Bhopal Murder Case. प्रेम में अंधे अमन ने अपनी उसी मां को गोली चला कर मार डाला, जो उस के सिर पर सेहरा बांध कर दुलहन लाने के सपने संजो रही थी. बन्ने खां को यह बात पता चली तो उन्होंने करोड़ों की संपत्ति के उस वारिस को बचाने की कोशिश तो की, लेकिन...
पुराने भोपाल में बन्ने मियां और उन की पत्नी जमीला का नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं था. उन्हें वहां हर कोई जानता था. बन्ने मियां की इमेज एक भाजपा समर्थक मुसलमान नेता की थी. वह आपातकाल के समय गिरफ्तार कर के जेल भी भेजे गए थे. वह बड़ी शान से खुद को मीसाबंदी बताते हुए जेल के उस समय यानी सन 1975 के किस्से लोगों को सुनाते रहते थे कि कांग्रेसी शासनकाल में हम नई आजादी के सिपाहियों पर किसकिस तरह के जुल्मोसितम ढाए गए थे.
48 साल की जमीला बेगम उन की दूसरी पत्नी थीं. वह भी राजनीति में जरूरत के हिसाब से सक्रिय रहने वाली महिला थीं और कदकाठी से भी काफी मजबूत थीं. उन की इमेज झुग्गीझोपड़ी की राजनीति करने वाली औरत की थी, जो अपने पति की पहुंच और रसूख के दम पर झुग्गीझोपड़ी का कारोबार भी करती थी. इस काम से उन्होंने खासा पैसा बनाया था. हालांकि पैसों की कमी उन्हें वैसे भी नहीं थी, क्योंकि बन्ने मियां खानदानी आदमी थे. उन्हें विरासत में ही कोई 25 एकड़ जमीन मिली थी, जिस की कीमत अब करोड़ों में थी.
दूसरी शादी कर के बन्ने मियां गौतमनगर थाना इलाके के इंदिरानगर में रहने लगे थे. जमीला से उन्हें एक बेटा अमन था, जो अब 22 साल का बांका जवान हो चुका था. बन्ने मियां की पहली बीवी अपने 4 बच्चों के साथ गांधीनगर इलाके में रहती थी. उन के बच्चों में से एक बेटा अपराधी प्रवृत्ति का था. जिंदगी में कई उतारचढ़ाव देखने वाले बन्ने मियां यह कहने का हक तो रखते ही थे कि मियां ऊपर वाले के फजल से सब कुछ है मेरे पास, किसी चीज की कमी नहीं है.






