जबरदस्ती का प्यार – भाग 2

पुलिस तुरंत ही उस शख्स के पास पहुंच गई. पुलिस ने नूर हसन को अपनी हिरासत में लेते ही उस की तलाशी ली तो वह मोबाइल नूर हसन के पास निकला. पुलिस ने उस से मोबाइल के बारे में जानकारी ली तो उस ने बताया कि यह मोबाइल उसे उसी रास्ते में मिला था, जहां से सावित्री की लाश मिली थी. लेकिन उसे यह नहीं मालूम था कि यह मोबाइल सावित्री का ही है.

मोबाइल को ले कर नूर हसन ने कई बहाने बनाए,लेकिन पुलिस के सामने उस की एक न चली. पुलिस ने उस से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने सावित्री की हत्या की बात कुबूल ली. इस हत्या का राज खुलते ही पुलिस ने आरोपी नूर हसन की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त ब्लेड, मृतका के मोबाइल के साथ ही अन्य सामान भी बरामद कर लिया था.

ठेकेदार नूर हसन ने कुबुला जुर्म

सावित्री की हत्या वाली बात कुबूलते ही नूर हसन से जो कहानी पुलिस को बताई, वह एक प्रेम प्रसंग भरी, दिल को दहलाने वाली कहानी थी.

उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के बाजपुर कोतवाली अंतरगत एक गांव आता है कनौरी. इसी गांव में रहता था भूप सिंह का परिवार. भूप सिंह पेशे से राजमिस्त्री था. भूप सिंह की शादी कई साल पहले सावित्री के साथ हुई थी. राजमिस्त्री के होने के नाते वह ठीकठाक ही कमा लेता था, जिस से दोनों की आजीविका ठीकठाक चलती रही.

समय के साथ सावित्री एक के बाद एक 3 बच्चों की मां बनी. बच्चों में सब से बड़ा बेटा नरेश, उस के बाद बेटी मोहिनी तथा अजय सब से छोटा था. बच्चे बड़े हुए तो घरगृहस्थी का बोझ भी बढ़ गया था. जिस के कारण परिवार आर्थिक परेशानियों से गुजरने लगा. जब भूप सिंह की कमाई से काम नहीं चला तो सावित्री को भी काम करने पर मजबूर होना पड़ा.

शुरूशुरू में तो भूप सिंह सावित्री को अपने साथ ही काम पर ले जाता था. लेकिन कुछ समय बाद भूप सिंह को शराब पीने की लत लग गई. जिस के कारण मियांबीवी में अनबन रहने लगी थी. इस के बावजूद भी दोनों ने किसी तरह से दिनरात मेहनत कर के अपने बच्चों को पालापोसा.

समय के साथ नरेश बड़ा हुआ तो वह भी अपने पापा के साथ काम पर जाने लगा था. जिस के कारण परिवार की आमदनी बढ़ी तो कुछ पैसा भी इकट्ठा हुआ. उन्हीं पैसों से भूप सिंह ने गांव में 2 कमरों का मकान भी बनवा लिया था. भूप सिंह ने जैसेतैसे कर के एक छोटा सा मकान तो बनवा लिया था, लेकिन मकान बन जाने के बाद उस के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई थी.

उस के बाद उस के बेटे नरेश ने एक ट्रक पर हेल्परी का काम पकड़ लिया. उसी ट्रक पर चलते हुए वह ट्रक चलाना भी सीख गया था. नरेश की शादी हो जाने के बाद भूप सिंह और भी ज्यादा शराब का आदी हो गया था. जिस के व्यवहार से नरेश पूरी तरह से तंग आ चुका था.

उसी समय नरेश की शादी हो गई. शादी हो जाने के बाद वह अपनी पत्नी को साथ ले कर अलग रहने लगा था. नरेश की शादी हो जाने के बाद भूप सिंह के पास अभी 2 बच्चे शादी के लिए और बचे हुए थे. लेकिन शराब की लत के कारण उस के घर में खाने के लाले पडऩे लगे. घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ते देख एक बार फिर से सावित्री को मजदूरी करने पर मजबूर होना पड़ा. उस के बाद वह फिर से ठेकेदार नूर हसन के साथ मजदूरी करने लगी.

आर्थिक सहयोग करने लगा ठेकेदार

नूर हसन अभी कम उम्र का था. सावित्री के साथ काम करतेकरते उसे उस से खास लगाव हो गया था. सावित्री के संपर्क में रहते हुए वह उस की पारिवारिक पृष्ठभूमि से पूरी तरह वाकिफ हो चुका था. सावित्री से लगाव होते ही वह उस की हर तरह से सहायता करने लगा था.

सावित्री का पति भूप सिंह तो पहले ही शराबी थी. इस वक्त तक उस ने काम करना भी छोड़ दिया था. उस दौरान वह कुछ मजदूरी करता भी था तो वह उसे शराब में उड़ा देता था. सावित्री ने उसे बहुत समझाने की कोशिश की, लेकिन वह उस की एक भी सुनने को तैयार न था. यही कारण रहा कि दोनों मियांबीवी के संबंधों में खटास पैदा हो गई थी.

नूर हसन के संपर्क में आते ही सावित्री उसे चाहने लगी थी. धीरेधीरे दोनों के दिलों में चाहत का सैलाब उमड़ा तो जल्दी ही दोनों के बीच अवैध संबंध भी स्थापित हो गए. सावित्री सारे दिन नूर हसन के साथ काम करती. काम खत्म होते ही नूर हसन उसे अपनी कामपिपासा शांत करने के लिए कहीं भी ले जाता था.

उस के बाद वह अपनी बाइक से ही उसे उस के घर भी छोड़ देता था. उसी आने जाने के कारण उस के परिवार से घरेलू संबंध हो गए थे. जिसके कारण सावित्री के परिवार वाले नूर हसन से खुश भी थे. लेकिन नूर हसन का भूप सिंह के घर वक्त बेवक्त आनाजाना गांव वालों को खलने लगा था.

यही कारण रहा कि शराब पीने के दौरान भूप सिंह के शुभचिंतकों ने कई बार उसे नूर हसन के बारे में चेताया, लेकिन वह जानता था कि उस की बीवी उसी के साथ रह कर पैसा कमाती है, जिस से उस के परिवार की रोटी चलती है. यही सोच कर वह काफी समय से सावित्री की तरफ से आंख बंद किए बैठा रहा.

लेकिन जब उस की बीवी और नूर हसन को ले कर गांव में चर्चा होने लगी तो उस ने उसे समझाने की कोशिश की. वह नहीं मानी तो उस ने उस के घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी. उस के बाद आए दिन मियांबीवी के बीच घर के खर्च को ले कर विवाद बढ़ गया. उसी बीच नूर हसन भी सावित्री को बारबार फोन करता रहता था, जिस से भूप सिंह बुरी तरह से चिढऩे लगा था.

ठेकेदार करने लगा शक

सावित्री काफी समय से मजदूरी करती आ रही थी. घर पर रहते उस का टाइम नहीं कटता था. जब सावित्री को बिना काम किए घर पर रहना मुश्किल हो गया तो उस ने फिर से किसी राजमिस्त्री के साथ काम करना आरंभ कर दिया था. यह जानकारी जल्दी ही नूर हसन तक भी पहुंच गई थी.

नूर हसन को जब पता चला कि सावित्री किसी और ठेकेदार के साथ काम कर रही है तो वह बौखला उठा. उस ने कई बार सावित्री को फोन मिलाया, लेकिन उस ने उस का फोन नहीं उठाया. नूर हसन बुरी तरह से उस का दीवाना बन चुका था. जब सावित्री ने उस का फोन नहीं उठाया तो वह उस के काम पर जाने के वक्त उस के गांव के रास्ते में जा कर खड़ा होने लगा.

लिवइन पार्टनर का खूनी खेल – भाग 1

पहली मई, 2023 को जयपुर शहर (पूर्व) के मालपुरा गेट निवासी मुन्नी ने अपनी बेटी रुखसाना उर्फ अफसाना (30 वर्ष) की हत्या का मामला दर्ज कराया था. एसएचओ सतीशचंद्र चौधरी को दी रिपोर्ट में मुन्नी ने बताया था कि उस की बेटी रुखसाना गत 2 साल से सूखाल सवाई माधोपुर हाल निवास शिकारपुरा रोड, सेक्टर-35 सांगानेर निवासी नजलू खान (24 वर्ष) केसाथ रह रही थी.

30 अप्रैल, 2023 को नजलू खान ने रुखसाना से मारपीट की और उसे जयपुरिया अस्पताल जयपुर में भरती करवाया और वहां मौत होने पर सूचना दे कर भाग गया. मुन्नी की तहरीर पर पुलिस ने नजलू खान के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया. इस के बाद थाना मालपुरा गेट के एसएचओ सतीशचंद्र चौधरी मय पुलिस टीम जयपुरिया अस्पताल पहुंचे. वहां पर रुखसाना की लाश मिली.

रुखसाना का इलाज करने वाले डाक्टरों ने पुलिस को बताया कि रुखसाना को नजलू खान अस्पताल ले कर आया था.  उस ने बताया था कि एक्सीडेंट में रुखसाना घायल हो गई है. साथ में कोई लेडीज नहीं थी. इस कारण डाक्टर ने नजलू से कहा कि वह परिवार की किसी महिला को बुला लें.  नजलू ने तब रुखसाना की अम्मी मुन्नी को फोन कर कहा कि रुखसाना का एक्सीडेंट हो गया है, आप जयपुरिया अस्पताल जल्दी आ जाओ.

मुन्नी जब अस्पताल आई, तब तक रुखसाना की मृत्यु हो गई थी. इस के बाद नजलू खान भी अस्पताल से फरार हो गया था. पुलिस ने रुखसाना के शव का पहली मई, 2023 को पोस्टमार्टम मैडिकल बोर्ड से करा कर शव उस की अम्मा मुन्नी को सौंप दिया.

पता चला कि रुखसाना की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रूह कंपा देने वाला सच सामने आया है. घुटनों से वार करने के कारण रुखसाना की दोनों तरफ की 3-3 पसलियां टूट गई थीं. लिवर फट गया था. छाती और पेट पर घुटनों से कई वार किए गए. अंदर इतनी ब्लीडिंग हुई कि पेट में 2 यूनिट से ज्यादा खून जमा हो गया. 18 से अधिक गंभीर चोटें, छोटीमोटी अनगिनत चोटें पाई गईं. लिवइन पार्टनर ने मारपीट इतनी बुरी तरह से की थी कि रुखसाना की मौत हो गई थी.

लिवइन पार्टनर के खिलाफ लिखाई रिपोर्ट

मामला हत्या का लग रहा था. अगर मामला एक्सीडेंट का होता तो नजलू खान फरार क्यों हुआ. मामले को पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया. डीसीपी ज्ञानचंद यादव के निर्देश पर एसएचओ सतीशचंद्र चौधरी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई. पुलिस टीम आरोपी नजलू खान को गिरफ्तार करने के प्रयास में जुट गई.

डीसीपी ज्ञानचंद यादव के निर्देशन में पुलिस ने फरार आरोपी नजलू खान के मोबाइल को ट्रेस करना शुरू किया. सीसीटीवी फुटेज देखे. नजलू खान ने जिन लोगों से 30 अप्रैल, 2023 को बातचीत की थी, पुलिस ने उन लोगों से संपर्क किया. पता चला कि नजलू खान ने पहली मई को पुरानी सिम फेंक कर नया सिम जारी करवाया, लेकिन इस के बावजूद पुलिस से बच नहीं पाया. पुलिस ने पताठिकाना मालूम कर उसे 3 मई, 2023 को हिरासत में ले लिया.

पूछताछ में नजलू खान ने स्वीकार किया कि उस ने रुखसाना के साथ 30 अप्रैल, 2023 को बुरी तरह से मारपीट कर रुखसाना का मर्डर किया था. उस ने पुलिस को बताया कि उसे शक था कि रुखसाना किसी दूसरे आदमी से फोन पर बात करने लगी है. शक के आधार पर ही उस ने रुखसाना को पीटपीट कर मौत के घाट उतार दिया.

जुर्म कुबूल करते ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया आरोपी नजलू खान से कड़ी पूछताछ में रुखसाना हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार से है—

राजस्थान के टोंक जिले के काकोड़ गांव के कमरुद्दीन व मुन्नी की बेटी थी रुखसाना उर्फ अफसाना. मुन्नी के 7 बेटियां हैं. रुखसाना रूपसौंदर्य की मल्लिका थी. वह करीब साढ़े 5 फीट की गोरे रंग की सुंदरी थी. उस की बड़ीबड़ी कजरारी आंखों व खनकती हंसी से जो भी रूबरू हुआ, वह उस का दीवाना हो जाता था. रुखसाना की मीठी बोली थी. जब वह जवान होने लगी तो उस का रूपसौंदर्य खिलता गया. गरीब मांबाप की बेटी को सुंदरता मिले तो कहते हैं कि वह अभिशाप बन जाती है.

टोंक जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर काकोड़ गांव के युवाओं में उस वक्त रुखसाना के रूप की ही चर्चा थी. जब रुखसाना गांव में कहीं काम से निकलती तो लोग उसे मंत्रमुग्ध हो कर देखते रह जाते. बेटी के साथ कहीं कोई ऊंचनीच न हो जाए, इसलिए घर वालों ने रुखसाना की शादी मात्र 14 वर्ष की आयु में निवाई (जिला टोंक) के बबलू खान से कर दी. मात्र 14 बरस की आयु में भी रुखसाना भरेपूरे शरीर के कारण भरीपूरी जवान दिखती थी.

बबलू खान निवाई की पत्थर फैक्ट्री में काम करता था. इस से परिवार का भरणपोषण होता था. शादी के साल भर बाद ही रुखसाना एक बेटे की मां बन गई, जो इस समय 15 बरस का है. इस के बाद रुखसाना के 3 बेटे और हुए 4 बेटों के कारण घरगृहस्थी में खर्चा भी बढ़ गया. मगर कमाई वही थी. पत्थर फैक्ट्री में पत्थर कटिंग के बदले 4 सौ रुपए दैनिक की मजदूरी में. मुश्किल से गुजरबसर हो रही थी.

पत्थर की फैक्ट्री में काम करते समय पत्थर कटिंग से उड़ती धूल उस के गले में जमती गई. कफ रहने लगा. धीरेधीरे पति बबलू खान काफी बीमार रहने लगा और आज से साढ़े 3 साल पहले उस की मौत हो गई. रुखसाना विधवा हो गई. उस के चारों बेटे पिता के साए से वंचित हो गए. पति का इंतकाल होने के बाद घर में फाकाकशी की नौबत आ गई.

कुछ समय तक वह जैसेतैसे ससुराल निवाई में रही. ससुराल वाले उसे पूछते तक नहीं थे. ऐसे में पति की मौत के 6 माह बाद रुखसाना ससुराल छोड़ मायके काकोड़ आ कर मांबाप के पास रहने लगी. मातापिता गरीब थे. मगर दुखियारी बेटी को वे कैसे पनाह नहीं देते, रुखसाना अपने चारों बेटों के साथ करीब साल भर मायके में रही.

इस के बाद रुखसाना ने अपनी मां मुन्नी से कहा, “मां, मैं अब तुम लोगों पर बोझ नहीं बनना चाहती हूं. मैं जयपुर जा कर कोई काम कर लूंगी. उस से अपना और बेटों को भरणपोषण हो जाएगा.”

मां की बात नहीं मानी रुखसाना ने

बेटी के जयपुर जाने की बात सुन कर मां मुन्नी ने कहा, “इतने बड़े शहर में किस के भरोसे रहोगी. जमाना बड़ा खराब है. अकेली जवान औरत कैसे अजनबी शहर में अजनबी लोगों के साथ रह सकेगी. मुझे तो बड़ी चिंता हो रही है. तुम यहीं रहो हमारे पास, जैसेतैसे गुजारा कर लेंगे.”

मां की बात सुन कर रुखसाना बोली, “मां, जिंदगी बहुत लंबी है. कुछ न कुछ तो करना ही होगा. यहां पर मैं कब तक तुम लोगों पर बोझ बनी रहूंगी. अकेली औरतें आज हर काम कर रही हैं, वो अकेली ही रहती हैं. मेरे साथ तो 4 बेटे हैं. मैं अकेली थोड़ी हूं. आप लोग चिंता न करो. ऊपर वाला सब ठीक करेगा.”

“जैसा तू ठीक समझे बेटी. मगर मेरा दिल न जाने क्यों अनहोनी के डर से धडक़ रहा है.” मुन्नी ने शंका जाहिर की. मगर रुखसाना मां को समझाबुझा कर मनाने में कामयाब रही.

जबरदस्ती का प्यार – भाग 1

29 मई, 2023 को सुबहसुबह दोराहा चौकी इंचार्ज देवेंद्र सिंह राजपूत को सूचना मिली कि गांव कनौरा के नजदीक ईदगाह के निकट साबिर हुसैन के गन्ने के खेत में एक औरत की लाश पड़ी हुई है. यह क्षेत्र उत्तराखंड के जिला ऊधमसिंह नगर की बाजपुर कोतवाली के अंतरगत आता है, अत: लाश मिलने की सूचना मिलते ही देवेंद्र सिंह ने तुरंत ही इस की जानकारी बाजपुर कोतवाल प्रवीण सिंह कोश्यारी को दी. उक्त सूचना पर कोतवाल मय फोर्स के घटना स्थल पर पहुंचे.

उस वक्त तक घटनास्थल पर तमाम लोग जमा हो गए थे. मृतक महिला का शव अर्धनग्न अवस्था में पड़ा हुआ था. पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचते ही महिला के ऊपर एक कपड़ा डलवा दिया था. इस के बाद पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. महिला के सिर पर, गले पर चोट के निशान थे, जिन्हें देखते ही लग रहा था कि उस के साथ कोई जोरजबरजस्ती की गई थी. उस के बाद उस की हत्या की गई थी.

महिला के निचले हिस्से के कपड़े भी फटे हुए पाए गए. जिस के कारण उस के साथ दुष्कर्म की आशंका भी जताई जा रही थी. एक औरत की हत्या की जानकारी मिलते ही काशीपुर के एएसपी अभय सिंह, सीओ (बाजपुर) भूपेंद्र सिंह भंडारी व अन्य पुलिस अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे.

सावित्री की हुई हत्या

सब से पहले पुलिस ने मृतक महिला की शिनाख्त कराने की कोशिश की. कुछ ही देर में उस महिला की पहचान भी हो गई. पता चला कि महिला कनौरी निवासी भूप सिंह की पत्नी सावित्री देवी थी. पुलिस ने मृतका के बेटे नरेश को फोन कर के घटनास्थल पर बुला लिया.

पुलिस ने नरेश से जानकारी ली तो उस ने बताया कि वह सुबह ही अपनी गाड़ी ले कर काम पर निकल जाता है. उस की मां राजमिस्त्री के साथ मजदूरी करती थी. उस दिन भी वह हर रोज की तरह से काम पर निकली थी,लेकिन शाम को वह वापस नहीं आई. नरेश ने बताया कि उस ने कई बार उन के मोबाइल पर फोन लगाया, लेकिन वह लगातार बंद आ रहा था. उस के बाद देर रात तक उस ने अपने रिश्तेदारों के साथ मिल कर उसे हर जगह खोजा, लेकिन कहीं भी पता नहीं चला. पुलिस पूछताछ में नरेश ने बताया कि गांव में उस की किसी से कोई दुश्मनी भी नहीं है.

घटनास्थल पर मुआयना करने के बाद पुलिस ने फील्ड यूनिट व डौग स्क्वायड टीम को भी बुला लिया था. जिन के द्वारा घटनास्थल के आसपास निरीक्षण कर सभी सबूत इककट्ठा किए गए. खोजी कुतिया कैटी को मृतका के कपड़े सुंघा कर घटनास्थल पर छोड़ा गया. वह गन्ने के खेत में इधरउधर घूमने के बाद एक राजमिस्त्री ठेकेदार के पास जा कर रुकी. पुलिस ने ठेकेदार के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि मृतका उसी ठेकेदार के साथ मजदूरी करती थी.

पुलिस को लगा कि एक साथ काम करने के कारण भी ऐसा हो सकता है. क्योंकि मृतका हर वक्त उसी ठेकेदार के संपर्क में रहती थी. उस के बावजूद भी पुलिस ने उस ठेकेदार को पूछताछ के लिए अपनी कस्टडी में ले लिया था. पुलिस पूछताछ में उस ठेकेदार ने इस मामले से पूरी तरह से जानकारी होने से साफ मना कर दिया था.

ठेकेदार ने बताया कि वह कई दिन से उस के पास काम पर नहीं आ रही थी. उस के बाद महिला एसआई रुचिका चौहान द्वारा संपूर्ण काररवाई को पूरा करते हुए मृतका की लाश का पंचनामा भरने के बाद उस की लाश को सील कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया था.

इस मामले में मृतका सावित्री के बड़े बेटे नरेश की ओर से लिखित तहरीर दी गई. तहरीर के आधार पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया, जिस की विवेचना इंसपेक्टर प्रवीण सिंह कोश्यारी को सौंपी गई.

4 पुलिस टीमें गठित

सावित्री मर्डर केस की गंभीरता को देखते हुए इस केस को खोलने के लिए 4 टीमों का गठन किया गया था. पहली टीम में सर्विलांस के लिए एसआई भुवनचंद जोशी, कांस्टेबल विनय, दीपक, कैलाश. दूसरी टीम में आसपास में नशा करने वाले संदिग्धों से पूछताछ हेतु व सीसीटीवी फुटेज की जांच करने के लिए एसआई देवेंद्र सिंह राजपूत, विजय सिंह, तीसरी टीम में एसआई भगवान गिरि तथा चौथी टीम में एसएसआई गोविंदा मेहता, एसआई प्रकाश सिंह बिष्ट व कांस्टेबल भूपाल सिंह को शामिल किया गया था.

पुलिस टीमों के गठित होते ही पुलिस ने सब से पहले मृतका के परिवार वालों से पूछताछ की. जिस के द्वारा जानकारी मिली कि मृतक सावित्री देवी पिछले 8-10 साल से सुलतानपट्टी निवासी मकान बनाने वाले ठेकेदार नूर हसन उर्फ नन्हे के साथ काम कर रही थी. दोनों के बीच काफी नजदीकी संबंध भी थे.

28 मई, 2023 को सुबह 9 बजे किसी बात को ले कर दोनों के बीच झगड़ा भी हुआ था. यह जानकारी मिलते ही पुलिस ने नूर हसन को फिर से पूछताछ के लिए हिरासत में लिया. पुलिस ने अपने स्तर से इस मामले को ले कर उस से पूछताछ की तो उस ने इस मामले में किसी भी तरह की जानकारी नहीं दी.

नूर हसन से पुलिस को बताया कि उस ने काफी समय पहले से ही उस के पास से काम छोड़ दिया था. उस के बाद न तो वह उस से कभी मिला और न ही वह उस के पास आई थी. साथ ही उस ने कहा कि वह तो घटनास्थल की तरफ कभी गया भी नहीं. जबकि पुलिस की खोजी कुतिया ने भी सब से पहले पुलिस को चेता दिया था कि मृतका का इस इंसान से नजदीकी का रिश्ता था, फिर भी पुलिस बिना किसी सबूत के नूर हसन को आरोपी साबित नहीं कर सकती थी.

उस के बाद पुलिस टीमें फिर से अपनेअपने कामों में व्यस्त हो गईं. मृतका के निचले हिस्से के कपड़े भी फटे हुए पाए गए थे, जिसे ले कर पुलिस अनुमान लगा रही थी कि कहीं महिला की रेप करने के बाद तो हत्या नहीं कर दी गई. जिस का खुलासा पोस्टमार्टम के बाद ही होना था. इस हत्याकांड के सभी तथ्यों को जोड़ कर एसओजी सहित 5 टीमें लगातार अपनी जांच में लगी हुई थीं.

मोबाइल फोन से मिला सुराग

उसी तहकीकात के दौरान पुलिस को एक खास जानकारी और मिली. पता चला कि सावित्री की हत्या के बाद उस की सहेली सरोज उस के घर वालों से मिलने पहुंची थी. सावित्री की सहेली ने उस के घर वालों को बताया था कि 29 तारीख को उस के मोबाइल पर किसी औरत ने फोन कर के बताया था कि तुम्हारी सहेली सावित्री की हत्या हो गई है. उस की लाश गन्ने के एक खेत में पड़ी हुई है.

सावित्री की हत्या की बात सुनते ही पहली बार तो उसे विश्वास ही नहीं हुआ, लेकिन जब वह तुरंत ही उस के घर पर आई तो उसे पता चला कि सावित्री की किसी ने वाकई में हत्या कर दी है. वह घटनास्थल पर उस की लाश को देखने भी गई. लेकिन वहां पर पुलिस को देख कर वह डर गई.

उस ने वह बात अपने मन ही मन में दफन कर ली थी. उस के बाद यह बात मृतका सावित्री के बेटे ने भी बताई कि उसी दिन उस के मोबाइल पर भी किसी औरत का फोन आया था. उस ने भी उस से यही बात कहीं थी कि उस की मम्मी की हत्या हो गई है. जिस फोन से औरत ने बात की थी, वह भी उस की मम्मी का फोन ही था. लेकिन फोन पर बात करने वाली औरत ने इतनी जानकारी देने के बाद ही मोबाइल बंद कर दिया था.

यह जानकारी मिलते ही पुलिस ने मृतका के मोबाइल को सर्विलांस पर लगा दिया, लेकिन उस के बाद वह मोबाइल लगातार बंद आ रहा था. इस दौरान मोबाइल कई बार खुला और बंद हुआ. उसी दौरान पुलिस को मोबाइल की लोकेशन भी मिल गई थी. मोबाइल की लोकेशन से पुलिस को उस स्थान पर पहुंचने में आसानी हो गई थी.

प्रेमिका बनी ब्लैकमेलर – भाग 1

3 मई, 2023 को रात के कोई साढ़े 9 बजे का वक्त रहा होगा. उसी दौरान पुलिस हैडक्र्वाटर से पुलिस को सूचना मिली कि मुलताई कस्बे के गांधी वार्ड के नागपुर चौक पर एक युवती की गला रेत कर हत्या कर दी गई है. युवती की लाश सडक़ पर पड़ी हुई है. मुलताई कस्बा मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के अंतर्गत आता है.

हत्या की सूचना मिलते ही मुलताई थाने की टीआई प्रज्ञा शर्मा पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गई. घटनास्थल पर पहुंचते ही टीआई प्रज्ञा शर्मा ने सब से पहले घटनास्थल का मुआयना किया. युवती की गला रेत कर बड़ी ही बेरहमी से हत्या की गई थी. घटनास्थल पर सडक़ के बीचोंबीच युवती का शव पेट के बल पड़ा हुआ था. उस के पास ही एक स्कूटी और उस का अन्य सामान भी बिखरा पड़ा था.

घटनास्थल का मुआयना करने के बाद प्रज्ञा शर्मा ने इस सब की जानकारी एसडीओपी नम्रता सोंधिया तथा बैतूल एसपी प्रतीक चौधरी को भी दे दी थी. सरेआम भीड़भाड़ वाले इलाके में बीच सडक़ पर युवती की हत्या कर दिए जाने का मामला बेहद ही गंभीर था. यही कारण था कि युवती की हत्या की सूचना पाते ही सारे पुलिस उच्चाधिकारी मौके पर पहुंच गए थे.

उस वक्त तक मार्केट की ज्यादातर दुकानें बंद हो चुकी थीं. बाकी दुकानदार पुलिस को देख कर अपने शटर गिरा कर चलते बने थे. पुलिस ने आसपास खुल रही दुकान वालों से उस युवती की हत्या के बाबत जानकारी लेनी चाही तो किसी ने अपना मुंह तक नहीं खोला, लेकिन उस की शिनाख्त जल्दी ही हो गई. युवती मुलताई के नेहरू नगर के इलाके में रहने वाली अफजल शेख की बेटी सिमरन शेख थी. जानकारी मिलते ही पुलिस ने उस की हत्या की जानकारी उस के घर वालों को देते हुए तुरंत घटनास्थल पर पहुंचने को कहा.

कैमरे में रिकौर्ड नहीं हो पाई वारदात

युवती की हत्या किस ने और क्यों की? यह बात न तो उस के घर वालों को पता था और न ही पुलिस को पता लग पा रहा था. उस वक्त तक मार्केट पूरी तरह से बंद हो चुकी थी. तब पुलिस ने अपनी अपनी काररवाई पूरी कर उस की लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी.

इस के बाद पुलिस इस केस की जांच में जुट गई. पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे चैक किए. लेकिन पुलिस को इस से भी कोई सफलता नहीं मिली, क्योंकि सीसीटीवी कैमरे के सामने एक बड़ी गाड़ी खड़ी थी. जिस के कारण वह वारदात कैमरे में रिकौर्ड नहीं हो पाई थी. उस के बाद पुलिस ने देखा कि घटनास्थल के ठीक सामने हनीफ मियां की अंडों की दुकान थी, जो हर रोज देर रात 10 बजे तक खुली रहती थी.

पुलिस को लगा कि घटना के वक्त हनीफ मियां की दुकान जरूर खुल रही होगी. शायद उन्हीं से इस मामले में कुछ जानकारी हासिल हो सके. यह सोचते ही पुलिस ने दुकान पर लिखे मोबाइल नंबर को डायल किया तो किसी ने फोन नहीं उठाया. पुलिस ने 1-2 बार नहीं कई बार उसी नंबर को रिडायल किया. लेकिन वह फोन नहीं उठा.

फोन न उठने के कारण पुलिस को उसी दुकानदार पर कुछ शक हुआ. पुलिस हनीफ मियां का पता पूछतेपूछते उस के घर पर पहुंच गई. वह घर पर ही मिल गए. पुलिस ने हनीफ मियां से उस घटना को ले कर जानकारी जुटानी चाही तो उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया कि उन की दुकान बहुत पहले ही बंद हो गई थी. उस के बाद वहां पर कब, क्या हुआ, उन्हें कोई जानकारी नहीं.

शक के घेरे में आया शनीफ

उसी पुलिस पूछताछ के दौरान पुलिस को गुप्तरूप से जानकारी मिली कि शाम के वक्त ज्यादातर उन का बेटा शनीफ दुकान पर बैठता था. पुलिस ने हनीफ मियां से शनीफ के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि वह दुकान से आने के बाद अकसर अपने दोस्तों के पास चला जाता है. हो सकता है कि वह अपने दोस्तों के पास ही होगा. पुलिस ने हनीफ मियां से उस का मोबाइल नंबर ले कर डायल किया तो वह बंद मिला.

शनीफ का मोबाइल बंद पा कर पुलिस को पूरा शक हो गया कि इस हत्या के बारे में उसे जरूर जानकारी रही होगी. तभी उस ने अपना मोबाइल बंद कर लिया है. उसी शक के आधार पर पुलिस उस की तलाश में जुट गई, लेकिन उस का कहीं भी पता नहीं चला. उस के बाद पुलिस ने उस की गिरफ्तारी के लिए मुखबिर लगा दिए. मुखबिर की सूचना पर शनीफ जल्दी ही पकड़ में आ गया. पुलिस पकड़ में आते ही वह बुरी तरह से घबरा गया था. पुलिस उसे गिरफ्तार कर थाने ले आई.

चूंकि शनीफ ने सरेआम घटना को अंजाम दिया था, जिस को वहां मौजूद काफी लोग देख रहे थे. वह जानता था कि पुलिस के आगे उस की एक नहीं चलने वाली. यही सोच कर उस ने जल्दी ही सब कुछ साफसाफ उगल दिया. शनीफ ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि सिमरन शेख उसे ब्लैकमेल कर उसे बरबाद करने पर तुली थी. जिस के कारण ही उसे यह कदम उठाना पड़ा.

हत्या का अपराध स्वीकारते ही पुलिस ने उस की निशानदेही से हत्या में प्रयुक्त मीट काटने वाला छुरा भी बरामद कर लिया. साथ ही उस के द्वारा घटना के वक्त पहने कपड़े भी पुलिस ने बरामद कर लिए.

कौन थी सिमरन शेख? और उस की जानपहचान शनीफ से कैसे हुई? जानने के लिए हमें इस दिलचस्प कहानी के अतीत में जाना होगा.

सोशल मीडिया की दीवानी हुई सिमरन शेख

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में पड़ता है एक कस्बा मुलताई. सिमरन इसी कस्बे के नेहरू नगर में रहने वाले अफजल शेख की बेटी थी. सिमरन शेख बचपन से ही चंचल थी. उस के नैननक्श उस की सुंदरता का स्वयं ही बखान करते थे. यही कारण था कि वह अपनी सुंदरता और चंचलता के कारण सभी की चहेती बन गई थी.

अफजल शेख की एक बहन थी फातिमा. फातिमा के कोई बच्चा नहीं था. सिमरन से वह बहुत ही प्रभावित थी. जब से सिमरन ने जन्म लिया था, उस की निगाहें उसी पर गड़ी रहती थीं. एक दिन मौका मिलने पर उस ने अपने भाई अफजल से उस प्यारी सी गुडिय़ा को लेने की चाहत जाहिर की. अफजल अपनी बहन की इस मांग को मना नहीं कर सके और उन्होंने सिमरन को उस के हवाले कर दिया. सिमरन की बुआ उसे ले कर अपने घर चली आई और प्यार से उस का पालनपोषण करने लगी.

एक हत्या ऐसी भी

कत्ल का मुकदमा चल रहा हो तो उस का फैसला जानने के लिए काफी लोग उत्सुक रहते हैं. 12 मार्च, 2018 को चंडीगढ़ के सेशन जज बलबीर सिंह की अदालत के भीतरबाहर तमाम लोग एकत्र थे. वजह यह थी कि उन की अदालत में चल रहा कत्ल का एक मुकदमा अपने आखिरी पड़ाव पर आ पहुंचा था. लोग इस केस का फैसला सुनने को बेकरार थे.

इस केस की शुरुआत कुछ यूं हुई थी.

उस दिन किसी केस की छानबीन के सिलसिले में चंडीगढ़ के थाना सेक्टर-31 की महिला एसएचओ जसविंदर कौर अपने औफिस में मौजूद थीं. रात में ही करीब 45 वर्षीय शख्स ने आ कर उन से कहा, ‘‘मैडम, मेरा नाम दुर्गपाल है और मैं रामदरबार इलाके के फेज-2 के मकान नंबर 2133 में रहता हूं.’’

‘‘जी बताइए, थाने में कैसे आना हुआ, वह भी इस वक्त?’’ इंसपेक्टर जसविंदर कौर ने उस व्यक्ति को गौर से देखते हुए पूछा.

‘‘ऐसा है मैडमजी,’’ खुद को दुर्गपाल कहने वाले शख्स ने बताना शुरू किया, ‘‘हम 4 भाई हैं और मैं सब से बड़ा हूं. मेरी मां शारदा देवी मेरे से छोटे भाई राजबीर के साथ ग्राउंड फ्लोर पर रहती हैं. फर्स्ट फ्लोर पर मेरा सब से छोटा भाई विजय रहता है. मैं और तीसरे नंबर का भाई उदयवीर अपनीअपनी फैमिली के साथ टौप फ्लोर पर रहते हैं.’’

‘‘ठीक है, आप समस्या बताइए.’’

‘‘मैडम, हमारे घर के टौप फ्लोर पर 4 कमरे हैं. वहां सीढि़यों की तरफ वाले 2 कमरे मेरे पास हैं और उस के आगे वाले 2 कमरे मेरे भाई उदयवीर के पास.’’

‘‘आप के मकान और कमरों की बात तो हो गई, वह बताइए जिस के लिए आप को थाने आना पड़ा?’’ थानाप्रभारी जसविंदर कौर ने अपना लहजा थोड़ा बदला. लेकिन उस शख्स ने जैसे कुछ सुना ही नहीं.

उस ने अपनी बात बेझिझक जारी रखी, ‘‘मेरा भाई उदयबीर अपनी पत्नी प्रतिभा के साथ रहता था. दोनों की शादी को अभी कुल डेढ़ साल हुआ है. 10 जून, 2017 को मेरे पिता जंडियाल सिंह की मौत हो गई थी. कल मैं और मेरे तीनों भाई कुछ रिश्तेदारों के साथ हरिद्वार में पिताजी की अस्थियों का विसर्जन कर के रात करीब साढ़े 8 बजे घर लौटे थे.’’

‘‘आगे बताइए,’’ अब इंसपेक्टर जसविंदर कौर ने दुर्गपाल की बात में रुचि लेते हुए कहा.

‘‘हम लोग थकेहारे थे. घर आ कर खाना खाने के बाद सो गए थे. मैं घर के टौप फ्लोर पर बने कमरों के आगे गैलरी में सो रहा था. रात के एक बजे जब मैं गहरी नींद में था, तभी शोरशराबा सुन कर अचानक मेरी आंखें खुल…’’

दुर्गपाल की बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि इंसपेक्टर जसविंदर कौर ने हाथ के इशारे से उसे रोक दिया. दरअसल, थानाप्रभारी के लिए कंट्रोलरूम से फोन आया था. इंसपेक्टर जसविंदर ने काल रिसीव की तो दूसरी तरफ से पीसीआर कांस्टेबल ओमप्रकाश था.

society

उस ने कहना शुरू किया, ‘‘मैडम, रामदरबार इलाके से किसी के छत से गिराने की काल आई है. मौके पर पहुंच कर पता चला कि छत से गिरने वाले को अस्पताल ले जाया चुका था, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. उसे गिराने वाला फरार है. शुरुआती छानबीन में ही मामला कत्ल का लग रहा है, जिस के पीछे की वजह इश्क हो सकती है. केस आप के ही इलाके का है.’’

‘‘मरने वाले और मारने वाले के नाम वगैरह के बारे में पता चला?’’ इंसपेक्टर जसविंदर ने पूछा.

‘‘जी मैडम, सब पता कर लिया है. मरने वाले का नाम उदयवीर है और उसे छत से गिरा कर मारा है उस की पत्नी के कथित प्रेमी सतनाम ने.’’

‘‘ओके, तुम लोग अभी वहीं रुको, मैं पहुंचती हूं वहां.’’ कहते हुए इंसपेक्टर जसविंदर ने फोन डिसकनेक्ट कर दिया.

उन्होंने सामने बैठे दुर्गपाल की ओर देख कर पूछा, ‘‘आप के भाई उदयवीर को सतनाम नामक शख्स ने छत से नीचे गिरा कर मार दिया और आप…’’

‘‘जी मैडम.’’ इंसपेक्टर जसविंदर की बात पूरी होने से पहले ही दुर्गपाल ने कहा.

‘‘तुम वहां रुकने के बजाय थाने चले आए?’’

‘‘मैडम, मैं ने तुरंत 100 नंबर पर फोन कर के घटना के बारे में बता दिया था. साथ ही आटोरिक्शा से भाई को सेक्टर-32 के सरकारी अस्पताल में पहुंचा भी दिया था. फिर यह सोच कर कि इस तरीके से पुलिस पता नहीं कब पहुंचेगी, मैं अपने दूसरे भाइयों को वहीं रुके रहने को बोल कर थाने चला आया.’’

‘‘कोई बात नहीं, पुलिस ने वहां पहुंच कर अपनी काररवाई शुरू कर दी है. तुम भी चलो हमारे साथ.’’ इस के बाद इंसपेक्टर जसविंदर कौर सबइंसपेक्टर राजवीर सिंह और सिपाही प्रमोद व नवीन के अलावा दुर्गपाल सिंह को साथ ले कर सरकारी गाड़ी से रामदरबार की ओर रवाना हो गईं.

घटनास्थल पर काफी भीड़ एकत्र थी. पीसीआर वाले भी वहीं थे. उन से जरूरी जानकारी लेने के बाद उन्हें वहां से रुखसत कर दिया गया. साथ ही सिपाही नवीन को वहां तैनात कर के इंसपेक्टर जसविंदर कौर अन्य लोगों के साथ सेक्टर-32 के सिविल अस्पताल चली गईं.

वहां उदयवीर को पहले ही मृत घोषित किया जा चुका था. थाना पुलिस ने अपनी आगे की काररवाई शुरू कर दी. एसआई राजबीर सिंह शव का पंचनामा बनाने लगे और जसविंदर कौर ने दुर्गपाल से उस की तहरीर ले कर एफआईआर दर्ज करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी. दुर्गपाल ने अपनी तहरीर के शुरुआती हिस्से में वही सब दोहराया, जो वह पहले ही थाने में थानाप्रभारी जसविंदर कौर को बता चुका था. आगे उस ने जो कुछ बताया, वह कुछ इस तरह था—

शोरशराबा सुन कर जब मेरी आंखें खुलीं तो मैं ने देखा कि बहलाना में रहने वाला एक लड़का सतनाम सिंह अपने हाथ में बेसबाल बैट पकड़े मेरे भाई उदयवीर से लड़ता हुआ छत पर जा पहुंचा था. वह उदयवीर से मारपीट करते हुए उसे घसीट कर छत पर ले गया था. बीचबीच में उदयवीर भी उस का मुकाबला करने का प्रयास करते हुए उस पर हाथपैर से वार कर रहा था.

यह सब देख मैं भी तेजी से उन के पीछे छत पर चला गया. तब तक वे दोनों लड़ते हुए कौर्नर के मकानों की छत पर जा पहुंचे थे. ऐसा इसलिए था कि हमारी लाइन के मकानों व बैकसाइड वाले मकानों की छतें आपस में मिली हुई हैं. जिस वक्त वे दोनों लड़ते हुए मकान नंबर 2088 की छत पर पहुंचे तो मैं भी उन्हें छुड़ाने के लिए वहां जा पहुंचा. अभी मैं उन से थोड़े फासले पर था, जब मेरे कानों में सतनाम की आवाज पड़ी.

वह मेरे भाई से कह रहा था कि प्रतिभा हमेशा से उस की प्रेमिका रही है, उसे मजबूरी में उस से शादी करनी पड़ी थी. अब वह उसे आजाद कर दे, वरना वह उस की (मेरे भाई उदयवीर की) जान ले लेगा.

इस से पहले कि मैं भाई की मदद के लिए उस के पास पहुंच पाता, वह दीवार के एक कोने की तरफ हुआ और तभी सतनाम ने मौका देख कर उसे धक्का दे कर नीचे गिरा दिया. सतनाम सिंह ने मेरे भाई की पत्नी प्रतिभा के साथ लव अफेयर के चलते मेरे भाई को रास्ते से हटाने के लिए जान से मार दिया. उस के खिलाफ मामला दर्ज कर के सख्त काररवाई की जाए.

उसी रोज यह प्रकरण थाना सेक्टर-31 में भादंवि की धाराओं 302 एवं 456 के तहत दर्ज हो गया. यह 14 जून, 2017 की बात है. मौके की अन्य काररवाइयां पूरी कर के थाने लौटने के बाद पुलिस ने सतनाम सिंह को काबू करने की योजनाएं बनानी शुरू कीं. वारदात को अंजाम देने के बाद वह मौके से फरार होने में सफल हो गया था. लेकिन अपराध कर के भागने के 8 घंटे के भीतर ही पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया.

अगले दिन अदालत से उस का कस्टडी रिमांड हासिल कर के उस से विस्तार से पूछताछ की गई. इस पूछताछ में उस ने बताया कि वह चंडीगढ़ के गांव बहलाना के मकान नंबर 74 का रहने वाला था. यहीं की रहने वाली लड़की प्रतिभा से उसे प्यार हो गया था. मगर यह एकतरफा प्यार था, जिस में प्रतिभा ने कभी कोई रुचि नहीं दिखाई थी.

सतनाम सिंह ने उसे अपनी प्रेमिका घोषित करते हुए उस का पीछा नहीं छोड़ा था. इस से प्रतिभा खुद तो परेशान थी ही, उस के घर वाले भी फिक्रमंद होने लगे थे. उन के मन में यह भय समा गया था कि कहीं सतनाम उन की बेटी को उठा न ले जाए. इस की वजह यह भी थी कि सतनाम अपराधी किस्म का लड़का था. आखिर प्रतिभा के घर वालों ने रामदरबार के रहने वाले उदयवीर से उस की शादी कर दी.

सतनाम के बताए अनुसार प्रतिभा के घर वालों का डर एकदम सही निकला. वह वाकई उन की लड़की को अपहृत करने के प्रयास में था. यह अलग बात है कि अभी तक उसे सफलता नहीं मिल पाई थी. प्रतिभा की शादी के बाद तो उस के लिए यह काम और भी मुश्किल हो गया था.

देखतेदेखते इस शादी को डेढ़ साल गुजर गया. लेकिन सतनाम इस बीच प्रतिभा को भूल नहीं पाया. इस बीच उस ने एक दुस्साहस भरा काम यह भी किया कि उदयवीर से मिल कर उस से सीधे ही कह दिया, ‘‘प्रतिभा मेरी प्रेमिका थी और हमेशा रहेगी. तुम ने उस की मजबूरी का फायदा उठा कर उस की इच्छा के विरुद्ध शादी की है. तुम्हारी भलाई इसी में है कि उस से तलाक ले कर उसे मेरे हवाले कर दो, वरना मुझे तुम्हारा खून करना पड़ेगा.’’

उदयवीर ने इस बारे में अपने भाइयों को भी बताया और प्रतिभा से भी बात की. प्रतिभा ने पति को समझाया कि उस का सतनाम से प्रेमप्यार जैसा कभी कोई रिश्ता नहीं था. वह उस के पीछे पड़ कर नाहक उसे परेशान करता था. इस पर उदयवीर ने सतनाम को फोन कर के उसे लताड़ दिया.

बकौल सतनाम उस ने भी तय कर लिया कि आगे उसे कुछ भी करना पड़े, वह प्रतिभा को उठा ले जाएगा. बस, मौका मिलने भर की देर थी. यह मौका भी उसे जल्दी ही मिल गया. उदयवीर के पिता का देहांत हो गया और उन की अस्थियों को गंगा में विसर्जित करने उसे अपने भाइयों व परिजनों के साथ हरिद्वार जाना पड़ा.

सतनाम ने पुलिस को बताया कि उसे 13 जून, 2017 की रात में प्रतिभा के घर पर अकेली होने की जानकारी मिली. आधी रात के बाद वह घर के पिछवाड़े से उस के पास जा पहुंचा. वहां जा कर देखा तो उस का पति भी उस की बगल में लेटा था. लेकिन सतनाम ने परवाह नहीं की और प्रतिभा के मुंह पर हाथ रख कर उसे कंधे पर लाद लिया. जब वह प्रतिभा को ले जाने लगा तो उदयवीर की आंखें खुल गईं. वह सतनाम पर झपटा तो प्रतिभा उस की पकड़ से छूट गई.

इस के बाद सतनाम और उदयवीर गुत्थमगुत्था हो गए. संभव था कि उदयवीर सतनाम पर हावी हो जाता और इस बीच उस के परिजन भी उस की मदद को आ जाते. लेकिन पता नहीं कैसे वहां पड़ा बेसबाल बैट सतनाम के हाथ लग गया और वह उसी से उदयवीर को पीटते हुए छत पर ले गया. वहां से सतनाम ने उसे नीचे गिरा दिया. वह मुंह के बल आ कर गिरा था.

सेक्टर-32 के सिविल अस्पताल के डा. मंडर रामचंद सने व डा. गौरव कुमार ने उदयवीर के शव का पोस्टमार्टम किया. उन्होंने उस के जिस्म पर छोटीबड़ी 10 चोटों का उल्लेख करते हुए मौत का कारण मानसिक आघात और फेफड़ों का बायां हिस्सा नष्ट होना बताया.

खैर, कस्टडी रिमांड की अवधि समाप्त होने पर पुलिस ने सतनाम को फिर से अदालत में पेश कर के न्यायिक हिरासत में बुड़ैल जेल भेज दिया गया. इस के बाद समयावधि के भीतर उस के विरुद्ध आरोपपत्र तैयार कर 8 गवाहों की सूची के साथ प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी गीतांजलि गोयल की अदालत में पेश कर दिया. इस के बाद यह केस सेशन कमिट हो कर चंडीगढ़ के जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलवीर सिंह की अदालत में विधिवत रूप से चला.

विद्वान न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को गौर से सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों की गहराई से जांच करने के बाद बचावपक्ष के वकील व पब्लिक प्रौसीक्यूटर के बीच हुई बहस के मुद्दों पर भी पूरा ध्यान दिया.

बहस के दौरान पब्लिक प्रौसीक्यूटर राजेंद्र सिंह ने दूसरे की औरत को अपना बनाने की एवज में उस के पति का कत्ल करने को ले कर जहां इसे अमानवीय एवं घिनौना अपराध बताया, वहीं बचावपक्ष के वकील यादविंदर सिंह संधू ने अपनी दलील से अभियोजन पक्ष का रुख पलटने का प्रयास किया. वकील संधू का कहना था कि मृतक के पिता की मौत के बाद संपत्ति विवाद को ले कर उस का अपने भाइयों से झगड़ा हो गया था. उन्होंने ही उसे छत से गिरा कर मौत के घाट उतारा है. सतनाम सिंह को इस केस में नाहक फंसा दिया है.

लेकिन एक अलग बात यह भी रही कि जहां अभियोजन पक्ष की ओर से 8 गवाह अदालत में पेश हुए, वहीं बचावपक्ष एक गवाह भी पेश नहीं कर पाया. बहरहाल, माननीय न्यायाधीश बलवीर सिंह ने 12 मार्च, 2018 को अभियुक्त सतनाम सिंह को भादंवि की धाराओं 302 एवं 456 का दोषी करार देते हुए अपना फैसला सुना दिया. इस केस में दी जाने वाली सजा की घोषणा 14 मार्च, 2018 को की गई.

14 मार्च को दोषी को सजा सुनाए जाने से पहले सजा के मुद्दे को सुना गया. दोषी ने बताया कि उस की मां की मौत हो चुकी है और अपने वृद्ध पिता हरबंस सिंह का वही अकेला सहारा है. वैसे भी वह अपनी बीए की पढ़ाई कर रहा था, जो पूरी कर के उसे नौकरी की तलाश करनी थी. इसलिए उसे कम से कम सजा सुनाई जाए.

जज साहब ने यह सब शांति से सुना, मगर उसी दिन दोपहर बाद अपना 27 पृष्ठ का फैसला सुनाते हुए दोषी सतनाम सिंह को धारा 302 के तहत उम्रकैद व 5 हजार रुपए जुरमाने और धारा 456 के अंतर्गत एक साल कैद की सजा सुनाई. दोषी ने जुरमाना भरने में अपने को असमर्थ बताया तो उस की कैद की सजा में 6 महीने की बढ़ोत्तरी कर दी गई.

जिस दिन सतनाम सिंह को न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेजा गया था, तब से वह चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में ही बंद था. उस की जमानत नहीं हो पाई थी. अब उसे अदालत के फैसले के बाद फिर से उसी जेल में भेज दिया गया.

– कथा पुलिस सूत्रों एवं अदालत के फैसले पर आधारित