4 लाख में खरीदी मौत – भाग 1

सुबह खेतों की ओर जाते हुए कुछ लोगों ने एक आदमी को पड़े देखा तो उन्हें लगा, शायद कोई शराब पी कर पड़ा है. लेकिन जब उन्होंने नजदीक जा कर देखा तो पता चला कि वह तो मरा पड़ा है. वह खून से लथपथ था, इस से लोगों ने अंदाजा लगाया कि यह हत्या का मामला है.

हत्या का अंदाजा होते ही वहां मौजूद लोगों में से किसी ने इस बात की जानकारी ग्रामप्रधान निर्मल सिंह को दे दी. कुछ ही देर में वहां अच्छीखासी भीड़ लग गई. लाश जसपुर कोतवाली के अंतर्गत आने वाले गांव अहमदनगर के पास खेतों में पड़ी थी. ग्रामप्रधान निर्मल सिंह की सूचना पर जसपुर कोतवाली के एसएसआई संजीव कुमार पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.

निरीक्षण में पुलिस ने देखा कि मृतक के शरीर पर किसी भी तरह का चोट का कोई निशान नहीं था. उस की हत्या गोली मार कर की गई थी. गोली आंख के पास लगी थी, जो छेद कर उस पार गले के पास से निकल गई थी.

मृतक की शिनाख्त के लिए पुलिस को किसी तरह की जहमत नहीं उठानी पड़ी. क्योंकि उसे वहां लगभग हर कोई जानता था. मृतक जसपुर के मोहल्ला गांगूवाला का रहने वाला जयप्रकाश था, जो घूमघूम पूरे दिन ठेले पर नीरा (खजूर के पेड़ का पानी) बेचता था. यही वजह थी कि अधिकांश लोग उसे जानतेपहचानते थे. हत्या की सूचना पा कर सीओ प्रकाशचंद आर्य भी घटनास्थल पर आ गए थे.

मृतक के कपड़ों की तलाशी में पुलिस को उस की जेब से पहचान पत्र, फोटो और 4 हजार रुपए नकद मिले थे. इस से यह साफ हो गया था कि मृतक की हत्या लूटपाट के लिए नही की गई थी.

साथ आई फोरेंसिक टीम अपना काम करने लगी तो एसएसआई संजीव कुमार ने जयप्रकाश की हत्या की सूचना उस के घर वालों को दिलवा कर वहीं बुला लिया. हत्या की सूचना पा कर घर वाले रोतेबिलखते वहां आ पहुंचे. पूछताछ में पता चला कि मृतक इधर कई दिनों से काशीपुर में रहने वाली अपनी बहन केला देवी के यहां रह रहा था. इस के बाद पुलिस के सामने यह सवाल खड़ा हो गया कि मृतक जब काशीपुर में रह रहा था तो इस की हत्या यहां कैसे हुई?

इसी पूछताछ में मृतक जयप्रकाश की पत्नी सुनीता ने बताया था कि कुछ दिनों पहले मृतक ने अपना मकान 9 लाख रुपए में बेचा था. मकान बेचने के बाद से ही वह अपनी बहन के यहां रह रहा था. 9 लाख रुपए एक मोटी रकम होती है. उस के लिए भी उस की हत्या हो सकती थी. यह सब जांच के बाद ही पता चल सकता था. पुलिस घटना की काररवाई निपटाते हुए लाश का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने की तैयारी कर रही थी कि तभी मृतक जयप्रकाश की बहन केला देवी आ गई.

आते ही केला देवी भाई की लाश से लिपट कर जोरजोर से रोने लगी. पुलिस को जब पता चला कि यही उस की बहन केला देवी है, जिस के यहां जयप्रकाश अपने मकान के रुपए ले कर रहा था तो पुलिस ने उस से भी पूछताछ करना उचित समझा.

सांत्वना दे कर पुलिस ने केला देवी से पूछताछ की तो उस ने बताया कि 11 अक्तूबर को करवा चौथ होने की वजह से जयप्रकाश अपने घर जाने की बात कह कर उस के घर से चला आया था. इस के बाद वह कहां गया, उस के साथ क्या हुआ, उसे कोई जानकारी नहीं थी.

पुलिस केला देवी से पूछताछ कर रही थी कि तभी मृतक जयप्रकाश की मां बिरमो देवी आ गई. वह बहू की ओर इशारा कर के रोते हुए कहने लगी, ‘‘अपने यार के साथ मिल कर तू ने ही मेरे बेटे को मरवाया है. तू हत्यारिन है. मेरे बेटे को मरवा कर तेरा कलेजा ठंडा हो गया न, अब मौज कर अपने यार के साथ.’’

बिरमो देवी की बातें सुन कर पुलिस के कान खड़े हो गए. पुलिस को समझते देर नहीं लगी कि यह अवैध संबंधों में हुई हत्या का मामला है. पुलिस को लगा, अब जल्दी ही इस मामले का खुलासा हो जाएगा. इस के बाद पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया.

बिरमो देवी की बातों से पुलिस ने इसे अवैध संबंध में हुई हत्या का मामला माना था, इसलिए अंतिम संस्कार होने के तुरंत बाद पुलिस मृतक जयप्रकाश के घर पूछताछ के लिए पहुंच गई. मृतक की मां बिरमो देवी घर में नहीं थी, इसलिए पुलिस उस की पत्नी सुनीता और बच्चों से पूछताछ करने लगी.

सुनीता और बच्चों ने बताया कि करवा चौथ को जयप्रकाश घर नहीं आया था. उसे किस ने, कब और क्यों मारा, उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. पत्नी और बच्चों के खिलाफ पुलिस को अब तक की जांच में कोई सुबूत नहीं मिला था, इसलिए पुलिस इस बात पर भी विचार करने लगी कि कहीं रुपयों की वजह से तो जयप्रकाश की हत्या नहीं हुई.

इस के बाद पुलिस ने मकान खरीदने वाले से पूछताछ की तो उस ने बताया कि मकान का सौदा होते ही उस ने पूरी रकम अदा कर दी थी. उस के बाद जयप्रकाश ने पैसों का क्या किया, उसे कोई जानकारी नहीं थी.

पुलिस जयप्रकाश की मां बिरमो देवी से पूछताछ करना चाहती थी, इसलिए एक बार फिर उस के घर गई. इस बार की पूछताछ में उस ने पुलिस को बताया कि उस की बहू सुनीता का चमनबाग के रहने वाले मास्टर हरजीत सिंह से प्रेमसंबंध है. जब देखो, तब वह उसी के घर में पड़ा रहता था.

जयप्रकाश ने कई बार सुनीता को समझाया था, लेकिन सुनीता मास्टर के प्यार में इस कदर पागल थी कि मास्टर के लिए वह पति से लड़ने लगती थी. सुनीता का मास्टर हरजीत सिंह से चक्कर था, इसलिए वह उस की तरफदारी करती थी. उस का बड़ा बेटा विशाल भी उस के साथ उस की तरफदारी करता था.

बिरमो देवी ने पूरे विश्वास के साथ पुलिस से कहा था कि सुनीता ने ही मास्टर हरजीत सिंह के साथ मिल कर जयप्रकाश की हत्या की है. बिरमो देवी के इसी बयान को आधार बना कर पुलिस ने उस की ओर से मास्टर हरजीत सिंह, उस के बेटे दीपक, मृतक जयप्रकाश की पत्नी सुनीता और बेटे विशाल के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया था.

नामजद मुकदमा दर्ज होने के बाद जसपुर कोतवाली पुलिस ने मृतक जयप्रकाश की पत्नी सुनीता और मास्टर हरजीत सिंह को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी. काफी पूछताछ के बाद भी जब दोनों ने स्वीकार नहीं किया कि उन्होंने हत्या की है तो पुलिस चक्कर में पड़ गई. क्योंकि पुलिस इस मामले को बड़े हलके में ले रही थी. जब सुनीता और हरजीत ने हत्या करने से साफ मना कर दिया और पुलिस को उन के हत्या में शामिल होने का कोई सुबूत नहीं मिला तो पुलिस के लिए परेशानी बढ़ गई.

कहानी के अगले अंक में पढ़ें.. जयप्रकाश ने क्यों दी अपनी ही पत्नी और बेटे की सुपारी?

पति ने किया अर्चना की जिंदगी का सूर्यास्त

शक का नासूर : फोन ने घोला जिंदगी में जहर – भाग 3

नीतू की लाश 3 दिन पहले जंगल में यमुना किनारे डाल दी थी. ऐसे में आशंका इस बात की थी कि कहीं लाश किसी जानवर ने क्षतिग्रस्त न कर दी हो. इसलिए पुलिस सब से पहले ओमप्रकाश को उसी जगह ले कर गई जहां उस ने लाश फेंकी थी.

ओमप्रकाश की निशानदेही पर पुलिस ने झाडि़यों के बीच से एक ट्राली बैग बरामद किया. उस ने बताया कि इसी बैग में नीतू की लाश है. बैग खोलने से पहले इंसपेक्टर सी.एम. मीणा ने सूचना क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम और जिला मुख्यालय को दे दी थी. फोन करने पर पूर्वी जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम भी वहां पहुंच गई.

उन सभी के सामने जब उस बैग की चैन खोली गई तो उस में एक महिला की लाश निकली लाश देखते ही पास में खड़े दिनेश कुमार की चीख निकल गई. वह जोरजोर से रोने लगे. उन्हें रोता देख पुलिस समझ गई कि लाश उन की बेटी नीतू की ही है. लाश की शिनाख्त हो जाने पर पुलिस ने पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल भेज दिया.

ओमप्रकाश ने अपनी नवविवाहिता पत्नी की हत्या क्यों की? इस बारे में पुलिस ने उस से पूछताछ की तो इस की वजह उन के दांपत्य जीवन में आई कड़वाहट निकली.

पूर्वी दिल्ली के कल्याणपुरी में रहने वाले दिनेश कुमार ललित कला अकादमी में नौकरी करते थे. उन के परिवार में पत्नी विजम के अलावा 2 बेटे और एक बेटी नीतू थी. छोटे से परिवार में वह हंसीखुशी से रहते थे. नीतू बच्चों में सब से छोटी थी. दूसरे वह 2 भाइयों के बीच अकेली बहन थी इसलिए वह सभी की दुलारी थी. इस वजह से वह जिद्दी स्वभाव की हो गई थी.

नीतू के 12वीं पास करने के बाद दिनेश उस के लिए कोई उचित लड़का ढूंढने लगे. किसी परिचित ने उन्हें ओमप्रकाश नाम का लड़का बताया. ओमप्रकाश गाजियाबाद के छपरौला में स्थित अरुणा इन्क्लेव में अपने बड़े भाई और छोटे भाई के साथ रहता था. एमबीए करने के बाद वह एयरटेल कंपनी में नौकरी करता था. उस का औफिस ग्रेटर नोएडा में परी चौक के पास था. वैसे ओमप्रकाश मूल रूप से गौतमबुद्ध नगर के दनकौर कस्बे के रहने वाले बीरपाल का बेटा था.

दिनेश ने ओमप्रकाश को देखा तो वह नीतू के लिए उचित लगा. फिर उन्होंने ओमप्रकाश के घर वालों से बात की. दोनों तरफ से बातचीत होने के बाद नीतू और ओमप्रकाश की शादी तय हो गई और 13 नवंबर, 2013 को सामाजिक रीतिरिवाज से उन का विवाह हो गया.

शादी के बाद नीतू अरुणा इन्क्लेव में ही रहने लगी. नीतू कुछ दिनों तक तो ठीक रही लेकिन बाद में वह पति से घर की छोटीछोटी बातों को ले कर शिकायतें करने लगी. दरअसल जिस फ्लैट में ओमप्रकाश रहता था, उस में उस के 2 भाई और भाभी भी रहती थी. नीतू को उन सब के साथ रहना अच्छा नहीं लगता था. वह उन सब से अलग पति के साथ रहना चाहती थी.

ओमप्रकाश घर वालों से अलग रहना नहीं चाहता था. इसी बात पर उन के बीच मनमुटाव रहने लगा. ओमप्रकाश के औफिस के पास ही आईसीआईसीआई बैंक की शाखा है. किसी काम से वह अकसर उस शाखा में जाता रहता था. शाखा में काम करने वाली प्रिया नाम की लड़की से उस की जानपहचान हुई जो पुणे की रहने वाली थी. बाद में वह जानपहचान दोस्ती में बदल गई थी.

प्रिया की उस से जबतब फोन पर भी बात होती रहती थी. पत्नी की मौजूदगी में भी वह उस से बात करता था. नीतू के पूछने पर उस ने बता भी दिया कि एक बैंक में नौकरी करने वाली प्रिया नाम की लड़की से दोस्ती है वह उसी से बात करता है.

ओमप्रकाश के प्रिया के साथ किस तरह के संबंध थे इस बात को प्रिया या ओमप्रकाश ही बेहतर जानते थे लेकिन नीतू को पति का प्रिया से बतियाना जरा भी अच्छा नहीं लगता था. नीतू ही क्या अधिकांश महिलाएं नहीं चाहतीं कि उन का पति उन के अलावा किसी और महिला या लड़की से बात करे. यानी नीतू की पति से इस बात की शिकायत करनी जायज थी.

लेकिन ओमप्रकाश पत्नी की शिकायत पर तवज्जो नहीं देता वह बात को एक कान से सुनता, दूसरे से निकाल देता था. इस बात पर नीतू को शक हो गया कि वह प्रिया से बात करना बंद क्यों नहीं कर रहा. शक की फांस बहुत खतरनाक होती है. यदि इस फांस को जल्द ही दूर न किया जाए तो यह मजबूत से मजबूत दांपत्य जीवन में भी दरार पैदा कर देती है.

ओमप्रकाश अपने दांपत्य में लगी इस फांस को गंभीरता से नहीं ले रहा था जिस का नतीजा यह निकला कि इस बात को ले कर नीतू की उस से अकसर ही नोकझोंक होने लगी.

ऐसी बात नहीं थी कि नीतू को ही पति पर शक हो, ओमप्रकाश को भी नीतू पर शक होने लगा. इस की वजह यह थी कि ओमप्रकाश ने कई बार औफिस से नीतू के मोबाइल पर फोन किया तो उस का फोन बिजी आया. ऐसा कई बार होने पर ओमप्रकाश के मन में भी शक बैठ गया कि वह जरूर अपने किसी बौयफ्रेंड से बतियाती होगी. बात में घर लौट कर जब वह उस से फोन बिजी होने की वजह पूछता तो वह कह देती कि मम्मी से बात कर रही थी.

नीतू और ओमप्रकाश के मन में शक की जो फांस लगी थी दोनों की जिद से वह नासूर बनती जा रही थी.

नीतू गुस्से में कई बार मायके भी चली गई थी. उस ने अपनी मां को भी बता दिया था कि ओमप्रकाश का किसी प्रिया नाम की लड़की के साथ चक्कर चल रहा है. वह उसी के साथ बतियाते रहते हैं. तब विजम ने भी दामाद को समझाया था. और बेटी को समझाबुझा कर ससुराल भेज दिया था.

21 जून, 2014 को भी नीतू और ओमप्रकाश के बीच कहासुनी हुई तो नीतू गुस्से में मायके आ गई थी. ओमप्रकाश ने उसे वापस आने को कहा तो वह नहीं आई. हां 2-4 दिनों बाद उन दोनों की फोन पर अकसर बातचीत जरूर होती रहती थी.

नीतू की तुनकबाजी और घर में रहने वाले क्लेश से ओमप्रकाश आजिज आ चुका था. सुकून से रहने के लिए उस ने पत्नी को ठिकाने लगाने की योजना बना ली. योजना को सही अंजाम देने के लिए पत्नी को विश्वास में लेना जरूरी था, इसलिए उस ने फोन पर चिकनीचुपड़ी बातें करनी शुरू कर दी. उस ने नीतू को 2 बार मिलने के लिए नोएडा भी बुलाया.

शक का नासूर : फोन ने घोला जिंदगी में जहर – भाग 2

2 दिन बीत चुके थे. पुलिस को नीतू के बारे में कोई क्लू नहीं मिल रहा था. उस का पति, मातापिता चिंतित और परेशान थे. वह बारबार थाने के चक्कर लगा रहे थे. मामला जवान महिला के गायब होने का था. दिल्ली में वैसे भी महिलाओं के साथ होने वाली आपराधिक वारदातें बढ़ती जा रही हैं. नीतू भी कहीं किसी वारदात का शिकार न हो जाए इसलिए पूर्वी दिल्ली के डीसीपी अजय कुमार ने एसीपी संजय सहरावत के निर्देशन में एक पुलिस टीम बनाई जिस में इंसपेक्टर सी.एम. मीणा, एसआई संदीप कुमार, हेडकांस्टेबल सुशील कुमार, कर्मवीर, कांस्टेबल जितेंद्र कुमार, सुरजीत, देशपाल आदि को शामिल किया.

पुलिस टीम सब से पहले यही पता लगाने में जुट गई कि नीतू पति की बताई गई जगह सेक्टर-18, नोएडा पहुंची थी या नहीं और गई भी होगी तो कल्याणपुरी से नोएडा जाने के 2 ही तरीके हैं या तो वह बस, कार, बाइक से गई होगी या फिर मैट्रो द्वारा.

कल्याणपुरी के नजदीक में मयूर विहार फेज-1 मैट्रो स्टेशन है. अगर वह मैट्रो से गई होगी तो मैट्रो स्टेशन पर लगे कैमरों में उस की तसवीर जरूर रिकौर्ड हो गई होगी. यह जानने के लिए टीम 23 जून को मयूर विहार फेज-1 मैट्रो स्टेशन पहुंची और 21 जून को दोपहर 11 बजे के बाद की रिकौर्ड की गई सीसीटीवी फूटेज देखनी शुरू कर दी. पुलिस के साथ नीतू के पिता दिनेश कुमार भी थे. ओमप्रकाश को पुलिस ने स्टेशन के नीचे खड़ी कार में बैठा रखा था. सभी फूटेज को बड़ी गौर से देख रहे थे.

तभी गेट नंबर 1 से नीतू मैट्रो स्टेशन पर चढ़ती दिखी. वह काले रंग की पेंट व मैरून कलर का टाप पहने हुई थी. उस समय वह काफी खुश दिख रही थी. दिनेश ने तुरंत अपनी बेटी को पहचान लिया. यह तसवीर सवा 11 बजे रिकौर्ड की गई थी.

इस तसवीर से यह पता लगा कि वह नोएडा के लिए निकली थी. इस के बाद पुलिस ने नोएडा सेक्टर-18 के मैट्रो स्टेशन की सीसीटीवी फुटेज देखी. वहां करीब साढ़े 11 बजे नीतू स्टेशन से बाहर निकलती दिखी. उस के साथ उस का पति ओमप्रकाश भी था. दोनों खुश थे और बतियाते हुए नीचे उतर रहे थे.

नोएडा सेक्टर-18 के मैट्रो स्टेशन के सीसीटीवी कैमरे की फूटेज देख कर पुलिस समझ गई कि ओमप्रकाश झूठ बोल रहा है. उस ने पुलिस को बताया था कि नीतू उस से नहीं मिली थी जबकि फूटेज देख कर पता चलता है कि वह मैट्रो स्टेशन पर पत्नी को खुद रिसीव कर के ले गया था. इस से पुलिस को ओमप्रकाश पर ही शक होने लगा.

थाने ला कर पुलिस ने ओमप्रकाश से पूछताछ की तो वह बोला, ‘‘नीतू को मैं ने फिल्म देखने के लिए नोएडा बुलाया था. सैक्टर-18 मैट्रो स्टेशन पहुंचने से पहले उस ने मुझे फोन कर दिया था. मैं भी मैट्रो स्टेशन पहुंच गया था. फिर बाद में उस ने फिल्म देखने का प्रोग्राम कैंसिल कर दिया. कह रही थी कि उसे जल्दी घर लौटना है. अट्टा मार्केट में एक दुकान से हम ने स्नैक्स खाए. कुछ देर बात करने के बाद नीतू को सैक्टर-18 के मैट्रो स्टेशन पर छोड़ कर मैं अपने औफिस चला गया था. चाहें तो आप औफिस में मेरी हाजिरी चैक कर सकते हैं.’’

‘‘जब तुम नीतू से मिले थे, तो झूठ क्यों बोले कि वो तुम्हारे पास नहीं आई थी?’’ इंसपेक्टर सी.एम. मीणा ने पूछा.

इस बात का ओमप्रकाश जवाब नहीं दे पाया तो उन्होंने उस से सख्ती से पूछताछ की. तभी ओमप्रकाश के ससुर दिनेश ने दामाद से सख्ती करने को मना कर दिया. उन्होंने पुलिस से कहा कि हमें अपने दामाद पर भरोसा है. वह हमारी बेटी के साथ बुरा नहीं कर सकता.

पुलिस को लग रहा था कि नीतू के गायब होने में ओमप्रकाश का हाथ रहा होगा. थोड़ी सख्ती करने पर वह सारा मामला उगल देता मगर दिनेश के मना करने पर पुलिस उस से पूछताछ नहीं कर सकी.

पुलिस ने दिनेश को काफी समझाने की कोशिश की लेकिन दामाद पर जमे विश्वास के आगे वह पुलिस की बात मानने को तैयार ही नहीं था. अंत में पुलिस ने यह कहते हुए ओमप्रकाश को दिनेश के हवाले कर दिया कि जांच में ओमप्रकाश से पूछताछ करने की जब भी जरूरत पड़ेगी, वही उसे थाने ले कर आएंगे.

पुलिस की इस शर्त पर दिनेश ने हामी भर ली और वह दामाद को अपने साथ घर ले गया. उन दोनों के थाने से जाने के बाद पुलिस टीम मशविरा करने लगी कि अब क्या किया जाए? क्योंकि पुलिस जांच जिस रास्ते पर आगे बढ़ रही थी, वह वहीं रुक गई थी.

मामला एक महिला से संबंधित था इसलिए पुलिस भी चुप नहीं बैठी. पुलिस टीम अब अपने मुखबिरों से नीतू के चालचलन आदि का पता लगाने लगी. यानी उस का कल्याणपुरी में किसी लड़के के साथ कोई चक्कर वगैरह तो नहीं चल रहा था.

दिनेश 23 जून की शाम को ओमप्रकाश को अपने साथ घर ले गया था. अगले दिन 24 जून की सुबह तकरीबन 4 बजे वह उसे ले कर फिर थाने आ गया. इंसपेक्टर सी.एम. मीणा और एसआई संदीप कुमार उस समय रात्रि गश्त कर के थाने लौटे थे. उन्होंने सुबहसुबह ससुरदामाद को थाने में देखा तो वे चौंके.

इस से पहले कि वह उन से थाने आने की वजह पूछते दिनेश ओमप्रकाश की तरफ इशारे करते हुए बोला, ‘‘सर, इस पर आप जो शक कर रहे थे वह सही था. अब हमें भी यकीन हो गया है कि नीतू को गायब कराने में इसी का हाथ होगा. इसे सब पता है कि इस समय मेरी बेटी कहां है? लेकिन यह हमें भी नहीं बता रहा. मैं इसी के खिलाफ नीतू का अपहरण करने की रिपोर्ट लिखाना चाहता हूं.’’

दिनेश की इस बात पर इंसपेक्टर सी.एम. मीणा को हैरानी हुई क्योंकि जो व्यक्ति कल तक अपने दामाद पर आंखें मूंद कर भरोसा कर रहा था, रात बीच में ऐसा क्या हो गया कि वह दामाद के खिलाफ हो गया. उन्होंने दिनेश से कहा, ‘‘हमें तो इस पर पहले से ही शक हो रहा था. कल जो इस से पूछताछ की जा रही थी, उसी में बता देता कि नीतू कहां है? मगर आपने इस से पूछताछ नहीं करने दी. यदि इसे अपने साथ नहीं ले गए होते तो अब तक सारी हकीकत सामने आ गई होती. मेरी समझ में यह बात नहीं आ रही कि अब आप इस के खिलाफ अपहरण का केस क्यों दर्ज करा रहे हैं?’’

‘‘सर, हम इस पर बहुत विश्वास करते थे तभी तो जब आप ने इस से सख्ती की तो हम ने आप से मना कर दिया था. हमें यह लग रहा था कि आप इस के ऊपर दबाव डाल कर कुछ कुबूलवाना चाहते हैं तभी तो हम इसे थाने से ले गए थे. घर ले जा कर हम ने इस से नीतू के बारे में पूछताछ की थी. इसने उस के बारे में कुछ भी नहीं बताया. लेकिन उस समय यह बहुत घबरा रहा था और बारबार हमारे यहां से जाने की बात कह रहा था. इन्हीं बातों पर हमें इस पर शक हो रहा है.’’ दिनेश ने बताया.

दिनेश के कहने पर पुलिस ने ओमप्रकाश को हिरासत में ले लिया और दिनेश कुमार की तरफ से ओमप्रकाश के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर ली. इस के बाद पुलिस ने ओमप्रकाश से उस की पत्नी नीतू की बाबत सख्ती से पूछताछ की तो उस ने जो राज खोला, उसे जानकर सभी सन्न रह गए. उस ने बताया कि 21 जून को ही वह नीतू की हत्या कर चुका है और लाश एक बैग में बंद कर के यमुना खादर में डाल दी थी.

शक का नासूर : फोन ने घोला जिंदगी में जहर – भाग 1

दोपहर के पौने 2 बजे के करीब ओमप्रकाश ने अपने साले संजय के मोबाइल पर फोन किया, ‘‘संजय नीतू कहां है? मैं बहुत देर से उस का नंबर मिला रहा हूं लेकिन उस का फोन स्विच्ड औफ आ रहा है. पता नहीं उस ने अपना फोन बंद क्यों कर रखा है. तुम देखो तो वो कहां है? और उस से मेरी बात भी करा देना.’’

नीतू ओमप्रकाश की पत्नी थी, जो उस समय अपने मायके में रह रही थी, यह बात 21 जून, 2014 की है.’’

संजय उस समय अपने घर पर नहीं था. उस ने उसी समय अपनी बहन नीतू का फोन नंबर मिलाया तो वास्तव में वह बंद था. नीतू के पास जो मोबाइल फोन था उस में वोडाफोन और आइडिया कंपनी के सिम थे. संजय ने उस के दोनों फोन नंबरों को कई बार मिलाया. लेकिन उस का फोन स्विच्ड औफ बताया गया. इस बात को वह भी नहीं समझ पाया कि नीतू ने फोन बंद क्यों कर रखा है?

फिर संजय ने अपनी मां विजम को फोन किया, ‘‘मम्मी, नीतू कहां है? उस का फोन नहीं मिल रहा. जीजाजी उस से बात करना चाहते हैं. उस से कह देना कि वह जीजाजी से बात कर ले.’’

‘‘वो तो सुबह 11 बजे के करीब घर से नोएडा में उन के जाने के लिए निकली थी. कह रही थी कि ओमप्रकाश ने उसे पिक्चर दिखाने के लिए बुलाया है. क्या 3 घंटे में वो उन के पास पहुंची नहीं तो कहां चली गई?’’ विजम चिंतित होते हुए बोलीं.

विजम ने भी बेटी के दोनों नंबर अपने फोन से मिलाए तो वे बंद आ रहे थे. फिर उन्होंने अपने दामाद ओमप्रकाश से फोन पर बात की. ओमप्रकाश ने अपनी सास को बताया कि नीतू को उस ने पिक्चर देखने के लिए बुलाया जरूर था लेकिन वह उस के पास नहीं पहुंची.

नीतू और ओमप्रकाश की शादी करीब 6 महीने पहले ही हुई थी. फोन पर बात करते समय ओमप्रकाश समझ रहा था कि नीतू को ले कर सास बहुत परेशान हो रही है. वह उन्हें समझाते हुए बोला, ‘‘मम्मी आप परेशान मत होइए. ऐसा भी हो सकता है कि वह अपनी किसी सहेली के साथ पिक्चर देखने चली गई हो. एक दो घंटे में शायद वह घर पहुंच ही जाएगी. जब वह घर पहुंच जाए तो मेरी बात जरूर करा देना. इस समय मैं औफिस में हूं. औफिस की छुट्टी के बाद मैं भी आप से मिलने आ रहा हूं.’’

‘‘ठीक है, वो घर आ जाएगी तो तुम्हारी बात करा दूंगी.’’ विजम बोली.

शाम हो गई. न तो नीतू ही घर लौटी और न ही उस का फोन मिला. विजम परेशान हुए जा रही थीं. उन्होंने यह बात पति दिनेश कुमार को भी बता दी. घर वालों ने नीतू की सहेलियों आदि से भी पूछताछ की लेकिन उस का पता नहीं चला. ओमप्रकाश ग्रेटर नोएडा में परी चौक के पास स्थित एक टेलीकौम कंपनी में काम करता था. औफिस की ड्यूटी पूरी करने के बाद वह कल्याणपुरी में स्थित अपनी ससुराल पहुंच गया.

तब तक नीतू घर नहीं लौटी थी. जिस की वजह से घर वाले परेशान थे. सभी इस बात से हैरान थे कि अपने फोन को कभी भी बंद न करने वाली नीतू ने आज अपना फोन बंद क्यों कर रखा है? वह बिना बताए इतनी देर तक गायब भी नहीं रही, फिर आज ऐसी कौन सी जगह पर है जहां उस ने अपना फोन तक बंद कर रखा है. सभी लोग बीचबीच में नीतू का फोन मिलाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन स्विच्ड औफ होने की वजह से उस का फोन नहीं मिल पाया.

आपस में सलाहमशविरा करने के बाद ओमप्रकाश अपने ससुर दिनेश कुमार को ले कर थाना कल्याणपुरी चला गया और थानाप्रभारी अरविंद कुमार को नीतू के लापता होने की जानकारी दी. दिनेश की सूचना पर थानाप्रभारी ने नवविवाहिता नीतू की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर ली. इस की जांच सबइंसपेक्टर संदीप कुमार को सौंपी गई.

एसआई संदीप कुमार ने काररवाई करते हुए सब से पहले वायरलैस से दिल्ली के समस्त थानों में नीतू का हुलिया आदि बताते हुए, उस के गायब होने की सूचना प्रसारित करा दी. नीतू के पास जो फोन था उस से भी कोई सुराग मिलने की संभावना थी, इसलिए उस के फोन में पड़े हुए वोडाफोन और आइडिया के नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाने की काररवाई की.

अगले दिन एसआई संदीप कुमार ने नीतू की मां विजम से बात की तो उन्होंने बताया, ‘‘नीतू 8 जून को अपनी ससुराल से यहां आई थी. कल सुबह तकरीबन 11 बजे घर से निकलते समय उस ने बताया था कि ओमप्रकाश ने उसे नोएडा में पिक्चर देखने के लिए बुलाया है. वह उस के पास जा रही है.

‘‘मैं तो यही सोच रही थी कि वह ओमप्रकाश के पास ही होगी लेकिन दोपहर बाद जब ओमप्रकाश ने नीतू से बात कराने के लिए फोन किया तो पता चला कि वह उस के पास पहुंची ही नहीं है.’’

ओमप्रकाश उस समय ससुराल में ही था. एसआई संदीप ने ओमप्रकाश से पूछताछ की तो उस ने कहा, ‘‘सर, मैं ने नीतू को फोन कर के नोएडा आने को कहा था उस के पहुंचने के बाद हम लोग कोई मूवी वगैरह देखने जाते. उस ने मुझ से कहा भी था कि मैट्रो से नोएडा सेक्टर-18 मैट्रो स्टेशन पहुंच जाएगी.

‘‘मैं उस का सैक्टर-18 के मैट्रो स्टेशन पर इंतजार करता रहा लेकिन वह वहां नहीं पहुंची तो मैं ने उसे फोन करने की कोशिश की, लेकिन उस का फोन बंद होने की वजह से बात नहीं हो सकी. फिर मैं अपने औफिस चला गया. मैं ने फिर संजय को फोन कर के नीतू का फोन बंद होने की बात बताई.’’

दोनों से बात करने के बाद एसआई संदीप यह समझ गए कि ओमप्रकाश ने नीतू को फिल्म देखने के लिए नोएडा बुलाया था. पति के पास जाने के लिए नीतू घर से निकली भी थी लेकिन वह पति के पास पहुंची थी या नहीं, इस बात पर संदेह था. उस समय वह विजम के घर से चले आए. और अपने स्तर से मामले की छानबीन में लग गए.  उन्होंने आसपास के लोगों से पूछा तो कुछ लोगों ने बता दिया कि उन्होंने नीतू को रिक्शे पर बैठे जाते देखा था.

एक जवान औरत की नौटंकी – भाग 3

रीता की तहरीर पर पुलिस ने दीपक कपूर व नीरू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया. पुलिस ने नीरू को थाने बुला कर उस से पूछताछ की तो उस ने स्वीकार कर लिया कि अपनी सास की हत्या उसी ने की थी. दीपक का इस में कोई हाथ नहीं था, लेकिन पुलिस के सख्ती करने पर नीरू ने कुबूल किया कि हत्या में दीपक कपूर भी साथ था. फिर नीरू ने मीरा की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी:

प्रेमी गौरव कपूर की हत्या के बाद नीरू दुखी रहने लगी थी. इस के लिए वह सास को ही कुसूरवार मान रही थी. क्योंकि वही जेल में बंद पति से मिल कर उस के कान भरती थी. इसीलिए उस के पति ने गौरव को मरवा दिया था.

नीरू ने फैसला कर लिया था कि जिस तरह गौरव को तड़पा तड़पा कर मारा गया था, उसी तरह वह सास को भी तड़पा तड़पा कर मारेगी. सास की हत्या कैसे की जाए, इस बारे में उस ने दीपक के साथ सलाहमशविरा किया. फिर दोनों ने एक योजना बना ली. योजना के अनुसार 12 फरवरी, 2014 की शाम को उस ने दीपक को अपने घर बुला लिया. उस समय उस का बेटा कशिश भी घर पर था. बेटे को उस ने फोन रिचार्ज कराने के लिए घर से बाहर भेज दिया.

सास मीरा यादव उस समय कमरे में सोफे पर बैठी थी. नीरू ने सास के सिर पर जमीन में गड्ढा खोदने वाले सब्बल का भरपूर वार किया. एक ही बार में मीरा का सिर फट गया और वह सोफे पर लुढ़क गई. इस के बाद उस ने कई और वार उस के ऊपर किए. थोड़ी देर तड़पने के बाद मीरा यादव की मौत हो गई. सास की हत्या कर के नीरू को बड़ा सुकून मिला.

सास की हत्या करने के बाद सब्बल को उस ने छत पर रखे कूलर के पास छिपा कर रख दिया और दीपक के चले जाने के बाद पुलिस कंट्रोल रूम के 100 नंबर पर फोन कर के सास की हत्या की सूचना दे दी. जिस सब्बल से मीरा यादव की हत्या की गई थी, उसे बरामद करना भी जरूरी था.

नीरू ने बताया था कि वह सब्बल उस ने अपने घर में ही छिपा दिया है. थानाप्रभारी ने वह सब्बल बरामद करने के लिए एसआई हरिशंकर मिश्रा, राजेश यादव, महिला सिपाही श्यामा देवी और प्रीती शाक्य को नीरू यादव के साथ उस के फ्लैट पर भेजा. नीरू ने चौथी मंजिल पर स्थित फ्लैट में पहुंच कर छत पर रखे कूलर के पास छिपा कर रखा सब्बल निकाल कर पुलिस को दे दिया.

पुलिस फर्द बरामदगी की काररवाई करने लगी, तभी मौका देख कर नीरू अपने बेटे कशिश को ले कर कमरे में जाने लगी, तो महिला सिपाहियों ने उसे रोकने की कोशिश की. उसी दौरान उस ने अपने पालतू कुत्ते को उन पर छोड़ दिया. दोनों सिपाही डर के मारे पीछे हट गईं. मौका देख नीरू ने झट से अंदर से दरवाजा बंद कर लिया.

पुलिस ने आवाज लगा कर नीरू से दरवाजा खोलने को कहा, लेकिन उस ने दरवाजा नहीं खोला. इसी दौरान एसआई राजेश कुमार के पास थानाप्रभारी का फोन आया तो राजेश ने उन्हें नीरू वाली बात बताते हुए तुरंत फोर्स भेजने को कहा.

गौरव कपूर की हत्या की तफ्तीश पूरी होने से पहले पुलिस के सामने मीरा यादव की हत्या का मामला सामने आ गया था. इन बातों को देख कर थाना प्रभारी को यह अंदेशा हो रहा था कि कहीं कमरे में बंद हो कर नीरू कोई उल्टासीधा काम न कर बैठे, जिस से नई समस्या पैदा हो जाए. इसलिए वह आवश्यक पुलिस बल के साथ खुद भी उस के घर पहुंच गए. लेकिन वहां उस का कुत्ता खुला हुआ देख कर वह भी घबरा गए.

देखने में वह कुत्ता खतरनाक लग रहा था. हिम्मत कर के थानाप्रभारी आगे बढ़े तो कुत्ते ने उन पर हमला कर के उन्हें घायल कर दिया. किसी तरह कुत्ते को काबू में किया गया. उसी समय फ्लैट में जलने की बू आने लगी और धुआं निकलता हुआ दिखा. यह देख कर पुलिस के हाथपांव फूल गए, क्योंकि फ्लैट के अंदर नीरू अपने बेटे के साथ मौजूद थी.  पुलिस ने दरवाजा तोड़ना शुरू कर दिया.

किसी तरह 2 दरवाजे तोड़ने के बाद पुलिस अंदर पहुंची तो वहां आग लगी थी, धुआं फैला था. आसपास के फ्लैटों में रहने वाले लोगों ने अपने यहां से पानी ला कर आग बुझाई.  धुआं छटा तो नीरू और उस के 13 वर्षीय बेटे की तलाश शुरू की गई. दोनों कहीं नहीं दिखे तो बाथरूम का दरवाजा तोड़ा गया. मांबेटे वहीं मिले, लेकिन बाथरूम में काफी मात्रा में खून फैला हुआ था, वह खून उन की कलाई से बह रहा था. नीरू ने अपनी और बेटे की जान लेने की गरज से नस काट ली थी.

पुलिस ने तुरंत दोनों को एक निजी अस्पताल पहुंचाया. फलस्वरूप उन की जान बच गई. चूंकि नीरू सास की हत्या की अभियुक्त थी, इसलिए पुलिस उसे थाने ले आई. कत्ल के अलावा पुलिस ने उस पर पुलिस के काम में बाधा डालने, आत्महत्या का प्रयास करने तथा बेटे की नस काट कर हत्या का प्रयास करने की धाराएं 309, 353, 352, 307 भी जोड़ दीं.

पूछताछ करने के बाद पुलिस ने नीरू को अदालत पर पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. अगले दिन दीपक को भी गिरफ्तार कर लिया गया. उस ने भी हत्या की बात कुबूल कर ली. उसे भी न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. दूसरी ओर दीपक के परिजनों का कहना है कि दीपक बेकुसूर है. उस का मीरा और नीरू से कोई लेनादेना नहीं था. उसे जबरदस्ती फंसा कर जेल भेजा गया है.

—कथा पुलिस सूत्रों, मीडिया रिपोर्टों पर आधारित

एक जवान औरत की नौटंकी – भाग 2

चूंकि नीरू का पति फिर से जेल चला गया था, इसलिए उस ने गौरव से फिर मिलना शुरू का दिया. यह खबर राजा को जेल में मिली तो वह सुन कर तिलमिला उठा. 6 फरवरी, 2014 की रात 10 बजे गौरव अपने घर पर ही था. उसी समय उस के पास किसी का फोन आया कि केबिल खराब है, आ कर देख लो. फोन आने के फौरन बाद गौरव बाइक ले कर निकल पड़ा. वह अभी सेंटर पार्क फजलगंज के पास पहुंचा था कि उसे कुछ लड़कों ने घेर लिया.

इस से पहले कि गौरव कुछ समझ पाता, उन लड़कों ने उस पर लातघूंसों और चाकू से हमला कर दिया. उन के पास तमंचे भी थे. कुछ लोगों ने यह नजारा देखा, लेकिन उन लोगों के हथियारों को देख कर किसी ने पास जाने की हिम्मत नहीं की. उसी दौरान किसी व्यक्ति ने 100 नंबर पर फोन कर के पुलिस को सूचना दे दी कि सेंटर पार्क में एक युवक को कुछ लोग बुरी तरह मार रहे हैं.

सूचना पा कर फजलगंज पुलिस मौके पर पहुंची तो हमलावर फरार हो गए. वहां एक युवक की लहूलुहान लाश पड़ी थी. पुलिस उसे हैलट अस्पताल ले गई. लेकिन तब तक वह मर चुका था. पुलिस ने जब तलाशी ली तो जेब में एक आइडेंटी कार्ड मिला. जिस में गौरव कपूर नाम लिखा था. आईडी कार्ड पर लगी फोटो मरने वाले युवक के चेहरे से मेल खा रही थी, इसलिए पुलिस को लगा कि मरने वाले का नाम गौरव कपूर ही है.

पुलिस ने आइडेंटिटी कार्ड में लिखे फोन नंबर पर काल किया तो पता चला कि वह फोन नंबर गौरव के घर का है. पुलिस ने उस के घर वालों को इस हादसे की सूचना दे दी. घर के लोग तत्काल अस्पताल आ गए. उस के घर वालों को सांत्वना देने के बाद थानाप्रभारी अनिल कुमार शाही ने मृतक के पिता राजेश कपूर से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उन के बेटे की रंजिश राजा यादव से थी.

पिछले साल भी राजा ने गौरव पर जानलेवा हमला किया था. राजा को शक है कि उस की पत्नी नीरू के अवैध संबंध उस के बेटे से थे. राजा ने खुद या फिर अपने गुर्गों से उन के बेटे की हत्या कराई है. अभी पिछले महीने भी खोया मंडी में उस के गुर्गों ने गौरव पर हमला किया था, जिस की सूचना थाने में दर्ज कराई गई थी.

9 फरवरी, 2014 को गौरव का पोस्टमार्टम कराने के बाद उस की लाश उस के घर वालों को सौंप दी गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि गौरव की बाईं कनपटी पर गोली मारी गई थी. वह गोली दाईं आंख के नीचे से निकल गई थी. उस की नाक की हड्डियां भी टूटी मिलीं थीं. उस के शरीर पर धार और नोंकदार हथियार के कुल 10 घाव मिले.

एक गहरा वार दिल तक गया था, जबकि दूसरे वार से किडनी को क्षति पहुंची थी. इस के अलावा उस के चेहरे, हिप और छाती पर भी धारदार हथियारों के कई घाव मिले. डाक्टर ने उस की मौत का कारण अधिक खून बह जाना माना था.  राजेश कपूर की तहरीर पर पुलिस ने राजा यादव के अलावा रानी गंज निवासी अभिलाष द्विवेदी और 4 अन्य लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया था.

रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने तहकीकात की तो पता चला कि राजा यादव पहले से ही जेल में है. थानाप्रभारी अनिल कुमार शाही ने मुखबिर व सर्विलांस के जरिए अभिलाष और अमित को दबोच लिया. पूछताछ में दोनों ने बताया कि राजा यादव को शक था कि गौरव कपूर के उस की पत्नी नीरू यादव से नाजायज संबंध हैं. इसी वजह से उस ने गौरव को मारने की सुपारी उन्हें दी थी.

फजलगंज पुलिस अभी इस मामले की जांच कर रही थी कि किसी ने 12 फरवरी, 2014 को नजीराबाद थाना क्षेत्र में शिवधाम अपार्टमेंट में रह रही राजा यादव की बूढ़ी मां मीरा यादव की दिनदहाड़े बेरहमी से हत्या कर दी. पुलिस को यह खबर मृतका की बहू नीरू यादव ने दी.

खबर पा कर नजीराबाद थानाप्रभारी सैय्यद मोहम्मद अब्बास अपने साथ सबइंसपेक्टर राजबहादुर सिंह, हरीशंकर मिश्रा, राजेश कुमार, कांस्टेबल नागेश कुमार, धर्मेश कुमार, श्यामा देवी व प्रीति शाक्य को ले कर घटनास्थल पर पहुंचे. पुलिस ने देखा कि सोफे पर एक बूढ़ी औरत खून से लथपथ पड़ी थी. मृतका 60 वर्षीया मीरा यादव थी. उस की सांस चल रही थी. आननफानन में फोन कर के एंबुलेंस बुला कर उसे हैलट अस्पताल पहुंचाया गया. डाक्टरों ने उस का तुरंत इलाज शुरू कर दिया. लेकिन वह बोलने की स्थिति में नहीं थीं. देर रात को उस ने दम तोड़ दिया.

पुलिस ने नीरू यादव से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस की ननद रीता नर्सिंगहोम में अपनी ड्यूटी पर गई थी. जबकि वह बाजार गई हुई थी. देर शाम जब वह बाजार से लौटी तो सास को बुरी तरह घायल पाया. सास को उस हालत में देख कर वह घबरा गई और उस ने यह सूचना पुलिस को दे दी. थानाप्रभारी सैयद मोहम्मद अब्बास ने जब उस से पूछा कि उस समय तुम्हारा बेटा कहां था तो नीरू ने बताया कि वह मोबाइल रिचार्ज कराने गया था.

थानाप्रभारी को इस बात पर हैरानी हुई कि घर में खतरनाक कुत्ता होते हुए भी कोई अनजान व्यक्ति वहां कैसे आ गया. जबकि कुत्ता खुला हुआ था. इस से पुलिस को लगा कि हत्या में जरूर किसी परिचित का हाथ है. क्षेत्राधिकारी नजीराबाद ममता कुरील भी मौके पर पहुंच गईं. उन्होंने नीरू से बात की तो उन्हें भी लगा कि वारदात में जरूर किसी जानने वाले का हाथ है.

पुलिस दोनों हत्याओं की गुत्थी सुलझाने में लगी थी कि 12 फरवरी की देर रात मीरा की बेटी रीता यादव ने पुलिस को लिखित तहरीर दी, जिस में लिखा था कि उस की मां की हत्या उस की भाभी नीरू ने गौरव कपूर के चचेरे भाई दीपक कपूर के साथ मिल कर की है. रीता ने पुलिस को बताया कि रात में जब वह ड्यूटी से घर लौटी तब नीरू और दीपक घर की सीढि़यों से उतर रहे थे. वह दीपक को अपने घर में देख कर चौंकी भी. बाद में जब वह घर के अंदर पहुंची तो मां खून से लथपथ पड़ी थी.

एक जवान औरत की नौटंकी – भाग 1

कानपुर के थाना नजीराबाद के लाजपत नगर का रहने वाला राजा यादव अपने इलाके का माना हुआ बदमाश था. उस के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज थे और थाने में उस की हिस्ट्रीशीट खुली हुई थी. इस वजह से वह या तो अकसर घर से फरार रहता था या फिर जेल में. ऐसे बदमाश जमाने के सामने खुद को भले ही दबंग समझते हों, लेकिन सच्चाई यह है कि जब वे जेल से बाहर होते हैं तो उन के घर वालों का अमन चैन गायब रहता है. आए दिन उन्हें पुलिस से अपमानित होना पड़ता है.

राजा यादव के परिवार में पत्नी नीरू यादव और 3 वर्षीय बेटे कशिश के अलावा मां मीरा यादव थीं. उस के पिता केदारनाथ की कुछ दिनों पहले मौत हो चुकी थी. पति के अकसर जेल में बंद होने की वजह से उस की पत्नी नीरू को आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही थी. वह चूंकि पढ़ीलिखी थी, इसलिए एक जीवन बीमा कंपनी में एजेंट बन गई. इस काम में वह जीजान से मेहनत करने लगी तो उसे ठीकठाक आमदनी होने लगी.

नीरू जो काम करती थी वह ऐसा था, जिस की वजह से उसे दिन में अकसर बाहर रहना पड़ता था. उस की सास मीरा यादव को यह पसंद नहीं था कि बहू घर से बाहर घूमे. लेकिन वह यह भी समझती थी कि बहू के कमाने से ही घर का खर्च चल रहा है, इसलिए वह चाहते हुए भी नीरू को घर से बाहर घूमने से मना नहीं कर पाती थी.

मीरा यादव की 2 बेटियां थीं, जिन में से एक नवाबगंज, कानपुर में ब्याही थी, जबकि छोटी रीता यादव की शादी देहरादून में हुई थी. लेकिन पति से विवाद के चलते वह पिछले एक साल से मायके में रह रही थी. किसी पर बोझ न बने, इसलिए वह एक प्राइवेट नर्सिंगहोम में नौकरी करती थी.

कानपुर के ही थाना फजलगंज के अंतर्गत दर्शनपुरवा के रहने वाले राजेश कपूर के परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटे गौरव उर्फ गगन कपूर और प्रतीक कपूर थे. प्रतीक 8वीं में पढ़ता था जबकि गौरव बीए सेकेंड ईयर में. गौरव पढ़ाई के साथसाथ अपने चाचा के काम में हाथ बंटाता था. उस के चाचा केबिल औपरेटर थे. पूरे इलाके में उन के ही केबिल की सर्विस थी. गौरव कंप्लेंट डील करता था. कंज्यूमर की शिकायत आने पर वही शिकायत करने वाले के घर जा कर केबिल वगैरह चेक कर के शिकायत का निपटारा करता था.

पिछले साल जनवरी की बात है. नीरू के टीवी पर कोई भी चैनल नहीं आ रहा था. उस ने गौरव कपूर को फोन कर के शिकायत की कि उस के यहां केबिल नहीं आ रहा है. कंप्लेंट मिलने पर गौरव नीरू यादव के घर गया. उस समय नीरू की सास मीरा यादव कहीं गई हुई थीं और बेटा कशिश स्कूल में था. घर पर नीरू अकेली थी. 34 साल की नीरू भले ही एक बच्चे की मां थी, लेकिन अभी भी वह जवान थी. पति के अकसर घर से बाहर रहने की वजह से उस की शारीरिक भूख पूरी नहीं हो पाती थी.

गौरव कपूर गोराचिट्टा औसत कदकाठी का बलिष्ठ युवक था. वह पढ़ालिखा भी था. उसे देख कर उस की कामना जागी तो उस ने गौरव को अपने मन में बसा लिया. गौरव ने जब केबिल ठीक कर दिया तो नीरू ने उस की खूब खातिर की और प्यार भरी बातें भी. चायपानी के बाद गौरव जब वहां से जाने लगा तो नीरू बोली, ‘‘अब कब आओगे?’’

‘‘जब भी आप के यहां केबिल न आने की शिकायत मिलेगी, चला आऊंगा. हम तो आप के नौकर हैं.’’

‘‘मैं तुम्हें नौकर नहीं समझती, यह तो तुम्हारा काम है. तुम मुझे यह बताओ कि क्या केबिल ठीक करने ही आ सकते हो या ऐसे भी? अरे, मैं भी पंजाबन कुड़ी हूं. राजा से लवमैरिज की तो यादव बन गई. कम से कम अपना समझ कर ही आ जाया करो.’’ नीरू ने कहा तो गौरव बोला, ‘‘ठीक है, आप जब भी बुलाएंगी, मैं चला आऊंगा.’’

नीरू गौरव से जिस तरह अपनेपन से बातें कर रही थी, उस से उस ने यही अनुमान लगाया कि शायद वह उस का बीमा करना चाहती है. 2 दिनों बाद ही नीरू ने गौरव को अपने यहां बुलाया और बीमा की बातों के बजाय और बहुत सारी बातें कीं. इस के बाद नीरू जब भी अकेली होती, उसे बुला कर प्यार भरी बातें करती. इस से गौरव समझ गया कि नीरू का इरादा कुछ और ही है. फिर क्या था, गौरव ने भी खुद को नीरू के रंग में रंगना शुरू कर दिया. यानी उस का झुकाव भी नीरू की तरफ हो गया.

इस के बाद दोनों के मिलने का सिलसिला शुरू हो गया. नीरू गौरव को कभी रेस्टोरेंट में ले जाती तो कभी उसे अपने घर बुला कर उस के साथ घंटों तक बातें करती. मीरा यादव को बहू की यह आदत अच्छी नहीं लगती थी. उस ने नीरू को कई बार समझाया भी, लेकिन उस ने गौरव से मिलना नहीं छोड़ा. इस पर मीरा यादव बहू पर बदचलनी का लांछन लगाने लगी. लेकिन नीरू ने सास की बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, वह गौरव से लगातार मिलती रही.

धीरेधीरे दोनों बेहद करीब आ गए. इस बीच मीरा ने बहू की बातें जेल में बंद अपने बेटे राजा यादव तक पहुंचा दी थीं. पत्नी की बदचलनी की बात सुन कर राजा को गुस्सा तो बहुत आया, लेकिन जेल में बंद होने की वजह से वह कड़वा घूंट पी कर रह गया.

कुछ दिनों बाद जब राजा जेल से जमानत पर बाहर आया तो सब से पहले उस ने पत्नी की खबर ली. फिर वह गौरव की तलाश में लग गया. अक्तूबर, 2013 में एक दिन लाजपत नगर में उसे गौरव दिख गया तो राजा ने उसे जम कर पीटा और गोली मार दी. गोली लगने से गौरव बुरी तरह घायल हो गया. उसे उस के घर वालों ने अस्पताल में भरती कराया. गौरव के बयान के आधार पर थाना नजीराबाद में राजा यादव के खिलाफ जान से मारने की कोशिश की रिपोर्ट दर्ज हुई. पुलिस ने राजा को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया. अस्पताल में कुछ दिनों इलाज कराने के बाद गौरव कपूर ठीक हो कर घर आ गया.

पत्नी के लिए पिता के खून से रंगे हाथ – भाग 3

दूसरी ओर शीलेश भी कम परेशान नहीं था. गांव के कुछ लोगों ने भी उस से कहा था कि जवान बीवी को इस तरह घर में छोड़ना ठीक नहीं है. उन लोगों के कहने का मतलब कुछ और था, जबकि शीलेश ने इस का मतलब वही लगाया, जो ममता ने उस के दिमाग में भरा था.

रुकुमपाल उस से बहुत कुछ कहना चाहता था, जबकि वह उस की कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं था. तनाव हद से ज्यादा हो गया तो शीलेश ने ठेके पर जा कर जम कर शराब पी. गिरतेपड़ते किसी तरह घर पहुंचा तो रुकुमपाल ने उसे संभालने की कोशिश की. तब वह बाप को धक्का दे कर गालियां देने लगा.

ममता ने सुना तो बहुत खुश हुई. वह यही तो चाहती थी. वह बापबेटे के बीच दीवार खड़ी करने में कामयाब हो गई थी. शीलेश चारपाई पर लुढ़का तो सुबह ही उठा. उठते ही उस ने कहा, ‘‘ममता, तुम अपना सारा सामान समेटो. हम दिल्ली चलेंगे.’’

ममता घबरा गई. उस का फेंका पासा उलटा पड़ रहा था. क्योंकि इस हालत में अगर वह दिल्ली चली गई तो फिर लौट नहीं सकती थी. हरीश दिल्ली जा नहीं सकता. तब वह उस से कैसे मिल सकती थी. अब वह इस सोच में डूब गई कि ऐसा क्या करे कि उसे दिल्ली भी न जाना पड़े और बुड्ढे से भी पिंड छूट जाए.

काफी सोचविचार कर उस ने तय किया कि वह दिल्ली जाने के बजाय इस कांटे को ही जड़ से निकलवा फेंकेगी. उस ने कहा, ‘‘तुम्हें पता नहीं, मैं पेट से हूं. इस हालत में मैं दिल्ली नहीं जा सकती. अब तुम्हें सोचना है कि इस हालात में तुम मुझे अपने बाप से कैसे बचा सकते हो? कोई दूसरा होता तो वह ऐसे आदमी को खत्म कर देता, जो उस की पत्नी पर बुरी नजर रखता हो.’’

ममता ने यह चाल बहुत सोचसमझ कर चली थी. उस का सोचना था कि शीलेश अगर अपने बाप को मार देता है तो बाप की हत्या के आरोप में पति जेल चला जाएगा. उस के बाद वह पूरी तरह से आजाद हो जाएगी. फिर वह आराम से हरीश से मिल सकेगी.

इस के बाद अपनी योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए ममता ने त्रियाचरित्र फैला कर शीलेश के मन में बाप के प्रति ऐसा जहर भरा कि वह बाप का ऐसा दुश्मन बना कि उस की जान लेने को तैयार हो गया. उसे लगा कि ऐसे बाप को जीने का बिलकुल हक नहीं है, जो अपने बेटे की ही पत्नी पर गंदी नीयत रखता हो.

रुकुमपाल यह तो जान गया था कि पत्नी के कहने में आ कर बेटा उस के खिलाफ हो गया है. लेकिन उसे यह विश्वास नहीं था कि बेटा उस की जान भी ले सकता है. उस का सोचना था कि जब शीलेश को सच्चाई का पता चल जाएगा तो अपने आप सब ठीक हो जाएगा.

19 मार्च की शाम को शीलेश ने रुकुमपाल से खेतों से भूसा लाने को कहा. रुकुमपाल भूसा लाने के लिए खेतों की ओर चला तो शीलेश भी फावड़ा ले कर उस के पीछेपीछे वहां जा पहुंचा. उस के साथ ममता भी थी.

रुकुमपाल झुक कर भूसा निकालने लगा तो शीलेश ने पीछे से उस पर फावड़े से वार कर दिया. रुकुमपाल चीख कर गिर पड़ा. उस की चीख सुन कर आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग उस की ओर दौड़े. वे रुकुमपाल के पास तक पहुंच पाते इस से पहले शीलेश ने बाप पर फावड़े से कई वार किए और भाग निकला. लेकिन गांव वालों ने उसे ही नहीं, ममता को भी उस के साथ भागते हुए देख लिया था.

गांव वालों ने घटना की सूचना कोतवाली देहात पुलिस को दी. सूचना पा कर कोतवाली प्रभारी पदम सिंह पुलिस बल के साथ गांव नगला समल पहुंच में रुकुमपाल के खेत पर गए. पहुंचते ही उन्होंने लाश को कब्जे में ले लिया. गांव वालों ने पूछताछ में बताया कि जब वे रुकुमपाल की चीख सुन कर उस की ओर दौड़े थे तो उन्हें मृतक का बेटा शीलेश और बहू ममता भागते ही दिखाई दिए थे.

पुलिस को लगा कि उन्हीं लोगों ने यह काम किया है, तभी भाग रहे थे अन्यथा बाप की चीख सुन कर वह बचाने दौड़ेगा, भागेगा नहीं. कोतवाली प्रभारी ने 2 सिपाहियों को घटनास्थल पर छोड़ा और खुद बाकी सिपाहियों को ले कर रुकुमपाल के घर जा पहुंचे.

शीलेश भागने की तैयारी कर रहा था. ममता भी उस के साथ थी. पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया. पुलिस ने मृतक की बेटी आशा को घटना की सूचना दी तो वह दादी रामरखी को साथ ले कर आ गई. रुकुमपाल की लाश देख कर रामरखी बेहोश हो गई तो आशा भी फूटफूट कर रोने लगी.

रामरखी को होश में लाया गया तो वह रोते हुए कहने लगी, ‘‘ममता ने ही अपने यार से मिलने के लिए मेरे बेटे को मरवाया है, क्योंकि मेरा बेटा उसे उस से मिलने से रोकता था.’’

जब आशा को पता चला कि शीलेश ने ही उस के पिता की हत्या की है तो उस का दुख और बढ़ गया. पुलिस ने घटनास्थल की काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. इस के बाद शीलेश और ममता को ले कर थाने आ गई.

थाने में शीलेश और ममता ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. इस के बाद ममता ने ससुर की हत्या करवाने के पीछे की अपने अवैध संबंधों की जो कहानी सुनाई, उसे सुन कर शीलेश ने अपना सिर पीट लिया.

लेकिन अब क्या हो सकता था. पत्नी के कहने में आ कर उस ने अपने बच्चों को तो अनाथ किया ही, उस बाप के खून से हाथ रंग लिए, जिस ने उसे बाप का ही नहीं, मां का भी प्यार दिया था. उस ने दादी के बुढ़ापे का सहारा छीनने के साथ भरापूरा परिवार बरबाद कर दिया.

पूछताछ के बाद पुलिस ने शीलेश और ममता को अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. रुकुमपाल का भी कैसा दुर्भाग्य था कि जिस बेटे से उस ने उम्मीद लगा रखी थी कि मरने पर उस का अंतिम संस्कार करेगा. उसी ने उसे मौत के घाट उतार दिया.

पति ने किया अर्चना की जिंदगी का सूर्यास्त – भाग 3

उसी दौरान उन्होंने सरिता को देर रात प्रमोद से मोबाइल फोन पर बातें करते पकड़ लिया तो उसे लगा कि अब वह बेटी को प्रमोद से अलग नहीं कर पाएगा, क्योंकि वह सरिता के साथ मारपीट, डांटफटकार कर के हार चुका था. सरिता प्रमोद को छोड़ने को तैयार नहीं थी. हद तो तब हो गई, जब सरिता ने मां से साफ कह दिया, ‘‘मां, आखिर प्रमोद में बुराई ही क्या है, हम दोनों एकदूसरे से प्यार करते हैं. आप लोगों को मेरी शादी कहीं न कहीं तो करनी ही है, उसी से कर दीजिए.’’

बेटी की बात सुन कर मां हैरान रह गई थी. बेटी के इसी इरादे से जीवनराम चिंतित था. उस ने देखा कि अब वह खुद कुछ नहीं कर सकता तो उस ने पंचायत बुलाई. पंचायत ने सलाह दी कि इस झंझट से बचने का एक ही तरीका है कि दोनों ही अपनेअपने बच्चों की शादी जल्द से जल्द कर दें. पंचायत ने प्रमोद से साफसाफ कह दिया था कि अगर उस ने कोई उल्टीसीधी हरकत की तो उसे गांव से निकाल दिया जाएगए.

प्रमोद की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे. सरिता का स्कूल जाना बंद करा दिया गया था. उसे घर से बिलकुल नहीं निकलने दिया जा रहा था. उन्हीं दिनों डालचंद अपनी बेटी अर्चना की शादी के लिए प्रमोद के घर पहुंचे तो प्रमोद के बाप छदामीलाल ने तुरंत यह रिश्ता स्वीकार कर लिया. इस के बाद 14 जून, 2013 को अर्चना और प्रमोद की शादी हो गई.

अर्चना ससुराल आई तो सभी ने उसे हाथोंहाथ लिया. इस से अर्चना बहुत खुश हुई. लेकिन पहली रात को प्रमोद ने उस के साथ जो व्यवहार किया, वह उसे कुछ अजीब सा लगा था. एक पति पहली रात जिस तरह पत्नी से प्यार करता है, वैसा प्रमोद के प्यार में नजर नहीं आया था.

अर्चना सप्ताह भर ससुराल में रही. इस बीच प्रमोद के बातव्यवहार से अर्चना ने अंदाजा लगा लिया कि पति उसे पसंद नहीं करता. लेकिन मायके आने पर यह बात उस ने किसी से नहीं कही क्योंकि अगर वह यह बात मायके में किसी से बताती तो वे काफी परेशान होते.

कुछ दिनों बाद अर्चना फिर ससुराल आ गई. पति का व्यवहार संतोषजनक नहीं था, इसलिए अर्चना परेशान रहने लगी थी. उस ने यह भी देखा कि प्रमोद दिनभर मटरगश्ती करता रहता है. घर का एक काम नहीं करता. पति की बेजा हरकतों से उस से रहा नहीं गया तो एक दिन उस ने कहा, ‘‘तुम दिनभर इधरउधर घूमा करते हो, पापा के साथ खेतों पर काम क्यों नहीं करते?’’

‘‘मुझ से खेती के काम नहीं होते.’’ प्रमोद ने जवाब दिया.

‘‘तो फिर कोई दूसरा काम करो. इस तरह आवारा की तरह घूमना ठीक नहीं है.’’ अर्चना ने कहा.

पत्नी की इस सलाह पर प्रमोद को गुस्सा आ गया. उस ने उसे डांट कर कहा, ‘‘तू अपने काम से काम रख. मैं क्या करूं, यह मुझे तू बताएगी?’’

‘‘तुम्हारी स्थिति से तो यही लगता है कि तुम कोई कामधंधा करने वाले नहीं. पापा से तो तुम्हारे घर वालों ने बताया था कि तुम दिल्ली में नौकरी करते हो. शादी के बाद तुम मुझे दिल्ली ले जाओगे. लेकिन मैं देख रही हूं कि आवारागर्दी करने के अलावा तुम्हारे पास कोई काम नहीं है.’’ अर्चना ने गुस्से में बोली.

प्रमोद ने हंसते हुए कहा, ‘‘तुम ने अपनी शक्ल देखी है. तुम जैसी गंवार लड़की दिल्ली में रहेगी तो यहां गांव में चूल्हाचौका कौन करेगा?’’

‘‘अगर मैं गंवार थी तो मुझ से शादी ही क्यों की.’’ अर्चना ने कहा.

‘‘बहुत हो गया, अब चुप रह. मैं फालतू की बकवास सुनना नहीं चाहता.’’

अर्चना को लगा कि कुछ ऐसा है जिस की जानकारी उसे नहीं है. लेकिन जल्दी ही उसे उस की भी जानकारी हो गई. उस ने प्रमोद के पर्स में सरिता के साथ उस की फोटो देख ली. उस ने तुरंत वह फोटो प्रमोद के सामने रख कर पूछा, ‘‘तुम्हारे साथ यह किस की फोटो है?’’

जवाब देने के बजाय प्रमोद उस के गाल पर जोरदार तमाचा मार कर बोला, ‘‘तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरा पर्स छूने की?’’

अर्चना तड़प कर बोली, ‘‘आज तो मार दिया, लेकिन फिर कभी ऐसी गलती मत करना, वरना जिंदगीभर पछताओगे. सब के सामने मैं विवाह कर के आई हूं. इसलिए तुम पर मेरा पूरा हक है. मेरे रहते यह सब नहीं चलेगा.’’

प्रमोद चुपचाप घर से निकल गया. अर्चना जान गई कि उस के पति के जीवन में उस के अलावा भी कोई है. यह उस के लिए चिंता की बात थी. अभी उस के हाथ की मेहंदी भी नहीं छूटी थी कि उसे पता चल गया कि उसे बचाखुचा प्यार मिल रहा है.

अगर यह संबंध इसी तरह चलते रहे तो अर्चना का जीवन नरक हो जाता, इसलिए रात में प्रमोद आया तो उस ने साफसाफ कह दिया, ‘‘शादी से पहले तुम्हारी जिंदगी में जो भी रही हो, मुझ से कोई मतलब नहीं है. लेकिन शादी के बाद यह सब नहीं चलेगा. मैं तुम्हारे प्रति समर्पित हूं तो तुम्हें भी मेरे प्रति समर्पित होना पड़ेगा.’’

‘‘अगर मैं समर्पित न हो सका तो…?’’

…तो इस का भी इलाज है, मुझे कानून का सहारा लेना होगा.’’ अर्चना ने कहा.

प्रमोद सन्न रह गया. जिसे वह सीधीसादी गंवार समझता था, वह तो उस से भी तेज निकली. अर्चना ने उसी समय अपने बाप को फोन कर के कह दिया कि वह मायके आना चाहती है.

प्रमोद को लगा कि अर्चना से उस की शादी गले की हड्डी बन रही है. उस ने घर वालों के दबाव में यह शादी की थी. उस ने सोचा था कि पत्नी को जैसे चाहेगा, रखेगा, लेकिन यह तो उस के लिए मुसीबत बन रही है. अब वह इस मुसीबत से छुटकारा पाने के बारे में सोचने लगा. जब उस की समझ में कुछ नहीं आया तो वह अपने दोस्त मुकेश से मिला और उस से पूरी बात बता कर कहा, ‘‘यार! मैं किसी भी तरह इस अर्चना नाम की मुसीबत से छुटकारा चाहता हूं.’’

‘‘क्या मतलब?’’ मुकेश ने पूछा.

‘‘मतलब यह कि जीतेजी तो उस से छुटकारा मिल नहीं सकता. ठिकाने लगाने के बाद ही शुकून मिल सकता है. और इस काम में तुम्हें मेरा साथ देना होगा.’’ प्रमोद ने कहा.

इस के बाद दोनों कई दिनों तक योजनाएं बनाते रहे. आखिर में जब योजना फाइनल हो गई तो दोनों मौके की तलाश करने लगे.

अर्चना को घर में तो मारा नहीं जा सकता था, क्योंकि घर में प्रमोद उसे मारता तो सीधे आरोप उसी पर लगता. यानी उस का फंसना तय था. इसलिए वह उसे घर के बाहर ही मारना चहाता था. उस ने ससुर को फोन किया कि पत्नी को विदा कराने आ रहा है.

अर्चना इस बार पिता के साथ मायके पहुंची थी तो उस ने मां से प्रमोद के गांव की किसी लड़की से संबंध होने की बात बता दी थी. बेटी की बात सुन कर शारदा स्तब्ध रह गई थी. कुछ महीने पहले ही तो उस ने बेटी की शादी की थी. अभी तो बेटी की पूरी जिंदगी पड़ी थी. उस ने बेटी को समझाया कि वह पति को संभाले. अब वह इस बात का जिक्र किसी और से न करे, क्योंकि अगर उस के पिता को इस बारे में पता चल गया तो मामला काफी संगीन हो जाएगा.

प्रमोद ससुराल पहुंचा तो अर्चना को उस के साथ जाना ही था. उसी दिन प्रमोद ने दोपहर के बाद विदाई के लिए कहा तो डालचंद ने कहा, ‘‘यह समय विदाई करने का नहीं है. लालपुर पहुंचतेपहुंचते रात हो जाएगी. इसलिए तुम कल चले जाना.’’

‘‘नहीं पापा, जाना बहुत जरूरी है. साधन से ही तो जाना है. आराम से पहुंच जाएंगे.’’

डालचंद को क्या पता था कि उस के मन में क्या है. उन्होंने अर्चना को विदा कर दिया. प्रमोद खुश था कि सब कुछ उस के मन मुताबिक हो रहा है. अर्चना भी पति के मन की बात से बेखबर थी. वह प्रमोद के साथ गजरौला कलां पहुंची तो वहां मुकेश मिल गया. दोनों अर्चना को ले कर लालपुर की ओर चल पड़े.

अंधेरा हो जाने की वजह से लालपुर जाने वाली सड़क सुनसान हो गई थी. रास्ते में खेतों के बीच प्रमोद ने अर्चना को दबोच लिया तो वह चीखी, ‘‘यह क्या कर रहे हो? छोड़ो मुझे.’’

लेकिन प्रमोद ने उसे छोड़ने के लिए थोड़े ही पकड़ा था. उस ने उसे जमीन पर गिरा दिया तो मुकेश ने फुरती से उस के दोनों हाथ पकड़ लिए. इस के बाद प्रमोद ने उस का गला दबा कर उसे मार डाला. इस तरह अर्चना का खेल खत्म कर के प्रमोद ने रास्ते का कांटा निकाल दिया था. इस के बाद प्रमोद ने जल्दीजल्दी अर्चना के गहने उतारे और फिर लाश को उठा कर गन्ने के खेत में फेंक दिया.

फिर योजना के मुताबिक प्रमोद थाना गजरौला कलां पहुंचा, जहां उस ने अपनी पत्नी के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करा दी. लेकिन उस के हावभाव से ही थानाप्रभारी भुवनेश गौतम ने ताड़ लिया कि यह झूठ बोल रहा है. इस के बाद तो उन्होंने उसे थाने ला कर सच्चाई उगलवा ही ली.

पूछताछ के बाद थानाप्रभारी ने प्रमोद और मुकेश को अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. बाद में डालचंद ने कहा कि उन की बेटी की हत्या की साजिश में प्रमोद का बाप छदामीलाल भी शामिल था तो पुलिस ने उसे भी इस मामले में अभियुक्त बना कर जेल भेज दिया.

जांच अधिकारी ने सीओ दिनेश शर्मा की देखभाल में इस मामले की चार्जशीट तैयार कर के अदालत में पेश कर दी गई है. अब देखना यह है कि इस मामले में दोषियों को सजा क्या होती है.  द्य

— कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित