Bollywood News: आशुतोष राणा – कस्बे से मायानगरी तक का सफर

Bollywood News: ऐसा नहीं है कि फिल्मी कलाकार केवल बड़ेबड़े शहरों में पैदा होते हैं, गांवकस्बों के रंगमंचों से भी अदाकारी की बारीकियां सीख कर कलाकार फिल्म इंडस्ट्री में अपना मुकाम बना सकते हैं. इस बात को बौलीवुड के मशहूर ऐक्टर आशुतोष राना ने साबित कर के दिखा दिया है. हजारों कलाकारों की भीड़ से निकल कर आशुतोष राना ने आखिर किस तरह बौलीवुड में अपनी जगह बनाई?

बौलीवुड के सफल अभिनेता और विलेन का जानदार रोल निभाने वाले आशुतोष राना का जन्म मध्य प्रदेश के जिला  नरसिंहपुर के एक छोटे से कस्बे गाडरवारा में 10 नवंबर, 1967 को हुआ था. एक छोटे से कस्बे से मायानगरी तक का सफर तय करने वाले आशुतोष की प्राथमिक स्तर की शिक्षा गाडरवारा के गंज स्कूल में हुई थी. उस के बाद जबलपुर और अहमदाबाद में उन्होंने मिडिल स्कूल तक की शिक्षा ली.

अहमदाबाद से लौट कर गाडरवारा के सब से पुराने बीटीआई स्कूल में नौवीं कक्षा में दाखिला ले कर उन्होंने 11वीं पास की थी. स्कूली जीवन से जुड़ी यादों को साझा करते हुए आशुतोष के भाई प्रो. नंदकुमार नीखरा बताते हैं कि आशुतोष की पढ़ाई को ले कर परिवार के लोग ज्यादा उम्मीद नहीं रखते थे. जब वह मैट्रिक पास हुए तो मार्कशीट को एक हाथ ठेला पर सजा कर बैंडबाजे के साथ अपने दोस्तों के साथ नाचतेगाते जुलूस ले कर घर पहुंचे थे.

आप को यह जान कर आश्चर्य होगा कि आशुतोष राना ने अपना नाम खुद रखा था. बचपन में जब उन के घर में भगवान शिव का अभिषेक चल रहा था, तभी पंडितजी के द्वारा बोले गए मंत्र ‘ॐ आशुतोषाय नम:’ को सुन कर उन्होंने पंडितजी से पूछा, ‘‘पंडितजी, आशुतोष का मतलब क्या होता है?’’

तब पंडितजी ने उन्हें बताया, ‘‘आशुतोष का मतलब है जो शीघ्र प्रसन्न है जाए. भगवान शिव भी जल्दी खुश हो जाते हैं.’’

पंडितजी की बात सुन कर उन्होंने मां से कहा था, ‘‘मां आज से मेरा नाम आशुतोष होगा.’’

इसी तरह स्कूल पढ़ते समय आशुतोष की छवि एक दबंग युवा के रूप में बन चुकी थी. गाडरवारा में रोज ही उन के कारनामों के किस्से सुनाई देने लगे थे. एक दिन उन के भाई ने उन से कहा था, ‘‘ये तुम्हारे नाम के आगे जो नीखरा लगा है, इस कारण लोग तुम्हारा लिहाज करते हैं, तुम्हारे पावर के कारण नहीं.’’

आशुतोष को यह बात चुभ गई, उस के बाद उन्होंने परिवार की प्रतिष्ठा व पद का लाभ न लेने के लिए अपने नाम के आगे लगा सरनेम ‘नीखरा’ हटा कर ‘राना’ कर लिया. आशुतोष बताते हैं कि अपने पिता के नाम राम नारायण के पहले अक्षर ‘रा’ और ‘ना’ को मिला कर उन्होंने अपना सरनेम राना कर लिया था.

स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद वह 1984 में ग्रैजुएशन करने मध्य प्रदेश की सागर यूनिवर्सिटी में चले गए थे. उस समय वह यूनिवर्सिटी टौप यूनिवर्सिटी में शुमार थी, जिस में प्रदेश के 128 कालेज जुड़े हुए थे. आशुतोष राना सागर यूनिवर्सिटी गए तो वहां नेतागिरी करने लगे. वह सागर यूनिवर्सिटी के विवेक हौस्टल में रहते थे. यूनिवर्सिटी में राना की छवि रौबिनहुड की तरह थी. उस दौरान वह पढ़ने वाले स्टूडेंट्स की हरसंभव मदद करते थे, भले ही इस के लिए उन्हें प्रशासन से टकराव करना पड़े.

सागर यूनिवर्सिटी में आशुतोष राना के सहपाठी रह चुके शिक्षक व साहित्यकार सुशील शर्मा बताते हैं, ‘‘उस समय हम एमटेक के छात्र थे. आशुतोष विवेक हौस्टल के कमरा नंबर 65 में रहते थे. गाडरवारा के होने के चलते हमारी अकसर मुलाकात उन से होती थी. वह उस समय दृश्य और श्रव्य विभाग के छात्र हुआ करते थे. हमें देख कर आशुतोष अकसर बुंदेली भाषा में कहा करते थे, ‘बड्डे, तुम तो बड़े पढ़ने वाले हो और हम से जा पढ़ाई होत नैया. कछु जड़ीबूटी दे दो हमें भी.’

आज भी आशुतोष राना जब गाडरवारा आते हैं तो अपने दोस्तों और परिचितों से उसी सहजता से मिलतेजुलते हैं और उन की बोलती आंखें आज भी बिना कुछ कहे संवाद करती हैं.

आशुतोष राना को कालेज के दिनों से ही अदाकारी से बेहद लगाव हो गया था और दशहरे पर वह पुरानी गल्ला मंडी, गाडरवारा में होने वाली रामलीला में रावण का किरदार निभाने लगे थे. रावण का ही किरदार चुनने की खास वजह बताते हुए आशुतोष कहते हैं, ‘‘रामलीला में राम व रावण के किरदार ही अहम हैं. सपाट किरदार कभी मेरी पसंद नहीं रहे. चूंकि उस समय राम का किरदार ब्राह्मण जाति के कलाकारों को मिलता था तो फिर रावण का किरदार मेरी पहली पसंद था.’’

संस्कार मिले हैं परिवार से

आशुतोष राना के पिता रामनारायण नीखरा इलाके के प्रतिष्ठित व्यक्ति थे. आशुतोष 7 भाई और 5 बहनों में सब से छोटे थे. इस वजह से सभी के लाडले और हठीले भी थे. बड़ों के प्रति आदर रखने का पाठ उन्हें बचपन में ही पढ़ाया गया था.
राना बताते हैं कि मिडिल स्कूल पढ़ने के लिए उन्हें उन के अन्य 2 भाइयों के साथ जबलपुर के एक अंगरेजी मीडियम स्कूल में भेजा गया. 2 भाइयों के साथ वह वहीं हौस्टल में रहा करते थे. कुछ दिन बाद रविवार को मां और बाबूजी मिलने के लिए आए थे. इंग्लिश मीडियम स्कूल में अनुशासन सिखाया गया था तो दौड़ कर सीधे मिल भी नहीं सकते थे.

खैर, कुछ देर बाद हम लोग टाईवाई लगा कर और अपने हाथ पीछे बांध कर अनुशासन में खड़े हो गए. जैसे ही मांबाबूजी मिलने आए तो उन को इंप्रैस करने के लिए मैं ने कहा, ‘‘गुडमौर्निंग बाबूजी. गुडमौर्निंग मम्मी.’’
स्कूल में सिखाए अनुशासन के कारण हम तीनों भाइयों ने बाबूजी और मां के लपक कर पैर भी नहीं छुए. बाबूजी और मां ने उस समय तो कुछ नहीं कहा केवल मुसकरा कर रह गए.

खाने के बाद बाबूजी ने सख्त लहजे में कहा, ‘‘चलिए रानाजी, अपना सामान बांध लीजिए. अब आप वहीं पढ़ेंगे.’’

हम सब लोग तो सोच रहे थे कि बाबूजी शाबाशी देंगे, पर यहां तो बाबूजी का रुख देख कर पैरों के नीचे से जैसे जमीन खिसकने लगी. हम सभी भाइयों ने परेशान हो कर बाबूजी से पूछा, ‘‘बाबूजी, आखिर हम लोगों से क्या गलती हो गई, जो आप स्कूल छोड़ कर घर चलने को कह रहे हैं?’’

तब बाबूजी ने हम लोगों को स्नेह से समझाते हुए कहा, ‘‘हम ने तुम लोगों को यहां कुछ नया सीखने भेजा है न कि पुराना भूलने के लिए. शिक्षा वही होती है जब हम अपने संस्कार उस में समाहित रखें.’’

उसी समय हम लोगों ने कान पकड़ कर बाबूजी से माफी मांगी और बाबूजी की दी गई सीख हम लोगों की समझ में आ गई. और तभी से हम नया तो सीख लेते हैं पर पुराना कभी नहीं भूलते. शिक्षा में ज्ञान के साथ संस्कार और संस्कृति का होना बहुत आवश्यक है.

बचपन से ही थे शरारती

आशुतोष राना बचपन के दिनों से ही शरारती थे. घर वालों के लाडप्यार का फायदा उठा कर वह शरारतों में अव्वल रहते थे. सोहागपुर डिग्री कालेज में प्रिंसिपल व उन के भाई डा. नंदकुमार नीखरा एक किस्सा सुनाते हुए कहते हैं कि इन्हीं शरारतों की वजह से जब राना 6 साल के थे, तब उन के कमर में चोट लग गई थी. उस समय सिर से पैर तक उन्हें प्लास्टर चढ़ा था. गरमी का मौसम था. आशुतोष ने मां से कहा, ‘‘मुझे कमरे से आंगन की खुली जगह में ले चलो.’’

तब घर के लोग पलंग सहित उन्हें आंगन में ले आए. उस के बाद राना ने कहा, ‘‘मुझे बरसात देखनी है.’’

राना की जिद से सभी परेशान हो गए. फिर हम सभी भाईबहनों ने घर के ऊपर के टीन की छत पर चढ़ कर बाल्टियों से पानी उड़ेलना शुरू कर दिया. इस तरह कृत्रिम बारिश का नजारा आशुतोष के सामने पेश कर दिया. राना इस पर भी खुश नहीं हुए और उन्होंने कहा सभी लोग डांस करें. फिर क्या था उन की जिद पूरी करने आधे लोग आंगन में डांस करने लगे.

स्कूल पढ़ते वक्त भी उन की शरारतें कम नहीं हुई थीं. बीटीआई स्कूल में उन के टीचर रहे सुदामा प्रसाद सोनी बताते हैं कि जब आशुतोष 11वीं कक्षा में पढ़ते थे, तब एक बार स्कूल के प्रिंसिपल साहब के साथ हमें पास के गांव चीचली जाना था तो मैं ने आशुतोष से कहा कि तुम अपने घर से जीप ले कर आ जाओ.

राना ने मेरी बात मानते हुए जीप स्कूल के सामने ला कर खड़ी कर दी. कुछ समय बाद जब हम जाने के लिए तैयार हो गए तो राना ने शरारती अंदाज में कहा, ‘‘सर, जीप स्टार्ट नहीं हो रही.’’

स्कूल के चपरासी ने धक्का लगाया, मगर फिर भी जीप स्टार्ट नहीं हुई तो आशुतोष ने कहा, ‘‘सर, आप लोगों को भी मिल कर धक्का लगाना पड़ेगा.’’

जैसे ही प्रिंसिपल साहब के साथ हम लोगों ने धक्का लगाया तो आशुतोष ने जीप स्टार्ट कर दी. बाद में पता चला कि जीप में कोई खराबी नहीं थी, आशुतोष ने मजा लेने के लिए हम से जबरन धक्का लगवाया था.

छठीं क्लास में पढ़ते लिखा लव लेटर

आशुतोष राना का बचपन उन की खास तरह की शरारतों के बीच बीता है. अहमदाबाद के स्कूल में पढ़ाई के दौरान एक लड़की उन्हें पसंद आ गई. एक दिन उन्होंने लव लेटर लिखा और उस लड़की की बेंच की ओर उछाल दिया, मगर वह लव लेटर उस लड़की की बेंच पर न पड़ कर दूसरी लड़की की बेंच पर गिर गया. उस लड़की ने लव लेटर पढ़ते हुए इशारे से पूछा, ‘ये मेरे लिए है?’ आशुतोष ने इशारे से ही कहा, ‘नहीं, आप के लिए नहीं आगे वाली सीट पर बैठी लड़की के लिए है.’

बस, फिर क्या था उस लड़की ने लव लेटर क्लास में मौजूद टीचर को दे दिया. टीचर उन्हें मैथ और अंगरेजी पढ़ाते थे, उन्होंने आशुतोष को खड़ा कर के पूछा, ‘‘माय डार्लिंग का क्या मतलब होता है?’’

आशुतोष ने बड़े ही मासूमियत से जबाब देते हुए कहा, ‘‘सर माय डार्लिंग का मतलब होता है मेरे प्रिय.’’

फिर क्या था, टीचर ने आशुतोष को झापड़ रसीद कर दिया. आशुतोष को उस समय यह समझ नहीं आया कि उन्हें गलत आंसर के लिए मार पड़ी है या कुछ और वजह से. इस वजह से आशुतोष को मैथ और अंगरेजी से नफरत सी हो गई थी.
स्कूल के प्रिंसिपल ने उन के भाई मदन मोहन नीखरा को बुला कर आशुतोष की इस हरकत की शिकायत की तो राना दुखी हो गए थे. बाद में उन के भाई ने उन्हें स्कूटर से अहमदाबाद घुमाया और उन को समझाते हुए आगे से पढ़ाई पर ध्यान देने की बात कह कर उन का मन बहलाया था.

गुरु के आशीर्वाद से पाया मुकाम

सागर यूनिवर्सिटी में जब आशुतोष कालेज की पढ़ाई कर रहे थे, उसी दौरान उन के बहनोई ने उन्हें पंडित देव प्रभाकर शास्त्री से मिलवाया था. देव प्रभाकर शास्त्री को दद्दाजी के नाम से जाना जाता था. जब आशुतोष राना उन से मिले तो दद्दाजी ने उन की अभिनय क्षमता की परख करते हुए उन्हें ऐक्टिंग कोर्स करने के लिए प्रेरित किया.
आशुतोष ने अपने गुरु की सलाह से साल 1994 में दिल्ली के एनएसडी यानी नैशनल स्कूल औफ ड्रामा में दाखिले के लिए गए और फर्स्ट अटेंप्ट में ही उन का सिलेक्शन हो गया. एनएसडी में पढ़ाई करने के बाद वह काम की तलाश में मुंबई चले गए और महेश भट्ट के टीवी सीरियल ‘स्वाभिमान’ से टेलीविजन पर एंट्री की.

‘जख्म’, ‘दुश्मन’ और ‘संघर्ष’ जैसी बेहतरीन फिल्मों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवा चुके आशुतोष राना की जिंदगी में एक दिन ऐसा भी आया, जब महेश भट्ट ने उन्हें सैट से बाहर का रास्ता दिखा दिया था. इस की वजह सिर्फ यह थी कि आशुतोष ने उन के पैर छू लिए थे.

आशुतोष राना ने एक रोचक किस्सा सुनाते हुए कहा, ‘‘मुझे फिल्मकार और डायरेक्टर महेश भट्ट से मिलने को कहा गया. मैं उन से मिलने गया और जा कर भारतीय परंपरा के मुताबिक उन के पैर छू लिए. पैर छूते ही वह भड़क उठे, क्योंकि उन्हें पैर छूने वालों से बहुत नफरत थी. उन्होंने मुझे अपने फिल्म सैट से बाहर निकलवा दिया और असिस्टैंट डायरेक्टरों पर भी काफी गुस्सा हुए कि आखिर उन्होंने मुझे कैसे फिल्म के सैट पर घुसने दिया.’’

आशुतोष राना ने आगे बताया कि इतनी बेइज्जती के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और जब भी महेश भट्ट मिलते या कहीं दिखते तो वे लपक कर उन के पैर छू लेते और वे बहुत गुस्सा होते. आखिरकार एक दिन महेश भट्ट ने आशुतोष राना से पूछ ही लिया, ‘‘तुम मेरे पैर क्यों छूते हो जबकि मुझे इस से नफरत है?’’
आशुतोष ने जवाब दिया, ‘‘बड़ों के पैर छूना मेरे संस्कार में है, जिसे मैं नहीं छोड़ सकता.’’

यह सुन कर महेश भट्ट ने उन्हें गले से लगा लिया और साल 1995 में दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले टीवी सीरियल ‘स्वाभिमान’ में एक गुंडे ‘त्यागी’ का रोल दिया. बाद में तो उन्होंने महेश भट्ट द्वारा निर्देशित कई फिल्मों में काम किया, जिन में ‘जख्म’ और ‘दुश्मन’ खास हैं.

एनएसडी के 1994 बैच के छात्र रहे आशुतोष राना कहते हैं कि प्रशिक्षण के बाद उन्हें एनएसडी में ही नौकरी का औफर हुआ और वह भी मोटी तनख्वाह पर, लेकिन
उन्होंने फिल्म जगत में जाने का रास्ता चुना.

रेणुका शहाणे से प्रेम की दिलचस्प कहानी

कभी जी टीवी के फेमस रिएलिटी गेम शो ‘अंताक्षरी’ में अन्नू कपूर की कोहोस्ट रही और फिल्म ‘हम आप के हैं कौन’ में सलमान खान की भाभी के रोल से मशहूर हुई रेणुका शहाणे से आशुतोष राना ने शादी की. आशुतोष राना की रेणुका से पहली मुलाकात फिल्म ‘जयति’ की शूटिंग के समय हुई थी. रेणुका और आशुतोष की दोस्ती मेल मुलाकात के बाद प्यार में बदल गई और उन्होंने साल 2001 में शादी कर ली. रेणुका से शादी करना आशुतोष के लिए आसान नहीं था. इस की वजह यह थी कि रेणुका तलाकशुदा थीं और दूसरी शादी के लिए तैयार नहीं थीं. हालांकि, आशुतोष राना ने भी ठान लिया था कि रेणुका को मजबूर कर देंगे कि वह उन्हें आई लव यू बोलें और ऐसा ही हुआ.

आशुतोष और रेणुका की पहली मुलाकात डायरेक्टर हंसल मेहता की एक फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थी. यह मुलाकात सिंगर राजेश्वरी सचदेव ने कराई थी. उस वक्त तक आशुतोष तो रेणुका के बारे में थोड़ाबहुत जानते थे, लेकिन रेणुका के लिए वह पूरी तरह अंजान थे. पहली मुलाकात में ही आशुतोष रेणुका को दिल दे बैठे थे. हालांकि, इस मुलाकात के बाद दोनों कई महीनों तक नहीं मिले, फिर धीरेधीरे दोनों मे बातचीत शुरू हुई. रेणुका शहाणे की पहली शादी टूट चुकी थी. उन्होंने मराठी थिएटर के डायरेक्टर विजय केनकरे से शादी की थी. ऐसे में रेणुका के मन में शादी को ले कर कुछ संदेह था.

रेणुका की मां मशहूर लेखिका शांता गोखले भी अपनी बेटी की शादी को ले कर थोड़े असमंजस में थीं. दरअसल, रेणुका के घर वालों को रेणुका की दूसरी शादी के बजाय इस बात को ले कर संशय था कि आशुतोष मध्य प्रदेश के छोटे से गांव से थे और उन की फैमिली में 12 लोग थे. उस समय डायरेक्टर रवि राय आशुतोष और रेणुका के साथ एक शो करना चाहते थे. इस मौके का फायदा उठाते हुए आशुतोष ने रवि से रेणुका का नंबर मांग लिया. रवि ने नंबर देते हुए साफतौर पर बता दिया कि रेणुका रात को 10 बजे के बाद किसी के फोन का जवाब नहीं देतीं और न ही अनजान नंबर की काल उठाती हैं. आंसरिंग मशीन पर मैसेज छोड़ना पड़ता है.

बस, फिर क्या था आशुतोष ने रेणुका की आंसरिंग मशीन पर अपना नंबर न देते हुए एक मैसेज छोड़ा, जिस में उन्हें दशहरे की बधाई दी थी. उन्होंने अपना नंबर जानबूझ कर नहीं दिया था. आशुतोष का मानना था कि अगर रेणुका को मुझ से बात करनी होगी तो वो खुद कोशिश करेंगी और कहीं न कहीं से मेरा नंबर तलाश ही लेंगी. कुछ दिनों बाद आशुतोष को अपनी बहन से मैसेज मिला कि रेणुका का फोन आया था और उन्होंने उन्हें दशहरा की शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद दिया है.

कुछ समय तक दोनों के बीच संदेशों का सिलसिला चलता रहा और फिर रेणुका ने उन्हें अपना पर्सनल नंबर दे दिया. जैसे ही आशुतोष को रेणुका का नंबर मिला, उसी दिन रात साढ़े 10 बजे रेणुका को काल किया और कहा, ‘थैंक्यू रेणुकाजी, आप ने अपना नंबर दे दिया.’ इस के बाद करीब 3 महीने तक उन की यूं ही फोन पर बात होती रही. आशुतोष राना के मुताबिक, एक बार रेणुका गोवा में शूटिंग कर रही थीं तो मैं ने उन्हें फोन पर एक कविता सुना दी. इस कविता में मैं ने इकरार, इनकार, खामोशी, खालीपन और झुकी निगाहें… सब कुछ लिखा था.

इस कविता को सुनने के बाद रेणुका अपने आप को रोक नहीं पाईं और उन्होंने फोन पर ही ‘आई लव यू’ कहा. यह सुन कर आशुतोष खुशी से पागल हो गए और अपने आप को संभालते हुए बोले, ‘‘रेणुकाजी, मिल कर बात करते हैं.’’

शादी के बाद आशुतोष राना जब रेणुका को ले कर गाडरवारा आते थे तो रेलवे स्टेशन से घर तक की दूरी उस समय चलने वाले घोड़ा तांगे से तय करते थे. आज उन के 2 बेटे शौर्यमान और सत्येंद्र हैं. अभी भी जब आशुतोष गाडरवारा आते हैं तो अपने बंगले पर दोस्तों और प्रशंसकों से दिल खोल कर मिलते हैं. उन से मिलने वालों को वह इस बात का तनिक भी आभास नहीं होने देते कि वह बौलीवुड के स्टार हैं.

आशुतोष का फिल्मी सफर

साल 1996 में आशुतोष राना की पहली फिल्म ‘संशोधन’ थी. इस के बाद उन्होंने ‘कृष्ण अर्जुन’, ‘तमन्ना’, ‘जख्म’, ‘गुलाम’ समेत कई फिल्मों में भी काम किया, लेकिन उन्हें असली पहचान साल 1998 में आई काजोल स्टारर फिल्म ‘दुश्मन’ ने दिलाई.
‘बादल’, ‘अब के बरस’, ‘कर्ज’, ‘कलयुग’ और ‘आवारापन’ जैसी फिल्मों में विलेन के किरदार के लिए आशुतोष को जाना जाने लगा.

फिल्म ‘दुश्मन’ में आशुतोष राना ने साइकोकिलर गोकुल पंडित का किरदार निभाया था. इस किरदार से आशुतोष ने दर्शकों का दिल जीत लिया था. उन्हें 1999 में फिल्म ‘दुश्मन’ और ‘संघर्ष’ के लिए बेस्ट विलेन के फिल्मफेयर अवार्ड से भी नवाजा गया था. बायोपिक फिल्म ‘शबनम मौसी’ के किरदार को भी लोगों ने काफी पसंद किया था. आशुतोष राना एक ऐसे ऐक्टर हैं,जो निगेटिव रोल में भी जान फूंक देते हैं. जब उन्होंने फिल्म ‘संघर्ष’ में लज्जाशंकर पांडे का रोल निभाया तो दर्शकों की चीख निकल गई थी. बच्चों की बलि देने वाले कैरेक्टर को इस तरह निभाया कि थिएटर में बैठे दर्शकों के रोंगटे खड़े हो गए थे.

और खौफ का ऐसा तिलिस्म आशुतोष जैसे कलाकार ही कर सकते हैं. ‘संघर्ष’ फिल्म में आशुतोष राना ने एक ऐसे किन्नर का रोल किया था, जो बच्चों की बलि दे कर अमर हो जाना चाहता है. लज्जाशंकर पांडे का चीखना, सनकीपन और जीभ को ट्विस्ट करने वाली आवाज ने थिएटर में बैठे दर्शकों में सिहरन पैदा कर दी थी. खतरनाक विलेन बन कर रहे चर्चा में इस रोल के बाद तो आशुतोष बौलीवुड के सब से खतरनाक विलेन बन गए. कहते हैं कि महेश भट्ट ने इस फिल्म को बनाने के बारे में जब सोचा था तो उन के दिमाग में सिर्फ आशुतोष ही थे और उन्होंने कहा भी था कि इस फिल्म जैसा विलेन आज तक बौलीवुड में नहीं देखा गया होगा. यह बात सच निकली और ‘संघर्ष’ जब रिलीज हुई तो खौफनाक अभिनय के लिए आशुतोष को फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था.

आशुतोष राना बौलीवुड के ऐसे कलाकार हैं, जिन्हें अभिनय करते हुए देखते वक्त लोग नजरें नहीं हटा पाते. उन के चेहरे के एक्सप्रैशन ऐसे होते हैं कि उस के सामने अच्छेअच्छे साउंड इफेक्ट भी फीके पड़ जाते हैं. वैसे तो वो एक वर्सेटाइल ऐक्टर हैं लेकिन उन्होंने विलेन के कुछ किरदार ऐसे निभाए हैं जिन्हें देखते ही थिएटर में दर्शक भी भौचक्के रह जाते हैं. बौबी देओल की सुपरहिट फिल्म ‘बादल’ में आशुतोष राना ने डीआईजी जय सिंह राना का किरदार निभाया था. जय सिंह एक ऐसा बेहरम इंसान था, जिस ने अपने फायदे के लिए पूरे गांव तक को जला डाला था.

इमरान हाशमी स्टारर फिल्म ‘आवारापन’ में आशुतोष ने जुर्म की दुनिया के बादशाह भरत दौलत मलिक का रोल किया था. उन के इस किरदार को लोगों ने बहुत सराहा था. फिल्म ‘अब के बरस’ में इन्होंने एक राजनीतिज्ञ तेजेश्वर सिंघल का किरदार निभाया था. एक ऐसा शख्स जो 2 प्यार करने वालों को जुदा करने की कसम खाता है. आशुतोष राना ने फिल्म ‘हासिल’ में मेन विलेन गौरीशंकर पांडे का रोल किया था. जिम्मी शेरगिल और इरफान खान जैसे कलाकारों के बीच इस फिल्म में उन्हें नोटिस किए बिना नहीं रहा जा सकता. मोहित सूरी की फिल्म ‘कलयुग’ में उन्होंने जौनी नाम के एक दलाल का रोल किया था. उन के इस कैरेक्टर की भी लोगों ने ख़ूब तारीफ की थी.

चंबल के बागी डाकुओं पर बनी फिल्म ‘सोन चिरैया’ में आशुतोष राना ने एक खतरनाक पुलिस अफसर वीरेंद्र सिंह गुर्जर का किरदार निभाया था. ऐसा निर्दयी पुलिस वाला जो डाकुओं से खार खाता है और उन्हें मार कर ही दम लेता है. उन के इस रोल की क्रिटिक्स ने ख़ूब सराहना की थी. इस फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत भी थे. के.सी. बोकाडिया की फिल्म ‘डर्टी पौलीटिक्स’ में आशुतोष ने ओमपुरी, नसीरुद्दीन शाह, अनुपम खेर, राजपाल यादव, गोविंद नामदेव और मल्लिका शेरावत के साथ काम किया था.

मनोहर कहानियां का शो भी किया होस्ट

आशुतोष राना ने जहां जैसा रोल मिला, उसी में संतोष कर अपने अभिनय की यात्रा को जारी रखा. जब हिंदी फिल्मों में काम नहीं मिला तो कई तेलुगू, मराठी, तमिल , कन्नड़ जैसी भाषाओं की फिल्मों में काम किया. आशुतोष बताते हैं कि दक्षिण भारत की 2-3 फिल्मों में काम कर के जो पैसा मिलता था, उस से एक साल का कोटा पूरा हो जाता था. अपनी शुद्ध हिंदी बोलने और ऐक्टिंग के अंदाज की वजह से उन्होंने कई टीवी शो ‘बाजी किस की’, ‘सरकार की दुनिया’ में होस्ट के रूप में काम किया है.
दिल्ली प्रैस की मनोहर कहानियां की अपराध कथाओं पर बने टीवी शो ‘अद्भुत कहानियां’ को होस्ट करने की जिम्मेदारी भी आशुतोष ने निभाई है.

आशुतोष ने डिजिटल प्लेटफार्म पर भी अपनी धमाकेदार एंट्री की है . एमएक्स प्लेयर पर दिखाई जाने वाली हिस्टोरिकल ड्रामा वेब सीरीज ‘छत्रसाल’ में उन्होंने औरंगजेब का किरदार निभाया है. आशुतोष ने ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज हुई एक फिल्म ‘पगलैट’ में भी काम किया है. ‘पगलैट’ का निर्माण सीखिया फिल्म्स और बालाजी मोशन पिक्चर ने मिल कर किया है व इस के निर्देशक उमेश बिष्ट हैं. फिल्म भारतीय मध्यमवर्गीय परिवार की कहानी बताती है, जो संकट में आ जाता है. निर्माता गुनीत मोंगा की इस फिल्म को फ्रांस का सब से बड़ा सिविलियन अवार्ड मिल चुका है.

पहली जुलाई, 2022 को आशुतोष राना की जैकी श्राफ और आदित्य राय कपूर के साथ एक फिल्म ‘ओम’ रिलीज हुई है. एक्शन से भरपूर इस फिल्म में आशुतोष राना जैकी श्राफ के भाई जय की भूमिका में हैं.

राना का साहित्य प्रेम

आशुतोष राना अपनी लाजवाब हिंदी के लिए भी काफी लोकप्रिय हैं. साहित्य का माहौल उन्हें अपने घर से ही मिला है. 7 भाई और 5 बहनों के परिवार में उन से बड़े भाई प्रभात नीखरा ‘दादा भैया’ बुंदेली भाषा के जानेमाने कवि हैं. अमरावती, महाराष्ट्र के हास्य व्यंग्य कवि किरण जोशी एक किस्सा साझा करते हुए बताते हैं कि कविताओं से आशुतोष का बहुत लगाव रहा है. 1991 में जब गाडरवारा में कवि सम्मेलन हुआ था तो उन्होंने मंच पर आ कर सभी कवियों से आटोग्राफ लिए थे, जबकि आज बौलीवुड में वह जिस मुकाम पर हैं तो लोग उन से आटोग्राफ लेने की ख्वाहिश रखते हैं.

आशुतोष राना अच्छे कवि होने के साथ साथ अच्छे लेखक भी हैं. उन के लिखे व्यंग्य ‘मौन मुसकान की मार’ नामक पुस्तक में प्रकाशित हुए हैं. उन की लिखी दूसरी पुस्तक ‘रामराज्य’ भी साहित्य जगत में काफी लोकप्रिय हुई है. हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति आशुतोष के लगाव की वजह से उन को बड़ेबड़े साहित्यिक मंचों पर बुलाया जाता है. उन की कविताओं में नारी के प्रति प्रेम और सम्मान के भाव साफ दिखाई देते हैं. उन की कविताओं की बानगी देखिए—

प्रिय! लिख कर
नीचे लिख दूं नाम तुम्हारा
कुछ जगह बीच में छोड़
नीचे लिख दूं सदा तुम्हारा..
और लिखा बीच में क्या? ये तुम को पढ़ना है
कागज पर मन की भाषा का अर्थ समझना है
और जो भी अर्थ निकालोगी तुम, वो मुझ को स्वीकार है
मौन अधर.. कोरा कागज.. अर्थ सभी का प्यार है..
देश के हालात पर लिखी उन की पंक्तियां देखिए—
देश चलता नहीं, मचलता है,
मुद्दा हल नहीं होता सिर्फ उछलता है,
जंग मैदान पर नहीं, मीडिया पर जारी है
आज तेरी तो कल मेरी बारी है.

आशुतोष का फिल्मी सफर अभी जारी है. उन के प्रशंसकों को पूरा भरोसा है कि आने वाले वक्त में गांव की मिट्टी में जन्मा यह ऐक्टर बुलंदियों के शिखर पर अपनी पताका मजबूती से जमाए रखेगा. Bollywood News

क्यों किया था TV Actress ने सुसाइड

इंदौर के तेजाजी नगर थाना इलाके में स्थित साईंधाम कालोनी के आलीशान बंगलों में एक बंगला बलवंत सिंह ठक्कर का भी है. इस कालोनी के लगभग सभी परिवार शहर के चर्चित चेहरे हैं. ऐसे में अगर बलवंत सिंह ठक्कर परिवार की चर्चा बाकी सब की चर्चाओं पर बीस साबित हो तो तय है कि ठक्कर परिवार में कुछ तो खासियत थी, जो दूसरों के पास नहीं. ऐसा ही था और वह खासियत थी बलवंत सिंह की बेटी वैशाली. वैशाली यानी स्टार प्लस के चर्चित टीवी सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ की संजना और ‘ससुराल सिमर का’ सुपरहिट सीरियल की चर्चित खलनायिका अंजलि भारद्वाज.

लगभग 20 साल की उम्र से ही छोटे परदे पर अपनी खूबसूरती और कला की चमक बिखेरने वाली वैशाली की देश भर में पहचान बन चुकी थी. इसलिए लोग बलवंत सिंह के परिवार को विशेष तवज्जो देते थे. इस में सब से बड़ी भूमिका वैशाली की थी, जिस के सौम्य रूप और चेहरेमोहरे में आकर्षण भरा पड़ा था. यूं तो वैशाली जहां भी रही, जब भी रही, चाहे वो उस का बचपन हो, किशोर उम्र हो या फिर जवानी, हमेशा ही अपने आसपास की भीड़ में आकर्षण का केंद्र रही है. शायद यही कारण था कि उसे अपनी खूबसूरती का भान सही उम्र में सही वक्त पर हो गया था. खूबसूरती के साथ युवती में योग्यता और वजनदारी भी हो तो वह अपनी पर्सनैलिटी को अपनी ताकत बना लेती है.

वैशाली के पास यह गुण था, इसलिए उस ने किशोर उम्र से ही अभिनय की दुनिया में किस्मत आजमाने का फैसला कर लिया था. वैशाली की यह मेहनत रंग लाई, जिस के चलते सब से पहले 2013 में स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाले सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में उसे लीड रोल के लिए चुना गया. सीरियल में वैशाली ने संजना की भूमिका निभाई जो दर्शकों में, खासकर युवा वर्ग में बहुत पसंद की गई और देखते ही देखते वैशाली छोटे परदे की बड़ी स्टार बन गई.

पहले ही सीरियल की सफलता के बाद सीरियल निर्माताओं ने वैशाली के दरवाजे पर लाइन लगानी शुरू कर दी. उस ने एक के बाद एक कई सीरियलों में अपने दमदार अभिनय और खूबसूरती की छटा बिखेरी. शाली साहसी भी कम नहीं थी. इसलिए उस ने करिअर के शुरुआती दौर में नेगेटिव रोल करने से भी परहेज नहीं किया. ‘ससुराल सिमर का’ सीरियल में उस ने अंजलि भारद्वाज की नेगेटिव भूमिका निभाई, जिस के लिए वैशाली को बेस्ट एक्ट्रैस इन नेगेटिव रोल का ‘गोल्डन पैलेट’ अवार्ड भी दिया गया. इस के अलावा वैशाली ने ‘सुपर सिस्टर्स’, ‘विष या अमृत’, ‘मनमोहिनी’, ‘लाल इश्की’, ‘रक्षाबंधन’ आदि सीरियलों में महत्त्वपूर्ण रोल अदा किए.

जाहिर सी बात है कि वैशाली जैसी एक्ट्रैस का साईंधाम कालोनी में रहना आसपास के लोगों को गर्व की बात लगती थी. इसलिए पत्नी अनु, बेटे नीरज और एक्ट्रैस बेटी वैशाली की मौजूदगी से कालोनी में बलवंत सिंह का बंगला सब के लिए उत्सुकता का विषय रहता था.

एक उद्योगपति की बेटी थी वैशाली ठक्कर

15 अक्तूबर, 2022 की शाम का समय था. बलवंत सिंह के बंगले में रोज की तरह सब कुछ अपनी गति से चल रहा था. बलवंत सिंह का सनमाइका और प्लाईवुड का काफी बड़ा कारोबार है. इसलिए पालदा स्थित अपनी फैक्ट्री से आमतौर पर वह रात में देर से ही घर वापस आ पाते थे. लेकिन 4 दिन बाद 20 अक्तूबर को उन की लाडली वैशाली की शादी होने वाली थी. इसलिए इन दिनों वह शाम ढलते ही घर वापस आ जाते थे.

उस दिन भी शाम को बलवंत सिंह घर पहुंच कर पत्नी अनु के साथ बैठ कर बेटी की शादी की चर्चा कर रहे थे. हालांकि इस शादी के लिए उन्हें कोई ज्यादा भागदौड़ करने की जरूरत नहीं थी. क्योंकि उन का होने वाला दामाद मितेश गौर 1-2 दिन में कैलिफोर्निया से इंदौर पहुंचने वाला था.

वैशाली की 4 दिन बाद होनी थी शादी

20 अक्तूबर को वैशाली और मितेश इंदौर के एडीएम के समक्ष उपस्थित हो कर कोर्ट मैरिज करने वाले थे. इस के लिए एडीएम कोर्ट में रजिस्ट्रैशन भी करवा लिया गया था. दोस्तों, रिश्तेदारों को बेटी की शादी की दावत देने का प्रोग्राम कोर्ट मैरिज होने के बाद में तय किया जाना था.

‘‘वैशाली कहां है,’’ घर आने के बाद काफी देर रात तक बेटी के दिखाई न देने पर बलवंत सिंह ने पत्नी से पूछा.

‘‘कहां होगी, अपने कमरे में है. आजकल तो उस ने घर से निकलना ही बंद कर दिया है.’’ पत्नी ने कहा.

‘‘क्या करें, आगे बढ़ कर एक्शन लेने  पर अपनी ही बदनामी होगी. फिर नरेश ने भरोसा दिलाया है कि इस बार ऐसा कुछ नहीं होगा, जिस से हम परेशानी में पड़ें.’’ बलवंत सिंह बोले.

‘‘आप अपने दोस्त नरेश के ही भरोसे बैठे रहना. उन के बेटेबहू का मुंह देखो, कैसे चलता है. नीरज बता रहा था कि राहुल ने 1-2 दिन पहले वैशाली को फिर धमकी दी है कि वो उस की शादी नहीं होने देगा. कुछ रोज पहले उस ने वैशाली को अपने घर बुला कर उस के संग गलत करने की कोशिश भी थी.’’ पत्नी अनु ने कहा.

‘‘नीरज कहां है?’’ पत्नी के मुंह से बेटे की बात सुन कर बलवंत ने पूछा.

‘‘बाहर गया है, आता ही होगा,’’ अनु पति की बात का जवाब दे रही थी कि तभी बेटा नीरज भी आ गया. जिस ने पूछने पर पिता को वह सब बता दिया, जो राहुल की धमकी के बारे में वैशाली ने उसे बताया था.

नीरज की बात सुन कर बलवंत गंभीर हो गए. लेकिन बात बेटी की बदनामी की थी, इसलिए यह सोच कर अपने मन को समझा लिया कि सब ठीक हो जाएगा. जिस घर में 4 दिन बाद बेटी की शादी हो, वहां खुशियां आंगन में चहकती हैं. लेकिन हालात कुछ ऐसे थे कि अपनी नामदार बेटी की शादी चोरों की तरह करना बलवंत सिंह की मजबूरी बन गई थी. इसलिए शुभ अवसर के दरवाजे पर आ कर खड़े हो जाने के बाद भी दीवारों के अंदर खामोशी लगातार पसरी हुई थी.

परिवार में 2 बहनें हों तो उन की आपस में खूब बनती है, लेकिन बहनें 2 न हों तो भाईबहन ही आपस में दोस्त बन जाते हैं. इसलिए नीरज की वैशाली से खूब बनती थी. वैशाली भी अपने मन की ऐसी हर बात जो आमतौर पर लड़कियां केवल अपनी बहन या सहेली से शेयर करती हैं, नीरज से शेयर कर लेती थी. चकाचौंध की जिंदगी बड़ी जालिम होती है. एक बार जो इस चकाचौंध में पड़ गया वो अंधेरे में जीने की बात सोच कर भी डरता है. वैशाली इसी दौर से गुजर रही थी.

लौकडाउन में वैशाली मुंबई से इंदौर आ गई थी, इसलिए 2020 में आखिरी सीरियल में काम करने के बाद नए सीरियल में मौका नहीं मिलने से वह अपने करिअर को ले कर परेशान थी. खुद को व्यस्त रखने के लिए वैशाली ज्यादातर समय अपने भाई नीरज के साथ वीडियो गेम खेलते हुए काटती थी. लेकिन उस रोज खाना खाने के बाद कमरे में गई वैशाली काफी देर तक बाहर नहीं आई तो रात लगभग साढ़े 12 बजे जब मां और पिता दोनों किसी गंभीर मुद्दे पर चर्चा में व्यस्त थे, नीरज बहन के साथ वीडियो गेम खेलने उस के कमरे में पहुंचा तो वहां का नजारा देख कर जोरों से चीख पड़ा.

वैशाली की मौत पर पुलिस अधिकारी भी हुए हैरान

बेटे की चीख सुन कर मौके पर पहुंचे बलवंत सिंह और उन की पत्नी अनु वैशाली को फांसी पर लटका देख कर मानो पत्थर के हो गए. होश आने पर घर वालों ने आननफानन में वैशाली को फंदे से उतारा और उसे ले कर अस्पताल की तरफ भागे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. ठक्कर परिवार की शान समझी जाने वाली वैशाली दुनिया को अलविदा कह कर दूर जा चुकी है.

सुबह के 7 बजे थे. हमेशा की तरह सुबह होते ही अपनी ड्यूटी पर पहुंचने वाले तेजाजी नगर थाने के टीआई आर.डी. कानवा थाने जाने के लिए तैयार हो रहे थे कि तभी उन्हें साईंधाम कालोनी में रहने वाली टीवी एक्ट्रैस वैशाली ठक्कर द्वारा फांसी लगाने की खबर मिली. मामला हाईप्रोफाइल था, इसलिए चंद पलों में ही साईंधाम कालोनी की सुबह पुलिस की गाडि़यों के सायरन से गूंज उठी. दलबल को ले कर टीआई आर.डी. कानवा के मौके पर पहुंचते ही कालोनी में वैशाली द्वारा आत्महत्या कर लेने की खबर फैल गई.

वैशाली शहर के एक उद्योगपति की बेटी और चर्चित टीवी एक्ट्रैस थी, इसलिए टीआई कानवा द्वारा मिली सूचना पर एसीपी (आजाद नगर) मोतीउर रहमान (आईपीएस) भी मौके पर पहुंच गए. श्री रहमान के नेतृत्व में टीआई कानवा की टीम ने मौके की बारीकी से जांच की, जिस में वैशाली द्वारा अपने पीछे छोड़ा गया 8 पेज का सुसाइड नोट बरामद कर लिया गया. कमरे में वैशाली की डायरी भी मिली, जिसे देखते ही एसीपी समझ गए कि इस के कुछ पन्ने फाड़े गए हैं इसलिए पुलिस टीम डायरी से फाड़े गए पन्नों की तलाश में जुट गई जो कुछ ही देर में वैशाली के बाथरूम में लगे कवर्ड में टुकड़ों के रूप में मिले.

उन पन्नों की इबारत मरने के बाद भी वैशाली दुनिया से छिपाना चाहती थी, इस से एसीपी मोती उर रहमान के सामने यह बात कांच की तरह साफ हो चुकी थी कि इन फटे पन्नों की इबारत में ही इस घटना की कहानी छिपी हो सकती है. इसलिए इन टुकड़ों के अलावा पुलिस ने मौके से वैशाली का मोबाइल और आईपैड भी बरामद कर लिया. इस के बाद शव का पंचनामा बना कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

इस दौरान एसीपी रहमान ने न केवल वैशाली द्वारा लिखा सुसाइड नोट पढ़ डाला, बल्कि वैशाली के मातापिता और भाई से शुरुआती पूछताछ भी कर ली. वैशाली के लंबेचौड़े सुसाइड नोट का लब्बोलुआब यह था कि उस ने अपनी मौत के लिए पड़ोस के बंगले में रहने वाले प्लाईवुड व्यापारी नरेश नवलानी के इकलौते बेटे राहुल नवलानी और उस की पत्नी दिशा नवलानी को जिम्मेदार ठहराया था. वैशाली के घर वाले भी राहुल और दिशा को जिम्मेदार बता रहे थे. लेकिन वैशाली ने रात लगभग साढ़े 12 बजे फांसी लगाई थी, जबकि परिवार ने घटना के 7 घंटे बाद पुलिस को जानकारी दी थी. इसलिए पुलिस को अगला कदम उठाने से पहले कई तथ्यों को जांचना जरूरी था.

फिर भी बात हाथ से न निकल जाए, इसलिए टीआई कानवा अपनी टीम ले कर वैशाली के पड़ोस में रहने वाले राहुल नवलानी के घर जा पहुंचे. लेकिन तब तक राहुल का पूरा परिवार घर में ताला लगा कर फरार हो चुका था. चोर की दाढ़ी में तिनका, इस कहावत का पूरा अर्थ एसीपी मोती उर रहमान भली प्रकार जानते थे, इसलिए सुसाइड नोट में क्या लिखा है, इस की जानकारी बाहर आने से पहले राहुल के परिवार सहित फरार हो जाने से वह समझ गए कि वैशाली के सुसाइड नोट में कुछ न कुछ सच्चाई अवश्य है.

राहुल और उस की पत्नी की तलाश में जुटी पुलिस

वैशाली ठक्कर सेलिब्रिटी थी. इसलिए मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी जोन-1 अमित तोलानी के अलावा खुद कमिश्नर इंदौर हरिनारायण चारी मिश्र भी मौके पर पहुंच गए. पुलिस पूछताछ में घर वालों ने खुल कर राहुल और उस की पत्नी दिशा पर वैशाली को प्रताडि़त करने का आरोप लगाया. कालोनी वालों ने तभी दबे स्वर में इन आरोपों के सही होने की तरफ इशारा किया. इस से एसीपी रहमान ने टीआई कानवा को राहुल और दिशा को खोज निकालने के निर्देश दे दिए.

इन की तलाश में पुलिस की 2 टीमें मुंबई और जयपुर के लिए रवाना कर दी गईं, जबकि टीआई कानवा अपने मुखबिरों के जरिए राहुल की लोकेशन स्थानीय स्तर पर तलाश करने लगे. क्योंकि वह जानते थे कि कई बार शातिर अपराधी नाक के नीचे छिप कर पुलिस को चकमा देने की कोशिश करता है. वास्तव में टीआई कानवा का सोचना सही साबित हुआ, जिस के चलते चौथे दिन पुलिस ने राहुल को इंदौर में ही उस के एक रिश्तेदार के घर से गिरफ्तार कर लिया.

पूछताछ में राहुल अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताता रहा, लेकिन पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर 4 दिन की रिमांड पर ले लिया. इस दौरान उस से गहराई से पूछताछ की गई, जिस में वैशाली आत्महत्या मामले की कहानी इस प्रकार सामने आई—

बलवंत सिंह ठक्कर मूलरूप से उज्जैन जिले में महिदपुर के रहने वाले हैं. इन का प्लाईवुड और सनमाइका का बड़ा कारोबार है, जिस के लिए इन्होंने अपनी एक फैक्ट्री इंदौर के पालदा में लगा रखी है. बलवंत कई साल पहले पत्नी अनु, बेटी वैशाली और बेटे नीरज के साथ इंदौर में आ कर बस गए थे. वैशाली बचपन से ही प्रतिभाशाली थी. बेटी को अभिनय का शौक देख कर पिता ने यह शौक पूरा करने के लिए उसे हर तरह की सुविधा मुहैया करवा रखी थी. पिता का समर्पण और बेटी की मेहनत दोनों ही रंग लाई, जिस के चलते वैशाली टीवी सीरियल की दुनिया में काफी नाम कमा चुकी थी. इस से उस का ज्यादातर वक्त मुंबई में कटता था, लेकिन साल 2020 में कोरोना का प्रकोप बढ़ने के बाद वैशाली मुंबई छोड़ कर अपने घर इंदौर आ गई थी.

राहुल के घर वालों से थे पारिवारिक संबंध

बलवंत सिंह के पड़ोस में नरेश नवलानी अपनी पत्नी, बेटा राहुल और बहू दिशा के साथ रहते हैं. नरेश भी प्लाईवुड के बड़े व्यापारी हैं. रालामंडल में उन की बड़ी दुकान है. बेटा राहुल पिता की मदद करने के अलावा एक लैमिनेट्स फर्म भी चलाता था. बलवंत सिंह और नरेश नवलानी एक ही कारोबार से जुड़े थे, इसलिए उन के बीच व्यापारिक रिश्ते के अलावा निजी तौर पर गहरी दोस्ती थी. इसलिए पड़ोसी होने के कारण दोनों परिवारों का एकदूसरे के यहां काफी आनाजाना था.

लगभग 6 फीट लंबे, गोरेचिट्टे राहुल को मौडलिंग का शौक था. वह मौडलिंग में अपना करिअर बनाना चाहता था. मगर पिता नरेश नवलानी को यह सब पसंद नहीं था, इसलिए मौडल बनने की अपनी इच्छा मार कर राहुल पिता का कारोबार संभालने लगा था. राहुल वैशाली को बचपन से जानता था. वैशाली का उस के घर में खूब आनाजाना था. दोनों में बातचीत भी खूब होती थी, लेकिन उस समय न राहुल के मन में वैशाली के प्रति कुछ था और न वैशाली के मन में राहुल के लिए. समय आने पर पिता नरेश ने अपनी बराबरी का घर देख कर राहुल की शादी कोटा निवासी दिशा के साथ कर दी.

राहुल और दिशा की पटरी अच्छी बैठी, जिस से जल्द ही राहुल 2 बच्चों का पिता बन गया. चूंकि ठक्कर परिवार से राहुल के परिवार के बेहद पुराने और नजदीकी संबंध थे, इसलिए वैशाली राहुल की शादी में भी शामिल हुई और बच्चों के जन्म पर आयोजित उत्सवों में भी उस ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया. इस से वैशाली के साथ दिशा की भी अच्छी बनने लगी थी.

सब कुछ ठीक चल रहा था. इस घटना की नींव तो उस रोज पड़ी, जब अचानक ही वैशाली का चयन स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाले सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में लीड रोल के लिए हो गया. यह सीरियल 2015 में शुरू हुआ, जिस के चलते वैशाली ठक्कर की देशभर में पहचान बन गई. लोग उस को सुंदर और सफल टीवी अभिनेत्री के रूप में जानने लगे. वैशाली का अचानक ही छोटे परदे पर छा जाना राहुल के लिए चौंकाने वाला था. इस के बाद उसे और कई सीरियलों में अच्छे रोल मिल गए.

मौडलिंग में करिअर बनाना चाहता था राहुल

वास्तव में लंबे समय तक साथसाथ रहने के बाद भी राहुल ने कभी वैशाली की सुंदरता पर गौर नहीं किया था. वैशाली अभिनेत्री बन कर लोगों के दिलों पर राज करने लगी तो उस की आंखें खुलीं. दूसरे राहुल खुद भी मौडलिंग के क्षेत्र में अपना करिअर बनाना चाहता था, इसलिए उसे लगने लगा कि वह भी मौडल बन सकता है. इसलिए राहुल ने अपनी दबी हुई इच्छा को फिर से जीवित कर वैशाली से मदद लेने का फैसला कर लिया, लेकिन अब वैशाली के पास पहले की तरह समय कहां था. अनेक सीरियलों में काम के चलते वह ज्यादातर समय मुंबई में ही रहने लगी थी, लेकिन वैशाली की जिंदगी का बुरा वक्त उसे इंदौर ले आया.

हुआ यह कि 2020 कोरोना महामारी के चलते सभी शूटिंग रोक दी गईं, इसलिए वैशाली परिवार के साथ समय बिताने इंदौर आ गई. लौकडाउन लंबा चला, इसलिए कई दूसरे कलाकारों की तरह वैशाली के करिअर की गाड़ी भी पटरी से उतर गई.

राहुल ने फांस लिया वैशाली को

इंदौर में रहते हुए वैशाली का राहुल के घर में आनाजाना फिर से पहले की तरह बढ़ गया था. वैशाली का इस परिवार में उस समय से ही काफी आनाजाना था, जब दिशा शादी हो कर आई भी नहीं थी, इसलिए दिशा ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया. इसी बीच अपनी फिटनैस और सुंदरता बनाए रखने के लिए वैशाली ने जिम जाना शुरू कर दिया. इस का पता लगने पर राहुल भी उसी जिम में जाने लगा, जिस से दोनों की रोज मुलाकात होने लगी.

यहीं राहुल ने मौडल बनने का अपना सपना पूरा करने में वैशाली की मदद मांगी तो वैशाली बड़े ही आराम से उस की मदद करने को राजी हो गई. इतना ही नहीं, उस ने जल्द ही मुंबई के कुछ फोटोग्राफर से राहुल की बात भी करवा दी. राहुल काफी शातिर था. वह जानता था कि वैशाली लगभग 27 साल की हो चुकी है, इसलिए उस से नजदीकी हासिल करना ज्यादा मुश्किल नहीं है.

उस ने धीरेधीरे वैशाली में अपनी रुचि दिखानी शुरू कर दी. इतना ही नहीं, जब कभी काम के सिलसिले में वैशाली मुंबई और दूसरे शहर जाती तो मौडलिंग में अपनी संभावनाएं तलाशने के लिए राहुल भी उस के साथ जाने लगा. चूंकि दोनों के परिवार एकदूसरे के काफी नजदीक थे. इसलिए खुद राहुल की पत्नी दिशा को भी दोनों के यूं अकेले बाहर आनेजाने पर कोई ऐतराज नहीं था. नतीजा यह निकला की राहुल ने धीरेधीरे वैशाली की नजदीकी हासिल कर ली. वैशाली जिस ने कभी ऐसा नहीं सोचा था, वह राहुल के फैलाए जाल में फंस गई.

27 की उम्र पार कर चुकी युवती के मन में प्रेमी को ले कर उत्सुकता और रोमांच दोनों ही होना स्वभाविक है. फिर वैशाली तो ऐसी दुनिया का हिस्सा थी, जहां ऐसी नजदीकियां बहुत ही सामान्य बात मानी जाती हैं. लेकिन इस के बावजूद महिदपुर जैसे छोटे से कस्बे के संस्कार उस के खून में घुले हुए थे, इसलिए समय के साथ वैशाली शादीशुदा और 2 बच्चों के पिता राहुल को ही अपना सब कुछ समझने लगी. राहुल के साथ अपने संबंध को वह अंतिम सांस तक निभाना चाहती थी, इसलिए वैशाली राहुल के प्रति काफी गंभीर हो चुकी थी. लेकिन कोरोना के बाद वैशाली का करिअर पटरी से उतर चुका था, इसलिए मातापिता उस के विवाह के बारे में सोचने लगे.

यह बात राहुल को पता चली तो राहुल और वैशाली दोनों ही किसी तरह आपस में शादी करने की योजना बनाने लगे. लेकिन दोनों ही यह भूल गए थे कि राहुल की पत्नी दिशा दूधपीती बच्ची नहीं है जो अपने पति की एक जवान युवती के साथ नजदीकी का मतलब न समझ सके. इसलिए धीरेधीरे दिशा ने पति के साथ वैशाली की दोस्ती का विरोध करना शुरू कर दिया.

इतना ही नहीं, जब राहुल नहीं माना तो एक रोज दिशा अपने दोनों बच्चों को ले कर अपने मायके कोटा में जा कर रहने लगी. राहुल और दिशा के इस विवाद के बारे में राहुल के पिता नरेश को जानकारी हुई तो वैशाली के साथ अपने बेटे के प्रेम संबंध की बात भी उन तक पहुंच गई. नरेश नवलानी सुलझे हुए आदमी हैं, इसलिए उन्होंने किसी तरह दिशा को वापस बुलवाने के बाद राहुल को सीधे चेतावनी दे दी कि वह वैशाली से शादी करने की बात भूल जाए, इसी में उस की भलाई है. वरना वह उसे अपनी सारी जायजाद से बेदखल कर सारा कुछ दिशा और उस के दोनों बच्चों को सौंप देंगे.

राहुल की वजह से टूटा था वैशाली का रिश्ता

पिता की इस धमकी से राहुल डर गया. उस ने वैशाली से शादी करने में मजबूरी जाहिर की तो वैशाली ने उस से ब्रेकअप कर अपना रास्ता बदल लिया. राहुल चाहता था कि शादी नहीं हो सकती तो क्या हुआ, वैशाली बिना शादी के भी उस की बन कर रह सकती है. लेकिन वैशाली को उधार का प्यार स्वीकार नहीं था, इसलिए उस ने राहुल से पूरी तरह दूरी बना ली.

इसी दौरान वैशाली की मुलाकात मैट्रीमोनियल साइट पर केन्या में रहने वाले भारतीय मूल के डा. अभिनंदन सिंह से हुई. दोनों में बातचीत हुई और रिश्ता पसंद आने पर अप्रैल 2021 में अभिनंदन के साथ वैशाली की सगाई हो गई. लेकिन सगाई के एक महीने बाद ही वैशाली और अभिनंदन का रिश्ता टूट गया. इस रिश्ते के टूटने के साथ ही दोनों परिवारों को खुल कर वैशाली और राहुल के बीच चल रहे प्रेम प्रसंग की जानकारी लग गई. दरअसल, हुआ यह कि जैसे ही वैशाली की सगाई की बात राहुल को पता चली, उस ने वैशाली साथ अपने नजदीकी रिश्ते की जानकारी अभिनंदन को दे दी.

इतना ही नहीं, उस ने वैशाली के संग अपने ऐसे वीडियो और फोटो अभिनंदन को भेज दिए, जिन्हें देख कर अभिनंदन क्या कोई भी युवक अपनी राय बदल सकता था. अभिनंदन ने भी यही किया, जिस से दोनों की शादी टूट गई. दिशा को लगता था कि वैशाली की शादी के बाद सब ठीक हो जाएगा. लेकिन जब राहुल ने वैशाली की सगाई तुड़वा दी तो उस के इस कदम से पत्नी दिशा भड़क गई. उसे लगने लगा कि राहुल वैशाली को नहीं छोड़ पाएगा. इसलिए उस ने अपने पति से साफ कह दिया कि अगर वह उस का संग चाहता है तो उसे वैशाली को भूलना होगा.

बताते हैं कि इस का राहुल पर कोई असर नहीं हुआ, उलटे उस ने दिशा को तलाक देने की बात कही. इस पर दिशा ने तत्काल अपना पाला बदल लिया. दिशा भी व्यापारी परिवार की बेटी थी, इसलिए किस रास्ते पर जाने से फायदा और किस पर नुकसान, इस का बोध करने में उस ने देर नहीं की.

पति को बचाने के लिए दिशा ने चली चाल

दिशा को हर हालत में अपना परिवार बचाना था, इसलिए यह इस रिश्ते में राहुल को बेगुनाह और वैशाली को मर्दखोर लड़की साबित करने पर उतर आई. इस के लिए उस ने कालोनी की महिलाओं में यह बात फैला दी कि राहुल के न चाहते हुए भी वैशाली उस के पीछे पड़ी है. इस से वैशाली का कालोनी में बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया. बेटी को परेशान देख कर बलवंत सिंह ने राहुल के पिता और अपने पुराने दोस्त नरेश से बात की जिस पर नरेश नवलानी ने बलवंत सिंह को भरोसा दिलाया कि अब राहुल उन की बेटी की खुशियों के बीच नहीं आएगा.

अवैध रिश्ते में पुरुष को सब से बड़ा डर अपनी पत्नी का होता है. लेकिन यह डर राहुल को नहीं था, क्योंकि दिशा को अपना परिवार बचाने की चिंता थी. इसलिए वह समझदारी दिखाते हुए पति को सही और वैशाली को गलत साबित करने लगी थी. पिता की चेतावनी के बाद भी राहुल वैशाली का पीछा नहीं छोड़ रहा था. इस से वैशाली काफी परेशान थी. परेशान तो वैशाली के मातापिता भी थे, लेकिन उन्हें राहुल के पिता नरेश नवलानी की बात पर भरोसा भी था. मगर सब ठीक होने के बजाए वैशाली की जिंदगी लगातार

मुश्किल में पड़ती जा रही थी. यहां तक कि कालोनी में लोगों की चुभती निगाहों से बचने के लिए उस ने घर से निकलना तक कम कर दिया था. इतना सब होने के बाद भी राहुल अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा था. दरअसल, पत्नी दिशा राहुल के पक्ष में थी, इसलिए वह वैशाली जैसी खूबसूरत युवती को अपने जाल से आजाद नहीं होने देना चाहता था.

वैशाली और उस का परिवार समझ चुका था कि राहुल आगे भी कोई हरकत कर सकता है. इसलिए कुछ समय पहले वैशाली की मुलाकात फिर मैट्रीमोनियल साइट पर मिले मितेश गौर से हुई. मूलरूप से अहमदाबाद निवासी मितेश कैलिफोर्निया की एक कंपनी में उच्च पद पर काम करता था. यह मुलाकात भी रंग लाई, जिस के चलते मितेश के संग वैशाली का रिश्ता तय हो गया. राहुल फिर कोई विवाद न कर दे, इसलिए वैशाली की इस सगाई को पूरी तरह गुप्त रखा गया.

बलवंत ठक्कर परिवार ने निर्णय लिया कि पहले वैशाली और मितेश कोर्ट मैरिज करेंगे, इस के बाद इस रिश्ते को सार्वजनिक कर धूमधाम से दोनों की शादी का समारोह आयोजित कर दिया जाएगा. 20 अक्तूबर को मितेश और वैशाली की इंदौर एडीएम कोर्ट में शादी होने वाली थी, जिस के लिए मितेश हफ्ते भर पहले इंदौर आने वाला था, लेकिन वैशाली यहां एक गलती फिर कर गई. शादी से कुछ रोज पहले वैशाली ने सोशल मीडिया पर मितेश के संग अपनी सगाई की एक फोटो स्टोरी पोस्ट कर दी, जिस की खबर लगते ही राहुल ने मितेश से संपर्क कर उसे अपने और वैशाली के रिश्ते के बारे में बताते हुए वैशाली से शादी न करने की सलाह दी.

मितेश ने इस बारे में वैशाली से बात की, जिसमें वैशाली ने अपना पक्ष रखा, जिससे संतुष्ट हो कर मितेश राहुल की धमकी के बाद भी शादी के लिए इंदौर आने पर राजी हो गया. दूसरी तरफ जब राहुल ने देखा कि सब कुछ जानने के बाद भी मितेश वैशाली से शादी करने जा रहा है, तब उस ने वैशाली को धमकी देनी शुरू कर दी कि अगर उस ने उसे छोड़ कर मितेश से शादी की तो वह उसे समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ेगा.

इस धमकी से वैशाली काफी डर गई थी. दूसरे मितेश को शादी के लिए अब तक इंदौर पहुंच जाना था, लेकिन वह किसी कारण से तय तारीख पर इंदौर नहीं आया. इस से वैशाली को लगने लगा कि अभिनंदन की तरह मितेश भी उस से शादी न करने का मन बना चुका है. इस से वह बेहद परेशान हो गई. वैशाली जो कभी चमकदमक की दुनिया में जीती थी. सड़कों पर हजारों प्रशंसक उस की झलक देखने को बेताब रहते थे, उसे अपनी जिंदगी में ऐसे जिल्लत भरे वक्त की उम्मीद कभी नहीं रही थी. इसलिए उस ने दिशा और राहुल की जुगलबंदी से परेशान हो कर मौत का रास्ता चुन लिया.

घटना के संबंध में एसीपी मोतीउर रहमान का कहना है कि मृतका के सुसाइड नोट के आधार पर राहुल एवं उस की पत्नी दिशा को आरोपी बनाया गया है. सुसाइड नोट से साफ है कि आरोपी मृतका को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताडि़त कर रहा था. मृतका के सुसाइड नोट के अलावा डायरी में भी ऐसे ही संकेत मिले थे. आरोपी ने अपने मोबाइल और आईपैड का डाटा डिलीट कर दिया था, जिसे पुलिस रिकवर कराने की कोशिश करेगी. इस में नए तथ्य मिलने पर उस के खिलाफ और भी धाराएं बढ़ सकती हैं.

फौजिया को क्या मिला कंदील बलोच बन कर

पाकिस्तानी पंजाब के जिला डेरा गाजीखान में 1 मार्च, 1990 को बलोच परिवार में पैदा हुई फौजिया अजीम की 5 बहन थीं और 6 भाई. बचपन से ही वह अपनी उम्र के बच्चों से हर मामले में आगे थी. पढ़ाई में वह ठीक थी. उस की आकांक्षाएं बहुत ऊंची थीं. बचपन से ही उस की खूबसूरती आंखों में बस जोने वाली थी. साधारण तरीके से बात करते हुउ भी उस की भावभंगिमाएं अलग ही नजर आती थीं.

फौजिया अपनी फ्रैंडस से अकसर कहा करती थी कि वह बड़ी हो कर पहले मौडल बनेगी और फिर अदाकारा. हकीकत यह है कि उस वक्त वह खुद नहीं जानती थी कि यह उस की महत्वाकांक्षा थी, या फिर शेखी बघारने की बालसुलभ प्रवृत्ति. लेकिन इस तरह की बातों से उस ने अपने लिए अच्छीखासी समस्या खड़ी कर ली. फौजिया की फ्रैंड्स घर जा कर उस की इन बातों को अपने परिवार में बताया करती थीं.

परिणाम यह निकला कि उन के परिवारों के बुजुर्ग यह सोच कर खौफजदा होने लगे कि कल को अगर उन की लड़़कियां भी फौजिया के नक्शेकदम पर चलने को आमादा हो गईं तो उन की बच्चियों का क्या होगा? लिहाजा वे बेटियों के सामने फौजिया की गलत तसवीर पेश कर के उन के भविष्य का स्याह पक्ष दिखलाने की कोशिश करते और उस से दूर रहने को कहते. फौजिया की आजाद सोच को ले कर होने वाले विरोध संबंधी कुछ शिकायतों का सामना उस के पिता मोहम्मद अजीम को भी करना पड़ा. सुन कर वह काफी परेशान हुए. लेकिन अपनी बेटी से प्यार और सकारात्मक सोच की वजह से उन्होंने फौजिया को कुछ नहीं कहा.

खानदान बाद की बात होती तो मोहम्मद अजीम संभाल लेते, लेकिन वे शिया सोच वाले अपने उस समुदाय के बनाए नियमों से बाहर जाने की सोच नहीं भी सकते थे, जो अपने कट्टरपन के लिए जाना जाता था.

दूसरा कोई चारा न देख, मोहम्मद अजीम ने बेटी का निकाह आशिक हुसैन से पढ़वा दिया. उस वक्त फौजिया की उम्र 18 साल थी. निकाह के साल भर के भीतर वह एक बेटे की मां बन गई. लेकिन अपने शौहर से उस की ज्यादा दिनों तक नहीं निभी. वह जब भी अपने अब्बू के पास आती थी तो शौहर के बारे में उन्हें बताती थी कि वह हमेशा उस से बुरा व्यवहार करता है.

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मोहम्मद अजीम बेटी को समझाया करते थे कि जैसे भी हो अपने शौहर का दिल जीतने की कोशिश करे और उस के साथ रहती रहे. अब तो वैसे भी वह एक बच्चे की मां बन गई है.

लेकिन फौजिया के लिए वह वक्त यूं ही बेकार गुजरने वाला नहीं, बल्कि बेशकीमती था. जिस समय वह अपनी प्रतिभा को उभारने के लिए ऊंची उड़ान भरने की सोच सकती थी. उस वक्त उस के पंख काट कर वैवाहिक जीवन में बांध दिया गया था.

इस मुद्दे पर फौजिया ने पूरी गहराई से सोचा. आखिर वह इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अगर उसे जिंदगी में ऊंचा उठने के सपने पूरे करने हैं तो सारे बंधन तोड़ कर एक बार खुले आसमान में उड़ान भरनी होगी.

और उस ने ऐसा ही किया भी…

उस रोज उस के निकाह को ठीक एक साल हुआ था. जब वह अपने शौहर व बच्चे को छोड़ कर अपनी ससुराल को हमेशा के लिए अलविदा कह गई.

ऐसे में न तो उस ने किसी अपने से सहारे की दरकार की, न किसी रिश्ते के साथसाथ पुराने नाम को अपने साथ घसीटा. अब उस ने अपना पुराना नाम बदल कर नया नाम रखा- कंदील बलोच. इस के साथ ही उस ने अपना गैटअप भी पूरी तरह बदल लिया. अपनी इस नई पहचान के साथ वह मौडलिंग की दुनिया में कूद गई.

कंदील का अर्थ होता है—प्रकाश. फौजिया को यह नाम बहुत रास आया. कुछ ही दिनों में न केवल उस का यह नाम बल्कि उस की प्रतिभा भी प्रकाश में आ गई. हालांकि मौडलिंग में उसे बड़ी कंपनियों के अनुबंध मिलने शुरू नहीं हुए थे, लेकिन वह दिन पर दिन इस क्षेत्र में लोकप्रिय होती जा रही थी. उस ने कुछ नाटकों व धारावाहिकों में अभिनय कर के काफी वाहवाही लूटी थी. वह गाती भी बहुत अच्छा थी. चर्चा यह थी कि वह जल्दी ही बड़े पर्दे पर दिखाई देगी.

अमूमन यह सब हो जाने के बाद ही कलाकार वांछित लोकप्रियता की सीढि़यां चढ़ने लगता है. मगर कंदील बलोच एक ऐसा ब्रांड नेम बनता जा रहा था जो इस मुकाम पर पहुंचने से पहले ही काफी प्रसिद्धि बटोरने लगा था.

कंदील की लोकप्रियता की मुख्य वजह थी आज के जमाने का ब्रह्मास्त्र कहलाए जाने वाला सोशल मीडिया. अपने फेसबुक एकाउंट से ले कर ट्विटर तक के सहारे वह अनगिनत लोगों से जुड़ती जा रही थी. वक्त के साथ उसे चाहने वालों की संख्या भी खूब बढ़ रही थी.

कंदील पहले अपनी सफलताओं का ब्यौरा ही फेसबुक पर साझा किया करती थी, जिन पर उसे खूब लाइक्स और कमेंटस मिला करते थे. फिर एक दौर ऐसा भी आया जब उस ने अपने थोड़े बोल्ड फोटो अपलोड करने शुरू कर दिए. साथ ही उस ने ट्विटर पर भी अजीबोगरीब जुमले कसने शुरू कर दिए. इस से जहां वह कुछ ज्यादा ही चर्चा में आने लगी, वहीं उस के विरोध में भी आवाजें उठने लगीं.

इन में कुछ आवाजें उस के अपनों की भी थीं. जो भी था, कंदील बलोच अपने तरीकों से खुद को स्थापित करने में लगी थी. उस का कहना था कि पाकिस्तान में औरतों की आजादी के लिए वह अपनी एक अलग जंग छेड़ेगी.

बांग्लादेश की चर्चित लेखिका तस्लीमा नसरीन को कंदील ट्विटर पर फौलो करती थी. दूसरी ओर कंदील के अपने फेसबुक एकाउंट पर उस के 7 लाख फौलोअर्स थे और ट्विटर पर थे 43 हजार. यह अपने आप में एक बड़ी बात थी.

कंदील के आचरण का एक पहलू यह भी सामने आया कि वह हर लिहाज से बेबाक थी. एक वीडियो में उस ने भारतीय प्रधानमंत्री को ‘डार्लिंग मोदी’ व ‘चाय वाला’ कह डाला था. हालांकि बाद में उस ने दूसरा वीडियो जारी कर के अपनी इस बेहूदगी पर माफी मांगते हुए यह भी कहा कि वह पीएम मोदी की दिल से इज्जत करती है और उन से संबंधित पूर्व में दी अपनी स्टेटमेंट पर बेहद शर्मिंदा है.

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मार्च, 2015 में टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप के दौरान कंदील ने शाहिद अफरीदी को औफर दी कि अगर पाकिस्तानी टीम ने इस मैच में भारतीय टीम को हरा दिया तो वह उस के सामने स्ट्रिप डांस करेगी.

लेकिन जब भारतीय खिलाडि़यों के हाथों पाकिस्तानी टीम हार गई तो उस ने विराट कोहली को मैसेज भेजा ‘विराट बेबी, अनुष्का शर्मा ही क्यों?… फीलिंग इन लव…’

कई बार उस ने पूर्व क्रिकेटर एवं विपक्षी नेता इमरान खान के साथ निकाह करने की इच्छा भी जताई थी. तब तो हद हो गई, जब उस ने एक मुस्लिम धर्मगुरू के साथ अपनी विवादास्पद तसवीरें सोशलमीडिया पर पोस्ट कर दीं. अहम बात यही थी कि रूढि़वादी मुस्लिम देश में रह कर कंदील को सोशल मीडिया पर खुलेपन वाले वीडियो पोस्ट करने के लिए जाना जाता था. यहां तक कि उसे पाकिस्तान की पूनम पांडे भी कहा जाने लगा था.

इस तरह कंदील बलोच अपने बोल्ड अंदाज और विवादों में रहने की वजह से अकसर मीडिया में छाई रहती थी. भले ही अलग तरह से सही, दिन पर दिन उस की लोकप्रियता में इजाफा होता जा रहा था. इसी तरह वक्त अपनी रफ्तार से आगे बढ़ता जा रहा था. कंदील बलोच को लोकप्रियता हासिल करते एक लंबा अरसा गुजर गया.

लेकिन 2016 आतेआते उसे इस तरह की धमकियां मिलने लगीं कि अगर उस ने प्रसिद्धि हासिल करने का अपना यह शर्मनाक रास्ता बंद नहीं किया तो उसे भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, जिस में उस की जान भी जा सकती है. उसे अकसर धमकियों भरे फोन भी आने लगे थे.

कंदील ने पहले तो इस सब की परवाह नहीं की. वह ऐसी धमकियां को गीदड़भभकियां कहते हुए अपने ट्विटर पर साहसिक अंदाज में ट्वीट करती रही. एक ट्वीट में उस ने लिखा—‘आज के युग की एक महिला के तौर पर हमें अपने लिए खड़े होना है, दूसरी तमाम महिलाओं की आजादी के लिए.’ फिर एक दफा उस ने ट्वीट किया—‘जिंदगी ने कम उम्र में ही मुझे सबक सिखा दिया था. एक साधारण सी लड़की से आत्मनिर्भर महिला बनने का मेरा सफर इतना आसान नहीं था. अगर आप में इच्छाशक्ति है तो कोई भी आप को नहीं झुका सकता. मैं हक के लिए लडूंगी और अपने लक्ष्य तक जरूर पहुंचूंगी, इसे पाने से कोई मुझे रोक नहीं सकता.’

अपनी एक फेसबुक पोस्ट में कंदील ने लिखा, ‘भले ही मुझे कितनी ही बार गिराया जाए मैं गिर कर भी हर बार उठ खड़ी होऊंगी. मैं एक फाइटर हूं, वनमैन आर्मी. उन महिलाओं को मैं प्रेरणा देती रहूंगी, जिन के साथ बुरा व्यवहार होता है. मुझ से कोई कितनी भी नफरत करता रहे, मैं अपने चेहरे पर आत्मविश्वास लिए इसी रफ्तार से आगे बढ़ती रहूंगी. कुछ लोग कहते हैं कि मैं पाकिस्तान को बदनाम कर रही हूं. लेकिन मैं रुकूंगी नहीं. इतना तो तय है कि मैं सिर पर दुपट्टा भी नहीं लेने वाली हूं.’

लेकिन कंदील को धमकियां देने वाले पीछे नहीं हटे. अब तो फोन पर उस से साफसाफ कहा जाने लगा कि जितना फुदकना है फुदक ले, तेरी जिंदगी अब चंद रोज की है. इस से कंदील थोड़ा भयभीत हुई. जून, 2016 के आखिरी ह़फ्ते में उस ने सुरक्षा हासिल करने के लिए गृहमंत्री, एफआईए (फेडरल इन्वेटिगेशन अथौरिटी) के महानिदेशक एवं इस्लामाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखे.

लेकिन इस से पहले कि उस की सुरक्षा के लिए कुछ हो पाता, 16 जुलाई की सुबह कंदील बलोच जिला मुल्तान के शहर करीमाबाद स्थित पिता के घर में अपने बिस्तर पर मृत पाई गई.

कंदील के पिता की तबीयत कुछ दिनों से नासाज चल रही थी, जिन की खैरियत जानने और ईद की मुबारकबाद देने वह 15 तारीख को उन के यहां आई थी. रात में हंसीखुशी का माहौल रहा. कंदील के छोटे भाई वसीम अजीम ने बहन के घर आने पर कुछ ज्यादा ही खुशी का इजहार किया था. मगर सुबह वह अपने बिस्तर पर मृत पाई गई.

कंदील के पिता मोहम्मद अजीम ने इस मौत को कत्ल की संज्ञा देते हुए पुलिस के पास जो एफआईआर लिखवाई, उस में अपने ही 2 बेटों वसीम अजीम व असलम शाहीन को नामजद किया.

मामला दर्ज कर के 16 जुलाई की शाम को पुलिस ने दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया. प्रारंभिक पूछताछ में ही वसीम ने अपना गुनाह कबूल करते हुए माना कि कंदील की हत्या उस ने अपने 3 दोस्तों के साथ मिल कर की है, इस में उस के भाई का कोई हाथ नहीं है. लिहाजा असलम शाहीन को छोड़ दिया गया.

वसीम ने अपना अपराध कुबूलते हुए पुलिस को बताया कि वह कंदील के फेसबुक पोस्ट और विवादित वीडियो से बहुत परेशान था. वह समाज, कौम और यहां तक कि अपने समुदाय की भी परवाह नहीं करती थी. इसे ले कर उस के कई दोस्तों ने उसे खूब जलील किया कि कंदील पूरी तरह बिगड़ चुकी है. वह अपने दोस्तों को समझाया करता था कि इस सब से वह खुद बहुत परेशान है, लेकिन जब भी उसे मौका मिलेगा, वह उन की मौजूदगी में ही अपनी बहन की हत्या करेगा.

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वसीम ने बताया, ‘‘मैं ने कंदील को गुप्त रूप से धमकियां दे कर समझाने और हड़काने की कोशिश की. मगर वह नहीं मानी. 15 तारीख को वह खुद हमारे यहां चली आई. मैं ने उस के आने पर खुशी का इजहार करने का नाटक किया. इस से उसे मुझ पर जरा भी शक नहीं हुआ. रात में मैं ने कंदील के खाने में नशे की गोली मिला दीं. बिस्तर पर लेटते ही वह गहरी नींद में चली गई.

घर में सभी के सो जाने के बाद आधी रात में मैं ने अपने दोस्तों हक नवाज अब्दुल बासित और जफर खोसा को बुलाया और हम सब ने मिल कर कंदील की गला दबा कर हत्या कर दी. मुझे अपनी बहन को मारने का कोई अफसोस नहीं है.’’

पुलिस ने वसीम के दोस्तों को भी गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ के बाद सभी को जेल भेज दिया गया. पुलिस ने समयावधि के भीतर चारों अभियुक्तों के खिलाफ आरोपपत्र तैयार कर अदालत में दाखिल कर दिया. इस के बाद 8 दिसंबर, 2016 को अदालत ने चारों के खिलाफ आरोप तय कर दिए.

मगर इस के बाद अचानक मोहम्मद अजीम ने केस वापस लेने की अर्जी लगा दी, जो अंतिम रूप से नामंजूर तो हुई ही अदालत ने इस सिलसिले में मोहम्मद अजीम के खिलाफ काररवाई करने की संस्तुति भी कर दी. तदनंतर, पाकिस्तान की अदालतों में हड़ताल चलती रही, जिस वजह से यह केस लटकता गया. अब इस में फिर से सुनवाई शुरू हो गई है.

बहरहाल, कंदील बलोच को ले कर लेखिका तस्लीमा नसरीन की यह टिप्पणी काबिलेगौर है कि कुछ लोगों के अनुसार कंदील अमेरिका की किम कार्दशियां की तरह थी, जिस ने अपना जिस्म दिखा कर नाम कमाया. जो काम करते हुए किम ने अमेरिका में करोड़ों डौलर कमाए, वही काम करते हुए पाकिस्तान में कंदील बलोच को अपनी जान गंवानी पड़ी.

पाकिस्तान में वह खूब लोकप्रिय थी, भले ही वह सस्ती लोकप्रियता रही हो. क्या सस्ती लोकप्रियता वाली शख्सियतों को जीने का अधिकार नहीं है? कल को कंदील के हत्यारों को भले ही बड़ी से बड़ी सजा मिले, लेकिन मुख्य मुद्दा यह है कि फौजिया को कंदील बलोच बन कर आखिर क्या मिला?

सरस सलिल भोजपुरी अवार्ड : छाई रही एक्शन थ्रिलर फिल्में

आजकल भोजपुरी में एक्शन और थ्रिलर फिल्मों का जबरदस्त बोलबाला है. अब भोजपुरी में भी एक्शन, थ्रिलर फिल्में बन रही हैं. इन फिल्मों की कहानियां भी रोमांच पैदा करने के आधार पर लिखी जा रही हैं. इस के अलावा इन फिल्मों में नेपाल और साउथ के एक्शन मास्टर एक्शन सीन का निर्देशन कर रहे हैं, जिस से फिल्म के एक्शन जबरदस्त रोमांच पैदा करते हैं.

साल 2022 में भोजपुरी में एक्शन और थ्रिलर पर आधारित कई फिल्में रिलीज हुईं, लेकिन उन में से जिस फिल्म ने सब से ज्यादा सुर्खियां बटोरीं, उस का नाम है ‘रण’. भोजपुरी में बनी फिल्म ‘रण’ का एक्शन और कहानी दोनों ही दमदार हैं, जिस में भोजपुरी स्टार आनंद ओझा और अभिनेत्री काजल राघवानी की जोड़ी ने दर्शकों पर अपनी अलग ही छाप छोड़ी.

इस फिल्म का एक्शन डबल डोज से भरा है और एक्टर आनंद ओझा का इस में खतरनाक रूप देखने को मिला, जो बुराइयों को खत्म करने का काम करते हैं. इसी के साथ ही फिल्म में उन की और काजल राघवानी की रोमांटिक कैमिस्ट्री भी दर्शकों को खूब पसंद आई थी.

फिल्म की कहानी में हीरो यानी आनंद ओझा और काजल राघवानी कि जोड़ी बचपन में बिछड़ जाती है. आनंद सेना में अधिकारी बनने के बाद जब वापस आते हैं तो वह काजल राघवानी से फिर से मिलने की कोशिश करते हैं. इसी बीच फिल्म में विलेन नरेना खड़का, जो नेपाली फिल्म के जानेमाने अभिनेता हैं, का भाई देव सिंह भी काजल राघवानी के पीछे पड़ जाता है.

फिर विलेन और हीरो में जबरदस्त मारधाड़ शुरू हो जाती है. जहां इस फिल्म का एक्शन डराने वाला है वहीं फिल्म का विलेन काजल राघवानी के भाई को किडनैप कर लेता है.

हीरो आनंद ओझा विलेन से लड़ कर उस के चंगुल से काजल के भाई को छुड़ा तो लेते हैं, लेकिन बौखलाया हुआ विलेन काजल राघवानी सहित उन के पूरे परिवार की

हत्या कर देता है. इस के बाद विलेन के गैंग से जुड़े  सभी लोगों की एकएक कर हत्याएं होने लगती हैं.

इस की जांच की जिम्मेदारी पुलिस अधिकारी बने अयाज खान और मनोज सिंह टाइगर को मिलती है. लेकिन ये हत्याएं इतनी चालाकी से की जाती हैं, जिस की तह तक पुलिस का पहुंचना मुश्किल हो जाता है. आखिर में हीरो आनंद ओझा विलेन के गैंग का सफाया कर वापस सेना में चला जाता है.

फिल्म रणकी हुई काफी चर्चा

4 जनवरी, 2023 को अयोध्या में संपन्न हुए चौथे ‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ में जहां पारिवारिक और मसाला फिल्मों का बोलबाला रहा, वहीं मारधाड़, एक्शन और अपराध वाली फिल्मों ने भी अपनी अमिट छाप छोड़ी.

इस अवार्ड में जिन फिल्मों से नौमिनेशन मिले थे, उन में से वैयक्तिक रूप से भोजपुरी फिल्म ‘रण’ से एक्टर सी.पी. भट्ट का नौमिनेशन शामिल किया गया था. इस फिल्म में किए गए अभिनय को देखते सी.पी. भट्ट को बेस्ट एक्टर इन कौमिक रोल का अवार्ड दिया गया.

बेस्ट एक्टर इन कौमिक रोल के अवार्ड से नवाजे गए एक्टर सी.पी भट्ट इस फिल्म में के गजनी के किरदार में न केवल गुदगुदाते हुए नजर आए हैं, बल्कि वह हीरो को कई जगह मुसीबतों से बचाते भी हैं. सी.पी. भट्ट ‘रण’ फिल्म में अपने किरदार में पूरी तरह से ढले हुए नजर आए हैं.

फिल्म में विलेन नरेना खड़का और आनंद ओझा का खतरनाक एक्शन, अलगअलग तेवर में काफी रोमांचित करने वाला है. फिल्म पूरी तरह से साउथ एक्शन के पैटर्न पर बनाई गई है. यह फिल्म प्यार, मोहब्बत, रोमांस और रोमांच से भरपूर है.

इस के आलावा अवार्ड शो में ‘ससुरा बड़ा पैसा वाला’, ‘दिदिया के देवर’ जैसी फिल्मों की झोली में भी कई अवार्ड गए. इन फिल्मों की कहानी और एक्शन भी रोमांच पैदा करने वाला रहा है.

अगर भोजपुरी में एक्शन और थ्रिलर वाली अन्य फिल्मों की बात करें तो इस में सब से ऊपर ‘वध’ का नाम लिया जा सकता है. साल 2022 में रिलीज हुई भोजपुरी फिल्म ‘वध’ काफी चर्चा में रही, क्योंकि इस फिल्म को बौलीवुड के जानेमाने डायरेक्टर सुभाष घई की कंपनी मुक्ता आर्ट्स ने लगभग 200 मल्टीप्लेक्स में एक साथ रिलीज किया. और भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के इतिहास में पहली बार हुआ कि इतने बड़े लेवल पर किसी भोजपुरी फिल्म को रिलीज किया गया हो.

विराज भट्ट की सभी फिल्मों की तरह इस फिल्म में भी एक्शन और मारधाड़ है. इस फिल्म में विराज भट्ट ने एक पुलिस वाले का किरदार निभाया है. हीरो विराज भट्ट के एरिया का एक बहुत बड़ा गुंडा है, जिस के आतंक से लोग हमेशा परेशान रहते हैं, उसी से इन की दुश्मनी हो जाती है. लेकिन वह गुंडा इन को मार देता है. और फिर उन की पत्नी यानी रक्षा गुप्ता फिर उस गुंडे से बदला लेती हैं. और फिर विराज भट्ट का दूसरा रोल आता है और फिर वह उस गुंडे का वध करते हैं.

पकड़ुआ बियाहने किया सामाजिक कुप्रथा पर वार

‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ में साल 2022 की सर्वाधिक चर्चित भोजपुरी सीरीज में शुमार रही ‘पकड़ुआ बियाह’ जो बिहार की एक कुप्रथा पर आधारित है. भरपूर एक्शन, सस्पेंस और क्राइम पर आधारित इस फिल्म में यह दिखाने की कोशिश की गई है.

यशी फिल्म्स के बैनर तले बनी ‘पकड़ुआ बियाह’ की कहानी उत्तर प्रदेश, बिहार के इलाकों में हो रही जबरन शादी जैसी कुप्रथा पर आधारित है. इस सीरीज में अंकुश राजा, अनारा गुप्ता और रक्षा गुप्ता लीड रोल में हैं. इस भोजपुरी सीरीज में अनारा गुप्ता निगेटिव रोल में नजर आई हैं.

फिल्म की कहानी बिहार में अपराध का पर्याय माने जाने वाले पकड़ुआ बियाह पर आधारित है, जिस के तहत दूल्हे को अगवा कर उस की शादी रचाने का चलन है.  बेगूसराय से सटे पटना जिले के हिस्से मोकामा, पंडारख, बाढ़, बख्तियारपुर जैसे इलाकों में एक समय इस का खूब चलन था.

पकड़ुआ बियाह में गांव या परिवार के दबंग लोग इलाके के किसी पढ़ेलिखे और धनसंपदा से संपन्न शादी योग्य युवक का अपहरण कर लेते हैं. इस के बाद जबरन उस की शादी किसी लड़की से करा दी जाती है. विरोध करने पर युवक की पिटाई भी की जाती है. हथियार वगैरह दिखा कर युवक को डरायाधमकाया भी जाता है.

इतना ही नहीं, शादी कराने वाले दबंग दूल्हे और उस के घर वालों को इतना डराधमका देते हैं कि वह मजबूरी में जबरिया विवाह को स्वीकार कर लेते हैं. आमतौर पर दबंग पहला बच्चा होने तक दूल्हा और उस के परिजनों पर नजर रखते हैं.

चौपाल ओटीटी ऐप पर 10 दिसंबर को रिलीज हुई थी भोजपुरी ओरिजिनल वेब सीरीज ‘पकड़ुआ बियाह’ में मुख्यरूप से अंकुश, राजा, रक्षा गुप्ता, अनारा गुप्ता, विनीत विशाल, विष्णु शंकर बेलू, बिजेंद्र सिंह बिब, साहिल शेख और जनार्दन पांडेय ने भूमिका निभाई है.

इस वेब सीरीज के निर्देशक विवेक तिवारी ने बताया कि इस फिल्म में अपराध, रहस्य और रोमांच दर्शकों को अंत तक बांधे रखते हैं. उन्होंने बताया कि वेब सीरीज ‘पकड़ुआ बियाह’ मनोरंजन के साथसाथ एक सामाजिक संदेश भी देती है.

इस की कहानी आधुनिक भारतीय समाज की रूढि़वादी सोच को सामने लाती है और लोगों को उन के तर्कहीन और अंधविश्वासी व्यवहार से अवगत कराती है.

कभी शादीविवाह और घरपरिवार की कहानियों के इर्दगिर्द ही भोजपुरी फिल्मों की कहानियां घूम कर रह जाती थीं, जिस में गानों की भरमार के साथ ही गांव, घरों के झगड़े दिखाए जाते थे. लेकिन हाल के सालों में सैकड़ों ऐसी भोजपुरी फिल्में बनीं, जिन में अपराध, रहस्य और रोमांच का तड़का देखने को मिला. इन फिल्मों को दर्शकों ने पारिवारिक फिल्मों से ज्यादा तवज्जो दी.

यही वजह है कि भोजपुरी की ‘वध’ जैसी फिल्में 200 से अधिक मल्टीपलेक्स  में रिलीज हुईं तो वेब सीरीज‘पकड़ुआ बियाह’ को चौपाल ओटीटी ऐप पर खूब देखा जा रहा है.

समारोह में फिल्म ‘डोली सजा के रखना’ को जहां बेस्ट मूवी का अवार्ड दिया गया तो वहीं इसी फिल्म से बेस्ट ऐक्ट्रैस का अवार्ड आम्रपाली दूबे को, विनोद मिश्र को

बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर, प्रफुल्ल तिवारी को बेस्ट गीतकार, शर्मिला सिंह को बेस्ट निर्मात्री, रजनीश मिश्र को बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर, जितेंद्र सिंह उर्फ जीतू को बेस्ट एडिटर, आर.आर. प्रिंस को बेस्ट सिनेमैटोग्राफी, समर्थ चतुर्वेदी को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर क्रिटिक, संतोष पहलवान को स्पैशल मेंशन, प्रसून यादव  को बेस्ट कोरियोग्राफर, रक्षा गुप्ता को बेस्ट डेब्यू एक्ट्रैस का अवार्ड दिया गया. द्य

टीवी स्टार का सुसाइड : तुनिषा शर्मा की उलझी गुत्थी

मुंबई के पश्चिमी मलाड में टीवी और फिल्मों की शूटिंग के लिए मदर नेचर स्टूडियो है. वहां आम दिनों की तरह 24 दिसंबर, 2022 की दोपहर लंच के बाद की गहमागहमी शुरू हो चुकी थी. वहां कई सेट्स पर शूटिंग चल रही थी. उन्हीं में एक सेट ‘अलीबाबा: दास्तान ए काबुल’ का भी लगा हुआ था.

वहीं कलाकारों के मेकअप या आराम करने के लिए वैनिटी वैन भी लगे थे. वहीं सीरियल की मुख्य भूमिका निभाने वाली 20 साल की हीरोइन तुनिषा शर्मा अगले शौट के लिए मेकअप कर रही थी.

बाहर सीरियल के अगले शौट की तैयारी करीबकरीब पूरी होने वाली थी. लाइट और कैमरे सीन के मुताबिक लगा दिए गए थे. स्पौटबौय से ले कर असिस्टैंट डायरेक्टर, कैमरामैन, म्यूजिक रिकौर्डिंग टेक्नीशियन और एक किनारे बैठे मेन डायरेक्टर ने भी मोर्चा संभाल लिया था. कुछ मिनटों में ही हीरोइन तुनिषा शर्मा को बुलाया जाना था.

डायरेक्टर का इशारा हुआ, म्यूजिक बज उठा. पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार कुछ सेकेंड में तुनिषा को शौट के लिए वहां आ जाना चाहिए था, किंतु वह नहीं आई. तभी डायरेक्टर ने माइक से बोला, ‘‘कट!’’

सेट पर अलर्ट सभी क्रू मेंबर बोल पड़े, ‘‘ओह हो! फिर कट…’’

‘‘सारा मूड बिगाड़ दिया,’’ एक कैमरामैन भुनभुनाया. फिर से सेटिंग करनी होगी.

‘‘पता नहीं आज सुबह से ही कट…कट… सुन रहा हूं. न जाने इस लड़की को क्या हो गया है, हर शौट में कट. पहले तो ऐसा नहीं करती थी, एक टेक में ही सीन ओके हो जाता था. तभी डायरेक्टर की आवाज आई, ‘‘अरे कोई देखेगा भी, वह अभी तक आई क्यों नहीं?’’

यह कहना था कि एक स्पौटबौय वैनिटी वैन की ओर भागा.

कुछ सेकेंड में हांफता हुआ लौट आया.

‘‘क्या हुआ, क्यों हांफ रहा है? घबराया हुआ है?’’ डायरेक्टर ने पूछा. लेकिन स्पौटबौय के मुंह से आवाज नहीं निकल पा रही थी. वहीं सिर पकड़ कर बैठ गया और ऐसे हांफने लगा जैसे उस ने कोई डरावना सीन देख लिया हो.

‘‘अरे क्या हुआ? कुछ बोलेगा भी…!’’ डायरेक्टर ने कहा.

‘‘सर…सर, वो वो उधर मेकअप वैन में…’’ स्पौटबौय हकलाने लगा.

‘‘अरे, क्या मेकअप वैन में? तुझे अचानक क्या हो गया? ले, पहले पानी पी और पूरी बात बता.’’ डायरेक्टर बोला.

‘‘मैं ठीक हूं, तुनीषा मैम को फांसी लगी हुई है,’’ कह कर स्पौटबौय ने एक लंबी सांस ली.

यह सुन कर वहां मौजूद सभी अचानक चौंक गए. सभी के मुंह से निकल पड़ा, ‘‘क्याऽऽ?’’

जो जहां था, वहां से तुरंत अपनी पोजीशन छोड़ उस ओर दौड़ पड़ा, जहां तुनिषा के फांसी पर लटके होने की सूचना मिली थी.

तुनिषा की मौत पर चौंक गए सारे लोग

जिस ने भी तुनिषा को फांसी के फंदे लटके देखा, वह चौंक गया. सभी के मुंह से एक ही बात निकली, ‘‘अभी तो अच्छीभली मेकअप के लिए गई थी, फिर अचानक क्या हो गया उसे?’’

तुनिषा की मौत की खबर सेट पर आग की तरह फैल गई. जितने मुंह, उतनी बातें होने लगीं. सूचना मिलते ही दलबल के साथ वालीव थाने की पुलिस आ गई. सूचना मिलने पर तुनिषा के घर वाले भी आ गए, जिन में उस की मां वनिता शर्मा भी थी.

वालीव थाने के सीनियर पुलिस इंसपेक्टर कैलाश बर्वे ने घटनास्थल की जांच शुरू की. रोल के मुताबिक शहजादी मरियम के मेकअप में तुनिषा को फंदे से नीचे उतारा गया. आसपास की छानबीन की जाने लगी. मेकअप के सामानों और कपड़ों, आभूषणों आदि में से जिस की खोज की जा रही थी, वह था सुसाइड नोट.

आमतौर पर फंदे पर झूलती लाश या जहर आदि खा कर हुई मौतों में ऐसे नोट पाए जाते हैं, जिन में मरने वाला अपनी अंतिम बात लिख डालता है. ये नोट ऐसी अप्रत्याशित मौतों के मामले सुलझाने में काफी मददगार साबित होते हैं.

पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला. हालांकि फोरैंसिक जांच दल ने मेकअप रूम के सामान, कपड़े आदि को नमूने के तौर पर कब्जे में ले लिया था.

पुलिस ने अलीबाबा के सेट पर मौजूद हर शख्स से पूछताछ करने के बाद 22 लोगों के बयान लिए. फिर तुनिषा के शव को पोस्टमार्टम के लिए जेजे हौस्पिटल भेज दिया. प्रारंभिक पूछताछ में उस रोज तुनिषा के डिप्रेशन में होने की बात सामने आई.

मामला बौलीवड के एक उभरते सितारे की मौत का था. खासकर जब से सुशांत सिंह राजपूत की खुदकुशी का मामला चर्चा में आया था, तभी से मुंबई पुलिस इस संबंध में काफी अलर्ट हो गई है.

यही कारण था कि तुनिषा की मौत के केस को पुलिस कमिश्नर मधुकर पांडेय ने गंभीरता से लेते हुए बारीकी से जांचपड़ताल और गहन पूछताछ के आदेश दिए. पूछताछ में तुनिषा की मां वनिता शर्मा ने साफसाफ कहा कि उस की हत्या की गई है.

यही पुलिस के लिए जांच की एक बड़ी वजह बन गई थी, जो प्रारंभिक सबूत नहीं मिल पाने के कारण उलझाने वाली बनी हुई थी. हालांकि इस की जांच सुसाइड केस के तौर पर ही शुरू की गई.

पूछताछ के सिलसिले में तुनिषा के सहकलाकर और बौयफ्रैंड शीजान की भी तुरंत चर्चा होने लगी, जो उस वक्त सेट पर मौजूद था. लोगों ने बताया कि उस की तुनिषा से गहरी दोस्ती थी.

यहां तक कि तुनिषा का उस के घर आनाजाना भी था और उस की मां और बहनों से भी वह काफी घुलीमिली थी.

चंडीगढ़ की मूल निवासी तुनिषा मुंबई में मीरा रोड स्थित इंद्रप्रस्थ बिल्डिंग में अपनी मां वनिता शर्मा के साथ रहती थी. पुलिस ने जब शीजान से पूछताछ की, तब कई बातों को ले कर मामला और भी गंभीर बन गया.

पहली बात तो यह कि वह घटना से पहले उस के साथ था. उस की तुनिषा से बातचीत हुई थी, उस के मोबाइल की जांच में कुछ चैटिंग से शक पैदा हो गया और तुनिषा की मौत के लिए शीजान को जिम्मेदार समझा जाने लगा. यही नहीं, आगे की काररवाई और पूछताछ के लिए उसे हिरासत में ले लिया गया.

पुलिस के सामने बड़ा सवाल उस की अचानक हुई मौत को ले कर था तो उस से भी बड़े कई और सवाल थे कि अगर उस ने खुदकुशी की तो क्यों?

इस के पीछे वह कौन सा कारण था? घटना के ठीक पहले तुनिषा के साथ शीजान स्टूडियो के मेकअप रूम में क्यों मौजूद था? उन के बीच आखिरी 15 मिनट में ऐसा क्या हुआ कि तुनिषा ने जान दे दी?

इसी बीच इंस्टाग्राम पर एक वीडियो वायरल हो गया, जिस में तुनिषा ने कुछ कमेंट लिखे थे. उस से पुलिस को तुनिषा की बदलती जिंदगी का पता चला, उस में विचलित होने और अवसाद से निपटने की राह तलाशने से ले कर शीजान के साथ प्रेम संबंध और ब्रेकअप की बातें थीं.

इसे ले कर वह तनाव में चल रही थी, फिर भी काम पर जा रही थी. शूटिंग में हिस्सा ले रही थी और खुद को सामान्य करने की कोशिश भी कर रही थी.

इसे ले कर पुलिस भी हैरान हो गई कि तुनिषा द्वारा मीडिया पोस्ट में सब कुछ सामान्य होने जैसी बात करने के बावजूद उस ने 24 दिसंबर की दोपहर को खुदकुशी करने जैसा बड़ा कदम क्यों उठा लिया?

यह अंदेशा लगाया जाने लगा कि उस रोज तुनिषा और शीजान के बीच कुछ ऐसा जरूर हुआ था, जिसे सामने लाया जाना जरूरी था.

जांच करने वाली पुलिस टीम इस नतीजे पर पहुंची कि तुनिषा ने खुदकुशी का फैसला भी उन 15 मिनटों में यानी आननफानन में ही लिया.

बौयफ्रैंड शीजान पर हुआ शक

जाहिर है, इस जल्दबाजी के चलते ही उस ने खुदकुशी तो कर ली, लेकिन जान देने से पहले कोई सुसाइड नोट तक नहीं छोड़ पाई. वरना खुदकुशी करने वाले ज्यादातर मामलों में लोग सुसाइड नोट लिख कर या वीडियो रिकौर्ड कर ही जान देते हैं. जबकि तुनिषा ने ऐसा कुछ भी नहीं किया था.

उस के बाद पुलिस की जांच भी तुनिषा की जिंदगी के उन आखिरी 15 मिनटों पर टिक गई थी, जब वो मेकअप वैन में शीजान के साथ अकेली बंद थी.

फिर क्या था, एक कमरे में बंद 2 लोगों में से एक ने खुदकुशी कर ली और दूसरे पर खुदकुशी के लिए मजबूर करने का आरोप लग गया. यह सच था इस घटना के वक्त उन दोनों के अलावा आखिरी वक्त पर वहां कोई नहीं था. ऐसे में अगर तुनिषा के आखिरी 15 मिनटों के बारे में कोई सहीसही जानकारी दे सकता था तो वह शीजान ही था.

तुनिषा की जिंदगी के आखिरी 15 मिनटों का सच जानने के लिए शीजान से लगातार पूछताछ की जाने लगी. इस बीच उस की मां और बहन उसे निर्दोष बताती रहीं, जबकि तुनिषा की मां ने सीधेसीधे शीजान पर ही मौत का आरोप मढ़ कर पुलिस में शिकायत कर दी.

इस कारण उस की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी गई. यही नहीं, तुनिषा की मां ने शीजान की मां को भी मौत के लिए जिम्मेदार ठहरा कर पुलिस कमिश्नर से गिरफ्तारी की मांग कर दी. इस शिकायत पर और दिए गए औडियो के कुछ सबूत के आधार पर तुरंत शीजान की मां और तुनिषा के साथ काम करने वाले अभिनेता पार्थ जुत्शी को भी न्यायिक हिरासत में ले लिया गया.

मामले की तह तक पहुंचने और तुनिषा की मौत के मामले में सबूत जुटाने के इरादे से पुलिस और फोरैंसिक एक्सपर्ट्स ने मदर नेचर स्टूडियो और खासकर उस के मेकअप रूम का बारीकी से मुआयना किया. पुलिस ने मौकाएवारदात से वो केप बैंडेज भी बरामद कर लिया, जिस से लटक कर तुनिषा ने खुदकुशी की थी.

इस के अलावा फोरैंसिक के जानकारों ने तुनिषा के कपड़े, उस की ज्वैलरी और स्टूडियो में मौजूद उस की दूसरी चीजों में शीजान के वो कपड़े भी बरामद कर लिए, जो उस ने तुनिषा की खुदकुशी के वक्त पहने हुए थे.

15 दिनों में इन दोनों के बीच क्या हुआ

पुलिस शीजान और तुनिषा के मोबाइल फोन की चैट या मोबाइल में मौजूद दूसरी चीजों का पता लगाने में जुट गई थी. पुलिस इस के जरिए यह जानने की कोशिश में थी कि दोनों की जिंदगी में आखिरी वक्त में क्या चल रहा था?

खासकर, क्या शीजान की जिंदगी में तुनिषा के अलावा कुछ और भी लड़कियां थीं, जिसे ले कर तुनिषा और शीजान के बीच में विवाद हुआ? तुनिषा की मां ने शीजान पर कुछ ऐसे ही इलजाम लगाए थे.

तफ्तीश के दौरान पुलिस ने शीजान के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 के तहत तुनिषा को खुदकुशी के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया.

इस मामले में कानून के जानकारों का कहना है कि शीजान पर इस जुर्म को साबित करना आसान नहीं होने वाला है. खासकर तब जब तुनिषा ने जान देने से पहले कोई सुसाइड नोट भी नहीं छोड़ा है और न ही किसी भी दूसरे तरीके से अपनी मौत के लिए शीजान को जिम्मेदार ठहराया है.

तुनिषा की मां की तरफ से बताया गया कि शीजान ने करीब 15 दिन पहले ही अचानक तुनिषा से ब्रेकअप कर लिया था. ऐसे में पुलिस यह भी पता लगाने में जुट गई थी कि आखिर इन 15 दिनों में शीजान और तुनिषा के बीच क्या कुछ चल रहा था.

एक सवाल यह बारबार उठ रहा था कि क्या तुनिषा इस ब्रेकअप को खत्म करने के लिए शीजान पर कोई दबाव बना रही थी और वह अपने फैसले पर अड़ा हुआ था? तुनिषा के घर वालों का कुछ ऐसा ही कहना था.

तुनिषा की मां ने पुलिस को बताया कि उन्हें शीजान के ब्रेकअप करने के बाद तुनिषा की हालत नहीं देखी गई. यह देखते हुए उन्होंने शीजान से दोबारा तुनिषा की जिंदगी में वापस लौट आने की सलाह दी थी, लेकिन शीजान ने मना कर दिया था.

 

शीजान से चली पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. उस के मुताबिक शीजान ने पूछे गए सवालों पर हर बार अलगअलग बयान दिए. इस सिलसिले में उस के बयान बदलने के चलते उस की जमानत की अरजी ठुकरा दी गई. ऐसे में पुलिस के लिए यह जानने की बड़ी चुनौती बन गई कि आखिर उस का कौन सा बयान सही है और कौन सा गलत?

शीजान और तुनिषा में कई अंतर भी पाए गए, जैसे उन का धर्म अलग है तो उम्र में भी करीब 18 साल का अंतर है. इस बारे में दोनों को अच्छी तरह मालूम था और दोनों के घर वाले भी जानते थे.

इसे दोनों के रिश्तों में बीच बनने वाली कड़वाहट का कारण माना गया, फिर उन की तसवीरें और वीडियोज दोनों के काफी करीब होने का सबूत देने जैसे थे.

इस से अलग शीजान ने कहा है कि दोनों के घर वाले इस रिश्ते से राजी नहीं थे, जबकि तुनिषा की मां वनिता शर्मा का कहना था कि शीजान से संबंध खराब होने के बाद भी वह खुद तुनिषा से दोबारा संबंध जोड़ने की अपील करती हुई शीजान से उसी मदर नेचर स्टूडियो में जा कर मिली थी. उस ने शीजान से विनती की थी, लेकिन उस ने इस रिश्ते को आगे बढ़ाने से मना कर दिया था.

हालांकि पूछताछ के दौरान शीजान महिला सीनियर इंसपेक्टर कैलाश बर्वे के सामने फूटफूट कर रोया और तुनिषा की मौत पर पश्चाताप किया था. ऐसा तब हुआ था, जब वालिव पुलिस स्टेशन में उस से तुनिषा को ले कर सवालजवाब किए गए.

एक दौर ऐसा भी आया, जब वह भावुक हो गया. फिर भी जब पुलिस ने उसे बताया कि भायंदर श्मशाम घाट पर तुनिषा का अंतिम संस्कार होने वाला है, तब शीजान ने उस में शामिल होने जैसी कोई इच्छा नहीं जताई.

13 साल की उम्र से कर रही थी अभिनय

तुनिषा शर्मा फिल्म और टीवी सीरियल की ऐसी अभिनेत्री थी, जो बहुत ही कम उम्र में अभिनय के क्षेत्र में मुकाम पा चुकी थी. उस ने मात्र 13 साल की उम्र में शेरे पंजाब महाराजा रंजीत सिंह सीरियल से अभिनय की शुरुआत की थी. कई सीरियलों के अलावा 3 फीचर फिल्मों में भी काम कर चुकी थी. यदि वह जीवित होती तो नए साल में 4 जनवरी को अपना 21वां जन्मदिन मनाती.

आल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश श्यामलाल गुप्ता ने पुलिस कमिश्नर को पत्र लिख कर मांग की है कि अभिनेत्री तुनिषा शर्मा की मौत की जांच विशेष जांच टीम (एसआईटी) से कराई जाए, जिस से उस की मौत की सच्चाई सामने आ सके.

पुलिस ने भले ही तुनिषा के घर वालों की शिकायत पर शीजान पर केस दर्ज कर लिया हो, उस की गिरफ्तारी भी हो गई हो. लेकिन उसे अदालत में गुनहगार साबित करने की प्रक्रिया लिखे जाने तक पूरी नहीं हो पाई थी.

इस मामले में तुनिषा की मां के आरोप को भी गंभीरता से लिया गया है. उन का आरोप था कि शीजान के घर वालों खासकर उस की मां द्वारा तुनिषा को गलत दवाएं दी गईं. इस के लिए जयपुर के डाक्टर की मदद ली जा रही थी.

तुनिषा की मां बेटी पर मानसिक दबाव डालने को ले कर कई तरह के आरोप लगाती रही हैं. इस सिलसिले उन्होंने शीजान की मां और बेटी के साथ एक दोस्ताना संबंध को सिरे ने नकार दिया है. उन्होंने दोनों के बीच प्यार को ले कर आखिरी औडियो भी मीडिया को दिया था, जिस में मां से बेहद प्यार भरी बातें तुनिषा कर रही थी.

कोर्ट में सुनवाई के दौरान कुछ नई जानकारियों में तुनिषा द्वारा घटना के दिन खाना नहीं खाने की बात भी थी. शीजान का मोबाइल फोन पुलिस के लिए बहुत ही अहम सबूत बना हुआ है.

कुछ सवाल शीजान के वकील की गतिविधियों को ले कर बने हुए हैं, जो उस ने मजिस्ट्रैट के सामने कहा था. जैसे उस ने बताया कि घटना के दिन तुनिषा ने किसकिस से बात की थी.

इस जानकारी का वकील कोई स्रोत या सबूत नहीं दे पाए. साथ ही शीजान ने अपने मोबाइल फोन से बहुत सारे चैट्स डिलीट कर दिए थे.

उन के बीच की चैटिंग के जवाब नहीं दिए गए थे. यह भी पुलिस के गले नहीं उतर रहा कि दोनों का मेकअप रूम अलगअलग था तो तुनिषा शीजान के मेकअप रूम में क्यों गई.

इस बारे में शीजान ने साफसाफ कुछ नहीं बताया है. इस तरह से कई बातों की जांच की जानी है. यानी जांच के बाद कई और चीजें अभी सामने आनी बाकी हैं. इस के बाद ही तुनिषा की मौत की सच्चाई सामने आ सकेगी.    द्य

एक्ट्रेस बिदिशा बेजबरुआ मर्डर केस: शक में गंवाई जान

मुंबई में मौजूद निशीथ झा ने अपनी पत्नी बिदिशा बेजबरुआ को कई बार फोन किया. उस के फोन की घंटी तो बजी, लेकिन वह फोन नहीं उठा रही थी. वह परेशान हो गए कि पता नहीं बिदिशा फोन क्यों नहीं उठा रही?

बिदिशा गुड़गांव के सेक्टर-43 स्थित सुशांत लोक में रहती थी. वह असम की मशहूर सिंगर और फिल्म अभिनेत्री थी. रणबीर कपूर की फिल्म ‘जग्गा जासूस’ में भी उस ने काम किया था. निशीथ ने 5 जुलाई, 2017 को ही गुड़गांव में यह फ्लैट किराए पर लिया था.

निशीथ ने जिस ब्रोकर के माध्यम से यह फ्लैट किराए पर लिया था, उसे अपना परिचय दे कर फोन कर के कहा, ‘‘मैं इस समय मुंबई में हूं. मेरी पत्नी की तबीयत ठीक नहीं है. आप उसे किसी अच्छे डाक्टर को दिखा दीजिए.’’

इंसानियत के नाते ब्रोकर सुशांत एस्टेट की नवीं मंजिल स्थित उस फ्लैट पर पहुंच गया, जिसे उस ने कुछ दिनों पहले ही निशीथ को किराए पर दिलवाया था. फ्लैट का दरवाजा अंदर से बंद था. फ्लैटों में रहने वाले लोग वैसे भी अपने दरवाजे बंद ही रखते हैं. ब्रोकर ने घंटी का बटन दबा दिया और वह दरवाजा खुलने का इंतजार करने लगा. दरवाजा नहीं खुला तो उस ने दोबारा घंटी बजाई. इस बार भी किसी ने दरवाजा नहीं खोला.

कई बार घंटी बजाने के बाद भी जब किसी ने दरवाजा नहीं खोला तो ब्रोकर ने निशीथ को फोन कर के दरवाजा न खुलने की बात बता दी. निशीथ ने कहा कि हो न हो बिदिशा की तबीयत ज्यादा खराब हो गई हो और वह दरवाजा खोलने लायक ही न हो. उस ने उस से अनुरोध किया कि वह जल्द से जल्द फ्लैट का दरवाजा तोड़ कर उसे डाक्टर के पास ले जाए.

निशीथ से बात होने के बाद ब्रोकर दरवाजे को जोरों से धक्का मार कर तोड़ने लगा. दरवाजा तोड़ने की आवाज सुन कर पड़ोसी अपनेअपने फ्लैटों से बाहर आ गए. उन में ज्यादातर लोग उस ब्रोकर को जानते थे. उन्होंने ब्रोकर से दरवाजा तोड़ने की वजह पूछी तो उस ने फ्लैट के मालिक निशीथ से हुई बात उन लोगों को बता दी.

हकीकत से अनभिज्ञ थे पड़ोसी

पड़ोसियों को ब्रोकर की बात पर विश्वास नहीं हुआ तो उस ने निशीथ को फोन मिला कर स्पीकर औन कर के पड़ोसियों द्वारा दरवाजा तोड़ने का विरोध करने की बात बता दी. निशीथ ने पड़ोसियों को बताया कि फ्लैट में उस की पत्नी अकेली है और उस की तबीयत बहुत ज्यादा खराब है. उसे अभी डाक्टर के पास ले जाना है.

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पड़ोसियों को पता चला कि निशीथ की पत्नी की ज्यादा तबीयत खराब है तो उन्होंने भी दरवाजा तोड़ने में ब्रोकर की मदद की. थोड़ी कोशिश के बाद दरवाजा टूट गया. लोग अंदर दाखिल हुए तो वहां का नजारा देख कर सभी सन्न रह गए. निशीथ की पत्नी की लाश पंखे से लटक रही थी. ब्रोकर ने फोन द्वारा यह खबर निशीथ और थाना सुशांत लोक पुलिस को दे दी.

सुशांत एस्टेट थाने से कुछ ही दूर स्थित है, इसलिए खबर मिलते ही थानाप्रभारी गौरव, एसआई सतीश, एएसआई अर्जुन आदि के साथ वहां पहुंच गए. पुलिस नौवीं मंजिल स्थित निशीथ के फ्लैट पर पहुंची तो वहां बिदिशा की लाश पंखे से झूलती मिली. थानाप्रभारी ने इस की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम को दे दी.

थोड़ी देर में क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम भी मौके पर पहुंच गई. उसी बीच डीसीपी (ईस्ट) दीपक सहारण भी वहां आ गए. मामला एक फिल्म अभिनेत्री की मौत का था, इसलिए वहां फ्लैटों में रहने वाले जिन लोगों को भी जानकारी मिली, वे बिदिशा के फ्लैट पर पहुंच गए.

पुलिस ने लोगों के सहयोग से लाश उतार कर कमरे की तलाशी ली, पर वहां कोई सुसाइड नोट नहीं मिला. पुलिस ने आसपास के फ्लैटों में रहने वाले लोगों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि बिदिशा कुछ दिनों पहले ही वहां रहने आई थी, इसलिए वे इस के बारे में ज्यादा नहीं जानते.

हां, उन्होंने इतना जरूर बताया कि बिदिशा का व्यवहार बहुत अच्छा था. बातचीत से कभी नहीं लगा कि उसे कोई तनाव था. वह जब भी मिलती थी, खुश दिखती थी.

मौके पर वह ब्रोकर भी मौजूद था, जिस ने बिदिशा को यह फ्लैट किराए पर दिलवाया था. पुलिस ने उस से पूछताछ की तो उस ने बताया कि बिदिशा और उस के पति निशीथ से उस की पहली मुलाकात तब हुई थी, जब वे लोग किराए पर फ्लैट लेने आए थे. पुलिस को ब्रोकर से बिदिशा के पति निशीथ का मोबाइल नंबर मिल गया था. थानाप्रभारी ने निशीथ को फोन कर के बिदिशा द्वारा आत्महत्या करने की सूचना दी. उस ने कहा कि इस समय वह मुंबई में है और कल तक गुड़गांव पहुंच जाएगा.

बिदिशा का फोन कमरे में ही था. उस में से पुलिस को उस के मातापिता का नबर मिल गया. पुलिस ने उस के पिता अश्वनी बेजबरुआ को फोन कर के बिदिशा के सुसाइड करने की बात बता दी. वह गुवाहाटी, असम में रहते थे. बेटी की मौत की खबर पा कर अश्वनी और उन की पत्नी रंजीता रोनेबिलखने लगी.

वे दोनों अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ फ्लाइट से सोमवार की रात को दिल्ली आ गए. दिल्ली से टैक्सी ले कर वे गुड़गांव पहुंचे. इस से पहले पुलिस ने मौके की जरूरी काररवाई कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया था.

मृतक अभिनेत्री बिदिशा के पिता अश्वनी ने थानाप्रभारी गौरव कुमार को बताया कि बिदिशा बहुत समझदार लड़की थी. पिछले साल ही निशीथ से उस की शादी हुई थी. शादी के बाद बिदिशा को पता चला कि निशीथ के किसी और लड़की से संबंध हैं.

बिदिशा निशीथ को उस लड़की से मिलने के लिए रोकती थी, पर वह नहीं मानता था. इसी बात को ले कर वह बिदिशा से झगड़ता रहता था. बिदिशा के तनाव की सब से बड़ी वजह यही थी. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि उन की बेटी की मौत का जिम्मेदार निशीथ है. उस के खिलाफ सख्त काररवाई की जानी चाहिए.

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निशीथ के खिलाफ केस दर्ज

मामला हाईप्रोफाइल था, इसलिए थानाप्रभारी ने डीसीपी दीपक सहारण से इस मसले पर बात की. उन्हीं के निर्देश पर थानाप्रभारी ने 18 जुलाई, 2017 को निशीथ के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज कर लिया.

अगले दिन निशीथ गुड़गांव पहुंचा तो पुलिस ने उस से पूछताछ की. उस ने बताया कि वह बिदिशा को खुश रखता था. बस कभीकभी छोटेमोटे मतभेद हो जाते थे, जो अकसर हर घर में होते रहते हैं. पर ऐसी कोई बात नहीं थी, जिस से बिदिशा को जान देनी पड़ती. बिदिशा ने ऐसा क्यों किया, यह उस की भी समझ में नहीं आ रहा.

निशीथ भले ही खुद को बेकसूर बता रहा था, लेकिन बिदिशा के पिता ने उसी पर आरोप लगाया था, इसलिए पुलिस ने 18 जुलाई को निशीथ को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने उस का मोबाइल फोन और लैपटौप भी कब्जे में ले लिया.

असम की गायिका और अभिनेत्री बिदिशा के सुसाइड का मामला असम में तूल पकड़ने लगा. वहां के लोग पूर्वोत्तर का मामला बता कर तूल देने लगे. इस से कुछ दिनों पहले ही वहां पूर्वोत्तर की एक लड़की से दुष्कर्म हुआ था. तब गुड़गांव पुलिस प्रशासन ने डीजीपी व गृह सचिव के माध्यम से सरकार को प्रस्ताव भिजवाया था कि यहां पूर्वोत्तर के पुलिस अफसरों को तैनात किया जाए. इस प्रस्ताव को अभी सरकार की मंजूरी नहीं मिली है.

अभिनेत्री बिदिशा का मामला जब असम में ज्यादा ही तूल पकड़ने लगा तो वहां के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर से फोन पर बात की. उन्होंने बिदिशा के केस की जांच ठीक से कराने की बात कही. इस के बाद मनोहरलाल खट्टर ने गुड़गांव के पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की.

मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद पुलिस गंभीरता से इस मामले की जांच में जुट गई. पुलिस ने निशीथ के फोन की काल डिटेल्स निकाल कर जांच की. इस जांच में ऐसे 2 फोन नंबर सामने आए, जिन पर निशीथ की काफी देर तक बातें होती थीं. एक फोन नंबर तो ऐसा था, जिस पर उस की शादी से पहले भी बातें होती रही थीं.

पुलिस ने निशीथ को एक दिन के रिमांड पर ले कर इस बारे में पूछताछ की तो उस ने स्वीकार किया कि शादी से पहले उस की एक लड़की से दोस्ती थी, जो अब भी है. उसी लड़की को ले कर बिदिशा उस पर शक करती थी. आगे की कहानी जानने से पहले आइए थोड़ा बिदिशा के बारे में जान लें कि वह चाय बागानों के इलाके से निकल कर बौलीवुड तक कैसे पहुंची?

27 साल की बिदिशा मूलरूप से गुवाहाटी के रहने वाले अश्वनी कुमार की बेटी थी. उन का एक बेटा था कौशिक बेजबरुआ, जो पुणे की किसी कंपनी में नौकरी कर रहा है.

बिदिशा बेहद खूबसूरत थी. उस ने गुवाहाटी के निकोल्स हाईस्कूल से सन 2007 में हायर सैकेंडरी की परीक्षा अच्छे नंबरों से पास की. पढ़ाई के साथसाथ वह स्कूल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती थी. उस की आवाज भी बड़ी मधुर थी, इसलिए वह गाने भी गाती थी.

इस के अलावा टीवी पर डांस देखतेदेखते बिदिशा ने डांस भी सीख लिया था. बिहू डांस की तो वह इतनी शौकीन थी कि स्कूल के अलावा वह सामाजिक संस्थाओं द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में भी बिहू डांस करने जाती थी. उस के डांस और गानों पर दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठते थे. फिल्म अभिनेत्री सोनम कपूर और कोंकणा सेन शर्मा की वह बड़ी फैन थी.

स्कूली पढ़ाई पूरी होने के बाद बिदिशा ने गुवाहाटी के कौटन कालेज से इंगलिश (लिटरेचर) से ग्रैजुएशन किया. कालेज के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी वह बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती रही. अभ्यास करतेकरते वह एक अच्छी सिंगर बन गई.

उन्हीं दिनों उस की मुलाकात मशहूर पत्रकार अर्नब गोस्वामी से हुई. वह उन से इतनी प्रभावित हुई कि उस ने पत्रकार बनने का निर्णय ले लिया. ग्रैजुएशन करने के बाद उस ने दिल्ली के इंडियन इंस्टीट्यूट औफ मास कम्युनिकेशन से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया.

बिदिशा ने तमाम नाटकों में अभिनय किया था, जिन में उस की अलगअलग भूमिकाओं की खूब सराहना हुई थी. दर्शकों से मिलने वाले इस प्यार ने उसे नया फैसला लेने पर मजबूर कर दिया. कहां तो उस ने पत्रकार बनने के लिए कोर्स किया था, लेकिन अब वह कुछ और ही सोचने लगी थी. इसी के चलते पत्रकार बनने के बजाय उस ने अभिनय के क्षेत्र को चुन लिया. सुंदर तो वह थी ही, साथ ही उस की फिगर भी बहुत अच्छी थी. कभीकभी वह अपनी सुंदरता और फिगर की तुलना बौलीवुड की नई अभिनेत्रियों से करती तो खुद को उन से बेहतर पाती.

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फलस्वरूप गायिका के साथसाथ उस ने अभिनेत्री बनने के सपने संजोने शुरू कर दिए. लेकिन उस के सामने समस्या यह थी कि फिल्म इंडस्ट्री में उस का कोई गौडफादर नहीं था, जो फिल्म इडस्ट्री में उस की एंट्री करा देता. फिर भी उस ने हिम्मत नहीं हारी और मुंबई चली गई.

फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री करने के लिए हजारों लड़कियां मुंबई में रह कर स्ट्रगल करती रहती हैं. विभिन्न डायरेक्टरों और प्रोड्यूसरों के पास चक्कर लगातेलगाते उन के सैंडल, जूते घिस जाते हैं. इन में तमाम लड़कियां ऐसी भी होती हैं, जो फिल्मों में रोल पाने के लिए हर तरह का समझौता करने को तैयार रहती हैं. मुंबई पहुंच कर बिदिशा भी स्ट्रगल करने वाली लड़कियों में शामिल हो गई.

मुंबई में बिदिशा की मुलाकात निशीथ झा से हुई. निशीथ गुजरात का रहने वाला था. पहले वह ओएनजीसी में अच्छे पद पर नौकरी करता था. नौकरी छोड़ कर वह मुंबई में वह बिजनैस करने लगा था. अच्छे रसूख वाले निशीथ के संबंध फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कुछ लोगों से थे.

निशीथ की कोशिश से बिदिशा को रणबीर कपूर की फिल्म ‘जग्गा जासूस’ में अभिनय करने का मौका मिल गया. इस फिल्म में बिदिशा ने बिहू डांस किया था. फिल्म में काम मिलने से बिदिशा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उस की निशीथ से अच्छी दोस्ती हो गई. धीरेधीरे उन की यह दोस्ती प्यार में बदल गई. घर वालों की मरजी से सन 2016 में दोनों की शादी हो गई. निशीथ का मुंबई में ही औफिस था. उस में काम करने वाली एक लड़की से उस की गहरी दोस्ती थी. घर पहुंच कर भी वह उस से बातें करता रहता था. उस के अलावा वह और भी कई लड़कियों से फोन पर बातें करता था.

कुछ दिनों तक तो बिदिशा यह सब देखती रही, पर बाद में उस ने पति को टोकना शुरू कर दिया. इतना ही नहीं, उस ने अपने स्तर से पता लगा लिया कि निशीथ के एक और लड़की से गहरे संबंध हैं. बिदिशा ने इस बारे में उस से बात की तो उस ने उसे समझाते हुए कहा कि जिस लड़की को ले कर वह उस पर शक कर रही है, उस से केवल उस की दोस्ती है. इस से अलावा उस से कोई संबंध नहीं है.

पति पर शक

पर बिदिशा के दिमाग में शक बैठ गया था. शक ऐसी बीमारी है, जो मतभेद होने पर और बढ़ती है. बिदिशा क्या कोई भी युवती इस बात को हरगिज स्वीकार नहीं कर सकती कि उस का पति किसी और महिला से संबंध रखे. जब पति ने उस की बात को गंभीरता से नहीं लिया तो उस ने पति की शिकायत अपनी मां से कर दी.

मांबाप ने बेटी की गृहस्थी में इसलिए दखल नहीं दिया कि अभी कुछ दिन पहले तो दोनों की शादी हुई है. दखल देने से कहीं उन के संबंधों में दरार न आ जाए, इसलिए पिता अश्वनी ने बेटी को ही समझाया और निशीथ से भी बात की.

बिदिशा की मायके वालों से शिकायत करने की बात निशीथ को अच्छी नहीं लगी. इस का नतीजा यह निकला कि बिदिशा और निशीथ के बीच विवाद बढ़ गया. चूंकि बिदिशा अपने कैरियर के लिए चिंतित रहती थी, इसलिए वह पारिवारिक तनाव में उलझना नहीं चाहती थी. पर उस के दिमाग में पति को ले कर ऐसा शक बैठ गया था, जो निकलने का नाम ही नहीं ले रहा था.

निशीथ उसे यकीन दिलाता रहता था कि उस के किसी भी लड़की से गलत संबंध नहीं हैं. पर बिदिशा उस की बात मानने को तैयार नहीं थी. घर में रोजरोज कलह न हो, इस के लिए निशीथ ने 5 जुलाई, 2017 को गुड़गांव के सुशांत लोक में एक फ्लैट किराए पर लिया और बिदिशा से कहा कि जब तक उस का मन करे वह यहां रहे और जब मन करे मुंबई आ जाए.

इतना ही नहीं, निशीथ ने यह भी कहा कि वह किसी और हिंदी फिल्म में उस के लिए काम तलाश रहा है. पति की बात मान कर बिदिशा गुड़गांव आ गई. गुड़गांव वाले फ्लैट में बिदिशा अकेली रहती थी. मन होने पर जब वह पति को फोन करती, उस का नंबर अकसर व्यस्त मिलता.

इस पर बिदिशा का शक बढ़ता गया और वह परेशान रहने लगी. जब कभी वह मांबाप को फोन कर के मन की बात बताती तो वे उसे समझाते हुए उस का डिप्रेशन दूर करने की कोशिश करते. धीरेधीरे वह इस तरह हतोत्साहित हो गई कि उसे यह जीवन नीरस लगने लगा.

बिदिशा ने पति को फोन किया तो बातचीत में उसे लगा कि बिदिशा की तबीयत ठीक नहीं है. उस ने उस से अपना खयाल रखने को कहा. उस दिन बिदिशा इतनी हताश हो गई कि गले में फंदा लगा कर पंखे से लटक गई, जिस से उस की मौत हो गई. शाम को निशीथ ने बिदिशा को फोन किया तो उस का फोन नहीं उठा.

गुड़गांव में उस का कोई जानकार तो था नहीं, जिसे वह फ्लैट में जा कर देखने को कहता. तब उसे उस ब्रोकर की याद आई, जिस के माध्यम से उस ने फ्लैट किराए पर लिया था. उसी ब्रोकर से उस ने पत्नी की तबीयत खराब होने की बात कह कर फ्लैट पर जाने को कहा.

जब ब्रोकर उस के फ्लैट पर पहुंचा तो पता चला कि मशहूर गायिका और अभिनेत्री बिदिशा बेजबरुआ की जीवनलीला समाप्त हो चुकी है. पुलिस ने निशीथ से पूछताछ कर उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया. केस की विवेचना एएसआई अर्जुन कर रहे हैं.

– कथा पुलिस सूत्रों एवं जनचर्चा पर आधारित

डायरेक्टर की कपटी मोहब्बत में फंसी ईशा आलिया – भाग 4

29 दिसंबर, 2022 को ईशा आलिया को चाहने वाले प्रशंसकों की भीड़ रांची ही नहीं, कोलकाता की सड़कों पर भी उतर कर होहल्ला मचाने लगी. एसपी स्वाति भंगालिया को यही डर था. वह जानती थीं, ऐसा ही होगा. इसलिए वह पूरी मुस्तैदी से इस हत्याकांड के दोषी को कटघरे में खड़ा करने के लिए दिनरात कड़ी मशक्कत कर रही थीं. अपराधी उन की नजरों के सामने था, बस उस के मुंह से सच्चाई उगलवानी थी.

दूसरी सुबह यानी बृहस्पतिवार को रांची से पुलिस टीम बगनान थाने लौट आई. तब एसपी भंगालिया ने प्रकाश अलबेला को अपने सामने बिठा लिया. प्रकाश अलबेला ने अपनी आंखों से अपने खिलाफ पुलिस को सबूत एकत्र करते देखा था, इसलिए वह अंदर तक हिला हुआ था.

उसे स्वाति भंगालिया ने प्रश्नों के घेरे में उलझाया तो कुछ देर पुलिस को वही स्क्रिप्ट सुनाता रहा, जो उस ने फिल्मी अंदाज में लिखी और पुलिस को पहले सुनाई थी लेकिन पुलिस की सख्ती के आगे आखिर वह झुक गया. उस ने ईशा की हत्या और उस के पीछे की बुनी हुई साजिश का खुलासा करते हुए हत्या की जो कहानी बताई, हैरान कर देने वाली निकली—

शादीशुदा और 2 बच्चों का बाप होने के बावजूद प्रकाश अलबेला को ईशा आलिया की खूबसूरती ने मोह लिया था. चूंकि वह और ईशा फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हुए थे, इसलिए वह धीरेधीरे ईशा को अपने प्रेम जाल में फांसने के लिए उसे कीमती उपहार और फिल्मों में हीरोइन बनाने का चांस देने का प्रलोभन देता रहा.

ईशा उस के प्रेमजाल में फंस गई तो उस ने उस से लवमैरिज कर ली. ईशा को वह अपनी पहली पत्नी शारदा से छिपा कर टैगोर हिल एरिया में स्थित फ्लैट में रखने लगा, लेकिन पता नहीं कैसे शारदा को इस की भनक लग गई. वह उस पर दबाव बनाने लगी कि वह ईशा को अपनी जिंदगी से निकाल दे.

तब शारदा के उकसाने पर ईशा पर वह जुल्म करने लगा. उस से झगड़ा करने लगा. चूंकि ईशा उस की बेटी परी की मां बन चुकी थी, इसलिए उस का हर जुल्म सह कर भी वह उस के साथ रहती रही. परी 2 साल की हो चुकी थी, लेकिन वह ईशा को अपनी जिंदगी से अलग नहीं कर पाया था.

पहली पत्नी शारदा इसी बात को ले कर उस के साथ कलह करने लगी. शारदा उसे  छोड़ कर जाने की धमकी देने लगी तो प्रकाश ने ईशा को हमेशा के लिए अपने रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली.

ईशा लगातार कोलकाता स्थित अपने घर जाने की जिद कर रही थी. तब प्रकाश ने 27 दिसंबर को उसे आश्वासन दिया कि हम रात को ही कोलकाता के लिए चलेंगे. वह आराम से 2-3 घंटे सो जाए. ईशा खुशीखुशी अपने बैडरूम में सोने चली गई. जब वह गहरी नींद में सो गई तो प्रकाश ने उस की कनपटी से रिवौल्वर सटा कर गोली मार दी.

ईशा चीख भी नहीं सकी. कुछ देर तड़पने के बाद उस ने दम तोड़ दिया. फिर रात को साढ़े 11 बजे उस ने ईशा की लाश को कार की अगली सीट पर इस तरह बिठाया जैसे वह सो रही हो. उस ने यह इसलिए किया कि अगर रास्ते में सीसीटीवी लगे हों तो उस में जाहिर हो सके कि वह ईशा को ले कर कोलकाता के लिए कार से निकला था.

कोलकाता के करीब महिषरेखा पुल के पास उस ने कार रोकी और ईशा की लाश को डिक्की में डाल दिया. रास्ता सुनसान था, वहां न सीसीटीवी कैमरे लगे थे न कोई चश्मदीद गवाह था.

इस के बाद वह सुबह बगनान थाने में ईशा की लाश ले कर पहुंचा और पुलिस को लुटेरों द्वारा ईशा को गोली मार देने की झूठी कहानी सुनाई.

प्रकाश अलबेला द्वारा जुर्म स्वीकार कर लिए जाने के बाद बगनान थाने में उस के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 498ए व आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर के उसे पुलिस अभिरक्षा में न्यायिक मजिस्ट्रैट की अदालत में पेश कर दिया गया, जहां से उसे जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया.

पुलिस प्रकाश अलबेला को ईशा आलिया की हत्या के जुर्म में कड़ी से कड़ी सजा दिलवाने के लिए उस के खिलाफ ठोस सबूत एकत्र करने में जुट गई है. इस मामले में प्रकाश की पत्नी शारदा और प्रकाश के भाइयों की भी कोई भूमिका रही है या नहीं, इस की भी जांच पुलिस द्वारा की जा रही थी.

पोस्टमार्टम के बाद ईशा आलिया की लाश को उस के घर वालों के सुपुर्द कर दिया गया.

चूंकि महुदी गांव में ईशा का बचपना गुजरा था, इसलिए उस का अंतिम संस्कार वहीं होना चाहिए था, लेकिन महुदी गांव के बड़ेबुजुर्गों ने ईशा के पिता धनोखी राणा को ईशा की लाश गांव में लाने से मना कर दिया. इस के पीछे क्या कारण रहा, यह कहना मुश्किल है.

ईशा के घर वालों ने बुजुर्गों की बात का मान रख कर पूरे विधिविधान से वहां के श्मशान घाट में ईशा की अंत्येष्टि कर दी.

ईशा की बेटी परी कथा लिखे जाने तक बगनान थाने में पुलिस के पास ही थी. पुलिस बगैर कानूनी औपचारिकता के बच्ची को ननिहाल वालों को सौंपने को तैयार नहीं थी. ननिहाल वाले परी को पाने के लिए पूरा प्रयास कर रहे थे.    द्य

डायरेक्टर की कपटी मोहब्बत में फंसी ईशा आलिया – भाग 3

एसपी स्वाति भंगालिया की नजरों में प्रकाश अलबेला की कहानी में झोल नजर आ रहा था. चूंकि प्रकाश अलबेला एक जानामाना डायरेक्टर था, इसलिए एसपी स्वाति भंगालिया पहले बहुत बारीकी से प्रकाश की बताई कहानी की जांचपड़ताल कर लेना चाहती थीं.

पुलिस टीम प्रकाश को ले कर घटनास्थल महिषरेखा पुलिया के लिए निकल पड़ी. एसपी भंगालिया अपनी कार से पुलिस वैन के पीछे आ रही थीं. महिषरेखा पुल बगनान क्षेत्र में था, वहां पहुंच कर उस स्पौट पर जांच का काम शुरू हुआ, जहां लुटेरों ने प्रकाश अलबेला की कार को घेर कर प्रकाश पर हमला किया था.

प्रकाश अलबेला उस स्थान पर खड़ा पुलिस की जांच का काम देखता रहा. एसपी स्वाति भंगालिया ने बहुत बारीकी से घटनास्थल की तहकीकात शुरू की.

उस जगह जहां प्रकाश अलबेला ने 3 लुटेरों के साथ मारपीट होने की बात की थी. वहां की सड़क किनारे उगी घास और जंगली झाड़झंखाड़ अपनी प्राकृतिक अवस्था में थे, न वे कुचले गए थे और न किसी रगड़ से उन्हें क्षति पहुंची थी.

एसपी ने हर चीज को संदेह की नजर से खंगाला तो यह बात निकल कर सामने आई कि प्रकाश की सुनाई गई लूटपाट की वारदात झूठी थी. फिर भी उन्होंने अपनी जांच को अंतिम रूप नहीं दिया.

जिस स्पौट पर ईशा आलिया को गोली मारी गई थी, वहां खून के धब्बे अवश्य मिलने चाहिए थे, लेकिन वहां ऐसा कुछ नहीं था. यानी प्रकाश अलबेला पुलिस के शक के दायरे में आ गया.

इस के बाद पुलिस प्रकाश को ले कर कुलगाछिया पिरताला स्थित एएससीसी मैडिकल कालेज पहुंची, जहां उस ने ग्रामीणों की मदद से घायल ईशा को ले जाने की बात कही थी. वहां पता चला कि आज सुबह ईशा आलिया नाम की गोली लगने वाली पेशेंट मैडिकल कालेज में नहीं लाई गई थी. इस का मतलब यह हुआ कि प्रकाश अलबेला सरासर झूठ बोल रहा है.

मैडिकल कालेज के रजिस्टर की जांच करने के बाद एसपी ने एसएचओ के नेतृत्व में एक पुलिस टीम रांची रवाना कर दी, ताकि प्रकाश अलबेला के फ्लैट की जांच कर सच्चाई का पता लगाया जा सके.

इधर ईशा आलिया के मायके वाले रिया कुमारी उर्फ ईशा आलिया की मौत की खबर पाने के बाद थाने पहुंच गए थे. मायके वाले लूट की इस कहानी को मानने के लिए तैयार नहीं थे. उन का कहना था कि ईशा की हत्या बदमाशों ने नहीं, बल्कि प्रकाश ने की है.

ईशा आलिया के पिता धनोखी राणा ने बताया कि प्रकाश अलबेला ने उन की बेटी रिया को प्यार के जाल में फंसा कर उस से लवमैरिज की थी. कुछ दिनों तक तो उस ने रिया को प्यार से रखा लेकिन फिर वह अपने असली रूप में आ गया.

उन्होंने बताया कि ईशा यूट्यूब का एक जानामाना चेहरा बन गई थी. प्रकाश ईशा की यूट्यूब पर होने वाली कमाई से जलता था. वह ईशा से उस की कमाई का पैसा जबरदस्ती छीन लेता था.

ईशा उसे पैसे नहीं देती थी तो वह उस की पिटाई कर देता था. शादी के कुछ दिनों बाद ही ईशा ने प्रकाश द्वारा प्रताडि़त करने की शिकायत स्थानीय थाने में भी कर दी थी.

प्रकाश ने तब ईशा से माफी मांग कर आगे मारपीट नहीं करने का आश्वासन दिया था. तब ईशा ने अपनी शिकायत वापस ले ली थी. कुछ समय शांत रहने के बाद वह फिर ईशा से मारपीट करने लगा था. वह ईशा को हम से मिलने कोलकाता भी नहीं आने देता था. चूंकि ईशा उस की बेटी परी की मां थी, इसलिए वह जैसेतैसे प्रकाश से रिश्ता निभा रही थी.

धनोखी राणा ने बताया कि ईशा मुझे फोन कर के जुल्म की एकएक बात बता देती थी. अभी 2 दिन पहले ही उस ने बताया था कि वह कोलकाता आने के लिए प्रकाश पर दबाव बना रही है. संभव हुआ तो वह उन लोगों से मिलने कोलकाता आएगी. वह तो नहीं आई, प्रकाश उस की लाश ले कर यहां आ गया. मेरी बेटी ईशा को प्रकाश ने ही मारा है.

धनोखी राणा ने यह बता कर वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को चौंका दिया कि प्रकाश पहले से शादीशुदा और 2 बच्चों का बाप है. ईशा से उस ने यह बात पहले छिपाई थी, जब ईशा को उस के शादीशुदा होने की जानकारी हुई तो वह प्रकाश से बहुत लड़ी. चूंकि उस वक्त वह प्रकाश के बच्चे की मां बनने वाली थी, इसलिए वह मन मार कर प्रकाश के साथ रहती रही. उन्होंने कहा कि ईशा की हत्या में प्रकाश, उस की पत्नी शारदा और भाइयों का हाथ हो सकता है.

धनोखी राणा ने बताया कि वह फरनीचर बनाने का कारीगर है और उन के 5 बच्चे थे. पैरालाइसिस से ग्रस्त होने के बाद वह कमाने से लाचार हो गए थे. ऐसी हालत में ईशा ने उन की बहुत मदद की. वह प्रकाश से छिपा कर उन्हें खर्च के लिए पैसे भेजती थी. उस की हत्या हो जाने के बाद वह फिर से असहाय और लाचार हो गए हैं.

एसपी स्वाति भंगालिया को पहले ही प्रकाश भंगालिया पर शक था, लेकिन अब वह पूरी तरह शक के दायरे मेंआ गया.

रात को इंदौर से एसएचओ की एसपी स्वाति के पास काल आई. उस समय तक एसपी स्वाति भंगालिया थाने में ही मौजूद थीं. वह इस हत्याकांड में खासी दिलचस्पी दिखा रही थीं.

एसएचओ ने बताया कि रांची के टैगोर हिल एरिया में स्थित प्रकाश अलबेला के फ्लैट में ईशा आलिया के बैडरूम के अंदर पलंग पर फोरैंसिक टीम को ईशा आलिया के खून के धब्बे मिले हैं.

ईशा आलिया की हत्या फ्लैट में सोते समय ही कर दी गई थी. प्रकाश अलबेला अपने फ्लैट से ईशा की लाश ले कर ही कोलकाता के लिए निकला था. उस ने झूठी स्क्रिप्ट सुना कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की है. वह प्रकाश को ले कर सुबह तक कोलकाता पहुंचने वाले हैं.

ईशा आलिया की हत्या की खबर न जाने कैसे प्रिंट मीडिया को लग गई थी. अखबारों में सुर्खियों के साथ ईशा आलिया की लुटेरों द्वारा हत्या किए जाने की खबर छपी तो झारखंड फिल्म इंडस्ट्री के लोग स्तब्ध रह गए. लुटेरों को पकड़ने का पुलिस पर दबाव बनाया जाने लगा.

डायरेक्टर की कपटी मोहब्बत में फंसी ईशा आलिया – भाग 2

प्रकाश अलबेला उन्हें ले कर कार के पास आया. उस ने पीछे आ कर कार की डिक्की खोली. डिक्की में ईशा आलिया की डैडबौडी थी, उस की कनपटी से खून निकल कर उस के कपड़ों पर फैल गया था.

अब तक थाने में मौजूद अन्य पुलिसकर्मी कार के पास आ गए थे. एसएचओ ने उन्हें इशारा किया तो उन में से 2 कांस्टेबलों ने आगे बढ़ कर ईशा आलिया की डैडबौडी डिक्की से बाहर निकाल कर नीचे रख दी.

एसएचओ ने ईशा आलिया की डैडबौडी का नीचे झुक कर निरीक्षण किया. ईशा आलिया की नब्ज टटोली. फिर वह गहरी सांस ले कर सीधा होते हुए प्रकाश अलबेला की तरफ घूमे, ‘‘आप के साथ यह वारदात कहां और कैसे हुई, मुझे विस्तार से बताइए.’’

एसएचओ के इशारे पर एक पुलिसकर्मी ने प्रकाश अलबेला को बैठने के लिए कुरसी दी. एसएचओ उस के सामने कुरसी सरका कर बैठते हुए बोले, ‘‘बताइए.’’

‘‘सर, मैं रांची में टैगोर हिल एरिया में अपनी पत्नी ईशा आलिया के साथ रहता हूं. यह हमारी बेटी परी है, हमारे प्यार की निशानी. सर, यह फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं आम लोगों को भी पता है कि मैं ने ईशा आलिया से लवमैरिज की थी.

‘‘हम दोनों में गहरा प्यार और एकदूसरे पर विश्वास था. ईशा मुझे टूट कर प्यार करती थी. मैं ने भी उसे हर तरह की सुखसुविधा दे रखी थी. ईशा आलिया यूट्यूब का फेमस चेहरा थी. ईशा ने नागपुरी, भोजपुरी, खेरठा, बांग्ला जैसी अनेक भाषाओं की एलबमों और फिल्मों में भी काम कर के काफी प्रसिद्धि बटोरी है.’’

प्रकाश अलबेला कुछ क्षण को रुका, फिर उस ने आगे बताना शुरू किया, ‘‘ईशा के मांबाप यहां कोलकाता के हजारीबाग के एक गांव महुदी में रहते हैं, यह गांव थाना चौपारन के अंतर्गत आता है. ईशा काफी समय से अपने घर कोलकाता नहीं आई थी. उस की इच्छा कोलकाता आने की हो रही थी. मैं कल रांची से ईशा और अपनी बेटी परी को ले कर रात साढ़े 11 बजे अपने फ्लैट से कोलकाता के लिए अपनी कार से निकला था.

‘‘ईशा अपने साथ परी को ले कर मेरे साथ ही आगे की सीट पर बैठी थी. मेरा विचार था हम सुबह 7-8 बजे तक कोलकाता पहुंच जाएंगे. मैं कार ड्राइव कर रहा था. सुबह करीब 6 बजे होंगे, सड़क पर सन्नाटा था, इक्कादुक्का वाहन हमारी कार के पास से गुजर रहे थे.

‘‘महिषरेखा पुलिया के पास मुझे बाथरूम के लिए कार को रोकना पड़ा. मैं कार किनारे पर रोक कर नीचे उतरा तो देखा उस वक्त ईशा बेटी परी को गोद में लिए सो रही थी. परी भी उस की गोद में सो गई थी.’’

प्रकाश ने आगे बताया, ‘‘मैं कार से उतर कर कुछ ही दूर गया था, मैं ने बाथरूम किया तो अपने पीछे कुछ कदमों की आवाजों से चौंक पड़ा. मैं ने पलट कर देखा, 2-3 लोग मेरी कार पर झुके हुए अंदर देख रहे थे. मैं दौड़ कर कार के पास आया और जोर से चीखा, ‘कौन हो तुम लोग, कार पर क्यों झुके हो तुम?’ सर, वे तीनों मेरी तरफ पलटे और मुझे घेर लिया. उन्होंने मेरे साथ लूटपाट करने की कोशिश की.

‘‘मैं उन से भिड़ गया. वे मुझ पर भारी पड़ने लगे, तब शोरशराबे से ईशा की आंखें खुल गईं. मुझे मार खाता देख वह परी को सीट पर लिटा कर कार से नीचे उतर आई और लुटेरों से उलझ गई.

‘‘ईशा को मेरी मदद से आया देख लुटेरे घबरा गए. उन में से एक ने ईशा पर रिवौल्वर तान कर उसे कार में बैठने को कहा. ईशा पीछे नहीं हटी तो उस ने ईशा को गोली मार दी. उफ मेरी ईशा… प्रकाश का स्वर भर्रा गया. उस की आंखों में आंसू छलक आए.’’

कुछ देर की खामोशी के बाद प्रकाश अलबेला ने खुद को संयत कर के आगे कहना शुरू किया, ‘‘ईशा को गोली लगी तो वह लहरा कर जमीन पर गिर पड़ी. लुटेरे घबरा गए और भाग खड़े हुए. मैं उन के पीछे दौड़ा लेकिन वे हाथ नहीं आए. मैं ईशा के पास आया, ईशा की कनपटी पर गोली लगी थी, वह तड़प रही थी. मैं बुरी तरह घबरा गया. मैं ने ईशा को कार में पिछली सीट पर लिटाया और मदद के लिए 3 किलोमीटर तक कार दौड़ाता ले गया.

‘‘3 किलोमीटर कार लाने के बाद कुलगछिया पिरताला क्षेत्र में मुझे कुछ स्थानीय लोगों का सपोर्ट मिला. उन के सहयोग से मैं ईशा को एएससीसी मैडिकल कालेज ले गया, जहां डाक्टरों ने ईशा का चैकअप करने के बाद मृत घोषित कर दिया. मैं बहुत देर तक रोता रहा, डाक्टरों ने मुझे ढांढस बंधाया, तब मैं ईशा की लाश को डिक्की में रख कर यहां ले आया.’’

यह सुन कर एसएचओ को इस बात का आश्चर्य हुआ कि जब यह पुलिस केस था तो मैडिकल कालेज ने डेडबौडी पुलिस को सूचना दिए बगैर प्रकाश को क्यों सौंप दी?

बात कहतेकहते जब प्रकाश अलबेला रोने लगा तो एसएचओ ने उस के कंधे को सहानुभूति से थपथपाया, ‘‘आप के साथ बहुत बुरा हुआ. आप अपने आप को संभालिए, मैं उन बदमाशों को पकड़ने की पूरी कोशिश करूंगा.’’

‘‘जी,’’ प्रकाश ने रुआंसे स्वर में कहा.

एसएचओ ने इस गंभीर मामले की एफआईआर दर्ज करने के बाद हावड़ा ग्रामीण एसपी स्वाति भंगालिया को फोन द्वारा इस लूटपाट और हत्या की जानकारी दे दी. एसपी स्वाति भंगालिया ने मामले की गंभीरता को देख कर उन से कहा कि वह खुद थाने आ रही हैं.

एसपी स्वाति भंगालिया आधा घंटे में ही थाने पहुंच गईं. उन्होंने सब से पहले ईशा की लाश का निरीक्षण किया. ईशा को जीरो पौइंट रेंज से गोली मारी गई थी. गोली कनपटी पर लगी थी, जिस में से खून बह कर उस की गरदन और चेहरे पर सूख चुका था.

एसपी भंगालिया ने फोरैंसिक टीम को मौके पर पहुंचने का आदेश देने के बाद प्रकाश अलबेला से पूछताछ की. प्रकाश ने स्वाति भंगालिया को वही सब बताया जो उस ने एसएचओ को बताया था.

मामला हाईप्रोफाइल था. प्रकाश अलबेला झारखंड फिल्म इंडस्ट्री का मशहूर डायरेक्टर था और उस की पत्नी ईशा आलिया भी फिल्म इंडस्ट्री की जानीमानी अभिनेत्री थी. इसलिए मामले को हलके में नहीं लिया जा सकता था.

प्रकाश से पूछताछ के बाद पुलिस को पता चला कि ईशा के पिता धनोखी राणा हजारीबाग के चौपारन थाना के महुदी गांव में रहते हैं. थानाप्रभारी ने धनोखी राणा को ईशा आलिया की मौत की जानकारी दे दी.

तब तक फोरैंसिक टीम थाने में पहुंच गई थी. टीम ने बहुत बारीकी से ईशा आलिया और प्रकाश अलबेला की कार की जांचपड़ताल शुरू कर दी.