प्रेमियों के लिए मचलने वाली विवाहिता – भाग 2

दशरथ समझ नहीं पा रहा था कि आखिर रीना कहां गई होगी? वह कुणाल के साथ जब भी कहीं जाती थी, तब उसे इस बारे में बता जरूर बता देती थी.

आखिरकार दशरथ पत्नी एक फोटो ले कर पावई थाने गया. उस ने एसएचओ राजेंद्र सिंह परिहार को पूरी बात बताई और पत्नी की गुमशुदगी दर्ज करवा दी. एसएचओ ने उसी वक्त से रीना की तलाश शुरू कर दी. मामला शादीशुदा महिला की गुमशुदगी का था, इसे देखते हुए पहले भदौरिया परिवार के सभी सदस्यों समेत रीना का मोबाइल नंबर ले कर उन की काल डिटेल्स निकलवाई.

काल डिटेल्स का अध्ययन करने के बाद पता चला कि रीना की बीते दिनों एक अनजान फोन नंबर पर अधिक समय तक बातचीत हुई. वह नंबर कुणाल पांडे का था. इस के बाद दशरथ समझ गया कि जरूर वह कुणाल के पास ही गई होगी.

यह जानकारी मिलते ही दशरथ आटो स्टैंड पर पहुंचा और वहां मौजूद आटो चालकों को जब रीना का फोटो दिखाया तो वहां मौजूद हरिओम नाम के ड्राइवर ने रीना को पहचान लिया. उस ने बताया कि वह महिला उस के आटो में बैठ कर बसस्टैंड तक गई थी, लेकिन वहां से वह कहां के लिए गई होगी, इस बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है.

इस जानकारी के बाद दशरथ ने बस कंडक्टरों को रीना की फोटो दिखा कर पूछताछ की. उन्हीं में से ग्वालियर से बनमौर रूट पर चलने वाली एक बस के कंडक्टर ने बताया कि वह महिला बनमौर तक उस की बस में सवार हो कर गई थी.

दशरथ ने थाने जा कर एसएचओ को सारी बात बताई. पवई पुलिस ने बनमौर बसस्टैंड से संबंधित थाने को इस की सूचना और रीना का फोटो भेज कर वहां लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जानकारी मांगी. जल्द ही एक फुटेज में रीना एक बाइक पर सवार दिख गई, जिसे एक नवयुवक ले जाता दिखाई दिया.

बाइक का नंबर और युवक का चेहरा भी दिख गया था. दशरथ ने उस की पहचान कुणाल के रूप में की. बाइक के नंबर की मदद से पुलिस दशरथ को ले कर कुणाल के पास पहुंच गई.

वहां कुणाल और रीना मिल गए. दशरथ ने रीना को साथ चलने के लिए कहा, लेकिन उस ने उस के साथ जाने से साफ इनकार कर दिया. पुलिस दोनों को थाने ले आई. वहां उन से की गई पूछताछ में रीना ने बताया कि वह अपनी मरजी से कुणाल के साथ आई है और आगे भी उसी के साथ रहना चाहती है.

पति दशरथ भदौरिया के हाथ क्यों रह गए खाली

दशरथ ने उसे बच्चों का हवाला देते हुए साथ चलने की विनती की, लेकिन रीना अपनी जिद पर अड़ी रही. पुलिस ने कागजी काररवाई कर रीना और उस के प्रेमी को छोड़ दिया. दशरथ को इस मामले में अदालती काररवाई की सलाह दी. मायूस दशरथ अपने घर लौट आया.

दशरथ का दिल टूट गया और भारी मन से रीना को उस के प्रेमी के भरोसे छोड़ दिया. तीनों बच्चों को कुछ दिनों के लिए उन के ननिहाल भेज दिया.

रीना भदौरिया और कुणाल के लिए अच्छी बात यह हुई कि दशरथ के रूप में उन के प्यार की बाधा खत्म हो गई थी. कुणाल बनमौर में नौकरी करता था. उस ने अपनी आमदनी से रीना को खुशहाल जिंदगी देने का वादा किया, लेकिन उस ने विवाह की औपचारिकता पूरी नहीं की. न तो उस के साथ मंदिर में जा कर उस के गले में वरमाला डाली और न ही कोर्टमैरिज के लिए कोई पहल की. दोनों का दांपत्य जीवन लिवइन रिलेशन की बुनियाद पर टिक गया.

सब कुछ रीना की महत्त्वाकांक्षा के अनुरूप चलने लगा. रीना ने महसूस किया कि जैसे उसे खुशियों और आजादी के पंख लग गए हों. वह अपनी मनमरजी का जीवन गुजारने लगी थी. लेकिन कहते हैं न कि सुख की समय सीमा बहुत जल्द कम होने लगती है. ऐसा ही रीना के साथ भी हुआ.

कुणाल जब रोजीरोटी के लिए नौकरी और ड्यूटी को प्राथमिकता देने लगा, तब रीना ने कुछ अच्छा महसूस नहीं किया. उसे लगा कि जैसे उस की खुशियां कम हो रही हैं.

कुणाल के साथ रहते हुए उसे कई बार बोरियत भी महसूस होने लगी. कारण कुणाल सुबह 10 बजे खाना खा कर अपनी ड्यूटी पर चला जाता था और रात 8 बजे कमरे पर लौटता था. रीना का घर पर अकेले मन नहीं लगता था. वह खुले विचारों वाली थी. घूमनाफिरना, होटल में खाना खाना, पार्क, मौल आदि में जाने की आदत लगी हुई थी. उस में कमी आने से वह उदास रहने लगी थी.

कुणाल अब छोटीछोटी बातों और घरेलू खर्च को ले कर रीना को जिम्मेदार ठहराने लगा था. रोजाना किसी न किसी बात को ले कर उन के बीच कहासुनी होने लगी थी.

घरेलू क्लेश से रीना दिन भर कमरे में अकेली पड़ी परेशान होती रहती थी. वह विचलित हो जाती थी कि आखिर अपनी पीड़ा किसे सुनाए. वहां कोई भी उस का हमदर्द नहीं था, जिसे अपने गम की बात सुनाए. दिल का दुखड़ा बताए. ऐसे में रीना को अपने लिए गए फैसले पर पछतावा होने लगा. अपने बच्चों और पति की याद भी उसे सताने लगी, लेकिन अब इतना सब हो जाने के बाद पति के पास वापस लौटना संभव नहीं था.

अपनी बदली हुई जिंदगी से निराश रीना की मुलाकात मार्केट में एक दिन सुरेंद्र धाकड़ नाम के युवक से हो गई. वह टैंपो चलाता था. उस की लच्छेदार और मीठी बातों ने रीना का मन मोह लिया था. अंत में रीना ने अपनी आदत के मुताबिक अपना नाम बताया और मोबाइल नंबर भी दे दिया. खुशमिजाज टैंपो वाले ने रीना का कुछ समय की यात्रा में ही दिल जीत लिया था.

कौन बना रीना का अगला प्रेमी

सुरेंद्र ठंडी हवा के झोंके की तरह रीना भदौरिया को छू कर चला गया था. उसे कई दिनों तक उस की बातें याद आती रहीं. एक रोज उस ने उसे फोन कर दिया. रीना उसे बसस्टैंड के मार्केट में आने के लिए बोली. सुरेंद्र तुरंत सौरी बोलता हुआ बोला, ”मैडम, मैं अभी ग्वालियर अपने कमरे पर हूं. आज में अपनी सेवा नहीं दे सकता. माफी चाहता हूं.’’

एक टैंपो चालक द्वारा इस तरह तमीज से बातें करना रीना के दिल को छू गया. 2 दिनों बाद सुरेंद्र एक बार फिर रीना को मार्केट में टकरा गया. कुछ घरेलू सामान के साथ रीना बाजार में सड़क के किनारे बैठी थी. वह खोई खोई थी. तभी सुरेंद्र ने अचानक उस के सामने टैंपो रोक दिया था. एक बार फिर उस रोज के लिए सौरी बोला और हालचाल पूछ बैठा.

रीना अचानक सुरेंद्र को देख कर चौंक पड़ी. कुछ बोलने से पहले ही सुरेंद्र बोला, ”देवी मंदिर चलना है मैडम! आज वहां मेला लगता है. चलिए वहां घुमा लाता हूं. ज्यादा किराया नहीं लूंगा. वैसे भी खाली जा रहा हूं.’’

रीना से जिस मंदिर के बारे में पूछा, संयोग से वह उस के घर के रास्ते में ही आगे कुछ दूरी पर था. तुरंत ही वह सुरेंद्र के साथ जाने के लिए तैयार हो गई.

उस दिन रीना ने महसूस किया कि उस के दिल की बात सुरेंद्र सुन सकता है. उस रोज नहीं चाहते हुए भी रीना मंदिर में कुछ समय सुरेंद्र के साथ रही. उस के साथ पूजा में हिस्सा लिया और पास के एक ढाबे में चायनाश्ता भी किया. यह सब सुरेंद्र को भी अच्छा लगा था.

रीना उस के साथ फोन पर भी बातें करने लगी. अपनी समस्याएं बताने लगी थी, जिस का सुरेंद्र दार्शनिक अंदाज में जवाब देने लगा था. एक दिन सुरेंद्र उसे ग्वालियर अपने कमरे पर ले गया. रीना के कदम पहले से ही बहके हुए थे.

उसे हमेशा महसूस होता था कि वह प्यार की भूखी है. थोड़ी सी हमदर्दी मिलते ही उस ओर मुड़ जाती थी. प्यार पाने की यही लालसा उसे कुणाल तक खींच लाई थी. जब कुणाल से जी ऊबने लगा, तब वह सुरेंद्र में अपना प्यार तलाशने लगी. एक मर्द से दूसरे मर्द की बाहों में जाने के बाद मिलने वाली उपेक्षा और असफलता का उसे कोई मलाल नहीं होता था.

इश्क के दरिया में पति को बहाया – भाग 3

पत्नी क्यों बनी पति की जान की दुश्मन

पुलिस ने स्कूल से बंटी का एड्रेस ले कर उस के गांव अडिंग में जा कर उसे तलाश किया गया तो मालूम हुआ कि बंटी कई दिनों से गांव में नहीं आया है. गांव में उस का पिता शोभाराम, बंटी की पत्नी और बच्चे रह रहे थे.

बंटी के बारे में शोभाराम ने बताया कि बंटी अपनी तनख्वाह का एक हिस्सा घर में पत्नी को भेजता है, बाकी अपने खानेपीने के लिए रख लेता है. उसे अब अपनी बीवी और बच्चों से कोई मोह नहीं रह गया है. वह फरीदाबाद में ही किराए का कमरा ले कर रहता है. वहां पर कहां रहता है, यह उस ने कभी नहीं बताया.

इन बातों का अर्थ यह निकाला गया कि बंटी ने अपना घरपरिवार बबीता के साथ आशनाई में छोड़ दिया है. वह बबीता को प्यार करता है. दीपक कुमार ने बंटी के फरीदाबाद वाले किराए के घर को तलाश कर लिया, लेकिन बंटी उस घर में भी नहीं था. वह 2-3 दिन से उस घर में नहीं आया था.

बंटी अब पूरी तरह पुलिस के शक के दायरे में आ गया था. उस को पकडऩे के लिए एसीपी अमन यादव ने मुखबिर लगा दिए.

इस का नतीजा भी सार्थक निकला. 17 अगस्त, 2023 की सुबह उसे मथुरा के गांव बुढ़ैना स्थित चंदीला चौक से गिरफ्तार कर लिया गया. उसी दिन उसे कोर्ट में पेश कर के 25 अगस्त तक के लिए रिमांड पर ले लिया गया.

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क्राइम ब्रांच डीएलएफ के रिमांड रूम में बंटी को लाया गया तो एसीपी अमन यादव के तेवर देख कर वह कांपने लगा. एसीपी भांप गए कि यह बगैर सख्ती के अपना मुंह खोल देगा.

उसे अपने सामने बिठा कर उन्होंने उस के चेहरे पर नजरें जमा दीं, ”बंटी, तुम्हारे लिए यही ठीक रहेगा कि जो कुछ हम पूछें, तुम सहीसही उत्तर दोगे. यदि झूठ बोलने या बरगलाने की कोशिश करोगे तो तुम्हें उलटा लटका दिया जाएगा और फिर…’’

”म… मैं कुछ भी नहीं छिपाऊंगा साहब,’’ बंटी जल्दी से बोला, ”आप पूछिए, क्या पूछना है?’’

”राकेश तुम्हारे साथ ही स्कूल में नौकरी करता था, अब वह 15 दिन से लापता है. बताओ, वह कहां है..’’ अमन यादव ने पूछा.

”मैं ने उसे मार दिया है साहब.’’ बंटी ने रुआंसे स्वर में कहा.

”मार दिया क्यों?’’ पास बैठे प्रभारी दीपक कुमार ने चौंक कर पूछा, ”उस ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था?’’

”कुछ भी नहीं साहब, वह तो सीधासादा आदमी था. गलती मेरी थी, मैं उस की पत्नी बबीता के साथ फंस गया. उस के रूपजाल ने मुझे ऐसा मोहित किया कि मैं अपने बीवी बच्चों तक को भूल गया. बबीता के कहने पर मैं ने राकेश की हत्या कर डाली. मुझ से बहुत बड़ा गुनाह हो गया साहब. मुझे माफ कर दो.’’ कहते कहते बंटी रोने लगा.

”तुम से अपने पति का खून करने के लिए बबीता ने कहा था?’’ प्रभारी दीपक कुमार ने पूछा.

”जी हां,’’ बंटी अपने आंसू पोंछते हुए बोला, ”साहब, परेशान हाल में काम की तलाश करने आई बबीता के यौवन पर फिदा हो कर मैं ने उसे स्कूल में चपरासी की पोस्ट पर लगवा दिया. बबीता दिलफेंक थी. वह जल्दी ही मेरी तरफ आकर्षित हो गई. मैं ने बहुत जल्दी बबीता को अपनी सेज पर सजा लिया.

”मेरे प्यार और जोश पर बबीता इस कदर फिदा हो गई कि उसे अपना पति बेकार लगने लगा. जबकि पहले उसी के कहने पर मैं ने स्कूल में राकेश को भी बस की कंडक्टरी का काम दिलवा दिया था. वह स्कूल में रोज आता था, लेकिन सुबह दोपहर में वह स्कूल बस के साथ बच्चों को लाने छोडऩे के लिए बाहर रहता था. इस बीच बबीता और मैं अपने दिल की मुरादें पूरी कर लेते थे.

”धीरेधीरे राकेश को हम पर शक होने लगा तो उस ने बबीता को मुझ से दूर करने की कोशिश की, लेकिन बबीता ने उस की परवाह नहीं की. वह मेरे नजदीक बनी रही. राकेश घर जा कर बबीता को उल्टीसीधी सुनाता. दोनों में क्लेश होता, लेकिन बबीता ने मेरा साथ नहीं छोड़ा.

”एक दिन बबीता ने मुझ से कहा कि मैं राकेश को रास्ते से हटा दूं, वह उस से रोज क्लेश करता है, गालियां देता है, अब हाथ भी उठाने लगा है. मैं ने बबीता की बात मान ली. राकेश का कांटा निकल जाने से बबीता मुझ से खुल कर अय्याशी करती, मैं उसे फरीदाबाद में पत्नी बना कर रखता.

”मैं ने एक योजना बनाई. 2 अगस्त, 2023 को मैं ने राकेश को शराब पीने की पार्टी दी, वह इस के लिए मान गया. मैं उसे शाम को ठेके पर ले गया.

”उसे दूर कर के मैं ने शराब की बोतल खरीदी और राकेश को ले कर आगरा कैनाल नहर के पास आ गया. वहां दूर तक सन्नाटा था. मैं ने शराब की बोतल खोली और राकेश को पैग बना कर दिया. मैं ने भी पैग बनाया.

”मैं धीरेधीरे अपना गिलास खाली करता, जबकि राकेश पानी की तरह शराब गटक रहा था. मैं ने उसे ज्यादा पिलाई. वह थोड़ी देर में नशे में झूमने लगा तो मौका देख कर मैं ने वहां पड़ी ईंट उठा कर उस के सिर पर वार कर दिया, वह चीख कर गिरा तो मैं ने उसे घसीट कर नहर में धकेल दिया.

”यह खबर मैं ने फोन द्वारा उसी रात बबीता को दे दी तो वह बहुत खुश हुई. फिर 3 अगस्त, 2023 को योजना के तहत उस ने थाना बीपीटीपी में अपने पति राकेश की गुमशुदगी की सूचना लिखवा दी.’’

कैसे बरामद हुई राकेश की लाश

बंटी के द्वारा राकेश की हत्या का जुर्म कुबूल कर लेने के बाद इस जुर्म में शामिल राकेश की पत्नी बबीता को क्राइम ब्रांच टीम ने खेड़ी कलां में उस के घर से गिरफ्तार कर लिया.

क्राइम ब्रांच के औफिस में अपने प्रेमी बंटी को सिर झुका कर बैठा देखते ही वह समझ गई कि पति की हत्या का भेद खुल गया है. इसलिए उस ने भी चुपचाप अपना गुनाह कुबूल कर लिया.

बीपीटीपी थाने में दर्ज अपराध संख्या 200/ 23 पर भादंवि की धारा 302 लगा कर दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. फिर दोनों आरोपियों की निशानदेही पर राकेश की डैड बौडी की तलाश शुरू की गई.

19 अगस्त, 2023 को पलवल के गांव छज्जूपुर के पास आगरा कैनाल से एसडीआरएफ की टीम ने राकेश की लाश बरामद कर पाने में सफलता पा ली. पुख्ता सबूत हासिल करने के बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने हत्यारोपी बंटी और उस की प्रेमिका बबीता को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया.

बंटी और बबीता को अपने किए की सजा दिलवाने के लिए एसएचओ तैयारी में लग गए. राकेश की लाश उस के परिजनों को सौंप दी गई थी, जिन्होंने उस का अंतिम संस्कार कर दिया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

प्रेमियों के लिए मचलने वाली विवाहिता – भाग 1

थोड़ी देर में रीना बस से बनमौर के लिए निकल चुकी थी. उधर उस का प्रेमी कुणाल वहां उस के इंतजार में था. रीना के बनमौर पहुंचने पर उसे बस स्टैंड पर ही कुणाल बाइक लिए खड़ा मिल गया. उसे देख कर रीना के चेहरे पर चमक आ गई. कुणाल ने सहजता से पूछा, ”कोई परेशानी तो नहीं हुई? किसी ने देखा तो नहीं?’’

रीना ने कुछ बोले बगैर कुणाल को अपना बैग पकड़ा दिया. कुणाल ने उसे अपनी गोद में रख कर दोनों हाथों से बाइक का हैंडल पकड़ कर बोला, ”बैठो, दुपट्टा संभाल लेना.’’

इसी के साथ रीना तुरंत बाइक पर बैठ गई. दोनों ने घर पहुंचने से पहले रास्ते में एक ढाबे पर खाना खाया और फिर कुणाल ने उस रात अपनी हसरतें पूरी कीं. रीना भी कुणाल का साथ पा कर निहाल हो गई. दोनों ने बिनब्याह के सुहागरात मनाई.

रीना मध्य प्रदेश के भिंड जिले के इंगुरी गांव के रहने वाले साधारण किसान दशरथ भदौरिया की पत्नी थी. कजरारी आंखों वाली सुंदर पत्नी को पा कर दशरथ बेहद खुश था. रीना की इस खूबसूरती का दीवाना उस के पति दशरथ के अलावा एक और युवक कुणाल पांडे भी था.

वह इंगुरी का नहीं था, लेकिन रीना और दशरथ के पड़ोस में रहने वाले शुक्ला परिवार में उस का अकसर आनाजाना लगा रहता था. एक दिन उस की भी नजर रीना पर पड़ गई. तभी से वह उस का दीवाना हो गया था.

शादीशुदा होने के बावजूद क्यों बहकी रीना

पहली बार में ही दोनों के दिलोदिमाग में खलबली मच गई थी. उन्होंने एकदूसरे के प्रति खिंचाव महसूस किया था. कुणाल कुंवारा था, उस ने कुंवारेपन की कसक के साथ रीना की सुंदरता और कमसिन अदाओं को महसूस किया था.

कुणाल के बांकपन और बलिष्ठ देह को देख कर रीना के दिमाग के तार भी झनझना उठे थे. दिल की धड़कनें तेज हो गई थीं. गुदगुदी होने लगी थी. उस से मिलने को बेचैन हो गई थी, जबकि वह 7 साल की ब्याहता थी, 3 बच्चे थे. उस की कुछ हसरतें थीं, जो पूरी नहीं हो रही थीं. वह खुद को खूंटे से बंधी गाय ही समझती थी.

ऐसा लगता था जैसे उस के सारे मंसूबे धरे के धरे रह जाएंगे. जवानी यूं ही सरकती चली जाएगी. मनचाही खुशियां नहीं मिल पाएंगी. एक दिन कुणाल से मिलने के बाद तो उस का मन और भी बेचैन हो गया था. रीना और कुणाल के बीच पनपे प्यार के बढऩे का यह शुरुआती दौर था, किंतु जल्द ही दोनों एकदूसरे के काफी करीब आ गए. यहां तक कि कुणाल उसे अपनी बाइक से जबतब पास के शहर ले कर जाने लगा. इस में उस के पति दशरथ की सहमति थी.

वह कुणाल को सिर्फ पड़ोसी शुक्लाजी का रिश्तेदार और अपना हमदर्द समझता था. इस वजह से वह कुणाल पर भरोसा करता था. जब भी रीना कुछ खरीदारी करने के लिए शहर जाने की बात कहती थी, तब वह उसे कुणाल के साथ जाने की अनुमति दे देता था. किंतु उसे इस बात का जरा भी आभास नहीं था कि रीना क्या गुल खिला रही है.

कुणाल और रीना एकदूसरे को बेहद चाहने लगे थे. रीना अपना दिल पूरी तरह से कुणाल को सौंप चुकी थी. दूसरी तरफ दशरथ के साथ उस की जिंदगी उबाऊ बनती जा रही थी. घर में छोटीछोटी बातों को ले कर चिकचिक होने लगी थी.

रीना जब कभी कुणाल के साथ किसी रेस्टोरेंट में एक साथ कोई पसंदीदा डिश खा रही होती, तब चम्मच से निवाले के साथसाथ अपनी सारी समस्याएं भी उस से साझा कर लेती थी. कुणाल उस के इसी प्रेम का दीवाना बन चुका था और उस के साथ अपनी हसरतें पूरी करने का हसीन सपना देखने लगा था. उस पर पैसा खर्च करने में जरा भी कंजूसी नहीं करता था.

कुणाल मध्य प्रदेश के औद्योगिक इलाके बनमौर में रहता था. वह वहीं एक कंपनी में काम करता था. रीना का गांव बनमौर से करीब 400 किलोमीटर दूर था. इस कारण उन का मिलनाजुलना महीने 2 महीने में ही हो पाता था, लेकिन वे फोन से अपने दिल की बातें करते रहते थे.

कुणाल एक बार करीब 3 महीने बाद रीना से मिला था. तब बातोंबातों में रीना ने लंबे समय बाद मिलने के शिकायती लहजे में साथ रहने की बात रखी. कुणाल भी चुप रहने वाला नहीं था, झट से बोल पड़ा था, ”मैं तो हमेशा तैयार हूं. मेरे पास बनमौर आने का फैसला तुम्हें लेना है.’’

”पति को क्या कहूं?’’ रीना मासूमियत के साथ बोली.

”दशरथ को साफसाफ हमारे तुम्हारे प्रेम के बारे में बता दो.’’ कुणाल ने समझाया.

”लेकिन मैं कैसे कहूं उस से. कहने पर बच्चों का हवाला दे कर रोक देगा.’’ रीना बोली.

”तो फिर एक ही उपाय है,’’ कुणाल ने कहा.

”वह क्या?’’ रीना ने सवाल किया.

”उसे बिना बताए मेरे पास चली आओ… जब वह हम लोगों से मिलेगा, तब उसे हाथ जोड़ कर समझा देंगे.’’ कुणाल ने समझाया. उस के बाद वह बनमौर लौट गया.

रीना कई दिनों तक उलझी रही. कभी बच्चे का विचार सामने आ जाता था तो कभी पति के साथ गुजर रही रूखी जिंदगी. वह काफी उलझन में थी. उसे डर लगने लगा था कि घर छोड़ कर कुणाल के पास जाना कहीं भविष्य में उस के लिए कोई खतरा न बन जाए.

काफी सोचविचार करने के बाद रीना ने एक रोज कुणाल को फोन कर कहा, ”आज दोपहर मैं ने घर की देहरी लांघने का फैसला कर लिया है.’’

रीना भदौरिया के इस फैसले पर कुणाल ने उसी वक्त आगे की योजना समझा दी. अगले रोज दोपहर के समय रीना तेजी से घरेलू काम निपटाने में लगी हुई थी. घर में कोई नहीं था. पति खेत पर गया हुआ था और बच्चे स्कूल जा चुके थे. वह बरतनों को साफ करने और करीने से रखने के बाद फटाफट अपने बैग में कपड़े ठूंसने लगी. पति की नजरों से बचा कर रखे गए कुछ पैसे भी बैग में संभाल कर रख लिए. फिर वह बस पकड़ कर प्रेमी कुणाल के पास पहुंच गई.

उधर दशरथ अपने बच्चे के साथ बेचैन था. उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर रीना अचानक बिना कुछ बताए कहां चली गई. दशरथ रीना को बारबार फोन मिला रहा था, वह स्विच्ड औफ आ रहा था. दशरथ ने इटावा में रीना के मायके से संपर्क किया. वहां रीना के नहीं पहुंचने की जानकारी से वह बेचैन हो गया कि अखिर वह कहां चली गई? उस का फोन क्यों बंद आ रहा है?

दशरथ आसपास के लोगों से भी पत्नी के बारे में पूछताछ कर चुका था. ससुराल में कई बार फोन करने पर हर बार निराशा ही हाथ लगी थी. यहां तक कि शुक्लाजी के यहां जा कर कुणाल के आने के बारे में भी पूछा था. उन से मालूम हुआ था कि वह महीनों से उन के पास नहीं आया है.

इश्क के दरिया में पति को बहाया – भाग 2

एसएचओ से आश्वासन पा कर बबीता वापस घर लौट आई. एसएचओ ने राकेश कुमार की गुमशुदगी का मामला संजीदगी से लिया. वह टीम के साथ राकेश की खोज में खेड़ी कलां के बाजार में गए. राकेश का फोटो दिखा कर वहां के दुकानदारों, चायपान के ठेलों पर उस के विषय में पूछा गया, लेकिन कहीं से भी उन्हें राकेश के यहां बाजार में आने की सूचना नहीं मिली.

थाने लौट कर उन्होंने एसपी को सूचना से अवगत कराया तो उन्होंने यह केस क्राइम ब्रांच शाखा डीएलएफ को ट्रांसपर कर दिया. क्राइम ब्रांच के डीसीपी मुकेश मल्होत्रा ने एसीपी अमन यादव के सुपरविजन में टीम को यह जिम्मेदारी सौंप दी कि वह जल्द से जल्द राकेश के लापता होने की गंभीरता से जांच करें.

उन्होंने राकेश के फोटो भी आसपास के थानों में भिजवा कर सोशल मीडिया पर भी शेयर करा दिए. क्राइम ब्रांच के प्रभारी दीपक और एसीपी अमन यादव ने जांच शुरू करने के लिए एक मीटिंग की.

”क्या कहते हैं आप, राकेश शाम को पत्नी को बता कर बाजार गया और लौट कर वापस नहीं आया.’’ एसीपी अमन यादव ने अपनी बात कह कर दीपक कुमार की ओर देखा.

”सर, इस के पीछे 2 बातें हो सकती हैं, राकेश का किसी ने अपहरण कर लिया है या फिर उस ने खुद अपना घर छोड़ दिया है. अगर उस का अपहरण किया गया होता तो अभी तक उस की फिरौती मांगने के लिए उस के उस के घर वालों के पास फोन आ जाता. रही बात दूसरी तो यदि राकेश अपनी मरजी से कहीं चला गया हो तो इस की संभावना न के बराबर है.’’

”वह कैसे?’’

”जनाब, पति घर तभी छोड़ेगा जब वह घर से परेशान हो जाएगा. परेशानी घरेलू कलह से शुरू होती है. अधिकतर घरों में पतिपत्नी के बीच अनबन रहती है. परेशान हालत में ही अनेक हादसे होते देखे गए हैं. यहां राकेश की पत्नी बबीता अपने पति के लिए चिंतित है, उसे पति की फिक्र है तो इसी से समझा जा सकता है कि दोनों पतिपत्नी में गहरा जुड़ाव रहा है.’’

”एक संभावना और है.’’

”वह क्या है सर?’’

”राकेश को गायब करवाया जा सकता है.’’

”हां.’’ प्रभारी दीपक कुमार ने सिर हिलाया, ”और यह काम एक ही सूरत में होगा, यदि पत्नी का चरित्र ठीक नहीं है. वह पति के अलावा किसी और को प्यार करती है. ऐसी पत्नी खुद अपने पति को गुम करवा सकती है या जान से मरवा सकती है. हमें गुप्त रूप से बबीता के चरित्र की जांचपड़ताल करनी पड़ेगी.’’

”बेशक. यदि बबीता को भनक लगी तो वह सावधान हो जाएगी.’’ प्रभारी अपनी कुरसी छोड़ते हुए बोले. एसीपी अमन यादव भी कुरसी से उठ गए.

कुछ ही देर में उन की जीप खेड़ी कलां में रहने वाले राकेश के घर की तरफ दौड़ रही थी. रास्ते में एसीपी अमन यादव ने साथ चल रही क्राइम ब्रांच की टीम को समझा दिया कि उन्हें किस तरह बबीता के पड़ोसियों से उस के चरित्र की टोह लेनी है.

राकेश के घर का पता पूछते हुए क्राइम ब्रांच की जीप राकेश के घर से पहले ही रुक गई. क्राइम ब्रांच की टीम के लोग जीप से उतर गए. वे सब सादे कपड़ों में थे. वह राकेश के घर के आसपास बबीता के चरित्र की जांच करने के लिए सक्रिय हो गए.

ड्राइवर से क्या खास जानकारी मिली पुलिस को

एसीपी अमन यादव और प्रभारी दीपक कुमार राकेश के दरवाजे पर पहुंच गए. बबीता उन्हें वहां बाहर ही मिल गई. दोनों अधिकारियों को सामने देख कर उस ने तुरंत सिर पर पल्ला ले लिया और आंखों में आंसू भर कर भर्राए स्वर में पूछा, ”कुछ मालूम हुआ साहब, मेरे पति की कोई खबर मिली?’’

”नहीं, अभी तो नहीं. लेकिन हमें विश्वास है कि हम जल्दी राकेश को तलाश कर लेंगे.’’ प्रभारी दीपक कुमार ने बबीता के चेहरे पर नजरें जमा कर गंभीर स्वर में कहा.

”हम यह मालूम करने आए हैं…’’ इस बार एसीपी अमन यादव बोले, ”क्या राकेश की किसी से कोई दुश्मनी थी या उस का गांव में किसी के साथ कभी झगड़ा हुआ था?’’

”नहीं साहब, मेरे पति झगड़ालू नहीं हैं. वह बहुत सीधे और अपने काम से काम रखने वाले हैं.’’ बबीता ने बताया.

”वह बाजार अकेला गया था या कोई और उस के साथ में था?’’

”अकेले ही गए थे साहब.’’

एसीपी अमन यादव और प्रभारी दीपक कुमार ने कुछ और जरूरी सवाल बबीता से किए. राकेश और वह फरीदाबाद में किस स्कूल में नौकरी करते हैं, यह जानकारी ली और जीप में आ कर जीप उन्होंने आगे बढ़ा कर रोक दी. उन के साथ आई क्राइम ब्रांच की टीम के चारों सदस्य भी कुछ ही देर में जीप में आ गए.

”कुछ मालूम हुआ बबीता के बारे में?’’ प्रभारी दीपक ने उन से पूछा.

”बबीता का किसी से अफेयर चल रहा हो, ऐसी तो जानकारी नहीं मिली सर, लेकिन यह जरूर मालूम हुआ है कि राकेश और बबीता के बीच अकसर किसी बात पर झगड़ा होता रहता था. वे किस बात पर झगड़ते थे, यह कोई नहीं जानता.’’ एक सदस्य ने बताया.

”यही मालूम करना होगा, तभी हमें आगे की राह मिलेगी.’’ प्रभारी दीपक कुमार ने गंभीर स्वर में कहा.

”कल स्कूल में चलते हैं, वहां से कुछ जानकारी मिल सकती है.’’ एसीपी अमन यादव ने कहा और सीट के साथ सट कर आंखें बंद कर लीं.

चौबीस घंटे से ऊपर हो गए थे, लेकिन राकेश कुमार का कोई सुराग नहीं लगा था. वह घर वापस नहीं लौटा था. उस का अपहरण किया गया हो, यह बात भी गलत साबित हुई, क्योंकि अपहरण करने वाले की ओर से कोई फिरौती का फोन नहीं आया था.

तीसरे दिन प्रभारी दीपक कुमार और एसीपी अमन यादव ने उस स्कूल में जा कर जानकारी जुटाई, जहां राकेश और बबीता काम करते थे. वहां से एक चौंकाने वाली बात का पता चला. एक स्कूल कर्मचारी ने बताया कि स्कूल में बबीता और बंटी में नजदीकियां थीं. दोनों स्कूल में साथसाथ ही रहते थे, खाना भी वे दोनों एक साथ खाते थे.

चूंकि राकेश स्कूल बस में कंडक्टरी करता था, इसलिए एसीपी अमन यादव ने स्कूल बस के ड्राइवर से बात कर के राकेश के बारे में बहुत कुछ मालूम कर लिया. स्कूल बस का ड्राइवर और राकेश अधिकांश समय साथसाथ ही रहते थे, इसलिए ड्राइवर से राकेश अपने दिल की गोपनीय बातें भी शेयर कर लेता था.

ड्राइवर ने पुलिस को बताया कि राकेश अपनी पत्नी बबीता से इस बात से खफा था कि वह बंटी के साथ हंसहंस कर बातें करती है और उस के आगेपीछे मंडराती रहती है. राकेश बबीता को बंटी के साथ मेलजोल न रखने को कहता था, लेकिन बबीता उस की बात नहीं मानती थी.

ड्राइवर ने बताया कि राकेश बंटी से बहुत खफा था. उस ने एक बार कहा था कि बंटी यदि नहीं माना तो वह उस का खून कर देगा. यह बहुत गहरी बात थी, ऐसा कोई आदमी तभी कह सकता था, जब उसे अपनी पत्नी के बदचलन होने का संदेह हो. पत्नी उस के सामने किसी और के साथ हंसतीबोलती हो.

बंटी को टटोलना अब बहुत जरूरी हो गया था. स्कूल में उस के बारे में पूछा गया तो मालूम हुआ, वह 2-3 दिन से ड्यूटी पर नहीं आ रहा है. यह क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के संदेह को पुख्ता करने वाली बात थी.

इश्क के दरिया में पति को बहाया – भाग 1

स्कूल में लंच का टाइम हुआ तो बबीता अपना खाने का टिफिन ले कर स्टोर रूम में आ गई. वहां बंटी एक कुरसी पर मुंह लटकाए बैठा था. उस के चेहरे पर उदासी थी.

बबीता ने उसे हैरानी से देखा, फिर एक कुरसी पर बैठ कर उस ने अपना टिफिन बौक्स खोलते हुए बंटी को टोका, ”आज खाना नहीं खाना है क्या?’’

”मैं खाना नहीं लाया,’’ बंटी गहरी सांस भर कर बोला, ”तुम खाना खा लो बबीता.’’

”क्या आज फिर बीवी से झगड़ा हुआ है तुम्हारा?’’ बबीता ने टिफिन का ढक्कन खोलते हुए पूछा.

”हां.’’ बंटी ने सिर हिलाया, ”आज केवल इस बात पर झगड़ बैठी कि मैं ने चाय में चीनी ज्यादा होने की शिकायत कर दी थी. बात बहुत छोटी थी बबीता, लेकिन लगता है वह मुझ से जलीभुनी बैठी रहती है. उसे कोई पौइंट मिला और लगी झगडऩे. मेरी जिंदगी तो नरक बना कर रख दी है उस ने. मैं आज गुस्से में भूखा ही चला आया हूं.’’

बबीता अपनी जगह से उठी और बंटी की कुरसी के पास आ गई. उस ने बंटी के कंधे पर हाथ रख कर प्यार से कहा, ”छोड़ो घर की बात, आओ मेरे साथ खाना खा लो.’’

”नहीं बबीता, अगर मैं ने तुम्हारे टिफिन से खाया तो तुम्हारा पति राकेश भूखा रह जाएगा. तुम राकेश को बुला लाओ और खाना खा लो. मैं अपने लिए कैंटीन से कुछ ले आता हूं.’’ बंटी कुरसी से उठने लगा.

बबीता ने उस की कलाई पकड़ ली, ”राकेश आज ड्यूटी पर नहीं आया है. उसे बुखार था, वैसे भी यदि वह आता तो मैं उसे अपने टिफिन में मुंह नहीं मारने देती.’’

बंटी ने कनखियों से बबीता की ओर देखा, ”ऐसा क्यों बोल रही हो बबीता, वो तुम्हारा पति है. उस का तुम पर और इस खाने पर पूरापूरा हक है.’’

”वह मेरा नाम का पति है बंटी, मुझे अब उस से नफरत होने लगी है.’’

”ऐसा क्यों, क्या मुझे ले कर वह अब भी तुम पर शक करता है?’’

”हां. उस का कहना है कि मैं उसे छोड़ कर तुम्हें चाहने लगी हूं. तुम्हारे साथ मेरा उठना बैठना उसे पसंद नहीं है.’’ बबीता ने कहतेकहते मुंह बिगाड़ा, ”छोड़ो ये बातें. तुम हाथ धो कर आओ. मैं ने आज तुम्हारी पसंद की आलूमटर की सब्जी बनाई है.’’

बंटी के मुंह में पानी आ गया. वह तुरंत बाहर गया और हाथ धो कर आ गया. बबीता के सामने वह बैठ गया तो बबीता ने टिफिन उस के सामने कर दिया. दोनों एक ही टिफिन में खाना खाने लगे.

बंटी 7-8 साल से फरीदाबाद के स्कूल में साफसफाई का काम कर रहा था. 4 साल पहले परेशान हालत में बबीता वहां काम की तलाश में आई तो बंटी ने उसे चपरासी की नौकरी पर रखवा दिया था. पहली ही नजर में बबीता उसे भा गई थी.

बंटी और बबीता में कैसे बनी नजदीकियां

27 साल की गदराए बदन की बबीता का रूपसौंदर्य किसी भी पुरुष को मोहित कर सकता था. शादीशुदा बंटी 2 बेटियों का बाप था, फिर भी बबीता को देख कर उस का मन उसे अपना बनाने के लिए डोल गया था. बबीता को स्कूल में नौकरी दिलवाने के पीछे उस का यही मकसद था कि बबीता उस का अहसान मान कर उस के करीब आ जाए. हुआ भी यही था. बबीता उस के आसपास ही मंडराने लगी थी. वह लंच बंटी के साथ ही बैठ कर करती थी.

यह सिलसिला लंबे समय तक चला, क्योंकि बबीता की परेशानी को भांप कर बंटी ने उस के पति राकेश को भी स्कूल में नौकरी पर लगवा दिया था. राकेश स्कूल बस में कंडक्टरी करने लगा था, इसलिए लंच में अब वह अपनी पत्नी बबीता के साथ लंच करने आ जाता था. बंटी को यह देख कर कुढऩ होती थी, लेकिन वह कर ही क्या सकता था. हां, उस ने यह जरूर महसूस किया था कि बबीता लंच टाइम में अपने पति राकेश की मौजूदगी पसंद नहीं करती थी.

जब कभी राकेश स्कूल के काम से लंच टाइम में बाहर रहता था तो बबीता बंटी को पास बिठा कर अपने ही टिफिन में खाना खिलाती थी. तब वह बहुत खुश नजर आती थी. उस दिन भी राकेश स्कूल में नहीं था. उसे बुखार था, इसलिए वह स्कूल में आया ही नहीं था. बबीता टिफिन में खाना बंटी के लिए बना कर लाई थी, जिस में बंटी के पसंद की आलूमटर की सब्जी थी.

”वाह बबीता! क्या सब्जी बनाई है तुम ने, जी चाहता है तुम रोज मेरे लिए खाना बना कर लाओ और प्यार से मुझे खिलाओ तो मेरी नीरस हो रही जिंदगी में बहार आ जाए.’’ बंटी ने तारीफ करते हुए कहा.

बबीता मुसकरा पड़ी, ”मैं तो तुम्हारी नीरस जिंदगी में सात रंग बिखरने को तैयार हूं बंटी, लेकिन उधर तुम्हारी पत्नी और इधर मेरा पति राकेश. दोनों के रहते हुए यह ख्वाब कभी पूरे नहीं हो सकेंगे.’’

”ख्वाब जरूर पूरे होंगे बबीता,’’ बंटी दूर शून्य में देखता हुआ बोला, ”यदि तुम मेरे साथ हो तो मैं यह ख्वाब भी पूरा कर के दिखाऊंगा.’’

बबीता उसे हैरानी से देख कर मन ही मन अंदाजा लगा रही थी कि अब बंटी उसे सचमुच दिल की गहराई से प्यार करने लगा है. उसे राकेश की दिल के अंदर जगह देने में कोई नुकसान नहीं होगा.

3 अगस्त, 2023 को बबीता फरीदाबाद (हरियाणा) के थाना बीपीटीपी में पहुंची तो उस के चेहरे पर परेशानी के अनेक भाव थे. एसएचओ उस वक्त चायनाश्ता कर के अखबार पढ़ रहे थे.

उन्होंने बबीता की उड़ी हुई रंगत देखी तो अखबार मेज पर रख कर पूछा, ”क्या बात है, तुम बहुत घबराई हुई और परेशान दिखाई दे रही हो.’’

”साहब मेरे पति…’’ कहतेकहते बबीता रोने लगी.

”क्या हुआ तुम्हारे पति को?’’

”वह कल शाम को बाजार गए थे, तब से अब तक घर नहीं आए हैं. मैं ने उन की हर जगह खोजखबर की, वह कहीं भी नहीं मिले हैं.’’ रोते हुए बबीता ने बताया.

”तुम्हारे पति यहां पर कहां रहते हैं?’’

”हम खेड़ीकलां गांव के हैं साहब.’’

”तुम्हारे पति कहीं नौकरी करते होंगे, वहां जा कर पता लगाया तुम ने?’’

”साहब, मैं और मेरे पति राकेश फरीदाबाद के एक स्कूल में नौकरी करते हैं. हम गांव से ही फरीदाबाद अपने काम पर आतेजाते हैं. कल शाम को मैं खाना बना रही थी, तब पति मुझ से बोले कि एक जरूरी काम से बाजार जाना पड़ रहा है. खाना बनाओगी, तब तक लौट आऊंगा. मैं ने खाना बनाया, बच्चों को खिलाया और पति की राह देखने घर के आंगन में बैठ गई. रात गहराने लगी तो मैं ने उन्हें फोन लगाया, लेकिन उन का फोन स्विच औफ आ रहा था.

”10 बजे मेरे सब्र का बांध टूट गया. मैं अपने पासपड़ोस वालों को साथ ले कर बाजार गई. उन्हें हर संभावित जगहों पर तलाश किया, लेकिन उन का कुछ पता नहीं चला. मैं घर लौट आई. रात भर सो नहीं पाई. सोचा रात में वह कहीं रुक गए होंगे, सुबह आ जाएंगे, लेकिन अब दिन के 9 बजने को आए हैं, वह अभी तक घर नहीं लौटे हैं.’’

”तुम अपने पति की गुमशुदगी लिखवा दो. पति का फोटो भी दे दो. हम तुम्हारे पति की तलाश करने की हरसंभव कोशिश करेंगे.’’ एसएचओ ने कहा.

एसएचओ ने बबीता को एक सिपाही के साथ गुमशुदगी दर्ज करवाने के लिए भेज दिया. पुलिस ने 35 वर्षीय राकेश कुमार की गुमशुदगी दर्ज कर ली गई. बबीता पति का फोटो साथ लाई थी. उसे जमा कर लिया गया.