उस ने तपन से बदला लेने की ठान ली थी. एक बार तो उस के मन में आया कि वह रात में सोते समय तपन की हत्या कर दे. लेकिन दिल्ली में ऐसा करने पर वह फंस सकता था, इसलिए वह ऐसी योजना बनाने लगा, जिस में सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे. इसी वजह से वह अपनी इस योजना में किसी को शामिल नहीं करना चाहता था. उस के मन में क्या चल रहा है, यह उस ने तपन को महसूस नहीं होने दिया. वह पहले की ही तरह रोजाना अपने काम पर जाता रहा.
उस ने तपन को सबक सिखाने की जो योजना बनाई थी, उस के दिसंबर, 2015 के पहले हफ्ते में वह मथुरा गया. वहां वह कोसी में रहने वाले अपने दोस्त पाल सिंह से मिला. उस के सहयोग से उस ने 2 हजार रुपए में एक देशी तमंचा और 2 कारतूस खरीदे, जिन्हें ले कर वह दिल्ली लौट आया. अपनी योजना के बारे में उस ने अपनी पत्नी तक को कुछ नहीं बताया था. अब वह अपनी योजना को सुरक्षित तरीके से अंजाम देने की सोचने लगा.
12 दिसंबर, 2015 की सुबह साढ़े 9 बजे वह नोएडा अपने काम पर पहुंचा. तमंचा और कारतूस वह साथ ले गया था. थोड़ी देर बाद तपन भी वहां पहुंचा. दिन भर दोनों वहीं रहे. शाम को तपन के साथ ही वह कमरे पर लौटा.
कमरे पर आते ही उस ने कहा, “भाईसाहब, मेरी सास की तबीयत बहुत ज्यादा खराब है. मुझे उन से मिलने के लिए अभी जाना है. आप मोटरसाइकिल से मेरे साथ चले चलें, हम सुबह लौट आएंगे.”
रात को तपन मथुरा नहीं जाना चाहता था, लेकिन उमेश ने जिद की तो वह उस के साथ जाने को तैयार हो गया. इस के बाद उमेश ने पत्नी से कहा कि कुछ काम से वह तपन के साथ मथुरा जा रहा है, सुबह लौट आएगा. जाते समय उस ने पत्नी को अपना मोबाइल दे दिया.
तपन अपनी मोटरसाइकिल यूपी16ए एच3937 पर उमेश को बैठा कर राधाकुंड मथुरा के लिए चल पड़ा. रात करीब साढ़े 10 बजे मोटरसाइकिल अकबरपुर शेरपुर रोड पर नहर के पास पहुंची तो उमेश ने पेशाब करने के बहाने मोटरसाइकिल रुकवा ली. मोटरसाइकिल खड़ी कर के दोनों उतर गए. तपन एक ओर खड़े हो कर पेशाब करने लगा. सडक़ उस समय सुनसान थी. उमेश को ऐसे ही मौके का इंतजार था. उस ने तमंचे में कारतूस पहले से ही भर रखा था.
उमेश धीरेधीरे तपन के पीछे पहुंचा. पेशाब कर रहे तपन को उस के आने का अहसास नहीं हुआ. उस ने पीछे से तपन की गरदन से तमंचा सटा कर फायर कर दिया. गोली लगते ही तपन जमीन पर गिरा और बिना कोई आवाज किए मर गया. उमेश ने फटाफट उस की जेबों की तलाशी ली. एक जेब में पर्स और दूसरी में उस का मोबाइल मिला. उमेश ने उन्हें निकाल कर अपनी जेब में रख लिए. बचे हुए एक कारतूस और कट्टे को उस ने वहीं झाडिय़ों में फेंक दिया.
तपन को ठिकाने लगा कर वह अपने गांव दलोता चला गया. वहां उस ने तपन का पर्स देखा तो उस में ढाई हजार रुपए नकद के अलावा उस का वोटर आईडी कार्ड, आधार कार्ड, मेट्रो कार्ड और एक भारतीय स्टेट बैंक का एटीएम कार्ड था. अगले दिन वह मोटरसाइकिल को गांव में ही खड़ी कर के दिल्ली लौट आया और पत्नी को ले कर गांव चला गया.
अगले दिन कुछ लोगों ने नहर के पास लाश देखी तो इस की सूचना थाना छाता पुलिस को दे दी. थानाप्रभारी यशकांत सिंह वहां पहुंचे. उन्होंने लाश की शिनाख्त करानी चाही, पर कोई उसे पहचान नहीं सका. तब लाश के फोटो करा कर उन्होंने उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया और अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया.
मृतक के फोटो के पैंफलेट चिपकवाने के बाद भी जब शिनाख्त नहीं हुई तो छाता पुलिस ने लावारिस मान कर उस का अंतिम संस्कार करा दिया. जब छाता पुलिस तपन की लाश की शिनाख्त नहीं करा सकी तो उमेश को लगा कि जब पुलिस लाश की शिनाख्त ही नहीं करा सकी तो मामले का खुलासा कैसे होगा?
उमेश का कुछ सामान दिल्ली में तपन के कमरे पर था. कहीं दिल्ली पुलिस उस सामान के जरिए उस तक न पहुंच जाए, यह सोच कर 24 दिसंबर, 2015 की रात के अंधेरे में वह अपना सामान ले कर भागना चाहता था, लेकिन मुखबिर की सूचना ने उस की इस योजना पर पानी फेर दिया और वह क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ गया.
उमेश कुमार से पूछताछ के बाद इंसपेक्टर अशोक कुमार ने मथुरा के थाना छाता के थानाप्रभारी यशकांत सिंह को पूरी बात बता कर उस के गिरफ्तार करने की सूचना दे दी. अगले दिन क्राइम ब्रांच ने उसे रोहिणी कोर्ट में ड्ïयूटी मजिस्ट्रेट विपुल डबास के समक्ष पेश किया.
उस समय तक यशकांत सिंह वहां पहुंच चुके थे. उसी समय उन्होंने कोर्ट में एक दरख्वास्त दे कर उमेश कुमार को 24 घंटे के ट्रांजिट रिमांड पर ले लिया. थाना छाता पुलिस पूछताछ के लिए उमेश को अपने साथ ले गई. उस की निशानदेही पर पुलिस ने मृतक की मोटरसाइकिल, पर्स, एटीएम कार्ड, वोटर आई कार्ड, आधार कार्ड और हत्या में प्रयुक्त तमंचा व एक जीवित कारतूस बरामद कर लिया.
विस्तार से पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. मामले की जांच यशकांत सिंह कर रहे हैं.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित


