हुस्न और नशे के जाल में फंसा खिलाड़ी – भाग 1

घटना मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के आष्टा थाने की है. 12 नवंबर, 2018 को आष्टा के टीआई कुलदीप खत्री थाने में बैठे थे. तभी क्षेत्र के कोठरी गांव का हेमराज अपने गांव के कन्हैयालाल को साथ ले कर टीआई के पास पहुंचा. उस ने उन्हें अपने 29 वर्षीय बेटे नरेश वर्मा के लापता होने की खबर दी.

हेमराज ने बताया कि नरेश कराटे में ब्लैक बेल्ट होने के अलावा पावर लिफ्टिंग का राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी रह चुका है. वह सीहोर में अपना जिम खोलना चाहता था. जिम का सामान खरीदने के लिए वह सुबह 10 बजे के आसपास घर से 4 लाख रुपए ले कर निकला था.

उस ने रात 8-9 बजे तक घर लौटने को कहा था. लेकिन जब वह रात 12 बजे तक भी नहीं आया तो हम ने उस के मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की, पर उस का मोबाइल फोन बंद मिला. उस के दोस्तों से पता किया तो उन से भी नरेश के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली.

नरेश के पास 4 लाख रुपए होने की बात सुन कर टीआई कुलवंत खत्री को मामला गंभीर लगा, इसलिए उन्होंने नरेश की गुमशुदगी दर्ज कर मामले की जानकारी एसपी राजेश चंदेल और एडीशनल एसपी समीर यादव को दे दी.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर टीआई खत्री ने जब हेमराज सिंह से किसी पर शक के बाबत पूछा तो उस ने बादशाही रोड पर रहने वाले सुहैल खान का नाम लिया. उस ने बताया कि सुहैल व उस के बेटे नरेश का वैसे तो कोई मेल नहीं था, इस के बावजूद काफी लंबे समय से नरेश का सुहैल के घर आनाजाना काफी बढ़ गया था.

सुहैल और नरेश की दोस्ती किस तरह बनी और बढ़ी थी, इस बात की जानकारी हेमराज को भी नहीं थी. परंतु लोगों में इस तरह की चर्चा थी कि सुहैल की खूबसूरत बेटी इस का कारण थी और घटना वाले दिन भी नरेश के मोबाइल पर सुहैल का कई बार फोन आया था.

हेमराज ने आगे बताया कि जब देर रात तक नरेश घर नहीं लौटा था तो हम ने सुहैल से ही संपर्क किया. उस ने बताया कि नरेश के बारे में उसे कुछ पता नहीं है. इतना ही नहीं नरेश का अच्छा दोस्त होने के बावजूद सुहैल ने उसे ढूंढने में भी रुचि नहीं दिखाई.

यह जानकारी मिलने के बाद एडीशनल एसपी समीर यादव ने सीहोर कोतवाली की टीआई संध्या मिश्रा को सुहैल की कुंडली खंगालने के निर्देश दिए. टीआई संध्या मिश्रा ने जब सुहैल के बारे में जांच की तो पता चला कि सुहैल कई बार नशीले पदार्थ बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है.

इस के बाद अगले ही दिन पुलिस ने सुहैल के घर दबिश डाली, लेकिन सुहैल घर पर नहीं मिला. घर में केवल उस की बीवी इशरत और बेटा अमन मिले. सुहैल के बारे में पत्नी ने बताया कि उन की तबीयत खराब हो गई थी और वह भोपाल के एलबीएस अस्पताल में भरती हैं.

‘‘उन की तबीयत को क्या हुआ?’’ पूछने पर परिवार वालों ने बताया, ‘‘कभीकभी अधिक नशा करने पर उन की ऐसी ही हालत हो जाती है. इस बार हालत ज्यादा खराब हो गई, जिस से वह कुछ बोल भी नहीं पा रहे थे.’’

यह बात एडीशनल एसपी समीर यादव के दिमाग में बैठ गई. क्योंकि सुहैल की तबीयत उसी रोज खराब हुई, जिस रोज नरेश गायब हुआ था. दूसरे अब तक तो वह तबीयत खराब होने पर बातचीत करता था, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ कि वह बोल भी नहीं पा रहा था.

यादव समझ गए कि वह न बोल पाने का नाटक पुलिस पूछताछ से बचने के लिए कर रहा है, इसलिए उन्होंने आष्टा थाने के टीआई को जरूरी निर्देश दे कर सुहैल से पूछताछ के लिए भोपाल के एलबीएस अस्पताल भेज दिया.

सुहैल से पूछताछ के लिए टीआई कुलदीप खत्री एलबीएस अस्पताल पहुंच गए. उन्होंने वार्ड में भरती सुहैल से पूछताछ की तो उस ने पुलिस की किसी बात का जवाब नहीं दिया.  तब टीआई अस्पताल से लौट आए, लेकिन उन्होंने उस पर नजर रखने के लिए सादे कपड़ों में एक कांस्टेबल को वहां छोड़ दिया.

पुलिस के जाने के कुछ देर बाद सुहैल जेब से मोबाइल निकाल कर किसी से बात करने लगा. यह देख कर कांस्टेबल चौंका और समझ गया कि सुहैल वास्तव में न बोलने का ढोंग कर रहा है. यह बात उस ने टीआई कुलदीप खत्री को बता दी.

अब टीआई समझ गए कि जरूर नरेश के लापता होने का राज सुहैल के पेट में छिपा है. लेकिन सुहैल इलाज के लिए अस्पताल में भरती था. डाक्टर की सहमति के बिना उस से अस्पताल में पूछताछ नहीं हो सकती थी. तब पुलिस ने सुहैल के बेटे और पत्नी को पूछताछ के लिए उठा लिया.

सांप की पूंछ पर पैर रखो तो वह पलट कर काटता है, लेकिन पैर अगर उस के फन पर रखा जाए तो वह बचने के लिए छटपटाता है. यही इस मामले में हुआ.

जैसे ही सुहैल को पता चला कि पुलिस उस के बीवी बच्चों को थाने ले गई है तो वह खुदबखुद स्वस्थ हो गया. इतना ही नहीं, अगले दिन ही वह अस्पताल से छुट्टी करवा कर पहले घर पहुंचा और वहां से सीधे आष्टा थाने जाने के लिए रवाना हुआ. सुहैल भी कम शातिर नहीं था. वह किसी तरह पुलिस पर दबाव बनाना चाहता था. इसलिए आष्टा बसस्टैंड से थाने की तरफ जाने से पहले उस ने सल्फास की कुछ गोलियां मुंह में डाल लीं.

पुलिस को धोखा देने के चक्कर में मौत

सल्फास जितना तेज जहर होता है, उतनी ही तेज उस की दुर्गंध भी होती है. सुहैल का इरादा कुछ देर मुंह में सल्फास की गोली रखने के बाद बाहर थूक देने का था, ताकि जहर अंदर न जाए और उस की दुर्गंध मुंह से आती रहे, जिस से डर कर पुलिस उस से ज्यादा पूछताछ किए बिना ही छोड़ दे. हुआ इस का उलटा. मुंह में रखी एक गोली हलक में अटकने के बाद सीधे पेट में चली गई. इस से वह घबरा गया. उस ने तुरंत थाने पहुंचने की सोची, लेकिन थाने से बाहर कुछ दूरी पर गिर कर तड़पने लगा.

पुलिस को इस बात की खबर लगी तो उसे पहले आष्टा, फिर सीहोर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उपचार के दौरान सुहैल की मौत हो गई. सुहैल की मौत हो जाने से पुलिस को सुहैल की बीवी और बेटे को छोड़ना पड़ा. अब तक पुलिस पूरी कहानी समझ चुकी थी. नरेश के साथ जो कुछ भी हुआ है, उस में सुहैल और उस के परिवार का ही हाथ है.

हकीकत यह जानते हुए भी एडीशनल एसपी समीर यादव को कुछ दिनों के लिए जांच का काम रोक देना पड़ा. कुछ दिन बाद फिर जांच आगे बढ़ी तो सुहैल की बीवी और बेटे से पूछताछ की गई. लेकिन वे कुछ भी जानने से इनकार करते रहे.

प्रेमियों के लिए मचलने वाली विवाहिता

प्रेमियों के लिए मचलने वाली विवाहिता – भाग 3

जल्द ही रीना और सुरेंद्र ग्वालियर के शील नगर में लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगे. सुरेंद्र ने अपने मकान मालिक से रीना का परिचय पत्नी के रूप में करवाया. हालांकि इस फैसले को ले कर रीना को उस की एक सहेली ने काफी समझाया था कि वह गलत कर रही है. सुरेंद्र उस से 13 साल छोटा भी था. किंतु तब तक रीना पर सुरेंद्र के इश्क का भूत ठीक उसी तरह सवार हो चुका था, जिस तरह एक समय में वह कुणाल के इश्क की दीवानी बनी हुई थी.

रीना ने अपने नाबालिग बेटे दीपेश को भी ननिहाल से बुलवा लिया था. उसे सुरेंद्र पास की एक बेकरी में काम पर लगवा दिया था. वह दोपहर बेकरी पर जाता था और रात के 9 बजे सुरेंद्र उसे अपने साथ वापस कमरे पर ले आता था.

कुछ दिनों तक सुरेंद्र ने रीना को अच्छी तरह से रखा. बाद में वह एकएक पैसे के लिए मोहताज रहने लगी. अब उसे कुणाल को छोड़ कर सुरेंद्र की बातों में आने का पछतावा होने लगा था. कुछ दिनों से रीना फिर से कुणाल के संपर्क में आ गई. उन के पुराने रिश्ते फिर से रंग भरने लगे. एकदूसरे के साथ जीवन भर निर्वाह करने के कसमेवादे करने लगे. रीना चाहत थी कि वह कुणाल के पास फिर से रहने लगे.

प्रेमी क्यों बना कातिल?

18 फरवरी, 2023 की दोपहर एक बजे के करीब सुरेंद्र शिवमंदिर में पूजा अर्चना कर के लौटा तो बेडरूम में रीना को कुणाल के साथ हंस हंस कर बातें करते सुन लिया. यह देखते ही उस का खून खौल उठा. रीना की बेवफाई और बेरुखी ने सुरेंद्र के गुस्से को हवा दे दी.

वह रीना को गालियां देते हुए उस के साथ मारपीट करने लगा. इस पर रीना को भी गुस्सा आ गया. वह बोली, ”मैं तुझे छोड़ कर हमेशा के लिए अपने कुणाल के पास जा रही हूं.’’

रीना के मुंह से इतना सुनते ही सुरेंद्र भी गुस्से में बोल पड़ा, ”देखता हूं हरामजादी तू वहां कैसे जाती है.’’

रीना भी कहां चुप रहने वाली थी. वह सुरेंद्र के साथ बदतमीजी से पेश आने लगी. उसे गालियां देने लगी और  बोली, ”तो क्या तू मुझे जबरदस्ती जाने से रोकेगा, कान खोल कर सुन ले कि जहां मेरी मरजी होगी, मैं वहां जाऊंगी. जिस से मेरा मन मिलेगा, वहीं रहूंगी.’’

रीना का इतना कहना था कि सुरेंद्र ने उसे धमकी दी और बोला, ”रीना, जिद मत कर यही तेरे लिए बेहतर रहेगा. वरना मैं भी अच्छे के साथ अच्छा और बुरे के साथ बुरा हूं.’’

”कमीने शिवरात्रि के व्रत के दिन तूने मेरे साथ मारपीट की है. मैं अब किसी भी सूरत में तेरे पास एक भी पल के लिए नहीं रुकने वाली.’’

रीना भदौरिया की यह बात सुरेंद्र को बहुत ही बुरी लगी. उस ने उसे धक्का दे दिया. वह जमीन पर गिर पड़ी. इस बीच सुरेंद्र ने उस की साड़ी को उस के बदन से खींच कर गले में फंदा डाल दिया. वह तब तक साड़ी के फंदे को खींचता रहा,जब तक रीना बेसुध नहीं हो गई. उस के बाद सुरेंद्र मेला घूमने चला गया और रात के करीब 9 बजे उस के बेटे को ले कर कमरे पर आया.

वहां रीना को मृत अवस्था में देख कर परेशान होने का नाटक किया. फिर उस ने अपने एक दोस्त कालू के माध्यम से एंबुलेंस बुलाई. उस पर रीना की लाश रखवा कर उस के गांव इंगुरी भेज दी. साथ में उस के बेटे दीपेश को भी बिठा दिया. सुरेंद्र ने इस की जानकारी रीना के पति दशरथ भदौरिया को फोन पर दे दी

लाश को गांव पहुंचने से पहले ही कुछ दूरी पर एंबुलेंस से उतरवा दी. दीपेश वहां से भागता हुआ अपने पिता दशरथ के पास गया और मम्मी की मृत्यु की सूचना दी.

दशरथ घबराया हुआ लाश के पास पहुंच गया. उस ने जैसे ही रीना के कान से खून और गले पर किसी चीज से कसे जाने के निशान देखे तो उसे हत्या का शक हुआ. उस ने तुरंत पवई पुलिस को इस की सूचना दे दी. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच की तो मामला संदिग्ध नजर आया.

घटनास्थल ग्वालियर होने की वजह से पवई पुलिस ने रीना के शव को मृतका के परिजनों के साथ वापस ग्वालियर भेज दिया. मृतका के परिजन शव को ले कर ग्वालियर थाने पहुंचे तो पुलिस ने मामला दर्ज कर रीना का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

19 फरवरी, 2023 की सुबह ग्वालियर थाने के एसएचओ राजेंद्र परिहार की टीम ने सुरेंद्र धाकड़ को जलालपुर फिल्टर प्लांट से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली. इस टीम में एसआई रमाकांत उपाध्याय, हेमेंद्र राजपूत, योगेंद्र मावई, एएसआई हरिराम नागर शामिल थे. पुलिस के सामने उस ने अपने जुर्म स्वीकार कर लिया.

पूछताछ के बाद सुरेंद्र धाकड़ को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

प्रेमियों के लिए मचलने वाली विवाहिता – भाग 2

दशरथ समझ नहीं पा रहा था कि आखिर रीना कहां गई होगी? वह कुणाल के साथ जब भी कहीं जाती थी, तब उसे इस बारे में बता जरूर बता देती थी.

आखिरकार दशरथ पत्नी एक फोटो ले कर पावई थाने गया. उस ने एसएचओ राजेंद्र सिंह परिहार को पूरी बात बताई और पत्नी की गुमशुदगी दर्ज करवा दी. एसएचओ ने उसी वक्त से रीना की तलाश शुरू कर दी. मामला शादीशुदा महिला की गुमशुदगी का था, इसे देखते हुए पहले भदौरिया परिवार के सभी सदस्यों समेत रीना का मोबाइल नंबर ले कर उन की काल डिटेल्स निकलवाई.

काल डिटेल्स का अध्ययन करने के बाद पता चला कि रीना की बीते दिनों एक अनजान फोन नंबर पर अधिक समय तक बातचीत हुई. वह नंबर कुणाल पांडे का था. इस के बाद दशरथ समझ गया कि जरूर वह कुणाल के पास ही गई होगी.

यह जानकारी मिलते ही दशरथ आटो स्टैंड पर पहुंचा और वहां मौजूद आटो चालकों को जब रीना का फोटो दिखाया तो वहां मौजूद हरिओम नाम के ड्राइवर ने रीना को पहचान लिया. उस ने बताया कि वह महिला उस के आटो में बैठ कर बसस्टैंड तक गई थी, लेकिन वहां से वह कहां के लिए गई होगी, इस बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है.

इस जानकारी के बाद दशरथ ने बस कंडक्टरों को रीना की फोटो दिखा कर पूछताछ की. उन्हीं में से ग्वालियर से बनमौर रूट पर चलने वाली एक बस के कंडक्टर ने बताया कि वह महिला बनमौर तक उस की बस में सवार हो कर गई थी.

दशरथ ने थाने जा कर एसएचओ को सारी बात बताई. पवई पुलिस ने बनमौर बसस्टैंड से संबंधित थाने को इस की सूचना और रीना का फोटो भेज कर वहां लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जानकारी मांगी. जल्द ही एक फुटेज में रीना एक बाइक पर सवार दिख गई, जिसे एक नवयुवक ले जाता दिखाई दिया.

बाइक का नंबर और युवक का चेहरा भी दिख गया था. दशरथ ने उस की पहचान कुणाल के रूप में की. बाइक के नंबर की मदद से पुलिस दशरथ को ले कर कुणाल के पास पहुंच गई.

वहां कुणाल और रीना मिल गए. दशरथ ने रीना को साथ चलने के लिए कहा, लेकिन उस ने उस के साथ जाने से साफ इनकार कर दिया. पुलिस दोनों को थाने ले आई. वहां उन से की गई पूछताछ में रीना ने बताया कि वह अपनी मरजी से कुणाल के साथ आई है और आगे भी उसी के साथ रहना चाहती है.

पति दशरथ भदौरिया के हाथ क्यों रह गए खाली

दशरथ ने उसे बच्चों का हवाला देते हुए साथ चलने की विनती की, लेकिन रीना अपनी जिद पर अड़ी रही. पुलिस ने कागजी काररवाई कर रीना और उस के प्रेमी को छोड़ दिया. दशरथ को इस मामले में अदालती काररवाई की सलाह दी. मायूस दशरथ अपने घर लौट आया.

दशरथ का दिल टूट गया और भारी मन से रीना को उस के प्रेमी के भरोसे छोड़ दिया. तीनों बच्चों को कुछ दिनों के लिए उन के ननिहाल भेज दिया.

रीना भदौरिया और कुणाल के लिए अच्छी बात यह हुई कि दशरथ के रूप में उन के प्यार की बाधा खत्म हो गई थी. कुणाल बनमौर में नौकरी करता था. उस ने अपनी आमदनी से रीना को खुशहाल जिंदगी देने का वादा किया, लेकिन उस ने विवाह की औपचारिकता पूरी नहीं की. न तो उस के साथ मंदिर में जा कर उस के गले में वरमाला डाली और न ही कोर्टमैरिज के लिए कोई पहल की. दोनों का दांपत्य जीवन लिवइन रिलेशन की बुनियाद पर टिक गया.

सब कुछ रीना की महत्त्वाकांक्षा के अनुरूप चलने लगा. रीना ने महसूस किया कि जैसे उसे खुशियों और आजादी के पंख लग गए हों. वह अपनी मनमरजी का जीवन गुजारने लगी थी. लेकिन कहते हैं न कि सुख की समय सीमा बहुत जल्द कम होने लगती है. ऐसा ही रीना के साथ भी हुआ.

कुणाल जब रोजीरोटी के लिए नौकरी और ड्यूटी को प्राथमिकता देने लगा, तब रीना ने कुछ अच्छा महसूस नहीं किया. उसे लगा कि जैसे उस की खुशियां कम हो रही हैं.

कुणाल के साथ रहते हुए उसे कई बार बोरियत भी महसूस होने लगी. कारण कुणाल सुबह 10 बजे खाना खा कर अपनी ड्यूटी पर चला जाता था और रात 8 बजे कमरे पर लौटता था. रीना का घर पर अकेले मन नहीं लगता था. वह खुले विचारों वाली थी. घूमनाफिरना, होटल में खाना खाना, पार्क, मौल आदि में जाने की आदत लगी हुई थी. उस में कमी आने से वह उदास रहने लगी थी.

कुणाल अब छोटीछोटी बातों और घरेलू खर्च को ले कर रीना को जिम्मेदार ठहराने लगा था. रोजाना किसी न किसी बात को ले कर उन के बीच कहासुनी होने लगी थी.

घरेलू क्लेश से रीना दिन भर कमरे में अकेली पड़ी परेशान होती रहती थी. वह विचलित हो जाती थी कि आखिर अपनी पीड़ा किसे सुनाए. वहां कोई भी उस का हमदर्द नहीं था, जिसे अपने गम की बात सुनाए. दिल का दुखड़ा बताए. ऐसे में रीना को अपने लिए गए फैसले पर पछतावा होने लगा. अपने बच्चों और पति की याद भी उसे सताने लगी, लेकिन अब इतना सब हो जाने के बाद पति के पास वापस लौटना संभव नहीं था.

अपनी बदली हुई जिंदगी से निराश रीना की मुलाकात मार्केट में एक दिन सुरेंद्र धाकड़ नाम के युवक से हो गई. वह टैंपो चलाता था. उस की लच्छेदार और मीठी बातों ने रीना का मन मोह लिया था. अंत में रीना ने अपनी आदत के मुताबिक अपना नाम बताया और मोबाइल नंबर भी दे दिया. खुशमिजाज टैंपो वाले ने रीना का कुछ समय की यात्रा में ही दिल जीत लिया था.

कौन बना रीना का अगला प्रेमी

सुरेंद्र ठंडी हवा के झोंके की तरह रीना भदौरिया को छू कर चला गया था. उसे कई दिनों तक उस की बातें याद आती रहीं. एक रोज उस ने उसे फोन कर दिया. रीना उसे बसस्टैंड के मार्केट में आने के लिए बोली. सुरेंद्र तुरंत सौरी बोलता हुआ बोला, ”मैडम, मैं अभी ग्वालियर अपने कमरे पर हूं. आज में अपनी सेवा नहीं दे सकता. माफी चाहता हूं.’’

एक टैंपो चालक द्वारा इस तरह तमीज से बातें करना रीना के दिल को छू गया. 2 दिनों बाद सुरेंद्र एक बार फिर रीना को मार्केट में टकरा गया. कुछ घरेलू सामान के साथ रीना बाजार में सड़क के किनारे बैठी थी. वह खोई खोई थी. तभी सुरेंद्र ने अचानक उस के सामने टैंपो रोक दिया था. एक बार फिर उस रोज के लिए सौरी बोला और हालचाल पूछ बैठा.

रीना अचानक सुरेंद्र को देख कर चौंक पड़ी. कुछ बोलने से पहले ही सुरेंद्र बोला, ”देवी मंदिर चलना है मैडम! आज वहां मेला लगता है. चलिए वहां घुमा लाता हूं. ज्यादा किराया नहीं लूंगा. वैसे भी खाली जा रहा हूं.’’

रीना से जिस मंदिर के बारे में पूछा, संयोग से वह उस के घर के रास्ते में ही आगे कुछ दूरी पर था. तुरंत ही वह सुरेंद्र के साथ जाने के लिए तैयार हो गई.

उस दिन रीना ने महसूस किया कि उस के दिल की बात सुरेंद्र सुन सकता है. उस रोज नहीं चाहते हुए भी रीना मंदिर में कुछ समय सुरेंद्र के साथ रही. उस के साथ पूजा में हिस्सा लिया और पास के एक ढाबे में चायनाश्ता भी किया. यह सब सुरेंद्र को भी अच्छा लगा था.

रीना उस के साथ फोन पर भी बातें करने लगी. अपनी समस्याएं बताने लगी थी, जिस का सुरेंद्र दार्शनिक अंदाज में जवाब देने लगा था. एक दिन सुरेंद्र उसे ग्वालियर अपने कमरे पर ले गया. रीना के कदम पहले से ही बहके हुए थे.

उसे हमेशा महसूस होता था कि वह प्यार की भूखी है. थोड़ी सी हमदर्दी मिलते ही उस ओर मुड़ जाती थी. प्यार पाने की यही लालसा उसे कुणाल तक खींच लाई थी. जब कुणाल से जी ऊबने लगा, तब वह सुरेंद्र में अपना प्यार तलाशने लगी. एक मर्द से दूसरे मर्द की बाहों में जाने के बाद मिलने वाली उपेक्षा और असफलता का उसे कोई मलाल नहीं होता था.

प्रेमियों के लिए मचलने वाली विवाहिता – भाग 1

थोड़ी देर में रीना बस से बनमौर के लिए निकल चुकी थी. उधर उस का प्रेमी कुणाल वहां उस के इंतजार में था. रीना के बनमौर पहुंचने पर उसे बस स्टैंड पर ही कुणाल बाइक लिए खड़ा मिल गया. उसे देख कर रीना के चेहरे पर चमक आ गई. कुणाल ने सहजता से पूछा, ”कोई परेशानी तो नहीं हुई? किसी ने देखा तो नहीं?’’

रीना ने कुछ बोले बगैर कुणाल को अपना बैग पकड़ा दिया. कुणाल ने उसे अपनी गोद में रख कर दोनों हाथों से बाइक का हैंडल पकड़ कर बोला, ”बैठो, दुपट्टा संभाल लेना.’’

इसी के साथ रीना तुरंत बाइक पर बैठ गई. दोनों ने घर पहुंचने से पहले रास्ते में एक ढाबे पर खाना खाया और फिर कुणाल ने उस रात अपनी हसरतें पूरी कीं. रीना भी कुणाल का साथ पा कर निहाल हो गई. दोनों ने बिनब्याह के सुहागरात मनाई.

रीना मध्य प्रदेश के भिंड जिले के इंगुरी गांव के रहने वाले साधारण किसान दशरथ भदौरिया की पत्नी थी. कजरारी आंखों वाली सुंदर पत्नी को पा कर दशरथ बेहद खुश था. रीना की इस खूबसूरती का दीवाना उस के पति दशरथ के अलावा एक और युवक कुणाल पांडे भी था.

वह इंगुरी का नहीं था, लेकिन रीना और दशरथ के पड़ोस में रहने वाले शुक्ला परिवार में उस का अकसर आनाजाना लगा रहता था. एक दिन उस की भी नजर रीना पर पड़ गई. तभी से वह उस का दीवाना हो गया था.

शादीशुदा होने के बावजूद क्यों बहकी रीना

पहली बार में ही दोनों के दिलोदिमाग में खलबली मच गई थी. उन्होंने एकदूसरे के प्रति खिंचाव महसूस किया था. कुणाल कुंवारा था, उस ने कुंवारेपन की कसक के साथ रीना की सुंदरता और कमसिन अदाओं को महसूस किया था.

कुणाल के बांकपन और बलिष्ठ देह को देख कर रीना के दिमाग के तार भी झनझना उठे थे. दिल की धड़कनें तेज हो गई थीं. गुदगुदी होने लगी थी. उस से मिलने को बेचैन हो गई थी, जबकि वह 7 साल की ब्याहता थी, 3 बच्चे थे. उस की कुछ हसरतें थीं, जो पूरी नहीं हो रही थीं. वह खुद को खूंटे से बंधी गाय ही समझती थी.

ऐसा लगता था जैसे उस के सारे मंसूबे धरे के धरे रह जाएंगे. जवानी यूं ही सरकती चली जाएगी. मनचाही खुशियां नहीं मिल पाएंगी. एक दिन कुणाल से मिलने के बाद तो उस का मन और भी बेचैन हो गया था. रीना और कुणाल के बीच पनपे प्यार के बढऩे का यह शुरुआती दौर था, किंतु जल्द ही दोनों एकदूसरे के काफी करीब आ गए. यहां तक कि कुणाल उसे अपनी बाइक से जबतब पास के शहर ले कर जाने लगा. इस में उस के पति दशरथ की सहमति थी.

वह कुणाल को सिर्फ पड़ोसी शुक्लाजी का रिश्तेदार और अपना हमदर्द समझता था. इस वजह से वह कुणाल पर भरोसा करता था. जब भी रीना कुछ खरीदारी करने के लिए शहर जाने की बात कहती थी, तब वह उसे कुणाल के साथ जाने की अनुमति दे देता था. किंतु उसे इस बात का जरा भी आभास नहीं था कि रीना क्या गुल खिला रही है.

कुणाल और रीना एकदूसरे को बेहद चाहने लगे थे. रीना अपना दिल पूरी तरह से कुणाल को सौंप चुकी थी. दूसरी तरफ दशरथ के साथ उस की जिंदगी उबाऊ बनती जा रही थी. घर में छोटीछोटी बातों को ले कर चिकचिक होने लगी थी.

रीना जब कभी कुणाल के साथ किसी रेस्टोरेंट में एक साथ कोई पसंदीदा डिश खा रही होती, तब चम्मच से निवाले के साथसाथ अपनी सारी समस्याएं भी उस से साझा कर लेती थी. कुणाल उस के इसी प्रेम का दीवाना बन चुका था और उस के साथ अपनी हसरतें पूरी करने का हसीन सपना देखने लगा था. उस पर पैसा खर्च करने में जरा भी कंजूसी नहीं करता था.

कुणाल मध्य प्रदेश के औद्योगिक इलाके बनमौर में रहता था. वह वहीं एक कंपनी में काम करता था. रीना का गांव बनमौर से करीब 400 किलोमीटर दूर था. इस कारण उन का मिलनाजुलना महीने 2 महीने में ही हो पाता था, लेकिन वे फोन से अपने दिल की बातें करते रहते थे.

कुणाल एक बार करीब 3 महीने बाद रीना से मिला था. तब बातोंबातों में रीना ने लंबे समय बाद मिलने के शिकायती लहजे में साथ रहने की बात रखी. कुणाल भी चुप रहने वाला नहीं था, झट से बोल पड़ा था, ”मैं तो हमेशा तैयार हूं. मेरे पास बनमौर आने का फैसला तुम्हें लेना है.’’

”पति को क्या कहूं?’’ रीना मासूमियत के साथ बोली.

”दशरथ को साफसाफ हमारे तुम्हारे प्रेम के बारे में बता दो.’’ कुणाल ने समझाया.

”लेकिन मैं कैसे कहूं उस से. कहने पर बच्चों का हवाला दे कर रोक देगा.’’ रीना बोली.

”तो फिर एक ही उपाय है,’’ कुणाल ने कहा.

”वह क्या?’’ रीना ने सवाल किया.

”उसे बिना बताए मेरे पास चली आओ… जब वह हम लोगों से मिलेगा, तब उसे हाथ जोड़ कर समझा देंगे.’’ कुणाल ने समझाया. उस के बाद वह बनमौर लौट गया.

रीना कई दिनों तक उलझी रही. कभी बच्चे का विचार सामने आ जाता था तो कभी पति के साथ गुजर रही रूखी जिंदगी. वह काफी उलझन में थी. उसे डर लगने लगा था कि घर छोड़ कर कुणाल के पास जाना कहीं भविष्य में उस के लिए कोई खतरा न बन जाए.

काफी सोचविचार करने के बाद रीना ने एक रोज कुणाल को फोन कर कहा, ”आज दोपहर मैं ने घर की देहरी लांघने का फैसला कर लिया है.’’

रीना भदौरिया के इस फैसले पर कुणाल ने उसी वक्त आगे की योजना समझा दी. अगले रोज दोपहर के समय रीना तेजी से घरेलू काम निपटाने में लगी हुई थी. घर में कोई नहीं था. पति खेत पर गया हुआ था और बच्चे स्कूल जा चुके थे. वह बरतनों को साफ करने और करीने से रखने के बाद फटाफट अपने बैग में कपड़े ठूंसने लगी. पति की नजरों से बचा कर रखे गए कुछ पैसे भी बैग में संभाल कर रख लिए. फिर वह बस पकड़ कर प्रेमी कुणाल के पास पहुंच गई.

उधर दशरथ अपने बच्चे के साथ बेचैन था. उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर रीना अचानक बिना कुछ बताए कहां चली गई. दशरथ रीना को बारबार फोन मिला रहा था, वह स्विच्ड औफ आ रहा था. दशरथ ने इटावा में रीना के मायके से संपर्क किया. वहां रीना के नहीं पहुंचने की जानकारी से वह बेचैन हो गया कि अखिर वह कहां चली गई? उस का फोन क्यों बंद आ रहा है?

दशरथ आसपास के लोगों से भी पत्नी के बारे में पूछताछ कर चुका था. ससुराल में कई बार फोन करने पर हर बार निराशा ही हाथ लगी थी. यहां तक कि शुक्लाजी के यहां जा कर कुणाल के आने के बारे में भी पूछा था. उन से मालूम हुआ था कि वह महीनों से उन के पास नहीं आया है.

प्रेमी की खातिर : पति को दी मौत

मध्य प्रदेश के जिला ग्वालियर के अशोक नगर में स्थित त्रिकाल चौबीसी जैन मंदिर हिंदुस्तान भर में  प्रसिद्ध है. इस के अलावा यहां उत्पन्न होने वाले शरबती गेहूं की वजह से इस शहर की विश्व भर में पहचान है. इसी शहर में वार्ड नंबर 15 के अंतर्गत आने वाले हिरियन टपरा पठार मोहल्ला में सौरभ जैन अपने परिवार के साथ रहता था.

पेशे से सौरभ सेल्समैन का काम करता था, अत: सुबह 10 बजे खाना खा कर घर से निकलने के बाद उस का देर रात को ही घर लौटना होता था.

रिचा ने अपने अच्छे व्यवहार से अपनी सास और देवर का मन मोह लिया था. ससुराल में रिचा की सभी तारीफ करते थे, इस से रिचा बेहद ख़ुश थी, रिचा ने अपने दिल में ढेरों सपने संजोए थे. वह दुनिया की वे सब खुशियां पाना चाहती थी, जो एक लड़की चाहती है.

शादी के बाद सौरभ और रिचा बेहद खुश थे. शादी के 9 साल कब बीत गए,पता ही नहीं चला. इसी बीच रिचा एक बेटे की मां बन गई, बेटा पैदा होने के बाद घर में खुशी और बढ़ गई. रिचा का समय बच्चे के लालनपालन में व्यतीत होने लगा.

रिचा अपने जीवनसाथी के साथ ख़ुश थी, लेकिन कोरोना काल में फेसबुक पर चैटिंग के दौरान दीपेश भार्गव से दोस्ती हो जाने के बाद रिचा के व्यवहार में अचानक काफी बदलाव आ गया था, जिस के चलते घर में हर समय कलह रहने लगी.

सौरभ को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि रिचा उस के और उस के घर वालों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रही है. ऐसी स्थिति में आखिरकार वह क्या करे. रोजरोज की किचकिच से परेशान हो कर सौरभ ने एक दिन अपनी मां को रिचा के बदले व्यवहार के बारे में बताया. मां ने बेटे को ही समझाया कि आज नहीं तो कल सब ठीक हो जाएगा.

समय अपनी गति से गुजरता रहा, लेकिन रिचा के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया. दिन प्रतिदिन पति पत्नी में कलह बढ़ती ही गई. रिचा के व्यवहार को देख कर सौरभ सोचता था कि इस से तो वह बिना शादी के ही हंसीखुशी से जीवन गुजार लेता.

27 वर्षीय रिचा जैन बालाजी धाम कालोनी में रहने वाले 35 वर्षीय सौरभ जैन की पत्नी थी. बात तकरीबन 3 साल पुरानी 2020 में कोरोना महामारी में लगे लौकडाउन के समय की है. उसी दौरान रिचा की विदिशा के भटौली निवासी दीपेश भार्गव से फेसबुक पर चैटिंग के दौरान दोस्ती हो गई थी.

रिचा के कहने पर एक दिन दीपेश भार्गव रिचा से मिलने अशोक नगर आया. रिचा के बात करने के खुले लहजे और उस की खूबसूरती से वह बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ. उस पर अपना प्रभाव जमाने के लिए गजब के चालाक दीपेश ने खुद को एक बड़े रईस परिवार से ताल्लुक रखने वाला बताया.

उस ने अपने पिता का विदिशा में बहुत बड़ा इलेक्ट्रौनिक शोरूम होना भी बताया. दीपेश ने रिचा को अपनी बातों के जाल में फंसा कर अपना दोस्त बना लिया था. जैसेजैसे समय गुजरता गया, रिचा और दीपेश की सोच में बदलाव आता गया.

धीरेधीरे उन की दोस्ती प्यार में बदल गई. दोस्ती और प्यार तक तो ठीक था, लेकिन दोनों के कदम मर्यादा की दीवारों को लांघ चुके थे. उन के बीच शारीरिक संबंध तक बन गए थे. हालात बिगड़ने तब शुरू हुए, जब दीपेश रिचा से मिलने उस के घर भी आने लगा और रुकने भी लगा.

अभी तक तो रिचा और दीपेश के संबंध सौरभ और उस के घर वालों से पूरी तरह छिपे हुए थे, क्योंकि रिचा ने ससुराल वालों को दीपेश को अपना मुंहबोला भाई बताया. सौरभ का बेटा भी दीपेश को मामा कहता था, अत: शुरुआत में दीपेश की खूब आवभगत हुई थी.

इसी रिश्ते की आड़ में पति की गैरमौजूदगी में मौका मिलते ही रिचा और दीपेश अपनी हसरतें पूरी कर लेते थे, क्योंकि सौरभ और उस के घर वालों के मन में रिचा के प्रति अविश्वास जैसी कोई बात नहीं थी. हालांकि रिश्तों के विश्वास के मामले में सौरभ अपने ही घर में पत्नी से धोखा खा रहा था.

ऐसी बातें छिपी नहीं रहतीं, एक दिन सौरभ ने रिचा और दीपेश को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया तो उस ने रिचा को जम कर लताड़ा और उसे ऊंचनीच समझाई तो मौके की नजाकत को समझते हुए रिचा ने दीपेश से अपने रिश्ते खत्म करने की बात कह कर झूठी कसमें भी खा लीं और वादा किया कि वह आइंदा ऐसा कुछ भी नहीं करेगी, लेकिन वह उस पर लंबे समय तक कायम नहीं रह सकी.

कसमें और वादे मात्र दिखावा थे, बात आईगई हो गई. उधर रिचा और दीपेश का प्यार परवान चढ़ा तो रिचा का मोह अपने पति से भंग होने लगा. इतना ही नहीं, उस ने पति के साथ बेवफाई कर डाली. रिचा ने घर से भाग कर लिवइन रिलेशनशिप में रहने का फैसला भी कर लिया था.

पति के पास वापस क्यों आई रिचा

31 मार्च 2022 को मौका मिलते ही रिचा अपने 8 वर्षीय बेटे को अपने साथ ले कर प्रेमी दीपेश के साथ ससुराल से भाग गई. तकरीबन 2 महीने तक रिचा और दीपेश लिवइन रिलेशनशिप में रहे.

एक दिन रिचा ने अपने पति सौरभ को फोन कर के कहा, ”मुझे तुम्हारी बहुत याद आती है, वहीं तुम्हारा बेटा शौर्य भी तुम्हारे पास जाने की हठ करता है. उसे दीपेश के पास रहना कतई अच्छा नहीं लगता. मैं और तुम्हारा बेटा तुम्हारे पास वापस लौटना चाहते हैं.’’

भोलाभाला सौरभ अपनी फरेबी पत्नी के शैतानी दिमाग में मच रही साजिश को नहीं समझ सका, बल्कि रिचा के अंदर आए इस बदलाव से वह काफी खुश हुआ. कोमल दिल के सौरभ ने पत्नी को माफ कर दिया और नए तरीके से जिंदगी शुरू करने का ख्वाब देखने लगा. वह पत्नी रिचा और बेटे शौर्य को पुन: अपने साथ रखने को तैयार हो गया.

रिचा के प्रेमी के पास से लौट कर आने के बाद सौरभ सोचता था कि सब कुछ पहले की तरह ठीक हो जाएगा, मगर ऐसा नहीं हुआ. ठीक होने के बजाए घर में कलह बढ़ गई. रोजरोज की कलह से परेशान हो कर सौरभ रिचा के दबाव में घर वालों से नाता तोड़ कर अशोक नगर के ही हिरियन के टपरा  में किराए पर कमरा ले कर रहने लगा.

यहां पर कुछ दिन रहने के बाद बालाजी धाम और फिर कोलुआ रोड पर रहने पहुंच गया था. यहीं पर रिचा ने अनेक बार ‘दृश्यम’ फिल्म देखने के बाद प्रेमी के साथ मिल कर पति की हत्या की वारदात को अंजाम  देने की योजना बनाई.

इसी योजना के तहत घर वालों से नाता तोड़वाने के बाद उस के हिस्से में मिली 5 बीघा जमीन की जनवरी, 2023 में साढ़े 11 लाख रुपए में बिकवा दी. फिर पति के नाम एक ट्रैक्टर फाइनेंस कराने के बाद पति का जीवन बीमा भी करा दिया. शेष बची रकम अपने नाम करा ली.

किस तरह से दिया हत्या को अंजाम

ट्रैक्टर और जीवन बीमा पालिसी के पैसे हड़पने के लालच में रिचा ने अपने पति के घर वालों से पति का नाता तुड़वाने के साथ ही बोलचाल भी बंद करा दी थी. हालांकि सौरभ मां के बुलाने पर रिचा से छिप कर अपनी मां से मिलने घर पर आता रहता था. सौरभ का छोटा भाई विनीत भी जब तब सौरभ के दोस्तों से सौरभ के हालचाल पूछ लिया करता था.

इत्तफाक से फरवरी माह में सौरभ के हाथ में फै्रक्चर हो गया तो अपनी योजना को अंजाम देने के लिए रिचा ने अशोक नगर के ही दिनेश शर्मा की स्विफ्ट डिजायर कार भोपाल के लिए बुक की.

21 फरवरी, 2023 की सुबह रिचा अपने पति को बेहतर इलाज कराने जाने के बहाने कार ले कर अशोक नगर से पति को ले कर भोपाल के लिए निकली. सौरभ को क्या पता था कि पत्नी और उस के प्रेमी के मन में क्या चल रहा है. खतरे से अंजान सौरभ ने सहज भाव से भोपाल चलने की हामी भर दी.

जैसे ही कार विदिशा जिले के शमशाबाद स्थित कोलुआ गांव में पहुंची, रिचा ने ड्राइवर से यह कहते हुए कार रोकने को कहा कि अब हम लोगों का इरादा बदल गया है. आज सिरोंज में रुकने के बाद दूसरे वाहन से भोपाल जाएंगे, इसलिए तुम अपने पैसे ले लो और अशोक नगर वापस लौट जाओ.

पैसे ले कर ड्राइवर के जाते ही रिचा और उस का प्रेमी सौरभ को सुनसान जगह पर ले गए. फिर दोनों ने बड़ी बेरहमी से पत्थर से सौरभ का सिर कुचल कर मौत के घाट उतार दिया और उस के बाद सौरभ की लाश विदिशा जिले के शमशाबाद की एक खंती में फेंक दी.

इस के बाद वह ससुराल वालों को बिना कुछ बताए प्रेमी के साथ लंबे समय के लिए उज्जैन, अयोध्या, खाटूश्यामजी, शिरडी की तीर्थयात्रा पर निकल गई.

तीर्थयात्रा से लौट कर वह और प्रेमी के साथ सिरोंज में रहने लगी. कुछ समय बाद रिचा के मातापिता भी उस के साथ रहने लगे. रिचा ने 5 जून को बोगस पंचनामा और मृत्यु प्रमाणपत्र तक बनवा लिया. 5 महीने बाद घर वालों को सौरभ की मौत का पता उस वक्त चला, जब रिचा 10 जुलाई, 2023 को अपने बेटे शौर्य की टीसी लेने के लिए पति का मृत्यु प्रमाणपत्र ले कर उस के स्कूल पहुंची.

तब टीचर ने रिचा से बेटे की अचानक टीसी निकलने की वजह पूछी तो रिचा ने बताया कि शौर्य के पिता का एक्सीडेंट हो जाने से निधन हो गया है, इस वजह से टीसी चाहिए.

सौरभ की हत्या की बात कैसे आई सामने

वह शिक्षिका सौरभ के पैतृक घर के पड़ोस में ही रहती थी. इसलिए उसे रिचा की बात पर भरोसा नहीं हुआ तो उस ने रिचा से कहा कि टीसी तो आप को कल मिल सकेगी. स्कूल से लौटने पर शिक्षिका ने सौरभ की मां को बताया कि आज सौरभ की पत्नी रिचा स्कूल आई थी. बता रही थी कि सौरभ का एक्सीडेंट हो जाने से निधन हो गया है.

यह सुनते ही मां सन्न रह गई. सौरभ की मां ने किसी तरह अपने आप को संभाला और अपने छोटे बेटे विनीत को इस बारे में बताया. विनीत को भी विश्वास नहीं हुआ कि उस के भाई का निधन हो गया है. वह असलियत का पता लगाने के लिए दूसरे दिन अपने भतीजे शौर्य के  सेंट थामस स्कूल जा पहुंचा.

जैसे ही सौरभ की पत्नी रिचा बेटे की टीसी लेने स्कूल पहुंची, विनीत ने भाभी से पूछा कि भैया कहां हैं?

रिचा ने बेझिझक हो कर बताया कि उन का तो 21 फरवरी, 2023 को ही ऐक्सीडेंट में निधन हो गया. उन का वहीं पर अंतिम संस्कार कर दिया था.

भाभी के मुंह से यह सुन कर विनीत दंग रह गया. उस से ज्यादा बहस करने के बजाय विनीत ने अपने रिश्तेदारों को इकट्ठा किया और सीधे अशोक नगर के एसपी अमन सिंह राठौड़ से मिलने उन के कार्यालय में जा पहुंचा.

विनीत ने उन्हें बताया, ”सर, मुझे पिछले 5 महीने से अपने बड़े भाई के बारे में कुछ भी पता नहीं चल रहा है. मुझे अपनी भाभी और उन के प्रेमी दीपेश भार्गव पर शक है कि दोनों ने मिल कर उन की हत्या कर दी है.’’

एसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस मामले का जल्द से जल्द खुलासा करने की जिम्मेदारी कोतवाल नरेंद्र त्रिपाठी को सौंप दी. त्रिपाठी के नेतृत्व में एएसआई अवधेश रघुवंशी, हैडकांस्टेबल शैलेंद्र रघुवंशी तथा टीम के सदस्यों ने कड़ी से कड़ी जोड़ कर फरार रिचा और उस के प्रेमी को गंज बासौदा से गिरफ्तार कर लिया.

उन से थाने में पूछताछ की गई तो पूछताछ के दौरान रिचा और उस के प्रेमी दीपेश ने एक नहीं, कई झूठ बोले थे. उन में सब से बड़ा झूठ तो यही बोला था कि सौरभ की हत्या करने के बाद उस के शव के टुकड़े करने के बाद बालाजी कालोनी में मकान की छत पर जला दिए थे, लेकिन पुलिस की पड़ताल के दौरान उक्त स्थान पर शव जलाए जाने का कोई सबूत नहीं मिला.

फिर रिचा के प्रेमी ने बताया कि सौरभ का अंतिम संस्कार अशोक नगर के श्मशान घाट में किया था. श्मशान घाट का रिकौर्ड देखने पर यह बात भी झूठी साबित हुई, क्योंकि वहां के रजिस्टर में सौरभ का नाम दर्ज नहीं था.

कोतवाल नरेंद्र त्रिपाठी ने रिचा और दीपेश की बताई कहानी पर भरोसा न कर के विदिशा, सागर और गुना पुलिस से 21 फरवरी से 23 मार्च के बीच मिली अज्ञात लाशों के संबंध में वायरलैस पर मैसेज भेज कर जानकारी ली.

इस पर शमशाबाद पुलिस ने बताया कि 23 फरवरी को किसी युवक का शव मिला था. वह फोटो सौरभ के भाई को दिखाए तो फोटो देखते ही उस ने शव की शिनाख्त बड़े भाई सौरभ जैन के रूप में कर दी.

शव की शिनाख्त हो जाने के बाद कोतवाल नरेंद्र त्रिपाठी ने उन दोनों से फिर से पूछताछ की. इस बार सख्ती बरती तो दोनों टूट गए और उन्होंने सौरभ की हत्या की बात कुबूल कर ली. पुलिस ने रिचा और दीपेश के खिलाफ सौरभ की हत्या का मामला दर्ज कर दोनों को अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया.

शातिर दिमाग रिचा और दीपेश भार्गव को उम्मीद थी कि सौरभ की हत्या पहेली बन कर रह जाएगी और वे कभी नहीं पकड़े जाएंगे. उधर अशोक नगर एसपी अमन सिंह राठौड़ ने केस का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की है.

रोमानिया का जालसाज : एटीएम क्लोनिंग से अकाउंट साफ

पति की आशिकी का अंजाम

रोमानिया का जालसाज : एटीएम क्लोनिंग से अकाउंट साफ – भाग 3

भोपाल और इंदौर में बैठे लोगों के मोबाइल पर पैसा निकलते ही मैसेज आने लगे तो लोग चौंक गए कि वह तो कभी दिल्ली गए ही नहीं और एटीएम उन की जेब में है. ऐसे में दिल्ली के एटीएम से किस ने उन के पैसे निकाल लिए. इस के बाद 15 दिन के भीतर 100 से ज्यादा लोगों ने साइबर फ्रौड की शिकायतें इंदौर-भोपाल में कीं.

12वीं पास आयोनियल साइबर फ्रौड करने के मामले में इतना शातिर था कि वह स्कीमर से एटीएम के क्लोन बना लेता था. एटीएम के जरिए किसी के अकाउंट से पैसे निकालने के लिए पासवर्ड जानने  के लिए उस ने फिरोज के जरिए एटीएम मशीन के कीपैड के ऊपर लगने वाले कई प्लेट्स मंगवाए. इन प्लेट्स के बीच में स्पैशल कैमरा फिट किया.

ये कैमरा एक माइक्रो एसडी कार्ड और छोटी बैटरी से कनेक्टेड था. आयोनियल ने कैमरे से लैस प्लेट्स को एटीएम मशीन के कीपैड पर कुछ इस तरह सेट किया कि सीधे इस की नजर पासवर्ड वाले नंबर्स पर ही पड़े.

इस के बाद दोनों सुबह से शाम तक उस एटीएम के बाहर ही भटकते रहते थे, जहां ये डिवाइस फिट करते थे. दोनों कैमरे की बैटरी खत्म होने से पहले ही प्लेट निकाल लेते थे. इस के बाद ट्रांजैक्शन टाइमिंग के हिसाब से हिडन कैमरे में रिकौर्डेड कोड को मैच करते थे. जिस कार्ड का पास कोड मैच होता, उस का क्लोन तैयार कर के रख लेते थे.

आरोपी ने भोपाल आ कर बैंक औफ बड़ौदा के एटीएम बूथों की रेकी की. फिर सुनसान जगह पर लगे बूथ में स्कीमिंग डिवाइस के साथ हिडन कैमरे फिट किए. इस के जरिए उन्होंने डाटा चुराया. इस के बाद वह पुराने गिफ्ट कार्ड का इंतजाम करते थे, इस में चुराए गए खाताधारक का डाटा डिजिटल एमएसआर (एटीएम कार्ड का क्लोन तैयार करने वाली मशीन) से उस में भर देते थे.

इस काम में आयोनियल मिउ माहिर था.उस ने रोमानिया में ही यह सब सीखा था. बाद में हिडन कैमरे की मदद से पिन नंबर हासिल कर लेते थे और फिर क्लोन कर बनाए नए एटीएम से बूथ में जा कर रुपए निकालते थे.

रोमानियन नागरिक आयोनियल मिउ मईजून महीने में भोपाल आया था. इस दौरान रातीबड़ के गांव मैंडारा में औनलाइन ऐप का उपयोग कर वह होम स्टे में रुका था. उसे रुकवाने और कार का इंतजाम फिरोज ही करवाता था. वह अपने ही दस्तावेज उस के नाम के साथ लगाया करता था.

आयोनियल मिउ का पासपोर्ट और वीजा तो पुलिस के पास 6 साल से जब्त है. मिउ पर 2017 में 2 साइबर अपराध मुंबई में दर्ज हैं, फिलहाल वह जमानत पर है, उस की जमानत भी फिरोज ने करवाई थी.

जालसाजों ने बैंक औफ बड़ौदा के एटीएम को ही क्यों चुना

मास्टरमाइंड आयोनियल मिउ रोमानिया और यूरोपियन जालसाजों के गिरोह में रह कर काम कर चुका है. वह विदेश से क्लोनिंग मशीन और हिडन कैमरे ले कर आया था. उक्त क्लोनिंग कियोस्क पुरानी तकनीक की हैं, जो मैग्नेटिक एटीएम कार्ड का डाटा ही कैप्चर कर सकती हैं. बैंक औफ बड़ौदा की कुछ पुरानी एटीएम मशीनें हैं. जालसाज के पास जो मशीनें थीं, वह पुरानी डिजाइंस के एटीएम मशीनों में ही लग सकती थी, इस कारण वह बैंक औफ बड़ौदा के एटीएम कियोस्क को चुनता था.

रोमानिया के आयोनियल के पास जो स्कीमर मशीन थी, वह चिप वाले एटीएम डिवाइस का क्लोन तैयार नहीं कर सकती थी. बैंक औफ बड़ौदा के कुछ खाताधारक अब भी पुराने ढर्रे के एटीएम काड्र्स उपयोग कर रहे थे. पुराने एटीएम कार्ड में चिप नहीं लगी थी, इन के पीछे ब्लैक कलर की एक मैग्नेटिक स्ट्रिप होती थी, जिसे एटीएम मशीन रीड करती थी.

इस के अलावा जिन एटीएम कियोस्क में डिवाइस फिट किए गए, वो भी अपडेटेड नहीं थी. इस कारण यहां से डाटा चुराना आसान था. यही कारण था कि आयोनियल ने बैंक औफ बड़ौदा को चुना.

रोज 50 हजार की कोकीन का सेवन करता था आयोनियल

जालसाज गिफ्ट वाउचर वाले कार्ड को एमएसआर मशीन से एटीएम के रूप में बनाता था. स्कीमिंग डिवाइसेस से एटीएम कार्ड की जानकारी लेता था. उसी समय ग्राहक द्वारा डाले गए पिन नंबर की जानकारी वह मशीन की स्क्रीन के ऊपर लगाए गए हाई रिजोल्यूशन कैमरे से निकाल लेता था. दोनों के डाटा को मैच करने के बाद वह एसएमआर मशीन से उक्त डाटा को गिफ्ट वाउचर के कार्ड में डालता था, जिस के बाद एटीएम कार्ड के रूप में इस्तेमाल कर पैसे निकालता था.

पूछताछ में पता चला है कि जालसाज आयोनियल मिउ ड्रग्स का आदी था. वह रोज 40 से 50 हजार रुपए की कोकीन या अन्य सिंथेटिक ड्रग्स का सेवन करता था. डीसीपी ने बताया कि हैवी ड्रग एडिक्ट होने के कारण भोपाल में जब रहने आया तो करीब एक महीने के उपयोग के लिए अपने साथ दिल्ली से ही बड़ी मात्रा में कोकीन ले कर आया था. बिना पासपोर्ट वीजा का एक अंतरराष्ट्रीय जालसाज भोपाल में किराए के कमरे में एक महीने रहा.

आयोनियल मिउ का पासपोर्ट जब्त होने के कारण भोपाल में फिरोज ने अपने दस्तावेज से मकान किराए पर लिया था.

19 अगस्त, 2023 को भोपाल पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्रा ने बैंक औफ बड़ौदा ठगी मामले का खुलासा एक प्रैस कौन्फ्रैंस में करते हुए बताया कि रोमानिया का रहने वाला आयोनियल केवल कैश में डील करता था. उस का कोई बैंक अकाउंट नहीं है.

पुलिस को फिरोज के कुछ बैंक डिटेल्स हाथ लगे हैं. उस की छानबीन की जा रही है. वहीं दोनों ने फरजी तरीके से 16 लाख रुपए जमा किए थे, जो दोनों ने अय्याशी में उड़ा दिए. दोनों के हर दिन का खर्चा करीबन 60 हजार रुपए था.

दोनों दिल्ली के महंगे होटलों में अय्याशी करने ही पहुंचे थे, लेकिन पकड़े गए. आयोनियल मिउ कोकीन और दूसरे नशे का भी आदी है, उसे ठीक से अंगरेजी नहीं आती, इसलिए पूछताछ में पुलिस को परेशान होना पड़ा.

भोपाल, इंदौर के साथ कई शहरों में जालसाजी करने के बाद वह अपने साथी फिरोज के साथ जयपुर में ठगी करने के लिए ही जाने वाला था. दोनों राजस्थान के जयपुर में रैकी भी कर चुके थे, लेकिन उस से पहले ही दबोच लिए गए. भोपाल पुलिस ने दोनों से पूछताछ करने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

रोमानिया का जालसाज : एटीएम क्लोनिंग से अकाउंट साफ – भाग 2

भोपाल पुलिस की टीम जब कंपनी के बताए हुए एड्रेस पर पहुंची तो घर के मकान मालिक ने बताया कि यहां पर फिरोज और आयोनियल मिउ नाम के 2 लोग रहते थे. उन्होंने कुछ दिन पहले ही घर छोड़ा है. इस के बाद पुलिस उस घर की तलाशी में जुटी तो तलाशी के दौरान टीम के एक सदस्य की नजर घर के दरवाजे के पीछे रखे एक डस्टबिन पर गई.

सबूत की उम्मीद में डस्टबिन को पलटा तो उस में एक फूड डिलीवरी की परची मिली. उस परची पर एक मोबाइल नंबर लिखा हुआ था. पुलिस जांच में सामने आया कि वह मोबाइल नंबर फिरोज नाम के शख्स का ही दूसरा नंबर था, जिस की लोकेशन उस समय मुंबई की थी.

टीम ने कुछ दिन दिल्ली में रुक कर दोनों की और जानकारी खंगालनी शुरू कर दी. मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगाया तो 2-3 दिन बाद फिरोज का लोकेशन अलर्ट मिला. वह मुंबई से दिल्ली आ चुका था. वह दिल्ली के पहाडग़ंज के किसी होटल में ठहरा हुआ था.

भोपाल पुलिस की टीम सक्रिय हुई और सीधे उस होटल में दबिश दी. पुलिस टीम को होटल में 2 लोग मिले, जब उन से पूछताछ की तो एक ने अपना नाम फिरोज दूसरे ने अपना नाम आयोनियल मिउ बताया. आयोनियल रोमानिया का रहने वाला था.

पता चला कि फिरोज दिल्ली में किसी लडक़ी से मिलने आया था और आयोनियल भी उस के साथ ठहरा हुआ था. ठगी के दोनों आरोपियों को पुलिस 18 अगस्त, 2023 को दिल्ली से भोपाल ले कर आई और उन से सख्ती से पूछताछ की तो बैंक खातों से ठगी के एक नए तरीके की कहानी सामने आई.

जालसाजों ने भोपाल में इस तरह से बैंक औफ बड़ौदा के 75 खाताधारकों के एटीएम की स्कीमिंग कर दिल्ली के 9 एटीएम बूथों से करीब 16-17 लाख रुपए निकाले. जालसाज लगातार रोमानिया के कई लोगों से संपर्क में था. उस ने एटीएम कार्ड बनाने की विधि औनलाइन सीखी. वह पहले रोमानिया और यूरोपीय देशों में सक्रिय साइबर फ्रौड करने वाले गिरोह के साथ काम करता था.

रोमानिया से भारत आया था जालसाज

पुलिस पूछताछ में 50 साल के आयोनियल ने कुबूल किया कि वह 2015 में टूरिस्ट वीजा पर भारत घूमने आया था. उसे भारत में उपयोग हो रहे एटीएम और उस की पुरानी तकनीक की पूरी जानकारी थी. उस ने बाकायदा इस पर एक स्टडी की हुई थी. वह रोमानिया से सब से पहले मुंबई पहुंचा था. आयोनियल मिउ की मुलाकात जब फिरोज से हुई थी, उस ने टूटीफूटी हिंदी में फिरोज से कहा, ‘‘मुझे रहने के लिए रूम चाहिए.’’

‘‘मैं आप के लिए अपने घर का रूम रेंट पर देने को तैयार हूं.’’ फिरोज ने उसे समझाते हुए कहा.

फिरोज ने यह सोच कर रूम किराए पर दे दिया कि विदेशी नागरिक से अच्छाखासा किराया वसूल कर लेगा. उस ने फिरोज का घर किराए पर लिया था. फिरोज को तब आयोनियल के मंसूबों के बारे में कुछ भी पता नहीं था.

आयोनियल को हिंदी और अंगरेजी ठीक से नहीं आती थी. उसे अपने फ्रौड के काम के लिए भारत में किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी, जो उस के लिए सारी व्यवस्थाएं आसानी से कर दे. उस ने इस के लिए फिरोज को राजी किया. फिरोज के पास उस समय कोई काम नहीं था, तब आयोनियल मिउ ने उसे समझाया, ‘‘मेरे काम में सहयोग करो तो तुम्हें मैं रातोंरात अमीर बना दूंगा.’’

फिरोज के राजी हो जाने के बाद उस ने फिरोज को अपना पूरा प्लान टूटीफूटी भाषा में समझाया. जल्दी अमीर बनने के चक्कर में फिरोज उस का हर तरह से साथ देने को तैयार हो गया था. सब से पहले दोनों ने मुंबई में फ्रौड की शुरुआत की, लेकिन कुछ महीनों के बाद आयोनियल को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर उस का पासपोर्ट जब्त कर लिया.

बिना पासपोर्ट के वह रोमानिया नहीं जा सका. उसे पैसों की जरूरत थी. वह दूसरा कोई काम भी नहीं जानता था, इस के बाद उस ने फिरोज के साथ मिल कर फुलप्रूफ प्लान बनाया. फिरोज उस के लिए गाड़ी, होटल से ले कर और तमाम व्यवस्थाएं जुटाता था.

फिरोज का काम एटीएम बूथों में डिवाइस लगाने, उन्हें निकालने, पैसे निकालने, मकान बुक करने, कार व आटो बुक करने, बाजार से सामान लाने का था. आयोनियल मिउ किसी से फोन पर ज्यादा बात नहीं करता था, वह सिर्फ फिरोज से ही बात करता है, बाकी किसी से संपर्क नहीं रखता, ताकि वह कौन है और क्या करता है, किसी को पता न चल सके.

आयोनियल मिउ रैकी कर टारगेट तय करता था. क्लोनिंग से प्राप्त डाटा को मशीन और लैपटाप के जरिए मिलान करना और मशीन के जरिए नया एटीएम कार्ड बनाने का काम करता था. कई बार वह एटीएम बूथ में जा कर पैसे निकालने का काम भी खुद करता था.

साल 2015 में रोमानिया से भारत आ कर वह दिल्ली में रुका. 2015 में ठाणे के पैठ बाजार थाना क्षेत्र में उस ने इसी तरह की धोखाधड़ी की और गिरफ्तार हो गया. इस के बाद उस ने 2017 में मुंबई में धोखाधड़ी की और फिर पकड़ा गया. गिरफ्तारी के बाद उस का पासपोर्ट जब्त हो जाने के कारण वह अब अवैध रूप से भारत में रह रहा था.

फिलहाल वह दोनों मामलों में जमानत पर है. 2018 में उस का परिवार भारत मिलने आया था. वह नाइजीरिया के कई लोगों से लगातार फोन से संपर्क में रहता था.

बैंक औफ बड़ौदा के एटीएम में फिट किए स्कीमर डिवाइस

मई 2023 में फिरोज और आयोनियल दोनों भोपाल आए, मुंबई निवासी फिरोज अहमद ने अपने पहचान पत्र से भोपाल के डोरा क्षेत्र में औनलाइन एक मकान किराए पर लिया, जिस में दोनों जालसाज करीब एक महीने तक ठहरे थे.

दोनों ने भोपाल में रेकी कर बैंक औफ बड़ौदा के पुराने तकनीक वाले 3 एटीएम बूथों को पहचान कर उन में एटीएम क्लोनिंग मशीन लगाई और मशीन के ऊपर हाई रिजोल्यूशन  कैमरे लगाए. वह एटीएम में सुबह आटो से जाते और क्लोनिंग मशीन और कैमरे लगा कर चले आते थे. शाम को जा कर उपकरण निकाल लाते थे. इस की मदद से लोगों के एटीएम की डिटेल्स और पासवर्ड पता किए.

इस के बाद दोनों 25 जून को इंदौर पहुंचे और यही काम यहां के 2 एटीएम के साथ किया. 3 और 4 जुलाई के दौरान दोनों दिल्ली पहुंचे और वहां कुछ एटीएम कार्ड के क्लोन तैयार किए. इस के बाद 10 जुलाई के बाद दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित एटीएम से पैसे निकाल लिए.