मां के प्रेम का जब खुला राज – भाग 1

उत्तर प्रदेश के जालौन जिले का एक ऐतिहासिक कस्बा है- कालपी. इसी कालपी कस्बे के स्टेशन रोड पर नरेश कुमार तिवारी सपरिवार रहते थे. उन के परिवार में पत्नी उमा के अलावा 2 बेटियां राधा व सुधा थीं. नरेश कुमार प्राइवेट नौकरी करते थे. उन की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. बड़ी मुश्किल से वह परिवार की दोजून की रोटी जुटा पाते थे.

गरीबी में पलीबढ़ी राधा जब जवान हुई तो उस के रंगरूप में निखार आ गया. हर मांबाप बेटी के लिए अच्छा घर तथा सीधा शरीफ वर ढूंढते हैं, वे यह नहीं देखते कि बेटी ने अपने जीवनसाथी को ले कर क्या सपने संजोए हुए हैं. राधा के मातापिता ने भी बेटी का मन नहीं टटोला. उन्होंने अश्वनी दुबे से उस का विवाह रचा कर अपने कर्तव्य की इतिश्री भर कर दी.

अश्वनी के पिता ओमप्रकाश दुबे जालौन जिले के माधौगढ़ थाना अंतर्गत सिरसा दोगड़ी गांव के निवासी थे. अश्वनी दुबे उन का इकलौता बेटा था. ओमप्रकाश किसान थे. किसानी में बेटा अश्वनी भी उन का हाथ बंटाता था. खेती के अलावा वह दुधारू जानवर भी पाले हुए थे. दूध के कारोबार से उन की अतिरिक्त आमदनी हो जाती थी.

अश्वनी दुबे जैसा मेहनती और सीधासादा दामाद पा कर नरेश कुमार निश्ंचत हो गया था कि बेटी का जीवन संवर गया. राधा के मन के दर्पण में क्याक्या दरका, यह कोई नहीं जानता था. राधा एक महत्त्वाकांक्षी युवती थी. उस ने अपने मन में सपना संजोया हुआ था कि शादी के बाद उस के पास बड़ा सा घर, खूब सारा पैसा और स्मार्ट पति होगा. लेकिन मिला क्या? मामूली सा घर और रोटी के लिए जूझता हुआ मामूली सा पति.

अश्वनी के पास थोड़ी सी जमीन थी, जिस के सहारे वह गृहस्थी की नैया को खे रहा था. ससुर और पति के खेत पर चले जाने के बाद राधा अपने टूटे हुए सपनों को जोडऩे की उधेड़बुन में लगी यही सोचती कि अब कभी उस की चाहतें पूरी नहीं होंगी.

बहरहाल, शादी हुई थी तो निभाना ही था और बच्चे भी होने ही थे. राधा ने पहले बेटी साहनी को जन्म दिया, उस के बाद बेटे को. लेकिन 2 बच्चों के बाद भी राधा दिल से अश्वनी के साथ जुड़ नहीं पाई. उसे हमेशा यह एहसास सालता रहता था कि उसे मनपसंद पति नहीं मिला.

राधा के पड़ोस में रहता था नेत्रपाल सिंह. वह कुंवारा था. पड़ोसी होने के नाते उस का राधा के घर आनाजाना था. राधा को वह भाभी कहता था. देवरभाभी के नाते कभीकभार राधा उस से हंसबोल लिया करती थी.

एक दिन राधा गांव में लगने वाले साप्ताहिक बाजार में गई तो वहां उसे नेत्रपाल सिंह मिल गया. नेत्रपाल सिंह ने उस से कहा, “भाभी, चलो आज आप को चाट खिलाऊं. वो देखो, उस ठेले पर कनपुरिया चाट मिलती है.”

चाट का नाम सुन कर राधा के मुंह में पानी आ गया. फिर वह सकुचाते हुए बोली, “लेकिन मेरे पास तो अब पैसे बचे ही नहीं है.”

“अरे भाभी, पैसों की बात मत करो, मैं हूं न, मैं खिलाउंगा तुम्हें.”

राधा उस की बात टाल नहीं सकी. चाट वाले के पास पहुंच कर नेत्रपाल सिंह बोला, “यार रामू, जरा बढिय़ा सी चाट खिलाना हमारी भाभी को.”

नेत्रपाल डालने लगा राधा पर डोरे

कुछ ही देर में चाट का पत्ता राधा के हाथ में था. राधा ने चाट खाई, फिर पानी पूरी भी खाई. चूंकि रामू नेत्रपाल सिंह का दोस्त था, अत: उस ने राधा को भरपूर आदर के साथ हर चीज पेश की. चाट खाने के बाद नेत्रपाल सिंह ने रामू को पैसे देने चाहे तो उस ने नाराजगी से कहा, “कैसी बात करता है यार, तेरी भाभी मेरी भाभी नहीं है क्या?”

बाजार से लौटते वक्त नेत्रपाल ने राधा का थैला उठाया और उसे घर के बाहर तक छोड़ गया. रास्ते में दोनों के बीच खूब बातें हुईं. नेत्रपाल का बातबात में खिलखिलाना और राधा के चेहरे को निहारना, उसे अच्छा लगा था. पहली बार उस ने नेत्रपाल को गौर से देखा था. वह स्मार्ट भी था और स्वस्थ भी. राधा की कद्र भी खूब कर रहा था.

जाते वक्त उस ने नेत्रपाल का शुक्रिया अदा किया तो वह हंसते हुए बोला, “मेरी सारी मेहनत को इस एक शब्द में बहा दिया न भाभी आप ने. अपनों को भी शुक्रिया कहा जाता है क्या?”

उस की यह अदा भी राधा को बहुत अच्छी लगी थी. उस सारी रात राधा की आंखों में नेत्रपाल सिंह का चेहरा ही घूमता रहा. उस का अपनापन, उस का अंदाज उस के उदास मन की तनहाइयों को सहलाता रहा.

तीसरे दिन की बात थी. राधा को सुबह खाना बनाने में देर हो गई थी. अश्वनी ने कहा, “राधा हमारा खाना तुम खेत पर ही दे जाना.”

खाना बना कर राधा ने टिफिन में डाला. बेटी को पड़ोस के घर छोड़ा और मासूम बेटे को गोद में ले कर वह खेत की ओर बढ़ चली. टिफिन पति को थमा कर वह खेत से घर की ओर आ ही रही थी कि रास्ते में नेत्रपाल सिंह टकरा गया. देखते ही बोला, “अरे भाभी, तुम यहां?”

“हां, तुम्हारे भैया का खाना देने खेत पर गई थी.” राधा ने मुसकरा कर जवाब दिया.

“लाओ बेटे को हमें दे दो. हम ले कर चलते हैं,” कहते हुए नेत्रपाल सिंह ने राधा की गोद से बच्चा ले लिया.

बच्चा पकड़तेे वक्त उस की अंगुलियां राधा के उरोजों के साथसाथ उस के हाथों को छू गईं. पता नहीं उस स्पर्श में ऐसा क्या था कि राधा की देह में एक सनसनी सी भर गई. पति के स्पर्श से उस ने कभी ऐसा रोमांच महसूस नहीं किया था.

घर पहुंच कर नेत्रपाल ने अनुज को गोद से उतार कर राधा की गोद में दे दिया तो एक बार फिर दोनों की अंगुलियां टकरा गईं. वही सनसनी फिर राधा की देह से गुजर गई. नेत्रपाल ने मुसकरा कर कहा, “अब चलता हूं भाभी.”

“अरे ऐसे कैसे जाओगे? तुम ने मेरी इतनी मदद की है, बदले में मेरा भी तो फर्ज बनता है. अंदर चलो, चाय पी कर जाना.” कहते हुए राधा ने घर का ताला खोला और नेत्रपाल का हाथ पकड़ कर उसे अंदर ले आई.

भीतर आ कर उस ने बेटे को गोद से उतार कर बिस्तर पर लिटा दिया. इस के बाद उस ने साड़ी का पल्लू सिर से उतारा ही था कि झटके से उस का जूड़ा खुल गया. लंबे बाल कंधों पर लहराने लगे. नेत्रपाल को राधा की यह दिलकश अदा भा गई.

सावधान! ऐसे दोस्तों से : दोस्त की बेटी पर बुरी नजर – भाग 1

मुरादाबाद के मोहल्ला वारसीनगर के रहने वाले रईस मंसूरी का इनवर्टर बनाने और उस की मरम्मत करने का काम था. उस का यह काम काफी अच्छा चल रहा था. 15 दिसंबर, 2015 को इनवर्टर लगवाने के लिए उस के दोस्त जमा खां के बेटे आलम ने फोन किया.

आलम शहर के ही मोहल्ला बखलान की चामुंडा वाली गली में रहता था. इनवर्टर लगाने के लिए वह रईस को 5 हजार रुपए पहले ही दे चुका था. लेकिन काम ज्यादा होने की वजह से रईस को आलम के यहां इनवर्टर लगाने का समय नहीं मिला था.

आलम ने 15 दिसंबर को रईस को फोन कर के अपने यहां जल्द इनवर्टर लगाने को कहा तो रईस ने उसे भरोसा दिया कि उसी दिन शाम को वह उस के यहां इनवर्टर जरूर लगा देगा. अपने वादे के अनुसार उसी दिन शाम को लगभग साढ़े 7 बजे रईस अपनी स्कूटी से आलम के घर के लिए निकला. आलम के घर जाने वाली बात उस ने अपनी पत्नी नुसरत को बता दी थी.

रईस को आलम के घर गए कई घंटे बीत गए. न तो वह लौटा और न ही उस ने फोन किया. इस से पहले जब कभी उसे देर होने लगती थी तो वह पत्नी को फोन कर देता था. घर आने में कितनी देर और लगेगी, यह जानने के लिए नुसरत ने फोन किया तो रईस का फोन बंद मिला.

नुसरत ने 2-3 बार पति को फोन किया, हर बार कंप्यूटर द्वारा फोन बंद होने की बात बताई गई. नुसरत परेशान हो गई कि उन्होंने फोन बंद क्यों कर दिया है? आधे घंटे बाद उस ने फिर फोन किया. इस बार भी फोन बंद मिला. पति से संपर्क न होने की बात उस ने अपने देवर अमीर को बताई. अमीर आलम को तो जानता ही था, उस ने उस का घर भी देखा था. अमीर भाई के बारे में पता लगाने आलम के घर पहुंचा.

पूछने पर आलम ने बताया कि वह तो इनवर्टर लगा कर 8 बजे ही चले गए थे. अमीर घर लौट आया. अमीर और नुसरत रईस के बारे में पता लगाने लगे, लेकिन कहीं से कोई जानकारी नहीं मिली. रात भर दोनों परेशान होते रहे. सुबह होते ही रईस के घर वालों ने एक बार फिर उस की खोज शुरू कर दी. सभी रिश्तेदारों से फोन कर के उस के बारे में पूछा, लेकिन सभी ने कहा कि वह उन के यहां नहीं आया था.

जब कहीं से रईस के बारे में कुछ पता नहीं चला तो घर वाले चिंतित हो गए. 16 दिसंबर को अमीर हुसैन ने थाना मुरादाबाद पहुंच कर भाई रईस की गुमशुदगी दर्ज करा दी. रईस के मामले में पुलिस कोई काररवाई करती, उस के पहले ही क्रिकेट खेलने वाले कुछ बच्चों ने रईस के बारे में पता कर लिया.

हुआ यह कि 16 दिसंबर की दोपहर को कुछ बच्चे शहर के किनारे से गुजरने वाली रामगंगा नदी के किनारे क्रिकेट खेल रहे थे. उन्हीं बच्चों में से किसी ने ऐसा शौट मारा कि गेंद पानी के किनारे जा कर गिरी. जैसे ही एक बच्चा गेंद लेने गया, उसे वहां एक आदमी का हाथ पड़ा दिखाई दिया. हाथ देख कर वह बच्चा डर गया और उस ने शोर मचा दिया.

शोर सुन कर सभी बच्चे वहां आ गए. हाथ देख कर बच्चे क्रिकेट खेलना भूल कर शोर मचाने लगे. इस के बाद आसपास के खेतों में काम करने वाले भी आ गए. सभी इस बात को ले कर परेशान थे कि यह कटा हाथ किस का हो सकता है? किसी ने पुलिस कंट्रोल रूम को इस की सूचना दे दी. वह इलाका थाना मुगलपुरा के तहत आता था, इसलिए पुलिस कंट्रोल रूम से यह सूचना थाना मुगलपुरा को दे दी गई.

खबर मिलते ही मुगलपुरा के थानाप्रभारी अनिल कुमार वर्मा एसएसआई मनोज कुमार सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों को साथ ले कर रामगंगा नदी के किनारे पहुंच गए. हाथ के बालों को देख कर पुलिस ने अनुमान लगाया कि यह हाथ किसी आदमी का है. पुलिस को लगा कि इस हाथ को कुत्ता वगैरह यहां खींच कर ले आया है. लाश भी यहीं आसपास ही होगी.

पुलिस वाले लाश को इधरउधर तलाशने लगे. वहां से कुछ दूरी पर रामगंगा पर बने पुल के नीचे 4 बोरे मिले. पुलिस ने उन बोरों को खोला तो उन में से आदमी के कटे अंग निकले. लेकिन उस में सिर और एक हाथ नहीं मिला.

थानाप्रभारी ने यह सूचना एसएसपी नितिन तिवारी, एसपी (सिटी) डा. रामसुरेश यादव को दी तो दोनों पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए. पुलिस ने सिर और एक हाथ को आसपास बहुत ढूंढा, लेकिन वे नहीं मिले. शायद उन्हें कोई जंगली जानवर उठा ले गया था.

5 टुकड़ों में लाश मिलने की खबर थोड़ी देर में ही शहर में फैल गई. मीडिया वाले भी वहां पहुंच गए. एक दिन पहले ही थाना मुगलपुरा में रईस मंसूरी की गुमशुदगी दर्ज हुई थी. थानाप्रभारी ने गुमशुदगी वाला रजिस्टर चेक किया तो पता चला कि गुम हुए व्यक्ति की कदकाठी और हुलिया मरने वाले से मिल रहा था.

यह गुमशुदगी अमीर ने दर्ज कराई थी. अमीर का फोन नंबर लिखा ही था, थानाप्रभारी ने उस नंबर पर फोन कर के उसे बुला लिया. अनिल कुमार वर्मा से बात होने के बाद अमीर अपनी भाभी नुसरत को ले कर रामगंगा के किनारे पहुंच गया. हालांकि लाश का सिर नहीं था, इस के बावजूद कपड़ों से अमीर और नुसरत ने उस की शिनाख्त रईस मंसूरी की लाश के रूप में कर दी.

पति के शरीर के 5 टुकड़े देख कर नुसरत रोरो कर बेहोश हो गई. अमीर समझ नहीं पा रहा था कि उस के भाई की किसी से ऐसी क्या दुश्मनी थी कि उस की हत्या कर उसे इस तरह टुकड़ों में काट कर यहां फेंक गया. लाश की शिनाख्त होने के बाद पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि हत्यारों ने उस के गुप्तांग को काट डाला था. हत्या करने से पहले रईस ने शराब भी पी थी.

हत्या के इस सनसनीखेज मामले को सुलझाने के लिए एसएसपी ने एसपी (सिटी) डा. रामसुरेश यादव के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बनाई. इस टीम ने मृतक की पत्नी नुसरत और भाई अमीर से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि रईस का किसी से कोई झगड़ा वगैरह नहीं था. उस दिन शाम को वह आलम के घर इनवर्टर लगाने गया था. उस के बाद नहीं आया.

प्रेम में डूबी जब प्रेमलता – भाग 1

अभी सुबह का उजाला भी ठीक से फैला नहीं था कि मैनपुरी कोतवाली के गेट से एक महिला अंदर घुसी. वह काफी अस्तव्यस्त और घबराई हुई लग रही थी, इसलिए ड्यूटी पर तैनात संतरी ने आगे बढ़ कर पूछा, “कहो, कैसे आई?”

“साहब से मिलना है.”

“क्यों, क्या परेशानी है?” संतरी ने पूछा.

संतरी का इतना कहना था कि महिला रोने लगी. संतरी ने उसे चुप कराते हुए कहा, “साहब तो अभी आए नहीं हैं. तुम अपनी परेशानी बताओ. अगर कोई ज्यादा परेशानी वाली बात होगी तो मैं साहब से जा कर बता दूंगा.”

“मेरे पति ने रात में आत्महत्या कर ली है. उन की लाश घर में पड़ी है.” महिला ने सिसकते हुए कहा.

इस के बाद संतरी महिला को ड्यूटी पर तैनात मुंशी के पास ले गया और उसे पूरी बात बताई. मामला गंभीर था, इसलिए मुंशी ने संतरी से कोतवाली प्रभारी को सूचना देने के लिए कहा.

सूचना पा कर कुछ ही देर में कोतवाली प्रभारी मनोहर सिंह यादव आ गए. उन्होंने महिला को अपने कक्ष में बुला कर पूछा,

“क्या नाम है तुम्हारा?”

“जी प्रेमलता, घर में सब पिंकी कहते हैं.”

“कहां से आई हो?”

“नगला कीरत से. वहीं अपने पति और बच्चों के साथ रहती थी.”

“पति का क्या नाम था?”

“गवेंद्र सिंह उर्फ नीलू.”

“बच्चे कितने हैं?”

“2, बेटा 8 साल का और बेटी 5 साल की है.”

प्रेमलता जिस तरह टकर टकर मनोहर सिंह के सवालों का जवाब दे रही थी, उस से उन्हें उस पर संदेह हुआ. जिस औरत का पति मरा हो, वह इस तरह कतई बातें नहीं कर सकती. उन्होंने पूछा, “यह सब हुआ कैसे?”

“साहब, हम क्या बताएं. रात को हम सब खाना खा कर सोए और सवेरे उठे तो उन की लाश मिली. आप चलिए और लाश कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम करा दीजिए. हम उन का जल्दी से अंतिम संस्कार करना चाहते हैं.”

आगे कुछ पूछने के बजाय कोतवाली प्रभारी कुछ सिपाहियों और प्रेमलता को साथ ले कर कीरतपुर नगला जा पहुंचे. प्रेमलता के घर के सामने भीड़ लगी थी. भीड़ को हटा कर मनोहर सिंह अंदर पहुंचे तो कमरे में पड़ी चारपाई अस्तव्यस्त हालत में पड़ी थी.

मनोहर सिंह ने लाश का निरीक्षण किया तो उस के शरीर पर चोट का कहीं कोई निशान नहीं था. गले पर जरूर कुछ इस तरह का निशान था, जो गला दबाने पर पड़ जाते हैं. उन्हें जो आशंका थी, लाश देख कर वह सच नजर आ रही थी. घर में एक ही दरवाजा था, उसी से अंदर आया या बाहर जाया जा सकता था. प्रेमलता का कहना था कि रात में उस ने खुद कुंडी लगाई थी.

मनोहर सिंह ने औपचारिक काररवाई पूरी कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया. इस के बाद उन्होंने एक बार फिर प्रेमलता से पूछताछ की. उस का कहना था कि वह रहते भले तनाव में थे, लेकिन ऐसी कोई बात नहीं कि उन्हें आत्महत्या करनी पड़े. शाम को सब ठीकठाक था. बात भी अच्छी तरह कर रहे थे. कहीं से नहीं लगता था कि वह रात में आत्महत्या कर लेंगे.

पूछताछ में पता चला कि मृतक गवेंद्र सिंह की सरकारी नौकरी थी. वह सरकारी स्कूल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी था. वह बहुत खुशदिल था. हर किसी से हमेशा हंस कर मिलता था. मनोहर सिंह को गवेंद्र सिंह की आत्महत्या का यह मामला पूरी तरह से संदिग्ध लग रहा था, लेकिन जब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आ जाती, वह कुछ नहीं कर सकते थे.

प्रेमलता ने 6 बजे ही अपने ससुर रामसेवक को फोन कर के गवेंद्र की मौत की सूचना दे दी थी. उसी सूचना पर रामसेवक 9 बजे घर वालों के साथ नगला कीरतपुर पहुंचे तो पुलिस वहां मौजूद थी. बेटे की लाश देख कर रामसेवक ने रोते हुए कहा,

“साहब, मेरे बेटे ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उस की हत्या की गई है. आखिर वह आत्महत्या क्यों करेगा, उसे किसी चीज की कमी थोड़े ही थी.”

“कोई बात नहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सब पता चल जाएगा. उस के पहले हम कुछ नहीं कह सकते.” मनोहर सिंह ने उसे आश्वासन दिया.

मनोहर सिंह ने मृतक के पिता रामसेवक की ओर से अपराध संख्या 1341/2015 पर अज्ञात लोगों के खिलाफ गवेंद्र सिंह उर्फ नीलू की हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया था. मनोहर सिंह ने मुखबिरों से प्रेमलता के बारे में पता लगाने को कहा, क्योंकि उन्हें उस का चरित्र संदिग्ध लग रहा था.

आखिर जब उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली तो सारा मामला साफ हो गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृतक की मौत दम घुटने से हुई थी. उस की गला दबा कर हत्या की गई थी. ऐसे में संदेह प्रेमलता पर ही था, क्योंकि घर में मृतक के साथ वही थी और थाने आ कर उस ने झूठ भी बोला था.

मनोहर सिंह ने पूरे परिवार को इकट्ठा किया तो उन की नजरें मृतक के बच्चों पर जम गईं. हत्या वाली रात वे भी साथ थे. बच्चे डरे हुए लग रहे थे. बेटी तो छोटी थी, लेकिन बेटा उमंग 8 साल का था. वह कुछ बता सकता है, यह सोच कर उन्होंने उसे अपने पास बुलाया और प्यार से पुचकार कर पूछा तो उस ने कहा, “मम्मी ने बबलू अंकल और 2 लोगों के साथ मिल कर पापा को मारा है.”

अब क्या था, पुलिस ने तुरंत प्रेमलता उर्फ पिंकी को हिरासत में ले लिया. लेकिन जब उस से हत्या में शामिल बबलू तथा 2 अन्य लोगों के बारे में पूछा गया तो उस ने कहा कि न वह बबलू को जानती है और न 2 अन्य लोगों को. उमंग ने बबलू का नाम तो बता दिया था, लेकिन वह कौन था, कहां का रहने वाला था, यह सब वह नहीं बता सका था.

पुलिस बबलू के बारे में पता करने लगी. उसी बीच उसे पता चला कि प्रेमलता इन दिनों आगरा की लायर्स कालोनी स्थित आईआईएमटी से नॄसग की पढ़ाई कर रही थी और वहीं कमरा ले कर रहती थी. इस से पुलिस को लगा कि कहीं बबलू आगरा का ही रहने वाला तो नहीं है.

पुलिस वहां जा कर बबलू के बारे में पता लगाने की सोच ही रही थी कि प्रेमलता से मिलने एक लडक़ा आया. उस ने थानाप्रभारी से प्रेमलता को अपनी बहन बता कर मिलने की गुजारिश की तो मनोहर सिंह ने उसे प्रेमलता से मिलने की इजाजत दे दी.

भांजी को प्यार के जाल में फांसने वाला पुजारी

देवर के इश्क़ में

भांजी को प्यार के जाल में फांसने वाला पुजारी – भाग 3

काफी भटकने के बाद भी लकड़ी की व्यवस्था नहीं हो सकी तो उस ने अप्सरा की जूतियां और कपड़े वहीं झाड़ियों में छिपा दिए. इस के बाद लाश उठा कर उस ने कार की डिक्की में रखा और मंदिर लौट आया. अब उस के सामने लाश को ठिकाने लगाने की समस्या थी.

वह काफी देर तक विचार करता रहा. सोचते हुए वह मंदिर के पीछे गया. मंदिर के पीछे राजस्व विभाग की पुरानी इमारत है. वह सोचतेविचारते हुए मंदिर के पीछे टहल रहा था कि उस की नजर राजस्व विभाग की उस पुरानी इमारत के सामने बने मेनहोल पर पड़ी. उस पर नजर पड़ते ही उस की समस्या हल हो गई.

साईंकृष्णा तुरंत मंदिर में आया और कार की डिक्की से लाश निकाल कर ले जा कर मेनहोल का ढक्कन हटा कर लाश उसी में डाल दी और ढक्कन बंद कर मंदिर में वापस आ गया. रात में ही उस ने कार साफ की और अप्सरा का हैंडबैग वगैरह जला कर उस की राख भी उसी मेनहोल में ले जा कर फेंक दी. फिर वह आराम से सो गया.

अगले दिन सुबह वह अप्सरा के घर गया तो उस की मां ने कहा, “अप्सरा को कल रात से ही फोन कर रही हूं. उस का फोन ही नहीं लग रहा है. जब भी फोन करो, स्विच्ड औफ बताता है.”

“यही पता करने तो मैं भी आया हूं. मैं ने भी फोन किया था. उस का फोन बंद ही बताए जा रहा था. कहीं उस का फोन चोरी तो नहीं हो गया. पर फोन चोरी होता तो अपनी किसी सहेली के फोन से फोन कर सकती थी.” साईंकृष्णा ने कहा.

दुर्गंध न आने का कर दिया पुख्ता इंतजाम

अप्सरा के घर से लौट कर पुजारी साईंकृष्णा मेनहोल के पास गया तो उसे लगा कि मेनहोल से लाश के सडऩे की बदबू आ रही है. उसे लगा कि अगर यह बदबू फैली और मेनहोल का ढक्कन उठा कर देखा गया तो वह फंस जाएगा. उस ने ढक्कन के किनारे सीमेंट और कंक्रीट लगा कर 2 ट्रक लाल मिट्टी मंगा कर मेनहोल के ढक्कन के ऊपर डलवा दी, जिस से ढक्कन पूरी तरह बंद हो गया. अब वह निश्चिंत हो गया.

इसी तरह इंतजार में पूरा दिन भी बीत गया और रात भी. जब अप्सरा का कुछ पता नहीं चला तो 5 जून, 2023 को दोपहर के बाद पुजारी साईंकृष्णा अप्सरा की गुमशुदगी दर्ज कराने थाना आरजीआईए पहुंच गया. वहां गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद असलियत सामने आ गई और अप्सरा मर्डर केस में वह खुद ही पकड़ा गया. थाना शम्साबाद पुलिस ने वह पत्थर भी बरामद कर लिए, जिन से अप्सरा की हत्या की गई थी. गौशाला के पास से अप्सरा की जूतियां और कपड़े भी मिल गए थे.

पुलिस ने पुजारी अय्यागिरि वेंकट सूर्या साईंकृष्णा के खिलाफ हत्या (धारा 302) और सबूत मिटाने (धारा 120) के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे रंगा रेड्डी कोर्ट में पेश किया, जहां से 14 दिनों के रिमांड पर लिया गया. रिमांड अवधि में पुलिस ने उस से पूछताछ कर कुछ और सबूत जुटाए. रिमांड अवधि पूरी होने पर उसे दोबारा अदालत में पेश किया गया, जहां से कातिल पुजारी को जेल भेज दिया गया.

पुजारी की पापलीला और अप्सरा की हत्या को ले कर मीडिया में अप्सरा की एक से एक फोटो के साथ पुजारी के फोटो दिखाए जा रहे थे. तभी इस मामले में एक और नया रहस्य निकल कर सामने आया.

अप्सरा और उस की मां अरुणा एक साल पहले ही हैदराबाद रहने आई थीं. इस के पहले दोनों चेन्नै में रहती थीं. अप्सरा की हत्या का समाचार सुन कर चेन्नै की धनलक्ष्मी राजा नाम की एक महिला ने सोशल मीडिया पर अप्सरा के फोटोग्राफ्स, वीडियो और आडियो डाल कर हडक़ंप मचा दिया.

सामने आई नई जानकारी

धनलक्ष्मी ने वीडियो वायरल कर के कहा था कि दुनिया में देर है पर अंधेर नहीं है. प्रकृति हर किसी को उस के कर्म की सजा देती है. मेरा एकलौता बेटा कार्तिक सौफ्टवेयर इंजीनियर था. उसे अप्सरा से प्यार हो गया. उस की सुंदरता पर वह ऐसा मोहित हुआ था कि मेरे मना करने के बावजूद उस ने उस रूपसुंदरी से विवाह कर लिया.

विवाह कर के घर आते ही अप्सरा ने हम दोनों को परेशान करना शुरू कर दिया था. मेरा बेटा तो सीधासादा था और वह महारानी हर शनिवार और रविवार को बाहर घूमने जाती और हद से ज्यादा खर्च कराती. इस मामले में उस की मां अरुणा भी बेटी का पक्ष ले कर मेरे बेटे को धमकाती. जब देखो तब लड़ाईझगड़ा कर के मांबेटी ने कार्तिक का जीना हराम कर दिया था.

एक दिन घर में थोड़ा ज्यादा झगड़ा हो गया. अप्सरा ऐसी बिफरी की मुझे और कार्तिक को गंदीगंदी गालियां देने लगी. कार्तिक को भी गुस्सा आ गया. उस ने अप्सरा पर हाथ उठा दिया. इस के बाद अप्सरा थाने चली गई और कार्तिक के खिलाफ तरहतरह के आरोप लगा कर शिकायत दर्ज करा दी. अप्सरा की सुंदरता देख कर पुलिस ने भी फटाफट मुकदमा दर्ज कर लिया और कार्तिक को गिरफ्तार कर के अदालत में पेश कर दिया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. इस के बाद अप्सरा अपनी मां के साथ चेन्नै से हैदराबाद चली गई.

करीब डेढ़ महीने बाद कार्तिक जमानत पर जेल से बाहर आया. जेल जाने से उस की नौकरी भी चली गई थी, जिस की वजह से वह भारी डिप्रेशन में आ गया. मां धनलक्ष्मी ने उसे बहुत समझाया, हिम्मत दी. पर अप्सरा ने उसे जिस तरह परेशान किया था, उस से वह इस हद तक टूट गया था कि वह इस हादसे से उबर नहीं पाया और जेल से बाहर आने के चौथे दिन उस ने फंदे से लटक कर आत्महत्या कर ली.

धनलक्ष्मी ने कार्तिक और अप्सरा के विवाह के जो फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए थे, उन्हें ले कर लोगों में यही चर्चा हो रही थी कि अप्सरा की वजह से जिस तरह कार्तिक की मां बिलख रही है, ठीक उसी तरह से बेटी के मौत हो जाने पर अब खुद अरुणा को भी बिलखना पड़ रहा है.

भांजी को प्यार के जाल में फांसने वाला पुजारी – भाग 2

हैदराबाद दक्षिण भारतीय फिल्मों और धारावाहिकों के लिए बहुत बड़ा गढ़ माना जाता है. अप्सरा भी फिल्मों और धारावाहिकों में काम कर के नाम और दाम कमाना चाहती थी. हैदराबाद में उस की जानपहचान वाला कोई नहीं था. वह ज्योतिष और भाग्य पर आंख मूंद कर भरोसा करती थी.

अप्सरा के भाग्य में फिल्मों और धारावाहिकों में काम करने का योग है कि नहीं, यह पता करने के लिए अप्सरा और उस की मां नजदीक स्थित बांगारू माइसम्मा मंदिर गई, जहां का पुजारी था अय्यागिरि वेंकट सूर्या साईंकृष्णा. साईंकृष्णा मंदिर का पुजारी तो था ही, वह एमबीए कर के बिल्डिंग निर्माण की ठेकेदारी भी करता था.

अरुणा और अप्सरा साईंकृष्णा से मिलीं. इस के बाद अप्सरा कुंडली दिखाने और भगवान के दर्शन के लिए मंदिर आने लगी. मंदिर में आतेआते अप्सरा की पुजारी से अच्छी जानपहचान हुई, फिर कुछ दिनों में दोस्ती हो गई. अब तक पुजारी का दिल अप्सरा पर आ चुका था. इस की वजह यह थी कि पुजारी वहां अकेला ही रहता था.

पुजारी को भांजी से हुआ प्यार

पुजारी साईंकृष्णा का दिल अप्सरा पर आया तो वह उस की हर तरह से मदद करने लगा. अप्सरा और उस की मां पर प्रभाव जमाने के लिए उस ने रिश्ता भी जोड़ लिया. अरुणा को उस ने मुंहबोली बहन बना लिया तो अप्सरा उस की भांजी हो गई. अप्सरा साईंकृष्णा को अन्ना कहती थी.

अप्सरा मंदिर आती ही रहती थी. तभी साईंकृष्णा को भांजी अप्सरा से प्यार हो गया. साईंकृष्णा ने रिश्ते की आड़ में उस पर डोरे डालतेडालते आखिर उसे अपने प्रेम जाल में फंसा ही लिया. साईंकृष्णा शादीशुदा था और उस के 2 बच्चे भी थे. परंतु उस की पत्नी बच्चों के साथ गांव में रहती थी. इसलिए यहां पुजारी को अप्सरा के साथ रंगरलिया मनाने का खुला मौका मिल गया था.

मंदिर परिसर में पुजारी के लिए कमरा बना था. उसी कमरे में अप्सरा साईंकृष्णा से मिलती थी. अप्सरा को पूरी उम्मीद थी कि पुजारी साईंकृष्णा उस से विवाह कर के उसे पत्नी के रूप में स्वीकार कर लेगा. इसलिए उस से संबंध बढ़ाने में उसे कोई दिक्कत महसूस नहीं हुई, लेकिन जब उसे पता चला कि पुजारी तो शादीशुदा ही नहीं, बल्कि 2 बच्चों का बाप भी है तब उसे तकलीफ तो बहुत हुई, पर उस ने न पुजारी का साथ छोड़ा और न ही उस की पत्नी बनने की उम्मीद छोड़ी.

अप्सरा लगातार पुजारी साईंकृष्णा से मिलती रही, पर अब वह उस पर दबाव बनाने लगी कि वह अपनी पत्नी को छोड़ कर उस से विवाह कर ले. साईंकृष्णा अप्सरा को झूठे आश्वासन दे कर उस का शारीरिक शोषण करता रहा. उन के अवैध संबंधों की भनक किसी को नहीं लगी.

अप्रैल, 2023 के अंतिम सप्ताह में अप्सरा ने साईंकृष्णा को बताया कि वह प्रैग्नेंट है. उस ने कहा कि वह इस बच्चे को जन्म देगी. यह सुन कर साईंकृष्णा घबरा गया. उस ने गर्भपात कराने की सलाह दी. अप्सरा ने मना करते हुए कहा, “मैं अपनी पहली संतान की हत्या का पाप कतई नहीं करूंगी.”

पर चालाक साईंकृष्णा ने अप्सरा को उलटीसीधी पट्टी पढ़ा कर, समझाबुझा कर गर्भपात करा ही दिया. इस के बाद अप्सरा आक्रामक हो गई और पुजारी पर विवाह के लिए दबाव डालने लगी. अब इस बात को ले कर दोनों के बीच खूब कहासुनी भी होने लगी.

अप्सरा की धमकी से डर गया पुजारी

जल्दी ही अप्सरा की समझ में आ गया कि इस पुजारी को केवल उस के शरीर में रुचि है. इसे न उस की जिंदगी से कोई मतलब है न उस की भावनाओं से. वह उसे खिलौने की तरह खेल कर किनारे कर देना चाहता है. वह उसे पत्नी नहीं बनाना चाहता यानी उस से विवाह नहीं करना चाहता.

फिर तो अप्सरा रणचंडी बन गई. उस ने साईंकृष्णा को चेतावनी देते हुए कहा, “मेरी यह आखिरी चेतावनी है. अगर तुम ने मुझ से विवाह नहीं किया तो इसी मंदिर में बैठ कर तुम्हारे पराक्रम की पूरी कथा सभी को सुनाऊंगी, अखबारों में छपवाऊंगी, वीडियो बना कर वायरल करूंगी. मेरा तो जो होना होगा, वह होगा ही, पर तुम्हारी भी इज्जत की ऐसीतैसी कर के रहूंगी.”

अब पुजारी को अप्सरा अप्सरा नहीं, बला लगने लगी थी. अब रातदिन वह इसी सोच में डूबा रहने लगा कि किस तरह इस बला से छुटकारा पाए. अप्सरा अब पूरी तरह बिंदास हो कर पुजारी को धमकियां दे रही थी, इसलिए वह बुरी तरह घबराया हुआ था.

आखिर काफी मानसिक परेशानी झेल कर उस ने अप्सरा से हमेशाहमेशा के लिए छुटकारा पाने का उपाय खोज ही लिया. उस ने गूगल पर सर्च किया कि इंसान को कैसे मारा जाए.

योजना के अनुसार, 3 जून, 2023 को उस ने अप्सरा को मनाने के बाद कहा, “चलो, आज लांग ड्राइव पर चलते हैं. चलते हुए रास्ते में विचार करते हैं. फिर शायद कोई रास्ता निकल ही आए.”

अप्सरा को भला क्यों ऐतराज होता. फिर पुजारी साईंकृष्णा के मन में क्या खिचड़ी पक रही है, उसे कहां पता था. वह सहज तैयार हो गई. अप्सरा ने पुजारी के कहने पर घर में मां को बताया कि उसे सहेलियों के साथ भद्राचलम जाना है. उस की सारी सहेलियां शम्साबाद में मिलेंगी. मामा यानी पुजारी साईंकृष्णा उसे अपनी कार से शम्साबाद तक छोड़ देंगे.

पुजारी ने लिखी मौत की स्क्रिप्ट

3 जून, 2023 को पुजारी साईंकृष्णा ने अप्सरा को उस के घर से कार में बिठा लिया और शम्साबाद की ओर चल पड़ा. वह शम्साबाद जाने के बजाय अप्सरा को कार में बैठा कर घुमाता रहा. अप्सरा को नींद की गोलियां खाने की आदत थी. नींद की गोली खा कर कार में बैठेबैठे जब अप्सरा को नींद आ गई तो साईंकृष्णा ने देर रात को शम्साबाद के पहले ही सुलतानपल्ली के गौशाला के पास सुनसान जगह में कार रोक दी. वह इस जगह को पहले ही देख गया था.

कार रुकी तो अप्सरा की आंखें खुल गईं. उस ने कहा, “यह कहां कार रोक दी?”

“अपना निर्णय सुनाने के लिए.” साईंकृष्णा ने कहा, “मैं ने खूब सोचविचार कर तय कर लिया है कि मुझे तुम से विवाह नहीं करना है. तुम से जो हो सके तुम कर लो. हमारा विवाह किसी भी हालत में संभव नहीं है.”

पुजारी का यह फैसला सुनते ही अप्सरा भडक़ उठी. वह हाथापाई पर उतर आई तो साईंकृष्णा ने उसे जोर से धक्का दिया. वह जमीन पर गिर पड़ी. इस के बाद उस ने कार में रखा एक बड़ा पत्थर उठाया और दांत भींच कर पूरी ताकत से अप्सरा के सिर पर दे मारा, जिस से उस का सिर फूट गया. उस के सिर से खून बहने लगा, लेकिन साईंकृष्णा अप्सरा के सिर पर उस पत्थर से तब तक वार करता रहा, जब तक वह मर नहीं गई. वह कार में 2 पत्थर साथ ले कर ही आया था.

पुजारी ने अप्सरा की हत्या कर के पत्थर से उस का चेहरा इस तरह कुचल दिया था कि लाश मिलने पर भी पहचानी न जा सके. इस के बाद उस ने वहां आसपास लकडिय़ों की तलाश की ताकि लाश को यहीं जला दे.

भांजी को प्यार के जाल में फांसने वाला पुजारी – भाग 1

तेलंगाना के हैदराबाद शहर के थाना राजीव गांधी इंटरनैशनल एयरपोर्ट (थाना आरजीआईए) में 5 जून, 2023 दिन सोमवार की सुबह एक साधु जैसे कपड़े पहने हुआ आदमी पहुंचा. उस की उम्र यही कोई 35-36 साल थी. तंदुरुस्त शरीर, सफेद धोती, काले बाल और दाढ़ी, गले में माला, माथे पर बड़ा सा तिलक और उस के हाथ में मोबाइल था. उस ने एसएचओ टी.के. रेड्डी को नमस्कार किया तो जवाब में उन्होंने भी नमस्कार कर के उसे सामने पड़ी कुरसी पर बैठने का इशारा किया.

कुरसी पर बैठते ही उस ने कहा, “सर मैं बांगारू माइसम्मा मंदिर का पुजारी हूं. मेरा नाम अय्यागिरि वेंकट सूर्या साईंकृष्णाहै.”

इस के बाद उस ने दोनों हाथ जोड़ कर कहा, “सर, कल से मेरी भांजी गायब है. उसी के गायब होने की रिपोर्ट लिखाने आया हूं. उस की गुमशुदगी दर्ज कर के उसे खोज दीजिए प्लीज.”

“फोटो लाए हैं उस का?” एसएचओ टी.के. रेड्डी ने पूछा.

“जी सर, मैं उस का फोटो साथ लाया हूं. उस का नाम कुरूंगाती अप्सरा है. उम्र 30 साल और लंबाई 5 फुट 7 इंच है.” अप्सरा का फोटो मेज पर रखते हुए साईंकृष्णा ने कहा.

एसएचओ ने फोटो पर एक नजर डाली. अप्सरा सचमुच अप्सरा जैसी ही सुंदर थी.

एसएचओ ने फोटो देखते हुए पूछा, “अप्सरा कैसे और कहां से गायब हुई? पूरी बात विस्तार से बताइए?”

एक लंबी सांस ले कर पुजारी साईंकृष्णा ने कहा, “सर, मेरा घर और मंदिर सरूरनगर में है. मेरी बहन और भांजी भी सरूरनगर में ही रहती थीं. 3 जून शनिवार को अप्सरा को अपनी सहेलियों के साथ भद्राचलम जाना था. सारी सहेलियां शम्साबाद में बस स्टैंड पर मिलने वाली थीं. इसलिए उस ने मुझ से वहां छोड़ आने के लिए कहा.”

एसएचओ साईंकृष्णा की बातें ध्यान से सुन रहे थे. याद करते हुए साईंकृष्णा ने आगे कहा, “मैं ने अप्सरा को उस के घर से ले कर शम्साबाद पहुंचा दिया. इस के बाद सुबह से उस का फोन बंद बता रहा है. वह भद्राचलम भी नहीं पहुंची है और न अभी तक घर ही लौट कर आई है. पता नहीं वह कहां गई? कहीं रास्ते से उसे किसी ने उठा तो नहीं लिया? कुछ समझ में नहीं आता. उस की मां के साथ मैं ने उसे सब जगह तलाश लिया है, पर उस का कहीं कुछ पता नहीं चला. अब सर, जो कुछ कर सकते हैं आप ही कर सकते हैं.”

अप्सरा के फोटो को घूरते हुए एसएचओ ने पूछा, “कहीं किसी लड़के से प्रेम वगैरह तो नहीं था? घर में मां से लड़ाईझगड़ा तो नहीं होता था?”

“जी नहीं, ऐसी कोई बात नहीं थी. अप्सरा अपने काम से काम रखने वाली लड़की है.” साईंकृष्णा ने कहा.

“यह तुम्हारी सगी भांजी है?” एसएचओ ने पूछा.

एसएचओ के इस सवाल के जवाब में ‘न’ में सिर हिलाते हुए साईंकृष्णा ने कहा, “इस की मां अरुणा को मैं धर्म बहन मानता हूं. इसी रिश्ते से भांजी हुई. बाकी खून का कोई संबंध नहीं है.”

मामला थोड़ा विचित्र लगा, इसलिए कुछ सोचते हुए एसएचओ टी.के. रेड्डी ने कहा, “आप की शिकायत यहां दर्ज कर के थाना शम्साबाद को ट्रांसफर करनी पड़ेगी, क्योंकि घटना उसी इलाके की है. इसलिए इनवैस्टीगेशन वही लोग करेंगे.”

30 वर्षीया सुंदर युवती की गुमशुदगी का मामला था, इसलिए शिकायत मिलते ही थाना शम्साबाद पुलिस की टीम अप्सरा की खोज में लग गई. साईंकृष्णा के बताए अनुसार, सरूरनगर से अपनी कार में बैठा कर उस ने उसे शम्साबाद में बस स्टैंड पर उतारा था. सरूरनगर से शम्साबाद 21 किलोमीटर दूर है.

पुलिस की एक टीम सरूरनगर से शम्साबाद के बीच लगे सीसीटीवी की फुटेज की जांच करने में लग गई थी. सरूरनगर में साईंकृष्णा अप्सरा को कार में बैठाते तो दिखाई दिया, पर शम्साबाद में कहीं अप्सरा साईंकृष्णा की कार से उतर रही हो, ऐसा एक भी दृश्य वहां की सीसीटीवी फुटेज में दिखाई नहीं दिया.

टीम के सदस्यों ने यह जानकरी थाना शम्साबाद के एसएचओ को दी तो उन्होंने साईंकृष्णा को थाने बुला कर एक बार फिर पूरी जानकारी देने को कहा. इस बार थोड़ीथोड़ी देर में साईंकृष्णा अपना बयान बदलने लगा. उस के इस तरह बारबार बयान बदलने से एसएचओ को शक हुआ कि यह पुजारी निर्दोष तो बिलकुल नहीं लग रहा. इस की बात पूरी तरह सच बिलकुल नहीं है.

तब उन्होंने पुजारी से पूछा, “तुम ने अप्सरा को कहां उतारा था, वह एग्जैक्ट जगह बताओ.”

एसएचओ (शम्साबाद) के इस सवाल पर पुजारी थोड़ा बेचैन हुआ और बारबार बयान बदलने लगा. अब एसएचओ का शक विश्वास में बदलने लगा. उन्होंने सवाल पल सवाल करने शुरू किए तो पुजारी साईंकृष्णा ज्यादा देर तक अपने बयान पर टिका नहीं रह सका और सच्चाई उगल दी.

उस ने पुलिस को बता दिया कि अप्सरा अब इस दुनिया में नहीं है. उस ने खुद उस की हत्या कर के लाश मेनहोल में डाल दी है. उस की यह बात सुनते ही वहां मौजूद सभी पुलिसकर्मी चौंक गए. पुलिस को सब से पहले अप्सरा की लाश बरामद करनी थी, इसलिए पुलिस ने साईंकृष्णा को घटनास्थल पर ले जा कर घटना का रिकंस्ट्रक्शन कराया.

चूंकि पुजारी ने मेनहोल में लाश डालने के बाद उस के ऊपर 2 ट्रक मिट्टी डलवा दी थी, इसलिए पुलिस ने मेनहोल की मिट्टी हटवा कर अप्सरा की लाश निकलवा कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. पोस्टमार्टम के बाद अप्सरा की लाश उस की मां अरुणा को सौंप दी गई. मां ने उस का अंतिम संस्कार करा दिया.

अभिनेत्री बनना चाहती थी अप्सरा

फिर 9 जून, 2023 को पुलिस ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर पुजारी साईंकृष्णा को पत्रकारों के सामने पेश किया. इस प्रैस कौन्फ्रैंस में साईंकृष्णा ने अप्सरा हत्याकांड में अपना अपराध स्वीकार करते हुए उस की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी.

अप्सरा पहले अपनी मां अरुणा के साथ चेन्नै में रहती थी. वहां उस का विवाह भी हो गया था, लेकिन पति ने आत्महत्या कर ली थी तो अप्सरा अकेली पड़ गई. अप्सरा खूबसूरत तो थी ही, उसे अभिनय में रुचि भी थी. इसलिए वह मां के साथ हैदराबाद आ गई. यहां सरूरनगर की वेंकट कालोनी में किराए का मकान ले कर मांबेटी रहने लगीं. घर खर्च चलाने के लिए अप्सरा ने प्राइवेट नौकरी कर ली.

देवर के इश्क़ में – भाग 3

गायत्री ने उसी दिन फोन कर के अनिल को बहू की करतूतें बताते हुए तुरंत घर आने को कहा. अनिल छुट्टी ले कर अगले ही दिन घर आ गया. पत्नी की बेवफाई पर उस का खून खौल उठा था. उस ने पुष्पा की खूब पिटाई की, साथ ही उस ने यह भी कह दिया कि अब वह उसे दिल्ली ले जाएगा. उस ने पुष्पा से दिल्ली चलने की तैयारी करने के लिए कह दिया.

लेकिन पुष्पा ने दिल्ली जाने से साफ मना कर दिया. इस की शिकायत उस ने पत्नी के मायके वालों से की. उन्होंने भी पुष्पा को समझाया. अगले दिन सुबह अनिल जब घर से निकला तो उसे रामखिलौने दिख गया. गुस्से में अनिल उस के पास पहुंचा और बोला, ‘‘रामखिलौने तुम होश में आ जाओ, वरना इस का अंजाम बहुत बुरा होगा.’’

रामखिलौने ने कुछ नहीं कहा. वह वहां से चला गया.

अनिल केवल 2 दिनों की छुट्टी ले कर आया था. पत्नी ने जब उस के साथ जाने से मना कर दिया तो मन मसोस कर वह अकेला ही दिल्ली चला गया. दिल्ली जाने के बाद उस का मन अपने काम में नहीं लगा. उस का ध्यान पत्नी पर ही लगा रहता था. मन चिंता से भरा हुआ था. आखिर एक दिन वह नौकरी छोड़ कर गांव चला आया.  पुष्पा को जब पता चला कि उस का पति अब घर में ही रहेगा तो उस के पांव के नीचे से जमीन खिसक गई.

अनिल घर तो आ गया, पर मन में शक बना रहा. उस ने पुष्पा पर नजर रखनी शुरू कर दी. साथ ही उस ने उस पर कई तरह की बंदिशें भी लगा दीं. इस से उन के दांपत्य रिश्ते में खटास पैदा हो गई. पति की मौजूदगी और बंदिशों की वजह से उस की अपने प्रेमी रामखिलौने से मुलाकात नहीं हो पा रही थी, इसलिए पति उसे दुश्मन लगने लगा. वह उस से छुटकारा पाने के उपाय खोजने लगी.

एक दिन उस ने रामखिलौने से कह भी दिया, ‘‘या तो तुम मुझे यहां से कहीं दूर ले चलो या फिर मेरा खयाल दिल से निकाल दो.’’

‘‘देखो  पुष्पा, मैं तुम्हें भगा कर नहीं ले जा सकता, क्योंकि बाद में पुलिस मुझे पकड़ कर जेल में डाल देगी और मैं तुम से दूर नहीं रहना चाहता. मुझे लगता है अनिल को ही रास्ते से हटा देना चाहिए.’’ रामखिलौने ने कहा.

‘‘तुम बिलकुल ठीक कह रहे हो. यही ठीक रहेगा.’’ इस तरह पुष्पा ने पति को ठिकाने लगाने की अनुमति दे दी. इस के बाद पुष्पा और रामखिलौने ने अनिल को ठिकाने लगाने की योजना बना डाली.

21 जुलाई, 2014 को अनिल थकामांदा खेत से घर लौटा और खाना खा कर अपने कमरे में चला गया. आने वाली मुसीबत से बेखबर घर के अन्य लोग भी सो गए. सुबह पुष्पा उठी और चूल्हे पर चाय चढ़ा दी. गायत्री ने पुष्पा से कहा कि वह अनिल को जगा दे, जिस से वह भी नाश्ता कर ले.

तभी पुष्पा बोली, ‘‘अम्मां मैं परांठे बना रही हूं, तुम्हीं उन्हें उठा दो.’’

गायत्री अनिल को जगाने उस के कमरे में गई तो वह कमरे में नहीं मिला. वहीं से उस ने कहा, ‘‘बहू, लगता है अनिल बाहर निकल गया है.’’

‘‘नहीं अम्मा, बाहर का दरवाजा तो बंद है. अगर वह बाहर जाते तो दरवाजा खुला होता. कहीं ऐसा तो नहीं कि वह छत पर चले गए हों.’’  पुष्पा ने कहा.

बहू के कहने पर गायत्री छत पर गई. छत पर पहुंचते ही वह चीखी तो रामनिवास ने पूछा, ‘‘क्या हुआ गायत्री?’’

‘‘हम लुट गए, बर्बाद हो गए.’’ गायत्री रोते हुए बोली.

पत्नी के इस तरह रोने से परेशान हो कर रामनिवास भी छत पर पहुंच गया. ऊपर का नजारा देख कर वह भी सन्न रह गया. छत पर अनिल की लाश पड़ी थी. बेटे की लाश देख कर वह भी चीखने लगा. इस के बाद तो तमाम लोग वहां जमा हो गए. उसी दौरान किसी ने थाना नया गांव को फोन द्वारा इस बात की सूचना दे दी.

थोड़ी देर में थानाप्रभारी घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस ने जब लाश का मुआयना किया तो उस के शरीर पर चोट का कोई निशान नजर नहीं आए. सिर्फ गले पर निशान मिले, जिस से अनुमान लगाया कि उस की हत्या गला घोंट कर की गई है.  अनिल के घर वालों से पूछताछ करने के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.  मुखराम ने पुष्पा और रामखिलौने पर हत्या का आरोप लगाते हुए एक तहरीर थानाप्रभारी को दी. थानाप्रभारी ने दोनों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी.

थानाप्रभारी को ध्यान आया कि जब वह अनिल की हत्या की सूचना पर उस के घर गए थे तो उस समय उस की पत्नी पुष्पा रोते हुए कह रही थी कि उस के पति को बदमाशों ने मारा है, जबकि उस के मांबाप का कहना था कि  पुष्पा और रामखिलौने के बीच नाजायज संबंध थे. इसलिए अनिल की हत्या उन्हीं दोनों ने की है.

थानाप्रभारी ने  पुष्पा को पूछताछ के लिए थाने बुला लिया. सख्ती से पूछताछ करने पर पुष्पा ने कुबूल कर लिया कि उसी ने प्रेमी रामखिलौने के साथ मिल कर कमरे में पति की हत्या गला दबा कर की थी और बाद में लाश छत पर डाल दी थी.

इस के बाद पुलिस ने रामखिलौने के घर दबिश दी, लेकिन वह घर पर नहीं मिला. पूछताछ के बाद पुलिस ने पुष्पा को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया. 2 दिनों बाद अनिल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस को मिल गई. उस में बताया गया था कि अनिल की मौत जहर खाने से हुई थी.

इस से पता चला कि पुष्पा ने पति को जहर खिलाने वाली बात छिपा ली थी. उसी दौरान रामखिलौने ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया, जहां से उसे भी जेल भेज दिया गया था. मामले की तफ्तीश सबइंसपेक्टर विनोद कुमार कर रहे थे.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

देवर के इश्क़ में – भाग 2

अब रामखिलौने का उस के यहां आनाजाना उस समय होने लगा, जब रामनिवास और गायत्री खेतों पर होते. एक दिन मौका पा कर रामखिलौने घर आया तो बातोंबातों में उस ने पुष्पा की खूबसूरती की तारीफ शुरू कर दी. पुष्पा हैरानी से उस की ओर देखने लगी. इस से पहले कि वह उस से कुछ कह पाती, उस ने लपक कर उस का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘भाभी, मैं तुम से प्यार करने लगा हूं और अब मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता.’’

‘‘यह क्या कह रहे हो?’’  पुष्पा अपना हाथ छुड़ा कर बोली, ‘‘जानते हो मैं तुम्हारे बड़े भाई की पत्नी हूं.’’

पुष्पा कहने को तो यह बात कह गई, लेकिन उसे रामखिलौने का स्पर्श अच्छा लगा था.

रामखिलौने ने कहा, ‘‘भाभी, मैं वादा करता हूं कि हमेशा तुम्हारा साथ दूंगा और जीवन भर तुम्हें प्यार करता रहूंगा.’’

पुष्पा रामखिलौने की बात का जवाब दिए बगैर दूसरे कमरे में चली गई. उस के तेवर देख कर रामखिलौने डर गया और वहां से चला गया. उस के जाने के बाद  पुष्पा परेशान हो कर चारपाई पर बैठ गई और अभीअभी जो हुआ था, उसी के बारे में देर तक सोचती रही. आखिर उस के बागी मन ने तय कर लिया कि वह रामखिलौने की मोहब्बत को कुबूल कर लेगी.

अगले कुछ दिनों तक रामखिलौने डर की वजह से  पुष्पा के यहां नहीं आया. पुष्पा काफी परेशान थी. एक दिन उस ने गली में रामखिलौने को खड़ा देखा तो उसे चाहत भरी नजरों से देखते हुए कहा, ‘‘बस यही है तुम्हारी मोहब्बत. उस दिन तो बड़ीबड़ी बातें कर रहे थे.’’

पुष्पा की बातें सुन कर रामखिलौने खुश हो गया. वह समझ गया कि पुष्पा उस से नाराज नहीं है. उस ने कहा, ‘‘भाभी, मैं तो आने ही वाला था.’’

‘‘सब जानती हूं मैं.’’  पुष्पा ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘आज आधी रात को आ जाना, मैं इंतजार करूंगी.’’

रामखिलौने का दिल बल्लियों उछलने लगा. वह अपने घर चला गया और रात होने का इंतजार करने लगा. अब उस के लिए एकएक पल बहुत लंबा महसूस हो रहा था. वह चाह रहा था कि जल्द से जल्द रात हो, जिस से वह पुष्पा से मिल सके. सूरज छिपने के बाद जैसेजैसे अंधेरा गहरा रहा था, रामखिलौने के दिल की धड़कनें बढ़ती जा रही थीं.

दूसरी ओर पुष्पा को पूरा विश्वास था कि रामखिलौने रात को जरूर आएगा. इसलिए उस ने फटाफट घर का काम निपटाया और बेटे को सुला दिया. सासससुर भी खापी कर सो गए. वह बेसब्री से रामखिलौने का इंतजार करने लगी. आधी रात के करीब उस के दरवाजे पर हलकी सी दस्तक हुई.  पुष्पा का दिल धड़कने लगा.

दबे पांव पुष्पा दरवाजे पर पहुंची. जैसे ही उस ने दरवाजा खोला, सामने रामखिलौने को देख कर खुश हो गई. इशारे से उस ने उसे अंदर बुला लिया और अपने कमरे में ले गई. इस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं. कुछ ही देर में उन के रिश्ते तारतार हो गए.

इस के बाद रामखिलौने खुश हो कर चुपचाप वहां से चला गया. दिल्ली में बैठा अनिल अपनी नौकरी में व्यस्त था. उस की गृहस्थी में उस का चचेरा भाई सेंध लगा सकता है, ऐसा उस ने कभी सोचा भी नहीं था. वह तो इसी कोशिश में लगा था कि किसी तरह वह दिल्ली में अपना घर बना ले.

अवैध संबंधों की राह बड़ी ही ढलवां होती है, जो कोई एक बार इस राह पर कदम बढ़ाता है, वह गर्त में धंसता चला जाता है. अब तो पुष्पा को जब भी मौका मिलता, वह रामखिलौने को अपने घर बुला लेती. चूंकि उन का यह खेल घर में होता था, इसलिए काफी समय उन के संबंधों की किसी को भनक नहीं लगी.

इस बीच पुष्पा के तेवर काफी बदल गए थे. गायत्री समझ नहीं पा रही थी कि वह बहू से कुछ काम करने को कहती है तो वह तबीयत खराब होने की बात कह कर टाल क्यों देती है, जबकि जब कभी रामखिलौने आता है, तुरंत उठ कर चाय बनाने चली जाती है.

गायत्री ने पहले तो इस बात पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब एक पड़ोसन ने रामखिलौने के उन के घर रोजाना आने की बात बताई तो वह चौंकी. गायत्री सोचने लगी कि कहीं उस की बहू और रामखिलौने के बीच कोई चक्कर तो नहीं है. यह शक गायत्री के दिमाग में बैठ गया.

अगले दिन वह पति के साथ खेत पर नहीं गई. दोपहर में रामखिलौने घर आया तो ताई को देख कर सकपका गया. उस ने कहा, ‘‘रामिखलौने, तू दिनभर इधरउधर घूमता रहता है, तेरे पास कोई काम नहीं क्या है?’’

रामखिलौने हंसने लगा, ‘‘तुम ने यह कैसे सोच लिया ताई कि मैं कोई काम नहीं करूंगा? देखना एक दिन मैं ऐसा काम करूंगा कि तुम हैरान रह जाओगी.’’

‘‘ठीक है, जब करना तब करना, लेकिन दिन भर मेरे घर के फेरे लगाने की जरूरत नहीं है.’’

सास की यह बात पुष्पा ने भी सुन ली थी. वह डर गई कि कहीं सास को उन के संबंधों पर शक तो नहीं हो गया, जो वह रामखिलौने से इस तरह कह रही है. ताई की बात सुन कर रामखिलौने का भी चेहरा उतर गया. वह उसी समय बिना कुछ कहे वहां से चला गया.  रामखिलौने ने अब पुष्पा के यहां जाना बंद कर दिया. प्रेमी से मुलाकात न होने की वजह से पुष्पा बेचैन रहने लगी. वह समझ नहीं पा रही थी कि उस से कैसे मिले.

एक दिन पुष्पा की तबीयत खराब हो गई. वह गांव के डाक्टर से दवा लेने गई. घर लौटते समय उसे रामखिलौने मिल गया. उस ने रामखिलौने से बेचैनी प्रकट की तो उस ने कहा, ‘‘तुम चिंता न करो भाभी. मैं तुम्हें एक मोबाइल दे दूंगा. तुम जब भी बुलाओगी, मैं आ जाऊंगा.’’

‘‘लेकिन ऐसा कब तक चलेगा? मैं जानती हूं कि जब अनिल आएगा तो इस बात को ले कर घर में तूफान खड़ा हो जाएगा. इसलिए बेहतर होगा कि तुम सतर्क रहो.’’

2 दिनों बाद रामखिलौने ने एक मोबाइल फोन खरीद कर पुष्पा को दे दिया. अब दोनों मोबाइल से रात को अपने मन की बातें करने लगे. चूंकि अब पुष्पा की सास सतर्क हो चुकी थी, इसलिए वह बहू की गतिविधियों पर नजर रखने लगी थी. एक रात उस ने बहू और रामखिलौने को छत पर देख लिया. गायत्री को देख कर रामखिलौने छत से कूद कर भाग गया. इस के बाद गायत्री ने पुष्पा को बहुत फटकारा.