Family Crime. यूपी पुलिस की कांस्टेबल लता सिंह जानती थी कि टैक्सी ड्राइवर दान सिंह की पहली पत्नी मर चुकी है और अपनी एक बेटी को वह पालपोस रहा है, इस के बावजूद वह दान सिंह को दिल दे बैठी. इतना ही नहीं, दोनों ने शादी भी कर ली. एक बेटे की मां बनने के बाद लता सिंह पर पति के जुल्मोसितम बढ़ते गए. फिर एक दिन ऐसा आया कि...
एक दिन दान सिंह ने रवि से कहा, ''रवि तू तो मेरा भाई है. मैं इस वक्त बहुत उलझन में हूं. मैं अपनी पत्नी लता सिंह को ठिकाने लगाना चाहता हूं. साथ में ही बेटे लड्डू को भी. क्योंकि मैं उस की ये निशानी भी रखना नहीं चाहता. इस योजना में तू मेरी मदद कर.’’
''बताओ भाई दान सिंह, तमंचा, छुरी, चाकू क्या ला कर दूं. कहां पर कैसे मारना है. मैं भी साथ चलूंगा, लेकिन सोच ले वो सिपाही है. उस की हत्या होते ही पूरा महकमा लोटपोट हो जाएगा. सात समंदर पार भाग जाएं या पाताल में भी छिप जाएं, तब भी पुलिस हमें ढूंढ लेगी और हमारा बचना मुश्किल होगा.’’ दान सिंह बोला.
''मेरे दिमाग में एक आइडिया है. मैं अपनी पहली पत्नी के साथ बाइक से कहीं जा रहा था. बस से एक्सीडेंट हो गया था. मेरी पत्नी की मौत हो गई थी और मैं भी थोड़ाबहुत घायल हुआ था. पूरा दोष बस वाले पर ही आया था. मुझ पर किसी ने कोई शक नहीं किया और न ही मेरा उस में हाथ था, लेकिन अब अगर मैं इस चुड़ैल को इसी तरह एक्सीडेंट दिखा कर ठिकाने लगा दूं तो मैं साफ बच सकता हूं.






