एक लाश ने लिया प्रतिशोध – भाग 3

स्लेड जानता था कि स्पेल्डिंग उस की बात पर ध्यान नहीं देगा, इसलिए उस ने जेब से वह रस्सी निकाल कर अपने हाथ स्पेल्डिंग की सीट के पीछे की ओर बढ़ा दिए.

‘‘नहीं, मैं यह नहीं कर सकता. मेरा फर्ज अपने मुवक्किल का हित देखना है. मैं मजबूर हूं. तुम अच्छी तरह जानते हो कि एक वकील की हैसियत से मेरा फर्ज क्या है?’’ स्पेल्डिंग ने कहा.

‘‘हां, जानता हूं. मगर मैं सिर्फ 3 महीने की मोहलत चाहता हूं.’’ स्लेड ने कहा.

‘‘नहीं, मैं यह नहीं कर सकता. मेरे खयाल से इस मसले पर बात करने से कोई फायदा नहीं है. बेहतर होगा कि मैं आप की कार से उतर कर पैदल ही चला जाऊं.’’

कह कर स्पेल्डिंग ने कार के दरवाजे के हैंडिल पर जैसे ही हाथ रखा, तभी स्लेड ने रस्सी का फंदा स्पेल्डिंग की गरदन में डाल दिया. स्पेल्डिंग कुछ समझ पाता, उस के पहले ही गले में फंदा कस गया. उस का दम घुटने लगा.

भारतीय ठगों की उस किताब में जो गला घोंटने का तरीका बताया गया था, वह कितना अचूक था. स्लेड की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उस की योजना का पहला चरण कितनी आसानी से पूरा हो गया था.  अब स्पेल्डिंग की लाश को ठिकाने लगाना था. इस के लिए उस ने पहले से ही योजना बना रखी थी.

उस ने स्पेल्डिंग की लाश को सीट पर लिटा कर कार स्टार्ट की और तेज रफ्तार से समुद्र की ओर चल पड़ा. ज्वार आने में अब पौन घंटे बाकी थे. जबकि स्लेड को समुद्र तक पहुंचने के लिए उस बर्फ और तेज हवा में 10 मील की दूरी तय करनी थी.

उस खौफनाक रात में कार भागी जा रही थी. सड़क पर कहीं भी कोई नजर नहीं आ रहा था. रास्ता बिलकुल साफ था. स्लेड को रास्ते का पता था. उस सड़क पर वह न जाने कितनी बार आयागया था.

आखिर स्लेड समुद्र के किनारे पहुंच गया. अब उस के आगे कार नहीं जा सकती थी. चारों ओर गहरा अंधकार छाया हुआ था. तीखी हवा चल रही थी. बर्फ के गाले उड़ रहे थे. सड़क से 2 मील दूर काला सागर लहरा रहा था. उस की लहरों की गूंज यहां तक रही थी.

स्लेड कार से नीचे उतरा और लाश को खींच कर एकदम गेट के पास कर लिया. लाश की जेबों में लोहे के टुकड़े भर कर उस की कमर से जंजीर लपेट दी. यह काम उस ने इसलिए किया था, जिस से उस के वजन से लाश समुद्र की तलहटी में बैठ जाए और उसे मछलियां खा जाएं.

अब स्लेड को लाश उठा कर समुद्र के किनारे तक ले जाना था. निश्चय ही यह एक मुश्किल काम था. वह कोई हट्टाकट्टा आदमी नहीं था. दुबलापतला साधारण शरीर वाला था. उस की जवानी भी उतार पर थी. एक क्षण के लिए उसे लगा कि शायद वह लाश को समुद्र तक नहीं ले जा पाएगा.

लेकिन वह हिम्मत हारने वालों में नहीं था. उस ने लाश को उठा कर कंधे पर लाद लिया. लाश काफी भारी थी. फिर भी स्लेड तेजी से चल पड़ा. उस ने सुविधा के लिए लाश की बांहें गले में तो पांवों को कमर में लपेट लिया. अभी लाश की लचक कायम थी. एक तरह से वह स्पेल्डिंग की लाश को पीठ पर लादे था. लाश की बांहें स्लेड की गरदन में लिपटी थीं तो पैर कमर को कसे हुए थे.

लाश के वजन से स्लेड के कदम लड़खड़ा रहे थे. फिर भी वह हिम्मत कर के बढ़ता रहा. अब ज्वार आने में ज्यादा देर नहीं थी. वह हांफ रहा था, लेकिन रुक कर वक्त बिलकुल बरबाद नहीं करना चाहता था. उसे ज्वार आने के पहले ही पानी तक पहुंच कर लाश को फेंक देना था.

उस की आंखों में चमक आ गई. आखिर वह अपनी मंजिल पाने वाला था. अंधकार में उसे एक उजली सी लकीर नजर आई. वह लहरों के झाग की थी.

स्लेड के पांव समुद्र के पानी में पड़े तो उस की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. वह थोड़ा और आगे बढ़ा. पानी उस के घुटनों तक आ गया तो वह रुक गया और उस ने राहत की सांस ली. अब उसे लाश को कंधे से उतार कर पानी में लुढ़का देना था. वह लाश को पानी में लुढ़काने के लिए झुका. लेकिन यह क्या? लाश उस के कंधे से गिरी ही नहीं. उस ने लाश की बाहों को खींचा. लेकिन वे टस से मस न हुईं.

वे अकड़ चुकी थीं. उन का लचीलापन खत्म हो चुका था. उस ने जोर लगा कर कमर को कसे टांगों को खींचा. लेकिन टांगें भी टस से मस न हुईं. वे भी अकड़ गई थीं. यह देख कर वह डर के मारे पागल हो गया. पूरी ताकत लगा कर लाश की गिरफ्त से छूटने की कोशिश की. लेकिन लाश की गिरफ्त जरा भी ढीली नहीं पड़ी.

ऐसा लग रहा था, जैसे लाश ने एक जिंदा शक्तिशाली युवक की तरह उसे पकड़ लिया है. वह लाश की पकड़ को सारी कोशिशों के बावजूद नहीं छुड़ा सका. अब वह क्या करे?

तभी ज्वार आ गया. बड़ी बड़ी लहरें चिंघाड़ती हुई आने लगीं. अब वहां से भागने के अलावा स्लेड के पास कोई दूसरा उपाय नहीं था. उस ने बौखला कर एक बार फिर लाश से पिंड छुड़ाने की कोशिश की. पर कोई फायदा नहीं हुआ. लाश के हाथपांव उसे संड़सी की तरह जकड़े हुए थे.

निढाल और निराश हो कर स्लेड ने पानी से निकलने की कोशिश की. लेकिन अब देर हो चुकी थी. लहरों का ऐसा रेला आया कि वह संभल नहीं सका और उस के धक्के से गिर पड़ा. स्लेड ने उठने की कोशिश की, लेकिन उठ नहीं सका. उस का दम घुटने लगा, फिर बेहोश हो गया. लाश उसे उसी तरह दबोचे रही.

ज्वार उतर गया तो समुद्र तट पर 2 लाशें एकदूसरे से लिपटी हुई मिलीं. उन की शिनाख्त होते देर नहीं लगी. उन में एक लाश स्लेड की थी और दूसरी स्पेल्डिंग की. दोनों लाशों को उसी स्थिति में पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया. डा. मैथ्यू शव परीक्षण गृह में आए तो लाशों को इस तरह लिपटी देख कर हैरान रह गए.

उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लिखा, ‘स्लेड ने स्पेल्डिंग को गरदन दबा कर मार दिया था. स्पेल्डिंग की लाश को ठिकाने लगाने की गरज से कंधे पर उठा कर उस के हाथ गरदन में तो पैर कमर में लपेट लिए थे. स्लेड लाश समुद्र में फेंकने गया था. लेकिन लाश की पकड़ से न छूट पाने की वजह से वह पानी में गिर गया. सांस की नली में पानी भर जाने से वह भी मर गया.’

एक लाश ने लिया प्रतिशोध – भाग 2

सचमुच मौसम ठीक नहीं था. स्लेड अपने दोस्त डा. मैथ्यू को कार तक पहुंचाने आया तो देखा जोरों से बारिश हो रही थी. हवा भी बड़ी तीखी चल रही थी. ठंड से उस की देह कांप उठी थी.

‘‘लगता है, रात को बर्फ गिरेगी.’’ कार स्टार्ट करते हुए डा. मैथ्यू ने कहा. इस के बाद नमस्कार कर के वह चला.

मौसम बेहद खराब था. मगर स्लेड को वह तूफानी रात बहुत अच्छी लग रही थी. वह बहुत खुश था. क्योंकि उस तूफानी रात में अगर बर्फ गिरती है तो कोई बाहर नहीं निकलेगा. ऐसे में स्पेल्डिंग की लाश ठिकाने लगाने में उसे आसानी रहेगी.

बैठक में आ कर स्लेड ने घड़ी पर निगाह डाली. अभी उस के पास पूरे एक घंटे का समय था. इस बीच वह अपनी योजना पर कायदे से सोचविचार सकता था.  उसे ज्वार (समुद्र के पानी चढ़ने) आने के समय की पक्की सूचना थी. कल सुबह ज्वार आने वाला था. यह भी कितना अच्छा था. आज रात को वह स्पेल्डिंग को मार कर समुद्र में फेंक देगा तो सुबह ज्वार उस की लाश को बहा ले जाएगा. आज बुधवार है, आधी रात की टे्रन से स्पेल्डिंग आएगा और उसी समय…

उस ने बैठक का दरवाजा खोला, बाहर की आहट ली. कोई आवाज नहीं आ रही थी. उस की मकान मालकिन डंबलटन सोने चली गई थीं. वैसे भी उन्हें कहां सुनाई देता था. उसे स्लेड के जाने का पता ही नहीं चलेगा. जब स्लेड स्पेल्डिंग की हत्या कर के लौटेगा, तब भी उसे कुछ नहीं पता चल पाएगा.

स्लेड को लगा, घड़ी की सुइयां अब तेज चल रही हैं. उस के दिल की धड़कन तेज हो गई. उस ने लोहे की जंजीर और लोहे का वजनदार टुकड़ा कार की पिछली सीट पर रख कर अपने ओवरकोट से ढक दिया था.

अपनी मेज की दराज से स्लेड ने एक रस्सी का टुकड़ा निकाला, जो 18 इंच लंबा था. उस के दोनों सिरों पर 6-6 इंच लंबे लकड़ी के टुकड़े बंधे थे. रस्सी के बीच में एक गांठ लगी थी. उस ने सभी गांठों की जांच कर के रस्सी जेब में रख ली. उसे उस रस्सी के बारे में वे बातें याद आ गईं, जिन्हें उस ने एक किताब में पढ़ा था. वह किताब भारत के ठगों की कार्यप्रणाली पर थी. भारतीय ठग इसी तरह रूमाल या रस्सी में लगी गांठ से अपने शिकार का गला घोंट कर लूट लेते थे.

स्पेल्डिंग भी वकील था. स्लेड के खिलाफ वह एक ट्रस्ट का मुकदमा जीत गया था. इस के अलावा उस ने स्लेड की कुछ जालसाजियां भी पकड़ ली थीं. उसी के बल पर वह स्लेड को जेल भिजवा सकता था. यही नहीं, बार एसोसिएशन से उस का रजिस्ट्रेशन रद्द करवा कर उसे बदनाम और बेकार कर सकता था. इसीलिए स्लेड ने स्पेल्डिंग को खत्म करने की योजना बनाई थी.

स्लेड ने एक बार फिर घड़ी पर नजर डाली. घर से निकलने का समय हो गया था. उस ने बत्तियां बुझा दीं और दबे पांव चल कर मकान के बाहर आ गया. बड़ी सतर्कता से बिना कोई आवाज किए उस ने दरवाजा बंद किया.

हवा बहुत तेज थी. अब तक बर्फ गिरने लगी थी. लेकिन स्लेड को उस की कोई परवाह नहीं थी. क्योंकि उस समय उस के मन में उस से भी भयंकर और तेज आंधी चल रही थी. उस ने हाथों से कार को धकेल कर गैराज से बाहर निकाला. गैराज को धीरे से बंद कर के ताला लगा दिया. सड़क पर काफी दूर ले जा कर उस ने कार स्टार्ट की. सड़क बिलकुल सुनसान थी. स्ट्रीट लाइट बर्फ की वजह से मद्धिम हो गई थीं.

वह पुल पर पहुंचा. वहां से उसे रेलवे स्टेशन की रोशनी दिखाई दे रही थी. साढ़े 12 बजे वाली गाड़ी से स्पेल्डिंग को आना था. हर बुधवार को वह 60 किलोमीटर दूर अपने औफिस की ब्रांच में जाता था. वहां से वह रात साढ़े 12 बजे की गाड़ी से वापस आता था.

स्लेड स्पेल्डिंग के रास्ते में कार की बत्तियां बुझा कर उस के आने का इंतजार करने लगा. ट्रेन कुछ लेट थी. लगभग 15 मिनट बाद स्लेड को ट्रेन की लाइट नजर आई और फिर टे्रन धड़धड़ाती हुई स्टेशन पर आ कर खड़ी हो गई.

स्लेड ने स्टेशन की ओर ताका. यात्री निकलने लगे. स्पेल्डिंग के पास गाड़ी नहीं थी. अभी वह नया वकील था. उस की आमदनी ज्यादा नहीं थी. वह टैक्सी का खर्च भी बरदाश्त नहीं कर सकता था. स्लेड ने देखा, स्पेल्डिंग पैदल ही चला आ रहा था. तेज हवा की वजह से उस ने सिर झुका रखा था. वह अंधेरे में खड़ी स्लेड की कार को नहीं देख सका और आगे निकल गया.

कार में बैठे स्लेड ने कार स्टार्ट कर के बत्तियां जलाईं. वह शिकार के पीछेपीछे चल पड़ा. सामने सड़क पर चल रहा स्पेल्डिंग कार की लाइट में दिखाई दे रहा था. कार बगल में पहुंची तो उस ने खिड़की से सिर निकाल कर पूछा, ‘‘क्या आप मेरी कार से चलना चाहेंगे?’’

‘‘बहुत बहुत शुक्रिया. आज मौसम बहुत खराब है. 2 किलोमीटर चलना भी मुश्किल लग रहा है.’’

‘‘तो फिर आ जाइए.’’ कार रोक कर स्लेड ने कहा.

स्पेल्डिंग ने अंदर आ कर दरवाजा बंद कर लिया. स्लेड ने कार आगे बढ़ा दी.

‘‘संयोग से तुम्हारे ऊपर नजर पड़ गई. मैं मिसेज क्ले के घर गया था. लौटते हुए मुझे ट्रेन के आने की आवाज सुनाई दी तो तुम्हारी याद आ गई. मैं ने सोचा आज बुधवार है. तुम घर लौट रहे होगे.’’

‘‘बहुत बहुत शुक्रिया, स्लेड साहब.’’ स्पेल्डिंग ने कहा.

धीरेधीरे कार चलाते हुए स्लेड ने मतलब की बात पर आते हुए कहा, ‘‘सही बात तो यह है कि मैं ने यह काम बिना मतलब नहीं किया है. मैं तुम से मतलब की एक बात करना चाहता हूं.’’

‘‘यह समय मतलब की बात करने का नहीं है. आप उसे कल कीजिएगा.’’

‘‘नहीं, यह बात मिसेज क्ले के ट्रस्ट से संबंधित है.’’

‘‘मैं ने पिछले हफ्ते कोर्ट से आदेश भिजवा दिया था.’’

‘‘हां, वह तो मिला था. मगर मैं ने तो तुम से कहा था कि मेरे मुवक्किल के लिए यह परेशानी की बात है. उस का पति आजकल बाहर है.’’

‘‘मेरे खयाल से परेशानी की कोई बात नहीं है. उस के पति को इस सब से क्या लेनादेना? आप मिसेज क्ले से कह कर जल्दी से मामला निपटवा दीजिए.’’

स्पेल्डिंग के इतना कहते ही स्लेड ने कार सड़क के किनारे रोक दी और स्पेल्डिंग को घूरते हुए कहा, ‘‘देखो स्पेल्डिंग, मैं ने कभी तुम्हारा कोई एहसान लेने की जरूरत नहीं समझी. कुछ समय तक के लिए तुम वह आदेश रुकवा दो, सिर्फ 3 महीने के लिए.’’

crime thriller कहानी के अगले भाग में पढ़िए, कैसे एक लाश ने लिया प्रतिशोध…

एक लाश ने लिया प्रतिशोध – भाग 1

स्लेड ने तय कर लिया था कि उसे किसी भी तरह स्पेल्डिंग की हत्या करनी है. क्योंकि उसे पता था कि अगर उस ने स्पेल्डिंग की हत्या नहीं की तो वह उस का कैरियर बरबाद कर देगा. एक वकील होने के नाते उसे बचाव  के लिए दलीलें देनी तो आती थीं, लेकिन हत्या किस तरह की जाए कि न तो मैडिकल साइंस पकड़ सके और न कानून. क्योंकि जब हत्या साबित ही नहीं होगी तो वह पकड़ा ही नहीं जाएगा.

स्पेल्डिंग की हत्या कैसे की जाए, इस पर वह काफी दिनों तक सोचता रहा. इस की वजह यह थी कि वह नहीं चाहता था कि हत्या जैसे अपराध में फंस कर उस का कैरियर और जिंदगी बरबाद हो. क्योंकि कैरियर और जिंदगी बचाने के लिए ही तो वह हत्या जैसा जघन्य अपराध करने पर विचार कर रहा था. लेकिन उस की समझ में यह नहीं आ रहा था कि वह स्पेल्डिंग की हत्या कैसे करे कि कानून की नजरों से साफ बच जाए.

आज की तरह तब इंटरनेट तो था नहीं कि इंटरनेट पर सर्च कर के वह हत्या की तरकीब खोज निकालता. यह ऐसा काम था, जिस के लिए किसी से सीधे सलाह भी नहीं ली जा सकती थी. स्लेड को किसी भी तरह स्पेल्डिंग की हत्या करनी थी. जब उसे कोई उपाय नहीं सूझा तो उस ने अपने दोस्त डा. मैथ्यू से हत्याओं पर चर्चा कर के कोई तरीका निकालने का विचार किया.

इस के लिए उस ने उन्हें एक शाम खाने पर बुला लिया. खाना खाते हुए स्लेड ने कहा, ‘‘आजकल अपराध कुछ ज्यादा ही होने लगे हैं. खासकर हत्या जैसे अपराधों की तो जैसे बाढ़ सी आ गई है. लगता है, पुलिस हत्यारों को पकड़ नहीं पा रही है?’’

‘‘ऐसी बात नहीं है, हत्यारा कितनी भी होशियारी से हत्या करे, उस से कोई न कोई चूक हो ही जाती है. और फिर उसी चूक की वजह से वह पकड़ा जाता है. तब उस की कश्ती किनारे पर आ कर भी डूब जाती है. हत्या करने के बाद सब से कठिन काम है लाश को ठिकाने लगाना. लेकिन तुम्हें पता होना चाहिए कि मैं इस काम को बखूबी अंजाम दे सकता हूं.’’ डा. मैथ्यू ने कहा.

‘‘जी हां.’’ स्लेड ने कहा. लेकिन वह जानता था कि इस मामले में उसे डा. मैथ्यू से कहीं ज्यादा अनुभव है.

‘‘दरअसल यह बहुत ही खतरनाक और पेचीदा मसला है. यह इतना मुश्किल काम है कि मेरी समझ में यह नहीं आता कि लोग कत्ल करने जैसा गैरबुद्धि वाला काम करते ही क्यों हैं?’’

‘‘मेरा भी कुछ ऐसा ही खयाल है,’’ स्लेड ने कहा. लेकिन मन में वह कुछ और ही सोच रहा था. उस का खयाल था कि इस दुनिया में आदमी के लिए कोई भी काम कठिन नहीं है.

‘‘लोग सोचते हैं कि किसी को जहर दे कर मारना बहुत आसान है,’’ डा. मैथ्यू ने आगे कहा, ‘‘लेकिन उन्हें पता नहीं होता कि पोस्टमार्टम में जहर का पता लग जाता है. और जब हत्या का पता चल जाएगा तो हत्यारा पकड़ा ही जाएगा. मेरा तो काम ही जहर का पता लगाना है. मैं ही क्या, जाहिल से जाहिल डाक्टर भी जहर का पता लगा सकता है.’’

‘‘मैं आप की राय से पूरा इत्तफाक रखता हूं, डाक्टर.’’ स्लेड ने कहा.

चूंकि वह स्पेल्डिंग की हत्या के लिए जहर का इस्तेमाल करने की सोच ही नहीं रहा था, इसलिए उसे इस बारे में विचार ही नहीं करना था. उस ने तो कोई और ही उपाय सोच रखा था.

‘‘अगर तुम जहर दे कर हत्या नहीं करते तो लोग यही सोचेंगे कि वह अपनी मौत मरा होगा. हत्या करने के बाद अगर हत्यारा बचना चाहता है तो वह कुछ ऐसी तिकड़म करे कि लोगों को लगे कि मृत व्यक्ति ने खुदकुशी की है. मगर मेरी तरह तुम भी जानते हो कि यह काम इतना आसान नहीं है. वैसे भी खुदकुशी के मामले में बड़ी गहराई से जांच होती है. तुम खुद वकील हो, खुदकुशी के कितने मामलों को तुम ने निपटाए हैं. तुम्हें तो पता ही है कि ऐसे मामलों में कितनी परेशानी होती है. और फिर नतीजा क्या निकलता है?’’

‘‘आप ने सही कहा,’’ स्लेड ने कहा.

उस ने इस मामले पर काफी गहराई से विचार किया था. काफी सोचविचार कर वह इस नतीजे पर पहुंचा था कि इस तरह स्पेल्डिंग की हत्या कर लाश को गायब करेगा कि उसे कोई पकड़ नहीं पाएगा. अगर स्पेल्डिंग की लाश मिल भी गई तो पुलिस यही समझेगी कि उस ने आत्महत्या की है.

‘‘हां, तो मैं उसी मसले पर फिर आता हूं. हत्यारे के लिए लाश से पीछा छुड़ाना आसान नहीं है.’’ डा. मैथ्यू ने कहा.

‘‘जी हां,’’ स्लेड ने कहा, ‘‘आप बिलकुल सही कह रहे हैं.’’

लेकिन स्लेड को पूरा विश्वास था कि स्पेल्डिंग की लाश से वह आसानी से पीछा छुड़ा लेगा.

‘‘जानते ही हो, लाश को ठिकाने लगा कर उस से मुक्ति पाना बहुत ही कठिन काम है,’’ डा. मैथ्यू ने कहा, ‘‘कुछ लोग रासायनिक पदार्थों और तेजाब से लाश को जला गला देते हैं. लेकिन एक डाक्टर होने के नाते मैं इस तरकीब को पसंद नहीं करता.’’

‘‘वह क्यों?’’ स्लेड ने पूछा.

‘‘लाश कितनी भारी होती है. उसे उठाना, ढोना, संदूक, तहखाने या नदीनाले में छिपाते फिरना, कितना खतरनाक काम है.’’

‘‘आप ठीक कह रहे हैं. मैं ने इस के बारे में पहले कभी नहीं सोचा.’’ स्लेड ने कहा. जबकि उसे लग रहा था कि डाक्टर बिलकुल बेकार की बातें कर रहा है.

‘‘वैसे एक ऐसी तरकीब है, जिस में बचने की काफी गुंजाइश है. वकील होने के नाते तुम उस में जरूर दिलचस्पी लोगे, क्योंकि इस में एक कानूनी नुक्ता है.’’

‘‘कौन सा?’’ स्लेड ने अचकचा कर पूछा.

‘‘जब तक तुम किसी अभियुक्त को मुजरिम नहीं साबित कर देते, तब तक उसे सजा नहीं दिला सकते. और जब तक लाश नहीं मिल जाती, तब तक किसी अपराधी को पकड़ने या उस पर मुकदमा चलाने का सवाल ही नहीं उठता. किसी को हत्यारा साबित करने के लिए लाश का मिलना बहुत जरूरी है.’’

‘‘आप ने बिलकुल सही कहा. हैरानी की बात यह है कि इतनी बढि़या बात मेरे जेहन में पहले क्यों नहीं आई?’’ स्लेड ने कहा.

लेकिन अचानक उसे लगा कि उस के मुंह से यह बात निकल कैसे गई? उस ने तुरंत खुद को सहज बनाने की कोशिश की. उस ने अपने दिल की खुशी भी छिपाई, ताकि डाक्टर जान न सके कि उस के मन में क्या है.   जबकि डाक्टर ने उस की बात पर गौर ही नहीं किया था.

उस ने कहा, ‘‘मेरे खयाल से लाश को पूरी तरह से नष्ट करना आसान नहीं है. लेकिन अगर कोई अपराधी लाश गायब करने में सफल हो जाता है तो निश्चित ही वह पकड़ में नहीं आएगा. उस पर कितना भी जबरदस्त शक क्यों न हो. पुलिस बिना लाश बरामद किए उस के खिलाफ सुबूत नहीं जुटा पाएगी. इस तरह के कत्ल की कहानी सचमुच एक अनोखी कहानी होगी.’’

‘‘जरूर,’’ स्लेड ने हंसते हुए कहा. इस के बाद उस ने मन ही मन सोचा, ‘सचमुच स्पेल्डिंग के कत्ल की कोई कहानी नहीं बन सकेगी.’

‘‘अच्छा स्लेड, अब मैं चलूंगा. खाते खाते काफी बकबक कर ली. तुम्हारी इस शानदार दावत के लिए बहुत बहुत शुक्रिया. आज मौसम भी कुछ ठीक नजर नहीं आ रहा है. अब चल देना ही ठीक है.’’ डा. मैथ्यू ने उठते हुए कहा.

क्या स्लेड हत्या करने में कामयाब हो सकेगा ? जानने के लिए पढ़ें crime thriller story का अगला भाग..