Domestic Dispute: गलती गुरतेज की – क्यों बना बीवी का हत्यारा

Domestic Dispute: गुरतेज सिंह के 2 और भाई थे. ये सभी बठिंडा के थाना संगत के गांव मुहाला के आसपास रहते थे. गुरतेज भाइयों से अलग रहता था. उस के पास पैसा भी था और रुतबा भी. शादी के 2 सालों बाद ही वह एक बेटे का बाप बन गया था.

वह सुबह खेती के काम के लिए निकल जाता तो शाम को ही लौटता था. पतिपत्नी एकदूसरे से बहुत खुश थे. लेकिन एक दिन गुरतेज के एक दोस्त ने उसे जो बताया, उस से इस घर की खुशियों में ग्रहण लगना शुरू हो गया. गुरतेज के उस खास दोस्त ने बताया था कि उस ने जसप्रीत भाभी को एक लड़के के साथ शहर के बाजार में घूमते देखा था. लेकिन गुरतेज को उस की बातों पर विश्वास ही नहीं हुआ.

लेकिन यही बात कुछ दिनों बाद किसी दूसरे दोस्त ने बताई तो गुरतेज सोचने को मजबूर हो गया कि दोनों दोस्तों को एक जैसा धोखा नहीं हो सकता.

इसलिए शाम को घर लौट कर उस ने जसप्रीत से इस बारे में पूछा तो उस ने खिलखिला कर हंसते हुए कहा, ‘‘लगता है, आप के दोस्त भांग पी कर घूमते हैं, इसीलिए आप से बहकीबहकी बातें करते हैं. आप खुद ही सोचिए, मैं आप के बगैर शहर क्या करने जाऊंगी?’’

जसप्रीत के इस जवाब से गुरतेज लाजवाब हो गया. लेकिन यह धोखा नहीं था. इस के 10 दिनों बाद की बात है. यही बात एक रिश्तेदार ने गुरतेज से कही तो घर में झगड़ा होना स्वाभाविक था, जबकि जसप्रीत का अब भी वही कहना था, जो उस ने पहले कहा था.

जसप्रीत की बातों से गुरतेज को लगता कि वही गलत है. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि कौन सच है और कौन झूठा? लेकिन एक बात तय थी कि कोई न कोई तो झूठ बोल रहा था. काफी सोचनेविचारने के बाद भी गुरतेज को इस समस्या का कोई हल नजर नहीं आया. इसी तरह ऊहापोह में कुछ दिन और बीत गए, इस बार उस के छोटे भाई जगतार ने एक दिन उस से कहा, ‘‘भाई, आप होश में आ जाइए, कहीं ऐसा न हो कि पानी सिर के ऊपर से गुजर जाए और आप को इस की खबर तक न लगे.’’

इस बार भाई जगतार ने जसप्रीत के बारे में खबर दी तो उसे पूरा विश्वास हो गया कि सभी सच थे, झूठ जसप्रीत ही बोल रही थी. इसलिए उस दिन गुरतेज ने सख्ती से काम लिया. उस ने जसप्रीत को खूब डांटाफटकारा.

इस के बाद पतिपत्नी दोनों ही सतर्क हो गए. जसप्रीत जहां घर से बाहर निकलने में सावधानी बरतने लगी, वहीं गुरतेज गुपचुप तरीके से उस पर नजर रखने के साथ पड़ोसियों से उस के बारे में पूछता रहता था. इस से गुरतेज को पता चल गया कि उस के खेतों पर जाने के बाद कोई लड़का उस के घर आता है. उस के आने के बाद जसप्रीत बेटे को किसी पड़ोसी के घर छोड़ कर उस लड़के के साथ चली जाती है.

वह लड़का कौन था, यह कोई नहीं जानता था. इस से साफ हो गया कि जसप्रीत के किसी लड़के से संबंध हैं. इस बारे में गुरतेज ने जसप्रीत से कुछ नहीं पूछा. दरअसल, वह उसे रंगेहाथों पकड़ना चाहता था, इसलिए एक दिन घर से वह खेतों पर जाने की बात कह कर गांव में ही छिप गया.

करीब एक घंटे बाद एक टाटा 407 टैंपो आ कर रुका. उस में से एक लड़का उतर कर गांव की ओर चला गया. गुरतेज ने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, क्योंकि इस तरह लोगों के रिश्तेदार अपनी गाडि़यों से आते रहते थे. लेकिन जब कुछ देर बाद टैंपो स्टार्ट होने लगा तो उस ने झांक कर देखा. लड़के के साथ टैंपो में जसप्रीत बैठी थी.

गुरतेज मोटरसाइकिल से टैंपो के पीछेपीछे चल पड़ा, लेकिन वह टैंपो का पीछा नहीं कर सका. कुछ दूर जा कर टैंपो उस की आंखों से ओझल हो गया. कुछ देर वह सड़क पर खड़ा सोचता रहा, उस के बाद घर लौट आया. घर के अंदर कदम रखते ही उस का दिमाग चकरा गया, क्योंकि जसप्रीत घर में बैठी बेटे को खाना खिला रही थी. उसे देख कर गुरतेज की बोलती बंद हो गई.

उस ने सोचा था कि जसप्रीत यार से मिल कर लौटेगी तो वह पूछेगा कि कहां से आ रही है? पर उस ने अपनी आंखों से जो देखा, वह भी झूठा हो गया था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या कहे, उस ने उसे खुद टैंपो में बैठ कर जाते देखा था. यह धोखा कैसे हो गया? गुरतेज के पास अब कहने को कुछ नहीं बचा था, इसलिए वह खामोश रह गया.

लेकिन उस ने जसप्रीत का पीछा करना नहीं छोड़ा. आखिर एक दिन उस ने जसप्रीत को बाजार में एक लड़के के साथ घूमते देख लिया. दोनों उस से कुछ दूरी पर थे. वहां भीड़ थी. गुरतेज के वहां पहुंचने तक लड़का तो गायब हो गया, पर जसप्रीत खड़ी रह गई. अब जसप्रीत के पास अपनी सफाई में कहने को कुछ नहीं था.

गुरतेज ने घर आ कर जसप्रीत की जम कर पिटाई की, लेकिन उस ने प्रेमी का नाम बताना तो दूर, यह भी नहीं माना कि उस के साथ बाजार में कोई था. लेकिन अब गुरतेज को सच्चाई का पता चल गया था. इसलिए पतिपत्नी में क्लेश रहने लगा. घर में रोजाना लड़ाईझगड़ा और मारपीट आम बात हो गई.

आखिर एक दिन गुरतेज को कुछ बताए बगैर जसप्रीत बेटे को छोड़ कर घर से भाग गई. लेकिन वह अपने किसी प्रेमी के साथ नहीं भागी थी, अपने पिता के घर गई थी. हालांकि जसप्रीत के पिता ने उसे काफी समझाया, पर उस ने उन की एक नहीं सुनी. पिता के घर कुछ दिन रहने के बाद वह अपनी बड़ी बहन के पास बाड़ी गांव चली गई.

दरअसल, जसप्रीत बहन के यहां कुछ दिन रह कर अपने प्रेमी के साथ भाग जाना चाहती थी. लेकिन उस की बहन को न जाने कैसे इस बात का पता चल गया. उस ने यह बात अपने पति को भी बता दी. उन लोगों ने सोचा कि अगर जसप्रीत उन के घर से भागती है तो उन की बदनामी तो होगी ही, साथ ही लोग यही कहेंगे कि जसप्रीत को उन्हीं लोगों ने भगाया है.

यही सोच कर उन्होंने गुरतेज को अपने गांव बुलाया और पतिपत्नी में समझौता करा दिया. गुरतेज जसप्रीत को ले कर गांव आ गया. जसप्रीत ने भी पति से माफी मांगी और वादा किया कि अब वह कभी वैसी गलती नहीं करेगी. पतिपत्नी फिर पहले की ही तरह रहने लगे. जिंदगी की गाड़ी एक बार फिर से पटरी पर दौड़ने लगी.

27 जुलाई, 2017 की रात आम दिनों की तरह गुरतेज और जसप्रीत ने साथसाथ रात का खाना खाया. बेटा पहले ही खाना खा कर सो गया था. खाना खाते ही गुरतेज को बहुत जोर से नींद आ गई तो वह जा कर बैड पर लेट गया. वह पिछले एक सप्ताह से देख रहा था कि खाना खाते ही उसे नींद आ जाती है. लेकिन उस ने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया.

बहरहाल, खाना खा कर वह सो गया. सुबह 4 बजे के करीब उस की आंख खुली तो उसे लगा कि उस का सिर भारीभारी है. वह बिस्तर पर चुपचाप पड़ा रहा. तभी उसे किसी के हंसने और बातें करने की आवाजें सुनाई दीं. उस ने ध्यान लगा कर सुना तो उन की आवाजों के साथ चूडि़यों के खनकने की भी आवाजें आ रही थीं.

अब उस से रहा नहीं गया. वह बैड से उठा. कमरे से बाहर आ कर उस ने जो देखा, उस से उस के पैरों तले से जमीन खिसक गई. गुस्सा और उत्तेजना से उस का पूरा शरीर कांपने लगा. सामने आंगन में बिछी चारपाई पर जसप्रीत एक लड़के के साथ आपत्तिजनक स्थिति में थी. उस दृश्य ने उसे आकाश की ऊंचाइयों से उठा कर पाताल में झोंक दिया था. वही क्या, उस की जगह कोई भी होता, उस का यही हाल होता.

गुरतेज कमरे में गया और दीवार पर टंगी लाइसेंसी बंदूक उतारी और आंगन में पड़ी चारपाई के पास पहुंच कर उस ने बिना कुछ कहे एक गोली जसप्रीत की छाती में तो दूसरी गोली उस के यार को मार कर दोनों को मौत के घाट उतार दिया.

पत्नी और उस के प्रेमी को मौत के घाट उतार कर गुरतेज ने यह बात दोनों भाइयों, गुरप्रीत सिंह और जगतार सिंह को बता दी. इस के बाद इधरउधर भागने के बजाय उस ने थाना पुलिस को फोन कर के कहा कि उस ने अपनी पत्नी और उस के प्रेमी को गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया है. पुलिस आ कर उन की लाशें बरामद कर के उसे गिरफ्तार कर ले. वह घर में बैठा पुलिस का इंतजार कर रहा है.

इस के बाद गुरतेज ने अपने छोटे भाई जगतार से नाश्ता बनवाने तथा बेटे को संभालने को कहा. इस के बाद नहाधो कर घर के आंगन में कुरसी डाल कर बैठ कर पुलिस का इंतजार करने लगा.

सचना मिलते ही थाना संगत के थानाप्रभारी इंसपेक्टर परमजीत सिंह एसआई सुरजीत सिंह, हवलदार जसविंदर सिंह, सिपाही राकेश कुमार, तारा सिंह, तेज सिंह, महिला सिपाही चरनजीत कौर और कर्मजीत कौर को साथ ले कर गांव मलीहा पहुंच गए.

गुरतेज आंगन में कुरसी डाले बैठा था. बाहर गांव वालों की भीड़ लगी थी. वहीं चारपाई पर जसप्रीत और उस के प्रेमी की रक्तरंजित निर्वस्त्र लाशें पड़ी थीं. परमजीत सिंह ने लाशों पर चादर डलवा कर सारी काररवाई कर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भिजवा दिया.

गुरतेज सिंह उर्फ तेजा को हिरासत में ले कर थाने आ गए. उस के बयान के आधार पर अपराध संख्या 174/2017 पर आईपीसी की धारा 302 और 27 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया. उसी दिन उसे जिला मजिस्ट्रैट की अदालत में पेश कर दिया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

इस के बाद परमजीत सिंह ने जसप्रीत के साथ मारे गए उस के प्रेमी के बारे में पता किया तो पता चला कि उस का नाम गुरप्रीत सिंह था. वह गांव मिडू खेड़ा के रहने वाले दिलवीर सिंह का बेटा था. वह टैंपो चलाता था. करीब 2 सालों से जसप्रीत कौर से उस के अवैध संबंध थे.

दोनों शादी करना चाहते थे, वे शादी करते, उस के पहले ही गुरतेज ने उन्हें खत्म कर दिया. लेकिन यहां गलती गुरतेज ने भी की. बेशर्म पत्नी और उस के प्रेमी को मार कर उन्हें क्या मिला, वह तो हत्या के आरोप में जेल चले गए. शायद उन्हें सजा भी हो जाए. ऐसे में उन का घर तो बरबाद हुआ ही, बेटा भी अनाथ हो गया. Domestic Dispute

   —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

True Crime Story: जब माया की सास बनीं फांस

True Crime Story: 8 जनवरी, 2020 की बात है. पन्ना, अजयगढ़ में सर्दी का भारी प्रकोप था. पवई थाना क्षेत्र के बधाई गांव का रहने वाला संजय चौधरी खेतों की रखवाली के लिए रात को खेतों पर ही सोता था, उस के पिता मलुवा चौधरी भी खेत पर ही सोते थे. घर खेत के करीब ही थे.8 जनवरी की रात को दोनों बापबेटे खेत पर सोने गए थे, जबकि घर पर संजय की पत्नी मायाबाई और मां कसुम थी. सुबह को संजय की पत्नी मायाबाई ने उसे फोन पर बताया कि थोड़ी देर पहले वह सो कर उठी तो उस के कमरे का दरवाजा बाहर से बंद मिला. मायाबाई ने उसे आगे बताया कि फोन लगाने से पहले उस ने सासू मां को कई आवाजें दी थीं. लेकिन जब उन की तरफ से कोई उत्तर नहीं मिला, तब उस ने उन्हें फोन लगाया.

‘‘कहीं ऐसा तो नहीं कि अम्मा दिशामैदान चली गई हों, तुम इंतजार करो. हो सकता है, थोड़ी देर में आ जाएं.’’ संजय बोला.‘‘मैं काफी देर से उन का इंतजार कर रही हूं, आज तक वह बाहर से दरवाजा बंद कर के कभी नहीं गईं. आप जल्द दरवाजा खोल दो.’’ मायाबाई ने पति से कहा.पत्नी की बात सुन कर संजय घर पहुंच गया. उस ने कमरे का दरवाजा खोला तो माया बहुत घबराई हुई थी. संजय ने उस से पूछा तो उस ने कहा कि पता नहीं किस ने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया था.इस के बाद मियांबीवी दोनों मां के कमरे में गए तो वह कमरे में नहीं थी. कुछ देर तक दोनों ने उस के लौटने का इंतजार किया. काफी देर बाद भी जब वह नहीं लौटी तो संजय ने खेत पर जा कर पिता को यह जानकारी दे दी. मायाबाई भी खेत पर पहुंच गई थी.

पत्नी के गायब होने की बात सुन कर मलुवा चौधरी भी परेशान हो गए. उन के एक खेत में अरहर की फसल खड़ी थी. मायाबाई पति के साथ जब उसी खेत के किनारे से जा रही थी, तभी संजय की नजर अरहर के खेत में पड़ी एक लाश पर गई. वह लाश के नजदीक पहुंचा तो उस की चीख निकल गई. लाश उस की मां कुसुम की थी.उस की गरदन के आसपास कई जगह कुल्हाड़ी के गहरे घाव थे. खून से सनी कुल्हाड़ी भी वहीं पड़ी थी. इस से लग रहा था कि किसी ने उसी कुल्हाड़ी से उस की हत्या की है.

संजय की चीखपुकार पर पास के खेतों में सो रहे किसान कन्हैयालाल और मांगीलाल भी आ गए. कुछ देर बाद संजय ने यह खबर डायल 100 को दे दी. कुछ देर बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई. डायल-100 के एक पुलिसकर्मी ने मामले की जानकारी पवई थाने के टीआई एस.पी. शुक्ला को दे दी.महिला की हत्या की सूचना मिलते ही थानाप्रभारी सिपाही संजय को साथ ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए. टीआई ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. मृतका कुसुम के शव से बहा खून अभी भी सूखा नहीं था. इस से टीआई समझ गए कि घटना सुबह हुई है. उन्होंने सोचा कि जब कुसुम दिशामैदान के लिए खेत में आई होगी, तभी किसी ने उस की हत्या कर दी. लेकिन शव के पास लोटा वगैरह नहीं था. सवाल यह उठा कि अगर कुसुम शौच के लिए नहीं आई तो खेत पर सुबहसुबह क्यों आई.

हत्या की खबर पा कर एसपी मयंक अवस्थी, डीएसपी (पवई) डी.एस. परिहार भी मौके पर पहुंच गए. उन्होंने भी मौकामुआयना किया. टीआई द्वारा पूछताछ करने पर कुसुम के पति मलुवा और बेटे संजय ने किसी से दुश्मनी होने की बात से इनकार कर दिया. संजय की पत्नी मायाबाई ने भी सारी जानकारी पुलिस को दे दी.इस के बाद पुलिस ने उन के घर का मुआयना किया. पूछताछ करने पर टीआई को कुसुम के किसी परिचित पर ही हत्या का शक था, क्योंकि जिस कमरे में कुसुम सो रही थी, वहां किसी संघर्ष के कोई निशान नहीं मिले थे. इस से लग रहा था कि कुसुम अपनी मरजी से उठ कर ही बाहर आई थी.

मायाबाई के कमरे का दरवाजा बाहर से बंद किए जाने को ले कर टीआई का मानना था कि संभव है, कुसुम के गांव के किसी आदमी से अवैध संबंध हों. उस का आशिक रात में कुसुम से मिलने घर आया होगा. कहीं बहू अपने कमरे से निकल कर सास के कमरे में न आ जाए, इसलिए उस ने ही मायाबाई के कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया होगा. इस के बाद किसी बात को ले कर कुसुम का उस के प्रेमी से विवाद हुआ होगा. इसी के चलते उस व्यक्ति ने कुसुम की हत्या कर दी होगी. लेकिन 56 साल की कुसुम का प्रेम पुलिस के गले नहीं उतर रहा था. फिर भी टीआई ने पुष्टि के लिए गांव में कुसुम के चालचलन की जानकारी जुटानी शुरू की.

इस जांच में कुसुम के बारे में तो नहीं लेकिन उस की बहू मायाबाई के बारे में यह जानकारी निकल कर आई कि गांव में सब से ज्यादा सुंदर मानी जाने वाली मायाबाई का चालचलन संदिग्ध था. आसपास के लोगों ने यह भी बताया कि मायाबाई का चक्कर पड़ोस में रहने वाले एक 19 वर्षीय युवक हलके चौधरी के साथ था.
पुलिस पहले भी संजय की पत्नी मायाबाई से पूछताछ कर चुकी थी, लेकिन उस के बयानों में पुलिस को कुछ भी संदिग्ध नहीं लगा था. सिवाय इस के कि बयान देते समय मायाबाई एक हाथ लंबा घूंघट निकाले रहती थी. इस से टीआई को लगा कि हो सकता है मायाबाई अपने चेहरे के भाव छिपाने के लिए घूंघट का सहारा लेती हो, इसलिए उस के बारे में नई जानकारी मिलने के बाद टीआई शुक्ला ने एक महिला पुलिसकर्मी को मायाबाई से पूछताछ करने को कहा.

महिला पुलिसकर्मी ने उस का घूंघट खुलवा कर उस से घटना वाली रात के बारे में कई सवाल पूछते हुए अचानक से पूछा, ‘‘अच्छा, यह बता कि हलके तेरे पास कितने बजे आया था?’’हलके का नाम सुनते ही मायाबाई का चेहरा बुझ गया. पहले तो वह सकपकाई फिर बोली, ‘‘कौन हलके? वो मेरे पास क्यों आएगा?’’‘‘ज्यादा सयानी मत बन. पुलिस को सारी बात पता चल गई है. उस रात हलके तुझ से मिलने आया था, इसलिए सीधेसीधे बता दे कि हलके ने तेरी सास को क्यों मारा? देख, तू सच बता देगी तो पुलिस तुझे छोड़ देगी वरना तुझे जेल जाने से कोई नहीं रोक सकेगा.’’मायाबाई पुलिस की बातों में आ गई, उस ने स्वीकार कर लिया कि उस रात सास ने उसे उस के प्रेमी हलके के साथ देख लिया था. इस के बाद हालात ऐसे बने कि उस ने प्रेमी के साथ मिल कर सास की हत्या कर दी.पुलिस पूछताछ में बहू के इश्क में सास के कत्ल की कहानी इस प्रकार सामने आई—

कोई 5 साल पहले मायाबाई जब संजय के साथ ब्याह कर गांव में आई, तब उस की उम्र 21 साल थी. पति के साथ कुछ समय तो उस के दिन अच्छे बीते लेकिन बाद में संजय पत्नी के बजाए खेती पर ज्यादा ध्यान देने लगा. पत्नी की भावनाओं को नजरंदाज करते हुए वह घर के बजाए रात को खेतों पर ही सोने लगा.
ऐसे में मायाबाई की नजरें पड़ोस में रहने वाले युवक हलके चौधरी से लड़ गईं. वह मायाबाई से 2 साल छोटा था और उसे भौजी कहता था. गांव में मायाबाई के आते ही उस की सुंदरता के चर्चे होने लगे थे. लेकिन उस वक्त हलके इन सब बातों में ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेता था. धीरेधीरे उस की उम्र बढ़ी तो उस के मन में भी मायाबाई की खूबसूरती गुदगुदी करने लगी.

मायाबाई के कच्चे मकान में कच्चा बाथरूम बाहर आंगन में था, जो हलके के घर से साफ दिखाई देता था. इसलिए 20 साल की उम्र तक आतेआते जब हलके के मन में जवानी की तरंगें उछाल मारने लगीं तो वह मायाबाई को नहाते हुए छिप कर देखने लगा. इसी बीच करीब साल भर पहले एक दिन नहा रही मायाबाई की नजर हलके पर पड़ गई. उस ने उस से कुछ नहीं कहा. वह समझ गई थी कि हलके चौधरी की जवानी अंगड़ाई ले रही है.फिर मायाबाई के मन में भी चुहल करने की बात घर कर गई. अगले दिन से वह चोरीछिपे ताकाझांकी करने वाले हलके को अपने रूप के और भी खुले दर्शन करवाने लगी. मायाबाई ने यह खेल हलके के मन में आग लगाने के लिए खेला था. लेकिन धीरेधीरे उसे न केवल इस खेल में मजा आने लगा, बल्कि हलके के प्रति उस के मन में भी चाहत पैदा हो गई.

हलके का मायाबाई के घर आनाजाना था, इसलिए जब भी हलके मायाबाई के घर आता तो वह उस से हंसीमजाक करती, जिस से कुछ दिनों में हलके की समझ में भी आ गया कि मायाबाई उस के मन की बात समझ चुकी है. इसलिए एक दिन दोपहर में वह उस समय मायाबाई के घर पहुंचा, जब वह घर पर अकेली थी. मायाबाई को भी ऐसे ही मौके का इंतजार था. उस रोज मायाबाई ने बातोंबातों में हलके से पूछ लिया, ‘‘हलके, तुम मुझे यह बताओ कि तुम्हारी कोई प्रेमिका है?’’‘‘नहीं.’’ हलके चौधरी ने जवाब दिया.
‘‘क्यों, अभी तक क्यों नहीं बनाई? तुम्हारा मन तो होता होगा?’’ मायाबाई ने पूछा.
‘‘नहीं.’’ हलके ने झूठ बोला.

‘‘मन नहीं होता तो फिर छिप कर मुझे नहाते क्यों देखते हो? मैं तो समझी थी कि मेरा देवर कई लड़कियों से दोस्ती कर चुका होगा, इसलिए अब मेरे साथ दोस्ती करना चाहता है.’’ मायाबाई मुसकराते हुए बोली.
‘‘वो तो इसलिए कि आप अच्छी लगती हो.’’‘‘कभी मेरी सुंदरता को पास से देखने का मन नहीं करता तुम्हारा?’’ मायाबाई ने पूछा.‘‘करता है, लेकिन डर लगता है कि कहीं आप गुस्सा न हो जाओ.’’ हलके ने बताया.‘‘मैं ने कब कहा कि मैं गुस्सा हो जाऊंगी. अच्छा, एक काम करो अभी तो अम्मा खेत से आने वाली हैं. कल सुबह जल्दी आ जाना फिर देख लेना, अपनी भाभी को एकदम पास से और मन करे तो छू कर भी देखना.’’ इतना कह कर मायाबाई ने नौसिखिया हलके के गाल पर एक पप्पी दे कर उसे उस के घर भेज दिया.

दूसरे दिन हलके चौधरी मायाबाई के घर पहुंच गया. उस समय घर में उन दोनों के अलावा कोई नहीं था. मायाबाई ने इस का फायदा उठाया. उस ने हलके को कामकला का ऐसा पाठ पढ़ाया कि वह उस का मुरीद बन गया. इस के बाद तो दोनों के बीच आए दिन वासना का खेल खेला जाने लगा.

मायाबाई को कम उम्र का प्रेमी मिला तो वह उसे बढ़चढ़ कर वासना के खेल सिखाने लगी. जिस के चलते हलके उस का ऐसा दीवाना हुआ कि हर दिन मायाबाई से अकेले में मिल कर प्यार करने की जिद करने लगा. लेकिन यह रोजरोज कैसे संभव हो पाता. इसलिए मायाबाई ने एक रास्ता निकाला.
रात को जब उस का पति और ससुर खेत की रखवाली करने चले जाते तो सास के सो जाने के बाद आधी रात में वह अपने प्रेमी हलके को कमरे में बुला लेती और फिर पूरी रात उसके संग अय्याशी करने के बाद सुबह होने से पहले वापस भेज देती.

8 जनवरी, 2020 की रात को भी यही हुआ. रात में संजय और उस के पिता मलुवा खेत पर चले गए. फिर सास भी खाना खापी कर गहरी नींद सो गई तो मायाबाई ने हलके को बुला लिया. हलके अब प्यार के खेल में काफी होशियार हो चुका था. वह अपने मोबाइल पर अश्लील फिल्में लगा कर मायाबाई को गुदा मैथुन के लिए मना रहा था लेकिन मायाबाई तैयार नहीं हो रही थी. उस रोज हलके ने जिद की तो मायाबाई गुदा मैथुन के लिए राजी हो गई.

उसी दौरान मायाबाई के मुंह से चीख निकली तो बाहर कमरे में सो रही सास की नींद टूट गई. अनुभवी सास ऐसी चीख का मतलब अच्छी तरह जानती थी, सो उस ने उठ कर चुपचाप बहू के कमरे में झांक कर देखा तो पड़ोसी हलके के साथ बहू को अय्याशी करते देख उस की आंखें फटी रह गईं. सास ने गुस्से में किवाड़ पर लात मार कर दरवाजा खोला और मायाबाई और हलके को खूब खरीखोटी सुनाई. सास बहू की करतूत अपने बेटे को बताने के लिए रात में ही खेत पर जाने लगी.यह देख कर मायाबाई के हाथपैर फूल गए. उस ने पास पड़ी कुल्हाड़ी उठा कर हलके के हाथ में पकड़ाते हुए कहा कि वह सास की कहानी खत्म कर दे वरना उन के प्यार की कहानी खत्म हो जाएगी.

हलके के हाथपैर कांपने लगे. उस में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह बाहर जा कर कुसुम की हत्या कर सके. लेकिन जब मायाबाई भी साथ हो गई तो दोनों ने पीछे से जा कर खेतों पर पहुंच चुकी कुसुम की गरदन पर कुल्हाड़ी से वार किया, जिस से वह वहीं गिर गई. इस के बाद उस के शरीर पर कुल्हाड़ी से कई वार और किए, जिस से कुसुम की मृत्यु हो गई.कुछ देर बाद मायाबाई के कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर हलके चौधरी अपने घर चला गया. दोनों को भरोसा था कि पुलिस उन तक कभी नहीं पहुंच पाएगी, लेकिन पवई पुलिस ने 4 दिन में ही दोनों को कानून की ताकत का अहसास करवा दिया.

Crime Story: खुल गया हत्या का रहस्य

Crime Story: रात लगभग 2 बजे का समय था. घर के दरवाजे की कुंडी बजी. दरवाजा राजरानी ने खोला राजरानी ने देखा कि उस के पति मूलचंद प्रजापति को 2 लोग बाइक से घायल व अचेत अवस्था में ले कर आए थे. पति की हालत देख कर राजरानी घबरा गई.

इस से पहले कि वह उन दोनों से पति की हालत के बारे में पूछती, वे दोनों मूलचंद को बेहोशी की हालत में दरवाजे पर ही छोड़ यह कह कर चले गए कि इन्होंने ज्यादा शराब पी रखी है. दोनों व्यक्तियों के चेहरे कपड़े से ढके थे. वह अपने पति को किसी तरह घर के अंदर लाई और होश में लाने के लिए उस के चेहरे पर पानी के छींटे मारती रही, लेकिन होश नहीं आया. पति के गले और सिर पर चोट के निशान दिख रहे थे. उस ने बच्चों को जगाने की कोशिश की, लेकिन बच्चे गहरी नींद में सोए थे.

सुबह लगभग 6 बजे मूलचंद की मौत हो गई. यह घटना 7 अक्तूबर, 2020 की है. फिरोजाबाद शहर के थाना उत्तर क्षेत्र स्थित श्रीराम कालोनी निवासी 39 वर्षीय मूलचंद शटरिंग मिस्त्री था. पत्नी राजरानी घर पर ही चूडि़यों पर नग लगाने का काम करती थी. पति की मौत पर राजरानी व बच्चों की चीखपुकार सुन कर मोहल्ले में जगार हो गई थी. पड़ोसियों ने उस के घर आ कर देखा, मूलचंद की मौत हो चुकी थी. मूलचंद के बेटे राहुल ने पिता की मौत की जानकारी द्वारिकापुरी में रहने वाले अपने ताऊ रामदास को दी.

कुछ ही देर में रामदास भी वहां पहुंच गया. जैसेजैसे लोगों को इस घटना की जानकारी मिलती गई. वैसेवैसे वहां पर लोगों का जमघट लगता गया. तब तक सुबह के लगभग 7 बज गए थे. इसी बीच किसी ने थाना उत्तर में सूचना दे दी. थानाप्रभारी अनूप कुमार भारतीय सूचना मिलते ही पुलिस टीम के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो गए. सूचना मिलने पर सीओ (सिटी) हरिमोहन सिंह भी मौके पर पहुंच गए.घटनास्थल पर पहुंच कर पुलिस ने जांचपड़ताल की. मृतक मूलचंद के सिर से खून बह कर जम चुका था तथा गले पर भी चोट के निशान थे. मिस्त्री की मौत होने से उस के बच्चों व पत्नी का रोरो कर बुरा हाल हो रहा था.

पुलिस ने समझाबुझा कर राजरानी को शांत कराया. पूछताछ में मृतक की पत्नी राजरानी ने पुलिस को बताया कि उस के पति शटरिंग का काम करते थे. बुधवार की शाम 5 बजे बाजार से सामान लेने के लिए निकले थे. इस के बाद देर रात तक नहीं लौटे. उन के लौटने का इंतजार करतेकरते घर में सभी जने सो गए. रात 2 बजे किसी ने दरवाजा खटखटाया तो उस ने दरवाजा खोला. देखा 2 युवक बाइक से पति को बेहोशी की हालत में ले कर आए थे. वह कुछ समझ पाती, उस से पहले ही उन्होंने अधिक शराब पीने से तबीयत खराब होने की बात कह कर दरवाजे पर डाल कर भाग गए.

राजरानी ने उन युवकों पर पति की हत्या करने का आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों के चेहरे ढके हुए थे. इसलिए वह उन्हें पहचान नहीं पाई. पुलिस ने कहा कि घायल पति को उपचार के लिए अस्पताल क्यों नहीं ले गई? इस पर राजरानी ने बताया कि पति रोज ही शराब पी कर गिरतेपड़ते घर आते थे. उस ने सोचा थोड़ी देर में उन्हें होश आ जाएगा. इसलिए वह उन्हें अस्पताल नहीं ले गई. सुबह जब वह सो कर उठी तो देखा, उन की मौत हो गई थी. पड़ोसियों से भी पुलिस ने पूछताछ की.

उन्होंने बताया कि सुबह राजरानी व बच्चों की चीख सुन कर उन्हें घटना की जानकारी हुई थी. मृतक के भाई रामदास ने पुलिस को बताया कि सुबह भतीजे राहुल का फोन आने पर उन्हें घटना की जानकारी मिली थी. जब वे घर पर पहुंचे, उन्हें भाई मृत अवस्था में मिला था.पुलिस ने शटरिंग मिस्त्री के मकान के आसपास भी पड़ताल की. उन्हें खाली पड़े प्लौट में खून के निशान मिले. पुलिस का मानना था कि मिस्त्री के साथ घर के आसपास ही मारपीट की गई थी. पुलिस ने मृतक मूलचंद के मोबाइल को कब्जे में ले लिया ताकि काल डिटेल्स के माध्यम से हत्यारों तक पहुंचा जा सके.

इंसपेक्टर भारतीय ने मौके की आवश्यक काररवाई निपटाने के साथ ही लाश को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया और थाने लौट आए.भाई रामदास ने मृतक भाई की पत्नी राजरानी के बताए अनुसार 2 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. दूसरे दिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई. रिपोर्ट में मूलचंद की गला दबा कर व सिर पर चोट पहुंचा कर हत्या किए जाने की बात कही गई थी. मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने केस की जांच शुरू करते हुए मूलचंद के बारे में पता किया कि उस की किसी से कोई दुश्मनी तो नहीं थी. जानकारी मिली कि मूलचंद सीधासादा व्यक्ति था. शटरिंग के काम से जो आमदनी होती थी, उसी से अपने परिवार को पालता था.

हत्याकांड के खुलासे के लिए एसएसपी सचिंद्र पटेल ने जिम्मेदारी एसपी (सिटी) मुकेशचंद्र मिश्र को सौंपी. साथ ही उन्होंने उन की मदद के लिए सीओ (सिटी) हरिमोहन सिंह और थानाप्रभारी अनूप कुमार भारतीय को ले कर एक पुलिस टीम का गठन कर दिया. पुलिस ने जांच के दौरान मृतक मूलचंद और राजरानी के मोबाइल फोन नंबरों की काल डिटेल्स खंगाली. राजरानी के फोन की काल डिटेल्स में घटना वाली रात आखिरी काल गौरव चौहान को की गई थी. शक गहराने के बाद पुलिस ने गौरव के बारे में पता किया तो जानकारी मिली कि वह 26 साल का अविवाहित युवक है और मृतक के घर के पास ही रहता है.

गौरव भी चूड़ी पर मोती लगाने का काम करता था. जांच के दौरान पूछताछ में यह भी पता चला कि गौरव का राजरानी के घर काफी आनाजाना था.इस के बाद राजरानी से पूछताछ की गई. पुलिस ने उस से गौरव के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि हमारे व गौरव के यहां चूड़ी का काम होता है. घर भी पासपास हैं इसलिए हमारा परिवार उस से परिचित है. पुलिस ने उस से पूछा कि जब पति घायल और बेहोशी की हालत में था तो अपने जेठ रामदास को फोन कर जानकारी क्यों नहीं दी? रात में तुम ने गौरव को फोन क्यों किया था? इस प्रश्न पर राजरानी ने चुप्पी साध ली.

राजरानी बारबार बयान बदलने लगी. इस से पुलिस का शक मजबूत हो गया. जब पुलिस ने सख्ती दिखाई तो उस ने प्रेमी गौरव के साथ मिल कर पति की हत्या करने का जुर्म कबूल कर लिया. पुलिस ने 8 अक्तूबर को घर से राजरानी को तथा कोटला से गौरव को गिरफ्तार कर लिया.

एसपी (सिटी) मुकेशचंद्र मिश्र ने अपने औफिस में आयोजित प्रैस कौन्फ्रैंस में शटरिंग मिस्त्री मूलचंद की हत्या का 24 घंटे में ही खुलासा करने तथा 2 हत्यारोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी. इस हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी.28 वर्षीय गौरव चौहान फिरोजाबाद की श्रीराम कालोनी में मृतक मूलचंद के घर के पास रहता था. मूलचंद शराब पीने का आदी था. वह अपनी आमदनी का बड़ा हिस्सा शराब पर खर्च कर देता था. पत्नी विरोध करती तो वह नशे में उस के साथ मारपीट करता था.

लौकडाउन के दौरान मूलचंद का शटरिंग का काम बंद हो जाने से उस की माली हालत बिगड़ गई. उस के सामने 8 लोगों का पेट पालने की समस्या खड़ी हो गई.गौरव और राजरानी चूड़ी का काम अपनेअपने घरों पर ही करते थे. इस से वे एकदूसरे को जानते थे. आर्थिक संकट आने पर गौरव ने राजरानी की काफी मदद की. वह गौरव के एहसानों के तले दब गई थी. धीरेधीरे दोनों का एकदूसरे के प्रति आकर्षण बढ़ता गया.

6 बच्चों की मां बनने के बाद भी भरेपूरे बदन की 30 साल की राजरानी का जादू अविवाहित गौरव पर पूरी तरह छाने लगा था. दोनों एकदूसरे से प्यार करने लगे थे. इस बीच दोनों के अवैध संबंध भी बन गए थे.पति के काम पर जाने के बाद दोनों चोरीछिपे मिलते थे. दोनों का यह रिश्ता बिना रोकटोक के चल रहा था. एक बार मूलचंद ने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया. इस पर उस का पत्नी से विवाद हो गया. गुस्से में उस ने पत्नी की पिटाई कर दी.

इस की जानकारी प्रेमी गौरव को हुई. प्रेमिका के साथ हुई मारपीट पर गौरव को बहुत गुस्सा आया. उस ने राजरानी के साथ मिल कर अपने प्यार की राह के रोड़े को हटाने की योजना बनाई.मूलचंद बुधवार 7 अक्तूबर, 2020 की शाम 5 बजे सामान लेने बाजार गया था. रात साढ़े 11 बजे मूलचंद शराब के नशे में गिरतापड़ता घर लौटा. तब तक सभी बच्चे सो चुके थे. पत्नी राजरानी पति को नशे में पकड़ कर घर की छत पर बने कमरे में ले गई थी. इस के बाद उस ने अपने प्रेमी गौरव को फोन कर घर पर बुला लिया. उस ने फोन पर कहा कि तुम यहां इस तरह चोरीछिपे आना कि कोई तुम्हें देख न सके.

गौरव दबे पांव राजरानी के घर पहुंच गया. गौरव ने देखा मूलचंद शराब के नशे में बेसुध पड़ा था.राजरानी और गौरव के लिए यह एक अच्छा मौका था. राजरानी ने पति के पैर पकड़े और गौरव ने चुनरी से मूलचंद का गला घोंट दिया. राजरानी ने तसल्ली के लिए उस के सिर पर ईंट से प्रहार भी किया. हत्या के बाद उस के शव को दोनों ने बरामदे में बिछी चारपाई पर ला कर डाल दिया. खून से सनी ईंट मकान के बगल में खाली पड़े प्लौट में फेंक दी. इस के बाद गौरव अपने घर चला गया था.प्रेमी के साथ पति की हत्या करने के बाद राजरानी ने 2 युवकों द्वारा पति को बेहोश व घायल अवस्था में बाइक से घर ला कर छोड़े जाने की कहानी बना दी. इस के साथ ही राजरानी के बताने पर जेठ रामदास ने 2 अज्ञात युवकों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी. जबकि सच्चाई कुछ और ही थी.

पुलिस ने दोनों आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में प्रयुक्त चुनरी (दुपट्टा) व खून सनी ईंट बरामद कर ली.इस हत्याकांड का खुलासा करने वाली पुलिस टीम में थानाप्रभारी अनूप कुमार भारतीय, एसएसआई नरेंद्र कुमार शर्मा, कांस्टेबल विनीत कुमार, तेजवीर सिंह, अजय कुमार, आशीष कुमार, मोहनश्याम, नेत्रपाल, प्रवीन कुमार, लव प्रकाश, महिला कांस्टेबल उपासना शामिल थे.

आवश्यक काररवाई करने के बाद पुलिस ने दोनों दोषियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. एक बेवफा पत्नी ने अपने पति से बेवफाई कर दूसरे मर्द से अवैध संबंध बना कर अपने हंसतेखेलते घर को हमेशाहमेशा के लिए उजाड़ दिया. Crime Story

Delhi Crime: इश्क में राहुल ने उजाड़ दिया पूरा परिवार

Delhi Crime: 8 जनवरी, 2017 को दोपहर बाद की बात है. 34 साल का राहुल माटा पूर्वी दिल्ली के मधु विहार स्थित अजंता अपार्टमेंट के गेट पर पहुंचा. इसी अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर-32 में उस के मातापिता रहते थे. लेकिन राहुल की गलत आदतों की वजह से उस के पिता रविंद्र माटा ने उसे घर से बेदखल कर दिया था. इस के बाद उस के सोसाइटी में घुसने तक पर रोक लगा दी गई थी. जाहिर है, राहुल की कोई न कोई बात उस सोसाइटी के पदाधिकारियों को बुरी लगी होगी, तभी तो गेट पर तैनात गार्डों से भी कह दिया गया था कि उसे किसी भी सूरत में सोसाइटी के अंदर न आने दिया जाए.

उस दिन राहुल अपने फ्लैट पर जाने के लिए सोसाइटी के गेट पर पहुंचा तो वहां मौजूद सुरक्षागार्ड नंदन सहाय ने उसे रोक दिया. गार्ड ने कहा कि सोसाइटी के पदाधिकारियों के आदेश पर ही वह यह कर रहा है. एक सुरक्षागार्ड की राहुल के सामने भला क्या औकात थी. गार्ड द्वारा रोकने की बात राहुल को बुरी लगी. वह गार्ड को डांटते हुए आगे बढ़ा तो गार्ड ने इस का विरोध किया. क्योंकि उसे तो अपनी ड्यूटी करनी थी. राहुल को गार्ड की यह जुर्रत नागवार लगी और वह गार्ड से झगड़ने लगा तथा उस की पिटाई कर दी.

शोरशराबा सुन कर सोसाइटी के कई लोग अपनेअपने फ्लैट से निकल आए. उन लोगों ने भी सुरक्षागार्ड का पक्ष लिया, पर राहुल सभी की बात अनसुनी कर के जबरदस्ती आगे बढ़ गया. तब तक राहुल के 63 वर्षीय पिता रविंद्र माटा भी फ्लैट से बाहर निकल आए थे. बेटे का गार्ड से झगड़ना उन्हें अच्छा नहीं लगा. उस से बात करने के लिए वह उस की तरफ बढ़े. चूंकि वह उसे संपत्ति से पहले ही बेदखल कर चुके थे, इसलिए राहुल ने उन से झगड़ना शुरू कर दिया.

उसी दौरान राहुल ने अपने साथ लाए नारियल काटने वाले चापड़ से पिता पर हमला कर दिया. वहां जितने भी लोग मौजूद थे, उन में से किसी की भी इतनी हिम्मत नहीं हो सकी कि वह रविंद्र माटा को बचा सकते. बल्कि वह अपनी जान बचाने के लिए अपने फ्लैटों में चले गए और दरवाजे बंद कर लिए. राहुल पिता पर करीब ढाई मिनट तक चापड़ से वार करता रहा और वह जमीन पर गिर कर तड़पते रहे. इस दौरान किसी ने पुलिस के 100 नंबर पर फोन कर के वारदात की जानकारी देने का साहस जरूर कर दिया था.

राहुल को जब लगा कि उस के पिता मर चुके हैं तो वह खून से सना चापड़ हाथ में थामे अपने फ्लैट पर पहुंचा. पर उस की मां विभा माटा ने पहले ही दरवाजा बंद कर लिया था. राहुल ने मां को आवाज देते हुए कई बार दरवाजा खटखटाया, पर विभा ने दरवाजा नहीं खोला. राहुल को अब इस बात का डर लगा कि कहीं सोसाइटी के लोग उसे पकड़ न लें. इसलिए खुद को बचाने के लिए वह किसी दूसरे फ्लैट में जा रहा था, तभी रास्ते में रेनू बंसल नाम की महिला मिलीं, जो पास के फ्लैट में ही रहती थीं. राहुल ने चापड़ से उन्हें भी घायल कर दिया. रेनू को घायल करने के बाद वह तीसरी मंजिल स्थित फ्लैट नंबर 35 में घुस गया.

यह फ्लैट फिल्म अभिनेता वी.के. शर्मा का था. उस समय वह अपने बेटे कशिश के साथ मौजूद थे. राहुल के हाथ में खून से सना चापड़ देख कर वह भी डर गए. राहुल ने दोनों बापबेटों को धक्का दे कर कहा, ‘‘मेरे पास मत आना, वरना मार डालूंगा.’’

वी.के. शर्मा ने अपनी फिल्मी लाइफ में फिल्मी गुंडों को देखा था पर अब तो राहुल उन के सामने सचमुच का गुंडा था. उस से कोई पंगा लेने के बजाए उन्होंने खुद को बचाना जरूरी समझा और बेटे के साथ खुद को एक कमरे में बंद कर लिया. राहुल उन के किचन में चला गया और अंदर से किचन का दरवाजा बंद कर लिया. तब तक मधु विहार थाने की पुलिस अजंता अपार्टमेंट पहुंच चुकी थी. गेट से कुछ कदम दूर रविंद्र माटा की लहूलुहान लाश पड़ी थी. सोसाइटी के लोगों ने बताया कि इन की हत्या इन के बेटे राहुल ने की है जो फ्लैट नंबर 35 में छिपा है.

पुलिस टीम फ्लैट नंबर 35 में पहुंची. उस फ्लैट का किचन और एक कमरा अंदर से बंद था. पुलिस ने दोनों जगह दस्तक दी तो पुलिस का नाम सुनते ही अभिनेता वी.के. शर्मा ने दरवाजा खोल दिया. सामने पुलिस देख कर उन्होंने राहत की सांस ली. उन्होंने बताया कि राहुल उन के किचन में है.

पुलिस ने किचन का दरवाजा खटाखटा कर राहुल से दरवाजा खोलने को कहा. पर राहुल ने दरवाजा नहीं खोला. उसे डर था कि पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेगी. इसलिए वह अपने बचाव का रास्ता खोजने लगा. पर उसे ऐसा कोई रास्ता नहीं मिला. जब काफी देर तक राहुल ने दरवाजा नहीं खोला तो पुलिस ने दरवाजा तोड़ना शुरू कर दिया.

तब राहुल ने रसोई गैस (पीएनजी) खोल कर पुलिस को धमकी दी. इतना ही नहीं उस ने आग भी लगा दी. रसोई गैस की आग ने पूरे किचन को चपेट में ले लिया. पुलिस ने दरवाजा तोड़ कर किचन की आग की लपटों में घुस कर राहुल माटा को बाहर निकाल लिया. उस समय तक राहुल काफी जल गया था. राहुल को सुरक्षित निकालने में 10 पुलिसकर्मी भी झुलस गए. झुलसे हुए पुलिसकर्मियों में इंसपेक्टर मनीष जोशी, एसआई संजय, निशाकर, अंशुल, मनीष, एएसआई सुनील कुमार, चंद्रघोष, हैडकांस्टेबल रामकुमार, कांस्टेबल सुधीर, गजराज शामिल थे. खुद के घायल होने के बावजूद भी पुलिस राहुल को मैक्स अस्पताल ले गई.

तब तक आग पूरे फ्लैट में फैल चुकी थी. फायर ब्रिगेड की 10 गाडि़यां मौके पर पहुंच गईं. घंटे भर की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका. पर आग में अभिनेता वी.के. शर्मा के फ्लैट का सारा सामान स्वाहा हो चुका था. उन्हें उत्कृष्ट अदाकारी के लिए संगीत नाटक अकादमी से मिला पुरस्कार भी स्वाहा हो गया था.

बचाव के दौरान पुलिसकर्मियों के झुलसने की बात सुन कर डीसीपी ओमवीर सिंह बिश्नोई भी अस्पताल पहुंच गए. आरोपी राहुल माटा और 4 पुलिसकर्मियों की हालत गंभीर होने पर उन्हें सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया. राहुल 40 प्रतिशत जल चुका था. घायल पुलिसकर्मियों को देखने के लिए पुलिस आयुक्त आलोक वर्मा भी अस्पताल पहुंचे.

राहुल ने रेनू बंसल नाम की जिस महिला को घायल किया था, उसे भी 26 टांके लगे थे. राहुल की हालत सामान्य होने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने उस से विस्तार से पूछताछ की तो चौंकाने वाली कहानी सामने आई—

राहुल माटा एक धनाढ्य परिवार से था. उस के पिता रविंद्र माटा का कनाडा में अपना बिजनैस था. करीब 20 साल पहले वह कनाडा चले गए थे. परिवार में पत्नी विभा माटा के अलावा 2 बेटे ही थे. एक राहुल माटा और दूसरा मुकुल माटा. दोनों बच्चों की प्रारंभिक पढ़ाई दिल्ली में हुई थी. विभा दिल्ली में सरकारी नौकरी करती थीं. स्कूली शिक्षा पूरी  करने के बाद राहुल ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक किया. आगे की पढ़ाई के लिए पिता ने उसे अमेरिका भेज दिया. सन 1995 से 1999 तक उस ने अमेरिका में पढ़ाई की.

इस के बाद सन 2000 में उस ने अमेरिका की ही एक बैंक में नौकरी कर ली. 8 सालों तक वहां काम करने के बाद वह पिता के पास कनाडा चला गया. पिता को कनाडा की नागरिकता मिली हुई थी. कनाडा में उस ने मर्चेंट नेवी में नौकरी की पर अनुशासनहीनता के आरोप में उसे सन 2011 में नौकरी से निकाल दिया गया.  कनाडा की एक लड़की से छेड़छाड़ के आरोप में राहुल को जेल जाना पड़ा, जिस में उसे 2 साल की सजा भी हुई. इस आरोप की वजह से राहुल को कनाडा से डिपोर्ट कर भारत भेज दिया गया.

बाद में सन 2014 में उस का मर्चेंट नेवी का लाइसैंस भी निरस्त हो गया. तब मर्चेंट नेवी में नौकरी करने का उस का रास्ता भी बंद हो गया.

रविंद्र माटा ने अपने छोटे बेटे मुकुल माटा को भी कनाडा बुला लिया था. उस की वहां एक मोबाइल फोन कंपनी में नौकरी लग गई थी. दोनों बापबेटे कनाडा में रहते थे, जबकि राहुल अपनी मां विभा के साथ दिल्ली के अजंता अपार्टमेंट के फ्लैट में रहता था. अब से करीब 2 साल पहले विभा भी रिटायर हो गई थीं. अजंता अपार्टमेंट का यह फ्लैट रविंद्र ने सन 1994 में खरीदा था.

दिल्ली में कोई कामधाम करने के बजाय राहुल दिन भर दोस्तों के साथ घूमता रहता था. खर्च के लिए पैसे मां से ले जाता था. विभा जब उसे कोई काम करने को कहतीं तो वह काम न मिलने का बहाना बना देता. इस के बावजूद भी मां उसे समझाती रहतीं. पर वह उन की सलाह को अनसुना कर देता था.

जिस अपराध की वजह से राहुल को कनाडा छोड़ना पड़ा था, उसी तरह का आरोप उस पर सोसाइटी की एक महिला ने भी लगाया था. राहुल पर बारबार इस तरह के आरोप लगने के बाद भी मांबाप ने उस की शादी नहीं की. इस का नतीजा यह हुआ कि राहुल 2 बच्चों की मां निशा के चक्कर में पड़ गया. निशा के 15 और 16 साल के 2 बच्चे थे. वह एक स्कूल में टीचर थी. राहुल निशा के साथ लिवइन रिलेशन में रहने लगा. एक दिन राहुल ने यह बात मां को बताई तो उन्हें यह बात बड़ी नागवार गुजरी. उन्होंने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना.

इतना ही नहीं, वह निशा को मां के पास फ्लैट पर भी लाने लगा. विभा ऐतराज जताती रहीं और उसे फ्लैट पर लाने के लिए मना करती रहीं. मां की आपत्ति पर राहुल ने कहा कि उस ने उस के साथ मंदिर में शादी कर ली है. यह सुन कर विभा के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उन्होंने यह जानकारी कनाडा में रह रहे पति को दे दी, साथ ही यह भी कह दिया कि मना करने के बावजूद राहुल जबरदस्ती निशा को फ्लैट पर लाता है.

तब वीडियो कौन्फ्रैंसिंग कर रविंद्र ने भी बेटे राहुल को समझाने की कोशिश की, लेकिन उस पर तो प्यार का फितूर चढ़ा था. वह भी अपनी जिद पर अड़ा था. राहुल की जिद से रविंद्र माटा और उन की पत्नी को इस बात की आशंका होने लगी कि कहीं बिना शादी की हुई यह महिला और उस के बच्चे उन के फ्लैट पर कब्जा न कर लें.

राहुल की हठधर्मिता से विभा का उस के प्रति व्यवहार भी बदल गया. हर महीने वह उसे खर्च के जो पैसे देती थीं, उन्होंने देने बंद कर दिए. तब राहुल उन से झगड़ता और उन की पिटाई तक कर देता. कभीकभी तो मांबेटे के बीच झगड़ा इतना बढ़ जाता कि पड़ोसियों को बीचबचाव के लिए आना पड़ता.

उस के हिंसक मिजाज से सोसाइटी के लोग भी परेशान थे. एकदो बार पड़ोसियों ने हस्तक्षेप किया तो राहुल ने उन के साथ भी बदतमीजी की. विभा के परिवार में कलह लगातार बढ़ती जा रही थी. फोन कर के वह कनाडा में बैठे पति को सब बताती रहती थीं. बेटे के आचरण से रविंद्र माटा भी परेशान हो गए.

12 अक्तूबर, 2016 को वह कनाडा से दिल्ली आ गए. उन्होंने एक बार फिर बेटे राहुल को समझाया. उन्हें लगा कि राहुल सुधरने वाला नहीं है तो उन्होंने उसे अपनी चलअचल संपत्ति से पूरी तरह से बेदखल करने की चेतावनी दे दी और कह दिया कि वह आइंदा उन के फ्लैट पर न आए.

सोसाइटी वाले तो राहुल के व्यवहार और उस के शोरशराबा करने से पहले परेशान थे. ऊपर से रविंद्र माटा ने सोसाइटी के सचिव जे.एल. गुप्ता से कह दिया कि राहुल को उन के फ्लैट में आने की अनुमति न दी जाए. इस के बाद अजंता रेजीडैंशियल सोसाइटी के सचिव जे.एल. गुप्ता ने गेट पर तैनात सुरक्षागार्डों को राहुल की एंट्री पर बैन लगाने की हिदायत दे दी.

बेटे से खतरे को देखते हुए रविंद्र माटा ने अपने फ्लैट की एंट्री और बालकनी में लोहे के ग्रिल और दरवाजे भी लगवा दिए. बेटे के तेवर देखते हुए उन्होंने इस की शिकायत थाने में भी कर दी थी. सीनियर सिटिजन सेफ्टी के लिहाज से पुलिस ने उन्हें कुछ सेफ्टी टिप्स दिए, साथ ही पुलिस ने पड़ोसियों से भी उन का ध्यान रखने को कह दिया. बहरहाल रविंद्र माटा और विभा अब सतर्क रहने लगे. हालात सामान्य होने पर रविंद्र माटा का कनाडा लौटने का कार्यक्रम निश्चित था.

घर से बेदखल होने के बाद राहुल निशा के साथ पूर्वी दिल्ली के पांडव नगर में रहने लगा था. अब उसे अपने मांबाप दुश्मन लगने लगे. इतना ही नहीं, उस ने दोनों की हत्या करने की ठान ली. इस के लिए उस ने बाजार से एक चापड़ खरीद लिया. चापड़ अपने साथ ले कर वह 8 जनवरी को दोपहर के समय अजंता अपार्टमेंट पहुंच गया. वह जैसे ही गेट पर पहुंचा, वहां तैनात सुरक्षागार्ड नंदन सहाय ने उसे रोक लिया और बता दिया कि उस के अपार्टमेंट में घुसने पर बैन लगा है.

सुरक्षागार्ड के इतना कहते ही राहुल उस से उलझ गया और अपना रौब दिखाने लगा. गार्ड तो अपनी ड्यूटी कर रहा था, पर राहुल नहीं माना. सुरक्षागार्ड की पिटाई करने के बाद राहुल अपने फ्लैट की तरफ जाने लगा. इस के बाद शोर सुन कर बाहर आए पिता को उस ने चापड़ से वार कर मौत के घाट उतार दिया.

पिता की हत्या करने के बाद वह मां की हत्या करने के लिए फ्लैट पर गया. फ्लैट का दरवाजा बंद होने पर उस ने दूसरी बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया.

रेनू बंसल को घायल करने के बाद वह फिल्म अभिनेता वी.के. शर्मा के फ्लैट में घुस गया और खुद को बचाने के चक्कर में उन के घर को आग के हवाले कर दिया. वी.के. शर्मा पिछले 15 सालों से इस फ्लैट में रह रहे थे.

राहुल माटा से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे 9 जनवरी, 2017 को कड़कड़डूमा अदालत में महानगर दंडाधिकारी के समक्ष पेश किया. राहुल ने जज को बताया कि उस ने अपने पिता की हत्या नहीं की और वी.के. शर्मा के फ्लैट में आग उस ने नहीं, बल्कि पुलिस ने लगाई थी. बहरहाल पुलिस ने कोर्ट के आदेश के बाद उसे जेल भेज दिया. मामले की जांच इंसपेक्टर अजीत सिंह कर रहे हैं. Delhi Crime

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित, निशा परिवर्तित नाम है.

Domestic Dispute: पत्नी की सहेली पर वासना का वार

Domestic Dispute: दिन ढलने वाला था. करीब 3 बजे का वक्त रहा हागा. उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी में रहने वाले 26 वर्षीय अमन बिष्ट कमरे में बैड पर करवटें बदल रहा था. मन में अजीब तरह की बेचैनी थी. काल सेंटर की ड्यूटी से सुबह 5 बजे घर आया था. सीधा बैड पर कंबल में जा घुसा था. पत्नी अनुप्रिया कब ड्यूटी पर घर से निकली, उसे पता ही नहीं चला. दिन में 11 बजे के करीब नींद खुली, तब फ्रैश होने के लिए सीधा बाथरूम में गया.

आधे घंटे बाद किचन में रखा फ्रिज खोलने लगा. उस पर एक चिट चिपकी थी. चिट पर लिखा था, ‘दूध खत्म हो गया है, ले आना. रात की बची सब्जी खा लेना. आटा रखा है. परांठा बना लेना.’ चिट पत्नी अनुप्रिया लगा कर गई थी.

सुबह साढ़े 8 बजे निकलते हुए उस ने सोए अमित को जगा कर कहने के बजाय चिट पर लिख दिया था. चिट की सारी बातें आदेश थीं. पढ़ कर अमन भीतर ही भीतर तिलमिला गया. पत्नी दरवाजा बाहर से लौक कर गई थी. डुप्लीकेट चाबी फ्रिज पर रखी थी.

वह कौशिक एनक्लेव के अपार्टमेंट के नीचे की दुकान से दूध, ब्रेड और मक्खन खरीद लाया. चाय बनाई. उस के साथ 4 ब्रेड सेंक लिए. खाने के बाद कमरे में ही इधरउधर चहलकदमी करता हुआ मोबाइल पर सोशल साइटों को स्क्राल करने लगा.

अचानक जाने उसे क्या सूझी, उस ने बार्डरोब से पत्नी के कपड़े निकाल कर बैड पर फैला दिए. उस में से कुछ अंडरगारमेंट छांटे. बाकी कपड़े सहेज कर दोबारा बार्डरोब में रख दिए.

कुछ समय बाद उस ने मोबाइल से एक नंबर पर काल मिलाया, ‘‘हैलो प्रियंका, क्या हो रहा है?’’

‘‘कुछ खास नहीं, यूं ही शादी के लिए लहंगे का प्राइस पता कर रही हूं. मम्मी ने कहा है कि मेरी शादी के कुछ हफ्ते ही बचे हैं.’’ प्रियंका बोली.

वह उस की पत्नी अनुप्रिया के स्कूल की खास सहेली थी. पास में ही अपने मातापिता और भाईबहन के साथ रहती थी. अमन ने पत्नी की उसी सहेली प्रियंका को काल किया था. वह उस से काफी घुलीमिली थी. उस के घर भी आनाजाना लगा रहता था.

जब कभी अमन का मन विचलित होता या उदासी से घिर जाता, तब प्रियंका से बातें कर लिया करता था. इस बात को प्रियंका भी समझती थी.

उस रोज 18 फरवरी, 2022 को भी अमन का मन बेचैन था. मन में कुछ वैसी बातें गांठ बन रही थीं, जो प्रियंका ही खोल सकती थी. इसलिए वह अपने मन की बात प्रियंका को बताना चाहता था. खुशमिजाज प्रियंका को उस ने कहा, ‘‘तुम से आज मिलना चाहता हूं, कुछ जरूरी काम है.’’

‘‘क्यों, क्या हुआ? फिर अनुप्रिया से झगड़ा हो गया?’’ प्रियंका बोली.

‘‘वैसा ही कुछ समझ लो, वैलेंटाइन डे के एक दिन पहले से ही रूठी है.’’

‘‘आखिर हुआ क्या?’’ प्रियंका बोली.

‘‘मैं जो गिफ्ट देना चाहता था, उस का नाम सुनते ही भड़क उठी. फिर भी मैं अगले रोज खरीद लाया,’’ अमन बोला.

‘‘क्या गिफ्ट था, जरा मैं भी तो सुनूं.’’ प्रियंका बोली.

‘‘मिलोगी, तब उस बारे में बताऊंगा.’’ अमन बोला.

‘‘अच्छा छोड़ो पुरानी बात, अब क्या है? वैलेंटाइन गए तो कई दिन गुजर गए,’’ प्रियंका ने कहा.

‘‘मैं चाहता हूं कि उस के पसंद की साड़ी खरीदूं, लेकिन मुझे उस की अच्छी समझ नहीं है. इसलिए मैं चाहता हूं कि तुम मेरे साथ बाजार चलो ताकि मैं अच्छी साड़ी खरीद लूं. वैसे भी तुम उस का टेस्ट मुझ से अच्छी तरह जानती हो,’’ अमन आग्रह के लहजे में बोला.

‘‘चलो ठीक है चलती हूं, लेकिन मम्मी से पूछ कर काल करती हूं. तुम अपनी स्कूटी ले कर आ जाना,’’ कहती हुई प्रियंका ने फोन कट कर दिया.

कुछ देर में ही प्रियंका ने अमन को फोन कर आने की सूचना दे दी. अमन 10 मिनट में प्रियंका के घर चला गया. उसे स्कूटी पर अपने फ्लैट पर ले आया. जबकि प्रियंका ने उस से सीधे बाजार चलने को कहा, तब उस ने बताया कि पहले उसे वह गिफ्ट को दिखाना चाहता है, जो पत्नी के लिए खरीदा था.’’

बातें करतेकरते दोनों फ्लैट में आ गए थे. अमन ने प्रियंका को सीधा बैडरूम में जाने के लिए इशारा किया और खुद किचन में चला गया. प्रियंका बैडरूम में बैड पर फैले कपड़ों को देख कर चौंक पड़ी.

तुरंत वह भी किचन में आते ही बोली, ‘‘यह सब क्या है अमन? बैडरूम की तुम ने क्या हालत बना रखी है. और…और उस पर तुम ने बीवी के कैसेकैसे कपड़े फैला रखे हैं. मुझे लगता है कि अनुप्रिया ने तो ऐसा नहीं किया होगा.’’

‘‘क्यों, क्या हुआ पसंद नहीं आया वह सब,’’ अमन मुसकराता हुआ बोला.

‘‘पसंद? कैसी बेशर्मी की बातें कर रहे हो, वह भी एक लड़की के सामने. अब समझी कि अनुप्रिया तुम से क्यों नाराज हुई होगी.’’ प्रियंका सख्ती से बोली.

‘‘इस में नाराज होने की बात क्या है? मैं वही तो उस के लिए वैलेंटाइन गिफ्ट ले कर आया था. उसे पसंद नहीं आया. तुम्हें पसंद है तो तुम ले लो मेरी तरफ से यह गिफ्ट.’’

‘‘तुम तो बड़े बदतमीज हो. मैं तुम से अंडरगारमेंट्स गिफ्ट लूंगी? शर्म नहीं आती है तुम्हें… मैं तो तुम्हें बहुत अच्छा और सभ्य समझती थी, लेकिन तुम तो बेहद ही गंदे इंसान निकले. मैं जा रही हूं.’’ कहती हुई प्रियंका मेन गेट की ओर बढ़ी.

अमन ने उस का हाथ पकड़ लिया. एक झटके में हाथ छुड़ा कर प्रियंका तेजी से दरवाजा खोलने के लिए हैंडल घुमाने लगी. दरवाजा लौक था. पीछे से अमन उस के पास आ कर बोला, ‘‘लौक लगा है. दरवाजा तब तक नहीं खुलेगा, जब तक मैं नहीं चाहूंगा.’’

प्रियंका का हाथ पकड़ कर खींचते हुए बैडरूम में ले गया. उसे बैड पर वहीं गिरा दिया, जहां अनुप्रिया के लिए खरीदे गए अंडरगारमेंट्स फैले थे. कुटिलता के साथ बोला, ‘‘मैं आज इस बिकिनी और ब्रा को तुम्हें अपने हाथों से पहनाऊंगा और गिफ्ट भी करूंगा…’’

प्रियंका बैड से उठ बैठी. उस ने हाथ जोड़ लिए. वहां से जाने देने की भीख मांगने लगी, लेकिन अमन के दिमाग में उस समय कुछ और ही चल रहा था. प्रियंका उस की आंखों में सैक्स का उतावलापन देख कर सहम गई थी.

कमरे से निकलने की कोशिश करने लगी, लेकिन अमन उसे दबोचने का प्रयास करने लगा, ‘‘मैं जो कहता हूं, सीधी तरह मान जाओ, वरना मैं कुछ गलत कर बैठूंगा, तब मुझे बाद में मत कहना.’’

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‘प्लीज मुझे छोड़ दो! छोड़ दो!!’ प्रियंका कहती रही. जबकि अमन उसे अपनी जिद के आगे झुकाने में लगा रहा.

‘‘मैं तुम्हें अपने हाथों से बिकिनी पहनाऊंगा, साथ में एक सेल्फी लूंगा. फिर तुम उसी पर अपने कपड़े पहन लेना और चली जाना. मैं सिर्फ इतना ही चाहता हूं.’’ अमन बोला.

‘‘नहीं…नहीं, प्लीज… अगले महीने मेरी शादी होने वाली है,’’ प्रियंका गिड़गिड़ाने लगी.

‘‘तो तुम ऐसे नहीं मानोगी.’’ यह कहते हुए अमन तेजी से किचन जा कर नायलोन की रस्सी ले आया.

पीछेपीछे दरवाजे तक आ चुकी प्रियंका को धकेलते हुए उस ने उसे बैड पर दोबारा पटक दिया. उस के हाथपैर बांध दिए. उस के साथ जबरदस्ती करने लगा. उस ने उस की जींस की बेल्ट खोलने की कोशिश की.

बचाव में प्रियंका पलट गई. अमन गुस्से में बोला, ‘‘साली… हरामजादी, हमारी बिल्ली, हम से म्याऊं. यह ले और छटपटा ले.’’ गुस्से में बड़बड़ाते हुए अमन ने उस के गले में रस्सी फंसा कर जोर से खींच दिया. प्रियंका की हलकी सी चीख निकल पड़ी और छटपटाती हुई कुछ पल में ही शांत हो गई.

औंधे मुंह पड़ी प्रियंका को देख कर अमन बोला, ‘‘सीधी तरह मान जाती तो बेहोश नहीं होती. पड़ी रह ऐसे. तेरे साथ मैं तो अब मनमाफिक सैक्स भी करूंगा…’’

अमन प्यार से प्रियंका के बदन को सहलाने लगा. उस की जींस खोल दी. उसे बिकिनी पहनाई. मोबाइल में उस की तसवीरें भी लीं और अपने मन की हर मुराद पूरी कर ली.

पत्नी की बेरुखी के चलते यौन जीवन से वंचित गुबार निकालने के बाद उस ने पाया कि प्रियंका बेहोश नहीं थी, बल्कि उस की सांसें हमेशा के लिए थम चुकी थीं. इस दौरान उस ने प्रियंका की लाश के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध भी बनाए.

प्रियंका की मौत हो जाने का एहसास होने पर वह घबरा गया. उस ने बचाव के लिए फटाफट अपने कपड़े और जरूरी सामान बैग में भरे और फरार हो गया. प्रियंका की लाश उस ने वहीं छोड़ दी. कमरे को इंटरलौक करने के अलावा बाहर से एक दूसरा ताला जड़ दिया.

शाम के करीब 8 बजे अनुप्रिया ड्यूटी से अपने फ्लैट पर आई. बाहर दूसरा ताला जड़ा देख चौंक गई. किसी अनहोनी से भी आशंकित हो गई. कारण इंटरलौक के साथसाथ दूसरा ताला तभी लगाया जाता था, जब दोनों अधिक समय या कुछ दिनों के लिए कहीं बाहर जाते थे.

अमन की स्कूटी नीचे पार्किंग में लगी थी. उस के पास बाहर लगे ताले की एक्स्ट्रा चाबी नहीं थी. वह सोच में पड़ गई. क्या करे… नहीं चाहते हुए भी उस ने अमन के मोबाइल पर काल किया, जो स्विच्ड औफ था.

अब उस की चिंता और बढ़ गई. कुछ देर इंतजार किया. करीब आधे घंटे तक वह नहीं आया, तब उस ने पड़ोसियों की मदद से ताला तुड़वाया.

कमरे में घुसते ही उसे कुछ अच्छा महसूस नहीं हुआ. जहांतहां सामान बिखरा पड़ा था. बैडरूम में जाते ही उस की चीख निकल गई. बैड पर एक युवती की अर्धनग्न लाश पड़ी थी. उस का चेहरा आधा दिख रहा था. उस ने तुरंत उसे पहचान लिया, मुंह से निकल पड़ा, ‘‘अरे यह तो प्रियंका है. यहां कैसे आई?’’

उस ने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को काल कर लाश की सूचना दे दी. पुलिस टीम के साथ 5 मिनट में ही आ गई. पुलिस बैड पर पड़ी लाश की स्थिति, पास पड़ी नीले रंग की नायलोन की रस्सी, गले में रस्सी के गहरे निशान, अस्तव्यस्त बैड की चादर, बिखरे कपड़े आदि से समझ गई कि उस की गला घोट कर हत्या की गई है. युवती का अर्धनग्न शरीर रेप की भी गवाही दे रहा था.

पुलिस ने घटनास्थल की जरूरी काररवाई कर लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में अनुप्रिया ने बताया कि मरने वाली प्रियंका उस की सहेली थी. उस का पति अमन बिष्ट वारदात के बाद से ही फरार है.

शुरुआती जांच में हत्या का संदेह अनुप्रिया के पति पर गया. पुलिस ने मृतका के घर वालों को इस की सूचना दे कर घटनास्थल पर बुला लिया.

मृतका की मां भागीभागी आई. उन्होंने पुलिस को बताया कि उस की बेटी प्रियंका अनुप्रिया के पति अमन के साथ बाजार से साड़ी खरीदवाने के लिए गई थी. अमन ही उसे बुलाने आया था.

इस मामले में थाना बुराड़ी में अमन बिष्ट के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली. अनुप्रिया ने बताया कि उस ने अमन से 2 साल पहले प्रेम विवाह किया था. ग्रैजुएट अनुप्रिया एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करती थी. जबकि अमन एक काल सेंटर में काम करता था.

उस ने हरियाणा से पौलिटैक्निक किया था. अमन के मातापिता उन के प्रेम विवाह से नाराज चल रहे थे. वे अमन से कोई संबंध नहीं रखते थे. इस कारण अमन परिवार वालों से अलग किराए के मकान में रहता था.

फरार अमन की तलाशी के लिए डीसीपी (नौर्थ) सागर सिंह कलसी ने एसीपी स्वागत पाटिल के नेतृत्व में एक टीम बनाई.

टीम में बुराड़ी थानाप्रभारी राजेंद्र प्रसाद, एसआई सतेंद्र कुमार, दीपक कुमार, एएसआई राजीव कुमार, हैडकांस्टेबल सतवीर, परवीन कुमार, कांस्टेबल शीशराम, कुलदीप के साथसाथ महिला कांस्टेबल मेघा को शामिल किया गया.

अमन को ढूंढने की शुरुआत 18 फरवरी से हो गई. उस के फोन नंबर को सर्विलांस पर लगा दिया गया. अगले रोज 19 फरवरी की शाम को दिल्ली पुलिस ने अमन का फोन लखनऊ में औन पाया. तुरंत वहां की पुलिस को सूचना दे कर मदद मांगी गई. लेकिन पुलिस उसे लखनऊ में नहीं दबोच पाई.

मोबाइल फोन सर्विलांस के माध्यम से 20 फरवरी, 2022 को अमन के जयपुर में होने की जानकारी मिली. दिल्ली पुलिस ने तुरंत वहां की पुलिस से संपर्क किया. अमन जयपुर से निकल भागने में सफल नहीं हो पाया. जयपुर की पुलिस ने अमन को बस अड्डे से गिरफ्तार कर लिया.

21 फरवरी की सुबहसुबह अमन बुराड़ी थाने में था. उस से जांच टीम ने प्रियंका की हत्या के मामले में गहन पूछताछ की. जल्द ही उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया.

अमन के बयान के आधार पर उस पर 24 वर्षीय युवती प्रियंका की हत्या और उस के साथ अप्राकृतिक यौनाचार संबंधी आईपीसी की धाराएं लगाई गईं. हत्या की धारा 302 तो पहले से ही एफआईआर में दर्ज थी. उस में बलात्कार की धारा और अप्राकृतिक यौन संबंध की धारा 377 को  भी जोड़ दिया गया.

अमन ने बताया कि उस ने प्रियंका के साथ बलात्कार करने की कोशिश की थी. वह उस की हत्या नहीं करना चाहता था, लेकिन उस के द्वारा  विरोध करने पर गुस्से में उस के गले में रस्सी डाल दी थी. उसे अंदाजा नहीं था कि उस की मौत हो जाएगी.

इस छानबीन के बाद पुलिस ने दावा किया कि आरोपी एक सैक्स उन्मादी युवक था. वह नियमित रूप से पोर्न देखता था. अपनी पत्नी के साथ यौन जीवन से असंतुष्ट था.

इस कारण ही उस ने 24 वर्षीया प्रियंका को निशाना बना लिया था. यहां तक कि वह ड्रग्स और सैक्स क्षमता बढ़ाने वाली गोलियां लेता था. वह अपने करीबी दोस्तों के तानों से भी परेशान था. वे उसे कमजोर मर्द का ताना देते थे.

पूछताछ के दौरान अमन ने पत्नी के वास्ते साड़ी दिलाने के बहाने प्रियंका को अपने कमरे में बुलाने की बात स्वीकार ली. उस की बात मानने से इनकार करने पर जबरदस्ती की. गुस्से में आ कर उस की गरदन पर इतना जोर लगाया कि उस का दम घुट गया.

पुलिस ने नीले रंग की नायलोन की रस्सी बरामद कर ली. मैडिकल रिपोर्ट के आधार पर अप्राकृतिक यौन संबंध का खुलासा हो गया था.

दिल्ली पुलिस ने पूछताछ कर 23 फरवरी, 2022 को उसे कोर्ट में पेश कर दिया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

(यौन उत्पीड़न से संबंधित मामलों पर माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पीडि़ता की निजता की रक्षा के लिए उस की पहचान का खुलासा नहीं किया गया है. कथा में अनुप्रिया और प्रियंका परिवर्तित नाम हैं) Domestic Dispute

Romantic Story: मोहब्बत पर भारी पड़े अरमान

Romantic Story: शाम सुरमई हो चली थी. थकाथका सा निढाल सूरज धीरेधीरे पश्चिम दिशा में डूब रहा था. उस की सिंदूरी किरणें वातावरण में फैली हुई थीं. तहसील बिलाईगढ़ के एक गांव के बाहर अमराई में 2 युवा जोड़े प्रेमालाप में मशगूल थे. आम के दरख्तों की टहनियों में बौर निकल आए थे. टहनियों के बीच कंचे के बराबर अमियां हवा के झोंके से झूम उठा करती थीं. कोयलों की कूक और अमियों की सुगंध से नंदिनी खगेश्वर के प्यार में बढ़ोत्तरी ही हुई थी.

नंदिनी खगेश्वर की बांहों से खुद को आजाद करती हुई हांफ उठी थी. खुद को संभालते हुए और अपनी अनियंत्रित सांसों को काबू करती हुई फुसफुसा कर खगेश्वर प्रसाद से बोली, ‘‘तोषू (खगेश्वर को वह प्यार से तोषू कहती थी), बहुत देर हो गई है, अब मुझे जाने दो. घर वालों को कहीं शक न हो जाए. तुम्हें पता नहीं कि मैं दिशामैदान के बहाने बड़ी मुश्किल से निकल पाई हूं.

‘‘जब भी दिशामैदान की बात आती है, घर वाले कहा करते हैं कि घर में शौचालय स्नानागार की पूरी सुविधा है, इस के बावजूद भी तुम नहाने तालाब पर और दिशामैदान के लिए बाहर जाती हो. ऐसा क्यों करती हो. बस, यही कहती हूं कि घर में रहेरहे हाथपैरों की वर्जिश नहीं हो पाती, इसलिए इसी बहाने बाहर हो आया करती हूं. अब तुम बताओ कि हमेशा तो मैं ऐसा कर नहीं पाऊंगी.’’

खगेश्वर उर्फ तोषू ने फिर से नंदिनी को अपनी बांहों में लेना चाहा, लेकिन नंदिनी खुद को बचाती हुई बोली, ‘‘किसी रोज हम पकड़े जाएंगे, मुझे हमेशा अनजाना सा डर लगा रहता है. आखिर हम कब तक ऐसे ही लुकछिप कर मिला करेंगे?’’

‘‘कुछ महीनों की बात है, मैं ने कुछ रुपए इकट्ठे कर रखे हैं. कुछ रुपए और हो जाएं तो यह लुकछिप कर मिलने वाली बात ही नहीं रहेगी. हम यहां से निकल कर कहीं भी जाएंगे तो सब से पहले सिर ढकने को छत चाहिए. 2-4 महीने के खर्च के लिए रुपए भी चाहिए. इस के लिए मैं कोशिश कर रहा हूं. रायपुर के जयहिंद चौक शीतला मंदिर के पीछे लोधी पारा में मैं ने सभी सुविधाओं वाला एक घर देख रखा है.’’ तोषू गंभीर होता हुआ बोला.

नंदिनी जरा नागवारी के अंदाज में बोली, ‘‘महीनों से सुन रही हूं घर रुपए, घर रुपए. तुम मुझे यहां से ले चलो, दोनों इकट्ठे मिल कर कमाएंगे, 12वीं तक मैं भी तो पढ़ी हूं. 12-15 हजार रुपए मैं खुद कमा सकती हूं. 10-12 हजार तुम कमा लोगे. 20-25 हजार में दालरोटी तो चल ही जाएगी.’’

तोषू बोला, ‘‘मेरा वादा है, अगले महीने की 25 तारीख को हम दोनों यहां से निकल चलेंगे. लेकिन मेरी शर्त है, मैं अपने वादे पर तभी अमल करूंगा जब तुम मुझे…’’ कहते हुए तोषू ने निश्चिंत खड़ी नंदिनी के मुखड़े को हथेलियों के बीच लेते हुए भरेभरे होंठों का चुंबन लिया, गहरा और चटख चुंबन.

‘‘अब मैं तुम से 25 तारीख को ही मिलूंगी,’’ नंदिनी मीठी झिड़की लगाती हुई बोली.

‘‘25 तारीख आने में अभी एक महीना बाकी है मेरी जान, तब तक मैं कैसे गुजारूंगा?’’ तोषू तुरंत मनुहार करते हुए बोला.

‘‘ये तुम जानो, मैं चली. याद रखना, 25 यानी 25.’’

फिर नंदिनी वहां रुकी नहीं. तोषू पीछे से पुकारता रह गया, ‘‘सुनो तो…सुनो नंदिनी.’’

नंदिनी को रुकना नहीं था, वह वहां रुकी नहीं. इस के बाद नंदिनी ने किसी भी बहाने अब घर से निकलना बंद कर दिया.

नंदिनी कोसरिया और खगेश्वर कोसरिया उर्फ तोषू छत्तीसगढ़ के जिला बलौदाबाजार के कस्बा बिलाईगढ़ के रहने वाले थे. दोनों ही एकदूसरे को दिलोजान से चाहते थे. लेकिन मुलाकात न हो पाने की वजह से तोषू अधजले परवाने की तरह छटपटाने लगा. नंदिनी भी अंदर ही अंदर छटपटाती रही लेकिन तोषू से मिलना उचित नहीं समझा. ऐसा उस ने इसलिए किया कि यदि वह तोषू से मिल लेती तो तोषू फिर अपने वादे पर कायम नहीं रह पाता. प्यार में तड़प जरूरी थी. भले ही वह तोषू से मिलने के लिए मन ही मन व्याकुल हुए जा रही थी.

नंदिनी से मुलाकात करने के लिए उस ने बहुतेरे प्रयास किए लेकिन असफल ही रहा. तोषू अपने घर के बरामदे में उदास बैठा हुआ था कि एक 10-12 साल की एक लड़की दौड़ती हुई आई और तोषू के हाथ में एक कागज थमा गई. उसी पैर लौटने हुए वह बोली, ‘‘नंदिनी दीदी ने तुम्हें देने को कहा है.’’

फिर वह अबोध लड़की वहां ठहरी नहीं, कुलांचे भरती हुई वहां से निकल गई. तोषू वापस लौट कर बरामदे में बैठा और तह किए हुए उस कागज की परतें खोलीं. उस खत में कुछ ही लाइनें लिखी थीं. वह इस राइटिंग को बखूबी पहचानता था. वह उस की प्रेमिका नंदिनी की थी. लिखा था, ‘तोषू जान, जुदाई के ये पल आत्मा को लहूलुहान कर रहे हैं. मुझे अहसास है कि इस पीड़ा से तुम भी घायल जरूर हो गए होगे. 23 तारीख को वहीं मुलाकात होगी. उम्मीद है भविष्य में साथ रह सकें, तैयारी तुम्हारी ओर से पूरी हो गई होगी. मैं ने अभी से पैकिंग करनी शुरू कर दी है. बस, मुझे तुम्हारे पैरों के निशां पर कदम बढ़ाना है. तुम्हारी नंदिनी.’

तोषू की आंखों में आंसू झिलमिला उठे. खत में उसे नंदिनी का चेहरा उभरता दिख रहा था. उस ने कई बार खत को उस रात पढ़ा. नंदिनी के शब्दों पर उस ने दीवानों की तरह चुंबन लगाए. 2 दिन बचे थे. नंदिनी के दिए गए समय को आने में 2 दिन उस ने जैसे अंगारों पर लोट कर समय गुजारा. इस बीच उसे अपनी शेव करने का खयाल भी नहीं आया. पहले से मुकर्रर मिलने की जगह पर तोषू पहुंच कर प्रेमिका का इंतजार करने लगा. उस ओर टकटकी लगाए हुए निहार रहा था, जिस रास्ते से नंदिनी को वहां पहुंचना था.

शाम को धुंधलका काबिज हो चुका था. कोहरे ने बिलाईगढ़ कस्बे को अपने में समेटने का भरसक प्रयास किया था. शाम होने के पहले ही शाम का आभास वातावरण में व्याप्त था. उस ने देखा, कोहरे की धुंध को चीरती हुई कोई चली आ रही है. कदकाठी और चलने के अंदाज ने उसे इस बात का अहसास करा दिया कि आने वाली उस की जाने जिगर, जाने तमन्ना नंदिनी है. तोषू ने कोहरे में ही हाथ हिला कर अपनी मौजूदगी का भान नंदिनी को करवाने का प्रयास किया. नंदिनी दूर से ही तोषू को पहचान चुकी थी. पहचानती भी क्यों नहीं, 7 महीने से दोनों प्रेम के झूले में जो झूल रहे थे.

नंदिनी तोषू के करीब पहुंची. दौड़ कर नंदिनी अपने तोषू के कंधे से जा लगी. सिसक जो पड़ी नंदिनी. अनायास तोषू के हाथ गर्दिश करने लगे. सुबकती हुई नंदिनी बोली, ‘‘कैसे मैं ने इतने दिन गुजारे तोषू, अब मैं तुम से एक पल को अलग नहीं रहूंगी. तुम्हारी कसम तोषू, जुदाई के पल कितने गहन और भयावह हुआ करते हैं, सोचने से ही कलेजा मुंह को आ जाता है.’’

अपने से दूर करता हुआ भर्राई आवाज में तोषू बोला, ‘‘मेरी भी स्थिति तुम से अलग नहीं रही है. जुदाई के गम को किसी तरह बरदाश्त करता रहा हूं.’’

दोनों वहीं एक पत्थर की आड़ ले कर बैठ गए. उन दोनों में भविष्य को ले कर बातचीत होने लगी. बातचीत में यह बात उन लोगों के बीच मुख्य रही कि कब, कहां और कितने बजे मिलना है. उस दिन लुकाछिपी का उन का यह मिलन आखिरी था. रात के चौथे पहर में नंदिनी घर छोड़ कर निकल गई. अलसुबह आवागमन का साधन तो था नहीं, पहले से ही खगेश्वर ने अपने दोस्त से एक बाइक की व्यवस्था कर ली थी.

बाइक पर सवार हो कर वह बिलाईगढ़ से बलौदा बाजार पहुंचा. बाइक को वह कहां खड़ी करेगा, कहां रखेगा, बाइक की चाबी किस को सौंपेगा, यह सब उस ने अपने दोस्त को पहले से ही बता दिया था. बलौदा बाजार से सुबहसुबह बस पकड़ कर वे दोनों रायपुर पहुंचे. यहां पर खगेश्वर उर्फ तोषू ने पहले से ही लोधीपारा शीतला मंदिर के पास किराए का कमरा ले रखा था. लिहाजा खगेश्वर को नंदिनी को यहांवहां ले कर भटकना नहीं पड़ा.

मकान मालिक अरुण जहोल को उस ने नंदिनी का परिचय अपनी पत्नी के रूप में कराया. पहचान के लिए उस ने मकान मालिक को आधार कार्ड दिखाया. संतुष्ट होने के बाद अरुण जहोल ने किराए पर उन दोनों को कमरे की चाबी दे दी. हफ्ते 15 दिन तक दोनों भयभीत रहे. दोनों के घर वालों को यह समझते देर नहीं लगी कि दोनों गांव छोड़ कर चल गए हैं. थोड़ा होहल्ला हुआ गांव में.

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चूंकि दोनों एक ही जाति के थे, इसलिए यह मामला विशेष तूल नहीं पकड़ा. दोनों के घर वालों को यह समझने में जरा भी दिक्कत नहीं हुई कि नंदिनी खगेश्वर के साथ भाग गई है. नंदिनी के पिता ने बेटी के गायब होने की थाने में रिपोर्ट तक नहीं लिखाई. जो होना था, वह हो चुका था. सांप निकल चुका था. लकीर पीटने से हालात सुधर नहीं सकते थे. लिहाजा दोनों पक्षों ने खामोशी से समझौता कर लिया था.

इधर दूसरी ओर खगेश्वर कब तक घर में बैठा रहता. उस ने एक कपड़े की दुकान में नौकरी कर ली. खगेश्वर जब काम पर चला जाता, तब नंदिनी घर में अकेली बैठी बोर होती. खगेश्वर से उस ने एक बार कहा, ‘‘तुम्हारे काम पर चले जाने के बाद घर में मैं अकेली बोर हो जाया करती हूं. अगर तुम कहो तो मैं भी कहीं कुछ काम कर लूं. इस से आमदनी तो बढ़ेगी, साथ ही मेरी बोरियत भी दूर हो जाएगी.’’

पहले तो खगेश्वर ने उसे नौकरी के लिए मना किया लेकिन नंदिनी के काफी मनुहार और बोरियत का हवाला देने पर किसी तरह से वह राजी हो गया. इस दिशा में नंदिनी को बहुत ज्यादा भटकना नहीं पड़ा. उसे सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी मिल गई. आय का जरिया भी बढ़ गया और नंदिनी की बोरियत भी दूर हो गई. सब कुछ अच्छाअच्छा गुजरने लगा. दोनों को साथ रहते हुए एक साल गुजरने को था. दोनों के घर वाले भी कभीकभी उन से मिलने लोधीपारा आनेजाने लगे थे. उन के घर वालों को यह देख कर संतोष मिलता था कि चलो दोनों कमाखा रहे हैं, सुखी हैं.

दोनों के घरवालों को किसी तरह का किसी से कोई गिलाशिकवा नहीं रह गया था. जब सब कुछ अच्छा गुजरने लगा तो एक नया ही फितूर नंदिनी पर काबिज होता चला गया. जब भी वह टीवी पर शादी से संबंधित रस्मोरिवाज होते हुए देखती तो उसे खुद से मलाल होने लगता था. अकसर वह खगेश्वर उर्फ तोषू से इस बात का जिक्र कर बैठती कि काश! हमारी भी ऐसी ही धूमधड़ाके से शादी हुई होती. तुम बारात ले कर आते, मंडप सजा होता, सहेलियों के बीच मैं छिपी होती. एक रस्म तुम्हें मालूम है तोषू, जिस पत्तल पर वधू खाना खाती है, उसी पत्तल को लपेट कर छिप कर उस से वर को मारती भी है.

‘‘जब होना था, तब तो हुआ नहीं और अब लाख चाहने के बावजूद यह संभव नहीं है. ऐसी बातें सोच कर क्यों अपना दिल दुखाती हो और मेरा मूड भी खराब करती हो.’’ खगेश्वर ने समझाया.

दोनों के बीच और कई तरह के मुद्दों को ले कर अकसर तकरार होने लगती थी. मोहल्ले के लोग समझाबुझा कर दोनों को शांत करा दिया करते थे. अकसर उन दोनों में इन्हीं बातों को ले कर जबतब कलह हो जाती थी. एक रोज खगेश्वर अपने दोस्त की शादी में गया हुआ था. अपने मोबाइल पर उस ने शादी के रस्मोरिवाजों को शूट किया. शूट किए हुए मोबाइल की वीडियो उस ने नंदिनी को दिखाईं तो उस के सोए अरमान फिर जाग उठे. उसी मुद्दे को ले कर वह तकरार करने लगी.

उस ने उलाहना देते हुए खगेश्वर से कहा, ‘‘लोग अपनी माशूका के लिए चांदसितारे तोड़ लाने का माद्दा रखते हैं और तुम हो कि मेरी एक इच्छा भी पूरी नहीं कर सकते.

‘‘सुनो, मैं आसमां को बांहों में समेटने को नहीं कह रही हूं. सिर्फ इतना चाहती हूं कि हम दोनों एक बार रस्मोरिवाजों के मुताबिक शादी कर लेते. अच्छी सी पार्टी देते. ढेर सारे मेहमान आते. कितना अच्छा लगता.’’

तोषू दिन भर का थकामांदा आया था. इस वक्त दोनों खाना खा कर बैड पर लेटे हुए बातें कर रहे थे, ‘‘यार, तुम समझती नहीं हो. अब न तुम माशूका रह गई और न मैं आशिक. हम दोनों का रिश्ता पतिपत्नी का हो चुका है.’’

‘‘वक्त गुजर गया, इन सब बातों के लिए. कैसी बातें कर रहे हो. कौन सा हम लोग बुड्ढे हो गए हैं या हमारे 4-6 बच्चे हो गए हैं. सच्ची कह रही हूं तोषू, मेरी यह इच्छा पूरी कर दो.’’ वह मनुहार से बोली, ‘‘2 ही साल तो हुए हैं हमें पतिपत्नी बने हुए.’’

‘‘यार, मेरा मूड खराब मत किया करो.’’

‘‘मैं कहां खराब कर रही हूं. पैसों को ले कर तुम चिंता मत करो, मेरे पास पैसे हैं. बस तुम हां कह दो.’’

माहौल तल्ख होता चला गया. तूतूमैंमैं पर दोनों उतर आए. दोनों के बीच तकरार इतनी बढ़ गई कि हालात बेकाबू होते चले गए. बात 2 मार्च, 2022 की है. जिले के थाना पंडरी के थानाप्रभारी उमाशंकर राठौर के पास एक युवक बदहवास सा तेजी के साथ थाने में आया. ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उस युवक को रोकना चाहा लेकिन वह रुका नहीं. युवक सीधे थानाप्रभारी उमाशंकर राठौर के सामने जा कर बोला, ‘‘साहब, मेरा नाम खगेश्वर कोसरिया है. मैं ने अपनी पत्नी नंदिनी को मार डाला. मैं बीवी का हत्यारा हूं. उस की लाश कमरे में पड़ी है.’’

उस की बात सुन कर थानाप्रभारी चौंक गए. उन्होंने उस से पूरी बात विस्तार से बताने को कहा. इस के बाद खगेश्वर उर्फ तोषू सब कुछ सिलसिलेवार बताता चला गया.

पूरी बात सुनने के बाद राठौर ने यह बात एसपी प्रशांत अग्रवाल एएसपी तारकेश्वर पटेल को भी बता दी. उन के निर्देश पर खगेश्वर को गिरफ्तार कर लिया.

इस के बाद पुलिस खगेश्वर को साथ ले कर उस के कमरे पर पहुंची तो वहां नंदिनी की लाश पड़ी थी. खगेश्वर ने बताया कि उस ने नंदिनी का गला घोटा था. सामाजिक रीतिरिवाज से शादी करने को ले कर उस ने उस का जीना हराम कर दिया था, इसलिए गुस्से में उसे मार डाला.

पुलिस ने मौके की काररवाई कर लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी और खगेश्वर उर्फ तोषू से पूछताछ के बाद उसे हत्या के  आरोप में 2 मार्च, 2022 को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. Romantic Story

Allahabad Crime: बेबी को पति नहीं प्रेमी पसंद है

Allahabad Crime: 14 नवंबर, 2016 की शाम उत्तर प्रदेश के जिला इलाहाबाद के थाना नैनी के मोहल्ला करबला का रहने वाला मोहम्मद हुसैन रोज की अपेक्षा आज कुछ जल्दी ही घर आ गया था. हाथमुंह धोने के बाद वह चाय पी कर टीवी देखते हुए 2 साल की बेटी शैजल के साथ खेलने लगा तो पत्नी बेबी ने पास आ कर कहा, ‘‘लगता है, अब आप को कहीं नहीं जाना?’’

‘‘क्यों, कोई काम है क्या?’’

‘‘हां, अगर आप को कहीं नहीं जाना तो चल कर मेरे मोबाइल का चार्जर खरीदवा लाओ. कितने दिनों से खराब पड़ा है. दूसरे का चार्जर मांग कर कब तक काम चलेगा.’’

हुसैन बेबी की बात को टाल नहीं सका और फौरन तैयार हो गया. बेबी को भी साथ जाना था, इसलिए वह भी फटाफट तैयार हो गई. बेटी को उस ने सास के हवाले किया और पति के साथ बाजार के लिए चल पड़ी.

मोबाइल शौप उन के घर से महज 2 सौ मीटर की दूरी पर थी. जैसे ही दोनों दुकान के सामने पहुंचे, एक मोटरसाइकिल उन के सामने आ कर रुकी. मोटरसाइकिल सवार हेलमेट लगाए था, इसलिए कोई उसे पहचान नहीं सका. पतिपत्नी कुछ समझ पाते, उस के पहले ही उस ने कमर में खोंसा तमंचा निकाला और हुसैन के सीने पर रख कर गोली दाग दी.

गोली लगते ही हुसैन जमीन पर गिर पड़ा. शाम का समय था इसलिए बाजार में काफी भीड़भाड़ थी. पहले तो लोगों की समझ में नहीं आया कि क्या हुआ. लेकिन जैसे ही लोगों को सच्चाई का पता चला, बाजार में अफरातफरी मच गई. धड़ाधड़ दुकानों के शटर गिरने लगे. इस अफरातफरी का फायदा उठा कर बदमाश भाग गया. कोई भी उसे पकड़ने की हिम्मत नहीं कर सका.

हुसैन का घर घटनास्थल के नजदीक ही था, इसलिए उसे गोली मारे जाने की सूचना जल्दी ही उस के घर तक पहुंच गई. खून से लथपथ जमीन पर पड़ा हुसैन तड़प रहा था. बेबी उस का सिर गोद में लिए रो रही थी.

सूचना मिलते ही आननफानन में हुसैन के घर वाले और पड़ोसी आ गए थे. घटना की सूचना पा कर थाना नैनी की पुलिस भी आ गई थी. चूंकि हुसैन की सांसें चल रही थीं, इसलिए पुलिस और घर वाले उसे उठा कर पास के एक नर्सिंगहोम में ले गए. उस की हालत काफी नाजुक थी, इसलिए नर्सिंगहोम के डाक्टरों ने उसे स्वरूपरानी नेहरू जिला चिकित्सालय ले जाने की सलाह दी. लेकिन हुसैन की हालत प्रति पल बिगड़ती ही जा रही थी.

पुलिस हुसैन को ले कर जिला अस्पताल ले गई लेकिन वहां पहुंचतेपहुंचते उस की मौत हो चुकी थी. वहां के डाक्टरों ने उसे देखते ही मृत घोषित कर दिया. हुसैन की मौत की जानकारी होते ही उस के घर में कोहराम मच गया. मां और पत्नी का रोरो कर बुरा हाल था. इस हत्या की सूचना पा कर एसपी (गंगापार) ए.के. राय, सीओ करछना बृजनंदन एवं नैनी समेत कई थानों की पुलिस आ गई थी.

हुसैन के बड़े भाई नफीस की तहरीर पर थाना नैनी पुलिस ने हुसैन की बीवी बेबी और उस के प्रेमी सल्लन मौलाना के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर बेबी को तुरंत हिरासत में ले लिया था.

अगले दिन पोस्टमार्टम के बाद हुसैन का शव उस के घर वालों को सौंप दिया गया था. उस के अंतिम संस्कार के बाद बेबी से पूछताछ शुरू हुई. पहले तो वह खुद को निर्दोष बताती रही, लेकिन जब पुलिस ने मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए सवालों की झड़ी लगाई तो वह असलियत छिपा नहीं सकी. उस ने स्वीकार कर लिया कि उसी ने पति की हत्या उस के दोस्त सल्लन मौलाना से कराई थी. इस के बाद पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर 16 नवंबर को छिवकी जंक्शन से सल्लन को भी गिरफ्तार कर लिया था.

थाना नैनी के थानाप्रभारी इंसपेक्टर अवधेश प्रताप सिंह और अन्य पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में मृतक हुसैन की पत्नी बेबी बेगम और दोस्ती में दगा देने वाले सल्लन ने हुसैन की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी—

इलाहाबाद में यमुनापार स्थित थाना नैनी के मुरादपुर करबला निवासी मोहम्मद हुसैन का निकाह सन 2013 में कोरांव गांव की रहने वाली बेबी के साथ हुआ था. हुसैन औटो चलाता था. वह इतना कमा लेता था कि परिवार हंसीखुशी से रह रहा था. शादी के करीब साल भर बाद ही वह बेटी शैजल का बाप बन गया तो उस का परिवार भरापूरा हो गया.

हुसैन की दोस्ती मोहल्ला लोकपुर के रहने वाले सल्लन से थी, जो थाना नैनी का हिस्ट्रीशीटर था. मुरादपुर अरैल में उस की तूती बोलती थी. वह मौलाना के नाम से मशहूर था. सल्लन मोहम्मद हुसैन के घर भी आताजाता था. इसी आनेजाने में कब सल्लन और हुसैन की पत्नी बेबी की आंखें चार हो गईं, हुसैन को पता नहीं चला. क्योंकि वह तो अपने दोस्त सल्लन पर आंखें मूंद कर विश्वास करता था.

आंखें चार होने के बाद सल्लन अपने दोस्त हुसैन की अनुपस्थिति में भी उस के घर आनेजाने लगा. जैसे ही हुसैन औटो ले कर घर से निकलता, बेबी सल्लन को फोन कर के घर बुला लेती. इस के बाद दोनों ऐश करते. ऐसी बातें छिपी तो रहती नहीं, सल्लन और बेबी के संबंधों की जानकारी पहले मोहल्ले वालों को, उस के बाद हुसैन तथा उस के घर वालों को हो गई.

लेकिन सल्लन के डर से कोई सीधे उस से कुछ कहने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था. लेकिन जब मोहल्ले वाले हुसैन और उस के घर वालों पर तंज कसने लगे तो घर वालों ने हुसैन पर सल्लन से दोस्ती खत्म कर के उस के घर आनेजाने पर पाबंदी लगाने को कहा. उन का कहना था कि अगर इसी तरह चलता रहा तो बेबी नाक कटवा सकती है.

उस समय तो हुसैन कुछ नहीं बोला, लेकिन पत्नी की बेवफाई पर वह तड़प कर रह गया. दोस्त सल्लन की करतूत सुन कर उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे. इतना सब जानने के बाद भी उस ने सल्लन से कुछ नहीं कहा. इसलिए उस की और सल्लन की दोस्ती में कोई फर्क नहीं पड़ा. अलबत्ता हुसैन ने बेबी पर जरूर शिकंजा कसा. उस ने उसे समझाया कि वह जो कर रही है, वह ठीक नहीं है.

बेबी ने हुसैन को सफाई दी कि लोग उसे बिनावजह बदनाम कर रहे हैं. कभीकभार सल्लन उसे पूछने घर आ जाता है तो क्या वह उसे घर से भगा दे. बेबी ने सफाई भले दे दी, लेकिन वह समझ गई कि पति को उस के और सल्लन के संबंधों का पता चल गया है. यही नहीं, उसे यह भी पता चल गया था कि इस की शिकायत हुसैन के भाई हसीन ने की थी. इसलिए उस ने सल्लन से उसे सबक सिखाने के लिए कह दिया ताकि दोनों आराम से मौजमस्ती कर सकें.

हसीन ने जो किया था, वह सल्लन को बुरा तो बहुत लगा लेकिन न जाने क्यों वह शांत रहा. शायद ऐसा उस ने हुसैन की वजह से किया था. उस के बाद उस ने हुसैन के घर भी आनाजाना कम कर दिया था. लेकिन मौका मिलते ही बेबी से मिलने जरूर आ जाता था. इसी का नतीजा यह निकला कि एक दिन हुसैन दोपहर में घर आ गया और उस ने बेबी व सल्लन को रंगेहाथों पकड़ लिया.

सल्लन तो सिर झुका कर चला गया, लेकिन बेबी कहां जाती. पत्नी की कारगुजारी आंखों से देख कर हुसैन का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया. क्योंकि उस पर भरोसा कर के उस ने घर वालों तक की बात नहीं मानी थी. उस गुस्से में हुसैन ने बेबी की जम कर पिटाई कर दी. इस के बाद बेबी ने कान पकड़ कर माफी मांगी कि अब वह इस तरह की गलती दोबारा नहीं करेगी.

हुसैन ने पत्नी को माफ तो कर दिया, लेकिन अब उसे न तो पत्नी पर भरोसा रहा और न दोस्त सल्लन पर. इसलिए वह दोनों पर नजर रखने लगा. बेबी ने पति से माफी जरूर मांग ली थी, लेकिन अपनी हरकतों से बाज नहीं आई.

चोरीछिपे वह सल्लन से फोन पर बातें करती रहती. इस का नतीजा यह निकला कि सन 2016 के जुलाई महीने के अंतिम सप्ताह में वह सल्लन के साथ भाग गई. इस से मोहल्ले और रिश्तेदारी में काफी बदनामी हुई. इस के बाद दोनों के घर वालों के बड़ेबुजुर्गों के हस्तक्षेप के बाद हुसैन और उस के घर वाले बेबी को अपने घर ले आए.

दरअसल, बेबी के मायके वालों को उस की यह हरकत काफी बुरी लगी थी. वे नहीं चाहते थे कि बेबी अपना अच्छाखासा बसाबसाया घर बरबाद कर के एक गुंडे के साथ रहे. क्योंकि इस से उन की भी बदनामी हई थी. सब के दबाव में हुसैन बेबी को घर तो ले आया था लेकिन घर आने के बाद उस ने उस की जम कर धुनाई की थी.

महीने, 2 महीने तक तो सब ठीक रहा, लेकिन इस के बाद बेबी फिर पहले की तरह फोन पर अपने यार सल्लन से बातें करने लगी. शायद उसी के कहने पर सल्लन ने हुसैन के छोटे भाई पर गोली चलाई थी, जिस में वह बालबाल बच गया था. हसीन ने इस वारदात की रिपोर्ट दर्ज करानी चाही तो इस बार भी बड़ेबुजुर्गों ने बीच में पड़ कर दोनों पक्षों का थाने में समझौता करा दिया.

बेबी से सल्लन की जुदाई बरदाश्त नहीं हो रही थी. यही हाल सल्लन का भी था. दोनों ही एकदूसरे के बिना रहने को तैयार नहीं थे. लेकिन बेबी ऐसा नाटक कर रही थी, जैसे हुसैन ही अब उस का सब कुछ है.

पत्नी में आए बदलाव से हुसैन पिछली बातें भूल कर उसे माफ कर चुका था. हुसैन की यह अच्छी सोच थी, जबकि बेबी कुछ और ही सोच रही थी. अब वह पति को राह का कांटा समझने लगी थी, जिसे वह जल्द से जल्द निकालने पर विचार कर रही थी. क्योंकि अब वह पूरी तरह सल्लन की होना चाहती थी.

मन में यह विचार आते ही एक दिन उस ने प्रेमी से बातें करतेकरते रोते हुए कहा, ‘‘सल्लन, अब मुझ से तुम्हारी जुदाई बरदाश्त नहीं होती. हुसैन मुझे छूता है तो लगता है कि मेरे शरीर पर कीड़े रेंग रहे हैं. अब तुम मुझे हुसैन से मुक्त कराओ या मुझे मार दो. ये दोहरी जिंदगी जीतेजीते मैं खुद तंग आ गई हूं.’’

बेबी की बातें सुन कर सल्लन तड़प उठा. उस ने कहा, ‘‘तुम्हें मरने की क्या जरूरत है. मरेंगे तुम्हारे दुश्मन. बेबी, जो हाल तुम्हारा है, वही मेरा भी है. तुम कह रही हो तो मैं जल्दी ही प्यार की राह में रोड़ा बन रहे हुसैन को ठिकाने लगाए देता हूं.’’

इस के बाद बेबी और सल्लन ने मोबाइल फोन पर ही हुसैन को ठिकाने लगाने की योजना बना डाली. उसी योजना के अनुसार, 14 नवंबर, 2016 की शाम बेबी हुसैन को चार्जर खरीदवाने के बहाने लोकपुर मोहल्ला स्थित मोबाइल शौप पर ले आई, जहां पहले से घात लगाए बैठे सल्लन मौलाना ने गोली मार कर हुसैन की हत्या कर दी.

सल्लन की निशानदेही पर थाना नैनी पुलिस ने 315 बोर का देसी पिस्तौल और एक जिंदा कारतूस बरामद कर लिया. पूछताछ के बाद पुलिस ने सल्लन और बेबी को इलाहाबाद अदालत में पेश किया था, जहां से दोनों को जिला कारागार, नैनी भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक किसी की जमानत नहीं हुई थी. Allahabad Crime

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Love Story: प्रेम कहानी का दर्दनाक अंत

Love Story: 29 जुलाई, 2017 की रात साहिल उर्फ शुभम वोल्वो बस पकड़ कर लखनऊ से जौनपुर जा रहा था. उस के साथ उस का भाई सनी भी था. रात गहराते ही बस की लगभग सभी सवारियां सो गई थीं. रात 2 बजे फोन की घंटी बजी तो साहिल की आंखें खुल गईं. उस ने मोबाइल स्क्रीन देखी, नंबर उस की भाभी शिवानी का था. उस ने जैसे ही फोन रिसीव कर के कान से लगाया, दूसरी ओर से शिवानी ने रोते हुए कहा, ‘‘साहिल, राहुल अब नहीं रहा. मैं भी उस के बिना नहीं रह सकती.’’

‘‘कैसे, क्या हुआ, कहां है राहुल?’’ साहिल ने परेशान हो कर पूछा.

‘‘राहुल ने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली है. वह परदे की रस्सी बना कर उसी से लटक गया है.’’ शिवानी ने रोतेरोते कहा.

उस समय साहिल लखनऊ से काफी दूर बस में था. वह खुद कुछ कर नहीं सकता था, इसलिए वह सोचने लगा कि शिवानी की मदद कैसे की जाए. एकाएक उस की समझ में कुछ नहीं आया तो उस ने कहा, ‘‘भाभी, आप जल्दी से राहुल भैया को उतारिए.’’

‘‘साहिल, मैं हर तरह से कोशिश कर चुकी हूं, पर उतार नहीं पाई. मैं ने घर से बाहर जा कर कालोनी वालों को आवाज भी लगाई, पर कोई भी मेरी मदद के लिए नहीं आया. अब तुम्हीं बताओ मैं क्या करूं. मैं राहुल के बिना कैसे रहूंगी?’’ शिवानी ने रोते हुए साहिल से मदद मांगी.

‘‘भाभी, मैं तो लखनऊ से बहुत दूर हूं. आप एक काम करें, वहीं मेज पर लाइटर रखा होगा, आप उस से परदे की गांठ में आग लगा दीजिए, परदा जल कर टूट जाएगा. आप इतना कीजिए, तब तक मैं मदद के लिए किसी से बात करता हूं.’’

कह कर साहिल ने फोन काट दिया. इस के बाद उस ने अपने कुछ दोस्तों को फोन किए, पर किसी से बात नहीं हो सकी. इस के बाद उस ने लखनऊ पुलिस को फोन किया. उस वक्त रात के करीब ढाई बजे थे. लखनऊ पुलिस को फोन कर के साहिल ने बताया कि उस का भाई राहुल और भाभी शिवानी विनयखंड, गोमतीनगर के मकान नंबर 3/137 में रहते हैं, जो होटल आर्यन के पास है. उस के भाई को कुछ हो गया है. वह जौनपुर से विधायक और एक बार सांसद रह चुके कमला प्रसाद सिंह का पोता है.

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कमला प्रसाद सिंह की जौनपुर में अच्छी साख थी. वह 2 बार जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके थे. जमुई में उन का इंटर कालेज भी है. उन के 2 बेटे विनय और अनिल हैं. राहुल अनिल का बड़ा बेटा था. पुलिस को जैसे ही पता चला कि विधायक और सांसद रहे कमला प्रसाद सिंह के घर का मामला है तो पुलिस तुरंत हरकत में आ गई.

पुलिस की पीआरवी टीम के कमांडर रामनरेश गौतम सबइंसपेक्टर सुशील कुमार और ड्राइवर निहालुद्दीन के साथ विनयखंड पहुंच कर आर्यन होटल के पास मकान नंबर 3/137 खोजने लगे. रात का समय था, कालोनी में सन्नाटा पसरा था, इसलिए मकान मिल नहीं रहा था.  पुलिस को फोन करने के बाद साहिल ने शिवानी को फोन किया. लेकिन उस का फोन बंद हो चुका था. साहिल ने इस बात की जानकारी घर वालों को भी दे दी थी. जैसे ही घर वालों को इस घटना का पता चला, उन्होंने शिवानी को फोन करने शुरू कर दिए. लेकिन तब तक शिवानी का फोन बंद हो चुका था. इस से सब परेशान हो गए.

साहिल ने एक बार फिर पुलिस को फोन किया. पुलिस ने बताया कि वे मकान तलाश रहे हैं, लेकिन मकान मिल नहीं रहा है. इस पर साहिल ने कहा, ‘‘मेरे मकान का दरवाजा खुला होगा, क्योंकि भाभी ने बताया था कि वह दरवाजा खोल कर बाहर आई थीं.’’

जैसे फिल्मों और क्राइम सीरियलों में पुलिस समय पर नहीं पहुंचती, उसी तरह यहां भी हुआ. उधर साहिल से बात करने के बाद शिवानी ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया था. वह लाइटर से परदे को जला रही थी, तभी राहुल की गरदन में फंसा फंदा खुल गया और वह नीचे गिर गया. उस के शरीर में कोई हरकत होती न देख शिवानी परेशान हो गई. उसे समझते देर नहीं लगी कि राहुल मर गया है.

पति को मरा देख कर वह वहां रखी प्लास्टिक की कुरसी पर चढ़ गई और परदे के दूसरे छोर में फंदा बना कर गले में डाला और पैर से कुरसी गिरा दी. इस के बाद वह भी लटक गई. थोड़ी देर पहले जो हाल राहुल का हुआ था, वही हाल शिवानी का भी हुआ. इस तरह पुलिस के पहुंचने से पहले ही उस ने भी मौत को गले से लगा लिया.

आखिरकार पुलिस तलाश करती हुई उस घर तक पहुंच गई, जिस का मेनगेट और दरवाजा खुला था. पुलिस ने खिड़की से झांक कर देखा तो पता चला कि एक औरत रस्सी से लटक रही थी और एक पुरुष की लाश फर्श पर पड़ी थी. पुलिस ने कमरे के दरवाजे को धक्का दिया तो वह खुल गया.

मामला एक सांसद के परिवार का था. इसलिए मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने तत्काल एएसपी (उत्तरी) अनुराग वत्स, सीओ (गोमतीनगर) दीपक कुमार सिंह, थाना गोमतीनगर के थानाप्रभारी विश्वजीत सिंह को भी इस घटना की सूचना दे दी. उस समय सभी अधिकारी गश्त पर थे, इसलिए सूचना मिलते ही घटनास्थल पर पहुंच गए.

पुलिस ने जल्दी से लाश उतार कर फर्श पर लेटा दी. पुलिस की गाड़ी देख कर कालोनी वाले भी इकट्ठा होने लगे थे. पुलिस को उन से पूछताछ में पता चला कि ज्यादातर यह मकान खाली ही रहता था. कभीकभी ही कोई उस में रहने आता था. इसलिए आसपास रहने वालों से उन लोगों का कोई खास संबंध नहीं था. आमनेसामने पड़ जाने पर दुआसलाम जरूर हो जाती थी.

सांसद के पौत्र और पौत्रवधू की मौत की खबर पा कर पूरी कालोनी में हड़कंप मच गया था. पुलिस ने घर वालों से बातचीत कर के सच्चाई का पता लगाने की कोशिश की. लेकिन कोई ऐसी बात सामने नहीं आई, जिस से आत्महत्या पर शक किया जा सकता. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी स्पष्ट हो गया था कि मामला आत्महत्या का ही है. पोस्टमार्टम के बाद शिवानी और राहुल की लाशें जौनपुर के लाइनबाजार स्थित कमला प्रसाद सिंह के घर पहुंचीं तो वहां हड़कंप मच गया. घर के सभी लोगों का रोरो कर बुरा हाल था. जौनपुर में ही दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

मामले की जांच के लिए पुलिस ने शिवानी और साहिल के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस से भी पहले से दिए गए बयान और हालात मिलते नजर आए. शिवानी और राहुल के बीच दोस्ती कालेज में पढ़ाई के दौरान हुई थी. जल्दी ही यह दोस्ती प्यार में बदल गई थी. उस के बाद दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया.

शिवानी के पिता सेना से रिटायर हो चुके थे. वह लखनऊ के कैंट एरिया में रहते थे. सन 2015 में घर वालों की मरजी से शिवानी और राहुल की शादी हुई थी. राहुल जौनपुर के केराकत इंटर कालेज में क्लर्क था. शादी के बाद राहुल परिवार के साथ जौनपुर में रहता था. वहीं से वह केराकत जा कर अपनी नौकरी करता था.

कभीकभी राहुल लखनऊ भी आता रहता था. लखनऊ में वह जमीन का कारोबार करने लगा था, जिस से उसे अलग से आमदनी होने लगी थी. लखनऊ के विनयखंड स्थित मकान का उपयोग किसी के आनेजाने पर ही होता था. प्राप्त जानकारी के अनुसार, 2 दिन पहले ही राहुल लखनऊ आया था. जबकि शिवानी पहले से अपने मायके में रह रही थी. क्योंकि कुछ महीनों से राहुल और शिवानी के बीच संबंध ठीक नहीं थे.

पढ़ाई के दौरान एकदूसरे पर जान छिड़कने वाले राहुल और शिवानी के बीच कुछ समय से तनाव रहने लगा था. दोनों को एकदूसरे से दूर रहना गंवारा नहीं था, इसलिए पढ़ाई के बाद कैरियर बनाने के बजाय दोनों ने शादी कर ली थी. शादी के बाद राहुल ने जौनपुर के केराकत स्थित एक इंटर कालेज में नौकरी कर ली थी, जिस की वजह से उसे जौनपुर में रहना पड़ रहा था, जबकि शिवानी को वहां रहना पसंद नहीं था. इस बात को ले कर अकसर दोनों में कहासुनी होती रहती थी.

प्यार के बाद दोनों को ही शादी की हकीकत उतनी प्यारी नहीं लग रही थी, जितनी लगनी चाहिए थी. जौनपुर में मन न लगने से शिवानी लखनऊ में अपने मातापिता के यहां रह रही थी. राहुल जब भी लखनऊ आता, विनयखंड के मकान में ही रुकता था. उस के आने पर शिवानी भी आ जाती थी.

राहुल गुस्सैल स्वभाव का था, इसलिए जराजरा सी बात में दोनों के बीच लड़ाई हो जाती थी. शिवानी राहुल को बहुत प्यार करती थी, जिस की वजह से वह उस के गुस्से के बाद भी उस से अलग नहीं रहना चाहती थी. जबकि शिवानी कभी खुद के बारे में सोचती थी तो उसे लगता था कि अपने कैरियर को ले कर उस ने जो सपने देखे थे, वे सब बिखर गए. इसे ले कर वह भी तनाव में रहती थी.

शिवानी अपनी खुद की पहचान बनाना चाहती थी, पर शादी के बाद इस बात का कोई मतलब नहीं रह गया था. उस का यह द्वंद्व उस के संबंधों पर भारी पड़ रहा था. शिवानी राहुल से कभी कुछ कहती तो आपस में बहस के बाद दोनों में लड़ाई हो जाती थी. ऐसे में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ जाता था.

29 जुलाई, 2017 की शाम को साहिल उर्फ शुभम अपने चचेरे भाई सनी के साथ राहुल से मिलने विनयखंड स्थित घर पर आया. भाइयों के आने की खुशी में पार्टी हुई, जिस में शराब भी चली. पुलिस को वहां मेज पर सिगरेट का एक खाली पैकेट, एक भरा पैकेट, शराब और बीयर की खाली बोतलें मिली थीं. बैड का बिस्तर भी बेतरतीब था. साहिल और सनी के जौनपुर चले जाने के बाद भी राहुल संभवत: शराब पीता रहा था.

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यह बात शिवानी को अच्छी नहीं लगी होगी. उस ने रोका होगा तो दोनों में बहस होने लगी होगी. नशे में होने की वजह से राहुल को गुस्सा आ गया होगा. इस के बाद शिवानी अपने कमरे में जा कर सो गई होगी. रात में 2 बजे के करीब जब उस की नींद खुली होगी तो उस ने देखा होगा कि राहुल परदे की रस्सी का फंदा बना कर उस में लटका है. पति को उस हालत में देख कर शिवानी की कुछ समझ में नहीं आया होगा. नशे में गुस्से की वजह से राहुल ने यह कदम उठा लेगा, यह शिवानी ने कभी नहीं सोचा था. वह परेशान हो गई होगी.

बहुत सारी शिकायतों के बाद भी शिवानी राहुल के बिना जिंदगी नहीं गुजार सकती थी. शायद यही वजह थी कि उस ने भी उस के साथ मरने का फैसला कर लिया. परदे से बनी जिस रस्सी के फंदे पर लटक कर राहुल ने अपनी जान दी थी, उसी के दूसरे सिरे पर फंदा बना कर शिवानी ने भी लटक कर जान दे दी. साथ जीनेमरने की कसम खाने वाली शिवानी ने अपना वचन निभा दिया.

राहुल और शिवानी की मौत अपने पीछे तमाम सवाल छोड़ गई है. प्यार करना, उस के बाद शादी करना कोई गुनाह नहीं है. प्यार के बाद शादी के बंधन को निभाने के लिए पतिपत्नी के बीच जिस भरोसे, प्यार और संघर्ष की जरूरत होती है, वह राहुल और शिवानी के बीच नहीं बन पाया. लड़ाईझगड़े में जान देने जैसे फैसले मानसिक उलझन की वजह से होते हैं. अगर राहुल ने नशे में यह फैसला नहीं लिया होता तो वह भी आज जिंदा होता और शिवानी भी.

राहुल की मौत के बाद शिवानी ने भी खुद को खत्म कर लिया. उन दोनों के इस फैसले से उन के परिवार वालों पर क्या गुजरेगी, उन दोनों ने नहीं सोचा. इस तरह की मौत का दर्द परिवार वालों को पूरे जीवन दुख देता रहता है. ऐसे में अगर पतिपत्नी के बीच कोई अनबन होती है तो जल्दबाजी में कोई फैसला लेना ठीक नहीं होता. Love Story

Family Crime: मौज मजे में पति की हत्या

Family Crime: मानने वाले प्रेमीप्रेमिका और पतिपत्नी का रिश्ता सब से अजीम मानते हैं. लेकिन  जबजब ये रिश्ते आंतरिक संबंधों की महीन रेखा को पार करते हैं, तबतब कोई न कोई संगीन जुर्म सामने आता है.

हरिओम तोमर मेहनतकश इंसान था. उस की शादी थाना सैंया के शाहपुरा निवासी निहाल सिंह की बेटी बबली से हुई थी. हरिओम के परिवार में उस की पत्नी बबली के अलावा 4 बच्चे थे. हरिओम अपनी पत्नी बबली और बच्चों से बेपनाह मोहब्बत करता था. बेटी ज्योति और बेटा नमन बाबा राजवीर के पास एत्मादपुर थानांतर्गत गांव अगवार में रहते थे, जबकि 2 बेटियां राशि और गुड्डो हरिओम के पास थीं. राजवीर के 2 बेटों में बड़ा बेटा राजू बीमारी की वजह से काम नहीं कर पाता था. बस हरिओम ही घर का सहारा था, वह चांदी का कारीगर था.

हरिओम और बबली की शादी को 15 साल हो चुके थे. हंसताखेलता परिवार था, घर में किसी चीज की कोई कमी नहीं थी. दिन हंसीखुशी से बीत रहे थे. लेकिन अचानक एक ऐसी घटना घटी, जिस से पूरे परिवार में मातम छा गया. 3 नवंबर, 2019 की रात में हरिओम अपनी पत्नी और 2 बच्चों के साथ घर से लापता हो गया. पिछले 12 साल से वह आगरा में रह रहा था. 36 वर्षीय हरिओम आगरा स्थित चांदी के एक कारखाने में चेन का कारीगर था.

पहले वह बोदला में किराए पर रहता था. लापता होने से 20 दिन पहले ही वह पत्नी बबली व दोनों बच्चियों राशि व गुड्डो के साथ आगरा के थानांतर्गत सिकंदरा के राधानगर इलाके में किराए के मकान में रहने लगा था. आगरा में ही रहने वाली हरिओम की साली चित्रा सिंह 5 नवंबर को अपनी बहन बबली से मिलने उस के घर गई. वहां ताला लगा देख उस ने फोन से संपर्क किया, लेकिन दोनों के फोन स्विच्ड औफ थे.

चित्रा ने पता करने के लिए जीजा हरिओम के पिता राजबीर को फोन कर पूछा, ‘‘दीदी और जीजाजी गांव में हैं क्या?’’

इस पर हरिओम के पिता ने कहा कि कई दिन से हरिओम का फोन नहीं मिल रहा है. उस की कोई खबर भी नहीं मिल पा रही. चित्रा ने बताया कि मकान पर ताला लगा है. आसपास के लोगों को भी नहीं पता कि वे लोग कहां गए हैं. किसी अनहोनी की आशंका की सोच कर राजबीर गांव से राधानगर आ गए. उन्होंने बेटे और बहू की तलाश की, लेकिन उन की कोई जानकारी नहीं मिली. इस पर पिता राजबीर ने 6 नवंबर, 2019 को थाना सिकंदरा में हरिओम, उस की पत्नी और बच्चों की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

जांच के दौरान हरिओम के पिता राजबीर ने थाना सिकंदरा के इंसपेक्टर अरविंद कुमार को बताया कि उस की बहू बबली का चालचलन ठीक नहीं था. उस के संबंध कमल नाम के एक व्यक्ति के साथ थे, जिस के चलते हरिओम और बबली के बीच आए दिन विवाद होता था. पुलिस ने कमल की तलाश की तो पता चला कि वह भी उसी दिन से लापता है, जब से हरिओम का परिवार लापता है. पुलिस सरगरमी से तीनों की तलाश में लग गई. इस कवायद में पुलिस को पता चला कि बबली सिकंदरा थानांतर्गत दहतोरा निवासी कमल के साथ दिल्ली गई है. उन्हें ढूंढने के लिए पुलिस की एक टीम दिल्ली के लिए रवाना हो गई.

शनिवार 16 नवंबर, 2019 को बबली और उस के प्रेमी कमल को पुलिस ने दिल्ली में पकड़ लिया. दोनों बच्चियां भी उन के साथ थीं, पुलिस सब को ले कर आगरा आ गई. आगरा ला कर दोनों से पूछताछ की गई तो मामला खुलता चला गया. पता चला कि 3 नवंबर की रात हरिओम रहस्यमय ढंग से लापता हो गया था. पत्नी और दोनों बच्चे भी गायब थे. कमल उर्फ करन के साथ बबली के अवैध संबंध थे. वह प्रेमी कमल के साथ रहना चाहती थी. इस की जानकारी हरिओम को भी थी. वह उन दोनों के प्रेम संबंधों का विरोध करता था. इसी के चलते दोनों ने हरिओम का गला दबा कर हत्या कर दी थी.

बबली की बेहयाई यहीं खत्म नहीं हुई. उस ने कमल के साथ मिल कर पति की गला दबा कर हत्या दी थी. बाद में दोनों ने शव एक संदूक में बंद कर यमुना नदी में फेंक दिया था.

  पूछताछ और जांच के बाद जो कहानी सामने आई, वह इस तरह थी—

फरवरी, 2019 में बबली के संबंध दहतोरा निवासी कमल उर्फ करन से हो गए थे. कमल बोदला के एक साड़ी शोरूम में सेल्समैन का काम करता था. बबली वहां साड़ी खरीदने जाया करती थी. सेल्समैन कमल बबली को बड़े प्यार से तरहतरह के डिजाइन और रंगों की साडि़यां दिखाता था. वह उस की सुंदरता की तारीफ किया करता था. उसे बताता था कि उस पर कौन सा रंग अच्छा लगेगा. कमल बबली की चंचलता पर रीझ गया. बबली भी उस से इतनी प्रभावित हुई कि उस की कोई बात नहीं टालती थी. इसी के चलते दोनों ने एकदूसरे को अपने मोबाइल नंबर दे दिए थे.

अब जब भी बबली उस दुकान पर जाती, तो कमल अन्य ग्राहकों को छोड़ कर बबली के पास आ जाता. वह मुसकराते हुए उस का स्वागत करता फिर इधरउधर की बातें करते हुए उसे साड़ी दिखाता. कमल आशिकमिजाज था, उस ने पहली मुलाकात में ही बबली को अपने दिल में बसा लिया था. नजदीकियां बढ़ाने के लिए उस ने बबली से फोन पर बात करनी शुरू कर दी. जब दोनों तरफ से बातों का सिलसिला शुरू हुआ तो नजदीकियां बढ़ती गईं. फोन पर दोनों हंसीमजाक भी करने लगे. फिर उन की चाहत एकदूसरे से गले मिलने लगी. बातोंबातों में बबली ने कमल को बताया कि वह बोदला में ही रहती है.

इस के बाद कमल बबली के घर आनेजाने लगा. जब एक बार दोनों के बीच मर्यादा की दीवार टूटी तो फिर यह सिलसिला सा बन गया. जब भी मौका मिलता, दोनों एकांत में मिल लेते थे. हरिओम की अनुपस्थिति में बबली और कमल के बीच यह खेल काफी दिनों तक चलता रहा. लेकिन ऐसी बातें ज्यादा दिनों तक छिपी नहीं रहतीं, एक दिन हरिओम को भी भनक लग गई. उस ने बबली को कमल से दूर रहने और फोन पर बात न करने की चेतावनी दे दी.

दूसरी ओर बबली कमल के साथ रहना चाहती थी. उस के न मानने पर वह घटना से 20 दिन पहले बोदला वाला घर छोड़ कर सपरिवार सिकंदरा के राधानगर में रहने लगा. 3 नवंबर, 2019 को हरिओम शराब पी कर घर आया. उस समय बबली मोबाइल पर कमल से बातें कर रही थी. यह देख कर हरिओम के तनबदन में आग लग गई. इसी को ले कर दोनों में झगड़ा हुआ तो हरिओम ने बबली की पिटाई कर दी. बबली ने इस की जानकारी कमल को दे दी. कमल ने यह बात 100 नंबर पर पुलिस को बता दी. पुलिस आई और रात में ही पतिपत्नी को समझाबुझा कर चली गई. पुलिस के जाने के बाद भी दोनों का गुस्सा शांत नहीं हुआ, दोनों झगड़ा करते रहे.

रात साढे़ 11 बजे बबली ने कमल को दोबारा फोन कर के घर आने को कहा. जब वह उस के घर पहुंचा तो हरिओम उस से भिड़ गया. इसी दौरान कमल ने गुस्से में हरिओम का सिर दीवार पर दे मारा. नशे के चलते वह कमल का विरोध नहीं कर सका. उस के गिरते ही बबली उस के पैरों पर बैठ गई और कमल ने उस का गला दबा दिया. कुछ देर छटपटाने के बाद हरिओम की मौत हो गई. उस समय दोनों बच्चियां सो रही थीं. कमल और बबली ने शव को ठिकाने लगाने के लिए योजना तैयार कर ली. दोनों ने शव को एक संदूक में बंद कर उसे फेंकने का फैसला कर लिया, ताकि हत्या के सारे सबूत नष्ट हो जाएं.

योजना के तहत दोनों ने हरिओम की लाश एक संदूक में बंद कर दी. रात ढाई बजे कमल टूंडला स्टेशन जाने की बात कह कर आटो ले आया. आटो से दोनों यमुना के जवाहर पुल पर पहुंचे. लाश वाला संदूक उन के साथ था. इन लोगों ने आटो को वहीं छोड़ दिया. सड़क पर सन्नाटा था, कमल और बबली यू टर्न ले कर कानपुर से आगरा की तरफ आने वाले पुल पर पहुंचे और संदूक उठा कर यमुना में फेंक दिया. इस के बाद दोनों अपनेअपने घर चले गए. दूसरे दिन 4 नवंबर को सुबह कमल बबली और उस की दोनों बच्चियों को साथ ले कर दिल्ली भाग गया.

बबली की बेवफाई ने हंसतेखेलते घर को उजाड़ दिया था. उस ने पति के रहते गैरमर्द के साथ रिश्ते बनाए. यह नाजायज रिश्ता उस के लिए इतना अजीज हो गया कि उस ने अपने पति की मौत की साजिश रच डाली. पुलिस 16 नवंबर को ही कमल व बबली को ले कर यमुना किनारे पहुंची. उन की निशानदेही पर पीएसी के गोताखोरों को बुला कर कई घंटे तक यमुना में लाश की तलाश कराई गई, लेकिन लाश नहीं मिली. अंधेरा होने के कारण लाश ढूंढने का कार्य रोकना पड़ा.

रविवार की सुबह पुलिस ने गोताखोरों और स्टीमर की मदद से लाश को तलाशने की कोशिश की. लेकिन कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला. बहरहाल, पुलिस हरिओम का शव बरामद नहीं कर सकी. शायद बह कर आगे निकल गया होगा. पुलिस ने बबली और उस के प्रेमी कमल को न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. Family Crime

Crime Story: रसीली नहीं थी रशल कंवर

Crime Story: डूंगरदान पत्नी को सुखी और खुश रखने के लिए गांव से शहर ले आया था. वह जितना कमाता था, उतने में गृहस्थी आराम से चल जाती थी, लेकिन दिन भर घर में अकेली रहने वाली पत्नी रसाल कंवर ने अपना सुख खोजा पति के दोस्त मोहन सिंह राव में. इस के चलते कुछ न कुछ तो गलत होना ही था. आखिर…

रविवार 14 जुलाई, 2019 का दिन था. दोपहर का समय था. जालौर के एसपी हिम्मत अभिलाष टाक को फोन पर सूचना मिली कि बोरटा-लेदरमेर ग्रेवल सड़क के पास वन विभाग की जमीन पर एक व्यक्ति का नग्न अवस्था में शव पड़ा है.

एसपी टाक ने तत्काल भीनमाल के डीएसपी हुकमाराम बिश्नोई को घटना से अवगत कराया और घटनास्थल पर जा कर काररवाई करने के निर्देश दिए. एसपी के निर्देश पर डीएसपी हुकमाराम बिश्नोई तत्काल घटनास्थल की ओर रवाना हो गए, साथ ही उन्होंने थाना रामसीन में भी सूचना दे दी. उस दिन थाना रामसीन के थानाप्रभारी छतरसिंह देवड़ा अवकाश पर थे. इसलिए सूचना मिलते ही मौजूदा थाना इंचार्ज साबिर मोहम्मद पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.

घटनास्थल पर आसपास के गांव वालों की भीड़ जमा थी. वहां वन विभाग की खाई में एक आदमी का नग्न शव पड़ा था. आधा शव रेत में दफन था. उस का चेहरा कुचला हुआ था. शव से बदबू आ रही थी, जिस से लग रहा था कि उस की हत्या शायद कई दिन पहले की गई है. वहां पड़ा शव सब से पहले एक चरवाहे ने देखा था. वह वहां सड़क किनारे बकरियां चरा रहा था. उसी चरवाहे ने यह खबर आसपास के लोगों को दी थी. कुछ लोग घटनास्थल पर पहुंचे और पुलिस को खबर कर दी.

मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को खाई से बाहर निकाल कर शिनाख्त कराने की कोशिश की, मगर जमा भीड़ में से कोई भी मृतक की शिनाख्त नहीं कर सका. शव से करीब 20 मीटर की दूरी पर किसी चारपहिया वाहन के टायरों के निशान मिले. इस से पुलिस ने अंदाजा लगाया कि हत्यारे शव को किसी गाड़ी में ले कर आए और यहां डाल कर चले गए. पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए. शव के पास ही खून से सनी सीमेंट की टूटी हुई ईंट भी मिली. लग रहा था कि उसी ईंट से उस के चेहरे को कुचला गया था. कुचलते समय वह ईंट भी टूट गई थी.

मौके की सारी काररवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए राजकीय चिकित्सालय की मोर्चरी भिजवा दिया. डाक्टरों की टीम ने उस का पोस्टमार्टम किया. जब तक शव की शिनाख्त नहीं हो जाती, तब तक जांच आगे नहीं बढ़ सकती थी. शव की शिनाख्त के लिए पुलिस ने मृतक के फोटो वाट्सऐप पर शेयर कर दिए. साथ ही लाश के फोटो भीनमाल, जालौर और बोरटा में तमाम लोगों को दिखाए. लेकिन कोई भी उसे नहीं पहचान सका.

सोशल मीडिया पर मृतक का फोटो वायरल हो चुका था. जालौर के थाना सिटी कोतवाली में 2 दिन पहले कालेटी गांव के शैतानदान चारण नाम के एक शख्स ने अपने रिश्तेदार डूंगरदान चारण की गुमशुदगी दर्ज कराई थी. कोतवाली प्रभारी को जब थाना रामसीन क्षेत्र में एक अज्ञात लाश मिलने की जानकारी मिली तो उन्होंने लाश से संबंधित बातों पर गौर किया. उस लाश का हुलिया लापता डूंगरदान चारण के हुलिए से मिलताजुलता था. कोतवाली प्रभारी बाघ सिंह ने डीएसपी भीनमाल हुकमाराम को सारी बातें बताईं.

मारा गया व्यक्ति डूंगरदान चारण था

इस के बाद एसपी जालौर ने 2 पुलिस टीमों का गठन किया, इन में एक टीम भीनमाल थाना इंचार्ज साबिर मोहम्मद के नेतृत्व में गठित की गई, जिस में एएसआई रघुनाथ राम, हैडकांस्टेबल शहजाद खान, तेजाराम, संग्राम सिंह, कांस्टेबल विक्रम नैण, मदनलाल, ओमप्रकाश, रामलाल, भागीरथ राम, महिला कांस्टेबल ब्रह्मा शामिल थी. दूसरी पुलिस टीम में रामसीन थाने के एएसआई विरधाराम, हैडकांस्टेबल प्रेम सिंह, नरेंद्र, कांस्टेबल पारसाराम, राकेश कुमार, गिरधारी लाल, कुंपाराम, मायंगाराम, गोविंद राम और महिला कांस्टेबल धोली, ममता आदि को शामिल किया गया.

डीएसपी हुकमाराम बिश्नोई दोनों पुलिस टीमों का निर्देशन कर रहे थे. जालौर के कोतवाली निरीक्षक बाघ सिंह ने उच्चाधिकारियों के आदेश पर डूंगरदान चारण की गुमशुदगी दर्ज कराने वाले उस के रिश्तेदार शैतानदान को राजदीप चिकित्सालय की मोर्चरी में रखी लाश दिखाई तो उस ने उस की शिनाख्त अपने रिश्तेदार डूंगरदान चारण के रूप में कर दी. मृतक की शिनाख्त होने के बाद पुलिस ने उस के परिजनों से संपर्क किया तो इस मामले में अहम जानकारी मिली. मृतक की पत्नी रसाल कंवर ने पुलिस को बताया कि उस के पति डूंगरदान 12 जुलाई, 2019 को जालौर के सरकारी अस्पताल में दवा लेने गए थे.

वहां से घर लौटने के बाद पता नहीं वे कहां लापता हो गए, जिस की थाने में सूचना भी दर्ज करा दी थी. रसाल कंवर ने पुलिस को अस्पताल की परची भी दिखाई. पुलिस टीम ने अस्पताल की परची के आधार पर जांच की. पुलिस ने राजकीय चिकित्सालय जालौर के 12 जुलाई, 2019 के सीसीटीवी फुटेज की जांच की तो पता चला कि डूंगरदान को काले रंग की बोलेरो आरजे14यू बी7612 में अस्पताल तक लाया गया था. उस समय डूंगरदान के साथ उस की पत्नी रसाल कंवर के अलावा 2 व्यक्ति भी फुटेज में दिखे. उन दोनों की पहचान मोहन सिंह और मांगीलाल निवासी भीनमाल के रूप में हुई. पुलिस जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही थी.

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जांच के बाद गांव के विभिन्न लोगों से पूछताछ की तो सामने आया कि मृतक डूंगरदान चारण की पत्नी रसाल कंवर से मोहन सिंह राव के अवैध संबंध थे. इस जानकारी के बाद पुलिस ने रसाल कंवर और मोहन सिंह को थाने बुला कर सख्ती से पूछताछ की. मांगीलाल फरार हो गया था. रसाल कंवर और मोहन सिंह राव ने आसानी से डूंगरदान की हत्या करने का जुर्म कबूल कर लिया. केस का खुलासा होने की जानकारी मिलने पर पुलिस के उच्चाधिकारी भी थाने पहुंच गए. उच्चाधिकारियों के सामने आरोपियों से पूछताछ कर डूंगरदान हत्याकांड से परदा उठ गया.

पुलिस ने 16 जुलाई, 2019 को दोनों आरोपियों मृतक की पत्नी रसाल कंवर एवं उस के प्रेमी मोहन सिंह राव को कोर्ट में पेश कर 2 दिन के रिमांड पर ले लिया. रिमांड के दौरान उन से विस्तार से पूछताछ की गई तो डूंगरदान चारण की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह कुछ इस तरह थी. मृतक डूंगरदान चारण मूलरूप से राजस्थान के जालौर जिले के बागौड़ा थानान्तर्गत गांव कालेटी का निवासी था. उस के पास खेती की थोड़ी सी जमीन थी. वह उस जमीन पर खेती के अलावा दूसरी जगह मेहनतमजदूरी करता था. उस की शादी करीब एक दशक पहले जालौर की ही रसाल कंवर से हुई थी.

करीब एक साल बाद रसाल कंवर एक बेटे की मां बनी तो परिवार में खुशियां बढ़ गईं. बाद में वह एक और बेटी की मां बन गई. जब डूंगरदान के बच्चे बड़े होने लगे तो वह उन के भविष्य को ले कर चिंतित रहने लगा. गांव में अच्छी पढ़ाई की व्यवस्था नहीं थी, लिहाजा डूंगरदान अपने बीवीबच्चों के साथ गांव कालेटी छोड़ कर भीनमाल चला गया और वहां लक्ष्मीमाता मंदिर के पास किराए का कमरा ले कर रहने लगा. भीनमाल कस्बा है. वहां डूंगरदान को मजदूरी भी मिल जाती थी. जबकि गांव में हफ्तेहफ्ते तक उसे मजदूरी नहीं मिलती थी.

डूंगरदान के पड़ोस में ही मोहन सिंह राव का आनाजाना था. मोहन सिंह राव पुराना भीनमाल के नरता रोड पर रहता था. वह अपराधी प्रवृत्ति का रसिकमिजाज व्यक्ति था. उस की नजर रसाल कंवर पर पड़ी तो वह उस का दीवाना हो गया. मोहन सिंह ने इस के लिए ही डूंगरदान से दोस्ती की थी. इस के बाद वह उस के घर आनेजाने लगा. मोहन सिंह रसाल कंवर से भी बड़ी चिकनीचुपड़ी बातें करता था. जब डूंगरदान मजदूरी करने चला जाता और उस के बच्चे स्कूल तो घर में रसाल कंवर अकेली रह जाती. ऐसे मौके पर मोहन सिंह उस के यहां आने लगा. मीठीमीठी बातों में रसाल को भी रस आने लगा. मोहन सिंह अच्छीखासी कदकाठी का युवक था.रसाल और मोहन के बीच धीरेधीरे नजदीकियां बढ़ने लगीं.

थोड़े दिनों के बाद दोनों के बीच अवैध संबंध कायम हो गए. इस के बाद रसाल कंवर उस की दीवानी हो गई. डूंगरदान हर रोज सुबह मजदूरी पर निकल जाता तो फिर शाम होने पर ही घर लौटता था. रसाल और मोहन पूरे दिन रासलीला में लगे रहते. डूंगरदान की पीठ पीछे उस की ब्याहता कुलटा बन गई थी. दिन भर का साथ उन्हें कम लगने लगा था. मोहन चाहता था कि रसाल कंवर रात में भी उसी के साथ रहे, मगर यह संभव नहीं था. क्योंकि रात में पति घर पर होता था.

ऐसे में एक दिन मोहन सिंह ने रसाल कंवर से कहा, ‘‘रसाल, जीवन भर तुम्हारा साथ तो निभाऊंगा ही, साथ ही एक प्लौट भी तुम्हें ले कर दूंगा. लेकिन मैं चाहता हूं कि तुम्हारे बदन को अब मेरे सिवा और कोई न छुए. तुम्हारे तनमन पर अब सिर्फ मेरा अधिकार है.’’

‘‘मैं हर पल तुम्हारा साथ निभाऊंगी.’’ रसाल कंवर ने प्रेमी की हां में हां मिलाते हुए कहा.

रसाल के दिलोदिमाग में यह बात गहराई तक उतर गई थी कि मोहन उसे बहुत चाहता है. वह उस पर जान छिड़कता है. रसाल भी पति को दरकिनार कर पूरी तरह से मोहन के रंग में रंग गई. इसलिए दोनों ने डूंगरदान को रास्ते से हटाने का मन बना लिया. लेकिन इस से पहले ही डूंगरदान को पता चल गया कि उस की गैरमौजूदगी में मोहन सिंह दिन भर उस के घर में पत्नी के पास बैठा रहता है. यह सुनते ही उस का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. गुस्से से भरा डूंगरदान घर आ कर चिल्ला कर पत्नी से बोला, ‘‘मेरी गैरमौजूदगी में मोहन यहां क्यों आता है, घंटों तक यहां क्या करता है? बताओ, तुम से उस का क्या संबंध है?’’ कहते हुए उस ने पत्नी का गला पकड़ लिया.

रसाल मिमियाते हुए बोली, ‘‘वह तुम्हारा दोस्त है और तुम्हें ही पूछने आता है. मेरा उस से कोई रिश्ता नहीं है. जरूर किसी ने तुम्हारे कान भरे हैं. हमारी गृहस्थी में कोई आग लगाना चाहता है. तुम्हारी कसम खा कर कहती हूं कि मोहन सिंह से मैं कह दूंगी कि वह अब घर कभी न आए.’’

पत्नी की यह बात सुन कर डूंगरदान को लगा कि शायद रसाल सच कह रही है. कोई जानबूझ कर उन की गृहस्थी तोड़ना चाहता है. डूंगरदान शरीफ व्यक्ति था. वह बीवी पर विश्वास कर बैठा. रसाल कंवर ने अपने प्रेमी मोहन को भी सचेत कर दिया कि किसी ने उस के पति को उस के बारे में बता दिया है. इसलिए अब सावधान रहना जरूरी है. उधर डूंगरदान के मन में पत्नी को ले कर शक उत्पन्न तो हो ही गया था. इसलिए वह वक्तबेवक्त घर आने लगा. एक रोज डूंगरदान मजदूरी पर गया और 2 घंटे बाद घर लौट आया. घर का दरवाजा बंद था. खटखटाने पर थोड़ी देर बाद उस की पत्नी रसाल कंवर ने दरवाजा खोला. पति को अचानक सामने देख कर उस के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं.

डूंगरदान की नजर कमरे में अंदर बैठे मोहन सिंह पर पड़ी तो वह आगबबूला हो गया. उस ने मोहन सिंह पर गालियों की बौछार कर दी. मोहन सिंह गालियां सुन कर वहां से चला गया. इस के बाद डूंगरदान ने पत्नी की लातघूंसों से खूब पिटाई की. रसाल लाख कहती रही कि मोहन सिंह 5 मिनट पहले ही आया था. मगर पति ने उस की एक न सुनी. पत्नी के पैर बहक चुके थे. डूंगरदान सोचता था कि गलत रास्ते से पत्नी को वापस कैसे लौटाया जाए. वह इसी चिंता में रहने लगा. उस का किसी भी काम में मन नहीं लग रहा था. वह चिड़चिड़ा भी हो गया था. बातबात पर उस का पत्नी से झगड़ा हो जाता था.

आखिर, रसाल कंवर पति से तंग आ गई. यह दुख उस ने अपने प्रेमी के सामने जाहिर कर दिया. तब दोनों ने तय कर लिया कि डूंगरदान को जितनी जल्दी हो सके, निपटा दिया जाए. रसाल कंवर पति के खून से अपने हाथ रंगने को तैयार हो गई. मोहन सिंह ने योजना में अपने दोस्त मांगीलाल को भी शामिल कर लिया. मांगीलाल भीनमाल में ही रहता था.

साजिश के तहत रसाल और मोहन सिंह 12 जुलाई, 2019 को डूंगरदान को उपचार के बहाने बोलेरो गाड़ी में जालौर के राजकीय चिकित्सालय ले गए. मांगीलाल भी साथ था. वहां उस के नाम की परची कटाई. डाक्टर से चैकअप करवाया और वापस भीनमाल रवाना हो गए. रास्ते में मौका देख कर रसाल कंवर और मोहन सिंह ने डूंगरदान को मारपीट कर अधमरा कर दिया. फिर उस का गला दबा कर उसे मार डाला.

इस के बाद डूंगरदान की लाश को ठिकाने लगाने के लिए बोलेरो में डाल कर बोरटा से लेदरमेर जाने वाले सुनसान कच्चे रास्ते पर ले गए, जिस के बाद डूंगरदान के शरीर पर पहने हुए कपड़े पैंटशर्ट उतार कर नग्न लाश वन विभाग की खाली पड़ी जमीन पर डाल कर रेत से दबा दी. उस के बाद वे भीनमाल लौट गए. भीनमाल में रसाल कंवर ने आसपास के लोगों से कह दिया कि उस का पति जालौर अस्पताल चैकअप कराने गया था. मगर अब उस का कोई पता नहीं चल रहा. तब डूंगरदान की गुमशुदगी उस के रिश्तेदार शैतानदान चारण ने जालौर सिटी कोतवाली में दर्ज करा दी.

पुलिस पूछताछ में पता चला कि आरोपी मोहन सिंह आपराधिक प्रवृत्ति का है. उस ने अपने साले की बीवी की हत्या की थी. इन दिनों वह जमानत पर था. मोहन सिंह शादीशुदा था, मगर बीवी मायके में ही रहती थी. भीनमाल निवासी मांगीलाल उस का मित्र था. वारदात के बाद मांगीलाल फरार हो गया था. थाना रामसीन के इंचार्ज छतरसिंह देवड़ा अवकाश से ड्यूटी लौट आए थे. उन्होंने भी रिमांड पर चल रहे रसाल कंवर और मोहन सिंह राव से पूछताछ की.

रिमांड अवधि समाप्त होने पर पुलिस ने 19 जुलाई, 2019 को दोनों आरोपियों रसाल कंवर और मोहन सिंह को फिर से कोर्ट में पेश कर दोबारा 2 दिन के रिमांड पर लिया और उन से पूछताछ कर कई सबूत जुटाए. उन की निशानदेही पर मृतक के कपड़े, वारदात में प्रयुक्त बोलेरो गाड़ी नंबर आरजे14यू बी7612 बरामद की गई. मृतक डूंगरदान के कपडे़ व चप्पलें रामसीन रोड बीएड कालेज के पास रेल पटरी के पास से बरामद कर ली गईं.

पूछताछ पूरी होने पर दोनों आरोपियों को 21 जुलाई, 2019 को कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. पुलिस तीसरे आरोपी मांगीलाल माली को तलाश कर रही है. Crime Story

   —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित