फरेबी प्यार में हारी अय्याशी – भाग 3

पुनीत नर्मदा नदी के बुधनी घाट पर पूजापाठ करता था. सुंदर लड़कियां उस की कमजोरी थीं. वह लड़कियों को देख कर जल्दी फिसल जाता था. अंजू से प्यार हो जाने के बाद उस ने अंजू के घर वालों के सामने शादी का प्रस्ताव रखा था, लेकिन जब वे लोग राजी नहीं हुए तो वह अंजू को भगा कर ले गया और कोर्ट में शादी कर ली.

शादी के एक साल बाद ही अंजू ने एक बेटे को जन्म दिया. उस के बाद पुनीत के सिर से प्यार का खुमार उतर गया और वह अंजू के साथ मारपीट करने लगा.

वह अपने बेटे को ही बेचने की धमकी देने लगा.

यह बात राजाराम गोस्वामी के परिवार को चली तो वे पुनीत से और ज्यादा नफरत करने लगे. राजू रघुवंशी को जब अंजू की दयनीय हालत का पता चला तो वह अंजू से हमदर्दी रखने लगा. वह अकसर यही सोचता कि अगर किसी तरह पुनीत को रास्ते से हटा दे तो अंजू को फिर से हासिल कर सकता है. इसी वजह से उस ने प्रदीप के बनाए प्लान में शामिल हो कर पुनीत की हत्या करने की योजना बनाई.

22 साल की नूरजहां राजाराम गोस्वामी के नाबालिग बेटे प्रदीप पर इस कदर फिदा थी कि उस का प्यार पाने के लिए कुछ भी कुरबान करने को तैयार थी. अपने प्रेमी के कहने पर नूरजहां ने पुनीत से नजदीकी बनाई और और उसे अपने प्रेमजाल में फांस लिया.

नूरजहां  फोन पर पुनीत से घंटों बातें किया करती थी और उसे संबंध बनाने के लिए सोहागपुर बुलाती थी, मगर पुनीत के मन में यह डर बना रहता था कि कहीं उस का साला प्रदीप उस के साथ कोई बदसलूकी न कर दे.

पुनीत दिलफेंक आशिक था. वह नूरजहां के आमंत्रण को ज्यादा दिनों तक नहीं टाल सका. जब 26 नवंबर, 2022 को नूरजहां ने बातचीत के दौरान पुनीत से सोहागपुर आने की बात कही तो उस ने आने की स्वीकृति दे दी.

जब नूरजहां और पुनीत मोबाइल पर बात कर रहे थे तब साला प्रदीप कौन्फ्रैंस काल के माध्यम से दोनों की बातें सुन रहा था. योजना के मुताबिक नूरजहां ने पुनीत को सोहागपुर के रेलवे पुल के पास मिलने के लिए बुलाया.

शाम होतेहोते पुनीत रेलवे पुल पर पहुंच गया. लेकिन वहां नूरजहां नहीं पहुंची. रेलवे पुल के नीचे पुनीत की नजर दूर खड़े अपने साले प्रदीप पर पड़ी तो वह वहां से भाग निकला और पुराने बसस्टैंड पर चायपान की एक दुकान पर बैठ गया.

वहां से पुनीत ने नूरजहां को फोन कर के पूछा, ‘‘तुम मिलने क्यों नहीं आईं?’’

‘‘आज घर से निकलने का कोई बहाना नहीं मिला,’’ नूरजहां बोली.

‘‘तो फिर तुम्हारे घर पर ही आ जाऊं?’’ पुनीत बोला.

‘‘नहीं, आज अब्बू घर पर ही हैं.’’ नूरजहां ने मना करते हुए कहा.

इसी बीच राजू रघुवंशी ने पुनीत को फोन कर के पूछा, ‘‘पुनीत, कहां हो भाई? आज मिल कर कहीं पार्टी करते हैं.’’

‘‘मैं तो इसी इंतजार में हूं, तुम सोहागपुर आ जाओ.’’ पुनीत बोला.

राजू और पुनीत की आपस में दोस्ती थी और अकसर वे साथ बैठ कर शराब के जाम छलकाते थे. दोनों की फोन पर बात होती रहती थी, इसलिए राजू ने फोन पर पुनीत से कहा, ‘‘मुझे सोहागपुर पहुंचने में थोड़ा समय लगेगा. जब तक वह अपने दोस्त लकी को उस के पास भेज रहा है. उस के साथ मंडी में बैठ कर दारू पियो, तब तक मैं आ रहा हूं. फिर घर चलते हैं वहीं तुम रुक जाना.’’

पुनीत सोहागपुर नूरजहां से मिलने के लिए आया था, परंतु शराब की तलब के कारण वह राजू की बातों में आ गया. रात होते होते राजू के कहने पर लकी कहार पुनीत को ले कर मंडी परिसर पहुंच गया, जहां दोनों ने जम कर शराब पी.

जब पुनीत शराब के नशे में चूर हो गया, तभी राजू के साथ प्रदीप भी वहां पहुंच गया. तीनों ने मिल कर पुनीत के साथ मारपीट शुरू कर दी. लकी और प्रदीप ने पुनीत के पैर पकड़ लिए, तभी राजू ने बांका मार कर बेरहमी से उस की हत्या कर दी.

हत्या के बाद तीनों पुनीत के शव को घसीट कर मंडी परिसर में बने नाले में फेंक आए और घटनास्थल पर खून के निशानों को मिटाने के लिए पास में पड़ी रेत मिट्टी ला कर डाल दी. लाश की शिनाख्त न हो सके, इस के लिए तीनों ने उस का मोबाइल और  पर्स भी निकाल लिया.

इस खुलासे के बाद पुलिस ने लकी कहार और नूरजहां को हिरासत में ले लिया. हत्या के मुख्य आरोपी राजू की तलाश करने जब पुलिस टीम उस के गांव पहुंची तो पता चला, वह किसी काम से पिपरिया गया है.

जब पुलिस टीम उस की तलाश में पिपरिया पहुंची तो पुलिस को देख कर राजू बीच बाजार में भाग खड़ा हुआ, जहां पुलिस ने फिल्मी अंदाज में राजू को बीच बाजार से घेराबंदी कर दौड़ा कर पकड़ लिया.

पुलिस हिरासत में आते ही राजू ने पुनीत की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. राजू की निशानदेही पर हत्या में प्रयोग हुए हथियार बांका, पर्स, मोबाइल आदि सामग्री, जो राजू के घर नवलगांव में भूसे के अंदर छिपा कर रखी गई थी, उसे बरामद कर लिया.

पुलिस ने प्रैस कौन्फ्रैंस में मामले का खुलासा किया और हत्या के आरोपी राजू रघुवंशी, नूरजहां और लकी कहार को भादंवि की धारा 302, 201,120 एवं आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें होशंगाबाद जेल भेज दिया गया. जबकि नाबालिग प्रदीप को बाल सुधार गृह भेज दिया गया.   द्य

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में प्रदीप परिवर्तित नाम है.

उम्मीदों से दूर निकला लिवइन पार्टनर – भाग 3

मनप्रीत ने यह घोषित कर दिया था कि वह मनोरोगी है. मनप्रीत एक डाक्टर से दवा ला कर उसे जबरन खिलाता था. कल रात को भी उस ने उसे जबरन गोलियां खिलाई थीं, जिस से वह बेहोशी की हालत में आ कर गहरी नींद सो गई थी.

सुनील कुमार ने मकान मालिक से भी मनप्रीत के बारे में काफी जानकारी हासिल कर ली. मकान मालिक ने 8 साल पहले मनप्रीत को अपना कमरा किराए पर देते वक्त एक रेंट एग्रीमेंट बनवाया था, जिस में मनप्रीत के गांव का पता लिखा गया था. मनप्रीत पटियाला के एक गांव का रहने वाला था. सुनील कुमार ने वह पता नोट कर लिया.

सुनील कुमार ने डीसीपी राणा को फोन द्वारा बता दिया कि रेखा के कत्ल में उस का प्रेमी मनप्रीत संदिग्ध आरोपी है. वह लापता है. राणा ने उन्हें मनप्रीत को गिरफ्तार करने के आदेश दिए.

सुनील कुमार ने नीतू से मनप्रीत का एक फोटो हासिल कर के उस का क्लोजअप अपने स्टाफ के मोबाइल में अपलोड कर दिया. फिर उन्हें मनप्रीत की तलाश में दौड़ा दिया. वहां की आवश्यक काररवाई निपटाने के बाद रेखा की लाश का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

उस कमरे को सील करने के बाद वह राकेश के पास आए और उसे नीतू की देखभाल की जिम्मेदारी संभलवा कर डीसीपी घनश्याम बंसल की ओर बढ़ गए जो अभी भी पुलिस स्टाफ के साथ वहां मौजूद थे.

‘‘इजाजत चाहूंगा सर, मुझे अब कातिल की तलाश में निकलना है.’’ सुनील ने शिष्टाचार से कहा.

‘‘ठीक है, आप अपना काम मुस्तैदी से करें और जल्दी कातिल की गिरफ्तारी की खबर दें.’’ डीसीपी घनश्याम बंसल

ने कहा. सुनील उन्हें सैल्यूट करने के बाद वहां से निकल गए.

मनप्रीत की टोह में क्राइम ब्रांच की टीम तो लगी ही हुई थी, कुछ खास मुखबिरों को भी मनप्रीत का सुराग तलाशने के लिए लगा दिया गया था.

दिल्ली के रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों पर खास निगरानी की गई लेकिन मनप्रीत दिल्ली में होता तो मिलता. वह पहली दिसंबर की दोपहर को ही दिल्ली से बाहर निकल गया था. शाम तक मनप्रीत की तलाश में भटकने के बाद क्राइम ब्रांच की टीम और मुखबिर खाली हाथ वापस लौट आए.

इंसपेक्टर सुनील ने अनुमान लगाया कि हो न हो मनप्रीत अपने पटियाला के गांव भाग गया है. इंसपेक्टर सुनील ने मनप्रीत के विषय में मकान मालिक से बहुत सारी जानकारी हासिल कर ली थी.

उन्हें यह पता चला था कि मनप्रीत के पास एक पुरानी कार है, जिसे वह अपने लिए इस्तेमाल करता है. उस कार का रंग भी मकान मालिक से मालूम हो गया था.

इंसपेक्टर सुनील ने क्राइम ब्रांच के 2 एसआई और एक हैडकांस्टेबल को साथ लिया और वह पटियाला की तरफ रात को ही रवाना हो गए.

उन की गाड़ी पंजाब जाने वाले हाईवे पर फर्राटे भरती हुई पहले टोलनाका पर पहुंची तो इंसपेक्टर सुनील ने कार रुकवा ली. वह जानते थे हर टोलनाका पर सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं. उन्होंने एसआई को सीसीटीवी फुटेज चैक करने के लिए कहा.

उन की कोशिश रंग लाई. टोलनाका पर पंजाब की ओर जाने वाले सड़क के ब्रेकर पर लगे सीसीटीवी कैमरे में उन्हें मनप्रीत की कार नजर आ गई. पिक्चर जूम कर के देखने पर कार की ड्राइविंग सीट पर उन्हें मनप्रीत भी बैठा दिखाई दे गया.

सुनील उत्साह से भर कर बोले, ‘‘हम सही दिशा में जा रहे हैं. ड्राइवर गाड़ी को आगे बढ़ाओ, हम कल सुबह ही मनप्रीत की गरदन पर हाथ डाल देंगे.’’

कार फिर से दौड़ने लगी. बगैर विश्राम किए क्राइम ब्रांच की टीम सुबह 7 बजे पटियाला पहुंच गई. वहां से मनप्रीत का गांव ज्यादा दूर नहीं था.

टीम स्थानीय पुलिस के साथ उस के गांव में सीधे मनप्रीत के घर पहुंची. मनप्रीत हक्काबक्का रह गया. उसे शायद उम्मीद नहीं थी कि दिल्ली से पुलिस उसे पकड़ने के लिए पटियाला तक पहुंच जाएगी.

मनप्रीत की कलाई में हथकड़ी डाल कर उसे कस्टडी में ले लिया गया. मनप्रीत समझ चुका था कि उस का खेल खत्म हो गया है, इसलिए बगैर विरोध किए वह सिर झुका कर कार में बैठ गया था. क्राइम ब्रांच की टीम उसे ले कर दिल्ली आ गई.

इंसपेक्टर सुनील ने डीसीपी अमित राणा को इस की जानकारी दी तो वह थोड़ी ही देर में इनवैस्टीगेशन रूम में आ गए. उन की मौजूदगी में सुनील कुमार ने मनप्रीत से रेखा को कत्ल करने की वजह पूछी तो इस जघन्य हत्याकांड की जो कहानी मनप्रीत के मुंह से निकल कर सामने आई, वह उस प्यार और विश्वास को चाकू की धार से लहूलुहान कर देने वाली निकली, जो प्रेमीप्रेमिका एकदूसरे से करते हैं. जीवन भर एकदूसरे का हो जाने के लिए कसमें खाते हैं.

रेखा ने भी मनप्रीत पर आंखें बंद कर के विश्वास किया था. रेखा ने जिस घर में जन्म लिया था, वह संपन्न और सुखी नहीं था. रेखा ने होश संभाला तो उसे अभाव भरी जिंदगी से नफरत हो गई. चूंकि वह लड़की थी, इसलिए विद्रोह भी नहीं कर सकती थी. उसे अपनी तंगहाल जिंदगी से समझौता करना पड़ा.

दिन, महीने, साल गुजरते गए, जब उस की उम्र शादी के लायक हुई तो मांबाप ने जैसेतैसे कर उस के हाथ पीले कर के घर से विदा कर दिया. पति के घर में उस ने सुख की कल्पना की थी. सोचा था, जो मांबाप से नहीं मिला वह पति के घर मिलेगा. लेकिन यहां भी दरिद्रता पांव पसारे बैठी थी.

रेखा मन मसोस कर रह गई. उस के अरमान, उस के सपने चकनाचूर हो गए थे. पति के साथ उस ने गृहस्थ जीवन की गाड़ी आगे बढ़ाई. एक साल बाद ही उस की कोख से बेटी ने जन्म लिया. अब वे 2 से 3 हो गए थे. पति की कमाई से पहले ही गुजर नहीं हो पाती थी, बेटी के आने से और दिक्कत होने लगी.

वह खुद तो भूखा रह सकती थी, लेकिन बेटी का भूख से बिलबिलाना उसे सहन नहीं हुआ. पैसों को ले कर घर में झगड़े होने लगे, जो इतने बढ़ गए कि रेखा पति से तलाक ले कर अलग हो गई.

मांबाप के घर में पहले ही अभाव था, इसलिए उस ने किराए पर घर लिया. घरों में चौकाबरतन कर के वह अपना और बेटी का पेट भरने लगी. बाद में उस ने एक फैक्ट्री में नौकरी कर ली. अब वह पति के घर से अधिक सुखी थी. 2 पैसे हाथ में आए तो उस का रहनसहन भी बदल गया. सुंदर तो वह बचपन से ही थी, दरिद्रता की धूल बदन से झड़ी तो उस की सुंदरता और निखर उठी.

मनप्रीत खातेपीते घर का युवक था. उस ने पटियाला यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन किया था. उस के पिता यूएसए में रहते थे. घर में रुपएपैसों की कोई कमी नहीं थी. लेकिन मनपप्रीत अपने पिता की दौलत पर नहीं जीना चाहता था. बचपन से वह महत्त्वाकांक्षी था. खूब रुपया कमाना चाहता था, इसलिए 1998 में वह दिल्ली चला आया.

बेपनाह इश्क की नफरत : 22 साल की प्रेमिका का कत्ल – भाग 2

लोमहर्षक घटना की सूचना पा कर एसएचओ योगेंद्र बहादुर चौंके बिना नहीं रह सके. उन्होंने आननफानन में टीम तैयार की. थोड़ी देर बाद वह घटनास्थल की तरफ रवाना हो गए. थोड़ी देर बाद वे घटनास्थल पर अपने दलबल के साथ मौजूद थे. एसएचओ योगेंद्र बहादुर सिंह ने कुएं के भीतर झांक कर देखा तो सचमुच कुएं में लाश के टुकड़े थे.

अभी दिल्ली की श्रद्धा हत्याकांड की तपिश कम भी नहीं हुई थी कि आजमगढ़ में श्रद्धा हत्याकांड जैसी घटना ने प्रदेशवासियों को हिला कर रख दिया था.

बहरहाल, एसएचओ योगेंद्र बहादुर सिंह ने घटना की सूचना एसपी अनुराग आर्य को दे दी और अपनी काररवाई में जुट गए थे. जाल के सहारे कुएं के भीतर से लाश के 5 टुकड़ों को बारीबारी से बाहर निकाला गया. लेकिन उस का सिर नहीं मिला.

लाश किसी युवती की थी, जो पानी में फूल चुकी थी. लाश के बाएं हाथ में रक्षासूत्र व काला धागा, दोनों कलाइयों में कंगन और दोनों हाथों की अंगुलियों में मैरून कलर की नेल पौलिश लगी हुई थी.

कुएं के आसपास पुलिस ने मृतका की सिर की तलाश की लेकिन उस का सिर कहीं नहीं मिला. देखने से ऐसा लगता था कि लाश 4-5 दिन पुरानी होगी.

एसएचओ सिंह को अचानक याद आया कि अशहाकपुर निवासी केदार प्रजापति ने अपनी बेटी आराधना के गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई थी. कहीं ये लाश उस की बेटी आराधना की तो नहीं है. अपनी आशंका को दूर करने के लिए उन्होंने 2 कांस्टेबलों को अशहाकपुर केदार और उस के बेटे सुनील को बुलाने के  लिए भेज दिया.

घंटे भर बाद केदार प्रजापति और उस का बेटा सुनील घटनास्थल मौजूद थे. दोनों बापबेटे ने लाश को गौर से देखा. सिरविहीन लाश देख कर कुछ समझ नहीं पा रहे थे कि लाश किस की हो सकती है.

लेकिन जब उन की नजर शव के बाएं हाथ पर गई तो चौंक गए. उन की बेटी आराधना भी ठीक ऐसे ही अपने बाएं हाथ की कलाई में रक्षासूत्र व काला धागा, कंगन पहनी थी और दोनों हाथों की अंगुलियों में मैरून नेल पौलिश लगाई थी. लाश के साथ भी ऐसी समानता जुड़ी हुई थी.

केदार और सुनील ने कुछकुछ आशंका जाहिर की कि लाश उन की बेटी आराधना की हो सकती है. उस ने भी यही सब पहना था, जब वह घर से निकल रही थी.

केदार और सुनील के आंशिक शिनाख्त के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए आजमगढ़ जिला अस्पताल भेज दिया.

लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज कर एसएचओ थाने लौट आए और आराधना की गुमशुदगी की सूचना को भादंसं की धाराओं 302, 201, 120बी में तरमीम करते हुए अज्ञात हत्यारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया.

योगेंद्र बहादुर सिंह लगातार हत्यारों की सुरागरसी में जुटे हुए थे. उन्होंने आराधना का मोबाइल नंबर ले कर काल डिटेल्स निकलवाई थी और घटना से 15 दिन पहले तक की बातचीत भी सुनी थी. उन से पता चला कि मृतका आराधना की कठही के रहने वाले प्रिंस यादव के साथ प्रेम संबंध कायम था. प्रिंस यादव आराधना की बचपन की सहेली मंजू यादव का बड़ा भाई था.

कुछ और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर यह पुख्ता हो गया था कि 5 टुकड़ों में बंटा सिरविहीन शव आराधना प्रजापति का ही था. लेकिन अभी तक उस का कटा सिर बरामद नहीं हुआ था, जिस की तलाश में पुलिस दिनरात यहांवहां भटक रही थी.

खैर, पुलिस प्रिंस यादव की तलाश में सरगरमी से जुट गई थी. उस का फोन सर्विलांस पर लगाया तो वह बंद आ रहा था. इस बात से पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची थी कि आराधना की हत्या में उस का पूरापूरा हाथ हो सकता है. इसी बीच मुखबिर ने पुलिस को एक ऐसी सूचना दी, जिसे सुन कर वह चौंक पड़े. उस ने बताया कि 9 नवंबर के दिन दोपहर में गांव के बाहर पुलिया पर प्रिंस यादव की बाइक पर आराधना को बैठे कहीं जाते देखा गया था. यही नहीं, उस के साथ उस के मामा का बेटा सर्वेश यादव दूसरी बाइक पर था. वह भी प्रिंस के साथसाथ जा रहा था.

इस के बाद प्रिंस यादव और सर्वेश की खोज में पुलिस ने तेजी कर दी थी. मगर दोनों का कहीं पता नहीं चल पा रहा था.

पुलिस के लिए दोनों एक अबूझ पहेली बन गए थे. उन के हरसंभावित ठिकानों पर दबिश दे कर पुलिस थक चुकी थी लेकिन निराशा ही हाथ लग रही थी. अभियुक्तों को गिरफ्तार न करने पर क्षेत्र के लोगों में पुलिस के प्रति आक्रोश बढ़ रहा था. उन्होंने इस के विरोध में पुलिस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया.

पुलिस की मेहनत का ही परिणाम था कि 19 नवंबर, 2022 की शाम 7 बजे के करीब उसी मुखबिर ने एक ऐसी सूचना दी जिसे सुन कर पुलिस की बांछें खिल उठी थीं. सूचना के मुताबिक, मुखबिर ने पुलिस को बताया कि प्रिंस अपने गांव के बाहर स्थित घनी झाडि़यों में छिपा बैठा है.

यह सूचना सुन कर एसएचओ योगेंद्र बहादुर सिंह सतर्क हो गए और आननफानन में एक टीम बनाई, जिस में अपने कुछ विश्वस्त पुलिसकर्मियों को शामिल किया ताकि वे इस मिशन को बेहद गुप्त रखें.

पूरी योजना बनाने के बाद एसएचओ पूरी टीम के साथ जीप से रवाना हो गए. कठही गांव पहुंचने से करीब एक किलोमीटर पहले ही उन्होंने गाड़ी रोक दी. गाड़ी से उतर कर सारे पुलिसकर्मी अलगअलग हो कर पगडंडियों के रास्ते गांव के बाहर स्थित झाडि़यों तक पहुंचे, जहां प्रिंस छिपा हुआ था.

मुखबिर ने इशारे से उस के छिपे स्थान बता कर अंधेरे में कहीं गायब हो गया. पुलिस ने पोजीशन लेते हुए टौर्च की रोशनी में प्रिंस को आत्मसमर्पण करने को कहा.

इतने में झाड़ी से एक फायरिंग पुलिस पर की गई तो पुलिस सतर्क हो गई और फायरिंग की दिशा में लक्ष्य कर एसएचओ ने फायर किया. गोली जा कर प्रिंस के जांघ में लगी और वह झाड़ी में से भागता हुआ बाहर निकल आया.

प्रिंस को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी थी. चूंकि गोली उस की जांघ में लगी थी और तेजी से खून बह रहा था इसलिए पुलिस उसे सरकारी अस्पताल ले गई और कड़ी सुरक्षा में उस का इलाज शुरू किया गया.

प्रिंस यादव खतरे से बाहर था. अगले दिन पुलिस ने उस से अस्पताल में ही पूछताछ की तो उस ने प्रेमिका आराधना की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था. आगे उस ने यह भी बताया कि इस हत्याकांड में उस के मामा का बेटा सर्वेश भी शामिल था. उस ने यह भी बता दिया कि आराधना का कटा सिर कहां छिपा कर रखा है.

21 नवंबर, 2022 की दोपहर में पुलिस प्रिंस को पुलिस की कड़ी सुरक्षा में वहां ले गई, जहां उस ने सिर छिपाने की बात कही थी. वह गौरा का पुरा यानी शव पाए जाने वाले स्थान से 6 किलोमीटर दूर स्थित एक तालाब के किनारे गीली मिट्टी के भीतर पौलीथिन में लपेट कर गाड़ दिया था. उस की निशानदेही पर पुलिस ने मृतका का सिर बरामद कर लिया.

13 दिनों से रहस्य बने आराधना प्रजापति हत्याकांड से परदा उठ गया था. बेपनाह इश्क करने वाला पागल दीवाने प्रिंस ने नफरत के आवेश में आ कर अपनी मोहब्बत की ऐसी खूनी दास्तान लिख दी कि समूचा प्रदेश हिल गया.

बबिता का खूनी रोहन – भाग 2

इस दौरान इंसपेक्टर जितेंद्र मलिक की टीम ने भीमराज की पत्नी बबीता से जब पूछताछ शुरू की तो पता चला की भीमराज ने चिराग दिल्ली गांव में अपना मकान बना रखा था, जहां वह अपनी पत्नी बबीता व 3 बच्चों के साथ रहता था.

भीमराज और बबीता के 3 बच्चों में 2 बेटी और एक बेटा था. बड़ी बेटी की उम्र करीब 19 साल थी, जबकि छोटी बेटी 15 साल की थी. उन के बीच 17 साल का एक बेटा था.

बबीता आई शक के दायरे में

42 साल की बबीता आकर्षक व तीखे नाकनक्श वाली महिला थी. इंसपेक्टर जितेंद्र मलिक को पूछताछ की शुरुआत में ही लगा कि बबीता को अपने पति के साथ हुई इस गंभीर वारदात का मानो कोई रंज नहीं है.

इंसपेक्टर जितेंद्र मलिक के हर सवाल का बबीता इतने सहज भाव से जवाब दे रही थी, मानो कुछ हुआ ही नहीं था.

पुलिस की नौकरी करते करते हुए अनुभव में जितेंद्र मलिक ने इस तरह के कई हादसे देखे थे, जिस में मृत्यु की शैय्या पर पड़े पति के गम और आशंका में पत्नी का रोरो कर बुरा हाल हो जाता है और उसे कोई सुधबुध नहीं रहती. लेकिन बबीता न सिर्फ इंसपेक्टर मलिक के हर सवाल का सहजता से जवाब दे रही थी अपितु जब उन्होंने उस के लिए चाय मंगाई तो वह पूरी सहजता के साथ चाय भी पी गई.

किसी पीडि़त की पत्नी का ऐसा व्यवहार इंसपेक्टर मलिक को थोड़ा अटपटा लगा. हालांकि बबीता ने पूछताछ में यह बात साफ कर दी थी कि उस के पति की किसी से उस की दुश्मनी या रंजिश के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है.

बबीता ने यह भी बताया कि उस के पति भीमराज की संगत ठीक नहीं थी. वह खानेपीने का शौकीन था और अकसर शराब पी कर घर आता था. उस ने बताया कि पति की कमाई से घर ठीक से नहीं चल पाता था, इसलिए वह खुद भी घरगृहस्थी चलाने में पति का हाथ बंटाती थी. बबीता ने साउथ एक्सटेंशन में किराए की दुकान ले कर उस में अपना ब्यूटीपार्लर खोल रखा था, जो ठीकठाक चलता था और उस से अच्छीखासी कमाई भी हो जाती थी.

एक तो बबीता का अटपटा व्यवहार और दूसरा उस का ब्यूटीपार्लर के पेशे से जुड़ा होना दोनों ऐसी बातें थीं, जिस के कारण इंसपेक्टर मलिक के लिए बबीता जिज्ञासा और जांचपड़ताल का केंद्रबिंदु बन गई. उन्होंने बातों ही बातों में भीमराज के अलावा बबीता और उस के तीनों बच्चों के मोबाइल नंबर नोट कर लिए.

सीसीटीवी फुटेज से मिला सुराग

बबीता से पूछताछ के बाद इंसपेक्टर मलिक ने तत्काल एसआई प्रमोद को  भीमराज और बबीता के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाने के लिए भेज दिया. इधर कई घंटे की मशक्कत और जांचपड़ताल के बाद पुलिस की अलगअलग टीमों ने 5 किलोमीटर के दायरे में जो सीसीटीवी फुटेज खंगाले थे, उन में से एक फुटेज में हुडको कालोनी के पास वही बाइक सवार पुलिस को एक बार उसी बाइक पर सवार नजर आया.

लेकिन यह फुटेज वारदात से करीब एक घंटा पहले की थी. उस वक्त बाइक सवार ने हेलमेट को हाथ में पकड़ा हुआ था और वह बाइक पर बैठा हुआ शायद किसी का इंतजार कर रहा था. इतना ही नहीं इस फुटेज में बाइक की नंबर प्लेट भी मुड़ी हुई नहीं थी, जिस से बाइक के नंबर भी स्पष्ट नजर आ रहे थे.

भीमराज के हमलावर तक पहुंचने के लिए पुलिस के हाथ यह बड़ी सफलता लगी थी. बाइक के उस नंबर को उसी शाम पुलिस ने ट्रेस कर के यह पता लगा लिया कि यह बाइक किस की है. भीमराज का हमलावर जिस बाइक पर सवार था वह महिंद्रा सेंटुरो बाइक थी. घटनास्थल से ले कर हुडको प्लेस में कालोनी के बाहर सीसीटीवी में दिख रही दोनों बाइक व उन पर वही लिबास पहने व्यक्ति एक ही था.

पुलिस ने परिवहन विभाग के पोर्टल से जब उस बाइक का इतिहास खंगाला तो पता चला कि कबीरनगर में रहने वाले प्रवीण के नाम पर यह बाइक पंजीकृत थी. पुलिस की एक टीम उसी रात प्रवीण के घर पहुंच गई और उसे हिरासत में ले लिया. फिर उस से पूछताछ शुरू हो गई.

प्रवीण को जब पता चला कि उस पर एक व्यक्ति पर गोली चलाने का आरोप है और जिस के गोली लगी है, वह जिंदगी और मौत से जूझ रहा है तो उस के होश उड़ गए.

जांच में आए नए तथ्य

उस ने बताया कि यह बाइक उस के नाम पंजीकृत जरूर है, लेकिन एक साल पहले उस ने यह बाइक लखन नाम के व्यक्ति को बेच दी थी, जिस ने शायद लौकडाउन के कारण इसे अपने नाम पर अभी ट्रांसफर नहीं कराया है.

पुलिस ने उस की बात पर विश्वास करने से पहले प्रवीण की वारदात वाले दिन की गतिविधियों का पता लगाया और उस के मोबाइल की लोकेशन चैक की तो पता कि वारदात के वक्त वह अपने घर में मौजूद था. लिहाजा पुलिस ने उस से लखन नाम के उस व्यक्ति का फोन नंबर व पता हासिल किया, जिसे उस ने अपनी बाइक बेची थी.

लखन गोविंदपुरी, दिल्ली का रहने वाला था. पुलिस ने उसे भी रात में ही दबोच लिया और थाने ले आई. जब लखन को पता चला कि जो बाइक उस ने प्रवीण से खरीदी थी, उस का इस्तेमाल किसी पर जानलेवा हमला करने में हुआ है तो लखन ने भी माथा पीट लिया.

जितेंद्र मलिक समझ गए कि कोई खास बात है, जो लखन ने ऐसी प्रतिक्रिया दी है. लिहाजा उन्होंने थोड़ा सख्ती के साथ लखन से पूछा, ‘‘लगता है तुम्हें पता है कि भीमराज को गोली किस ने मारी है.’’

‘‘नहीं सर, मुझे कुछ नहीं पता. मैं तो यह भी नहीं जानता कि आप किस भीमराज की बात कर रहे हो… सर मैं तो अपने भतीजे की बात कर रहा हूं, जिस को मैं ने पिछले कुछ महीनों से ये गाड़ी चलाने के लिए दी हुई थी. अब पता नहीं उस ने किस को ये गाड़ी दी थी कि जिस ने यह कांड किया है.’’

अगले भाग में पढ़ें- आखिर रोहन ने बता दी सच्चाई

2 आशिको की एक ही आशा – भाग 2

पुलिस की अब तक की जांच में यह पता चल गया था कि मृतक की पत्नी आशा का विकास और दीपक नाम के युवकों के साथ चक्कर चल रहा है. प्रेम त्रिकोण की इस खबर की पुलिस को अब चश्मदीद की बात से पुष्टि हो चुकी थी.

इस के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए इस ब्लाइंड मर्डर सें शामिल तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जब सख्ती से पूछताछ की तो हत्या की सच्चाई खुल कर सामने आ गई.

राजस्थान के जिला श्रीगंगानगर के सुभाष चौक बस्ती नौहर के रहने वाले अमरचंद सरकारी नौकरी करते थे. आशा उन्हीं की बेटी थी. वह हाईस्कूल तक पढ़ी थी. फिर कदम बहकने पर पिता ने उस की शादी 14 फरवरी, 2020 को हनुमानगढ़ की बस्ती पीलीगंगा निवासी फकीरचंद के बेटे राजू से कर दी.

राजू भी कोई बहुत ज्यादा पढ़ालिखा नहीं था, लेकिन वह था बहुत मेहनती. वह खेतीकिसानी करता था. राजू और आशा का दांपत्य जीवन कुछ महीने तो ठीक से चला परंतु फिर धीरेधीरे आशा राजू के प्रति विमुख सी होने लगी. उस का कारण यह था कि जहां एक ओर आशा रंगीन शौकीन मिजाज की युवती थी, वहीं दूसरी ओर राजू सीधासादा था.

आशा चाहती थी कि उस का पति दिनरात उस से प्यार करता रहे, सदा उस के आगेपीछे घूमता रहे, उस की हर जरूरत को पूरा करता रहे. चाहे जरूरत सही हो या गलत. इस का परिणाम यह हुआ कि राजू आशा को कभीकभी झिड़क भी दिया करता था.

इस से अब आशा ने राजू की परवाह करनी छोड़ दी थी. इसी तरह 2 साल गुजर गए और आशा 2 बच्चों की मां भी बन गई. एक दिन बाजार में आशा की मुलाकात 22 वर्षीय दीपक से हो गई. दीपक राजू का दोस्त और दूर का रिश्तेदार भी था. दीपक श्रीगंगानगर के गांव नूरपुरा ढाणी का रहने वाला था. वह प्लंबर था.

उसे बाजार में देखते ही दीपक बोला, ‘‘अरे भाभी, आप बाजार में आई हैं. लेकिन साथ में राजू भैया क्यों नहीं आए?’’

‘‘आप के भैया को मेरी परवाह कहां? वो तो अपनी दुनिया में मस्त रहते हैं.’’ आशा ने कहा.

‘‘अरे भाभीजी, आप भी क्या बात करती हैं. हम हैं न, आप जो हुक्म करें, आप का देवर हाजिर है.’’ दीपक ने अपना सिर झुकाते हुए कहा.

‘‘ठीक है, मेरा आज सिनेमा देखने का मन है,’’ आशा ने कहा.

‘‘फिर ठीक है, आप कोई बहाना कर के आ जाना, आज दिन का शो देख लेंगे,’’ दीपक ने हामी भरते हुए कहा.

दोनों अपनेअपने घर चले गए. वैसे दीपक की कई महीनों से आशा पर नजर थी. दीपक का एक दोस्त विकास (20 वर्ष) था. विकास भी उस के साथ प्लंबर का काम करता था. विकास ने ही एक दिन दीपक से कहा था कि यार तेरी भाभी आशा तो गजब की चीज है. तू उस से बात किया कर, बड़ी मस्त चीज है.

उस दिन खाना खाने के बाद जब दीपक आशा के साथ पिक्चर देखने जाने वाला था, तभी सामने से विकास आता दिखाई दे गया. जब दीपक ने बताया कि वह आशा भाभी के साथ पिक्चर देखने जा रहा है तो वह भी जिद करने लगा.

‘‘यार विकास, बड़ी मुश्किल से तो आशा भाभी आज पिक्चर देखने को राजी हुई है. अब तू भी आने की जिद करने में लगा. कबाब में हड्डी तो मत बन यार.’’ दीपक ने झुंझलाते हुए कहा.

‘‘देख भाई दीपक, मैं तेरे साथ चलता हूं. यदि तेरी भाभी मना कर देगी तो मैं वापस चला जाऊंगा,’’ विकास बोला.

जब दीपक और विकास सिनेमाघर पर पहुंचे तो आशा बारबार इधरउधर देख रही थी. जैसे ही आशा की नजर दीपक पर पड़ी तो उस ने हाथ से इशारा करते हुए अपने पास बुला लिया.

‘‘भाभी, ये मेरा दोस्त विकास है, ऐसे ही मुझे रास्ते में मिल गया,’’ दीपक ने विकास का परिचय कराते हुए कहा.

विकास टिकट लेने खिड़की पर चला गया तो दीपक ने धीरे से कहा, ‘‘भाभी, एक बात है, आप बुरा तो नहीं मानोगी?’’

‘‘क्या बात है? अपने प्यारे देवर की बात का भला मैं बुरा क्यों मानने लगी. बोलो तो सही, तुम क्या कहना चाहते हो,’’ आशा ने कहा.

‘‘भाभी, मेरा दोस्त विकास भी हम दोनों के साथ पिक्चर देखना चाहता है.’’ दीपक ने झिझकते हुए कहा.

‘‘चलो, उस को आने दो, फिर मैं बात करती हूं.’’ आशा ने कहा तो दीपक मन ही काफी डर सा गया था. दीपक अब अपने दिल में विकास को कोसने लगा था कि इस ने आज सब काम बिगाड़ कर रख दिया. अब आशा भाभी न जाने विकास से क्या कहेगी.

 

थोड़ी ही देर में विकास पिक्चर के टिकट ले कर आ गया और उस ने दीपक और आशा को टिकट दिए और हाल के अंदर चलने का आग्रह किया.

‘‘एक बात पूछूं विकास?’’ आशा ने कहा.

‘‘जी भाभीजी, पूछिए.’’ विकास ने नजाकत से झुकते हुए कहा, ‘‘चलो ठीक है, एक से भले दो और दो से भले तीन. वैसे विकास आज तुम ने भी मेरा मन जीत लिया,’’ और वह दोनों का हाथ पकड़ कर हाल के भीतर चली गई. आशा तो पहले से खेलीखाई थी. दोनों युवकों का साथ पा कर वह बहुत खुश हुई.

इत्तफाक से तीनों सीटें कोने से लगी एक साथ थीं. आशा ने अपने लिए बीच की सीट चुनी तो दीपक और विकास उस की अगलबगल में बैठ गए. पिक्चर शुरू हो गई. इस बीच दीपक ने ठंडा और स्नैक्स भी मंगा लिया था. तीनों फिल्म देखने में मस्त थे.

उसी दौरान दीपक और विकास ने आशा के साथ हलकी छेड़छाड़ की, जिस का आशा ने विरोध नहीं किया तो वे दोनों दोस्त बहुत खुश हुए.

जब वे तीनों घर को जाने लगे तो विकास ने आशा से कहा, ‘‘भाभीजी, आप जैसे चेहरे से खूबसूरत हो, उस से ज्यादा आप जिंदादिल हो. किसी दिन हमारी जिंदगी में भी रंग भर दो.’’

ज्योतिषी के चक्कर में प्रेमी की हत्या – भाग 2

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उस से पूछताछ की. शुरू में ग्रीष्मा पुलिस को गुमराह करती रही. तब मामले को अपराध शाखा को स्थानांतरित कर दिया गया. पुलिस ने ग्रीष्मा से पूछा, ‘‘तुम ने अपने बौयफ्रैंड का कत्ल क्यों किया?’’

तब ग्रीष्मा ने जवाब दिया, ‘‘मैं ने शैरोन का कत्ल नहीं किया. हम दोनों एकदूसरे को बहुत प्यार करते थे. हम लोगों ने मंदिर और चर्च में शादी भी कर ली थी.’’

पुलिस इस संबंध में ग्रीष्मा से लगातार 8 घंटे तक पूछताछ करती रही. पुलिस के सामने बैठी ग्रीष्मा से पुलिस ने कई बार यही प्रश्न पूछा और हर बार वह ‘न’ में ही जबाव देती रही.

जब ग्रीष्मा के सामने शैरोन की पोस्टमार्टम रिपोर्ट व अन्य सबूत रखे गए, तब वह पूरी तरह टूट गई. उस के चेहरे का रंग उड़ गया, माथे पर पसीना आ गया. कई दिनों के हाई ड्रामे और साजिश के बाद केरल पुलिस ने ग्रीष्मा को सच बताने पर मजबूर कर दिया.

आखिर 8 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद उस ने अपने प्रेमी शैरोन की मौत का सच उगल दिया. पुलिस मृतक शैरोन के उन कपड़ों, जो उस ने 14 अक्तूबर को प्रेमिका ग्रीष्मा के घर जाने पर पहने थे, को फोरैंसिक जांच के लिए भेज दिए.

ज्योतिषी ने बताया था ग्रीष्मा की कुंडली में दोष

उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. उस ने स्वीकार किया कि उस ने आर्मी आफीसर के साथ सुखी वैवाहिक जीवन जीने के लिए शैरोन को मारने की साजिश रची थी. उस का रिश्ता एक आर्मी अफसर के साथ तय हो गया था.

अपने प्रेमी शैरोन से छुटकारा पाने के लिए उसे धीमा जहर पिला कर उस की हत्या की थी. उस ने एक आयुर्वेदिक जूस में कीटनाशक मिला कर शैरोन को पीने के लिए दिया, जिस से उस की मौत हो गई. ग्रीष्मा का अपने प्रेमी शैरोन से पीछा छुड़ाने के पीछे भी एक खौफनाक और दहलाने वाली कहानी है.

ग्रीष्मा के घर वाले अपनी इकलौती बेटी और शैरोन के बीच चल रहे प्यार के बारे में जान गए थे. ग्रीष्मा के घर वाले यह सब जानते हुए भी उस के लिए रिश्ता तलाश रहे थे. ग्रीष्मा के मातापिता एक ज्योतिषी के संपर्क में भी थे. वे ग्रीष्मा के लिए लड़का देखने के साथसाथ ग्रीष्मा की जन्मकुंडली भी दिखा रहे थे. इसी बीच ग्रीष्मा के घर वालों ने ग्रीष्मा की शादी एक आर्मी आफीसर से तय कर दी थी. ज्योतिषी ने ग्रीष्मा की कुंडली देख कर जो बात बताई, उसे सुन कर उन के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई.

ज्योतिषी ने बताया कि ग्रीष्मा की कुंडली में दोष है. उस की पहली शादी जिस से भी होगी, उस के पति की मौत हो जाएगी. जबकि दूसरी शादी सफल रहेगी. दूसरे पति को कुछ नहीं होगा. बस यही बात ग्रीष्मा और उस के मन में बैठ गई.

ग्रीष्मा चाहती थी शैरोन से ब्रेकअप

ग्रीष्मा ने यह बात शैरोन को बताई. उस ने बताया कि ज्योतिषी ने बताया है कि उस के पहले पति की मौत हो जाएगी. इसलिए उस ने शैरोन से रिलेशनशिप खत्म करने को कहा. पहले तो ग्रीष्मा ने कई बहाने किए, लेकिन शैरोन नहीं माना.

शैरोन ग्रीष्मा को किसी भी कीमत पर छोड़ने को तैयार नहीं था. वह उसे अपनी जान से भी ज्यादा चाहता था. उस ने कहा कि वह मरते दम तक उसे नहीं छोड़ेगा. उस ने ज्योतिषी की भविष्यवाणी को झूठा बताया.

ग्रीष्मा की कोशिशें नाकाम हो रही थीं, लिहाजा उस ने शैरोन से पीछा छुड़ाने के लिए एक ऐसी साजिश रची जिस की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता.

ग्रीष्मा अपनी शादीशुदा जिंदगी की हिफाजत हर हाल में चाहती थी. वह नहीं चाहती थी कि जिस से भी उस की शादी हो, उस की मौत हो जाए. जिस के चलते उस की गृहस्थी उजड़ जाए.

कहने को ग्रीष्मा का अपने बौयफ्रैंड शैरोन से भी रिश्ता काफी अच्छा था. शैरोन उसे बहुत चाहता था और शायद ग्रीष्मा भी.

अब सवाल यह था कि पहली शादी हो और वह पति मर जाए, तभी दूसरी शादी सफल हो सकेगी. शादी के लिए मोहरे की जरूरत थी. तब षडयंत्र के तहत शैरोन को मोहरा बनाया गया. उसे शैरोन से अच्छा मोहरा मिलना मुश्किल था. ग्रीष्मा ने शैरोन को तब तक अपने प्रेमजाल में पूरी तरह फांस लिया था.

ग्रीष्मा ने अपनी योजना को कार्यरूप देने के लिए तब ज्योतिषी की बात मान कर किसी को बताए बिना शैरोन से एक मंदिर में शादी भी कर ली और मांग में सिंदूर भी भरवाया तथा मंगलसूत्र जिसे केरल में ‘ताली’ कहते हैं, पहना. इस के साथ ही वेट्टुकोड चर्च में शादी भी की. ज्योतिषी के कहे अनुसार अब उस का काम पूरा हो चुका था. वह उस का विधिवत पति बन चुका था.

अब उसे पहले पति शैरोन से अलग हो कर दूसरी शादी आर्मी अफसर से करनी थी, जिस के लिए ग्रीष्मा के घरवालों ने आर्मी अफसर से उस का रिश्ता पहले ही तय कर दिया था और शादी फरवरी, 2023 में होनी थी. उसे यकीन था कि अब उस की आर्मी अफसर से जो शादी होगी, उस पर कोई आंच नहीं आएगी.

2 महीने में 10 बार दिया जहर

शैरोन इन सब बातों से पूरी तरह अनजान था. वह ग्रीष्मा को हद से ज्यादा चाहता था. उसे दूरदूर तक इस बात की जरा सी भी भनक नहीं लगी थी कि ग्रीष्मा उस के खिलाफ कोई साजिश रच रही है. जबकि ग्रीष्मा तो शेरोन को अपनी जिंदगी से दूध की मक्खी की तरह निकाल फेंकना चाहती थी.

यही कारण था कि ग्रीष्मा अब शैरोन से बे्रकअप करना चाहती थी. उस ने अपनी ओर से इस रिश्ते से पीछे हटने की हर तरह से कोशिश की, लेकिन शैरोन उसे छोड़ने को किसी भी कीमत पर तैयार नहीं हुआ.

कहने को ग्रीष्मा आर्मी अफसर से अपनी सगाई तय हो जाने के बाद शैरोन से अलग होना चाह रही थी, फिर भी दोनों की अकसर मुलाकात होती रहती थी.

शैरोन के मोबाइल में ग्रीष्मा के कुछ पर्सनल फोटो व वीडियो थे. शैरोन के घर वालों ने बताया कि ग्रीष्मा ने फोटो व वीडियो के लिए शैरोन को फोन भी किया था. शैरोन रिश्ता तोड़ने व वीडियो तथा फोटो को हटाने को तैयार नहीं था. कई वीडियो ऐसे थे, जिन में दोनों शादी के जोड़े में नजर आ रहे थे.

ग्रीष्मा को डर था कि यदि प्रेमी शैरोन ने ये वीडियो उस के पति को दिखा दिए तो गड़बड़ हो जाएगी. उस की गृहस्थी बरबाद हो जाएगी. तब ग्रीष्मा ने घर वालों से मिल कर एक खौफनाक निर्णय लिया.

रिश्तों पर भारी पड़ी मोहब्बत – भाग 2

एसपी केशव कुमार के आदेश पर चारों टीमों का नेतृत्व एएसपी कुंवर ज्ञानंजय सिंह कर रहे थे. पुलिस ने मृतक की पत्नी नुसरत जहां को शक के दायरे में ले लिया और जांच में एक चौंकाने वाली बात सामने आई कि पतिपत्नी के बीच रिश्ते मधुर नहीं थे. उन में काफी तनाव और कड़वाहट थी और दोनों में अकसर झगड़ा होता रहता था.

मियांबीवी के बीच बिगड़े रिश्ते की असल वजह पति इम्तियाजुल का पत्नी के चरित्र पर शक करना था. इसी बिंदु को आधार मान कर पुलिस ने अपनी जांच आगे बढ़ाई और नुसरत जहां के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगा दिया. यही नहीं, पुलिस ने उस के नंबर की पिछले 15 दिनों की कालडिटेल्स भी निकलवाई.

पुलिस ने उस के बातचीत की रिकौर्डिंग भी सुनी तो उस के पैरों से जमीन जैसे खिसक गई. बातचीत की रिकौर्डिंग ने पुलिस के शक को यकीन में बदल दिया. पति की हत्या में नुसरत जहां का पूरापूरा हाथ था लेकिन पुलिस ने उसे आभास तक नहीं होने दिया नहीं तो उस का साथ देने वाले सावधान हो जाते.

बहरहाल, जिस नंबर से नुसरत जहां के फोन पर आखिरी बार काल आया था, उसी नंबर से उस की लंबी बातचीत हुआ करती थी.

पुलिस ने जब उस नंबर की डिटेल्स निकलवाई तो वह दरगाह शरीफ थाना क्षेत्र के मुसल्लमपुर राम के रहने वाले नदीम अहमद का नंबर था. फिर देर रात नदीम अहमद के घर दबिश दे कर उसे पूछताछ के लिए हिरासत में ले कर थाने ले आई.

सख्ती के साथ पूछताछ में वह पुलिस के सामने टूट गया और अपना जुर्म कुबूलते हुए बताया कि उस ने अपने दोस्त और मसजिद के इमाम दाऊद के साथ मिल कर वकील इम्तियाजुल हक की हत्या की थी. इस में मृतक की पत्नी नुसरत जहां ने उस की पूरी मदद की थी.

उसी रात पुलिस ने नदीम अहमद की निशानदेही पर कोतवाली नगर स्थित काजीपुरा निवासी दाऊद अहमद और जमील कालोनी से नुसरत जहां को गिरफ्तार कर लिया. दोनों आरोपियों ने भी अपने अपराध स्वीकार कर लिए.

24 घंटे के भीतर पुलिस ने वकील इम्तियाजुल हक हत्याकांड का खुलासा कर दिया था. अगले दिन 17 अक्तूबर, 2022 को पुलिस लाइन में एएसपी कुंवर ज्ञानंजय सिंह ने प्रैस कौन्फ्रैंस आयोजित कर केस का खुलासा कर दिया.

प्रैसवार्ता संपन्न होने के बाद तीनों आरोपियों को अदालत के सामने पेश कर जेल भेज दिया गया. पुलिस पूछताछ में अधिवक्ता इम्तियाजुल हक हत्याकांड की कहानी कुछ ऐसे सामने आई—

40 वर्षीय इम्तियाजुल हक मूलरूप से बहराइच जिले के थाना दरगाह शरीफ इलाके के सलारगंज स्थित जमील कालोनी में अपने परिवार सहित पैतृक मकान में रहते थे. पतिपत्नी और 2 बच्चे. यही उन का हंसताखेलता परिवार था.

उन का छोटा भाई रिजवानुल हक मांबाप के साथ रहता था. हालांकि दोनों भाइयों के बीच पैतृक संपत्तियों का बंटवारा हो चुका था. बंटवारे के बाद मांबाप ने खुद छोटे बेटे के साथ रहना पसंद किया तो बड़ा बेटा इम्तियाजुल ने उन के फैसले को मान लिया.

यूं तो इम्तियाजुल हक पेशे से वकील थे. उन की अच्छी वकालत चलती थी. मिलनसार प्रवृत्ति के इम्तियाजुल अपने पेशे में ईमानदार थे. जिस का भी केस अपने हाथों में लेते थे, उस की जीत होनी पक्की रहती थी. इस वजह से उन के मुवक्किल मुंहमांगी फीस देने को तैयार रहते थे.

अनुभवी वकील इम्तियाजुल हक वकालत से इतना कमा लेते थे कि उन की जिंदगी बड़े चैन से कट रही थी. घर में हर सुखसुविधा मुहैया थी. चाहे वह खानेपीने वाली चीज हो अथवा भौतिक सुख. किसी भी चीज में वह कभी कटौती नहीं करते थे. बच्चे भी अच्छे स्कूल में पढ़ रहे थे. वे पढ़ने में होशियार थे.

इम्तियाजुल हक की अपनी सोच थी कि बच्चे अंगरेजी के साथसाथ अन्य भाषाओं का ज्ञान हासिल कर रहे हैं तो क्यों न उन्हें अरबी भाषा का भी ज्ञान दिया जाए जो कभी न कभी उन के काम आ सकता है.

उन्होंने अपने कुछ परिचितों से बात छेड़ी तो उन के एक दोस्त ने सलारगंज स्थित मसजिद के मुअज्जिन नदीम अहमद का नाम सुझाया और कहा कि वह बेहद काबिल उस्ताद हैं. उन्हें अरबी का अच्छा ज्ञान है.

अधिवक्ता इम्तियाजुल हक की ओर से हरी झंडी मिलते ही वह दोस्त एक दिन रविवार की सुबह नदीम अहमद को अपने साथ ले कर उन के घर पहुंचा तो बच्चों से उसे मिला दिया गया और परिचय भी करवा दिया कि अब से ये आप को अरबी की तालीम देंगे. ये आप के उस्ताद हैं.

उस दिन के बाद से नदीम अहमद इम्तियाजुल के दोनों बच्चों को घर पर आ कर अरबी की तालीम देने लगा. यह घटना से करीब एक साल पहले की बात है.

नदीम अहमद गोराचिट्टा, सुंदर और लंबाचौड़ा इकहरे बदन वाला नौजवान था. यही नहीं उस की बोली में गजब की मिठास थी. अपनी मीठी बोली से किसी को भी अपनी ओर सरलतापूर्वक रिझा सकता था. इम्तियाजुल के दोनों बच्चे भी नदीम की मीठी बोली के कायल थे.

चूंकि नदीम अहमद बच्चों का उस्ताद था, इस लिहाज से दोनों बच्चों की मां नुसरत जहां उर्फ गुलसुम उस के स्वागत में चायनाश्ता वगैर खुद देने आती थी. क्योंकि दोनों बेटों के अलावा परिवार में कोई नहीं था जो उस्ताद को चायनाश्ता ले जाता.

भले ही नुसरत जहां 2 बच्चों की मां थी. 12-14 साल के करीब दोनों बच्चों की उम्र भी हो चुकी थी लेकिन शक्लोसूरत देख कर कोई नहीं बता सकता था कि वह इतने बड़ेबड़े बच्चों की मां होगी.

गले में दुपट्टा डाले और उसी के मैचिंग का पहने जब वह पहली बार हाथ में चाय की प्याली ले कर कुरसी पर बैठे नदीम के सामने गई तो नदीम की नजरें नुसरत जहां के गोल और सुंदर मुखड़े से टकराईं. उस की सुंदरता देख कर वह उस का मुरीद हो गया था. ऐसा नहीं था कि नुसरत ने उस्ताद नदीम की हरकतों को देखा न हो, उस ने अपनी झुकीझुकी नजरों से सब देख लिया था. फिर वह उस के सामने पड़ी मेज पर चाय की प्याली और नमकीन से भरी प्लेट रख कर अपने कमरे में लौट आई.

सपना को नहीं मिला अमन और फिर – भाग 2

सयानी हो चुकी बेटी के हावभाव और हरकतों को देख कर मां को संदेह हुआ तो उन्होंने पति से बात करने का विचार किया. दूसरी ओर जगदंबा खुद भी बेटी के बदले व्यवहार से सकते में थे. वह पिता थे, इसलिए बेटी से सीधे कुछ पूछ नहीं सकते थे, इसलिए वह उस पर चोरीछिपे नजर रखने लगे थे.

इस का नतीजा यह निकला कि उन्हें पता चल गया कि सपना अमनप्रताप सिंह नाम के लड़के से प्यार करती है. यह जान कर उन के होश ही उड़ गए, क्योंकि बेटी से उन्हें इस तरह की कतई उम्मीद नहीं थी. उन्होंने यह बात पत्नी से बताई तो उन की शंका सच साबित हुई. उन्होंने चिंता में कहा, ‘‘लड़की कुछ ऐसावैसा कर बैठी तो हम समाजबिरादरी में मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे.’’

पतिपत्नी काफी परेशान थे, जबकि सपना अपनी ही दुनिया में खोई थी. उसे इस बात की भनक तक नहीं लग पाई कि मांबाप को उस के प्यार की खबर लग गई है. उसे पता तब चला, जब जगदंबा ने अचानक उस के कोचिंग जाने पर रोक लगा दी. इस से सपना को समझते देर नहीं लगी कि पापा को उस के प्यार वाली बात का पता चल गया है. जबकि इस के पहले उन्होंने उसे पढ़ने के लिए कहीं भी आनेजाने से मना नहीं किया था.

सपना ने पिता के इस निर्णय के बारे में मां से बात की तो उन्होंने कहा, ‘‘सपना, तुम ने जो किया है, उस की हम लोगों को जरा भी उम्मीद नहीं थी.’’

‘‘मां, मैं ने ऐसा क्या कर डाला कि मेरी पढ़ाई बंद करा दी गई?’’

‘‘तुम ने जो किया है बेटी, उस का तुम्हारे पापा को पता चल चुका है. तुम्हें घर से पढ़ने के लिए भेजा जाता था, न कि किसी लड़के से प्यार करने. तुम ने क्या सोचा था कि तुम बताओगी नहीं तो हमें पता ही नहीं चलेगा.’’

‘‘तो यह बात है. आप लोगों को मेरे और अमन के प्यार के बारे में पता चल गया है.’’ सपना ने बेशर्मी से कहा, ‘‘मां, अमन बहुत अच्छा लड़का है, हम दोनों ही एकदूसरे को बहुत प्यार करते हैं.’’

‘‘मां के सामने यह कहते तुझे शर्म नहीं आई. 4 अक्षर पढ़ क्या लिया, तुम ने खुद को न जाने क्या समझ लिया? हम ने तुम्हें यही संस्कार दिए थे. आज भी हमारे यहां बेटियों के भाग्य का फैसला मांबाप करते हैं. इतनी बेशर्मी ठीक नहीं, अगर तेरी इन बातों को तुम्हारे पापा ने सुन लिया तो तुझे जिंदा गाड़ देंगे.’’

मां की बातें सुन कर सपना की बोलती बंद हो गई. मां ने सपना को काफी देर तक समझाया, लेकिन ऐसे लोगों पर किसी के समझाने का असर कहां होता है. सपना पर भी नहीं हुआ. मौका मिलते ही उस ने अमन को फोन कर के बता दिया कि उस के मांबाप को उन के प्यार का पता चल गया है.

सपना की बात सुन कर अमन को जैसे सांप सूंघ गया. वह बुरी तरह घबरा गया, क्योंकि सपना ने उस से यह भी कहा था कि उस के पापा बहुत गुस्से में हैं. वह उस से मिलने कोचिंग जरूर जाएंगे, इसलिए वह सतर्क रहे.

ऐसा हुआ भी. अपने साले संजीव द्विवेदी को साथ ले कर जगदंबा कोचिंग सेंटर जा पहुंचे थे. कोचिंग सेंटर के गेट पर अमन को रोक कर जब उन्होंने उसे अपना परिचय सपना के पिता के रूप में दिया तो वह परेशान हो उठा.

लेकिन उस समय उन्होंने उसे डांटनेफटकारने के बजाय प्यार से सपना से दूर रहने की चेतावनी देते हुए कहा कि यह उस की पहली गलती मान कर उसे चेतावनी दे कर इस शर्त पर छोड़ रहे हैं कि अब वह कभी सपना से मिलने की कोशिश नहीं करेगा.

परिस्थितियों को देखते हुए अमन ने उस समय दोनों हाथ जोड़ कर माफी मांगते हुए वादा कर लिया कि अब वह कभी भी सपना से नहीं मिलेगा. ऐसा उस ने वक्त की नजाकत देख कर किया था, ताकि जगदंबा को उस पर भरोसा हो जाए कि वह जो भी कह रहा है, सच कह रहा है. जबकि मन ही मन उस ने कुछ और ही तय कर रखा था. बहरहाल अमन के वादे पर विश्वास कर के जगदंबा घर आ गए. सपना का कोचिंग जाना बंद ही करा दिया गया था, इसलिए घर का हर कोई उस पर नजर भी रख रहा था.

प्रेमी से मिलने के लिए सपना ने एक खेल यह खेला कि वह ऐसा व्यवहार करने लगी, जैसे वह पूरी तरह बदल गई हो. अपनी बातचीत और हावभाव से आखिर उस ने मांबाप को भरोसा दिला दिया कि वह अमन को भूल चुकी है. इस के बाद उस पर लगी पाबंदी हटा ली गई तो वह चोरीछिपे अमन से मिलने लगी. क्योंकि शायद वह अमन के बिना खुद को अधूरी समझती थी.

उसी तरह अमन भी सपना को टूट कर प्यार करता था. वह उस की रगों में लहू बन कर दौड़ रही थी. दोनों ही एकदूसरे से अलग रह कर जीने की कल्पना नहीं कर सकते थे. सपना और अमन की ये मुलाकातें ज्यादा दिनों तक सपना के घर वालों से छिपी नहीं रह सकीं. जगदंबा को पता चल गया कि सपना अमन से फिर मिलने लगी है. इस बार उन्होंने खुद सपना को अमन के साथ घूमते देख लिया था. बेटी की हरकतों से वह परेशान हो उठा था. अमन से बेटी का पीछा छुड़ाने के लिए उस ने उस के खिलाफ थाना कैंट में बेटी के साथ छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज करा दिया. थाना कैंट पुलिस ने अमन को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया. यह सन 2014 की बात है.

अमन के पिता परिवार सहित जबलपुर में रहते थे. उस के चाचा राजू सिंह गांव में परिवार के साथ रहते थे. वह गांव के प्रधान भी थे. अमन के गिरफ्तार होने के बारे में जब उन्हें पता चला तो वह परेशान हो उठे. इस बात को बड़े भाई यानी अमन के पिता को बताए बगैर वह गोरखपुर पहुंचे और अमन को जमानत दिलवा कर जेल से बाहर निकलवाया.

यूट्यूबर नामरा लुटेरी गर्लफ्रेंड – भाग 2

दिनेश ने महसूस किया कि नामरा की निहायत खूबसूरती उसे अपनी ओर खींच रही है, जबकि नामरा ने भी महसूस किया कि उसे दिनेश के रूप में एक वैसा व्यक्ति मिल गया है, जो भविष्य में मददगार साबित हो सकता है.

उस के बाद 3 महीने के दरम्यान नामरा और दिनेश का कई बार मिलना हुआ. उन के बीच कामकाज की बातों के साथसाथ आज के दौर की प्यारमोहब्बत की बातें होने लगीं. बातोंबातों में दिनेश से नामरा ने बताया कि वह उसे बहुत अच्छा लगता है, हालांकि उस ने विराट बेनीवाल से शादी की है.

दिनेश के दिलोदिमाग में छा गई नामरा

अब दिनेश के दिल में नामरा के लिए कितनी जगह थी, इस का तो पता नहीं, लेकिन इतना जरूर था कि नामरा दिनेश के दिमाग पर छा गई थी. वह उस का खास दोस्त बन चुका था और उस की हर छोटीबड़ी मदद में साथ देने को तत्पर रहता था.

मदद के तौर पर नामरा हमेशा उस से कुछ न कुछ पैसे मांग लिया करती थी. कभी उधार के नाम पर तो कभी उस के प्रोजैक्ट पर आने वाले खर्च के नाम पर. दिनेश का कहना है कि नामरा ने अपनी बहन की शादी के लिए उस से उधार पैसे मांगे थे.

नामरा यहीं नहीं रुकी, उस ने एक एडवरटाइजमेंट और वीडियो शूट से जुड़े काम के सिलसिले में उस से 50 लाख रुपए एडवांस के तौर पर और ले लिए. लेकिन इस के बाद भी उस का काम शुरू नहीं हुआ.

इस बारे में पूछने पर वह कुछ न कुछ मजबूरियां बताती रही. उस के बाद से दिनेश परेशान रहने लगा. यहां तक कि उस ने कहा कि यदि वह उस का काम नहीं कर पा रही है तो उस के पैसे लौटा दे.

इस के बाद दोनों के मधुर संबंधों में थोड़ी खटास आ गई थी. जबकि नामरा पति के साथ मिल कर उस के पैसों से अपने निजी प्रोजेक्ट के वीडियो शूट कर यूट्यूब पर रेग्युलर डाले जा रही थी. उस के पैसे से ही जगहजगह घूम कर रील्स बना रही थी. फैशनेबल बनी फिर रही थी. मौडलिंग और ब्लौगर की दुनिया में सब से आगे निकल जाने की होड़ में शामिल हो गई थी.

दिनेश काफी समय से परेशान चल रहा था. उसी दौरान उस के पिता ने अपने बैंक से 5 लाख रुपए निकाले जाने के बारे में उस से जानकारी मांगी. उन्होंने पूछा कि इतने पैसे उस ने किसे और क्यों ट्रांसफर किए हैं, जबकि उसे वह बिजनैस के लिए पहले से उस की जरूरत के मुताबिक पैसा दे चुके हैं. इसी के साथ उन्होंने दिनेश को जबरदस्त डांट भी लगाई.

पिता की डांट खा कर दिनेश को लगा कि उस की गलती पकड़ी जा चुकी है. इसलिए इस से पहले कि उस की बात पिता समेत बिजनैस या फ्रैंड सर्कल में फैले और उस की बदनामी हो व इमेज को धक्का लगे, इस से पहले पिता को सारी बात बता देना जरूरी समझा.

इस के बाद दिनेश ने पिता से पूरी बात बताई कि कैसे वह पिछले 7-8 महीने से ब्लैकमेलिंग का शिकार बना हुआ है. दिनेश के पिता बेटे की कहानी सुन कर अवाक रह गए. उन्होंने समझदारी से काम लिया.

वह जानते थे कि उन का बेटा जालसाजी और ठगी का शिकार हो चुका है… और ठगने वाली मीडिया जगत की सेलिब्रिटी लड़की है. ऐसे में वह अपने बचाव के लिए रेप जैसे हथकंडे भी अपना सकती है, इसलिए उस की तरफ से कोई पहल किए जाने से पहले दिनेश का बचाव किया जाना जरूरी है.

दिनेश ने 80 लाख रुपए ऐंठने की कराई रिपोर्ट

यह बात अगस्त, 2022 की है. दिनेश ने पिता के कहने पर गुरुग्राम के थाने में नामरा कादिर और उस के पति विराट बेनीवाल के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई.

शिकायत में लिखा कि दोनों पतिपत्नी एडवरटाइजिंग के काम के सिलसिले में उस से 6-7 माह के दरम्यान 80 लाख रुपए ले चुके हैं, लेकिन उन्होंने उस का कोई काम नहीं किया है.

उस में नामरा ने बहन की शादी के लिए कुछ पैसे उधार के तौर पर लिए थे. पैसा वापस मांगने पर उल्टे उसे रेप में फंसाने की धमकी दी. उन्होंने उसे हनीट्रैप में फंसा रखा है और उस की वीडियो क्लिपिंग्स दिखा कर वसूली करते हैं.

इस शिकायत के बाद गुरुग्राम की पुलिस ने नामरा और उस के पति की जांच शुरू की गई. दिनेश के आरोप के मुताबिक उस के साथ जालसाजी और पैसा वसूलने में शामिल होने को ले कर उन्हें कई बार थाने में बुलाया गया, लेकिन वे एक बार भी जांच के लिए नहीं पहुंचे.

उलटे अपने चैनल पर दिनेश के खिलाफ ही आरोप लगाते हुए नोटिस जारी कर अपनी सफाई पेश कर दी. साथ ही बचाव के लिए उन्होंने पहली नवंबर को गुरुग्राम की जिला अदालत में इस केस के सिलसिले में अग्रिम जमानत की अरजी दाखिल कर दी. अदालत ने उन की अरजी ठुकरा दी.

इस के बाद 24 नवंबर को इस सिलसिले में नामरा और उस के पति के खिलाफ आईपीसी की धारा 388 यानी धमका कर जबरन वसूली करना, 406 आपराधिक तरीके से धोखा देना, 506 यानी धमकाना, 34 यानी साजिश के लिए एक राय होना और 328 यानी जख्मी करना या फिर जहर दे कर नुकसान पहुंचाने की कोशिश करना. जैसी धाराओं और इल्जामों के तहत केस दर्ज किया गया.

इस तरह नामरा गुरुग्राम पुलिस द्वारा पूछताछ के लिए गिरफ्तार कर ली गई. जबकि पति विराट बेनीवाल पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ पाया.

नामरा ने रखा अपना पक्ष

इस मामले पर नामरा ने सोशल मीडिया पर अपना पक्ष रखा है. नामरा की ओर से उस के यूट्यूब चैनल पर बताया गया है कि दिनेश यादव ने मुझ पर आरोप लगाया है कि मैं ने उस के 70 से 80 लाख रुपए लूट लिए. उसे ब्लैकमेल कर के और प्यार के झांसे में फंसा के. पहली बात उस ने मुझे 70 से 80 लाख रुपए नहीं दिए और उस ने जितने भी पैसे मुझे दिए वह मेरे काम के लिए दिए थे.