True Crime Story. यह निर्मम हत्याकांड जहां बेटी और बाप के पवित्र रिश्तों को कलंकित करता है, वहीं दूसरी ओर प्रेमी और प्रेमिका के एकदूसरे से नफरत करने के दुष्परिणाम को भी उजागर करता है. यह एक ऐसी दिल को दहला देने वाली सच्ची कहानी है, जहां कदमों में झुकने वाले हाथ ही कातिल बन गए.

आर्या और जयंत की पहली मुलाकात एक साइबर कैफे में हुई थी. रोज की तरह आर्या उस दिन भी शाम को 6 बजे साइबर कैफे में पहुंची थी. रोज की तरह वह अपने वाले कंप्यूटर सिस्टम की ओर उस दिन भी बढ़ी तो उस ने देखा कि उस सीट पर एक युवक बैठ कर काम कर रहा था.

आर्या ने एक उचटती निगाह उस युवक पर डाली. उसे थोड़ा गुस्सा भी आया, लेकिन अपने मनोभावों पर काबू करते हुए बगल वाले कंप्यूटर पर बैठ कर वह अपना काम करने लगी. तभी उसे अपने कानों में ‘एक्सक्यूज मी’ शब्द सुनाई पड़ा.

आर्या ने अपना सिर उठा कर देखा तो बगल के कंप्यूटर पर बैठा युवक उस की सीट के सामने खड़ा था. आर्या ने उस से कहा, ”बताइए, क्या बात है?’’

”देखिए, मैं अभी नयानया कंप्यूटर सीख रहा हूं. आज मेरा पहला दिन है. मुझे कंप्यूटर के बारे में कुछ आता नहीं है. क्या आप मेरी मदद कर सकती हैं?’’ उस युवक ने याचना भरे स्वर में कहा.

आर्या का तो एक बार मन किया कि उस युवक को दुत्कार दे, क्योंकि उस ने आज उस की सीट पर ही कब्जा कर लिया था. लेकिन जब उस ने अपनी पूरी गरदन घुमा कर उस अजनबी युवक को देखा तो एकबारगी उस का दिल धड़क उठा.

उस की आंखें जब रूबरू हो कर उस अपरिचित युवक से मिलीं तो आर्या को उस के चेहरे पर एक सम्मोहन भरा आकर्षण दिखा. उसे लगा कि उसे वर्षों से जैसे प्रेमी की तलाश थी, वह आज एक राजकुमार की तरह उस के सामने आ खड़ा हुआ है.

जब आर्या ने उस की आंखों में झांका, फिर आंखों से आंखें मिलीं तो उस अजनबी युवक की आंखों में एक जादू सा सम्मोहन दिखा.

आर्या तो उसे देख कर कुछ पलों के लिए अपनी पलकें झपकाना ही भूल गई थी. आर्या को लगा कि मानो उस की इस युवक से पहले से कोई पहचान हो.

”जी, मैं ने आप से कंप्यूटर के बारे में जानकारी चाही थी, अगर आप को कोई आपत्ति न हो…’’ इस युवक ने सकपकाते हुए जब यह बात पूछी.

आर्या जैसे होश में आई, ”जी ठीक है, मैं अभी बताती हूं.’’ आर्या ने झेंपते हुए कहा.

कुछ ही देर में आर्या ने उस युवक को कंप्यूटर के बारे में आवश्यक बातें बता दीं. वेब ब्राउजिंग का तरीका भी ठीक से समझा दिया.

”जी, आप ने तो कुछ ही देर में मेरी सारी समस्याओं का समाधान कर डाला, आप का यह अहसान मैं हमेशा याद रखूंगा.’’ उस युवक ने आर्या को धन्यवाद देते हुए कहा.

आर्या जयंत बल्लावार जिला चंद्रपुर, महाराष्ट्र की रहने वाली थी. उस के परिवार में मम्मी शारदा व पापा जयंत बल्लावार के अतिरिक्त और कोई नहीं था. आर्या अपने घर में इकलौती थी, जबकि उस के पापा जयंत बल्लावार महाराष्ट्र पुलिस में हैडकांस्टेबल थे और वर्तमान में चंद्रपुर जिला कलेक्टर के प्रशासनिक भवन में सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात थे.

उधर दूसरी तरफ कंप्यूटर सीखने आने वाले युवक का नाम आशीष महेश शेडमाके था, जो भद्रावती का रहने वाला था. उस के परिवार में उस के पापा महेश शेडमाके के अतिरिक्त और कोई नहीं था. आशीष के पापा महेश शेडमाके महाराष्ट्र पुलिस में कांस्टेबल थे. घर में इकलौता बेटा था आशीष.

कुछ साल पहले उस की मम्मी एक बीमारी में चल बसी थीं. महेश अपनी ड्यूटी पर अधिक रहने के कारण आशीष की ओर ध्यान नहीं दे पाते थे, जिस के कारण वह जिद्दी, गुस्सेबाज और उच्छृंखल बन गया था. यानी कि आशीष किसी नियम, अनुशासन या मर्यादा का पालन बिलकुल नहीं करता था. वह एकदम से मनमौजी सा बन गया था.

उस के पापा महेश उसे बारबार समझाते रहते कि अब तुम बड़े हो गए हो, कालेज में पढ़ाई करने लगे हो, कम से कम अब अपनी आदतों में सुधार करने का प्रयास तो करो. मैं जब तक हूं, तब तक तो ठीक है, मगर जब मैं नहीं रहूंगा तो तुम्हारा एक पल भी सांस लेना कठिन हो जाएगा, इसलिए समय पर संभल जाओ. लेकिन इतनी नसीहत देने पर भी आशीष मनमौजी हो कर जिंदगी जीने का आदी हो चुका था.

किया प्रेम का इजहार

इस के बाद आशीष रोज साइबर कैफे में आने लगा था और कंप्यूटर पर बैठ कर अपना काम करने लग जाता था. आशीष अपने बगल में बैठी उस युवती को भी निहारता रहता था, जिस ने एक नजर में ही उसे अपना दीवाना बना डाला था.

उधर आर्या की हालत भी कुछ ऐसी ही थी. वह न चाहते हुए भी कभीकभी आशीष को एकटक देखने लग जाती थी. ऐसे ही कुछ दिन गुजर गए, एकदूसरे को निहारने, होंठों में मुसकराने का सिलसिला ऐसे ही चलता रहा. पहल करने की हिम्मत किसी ओर से नहीं हो सकी.

दूसरी तरफ आशीष को तो अब रातों की नींद भी ठीक से नहीं आ रही थी, इसलिए एक दिन हिम्मत कर के उस ने आर्या से पूछ ही लिया, ”देखिए, मैं कई दिनों से आप से अपने दिल की बात कहना चाह रहा था. यदि आप बुरा न मानें तो क्या मैं कह सकता हूं?’’

”अजनबी जी, मैं भी कुछ ऐसा ही सोच रही थी कि आप बड़े गुमसुम से क्यों रहते हैं.’’ आर्या ने कनखियों से उसे देखते हुए कहा.

”जी, यदि आप कुछ कहना चाहती हैं तो बेशक पहले कह सकती हैं. मैं अपनी बात बाद में कह दूंगा.’’ आशीष ने जल्दी से कहा.

”जी, अब बात आप ने शुरू की है तो बात तो पहले आप को ही करनी चाहिए. आप निस्संकोच कह सकते हैं. वैसे आप कहीं मेरी तारीफ के कसीदे तो नहीं करना चाहते?’’ आर्या ने मुसकराते हुए कहा.

”जी, बात तो कुछ ऐसी ही है. आप बहुत खूबसूरत होने के साथसाथ काफी समझदार भी लगती हैं. वैसे क्या मैं आप का नाम जानने की जुर्रत कर सकता हूं? मेरा नाम आशीष महेश शेडमाके है. मैं अभी ग्रैजुएशन कर रहा हूं. मेरे पापा महाराष्ट्र पुलिस में सर्विस करते हैं. मैं घर में अकेला हूं.’’ आशीष ने कहा.

”आशीषजी, यह कैसी संयोग की बात है कि मैं भी घर में अकेली हूं और मेरे पापा भी महाराष्ट्र पुलिस में हैं. वैसे मेरा नाम आर्या जयंत बल्लावार है.’’

”क्या आप मुझ से दोस्ती करना पसंद करेंगी?’’ आशीष ने धड़कते दिल से कह डाला.

”आशीषजी, आप से तो अपनी दोस्ती तभी से हो गई थी, जिस दिन आप से यहीं पर पहली मुलाकात हुई थी.’’ आर्या ने उस की आंखों में देखते हुए कहा.

यह सुन कर तो आशीष खुशी से उछल ही पड़ा था. वह आर्या के पास आया और उस का हाथ अपने हाथों में ले कर कहने लगा, ”आर्या, जिस दिन आप से यहीं पर पहली मुलाकात हुई थी, उसी दिन से मेरी आंखों में बस गई थीं. आर्या, दोस्ती बहुतबहुत मुबारक!’’

उस के बाद वे दोनों खूब बातें करते रहे. उस रात दोनों को ही गहरी नींद नहीं आई थी. दोनों एकदूसरे के सपने पूरी रात देखते रहे थे. धीरेधीरे वे एकदूसरे के आकर्षण में बंध गए थे.

एक हफ्ते के बाद आशीष खूब अच्छे नए कपड़े पहन कर और बनठन कर साइबर कैफे पहुंचा तो आर्या ने उसे छेड़ते हुए कहा, ”आज आप के चारों तरफ खुशबू ही खुशबू बिखरी हुई है. क्या बात है, आज तो आप बहुत खुश लग रहे हो? कोई लौटरी हाथ लग गई है क्या आप की?’’

”यही समझ लो आर्या, लौटरी हाथ लग भी सकती है. आज मुझे आप से एक खास बात कहनी है.’’ आशीष ने विनयपूर्वक कहा.

वैसे आर्या यह तो समझ चुकी थी कि आज आशीष उसे प्रपोज करने वाला है, क्योंकि प्रेम की यह आग एकतरफा नहीं, बल्कि दोनों ओर से बराबर लगी हुई थी. फिर भी मजे लेने के भाव से आर्या ने अपना चेहरा गंभीर बनाते हुए कहा, ”बोलिए आशीषजी, क्या खास बात कहना चाहते हैं आप?’’

”देखो आर्या, मेरे नाम के आगे अब तुम जी लगाना तो छोड़ ही दो. अब तुम मुझे केवल आशीष कहा करो.’’ आशीष ने झुंझलाते हुए कहा.

”अच्छा आशीष, बस केवल यही बात थी या कोई खास बात अभी भी बाकी रह गई है?’’ आर्या ने उस के चेहरे की ओर देखते हुए शरारत से कहा.

”देखो आर्या, सच बात तो यह है कि मुझे तुम से प्यार हो गया है. आर्या, तुम सारी दुनिया में वह पहली लड़की हो, जिस के लिए मेरे दिल में एक अजीब सी चाहत ने जन्म लिया है. मुझे उस दिन से रातों को नींद नहीं आ रही है, जिस दिन से मैं ने तुम्हें देखा था. मैं अब तुम्हारे बिना एक पल भी नहीं रह सकता, तुम हर पल मेरे दिलोदिमाग पर छाई रहती हो. सचमुच मुझे तुम से बेइंतहा प्यार हो गया है. अब तुम बताओ कि क्या तुम मेरे प्यार को स्वीकार करोगी?’’ आशीष ने अपने दिल की बात कहते हुए कहा.

यह बात सुनते ही आर्या दौड़ कर आशीष की बाहों में समा गई. फिर वह बोली, ”आशीष, तुम क्या सोच रहे थे कि मैं तुम से प्यार ही नहीं करती, बल्कि मैं तो तुम से अपने से भी अधिक प्यार करती हूं.’’

उस के बाद तो दोनों अब साथसाथ इधरउधर घूमनेफिरने भी जाने लगे थे. तभी एक दिन किसी व्यक्ति के माध्यम से आर्या के पापा हैडकांस्टेबल जयंत बल्लावार को अपनी बेटी के किसी युवक के साथ घूमनेफिरने की जानकारी मिली तो उन्होंने घर पर आ कर आर्या से सवालजवाब शुरू कर दिए.

”आर्या, मैं तुम्हारे बारे में आजकल तरहतरह की अनापशनाप बातें सुन रहा हूं. ऐसा सुनने में आया है कि किसी लड़के के साथ तुम सैरसपाटे कर रही हो. लगता है तुम मेरी नाक कटा कर ही मानोगी? कौन है वह लड़का? कहां का रहने वाला है? किस जाति का है?’’ जयंत बल्लावार ने आर्या को फटकारते हुए पूछा.

”पापाजी, मैं यह बात आप क ो बताने ही वाली थी. मैं उस लड़के से बहुत प्यार करती हूं. वह मुझ से शादी भी करना चाहता है. वैसे उस का नाम आशीष महेश शेडमाके है.’’ आर्या ने अपनी बात रखते हुए कहा.

”अरे बेवकूफ, शेडमाके जाति के बारे में कुछ पता भी है तुम्हें? शेडमाके गोंड समुदाय से आते हैं. जंगली आदिवासी लोग थे पहले ये सब. अब तू इस लड़के का खयाल अपने दिलदिमाग से निकाल दे और अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे बस.’’ जयंत ने कहा.

”पापाजी, ये लोग पहले आदिवासी थे. अब तो ये कई पीढिय़ों से भद्रावती में आ कर बस गए हैं. इन के परिवार वाले 3-4 पीढिय़ों से अच्छीखासी नौकरियां करने लगे हैं. आशीष के पापा महेश शेडमाके खुद महाराष्ट्र पुलिस में नौकरी कर रहे हैं. उन का इकलौता बेटा है आशीष. देखिए पापाजी, आप एक बार मेरी बात मान कर तो देखिए, आप एक बार जब उसे देखेंगे तो आप भी जरूर उसे पसंद करने लगेंगे,’’ आर्या ने अपने पापा से विनती करते हुए कहा.

जयंत थे रिश्ते के खिलाफ

लेकिन दूसरी ओर जयंत इस रिश्ते के एकदम खिलाफ थे, इसलिए उन्होंने आर्या को चेतावनी देते हुए अपना अंतिम निर्णय सुनाते हुए कहा, ”देख आर्या, तू मेरा अपना खून है इसलिए तेरी पहली गलती को माफ कर रहा हूं. लेकिन एक बात का ध्यान रखना भूल से भी उस आवारा लड़के को अपने साथ ले कर मेरे पास मत आना. मैं उस समय यह भी भूल जाऊंगा कि तू मेरी बेटी है. मैं तुम दोनों को काट कर फेंक दूंगा. तेरे लिए यही अच्छा रहेगा कि तू इस लड़के को हमेशाहमेशा के लिए भूल जा, अपने जीते जी मैं तेरी शादी उस लड़के से हरगिज नहीं होने दूंगा.’’

आर्या रोते हुए अपने कमरे में चली गई और रात भर रोती रही. 2-3 दिन तक वह न तो अपने कालेज गई और न ही साइबर कैफे. उस ने अपना मोबाइल साइलेंट छोड़ दिया था. वह किसी से बात नहीं कर रही थी.

उधर आशीष भी रोजरोज साइबर कैफे में जाता, परंतु आर्या कई दिनों से वहां पर आ ही नहीं रही थी. आशीष उसे फोन करता पर वह उस का भी फोन नहीं उठा रही थी.

उस ने फिर आर्या को मैसेज किया कि क्या बात है, कहां हो तुम? उधर से आर्या ने मैसेज में लिखा कि मुझे भूल जाओ. तब आशीष ने 22 अप्रैल, 2023 को आर्या को साइबर कैफे में मिलने के लिए बुलाया. आर्या भी उस से मिलने रोज की तरह साइबर कैफे में पहुंच गई.

22 अप्रैल को जैसे ही आर्या साइबर कैफे में पहुंची तो आशीष ने एक गुलदस्ता भेंट करते हुए कहा, ”आर्या, तुम्हें पता है कि आज पृथ्वी दिवस है. पृथ्वी दिवस पूरी दुनिया में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने और पृथ्वी को बचाने का संकल्प लेने के लिए मनाया जाता है. मेरी ओर से तुम्हें पृथ्वी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!’’

”सेम टू यू,’’ कहते हुए उदासी के साथ आर्या ने गुलदस्ता ले लिया.

उस के बाद आर्या अपने कंप्यूटर के सामने उदासी से बैठ गई और गुलदस्ता उस ने मेज के ऊपर रख दिया.

”आर्या, तुम इतनी उदास क्यों हो? तुम ने मैसेज में क्यों लिखा कि मुझे भूल जाओ. कुछ बताओ तो सही! लगता है तुम ने अपना मन बना लिया है.’’ आशीष ने आर्या के पास रखी कुरसी पर बैठते हुए कहा.

”आशीष, मैं ने तो सदा तुम्हें अपना माना है, लेकिन मेरे पापाजी को हमारे अफेयर के बारे में पता चल गया है.’’ आर्या की आंखों में आंसू आ गए थे.

”यह तुम क्या कह रही हो आर्या?’’ आशीष ने उस का हाथ अपने हाथ में ले कर कहा.

”पापाजी को जब यह पता चली तो उन्होंने साफ कह दिया है कि वह अपने जीते जी हमारी शादी नहीं होने देंगे. तुम्हारी जाति हम लोगों की जाति से छोटी है.’’

इस के बाद आर्या ने अपने पापा के साथ हुई सब बातें विस्तार से आशीष को बता दीं.

यह सुन कर एकबारगी तो आशीष भी हतप्रभ हो कर रह गया था. उस की स्थिति काफी दयनीय हो गई थी. उस ने फिर धीरे से कहा, ”आर्या, मैं तुम्हारे बिना एक पल भी जीना नहीं चाहता हूं. मैं यही चाहता हूं कि जैसे तुम्हारे पापा चाहते हैं, अब तुम्हें ऐसा ही करना चाहिए.’’ यह कहते हुए आशीष रो पड़ा था.

आशीष को इस स्थिति में देख कर आर्या दिल ही दिल में रोने लगी थी, लेकिन उस ने अपनी भावनाओं को दबाते हुए आशीष से पूछा, ”अच्छा आशीष, अब एक बात तो बताओ, इस स्थिति में अब तुम आगे क्या करोगे? मेरा विचार यह है कि तुम अपनी जाति की ही किसी लड़की से ब्याह कर लेना और मुझे भूल कर हमेशा खुश रहना.’’

”आर्या, तुम भी यह कैसी बात कर रही हो. मैं तुम्हें छोड़ कर कभी किसी दूसरी लड़की के बारे में तो सपने में भी सोच नहीं सकता हूं, यदि मुझे तुम नहीं मिली तो मैं हंसतेहंसते मौत को गले लगा लूंगा. यही मेरा अब अंतिम फैसला है.’’ आशीष ने आर्या को अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए कहा.

पापा को मारने की योजना

यह बात सुन कर तो जैसे आर्या का कलेजा ही मुंह पर आ गया था. वह आगे बढ़ी और उस ने अपनी हथेली आशीष के मुंह पर रखते हुए कहा, ”ऐसा मत करना आशीष. मरेंगे अब हमारे दुश्मन, जो भी हमारे प्यार के आड़े आएंगे. मेरे पापा को मार डालो आशीष.’’

”यह तुम क्या कह रही हो आर्या?’’ आशीष ने चौंकते हुए कहा.

”इस के अलावा और दूसरा चारा ही नहीं बचा है अब आशीष, मैं तुम्हें खोना नहीं चाहती.’’ आर्या ने कहा.

”देखो आर्या, मेरे पास एक बहुत अच्छा प्लान है, यदि हमारा ये प्लान काम कर गया तो हम कभी भी नहीं फंस सकते,’’ आशीष ने कहा.

”जल्दी बताओ न अपना प्लान, मुझे अब तुम से एक पल की दूरी भी बरदाश्त नहीं हो रही है.’’ आर्या ने कहा.

”देखो आर्या, मैं कहीं से जहर का बंदोबस्त करूंगा. तुम्हें यह जहर खाने में मिला कर उन्हें दे देना है. तुम ऐसा करना, यह जहर सुबह के समय देना. औफिस पहुंचने पर जहर का असर सामने आएगा और हम साफसाफ बच जाएंगे.’’ आशीष ने अपना प्लान समझाया.

यह सुन कर आर्या खुश हो कर अपने घर चली गई. 24 अप्रैल, 2023 की शाम आशीष ने एक कांच की बोतल में घातक जहर आर्या को दे दिया. आर्या ने उसे अपने घर में छिपा दिया. 25 अप्रैल, 2023 की सुबह आर्या ने अच्छा नाश्ता बनाया और मिल्कशेक में जहर मिला क र अपने पिता को पिला दिया.

नाश्ता करने के बाद हैडकांस्टेबल जयंत बल्लावार अपनी ड्यूटी पर भी सकुशल पहुंच गए, लेकिन अचानक से उन की तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गए. आननफानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डौक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

अनुकंपा पर नौकरी

आर्या वहां पर पहुंची और भ्रामक जानकारी दी कि उन के पिता को कई सालों से ऐसे ही चक्कर आते रहते थे, जिस के कारण पुलिस ने इसे सामान्य मौत समझ कर केस को बंद कर दिया.

पापा की मृत्यु के बाद आशीष और आर्या का प्रेम संबंध निर्बाध रूप से आगे बढऩे लगा था. आशीष ने अब अपने पापा को भी आर्या के बारे में सब कुछ सचसच बता दिया था. उन्हें भी यह विवाह मंजूर था. परंतु होनी को तो कुछ और ही मंजूर था.

इस बीच एक दिन आशीष के पापा महेश शेडमाके को दिल का दौरा पड़ा और उन की तत्काल मृत्यु हो गई. दुख की इस घड़ी में आर्या आशीष के साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़ी रही.

आशीष के पापा की आकस्मिक मृत्यु होने के कारण साधारण मृत्यु मान लिया गया और अनुकंपा के आधार पर आशीष को महाराष्ट्र पुलिस में भरती कर लिया गया, जिस के बाद आशीष की पुलिस ट्रेनिंग शुरू हो गई.

पुलिस की ट्रेनिंग काफी कठिन होती है. ट्रेनिंग के दौरान आशीष कभीकभी अपने उस्तादों की बात न मान कर अपनी मनमरजी करने लगता था, जिस के कारण उस के खिलाफ काफी प्रतिकूल रिपोर्ट सामने आनी शुरू हो गई थी.

ट्रेनिंग सेंटर के अधिकारियों ने आशीष को समझाया कि सरकारी नौकरी इतनी आसानी से नहीं मिल पाती है. आजकल तो पढ़ेलिखे लोग भी नौकरी के लिए दरदर की ठोकरें खा रहे हैं. अपना ध्यान काम में लगाओ, भूल कर भी अनुशासनहीनता या कोई गलत हरकत मत करना, पुलिस की नौकरी में जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है.

उन्होंने आशीष को आगे समझाया कि अपने सीनियर अधिकारियों के आदेशों का पालन करो. इस बार तो हम ने तुम्हें एक पूर्व पुलिस वाले का बेटा समझ कर छोड़ दिया है, यदि तुम ने भविष्य में ऐसी कोई गैरजिम्मेदाराना हरकत की तो तुम्हें इस का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.

लेकिन आशीष एक चिकने घड़े के समान था, उसे ट्रेनिंग के दौरान आर्या की याद भी बुरी तरह से सताने लगी थी. उस का स्वभाव बहुत आक्रामक बना हुआ था, जिस में वह सुधार करना नहीं चाहता था. एक दिन एक साथी पुलिस ट्रेनी से आशीष का बुरी तरह से झगड़ा हो गया, बात मारपीट तक भी पहुंच गई.

पुलिस अधिकारी जब बीचबचाव के लिए वहां पर पहुंचे तो आशीष ने उन पर भी हाथ उठा दिया. इस गंभीर अपराध के कारण उसे पुलिस प्रशिक्षण के दौरान अनुशासनहीनता और अनैतिक आचरण के कारण बरखास्त कर दिया गया.

इस के बाद आशीष वापस चंद्रपुर आ गया. यहां पर उस ने ये सारी बातें आर्या को बताईं और विवाह करने को कहा. आर्या ने उस से कहा कि आशीष आजकल नौकरी कितनी मुश्किल से मिलती है, तुम ने तो हाथ आई नौकरी पर ही ठोकर मार दी. कुछ दिन शांत रह लेते तो तुम्हारा क्या बिगड़ जाता.

इस पर आशीष उसे बोला कोई बात नहीं, अब मैं भागदौड़ कर के अनुकंपा के आधार पर तुम्हारी नौकरी लगाने की कोशिश करूंगा.

उस के बाद आशीष विवाह की तैयारियों में जुट गया और आर्या की नौकरी के लिए भी एक पत्र व्यवहार करने लगा. आशीष के पापा की लाखों की एफडी व बैंक बैलेंस था, इसलिए वह काफी शानोशौकत से रहने लगा था. वह पक्का शराबी भी हो गया था. उस ने आर्या के साथ विवाह भी कर लिया था.

आशीष की मेहनत रंग लाई और फरवरी 2025 में आर्या का अनुकंपा के आधार पर पुलिस में महिला कांस्टेबल के तौर पर चयन हो गया और वह 9 महीने की पुलिस ट्रेनिंग करने नागपुर चली गई.

आर्या जुझारू और मेहनती प्रवृत्ति की थी. बचपन से ही वह स्वयं को हर परिस्थिति के अनुरूप ढाल लेने में पारंगत थी, इसलिए उस की ट्रेनिंग सहज और सरल रूप से चल रही थी, लेकिन आशीष यहां पर भी अपनी मनमानी करने पर उतारू था. वह दिन में कई बार आर्या को फोन करता, जबकि उसे यह अच्छी तरह से पता था कि ट्रेनिंग पीरियड में ट्रेनी पुलिसकर्मी को एक निश्चित अवधि में ही बातचीत करने का मौका मिलता है.

आर्या उसे बारबार समझाने की कोशिश भी करती थी, लेकिन वह उलटा आर्या पर ही बरस पड़ता था. उस के बाद कई बार आशीष ट्रेनिंग सेंटर में आर्या से मिलने भी आने लगा था, जिस के कारण उसे रोज तरहतरह की बातें सुनने को मिलती रहती थीं.

एक दिन आर्या के ट्रेनिंग बैच की सीनियर अपर्णा (काल्पनिक नाम) ने आर्या से जो बात कही तो आर्या कुछ भी कह पाने में असमर्थ रही थी.

”आर्या, क्या तू शादीशुदा है? क्या ये आशीष नाम का युवक तेरा पति है?’’ ”अपर्णाजी, यह बात सच है. मैं उस से विवाह करने के बाद यहां पर ट्रेनिंग करने आई हूं.’’ आर्या ने पूछा.

”देखो आर्या, अगर यह बात सच है तो कोई बात नहीं, पर यह आदमी कुछ सनकी सा और गुस्सेबाज लगता है. कल मुझे रिसैप्शन में फोन पर बुलाया गया कि एक युवक आप की ट्रेनी महिला कांस्टेबल से मिलना चाहता है. आप यहां पर आ कर उस युवक से बात कीजिए, यह बहुत उत्तेजक अवस्था में लग रहा है. आप यहां पर आ कर इसे समझाइए वरना आप की ट्रेनी महिला कांस्टेबल पर मुसीबत आ सकती है.’’

”उस के बाद क्या हुआ मैडम? क्या आप वहां पर गई थीं?’’ आर्या ने पूछा.

”हां आर्या, जब मैं वहां पर पहुंची तो आशीष गुस्से में अनापशनाप बकवास करने में लगा था. मुझे तो यह भी लगा कि उस ने शराब पी हुई थी. मैं ने जब उसे समझाने की कोशिश की तो वह मुझे ही उल्टापुल्टा कहने लगा था. मैं इसीलिए चुप रही, क्योंकि मैं जानती थी कि वह तुम्हारा पति है. ऐसे इंसान के साथ तुम अपनी जिंदगी कैसे बिताओगी?’’ आर्या ने कहा.

दूर होने का फैसला

उस दिन के बाद से ही आर्या ने अपना मन से अंतिम फैसला कर लिया था कि उसे अब आगे की जिंदगी आशीष के साथ नहीं बितानी है. आर्या अपनी ओर से उसे समझाने की कोशिश करती थी तो वह बुरी तरह उस पर भड़क जाता था.

इसलिए अब आर्या ने मन मना लिया था कि वह आशीष के साथ कभी भी नहीं रहेगी, उसे नेगलेक्ट करती रहेगी और जल्दी ही उस से तलाक ले कर अपनी आगे की जिंदगी शांति से गुजारेगी.

इसलिए अब उस ने आशीष से मिलना तो दूर उस के मैसेज और उस की कौल्स उठाना बंद कर दिया था. आर्या ने तो अब आशीष का मोबाइल नंबर तक ब्लौक कर दिया था.

आशीष को पता था कि आर्या की पुलिस ट्रेनिंग कब पूरी हो रही है. इसलिए वह गाड़ी बुक कर के नागपुर पुलिस ट्रेनिंग सेंटर उसे लेने पहुंचा. लेकिन वहां जा कर आशीष को पता चला कि आर्या जयंत बल्लावार नाम की पुलिस ट्रेनी अपने रिश्तेदारों के साथ यहां से जा चुकी है.

आशीष का गुस्सा अब अपने चरम तक पहुंच चुका था. उस ने आर्या के मोबाइल पर फोन करने की काफी कोशिश की, मगर आर्या का नंबर तो लग ही नहीं रहा था. गुस्से में आ कर आशीष ने नागपुर से आते वक्त अपना मोबाइल फोन भी पटक दिया था, जिस के कारण उस का मोबाइल फोन खराब हो गया था. पूरे दिन वह आर्या को कोसता रहा.

फिर उस ने अपना फोन ठीक कराया, एक नया सिम ले कर फिर आर्या को फोन किया. अनजान नंबर से कौल आया था, आर्या ने फोन उठा लिया. फोन पर काफी देर तक बहस होती रही, आशीष ने आर्या को अपना सामान ले कर घर आने के लिए काफी समझाया, लेकिन आर्या ने उस के साथ जाने से साफ इनकार कर दिया.

महाराष्ट्र के जिला भद्रावती के अंतर्गत रामनगर पुलिस थाने के पीआई आसिफ राजा शेख 23 मार्च, 2026 को दोपहर में थाने के काम निपटा कर लंच के लिए जाने वाले ही थे कि तभी उन के औफिस के बाहर एक युवक ने उन से पूछा, ”मे आई कम इन सर?’’

आसिफ राजा शेख ने युवक को आने का इशारा किया और उसे सामने वाली कुरसी पर बैठने का इशारा करते हुए कहा, ”कहिए जनाब, किस काम से आए हैं आप? बताइए, हम आप की क्या मदद कर सकते हैं?’’

खोल दिया मर्डर का राज

”जयहिंद सर, मेरा नाम आशीष महेश शेडमाके है. मैं आप के थाने में 3 साल पहले हुए हैडकांस्टेबल जयंत बल्लावार के मर्डर की रिपोर्ट लिखाने आया हूं. उन का मर्डर उन की बेटी और मैं ने मिल कर किया था.’’ आगंतुक आशीष ने अपना परिचय देते हुए कहा.

”यह क्या बात कह रहे हो तुम? तुम क्या कहीं पर नौकरी करते हो और ये मर्डर की बात 3 साल बाद कैसे आज सामने ला रहे हो, कहीं पागल तो नहीं हो गए हो तुम?’’ पीआई ने हैरानी से कहा.

”नहीं साहब, मैं कोई पागल नहीं हूं. मेरे पापा कांस्टेबल महेश शेडमाके थे, जिन की सर्विस के दौरान दिल का दौरा पडऩे से मृत्यु हो गई थी. मुझे अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति मिली थी, लेकिन पुलिस ट्रेनिंग के दौरान अनुशासनहीनता के आरोप में मुझे बरखास्त कर दिया गया.’’ आशीष ने कहा.

”मैं ने आप के पापा महेशजी और हैडकांस्टेबल जयंत बल्लावार के साथ काफी काम किया है. दोनों बड़े भले लोग थे, लेकिन ये मर्डर वाली बात मेरी समझ में नहीं आ रही है.’’ एसएचओ ने कहा.

”साहब, मैं और हैडकांस्टेबल जयंत की इकलौती बेटी आर्या एकदूसरे से प्यार करते थे, लेकिन आर्या के पापा हमारी शादी के खिलाफ थे. वह जाति के मामले को ले कर हमारी शादी नहीं होने देना चाहते थे, तब आर्या ने अपने पापा को रास्ते से हटाने के लिए मेरी मदद मांगी. फिर हम दोनों ने मिल कर उन्हें मार डाला था.’’ आशीष ने कहा.

”आशीष, तुम ने और आर्या ने मिल कर कैसे उन्हें मारा, मुझे विस्तार से बताओ?’’ पीआई ने पूछा. इस बीच उन्होंने अपने एक सिपाही को आशीष की वीडियो बनाने के लिए भी कह दिया.

”सर, उस दिन 22 अप्रैल, 2023 की तारीख थी. मेरी प्रेमिका आर्या ने मुझे यह बात बताई कि मेरी जाति छोटी होने के कारण उस के पापा अपने जीते जी यह विवाह नहीं होने देंगे. उस समय आर्या भी मुझे दिलोजान से चाहती थी. मेरे मन में तब यह बात आई थी कि उस के पापा को अब जीने का कोई हक भी नहीं है. मैं ने जब आर्या से पूछा कि अब हम आगे क्या कर सकते हैं? इस पर आर्या ने साफ कह दिया कि उस के पापा को रास्ते से हटा कर ही हम शादी कर सकते हैं. मैं ने ही उसे जहर देने का प्लान बताया, जिसे वह एकदम मान गई थी.’’ आशीष ने कहा.

”अच्छा आशीष, अब यह बताओ कि तुम ने फिर जहर का इंतजाम कैसे किया?’’ पीआई ने आशीष से पूछा.

”सर, मेरा एक चचेरा भाई है जिस का नाम चैतन्य सचिन गेडाम उर्फ मोंटी है. वह भी मेरी तरह ही सिरफिरा युवक है. उसे मैं ने कहा कि ऐसे जहर का इंतजाम करो, जिस से कुछ समय के बाद मौत हो सकती हो. उस ने मुझ से इस काम के लिए कुछ पैसे मांगे, जो मैं ने उसे तुरंत दे भी दिए. मेरे चचेरे भाई ने अपने एक दोस्त के माध्यम से वह जहर एक शीशी में मुझे दे दिया.

”उस के बाद 24 अप्रैल, 2023 को मैं ने वह जहर की शीशी शाम को साइबर कैफे में आर्या को दे दी और इसे अपने पापा के नाश्ते में मिलाने को कह दिया. आर्या ने वैसा ही किया, जैसा कि मैं ने उसे बताया था. आर्या ने नाश्ते में मिल्कशेक में जहर मिला कर अपने पापा को दे दिया. उस ने मिल्कशेक में काफी चीनी घोल दी, ताकि स्वाद का भी पता न चल सके.

”जयंत बल्लावार नियत समय पर अपनी ड्यूटी पर गए, जहां कुछ समय बाद उन की स्थिति बिगडऩे लगी तो उन्हें तत्काल हौस्पिटल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

”आर्या ने वहां पर यह बताया कि पापा को अकसर चक्कर आते रहते थे, उन की तबीयत हमेशा खराब रहती थी, उन्हें कई प्रकार की बीमारियां भी थीं. मेरे समझाने के अनुसार आर्या ने पुलिस अधिकारियों से यह प्रार्थना भी की कि अब तो इस के पिता की मृत्यु हो चुकी है, लिहाजा पोस्टमार्टम कर के उन की डैडबौडी को खराब न किया जाए. इसलिए किसी प्रकार का शक न करते हुए पुलिस ने इसे आकस्मिक मृत्यु मान कर फाइल ही बंद कर दी.’’

सारी बातें सुनने के बाद पीआई ने पूछा, ”अच्छा आशीष, क्या तुम जानते हो कि यह बयान दे कर तुम खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने का काम कर रहे हो? सहआरोपी होने के कारण तुम्हें भी जेल की हवा खानी पड़ सकती है. यह जानते हुए भी कि आर्या तुम्हारी पत्नी है, तुम यह सब क्यों कर रहे हो?’’

”साहब, आग से खेलने वाले अंजाम से नहीं डरा करते. जानता हूं कि आर्या मेरी पत्नी है और मैं ने उस से दिल से प्यार किया, लेकिन उस ने मेरे साथ बेवफाई की. उस ने पुलिस ट्रेनिंग पूरी करने के बाद मेरे साथ रहने से मना कर दिया और मायके में रहने लगी. जिस के लिए मैं ने इतना बड़ा पाप किया, उस को सजा तो मिलनी चाहिए और असली गुनहगार वह है, जिस ने मुझे पाने के लिए अपने पापा को ही मार डाला था.’’ आशीष ने कहा.

इस के बाद मुख्य आरोपी आशीष महेश शेडमाके, आर्या जयंत बल्लावार, चैतन्य उर्फ मोंटी सचिन गेडाम और एक नाबालिग के खिलाफ आईपीसी की धाराएं 120(बी), 302, 201 और 34 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया.

आशीष के इकबालिया बयान के बाद जब पुलिस ने महिला पुलिस कांस्टेबल आर्या जयंत बल्लावार से कड़ाई के साथ पूछताछ की तो आर्या के झूठ का महल ढह गया और पूरी साजिश बेनकाब हो गई.

कहानी लिखे जाने तक महाराष्ट्र पुलिस ने हैडकांस्टेबल जयंत बल्लावार हत्याकांड के चारों आरोपियों आशीष महेश शेडमाके निवासी भद्रावती, आर्या जयंत बल्लावार, आशीष के चचेरे भाई चैतन्य उर्फ मोंटी सचिन गेडाम निवासी भद्रावती एवं एक नाबालिग आरोपी निवासी भद्रावती को गिरफ्तार कर लिया था.

कानूनी कारणों और एक आरोपी के नाबालिग होने के कारण पुलिस ने अभी तक उस का नाम सार्वजनिक नहीं किया है.

हैडकांस्टेबल जयंत बल्लावार मर्डर केस एक ऐसा सनसनीखेज मामला है, जिस ने मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों के अटूट विश्वास को तारतार कर डाला है. यह पूरी कहानी किसी डार्क थ्रिलर फिल्म जैसी प्रतीत होती है, लेकिन इस के पीछे छिपी कड़वी हकीकत ने पुलिस महकमे समेत पूरे समाज को स्तब्ध कर के रख दिया है.

जिस बेटी के कंधों पर समाज की रक्षा और पिता के सम्मान और देखभाल की जिम्मेदारी थी, वही अपने पिता के रक्त की प्यासी बन गई. वहीं दूसरी तरफ एक पुलिसकर्मी पिता की हत्या में उस की अपनी पुलिसकर्मी बेटी की संलिप्तता ने पुलिस विभाग की साख पर भी गहरे प्रश्नचिह्नï खड़े कर दिए हैं.

यह घटना मात्र एक अपराध नहीं है, बल्कि आधुनिक समाज में गिरते नैतिक मूल्यों और अनियंत्रित आवेग का एक भयावह दृष्टांत भी उभर कर सामने आया है.

वर्षों तक यह काला राज दफन रहा, क्योंकि आर्या ने अपने प्रेमी आशीष के निर्देशानुसार जांच की दिशा को चतुराई से भटका दिया था. किंतु नियति का चक्र घूम कर फिर वहीं पर आ धमका, जिस प्रेमी के लिए आर्या जयंत बल्लावार ने अपने पिता के रक्त की बलि दे डाली थी, उसी प्रेमी आशीष ने आपसी विवाद और आत्मग्लानि के कारण इस दफन हुए राज को उजागर कर दिया.

कानून इस केस में अपना काम कर रहा है, लेकिन चंद्रपुर की जनता के लिए आज भी यह विश्वास कर पाना कठिन लगता है कि कोई संतान भला इतनी निष्ठुर कैसे हो सकती है.True Crime Story

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