महिला सिपाही का प्यार

महिला सिपाही की खून से लथपथ लाश फर्श पर पड़ी थी. किसी ने बिस्तर से चादर उठा कर लाश के ऊपर डाल दी थी. पते की बात यह थी कि उस का पति कमरे या आसपास कहीं नजर नहीं आ रहा था.

बिस्तर पर महिला सिपाही की वरदी और एक बैग पड़ा हुआ था. नीचे फर्श पर एक मीटर के इर्दगिर्द में सिंदूर बिखरा पड़ा था. वरदी पर लगी नेमप्लेट से मृतका का नाम शोभा कुमारी पता चला. और तो और वरदी के पास ही 2 कट्टे (तमंचे) पड़े थे, जबकि नीचे फर्श पर एक कारतूस का खोखा पड़ा था.

पुलिस ने इसी से अनुमान लगाया कि हत्यारे ने इसी कट्टे से गोली मार कर इस की हत्या की होगी. पुलिस ने दोनों कट्टे और फायरशुदा खोखा अपने कब्जे में ले लिया.

20 अक्तूबर, 2023 की सुबह के 10 बज रहे थे. पटना में स्टेशन रोड पर स्थित होटल मीनाक्षी के कमरा नंबर-305 के मुसाफिर संजय कुमार अपना कमरा चेकआउट करने के लिए तैयार थे.

उन्होंने रिसैप्शन पर फोन कर के मैनेजर को बता दिया था कि एक बार आ कर वह कमरा चैक कर लें, वह रूम छोड़ रहे हैं. मैनेजर विकास ने कहा कि परेशान न हों, मैं अपने कर्मचारी को कमरे में भेज रहा हूं. वह चैक कर लेगा. फिलहाल थोड़ी देर के लिए कमरे से कहीं जाइएगा मत.

कुछ देर बाद कुछ सोच कर मैनेजर विकास कुमार किसी और को न भेज कर खुद ही कमरा चैकआउट करने तीसरी मंजिल पर स्थित कमरा नंबर-305 की ओर लिफ्ट में सवार हो कर पहुंचा, जहां लिफ्ट थी. वहां से कमरा नंबर-305 करीब 5 मीटर दूर पश्चिम की ओर था. वहां गैलरी से हो कर जाना होता था. उस गैलरी से हो कर मैनेजर जब आगे बढ़ा तो देखा कमरा नंबर-303 का दरवाजा अधखुला था.

भीतर कोई हलचल होती न देख कर मैनेजर विकास कुमार को कुछ शक हुआ तो वह कमरे में दाखिल हुआ. कमरे में महिला सिपाही की नग्नावस्था में खून से सनी लाश फर्श पर पड़ी हुई थी. उस की वरदी बिस्तर पर पड़ी थी.

होटल मीनाक्षी स्टेशन रोड स्थित कोतवाली थाने में पड़ता है. मैनेजर विकास ने फोन कर के घटना की सूचना कोतवाली थाने के इंसपेक्टर कौशलेंद्र सिंह को दे दी थी. घटना की सूचना मिलते ही वह आननफानन में कुछ पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. घटनास्थल पहुंच कर इंसपेक्टर सिंह ने सब से पहले कमरे का मुआयना किया.

किस ने की सिपाही की हत्या

पता चला कि कमरा 19 अक्तूबर को किसी गजेंद्र कुमार यादव ने अपने और अपनी पत्नी शोभा कुमारी के नाम पर बुक कराया था, जो जहानाबाद जिले के काको थानाक्षेत्र के दमुआ गांव का निवासी था.

इस के बाद इंसपेक्टर सिंह ने जिले के सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को यह जानकारी दे दी थी. घटना की सूचना पा कर एसपी (सिटी) वैभव शर्मा, डीएसपी (कानून व्यवस्था) कृष्ण मुरारी प्रसाद मौके पर पहुंच गए थे. मौके से मृतका का पति गजेंद्र फरार था. इस से यही अनुमान लगाया जा रहा था कि घटना को अंजाम देने में उसी का हाथ होगा.

पुलिस ने काररवाई पूरी कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजवा दिया और अज्ञात हत्यारे के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया और गजेंद्र की तलाश के लिए एक पुलिस टीम गठित कर के जहानाबाद भेज दी. खोजबीन करती हुई पटना पुलिस 22 अक्तूबर, 2023 को काको थाने पहुंची. काको थानेदार अजीत कुमार के साथ आरोपी गजेंद्र के घर दमुआ में दबिश दी. गजेंद्र घर पर नहीं मिला.

बताते चलें कि गजेंद्र यादव के पिता रामाशीष यादव पहले गांव के चौकीदार थे. उन को कैंसर हो गया था. वे ज्यादातर बेडरेस्ट पर रहते थे.

रामाशीष ने बताया, ”साहब, वह मेरे लिए कैंसर की दवा लेने के लिए 17 अक्तूबर को दिल्ली चला गया था और दवा ले कर 1-2 दिन में आ जाएगा.’

पुलिस ने बताया कि वह अपनी पत्नी की हत्या करने के बाद फरार है. पुलिस द्वारा बहू की हत्या की जानकारी मिलते ही घर में कोहराम मच गया. घर में रोनाधोना शुरू हो गया.

पुलिस ने पकड़ी गजेंद्र की दुखती नस

फिलहाल गजेंद्र के न मिलने पर पटना पुलिस जहानाबाद से पटना खाली हाथ वापस लौट आई, लेकिन काको थाने को उस पर कड़ी नजर रखने को कह दिया.

करीब सप्ताह भर बाद यानी 28 अक्तूबर, 2023 को पुलिस ने कैंसर से पीडि़त पिता को हिरासत में ले लिया. पिता को पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर ले जाने की सूचना किसी तरह गजेंद्र तक पहुंच गई तो उस ने 30 अक्तूबर, 2023 को जहानाबाद की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया.

आरोपी गजेंद्र के आत्मसमर्पण करने की सूचना मिलते ही पहली नवंबर, 2023 को पटना पुलिस टीम जहानाबाद के लिए रवाना हो गई और आरोपी गजेंद्र को अदालत के सामने पेश कर उसे ट्रांजिट रिमांड पर ले कर वहां से पटना के लिए वापस रवाना हो गई. 2 घंटे तक चली कड़ी पूछताछ में आरोपी गजेंद्र ने पुलिस के सामने घुटने टेक दिए और अपना जुर्म कुबूल कर लिया.

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पुलिस द्वारा पूछताछ में इस हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, उस से यही पता चलता है कि शोभा ने अपने हाथों खुद ही अपनी बदनसीबी की दर्दनाक पटकथा लिखी थी, जो इस तरह थी—

इस तरह हुआ गजेंद्र को शोभा से प्यार

30 वर्षीय गजेंद्र यादव मूलरूप से बिहार के जहानाबाद जिले के काको थानाक्षेत्र के गांव दमुआ का रहने वाला था. अपने 2 भाइयों में गजेंद्र बड़ा था. जितना पढऩे में गजेंद्र अव्वल था, उतना ही अपने अच्छे व्यवहार से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने में महारथी था.

अपनी अलग पहचान बनाने के लिए उस ने घर से कुछ दूर कुर्था मोहल्ले में कोचिंग सेंटर खोल दिया. उस समय उस की उम्र 23-24 साल के आसपास रही होगी. उस का कोचिंग सेंटर चल निकला. बच्चों को वह मैथ और साइंस की कोचिंग देता था.

उस के कोचिंग सेंटर में मोहल्ले के अनेक लड़के लड़कियां कोचिंग के लिए आने लगे. शोभा भी गजेंद्र की कोचिंग सेंटर में आती थी. यह बात साल 2018 के आसपास की थी. उसी दौरान उसे शोभा से प्यार हो गया.

गजेंद्र जैसे प्रेमी को पा कर शोभा बहुत खुश थी और उस से शादी करने के लिए तैयार हो गई थी. एक दिन समय देख कर गजेंद्र ने अपने पिता से अपने और शोभा के रिश्ते की जानकारी दे कर शादी करने की अपनी इच्छा जाहिर की तो उन्होंने इजाजत दे दी. लेकिन उस के सामने एक शर्त यह रखी कि शादी के बाद पत्नी को ले कर यहां पुश्तैनी मकान में नहीं रहोगे.

गजेंद्र ने अपने प्यार को पाने के लिए पिता की इस शर्त पर अपनी स्वीकृति की मोहर लगा दी और शोभा से कोर्ट मैरिज कर के शहर में किराए का कमरा ले कर उस के साथ रहने लगा.

गजेंद्र का किस ने और क्यों किया अपहरण

गजेंद्र के पिता रामाशीष यादव की ऐसा करने के पीछे एक बड़ी और खास वजह थी. दरअसल, जब गजेंद्र 13 साल का था तो उस का अपहरण हो गया था. अपहरण एक लड़की के पिता ने किया था अपनी बेटी से शादी करने के लिए. बिहार में आज भी यह प्रचलन जारी है कि लोग अच्छे परिवार के लड़के का अपहरण कर अपनी बेटी के साथ जबरन उस की शादी कर देते हैं.

गजेंद्र की भी जबरन शादी करा दी गई थी. शादी कराने के बाद लड़की के घर वालों ने उसे उस के घर तक पहुंचा दिया था. समाज के रीतिरिवाजों को मानने वाले रामाशीष ने भी इस शादी पर मोहर लगा दी थी और लड़की को बहू का दरजा दे दिया था, जबकि गजेंद्र के दिल को इस घटना से ठेस पहुंची थी. उसे पत्नी नहीं स्वीकार किया था. इस से उस के पिता काफी नाराज रहते थे.

इस बात को ले कर बापबेटे के बीच काफी रस्साकशी भी चलती रही. बाद के दिनों में गजेंद्र और उस की पत्नी के बीच तलाक हो गया था. तलाक के बाद दोनों अलगअलग हो गए थे.

शोभा अतिमहत्त्वाकांक्षी युवती थी. गजेंद्र उस की महत्त्वाकांक्षाओं को अच्छी तरह पहचानता था. इसी बीच गजेंद्र एक बेटी का पिता बना. बेटी के आने से घर में खुशहाली आ गई.

उन दिनों बिहार में पुलिस की बड़ी पैमाने पर वैकेंसी निकली थी. गजेंद्र ने पत्नी शोभा को अप्लाई करा दिया. उस की मेहनत से बिहार पुलिस में वह भरती हो गई. इस के लिए गजेंद्र ने अपने हिस्से की 5 बीघा जमीन भी बेच दी थी. अपना कारोबार और अपना जीवन सब कुछ दांव पर लगा दिया था.

उस का सोचना था कि उस की भी प्राइवेट जौब है. अगर दोनों में से किसी एक की भी सरकारी नौकरी हो जाए तो जीवन सरल हो जाएगा. यही सोच कर उस ने पत्नी को नौकरी के लिए प्रेरित किया था.

शोभा की टे्रनिंग पटना में हो रही थी.  बेटी दादा दादी के पास रहती थी. उसे जब ट्रेनिंग से थोड़ा वक्त मिलता तो 1-2 दिन के लिए बेटी से मिलने जहानाबाद स्थित घर आ जाया करती थी या फिर गजेंद्र ही पत्नी से मिलने पटना चला जाया करता था.

ट्रेनिंग के दौरान ही शोभा को वहीं पर एसएसबी की तैयारी कर रहे धीरज से प्यार हो गया. यह घटना से करीब एक साल पहले की बात है. शोभा अपने परिवार के प्रति अति लापरवाह होती जा रही थी. शोभा की ये बातें पता नहीं क्यों गजेंद्र को अजीब लग रही थीं. वह सोचता कि ऐसी कौन सी मां होगी जो अपने बच्चे से मिलने तक के लिए वक्त नहीं निकाल सकती.

बात पहली जुलाई, 2023 की है. गजेंद्र किसी काम से पटना आया था. उस ने यह बात पत्नी को नहीं बताई थी. दोपहर के वक्त गजेंद्र ने देखा एक बाइक पर किसी युवक के साथ उस की पत्नी कहीं जा रही थी. जिस युवक के साथ वह जा रही थी, उस का न तो गजेंद्र के साथ कोई रिश्ता था और न ही वह उस कोई रिश्तेदार ही था. यह देख उस का माथा ठनक गया.

शोभा के इस कदम से गजेंद्र डिप्रेशन में चला गया और बुझाबुझा सा रहने लगा. गजेंद्र इस कदर डिप्रेशन में चला गया था कि खुद को अकेला समझने लगा था. गजेंद्र डिप्रेशन से बिलकुल टूट चुका था. अब उस में पत्नी की बेवफाई का दर्द सहने की क्षमता रह नहीं गई थी, इसलिए वह जल्द से जल्द किसी नतीजे पर पहुंच जाना चाहता था.

इसी बीच गजेंद्र ने एक खतरनाक फैसला ले लिया था कि अगर शोभा मेरी नहीं हुई तो उसे किसी और की भी नहीं होने देगा. उसे मरना ही होगा.

अक्तूबर के महीने में दुर्गा पूजा थी. टे्रनिंग के दौरान शोभा की ड्यूटी कोतवाली क्षेत्र में लगी थी. यह बात गजेंद्र को पता चल चुकी थी. 17 अक्तूबर, 2023 को गजेंद्र पिता के कैंसर की दवा लेने के लिए जहानाबाद से दिल्ली के लिए निकला, लेकिन दिल्ली जाने के बजाय वह पटना आ गया. बेटी को उस ने छोटे भाई की जिम्मेदारी पर छोड़ दिया था.

होटल में दोनों के बीच क्या हुआ

19 अक्तूबर को वह पटना आ गया. पटना में उस ने स्टेशन रोड पर मीनाक्षी होटल में एक कमरा पतिपत्नी के नाम बुक कराया. उसे ठहरने के लिए कमरा नंबर-303 मिला. उस के पास एक पिट्ठू बैग था. उस में एक जोड़ी कपड़ा रखे थे. उन्हीं कपड़ों के बीच लोडेड 2 देसी तमंचे रख लिए थे.

रात में जब वह घूमफिर कर होटल लौटा तो 9 बजे के करीब उस ने पत्नी शोभा को फोन किया और उस का हालचाल लिया. उस ने उस से कहा कि वह स्टेशन रोड के होटल में ठहरा हुआ है. थोड़ी ही देर के लिए होटल में आ जाए. पति के कई बार आग्रह पर शोभा ने सुबह मिलने के लिए कह दिया.

अगली सुबह 8 बजे शोभा होटल पहुंची. उस समय गजेंद्र पूरी तरह तैयार हो चुका था और बैग से दोनों तमंचे निकाल कर कमर में खोंस लिए थे. शोभा कमरे में जैसे ही घुसी उसे बिना सिंदूर के देख उस का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया. इस बात को ले कर दोनों के बीच विवाद छिड़ गया.

गजेंद्र अपने साथ सिंदूर की डिबिया भी ले कर गया था. वह अपने हाथों से पत्नी की मांग में सिंदूर भरना चाहता था, लेकिन शोभा तैयार नहीं हुई और दोनों के बीच हाथापाई होने लगी. इसी दौरान गजेंद्र के हाथ से सिंदूर की डिबिया छूट कर नीचे फर्श पर जा गिरी और सिंदूर फर्श पर बिखर गया.

यह देख कर तो गजेंद्र एकदम पागल सा हो गया. उस ने आव देखा न ताव, कमर में खोंस रखा कट्टा निकाला और उस के सीने पर गोली मार दिया. गोली लगते ही शोभा नीचे फर्श पर जा गिरी और काल के गाल में समा गई.

इस के बाद उस ने दोनों असलहे बिस्तर पर रख दिए और पत्नी की वरदी उस के जिस्म से उतार कर बैड पर रख दी. फिर कमरे से 9 बज कर 32 मिनट पर बड़े आराम से अपना बैग ले कर दिल्ली के लिए रवाना हो गया.

गजेंद्र से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे जेल भेज दिया. कथा लिखने तक पुलिस गजेंद्र के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर न्यायालय में पेश करने की तैयारी में थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

होली पर मंगेतर को मौत का अबीर

होली पर मंगेतर को मौत का अबीर – भाग 3

शादी से पहले ही मोहित प्रियंका पर तरहतरह की बंदिशें लगाने लगा था. उस की तानाशाही प्रियंका को भी अच्छी नहीं लगती थी. वह सोचने लगी कि जब विवाह से पहले मोहित का यह व्यवहार है तो बाद में क्या होगा. प्रियंका ने मोहित के इस व्यवहार के बारे में जब बड़ी बहन सुमन को बताया तो मोहित की यह आदत उसे भी अच्छी नहीं लगी.

जब बात ज्यादा ही बढ़ने लगी तो प्रियंका के पिता को लगा कि मोहित कहीं सनकी टाइप का तो नहीं है. इस बारे में उन्होंने छानबीन शुरू की तो पता चला कि मोहित तो नौकरी पर जाने के बजाय अकसर अपने गांव में ही रहता है. इस से प्रियंका के घर वालों को इस बात पर शक होने लगा कि जब वह नेवी में नौकरी करता है तो अपनी ड्यूटी पर न जा कर घर पर ही क्यों रहता है. कहीं ऐसा तो नहीं कि उन्हें मोहित के बारे में गलत जानकारी दी गई हो. यदि ऐसा हुआ तो उन की बेटी की जिंदगी ही तबाह हो जाएगी.

यह पता चलने प्रियंका ने मोहित के साथ घूमनाफिरना कम कर दिया था. उस ने फोन पर भी लंबी बातें करनी बंद कर दीं. कभीकभी मोहित को जब प्रियंका का फोन बिजी मिलता तो उसे उस पर शक होने लगता और जब किसी तरह उस से बात हो जाती तो वह मिलने के लिए उसे नियत जगह पर बुलाता. लेकिन प्रियंका ड्यूटी पर बिजी होने की बात कह देती थी. इस से मोहित को भी लगने लगा था कि प्रियंका अब उस से मिलने में आनाकानी करने लगी है.

उधर प्रियंका के घरवालों द्वारा छानबीन करने की जानकारी भी मोहित को हो गई थी. अब उसे इस बात का अंदेशा होने लगा था कि कहीं उस का प्रियंका से रिश्ता न टूट जाए.

प्रियंका की बेरुखी से वह परेशान रहने लगा. वह प्रियंका से हरगिज दूर नहीं होना चाहता था. उस ने अपने दिल की बात प्रियंका से बताई तो उस ने मोहित की बात को गंभीरता से नहीं लिया. जो प्रियंका पहले मोहित पर जान न्यौछावर करने को तैयार रहती थी, वही अब वह कहने लगी थी कि अपने घर वालों की मरजी के बिना कहीं नहीं जाएगी.

प्रियंका के घरवालों का आरोप है कि प्रियंका को मोहित का व्यवहार और हिटलरशाही पसंद नहीं थी इसलिए उस ने मोहित के साथ शादी करने से मना कर दिया. इस पर मोहित ने प्रियंका पर शादी के लिए दबाव बनाया और उसे धमकी भी दी थी कि अगर वह उस की नहीं होगी तो उसे किसी और की भी नहीं होने देगा.

16 मार्च, 2014 को पूरे देश में होली का त्यौहार मनाया जा रहा था. इसी दिन मोहित ने प्रियंका को सबक सिखाने की ठान ली. वह अपने गांव से दिल्ली के सागरपुर इलाके में पहुंच गया. वहां पहुंच कर उस ने शाम के समय प्रियंका को फोन कर के किसी बहाने से एक नियत जगह पर बुला लिया.

प्रियंका जब उस के पास आई तो वह उसे सागरपुर इलाके के मोहन नगर स्थित नील गगन गेस्ट हाउस ले गया. रात 8 बजे वह प्रियंका के साथ गेस्ट हाउस पहुंचा तो गेस्ट हाउस के रजिस्टर में उस ने अपना नाम मोहित लिखा और प्रियंका को अपनी पत्नी बताया. गेस्ट हाउस के मैनेजर सुनील कुमार ने उन दोनों को कमरा नंबर-105 ठहरने के लिए दे दिया.

कमरे में पहुंचने के बाद मोहित प्रियंका के लिए कोल्डड्रिंक लाया. जो कोल्डड्रिंक उस ने प्रियंका को पीने के लिए दी थी, उस में उस ने पहले ही नींद की दवा मिला दी थी. कोल्डड्रिंक पीने के कुछ देर बाद ही प्रियंका की आंखें मुंदने लगीं. जब वह गहरी नींद में सो गई तो मोहित ने अपने साथ लाए तमंचे से उस पर गोली चलानी चाही लेकिन गोली मिस हो गई.

ऐसा उस ने 2 बार किया, लेकिन दोनों बार गोली नहीं चली. तब मोहित ने गुस्से में सारे कारतूस वहीं डाल दिए और प्रियंका के मुंह पर तकिया रख कर कुछ देर तक दबाए रखा. सांस घुटने पर प्रियंका ने छटपटाहट महसूस की तो मोहित ने उसे दबोच लिया. कुछ ही देर में वह शांत हो गई. कहीं वह जिंदा न रह जाए, इसलिए मोहित ने दोनों हाथों से उस का गला और दबा दिया.

प्रियंका को ठिकाने लगाने के बाद रात करीब पौने 11 बजे उस ने उस कमरे को बाहर से बंद कर दिया और किसी तरह गेस्ट से निकलने में कामयाब हो गया. इस के बाद वह दिल्ली में ही किसी परिचित के यहां चला गया.

उधर जब गेस्ट हाउस के एक कर्मचारी ने रूम नंबर 105 का दरवाजा बाहर से बंद देखा तो उस ने यह बात मैनेजर सुनील कुमार को बता दी. सुनील कुमार ने जब रोशनदान से कमरे में झांक कर देखा तो वह सन्न रह गया. फिर उस ने यह सूचना पुलिस को दे दी थी.

मोहित से पूछताछ के बाद पुलिस ने उस की निशानदेही पर वह तमंचा भी बरामद कर लिया जिस से उस ने प्रियंका पर गोली चलाने की कोशिश की थी. पूछताछ के बाद पुलिस ने मोहित को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. मामले की तफ्तीश थानाप्रभारी रिछपाल सिंह कर रहे थे.

— कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

होली पर मंगेतर को मौत का अबीर – भाग 2

क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम द्वारा अपना काम निपटाने के बाद थानाप्रभारी ने लाश का मुआयना किया तो उस के गले और मुंह पर लगे निशानों से लग रहा था कि उस की हत्या शायद गला घोंट कर की गई होगी.

बेडशीट और तकिया के कवर पर खून के निशान मिले. बेड के ऊपर और नीचे बंदूक के कुछ कारतूस भी पड़े हुए थे. प्रियंका के शरीर पर गोली लगने का कोई निशान नहीं था तो वहां कारतूस कैसे आ गए यह बात थानाप्रभारी नहीं समझ पा रहे थे.

थानाप्रभारी ने गेस्ट हाउस के मैनेजर सुनील से पूछा कि प्रियंका यहां कब और किस के साथ आई थी? इस पर उस ने बताया, ‘‘सर, यह कल शाम करीब 8 बजे मोहित नाम के एक युवक के साथ आई थी. मोहित ने इसे अपनी पत्नी बताया था. रात करीब पौने 11 बजे मोहित किसी काम से गेस्ट हाउस से बाहर गया था. आज 11 बजे गेस्ट हाउस का एक कर्मचारी इस कमरे पर आया तो कमरा बाहर से बंद था. उस कर्मचारी ने यह बात मुझे बताई.

‘‘मैं ने सब से पहले एंट्री रजिस्टर देखा कि कहीं मोहित पत्नी को ले कर यहां से चला तो नहीं गया. रजिस्टर में उस के द्वारा कमरा खाली करने का कोई जिक्र नहीं था. तब मैं यहां आया. दरवाजे का ताला बंद देख कर मैं भी चौंक गया. मैं ने दरवाजा खटखटा कर कई आवाजें दीं. कोई जवाब नहीं मिला तो मैं ने सोचा कि कहीं मोहित के जाने के बाद मौका पा कर उस की पत्नी भी तो यहां से नहीं खिसक गई.

‘‘फिर मैं ने सोचा कि एक बार रोशनदान से कमरे में भी देख लिया जाए. मैं ने ऐसा किया तो यह युवती बेड पर लेटी हुई दिखी. इस के मुंह में ठुंसा तौलिया और बेडशीट पर खून देख कर मुझे कुछ अनहोनी का अंदेशा हुआ. इस के बाद मैं ने पुलिस को फोन कर दिया.’’

टै्रफिक पुलिस की एक कांस्टेबल की हत्या की सूचना थानाप्रभारी ने जब उच्चाधिकारियों को दी तो डीसीपी सुमन गोयल और एसीपी ओमप्रकाश भी नीलगगन गेस्ट हाउस पहुंच गए. उन्होंने भी कमरे का बारीकी से मुआयना किया. और गेस्ट हाऊस के मैनेजर से भी पूछताछ की.

पुलिस ने लाश का पंचनामा और जरूरी काररवाई पूरी करने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल, हरि नगर भिजवा दिया.

पुलिस को यह जानकारी मिल चुकी थी कि प्रियंका अपने मंगेतर मोहित के साथ ही गेस्ट हाउस में आई थी. वह गेस्ट हाउस से फरार हो चुका था. इस के अलावा प्रियंका की बहन शिक्षा ने भी मोहित पर शक जताया था इसलिए पुलिस का शक भी मोहित पर बढ़ गया.

मोहित की तलाश के लिए डीसीपी सुमन गोयल ने एसीपी ओमप्रकाश के निर्देशन में एक पुलिस टीम बनाई, जिस में थानप्रभारी रिछपाल सिंह, एसआई मदन, अनुज यादव, चेतन, एएसआई यादराम, हेडकांस्टेबल दशरथ, सुमेर सिंह, राजकुमार, कांस्टेबल सुरेंद्र, नरेंद्र कुमार आदि को शामिल किया गया.

पुलिस टीम मोहित की तलाश में जुट गई. एएसआई मदन के नेतृत्व में एक पुलिस टीम मोहित के गांव छापर भेज दी गई. वहां पता चला कि वह घर पहुंचा ही नहीं है. उस के मोबाइल फोन पर बात करने की कोशिश की गई तो मोबाइल भी स्विच औफ मिला.

कहीं वह दिल्ली से बाहर न भाग गया हो, पुलिस को इस बात की आशंका थी. जब मोहित तक पहुंचने का कोई रास्ता न दिखा तो पुलिस ने अपने मुखबिरों को सतर्क कर दिया.

अगले दिन यानी 18 मार्च, 2014 को एक मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मोहित को सागरपुर से सटे द्वारका क्षेत्र से हिरासत में ले लिया. थाने ला कर जब उस से प्रियंका उर्फ प्रिया की हत्या के बारे में पूछताछ की गई तो वह मर्डर करने की बात तो दूर, नीलगगन गेस्ट हाउस में ठहरने वाली बात को ही नकारता रहा. लेकिन जब पुलिस ने उस से कहा कि गेस्ट हाउस के रजिस्टर में तुम्हारे साइन हैं, साथ ही वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में फोटो भी हैं.

सच्चाई की नदी में झूठ की नाव जल्द ही डूब जाती है. मोहित जानता था कि वह मंगेतर प्रियंका को ले कर नीलगगन गेस्ट हाउस में गया था. इसलिए थानाप्रभारी के सवालों के आगे उस का झूठ ज्यादा देर तक नहीं टिक सका. आखिर उस ने स्वीकार कर लिया कि प्रियंका की हत्या उस ने ही की थी. अपनी मंगेतर की हत्या की उस ने जो कहानी बताई वह इस प्रकार निकली.

मूल रूप से राजस्थान के झुंझनू जिले के थाना सूरजगढ़ के तहत आने वाले गांव चिमकावास के रहने वाले हरिसिंह के परिवार में 4 बेटियां और एक बेटा प्रवीण था. हरि सिंह भारतीय सेना में नौकरी करते थे जो फिलहाल रिटायर हो चुके हैं. उन्होंने अपने सभी बच्चों को उच्च शिक्षा हासिल करवाई. इस का नतीजा यह हुआ कि उन के 3 बच्चों की दिल्ली पुलिस में नौकरी लग गई. उन की बेटी शिक्षा दिल्ली पुलिस में सबइंस्पेक्टर, दूसरी प्रियंका कांस्टेबल हो गई तो बेटा भी दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर भरती हो गया.

तीनों भाईबहन दिल्ली पुलिस में नौकरी करने लगे तो दक्षिणपश्चिमी दिल्ली के सागरपुर (पश्चिमी) के आई ब्लौक में उन्होंने अपनी रिहाइश बना ली. परिवार के बाकी लोगों को भी उन्होंने दिल्ली बुला लिया. सभी साथसाथ रहने लगे. हरिसिंह सभी बच्चों की शादी कर के फारिग हो जाना चाहते थे.

वह प्रियंका के लिए उपयुक्त लड़का देखने लगे. तभी उन्हें किसी ने मोहित के बारे में बताया. मोहित हरियाणा के भिवानी जिले की दादरी तहसील के छापर गांव के रहने वाले धर्मपाल का बेटा था और भारतीय नेवी में नौकरी करता था. हरिसिंह ने मोहित को देखा तो उन्हें वह पसंद आ गया. बाद में प्रियंका ने भी अपनी सहमति जता दी. इस के बाद उन्होंने मोहित के घरवालों से बात की. फिर दोनों तरफ से रिश्ता पक्का हो गया. यह अक्तूबर, 2013 की बात है.

रिश्ता तय हो जाने के बाद मोहित और प्रियंका फोन पर बातें करते रहते थे और कभीकभी इधरउधर घूमने का प्रोग्राम भी बना लेते थे. प्रियंका के घरवालों को इस पर कोई ऐतराज नहीं था क्योंकि कुछ दिनों में उस की मोहित से शादी होने ही वाली थी. साथ रहने की वजह से दोनों खूब घुलमिल गए थे.

बताया जाता है कि मोहित कुछ शक्की मिजाज का था. उस ने प्रियंका के मोबाइल से उस के अधिकांश रिश्तेदारों के फोन नंबर हासिल कर लिए थे. प्रियंका की गैरमौजूदगी में वह उन रिश्तेदारों को फोन कर के प्रियंका के बारे में छानबीन करता रहता था. रिश्तेदारों द्वारा यह बात जब हरिसिंह को पता लगी तो उन्हें होने वाले दामाद द्वारा इस तरह से छानबीन करना अच्छा नहीं लगा.

हालांकि उन्होंने इस बारे में मोहित से कुछ नहीं कहा. वह जानते थे कि जब उन की बेटी में किसी तरह का खोट नहीं है तो उन्हें छानबीन से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. उन्होंने यह भी सोचा कि शादी से पहले इस तरह की बातें तो चलती ही रहती हैं, जब दोनों की शादी हो जाएगी तो सारी बातें अपने आप बंद हो जाएंगी.

होली पर मंगेतर को मौत का अबीर – भाग 1

17 मार्च को जिस समय देश भर में लोग होली के हुड़दंग में मस्त थे उस समय हरिसिंह के घर में  मायूसी छाई हुई थी. इस की वजह यह थी कि हरिसिंह की छोटी बेटी प्रियंका जो दिल्ली टै्रफिक पुलिस में कांस्टेबल थी, बीते दिन यानी 16 मार्च की शाम से गायब थी. वह शाम को करीब 7 बजे यह कह कर घर से निकली थी कि किसी से मिलने जा रही है और थोड़ी देर में घर लौट आएगी.

प्रियंका कोई दूध पीती बच्ची तो थी नहीं जो घर वालों को उस की तरफ से कोई चिंता होती. वह 22 साल की थी, ऊपर से दिल्ली पुलिस में नौकरी कर रही थी इसलिए उन्हें उस की समझदारी पर कोई शक नहीं था. घर वाले निश्चिंत थे कि वह कहीं किसी काम से गई है तो देरसवेर घर आ जाएगी.

प्रियंका को घर से गए हुए कई घंटे बीत गए. वह घर नहीं लौटी तो उस की बड़ी बहन सुमन ने उसे यह जानने के लिए फोन किया कि वह कहां है और कितनी देर में घर आ रही है. लेकिन प्रियंका का फोन कंप्यूटर द्वारा स्विच्ड औफ या पहुंच से दूर बताया जा रहा था. सुमन ने उस का फोन कई बार मिलाया, हर बाद उन्हें कंप्यूटर का वही जवाब सुनने को मिला.

प्रियंका कभी भी अपना फोन स्विच औफ कर के नहीं रखती थी. और जब कभी उसे घर लौटने में देरी हो जाती तो वह घर पर फोन जरूर कर दिया करती थी. लेकिन आज उस ने कोई फोन नहीं किया था.

सुमन की एक बहन शिक्षा दिल्ली पुलिस में सब इंसपेक्टर है. वह भी उस समय घर पर ही थी. उस ने भी प्रियंका का फोन नंबर मिलाया, जो उस समय भी स्विच्ड औफ था. घर के लोग परेशान थे कि न जाने वह कहां चली गई जो फोन भी बंद कर रखा है.

प्रियंका का एकलौता भाई प्रवीण भी दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल है. उसे भी प्रियंका के घर न लौटने की बात बताई गई तो वह भी घर आ गया. परिवार के सभी लोग इधरउधर फोन कर के प्रियंका का पता लगाने में जुट गए.

उन्होंने प्रियंका की जानपहचान वालों को भी फोन किए लेकिन उस का कहीं पता न लगा. घर के सभी लोग परेशान थे. वे रात भर जागते रहे. उस के लौटने के इंतजार में पूरी रात उन की निगाहें दरवाजे की तरफ ही लगी रहीं.

सुबह होने पर उस की फिर तलाश शुरू कर दी गई. लेकिन उस के बारे में कोई खबर नहीं मिल रही थी. तब उन के दिमाग में प्रियंका को ले कर गलत खयाल आने लगे. अंतत: सुमन ने 10 बजे के करीब बहन के रहस्यमय तरीके से गायब होने की खबर 100 नंबर पर फोन कर के पुलिस नियंत्रण कक्ष को दे दी.

एक महिला कांस्टेबल के गायब होने की सूचना पाते ही पुलिस कंट्रोल रूम (पीसीआर) की वैन प्रियंका के घर पहुंच गई. चूंकि मामला सागरपुर थाना क्षेत्र का था इसलिए पीसीआर द्वारा थाना सागरपुर में वायरलेस द्वारा सूचना दे दी गई. तब थानाप्रभारी रिछपाल सिंह एसआई मदन के साथ वेस्ट सागरपुर के आई ब्लाक में स्थित कुसुम के घर पहुंच गए. सुमन और शिक्षा ने थानाप्रभारी को प्रियंका के गुम होने की पूरी बात बता दी.

पुलिस दोनों बहनों को थाने ले आई और शिक्षा की तरफ से प्रियंका की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर ली. थानाप्रभारी ने प्रियंका के हुलिए के साथ उस के गायब होने की सूचना दिल्ली के समस्त थानों में प्रसारित करा दी. साथ ही उन्होंने जब शिक्षा से पूछा कि उन्हें किसी पर कोई शक वगैरह तो नहीं है तो शिक्षा ने बताया कि हमें प्रियंका के मंगेतर मोहित पर शक है.

‘‘मोहित कहां रहता है?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘वह हरियाणा के भिवानी जिले के गांव छापर का रहने वाला है और नेवी में नौकरी करता है. अभी 3 महीने पहले ही प्रियंका का रिश्ता उस से तय हुआ था.’’ शिक्षा ने बताया.

थानाप्रभारी शिक्षा से बात कर ही रहे थे कि उसी दौरान उन्हें थाना क्षेत्र के ही मोहन नगर स्थित नीलगगन गेस्ट हाउस में एक महिला की लाश मिलने की सूचना मिली. थानाप्रभारी रिछपाल सिंह एसआई मदन, हेडकांस्टेबल सुरेश, कांस्टेबल लाला राम, नवीन आदि के साथ नीलगगन गेस्ट हाउस की तरफ चल दिए. चूंकि प्रियंका भी गायब थी इसलिए उन्होंने सुमन और शिक्षा को भी साथ ले लिया.

थानाप्रभारी जब नील गगन गेस्ट हाउस पहुंचे तो गेस्ट हाउस के मैनेजर सुनील कुमार ने बताया कि रूम नंबर 105 में एक युवती बेड पर पड़ी हुई है ऐसा लगता है शायद वह मर चुकी है. पुलिस तुरंत रूम नंबर 105 की तरफ गई, वो ग्राउंड फ्लोर पर दाहिनी साइड में था. उस कमरे में बाहर से ताला लगा था. मैनेजर ने पुलिस को बताया कि उस ने कमरे के अंदर का नजारा रोशनदान से झांक कर देखा था.

थानाप्रभारी ने भी उस कमरे के रोशनदान से कमरे में देखा तो एक युवती बेड पर लेटी हुई दिखाई दी. उस के मुंह में सफेद रंग का तौलिया ठूंसा हुआ था और बेडशीट पर खून के धब्बे भी दिख रहे थे. उस युवती के सीने तक का शरीर ब्राउन कलर के कंबल से ढका हुआ था.

उस युवती की हालत और बेडशीट पर खून के धब्बे देख कर थानाप्रभारी को भी लगा कि शायद उस की हत्या हो चुकी है. उन्होंने शिक्षा से भी कमरे के अंदर पड़ी युवती को देखने को कहा. शिक्षा ने जब रोशनदान से कमरे में झांका तो उस की आंखों में आंसू भर आए. बेड पर लेटी वह युवती उसे प्रियंका जैसी ही लग रही थी.

शिक्षा का उतरा चेहरा और आंखों में छलकते आंसू देख कर थानाप्रभारी रिछपाल सिंह ने पूछा, ‘‘क्या हुआ शिक्षा? क्या तुम उस युवती को पहचानती हो?’’

‘‘सर, वो मुझे प्रिया लग रही है.’’ प्रियंका को घर पर सब प्रिया कहते थे. वह थोड़ा गंभीर हो कर बोली, ‘‘मगर वो यहां क्यों आएगी?’’

शिक्षा की बात सुन कर सुमन भी घबरा गई उस ने भी रोशनदान से झांक कर देखा तो वह भी रुआंसी हो गई. उस ने रोशनदान से ही प्रियाप्रिया कह कर जोर से कई बार पुकारा लेकिन बेड पर लेटी युवती में कोई हरकत नहीं हुई. तब पुलिस ने क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम को भी गेस्ट हाउस में बुला लिया.

क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम के सामने पुलिस ने धक्के मार कर उस कमरे के दरवाजे को तोड़ दिया. तभी शिक्षा और सुमन ने बेड पर लेटी युवती को देखा तो वे जोरजोर से रोने लगीं क्योंकि वह लाश उन की बहन प्रिया की ही निकली.