भांजी को प्यार के जाल में फांसने वाला पुजारी – भाग 3

काफी भटकने के बाद भी लकड़ी की व्यवस्था नहीं हो सकी तो उस ने अप्सरा की जूतियां और कपड़े वहीं झाड़ियों में छिपा दिए. इस के बाद लाश उठा कर उस ने कार की डिक्की में रखा और मंदिर लौट आया. अब उस के सामने लाश को ठिकाने लगाने की समस्या थी.

वह काफी देर तक विचार करता रहा. सोचते हुए वह मंदिर के पीछे गया. मंदिर के पीछे राजस्व विभाग की पुरानी इमारत है. वह सोचतेविचारते हुए मंदिर के पीछे टहल रहा था कि उस की नजर राजस्व विभाग की उस पुरानी इमारत के सामने बने मेनहोल पर पड़ी. उस पर नजर पड़ते ही उस की समस्या हल हो गई.

साईंकृष्णा तुरंत मंदिर में आया और कार की डिक्की से लाश निकाल कर ले जा कर मेनहोल का ढक्कन हटा कर लाश उसी में डाल दी और ढक्कन बंद कर मंदिर में वापस आ गया. रात में ही उस ने कार साफ की और अप्सरा का हैंडबैग वगैरह जला कर उस की राख भी उसी मेनहोल में ले जा कर फेंक दी. फिर वह आराम से सो गया.

अगले दिन सुबह वह अप्सरा के घर गया तो उस की मां ने कहा, “अप्सरा को कल रात से ही फोन कर रही हूं. उस का फोन ही नहीं लग रहा है. जब भी फोन करो, स्विच्ड औफ बताता है.”

“यही पता करने तो मैं भी आया हूं. मैं ने भी फोन किया था. उस का फोन बंद ही बताए जा रहा था. कहीं उस का फोन चोरी तो नहीं हो गया. पर फोन चोरी होता तो अपनी किसी सहेली के फोन से फोन कर सकती थी.” साईंकृष्णा ने कहा.

दुर्गंध न आने का कर दिया पुख्ता इंतजाम

अप्सरा के घर से लौट कर पुजारी साईंकृष्णा मेनहोल के पास गया तो उसे लगा कि मेनहोल से लाश के सडऩे की बदबू आ रही है. उसे लगा कि अगर यह बदबू फैली और मेनहोल का ढक्कन उठा कर देखा गया तो वह फंस जाएगा. उस ने ढक्कन के किनारे सीमेंट और कंक्रीट लगा कर 2 ट्रक लाल मिट्टी मंगा कर मेनहोल के ढक्कन के ऊपर डलवा दी, जिस से ढक्कन पूरी तरह बंद हो गया. अब वह निश्चिंत हो गया.

इसी तरह इंतजार में पूरा दिन भी बीत गया और रात भी. जब अप्सरा का कुछ पता नहीं चला तो 5 जून, 2023 को दोपहर के बाद पुजारी साईंकृष्णा अप्सरा की गुमशुदगी दर्ज कराने थाना आरजीआईए पहुंच गया. वहां गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद असलियत सामने आ गई और अप्सरा मर्डर केस में वह खुद ही पकड़ा गया. थाना शम्साबाद पुलिस ने वह पत्थर भी बरामद कर लिए, जिन से अप्सरा की हत्या की गई थी. गौशाला के पास से अप्सरा की जूतियां और कपड़े भी मिल गए थे.

पुलिस ने पुजारी अय्यागिरि वेंकट सूर्या साईंकृष्णा के खिलाफ हत्या (धारा 302) और सबूत मिटाने (धारा 120) के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे रंगा रेड्डी कोर्ट में पेश किया, जहां से 14 दिनों के रिमांड पर लिया गया. रिमांड अवधि में पुलिस ने उस से पूछताछ कर कुछ और सबूत जुटाए. रिमांड अवधि पूरी होने पर उसे दोबारा अदालत में पेश किया गया, जहां से कातिल पुजारी को जेल भेज दिया गया.

पुजारी की पापलीला और अप्सरा की हत्या को ले कर मीडिया में अप्सरा की एक से एक फोटो के साथ पुजारी के फोटो दिखाए जा रहे थे. तभी इस मामले में एक और नया रहस्य निकल कर सामने आया.

अप्सरा और उस की मां अरुणा एक साल पहले ही हैदराबाद रहने आई थीं. इस के पहले दोनों चेन्नै में रहती थीं. अप्सरा की हत्या का समाचार सुन कर चेन्नै की धनलक्ष्मी राजा नाम की एक महिला ने सोशल मीडिया पर अप्सरा के फोटोग्राफ्स, वीडियो और आडियो डाल कर हडक़ंप मचा दिया.

सामने आई नई जानकारी

धनलक्ष्मी ने वीडियो वायरल कर के कहा था कि दुनिया में देर है पर अंधेर नहीं है. प्रकृति हर किसी को उस के कर्म की सजा देती है. मेरा एकलौता बेटा कार्तिक सौफ्टवेयर इंजीनियर था. उसे अप्सरा से प्यार हो गया. उस की सुंदरता पर वह ऐसा मोहित हुआ था कि मेरे मना करने के बावजूद उस ने उस रूपसुंदरी से विवाह कर लिया.

विवाह कर के घर आते ही अप्सरा ने हम दोनों को परेशान करना शुरू कर दिया था. मेरा बेटा तो सीधासादा था और वह महारानी हर शनिवार और रविवार को बाहर घूमने जाती और हद से ज्यादा खर्च कराती. इस मामले में उस की मां अरुणा भी बेटी का पक्ष ले कर मेरे बेटे को धमकाती. जब देखो तब लड़ाईझगड़ा कर के मांबेटी ने कार्तिक का जीना हराम कर दिया था.

एक दिन घर में थोड़ा ज्यादा झगड़ा हो गया. अप्सरा ऐसी बिफरी की मुझे और कार्तिक को गंदीगंदी गालियां देने लगी. कार्तिक को भी गुस्सा आ गया. उस ने अप्सरा पर हाथ उठा दिया. इस के बाद अप्सरा थाने चली गई और कार्तिक के खिलाफ तरहतरह के आरोप लगा कर शिकायत दर्ज करा दी. अप्सरा की सुंदरता देख कर पुलिस ने भी फटाफट मुकदमा दर्ज कर लिया और कार्तिक को गिरफ्तार कर के अदालत में पेश कर दिया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. इस के बाद अप्सरा अपनी मां के साथ चेन्नै से हैदराबाद चली गई.

करीब डेढ़ महीने बाद कार्तिक जमानत पर जेल से बाहर आया. जेल जाने से उस की नौकरी भी चली गई थी, जिस की वजह से वह भारी डिप्रेशन में आ गया. मां धनलक्ष्मी ने उसे बहुत समझाया, हिम्मत दी. पर अप्सरा ने उसे जिस तरह परेशान किया था, उस से वह इस हद तक टूट गया था कि वह इस हादसे से उबर नहीं पाया और जेल से बाहर आने के चौथे दिन उस ने फंदे से लटक कर आत्महत्या कर ली.

धनलक्ष्मी ने कार्तिक और अप्सरा के विवाह के जो फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए थे, उन्हें ले कर लोगों में यही चर्चा हो रही थी कि अप्सरा की वजह से जिस तरह कार्तिक की मां बिलख रही है, ठीक उसी तरह से बेटी के मौत हो जाने पर अब खुद अरुणा को भी बिलखना पड़ रहा है.

भांजी को प्यार के जाल में फांसने वाला पुजारी – भाग 2

हैदराबाद दक्षिण भारतीय फिल्मों और धारावाहिकों के लिए बहुत बड़ा गढ़ माना जाता है. अप्सरा भी फिल्मों और धारावाहिकों में काम कर के नाम और दाम कमाना चाहती थी. हैदराबाद में उस की जानपहचान वाला कोई नहीं था. वह ज्योतिष और भाग्य पर आंख मूंद कर भरोसा करती थी.

अप्सरा के भाग्य में फिल्मों और धारावाहिकों में काम करने का योग है कि नहीं, यह पता करने के लिए अप्सरा और उस की मां नजदीक स्थित बांगारू माइसम्मा मंदिर गई, जहां का पुजारी था अय्यागिरि वेंकट सूर्या साईंकृष्णा. साईंकृष्णा मंदिर का पुजारी तो था ही, वह एमबीए कर के बिल्डिंग निर्माण की ठेकेदारी भी करता था.

अरुणा और अप्सरा साईंकृष्णा से मिलीं. इस के बाद अप्सरा कुंडली दिखाने और भगवान के दर्शन के लिए मंदिर आने लगी. मंदिर में आतेआते अप्सरा की पुजारी से अच्छी जानपहचान हुई, फिर कुछ दिनों में दोस्ती हो गई. अब तक पुजारी का दिल अप्सरा पर आ चुका था. इस की वजह यह थी कि पुजारी वहां अकेला ही रहता था.

पुजारी को भांजी से हुआ प्यार

पुजारी साईंकृष्णा का दिल अप्सरा पर आया तो वह उस की हर तरह से मदद करने लगा. अप्सरा और उस की मां पर प्रभाव जमाने के लिए उस ने रिश्ता भी जोड़ लिया. अरुणा को उस ने मुंहबोली बहन बना लिया तो अप्सरा उस की भांजी हो गई. अप्सरा साईंकृष्णा को अन्ना कहती थी.

अप्सरा मंदिर आती ही रहती थी. तभी साईंकृष्णा को भांजी अप्सरा से प्यार हो गया. साईंकृष्णा ने रिश्ते की आड़ में उस पर डोरे डालतेडालते आखिर उसे अपने प्रेम जाल में फंसा ही लिया. साईंकृष्णा शादीशुदा था और उस के 2 बच्चे भी थे. परंतु उस की पत्नी बच्चों के साथ गांव में रहती थी. इसलिए यहां पुजारी को अप्सरा के साथ रंगरलिया मनाने का खुला मौका मिल गया था.

मंदिर परिसर में पुजारी के लिए कमरा बना था. उसी कमरे में अप्सरा साईंकृष्णा से मिलती थी. अप्सरा को पूरी उम्मीद थी कि पुजारी साईंकृष्णा उस से विवाह कर के उसे पत्नी के रूप में स्वीकार कर लेगा. इसलिए उस से संबंध बढ़ाने में उसे कोई दिक्कत महसूस नहीं हुई, लेकिन जब उसे पता चला कि पुजारी तो शादीशुदा ही नहीं, बल्कि 2 बच्चों का बाप भी है तब उसे तकलीफ तो बहुत हुई, पर उस ने न पुजारी का साथ छोड़ा और न ही उस की पत्नी बनने की उम्मीद छोड़ी.

अप्सरा लगातार पुजारी साईंकृष्णा से मिलती रही, पर अब वह उस पर दबाव बनाने लगी कि वह अपनी पत्नी को छोड़ कर उस से विवाह कर ले. साईंकृष्णा अप्सरा को झूठे आश्वासन दे कर उस का शारीरिक शोषण करता रहा. उन के अवैध संबंधों की भनक किसी को नहीं लगी.

अप्रैल, 2023 के अंतिम सप्ताह में अप्सरा ने साईंकृष्णा को बताया कि वह प्रैग्नेंट है. उस ने कहा कि वह इस बच्चे को जन्म देगी. यह सुन कर साईंकृष्णा घबरा गया. उस ने गर्भपात कराने की सलाह दी. अप्सरा ने मना करते हुए कहा, “मैं अपनी पहली संतान की हत्या का पाप कतई नहीं करूंगी.”

पर चालाक साईंकृष्णा ने अप्सरा को उलटीसीधी पट्टी पढ़ा कर, समझाबुझा कर गर्भपात करा ही दिया. इस के बाद अप्सरा आक्रामक हो गई और पुजारी पर विवाह के लिए दबाव डालने लगी. अब इस बात को ले कर दोनों के बीच खूब कहासुनी भी होने लगी.

अप्सरा की धमकी से डर गया पुजारी

जल्दी ही अप्सरा की समझ में आ गया कि इस पुजारी को केवल उस के शरीर में रुचि है. इसे न उस की जिंदगी से कोई मतलब है न उस की भावनाओं से. वह उसे खिलौने की तरह खेल कर किनारे कर देना चाहता है. वह उसे पत्नी नहीं बनाना चाहता यानी उस से विवाह नहीं करना चाहता.

फिर तो अप्सरा रणचंडी बन गई. उस ने साईंकृष्णा को चेतावनी देते हुए कहा, “मेरी यह आखिरी चेतावनी है. अगर तुम ने मुझ से विवाह नहीं किया तो इसी मंदिर में बैठ कर तुम्हारे पराक्रम की पूरी कथा सभी को सुनाऊंगी, अखबारों में छपवाऊंगी, वीडियो बना कर वायरल करूंगी. मेरा तो जो होना होगा, वह होगा ही, पर तुम्हारी भी इज्जत की ऐसीतैसी कर के रहूंगी.”

अब पुजारी को अप्सरा अप्सरा नहीं, बला लगने लगी थी. अब रातदिन वह इसी सोच में डूबा रहने लगा कि किस तरह इस बला से छुटकारा पाए. अप्सरा अब पूरी तरह बिंदास हो कर पुजारी को धमकियां दे रही थी, इसलिए वह बुरी तरह घबराया हुआ था.

आखिर काफी मानसिक परेशानी झेल कर उस ने अप्सरा से हमेशाहमेशा के लिए छुटकारा पाने का उपाय खोज ही लिया. उस ने गूगल पर सर्च किया कि इंसान को कैसे मारा जाए.

योजना के अनुसार, 3 जून, 2023 को उस ने अप्सरा को मनाने के बाद कहा, “चलो, आज लांग ड्राइव पर चलते हैं. चलते हुए रास्ते में विचार करते हैं. फिर शायद कोई रास्ता निकल ही आए.”

अप्सरा को भला क्यों ऐतराज होता. फिर पुजारी साईंकृष्णा के मन में क्या खिचड़ी पक रही है, उसे कहां पता था. वह सहज तैयार हो गई. अप्सरा ने पुजारी के कहने पर घर में मां को बताया कि उसे सहेलियों के साथ भद्राचलम जाना है. उस की सारी सहेलियां शम्साबाद में मिलेंगी. मामा यानी पुजारी साईंकृष्णा उसे अपनी कार से शम्साबाद तक छोड़ देंगे.

पुजारी ने लिखी मौत की स्क्रिप्ट

3 जून, 2023 को पुजारी साईंकृष्णा ने अप्सरा को उस के घर से कार में बिठा लिया और शम्साबाद की ओर चल पड़ा. वह शम्साबाद जाने के बजाय अप्सरा को कार में बैठा कर घुमाता रहा. अप्सरा को नींद की गोलियां खाने की आदत थी. नींद की गोली खा कर कार में बैठेबैठे जब अप्सरा को नींद आ गई तो साईंकृष्णा ने देर रात को शम्साबाद के पहले ही सुलतानपल्ली के गौशाला के पास सुनसान जगह में कार रोक दी. वह इस जगह को पहले ही देख गया था.

कार रुकी तो अप्सरा की आंखें खुल गईं. उस ने कहा, “यह कहां कार रोक दी?”

“अपना निर्णय सुनाने के लिए.” साईंकृष्णा ने कहा, “मैं ने खूब सोचविचार कर तय कर लिया है कि मुझे तुम से विवाह नहीं करना है. तुम से जो हो सके तुम कर लो. हमारा विवाह किसी भी हालत में संभव नहीं है.”

पुजारी का यह फैसला सुनते ही अप्सरा भडक़ उठी. वह हाथापाई पर उतर आई तो साईंकृष्णा ने उसे जोर से धक्का दिया. वह जमीन पर गिर पड़ी. इस के बाद उस ने कार में रखा एक बड़ा पत्थर उठाया और दांत भींच कर पूरी ताकत से अप्सरा के सिर पर दे मारा, जिस से उस का सिर फूट गया. उस के सिर से खून बहने लगा, लेकिन साईंकृष्णा अप्सरा के सिर पर उस पत्थर से तब तक वार करता रहा, जब तक वह मर नहीं गई. वह कार में 2 पत्थर साथ ले कर ही आया था.

पुजारी ने अप्सरा की हत्या कर के पत्थर से उस का चेहरा इस तरह कुचल दिया था कि लाश मिलने पर भी पहचानी न जा सके. इस के बाद उस ने वहां आसपास लकडिय़ों की तलाश की ताकि लाश को यहीं जला दे.

भांजी को प्यार के जाल में फांसने वाला पुजारी – भाग 1

तेलंगाना के हैदराबाद शहर के थाना राजीव गांधी इंटरनैशनल एयरपोर्ट (थाना आरजीआईए) में 5 जून, 2023 दिन सोमवार की सुबह एक साधु जैसे कपड़े पहने हुआ आदमी पहुंचा. उस की उम्र यही कोई 35-36 साल थी. तंदुरुस्त शरीर, सफेद धोती, काले बाल और दाढ़ी, गले में माला, माथे पर बड़ा सा तिलक और उस के हाथ में मोबाइल था. उस ने एसएचओ टी.के. रेड्डी को नमस्कार किया तो जवाब में उन्होंने भी नमस्कार कर के उसे सामने पड़ी कुरसी पर बैठने का इशारा किया.

कुरसी पर बैठते ही उस ने कहा, “सर मैं बांगारू माइसम्मा मंदिर का पुजारी हूं. मेरा नाम अय्यागिरि वेंकट सूर्या साईंकृष्णाहै.”

इस के बाद उस ने दोनों हाथ जोड़ कर कहा, “सर, कल से मेरी भांजी गायब है. उसी के गायब होने की रिपोर्ट लिखाने आया हूं. उस की गुमशुदगी दर्ज कर के उसे खोज दीजिए प्लीज.”

“फोटो लाए हैं उस का?” एसएचओ टी.के. रेड्डी ने पूछा.

“जी सर, मैं उस का फोटो साथ लाया हूं. उस का नाम कुरूंगाती अप्सरा है. उम्र 30 साल और लंबाई 5 फुट 7 इंच है.” अप्सरा का फोटो मेज पर रखते हुए साईंकृष्णा ने कहा.

एसएचओ ने फोटो पर एक नजर डाली. अप्सरा सचमुच अप्सरा जैसी ही सुंदर थी.

एसएचओ ने फोटो देखते हुए पूछा, “अप्सरा कैसे और कहां से गायब हुई? पूरी बात विस्तार से बताइए?”

एक लंबी सांस ले कर पुजारी साईंकृष्णा ने कहा, “सर, मेरा घर और मंदिर सरूरनगर में है. मेरी बहन और भांजी भी सरूरनगर में ही रहती थीं. 3 जून शनिवार को अप्सरा को अपनी सहेलियों के साथ भद्राचलम जाना था. सारी सहेलियां शम्साबाद में बस स्टैंड पर मिलने वाली थीं. इसलिए उस ने मुझ से वहां छोड़ आने के लिए कहा.”

एसएचओ साईंकृष्णा की बातें ध्यान से सुन रहे थे. याद करते हुए साईंकृष्णा ने आगे कहा, “मैं ने अप्सरा को उस के घर से ले कर शम्साबाद पहुंचा दिया. इस के बाद सुबह से उस का फोन बंद बता रहा है. वह भद्राचलम भी नहीं पहुंची है और न अभी तक घर ही लौट कर आई है. पता नहीं वह कहां गई? कहीं रास्ते से उसे किसी ने उठा तो नहीं लिया? कुछ समझ में नहीं आता. उस की मां के साथ मैं ने उसे सब जगह तलाश लिया है, पर उस का कहीं कुछ पता नहीं चला. अब सर, जो कुछ कर सकते हैं आप ही कर सकते हैं.”

अप्सरा के फोटो को घूरते हुए एसएचओ ने पूछा, “कहीं किसी लड़के से प्रेम वगैरह तो नहीं था? घर में मां से लड़ाईझगड़ा तो नहीं होता था?”

“जी नहीं, ऐसी कोई बात नहीं थी. अप्सरा अपने काम से काम रखने वाली लड़की है.” साईंकृष्णा ने कहा.

“यह तुम्हारी सगी भांजी है?” एसएचओ ने पूछा.

एसएचओ के इस सवाल के जवाब में ‘न’ में सिर हिलाते हुए साईंकृष्णा ने कहा, “इस की मां अरुणा को मैं धर्म बहन मानता हूं. इसी रिश्ते से भांजी हुई. बाकी खून का कोई संबंध नहीं है.”

मामला थोड़ा विचित्र लगा, इसलिए कुछ सोचते हुए एसएचओ टी.के. रेड्डी ने कहा, “आप की शिकायत यहां दर्ज कर के थाना शम्साबाद को ट्रांसफर करनी पड़ेगी, क्योंकि घटना उसी इलाके की है. इसलिए इनवैस्टीगेशन वही लोग करेंगे.”

30 वर्षीया सुंदर युवती की गुमशुदगी का मामला था, इसलिए शिकायत मिलते ही थाना शम्साबाद पुलिस की टीम अप्सरा की खोज में लग गई. साईंकृष्णा के बताए अनुसार, सरूरनगर से अपनी कार में बैठा कर उस ने उसे शम्साबाद में बस स्टैंड पर उतारा था. सरूरनगर से शम्साबाद 21 किलोमीटर दूर है.

पुलिस की एक टीम सरूरनगर से शम्साबाद के बीच लगे सीसीटीवी की फुटेज की जांच करने में लग गई थी. सरूरनगर में साईंकृष्णा अप्सरा को कार में बैठाते तो दिखाई दिया, पर शम्साबाद में कहीं अप्सरा साईंकृष्णा की कार से उतर रही हो, ऐसा एक भी दृश्य वहां की सीसीटीवी फुटेज में दिखाई नहीं दिया.

टीम के सदस्यों ने यह जानकरी थाना शम्साबाद के एसएचओ को दी तो उन्होंने साईंकृष्णा को थाने बुला कर एक बार फिर पूरी जानकारी देने को कहा. इस बार थोड़ीथोड़ी देर में साईंकृष्णा अपना बयान बदलने लगा. उस के इस तरह बारबार बयान बदलने से एसएचओ को शक हुआ कि यह पुजारी निर्दोष तो बिलकुल नहीं लग रहा. इस की बात पूरी तरह सच बिलकुल नहीं है.

तब उन्होंने पुजारी से पूछा, “तुम ने अप्सरा को कहां उतारा था, वह एग्जैक्ट जगह बताओ.”

एसएचओ (शम्साबाद) के इस सवाल पर पुजारी थोड़ा बेचैन हुआ और बारबार बयान बदलने लगा. अब एसएचओ का शक विश्वास में बदलने लगा. उन्होंने सवाल पल सवाल करने शुरू किए तो पुजारी साईंकृष्णा ज्यादा देर तक अपने बयान पर टिका नहीं रह सका और सच्चाई उगल दी.

उस ने पुलिस को बता दिया कि अप्सरा अब इस दुनिया में नहीं है. उस ने खुद उस की हत्या कर के लाश मेनहोल में डाल दी है. उस की यह बात सुनते ही वहां मौजूद सभी पुलिसकर्मी चौंक गए. पुलिस को सब से पहले अप्सरा की लाश बरामद करनी थी, इसलिए पुलिस ने साईंकृष्णा को घटनास्थल पर ले जा कर घटना का रिकंस्ट्रक्शन कराया.

चूंकि पुजारी ने मेनहोल में लाश डालने के बाद उस के ऊपर 2 ट्रक मिट्टी डलवा दी थी, इसलिए पुलिस ने मेनहोल की मिट्टी हटवा कर अप्सरा की लाश निकलवा कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. पोस्टमार्टम के बाद अप्सरा की लाश उस की मां अरुणा को सौंप दी गई. मां ने उस का अंतिम संस्कार करा दिया.

अभिनेत्री बनना चाहती थी अप्सरा

फिर 9 जून, 2023 को पुलिस ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर पुजारी साईंकृष्णा को पत्रकारों के सामने पेश किया. इस प्रैस कौन्फ्रैंस में साईंकृष्णा ने अप्सरा हत्याकांड में अपना अपराध स्वीकार करते हुए उस की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी.

अप्सरा पहले अपनी मां अरुणा के साथ चेन्नै में रहती थी. वहां उस का विवाह भी हो गया था, लेकिन पति ने आत्महत्या कर ली थी तो अप्सरा अकेली पड़ गई. अप्सरा खूबसूरत तो थी ही, उसे अभिनय में रुचि भी थी. इसलिए वह मां के साथ हैदराबाद आ गई. यहां सरूरनगर की वेंकट कालोनी में किराए का मकान ले कर मांबेटी रहने लगीं. घर खर्च चलाने के लिए अप्सरा ने प्राइवेट नौकरी कर ली.

दरोगा की टेढ़ी सोच

प्रियंका को जल्दीजल्दी तैयार होता देख उस की मां चित्रा ने पूछा, ‘‘क्या बात है, आज कहीं जल्दी जाना है क्या, जो इतनी  जल्दी उठ कर तैयार हो गई?’’

‘‘हां मम्मी, परसों जो मैडम आई थीं, जिन्हें मैं ने अपने फोटो, आई कार्ड और सीवी दिया था, उन्होंने बुलाया है. कह रही थीं कि उन्होंने अपने अखबार में मेरी नौकरी की बात कर रखी है. इसलिए मुझे टाइम से पहुंचना है.’’

प्रियंका ने कहा तो चित्रा ने टिफिन में खाना पैक कर के उसे दे दिया. प्रियंका ने टिफिन अपने बैग में रखा और शाम को जल्दी लौट आने की बात कह कर बाहर निकल गई.   कुछ देर बाद प्रियंका के पापा जगवीर भी अपने क्लीनिक पर चले गए तो चित्रा घर के कामों में व्यस्त हो गई. उस दिन शाम को करीब साढ़े 5 बजे जगवीर सिंह के मोबाइल पर उन के साले ओमदत्त का फोन आया.

ओमदत्त ने उन्हें बताया, ‘‘जीजाजी, मेरे फोन पर कुछ देर पहले प्रियंका का फोन आया था. वह कह रही थी कि बच्चू सिंह ने अपने बेटे राहुल और कुछ बदमाशों की मदद से उस का अपहरण करवा लिया है और वह अलीगढ़ के पास खैर इलाके के वरौला गांव में है.’’

ओमदत्त की बात सुन कर जगवीर सिंह की आंखों के आगे अंधेरा छा गया. उन्होंने जैसेतैसे अपने आप को संभाला और क्लीनिक बंद कर के घर आ गए. तब तक उन का साला ओमदत्त भी उन के घर पहुंच गया था. मामला गंभीर था. विचारविमर्श के बाद दोनों गाजियाबाद के थाना कविनगर पहुंचे और लिखित तहरीर दे कर 25 वर्षीया प्रियंका के अपहरण की नामजद रिपोर्ट दर्ज करा दी.

जगवीर सिंह सपरिवार गोविंदपुरम गाजियाबाद में किराए के मकान में रहते थे. उन के परिवार में पत्नी चित्रा के अलावा 3 बच्चे थे—बेटी प्रियंका और 2 बेटे पंकज व तितेंद्र. उन का बड़ा बेटा पंकज एक टूर ऐंड ट्रैवल कंपनी की गाड़ी चलाता था, जबकि छोटा तितेंद्र सरकारी स्कूल में 10वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा था.

जगवीर सिंह ने 7 साल पहले प्रियंका की शादी गुलावठी के धर्मेंद्र चौधरी के साथ कर दी थी. धर्मेंद्र एक ट्रैवल एजेंसी में काम करता था. शादी के 1 साल बाद प्रियंका एक बेटे की मां बन गई थी, जो अब 6 साल का है. आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से जगवीर अपने बच्चों को अधिक पढ़ालिखा नहीं सके. उन का छोटा सा क्लीनिक था, जहां वह बतौर आरएमपी प्रैक्टिस करते थे. यही क्लीनिक उन की आय का एकमात्र साधन था.

प्रियंका शहर में पलीबढ़ी महत्त्वाकांक्षी लड़की थी. शादी के बाद गांव उसे कभी भी अच्छा नहीं लगा. इसी को ले कर जब पतिपत्नी में अनबन रहने लगी तो प्रियंका ने पति से अलग रहने का निर्णय ले लिया और बेटे सहित धर्मेंद्र का घर छोड़ कर मातापिता के पास गाजियाबाद आ गई. जगवीर सिंह की आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब थी. बेटे सहित प्रियंका के मायके आ जाने से उन के पारिवारिक खर्चे और भी बढ़ गए.

किसी भी मांबाप के लिए यह किसी विडंबना से कम नहीं होता कि उन की बेटी शादी के बाद भी उन के साथ रहे. इस बात को प्रियंका अच्छी तरह समझती थी. इसलिए वह अपने स्तर पर नौकरी की तलाश में लग गई. काफी खोजबीन के बाद भी जब उसे कोई अच्छी नौकरी नहीं मिली तो उस ने एक मोबाइल शौप पर सेल्सगर्ल की नौकरी कर ली.

मोबाइल शौप पर काम करते हुए प्रियंका की मुलाकात तरुण से हुई. तरुण चढ़ती उम्र का अच्छे परिवार का लड़का था. पहली ही मुलाकात में तरुण आंखों के रास्ते प्रियंका के दिल में उतर गया. बातचीत हुई तो दोनों ने अपनाअपना मोबाइल नंबर एकदूसरे को दे दिया. इस के बाद दोनों प्राय: रोज ही एकदूसरे से फोन पर बातें करने लगे. जल्दी ही मिलनेमिलाने का सिलसिला भी शुरू हो गया. दोनों एकदूसरे को दिन में कई बार फोन और एसएमएस करने लगे. जब समय मिलता तो दोनों साथसाथ घूमते और रेस्टोरेंट वगैरह में जाते. धीरेधीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती गईं.

तरुण के पिता बच्चू सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस में सबइंसपेक्टर थे और गाजियाबाद के थाना मसूरी में तैनात थे. जब तरुण और प्रियंका के संबंध गहराए तो उन दोनों की प्रेम कहानी का पता बच्चू सिंह को भी लग गया.   उन्होंने जब इस बारे में तरुण से पूछा तो उस ने बेहिचक सारी बातें पिता को बता दीं. प्रियंका के बारे में भी सब कुछ और यह भी कि वह उस से शादी की इच्छा रखता है. उधर प्रियंका भी तरुण से शादी का सपना देखने लगी थी.

बेटे की प्रेमकहानी सुन कर बच्चू सिंह बहुत नाराज हुए. उन्होंने तरुण से साफसाफ कह दिया कि वह प्रियंका से दूर रहे, क्योंकि एक तलाकशुदा और एक बच्चे की मां कभी भी उन के परिवार की बहू नहीं बन सकती. इतना ही नहीं, उन्होंने प्रियंका को भी आगे न बढ़ने की सख्त चेतावनी दी. प्रियंका और अपने बेटे की प्रेम कहानी को ले कर वह तनाव में रहने लगे.

बच्चू सिंह ने प्रियंका और तरुण को चेतावनी भले ही दे दी थी, पर वे जानते थे कि ऐसी स्थिति में न लड़का समझेगा न लड़की. इसी वजह से उन्हें इस समस्या का कोई आसान हल नहीं सूझ रहा था. आखिर काफी सोचविचार कर उन्होंने प्रियंका को समझाने का फैसला किया.

बच्चू सिंह ने प्रियंका को समझाया भी, लेकिन वह शादी की जिद पर अड़ी रही. इतना ही नहीं, ऐसा न होने पर उस ने बच्चू सिंह को परिवार सहित अंजाम भुगतने की धमकी तक दे डाली. अपनी इस धमकी को उस ने सच भी कर दिखाया.

1 मार्च, 2013 को उस ने थाना कविनगर में बच्चू सिंह, उन की पत्नी, बेटे राहुल, नरेंद्र, प्रशांत और रोबिन के खिलाफ धारा 376, 452, 323, 506 व 406 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया, जिस में उस ने घर में घुस कर मारपीट, बलात्कार और 70 हजार रुपए लूटने का आरोप लगाया. बलात्कार का आरोप लगने से बच्चू सिंह के परिवार की बड़ी बदनामी हुई.

इस मामले में बच्चू सिंह का नाम आने पर उन का तबादला मेरठ के जिला बागपत कर दिया गया. मामला चूंकि एक पुलिसकर्मी से संबंधित था, सो इस सिलसिले में गंभीर जांच करने के बजाय विभागीय जांच के नाम पर इसे लंबे समय तक लटकाए रखा गया.

जबकि दूसरे आरोपियों के खिलाफ कानूनी काररवाई की गई. उधर बच्चू सिंह के खिलाफ कोई विशेष काररवाई न होते देख प्रियंका ने उन के बड़े बेटे राहुल और उस के दोस्त के खिलाफ 17 जून, 2013 को छेड़खानी व मारपीट का एक और मुकदमा दर्ज करा दिया. इस से बच्चू सिंह का परिवार काफी दबाव में आ गया.

2-2 मुकदमों में फंसने से बच्चू सिंह और उन के परिवार को रोजरोज कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ रहे थे. इसी सब के चलते 31 नवंबर, 2013 को प्रियंका घर से गायब हो गई. प्रियंका के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज होने पर थानाप्रभारी कविनगर ने इस मामले की जांच की जिम्मेदारी सबइंसपेक्टर शिवराज सिंह को सौंप दी. शिवराज सिंह प्रियंका द्वारा दर्ज कराए गए पिछले 2 केसों की भी जांच कर रहे थे. उन्होंने पिछले दोनों केसों की तरह इस मामले में भी कोई विशेष दिलचस्पी नहीं ली.

दूसरी ओर प्रियंका के मातापिता लगातार थाने के चक्कर लगाते रहे. उन्होंने डीआईजी, आईजी और गाजियाबाद के एसपी, एसएसपी तक सभी अधिकारियों को अपनी परेशानी बताई . लेकिन किसी भी स्तर पर उन की कोई सुनवाई नहीं हुई. इसी बीच अचानक थानाप्रभारी कविनगर का तबादला हो गया. उन की जगह नए थानाप्रभारी आए अरुण कुमार सिंह.

अरुण कुमार सिंह ने प्रियंका के अपहरण के मामले में विशेष दिलचस्पी लेते हुए इस की जांच का जिम्मा बरेली से तबादला हो कर आए तेजतर्रार एसएसआई पवन चौधरी को सौंप कर कड़ी जांच के आदेश दिए. पवन चौधरी ने जांच में तेजी लाते हुए इस मामले में उस अज्ञात नामजद महिला पत्रकार के बारे में पता किया, जिस ने लापता होने वाले दिन प्रियंका को नौकरी दिलाने के लिए बुलाया था.

छानबीन में यह भी पता चला कि उस महिला का नाम रश्मि है और वह अपने पति के साथ केशवपुरम में किराए के मकान में रहती है. यह भी पता चला कि वह खुद को किसी अखबार की पत्रकार बताती है. पवन चौधरी ने रश्मि का मोबाइल नंबर हासिल कर के उस की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स से यह बात साफ हो गई कि 31 नवंबर को उसी ने प्रियंका को फोन किया था.

यह जानकारी मिलते ही पुलिस ने 18 फरवरी, 2014 को रात साढ़े 12 बजे रश्मि और उस के पति अमरपाल को उन के घर से गिरफ्तार कर लिया. थाने पर जब दोनों से पूछताछ की गई तो पहले तो पतिपत्नी ने पुलिस को बरगलाने की कोशिश की, लेकिन जब उन के साथ थोड़ी सख्ती की गई तो वे टूट गए. मजबूर हो कर उन दोनों ने सारा राज खोल दिया. पता चला कि प्रियंका की हत्या हो चुकी है.

रश्मि और उस के पति अमरपाल के बयानों के आधार पर 19 फरवरी को सब से पहले सिपाही विनेश कुमार को गाजियाबाद पुलिस लाइन से गिरफ्तार किया गया. इस के बाद उसी दिन इस हत्याकांड के मास्टरमाइंड बच्चू सिंह को टटीरी पुलिस चौकी, बागपत से गिरफ्तार कर गाजियाबाद लाया गया.

थाने पर जब सब से पूछताछ की गई तो पता चला कि बच्चू सिंह प्रियंका द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमों से बहुत परेशान रहने लगे थे. इसी चक्कर में उन का तबादला भी बागपत कर दिया गया था. यहीं पर बच्चू सिंह की मुलाकात उन के साथ काम करने वाले सिपाही राहुल से हुई.

राहुल अलीगढ़ का रहने वाला था. बच्चू सिंह ने अपनी समस्या के बारे में उसे बताया. राहुल पर भी अलीगढ़ में एक मुकदमा चल रहा था, जिस के सिलसिले में वह पेशी पर अलीगढ़ आताजाता रहता था. राहुल का एक दोस्त विनेश कुमार भी पुलिस में था और गाजियाबाद में तैनात था. विनेश जब एक मामले में अलीगढ़ जेल में था तो उस की मुलाकात एक बदमाश अमरपाल से हुई थी.

विनेश ने अमरपाल की जमानत में मदद की थी. इस के लिए वह विनेश का एहसान मानता था. बच्चू सिंह ने राहुल और विनेश कुमार के माध्यम से अमरपाल से प्रियंका की हत्या का सौदा 2 लाख रुपए में तय कर लिया. योजना के अनुसार अमरपाल ने इस काम के लिए अपनी पत्नी रश्मि की मदद ली. उस ने रश्मि को प्रियंका से दोस्ती करने को कहा.  उस ने प्रियंका से दोस्ती गांठ कर उसे विश्वास में ले लिया.

रश्मि को जब यह पता चला कि प्रियंका को नौकरी की जरूरत है तो उस ने खुद को एक अखबार की पत्रकार बता कर प्रियंका को 30 नवंबर, 2013 की सुबह फोन कर के घर से बाहर बुलाया और बसअड्डे ले जा कर उसे अमरपाल को यह कह कर सौंप दिया कि वह अखबार का सीनियर रिपोर्टर है और अब आगे उस की मदद वही करेगा.

अमरपाल प्रियंका को बस से लालकुआं तक लाया, जहां पर रितेश नाम का एक और व्यक्ति मोटरसाइकिल लिए उस का इंतजार कर रहा था. तीनों उसी बाइक से ले कर देर शाम अलीगढ़ पहुंचे.वहां से वे लोग खैर के पास गांव बरौला गए. तब तक प्रियंका को शक हो गया था कि वह गलत हाथों में पहुंच गई है. जब एक जगह बाइक रुकी तो प्रियंका ने बाथरूम जाने के बहाने अलग जा कर अपने मामा को फोन कर के अपनी स्थिति बता दी.

बाद में जब इन लोगों ने एक नहर के पास बाइक रोकी तो प्रियंका ने भागने की कोशिश भी की. लेकिन वह गिर पड़ी. यह देख अमरपाल और रितेश ने उसे पकड़ लिया और उस की गला घोंट कर हत्या कर दी. हत्या के बाद इन लोगों ने प्रियंका की लाश नहर में फेंक दी और अलीगढ़ स्थित अपने घर चले गए. इस हत्याकांड में बच्चू सिंह के बेटे राहुल की भी संलिप्तता पाए जाने पर पुलिस ने अगले दिन उसे भी गिरफ्तार कर लिया.

इस हत्याकांड में नाम आने पर सिपाही राहुल फरार हो गया था, जिसे पुलिस गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही थी. पूछताछ के बाद सभी गिरफ्तार अभियुक्तों को अगले दिन गाजियाबाद अदालत में पेश किया गया, जहां से रश्मि, बच्चू सिंह, विनेश कुमार और तरुण को जेल भेज दिया गया. जबकि अमरपाल को रिमांड पर ले कर प्रियंका की लाश की तलाश में खैर इलाके का चक्कर लगाया गया.

लेकिन वहां पर लाश का कोई अवशेष नहीं मिला. पुलिस ने उस इलाके की पूरी नहर छान मारी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. रिमांड अवधि पूरी होने पर अमरपाल को भी डासना जेल भेज दिया गया. फिलहाल सभी अभियुक्त डासना जेल में बंद हैं.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

इश्क के दरिया में जुर्म की नाव – भाग 4

उस समय तक टिंकू लाश को ठिकाने लगाने के लिए बाजार से गंडासा और प्लास्टिक के कुछ खाली कट्टे, रस्सी खरीद लाया था. संदीप कमरे पर पहुंचा तो टिंकू ने कहा, ‘‘यार, यह अपनी पत्नी से झगड़ रहा था, मैं ने बीचबचाव किया तो इस का सिर दीवार से लग गया और इस का काम तमाम हो गया. अब यह मुसीबत गले पड़ी है तो इसे ठिकाने लगाना भी जरूरी है. इसी के लिए मैं ने तुझे बुलाया है.’’

ऐसी मुसीबत से बाहर निकालने में संदीप ने उस का साथ देने की हामी भर दी. टिंकू ने इंद्रपाल की लाश ठिकाने लगाने की योजना पहले ही बना रखी थी. उसी योजना के अनुसार उस ने सब से पहले गंडासे से इंद्रपाल की गरदन काट कर धड़ से अलग की. सिर को उस ने एक बड़ी सी पौलीथिन थैली में रख लिया.  धड़ को प्लास्टिक के कट्टे में भर कर कट्टे को रस्सी से अच्छी तरह लपेट दिया. फिर उस कट्टे को दूसरे कट्टे में रखा और उसे अच्छी तरह बांध दिया.

लाश की अच्छी तरह पैकिंग करने के बाद अब वह रास्तों के सुनसान होने का इंतजार करने लगा. आधी रात के बाद धड़ वाले कट्टे को टिंकू ने अपने कंधे पर रखा और सिर वाली थैली संदीप ने ले ली. दोनों साढ़े 3 पुश्ता से होते हुए मेन रोड पर पहुंचे. फिर वहां से वे खादर की तरफ उतर कर गैस पाइपलाइन से थोड़ा आगे चल कर पानी के गड्ढे में सिर वाली थैली डाल दी.

धड़ वाला कट्टा उन्होंने तीसरे पुश्ते के पास डाल दिया. लाश को ठिकाने लगाने के बाद संदीप रात में ही नांगलोई लौट गया और टिंकू अपने कमरे पर लौट आया. कमरे में खून फैला हुआ था. टिंकू ने रात में ही खून को साफ किया. उस के कपड़ों पर खून के जो छींटे आ गए थे, उन्हें भी उस ने साफ किए. सुबह होने पर करावलनगर चला गया. करावल नगर में जिस जगह उस का काम चल रहा था, वहीं पर उस ने अपना सामान वगैरह रख दिया और वहीं रहने लगा.

उधर शशिबाला छोटी बहन सुषमा के कमरे पर गई तो उस ने शशिबाला से पूछा कि जीजू कहां हैं, वह क्यों नहीं आए?

तब शशिबाला ने उस से यह कह दिया कि वह घर पर बैठ कर ही खापी रहे हैं. शशिबाला की बुआ विनोद नगर में रहती थीं. उन से मिले हुए उसे काफी दिन हो गए थे. वह सुषमा के साथ उन से मिलने के लिए चली गई. वहां से वह उसी इलाके में रहने वाली चचेरी बहन संगीता के यहां भी गईं.

अगले दिन बुआ के घर से लौटते समय सुषमा ने कहा, ‘‘दीदी, जीजू से नहीं मिली हूं, चलो पहले तुम्हारे कमरे पर चलते हैं. जीजू से मिल कर फिर तुम मेरे साथ ही मेरे कमरे पर चलना.’’

‘‘उन से क्या मिलेगी. शराब पी कर कहीं घूमफिर रहे होंगे. फिर भी जब तेरा मन उन से मिलने को हो रहा है तो तू चल.’’ कहते हुए शशिबाला अपने कमरे पर गई तो वहां ताला लगा था. ताला देखते ही वह सुषमा से बोली, ‘‘मैं कह रही थी न कि वह कहीं घूमफिर रहे होंगे. तू ही देख, कमरे को बंद कर के पता नहीं कहां चले गए. मुझे लगता है शराब पी कर कहीं पड़े होंगे.’’

सुषमा को क्या पता था कि जिस जीजा से वह मिलने की इच्छा जता रही है, उस का काम तमाम हो चुका है और बहन उसे बेवकूफ बना रही है. खैर, बहन के कमरे का ताला बंद होने पर सुषमा बहन और उस के बच्चों को अपने कमरे पर ले आई. शशिबाला उस दिन सुषमा के यहां रही.

अगले दिन भी इंद्रपाल का पता नहीं चला तो सुषमा ने उस की सूचना थाने में दर्ज कराने को कहा. बहन के दबाव डालने पर शशिबाला ने 20 मार्च, 2014 को पति की गुमशुदगी थाने में दर्ज करा दी.

इस के बाद पुलिस मामले की छानबीन में लग गई. उस बीच टिंकू और शशिबाला की फोन पर बातें होती रहीं. जब उसे पता चला कि पुलिस बहुत सक्रिय हो गई है तो टिंकू ने 22 मार्च को सुषमा के कमरे पर पहुंच कर शशिबाला से मुलाकात की और उस से कहा कि वह पुलिस से काररवाई बंद करने की बात कह कर अपने गांव चली जाए. बाद में जब मामला शांत हो जाएगा तो वह उसे वहां से बुला लाएगा, फिर कहीं दूसरी जगह रहा जाएगा.

शशिबाला को उस का सुझाव पसंद आ गया और वह अगले दिन 23 मार्च की सुबह ही सुषमा और उस के पति को ले कर थाने पहुंच गई. लेकिन इत्तफाक से उसी समय थाने में सुषमा के मोबाइल पर टिंकू का फोन आ गया तो पुलिस टिंकू तक पहुंच गई.

टिंकू से पूछताछ के बाद पुलिस टीम ने 24 मार्च को संदीप और शशिबाला को भी गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने टिंकू की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त गंडासा और कपड़े आदि भी बरामद कर लिए.

पुलिस ने तीनों अभियुक्तों को कड़कड़डूमा न्यायालय में अतिरिक्त सत्र दंडाधिकारी शरद गुप्ता की कोर्ट में पेश किया. जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया. मामले की विवेचना इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह कर रहे हैं. द्य

—कथा पुलिस सूत्रों और जनचर्चा पर आधारित.

इश्क के दरिया में जुर्म की नाव – भाग 3

शशिबाला पहली बार दिल्ली आई थी. यहां आ कर उस का भी मन लग गया. इसी बीच वह एक बेटी की मां बनी. मां बनने के बाद इंद्रपाल और शशिबाला की खुशी का ठिकाना न रहा.  उन के दिन हंसीखुशी से गुजर रहे थे. इस के बाद शशिबाला एक और बेटी की मां बनी. 2 बच्चों के जन्म के बाद भी शशिबाला के हुस्न में जबरदस्त आकर्षण था. बल्कि इस के बाद तो उस के रूप में और भी निखार आ गया था.

इंद्रपाल जिस ठेकेदार के साथ काम करता था, उस का नाम टिंकू था. टिंकू बिहार के जिला मुंगेर के पहाड़पुर गांव के रहने वाले मुदीन सिंह का बेटा था. बीए पास टिंकू 3 साल पहले काम की तलाश में दिल्ली आया था. काफी कोशिश के बाद जब उस की कहीं नौकरी नहीं लगी तो उस ने कंस्ट्रक्शन कंपनियों में लेबर सप्लाई का काम शुरू कर दिया. कंस्ट्रक्शन ठेकेदारों के संपर्क में रहरह कर उसे भी मकान बनवाने के काम का अनुभव हो गया. फिर उस ने भी बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन के ठेके लेने शुरू कर दिए.

इंद्रपाल कुछ दिनों से टिंकू के साथ ही काम कर रहा था. करीब एक साल पहले की बात है. टिंकू का काम उस्मानपुर में चल रहा था. वह वहीं अपने रहने के लिए किराए का कमरा देख रहा था, ताकि अपने काम पर नजर रख सके. किराए के कमरे के बारे में उस ने इंद्रपाल से बात की. इंद्रपाल न्यू उस्मानपुर के गौतम विहार में पवन शर्मा के यहां रहता था. उस ने 2 कमरे किराए पर ले रखे थे.

उस ने टिंकू से कहा, ‘‘मेरे पास 2 कमरे हैं. चाहो तो तुम उन में से एक कमरा ले सकते हो. एक में मेरा परिवार रह लेगा.’’

टिंकू जब उस का कमरा देखने गया तो इंद्रपाल ने अपनी बीवी को बताया कि यह हमारे ठेकेदार हैं और इन्हें हमारा कमरा पसंद आ गया तो यह यहीं रहेंगे. ठेकेदार के घर आने पर शशिबाला ने उस की जम कर खातिरदारी की.  29 साल का टिंकू शशिबाला की मेहमाननवाजी से बहुत प्रभावित हुआ. उसे इंद्रपाल का कमरा भी पसंद आ गया तो अगले दिन से वह वहां रहने लगा.

टिंकू कमरे पर अकेला रहता था. उस की आमदनी अच्छी थी, इसलिए वह जी खोल कर पैसे खर्च करता था. चूंकि शशिबाला बराबर वाले कमरे में रहती थी, इसलिए उस की बेटियों के लिए वह अकसर खानेपीने की चीजें लाता रहता था. जिस की वजह से दोनों बच्चियां उस से घुलमिल गई थीं. कभीकभी वह शराब पीता तो इंद्रपाल को भी अपने कमरे पर बुला लेता था. फ्री में शराब मिलने पर इंद्रपाल की भी मौज आ गई थी.

इंद्रपाल जो कमाता था, उस से उस के घर का गुजारा तो हो जाता था, लेकिन वह बीवीबच्चों की फरमाइशें पूरी नहीं कर पाता था. जबकि टिंकू बहुत ठाठबाट से रहता था. 32 साल की शशिबाला की भी कुछ ख्वाहिशें थीं. पति की कमाई से उसे ख्वाहिशें पूरी होती नजर नहीं आ रही थीं. इसलिए उस ने अपने कदम टिंकू की तरफ बढ़ा दिए.

टिंकू जवान और अविवाहित था. अनुभवी शशिबाला ने अपने हुस्न के जाल में उसे जल्द ही फांस लिया. उन दोनों के बीच अवैध संबंध बन गए. यह करीब एक साल पहले की बात है.

अपनी उम्र से छोटे टिंकू के साथ संबंध बन जाने के बाद शशिबाला को अपना 40 वर्षीय पति बासी लगने लगा. अब वह उस में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाती. इंद्रपाल सुबह का घर से निकलने के बाद शाम को ही लौटता था, जबकि टिंकू का जब मन होता घर आ जाता था. मौका मिलने पर वे अपनी हसरतें पूरी कर लेते. इस तरह दोनों का यह खेल चलता रहा.

टिंकू अब शशिबाला को आर्थिक सहयोग भी करने लगा था. इस के अलावा वह उस के पसंद के कपड़े आदि भी खरीदवा देता. शशिबाला भी उस की खूब सेवा करती. पत्नी की बेरुखी को इंद्रपाल समझ नहीं पा रहा था.  वह पत्नी से इस की वजह पूछता तो वह उलटे उस पर झुंझला जाती. तब इंद्रपाल उस की पिटाई कर देता. अगर उस समय टिंकू घर पर होता तो बीचबचाव कर देता और नहीं होता तो शशिबाला को वह जम कर धुन डालता था.

पति द्वारा आए दिन पिटने से शशिबाला आजिज आ चुकी थी. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि उसे पति की पिटाई से कैसे निजात मिले.  टिंकू के सामने उस की प्रेमिका की पिटाई हो, यह बात उसे अच्छी नहीं लगती थी. शशिबाला चाहती थी कि वह हमेशा टिंकू के साथ ही पत्नी की तरह रहे. लेकिन इंद्रपाल के होते हुए ऐसा मुमकिन नहीं था.

इस बारे में उस ने टिंकू से भी बात की तो टिंकू ने उसे भरोसा दिलाया कि समय आने दो, सब कुछ ठीक हो जाएगा. शशिबाला जानती थी कि टिंकू जो कहता है, उस काम को पूरा जरूर कर देता है. इसलिए उसे विश्वास था कि वह पति से छुटकारा दिलाने का कोई न कोई रास्ता जरूर निकाल लेगा.

होली के मौके पर टिंकू ने इंद्रपाल के बीवीबच्चों पर खूब खर्च किया. खानेपीने के सामान के अलावा उस ने बच्चों को भी रंग और उन की पसंद की पिचकारियां दिलवाईं. बड़ी हंसीखुशी से त्यौहार मनाया. इंद्रपाल को भी जम कर शराब पिलाई.

18 मार्च, 2014 को इंद्रपाल का नशा उतरा तो किसी बात को ले कर उस की पत्नी से कहासुनी हो गई. उस समय दोनों बेटियां छत पर खेल रही थीं. दोनों के बीच झगड़ा बढ़ा तो इंद्रपाल ने उस की पिटाई करनी शुरू कर दी. इत्तफाक से टिंकू उस समय कमरे पर ही था. शोरशराबा सुन कर टिंकू वहां पहुंच गया. उस ने जब इंद्रपाल को रोकना चाहा तो इंद्रपाल ने उल्टे उसे ही झटक दिया. इस पर टिंकू को भी गुस्सा आ गया. उस ने इंद्रपाल को जोर से धक्का दिया तो इंद्रपाल का सिर दीवार से टकरा गया.

दीवार से सिर टकराने पर इंद्रपाल बेहोश हो कर नीचे गिर गया. यह देख कर टिंकू और शशिबाला घबरा गए. उन दोनों ने सोचा कि इंद्रपाल शायद मर चुका है.

शशिबाला ने टिंकू से कहा, ‘‘अब सब कुछ तुम्हें ही संभालना है, मैं अभी अपनी बहन सुषमा के घर जा रही हूं. जब काम हो जाए तो फोन कर देना.’’

इंद्रपाल को ठिकाने लगाने का टिंकू के पास इस से अच्छा मौका नहीं था. उस ने उसी समय दोनों हाथों से उस का गला घोंट दिया. इस के बाद इंद्रपाल का शरीर ठंडा पड़ता गया.  इंद्रपाल की हत्या के बाद उस के सामने इस बात की समस्या यह थी कि लाश को ठिकाने कहां लगाए. तब तक शशिबाला दोनों बेटियों को ले कर वहां से 200 मीटर दूर जयप्रकाश नगर में रहने वाली सुषमा के यहां चली गई थी.

कुछ देर सोचने के बाद टिंकू ने नांगलोई के चंदन विहार में रहने वाले अपने दोस्त संदीप को फोन कर के कहा, ‘‘यार संदीप, इस समय मैं एक बड़ी मुसीबत में फंस गया हूं. तू इसी समय मेरे कमरे पर आ जा.’’

23 वर्षीय संदीप भी मूलरूप से टिंकू के ही गांव का रहने वाला था. वह 3 साल पहले ही दिल्ली आया था. फिलहाल वह टिंकू के साथ ही राजमिस्त्री का काम कर रहा था. दोस्त टिंकू की परेशानी की बात सुन कर संदीप तुरंत अपने कमरे से निकल गया और रात करीब 8 बजे टिंकू के कमरे पर पहुंच गया.

जबरदस्ती का प्यार

इश्क के दरिया में जुर्म की नाव – भाग 2

दूसरे सुषमा ने टिंकू वाली बात पुलिस को बताई तो शशिबाला उस के कान में खुसरफुसर क्यों कर रही थी? इस का मतलब यह हुआ कि शशिबाला और टिंकू की इस बीच फोन पर भी बातचीत होती रही होगी. इन सब बातों से शशिबाला पर इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह का शक का दायरा बढ़ता जा रहा था.

पहले तो पुलिस यही समझ रही थी कि इंद्रपाल के साथ टिंकू भी गायब है, लेकिन अब यह बात साफ हो चुकी थी कि टिंकू कहीं और रह रहा है. वह कहां रह रहा है, इस बात को शशिबाला जरूर जानती होगी. इसलिए इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह ने शशिबाला से ही टिंकू के बारे में पूछताछ की तो उस ने साफसाफ कह दिया कि उसे नहीं पता कि अब वह कहां रह रहा है?

जिस समय पुलिस शशिबाला से पूछताछ कर रही थी, सुषमा भी वहीं थी. तभी सुषमा के फोन की घंटी बजी. सुषमा ने काल रिसीव की तो दूसरी ओर से टिंकू की आवाज आई.   सुषमा को पता था कि पुलिस टिंकू से पूछताछ करना चाहती है, इसलिए उस ने अपने फोन के स्पीकर पर हथेली रखी, ताकि उस की आवाज टिंकू तक न पहुंचे.

फिर वह इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह से आहिस्ता से बोली, ‘‘सर, टिंकू का फोन आया है.’’

जितेंद्र सिंह ने उस से धीरे से कहा, ‘‘उसे तुम किसी तरह शास्त्री पार्क बुला लो.’’

सुषमा ने ऐसा ही किया. उस ने टिंकू से बात करनी शुरू की तो टिंकू ने कहा, ‘‘सुषमा जी, मैं आप से एक जरूरी बात करना चाहता हूं.’’

सुषमा ने कहा, ‘‘ठीक है, तुम शास्त्री पार्क बस स्टौप पर आ जाओ. मैं भी वहीं पहुंच रही हूं.’’

इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह ने सुषमा द्वारा टिंकू से कही गई बात सुन ली थी, इसलिए वह 2-3 पुलिसकर्मियों को साथ ले कर सुषमा के साथ शास्त्री पार्क बस स्टौप पर पहुंच गए. पुलिस टीम सादा लिबास में थी.

सुबह साढ़े 10 बजे के करीब वहां एक युवक पहुंचा. वह जैसे ही सुषमा से बात करने लगा तो पुलिस ने सोचा कि यही टिंकू होगा, उसे दबोच लिया. पूछताछ में उस ने अपना नाम टिंकू बताया. उसे ले कर पुलिस थाने पहुंची तो उस से पहले शशिबाला थाने से जा चुकी थी. वह वहां से क्यों और कहां गई, यह बाद की बात थी. उस से पहले इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह ने टिंकू से इंद्रपाल के बारे में मालूमात की.

टिंकू पहले तो उन के सामने झूठ बोलता रहा. लेकिन पुलिस की सख्ती के आगे उस का झूठ ज्यादा देर तक नहीं टिक सका. उस ने स्वीकार कर लिया कि उस ने इंद्रपाल की हत्या करने के बाद उस की लाश को तीसरे पुश्ते के पास डाल दिया है. टिंकू ने बताया था कि उस की हत्या 18 मार्च को ही कर दी गई थी.

उस की लाश को जंगल में डाले हुए 6 दिन हो गए थे. लाश को कहीं जंगली जानवर वगैरह न खा गए हों, इसलिए पुलिस टिंकू को साथ ले कर तीसरे पुश्ते की तरफ चल दी. पुलिस के साथ इंद्रपाल के चाचा और चचेरा भाई भी था.

पुलिस तीसरे पुश्ते के पास यमुना खादर पहुंची और वहां टिंकू की निशानदेही पर झाडि़यों से प्लास्टिक का एक कट्टा बरामद किया. उस कट्टे का मुंह एक रस्सी से बंधा हुआ था. टिंकू ने बताया कि इंद्रपाल की लाश इसी कट्टे में है.  इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह ने फोन कर के क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम को भी वहां बुलवा लिया. क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम के सामने जब उस कट्टे को खोला गया तो उस के अंदर रस्सी से लपेटा हुआ एक और कट्टा निकला.

उस कट्टे को खोला गया तो उस में एक आदमी की लाश थी. लेकिन उस लाश का सिर गायब था. सिर के बारे में टिंकू से पूछा गया तो उस ने कहा कि सिर को जानवर खा गए होंगे. यह बात जितेंद्र सिंह के गले नहीं उतरी, क्योंकि जब प्लास्टिक के कट्टे रस्सी से बंद थे तो जानवर सिर कैसे खा सकते थे. इस का मतलब टिंकू उन से झूठ बोल रहा था. उन्होंने उस से सख्ती की तो उस ने बताया कि सिर पाइपलाइन के पास खादर में पानी के एक गड्ढे में डाल दिया था.

पुलिस वहां से एक-डेढ़ किलोमीटर दूर टिंकू की बताई जगह पर पहुंची. वहां गैस पाइपलाइन के पास पानी से भरे एक गड्ढे में एक पौलीथिन की थैली दिखाई दी. उस थैली को निकलवाया गया तो उस में सिर निकला. सुषमा और इंद्रपाल के रिश्तेदारों ने उस की पहचान इंद्रपाल के सिर के रूप में की.

पुलिस ने इंद्रपाल के सिर और धड़ को कब्जे में ले कर पंचनामा करने के बाद उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और थाने लौट कर इंद्रपाल की गुमशुदगी के मामले को हत्या कर लाश को छिपाने की धाराओं में दर्ज कर लिया.

अब पुलिस यह जानना चाह रही थी कि जिस इंद्रपाल के साथ टिंकू की गहरी दोस्ती थी, उसी इंद्रपाल के उस ने टुकड़े क्यों कर दिए? यह जानने के लिए पुलिस ने टिंकू से पूछताछ की तो इंद्रपाल की हत्या की जो कहानी सामने आई, उस की वजह उस की बीवी शशिबाला निकली.

इंद्रपाल मूलरूप से उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के कस्बा सिंभावली के नजदीक बसे गांव भगवानपुर का रहने वाला था. सन 1999 में उस की शादी जिला हापुड़ के ही गांव पटना मुरादपुर की रहने वाली शशिबाला से हुई थी.   जिस दिन शशिबाला की शादी हुई थी, उसी दिन उस की छोटी बहन सुषमा की शादी विक्रम के साथ हुई थी. यानी दोनों बहनों की शादी एक ही मंडप के नीचे हुई थी.

शादी के 7 साल बाद भी शशिबाला जब मां नहीं बनी तो वह बहुत टेंशन में रहने लगी. इंद्रपाल भी परेशान रहता था. उस ने बीवी का इलाज करवाया. जिस की वजह से उस पर कुछ लोगों का कर्ज भी हो गया.   वह गांव में खेतीकिसानी करता था. इस काम से उसे अपने ऊपर का कर्ज उतरने की कोई उम्मीद नहीं थी. इसलिए उस ने दिल्ली जा कर कमाने की सोची. उस के गांव के कई लड़के दिल्ली में काम करते थे, इसलिए वह भी दिल्ली आ गया.

वह मामूली पढ़ालिखा था, इसलिए उसे उस की इच्छा के मुताबिक नौकरी नहीं मिली. तब उस ने मजबूरी में बेलदारी करनी शुरू कर दी. दिल्ली में इस काम के बदले उसे जो मजदूरी मिल रही थी, वह उस के हिसाब से अच्छी थी. इसलिए कुछ दिनों बाद ही वह पत्नी शशिबाला को भी दिल्ली लिवा लाया और उत्तरपूर्वी दिल्ली के न्यू उस्मानपुर में किराए पर कमरा ले कर रहने लगा.

प्रेमिका बनी ब्लैकमेलर

इश्क के दरिया में जुर्म की नाव – भाग 1

शशिबाला अपनी छोटी बहन सुषमा के साथ 20 मार्च, 2014 को दोपहर के समय उत्तर पूर्वी दिल्ली के थाना न्यू उस्मानपुर पहुंची. थानाप्रभारी महावीर सिंह से मुलाकात कर उस ने बताया कि उस का पति इंद्रपाल 18 मार्च से गायब है. हम ने सभी जगह देख लिया, लेकिन उन का कहीं भी पता नहीं चला.

‘‘वह कहां से लापता हुए हैं. ’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘मैं उन्हें घर पर ही छोड़ कर गई थी. हम यहीं गौतम विहार की गली नंबर 5 में रहते हैं.’’ शशिबाला बोली.

‘‘जब उन्हें घर पर ही छोड़ कर गई थीं तो वह गायब कैसे हो गए?’’

‘‘साहब, न्यू उस्मानपुर के जयप्रकाशनगर में मेरी यह छोटी बहन सुषमा रहती है. होली के अगले दिन मैं बच्चों को ले कर इस के यहां होली मिलने चली गई थी. उस समय वह घर पर बैठे शराब पी रहे थे. जब मैं वापस आई तो वह नहीं मिले. कमरे पर ताला लगा था. मैं ने उन का फोन मिलाया, जो स्विच औफ मिला. तब मैं ने सोचा कि अपने यारदोस्तों के साथ कहीं खापी रहे होंगे. क्योंकि ऐसा वह अकसर करते रहते थे. लेकिन अब तक उन का कहीं पता नहीं चला तो मैं थाने आई हूं.’’ शशिबाला ने बताया.

शशिबाला से बातचीत करने के बाद थानाप्रभारी ने उस के पति इंद्रपाल की गुमशुदगी थाने में दर्ज करा कर जांच हेडकांस्टेबल श्रीपाल को सौंप दी. हेडकांस्टेबल श्रीपाल ने सब से पहले दिल्ली के समस्त थानों में इंद्रपाल के हुलिया के साथ उस की गुमशुदगी की सूचना वायरलेस से प्रसारित करा दी.

गौतम विहार का इलाका हेडकांस्टेबल श्रीपाल की बीट में ही आता था, इसलिए उन्होंने इलाके के लोगों से उस के बारे में छानबीन शुरू की. इस में उन्हें पता चला कि वह यारदोस्तों के साथ शराब पीने का शौकीन था.

हेडकांस्टेबल श्रीपाल को यह भी जानकारी मिली कि इंद्रपाल ने 2 कमरे किराए पर ले रखे थे, जिन में से एक कमरा उस ने टिंकू नाम के युवक को दे रखा था. इंद्रपाल उस के साथ भी खातापीता था. इंद्रपाल के गायब होने के बाद टिंकू भी लापता था. उस के कमरे पर भी ताला लटका मिला.

हेडकांस्टेबल श्रीपाल ने जो जांच की थी वह सब थानाप्रभारी को बता दी. एक की जगह 2 लोग गायब थे, इसलिए थानाप्रभारी को यह मामला संदिग्ध लगा. उन्होंने यह जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को दे दी.

डीसीपी के निर्देश पर एसीपी अमित शर्मा को नेतृत्व में एक पुलिस टीम बनाई गई, जिस में थानाप्रभारी महावीर सिंह, इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह, एसआई पंकज तोमर, हेडकांस्टेबल श्रीपाल, प्रदीप शर्मा, कांस्टेबल अनिल कुमार, सोनू राठी, सचिन खोखर आदि को शामिल किया गया. पुलिस टीम सब से पहले गौतम विहार में उस कमरे पर गई, जहां इंद्रपाल और टिंकू रहते थे. पड़ोसियों ने बताया कि वे दोनों मंगलवार यानी 18 मार्च से दिखाई नहीं दिए हैं.

इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह ने इंद्रपाल की पत्नी शशिबाला से टिंकू के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि टिंकू उसे कई दिनों से नहीं दिखा है. शशिबाला से टिंकू का मोबाइल नंबर ले कर जितेंद्र सिंह ने उसे अपने फोन से मिलाया तो उस का फोन नंबर स्विच औफ मिला. दोनों के ही फोन स्विच औफ मिलने की बात पुलिस के गले नहीं उतर रही थी.

इंद्रपाल के लापता होने की जानकारी मिलने पर उस के चाचा दिनेश कुमार और चेचरा भाई संजय कुमार भी थाना न्यू उस्मानपुर पहुंच चुके थे. उन्होंने भी पुलिस पर इंद्रपाल का जल्द से जल्द पता लगाने का दबाव बनाया. पुलिस ने उन्हें किसी तरह समझाया.

जो 2 लोग गायब थे, पुलिस के पास उन के केवल फोन नंबर थे और वे भी बंद थे, इस के अलावा पुलिस के पास ऐसी कोई चीज नहीं थी, जिस से उन दोनों के बारे में कुछ पता चल सके. पूछताछ के लिए सिर्फ इंद्रपाल की पत्नी शशिबाला ही बची थी. इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह ने शशिबाला से मालूमात की तो उस ने वही बातें उन के समने दोहरा दी, जो पहले थानाप्रभारी को बताई थीं.

इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह उस से पूछताछ कर रहे थे तो शशिबाला बोली, ‘‘साहब, अब मैं अपने गांव जाना चाहती हूं. मैं ने पति की गुमशुदगी की जो सूचना दर्ज कराई थी, उसे वापस लेना चाहती हूं. मैं पुलिस के किसी लफड़े में नहीं पड़ना चाहती. वह कहीं गए होंगे, अपने आप घर लौट आएंगे.’’ शशिबाला हापुड़ के पटना मुरादपुर गांव की रहने वाली थी.

शशिबाला के मुंह से यह बात सुन कर जितेंद्र सिंह चौंके कि पता नहीं यह कैसी औरत है जो पति के गुम हो जाने के बाद भी इस तरह की बातें कर रही है. उस ने एक बार भी पुलिस से यह नहीं कहा कि उस के पति का जल्द पता लगाया जाए.

पति के गायब होने पर जिस तरह कोई महिला परेशान हो जाती है, ऐसी कोई परेशानी शशिबाला के चेहरे पर नहीं दिख रही थी. वह एमदम सामान्य थी. इस से इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह को उस पर शक होने लगा. बहरहाल उन्होंने उस समय तो उस से कुछ नहीं कहा, लेकिन उस की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए हेडकांस्टेबल श्रीपाल को लगा दिया.

23 मार्च को शशिबाला, उस की बहन सुषमा, बहनोई विक्रम फिर थाने आए. इंद्रपाल के रिश्तेदार भी उस समय थाने में ही थे. तभी सुषमा ने इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह को बताया, ‘‘सर, कल रात शशिबाला उस के कमरे पर थी. रात करीब 8 बजे टिंकू भी उस के घर आया था. टिंकू ने शशिबाला से अलग में बात की थी. शशिबाला से बात कर के वह चला गया था. उस के चले जाने के बाद मैं ने शशिबाला से पूछा तो उस ने मुझे बताया कि टिंकू ने उस से कहा था कि वह पुलिस के पास चक्कर लगाने के बजाय अपने गांव चली जाए. इंद्रपाल अपने आप लौट आएगा.’’

सुषमा ने आगे कहा, ‘‘सर, मुझे टिंकू पर शक हो रहा है. आखिर वह इस तरह की बातें क्यों कर रहा है? इंद्रपाल जब टिंकू का दोस्त था तो इस परेशानी में उसे हमारा साथ देना चाहिए था, जबकि वह इधरउधर घूमता फिर रहा है.’’

सुषमा ने जैसे ही यह बात पुलिस से कही तो पास में खड़ी शशिबाला उस के कान में फुसफुसाते हुए बोली, ‘‘तुझे यह बात यहां कहने की क्या जरूरत थी?’’

चूंकि जिस दिन से इंद्रपाल गायब था उसी दिन से उस का दोस्त टिंकू भी गायब था. पुलिस को टिंकू की भी तलाश थी. उस के बारे में भी पुलिस को पता नहीं चल रहा था. इंसपेक्टर जितेंद्र सिंह ने सोचा कि कल जब टिंकू शशिबाला से मिला था तो उसे यह बात पुलिस को बता देनी चाहिए थी. लेकिन उस ने ऐसा नहीं किया.