26 जुलाई, 2023 को कोई 3 बजे का वक्त रहा होगा. मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में नाईट कल्चर लागू होने से हर रोज की भांति अधिकांश दुकानें खुली हुई थीं. रात का अंतिम पहर होने के बावजूद भी सड़क पर युवकयुवतियां एकदूसरे के हाथ थामे सड़क पर चहल कदमी कर रहे थे. वहीं सड़क पर दोपहिया व चार पहिया वाहन भी इधरउधर आजा रहे थे.
उसी दौरान इंदौर के लोटस चौराहे से एक कार नंबर एमपी09 सीएस 7613 तेजी से गुजरी. उसी चौराहे के पास ही वहां पर पहले से ही एक स्कूटी खड़ी हुई थी. उस स्कूटी पर एकदो नहीं नही बल्कि पूरे 4 लोग बैठे हुए थे. जिन में 3 युवक और एक युवती थी. युवती सब से पीछे बैठी हुई थी. उस समय उस के हाथ में सिगरेट थी. जिस को वह बारबार होंठो पर लगा कर उस से धुएं का छल्ला बना रही थी.
उस युवैती को इस हालत में देख कर अचानक कार उस एक्टिवा के पास रुकी. फिर कार में बैठे युवक ने युवती को कुछ कहा और फिर पल भर में ही उस कार ने आगे की ओर स्पीड पकड़ ली थी. उस कार को वहां से गुजरते ही युवती ने अगली सीट पर बैठे युवक को स्कूटी चलाने का इशार किया. फिर वह स्कूटी उस कार के पीछे लग गई.
देखते ही देखते स्कूटी ने तेज रफ्तार पकड़ ली. काफी देर पीछा करने के बाद मैरियट होटल के पास पहुंचने से पहले ही स्कूटी चालक ने इशारा कर कार को रुकवा लिया था. कार रुकते ही जैसे उस कार का शीश डाउन हुआ, तभी स्कूटी पर सवार युवती उतरी और कार की ओर बढ़ गई. तभी कार में बैठे एक युवक ने युवती की तरफ हाथ बढ़ाया. युवती ने भी बड़ी ही गर्म जोशी से उस युवक से हाथ मिलाया.
तभी युवती के साथ आया एक युवक बहुत ही फुरती से कार के पास आया. कार के पास आते ही उसने कार चालक रचित पर चाकू से हमला बोल दिया. उस के हमले से कार ड्राइवर रचित तो जैसेतैसे बच गया, लेकिन पिछली सीट पर बैठा मोनू इस से पहले कुछ समझ पाता युवक का चाकू उस के सीने में जा धंसा.
चाकू का वार होते ही मोनू की जोरदार चीख निकली. उस की चीख सुनते ही चारों लोग स्कूटी से फरार हो गए. इस घटना के घटते ही वहां पर मौजूद लोग नजर बचा कर इधरउधर हो गए थे. चाकू मोनू के दिल के पास जा कर लगा था. उस की हालत को देखते हुए. उसके साथियों ने उसे फौरन ही अस्पताल में भरती कराया. जहां पर इलाज के दौरान ही उस की मौत हो गई.

मोनू मर्डर केस की जानकारी पुलिस को दी गई. इस तरह से खुलेआम सड़क पर हत्या होने की बात सुनते ही पुलिस प्रशासन में तहलका मच गया. घटना की सूचना पाते ही विजय नगर थाने के टीआई रविंद्र सिंह गुर्जर पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और मौके का जायजा लिया. उसके बाद टीआई रविंद्र सिंह ने इस की सूचना इंदौर डीसीपी अभिषेक आनन्द व इंदौर पुलिस कमिश्नर मकरंद देवास्कर को दी. पुलिस ने इस घटना के चश्मदीद गबाह टीटू,रचित और हर्ष से पूछताछ की.
पुलिस पूछताछ में मृतक मोनू के दोस्त विशाल ने पुलिस को जानकारी दी कि मंगलवार की रात में मोनू, रचित उर्फ टीटू और हर्ष रचित की कार से उज्जैन के लिए निकले थे. लोटस चैराहे पर पहुंचते ही एक स्कूटी ने उन का पीछा करना आरंभ किया. साया जी होटल के पास पहुंचतेपहुंचते उस स्कूटी सवार ने उन की कार के आगे स्कूटी लगा कर कार रोकने पर मजबूर कर दिया.
कार रुकते ही जैसे ही कार के शीशे डाउन हुए, स्कूटी पर उसे तान्या बैठी दिखाई दी. मैं तान्या को पहले से ही जानता था. उस के बाद तान्या ने उस से हाथ भी मिलाया. तभी तान्या के साथ आए अन्य लोगों ने कार में बैठे रचित पर चाकू से हमला बोल दिया. उस हमले में रचित तो बच गया ,लेकिन वह चाकू मोनू के सीने में जा कर लगा.
उस के बाद सभी आरोपी स्कूटी द्वारा वहां से फरार हो गए. पुलिस पूछताछ में विशाल ने बताया कि इस केस की मुख्य आरोपी तान्या है. तान्या ही अपने साथ अपने दोस्तों शोभित ठाकुर, छोटू उर्फ तन्मय तथा ऋतिक के साथ घटना को अंजाम देने के लिए पहुंची थी.
जेल से रिमांड पर लिया तान्या को
यह सब जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मृतक मोनू की लाश का पंचनामा भरने के बाद लाश पोस्टमार्टम के लिए भेजवा दी. इस केस के आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 2 टीमें गठित कीं. पुलिस टीमों ने आरोपियों की धड़पकड़ का अभियान शुरू किया. चारों आरोपी बिना नंबर की स्कूटी पर सवार हो कर घटना को अंजाम देने के लिए आए थे.
पुलिस ने सब से पहले घटना स्थल के आसपास लगे. सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, उन से चारों आरोपियों की पहचान हो गई थी. उसी पहचान के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की धरपकड़ शुरू की. पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल नंबरों को सर्विलौंस पर लगा कर उन की लोकेशन के आधार पर उन के पास पहुंचने की कोशिश की.
इस हत्याकांड की मुख्य आरोपी तान्या जिला धार के बागटांडा के गांव बरोड़ की रहने वाली थी. पुलिस ने कई बार उसके मोबाइल पर संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन हर बार ही उसका मोबाइल बंद मिला. उस के बाद एक पुलिस टीम उस की गिरफ्तारी के लिए बरोड़ के लिए निकल गई. पुलिस टीम उसके घर पहुंच भी नहीं पाई थी कि तभी जानकारी मिली कि तान्या ने कोर्ट के माध्यम से खुद को सरेंडर कर दिया था.
यह जानकारी मिलते ही पुलिस टीम आधे रास्ते से ही वापिस आ गई. कोर्ट में सरेंडर करने के बाद तान्या ने अपने अन्य साथियों को भी फोन कर सरेंडर करने को कहा था. इस के बावजूद भी तीनों आरोपी फरार हो गए.
तान्या के सरेंडर करने की सूचना पाते ही पुलिस टीम कोर्ट पहुंची. पुलिस ने वहां से उसे रिमांड पर लिया और फिर उसे साथ ले कर थाने लौट आई. पुलिस ने उस से इस हत्याकांड के मामले में विस्तार से जानकारी ली.
तान्या ने पुलिस को बताया कि वह रचित को बहुत पहले से जानती है. उस के साथ काफी समय तक लव भी चला, लेकिन रचित बीच में उसे धोखा दे कर उस से अलग हो गया. जिस के कारण वह उस से नफरत करने लगी थी. वह अपने साथियों के साथ मिल कर उसे सबक सिखाना चाहती थी, लेकिन गलती से चाकू मोनू को लग गया. जिस के कारण ही उस की मौत हो गई.
आखिर विनीत को मुखबिर की सूचना पर लोनी गोल चक्कर से गिरफ्तार कर लिया गया.
आइए, पहले जान लेते हैं कि विनीत पंवार कौन है और उस ने माही की हत्या क्यों की.
विनीत और माही की फेसबुक से हुई थी जानपहचान
उत्तर प्रदेश के जिला बागपत का एक छोटा सा गांव है कागदीपुर. इसी गांव का निवासी था विनय पंवार. उस के 2 बेटे विनीत और मोहित थे तथा एक बेटी थी पारुल. विनय पंवार मेहनतमजदूरी कर के बच्चों का पेट पालता था. उस की पत्नी का देहांत हो गया था. विनय पंवार ने जैसेतैसे बच्चों की परवरिश की.
पारुल सयानी हुई तो उस ने उस की शादी विदिशा के साथ कर दी. विदिशा दिल्ली में काम करता था. बहन की शादी के बाद विनीत भी कामधंधे की तलाश में अपने जीजा के पास रहने आ गया. वह ज्यादा पढ़ालिखा नहीं था, इसलिए उसे अच्छी नौकरी तो नहीं मिली. हां, गुजरबसर करने लायक एक फैक्ट्री में काम जरूर मिल गया. वह बहन और जीजा के पास ही रहने लगा. वह बहन को अपने खाने का खर्चा देने लगा.
विनीत को अच्छा पहनने और फिल्में देखने का शौक था. धीरेधीरे उस ने कुछ रुपए जोड़ कर किस्तों पर मोबाइल फोन भी ले लिया था. वह दिन में फैक्ट्री में काम करता. शाम को नहाधो कर अच्छे कपड़े पहनता और मोबाइल हाथ में ले कर घूमने निकल जाता.
उसी मोबाइल पर फेसबुक द्वारा विनीत की रोहिना उर्फ माही नाम की एक लडक़ी से जानपहचान हो गई. यह जानपहचान धीरेधीरे दोस्ती और फिर प्यार में बदल गई. विनीत खाली समय में रोहिना उर्फ माही से प्रेम की बातें करता रहता.
दोनों के बीच यह प्यार इस कदर बढ़ा कि माही अपना घरद्वार छोड़ कर विनीत के साथ रहने को राजी हो गई. विनीत उसे लेने के लिए उत्तराखंड पहुंच गया. हरिद्वार के एक गांव मिर्जापुर में रहती थी रोहिना उर्फ माही. वह विनीत से मिलने हरिद्वार आ गई. दोनों पहली बार यूं आपस में गले मिले जैसे उन में बरसों की गहरी मित्रता हो.
माही अपना सामान बैग में भर कर लाई थी. विनीत उसे अपने साथ बागपत के गांव कागदीपुर ले गया. माही बगैर शादी किए उस के साथ लिवइन रिश्ता जोड़ कर रहने लगी. विनीत की इस हरकत पर उस के पिता विनय पंवार ने कोई विरोध नहीं किया.
उसे बेटे की शादी करनी ही थी. बेटा अपनी पसंद की कोई लडक़ी घर ले आया तो विनय पंवार को क्या एतराज होता. बस उसे यही अखरता था, माही के साथ विनीत बगैर शादी किए रह रहा था. लेकिन विनय पंवार खामोश रहा. माही उन के घर में रहती रही.
विनीत के जीवन में आया नया मोड़
लेकिन अभी विनीत की जिंदगी में और भी उतारचढ़ाव आने शेष थे. वह माही के साथ आराम से रह रहा था कि एक दिन उसे और उस के पिता विनय पंवार को पुलिस ने एक हत्या का दोषी मान कर गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया. यह सन 2017 की बात है. जुर्म साबित होने पर उसे सजा हो गई.
पिता विनय पंवार और भाई विनीत जेल चला गया तो माही को पारुल अपने पास दिल्ली ले गई. माही के कदम अच्छे नहीं थे. एक दिन पारुल के पति विदिशा की अचानक मौत हो गई. पारुल खूब रोईधोई, फिर उस ने मन को धीरज दे कर अपनी जिंदगी की गाड़ी को पटरी पर लाने का रास्ता तलाशना शुरू कर दिया.
कहा जाता है औरत का एक सहारा टूटता है तो अनेक हाथ उसे सहारा देने के लिए आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन तब जब औरत जवान और सुंदर हो. पारुल जवान भी थी और खूबसूरत भी. उस की तरफ इरफान ने हाथ बढ़ाया तो पारुल ने तुरंत उस का हाथ थाम लिया. पारुल की जिंदगी मजे में कटने लगी. साथ ही वह माही का भी खर्च उठाने में सक्षम हो गई.
पारुल को माही भाभी मानती थी. माही यहां विनीत के भरोसे अपने मांबाप, बहनभाई छोड़ कर आई थी. विनीत जेल चला गया तो माही उदास हो गई. विनीत के बगैर उसे कुछ अच्छा नहीं लगता था. लेकिन वह कर ही क्या सकती थी. वह यह सोच कर संतोष कर रही थी कि विनीत जल्दी ही जेल से छूट कर घर आएगा, तब वह उस से शादी कर के उस की दुलहन बन जा जाएगी.
नवंबर, 2022 में हाईकोर्ट के आदेश पर विनीत पैरोल पर जेल से बाहर आया तो माही उसे सामने देख कर खुशी से नाच उठी. उस ने विनीत के आगे शादी की बात रखी, लेकिन विनीत उसे गले की हड्डी नहीं बनाना चाहता था.
उस ने बहन पारुल से बात की तो पारुल ने संजीदगी से कहा, “विनीत, माही वह लडक़ी नहीं है जिसे मैं भाभी बनाऊं, इसे दफा करो और किसी धनी बाप की बेटी को फांसो, ताकि लडक़ी के साथ मोटी रकम भी हाथ आए.”
“मेरी जिंदगी पर अपराधी का ठप्पा लग गया है बहन, मुझे कोई पैसे वाला अपनी लडक़ी क्यों देगा?”
“तो फिर माही को बेच डालो, मोटी रकम हाथ आएगी तो हमारे दिन संवर जाएंगे.”
“हां, यह ठीक रहेगा.” विनीत ने खुश हो कर कहा.
उसी दिन से वह और पारुल रोहिना उर्फ माही को बेचने की जुगत में लग गए. काफी भागदौड़ करने पर भी माही के लिए मोटी कीमत देने वाला नहीं मिला. इधर माही रोज विनीत पर शादी करने का दबाव बना रही थी. आखिर इस से तंग आ कर विनीत ने माही से पीछा छुड़ाने के लिए उस का गला दबा कर उस की जान ले ली.
माही मर गई तो विनीत डर गया. उस ने माही की लाश दीवान में छिपा कर रखी. फिर पारुल को माही की हत्या कर देने की बात बता दी. पारुल ने माही की लाश ठिकाने लगाने के लिए अपने प्रेमी इरफान की मदद मांगी तो वह तुरंत रात को बाइक ले कर आ गया. उस वक्त पारुल का छोटा भाई मोहित भी घर पर था.
पारुल ने इरफान की बाइक पर रोहिना उर्फ माही की लाश लादने में विनीत और इरफान की मदद की. इरफान और विनीत माही की लाश रात के अंधेरे में करावल नगर के महालक्ष्मी विहार में डाल आए.
क्राइम ब्रांच और करावल नगर थाने की पुलिस टीम के संयुक्त प्रयास से इरफान, विनीत, पारुल और मोहित की गिरफ्तारी संभव हो सकी. विनीत ने भी अपना अपराध कबूल कर लिया था. पुलिस ने उन चारों अभियुक्तों को सक्षम न्यायालय में पेश कर के कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित सत्य कथा का नाट्य रूपांतरण है.
आखिरी कैमरे में पुलिस को जो दृश्य नजर आया, वह उन के लिए बड़ी सफलता ले कर आया था. दोनों युवकों में से एक युवक उन्हें बाइक लिए सडक़ पर खड़ा दिखाई दिया, दूसरा युवक गली में से आता नजर आया, आने वाले युवक के कंधे पर लडक़ी थी. वह निर्जीव यानी लाश लग रही थी.
“सर, यहीं कहीं से यह युवक युवती की लाश ले कर महालक्ष्मी विहार के लिए चले थे.” एसआई मनदीप जोश में भर कर बोले, “हमें यहां पर युवती की फोटो दिखा कर मालूमात कर लेनी चाहिए.”
“ठीक कहते हो.” एसएचओ नफे सिंह मुसकरा कर बोले.
आखिर पुलिस पहुंच ही गई ठिकाने
सभी के मोबाइल में उस मृत युवती का फोटो अपलोड था. उसे वहां के दुकानदारों, पटरी वालों और मजदूरी करने वाले लोगों को दिखाया गया तो एक पटरी वाले ने युवती को पहचान लिया. उस ने बताया, “साहब, यह युवती तो रोहिना है, यह छोटा बाजार में स्थित जाट धर्मशाला के पास पारुल के साथ रहती है.”
“क्या तुम हमें पारुल के घर तक पहुंचा सकते हो?” इंसपेक्टर राजेंद्र कुमार ने पटरी वाले से कहा.
“क्यों नहीं साहब,” वह व्यक्ति अपनी जगह पर खड़ा हो कर बोला, “आप किसी को मेरे सामान के पास खड़ा कर दीजिए.”
एसएचओ ने कांस्टेबल शुभम और निखिल को वहां खड़ा कर दिया. बाकी पुलिस टीम उस व्यक्ति के साथ पारुल के घर की ओर चल पड़ी. वह व्यक्ति उन्हें जाट धर्मशाला के पास एक मकान पर ले कर आया. मकान के दरवाजे पर ताला लटक रहा था.
“यहीं पारुल रहती है साहब, आप मकान मालिक से पूछ लीजिए.” उस व्यक्ति ने कहा.
पुलिस टीम को अपने मकान के दरवाजे पर देख कर ऊपर मौजूद मकान मालिक नीचे आ गया. वह काफी डरा हुआ दिखाई दे रहा था.
“क्या बात है साहब, आप मेरे मकान पर किसे तलाशने आए हैं?” मकान मालिक ने कांपती आवाज में पूछा.
“तुम्हारे कमरे में पारुल रहती है, हमें उस से मिलना है.” इंसपेक्टर राजेंद्र कुमार ने पूछा.
“वो तो कल शाम को मेरा कमरा खाली कर के कहीं दूसरी जगह चली गई है साहब.”
“ओह!” इंसपेक्टर ने गहरी सांस ली, फिर कुछ सोच कर उन्होंने मृत युवती का फोटो मकान मालिक को दिखाया, “इसे पहचानते हो?”
“जी हां, यह रोहिना उर्फ माही है. यह पारुल के साथ ही मेरे कमरे में कई सालों से रह रही थी. हां, मैं ने 2-4 दिन से इसे पारुल के साथ नहीं देखा तो पारुल से पूछा था, तब उस ने बताया था कि माही घूमने के लिए कहीं गई है.”
“पारुल तुम्हारा कमरा छोड़ कर अब कहां रहने गई है?”
“मुझे नहीं मालूम साहब, कल तांगे में अपना सामान लाद कर उस ने मुझे बाकी बचा किराया चुकाया और चली गई. कहां गई, मैं नहीं बता सकता.”
हत्यारे चढ़े पुलिस के हत्थे
पुलिस टीम वापस लौट आई. उन्हें पारुल के नए ठिकाने को तलाश करना था. पारुल ने सामान शिफ्ट करने में तांगा इस्तेमाल किया था. उस तांगे को ढूंढ कर पारुल के नए ठिकाने पर पहुंचा जा सकता था. तांगे का स्टैंड शाहदरा में फ्लाईओवर के नीचे था. वहां जा कर ही तांगा वाले का पता लगाया जा सकता था. यह काम एसआई मनदीप और हैडकांस्टेबल मनीष यादव को सौंपा गया. दोनों उसी वक्त शाहदरा में तांगा स्टैंड के लिए थाने से रवाना हो गए.
एसआई मनदीप ने हैडकांस्टेबल मनीष के साथ उस तांगे वाले को खोज निकाला. उस ने बताया कि वह एक महिला का सामान तेलीवाड़ा (शाहदरा) से अपने तांगे में लाद कर कांतिनगर ले गया था. उस ने एसआई मनदीप को कांतिनगर में पारुल के नए आशियाने पर पहुंचा दिया.
पारुल ने यहां कमरा किराए पर लिया था, इस वक्त वह और उस का भाई मोहित घर पर ही थे. एसआई मनदीप और हैडकांस्टेबल ने दोनों को हिरासत में ले लिया. उन दोनों को करावल नगर थाने में लाया गया. इन की गिरफ्तारी की सूचना डीसीपी डा. जौय टिर्की को दी गई तो वह करावल नगर थाने में आ गए. उन की मौजूदगी में पारुल से पूछताछ शुरू की गई.
एसएचओ नफे सिंह ने रोहिना उर्फ माही की तसवीर मोबाइल में पारुल को दिखाते हुए पूछा, “इसे तो पहचानती हो न पारुल?”
पारुल काफी डरी और सहमी हुई लग रही थी. वह थूक गटकती हुई बोली, “जी.. मैं इसे पहचानती हूं, यह माही है.”
“इस की हत्या किस ने की, क्यों की, इस बात का ठीकठीक जवाब दो. अगर चालाकी दिखाने की कोशिश करोगी तो तुम्हारे हक में अच्छा नहीं होगा.”
“साहब, मैं ने माही की हत्या नहीं की है. माही का गला मेरे भाई विनीत ने दबाया था, वह उसे मारना नहीं चाहता था, लेकिन माही की जिद के कारण विनीत को गुस्सा आ गया और उस ने माही का गला दबा दिया. उस ने डर के कारण माही का शव दीवान में छिपा कर रखा. जब अंधेरा फैलने लगा तो विनीत ने मेरे प्रेमी इरफान को घर बुला लिया.
“वह बाइक ले कर आया. मैं ने और विनीत ने माही की लाश को बाइक तक पहुंचाया. विनीत माही की लाश ले कर बैठा और इरफान ने बाइक संभाली. दोनों रात को माही की लाश करावल नगर क्षेत्र में डाल कर आ गए.”
“विनीत कहां छिपा हुआ है? अपने प्रेमी इरफान की भी जानकारी दो हमें.” डीसीपी जौय टिर्की ने सख्त लहजे में पूछा.
“साहब, मैं नहीं जानती विनीत कहां चला गया है. हां, इरफान के घर का पता मैं आप को बता देती हूं.” पारुल ने कहा और इरफान का पता बता दिया.
पुलिस टीम ने इरफान को उस के घर से दबोच लिया. उसे करावल नगर लाया गया तो वहां अपनी प्रेमिका पारुल उर्फ चिंकी को देख कर वह समझ गया कि माही की हत्या का राज पुलिस के सामने खुल गया है. फिर इरफान ने भी अपना गुनाह चुपचाप कुबूल कर लिया. अब असली कातिल विनीत की गिरफ्तारी शेष थी.
पुलिस ने विनीत पंवार की गिरफ्तारी के लिए जगहजगह दबिश दी, लेकिन वह बड़ी चालाकी से इधरउधर भाग रहा था. जब वह पुलिस टीम के हाथ नहीं आया तो डीसीपी जौय टिर्की ने क्राइम ब्रांच की ईस्टर्न रेंज (2) के हाथ में विनीत की गिरफ्तारी की कमान सौंप दी. अपराध शाखा के एसीपी राजकुमार साहा की देखरेख में क्राइम ब्रांच की टीम ने विनीत की खोज शुरू कर दी. मुखबिर भी विनीत की टोह में लगा दिए गए.
बात 12 अप्रैल, 2023 की है. उत्तरपूर्वी दिल्ली के करावल नगर क्षेत्र के महालक्ष्मी विहार में 12 अप्रैल की सुबह उस वक्त होहल्ला मच गया, जब मकान नंबर बी-85 के बाहर दरवाजे पर एक युवती की लाश किसी ने पड़ी देख कर शोर मचाया. देखते ही देखते अड़ोसपड़ोस ही नहीं, दूसरी गलियों के लोग भी उस मकान के आगे आ कर लाश देखने के लिए जमा होने लगे. युवती के शरीर पर सलवारसूट था. उस की उम्र 30 साल के करीब लग रही थी. चेहरे मोहरे से वह मध्यम परिवार की दिखाई देती थी.
किसी ने इस लाश की सूचना फोन द्वारा पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी. करीब 20-25 मिनट में ही करावल नगर थाने के एसएचओ नफे सिंह 2-3 पुलिसकर्मियों को ले कर वहां आ गए. पुलिस ने पहले वहां एकत्र भीड़ को दूर हटाया, फिर युवती की लाश का निरीक्षण किया गया. युवती के शरीर पर किसी भी प्रकार की चोट अथवा जख्म के निशान नहीं थे, एसएचओ नफे सिंह की पैनी निगाहों ने युवती के गले पर लाल निशान देखे तो तुरंत अनुमान लगा लिया कि युवती को गला घोंट कर मारा गया है.
सब से पहले युवती की शिनाख्त का प्रश्न था. अभी तक वहां जमा लोगों में से किसी ने भी मृतका की पहचान नहीं की थी. इस से यही लगा कि यह युवती इस क्षेत्र की नहीं है. उन्होंने इस लाश की सूचना मोबाइल फोन द्वारा नार्थ ईस्ट डिस्ट्रिक्ट के डीसीपी जौय टिर्की को दे दी. उन से सलाहमशविरा करने के बाद उन्होंने फोटोग्राफर और फोरैंसिक टीम को मौके पर बुला लिया. उन के आ जाने पर दूसरी आवश्यक कागजी काररवाई पूरी कर के लाश को जीटीबी अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया.
15 अप्रैल, 2023 को इंसपेक्टर (इनवैस्टीगेशन) राजेंद्र कुमार ने वादी बन कर अज्ञात हत्यारे के खिलाफ भादंवि की धारा 302/201 के तहत रिपोर्ट दर्ज करवा दी. उसी दिन उस युवती की लाश का पोस्टमार्टम करवाया गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया कि युवती की हत्या गला दबा कर की गई है. युवती शादीशुदा होगी, इस बात के कोई सुहाग चिह्न युवती के जिस्म पर नहीं थे, इस से यह अनुमान लगाया गया कि युवती कुंवारी थी और किसी साथ प्रेम संबंध में फंस कर उस ने अपनी अस्मत ही नहीं खोई थी, खुद भी दुनिया से विदा कर दी गई.
‘युवती कौन थी,’ सब से पहले यह पता लगाना जरूरी था.
मृतका की शिनाख्त कराने की हुई कोशिश
डीसीपी डा. जौय टिर्की ने युवती की शिनाख्त और उस के हत्यारे का पता लगाने के लिए एक पुलिस टीम एसीपी संजय सिंह (खजूरी खास) के नेतृत्व में गठित कर दी. इस टीम में करावल नगर थाने के एसएचओ नफे सिंह, इंसपेक्टर (इनवैस्टीगेशन) राजेंद्र कुमार, एसआई मनदीप कुकाना, एएसआई माथी, हैडकांस्टेबल मनीष यादव, अमरीश, कांस्टेबल शुभम, निखिल को शामिल किया गया.
युवती की पहचान के लिए दिल्ली के सभी थानों में लाश की फोटो भेज कर यह मालूम करने की कोशिश की गई कि इस युवती की गुमशुदगी उन के यहां दर्ज तो नहीं है, यदि है तो वह थाना करावल नगर में इस की इत्तला दें. लेकिन 2-3 दिन बीत जाने के बाद भी किसी भी थाने में सूचना नहीं मिली तो युवती के पैंफ्लेट छपवा कर करावल नगर और आसपास के इलाकों में चिपकाए गए.
इस से भी बात नहीं बनी तो अखबारों में मृतका की फोटो छपवा दी गई और उस को पहचानने वाले को उचित ईनाम देने की घोषण कर दी गई, लेकिन इस से भी पुलिस को युवती के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. फिर 4-5 दिन बाद पुलिस ने युवती के शव का अंतिम संस्कार करवा दिया.
एक बार पूरी टीम उच्चाधिकारियों के साथ सिर जोड़ कर मंत्रणा के लिए बैठी. सभी से इस केस में आगे बढऩे के लिए उन के सुझाव पूछे गए.
इंसपेक्टर (इनवैस्टीगेशन) राजेंद्र कुमार ने अंधेरे में भटकती पुलिस टीम के सामने अपना सुझाव रखते हुए कहा, “सर, यदि हम सीसीटीवी का सहारा लें तो हमें सफलता मिलने की संभावना है. मेरा मानना है कि जहां युवती की लाश मिली है, हमें वहां के सीसीटीवी को खोजना होगा. यदि वहां सीसीटीवी मिला तो काफी हद तक हम हत्यारों का सुराग पा सकते हैं.”
“शाबाश, मिस्टर राजेंद्र कुमार, आप ने बहुत अच्छा सुझाव दिया है, निस्संदेह वहां सीसीटीवी होंगे. उन में अपराधी द्वारा लाश उस मकान के बाहर डालने का एक भी फोटो यदि मिलता है तो हमें आगे बढऩे की राह मिल जाएगी.” डीसीपी जौय टिर्की राजेंद्र कुमार की पीठ थपथपा कर बोले, “आप सभी लोग इस बात पर अमल करिए.”
पुलिस टीम उसी वक्त थाने से निकल कर महालक्ष्मी विहार के मकान नंबर बी-85 के सामने पहुंच गई. उस युवती की लाश वहीं पाई गई थी. पुलिस वालों की खोजी नजरें वहां आसपास सीसीटीवी कैमरों को तलाशने लगीं. उस जगह पर तो नहीं, सामने सडक़ पर उन्हें सीसीटीवी कैमरा एक पोल पर लगा दिखलाई दे गया.
सीसीटीवी फुटेज से मिला सुराग
तुरंत उस की फुटेज निकलवा कर कंट्रोल रूम में चैक की गई तो पुलिस टीम की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उस सडक़ पर उन्हें एक बाइक पर 3 लोग बैठ कर गली की ओर जाते नजर आ गए. उन तीनों में एक बाइक चला रहा युवक था, दूसरा पीछे बैठा युवक दिखलाई दे रहा था. दोनों के बीच में एक युवती बैठी थी. जूम कर के देखने पर यह स्पष्ट हो गया कि युवती की आंखें बंद हैं यानी वह मुरदा हालत में है, जिसे पीछे बैठे युवक ने थाम रखा है.
यह युवती वही थी, जिस की लाश पुलिस को बी-85 घर के बाहर मिली थी. फुटेज में दोनों युवकों के चेहरे ज्यादा स्पष्ट नहीं थे. कुछ दूरी पर एक सीसीटीवी और नजर आया. उस की फुटेज देखी गई तो वे दोनों युवक बीच में मृत युवती को बाइक पर बिठा कर महालक्ष्मी विहार की तरफ आते नजर आए.
पुलिस टीम ने युवती और उन युवकों का पताठिकाना जानने के लिए सीसीटीवी को आधार बनाया. रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगालती हुई पुलिस टीम आखिर में शाहदरा के तेलीवाड़ा क्षेत्र तक पहुंच गई. यहां से आगे के पोल पर भी सीसीटीवी थे लेकिन उन में इन युवकों की तसवीर नहीं थी.
नजलू को रुखसाना के साथ रहते एक साल हो गया था. तब तक वह रुखसाना का बहुत ख्याल रखता था. एक साल बाद नजलू को पता चला कि रुखसाना किसी और व्यक्ति से फोन पर बातें करती है. बस, उस दिन के बाद वह रुखसाना के पीछे ही पड़ गया.
वह रुखसाना से कहता, “मेरे प्यार में क्या कमी थी, जो तू गैरमर्द से बातें करने लगी है. तूने मेरे साथ धोखा क्यों किया? बता, नहीं तो तुझे जिंदा नहीं छोड़ूंगा.”
रुखसाना उस के आगे हाथ जोड़ती, पैर पड़ती और कसम खाती कि वह उस पर झूठा शक कर रहा है. मगर नजलू कहता, “तू धोखेबाज है. तूने मेरे प्यार की कद्र नहीं की. मैं ने तुझे क्या कुछ नहीं दिया, मगर तू गैरमर्द के प्यार में पड़ गई. तुझे शर्म नहीं आई.”
इस तरह से नजलू उसे प्रताडि़त करता और मारपीट करता रहता था. रुखसाना को धमकाता कि अगर उस ने उसे छोड़ा तो वह उस के बच्चों और भाइयों को मार डालेगा. नजलू की इन धमकियों से डर कर वह उस के साथ रहने को मजबूर थी.
30 अप्रैल, 2023 को नजलू ने साजिश के तहत रुखसाना को जयपुर से दूर बाइक पर घुमाने ले जाने के लिए कहा. रुखसाना मान गई. नजलू ने रुखसाना को बाइक पर बिठाया और जयपुर से निमोडिय़ा की तरफ रवाना हो गया. बाइक पर जाते समय नजलू ने सोशल मीडिया रील भी बनाई.
रील के बैक ग्राउंड में आवाज थी, “अब मैं खुद को इतना बदल दूंगा कि तू तो क्या, मेरे अपने भी तरस जाएंगे मुझे पहले के जैसा देखने के लिए…?
इस के बाद नजलू रुखसाना को निमोडिय़ा के घने जंगल में ले गया. वहां उस ने रुखसाना को बेरहमी से पीटा. नीचे पटक कर घुटनों से उस की पसलियों पर वार किए. नजलू इतने गुस्से में था कि अपना आपा खो बैठा और रुखसाना के साथ इतनी मारपीट की कि रुखसाना की पसलियां टूट गईं.
मरणासन्न हालत में किया बलात्कार
जब रुखसाना ने नजलू से हाथ जोड़ कर माफी मांगी तो नजलू ने उसे पीटना बंद कर उस के साथ शारीरिक संबंध बनाए. रुखसाना घायलावस्था में अधमरी सी पड़ी थी और दरिंदा नजलू उस के साथ अपनी हवस शांत कर रहा था. दुष्कर्म करने के बाद रुखसाना की तबीयत जब बहुत ज्यादा बिगड़ गई तो नजलू डर गया. आननफानन में वह रुखसाना को निजी क्लीनिक में ले कर गया और बताया कि रोड एक्सीडेंट हो गया है.
हालत बिगडऩे पर रुखसाना को क्लीनिक से जयपुरिया अस्पताल रैफर कर दिया गया. जयपुरिया अस्पताल में भी नजलू ने डाक्टरों को बताया कि हाईवे पर जाते समय रिंग रोड पर एक्सीडेंट हो गया. इस के बाद डाक्टरों ने किसी महिला परिजन को बुलाने के लिए कहा. मजबूरन नजलू को रुखसाना की मां मुन्नी को फोन करना पड़ा.
फोन करने के बाद नजलू नजर बचा कर अस्पताल से फरार हो गया. अस्पताल से पुलिस को सूचना दे दी गई. रोड एक्सीडेंट की बात सुन कर मुन्नी देवी भी जैसेतैसे अस्पताल पहुंची, तब तक रुखसाना इस दुनिया से रुखसत हो चुकी थी.
बेटी की लाश देख कर उस की मां ने कहा, “आखिर मेरी बेटी को मार डाला नजलू ने.”
पुलिस ने नजलू से पूछताछ के बाद कई सबूत भी जुटाए. आरोपी नजलू खान को 4 मई, 2023 को कोर्ट में पेश कर दिया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.
रुखसाना के चारों बेटे अब यतीम हो चुके हैं. उस की ससुराल वालों ने बच्चों को अपनाने से मना कर दिया है. वे कहते हैं कि जब रुखसाना दूसरे व्यक्ति के साथ रहने लगी तो अब इन बच्चों से हमारा क्या लेनादेना. उस के 4 बेटों में से एक नानी के पास, 2 बच्चे एक मौसी के पास तो एक बेटा दूसरी मौसी के पास रह रहा है.
बेटी रुखसाना की हत्या के बाद उस के बच्चों की परवरिश की चिंता में बुजुर्ग नानानानी बीमार रहते हैं. ऐसे में उन्हें अब सरकारी योजनाओं के लाभ की आस है. यह आस पूरी होगी या अधूरी रहेगी, यह भविष्य बताएगा.
—कथा पुलिस सूत्रों व मृतका के मातापिता से की गई बातचीत पर आधारित
आज से करीब 2 साल पहले रुखसाना काकोड़ (जिला टोंक) से अपने चारों बेटों के साथ मालपुरा गेट इलाका जयपुर में आ कर रहने लगी. उस ने एक कमरा किराए पर लिया और सांगानेर की एक फैक्ट्री में नौकरी कर ली. रुखसाना की गाड़ी चलने लगी.
जयपुर आने के महीने भर बाद एक रोज किसी अंजान व्यक्ति का फोन रुखसाना के मोबाइल पर आया. रुखसाना ने काल रिसीव कर कहा, “हैलो.”
तब दूसरी तरफ से व्यक्ति बोला, “आप रुखसाना बोल रही हैं?”
“हां, मैं रुखसाना बोल रही हूं. आप कौन बोल रहे हैं? मैं ने पहचाना नहीं आप को.” रुखसाना ने कहा.
तब वह बोला, “मैं नजलू खान बोल रहा हूं. मुझे आप की आवाज बड़ी प्यारी लगती है.”
यह सुनते ही रुखसाना को गुस्सा आ गया. उस ने कहा, “बकवास मत करो और सुनो, दोबारा फोन भी मत करना.”
रुखसाना ने फोन काट दिया. सोचा कि कोई लफंगा है. एक बार डपटने के बाद दोबारा फोन नहीं करेगा. मगर यह उस की सोच तब गलत साबित हुई, जब 5 मिनट बाद उस का दोबारा फोन आ गया.
वह बोला, “मुझे तुम्हारी आवाज बहुत मीठी लगती है. मैं ने जब से तुम्हें देखा है और आवाज सुनी है. मैं तुम्हारा दीवाना हो गया हूं. लगता है मुझे तुम से प्यार हो गया है…”
सुन कर रुखसाना उस की बात बीच में काटते हुए बोली, “मैं तुम्हें जानती नहीं. फिर क्यों बारबार फोन कर रहे हो. दोबारा मुझे फोन मत करना. यही ठीक रहेगा तुम्हारे लिए.”
रुखसाना के संपर्क में आया नजलू खान
कहने के साथ ही रुखसाना ने फिर काल डिसकनेक्ट कर दी. मगर उस व्यक्ति का फोन जिस ने अपना नाम नजलू खान बताया था, दिन में कईकई बार रुखसाना के पास आने लगा. वह हमेशा उस की आवाज की तारीफ करता था. बोली बड़ी प्यारी लगती है. रुखसाना उस के दिन भर आने वाले फोन काल्स से तंग आ गई थी. मगर वह करती भी तो क्या.
नजलू खान (24 साल) निवासी गांव सूरवाल, जिला सवाई माधोपुर कामधंधे की तलाश में आज से करीब 4 साल पहले जयपुर आया था. उस ने शिकारपुरा रोड, सेक्टर-35 सांगानेर में किराए का कमरा लिया और रहने लगा. वह कुंवारा था और थोड़ा पढ़ालिखा भी. नजलू जयपुर आ कर कपड़े खरीदने और बेचने का काम करता था.
कपड़े के इस धंधे से उसे अच्छीखासी आमदनी होती थी. रुखसाना जब जयपुर आई थी, उन्हीं दिनों एक रोज नजलू की नजर रुखसाना पर पड़ी. तब वह उस की सुंदरता पर मर मिटा. नजलू ने पता किया कि यह महिला कौन है और कहां रहती है, नजलू ने उस के बारे में सारी बातें पता कर लीं.
उसे पता चला कि रुखसाना के पति की मौत हो चुकी है. उस के 4 बेटे हैं. वह अपने बच्चों के साथ मालपुरा गेट इलाके में किराए के कमरे में रहती है और सांगानेर की एक फैक्ट्री में नौकरी करती है. बस, उस के बाद नजलू ने उस फैक्ट्री से रुखसाना का मोबाइल नंबर जुटाया और उसे फोन कर उस की सुंदरता व मीठी बोली की तारीफ करने लगा.
बारबार अजनबी का फोन आने से रुखसाना को फैक्ट्री में परेशानी होने लगी. उस ने उसे डांटाफटकारा, लेकिन वह नहीं माना. आखिर में परेशान हो कर रुखसाना ने नजलू खान को पति की मौत और बच्चों के बारे में सब कुछ बता दिया, ताकि उस से पीछा छुड़ा सके. इस के बाद भी नजलू ने फोन करना बंद नहीं किया.
नजलू ने रुखसाना से कहा, “मैं तुम्हारे चारों बच्चों को अपनाऊंगा. तुम्हें और तुम्हारे बच्चों को बहुत अच्छी तरह से रखूंगा.”
रुखसाना उस की बातों में आ गई. रुखसाना ने पति की मौत के बाद जो धक्के खाए थे, उस से उसे ऐसा लगा था कि बिना सहारे के एक औरत का जीवन बहुत कठिन है. नजलू उसे अच्छा लगा था. नजलू की मीठी बातों के जाल में रुखसाना फंस गई थी.
नजलू के साथ रहने लगी लिवइन रिलेशन में
रुखसाना ने तय कर लिया था कि वह नजलू के साथ रहेगी. वह उस के कमरे पर आनेजाने लगा. लव अफेयर के बाद रुखसाना और नजलू खान के बीच अवैध संबंध बन गए तो दोनों लिवइन में साथ रहने लगे. रुखसाना ने नजलू खान को अपना तनमन सब समर्पित कर दिया. नजलू से रुखसाना उम्र में भले ही 6 साल बड़ी थी, मगर वह नजलू को शारीरिक सुख दे कर जब तृप्त कर देती तो वह उस के आगेपीछे मंडराता रहता.
रुखसाना के नजलू के साथ लिवइन रिलेशन में रहने का पता जब मुन्नी को लगा, तब वह रुखसाना को समझाने लगी, “बेटी, तू गलत आदमी के साथ रह रही है. यह रिश्ता तोड़ डाल. मैं अपनी बिरादरी में अच्छा लडक़ा देख कर तेरा निकाह कर दूंगी. अगर तू निकाह करना चाहेगी तो. मगर ये रिश्ता तोड़ दे.”
सुन कर रुखसाना बोली, “अम्मी, ये बहुत भोला है. बहुत अच्छा है. इस से निकाह करूंगी तो मेरी और बच्चों की जिंदगी सुधर जाएगी.”
यह सुन कर मुन्नी कसमसा कर रह गई. मुन्नी ने नजलू को भी बहुत समझाया. मगर मुन्नी की बात न रुखसाना ने मानी और नजलू ने. नजलू ने रुखसाना पर ऐसा जादू किया था कि उस ने मां की एक नहीं सुनी और वह उस के साथ रहने लगी.
शुरू में नजलू काफी अच्छे से रहा. बच्चों के कपड़े धोता, खाना बना देता. रुखसाना फैक्ट्री में काम करने जाती तो पीछे बच्चों का ध्यान भी रखता था. बच्चों को मोबाइल तक ला कर दिया. रुखसाना यह सब देख कर नजलू के छलावे में आ गई.
एक साल तक तो सब कुछ ठीक रहा, लेकिन उस के बाद नजलू का बरताव बदल गया. वह रुखसाना पर हाथ उठाने लगा. जब रुखसाना अपनी मां के घर जाती तो शरीर पर कई जगह नील के निशान दिखते थे. मां पूछती कि ये निशान कैसे हैं?
रुखसाना बात छिपा जाती और कुछ न कुछ बहाना कर देती. लेकिन मुन्नी पास बैठ कर रुखसाना का हाथ अपने सिर पर रखवा कर कसम दिलाती थी. तब रुखसाना सच बताती, वह रोते हुए बताती थी, “अम्मी, गलती हो गई. मैं ने नजलू को पहचानने में गलती कर दी.”
मां ने रुखसाना को नजलू से दूरी बनाने को कहा
रुखसाना ने मां को बताया कि नजलू ने एक रोज सिर पर भी वार किया था. रुखसाना का सिर फूट गया था, टांके आए थे. एक बार रुखसाना का हाथ भी फ्रैक्चर कर दिया, तब पट्टी करवानी पड़ी थी. मुन्नी ने थाने में रिपोर्ट भी कराई थी कि नजलू मेरी बेटी को मारता है. नजलू रुखसाना को धमकी भी देता था कि तेरे बच्चों और भाई को मार दूंगा. रुखसाना अब नजलू की मारपीट व बच्चों, भाई को मारने की धमकी से डरने लगी थी और चुपचाप लिवइन पार्टनर के जुल्म सहती रही.
मुन्नी ने रुखसाना से कहा कि वह नजलू को छोड़ दे. तब रुखसाना ने मां से कहा था, “मां, अगर मैं ने नजलू को छोड़ा और इस ने मेरे परिवार को कुछ कर दिया तो मैं कैसे जी पाऊंगी.”
तब मुन्नी ने नजलू को समझाया था. तेरी उम्र कम है, रुखसाना का पीछा छोड़ दे. उस के छोटेछोटे 4 बच्चे हैं. लेकिन वह पीछा छोडऩे को तैयार ही नहीं था.
पहली मई, 2023 को जयपुर शहर (पूर्व) के मालपुरा गेट निवासी मुन्नी ने अपनी बेटी रुखसाना उर्फ अफसाना (30 वर्ष) की हत्या का मामला दर्ज कराया था. एसएचओ सतीशचंद्र चौधरी को दी रिपोर्ट में मुन्नी ने बताया था कि उस की बेटी रुखसाना गत 2 साल से सूखाल सवाई माधोपुर हाल निवास शिकारपुरा रोड, सेक्टर-35 सांगानेर निवासी नजलू खान (24 वर्ष) केसाथ रह रही थी.
30 अप्रैल, 2023 को नजलू खान ने रुखसाना से मारपीट की और उसे जयपुरिया अस्पताल जयपुर में भरती करवाया और वहां मौत होने पर सूचना दे कर भाग गया. मुन्नी की तहरीर पर पुलिस ने नजलू खान के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया. इस के बाद थाना मालपुरा गेट के एसएचओ सतीशचंद्र चौधरी मय पुलिस टीम जयपुरिया अस्पताल पहुंचे. वहां पर रुखसाना की लाश मिली.
रुखसाना का इलाज करने वाले डाक्टरों ने पुलिस को बताया कि रुखसाना को नजलू खान अस्पताल ले कर आया था. उस ने बताया था कि एक्सीडेंट में रुखसाना घायल हो गई है. साथ में कोई लेडीज नहीं थी. इस कारण डाक्टर ने नजलू से कहा कि वह परिवार की किसी महिला को बुला लें. नजलू ने तब रुखसाना की अम्मी मुन्नी को फोन कर कहा कि रुखसाना का एक्सीडेंट हो गया है, आप जयपुरिया अस्पताल जल्दी आ जाओ.
मुन्नी जब अस्पताल आई, तब तक रुखसाना की मृत्यु हो गई थी. इस के बाद नजलू खान भी अस्पताल से फरार हो गया था. पुलिस ने रुखसाना के शव का पहली मई, 2023 को पोस्टमार्टम मैडिकल बोर्ड से करा कर शव उस की अम्मा मुन्नी को सौंप दिया.
पता चला कि रुखसाना की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रूह कंपा देने वाला सच सामने आया है. घुटनों से वार करने के कारण रुखसाना की दोनों तरफ की 3-3 पसलियां टूट गई थीं. लिवर फट गया था. छाती और पेट पर घुटनों से कई वार किए गए. अंदर इतनी ब्लीडिंग हुई कि पेट में 2 यूनिट से ज्यादा खून जमा हो गया. 18 से अधिक गंभीर चोटें, छोटीमोटी अनगिनत चोटें पाई गईं. लिवइन पार्टनर ने मारपीट इतनी बुरी तरह से की थी कि रुखसाना की मौत हो गई थी.
लिवइन पार्टनर के खिलाफ लिखाई रिपोर्ट
मामला हत्या का लग रहा था. अगर मामला एक्सीडेंट का होता तो नजलू खान फरार क्यों हुआ. मामले को पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया. डीसीपी ज्ञानचंद यादव के निर्देश पर एसएचओ सतीशचंद्र चौधरी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई. पुलिस टीम आरोपी नजलू खान को गिरफ्तार करने के प्रयास में जुट गई.
डीसीपी ज्ञानचंद यादव के निर्देशन में पुलिस ने फरार आरोपी नजलू खान के मोबाइल को ट्रेस करना शुरू किया. सीसीटीवी फुटेज देखे. नजलू खान ने जिन लोगों से 30 अप्रैल, 2023 को बातचीत की थी, पुलिस ने उन लोगों से संपर्क किया. पता चला कि नजलू खान ने पहली मई को पुरानी सिम फेंक कर नया सिम जारी करवाया, लेकिन इस के बावजूद पुलिस से बच नहीं पाया. पुलिस ने पताठिकाना मालूम कर उसे 3 मई, 2023 को हिरासत में ले लिया.
पूछताछ में नजलू खान ने स्वीकार किया कि उस ने रुखसाना के साथ 30 अप्रैल, 2023 को बुरी तरह से मारपीट कर रुखसाना का मर्डर किया था. उस ने पुलिस को बताया कि उसे शक था कि रुखसाना किसी दूसरे आदमी से फोन पर बात करने लगी है. शक के आधार पर ही उस ने रुखसाना को पीटपीट कर मौत के घाट उतार दिया.
जुर्म कुबूल करते ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया आरोपी नजलू खान से कड़ी पूछताछ में रुखसाना हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार से है—
राजस्थान के टोंक जिले के काकोड़ गांव के कमरुद्दीन व मुन्नी की बेटी थी रुखसाना उर्फ अफसाना. मुन्नी के 7 बेटियां हैं. रुखसाना रूपसौंदर्य की मल्लिका थी. वह करीब साढ़े 5 फीट की गोरे रंग की सुंदरी थी. उस की बड़ीबड़ी कजरारी आंखों व खनकती हंसी से जो भी रूबरू हुआ, वह उस का दीवाना हो जाता था. रुखसाना की मीठी बोली थी. जब वह जवान होने लगी तो उस का रूपसौंदर्य खिलता गया. गरीब मांबाप की बेटी को सुंदरता मिले तो कहते हैं कि वह अभिशाप बन जाती है.
टोंक जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर काकोड़ गांव के युवाओं में उस वक्त रुखसाना के रूप की ही चर्चा थी. जब रुखसाना गांव में कहीं काम से निकलती तो लोग उसे मंत्रमुग्ध हो कर देखते रह जाते. बेटी के साथ कहीं कोई ऊंचनीच न हो जाए, इसलिए घर वालों ने रुखसाना की शादी मात्र 14 वर्ष की आयु में निवाई (जिला टोंक) के बबलू खान से कर दी. मात्र 14 बरस की आयु में भी रुखसाना भरेपूरे शरीर के कारण भरीपूरी जवान दिखती थी.
बबलू खान निवाई की पत्थर फैक्ट्री में काम करता था. इस से परिवार का भरणपोषण होता था. शादी के साल भर बाद ही रुखसाना एक बेटे की मां बन गई, जो इस समय 15 बरस का है. इस के बाद रुखसाना के 3 बेटे और हुए 4 बेटों के कारण घरगृहस्थी में खर्चा भी बढ़ गया. मगर कमाई वही थी. पत्थर फैक्ट्री में पत्थर कटिंग के बदले 4 सौ रुपए दैनिक की मजदूरी में. मुश्किल से गुजरबसर हो रही थी.
पत्थर की फैक्ट्री में काम करते समय पत्थर कटिंग से उड़ती धूल उस के गले में जमती गई. कफ रहने लगा. धीरेधीरे पति बबलू खान काफी बीमार रहने लगा और आज से साढ़े 3 साल पहले उस की मौत हो गई. रुखसाना विधवा हो गई. उस के चारों बेटे पिता के साए से वंचित हो गए. पति का इंतकाल होने के बाद घर में फाकाकशी की नौबत आ गई.
कुछ समय तक वह जैसेतैसे ससुराल निवाई में रही. ससुराल वाले उसे पूछते तक नहीं थे. ऐसे में पति की मौत के 6 माह बाद रुखसाना ससुराल छोड़ मायके काकोड़ आ कर मांबाप के पास रहने लगी. मातापिता गरीब थे. मगर दुखियारी बेटी को वे कैसे पनाह नहीं देते, रुखसाना अपने चारों बेटों के साथ करीब साल भर मायके में रही.
इस के बाद रुखसाना ने अपनी मां मुन्नी से कहा, “मां, मैं अब तुम लोगों पर बोझ नहीं बनना चाहती हूं. मैं जयपुर जा कर कोई काम कर लूंगी. उस से अपना और बेटों को भरणपोषण हो जाएगा.”
मां की बात नहीं मानी रुखसाना ने
बेटी के जयपुर जाने की बात सुन कर मां मुन्नी ने कहा, “इतने बड़े शहर में किस के भरोसे रहोगी. जमाना बड़ा खराब है. अकेली जवान औरत कैसे अजनबी शहर में अजनबी लोगों के साथ रह सकेगी. मुझे तो बड़ी चिंता हो रही है. तुम यहीं रहो हमारे पास, जैसेतैसे गुजारा कर लेंगे.”
मां की बात सुन कर रुखसाना बोली, “मां, जिंदगी बहुत लंबी है. कुछ न कुछ तो करना ही होगा. यहां पर मैं कब तक तुम लोगों पर बोझ बनी रहूंगी. अकेली औरतें आज हर काम कर रही हैं, वो अकेली ही रहती हैं. मेरे साथ तो 4 बेटे हैं. मैं अकेली थोड़ी हूं. आप लोग चिंता न करो. ऊपर वाला सब ठीक करेगा.”
“जैसा तू ठीक समझे बेटी. मगर मेरा दिल न जाने क्यों अनहोनी के डर से धडक़ रहा है.” मुन्नी ने शंका जाहिर की. मगर रुखसाना मां को समझाबुझा कर मनाने में कामयाब रही.