— भारत भूषण श्रीवास्तव

Bhopal Bank Robbery. अजय और आशीष न तो ज्यादा पढ़ेलिखे थे और न ही बहुत बड़े अपराधी थे. फिर भी उन्होंने मात्र 9 मिनट में साधारण हथियारों से जिस तरह बैंक को लूट लिया, वह हैरान करने वाली बात थी.

30 मार्च, 2016 को शाम के लगभग पौने 5 बजे का वक्त था. भोपाल के होशंगाबाद रोड स्थित कालोनी बाग मुगालिया की यूको बैंक शाखा के कर्मचारी क्लोजिंग का काम निपटाने में लगे थे.

सन 2009 में खुली इस ब्रांच की गिनती शहर की अच्छी ब्रांचों में होती थी. यहां रोजाना करीब 10 लाख रुपए का लेनदेन होता था. यहां का पिछले साल का टर्नओवर 52 करोड़ रुपए था. शाखा में 7 हजार खाते हैं, फिर भी शाखा प्रबंधक चाहते थे कि यह संख्या 10 हजार तक पहुंच जाए.

इस शाखा के प्रबंधक शैलेंद्र सिंह चौहान को इसी साल 28 मार्च को पदोन्नति मिली थी, लिहाजा वह स्टाफ का उत्साह बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे ताकि क्लोजिंग 31 मार्च की रात 8 बजे के पहले हो जाए. 30 मार्च की शाम तक आधे से ज्यादा काम निपट चुका था. उन्हें और स्टाफ को पूरी उम्मीद थी कि दूसरे दिन शाम तक बगैर किसी अड़चन के क्लोजिंग पूरी हो जाएगी.

तब तक इस शाखा में मौजूद पांचों कर्मचारियों को रत्ती भर भी इल्म नहीं था कि एक बहुत बड़ी आफत धीरेधीरे उन की शाखा की तरफ बढ़ रही है.

उस समय तक ग्राहकों के लेनदेन का वक्त खत्म हो चुका था, इसलिए सभी कर्मचारी अपनाअपना काम निपटा कर घर जाने की सोच रहे थे. मैनेजर शैलेंद्र सिंह और असिस्टैंट मैनेजर उदित वर्मा जरूरी काम से फील्ड विजिट पर गए हुए थे.

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