Crime Fiction. सेठ दीनानाथ ने राधिका से दूसरा विवाह किया था. वह राधिका को पलकों पर बिठाए रखते थे. एक दिन सेठ कारोबार के सिलसिले में शहर से बाहर गए हुए थे, तभी रात में किसी ने राधिका की चाकू घोंप कर हत्या कर दी. उस रात कोठी में नौकरानी जानकी के अलावा 4 नौकर व सेठ की पहली पत्नी का बेटा रंजीत था. इस हत्या की जांच पुलिस के अलावा प्राइवेट जासूस द्वारा भी की जा रही थी. आखिर किस ने और क्यों की थी सेठानी की हत्या?
सुबह का उजाला फैला तो रोजाना की तरह जानकी की आंखें खुल गईं. रात 10 बजे तक जानकी घर के कामकाज निपटा कर अपने कमरे में सोने आ जाती थी. सुबह होते ही वह बिस्तर छोड़ देती थी. दीनानाथ को बैड टी पीने की आदत थी, इसलिए उसे जल्दी उठना पड़ता था.
सेठ दीनानाथ 2 दिन से जयपुर गए हुए थे. बिजनैस के सिलसिले में उन्हें कभीकभी जयपुर जाना पड़ता था. उन की बैड टी पीने की आदत उन की पत्नी राधिका रानी को भी पड़ गई थी. सेठजी की गैरमौजूदगी में जानकी मालकिन राधिका रानी के लिए चाय बना कर उन के बैडरूम में पहुंचाती थी.
जानकी ने फ्रैश होने के बाद गैस जला कर बढिय़ा वाली अदरक की चाय बनाई. एक कप में उस ने मालकिन राधिका के लिए चाय छानी और उसे स्टील की ट्रे में रख कर वह राधिका के बैडरूम की तरफ बढ़ गई. बैडरूम के दरवाजे पर मोटा परदा पड़ा हुआ था.
जानकी ने जैसे ही परदा सरका कर कमरे में कदम रखा, उस की नजरें राधिका के पलंग पर चली गईं. जानकी के हाथ थरथरा गए. चाय वाली ट्रे हाथ से छूट गई. वह घबरा कर चीखने लगी, ”खून… खून… मालकिन का खून हो गया…’’
उस की चीखें सुबह के सन्नाटे भरे वातावरण में पूरे बंगले में फैल गई. घर के नौकर और बाहर दरवाजे पर बैठेबैठे ऊंघ रहे चौकीदार की नींद खुल गई. वे भागते हुए मालकिन राधिका के बैडरूम की तरफ आए. जानकी अभी भी दहशत से भरी चीख रही थी, ”मालकिन का खून हो गया…’’
चौकीदार और तीनों नौकर राधिका के बैडरूम के दरवाजे पर आ कर रुक गए. चारों फटीफटी आंखों से बैड पर खून से लथपथ राधिका की लाश को देखने लगे. सब बदहवास थे. किसी को नहीं सूझ रहा था कि क्या करें.
कुछ देर यही स्थिति रही, फिर चौकीदार जंगबहादुर बाहर के मुख्य दरवाजे की ओर दौड़ा. दरवाजे पर जहां वह बैठता था, स्टूल पर टेलीफोन रखा हुआ था. उस ने कांपते हाथों से डायल पर सेठ दीनानाथ का नंबर मिलाया और घबराई हुई आवाज में उस ने सेठ दीनानाथ को मालकिन का खून हो जाने की जानकारी दे दी.
सेठ दीनानाथ उस समय जयपुर के होटल मौर्या में थे. पत्नी के खून की जानकारी पा कर वह घबरा गए, फोन पर उन्होंने बड़ी मुश्किल से कहा, ”जंगबहादुर, तुम पुलिस को सूचना दो, मैं तुरंत मुंबई लौट रहा हूं.’’
फोन डिसकनेक्ट करने के बाद सेठ दीनानाथ अपना सामान समेटने लगे.
चौकीदार जंगबहादुर ने हिम्मत बटोर कर पुलिस थाना अंधेरी (वेस्ट) को राधिका के खून की जानकारी दे दी, फिर दौड़ता हुआ बंगले में मालकिन राधिका के बैडरूम के दरवाजे पर आ गया.
अब तक वह खुद को पूरी तरह संभाल चुका था. उस ने दरवाजे पर बदहवास खड़े नौकरों और सेविका जानकी को हिदायत दी थी, ”सभी लोग दरवाजे से हट जाएं. पुलिस आ रही है, दोपहर तक मालिक भी लौट कर आ जाएंगे.’’
सभी दरवाजे से हट कर बाहर बरामदे में पड़े बेंच पर बैठ गए. करीब आधा घंटा बाद अंधेरी (वेस्ट) की पुलिस बंगले पर आ गई. पुलिस इंसपेक्टर गजानंद देशमुख के साथ 4-5 कांस्टेबल थे. इंसपेक्टर ने एक उचटती सी नजर नौकरों और चौकीदार पर डाली, फिर कमरे में घुस कर राधिका की लाश का मुआयना करने लगे.
राधिका की लाश पलंग पर चित पड़ी थी. उस की आंखें कटी हुई खुली हालत में थी. मुंह खुला हुआ था. राधिका के शरीर पर कीमती गाउन था. उन की छाती में गहरा घाव था, जहां से खून निकल कर गाउन और बिस्तर की सफेद चादर को रंग चुका था. खून सूख कर काला पड़ गया था.
”खून रात में 12-1 बजे के आसपास हुआ है.’’ इंसपेक्टर देशमुख होठों में बुदबुदाए. लाश के पास उन्हें ऐसा कोई हथियार नहीं मिला, जिस से राधिका की हत्या की गई हो. दूसरा कोई सूत्र भी कमरे में नहीं था, जिसे संदिग्ध समझा जाता.
अपनी जांच पूरी करने के बाद इंसपेक्टर देशमुख ने फोरैंसिक टीम और फोटोग्राफर को घटनास्थल पर बुला लिया. इंसपेक्टर देशमुख बरामदे में बदहवास खड़े नौकरों की तरफ बढ़ गए.
”लाश को सब से पहले किस ने देखा था?’’ सभी के चेहरों पर उचटती सी नजर डालते हुए इंसपेक्टर ने सवाल किया.
”मैं ने देखा था जी..’’ जानकी हिम्मत बटोर कर बोली, ”मालकिन को बैड टी देने के लिए मैं चाय बना कर लाई थी. मैं ने परदा हटाया तो मालकिन की लाश पर मेरी नजर गई. उन्हें खून में लथपथ देख कर मैं ने चीखना शुरू किया तो किशन, वासुदेव, पुंडरीक और चौकीदार जंगबहादुर दौड़ते हुए यहां आ गए. चौकीदार जंगबहादुर ने मालिक और आप को फोन किया.’’
”अरे! मैं सेठ दीनानाथजी को तो भूल ही गया, वह कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं, कहां पर हैं सेठ जी?’’ चौंकते हुए इंसपेक्टर ने पूछा.
”वह बिजनैस के सिलसिले में परसों जयपुर चले गए थे साहब.’’ चौकीदार जंगबहादुर ने 2 कदम आगे आ कर बताते हुए कहा, ”मैं ने उन्हें मालकिन की हत्या की सूचना दे दी है.’’
”जंगबहादुर, तुम रात पहरे पर थे, रात को हत्यारा बंगले में घुसा तो क्या उस समय सो रहे थे?’’ जंगबहादुर को घूरते हुए इंसपेक्टर ने पूछा.
”मैं अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से देता हूं साहब. उजाला फैलने लगता है तो मुझे झपकी आने लगती है. आज भी साढ़े 5 बजे मैं नींद में ऊंघने लगा था. साढ़े 5 बजे तक कोई भी बाहरी व्यक्ति अंदर नहीं आया.’’
”हूं.’’ इंसपेक्टर ने गरदन हिलाई, ”बाहरी नहीं आया, घर का कौन आया था, यही बता दो मुझे?’’
”छोटे बाबा रात को साढ़े 11 बजे बंगले पर लौटे थे.’’ जंगबहादुर ने बताया, ”वह शाम को क्लब जाते हैं तो रात को 11-12 बजे तक वापस आ जाते हैं.’’
”वह कहां है? मां का कत्ल होने की जानकारी उसे भी हो जानी चाहिए थी.’’ इंसपेक्टर थोड़ा चौंकते हुए बोले, ”अरे हां, राधिका रानी उस की सगी मां भी तो नहीं थी. कहीं उसी ने..?’’ आखिरी के शब्दों को इंसपेक्टर देशमुख ने मन ही बुदबुदा कर कहा था, जिसे वासुदेव ने सुन लिया.
वह जल्दी से बोला, ”बाबा ऐसा नहीं कर सकते. बेशक मालकिन उन की मां नहीं थी, फिर भी बाबा मालकिन को मन से मां ही मानते थे.’’
”ठीक है, ठीक है. मैं इस विषय पर जांच करूंगा.’’ इंसपेक्टर देशमुख ने कंधे झटक कर कहा, ”तुम उसे बुला कर लाओ.’’
वासुदेव आगे बढ़ता, तभी इंसपेक्टर देशमुख के मोबाइल की घंटी बजने लगी. इंसपेक्टर ने फोन कान से लगा कर अपना परिचय देते हुए पूछा, ”आप कौन बोल रहे हैं?’’
”मैं सेठ दीनानाथ बात कर रहा हूं इंसपेक्टर, आप राधिका के कत्ल को औपचारिक रूप में देखें. मैं इस मामले में प्राइवेट जासूस को लगाना चाहता हूं.’’
”क्यों, क्या आप को पुलिस की कार्यप्रणाली पर विश्वास नहीं है सेठजी?’’ इंसपेक्टर देशमुख ने गंभीर स्वर में पूछा.
”यह बात नहीं है इंसपेक्टर.’’ सेठ दीनानाथ भावुक हो गए, ”मैं जानकी की हत्या से बहुत आहत हुआ हूं. जानकी ने मेरी पहली पत्नी विमलेश की बहुत सेवा की थी. जानकी गरीब घर की थी, उस की नेकी और अच्छे व्यवहार ने मुझे विवश किया था कि मैं उसे सहारा दूं. मेरे जीवन में वह पत्नी बन कर आई तो मैं उस के बहुत करीब हो गया.
”अब असमय जानकी को किसी ने मुझ से छीन लिया है, मैं उस कातिल तक पहुंच कर उसे फांसी पर झूलते देखना चाहता हूं. इस से जानकी की आत्मा को शांति मिलेगी. इस मामले में मेरी विशेष दिलचस्पी रहे, इसलिए मैं प्राइवेट जासूस की मदद से इसे जल्द निपटाना चाहता हूं.’’
”मैं आप की भावनाओं को समझ रहा हूं.’’ इंसपेक्टर देशमुख गहरी सांस भरते हुए बोले, ”आप प्राइवेट जासूस की मदद लीजिए, मैं भी इस केस को पूरी गंभीरता से निपटाने की कोशिश करूंगा.’’
सेठ दीनानाथ से फोन पर बातें करने के बाद इंसपेक्टर ने कागजों की खानापूर्ति की, फिर दोबारा आने की कह कर वह अपनी टीम के साथ थाने लौट गए.
फोरैंसिक टीम कमरे में छोटे से छोटा सूत्र एकत्र करने में व्यस्त थी. फोटोग्राफर राधिका की लाश के विभिन्न कोणों से फोटो खींच कर वहीं एक कुरसी पर बैठ गया था. उसी वक्त एक दुबलेपतले युवक ने घटनास्थल वाले कमरे में प्रवेश किया.
लाल रंग की टीशर्ट और नीली जींस पहने हुए इस युवक ने बैड के पास आ कर राधिका की लाश को बहुत पैनी नजरों से देखना शुरू किया. सिर से पांव तक लाश का बारीकी से निरीक्षण कर लेने के बाद उस ने फोरैंसिक टीम इंचार्ज से गंभीर स्वर में पूछा, ”कोई सूत्र हाथ लगा आप के?’’
”नहीं. कातिल अनाड़ी नहीं है, वह हाथों में रबड़ के दस्ताने पहने हुए आया था. लाश के आसपास उस के फिंगरप्रिंट्स हमें नहीं मिल पाए हैं. हां, उस के जूते का साइज 8 नंबर रहा है, उस के निशान हम ने उठा लिए हैं.’’ बताते हुए फोरैंसिक टीम के इंचार्ज ने उस आगंतुक युवक के चेहरे पर गहरी नजरें डालते हुए पूछा, ”मैं ने आप को पहचाना नहीं है, कौन हैं आप?’’
”मेरा नाम श्रीनाथ है, मैं प्राइवेट डिटेक्टिव हूं. सेठ दीनानाथजी ने मुझे फोन द्वारा अपनी पत्नी राधिका की हत्या होने की खबर दे कर इस केस को हल करने के काम पर लगाया है.’’ युवक ने अपना परिचय देते हुए बताया, ”मेरे साथ मेरा सहयोगी चंदन चार्ली भी आया है, वह बाहर घर के नौकरों से पूछताछ कर रहा है.’’
”हमारा काम लगभग पूरा हो गया है, अब आप अपनी जांच कर लीजिए.’’ इंचार्ज ने कहा.
श्रीनाथ ने गंभीर स्वर में पूछा, ”आप ने एक बात नोट नहीं की है. राधिका के सीने में जो डेढ़ इंच चौड़ा घाव है, यह घाव किसी चाकू का ही है, क्या हत्या में प्रयोग चाकू भी आप लोगों को नहीं मिला है यहां?’’
”नहीं. शायद हत्यारा वह चाकू अपने साथ ही ले गया है मिस्टर श्रीनाथ.’’
”हूं.’’ श्रीनाथ ने गरदन झटकते हुए कहा, ”हत्यारे ने बहुत ही फुलप्रूफ योजना बना कर इस कत्ल को अंजाम दिया है. मैं देखता हूं, उस ने गलती कहां पर की है. आप मुझे मेरे वाट्सऐप नंबर पर हत्यारे के जूते की छाप भेज दें. मेरा नंबर बाहर मेरे सहयोगी चार्ली से आप ले लें.’’
”ठीक है.’’ इंचार्ज ने कहा और फिर फोरैंसिक टीम फोटोग्राफर के साथ बैडरूम से निकल गई.
जासूस श्रीनाथ ने फिर से अपनी जांच शुरू कर दी. राधिका के चेहरे और हैरान सी नजर आ रही खुली आंखों से श्रीनाथ ने अनुमान लगाया कि हत्यारा जो भी था, उसे राधिका पहचानती थी.
राधिका के सीने में चाकू का गहरा घाव था. हत्यारे ने उस वक्त राधिका पर हमला किया था, जब वह नींद में थी. हत्यारे का वार राधिका के लिए जानलेवा था, वह न चीख पाई न बिस्तर से उठ सकी. चूंकि बैडरूम में वह अकेली थी, इसलिए उस को मदद नहीं मिली. खून अधिक बह जाने के कारण उस की मौत हो गई.
हत्यारा यह भी जानता था है कि बैडरूम में राधिका अकेली है, सेठ दीनानाथ शहर से बाहर थे.
श्रीनाथ ने उस चाकू की तलाश करनी शुरू की, जिस से राधिका पर हमला किया गया था. राधिका के सीने पर वार कर के हत्यारे ने चाकू बाहर खींच लिया था और उसे शायद अपने साथ ले गया था.
राधिका की लाश खून में नहाई हुई थी, लेकिन श्रीनाथ जानता था कि जब हमला कर के घाव से चाकू निकाला जाता है तो वह खून से सना होता है, उस से खून अवश्य टपकता है. श्रीनाथ ने बैड से दूर उन्हीं खून की बूंदों की तलाश शुरू की. उस ने मोटे शीशे वाला कौनवेक्स लेंस निकाला और फर्श पर झुक कर खून की बूंदों की तलाश करने लगा.
बैड से थोड़ी दूरी पर उसे खून की बूंदें नजर आ गईं. ऐसी बूंदें बैडरूम की दूसरी ओर खुलने वाले दरवाजे तक दिखाई दीं. यह दरवाजा अधखुला था. श्रीनाथ ने उसे हलका सा धक्का दे कर खोल लिया.
यह सेठ दीनानाथ के इकलौते बेटे रंजीत का बैडरूम था. रंजीत अपने बैड पर लिहाफ ओढ़े सोया हुआ था.
श्रीनाथ दबे पांव बैडरूम में दाखिल हुआ. उस ने गहरी नजर से बैड पर सो रहे रंजीत को देखा. रंजीत गहरी नींद में था, उस के तन पर ग्रे कलर का सफारी सूट था. लिहाफ से बाहर उस के पांव नजर आ रहे थे, जिस में अभी भी जूते पहने हुए थे.
श्रीनाथ को ताज्जुब नहीं हुआ. वह जानता था कि रंजीत शराब का आदी है. रात को वह बार से पी कर बंगले पर लौटता है तो नशे की हालत में होता है, उसी हालत में वह बिस्तर पर पसर जाता है. कल रात भी पी कर लौटा होगा, उसी हालत में वह बिस्तर पर गिर कर सो गया होगा. घर में राधिका मां का कत्ल हो गया है, इस से वह अभी तक अंजान है.
एकाएक श्रीनाथ की नजर बैड की चादर पर चली गई. बैड पर बिछी सफेद चादर एक कोने से खून से सनी हुई थी. हैरत में डूबा श्रीनाथ नीचे बैठ कर चादर का वह कोना देखने लगा. यह खून से सना हुआ था. देखने से लग रहा था, इस से खून सनी कोई चीज पोंछी गई है.
”क्या इस से वही चाकू पोंछा गया है, जिस से राधिका का कत्ल हुआ? बेशक.’’ श्रीनाथ ने खुद से सवाल किया और खुद ही उत्तर दे दिया. फिर वह पलंग के नीचे झांकने लगा. उस की आंखों में चमक उभर आई.
पलंग के नीचे एक चाकू पड़ा था. श्रीनाथ ने दस्ताना पहन कर चाकू उठा लिया. चाकू उलटपलट कर देखने के बाद उसे पक्का यकीन हो गया कि इसी से राधिका को कत्ल किया गया है.
सारी उलझनें सुलझ रही थीं. रात को रंजीत बंगले पर शराब के नशे में लौट कर आया. उस ने बगैर सबूत छोड़े चाकू राधिका के सीने में उतारा. अपने कमरे में लौट कर उस ने चाकू का खून चादर से पोंछा. चाकू पलंग के नीचे फेंक कर वह इत्मीनान से सो गया.
संदेह पूरा का पूरा रंजीत पर जा रहा था. श्रीनाथ सेठ दीनानाथजी से अच्छी तरह परिचित था. सेठ दीनानाथ अपने बेटे रंजीत के शराब पीने और मां राधिका से नफरत करने की बात से परेशान थे, उन्होंने इसी मामले में उस से (श्रीनाथ) औफिस में मुलाकात की थी.
सेठ दीनानाथ का कहना था कि उन्होंने गरीब और बेसहारा राधिका से शादी अपनी जिस्मानी जरूरत के लिए नहीं की थी. राधिका ने उस वक्त उन के पास आ कर काम मांगा था, जब उन की पूर्वपत्नी विमलेश कैंसर से जूझ रही थी. उन्होंने राधिका को विमलेश की देखभाल के लिए रख लिया था.
राधिका ने पूरी ईमानदारी से विमलेश की देखभाल की थी. भाग्य की विडंबना थी कि अच्छी दवादारू और सेवा के बावजूद विमलेश की मौत हो गई. इस के बाद राधिका फिर सड़क पर आ जाती, लेकिन सेठ दीनानाथ ने उसे पत्नी बना कर सहारा दे दिया था.
यही बात रंजीत को अच्छी नहीं लगी थी. वह राधिका से नफरत करने लगा था, उसे उस ने कभी मां का दरजा नहीं दिया था. नशे में उस ने एक बार दीनानाथ को स्पष्ट धमकी दे डाली थी कि वह उन की इस नई बीवी को बरदाश्त नहीं करेगा, उसे मार डालेगा.
सेठ दीनानाथ ने श्रीनाथ से इसी नाजुक मसले पर बात की थी कि उन्हें रंजीत को कैसे समझाना चाहिए. श्रीनाथ ने कहा था कि रंजीत का गुस्सा अपनी जगह पर जायज है, लेकिन वह इतना गिरा हुआ इंसान नहीं है कि नई मां को मार ही डालेगा.
श्रीनाथ ने इस के लिए कई दिनों तक रंजीत की रेकी की थी, वह किस सोहबत में रहता है, उस की आदतें कैसी हैं आदिआदि जान कर श्रीनाथ ने निर्णय सुनाया था कि रंजीत जो कह रहा है वह कोरी धमकी है, वह कुछ नहीं करेगा.
श्रीनाथ को अब लग रहा था कि वह गलत था. रंजीत ने उसे गलत ठहरा दिया है राधिका की हत्या कर के.
कुछ देर श्रीनाथ पलंग के पास बैठा रहा, फिर खड़ा हो गया. उस के चेहरे पर सर्द मौसम में भी पसीना छलकने लगा था. कुछ सोचने के बाद वह तेजी से रंजीत के पैरों की तरफ आया. रंजीत के पैर में जो जूते थे, श्रीनाथ ने उन को मोबाइल के कैमरे में ले लिया. फिर कमरे को घूरने लगा.
कमरे में दूसरी ओर एक खिड़की थी, जो बंगले के पिछवाड़े की ओर खुलती थी. श्रीनाथ ने पास आ कर देखा, इस वक्त खिड़की की सिटकनी गिरी हुई थी. श्रीनाथ ने इत्मीनान की सांस ली और वापस राधिका की लाश के पास लौट आया. अब वह दूसरे एंगल से इस हत्या के केस की जांच करने लगा. उस ने राधिका की लाश को फिर से पैनी नजरों से देखा.
राधिका सुहागन थी. सुहागन स्त्रियां गले में मंगलसूत्र जरूर पहनती हैं. राधिका के गले में मंगलसूत्र नहीं था. उस की नजर राधिका के हाथों पर गई. हाथ में सोने की चूडिय़ां थीं, लेकिन अंगुली में कोई अंगूठी नहीं थी. हां, उन के दाएं हाथ की तर्जनी अंगुली में सफेद रंग का निशान था, जो यह घोषित कर रहा था कि उन के हाथ में अंगूठी थी, जिसे एक दिन पहले ही उतार लिया गया है.
उन्होंने अंगूठी उतार कर रख दी है यह हो सकता था, लेकिन मंगलसूत्र भला वह क्यों उतारेंगी. श्रीनाथ के चेहरे पर कुटिल मुसकान थिरकने लगी. उस ने बाहर आ कर अपने सहायक चार्ली को कुछ हिदायतें दीं. सेठ दीनानाथ के लौट कर आने तक वहीं रुकने को कहा, फिर वह अपने औफिस के लिए निकल गया.
थाना अंधेरी (वेस्ट) के इंसपेक्टर ने सेठ दीनानाथजी के वापस आ जाने के बाद उन के बंगले पर पहुंच कर राधिका की लाश को दीनानाथ के सामने ही पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया, फिर उन के बेटे रंजीत से मिलने उस के कमरे में पहुंच गए.
वहां रंजीत के बैड की सफेद चादर पर चाकू से खून पोंछे जाने की बात को देख कर इंसपेक्टर देशमुख की बांछें खिल गईं. उन्होंने रंजीत को पुलिसिया तरीके से घेरने में कोई कोरकसर नहीं छोड़ी. उन का कहना था कि रात को रंजीत ने राधिका का कत्ल किया फिर सो गया. 2 घंटे में ही इंसपेक्टर देशमुख ने अपना निर्णय भी सुना दिया.
”राधिका का कत्ल उस के बेटे रंजीत ने रात को किया है, वह अपनी इस सौतेली मां से बुरी तरह नाराज था.’’ इंसपेक्टर ने रंजीत को संदेह के आधार पर हिरासत में भी ले लिया.
दूसरी पत्नी को असमय खोने का दुख और बेटे के गिरफ्तार होने से सेठ दीनानाथ पूरी तरह टूट गए. वह भारी मन से जासूस श्रीनाथ के औफिस बांद्रा पहुंच गए. उन्हें देख कर श्रीनाथ को कोई ताज्जुब नहीं हुआ. ऐसे हालात में कठोर दिल वाले इंसान की भी यही हालत हो सकती है.
उस ने सेठ दीनानाथ को आराम कुरसी पर बिठा कर कौफी मंगवा ली.
”श्रीनाथ, ऐसी विपदा की घड़ी में तुम मुझे कौफी मंगवा कर पिला रहे हो, क्या यह उचित है?’’ दीनानाथ आहत स्वर में बोले.
”सेठजी, वह फैसला इंसपेक्टर देशमुख का है, मैं ने अपनी ओर से हार नहीं मानी है.’’
”स्थिति और साक्ष्य रंजीत को ही मुजरिम घोषित कर रहे हैं श्रीनाथ.’’
”मेरी नजर में रंजीत निर्दोष है.’’ श्रीनाथ गंभीर स्वर में बोला, ”मैं अभी जांच कर रहा हूं, आप आराम से कौफी पीजिए. असली कातिल कौन है, वह कल सुबह तक मैं बता दूंगा.’’
श्रीनाथ ने अपनी बात खत्म की, क्योंकि उस के मोबाइल पर चंचल चार्ली की कौल आ रही थी. वह उठ कर अपने औफिस से बाहर आ गया. मोबाइल को कान से लगा कर उस ने पूछा, ”क्या मालूम हुआ चार्ली?’’
”आप का संदेह सही निकला. मैं ने जानकी से सच उगलवा लिया है, उस का पति नागेश रात 12 बजे पीछे की खिड़की के रास्ते जानकी की मदद से चोरी करने के इरादे से अंदर घुसा था, लेकिन उस ने राधिका का मंगलसूत्र ही नहीं, हाथ में पहनी हीरे की अंगूठी हासिल करने के लिए राधिका का कत्ल कर डाला.’’
”वह कहां रहता है यह मालूम हुआ तुम्हें?’’ श्रीनाथ ने पूछा.
”पीला हाउस के देह बाजार में कहीं रहता है. मैं ने जानकी से उस की फोटो हासिल कर ली है. मैं पीला हाउस पहुंच रहा हूं, आप वहीं आ जाइए.’’ दूसरी ओर से कहने के बाद संपर्क काट दिया गया.
श्रीनाथ ने अंदर आ कर देखा. सेठ दीनानाथ धीरेधीरे कौफी की चुस्कियां ले रहे थे.
”सेठजी आप बंगले पर लौट जाइए, मैं एक जरूरी काम निपटाने जा रहा हूं. आप से सुबह मुलाकात करूंगा.’’ श्रीनाथ ने कहा और सेठ दीनानाथ का जवाब सुने बगैर वह अपनी इंडिका कार की तरफ बढ़ गया. कुछ ही देर बाद उस की कार मुंबई के देह बाजार पीला हाउस की तरफ फर्राटे भर रही थी.
पीला हाउस में नागेश को तलाश करना श्रीनाथ के लिए ज्यादा मुश्किल काम नहीं था. उस ने अपने सहायक चार्ली की मदद से वहां के एक दलाल को 5 सौ का नोट दिखा कर नागेश की तसवीर उस के सामने रख दी.
”यह तो नागेश है सर… रातदिन यहीं पीला हाउस के कोठा नंबर 7 के अहाते में पड़ा रहता है. 7 नंबर कोठे पर एक नर्तकी है शहनाज, उसी के प्यार में डूबा हुआ है. आप को वहीं अहाते में मिल जाएगा.’’ दलाल ने फोटो देख कर नागेश के विषय में बता दिया.
श्रीनाथ अपने सहायक चार्ली के साथ 7 नंबर कोठे की तलाश में आगे बढ़ गया. 7 नंबर कोठा तलाशने में इन्हें कोई दिक्कत नहीं आई, लेकिन वर्धा अहाते में उन्हें नागेश नजर नहीं आया. इन्होंने आसपास खोजा, लेकिन नागेश उन्हें नहीं मिला.
”सर, मुझे तो लगता है नागेश ऊपर कोठे पर नर्तकी शहनाज के पास है. उस ने राधिका की लाश से जो जेवर चुराए हैं, उस से शहनाज कुछ दिन तो नागेश की तरफ झुकेगी ही.’’ चार्ली ने गंभीर स्वर में कहा.
”ठीक सोच रहे हो तुम.’’ श्रीनाथ मुसकराया, ”आओ, ऊपर देख लेते हैं.’’
दोनों सीढिय़ां चढ़ कर ऊपर कोठे पर पहुंच गए. ऊपर लंबाचौड़ा हौल था, महफिल सजी हुई थी. एक खूबसूरत युवती तबले और हारमोनियम के संगीत पर नृत्य कर रही थी. कोठे की संचालिका हीराबाई फिल्मी गाना गा रही थी, ”इन्हीं लोगों ने, इन्हीं लोगों ने… ले लीना दुपट्टा मोरा…’’
श्रीनाथ और चार्ली को इस महफिल में भी नागेश दिखाई नहीं दिया. वे दोनों वहीं महफिल में खामोशी से बैठ गए. श्रीनाथ नर्तकी को पैनी नजरों से देख रहा था. उस के गले में सोने का हार और दाएं हाथ की अंगुली में हीरे की बेशकीमती अंगूठी चमक रही थी.
थोड़ी देर में गाना खत्म हो गया. तबले की थाप और हारमोनियम का मधुर संगीत थम गया तो नर्तकी हांफती हुई फर्श पर बिछी कालीन पर बैठ गई. हीराबाई ने ऊंची आवाज में कहा, ”आज की महफिल समाप्त हुई, आप लोग जा सकते हैं.’’
सभी जाने लगे. जब हौल के लोग चले गए तो हीराबाई ने कालीन पर बैठे श्रीनाथ और चार्ली को घूरा, ”आप ने सुना नहीं क्या, महफिल खत्म हो गई है. जाइए.’’
”हम महफिल खत्म होने का ही इंतजार कर रहे थे.’’ श्रीनाथ उठते हुए कड़क लहजे में बोला, ”हम क्राइम ब्रांच से हैं, शहनाज को गिरफ्तार करने आए हैं.’’
हीराबाई और नर्तकी शहनाज के चेहरों पर घबराहट उभर आई. हीराबाई ने खुद को संभालते हुए पूछा, ”हम ने क्या किया है?’’
”नागेश को जानती हो न तुम, उस ने कल रात सेठ दीनानाथ की पत्नी का कत्ल कर के ये आभूषण चुराए हैं, जो शहनाज इस वक्त पहने हुए है.’’
”वह कमीना तो कह रहा था, उस ने जुए में रात 5 लाख रुपए जीते हैं, उसी से मेरे लिए यह जेवर खरीद कर लाया है.’’ इस बार शहनाज कांपती आवाज में बोली.
”बेवकूफ लड़की, जो जेवर तुम पहने हो वह 30-40 लाख के हैं.’’ श्रीनाथ कंधे झटक कर बोला, ”तुम हमारे साथ चलो, मैं तुम्हें गिरफ्तार कर रहा हूं, लेकिन मैं तुम्हें इज्जत के साथ बाहर निकालूंगा. चार्ली, तुम नागेश का इंतजार करो, वह यहां जरूर आएगा.’’
”ठीक है सर!’’ चार्ली ने सिर हिलाया.
श्रीनाथ शहनाज को कस्टडी में ले कर कोठे से उतर गया. अपनी कार से वह शहनाज को अपने औफिस में ले आया. उस ने सेठ दीनानाथ और इंसपेक्टर देशमुख को भी अपने औफिस में बुलवा लिया. इसी दौरान चार्ली नागेश को अपने रिवौल्वर से कवर कर के वहां पहुंच गया.
नागेश का चेहरा भय से उतरा हुआ था. सेठ दीनानाथ और इंसपेक्टर देशमुख भी वहां आ गए थे.
”सेठजी, यह है आप की पत्नी का कातिल, नाम है नागेश. कल रात जानकी ने इसे बंगले में घुसने में मदद की थी. जानकी से इस ने 2-3 लाख चुराने की बात की थी, लेकिन बंगले में घुस कर इस ने मंगलसूत्र वाला सोने का हार और हीरे की अंगूठी हासिल करने के लिए राधिका की हत्या कर दी. यह आभूषण इस ने इस नर्तकी शहनाज को ले जा कर पहना दिए थे. नर्तकी को भी मैं पकड़ लाया हूं.’’
”लेकिन जानकी तो मेरी वफादार नौकरानी है, उस ने इस की मदद क्यों की?’’ सेठ दीनानाथ ने हैरानी से पूछा.
”जानकी, कभी कोठे की नर्तकी हुआ करती थी सेठजी, यह उसे उस कोठे से यह कह कर भगा लाया था कि उसे पत्नी का दरजा देगा, लेकिन घर ला कर इस ने पैसों की खातिर उसे दूसरों के आगे परोसना चाहा. जानकी ने यह स्वीकार नहीं किया. उस ने कहा कि मेहनतमजदूरी कर के वह इसे रुपए देती रहेगी.
”जानकी आप के घर का काम संभालने लगी. रोटी कपड़ा आप से मिल जाता था, जो 15 हजार रुपए आप उसे देते थे, वह इसे पहुंचाने लगी. आप का बंगला और ठाठबाट देख कर नागेश ने योजना बना कर जानकी को राजी कर लिया कि वह इसे बंगले से 3-4 लाख चुराने देगी तो वह हमेशा के लिए उस की जिंदगी से दूर चला जाएगा. जानकी ने पीछा छुड़ाने के लिए इस की कल रात मदद कर दी. यह राधिका का कत्ल कर के निकल गया.’’
श्रीनाथ ने कुछ क्षण रुक कर सांसें दुरुस्त की, फिर कहने लगा, ”इंसपेक्टर देशमुख, इस ने पूरी योजना बना कर बंगले में प्रवेश किया था. बाकायदा हाथ में दस्ताने पहने, कत्ल कर के चाकू सेठजी के बेटे रंजीत की चादर से पोंछ कर उस के पलंग के नीचे फेंक दिया, ताकि पुलिस रंजीत को ही कातिल समझे.’’
”इस के झांसे में आप फंस गए और आप ने रंजीत को गिरफ्तार कर लिया.’’
”लेकिन मिस्टर श्रीनाथ, सब कुछ देख कर आप को क्यों लगा कि रंजीत हत्यारा नहीं है?’’ इंसपेक्टर देशमुख ने पूछा.
”मैं ने फोरैंसिक टीम द्वारा उठाए गए जूते के नमूने को देखा था, कातिल का जूता 8 नंबर का था, जबकि रंजीत शराब के नशे में बैड पर जूता पहने सो रहा था, उस का जूता 6 नंबर का था. उस के कमरे की खिड़की अंदर से खुली छोड़ी गई थी. इस से मुझे जानकी पर संदेह हुआ था. चार्ली ने उसे धमका कर पूछताछ की, तब उस ने सारा राज उजागर कर दिया.’’
”अब आप असली कातिल को गिरफ्तार कर लें और रंजीत को रिहा कर दें. हां, जानकी और शहनाज भी इस मामले में शामिल हैं, इन्हें भी हिरासत में ले लीजिए.’’
इंसपेक्टर देशमुख ने नागेश को हथकड़ी पहना दी. जानकी को बंगले से हिरासत में ले लिया गया. दूसरे दिन सेठ दीनानाथ को पोस्टमार्टम हाऊस से राधिका का शव मिल गया. सेठ दीनानाथ ने पूरे विधिविधान से उस का अंतिम संस्कार कर दिया. इस के बाद शहनाज से बरामद किए जेवर पुलिस ने कोर्ट के आदेश के बाद सेठ दीनानाथ को सुपुर्द कर दिए. Crime Fiction






