Hindi Crime Story: गीता को पाने के बाद वारिस की नजर दयारानी की करोड़ों की संपत्ति पर थी, जो उस की मौत के बाद गीता को मिलने वाली थी. इस के लिए उस ने जो चाल चली, क्या वह ठीक थी?
उस दिन सुबह के तकरीबन 7 बजे गीता की आंखें खुलीं तो घर में सन्नाटा पसरा था. जबकि रोजाना उस के उठने से पहले ही दयारानी उठ चुकी होती थीं. वह जल्दी उठती थीं और उन के उठते ही लोगों का आनाजाना शुरू हो जाता था, जिस से घर में चहलपहल शुरू हो जाती थी. लेकिन उस सुबह घर में निहायत खामोशी छाई थी. दयारानी अभी तक सो रही हैं, यह उस के लिए हैरानी की बात थी. मन में सवाल आए तो उस के कदम दयारानी के बैडरूम की ओर बढ़ गए. कमरे का दरवाजा खुला था. वह अंदर पहुंची और जैसे ही उस की नजरें बिस्तर पर पड़ीं, वह चीख पड़ी. दयारानी का शरीर खून में डूबा बिस्तर पर पड़ा था.
गीता की चीख सुन कर घर में मौजूद दयारानी की शिष्या शमा भाग कर उस के पास आ गई. कमरे के अंदर का नजारा देख कर उस का भी हाल गीता जैसा ही हुआ. उन की चीखें सुन कर आसपास के लोग भी भाग कर आ गए थे. कुछ लोगों ने दयारानी को हिलाडुला कर देखा, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. उन की मौत हो चुकी थी. अब लोगों की जुबान पर एक ही सवाल था कि आखिर घर के अंदर घुस कर दयारानी को किस ने इस तरह बेरहमी से मार डाला? गीता दहाडे़ मार कर रो रही थी, ‘‘पता नहीं किस ने ऐसा कर डाला? ऊपर वाला उसे कभी माफ नहीं करेगा.’’






