Crime Story: मां खुद की जान जोखिम में डाल कर बच्चों को बचाती है. लेकिन राखी ऐसी मां है, जिस ने प्रेमी और 10 लाख रुपए की बीमे की रकम के लिए अपने ही बेटे की हत्या कर दी.

ससून डाक अस्पताल के डाक्टरों ने थाना विश्रामवाड़ी के सीनियर इंसपेक्टर पोपट सुपेकर को 11 साल के एक बच्चे के बारे में जो बताया, सुन कर वह हैरान रह गए. उन्होंने तुरंत ड्यूटी पर तैनात महिला सबइंसपेक्टर शीतल लोमटे से प्राथमिकी दर्ज करा कर पूरी बात वरिष्ठ अधिकारियों को बताई. इस के बाद वह असिस्टैंट इंसपेक्टर सूर्यकांत मारोडे, शीतल लोमटे एवं कुछ सिपाहियों को साथ ले कर ससून डाक अस्पताल के लिए चल पड़े. ससून डाक अस्पताल थाना विश्रामवाड़ी से ज्यादा दूर नहीं था, इसलिए पुलिस की यह टीम 10 मिनट में वहां पहुंच गई.

अस्पताल पहुंच कर पोपट सुपेकर अस्पताल के डाक्टरों से मिले तो उन्होंने बच्चे की लाश दिखा कर पूरी बात बताई. लाश का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने बच्चे के साथ आई उस की मां से पूछताछ शुरू की. मां ने पुलिस को भी वही सब बताया, जो डाक्टरों को पहले बता चुकी थी.  पुलिस ने उस की बातों पर विश्वास न कर के अपनी औपचारिक काररवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवा दिया और बच्चे की मां को साथ ले कर थाने आ गई. थाने में की गई पूछताछ में पता चला कि मृतक बच्चे की मां का नाम राखी बालपांडे था. मृतक बच्चा उस का एकलौता बेटा चैतन्य बालपांडे था.

पूछताछ में राखी जो बता रही थी, वह डाक्टरों द्वारा बताई घटना से बिलकुल मेल नहीं खा रहा था. राखी बारबार बयान बदल रही थी. इस का मतलब वह पुलिस को गुमराह कर रही थी. मजबूर हो कर पुलिस ने जब उस के साथ थोड़ी सख्ती की तो आखिर वह टूट गई. उस ने अपने विकलांग बेटे की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद राखी ने बताया कि उसी ने अपने विकलांग बेटे चैतन्य की हत्या प्रेमी सुमित मोरे के साथ मिल कर की थी.

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