Dehradun Crime: नादान शालू की रवि राजपूत से दोस्ती हो गई, जिसे रवि प्यार समझ बैठा. परेशानी तब हुई, जब इस प्यार ने रवि को जुनूनी बना दिया. वह शालू को भगा कर अपनी दुनिया बसाना चाहता था. एक रात वह शालू को भगा ले जाने के इरादे से आया तो शालू ने इंकार कर दिया. दोनों की इस जिद में शालू की जान गई तो रवि अपराधी बन गया.

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की पौश कालोनी पाम सिटी में लोगों की एक से बढ़ कर एक कोठियां और फ्लैट्स हैं. इन्हीं कोठियों में से कोठी नंबर 91 के.के. अरोड़ा की है. खुशमिजाज शख्स के तौर पर पहचाने जाने वाले के. के. अरोड़ा पेशे से प्रौपर्टी डीलर थे. वह होटल कारोबार से भी जुड़े रहे हैं. हर शख्स चाहता है कि उस का परिवार खुश रहे, आर्थिक रूप से संपन्न अरोड़ा भी इस चाहत को पूरा करने के लिए हर संभव कोशिश करते थे.

उन के परिवार में पत्नी लक्ष्मी के अलावा 2 बेटियां थीं, शालू व शालिनी और एक छोटा बेटा विशाल. शालू शहर के ही एक कालेज में इंटर की छात्रा थी. उस के दोनों भाईबहन भी पढ़ाई कर रहे थे. अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस यह परिवार बेहद खुशहाल था. किस की जिंदगी में खुशियों का सूरज कब रेशमी किरणें फैलाने लगे और कब शाम का रंग लाल हो कर दिल दहला जाए, कोई नहीं जानता. 21 जून, 2015 को विश्व योग दिवस मनाया जाना था. इसे ले कर शहर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाने थे. के. के. अरोड़ा को भी एक ऐसे कार्यक्रम में भाग लेने के लिए जाना था, जहां सामूहिक रूप से योगा किया जाना था. उस दिन वह भोर में करीब साढ़े 5 बजे जाग गए थे.

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