पबजी गेम की आड़ में की मां की हत्या

पबजी गेम की आड़ में की मां की हत्या – भाग 3

दक्ष को इंसपेक्टर धर्मपाल ने कस्टडी में ले लिया था और उसे कोतवाली पीजीआई ले आए थे. यहां लखनऊ के एडिशनल डीसीपी (नार्थ) एस.एम. कासिम आबिदी मौजूद थे.

उन के सामने दक्ष से एक बार फिर पूछा गया, ‘‘दक्ष अपनी मां की हत्या तुम ने की है, क्या तुम इसे कुबूल करते हो?’’

‘‘हां, मैं ने ही अपनी मौम की हत्या की है.’’

‘‘क्यों?’’ कासिम आबिदी ने गंभीरता से पूछा.

‘‘मैं पबजी गेम में बहुत ज्यादा उलझा रहता था. मौम चाहती थी कि मैं अपनी पढ़ाई पर ध्यान दूं. मैं उन की बात अकसर अनसुनी करता था, इस के लिए मौम मुझे गालियां देती थी, पीटती थी. कई बार वह मुझे कमरे में बंद कर देती थी और खाना भी नहीं देती थी. मेरे मन में धीरे धीरे मौम के प्रति नफरत भरती चली गई.’’ उस ने बताया.

‘‘जिस रात तुम ने मां की हत्या की, उस रात का चुनाव तुम ने पहले से कर रखा था’ किसी बात से रुष्ट हो कर तुम ने डैड की रिवौल्वर अलमारी से निकाल कर मां पर गोली चला दी थी?’’

‘‘वह 3 जून, 2022 का मनहूस दिन था सर. मैं अपने स्टडी रूम में बैठा पढ़ रहा था. मौम अचानक आई और मुझे मारने लगी थी कि मैं ने उन के 10 हजार रुपए चोरी कर के पबजी  गेम में उड़ा दिए हैं. मैं ने पापा की कसमें खाईं, बहुत कहा कि मैं ने 10 हजार नहीं चुराए हैं, लेकिन मौम का गुस्सा शांत नहीं हुआ.

उन्होंने मुझे पीटपीट कर अधमरा कर दिया, फिर स्टोर रूम में बंद कर दिया. मैं रोता गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन मौम को मुझ पर दया नहीं आई. तभी मैं ने निर्णय ले लिया कि मौम को जिंदा नहीं छोड़ूंगा. दूसरी रात मैं ने पापा की रिवौल्वर निकाली और सो रही मौम के सिर में गोली मार दी.’’

‘‘अपनी मां की हत्या कर के तुम ने उन की लाश को बैडरूम में ही पड़े रहने दिया, तुम ने ऐसा किस के कहने पर किया?’’ कासिम आब्दी ने दक्ष के चेहरे पर नजरें जमा कर पूछा.

‘‘मुझे किसी ने कुछ नहीं सिखाया. बस मेरे मन में आया कि मौम की हत्या की बात लोगों से छिपा कर रखूं. मुझे पापा के फोन आते रहे, वह मौम का फोन न लगने से परेशान थे. वह मुझ से पूछते रहे कि तुम्हारी मौम काल रिसीव क्यों नहीं कर रही है?

मैं ने पहले दिन बताया कि मौम फोन घर में रख कर बिजली का बिल जमा कराने चली गई है. दूसरे दिन पापा ने फिर मौम के विषय में पूछा तो मैं ने उन से झूठ बोला कि मौम बाजार गई है.’’

दक्ष कुछ क्षण को चुप रहा फिर उस ने मुसकरा कर कहा, ‘‘मैं ने 2 दिन तक मौम की हत्या करने और लाश घर में होने की बात बड़ी सफाई से छिपा कर रखी. मैं सोमवार को अपने एक दोस्त को घर लाया ताकि आसपास वाले समझें कि मेरे घर में सब सामान्य है. मैं ने जोमैटो कस्टमर सर्विस से दोस्त और अपने लिए खाना मंगवाया था. मंगलवार को मैं अपने दूसरे दोस्त को घर ले कर आया. उसे मैं ने घर में ही अंडा करी बना कर खिलाई थी.’’

‘‘ओह!’’ एडिशनल डीसीपी दक्ष के शातिर दिमाग पर हैरान हो गए. इंसपेक्टर धर्मपाल भी हैरान थे कि इस छोटी उम्र में दक्ष कितनी सफाई से मां की हत्या की बात पर परदा डालने की कोशिश करता रहा.

‘‘दक्ष,’’ इंसपेक्टर धर्मपाल ने एक विचार मन में आने पर पूछा, ‘‘2 दिन में तो तुम्हारी मां की लाश सडऩे लगी होगी, क्या तुम्हारे दोस्तों या पड़ोसियों को लाश से उठने वाली बदबू महसूस नहीं हुई?’’

‘‘कैसे होती सर, मैं रूम फ्रैशनर का छिडक़ाव पूरे कमरे में लगातार कर रहा था ताकि बाहर बदबू न जा सके. सर, मेरे दोस्तों ने पूछा था तुम्हारी मौम नजर नहीं आ रही है दक्ष. मैं ने बहाना बना दिया था कि वह दादी के पास गई है. दादा की तबीयत ठीक नहीं चल रही है इसलिए मौम 2-4 दिन वहीं रहेंगी. यही नहीं सर, पड़ोसियों को शक न हो इस कारण मैं क्रिकेट किट ले कर क्रिकेट खेलने भी जाता रहा. घर से बाहर भी मैं टहला ताकि आसपास वाले सब कुछ सामान्य समझें.’’

‘‘हूं, बहुत तेज दिमाग है तुम्हारा.’’ एडिशनल डीसीपी एस.एम. कासिम आबिदी ने होंठों को चबाया, ‘‘यह दिमाग तुम गेम्स में न लगा कर यदि देशहित के काम में लगाते तो तुम्हारे मौमडैड का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता. तुम पबजी एडिक्ट बन गए, घर का पैसा भी उड़ाने लगे, इन फिजूल के गेम्स में. तुम्हारी मौम अगर तुम पर नाराज होती थीं तो वह गलत नहीं थी.

‘‘हर मांबाप चाहते हैं उन का बेटा पढ़लिख कर लायक बने. किंतु अधिकांश बच्चे इन पबजी जैसे गेम्स में अपना जीवन बरबाद करने पर तुले हुए हैं. शायद तुम नहीं जानते, हमारी भारत सरकार ने इन गेम्स में उलझे बच्चों द्वारा अपना और अपने परिवार का अहित करने वाली अनेक वारदातों को देखते हुए 2 सितंबर, 2020 को अनेक चीनी ऐप और अन्य कंपनियों द्वारा चलाए जा रहे ऐसे 177 गेम्स पर पूरी तरह बैन लगा दिया था.

‘‘इस के बावजूद आज भी तुम्हारे जैसे बच्चे इंटरनेट की मदद से ऐसे हानि पहुंचाने वाले गेम खेलते हैं. इस का परिणाम तुम खुद देख लो, तुम ने इसी गेम्स के खेलने पर रोकाटोकी करने वाली अपनी प्यारी माम की हत्या कर दी.’’

‘‘मुझे अपनी मौम की हत्या करने का जरा भी अफसोस नहीं है.’’ दक्ष दृढ़ स्वर में बोला, ‘‘उस का कत्ल हो जाना ही ठीक था.’’

उस के हावभाव और आखिरी शब्दों ने एडिशनल डीसीपी और इंसपेक्टर धर्मपाल को चौंकाया. उन्होंने एकदूसरे की आंखों में देखा. इन आंखों की भाषा से तय हो गया कि दक्ष के मन में कोई ऐसा राज दफन है, जिसे वह होंठों पर नहीं लाना चाहता. वह राज क्या है, इस के लिए इस नाबालिग की काउंसलिंग होनी जरूरी थी.’’

‘‘एक आखिरी सवाल और मन में है दक्ष,’’ एडिशनल डीसीपी ने कहा.

‘‘पूछिए सर.’’

‘‘तुम ने अपनी मां को गोली मारी थी, तब तुम्हारी बहन भी घर में ही होगी?’’

‘‘घर में ही थी सर. मौम के साथ ही सो रही थी मेरी बहन. गोली की आवाज सुन कर वह घबरा कर उठी. मौम के माथे से खून निकलते देख कर वह चीखने को हुई थी, लेकिन मैं ने रिवौल्वर उस पर तान कर उसे डरा दिया. मैं ने उसे उस रात दूसरे कमरे में बंद कर दिया. दूसरे दिन मैं ने उसे बता दिया कि मैं ने मौम को मार डाला है. वह शांत और सामान्य रहे, किसी को उस के व्यवहार से शक हुआ तो वह उसे गोली मार देगा. सर, मेरी बहन प्रियांशी ने डर के मारे जुबान नहीं खोली है.’’

‘‘ठीक है, तुम्हें अब हमारे साथ घर चलना पड़ेगा. तुम्हारी मौम का मोबाइल, तुम्हारा मोबाइल और घर में रखा लैपटाप हमें कब्जे में लेना है.’’ इंसपेक्टर धर्मपाल ने कहा.

दक्ष उन के साथ जाने के लिए कुरसी से उठ खड़ा हुआ. उस का हाथ पकड़ कर इंसपेक्टर धर्मपाल कक्ष से बाहर आ गए. कुछ ही देर में उन की गाड़ी नवीन कुमार सिंह के घर से कोतवाली की ओर जा रही थी.

बुधवार 8 जून, 2023 को नवीन कुमार सिंह पत्नी की हत्या की खबर सुन कर आसनसोल से लखनऊ आ गए. ट्रेन से उतर कर वह इंद्रापुरी कालोनी में अपनी मां मिरजा देवी और छोटे भाई नीतीश से मिले. उन्हें साधना सिंह की बेटे दक्ष द्वारा हत्या का समाचार दे कर कुछ देर रुके. दक्ष नाबालिग था. नवीन कुमार जानते थे, उसे जुवेनाइल कोर्ट से अधिक से अधिक 5 साल की सजा होगी. फिर भी वह बेटे के लिए अच्छे सा अच्छा वकील खड़ा करना चाहते थे.

पत्नी बेशक बेटे के हाथों मारी गई थी, अब वह इस दुनिया में नहीं रही थी, लेकिन बेटा था इकलौता बेटा. वह उसे खोना नहीं चाहते थे. भाई के साथ वह कोतवाली थाना पीजीआई पहुंचे और इंसपेक्टर धर्मपाल सिंह से मिले. इंसपेक्टर धर्मपाल ने नवीन कुमार सिंह को बताया कि दक्ष को उन्होंने बाल कल्याण समिति के हवाले सौंप दिया है. दक्ष की काउंसलिंग की गई है और अब इस कहानी में नया मोड़ आ गया है.

दक्ष ने खुलासा किया है कि उन के घर में मौम से मिलने प्रौपर्टी डीलर और इलैक्ट्रीशियन आकाश का वक्त बेवक्त आनाजाना लगा रहता था, जो उसे पसंद नहीं था. उस के बर्थडे पर प्रौपर्टी डीलर बहुत बड़ा गिफ्ट ले कर आया था, यह बात उस ने डैडी को बता दी थी. उस रात मौम और डैडी के बीच बहुत झगड़ा हुआ था.

मौम का इन दोनों से मेलजोल बढ़ता जा रहा था. एक दिन जब वह अपनी बहन प्रियांशी के साथ दादी के घर गया था तो मौम ने प्रौपर्टी डीलर को घर में सुलाया था. यह बात उस ने डैडी को बताई और पूछा कि उसे क्या करना चाहिए, तब उन्होंने गुस्से में कहा था, ‘‘दक्ष, मैं वहां होता तो तुम्हारी मौम को गोली मार देता.’’

दक्ष ने कहा था, ‘‘क्या मुझे भी यही करना चाहिए?’’

तो डैडी ने कहा था, ‘‘जो तुम्हें उचित लगे, वह करो.’’

इंसपेक्टर धर्मपाल ने ये सारी बातें नवीन कुमार सिंह के सामने रख कर उन से पूछा, ‘‘क्या दक्ष को आप इस बात के लिए गाइड कर रहे थे कि वह अपनी मौम को गोली मार दे.’’

‘‘नहीं, मैं ऐसा क्यों चाहूंगा. यदि मेरे और मेरी पत्नी के बीच कोई विवाद होता तो उस का फैसला मैं करता. बेटे को नहीं कहता कि वह मां को गोली मार दे.’’ नवीन कुमार सिंह गंभीर स्वर में बोले, ‘‘दक्ष क्या कह रहा है, क्यों कह रहा है, मैं नहीं जानता. मैं इतना जानता हूं कि दक्ष पबजी गेम्स एडिक्ट है. वह इंस्टाग्राम पर ऐक्टिव था. साधना को यह पसंद नहीं था, वह उसे पीटती थी इसी से क्षुब्ध हो कर दक्ष ने उस की हत्या कर दी.’’

‘‘हूं.’’ इंसपेक्टर धर्मपाल ने सिर हिलाया, ‘‘एक बात और है नवीन कुमार जी. हमें आप की पत्नी के मोबाइल और लैपटाप में सभी काल और चैटिंग मैसेज डिलीट मिले हैं, उन्हें दक्ष ने उड़ा दिया है ताकि हम उस शख्स तक न पहुंच सकें, जो उसे इस हत्या के लिए गाइड कर रहा था. खैर, हम ने सभी चीजें फोरैंसिक जांच के लिए लैब में भेज दी है, आज नहीं तो कल सच्चाई सामने आ ही जाएगी.’’

साधना सिंह का शव पोस्टमार्टम के बाद नवीन कुमार सिंह को सौंप दिया गया. उन्होंने बुधवार की शाम को उस का अंतिम संस्कार कर दिया. तीसरे दिन वह उस की अस्थियां ले कर पैतृक गांव चंदौली चले गए. उन की बेटी, मां नीरजा देवी और भाई नीतीश उन के साथ में थे.

दक्ष को जुवेनाइल कोर्ट मे पेश कर दिया गया था, जहां से उसे बाल सुधार गृह में भेज दिया गया.

पुलिस साधना सिंह की हत्या के असली कारण को जानने का प्रयास कर रही थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में दक्ष और प्रियांशी नाम परिवर्तित हैं.

पबजी गेम की आड़ में की मां की हत्या – भाग 2

बैठक में सब सामान्य था. वहां सामने 2 कमरों के दरवाजे नजर आ रहे थे. इंसपेक्टर धर्मपाल ने बाईं ओर के दरवाजे की तरफ कदम बढ़ा दिए. वह बैडरूम था. इंसपेक्टर धर्मपाल ने जैसे ही कमरे में कदम रखा. तेज बदबू का झोंका उन की नाक से टकराया. रुमाल नाक पर होने के बावजूद इंसपेक्टर धर्मपाल का दिमाग झनझना उठा. उन्होंने रुमाल को नाक पर लगभग दबा ही लिया. उन की नजर बैड पर पड़ी तो वह पूरी तरह हिल गए.

बैड पर एक महिला का शव पड़ा हुआ था, जो काफी हद तक सड़ चुकी थी. नजदीक आ कर इंसपेक्टर धर्मपाल ने लाश का बारीकी से निरीक्षण किया. महिला के माथे पर गहरा सुराख नजर आ रहा था, जिस के आसपास खून जम कर काला पड़ गया था. लाश सड़ जाने के कारण चेहरा काफी बिगड़ गया था और उस की पहचान कर पाना मुश्किल था.

लाश के पास ही एक रिवौल्वर रखा हुआ था. स्पष्ट था इसी रिवौल्वर से महिला के सिर में गोली मारी गई थी, जिस से इस की मौत हो गई है. उन के इशारे पर एक पुलिसकर्मी ने रिवौल्वर पर रुमाल डाला और उसे अपने कब्जे में ले लिया.

लाश 2-3 दिन पुरानी लग रही थी. उस में से असहनीय बदबू उठ रही थी. घटनास्थल की बारीकी से जांच कर लेने के बाद इंसपेक्टर धर्मपाल कमरे से बाहर आ गए.

‘‘यह लाश किस की है?’’ उन्होंने बैठक में खड़े दक्ष से सवाल किया.

‘‘यह मेरी मौम की लाश है.’’ दक्ष ने सपाट स्वर में कहा, ‘‘इन्हें मैं ने गोली मारी है.’’

इंसपेक्टर धर्मपाल ने हैरानी से दक्ष की तरफ देखा. उन्हें विश्वास नहीं हुआ, 16 साल का यह लडक़ा बड़ी सरलता से अपनी मां को गोली मार देने की बात स्वीकार कर रहा है, क्या यह सच बोल रहा है?

‘‘तुम ने अपनी मां को गोली मारी है?’’ इंसपेक्टर हैरानी से बोले, ‘‘क्या तुम ठीक कह रहे हो?’’

‘‘मैं झूठ नहीं बोल रहा हूं सर. मैं ने ही अपनी मौम को गोली मारी है.’’ दक्ष बेहिचक बोला.

‘‘तुम ने अपनी मां को गोली क्यों मारी और यह रिवौल्वर तुम कहां से लाए हो?’’ इंसपेक्टर धर्मपाल ने रुमाल में बंधा रिवौल्वर दिखा कर पूछा.

‘‘रिवाल्वर मेरे डैड का है सर. इस का लाइसेंस है डैड के पास. यह रिवौल्वर उन्होंने सुरक्षा के लिए घर में ही रखा हुआ था. मौम मुझे पबजी गेम खेलने से मना करती थी. बातबात पर मुझे पीटती रहती थी. मैं कब तक सहन करता सर… इसलिए शनिवार और रविवार की रात को मौम को गोली मार दी थी.’’

‘‘यानी 3 जून और 4 जून, 2023 की रात को तुम ने अपनी मां की गोली मार कर हत्या कर दी. हत्या किए हुए कई दिन हो गए, क्या तुम इतने समय तक इसी घर में मां की लाश के साथ रहे?’’

‘‘और कहां जाते सर. मैं और मेरी बहन प्रियांशी हत्या के बाद से घर में ही हैं.’’

इंसपेक्टर धर्मपाल को दक्ष की बेबाकी और हिम्मत दिखाने पर हैरानी हो रही थी. मां की हत्या कर के यह लडक़ा अपनी बहन के साथ सड़ती जा रही लाश के साथ बड़ी बेफिक्री से अपने घर में ही जमा रहा है, यह हैरानी की ही बात है. यदि पड़ोसी इस असहनीय बदबू की सूचना पुलिस को नहीं देते तो न जाने कब तक दोनों भाई बहन लाश के साथ घर में ही रहते.

इंसपेक्टर धर्मपाल घर से बाहर आ गए. बाहर आसपास के लोग एकत्र हो कर नवीन कुमार सिंह के घर में आई पुलिस के बाहर आने का बेचैनी से इंतजार कर रहे थे. वे लोग यह जानने को उत्सुक थे कि नवीन कुमार सिंह के घर में ऐसी कौन सी चीज सड़ रही है, जिस की बदबू ने सभी को परेशान करके रख छोड़ा है.

‘‘क्या इस बदबू का राज मालूम हुआ सर?’’ शर्माजी ने आगे बढ़ कर इंसपेक्टर धर्मपाल से पूछा.

‘‘हां, दक्ष ने अपनी मां की गोली मार कर 3 दिन पहले हत्या कर दी है. लाश सड़ गई है, यही यहां फैल रही बदबू का कारण है.’’ इंसपेक्टर धर्मपाल ने बताया.

उन की बात सुन कर सभी हैरान रह गए.

‘‘दक्ष की मां का नाम बताएंगे आप?’’ इंसपेक्टर धर्मपाल ने शर्माजी से पूछा.

‘‘साधना सिंह था दक्ष की मां का नाम.’’ शर्माजी बोले.

‘‘आप इन के पति का फोन नंबर जानते हैं तो मेरी बात करवाइए शर्माजी.’’

‘‘ठीक है सर.’’ कहने के बाद शर्माजी ने नवीन कुमार सिंह का मोबाइल नंबर अपने मोबाइल से निकाल कर मिलाया. घंटी बजते ही दूसरी तरफ से नवीन कुमार सिंह ने काल रिसीव कर ली, ‘‘हैलो शर्माजी… मेरी पत्नी साधना आप को नजर आ गई हो तो.. मेरी बात करवाइए प्लीज.’’ नवीन कुमार सिंह के स्वर में बहुत उतावलापन था.

‘‘वह अब इस दुनिया में नहीं रही नवीनजी. मैं ने पुलिस को इनफौर्म कर दिया है. लीजिए इंसपेक्टर साहब से बात कीजिए.’’ शर्माजी ने मोबाइल इंसपेक्टर धर्मपाल की तरफ बढ़ा दिया.

‘‘मिस्टर नवीन कुमार सिंह, मैं इंसपेक्टर धर्मपाल बोल रहा हूं. आप के लिए बड़ी बुरी खबर है, आप के बेटे दक्ष ने आप की पत्नी साधना सिंह की गोली मार कर हत्या कर दी है.’’

‘‘मेरे बेटे दक्ष ने…ओह!’’ दूसरी तरफ से नवीन कुमार सिंह का घबराया हुआ स्वर उभरा, ‘‘मुझे ऐसा ही लग रहा था सर..यह दक्ष किसी दिन ऐसा कदम उठा सकता है… मेरा तो सब कुछ उजड़ गया.’’

‘‘आप यहां आ जाइए नवीनजी…’’ इंसपेक्टर धर्मपाल गंभीर हो गए, ‘‘मुझे आप के बेटे को पुलिस कस्टडी में लेना पड़ेगा. वह अपना गुनाह कुबूल कर रहा है.’’

‘‘जैसा आप उचित समझें इंसपेक्टर, मैं लखनऊ आ रहा हूं.’’ नवीन सिंह ने आहत स्वर में कहा और संपर्क काट दिया.

इंसपेक्टर धर्मपाल अपने उच्चाधिकारी को इस घटना की जानकारी देने के लिए अपने मोबाइल से नंबर मिलाने लगे थे. साधना सिंह की लाश को फोरैंसिक जांच करने के बाद पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया था.

पबजी गेम की आड़ में की मां की हत्या – भाग 1

साधना सिंह बहुत बदहवास नजर आ रही थी. 3 बार उस ने अपने बैडरूम में रखी अलमारी का लौकर और ड्राअर का सामान उलटपलट कर के अच्छे से चैक कर डाला था. रात को ही उस ने 10 हजार रुपए अलमारी में रखे थे, वे गायब थे.

‘कहां गए 10 हजार रुपए?’ वह बड़बड़ाई, ‘सारा दिन तो वह घर में ही थी, कोई आयागया भी नहीं. फिर रुपए कहां चले गए? कहीं दक्ष ने वे रुपए चुरा कर पबजी गेम में तो नहीं उड़ा दिए?’

‘यकीनन रुपए दक्ष ने ही चुराए हैं.’ साधना सिंह के मन में दृढ़ विचार कौंधा.

गुस्से में तनी साधना सिंह बेटे दक्ष को ढूंढती हुई उस के स्टडी रूम आई तो वहां दक्ष कुरसी पर बैठा दिखाई दे गया. उस के सामने की टेबल पर एक किताब उलटी पड़ी थी. दक्ष के हाथ में मोबाइल फोन था, उस का पूरा ध्यान मोबाइल की स्क्रीन पर था.

साधना सिंह के तनबदन में आग लग गई. गुस्से में तो वह पहले ही थी. उस ने दक्ष के हाथ से मोबाइल छीन कर टेबल पर पटक दिया और दक्ष को बालों से पकड़ कर चीखी, ‘‘ठहर, मैं खिलवाती हूं तुझे पबजी गेम.’’

साधना सिंह बेरहमी से उसे पीटने लगी. दक्ष रोने लगा, रोते हुए ही बोला, ‘‘मैं गेम नहीं खेल रहा था मौम, मैं औनलाइन पढ़ाई कर रहा था.’’

‘‘झूठ बोलता है नालायक,’’ साधना सिंह उस के गाल पर जोर से थप्पड़ मारते हुए चीखी, ‘‘मेरी अलमारी से 10 हजार रुपए गायब हैं. बता वे रुपए तूने क्या किए हैं?’’

‘‘मैं ने आप के रुपए नहीं लिए हैं मौम, डैड की कसम ले लो…’’

‘‘डैड के बच्चे… तू मोबाइल में गेम्स खेल खेल कर चोर और निकम्मा बन गया है. रुपए चोरी कर के गेम्स में उड़ाने लगा है.’’ साधना सिंह गुस्से से उस के बाल पकड़ कर हिलाने लगी.

‘‘नहीं मौम, मैं चोरी नहीं करता… मैं अब गेम भी नहीं खेलता हूं,’’ दर्द से तड़पते हुए दक्ष बोला, ‘‘आप प्लीज, मेरे बाल छोड़ दो. मुझे मत मारो.’’

‘‘मेरे 10 हजार रुपए चोरी गए हैं, जब तक तू उन रुपयों के बारे में नहीं बताएगा, मैं तुझे पीटना बंद नहीं करूंगी.’’

दक्ष को साधना सिंह पीटती रही. दक्ष रोता गिड़गिड़ाता मार खाता रहा, लेकिन साधना सिंह के हाथ नहीं रुके. दक्ष मार से जब बेहाल हो गया तो वह उसे घसीटती हुई स्टोर रूम में ले आई और उस में बंद करती हुई गुस्से से चीखी, ‘‘तू अब इसी में बंद रहेगा, तुझे खाना भी नहीं मिलेगा. यदि तूने 10 हजार रुपए के बारे में नहीं बताया तो मैं कल तुझ पर मिट्टी का तेल डाल कर आग लगा दूंगी.’’

मार से दक्ष बेहोश सा हो गया था. होश खोने के बाद भी उस के होंठों से मद्धिम स्वर निकल रहे थे, ‘‘मैं ने रुपए नहीं चुराए हैं मौम. मैं.. निर्दोष हूं.’’

उत्तर प्रदेश के महानगर लखनऊ की यमुनापुरम कालोनी में 7 जून, 2023 की सुबह असहनीय बदबू से लोग परेशान हो उठे. यह बदबू नवीन कुमार सिंह के घर से आ रही थी. लग रहा था इस घर में कोई चीज सड़ रही है.

नवीन कुमार सिंह सेना में जूनियर कमीशंड अधिकारी के पद पर तैनात थे, उन की पोस्टिंग बंगाल के आसनसोल में थी. घर में उन की पत्नी साधना सिंह 50 वर्ष, बेटी प्रियांशी 10 वर्ष और बेटा दक्ष 16 वर्ष रहते थे. उन के सामने वाले घर में शर्मा दंपति रहते थे. उन्हें कल ही आसनसोल से नवीन कुमार सिंह का फोन आया. उन्होंने शर्माजी से कहा था कि वह उन के घर जा कर देखें. उन की पत्नी साधना उन का फोन नहीं उठा रही है, वह साधना से उन की बात करवा दें.

शर्माजी ने अपनी पत्नी को नवीन कुमार सिंह के घर भेजा था. वह घर के दरवाजे तक पहुंची थी तो उन्हें वहां तेज स्मैल महसूस हुई. दरवाजे पर ही उन्हें नवीन कुमार का बेटा दक्ष मिल गया था. साधना के विषय में पूछने पर उस ने बताया था कि मौम बिजली का बिल जमा करवाने गई हैं. शर्माजी की पत्नी वापस लौट आई थी. यह बात नवीन सिंह को शर्माजी ने बता दी थी.

आज नवीन कुमार सिंह के घर से आ रही बदबू बढ़ती जा रही थी. इस से शर्माजी का माथा ठनका. वह अपनी पत्नी से बोले,

‘‘मुझे लग रहा है, नवीनजी के घर में कुछ गड़बड़ हुई है. इस असहनीय बदबू से सांस लेना दूभर हो रहा है. मैं पुलिस कंट्रोल रूम में सूचना दे देता हूं. पुलिस आ कर देख लेगी कि माजरा क्या है.’’

‘‘असहनीय बदबू है जी. आप पुलिस कंट्रोल रूम में फोन लगाइए.’’ पत्नी ने भी कह दिया.

शर्माजी ने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर के नवीन कुमार सिंह के घर से आ रही असहनीय बदबू के विषय में बता दिया.

यमुनापुरम क्षेत्र का थाना कोतवाली पीजीआई पड़ता था. आधा घंटा में ही कंट्रोल रूम से सूचना पा कर कोतवाली पीजीआई थाना पुलिस यमुनापुरम आ गई. एसएचओ धर्मपाल नवीन कुमार सिंह के घर के सामने पहुंचे तो घर से आ रही बदबू के कारण उन्हें रुमाल निकाल कर नाक पर रखना पड़ा. साथ में आए पुलिस वालों ने भी ऐसा ही किया.

इंसपेक्टर धर्मपाल ने घर के दरवाजे की कालबेल बजाई. दरवाजा दक्ष ने खोला. पुलिस को देख कर वह एक क्षण को विचलित हुआ, फिर तुरंत संभल गया.

‘‘आप को किस से मिलना है?’’ उस ने सामान्य तौर पर पूछा.

‘‘तुम्हारे पापा हैं घर में?’’

‘‘नहीं सर. वह आसनसोल में ड्यूटी पर हैं. मेरे पापा सेना में हैं.’’

‘‘ओह.’’ इंसपेक्टर ने होंठ सिकोड़े, ‘‘इस घर से बहुत तेज बदबू आ रही है. मुझे अंदर तलाशी लेनी है.’’

दक्ष एक तरफ हट गया. इंसपेक्टर धर्मपाल ने अंदर बैठक में कदम रखा. वहां सोफे पर 10 साल की प्रियांशी बैठी अपने स्कूल का काम कर रही थी. पुलिस को देख कर वह सहम गई और उठ कर अपने भाई दक्ष के पीछे आ कर खड़ी हो गई.