प्रेमिका की याद में घुट रहा था नवीन
नंदिनी भले ही अपने दिल से नवीन की यादें मिटा दी थीं, लेकिन नवीन उसे अभी भी भुला नहीं पाया था. उस के दिल में अब भी नंदिनी के साथ बिताए सुनहरे पल की यादें जवां थी. उस की एकएक सांस पर प्रेमिका का नाम लिखा हुआ था. जब उस की याद आती थी, उस की पलकें भीग जाती थीं. घुटता था वह दिल ही दिल में. आज भी वह इस बात को सोच कर परेशान हो जाता था कि नंदिनी ने किस कुसूर के लिए उसे अपने दिल से निकाल दिया.
तभी तो 2 साल बाद हिम्मत जुटा कर एक दिन नवीन ने नंदिनी को मैसेज किया. सालों बाद आए मैसेज को पढ़ कर वह हैरान रह गई थी. उस ने नवीन के भेजे गए मैसेज का कोई जवाब नहीं दिया, बल्कि उस ने यह बात हरिहर कृष्णा को बता दी.
हरिहर कृष्णा ने जैसे ही सुना कि नवीन ने प्रेमिका को मैसेज किया है, वह सतर्क हो गया और डर भी गया कि सालों से पड़ा परदा नंदिनी के सामने कहीं उठ न जाए. वरना बना बनाया खेल बिगड़ सकता है, उस की सच्चाई जान कर नंदिनी उस से दूर चली जाएगी. वह ऐसा होने नहीं देना चाहता था.
उस ने प्रेमिका को समझाया कि वह उस के किसी भी मैसेज का जवाब नहीं दे. इस के बाद भी अगर वह मैसेज करता है तो कोई और रास्ता निकालना होगा.
उस दिन के बाद से नवीन नंदिनी को मैसेज बराबर भेजने लगा था. उस के बारबार मैसेज आने से वह बुरी तरह परेशान हो गई थी और हरिहर कृष्णा से एकएक बात बताती थी. नवीन के प्यार भरे मैसेज भेजने से वह जलभुन उठता था. उसे इस बात का डर सताने लगा था कि कहीं नंदिनी उस के हाथ से निकल न जाए.
नंदिनी ने नवीन से पीछा छुड़ाने की कोई कारगर युक्ति निकालने की बात कही तो उस ने उसे यकीन दिलाया कि जल्द ही नवीन नाम के कांटे से छुटकारा दिला देगा, इस की वह चिंता न करे.
हरिहर कृष्णा भी यही चाहता था कि नवीन जो उस के प्रेम की राह में कांटा बना हुआ है, उस कांटे को सदा के लिए रास्ते से उखाड़ फेंके. फिर प्रेमिका ने तो फरमान ही जारी कर दिया था तो भला उस के फरमान को वह कैसे पूरा न करता.
शातिर दिमाग वाला हरिहर कृष्णा ने फैसला कर लिया था उसे क्या करना है. उस ने मन ही मन खतरनाक योजना भी बना ली थी. योजना थी नवीन की हत्या. अब इसे यह तय करना था कि नवीन को नेलगोंडा से हैदराबाद कैसे बुलाया जाए. क्योंकि इस ने नवीन की हत्या की पटकथा इसी शहर में लिखी थी यानी उसे यहीं मारने का प्लान बनाया था.
अपनी योजना में उस ने नंदिनी को भी शामिल कर लिया था. उसे इस की हर गतिविधियों की पलपल की जानकारी दी.
दोस्त ने ही नवीन को लगा दिया ठिकाने
सूत्रों के अनुसार, 17 फरवरी 2023 की सुबह हरिहर कृष्णा ने नवीन को फोन किया और धोखे से उसे पुराने दोस्तों के साथ गेट टुगेदर पार्टी के लिए हैदराबाद बुलाया. इस पर नवीन ने अपनी तरफ से हां कह दिया और दोस्त (रूम पार्टनर) प्रदीप से हैदराबाद जाने और हरिहर कृष्णा के साथ पार्टी करने की बात कह कर हैदराबाद के लिए रवाना हो गया.
हरिहर कृष्णा ने जैसे ही सुना कि नवीन आ रहा है, उस ने छोटे आकार के पिट्ठू बैग में एक जोड़ा दस्ताना, नायलौन की रस्सी और फलदार चाकू रख लिया था ताकि मौका मिलते ही उसे रास्ते से हटा देगा.
सुबह 10 बजे के करीब नवीन हैदराबाद बस स्टैंड पहुंचा. वहां बाइक लिए हरिहर कृष्णा पहले से ही उस का बेसब्री से इंतजार कर रहा था. बस से नीचे उतरते हुए दोस्त को देख कर हरिहर कृष्णा बुरी तरह जलभुन उठा, लेकिन चेहर ेपर जहरीली मुसकान थिरक रही थी.
दोस्त नवीन को बाइक पर बैठा कर हरिहर कृष्णा रेस्टोरेंट ले गया. वहां दोनों ने छक कर शराब पी. थोड़ी देर बाद शराब ने जब अपना रंग नवीन पर दिखाना शुरू कर दिया तो दिल में भरा गुब्बार फूट गया. उस ने अपनी प्रेमिका के छीनने का आरोप जब हरिहर कृष्णा पर मढ़ दिया तो हरिहर कृष्णा आगबबूला हो उठा और दोनों आपस में भिड़ गए.
एक पल को हरिहर कृष्णा उसे वहीं खत्म कर देने का मन बना लिया, लेकिन वहां भीड़ काफी थी, उसे अपने पकड़े जाने का भय सताने लगा था, इसलिए उस ने चुप रहने में ही भलाई समझी और बड़ी चालाकी से माहौल को दूसरी ओर घुमा दिया था.
फिर हरिहर कृष्णा नवीन को बाइक पर बैठा कर इधरउधर घुमाता रहा ताकि अंधेरा हो जाए. शाम 6 बजे के करीब बाइक ले कर वह अब्दुल्लापुरमेट थानाक्षेत्र के पेड्डा अंबरपेट की घनी झाडिय़ों के पास पहुंचा, जहां चारों ओर सन्नाटा और दूरदूर तक अंधेरा फैला था.
झाडिय़ों के पास उस ने बाइक रोक दी और दोनों पास स्थित रमादेवी पब्लिक स्कूल की ओर बढ़े, जहां पार्टी चलने की बात हरिहर कृष्ण ने बताई. आगेआगे लडख़ड़ाता हुआ नवीन चल रहा था, जबकि हरिहर कृष्णा उस के पीछेपीछे. यही सही मौका था. उस ने धीरे बैग से नायलौन की रस्सी निकाली और नवीन का गला घोंट कर उसे मौत के घाट उतार दिया. उस के बाद उस ने नफरत से एक लंबी हुंकार भरी.
हरिहर ने दिखा दी नफरत की इंतहा
फिर पिट्ठू बैग से दस्ताना निकाल कर हाथों में पहना और चाकू से उस का गला काट कर सिर धड़ से अलग कर दिया और मोबाइल की टार्च की रोशनी में मोबाइल कैमरे से फोटो खींचा और नंदिनी के वाट्सऐप पर भेज दिया. पुराने प्रेमी का कटा सिर देख कर नंदिनी बहुत खुश हुई.
हरिहर कृष्णा की नफरत की इंतहा यहीं खत्म नहीं हुई थी, उस ने उसी चाकू से नवीन का पेट फाड़ कर दिल बाहर दिया और नफरत व गुस्से से कहा, “ये दिल मेरी नंदिनी के लिए धडक़ता था न?” चाकू से दिल के कई टुकड़े कर डाले.
फिर उस ने कहा, “इन्हीं अंगुलियों से तू मेरी नंदिनी को मैसेज भेजता था न?” फिर उस ने दोनों हाथों की दसों अंगुलियों को काट कर अलग कर दिया.
फिर उस ने कहा, “तू मेरी नंदिनी के साथ शादी कर बच्चे पैदा करना चाहता था न?” उस के बाद उस ने उस के प्राइवेट पार्ट को भी काट कर अलग कर दिया और सबूत के तौर फोटो मोबाइल में उतार कर प्रेमिका के वाट्सऐप पर भेज दिया.
फिर उस की लाश को जला दिया ताकि कोई सबूत न मिले और रूमाल से अपने हाथों आदि पर खून पोंछ कर, चाकू, ग्लव्स वहीं फेंक दिया. उस के बाद वह अपने दोस्त हसन के कमरे पर पहुंचा. तब तक काफी रात हो चुकी थी, उस ने उसे सारी बात बता दी थी.
हरिहर कृष्णा की बात सुन कर वह सन्न रह गया था. फिर वह उस के वाशरूम में नहाया और उस के कपड़े पहने. उसी रात वह शहर छोड़ कर भाग जाना चाहता था तो उस ने नंदिनी से पैसे मांगे तो उस ने अपने मोबाइल से 1500 रुपए उस के अकांउट में ट्रांसफर किए और वह दूसरे शहर को फरार हो गया.
नवीन ने एक चालाकी की थी. हौस्टल से हैदराबाद के लिए निकलते समय उस ने बता दिया था कि अपने दोस्त हरिहर कृष्णा के पास पार्टी में जा रहा है. शाम तक वापस लौट आएगा. जब वह रात तक हौस्टल नहीं लौटा तो रूम पार्टनर प्रदीप ने पूरी बात उस के पिता शंकराय को बता दी थी. इसी वजह से पुलिस को यह केस खोलने में आसानी हुई.
पुलिस ने हरिहर कृष्णा से पूछताछ करने के बाद उस की प्रेमिका नंदिनी और दोस्त हसन को भी गिरफ्तार कर लिया. तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया.
कथा लिखने पुलिस कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी थी.
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में नंदिनी परिवर्तित नाम है.
नंदिनी ने बना ली नवीन से दूरी
हरिहर कृष्णा ने अपना दांव चल दिया था. कान की कच्ची नंदिनी उस की बातों में आ गई थी. वैसे भी नारी यह कब बरदाश्त कर सकती है कि एक म्यान में 2 तलवार रह सके.
हरिहर कृष्णा ने जब से नवीन के खिलाफ उस के कान भरे थे, तब से नंदिनी ने उस से दूरी बना ली. वह न तो उस से बात करती थी और न ही उस की काल रिसीव कर रही थी. अचानक प्रेमिका में आए बदलाव को देख कर नवीन परेशान हो गया था. वह उस से यह जानने की कोशिश करता था कि आखिर उस से ऐसी कौन सी गलती हुई है कि उस ने उस से बातचीत करनी बंद कर दी.
यहां तक कि काल रिसीव करना भी छोड़ दिया था वरना एक घंटी बनते ही झट से उस की काल रिसीव कर लेती थी. नवीन को क्या पता था कि उस की प्रेमिका को अपनी प्रेमिका बनाने के लिए उसी के अजीज यार ने गद्दारी की थी. उसी ने भोलीभाली नंदिनी को उस के खिलाफ भडक़ाया था. बिना सोचेसमझे नंदिनी भी शक के दरिया में रफ्तार से बढ़ गई थी.
इस घटना के महीने भर बाद शाम की छुट्ïटी के बाद एक दिन रास्ते में नवीन ने नंदिनी को रोक लिया, “एक मिनट के लिए नंदिनी, प्लीज मेरी बात सुन लो.” नवीन उस के सामने गिड़गिड़ाया.
“मैं तुम्हारी कोई बात नहीं सुनने वाली. और फिर तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई जो तुम ने मेरा रास्ता रोका?” गुस्से से नंदिनी तमतमा उठी थी.
“प्लीज नंदिनी, गुस्सा मत होओ,” एक बार फिर उस के सामने नवीन गिड़गिड़ाया, “सिर्फ इतना बता दो कि आखिर मुझ से ऐसी क्या गलती हुई है, जो तुम ने मुंह मोड़ लिया. प्लीज नंदिनी, प्लीज एक बार बता दो.”
“मैं ने कहा न, मुझे तुम से कोई बात नहीं करनी है तो नहीं करनी है. प्लीज मेरा रास्ता छोड़ दो. प्लीज.. प्लीज.. प्लीज… मुझे घर पहुंचना है, मम्मी मेरी राह देख रही होगी.”
इस के बाद नवीन ने प्रेमिका के सामने दोनों हाथ जोड़ कर अपने प्यार की दुहाई दी कि उसे उस की गलती तो एक बार बता दो ताकि जीवन में दोबारा वैसी कोई गलती न हो. वह उस के बिना नहीं जी सकता, उस की जुदाई का गम बरदाश्त नहीं कर सकता. लेकिन नंदिनी ने उस से कुछ नहीं कहा तो नहीं कहा. हार कर नवीन ने उसे छोड़ दिया और वहीं खड़ाखड़ा एकटक उसे तब तक देखता रहा, जब तक वह उस की आंखों से ओझल नहीं हुई.
हारे हुए जुआरी की तरह नवीन घर पहुंचा. दिल उस का नंदिनी के लिए सिसकियां भर रहा था, गंगा यमुना की धारा उस की आंखों से छलक रहा था. नंदिनी के वियोग में वह विरह की अग्नि में जल रहा था. आंखों के सामने बारबार नंदिनी का मुसकराता हुआ चेहरा थिरक उठता था.
बस, वह इसी उलझन में जकड़ा रहा कि आखिर उस से कौन सी गलती हुई थी, जो उस ने उसे इतनी बड़ी सजा दी. बहरहाल, क्या हुआ जो उस ने सच नहीं बताया, लेकिन वह भी चुप बैठने वालों में नहीं था. इस बात की सच्चाई पता लगा कर ही रहेगा. इस के बाद दोनों के बीच ब्रेकअप हो गया.
नवीन को छोड़ दोस्त की हो गई नंदिनी
आखिरकार, नवीन ने सच का पता लगा ही लिया था. गद्दार दोस्त हरिहर कृष्णा की सच्चाई जब खुल कर उस के सामने आई तो नवीन आगबबूला हो गया. दुख तो इस बात का था कि उस की प्रेमिका नंदिनी न तो उस की कोई बात सुनने के लिए तैयार थी और न ही उस से मिलना ही चाहती थी.
नवीन सही समय आने के इंतजार में बैठ गया कि एक न एक दिन वह समय आएगा, जब वह हरिहर कृष्णा की कलई उस के सामने खोल कर रख देगा.
शातिर हरिहर कृष्णा अपनी चाल की कामयाबी पर बेहद खुशी महसूस कर रहा था, उस ने अपनी दोगली चाल और दांवपेंच से 2 प्रेमियों को अलग कर दिया था. वह मन ही मन खुश था कि अब नंदिनी को अपना बनाने से कोई रोक नहीं सकता.
नंदिनी के दिल में हरिहर कृष्णा ने नवीन के खिलाफ इतना जहर भर दिया था कि वह उस के नाम से गुस्से की आग में जल उठती थी, ऐसा लगता था नवीन अगर उस के सामने आ जाए तो उस का खून पी जाएगी. हरिहर कृष्णा यही चाहता भी था कि नंदिनी के दिल और दिमाग से उस का पहला प्यार पूरी तरह खाली हो जाए ताकि उस के दिल के कैनवास पर अपने प्यार का मनचाहा रंग भर सके.
भले ही नंदिनी ने अपने दिल और दिमाग से नवीन को निकाल फेंका था, लेकिन जब वह अकेली होती थी तो उस की यादों के बादल और उस के साथ बिताए पल आंखों के सामने उमड़ पड़ते थे. वह उदास हो जाती थी, हरिहर इसी पल का इंतजार करता था ताकि उसे संभालने के बहाने उस के दिल के करीब पहुंच सके और अपने प्यार का मरहम लगा सके.
चतुर खिलाड़ी हरिहर कृष्णा धीरेधीरे नंदिनी के दिल के करीब पहुंचने में कामयाब हो गया. दिल के हरे जख्म को भरने के लिए उस ने सहानुभूति का जो मरहम लगाया था, नंदिनी उस की मुरीद हो गई थी. नंदिनी के दिल पर उस के प्यार का रंग चढऩे लगा था. वह उस के प्यार के रंग में रंगने लगी थी.
नंदिनी और हरिहर कृष्णा दोनों एकदूसरे से टूट कर प्यार करने लगे थे. उस ने नंदिनी के दिल पर अपने प्यार की ऐसी हुकूमत बैठा दी कि उस का दिल हरिहर कृष्णा के अलावा किसी और के बारे में धडक़ने की गुस्ताखी नहीं करता था.
धीरेधीरे 2 साल का समय बीत चुका था नंदिनी को हरिहर कृष्णा का हुए और पहले प्रेमी नवीन से दूरियां बनाए हुए. दोनों ही अपने प्यार की दुनिया में बहुत खुश थे. हरिहर कृष्णा ने जो चाहा था सो पा चुका था.
इधर नवीन ने नंदिनी से ब्रेकअप करने के बाद अपना सारा ध्यान पढ़ाई पर लगा दिया. इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद उस ने नेलगोंडा जिले के महात्मा गांधी इंजीनियरिंग कालेज में दाखिला ले लिया था, जबकि हरिहर कृष्णा जडीगुड़ा के इंजीनियरिंग कालेज से बी.टेक कर रहा था और नंदिनी हैदराबाद में ही रह कर बीएससी की पढ़ाई कर रही थी.
22 वर्षीय हरिहर कृष्णा मूलरूप से वेरांगल जिले का रहने वाला था. 3 भाईबहनों में वह सब से बड़ा था. उस के पिता एक बिजनैसमैन थे. बेटे की पढ़ाई पर वह खूब पैसे खर्च कर रहे थे. उन का सपना था कि बेटा पढ़लिख कर इंजीनियर बने तो उन का जीवन सार्थक हो जाए. भले ही उस की पढ़ाई पर ज्यादा खर्च आए, इस की कोई चिंता नहीं. उन का सोचना था कि जब हरिहर का जीवन संवर जाएगा तो बाकी दोनों बच्चों का भी भविष्य बन जाएगा.
नवीन और हरिहर कृष्णा एक ही कालेज और एक ही कक्षा में पढ़ते थे. इन दोनों के साथ ही हैदराबाद के हस्तिनापुरम की रहने वाली नंदिनी भी पढ़ती थी.
नंदिनी इकहरी बदन की दुबलीपतली और छरहरी लडक़ी थी. उस में कोई खास आकर्षण भी नहीं था, लेकिन न जाने क्यों नवीन उस की ओर चुंबक की तरह खिंचता चला जा रहा था. शायद नवीन को उस से प्यार हो गया था. तभी तो उस ने अपने दिल का दरवाजा नंदिनी के लिए खोल दिया था.
उस के दीदार के लिए हर घड़ी पलकें बिछाए रहता था. ऐसा नहीं था यह एकतरफा प्यार हो, नंदिनी भी नवीन को बेहद चाहती थी. अपने कोरे दिल पर अपने सपनों के राजकुमार के रूप में नवीन का नाम लिख दिया था. यह बात घटना से करीब 3 साल पहले 2020 की थी.
नंदिनी नवीन का पहला प्यार थी और नवीन भी उस का पहला प्यार. इन दोनों का प्यार ठीक उसी तरह था जैसे बाती बिन दीया नहीं, चांदनी बिन चांद नहीं और तपिश बिन सूरज नहीं. बेपनाह प्यार था दोनों के दिलों में एकदूसरे के लिए.
नंदिनी और नवीन ने एकदूजे को ले कर अपने भविष्य की कुछ सपने देखे थे. साथसाथ रहने की, साथसाथ जीवन के सुनहरे पल बिताने की. पते की बात तो ये थी कि नवीन अपने प्यार की पलपल की स्टोरी अपने अजीज दोस्त हरिहर कृष्णा को बताए बिना नहीं रहता था. इस से एकएक बात शेयर करता था.
हरिहर ने डाला दोस्त के प्यार पर डाका
हरिहर कृष्णा चटखारे ले कर मजे से दोनों की प्रेम कहानी सुनता था. दोनों की प्रेम कहानी सुनतेसुनते भी उस के दिल में दोस्त की प्रेमिका के लिए खास जगह बनने लगी थी. धीरेधीरे वह उस के प्रति आकर्षित होता चला गया था. जबकि हरिहर कृष्णा जानता था कि नंदिनी से उस का दोस्त प्यार करता था. किसी के प्यार को छीनना गलत है, लेकिन उस ने इस बात की परवाह किए बिना ही प्रेम और जंग में सब कुछ जायज है वाली नीति अपनाते हुए उसी ओर अपना कदम बढ़ा दिया था.
सीधासादा नवीन दोस्त हरिहर कृष्णा के मन में क्या चल रहा है, जान ही नहीं सका. वह समझ ही नहीं सका कि वह उस के प्यार पर डाका डालने के लिए कुंडली मार कर बैठा है. उसे अगर तनिक भी अंदेशा होता तो शायद अपने प्यार को दोस्त से कभी भी न तो शेयर करता और न ही उसे कुछ बताता. लेकिन हरिहर कृष्णा के मन में तो कुछ और ही चल रहा था.
नंदिनी को पाने के लिए हरिहर कृष्णा के मन में हसरतें जिंदा हो चुकी थीं. उसे किसी भी तरह हासिल करने की उस ने सौगंध ले ली थी. लेकिन उसे हासिल करे तो करे कैसे, इस जुगत में दिनरात परेशान रहा करता था. आखिरकार दोनों को अलग करने की उस ने तरकीब निकाल ही ली.
शातिर दिमाग वाले हरिहर कृष्णा ने दोनों को अलग करने के लिए उन में इस तरीके से फूट डाल दी थी कि बरसों का प्यार पल भर में रेत के मकान की तरह ढह गया था. एक दिन मौका देख कर हरिहर कृष्णा ने नंदिनी को भडक़ाया, “जानती हो नंदिनी, तुम जितनी भोली हो, नवीन उतना ही कमीना है.”
“तुम्हें शर्म नहीं आती अपने अजीज दोस्त के खिलाफ ऐसी बातें करते हुए.” प्रेमी की बुराई सुन कर नंदिनी गुस्सा हो गई थी.
“तभी तो कहता हूं नंदिनी तुम बहुत भोली हो. दोस्त के दोहरे चेहरे को तुम देख नहीं सकती.” हरिहर कृष्णा ने भडक़ाया.
“क्या मतलब है तुम्हारा, मैं अंधी हूं मुझे कुछ दिखता नहीं है?”
“नाराज क्यों होती हो यार, तुम्हें अपना समझ कर दोस्त की सच्चाई बता रहा हूं. तुम हो कि मेरी बात सुनने के बजाय मुझ पर ही नाराज हो रही हो. पता नहीं क्यों मुझ से तुम्हारे साथ हो रहा धोखा देखा नहीं जा रहा है.” इस बार हरिहर कृष्णा ने तीर निशाने पर लगाया था.
“कौन धोखा दे रहा है मुझे?” नंदिनी ने सवाल किया.
“तुम्हारा प्यार, नवीन. वही तुम्हें धोखा दे रहा है.”
“इसे मैं कतई मानने के लिए तैयार नहीं हूं कि नवीन मुझे कभी धोखा दे सकता है. वो मुझ से बहुत प्यार करता है, अंधा प्यार.”
“इसी बात का तो रोना है. उस ने तुम से अंधे प्यार वाली बात कर दी और तुम भी उसी तरह अंधी हो गई. पर इस में कोई सच्चाई नहीं है कि वो तुम से अंधा प्यार करता है.”
“तो फिर?”
“कई लड़कियों से उस के नाजायज संबंध हैं.”
“क्या?” नंदिनी उस की बात सुन कर बुरी तरह उछली.
“क्या कहते हो तुम? नवीन और कई लड़कियां? मैं और मेरा दिल इसे कभी मानने के लिए तैयार नहीं होगा कि मुझे छोड़ कर वह किसी और लडक़ी से प्यार करता है. नो…नेवर.”
“इसी बात का तो रोना है, तुम मेरी किसी बात को सीरियसली लेती नहीं हो. यह सब तुम्हें बता कर मुझे क्या बेनिफिट होने वाला, जरा सोचो.” इतना कह कर हरिहर कृष्णा ने नंदिनी के चेहरे पर अपनी शातिर नजरें गड़ा दी थीं और उस के हावभाव को पढऩे की कोशिश करने लगा था, जिस से उसे पता चल सके कि अब वह क्या सोच रही है.
कुछ पल के लिए वह गंभीर हुई, फिर कुछ सोच कर उस ने कहा, “पता नहीं क्यों मेरा दिल इसे मानने को तैयार नहीं हो रहा है कि नवीन के और लड़कियों से संबंध होंगे? लेकिन तुम कहते हो तो…”
“मेरा काम तुम्हें एलर्ट करना था, सो मैं ने कर दिया नंदिनी. बाकी मानना, न मानना तुम्हारा काम. अच्छा चलता हूं. एक सच्चा दोस्त होने का फर्ज निभाया है मैं ने. बाकी सब ऊपर वाले के हाथ में…” कहते हुए वह आगे बढ़ गया.
हरिहर कृष्णा की नफरत की इंतहा यहीं खत्म नहीं हुई थी, उस ने उसी चाकू से नवीन का पेट फाड़ कर दिल बाहर निकाल दिया और नफरत व गुस्से से कहा, “ये दिल मेरी नंदिनी के लिए धडक़ता था न?” चाकू से दिल के कई टुकड़े कर डाले.
फिर उस ने कहा, “इन्हीं अंगुलियों से तू मेरी नंदिनी को मैसेज भेजता था न?” फिर उस ने दोनों हाथों की दसों अंगुलियों को काट कर अलग कर दिया.
फिर उस ने कहा, “तू मेरी नंदिनी के साथ शादी कर बच्चे पैदा करना चाहता था न?” उस के बाद उस ने उस के प्राइवेट पार्ट को भी काट कर अलग कर दिया और सबूत के तौर पर फोटो मोबाइल में उतार कर प्रेमिका के वाट्सऐप पर भेज दिया.
उस समय सुबह के 7 बज रहे थे, जब नवीन हौस्टल में अपने दोस्त प्रदीप के साथ बैठा गप्पें लड़ा रहा था. तभी उस के मोबाइल की घंटी घनघना उठी. मोबाइल फोन उठाते हुए स्क्रीन पर डिसप्ले हो रहे नंबर को ध्यान से देखा. वह नंबर उस के पुराने दोस्त हरिहर कृष्णा का था. झट से काल रिसीव करते हुए नवीन ने कहा, “हैलो कृष्णा, कैसे हाल हैं?”
“बेटर हूं, मस्त हूं मेरे दोस्त,” गर्मजोशी के साथ हरिहर कृष्ण ने उत्तर दिया, “और बता तू कैसा है? अच्छा यह बता, आज शाम क्या कर रहा है?”
“एकदम फर्स्ट क्लास. रही बात शाम की तो शाम में फ्री हूं.” नवीन बोला.
“तो आ जाओ, चल मस्ती वस्ती करते हैं. मेरी तरफ से पार्टी. पार्टी में मैं रहूंगा, तू रहेगा. बड़े मजे होंगे. आ रहा है न मेरे यार.”
“हूंऽऽ अभी फिलहाल पार्टी सार्टी में जाने का मेरा मूड नहीं है, लेकिन जहां बात यार की हो तो मैं… तैयार हूं. बता, कहां मिलना है?”
“ऐसा कर तू पेड्डा अंबरपेट आ जा. तुझे मैं वहीं से रिसीव कर लूंगा और फिर मैं तुझे बाइक से ले कर पिकनिक प्लेस चल दूंगा, जहां पार्टी करनी है.”
“ठीक है भाई, आ रहा हूं मैं. तू बाइक ले कर वहां पहुंच. ..और हां, वापस लौटते समय मेरे को हौस्टल छोडऩा होगा.”
“बस इतनी सी बात?” हरिहर कृष्णा ने आगे कहा, “तेरे लिए तो मेरी जान हाजिर है. गर जान मांगी होती तो वो भी देने के लिए तैयार था. रही बात हौस्टल पहुंचाने की तो निश्चिन्त रह, वापस लौटते हुए तुझे हौस्टल छोड़ते हुए ही घर जाऊंगा.”
“तो फिर ठीक है, कपड़े चेंज कर मैं निकल रहा हूं, तू भी निकल.”
“ओके भाई, मैं भी बाइक ले कर निकल रहा हूं.”
“ओके,” नवीन ने फोन डिसकनेक्ट कर दिया था. फिर उस ने अपने रूममेट प्रदीप को बता दिया कि दोस्त कृष्णा का फोन आया था. उस ने मुझे पार्टी पर बुलाया है, मैं वहीं जा रहा हूं, मेरा खाना उसी के साथ है. कमरे पर लौटने में देर हो सकती है. ऐसा करना, तुम खाना बना कर खा लेना, मेरा बिलकुल भी इंतजार मत करना. देर रात तक कमरे पर लौट आऊंगा.उस के बाद नवीन हौस्टल से दोस्त हरिहर कृष्ण से मिलने नेलगोंडा से हैदराबाद रवाना हो गया.
रात के करीब 11 बज चुके थे. नवीन अब तक न तो हौस्टल लौटा था और न ही उस का फोन ही काम कर रहा था. काल करने पर वह स्विच औफ आ रहा था. यह देख कर प्रदीप घबरा गया था.
दरअसल, नवीन बीटेक का छात्र था और उस ने नेलगोंडा जिले के महात्मा गांधी इंजीनियरिंग कालेज में दाखिला लिया था और उसी कालेज के छात्रावास में क्लासमेट प्रदीप के साथ रहता था. नवीन मूलरूप से नगरकुरनूल जिले के सीरिसन गैंड का रहने वाला था. वह एक बिजनेसमैन का बेटा था.
नेलगोंडा थाने में करा दी रिपोर्ट
बहरहाल, नवीन जब घर नहीं लौटा और उस का सेलफोन भी बंद मिला तो वह बुरी तरह परेशान हो गया था. उस की समझ में यह बात नहीं आ रही थी कि वह क्या करे और कहां जा कर उसे ढूंढे? रात भी पूरे शबाब पर थी. उसे जब कुछ नहीं सूझा तो उस ने उसी रात नवीन के पापा शंकराय को फोन किया और उन से पूरी बात बता दी.
प्रदीप के मुंह से बेटे के बारे में सुन कर शंकराय बुरी तरह चौंक गए और तब उन्हें पता चला कि वह हरिहर कृष्णा से मिलने हैदराबाद गया था.
नवीन और कृष्णा बचपन के दोस्त थे, दोनों के बीच दांत काटी रोटी जैसे यारी भी थी. एक ही कालेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों अलगअलग शहर में जा बसे थे और अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई में जुट गए थे. लेकिन इन दिनों किसी बात को ले कर दोनों के बीच में मनमुटाव चल रहा था.
इसी बात को ले कर नवीन के पापा शंकराय बुरी तरह डर गए थे. उन्होंने भी अपने स्तर से बेटे के बारे में जानकारी जुटाने और बेटे से मिलने की कोशिश की थी, लेकिन वह भी अपने मकसद में नाकामयाब रहे.
अगले दिन यानी 18 फरवरी, 2023 को शंकराय नेलगोंडा जिले के नारकेत पल्ली थाने पहुंचे और उन्होंने बेटे की गुमशुदगी दर्ज करवा दी. एसएचओ आर. श्रीनिवास रेड्डी ने नवीन की गुमशुदगी दर्ज कर उन्हें आवश्यक काररवाई करने का आश्वासन दे कर घर भेज दिया था. घर वापस लौटने से पहले वह बेटे के गुम होने में उस के बचपन के दोस्त हरिहर कृष्णा की ओर इशारा कर गए थे.
गुमशुदगी दर्ज करने के बाद एसएचओ रेड्डी ने गुमशुदा नवीन के दोस्त हरिहर कृष्णा को टारगेट पर लेते हुए आगे की जांच बढ़ाई. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि नवीन की गुमशुदगी के बाद से हरिहर कृष्णा भी लापता है. इस के बाद पुलिस का शक उस पर गहरा गया और पुलिस उस की तलाश में जुट गई. उस के संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ दबिश देने लगी थी, लेकिन वह पुलिस की पकड़ से बहुत दूर था.
इधर पुलिस के साथसाथ नवीन के घर वाले भी उस की तलाश में जुट गए. उधर पुलिस नवीन और उस के दोस्त हरिहर कृष्णा के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स निकलवा कर अध्ययन में जुटी हुई थी. काल डिटेल्स के अध्ययन से पता चल गया था कि आखिरी बार नवीन से हरिहर कृष्णा की 17 फरवरी, 2023 को सुबह 7 बजे बात हुई थी. उस के बाद कोई बातचीत नहीं हुई थी.
पुलिस ने जब हरिहर कृष्णा के मोबाइल नंबर को खंगालना शुरू की तो एक बेहद हैरानपरेशान कर देने वाली जानकारी मिली, जिसे जान कर पुलिस चौंक गई. जानकारी यह थी कि 18 फरवरी को कृष्णा के एकाउंट में किसी ने 1500 रुपए ट्रांसफर किए थे.
पुलिस इस की तह में अंदर तक घुस गई थी. काफी मशक्कत के बाद आखिरकार पुलिस ने पता लगा ही लिया कि वह पैसे हैदराबाद से उस के खाते में ट्रांसफर किए गए थे.
हरिहर कृष्णा ने थाने में किया सरेंडर
कुल मिला कर पुलिस इस नतीजे पर पहुंच चुकी थी कि जो कुछ भी हुआ था, हैदराबाद में ही हुआ है. अपराध केंद्र हैदराबाद ही है. जब तक हरिहर कृष्णा पकड़ा नहीं जाता है, तब तक नवीन के बारे में किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचना संभव नहीं था, इसलिए हरिहर कृष्णा का पकड़ा जाना हर हाल में जरूरी था.
हरिहर कृष्णा के ऊपर पुलिस ने चारों ओर से ऐसा जबरदस्त शिकंजा कस दिया था कि वह किसी भी बिल में छिपा हो, बाहर आने के लिए विवश हो जाएगा. पुलिस का यह फारमूला कामयाब भी हो गया और 24 फरवरी, 2023 की दोपहर हरिहर कृष्णा ने नारकेतपल्ली थाने में खुद ही आत्मसमर्पण कर दिया.
उस ने पुलिस के सामने अपना जुर्म कुबूल कर लिया कि उस ने दोस्त नवीन की 17/18 फरवरी, 2023 की रात को हत्या कर दी थी. नवीन की हत्या करने का उसे तनिक भी मलाल नहीं था. इस के बाद वह पूरी घटना को विस्तार से बताता चला गया. मानवता के दुश्मन हरिहर कृष्णा का बयान सुन कर पुलिस वाले भी हैरान रह गए.
बहरहाल, आरोपी हरिहर कृष्णा के आत्मसमर्पण के बाद उसी के बयान के आधार पर हत्या का राज छिपाने और उसे पनाह देने के आरोप में उस की प्रेमिका नंदिनी और दोस्त हसन भी 10 दिनों बाद यानी 6 मार्च, 2023 को गिरफ्तार कर लिए गए थे. दोनों आरोपियों ने भी अपनेअपने जुर्म कुबूल कर लिए थे.
इस तरह 7 दिनों से रहस्य बने नवीन कांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया था और यह साबित हो चुका था कि अब नवीन इस दुनिया में नहीं है.
कैसे एक जिगरी यार ने अपने बचपन के यार के खून से होली खेली और मोहब्बत के कैनवास पर अपने प्यार की दास्तान लिखी? पुलिस पूछताछ में सनसनीखेज कहानी कुछ इस तरह से सामने आई है.
नवीन और नंदिनी एकदूसरे को करते थे प्यार
22 वर्षीय नवीन मूलरूप से तेलंगाना राज्य के नगरकुरनुल जिले के चेरागोंडा मंडल थानाक्षेत्र के सीरिसनगैंड का रहने वाला था. शंकराय का वह इकलौता बेटा था. पापा शंकराय उस पर बेहद नाज करते थे.हंसमुख स्वभाव का नवीन अपनी बातों से किसी को भी अनायास अपनी ओर खींच लेता था. और हर कोई उस का मुरीद हो जाता था.
उन में से एक नाम था हरिहर कृष्णा का. हरिहर जो उस का दोस्त बन गया था और आगे चल कर दोनों की यह दोस्ती दांत काटी रोटी जैसी पक्की हो गई थी और घरबाहर से ले कर स्कूल कालेज तक सभी उन की दोस्ती का गुणगान किए बिना नहीं रह सकते थे.