Uttar Pradesh Honor Killing. संगीता भले ही 17 साल की नाबालिग थी, लेकिन मानसिक और शारीरिक रूप से हृष्टपुष्ट थी. स्कूल में ही पढऩे वाले आदित्य चौरसिया (19 साल) से उस की गहरी दोस्ती थी. दोनों ही एकदूसरे को जान से ज्यादा प्यार करते थे, लेकिन झूठी शान की खातिर मथुरा गुप्त को बेटी संगीता के प्यार से नफरत थी. फिर एक दिन मथुरा गुप्त बेटी के प्यार का ऐसा दुश्मन बन बैठा कि...

मथुरा गुप्त बेटी संगीता के प्रेमी आदित्य चौरसिया को ले कर महीनों से परेशान था. 50 वर्षीय मथुरा गुप्त उत्तर प्रदेश के जिला महराजगंज के थाना फरेंदा स्थित लेजार महादेवा के टोला लीलाछापर का रहने वाला था. परेशान इसलिए नहीं था कि आदित्य उस की बेटी संगीता से प्यार करता था, बल्कि इसलिए था कि गांवसमाज में उस की खूब बदनामी हो रही थी.

बदनामी की जलालत की आग में जलता हुआ मथुरा गुप्त कई दिनों से उसे रास्ते से हटाने की फिराक में था, लेकिन अकेले कुछ करने में उस का दिल और दिमाग दोनों साथ नहीं दे रहे थे. इसीलिए उस ने अपने घर पर अपने चचेरे भाई प्रदीप गुप्त और पड़ोसी चंदन व अजय को बुलाया था. अजय झाडफ़ूंक का काम करता था.

''देखो भाई, आदित्य नाम का पानी सिर के बहुत ऊपर से बहने लगा है.’’ मथुरा के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ झलक रही थीं, ''अगर समय रहते धारा की दिशा को बदला नहीं गया तो आज मेरी बेटी के साथ नैन मटक्का करता फिरता है, हो सकता है कल तुम्हारी बहनबेटियों के साथ भी ऐसे ही करे, तब मेरे दर्द को समझोगे.’’ मथुरा की आवाज में काफी दर्द था.

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