Delhi Crime. रोशनआरा को संदेह था कि उस के पति के संबंध अपनी भाभी से हैं. इस के लिए उस ने जेठानी को सबक सिखाने के लिए उस की 3 साल की बेटी की जान ले कर क्या ठीक किया?
उत्तरपूर्वी दिल्ली के मुसलिम बहुल इलाके मुस्तफाबाद के इंदिरा विहार में अब्दुल अजीज अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी जरीना, 3 शादीशुदा बेटे मेहताब, फिरोज और आफताब थे. 3 मंजिला मकान में यह परिवार संयुक्त रूप से रहता था. पहली मंजिल पर बड़ा बेटा मेहताब रहता था. उसी मंजिल पर अब्दुल अजीज भी पत्नी जरीना के साथ रहता था.
दूसरी मंजिल पर अब्दुल अजीज का छोटा बेटा आफताब पत्नी रोशनआरा और 8 महीने की बेटी के साथ रहता था, जबकि तीसरी मंजिल पर मंझला बेटा फिरोज पत्नी फिरदौस, 5 साल के बेटे और 3 साल की बेटी आशना के साथ रहता था. अब्दुल अजीज अपने बेटों के साथ साप्ताहिक बाजारों में रेडीमेड कपड़ों की दुकानें लगाते थे. इस से उन्हें अच्छीखासी कमाई हो रही थी.
17 मई, 2016 को मंझले बेटे की पत्नी फिरदौस अपनी सास के साथ दिल्ली के ही भोेगल में रहने वाले एक रिश्तेदार की बेटी की शादी में शरीक होने गई थी. अपने साथ वह 5 साल के बेटे अरमान को तो ले गई थी, पर 3 साल की बेटी आशना को देवरानी रोशनआरा के पास छोड़ गई थी. उस का पति फिरोज दोपहर बाद 3 बजे गोकुलपुरी स्थित साप्ताहिक मंगल बाजार में दुकान लगाने चला गया था.
उस समय आशना सो रही थी. शाम करीब 5 बजे फिरोज मंगल बाजार में लगी अपनी दुकान पर बैठा था, तभी उस के मोबाइल पर घर से फोन आया. फोन उस के छोटे भाई की पत्नी रोशनआरा ने किया था. फिरोज ने फोन रिसीव कर के जैसे ही खैरियत पूछी, रोशनआरा ने हड़बड़ा कर कहा, ‘‘खैरियत ही तो नहीं है भाईजान.’’






