होती है कि यदि इस का समाधान नहीं किया तो यह हंसतीखेलती गृहस्थी को तहसनहस कर डालती है. शालिनी और दिलीप कुमार ने अपने प्यार को अरेंज मैरिज में तब्दील किया था, दोनों ही टीचर थे, इस के बावजूद दोनों के दिमाग में एकदूसरे के प्रति शक की विषबेल तेजी से फैल चुकी थी. इस का नतीजा इतना खतरनाक निकला कि…
दिलीप कुमार कई दिन से परेशान था. उस की परेशानी का कारण भी उस की पत्नी शालिनी ही थी. दिलीप एक सरकारी स्कूल में टीचर था, जबकि उस की पत्नी एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थी. दोनों की शादी को पूरे 9 वर्ष बीत चुके थे. इस बीच शालिनी एक बच्चे की मां भी बन गई थी. शादी के बाद दोनों खुश थे.
दोनों ही टीचर थे, लेकिन शालिनी को एक टीचर होते हुए जितनी मेहनत करनी पड़ती थी, वही जानती थी. वह हमेशा ही दिलीप के उठने से कई घंटे पहले उठती और फिर उस के उठने से पहले ही उसे घर का सारा कामकाज निपटाना होता था. उस के बाद भी दिलीप उस की परेशानी को समझने को तैयार नहीं था.
दिलीप सोचता कि वह एक प्राइवेट विद्यालय में ही तो पढ़ाती है. फिर उस के पास ऐसी कौन सी जिम्मेदारी है कि हर वक्त अपने स्कूल के काम में ही लगी रहती है. शालिनी अपने फोन को हमेशा ही साइलेंट मोड में रखती थी. कई बार दिलीप उसे फोन करता तो फोन बिजी आता था.
दिलीप वैसे भी शुगर पेशेंट था, जिस के कारण उस का ब्लडप्रेशर तुरंत ही बढ़ जाता था. हालांकि पतिपत्नी दोनों के टीचर होते हुए घर की आर्थिक स्थिति मजबूत थी. दिलीप को बैंक बैलेंस बढ़ाने का भूत सवार था.
दिलीप चाहता था कि शालिनी जो भी कमाती है उसे वह उस के ही खाते में डाले, लेकिन शालिनी पर अपने घर का खर्च उठाने के साथसाथ अपने बेटे की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी थी. उस का बेटा इस वक्त 8 साल का हो चुका था. दिलीप अपनी तनख्वाह में से एक कौड़ी भी खर्च नहीं करना चाहता था.
बस, उस की इसी कंजूसी ने शालिनी को चिड़चिड़ी बना दिया था, जिस के कारण उन दोनों के बीच लगभग पिछले डेढ़ साल से मनमुटाव चल रहा था. इस से उन के बीच मान सम्मान और शालीनता तो बिलकुल ही खत्म हो गई थी.
इस घटना से कुछ दिन पहले ही एक दिन दिलीप ने किसी काम से शालिनी को फोन किया, उस समय किसी वजह से वह उस की कौल रिसीव नहीं कर सकी. बाद में शालिनी ने पति दिलीप को फोन किया तो वह बिगड़ गया.
उसी वक्त दिलीप ने उस से तुरंत ही घर आने को कहा तो उस ने कह दिया कि उसे घर आने में कुछ वक्त लगेगा, लेकिन कुछ देर बाद ही वह घर आ गई. घर आते ही उस के फोन पर किसी का फोन आ गया. फिर वह फोन पर बातें करते हुए दूसरे कमरे में चली गई.
शालिनी को इस तरह से फोन पर बातें करते देख दिलीप बौखला गया, ”जब तुम्हारे पास टाइम नहीं था तो घर आने की क्या जरूरत थी. सारे दिन यारों के बीच रहती है, फिर भी घर आते ही यारों से बात करने की जरूरत पड़ गई.’’
दिलीप की यह बात सुनते ही शालिनी को भी गुस्सा आ गया. वह बोली, ”तुम्हें मुझ पर बिलकुल भी भरोसा नहीं रहा. जिस तरह से तुम दूसरी औरतों पर पैसा लुटा कर घर की बरबादी कर रहे हो, वह मैं नहीं कर सकती. इसीलिए तो तुम दूसरी औरतों के कारण मुझ से पीछा छुड़ाना चाहते हो, लेकिन मैं इतनी जल्दी तुम्हें आजादी देने वाली नहीं हूं.’’
उस दिन दोनों के बीच जम कर झगड़ा हुआ. मम्मीपापा के बीच होने वाले रोजाना के इस विवाद से उन का बेटा हमेशा ही खोयाखोया सा रहने लगा था. वहीं दिलीप शालिनी के व्यवहार को देख कर उस पर पूरी तरह से शक करने लगा था. उस को पूरा विश्वास हो गया था कि शालिनी का किसी के साथ जरूर चक्कर चल रहा है, जिस के कारण वह उसे बिलकुल भी मानसम्मान नहीं देती.
शालिनी के रंगढंग को देख कर उस के मन में तरहतरह के विचार आने लगे थे. उस की मानसिकता भी ऐसी हो गई थी कि जब भी वह स्कूल में अखबार ले कर बैठता तो ज्यादातर क्राइम न्यूज पर ही नजर डालता था.
उन दिनों कई घटनाएं ऐसी सामने आईं कि कई पत्नियों ने अपने प्रेमियों के साथ मिल कर पति को मौत के घाट उतारा था. शुगर पेशेंट होने के कारण दिलीप भी खुद को कमजोर मानने लगा था, जिस के कारण उस के दिमाग में एक गलतफहमी पैदा हो गई कि कहीं उस की पत्नी भी उन औरतों की तरह एक दिन उस की जान न ले ले.
जब दिलीप के मन में शालिनी के प्रति शक का कीड़ा पैदा हो गया तो उस ने उस से तलाक लेने वाली बात कही. तलाक की बात सुनते ही शलिनी को भी पूरा विश्वास हो गया था कि जरूर उस का किसी अन्य महिला के साथ चक्कर चल रहा है, जिस के कारण वह उस से तलाक ले कर सब कुछ उसी के नाम पर करने की योजना बना रहा है.
यही सोच कर शालिनी ने उसे तलाक देने से साफ मना कर दिया. जबकि दिलीप किसी भी कीमत पर उस से छुटकारा पाने के तरीके ढूंढने लगा था.
इस घटना से लगभग 15 दिन पहले भी इसी बात को ले कर दोनों में काफी लड़ाईझगड़ा हुआ. यहां तक कि दिलीप ने शालिनी को बेल्ट से बुरी तरह से पीटा. उस ने सोचा कि उस के व्यवहार से तंग आ कर वह उसे छोड़ कर चली जाएगी, लेकिन शालिनी ने घर छोडऩे के बजाए उस की शिकायत पुलिस से कर दी.
पुलिस के आने पर दिलीप ने पुलिस के सामने अपनी गलती मानते हुए उस से समझौता कर लिया, लेकिन उस दिन के बाद पतिपत्नी के नाजुक रिश्तों में गहरी दरार पड़ चुकी थी.
उस के बाद दिलीप की हरकतों से तंग आ कर शालिनी ने एक किराए का मकान ले कर अलग रहने की योजना बना ली थी. उस ने आसपास ही कमरे की तलाश भी शुरू कर दी थी, लेकिन इस से पहले शालिनी दूसरे कमरे में शिफ्ट कर पाती, उस के साथ बहुत बड़ा हादसा हो गया.
8 अगस्त, 2026 की सुबह ही दिलीप मौर्निंग वाक पर घर से निकला. सुबह लगभग साढ़े 6 बजे जब वह घर वापस आया तो उसे शालिनी मृत मिली. वह पानी के भरे टब में औंधे मुंह गिरी पड़ी थी.
शालिनी को इस हाल में देख कर दिलीप ने तुरंत इस की सूचना अपने भाइयों संदीप और भूपेंद्र को दी. उस के बाद वह अपने भाइयों की सहायता से शालिनी को ले कर तांबेश्वर मंदिर के पास स्थित एक नर्सिंग होम ले गया, लेकिन वहां पर डौक्टरों ने उसे देखते ही मृत घोषित कर दिया.
दिलीप शालिनी के शव को ले कर अपने घर चला आया. उस के बाद उस ने पुलिस को इस की सूचना देना ही उचित समझा. वह किसी उलझन में नहीं फंसना चाहता था.
उस ने पुलिस को फोन करते हुए बताया कि उस की पत्नी पैर फिसलने के कारण पानी के टब में गिर गई और पानी में डूबने के कारण उस की मौत हो गई. यही सूचना उस ने शालिनी के मायके वालों को भी दी थी.
सूचना पाते ही गांव जखनी थाना राधानगर जिला फतेहपुर निवासी शालिनी के पापा धर्म सिंह भी तुरंत ही मौके पर पहुंचे.
यह मामला थाना कोतवाली फतेहपुर के अंतर्गत आता था. दिलीप की सूचना पर आननफानन में कोतवाल हेमंत कुमार मिश्रा पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे, लेकिन पुलिस के वहां पहुंचने से पहले ही दिलीप वहां से फरार हो गया था.
इस मामले में पुलिस ने धर्म सिंह से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि बेटी शालिनी की जिद पर 3 दिसंबर, 2017 को उन्होंने हिंदू रीतिरिवाज से उस की शादी दिलीप के साथ की थी. शादी के बाद शालिनी एक बच्चे की मां भी बनी. लेकिन कुछ समय पहले दिलीप का उस के ही विद्यालय में पढ़ाने वाली एक टीचर के साथ अवैध संबंध हो गए थे.
दिलीप का शालिनी के प्रति व्यवहार बदलने लगा था, जिस के कारण आए दिन दोनों में इसी बात को ले कर मनमुटाव रहने लगा था.
उसी मनमुटाव के चलते दिलीप कई साल से शालिनी से तलाक लेना चाह रहा था, लेकिन शालिनी ने उसे तलाक नहीं दिया.
इस दौरान दिलीप ने कई बार उसे जान से मारने की धमकी भी दी थी. शालिनी से पीछा छुड़ाने के लिए 8 अगस्त, 2026 को दिलीप ने अपने भाइयों के साथ मिल कर उस की हत्या कर दी. फिर तीनों ने उस को दुर्घटना दिखाते हुए पानी के टब में डाल दिया.
इस हत्याकांड की सूचना मिलते ही एसपी अभिमन्यु मांगलिक और एएसपी ज्ञानप्रकाश राय भी घटनास्थल पर पहुंचे.
इस केस की हकीकत जानने के लिए मौके पर ही डौग स्क्वायड सूर्या को भी बुला गया था. कई बार सूर्या को घटनास्थल पर छोड़ा गया, लेकिन घटनास्थल से सारे सबूत पहले ही नष्ट कर दिए गए थे, जिस के कारण वह इस मामले में कोई सहायता नहीं कर सका.
यह जानकारी के मिलने के बाद पुलिस ने काररवाई करते हुए देर रात उस की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. उसी रात 3 डौक्टरों के पैनल ने उस का पोस्टमार्टम भी किया.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के शरीर पर धारदार हथियार से हमले के निशान पाए गए. सिर में कटने के 3 घाव व शरीर के अन्य हिस्सों पर 4 निशान पाए गए थे.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उस की मौत का कारण पानी में डूबना बताया गया, जिस से साबित हो गया था कि शालिनी के साथ कोई हादसा नहीं, बल्कि उस की हत्या की गई थी. पहले शालिनी के साथ मारपीट की गई, फिर उसे पानी के टब में डुबो कर मारा गया था.
यह जानकारी मिलने के बाद मृतका के पापा धर्म सिंह की तरफ से थाना कोतवाली में तीनों भाइयों के खिलाफ एक लिखित तहरीर दी गई थी, जिस के आधार पर पुलिस ने धारा 103(1), 238 बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.
इस मामले में एफआईआर दर्ज होते ही पुलिस ने अपनी जांच शुरू कर दी थी. इस मामले में आरोपी दिलीप सिंह के भाइयों की संलिप्तता सामने आई थी. उस के दोनों भाई संदीप और भूपेंद्र हरिहरगंज की चूना वाली गली में रहते थे.
दोनों ही भाइयों के घर पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे. कैमरों की फुटेज से जानकारी मिली कि घटना वाले दिन दोनों ही घर से निकले थे और बाद में घर भी वापस आ गए थे, जिस से साबित हो गया था कि इस हत्याकांड में वे दोनों भी शामिल थे.
इस के अलावा पुलिस ने शादीपुर चौराहे की एक दुकान पर लगे कैमरे की फुटेज खंगाली, जिस में दिलीप सुबह लगभग 6 बजे बाइक से जाते दिखाई दिया. उस के बाद 25 मिनट बाद ही वह घर की तरफ वापस आता नजर आया. जबकि दिलीप ने सभी से कहा था कि वह सुबह ही टहलने के लिए निकल गया था.
यह सब तथ्य जुटाने के बाद पुलिस ने दिलीप और उस के भाइयों को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया. पुलिस ने तीनों से कड़ी पूछताछ की, लेकिन सब ने पूरी तरह से अपना मुंह बंद रखा.
यही नहीं, दिलीप ने पुलिस की प्रताडऩा से बचने के लिए कोतवाली में ही गले में फंदा डाल कर मरने का नाटक भी रचा, जिस के कारण पुलिस उस पर ज्यादा दबाव नहीं बना रही थी.
हालांकि दिलीप ने वकालत भी कर रखी थी, लेकिन उस के खिलाफ पुलिस जो साक्ष्य जुटा चुकी थी, उस के पास उन की कोई भी काट नहीं थी. फिर दिलीप भी पुलिस के सामने अपनी हार मान चुका था.
दिलीप ने पुलिस को बताया कि पिछले लगभग डेढ़ साल से उसे अपनी पत्नी के चरित्र पर शक था. वह कभी भी उसे बिना बताए कहीं भी चली जाती थी. साथ ही वह अपनी तनख्वाह में से उसे एक भी पैसा नहीं देती थी. जिस से उसे पूरा शक हो गया था कि उस की पत्नी शालिनी का गैरमर्द के साथ अवैध संबंध है, जिसे वह बरदाश्त नहीं कर पा रहा था.
उस ने उस से तलाक देने को कहा तो वह तलाक देने के लिए भी तैयार नहीं थी. इस से तंग आ कर वह करीब 6 माह पहले से ही अपनी पत्नी की हत्या कर उसे दुर्घटना दिखाने की योजना बना रहा था, लेकिन उसे मौका नहीं मिल रहा था.
दिलीप ने बताया कि 8 अगस्त, 2026 को सुबह लगभग 5 बजे उस की आंखें खुलीं. उस के बाद वह टहलने छत पर चला गया. उस दिन शालिनी उस से भी पहले उठ गई थी. उस वक्त तक चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था. उस ने अपने घर की छत पर लगे जाल से झांक कर देखा, शालिनी घर के आंगन में बैठी बरतन साफ कर रही थी.
शालिनी को देखते ही उस के ऊपर शैतान सवार हो गया. वह तुरंत ही छत से नीचे उतर आया और शालिनी के पीछे रखे प्रेशर कुकर को उठा कर लगातार उस के सिर पर कई वार कर डाले, जिस के बाद वह तुरंत ही बेहोश हो गई. फिर उस ने उसे उठा कर पास में रखे पानी के टब में उस के सिर को डुबो दिया. 2 मिनट बाद ही उस की मौत हो गई.
पत्नी को मौत के घाट उतारने के बाद उसे हादसा दिखाने के लिए वह घर से बाइक निकाल कर मौर्निंग वाक पर निकल गया. लगभग आधा घंटा बाद वह घर वापस आया और इस की सूचना अपने भाइयों को दे दी.
उस के बाद दिलीप ने पुलिस के सामने कहा कि साहब मुझ से बहुत ही बड़ी गलती हो गई. मैं ने शक में आ कर अपनी बसीबसाई गृहस्थी बरबाद कर ली.
अपनी पत्नी से पीछा छुड़ाने के लिए उस ने जो फुलप्रूफ प्लान बनाया था, उसी के कारण वह कानून के शिकंजे में फंस गया.
मृतका के फेमिली वालों के साथ ही आरोपी दिलीप सिंह से पूछताछ के आधार पर शालिनी की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में थाना असोथर के अंतर्गत एक गांव पड़ता है अंदीपुर. इसी गांव में रहता था महादेव सिंह का परिवार. महादेव सिंह पोस्ट औफिस में कर्मचारी थे. उन के 3 बेटे थे. पोस्ट औफिस में होने के कारण उन का सभी लोग मानसम्मान करते थे.
महादेव ने अपने तीनों ही बेटों को मन से पढ़ायालिखाया और उन को काबिल बनाने के लिए हर प्रयास किए.
दिलीप इन सब में सब से बड़ा था. पढ़ाई करने के दौरान ही उस की मुलाकात शालिनी से हुई थी. बात अब से लगभग 9 साल पहले की है. दोनों एक ही कालेज में साथसाथ पढ़ते थे.
शालिनी बेहद खूबसूरत थी. यही कारण था कि शालिनी को देखते ही दिलीप उसे पाने के लिए पागल हो उठा. धीरेधीरे उस ने उस के साथ संपर्क बढ़ाए और उस के साथ दोस्ती कर ली. फिर देखते ही देखते दोनों के बीच प्यार का बीज अंकुरित हो उठा. जल्दी ही दोनों एकदूसरे के साथ जीनेमरने की कसमें भी खा चुके थे, लेकिन जब बात शादी की आई तो दोनों के फेमिली वालों की तरफ से अड़चनें बीच में आ खड़ी हुईं.
शालिनी भी एक अच्छे परिवार से ताल्लुक रखती थी. उस के पापा धर्म सिंह राधानगर थाने के जखनी गांव के प्रधान थे, जिस के कारण उन की क्षेत्र के अलावा राजनीति में भी अच्छी पहुंच थी.
धर्म सिंह ने अपनी बेटी को अच्छी तरह से समझाया कि शादी जिंदगी का एक अटूट बंधन होता है. इसलिए शादी में इतनी जल्दी नहीं करनी चाहिए, लेकिन शालिनी और दिलीप दोनों एकदूसरे के साथ शादी करने पर अड़े हुए थे.
हालांकि उस वक्त दिलीप बेरोजगार था. अपनी बेटी की जिद के आगे लाचार हो कर धर्म सिंह एक दिन दिलीप के गांव जा कर उस के पापा महादेव सिंह से मिले. दोनों पहले से ही एकदूसरे को भलीभांति जानते थे. उन्होंने उन से मिल कर शादी की चर्चा की तो महादेव सिंह ने तुरंत ही हां कर दी.
दोनों परिवारों की रजामंदी होते ही 3 दिसंबर, 2017 को हिंदू रीतिरिवाज से शालिनी और दिलीप की शादी कर दी गई. इस शादी से दिलीप और शालिनी बहुत ही खुश थे. शादी के बाद शालिनी और दिलीप कुमार जौब ढूंढने में जुटे रहे.
उसी दौरान किसी बीमारी के चलते दिलीप कुमार के पापा महादेव की मृत्यु हो गई. महादेव सिंह की मृत्यु के बाद आश्रित के रूप में दिलीप को पोस्टमैन की नौकरी मिल गई थी. दिलीप कुमार पोस्ट औफिस में नौकरी करने लगा, लेकिन उस ने अभी भी अपनी कोशिश पहले की तरह ही जारी रखी.
उस ने बीएड करने के बाद टेट की परीक्षा भी पास कर ली थी. उस की लगन और मेहनत से उसे एक दिन सरकारी टीचर की जौब भी मिल गई. टीचर की नौकरी मिलने के बाद उस ने पोस्टमैन की नौकरी छोड़ दी. इस वक्त वह बहुआ ब्लौक के चक अल्लीपुर प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के रूप में पढ़ा रहा था.
शालिनी चाहती थी कि वह भी दिलीप की तरह सरकारी टीचर बन जाए. उस ने इस के लिए बहुत प्रयास किया, लेकिन घरगृहस्थी में पड़ कर वह पूरी तरह से सफल नहीं हो पाई.
फिर भी उसे शहर के एक बड़े प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका के रूप में नौकरी मिल गई. दोनों को नौकरी मिलते ही उन की गृहस्थी की गाड़ी तेजी से दौडऩे लगी थी. शादी के एक साल बाद शालिनी एक बेटे की मां भी बन गई थी.
दिलीप कुमार शुरू से ही कंजूस किस्म का था. वह एकएक पैसे को देख कर जीने वालों में से था. वह अपनी सैलरी हमेशा बैंक में जमा रखता. जब कभी भी शालिनी खर्च के लिए पैसे मांगती तो कह देता कि तुम भी तो नौकरी कर रही हो. उसी से अपना खर्च चलाओ.
उस की यह बात शालिनी के दिल में चुभने लगी. फिर भी वह उस के साथ निभाते हुए अपनी सैलरी से ही घर खर्च चलाने लगी. उस के बाद भी दिलीप चाहता था कि वह अपनी भी सैलरी उस के खाते में डाले. उस की बात शालिनी को अखरने लगी थी. फिर जल्दी ही दोनों के बीच मनमुटाव पैदा हो गया.
इस के अलावा दिलीप कुमार का उस के प्रति व्यवहार भी पूरी तरह से बदल गया था. वह स्कूल से आने के बाद भी हर वक्त मोबाइल पर ही लगा रहता, जिस से शालिनी के मन में शक पैदा हो गया कि वह जरूर किसी दूसरी महिला के चक्कर में पड़ गया है.
शालिनी चाहती थी कि वह भी एक सरकारी टीचर बन जाए. इसी कारण वह स्कूल में पढ़ाने के साथसाथ नौकरी की तैयारी में जुटी थी, जिस के लिए उसे इधरउधर आनाजाना पड़ता था. लेकिन दूसरी तरफ उस का घर से बाहर निकलना दिलीप को खलने लगा था. फिर उस का मन भी उस की तरफ से शंकित हो उठा. उसे लगने लगा कि शालिनी का किसी अन्य व्यक्ति के साथ चक्कर चल रहा है.
दिलीप के मन में शंका पैदा होते ही उस ने उस के घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी, लेकिन शालिनी जानती थी कि अगर वह उस की बातों में आ कर घर पर बैठ गई तो उस का टीचर बनने का सपना साकार नहीं हो पाएगा. यही सोच कर वह अपने कामों में लगी रही.
दोनों के मन में मनमुटाव पैदा हो गया और दिलीप कुमार उस से तलाक की मांग करने लगा, लेकिन शालिनी ने अपने बेटे के भविष्य को ध्यान में रख कर उसे तलाक देने से साफ मना कर दिया था, जिस के बाद वह शालिनी से पूरी तरह से नफरत करने लगा था.
उसी नफरत के चलते एक दिन ऐसा आया कि वह शालिनी को मौत की नींद सुलाने की योजना बनाने लगा था.
उस ने 8 अगस्त, 2026 को अपनी योजना को अंजाम दे डाला. कुकर के ढक्कन से वार करने के दौरान कुकर की सीटी वाला हिस्सा शालिनी के सिर में घुस गया था, जिस के कारण वह बेहोश हो गई. तभी शालिनी के पास रखा कांच का गिलास भी टूट गया था. जो शालिनी के पैर में घुस गया था.
घटनास्थल पर जो उस का खून बहा, दिलीप ने बाथटब के पानी से साफ कर दिया था. साथ ही सारे सबूत मिटाने के लिए उस ने कुकर को भी अच्छी तरह से धो दिया था, जिस के कारण वहां से उस की हत्या के सारे सबूत पूरी तरह से नष्ट हो गए थे.
पुलिस ने घटनास्थल से आलाकत्ल कुकर का ढक्कन, टूटे गिलास के टुकड़े, बाथटब, मोबाइल फोन, 70 रुपए नकद व बाइक भी बरामद कर ली थी. मृतका के पापा धर्म सिंह की तहरीर के आधार पर पुलिस दिलीप कुमार के भाइयों भूपेंद्र और संदीप के खिलाफ विवेचना कर रही थी.
घटना के बाद जिस तरह से आरोपी दिलीप कुमार ने किसी क्राइम सस्पेंस फिल्म की तर्ज पर घटनास्थल से सभी साक्ष्य मिटाने की कोशिश की थी, पुलिस के साक्ष्य जुटाने में पसीने छूट गए थे.
फिलहाल शालिनी तो अपनी जान से हाथ धो बैठी थी, वहीं उस के पापा धर्म सिंह ने प्रशासन से गुहार लगाई थी कि आरोपी दिलीप कुमार की सारी संपत्ति उस के बेटे के नाम पर होनी चाहिए.
इस मामले में कोतवाल हेमंत कुमार मिश्रा ने बताया कि आरोपी दिलीप के निलंबन की तैयारी की भी जा रही थी. इस मामले की जानकारी शिक्षा विभाग को दे दी गई थी.
वहीं बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) प्रिंशी मौर्या ने बताया कि पुलिस विभाग की ओर से आरोपी शिक्षक की रिपोर्ट आने के बाद उस के निलंबन की काररवाई की जाएगी. आरोपी दिलीप कुमार को कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया गया था.
लेकिन इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शक, कंजूसी और अंधविश्वास किस तरह से एक खेलतेखाते परिवार को चिता में बदल देता है, जिस के कारण एक मासूम बच्चा अपनी मम्मी और पापा से दूर हो गया. True Crime Story






