वरदीवाला दिलजला : प्रेमिका और उसके मंगेतर की हत्या
प्रीति उम्र के उस पड़ाव पर थी, जहां एक मामूली सी चूक भविष्य के लिए नासूर बन जाती है. अगर वह समझदारी से काम ले कर वक्त पर दिनेश से संबंधविच्छेद कर लेती तो न तो वह जान से जाती और न उस का निर्दोष मंगेतर सुरेंद्र चौहान मारा जाता.
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