यशपाल को कोई उपाय नहीं सूझा तो उस ने परमिंदर से छुटकारा पाने के लिए अदालत में तलाक का मुकदमा दायर कर दिया. तलाक के लिए उस ने पत्नी पर चरित्रहीनता का आरोप लगाया था, इसलिए उस ने अदालत में बच्चों का डीएनए टेस्ट कराने का भी मुकदमा दायर कर दिया था.
इन दोनों ही मामलों में तारीखों पर तारीखें पड़ रही थीं. इस से यशपाल को लगा कि पुलिस ही नहीं, जज भी उस की चरित्रहीन पत्नी की सहायता कर रहे हैं.
जबकि अदालत तलाक के मुकदमे को इसलिए लटकाए रहती है कि शायद पतिपत्नी में समझौता हो जाए. बहरहाल सन 2012 में अदालत ने परमिंदर कौर के पक्ष में फैसला सुना दिया. इस के बाद यशपाल ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अपील दायर की, जहां से उस की अपील खारिज कर दी गई.
अदालतों की इस कार्यवाही से यशपाल इस तरह बौखला गया कि वह लोअर कोर्ट से ले कर हाईकोर्ट तक के जजों को धमकी भरे पत्र लिख कर भेजने लगा. इसी के साथ उस ने उन लोगों की एक सूची भी तैयार कर ली, जिन की वह हत्या करना चाहता था. उस की उस सूची में डीएसपी, एसपी, आईजी, डीआईजी, डीजीपी, लोअर कोर्ट के जज से ले कर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के अलावा पत्नी, बच्चे, साला और कई बैंकों के मैनेजर भी थे. इस सूची में करीब 50 लोग थे.
यशपाल लगातार सभी को धमकी भरे पत्र भेजने लगा तो पटियाला के पुलिस अधीक्षक को हाईकोर्ट की ओर से आदेश मिला कि धमकी भरे पत्र भेजने वाले इस आदमी को हिरासत में ले कर पूछताछ की जाए कि वह ऐसा क्यों कर रहा है? उस की मैडिकल जांच भी कराई जाए.
हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस अधीक्षक ने कोतवाली प्रभारी जसविंदर सिंह टिवाणा को यशपाल को हिरासत में ले कर पूछताछ करने और उस का मैडिकल कराने का आदेश दिया. पुलिस पूछताछ में वह पत्नी की बेवफाई की बातें करता रहा.
इस के बाद उस का चैकअप कराया गया तो डा. बी.एस. सिद्धू के अनुसार वह डेल्यूजनल डिसौर्डर का शिकार पाया गया. इस बीमारी का रोगी अपने दिमाग में कोई भ्रम पाल लेता है. फिर वह जैसा सोचता है, उसे वैसा ही दिखाई देता है.
पुलिस को इन बातों से क्या लेनादेना था. उस ने रिपोर्ट तैयार कर के मैडिकल रिपोर्ट सहित हाईकोर्ट भेज दी. पुलिस के चंगुल से छूटने के बाद यशपाल सिंह ने एक बार फिर पटियाला की सिविल कोर्ट में मैडम पवलीन कौर की अदालत में मुकदमा दायर कर दिया. इस मुकदमे में भी डीएनए टेस्ट की मांग की गई थी.
दूसरी ओर परमिंदर कौर ने भी सरदार हरपाल सिंह की अदालत में डोमेस्टिक वायलेंस का मुकदमा दायर कर दिया था. मुकदमेबाजी करते हुए यशपाल सिंह सब की हत्याओं की योजनाएं भी बना रहा था. वह लैपटौप पर हौलीवुड की फिल्में देखता और हत्याएं करने की तकनीकें खोजता रहता. बेटी हरमीत की हत्या के लिए उस ने इंटरनेट के माध्यम से एक दवा ढूंढ़ निकाली थी, जो धतूरे के बीजों से तैयार की जाती थी.
लेकिन तमाम कोशिश के बाद भी उसे वह दवा नहीं मिली. चाय की पत्ती से निकोटिन जैसा जहर बनाने का आइडिया भी उस ने इंटरनेट से ढूंढ़ निकाला. लेकिन इस में भी उसे सफलता नहीं मिली. 10 अक्तूबर, 2013 को मैडम पवलीन कौर के सुझाव पर यशपाल सिंह की बेटी हरमीत कौर उस के साथ रहने आ गई तो उस ने उस की हत्या की कोशिश और तेज कर दी. लेकिन वह उस की हत्या कुछ इस तरह से करना चाहता था कि उस पर किसी तरह की आंच न आए. इस के लिए वह इसी तरह की फिल्में देखने लगा.
22 फरवरी, 2014 की सुबह बैंक जाने के पहले रात भर पढ़ाई करने के बाद हरमीत कौर गहरी नींद सो रही थी, तभी मुर्गा काटने वाला छुरा ले कर यशपाल उस के कमरे में जा पहुंचा. हौलीवुड की फिल्म से लिए आइडिया के अनुसार उस ने हरमीत की गरदन की मुख्य नस एक ही झटके से काट दी. उसी बीच दर्द से तड़प कर हरमीत ने उसे पकड़ना चाहा तो उस के कुछ बाल उस की मुट्ठी में आ गए थे. दूसरी नस भी उस ने उसी तरह फुरती से काट दी थी. इस के बाद उस छुरे को गरदन में फंसा छोड़ कर वह कमरे में ताला बंद कर के बैंक चला गया.
दोपहर बाद बैंक से लौट कर कोतवाली गया, जहां कोतवाली प्रभारी जसविंदर सिंह टिवाणा को मनगढं़त कहानी सुना दी. लेकिन पुलिस ने घटनास्थल के निरीक्षण में ही ताड़ लिया था कि यह हत्या यशपाल के अलावा किसी और ने नहीं की है.
कोतवाली पुलिस ने यशपाल को सक्षम अदालत में पेश कर के सुबूत जुटाने के लिए 2 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड के दौरान यशपाल सिंह इंसपेक्टर जसविंदर सिंह टिवाणा से कहता रहा कि वह जितना चाहें पैसे ले लें, लेकिन उसे 2 दिनों के लिए छोड़ दें, ताकि वह अपने अन्य दुश्मनों को भी सबक सिखा सके. क्योंकि एक हत्या में भी उतनी ही सजा होगी, जितनी 5 हत्याओं में.
हरमीत कौर की हत्या की एक वजह यह भी थी कि वह 1 मार्च, 2014 को 18 वर्ष की हो रही थी. यशपाल उस पर यह दबाव डाल रहा था कि वह उस की बहन के पास कनाडा चली जाए. उस का सोचना था कि बालिग होने पर वह अपनी मरजी की मालिक हो जाएगी तो उसे छोड़ कर अपनी मां के पास जाएगी.
मां के साथ रहते हुए वह भी उसी की तरह चरित्रहीन हो जाएगी. जबकि हरमीत कौर चाहती थी कि किसी तरह मम्मीपापा में सुलह हो जाए तो पूरा परिवार एक साथ रह सके. उस की अच्छी सोच ने उसे मौत की नींद सुला दिया तो बाप की गंदी सोच ने उसे जेल पहुंचा दिया.
रिमांड अवधि समाप्त होने पर कोतवाली पुलिस ने यशपाल को एक बार फिर अदालत में पेश किया, जहां अदालत के आदेश पर उसे जिला जेल भेज दिया गया.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित


