Jhansi Love Crime. रजनी अहिरवार भले ही 4 बच्चों की मां बन चुकी थी, लेकिन उस की जवानी अब भी गजब ढाने के लिए तैयार थी. तभी तो पति भूपत अहिरवार के परदेस जाते ही वह गांव के ही शादीशुदा मर्द रक्षपाल बघेल की बांहों में झूलने लगी. लेकिन इस अधेड़ उम्र के प्यार में वह ऐसी जिद कर बैठी कि

जैसेजैसे समय बीतता जा रहा था, वैसेवैसे रक्षपाल बघेल की उलझनें बढ़ती जा रही थीं. उस का दिन का चैन छिन गया था और रात की नींद हराम हो गई थी. उलझन का कारण थी उस की प्रेमिका रजनी अहिरवार. रजनी जो चाहती थी, वह रक्षपाल के लिए नामुमकिन था. उस ने रजनी को हर तरह से समझाया, मिन्नतें भी कीं, लेकिन वह राजी नहीं हो रही थी. उस ने जिद पकड़ ली थी.

रक्षपाल बघेल, झांसी जनपद के थाना टोड़ी फतेहपुर के गांव बुढ़ाई का रहने वाला था. वह शादीशुदा और 4 बच्चों का बाप था. रजनी भी विवाहिता और 4 बच्चों की मां थी. वह अपने पति भूपत अहिरवार के साथ इसी बुढ़ाई गांव में रहती थी. रजनी का पति परदेस में कमाई करता था, इसलिए उस ने रक्षपाल बघेल से अवैध संबंध बना लिए थे.

रजनी रक्षपाल की इतनी दीवानी हो गई थी कि वह पति व बच्चों को छोड़ कर उस के साथ ही जीवन बिताना चाहती थी. रक्षपाल के साथ जब भी उस का शारीरिक मिलन होता तो वह उस पर दबाव डालती कि वह अपनी पत्नी व बच्चों को छोड़ कर उसे किसी दूसरे शहर ले चले. वहां वे दोनों मंदिर में शादी रचा कर मौजमस्ती की जिंदगी बिताएंगे. वहां न किसी का विरोध होगा और न ही बदनामी का डर. दोनों मिल कर कमाएंगे और मौज से रहेंगे.

शुरुआत में रक्षपाल ने रजनी की बात को नकार दिया, लेकिन जब वह बारबार दबाव बनाने लगी और धमकी देने लगी तो रक्षपाल का माथा ठनका. उस की दिनप्रतिदिन उलझन बढऩे लगी. उस ने रजनी को समझाया कि वह गांव छोडऩे की जिद छोड़ दे. उस का मिलन जैसे हो रहा है, वैसे ही होता रहेगा, लेकिन रजनी राजी नहीं हुई.

समझाने के बावजूद जब रजनी नहीं मानी तो रक्षपाल ने रजनी की हत्या का प्लान बनाया. पहले उस ने अपने एक खास दोस्त को शामिल करने की सोची, लेकिन किसी कारणवश उस ने विचार बदल दिया और अकेले ही मर्डर करने की योजना बनाई.

अपने प्लान के मुताबिक एक रोज रक्षपाल टोड़ी बाजार गया और लुहार की दुकान से 200 रुपए में एक तेजधार वाली कुल्हाड़ी खरीद लाया. इस कुल्हाड़ी को उस ने भूसे वाली कोठरी में छिपा कर रख दिया. इस के बाद वह उचित मौके की तलाश में रहने लगा. रक्षपाल ने अपने प्लान की भनक रजनी को नहीं लगने दी.

रक्षपाल ने 2 दिन तक इंतजार किया. तीसरे रोज वह हत्या के इरादे से रजनी के घर रात 10 बजे पहुंचा.

रजनी व उस के बच्चे तो घर के अंदर थे, लेकिन उस की सास फूलादेवी घर के बाहर चारपाई पर बैठी बीड़ी फूंक रही थी. बीचबीच में खांसती भी जा रही थी.

फूलादेवी की मौजूदगी से रक्षपाल के प्लान पर पानी फिर गया और वह उल्टे पांव वापस घर आ गया. उस ने रजनी को कौल लगाई तो उस ने बताया कि अम्मा (सास) घर आई हुई हैं, इसलिए हमारी हसरतें पूरी नहीं हो सकतीं. तुम घर मत आना. क्योंकि अम्मा तुम्हें पहचान लेंगी.

22 मई, 2026 की रात 11 बजे रक्षपाल बघेल चारपाई पर लेटा करवट बदल रहा था. नींद उस से कोसों दूर थी. तभी रजनी की कौल आई. रक्षपाल ने कौल रिसीव की तो रजनी बोली, ”सो गए क्या? अम्मा (सास) अपने पुराने घर चली गई है. बच्चे भी सो गए हैं. तुम जल्दी घर आ जाओ. रात भर मस्ती करेंगे. तुम से कुछ जरूरी बात भी करनी है.’’

”ठीक है. मैं तुरंत घर आ रहा हूं. तुम दरवाजा खुला रखना.’’ कहते हुए रक्षपाल ने फोन डिसकनेक्ट कर दिया. रक्षपाल को लगा कि आज की रात वह अपने प्लान में सफल हो जाएगा. क्योंकि रजनी ने उसे खुद ही बुलाया है. इसलिए वह भूसे वाली कोठरी गया और कुल्हाड़ी ले कर रजनी के घर की ओर निकल पड़ा.

रजनी का घर उस के घर से करीब 200 मीटर दूर था. अत: चंद मिनट में ही रक्षपाल उस के घर पहुंच गया. रक्षपाल ने सतर्क निगाहों से दाएंबाएं देखा फिर फुरती से दरवाजा धकेल कर घर के अंदर दाखिल हो गया.

रजनी उस समय कमरे में पड़ी चारपाई पर अपने मासूम बेटे के साथ लेटी थी. दूसरे कमरे में उस की दोनों बेटियां चारपाई पर गहरी नींद में सो रही थीं.

रक्षपाल को देख कर रजनी चारपाई से उठी और होंठों पर मुसकान बिखेरते हुए बोली, ”आ गए तुम. मैं तुम्हारा ही इंतजार कर रही थी.’’ जवाब में रक्षपाल भी मुसकराया और रजनी को गले लगा लिया.

इस के बाद रजनी ने फर्श पर चटाई बिछाई, फिर बैठ कर दोनों बातचीत करने लगे. बतियाते हुए रजनी बोली, ”रक्षपाल, मैं तुम्हारी दीवानी हूं. तुम्हारे बिना अब रहा नहीं जाता. इसलिए तुम मुझे किसी दूसरे शहर ले चलो. वहां हम दोनों मिल कर कमाएंगे और मौजमस्ती की जिंदगी बिताएंगे.’’

”रजनी, यह संभव नहीं है. मैं अपने बीवीबच्चों को धोखा दे कर तुम्हारे साथ मौजमस्ती की जिंदगी नहीं बिता सकता. हम दोनों के बीच जैसा चल रहा है, वैसा ही चलने दो.’’ रक्षपाल बोला.

रजनी तुनक कर बोली, ”जब मैं अपने पति और बच्चों को छोड़ सकती हूं तो तुम क्यों नहीं? तुम्हें मेरी बात माननी ही होगी. यदि तुम ने ऐसा नहीं किया तो मैं तुम्हारे खिलाफ बलात्कार की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करा दूंगी. सालों जेल में रहोगे.’’ ”धमकी दे रही हो?’’ रक्षपाल तमतमा कर बोला.

”नहीं, समझा रही हूं.’’ रजनी का गुस्सा भी बढ़ गया. वह कुछ देर मौन रही, फिर बोली, ”पता नहीं तुम कैसे मर्द हो. लोग तो अपनी मनपसंद औरत को हासिल करने के लिए खून तक कर देते हैं. एक तुम हो, जो कुत्ते की तरह दुम दबा कर भाग रहे हो. धिक्कार है तुम्हारी जवानी पर, धिक्कार है तुम्हारी मर्दानगी पर.’’

रजनी ने रक्षपाल की जवानी व मर्दानगी को धिक्कारा तो उस का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा. वह हत्या के इरादे से तो आया ही था. इसलिए उस ने साथ लाई कुल्हाड़ी को हवा में लहराया, फिर ताबड़तोड़ कई प्रहार रजनी के सिर, गरदन व छाती पर किए.

कुल्हाड़ी के प्रहार से रजनी का सिर फट गया और गरदन भी कट गई. वह जमीन पर बिछ गई और खून की धार बह निकली. कुछ पल तड़पने के बाद रजनी ने दम तोड़ दिया.

रजनी की हत्या करने के बाद रक्षपाल ने खून से सनी कुल्हाड़ी उठाई और दबे पांव घर के बाहर निकल आया. वह सीधे अपने घर नहीं गया. पहले वह अपने खेत की ओर गया.

वहां उस ने झाडिय़ों के बीच कुल्हाड़ी छिपाई फिर गांव के दूसरे छोर से हो कर अपने घर आया और बरामदे में पड़ी चारपाई पर लुढ़क गया. शातिरदिमाग रक्षपाल ने यह सब इसलिए किया, ताकि पुलिस उस तक न पहुंच सके.

इधर रात 3 बजे के बाद रजनी की 10 वर्षीया बेटी की आंखें खुलीं तो उसे मासूम भाई दिव्यांश के रोने की आवाज सुनाई दी. वह मम्मी के कमरे में पहुंची तो डर से कांप उठी. उस की मम्मी रजनी की लाश कमरे के फर्श पर खून से लथपथ पड़ी थी. फर्श खून से लाल था.

यह लोमहर्षक दृश्य देख कर मुसकान बेहाल हो गई. उस ने चीखना चाहा, पर चीख गले में घुट कर रह गई. उस ने वहां से भागना चाहा, लेकिन पांव मानो जड़ हो गए. वह कितनी देर तक पथराई सी खड़ी रही, खुद उसे पता नहीं.

उस ने किसी तरह अपने को संभाला, फिर सदमे की सी हालत में घर के बाहर आई. बाहर निकलते ही वह जोरजोर से चीखने लगी. उस की चीखें सुन कर पड़ोसी एकत्र हुए. उन्होंने बेटी को संभाला. फिर उस के चीखने का कारण पूछा.

मुुसकान ने बताया कि रात को किसी ने उस की मम्मी की हत्या कर दी. पड़ोसी अंदर गए तो वहां का नजारा देख कर सब की घिग्घी बंध गई. रजनी की हत्या निर्दयतापूर्वक की गई थी.

रजनी की सास फूलादेवी व ससुर करन अहिरवार गांव के पश्चिमी छोर पर दूसरे मकान में रहते थे. पड़ोसियों ने उन को सूचना दी तो वे घबरा गए. तुरंत दोनों मौके पर आ गए.

बहू रजनी की लाश देख कर करन अहिरवार व फूलादेवी की आंखें नम हो गईं. उन्होंने सब से पहले रजनी के बच्चों को संभाला, फिर अपने बेटे भूपत को फोन से वारदात की खबर दी, जो हरियाणा के रोहतक में रह कर नौकरी कर रहा था.

सुबह होते ही पूरे गांव में रजनी की हत्या की खबर फैल गई. अत: उस के दरवाजे पर लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई. लोग आपस में कानाफूसी करने लगे. फिर तो जितने मुंह, उतनी बातें. इसी बीच एक पड़ोसी ने थाना टोड़ी फतेहपुर पुलिस को इस घटना की सूचना दे दी.

सूचना पाते ही एसएचओ संजीव कटियार ने अपने सहयोगी पुलिसकर्मी नियाज खां, रविकांत गोस्वामी तथा अवध नरेश को साथ लिया और घटनास्थल बुढ़ाई गांव रवाना हो लिए. रवाना होने से पहले उन्होंने पुलिस अधिकारियों को भी वारदात से अवगत करा दिया था.

संजीव कटियार जिस समय बुढ़ाई गांव पहुंचे, उस समय सुबह के 9 बज रहे थे. रजनी के दरवाजे पर भीड़ जुटी थी. भीड़ को हटाते वह घर के अंदर पहुंचे.

वहां कमरे में रजनी की रक्तरंजित लाश पड़ी थी. किसी धारदार हथियार से उस की निर्मम हत्या की गई थी. सिर, माथा, गला व छाती पर गहरा घाव था. फर्श पर खून फैला था. मृतका रजनी की उम्र 35 साल के आसपास थी. उस का रंग गोरा व शरीर स्वस्थ था.

निरीक्षण के दौरान चारपाई पर पड़े तकिया के नीचे एक मोबाइल फोन भी मिला, जो शायद मृतका का था. संजीव कटियार ने उसे सुरक्षित कर लिया.

एसएचओ संजीव कटियार अभी निरीक्षण कर ही रहे थे कि सूचना पा कर एसपी (ग्रामीण) डा. अरविंद कुमार व डीएसपी (मऊरानीपुर) जितेंद्र सिंह भी आ गए. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुला लिया.

पुलिस अधिकारियों ने बड़ी बारीकी से घटनास्थल का निरीक्षण किया. पूरे घर में कोई ऐसे आसार नजर नहीं आ रहे थे, जिस से अनुमान लगाया जा सकता कि वहां लूटपाट की गई है.

घर का सारा सामान अपनी जगह पर था. बक्से भी जस के तस रखे थे. इस से पुलिस अधिकारियों ने अनुमान लगाया कि हत्यारा जो कोई भी था, उस का उद्देश्य केवल हत्या करना था. हत्या कर के वह फरार हो गया.

फोरैंसिक टीम ने भी घटनास्थल की बारीकी से जांच की और खून आलूदा मिट्टी का नमूना रासायनिक जांच हेतु सुरक्षित किया. टीम ने कई जगह से फिंगरप्रिंट भी उठाए. टीम को दरवाजे के पास एक व्यक्ति के पैरों के निशान भी मिले.

पुलिस के अनुमान के मुताबिक वह व्यक्ति हत्यारा ही हो सकता था. इस से यह थ्यौरी स्थापित करने में भी सहायता मिली कि हत्यारा कोई एक था. वह अकेले घर में आया. महिला का कत्ल किया और फरार हो गया. वह बच्चों को मारना नहीं चाहता था.

घटनास्थल पर मृतका रजनी के सासससुर मौजूद थे. डीएसपी जितेंद्र सिंह ने उन से पूछताछ की तो ससुर करन अहिरवार ने बताया कि गांव में उस के 2 मकान हैं. पुश्तैनी मकान में वह अपनी पत्नी फूलादेवी के साथ रहते हैं. दूसरे मकान में उस का बेटा भूपत अपने परिवार के साथ रहता था. यह मकान उसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिला था.

भूपत हरियाणा के रोहतक में नौकरी करता है. मकान में बहू रजनी अपनी 3 बेटियों व एक बेटे के साथ रहती थी. बीती रात उस की किसी ने हत्या कर दी. सुबह पड़ोसियों ने खबर दी, तब वह वहां पहुंचे. पता नहीं उसे किस ने मार डाला. गांव में हमारी न किसी से दुश्मनी है और न ही किसी से लेनदेन का कोई झगड़ा है.

मृतका की सास फूलादेवी ने बताया कि वह 3 दिन पहले बहू के घर गई थी. तब सब कुछ सामान्य था. वह 2 दिन बहू व बच्चों के साथ रही फिर रजनी की मंझली बेटी को साथ ले कर घर लौट आई. आज सुबह बहू की हत्या की खबर मिली तो वह आई. पता नहीं बहू को किस ने मार डाला. अब मां के बिना बच्चे कैसे रह पाएंगे.

मृतका की 10 वर्षीया बड़ी बेटी घटना के समय घर में मौजूद थी. एसपी (ग्रामीण) डा. अरविंद कुमार ने उस से पूछताछ की तो उस ने बताया कि शाम को मम्मी ने सब्जीरोटी बनाई थी. रात 8 बजे मम्मी के साथ हम ने खाना खाया था. उस के बाद भाई मम्मी के साथ और मैं छोटी बहन के साथ दूसरे कमरे में सो गई.

इस दौरान घर में कौन आयागया, उसे नहीं पता. रात 3 बजे के बाद उसे भाई के रोने की आवाज सुनाई दी. तब वह मम्मी के कमरे में गई. वहां मम्मी मरी पड़ी थीं. वह बाहर आई और पड़ोसियों को जानकारी दी.

बहन की हत्या की खबर पा कर मृतका का भाई राकेश भी आ गया था. उस ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि लगभग 12 साल पहले बहन की शादी की थी. बच्चे बड़े हुए और घर का खर्च बढ़ा तो बहनोई भूपत कमाने रोहतक चले गए. वह त्योहारों पर ही घर आ पाते थे.

निरीक्षण और पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने मृतका रजनी का शव पोस्टमार्टम के लिए झांसी के जिला अस्पताल भिजवा दिया. साथ ही मृतका की सास फूलादेवी की तहरीर पर थाना टोड़ी फतेहपुर में बीएनएस की धारा 103(1) के तहत अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी. विवेचना का काम एसएचओ संजीव कटियार को सौंपा गया.

विवेचक संजीव कटियार ने रजनी अहिरवार हत्याकांड को बड़ी गंभीरता से लिया. उन्होंने अपने खास मुखबिर गांव में लगा दिए और स्वयं भी अपनी टीम के साथ हत्यारे की खोज में जुट गए.

विवेचना के दौरान ही उन्हें याद आया कि उन्हें मृतका के कमरे से एक मोबाइल फोन मिला था. इस मोबाइल फोन को उन्होंने चैक किया तो पता चला कि घटना वाली रात रजनी ने सवा 11 बजे किसी को कौल लगाई थी. यह भी पता चला कि उस नंबर पर रजनी अकसर लंबी बाते करती थी. इस का मतलब यह था कि वह नंबर जिस का भी था, वह रजनी के करीब था.

इंसपेक्टर संजीव कटियार ने जब उस नंबर की जानकारी जुटाई तो पता चला कि वह झांसी के ही बुढ़ाई गांव के रहने वाले रक्षपाल बघेल के नाम दर्ज है. इंसपेक्टर संजीव कटियार ने मृतका के पति भूपत को थाने बुलवा लिया.

वह बेहद डरासहमा था. वह हाथ जोड़ कर बोला,” साहब, मैं ने कुछ नहीं किया. मुझे नहीं पता पत्नी को किस ने मार डाला.’’

संजीव कटियार ने उस का डर दूर किया फिर पूछा, ”भूपत, यह बताओ कि तुम्हारे गांव में रक्षपाल बघेल कौन है? वह क्या करता है? उस का आनाजाना क्या तुम्हारे घर था?’’

भूपत बोला, ”साहब, रक्षपाल गांव का दबंग ठाकुर है. उस के पिता श्याम सिंह सूद पर पैसा देते हैं. रक्षपाल खेतों की देखभाल करता है. हम भी उस के खेतों पर मजदूरी करते थे. कभीकभार उस के साथ बैठ कर शराब भी पी लेते थे.

”उस का आनाजाना मेरे घर नहीं था. 2 साल पहले हम मजदूरी करने रोहतक चले गए. उस के बाद वह घर आनेजाने लगा हो तो पता नहीं. बीवीबच्चों व मेरे मातापिता ने भी कभी उस का जिक्र नहीं किया.’’

इंसपेक्टर संजीव कटियार को हालांकि भूपत से रक्षपाल के संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं मिली थी, फिर भी उन्हें पूरा यकीन था कि रजनी की हत्या का रहस्य रक्षपाल के पेट में ही छिपा हो सकता है. अत: उन्होंने अपनी टीम के साथ रक्षपाल बघेल को गिरफ्तार करने की योजना बनाई.

24 मई, 2026 की रात 11 बजे संजीव कटियार पुलिस बल के साथ बुढ़ाई गांव पहुंचे और रक्षपाल के घर छापा मारा. रक्षपाल घर में मौजूद था. पुलिस को देख कर रक्षपाल घर के बाहर भागा, लेकिन पुलिस टीम ने उसे गली में कुछ दूरी पर दबोच लिया. उसे गिरफ्तार कर थाने लाया गया.

इंसपेक्टर संजीव कटियार ने रक्षपाल से रजनी की हत्या के बारे में पूछा तो वह साफ मुकर गया, लेकिन सख्ती बरतने पर वह टूट गया. उस ने रजनी की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. पुलिस के समक्ष रक्षपाल का कुबूलनामा—

हमारे और रजनी के बीच पिछले 8 महीने से प्रेम संबंध थे. दोनों के बीच अकसर बातचीत होती थी और मिलतेजुलते भी थे. बात करने के लिए रजनी को एक मोबाइल फोन भी दे दिया था. सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन अब रजनी पति को छोड़ कर मेरे साथ रहना चाहती थी.

रजनी शादी कर दूसरे शहर में रहने का दबाव बना रही थी. मैं ने समझाया कि तुम्हारी 3 बेटियां व एक बेटा है. मेरे भी 4 बच्चे हैं, लेकिन वह मानने को तैयार नही हुई. गुरुवार की रात सवा 11 बजे रजनी ने फोन कर मुझे अपने घर बुलाया. वहां पहुंचने पर वह इसी बात को ले कर फिर विवाद करने लगी. तब मैं ने पास रखी कुल्हाड़ी से रजनी पर वार कर दिया. इस से रजनी की मौत हो गई.

रक्षपाल ने जुर्म तो कुबूल कर लिया था, लेकिन अभी तक वह कुल्हाड़ी बरामद नही कराई थी, जिस से उस ने रजनी की हत्या की थी. अत: संजीव कटियार ने जब रक्षपाल से कुल्हाड़ी के बारे में पूछा, तो वह बोला, ”साहब, हत्या के बाद कुल्हाड़ी अपने खेत के पास झाडिय़ों में छिपा दी थी.’’

इस के बाद पुलिस ने रक्षपाल की निशानदेही पर आला कत्ल खून से सनी कुल्हाड़ी बरामद कर ली.

इंसपेक्टर संजीव कटियार ने ब्लाइंड मर्डर का परदाफाश करने और आरोपी को पकडऩे की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी तो एसपी (ग्रामीण) डा. अरविंद कुमार व डीएसपी जितेंद्र सिंह ने पुलिस सभागार में संयुक्त प्रैसवार्ता की और रजनी हत्याकांड का खुलासा किया.

चूंकि रक्षपाल ने रजनी की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था और आलाकत्ल कुल्हाड़ी भी बरामद करा दी थी, अत: एसएचओ संजीव कटियार ने रक्षपाल को हत्या के जुर्म में बीएनएस की धारा 103(1) के तहत विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. पुलिस जांच में अधेड़ उम्र की महिला के इश्क की सनसनीखेज कहानी प्रकाश में आई.

उत्तर प्रदेश के झांसी जनपद की मऊरानीपुर तहसील के अंतर्गत एक गंाव है- पिपरी. इसी पिपरी गांव में राजाराम जाटव सपरिवार रहता था. उस के परिवार में पत्नी देवकली के अलावा बेटा राकेश तथा बेटी रजनी थी. राजाराम भूमिहीन था. वह दूसरे के खेतों में मजदूरी कर परिवार की दो वक्त की रोटी जुटा पाता था.

राजाराम की बेटी रजनी खूबसूरत थी. जवान हुई तो उस की खूबसूरती में और भी निखार आ गया था. जवान बेटी पर किसी की बुरी नजर पड़े, इस के पहले ही वह उस के हाथ पीले कर देना चाहता था. उस ने बेटी के लायक लड़के की खोज शुरू की तो उसे भूपत पसंद आ गया.

भूपत अहिरवार झांसी जनपद के गांव बुढ़ाई के रहने वाले करन अहिरवार का बेटा था. परिवार में पत्नी फूलादेवी के अलावा इकलौता बेटा भूपत था. करन के पास 2-3 बीघा खेती की भूमि थी.

भूपत उम्र में रजनी से बड़ा था, फिर भी राजाराम ने उसे अपनी बेटी के लिए पसंद कर लिया था. वर्ष 2014 के फरवरी माह में रजनी का विवाह भूपत के साथ हो गया.

रजनी भूपत की दुलहन बन कर ससुराल आ गई. साधारण रंगरूप वाला भूपत रजनी जैसी खूबसूरत पत्नी पा कर बेहद खुश था, लेकिन रजनी उदास थी. क्योंकि उस ने जैसे पति की कामना की थी, भूपत वैसा नहीं था.

शादी के बाद रजनी के कुछ दिन तो हंसीखुशी से बीते, उस के बाद वह उदास रहने लगी. उदासी का कारण था घर की गरीबी. उस का पति भूपत इतना नहीं कमा पाता था कि वह उस की महत्त्वाकांक्षाओं को पूरा कर सके.

समय बीतते रजनी ने एक के बाद एक 3 बेटियों व एक बेटे दिव्यांश को जन्म दिया. 4 बच्चों के जन्म के बाद घर का खर्च और बढ़ गया. भूपत अब बच्चों के पालनपोषण के लिए हाड़तोड़ मेहनत करने लगा.

इन्हीं दिनों भूपत को ग्राम प्रधान के सहयोग से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गांव के पूर्वी छोर पर मकान मिल गया. इस के बाद भूपत पिता का पुश्तैनी मकान छोड़ कर उसी मकान में रहने लगा. रजनी को सासससुर की बंदिशों व तानों से छुटकारा मिल गया था, इसलिए वह खुश थी. जबकि भूपत मांबाप का सहारा छिन जाने से उदास था. हालांकि दोनों परिवार एकदूसरे के संपर्क में रहते थे.

गांव में रह कर भूपत इतना नहीं कमा पाता था कि वह बीवीबच्चों को खुशहाल रख सके. अत: उस ने शहर जा कर कमाई करने की सोची. उस के पड़ोसी गांव के कई युवक हरियाणा के रोहतक में काम करते थे. भूपत ने उन युवकों से बात की तो वे उसे साथ ले जाने को राजी हो गए. उस ने रोहतक जा कर कमाई करने के बाबत मातापिता व पत्नी से रायमशविरा किया तो वे भी राजी हो गए.

वर्ष 2023 की दीपावली के बाद भूपत गांव के युवकों के साथ रोहतक चला गया, जहां वह मजदूरी करने लगा. अब वह जो कमाता पत्नी को भेज देता. रजनी उन पैसों से बच्चों का पालनपोषण करती. कभीकभार सास के हाथों पर भी चार पैसा रख देती. कमाई के चक्कर में भूपत घर का रास्ता ही भूल गया. अब वह साल में 2 बार ही घर आता.

भूपत परदेस कमाने गया तो रजनी पति सुख से वंचित रहने लगी. उस का दिन तो बच्चों के कोलाहल से बीत जाता, लेकिन रात तनहाई में बीतती. रजनी ने कुछ माह तो तनहाई में काटे, उस के बाद उस का मन भटकने लगा. वह किसी ऐसे युवक की तलाश में रहने लगी, जो उस की तनहाई दूर कर सके.

35 वर्षीया रजनी 4 बच्चों की मां जरूर थी, लेकिन यौनाकर्षण बरकरार था. उसे देख कर कोई अनुमान नहीं लगा सकता था कि वह 4 बच्चों की मां है. उस का गोरा रंग, बांकी चितवन व भरा हुआ बदन किसी को भी आकर्षित करने में काफी था. वह जब खेत को निकलती तो मनचले उसे मुड़मुड़ कर देखते थे.

रजनी के घर से कुछ फासले पर रक्षपाल बघेल रहता था. वह शादीशुदा व 4 बच्चों का बाप था. रक्षपाल मनचला था. वह जब रजनी के घर के सामने से गुजरता था तो एक नजर रजनी पर जरूर डालता और मुसकरा कर आगे बढ़ जाता था. रक्षपाल रजनी के मन को भाता था. वह हट्टाकट्टा भी था और संपन्न भी. रजनी को उम्मीद थी कि रक्षपाल उस की दोनों जरूरतें पूरी कर सकता है. अपनी इसी सोच के तहत रजनी ने रक्षपाल को रिझाने के उपाय शुरू कर दिए.

रक्षपाल रंगीनमिजाज था. उसे रजनी का मन समझते देर नहीं लगी. एक दिन रजनी भड़काऊ शृंगार कर के दरवाजे पर बैठ गई. कहीं जाने के लिए रक्षपाल उधर से गुजरा तो रजनी के रूप की धार देख कर उस के कदम ठिठक गए.

”आज किस पर बिजली गिराने का इरादा है?’’

रजनी मुसकराई, ”मैं गरीब औरत किस पर बिजली गिराऊंगी. सुना है बिजलियां तो तुम गिराते फिरते हो.’’

रक्षपाल को स्त्री का मन खूब भाता था. वह उस से बोला, ”दरवाजे पर ही खड़ा रखोगी क्या? घर में बैठा कर चाय नहीं पिलाओगी?’’

रजनी दरवाजे से उठते हुए बोली, ”बेहिचक आ जाओ, घर में कोई नहीं है.’’

अंतिम 5 शब्दों के उच्चारण पर रजनी ने विशेष जोर दिया. रंगीले रक्षपाल के रक्त में रति भ्रमण करने लगी. उस ने दरवाजा बंद किया और रजनी को बांहों में भींच लिया. रजनी स्वयं को छुड़ाने की कमजोर सी कोशिश करती हुई बोली, ”यह क्या कर रहे हो, छोड़ो मुझे.’’

”मेरी जान, मैं ने तुम्हें छोडऩे के लिए नहीं पकड़ा है,’’ रक्षपाल रजनी के गालों पर होंठ फिराते हुए फुसफुसाया, ”मैं वही कर रहा हूं, जो तुम चाहती हो.’’

”मैं क्या चाहती हूं?’’ रजनी ने रक्षपाल की आंखों में देखा.

”मेरी बांहों में मस्त होना चाहती हो तुम,’’ कहते हुए रक्षपाल ने उसे बांहों में जकड़ लिया. रजनी ने कुछ क्षण बनावटी विरोध किया. उस के बाद खुद भी सहयोग करने लगी. फिर तो कमरे में सिसकारियां गूंजने लगीं. कुछ ही देर में दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कर लीं.

इस के बाद तो रजनी के लिए रक्षपाल ही सब कुछ हो गया. रक्षपाल को जब भी मौका मिलता, वह रजनी के घर जा कर उस के शबाब सागर में गोता लगा आता. रजनी भी रक्षपाल का सान्निध्य पा कर खुश रहने लगी. उस ने पति भूपत को दिल से निकाल दिया और रक्षपाल को बसा लिया.

रजनी और रक्षपाल मिलन में बेहद सतर्कता बरतते थे. इसी उद्देश्य से रक्षपाल ने रजनी को एक मोबाइल फोन खरीद कर दिया था. जिस रात उन्हें मिलना होता, उस रात रजनी बच्चों को दूसरे कमरे में सुला देती, फिर फोन कर रक्षपाल को बुला लेती.

चंद महीने बाद ही रजनी रक्षपाल की दीवानी बन गई. उस ने रक्षपाल से कहा कि उस की मांग में सिंदूर भर कर उसे पत्नी का दरजा दे कर किसी दूसरे शहर ले जाए. वह अपने पति व बच्चों को छोडऩे को तैयार थी.

लेकिन रक्षपाल न उस की मांग में सिंदूर भरने को राजी हुआ और न ही परिवार से नाता तोडऩे को. इस पर रजनी तुनक गई और रक्षपाल पर दबाव बनाने लगी. रक्षपाल ने उसे हर तरह से समझाया, लेकिन रजनी जिद पर अड़ गई. तब रक्षपाल ने उस की हत्या का प्लान बनाया.

22 मई, 2026 की रात जब रजनी ने उसे बुलाया और बहस करने लगी, साथ ही झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने लगी तो रक्षपाल का गुस्सा बढ़ गया और उस ने कुल्हाड़ी से वार कर रजनी को मौत की नींद सुला दिया.25 मई, 2026 को पुलिस ने आरोपी रक्षपाल बघेल को झांसी कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया. मृतका रजनी के चारों बच्चे दादादादी के संरक्षण में रह रहे थे.

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