वासना में बनी पतिहंता : पत्नी ही बनी कातिल – भाग 1

सुनील अपनी ड्यूटी से रोजाना रात 9 बजे तक अपने घर वापस पहुंच जाता था. पिछले 12 सालों से उस का यही रूटीन था. लेकिन 21 मई, 2019 को रात के 10 बज गए, वह घर नहीं लौटा.

पत्नी सुनीता को उस की चिंता होने लगी. उस ने पति को फोन मिलाया तो फोन भी स्विच्ड औफ मिला. वह परेशान हो गई कि करे तो क्या करे. घर से कुछ दूर ही सुनीता का देवर राहुल रहता था. सुनीता अपने 18 वर्षीय बेटे नवजोत के साथ देवर राहुल के यहां पहुंच गई. घबराई हुई हालत में आई भाभी को देख कर राहुल ने पूछा, ‘‘भाभी, क्या हुआ, आप इतनी परेशान क्यों हैं?’’

‘‘तुम्हारे भैया अभी तक घर नहीं आए. उन का फोन भी नहीं मिल रहा. पता नहीं कहां चले गए. मुझे बड़ी चिंता हो रही है. तुम जा कर उन का पता लगाओ. मेरा तो दिल घबरा रहा है. उन्होंने 8 बजे मुझे फोन पर बताया था कि थोड़ी देर में घर पहुंच रहे हैं, खाना तैयार रखना. लेकिन अभी तक नहीं आए.’’

45 वर्षीय सुनील मूलरूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले मोहनलाल का बड़ा बेटा था. सुनील के अलावा उन के 3 बेटे और एक बेटी थी. सभी शादीशुदा थे. सुनील लगभग 13 बरस पहले काम की तलाश में लुधियाना आया था. कुछ दिनों बाद यहीं के जनकपुरी इंडस्ट्रियल एरिया स्थित प्रवीण गर्ग की धागा फैक्ट्री में उस की नौकरी लग गई. फिर वह यहीं के थाना सराभा नगर के अंतर्गत आने वाले गांव सुनेत में किराए का घर ले कर रहने लगा. बाद में उस ने अपनी पत्नी और बच्चों को भी लुधियाना में अपने पास बुला लिया.

जब सुनील ने धागा फैक्ट्री में अपनी पहचान बना ली तो अपने छोटे भाई राहुल को भी लुधियाना बुलवा लिया. उस ने राहुल की भी एक दूसरी फैक्ट्री में नौकरी लगवा दी. राहुल भी अपने बीवीबच्चों को लुधियाना ले आया और सुनील से 2 गली छोड़ कर किराए के मकान में रहने लगा.

पिछले 12 सालों से सुनील का रोज का नियम था कि वह रोज ठीक साढे़ 8 बजे काम के लिए घर से अपनी इलैक्ट्रिक साइकिल पर निकलता था और पौने 9 बजे अपने मालिक प्रवीण गर्ग की गुरुदेव नगर स्थित कोठी पर पहुंच जाता. वह अपनी साइकिल कोठी पर खड़ी कर के वहां से फैक्ट्री की बाइक द्वारा फैक्ट्री जाता था. इसी तरह वह शाम को भी साढ़े 8 बजे छुट्टी कर फैक्ट्री से मालिक की कोठी जाता और वहां बाइक खड़ी कर अपनी इलैक्ट्रिक साइकिल द्वारा 9 बजे तक अपने घर पहुंच जाता था.

पिछले 12 सालों में उस के इस नियम में 10 मिनट का भी बदलाव नहीं आया था. 21 मई, 2019 को भी वह रोज की तरह काम पर गया था पर वापस नहीं लौटा. इसलिए परिजनों का चिंतित होना स्वाभाविक था. राहुल अपने भतीजे नवजोत और कुछ पड़ोसियों को साथ ले कर सब से पहले अपने भाई के मालिक प्रवीण गर्ग की कोठी पर पहुंचा.

प्रवीण ने उसे बताया कि सुनील तो साढ़े 8 बजे कोठी पर फैक्ट्री की चाबियां दे कर घर चला गया था. प्रवीण ने राहुल को सलाह दी कि सब से पहले वह थाने जा कर इस बात की खबर करे. प्रवीण गर्ग की सलाह मान कर राहुल सीधे थाना डिवीजन नंबर-5 पहुंचा और अपने सुनील के लापता होने की बात बताई.

उस समय थाने में तैनात ड्यूटी अफसर ने राहुल से कहा, ‘‘अभी कुछ देर पहले सिविल अस्पताल में एक आदमी की लाश लाई गई थी, जिस के शरीर पर चोटों के निशान थे. लाश अस्पताल की मोर्चरी में रखी है, आप अस्पताल जा कर पहले उस लाश को देख लें. कहीं वह लाश आप के भाई की न हो.’’

राहुल पड़ोसियों के साथ सिविल अस्पताल पहुंच गया. अस्पताल में जैसे ही राहुल ने स्ट्रेचर पर रखी लाश देखी तो उस की चीख निकल गई. वह लाश उस के भाई सुनील की ही थी.

राहुल ने फोन द्वारा इस बात की सूचना अपनी भाभी सुनीता को दे कर अस्पताल आने के लिए कहा. उधर लाश की शिनाख्त होने के बाद आगे की काररवाई के लिए डाक्टरों ने यह खबर थाना दुगरी के अंतर्गत आने वाली पुलिस चौकी शहीद भगत सिंह नगर को दे दी. सुनील की लाश उसी चौकी के क्षेत्र में मिली थी.

दरअसल, 21 मई 2019 की रात 10 बजे किसी राहगीर ने लुधियाना पुलिस कंट्रोलरूम को फोन द्वारा यह खबर दी थी कि पखोवाल स्थित सिटी सेंटर के पास सड़क किनारे एक आदमी की लाश पड़ी है. कंट्रोलरूम ने यह खबर संबंधित पुलिस चौकी शहीद भगत सिंह नगर को दे दी थी.

सूचना मिलते ही चौकी इंचार्ज एएसआई सुनील कुमार, हवलदार गुरमेल सिंह, दलजीत सिंह और सिपाही हरपिंदर सिंह के साथ मौके पर पहुंचे. उन्होंने इस की सूचना एडिशनल डीसीपी-2 जस किरनजीत सिंह, एसीपी (साउथ) जश्नदीप सिंह के अलावा क्राइम टीम को भी दे दी थी.

लाश का निरीक्षण करने पर उस की जेब से बरामद पर्स से 65 रुपए और एक मोबाइल फोन मिला. फोन टूटीफूटी हालत में था, जिसे बाद में चंडीगढ़ स्थित फोरैंसिक लैब भेजा गया था. लाश के पास ही एक बैग भी पड़ा था, जिस में खाने का टिफिन था. मृतक के सिर पर चोट का निशान था, जिस का खून बह कर उस के शरीर और कपड़ों पर फैल गया था.

उस समय लाश की शिनाख्त नहीं हो पाने पर एएसआई सुनील कुमार ने मौके की काररवाई पूरी कर लाश सिविल अस्पताल भेज दी थी.

अस्पताल द्वारा लाश की शिनाख्त होने की सूचना एएसआई सुनील कुमार को मिली तो वह सिविल अस्पताल पहुंच गए. उन्होंने अस्पताल में मौजूद मृतक की पत्नी सुनीता और भाई राहुल से पूछताछ कर उन के बयान दर्ज किए और राहुल के बयानों के आधार पर सुनील की हत्या का मुकदमा अज्ञात हत्यारों के खिलाफ दर्ज कर आगे की तहकीकात शुरू कर दी.

बेगम बनने की चाह में गवाया पति – भाग 1

28 अक्तूबर, 2018 की बात है. सुबह के 11 बज चुके थे. देवास शहर के थाना सिविल लाइंस के टीआई  विवेक कनोडिया अपने औफिस में बैठे थे, तभी एक महिला उन के पास आई. उस ने टीआई को अपने  पति के गुम होने की बात बताई. उस युवती ने अपना नाम पिंकी बता कर कहा कि वह विशाल सोसायटी में अपने पति सुनील कुमार के साथ रहती है. कल करवाचौथ का त्यौहार था. त्यौहार के बाद पति और मैं एक ही कमरे में सोए हुए थे. सुबह जब मेरी आंख खुली तो पति बिस्तर पर नहीं थे. हमारे मेनगेट की कुंडी भी बाहर से बंद थी, जो पड़ोसी से खुलवाई. पति को कई जगह ढूंढा, जब कहीं पता नहीं चला तो थाने चली आई.

मामला गंभीर था. टीआई को लगा कि या तो पति-पत्नी के बीच कोई झगड़ा हो गया होगा या फिर सुनील का किसी दूसरी औरत से चक्कर चल रहा होगा. लेकिन पिंकी ने लड़ाई झगड़े या पति का किसी दूसरी औरत से चक्कर की जानकारी होने से न केवल इनकार किया, बल्कि बताया कि कल करवाचौथ की रात हम दोनों काफी खुश थे.

पिंकी ने यह भी बताया कि सुनील अपना मोबाइल तो छोड़ गए लेकिन घर में रखे 20 हजार रुपए और कुछ चैक अपने साथ ले गए. मामला समझ से परे था. टीआई विवेक कनोडिया ने सुनील कुमार की गुमशुदगी दर्ज करने के बाद पास के गांव बामनखेड़ा में रहने वाले सुनील के मातापिता को बुलवा कर उन से पूछताछ की. उन्होंने बताया कि बहू-बेटे हंसी-खुशी साथ रह रहे थे.

सुनील देवास की एक दुकान पर काम करता था. उस ने 3 साल पहले विशाल नगर में 3 कमरे का अपना मकान बनवा लिया था. इस के बावजूद वह विशालनगर की सोसायटी में ही रहता था. मातापिता ने अपने गांव में रहने वाले अयूब नाम के युवक पर शक जाहिर किया.

टीआई विवेक कनोडिया ने पुलिस टीम भेज कर अयूब को थाने बुलवा लिया. उन्होंने अयूब से पूछताछ की, लेकिन कोई जानकारी निकल कर सामने नहीं आई. इस के बाद पुलिस ने सुनील के दुकान मालिक भंवर जैन से सुनील के चरित्र आदि के बारे में जानकारी जुटाई.

भंवर जैन ने बताया कि सुनील उन की दुकान में कई साल से काम कर रहा है. वह काफी ईमानदार व भरोसे का आदमी है. दुकानदार ने सुनील के प्रेमप्रसंग व नशाखोरी की आदत से भी इनकार किया.

पिंकी से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस के पास कोई पर्सनल फोन नहीं है. पति ही अपने पास मोबाइल रखते थे जो वह घर पर छोड़ गए. टीआई ने सुनील के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस से कोई लाभ नहीं हुआ. इस से मामला धीरेधीरे अंधकार से घिरने लगा.

इधर सुनील के मातापिता 10 दिन तक थाने के चक्कर लगाते रहे. बेटे के बारे में कोई पता नहीं लगने की बात पर वह उदास मन से गांव लौट जाते. इसी तरह 3 महीने बीत गए.

एक रोज जब सुनील के पिता मायाराम थाना सिविल लाइंस पहुंचे तो टीआई विवेक कनोडिया ने इस बात पर गौर किया कि सुनील के पिता तो अपने बेटे की खोजखबर के लिए थाने आते हैं, लेकिन सुनील की पत्नी पिंकी गुमशुदगी दर्ज करवाने के बाद एक बार भी थाने नहीं आई.

इस पर उन्होंने मायाराम से सुनील की पत्नी पिंकी के बारे में पूछा तो वह बोले, ‘‘उसे क्या फर्क पड़ना है, साहब. उसे तो कोई दूसरा मर्द मिल जाएगा. वह तो अपने मांबाप के घर जा कर बैठी है और बुलाने पर भी नहीं आ रही है.’’

मायाराम की बात सुन कर टीआई विवेक कनोडिया समझ गए कि इस मामले की बागडोर पिंकी के हाथ में है. उन्होंने तुरंत कांस्टेबल कनेश को भेज कर पिंकी को थाने बुलवा लिया. पूछताछ के बाद उन्होंने पिंकी को हिदायत दी कि जब तक इस केस की जांच न हो जाए, तब तक वह देवास छोड़ कर कहीं न जाए. न मायके और न ही कहीं और.

टीआई गोपनीय तरीके से पिंकी पर नजर गड़ाए हुए थे. उन्हें उस की एकएक हरकत की खबर मिल रही थी. उन्होंने अपने खबरी पिंकी के आसपास लगा रखे थे. टीआई के खबरी ने उन्हें बताया कि पिंकी दिन भर किसी से फोन पर बात करती रहती है.

यह सूचना मिलने के बाद टीआई ने सुनील के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि उस मोबाइल पर तो किसी का फोन आया ही नहीं था. फिर पिंकी किस फोन पर बात करती है. पिंकी ने यह पहले ही बता दिया था कि उस के पास कोई दूसरा मोबाइल नहीं है.

टीआई समझ गए कि सुनील के लापता होने का राज पिंकी के दूसरे मोबाइल में छिपा हो सकता है. इसलिए 5 जनवरी, 2019 को उन्होंने यह सारी जानकारी एसपी देवास को दे दी. फिर एसपी के निर्देश पर उन्होंने एक टीम पिंकी के घर भेजी.

पुलिस टीम ने पिंकी के घर की तलाशी ली तो गेहूं की बोरी में छिपा कर रखा गया एक मोबाइल पुलिस के हाथ लग गया. मोबाइल हाथ आते ही पिंकी का चेहरा उतर गया. पुलिस ने उस मोबाइल फोन का काल लौग चैक किया तो पता चला कि उस मोबाइल पर दिन भर में बीसियों बार केवल एक ही नंबर से फोन आताजाता था.

जांच के बाद वह नंबर पड़ोस में रहने वाले अनवर शाह का निकला. इस आधार पर जब पुलिस ने पिंकी से थोड़ी सख्ती की तो वह टूट गई. उस ने स्वीकार कर लिया कि प्रेमी अनवर शाह के साथ मिल कर उस ने पति की हत्या कर लाश एक खेत में दबा दी है.

2 गज जमीन के नीचे : प्रेमियों का प्यार हुआ दफन

साल 2020 समाप्त होने में गिनती के दिन बचे थे. नया साल शीत लहर की चौखट पर खड़ा था. ऐसे में खरगोन जिला मुख्यालय से कुछ दूरी पर स्थित भीकनगांव के टीआई जगदीश प्रसाद गोयल पुलिस टीम के साथ गांव में रहने वाली छायाबाई के पिता को ले कर मोहनखेड़ी पहुंचे. पुलिस को देख कर गांव वालों की भीड़ भी संतोष गोलकर के नए बने मकान के सामने जमा हो गई.

दरअसल 2 दिन पहले गांव में अपने पिता के घर पर रहने वाली 25 वर्षीय छायाबाई अचानक लापता हो गई थी. जिस दिन छायाबाई लापता हुई, उसी रोज संतोष भी गांव से गायब था. दोनों का पे्रम प्रंसग पूरे गांव के लोगों की जुबान पर था, इसलिए गांव वालों का मानना था कि संतोष ही छायाबाई को ले कर भाग गया.

लेकिन छायाबाई के पिता को शक था कि उस की बेटी को संतोष ने अपने नए मकान में छिपा रखा है. इसी बात की जांच करने के लिए पुलिस मोहनखेड़ी आई थी.

संतोष के मकान में ताला पड़ा था. गांव में रहने वाले उस के मातापिता भी गायब थे. इसलिए पुलिस ने ताला तोड़ कर पूरे घर की तलाशी ली, लेकिन वहां केवल छिपकली और मकडि़यों के अलावा कोई तीसरा जीव दिखाई  नहीं दिया. इसलिए पुलिस टीम वापस लौट आई.  गांव वाले तो पहले ही मान चुके थे कि छायाबाई संतोष के साथ कहीं भाग गई है. अब पुलिस ने भी ऐसा ही मान लिया, लेकिन ऐसा मानने वालों के बीच केवल छायाबाई का परिवार ही ऐसा था, जो इस बात को मानने को राजी नहीं हो रहा था.

इसलिए  उन के बारबार कहने पर संतोष के मकान में एक कमरे के फर्श की खुदाई भी कर के देखी गई, लेकिन कुछ हाथ नहीं आया. धीरेधीरे गांव के लोग छायाबाई और संतोष को भूलने लगे और अपने कामों में जुट गए थे.

लेकिन छायाबाई के पिता लगातार बेटी की खोज में लगे हुए थे. कोई महीने भर बाद संतोष के बंद पडे़ मकान से आने वाली अजीब सी बदबू से लोग परेशान होने लगे. पहले तो लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन बदबू लगातार बढ़ने से पड़ोसियों का ध्यान संतोष के बंद मकान पर गया.

इस बात की खबर छायाबाई के पिता को लगी तो वह दौड़ेदौड़े अपने समाज के नेता के पास पहुंचे और उन्हेें सारी बात बताई. वह नेता छायाबाई के पिता को खंडवा एसपी के पास ले गया और एसपी को सारी कहानी से अवगत कराया. संतोष छायाबाई के लापता होने के मामले में संदिग्ध तो था ही, इसलिए उस के मकान से आने वाली बदबू की जानकारी को खंडवा एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने गंभीरता से लिया.

उन के निर्देश पर एएसपी (ग्रामीण) जितेंद्र पंवार ने एसडीपीओ प्रवीण कुमार उइके के नेतृत्व में एक पुलिस टीम प्रशासनिक अधिकारियों के साथ 27 जनवरी, 2021 को एक बार फिर मोहनखेड़ी भेजी.

संतोष गोलकर का मकान खोलते ही बदबू का तेज झोंका आने से पुलिस समझ गई की यह मांस सड़ने की बदबू है. इसलिए पूरे मकान की बारीकी से जांच की गई. जिस से पता चला कि तीसरे कमरे के फर्श में ताजा सीमेंट लगाया गया है.

इसलिए शक के आधार पर पुलिस ने उस जगह की खुदाई करवाई तो डेढ़ फुट नीचे एक कान की बाली और लगभग ढाई फुट नीचे एक लेडीज चप्पल मिली. जिन के बारे में बताया कि ये दोनों ही चीजें छायाबाई की हैं.

hindi-manohar-family-crime-story

खुदाई की गहराई बढ़ने के साथ बदबू भी बढ़ती जा रही थी. वास्तव में पुलिस का शक उस समय सही साबित हुआ, जब कोई 4 फुट की गहराई पर छायाबाई का सड़ागला शव बरामद हो गया.

इस के बाद जांच के लिए एफएसएल अधिकारी सुनील मकवाना भी पहुंच गए. जांच के बाद उन्होंने शव को लगभग एक महीने पुराना बताया. जिस के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. लेकिन शव की हालत अत्यधिक खराब होने की वजह से उस का पोस्टमार्टम इंदौर के एमवाई अस्पताल में किया गया.

जाहिर सी बात है कि अब तक पुलिस का मानना था कि संतोष छायाबाई को ले कर भाग गया है. लेकिन अब छायाबाई की लाश संतोष के मकान में दफन मिल चुकी थी. जबकि संतोष और उस का परिवार गायब था. इसलिए पुलिस का सीधा शक यही था की संतोष ने ही छायाबाई की हत्या की है.

चूंकि उस के परिवार के सभी सदस्य गायब थे, इसलिए वे भी शक के घेरे में थे. एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक टीम गठित कर दी, जिस ने मुखबिरों से मिली सूचना के आधार पर 6 फरवरी, 2021 को संतोष की मां सकुबाई, भाई सुनील एवं बुआ के बेटे अनिल को गिरफ्तार कर लिया.

संतोष की तलाश पुलिस तत्परता से कर रही थी. जिस के चलते टीआई जगदीश प्रसाद गोयल की टीम में शामिल एसआई अंतिमवाला भूरिया, एएसआई लक्ष्मीनारायण पाल, प्रधान आरक्षक नंदकिशोर राय, आरक्षक अभिलाष डोंगरे, जितेंद्र, कांस्टेबल अंजली रिछारिया एवं कमलेश की टीम ने सूचना मिलने पर उसे बैतूल से गिरफ्तार कर लिया. इस के बाद यह कहानी कुछ इस तरह सामने आई—

16 साल की उम्र में छायाबाई की शादी पास के ही गांव एकतासा में रहने वाले युवक  के साथ हुई थी. दोनों के 3 बच्चे भी हुए किंतु दोनों के बीच रिश्ता कुछ यूं बिगड़ा कि छायाबाई अपने पति का घर छोड़ कर मोहनखेड़ी में पिता के घर आ कर रहने लगी.

मोहनखेड़ी में ही संतोष भी रहता था. संतोष छायाबाई की उम्र का था और छायाबाई की शादी से पहले वह उस की गली में चक्कर लगाया करता था. संतोष की दीवानगी की जानकारी छायाबाई को भी थी, लेकिन उन का इश्क परवान चढ़ पाता, उस से पहले ही छायाबाई की शादी हो गई थी. इस के बाद यह कहानी वहीं खत्म हो गई थी.

कुछ दिन बाद संतोष की भी शादी हो गई. लेकिन करीब 3 साल पहले ही उस की पत्नी भी उसे छोड़ कर अपने मायके में जा कर रहने लगी. संतोष ने कुछ दिनों तक तो ध्यान नहीं दिया, लेकिन पत्नी की गैरमौजूदगी में शारीरिक जरूरतें परेशान करने लगीं तो उसे छायाबाई का ध्यान आया जो खुद भी अपने पति को छोड़ कर बैठी थी. इसलिए उस ने अगले दिन ही छायाबाई की खातिर उस की गली में चक्कर लगाने शुरू कर दिए.

छायाबाई भी कई साल से पति से अलग रह रही थी. जैसे ही उस ने संतोष को देखा तो उसे अपने किशोर उम्र की याद आ गई, जब संतोष उस के लिए गली में चक्कर लगाया करता था.

इसलिए एक दिन छायाबाई ने भी मौका देख कर उसे सकारात्मक संदेश दे दिया. जिस के 4 दिन बाद ही दोनों गांव के बाहर एकांत में मिले और अपनी हसरतें पूरी कर प्यार के बंधन में बंध गए.

छायाबाई मायके में रहते हुए अपने मातापिता के ऊपर बोझ नहीं बनना चाहती थी. इसलिए वह गांव के कुछ घरों में झाड़ूपोंछा करने लगी थी. वह सुबह घर से निकल कर पहले अपना काम करती थी फिर सीधे संतोष के पास पहुंच जाती थी, जहां दोनों एकदूसरे के तन की प्यास पूरी करते थे. फिर छायाबाई वापस घर चली जाती थी.

दोनों एकांत में रोज मिला करते थे, इसलिए इस बात की जानकारी गांव वालों को हो गई थी. छायाबाई के परिवार तक भी यह खबर पहुंच चुकी थी. पिता ने अपनी बेटी को समझाने की कोशिश की, लेकिन मामला हाथ से निकल चुका था.

इधर छायाबाई के साथ घर बसाने की ठान चुके संतोष ने अपना खेत बेच कर छायाबाई के लिए सपनों का घर बनवा दिया था. कुछ दिनों में संतोष का मकान बन कर तैयार हो गया तो वह छायाबाई को इस मकान में ला कर अय्याशी करने लगा.

बताया जाता है कि इसी दौरान छायाबाई की नजरें गांव के ही एक दूसरे युवक से लड़ गई थीं. वह संतोष की तुलना में रईस और जवान था. इसलिए छायाबाई संतोष से दूर जाने की कोशिश करने लगी.

इस बात की जानकारी लगने पर संतोष काफी खफा था. बताया जाता है कि उस ने छायाबाई की हत्या की योजना पहले से ही बना रखी थी. इसलिए उस ने पानी का एक अंडरग्राउंड टैंक बनाने के नाम पर एक कमरे में गहरा गड्ढा खुदवा लिया था. जिस के बाद उस ने 24 दिसंबर की रात को छायाबाई को अपने घर बुला कर पहले तो उस के साथ संबंध बनाए और फिर इसी दौरान मौका पा कर उस का गला दबा कर हत्या कर के शव को गड्ढे में डाल कर उस के ऊपर मिट्टी डाल दी और फरार हो गया.

उस ने सोचा था कि घर के अंदर लाश की खबर पुलिस को कभी नहीं मिल पाएगी. लेकिन एक महीने के बाद मकान से आ रही बदबू के बाद शक होने पर पुलिस ने लाश बरामद कर हत्या में सहयोग करने वाली संतोष की मां, भाई और अन्य 2 को गिरफ्तार कर लिया.

छायाबाई के लापता होने पर उस के पिता को उस की हत्या का शक हो गया था. इसलिए पिता के कहने पर पुलिस ने पहले भी एक बार संतोष के घर नए पर बने फर्श की खुदाई लाश की तलाश करने के लिए की थी. लेकिन उस समय कुछ नहीं मिला था. लेकिन बदबू आने पर जब दूसरे कमरे में खुदाई की गई तो वहां से छायाबाई का शव बरामद हुआ. गिरफ्तार किए मुख्य आरोपी संतोष के भाई ने बताया कि छायाबाई की हत्या कर लाश को गड्ढे में दबाने वाली बात संतोष ने सुबह घर आ कर बताई थी. इस के बाद वह घर से भाग गया था. संतोष के भाग जाने के बाद घर वालों ने पुलिस से बचने के लिए खुदाई वाली जगह पर फर्श बनवा दिया और घर का ताला लगा कर फरार हो गए.

पुलिस ने सभी आरोपियों से पूछताछ के बाद उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.

पति और कातिल, दोनों में से कौन बड़ा हैवान – भाग 3

मौसी ने पूछा तो उस ने शराब के नशे में बताया कि उस से एक बड़ा गुनाह हो गया है. उस ने किसी औरत को मार दिया है. मौसी ने पुलिस को बताया कि यह सुन कर वह बहुत डर गई थी, इसलिए उस ने रामवीर से कह दिया कि वह तुरंत यहां से चला जाए. क्योंकि वह किसी पचड़े में नहीं पड़ना चाहती.

रामवीर तक पहुंचने के लिए उस की मौसी अंतिम सिरा थी, जहां से उस के मिलने की उम्मीद थी, लेकिन इस के बाद पुलिस को उस की कोई खबर नहीं मिली.

रामवीर तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं बचा था, लिहाजा एसीपी अंकिता शर्मा ने क्राइम ब्रांच की साइबर टीम को जांच के काम में साथ जोड़ कर रामवीर के मोबाइल को ट्रैक करने के काम पर लगा दिया.

रामवीर के मोबाइल की ट्रैकिंग के दौरान पुलिस को पता चला कि रामवीर लगातार सोनी के पति संदीप के साथ बातचीत कर उस के साथ संपर्क में बना हुआ था. पुलिस ने जब संदीप से पूछा कि क्या रामवीर साहू ने उस के साथ संपर्क किया है तो वह साफ मुकर गया कि रामवीर ने उस के साथ कोई संपर्क किया है.

पुलिस टीम समझ गई कि दाल में कुछ काला है जिस कारण संदीप सफेद झूठ बोल रहा है. पुलिस ने संदीप को बिना कुछ बताए उस के और रामवीर के मोबाइल की मौनिटरिंग और उस पर नजर रखनी शुरू कर दी.

7 फरवरी, 2022 को दोपहर में मोबाइल ट्रैकिंग से पता चला कि वे दोनों महामाया फ्लाईओवर के नीचे आपस में मिलने वाले हैं. इस सूचना के बाद थानाप्रभारी बी.एस. राठी ने अपनी टीम के साथ सादा कपड़ों में आसपास छिप कर निगरानी शुरू कर दी.

दोपहर करीब 3 बजे रामवीर साहू पहचान छिपाने के लिए सिर पर कपड़े का साफा बांध कर संदीप से मिलने पहुंचा तो पुलिस ने उन दोनों को हिरासत में ले लिया.

पुलिस की टीम दोनों को ले कर थाने पहुंची और उन से पूछताछ हुई तो मामूली पूछताछ के बाद ही सोनी यादव की हत्या का खुलासा हो गया.

दरअसल, संदीप ने बताया कि उसी ने अपनी पत्नी सोनी की हत्या रामवीर साहू के द्वारा पैसा दे कर करवाई थी.

संदीप की जब सोनी से शादी हुई तब दोनों की जिंदगी बेहद खुशहाल थी और संदीप सोनी को प्यार भी बहुत करता था. लेकिन एक दिन सोनी जब बाथरूम में नहा रही थी तो संदीप ने वैसे ही उस का मोबाइल चैक कर लिया.

उस दिन संदीप यह देख कर हैरान रह गया कि उस की बीवी सोनी उसे धोखा दे रही थी. शादी से पहले से ही उस के अपने गांव के अजय से संबंध थे. संदीप ने सोनी की सच्चाई उस पर उजागर नहीं होने दी, लेकिन इस दिन के बाद से वह सोनी से छुटकारा पाने की तरकीब सोचने लगा.

सोनी से छुटकारा पाने की सोच के पीछे एक दूसरी वजह यह भी थी कि अपनी ससुराल कासगंज में आतेजाते संदीप अपनी सब से छोटी साली रानी, जो सभी बहनों में सब से ज्यादा सुंदर थी, को पसंद करने लगा था.

सोनी से छुटकारा पाने की एक वजह यह भी थी कि डेढ़ साल होने को आया लेकिन अभी तक सोनी के मां बनने की कोई गुंजाइश नहीं बनी तो संदीप ने डाक्टरों को दिखाया तो उन्होंने बताया कि सोनी के मां बनने की संभावना बहुत कम है.

संदीप के पास सोनी से छुटकारा पाने की 3 वजह हो गई थीं. अब वह किसी भी हालत में सोनी से छुटकारा पा कर अपनी साली से शादी करने का फैसला कर चुका था.

संदीप ने फैसला किया कि अगर सही योजना बना कर सोनी की हत्या करवा दी जाए तो रानी से शादी का रास्ता साफ हो सकता है.

इस काम को कैसे अंजाम दिया जाए, यह बात सोच ही रहा था कि 19 जनवरी को अचानक उस की कालोनी में रहने वाला रामवीर जो उस का दोस्त भी बन चुका था, शाम को हमेशा की तरह दारू पीने के बाद उस के पास कचौरी खाने आया.

काम खत्म करने की तैयारी कर रहे संदीप से अचानक रामवीर ने अपनी आर्थिक तंगी का रोना रोते हुए कह दिया कि जिंदगी में पैसा बहुत बड़ी चीज है. इस को हासिल करने के लिए किसी का खून भी करना पड़े तो कर देना चाहिए.

रामवीर के मुंह से यह बात सुनते ही संदीप के दिमाग की बत्ती जलने लगी, उसे लगा कि अगर बात बढ़ाई जाए तो रामवीर उस का काम कर सकता है.

‘‘तो भाई कर दे तू भी खून. कमा ले पैसा.’’ संदीप ने अपनी तरफ से रामवीर को परखने के लिए पत्ता फेंका.

‘‘अरे भाई ऐसे ही किसी का खून कैसे कर दूं. कोई काम बताए, माल दे तभी तो करूं ये काम भी.’’

‘‘अगर मैं कोई काम बताऊं तो करेगा?’’ संदीप ने लोहा गरम होते देख तुरंत पूछ लिया.

‘‘तुझे किस का काम कराना है और तू पैसा कहां से देगा,’’ रामवीर की पुतलियां भी सोच में सिकुड़ गईं.

‘‘वो छोड़, तुझे तेरे काम का पैसा मिलेगा. पहले ये बता काम करेगा,’’ संदीप ने पूछा.

‘‘हां भाई, माल देगा तो काम क्यों नहीं करूंगा.’’ रामवीर ने उत्साहित होते हुए कहा.

‘‘तो ठीक है, मेरी बीवी को मार दे, पूरे 70 हजार रुपए दूंगा.’’

‘‘अबे पागल हो गया है क्या तू, जो अपनी बीवी को मरवाना चाहता है?’’ रामवीर ने फटी आंखों से पूछा.

‘‘वजह एक नहीं कई हैं भाई. एक तो कमीनी का शादी के पहले से ही गांव में किसी यार से चक्कर चल रहा है. दूसरा वह मां नहीं बन सकती और तीसरा मुझे उस की छोटी बहन बहुत पसंद है. इस का काम तमाम हो जाए तो मैं उस से शादी कर लूंगा.’’ संदीप ने इस दिन अपने मन की बात रामवीर को बताई तो उस ने कहा कि अभी शराब बहुत पी ली है. वह काम करेगा या नहीं, इस बारे में सोच कर कल बताएगा.

मामला बनता देख संदीप ने चलते समय रामवीर को 3 हजार रुपए दे दिए. रामवीर फिर से शराब के ठेके पर गया और फिर शराब पी और रात को घर चला गया. रामवीर ने सुबह शराब का नशा उतर जाने पर संदीप की कही बातों पर विचार किया तो काफी सोचविचार कर दोपहर एक बजे फिर से महामाया फ्लाईओवर के नीचे संदीप के ठिकाने पर पहुंच गया.

संदीप ने उस से पूछा, ‘‘क्या इरादा किया भाई?’’

‘‘इरादा तो ठीक है भाई, लेकिन तूने अपनी बीवी के मौत की कीमत बहुत कम लगाई है.’’

‘‘क्यों, तुझे कितना चाहिए?’’ संदीप ने पूछा.

‘‘देख, तू अपना दोस्त है तेरी परेशानी भी जायज है. लेकिन भी अगर कम से कम डेढ़ लाख खर्च करे तो काम किया जा सकता है.’’

थोड़ी देर तक संदीप और रामवीर के बीच कत्ल करने के लिए दी जाने वाली रकम को ले कर सौदेबाजी होती रही.

जब संदीप ने देखा कि रामवीर इस से कम पैसा लेने के लिए टस से मस नहीं हो रहा तो उस ने कहा, ‘‘ठीक है भाई, तुझे इतने ही पैसे मिलेंगे लेकिन काम बड़ी सफाई से होना चाहिए. काम होते ही सुबह पैसे दे दूंगा.’’ कहते हुए संदीप ने जेब से 2 हजार रुपए और निकाले और रामवीर की तरफ बढ़ाते हुए कहा, ‘‘हो सके तो आज ही काम कर दे. शाम तक कालोनी में वैसे भी सन्नाटा रहेगा, मैं यहां हूं और सोनी घर में अकेली है. बस, जा कर ठिकाने लगा दे.’’

सारी बात तय हो गई तो डेढ़ लाख में सोनी को मारने की बात कह कर रामवीर वहां से निकल गया. उस ने उसी समय अपना मोबाइल भी बंद कर दिया. क्योंकि उस ने टीवी सीरियलों में देखा था कि मोबाइल की लोकेशन से पुलिस कातिल को खोज लेती है.

सब से पहले वह निकट के शराब ठेके पर पहुंचा. जम कर शराब पी. उस के बाद करीब 4 बजे संदीप के घर पहुंच कर दरवाजा खटखटाया.

उस वक्त पूरी कालोनी में सन्नाटा पसरा हुआ था. सोनी ने अंदर से ही पूछा, ‘‘कौन है?’’ तो उस ने बता दिया, ‘‘भाभीजी, मैं हूं साहू. संदीप ने आप को देने के लिए पैसे भेजे हैं.’’ रामवीर ने बात ही ऐसी की थी कि सोनी ने दरवाजा खोल दिया. वैसे भी वह साहू को जानती थी.

लेकिन जैसे ही सोनी ने दरवाजा खोला रामवीर ने उस के चेहरे पर एक जोरदार घूंसा मारा. सोनी की नाक पर घूंसा लगते ही उस की आंखों के सामने अंधेरा छा गया. वह चीखते हुए कमरे के बीचोंबीच फर्श पर गिर पड़ी.

इतना मौका काफी था रामवीर के लिए. वह झट से कमरे में घुसा और दरवाजा भीतर से बंद कर जमीन पर पड़ी सोनी की तरफ पलटा. लेकिन कुछ पलों के लिए अचेत हुई सोनी पर निगाह पड़ते ही शराब के नशे में धुत रामवीर की आंखों में वासना के डोरे तैरने लगे.

दरअसल, चेहरे पर वार होने से संतुलन खो कर गिरने वाली सोनी के कपड़े इस कदर अस्तव्यस्त हो गए कि जांघों तक दिख रही सोनी की नग्न गोरी देह को देख कर रामवीर के शरीर के रोंगटे खड़े हो गए.

उस ने सोचा कि सोनी को मारना तो है ही, क्यों न उस से पहले वह अपनी वासना की आग बुझा ले. यही सोच कर उस ने उस के साथ जमीन पर ही शारीरिक संबंध बनाने शुरू कर दिए.

लेकिन अपनी उत्तेजना के अतिरेक में वह कुछ करता, उस से पहले ही सोनी की चेतना लौट आई और वह शोर मचाने को कोशिश करते हुए विरोध करने लगी.

एक तो शराब का नशा, ऊपर से वासना का जुनून, सोनी रामवीर के लंबेचौड़े शरीर के नीचे दबी पड़ी थी. उस को शांत करने के लिए रामवीर ने सोनी के सिर को दोनों कनपटी से पकड़ कर 3-4 बार फर्श पर पटक दिया. सोनी कुछ पल छटपटाई, फिर उस का शरीर शांत हो गया.

लेकिन सोनी के शांत होते ही रामवीर के भीतर वासना का उफान आ गया. इस बात से अनजान कि सोनी की मौत हो चुकी है, रामवीर उस के जिस्म से खेलते हुए अपनी कामवासना शांत करता रहा.

जब वासना का भूत उतरा तो देखा कि अचेत पड़ी सोनी के सिर से काफी खून बह चुका था और वह मर चुकी थी. उस ने सोनी की साड़ी को घुटनों से नीचे कर दिया. कई बार उस के शव को हिला कर देखा कि उस में जान तो नहीं बाकी है.

करीब 5 बजे रामवीर ने घर का दरवाजा खोल कर देखा कि बाहर कोई है तो नहीं और उस के बाद रास्ता साफ देख कर वह कमरे का दरवाजा बंद कर के वहां से फरार हो गया. वारदात को अंजाम देने के बाद वह इतना सहम गया कि संदीप से भी संपर्क नहीं किया.

रामवीर ने 2 दिन तक अपना मोबाइल फोन भी औन नहीं किया. जब संदीप को बाद में पुलिस ने यह बात बताई कि उस के कातिल ने मौत के बाद इस के साथ संबंध बनाए थे तो उस को रामवीर पर बहुत गुस्सा आया.

कुछ दिन बाद गिरफ्तारी के डर से इधरउधर भागते फिर रहे रामवीर ने जब पैसे मांगने के लिए संदीप से फोन पर बात करते हुए संपर्क करना शुरू किया, तभी पुलिस को मोबाइल सर्विलांस के जरिए संदीप पर भी शक होना शुरू हो गया.

इस मामले में न तो मोबाइल फोन की काल डिटेल्स से कोई मदद मिली. क्योंकि कातिल और साजिश रचने वाले के बीच कोई फोन संपर्क रिकौर्ड ही नहीं था. न ही रामवीर अपने फोन को औन कर के घटनास्थल पर गया था. न ही घटना का कोई चश्मदीद था, न ही रामवीर को घटनास्थल पर जाते किसी सीसीटीवी ने कैद किया था. इसलिए पुलिस अंधेरे में हाथपांव मार रही थी.

लेकिन अपने डर के कारण अगर रामवीर अपना घर छोड़ कर गायब नहीं होता और बाद में वह फोन पर संदीप से संपर्क नहीं करता तो शायद पुलिस कभी सोनी के हत्यारों तक पहुंच ही नहीं पाती.

अपनी साली को पाने की चाहत में संदीप ने अपनी बेवफा बीवी को मरवाने की साजिश रच कर जो घिनौना अपराध किया वो तो गलत था ही, लेकिन रामवीर ने सोनी की हत्या कर उस के मृत शरीर से वासना की जो भूख शांत की, वह हैवानियत की सभी सीमाओं से परे थी.

संदीप और रामवीर से पूछताछ के बाद पुलिस ने हत्या के इस मामले में साजिश की धारा 120बी जोड़ कर दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर दिया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

—कथा पुलिस की जांच व आरोपियों से पूछताछ पर आधारित

पति और कातिल, दोनों में से कौन बड़ा हैवान – भाग 2

सोनी के घर वालों से कत्ल और कातिल का कोई सुराग नहीं मिला था. इसलिए सेक्टर-126 थाने की पुलिस ने आसपड़ोस के लोगों से भी पूछताछ की ताकि पता चल सके कि सोनी का चालचलन कैसा था और संदीप की गैरमौजूदगी में किसी ने उस के घर में किसी को आतेजाते तो नहीं देखा था. लेकिन कालोनी के लोगों से पूछताछ में भी कोई मदद नहीं मिली.

अब बारी थी संदीप से कुछ अहम मुद्दों पर पूछताछ करने की. संदीप ने पुलिस को बताया कि उस की पत्नी के शायद अपने ही गांव के अजय नाम के लड़के से शादी से पहले ही संबंध थे. संदीप ने आशंका जताई कि हो सकता है उस ने ही सोनी को मार दिया हो.

यह जानकारी बेहद महत्त्वपूर्ण थी. इसलिए पुलिस की एक टीम उसी दिन कासगंज रवाना हो गई और अजय को हिरासत में ले कर नोएडा ले आई.

दरअसल, अजय को पूछताछ के लिए लाने का आधार यह था कि पुलिस ने संदीप से मिली जानकारी के आधार पर सोनी के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई और जब उसे खंगाला गया तो पता चला कि सोनी और अजय के बीच हर दिन कई बार फोन पर लंबीलंबी बातें होती थीं और वाट्सऐप पर मैसेज का आदानप्रदान भी होता था.

मोबाइल काल डिटेल्स की रिपोर्ट साफ बता रही थी कि दोनों के बीच साधारण संबंध नहीं थे. अजय से जब पूछताछ हुई तो पहले उस ने पुलिस को बरगलाने का प्रयास किया, लेकिन जब उस के साथ सख्ती की गई तो वह टूट गया और कुबूल कर लिया कि सोनी के साथ उस के पिछले कई सालों से संबंध थे.

सोनी की जब से शादी हुई थी, इस के बाद भी जब वह अपने गांव आती थी तो दोनों मौका मिलने पर एकांत में मिल कर अपनी पुरानी मोहब्बत की यादों को ताजा करते रहते थे.

थानाप्रभारी राठी ने जब अजय का मोबाइल फोन चैक कराया तो उन्हें उस में सोनी तथा अजय के कुछ ऐसी अवस्था के फोटो मिले जो दोनों के बीच के नाजायज रिश्ते को साबित करते थे.

लेकिन अजय के फोन की काल डिटेल्स रिपोर्ट और उस की लोकेशन से कहीं भी यह साबित नहीं हो रहा था कि वह सोनी की हत्या वाले दिन या उस से पहले नोएडा आया था या फिर उस ने किसी संदिग्ध नंबर पर बात की थी.

इंसपेक्टर राठी एक बात तो अच्छी तरह समझ गए कि अजय और सोनी के बीच संबंध होने के बावजूद अजय के पास सोनी की हत्या का कोई मोटिव नहीं था, लेकिन संदीप जिस को यह बात पता थी कि उस की बीवी के अजय से संबंध हैं तो उस के पास तो सोनी की हत्या करने का पुख्ता आधार था.

‘एक सीधे से दिखने वाले अनपढ़ आदमी ने पुलिस को कैसे अपने जाल में फंसा कर गुमराह कर दिया,’ बड़बड़ाते हुए राठी ने मुक्का मेज पर मारते हुए उसी समय एसआई राजेंद्र सिंह को तत्काल सोनी के पति संदीप यादव की काल डिटेल्स निकलवाने का आदेश दिया.

थानाप्रभारी राठी को न जाने क्यों यकीन होने लगा था कि सोनी की हत्या के पीछे कहीं न कहीं संदीप का हाथ हो सकता है, इसीलिए उन्होंने उस की काल डिटेल्स निकलवाई थी. लेकिन उस में कोई ऐसी जानकारी, संदिग्ध नंबर या लोकेशन नहीं मिली, जिस से इस मामले में अजय की भूमिका को साबित किया जा सके.

एक सप्ताह बीत चुका था पुलिस को सोनी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल गई थी. जिस बात का शक था वही हुआ. लक्ष्मी की मौत सिर में चोट लगने से हुई थी. इतना ही नहीं, उस की मौत के बाद उस के साथ शारीरिक संबंध भी बनाया गया था.

बस यही वो कारण था जिस की वजह से पुलिस को संदीप यादव पर किए गए शक से अपना ध्यान हटाना पड़ा. क्योंकि कोई भी पति किसी दूसरे आदमी को अपनी पत्नी की हत्या के बाद उस के शव के साथ ऐसा घिनौना काम न तो खुद करेगा न ही किसी दूसरे को करने देगा.

संदीप को संदेह से बाहर करने का दूसरा कारण यह भी था कि एक तो उस की काल डिटेल्स में कोई संदिग्ध बात नहीं मिली.

दूसरे महामाया फ्लाईओवर के नीचे रेहड़ी पटरी लगाने वाले कई लोगों से पूछताछ के बाद इस बात की पुष्टि भी हो गई थी कि संदीप यादव उस शाम को हमेशा की तरह शाम को 6 बजे अपना काम खत्म कर के साइकिल ले कर वहां से गया था.

इस के बाद संदीप पर शक करने की कोई वजह पुलिस के पास नहीं थी. राठी ने एक बार फिर से घटनास्थल के आसपास रहने वाले लोगों से पूछताछ करने का फैसला किया.

इसी कड़ी में पुलिस इलाके के हर घर में जा कर पूछताछ कर रही थी, लेकिन पुलिस ने तब पहली बार नोटिस किया कि एक प्लौट पर बना कमरा ऐसा था, जो घटना वाली रात को पूछताछ करते हुए भी पुलिस को बंद मिला और एक सप्ताह बाद जब पुलिस ने दोबारा छानबीन की तब भी बंद पाया गया.

पुलिस ने जब आसपास के लोगों से इस मकान में रहने वाले शख्स के बारे में पूछा तो पता चला कि बुलंदशहर के छतारी कस्बे का रहने वाला रामवीर साहू उस कमरे में रहता है.

रामवीर साहू पहले तो गुड़ बेचने का काम करता था, लेकिन 3-4 महीनों से वह आटोरिक्शा चलाने का काम कर रहा था. लोगों ने बताया कि जिस दिन सोनी की हत्या हुई, उस दिन सुबह के वक्त तो वह अपने घर में दिखा था, लेकिन इस के बाद से वह किसी को दिखाई नहीं दिया.

यह जानकारी साहू को संदेह के दायरे में लाने के लिए काफी थी. पुलिस ने जब संदीप यादव से रामवीर साहू के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि कालोनी में रहने के कारण उस की साहू से जानपहचान तो है लेकिन वह उस के बारे में बहुत अधिक नहीं जानता.

संदीप ने बताया कि कभीकभी साहू महामाया मेट्रो स्टेशन के नीचे जहां वह कचौरी बेचता है, सवारी लेने के लिए आ कर खड़ा हो जाता था. संदीप ने बताया कि इसी कारण अकसर उस की साहू से बातचीत हो जाती थी.

संदीप और कालोनी के दूसरे लोगों से साहू के बारे में जो सब से महत्त्वपूर्ण जानकारी मिली, वह यह थी कि वह अकसर शराब के नशे में रहता था. शराब तो मजदूर तबके के ज्यादातर लोग पीते हैं लेकिन साहू एक तरह से शराब का लती था. दिन हो या रात, वह अकसर शराब के नशे में दिख जाता था.

साहू के बारे में कुछ और जानकारी एकत्र की गई तो पता चला कि वह अविवाहित था और इस इलाके में आने से पहले अपनी बहन के पास छलेरा गांव में रहता था.

रामवीर साहू थानाप्रभारी राठी के रडार पर आ चुका था. उन्होंने साहू की बहन का पता हासिल कर लिया और छलेरा में जा कर जब उस की बहन से उस के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि 20 जनवरी, 2022 की रात को वह उस के पास आया था लेकिन उस ने बहुत शराब पी रखी थी.

अगली सुबह जब उस ने साहू को शराब पी कर अपने घर आने की बात पर खरीखोटी सुनाई तो वह दोपहर को वहां से गांव जाने की बात कह कर चला गया. साहू के बारे में जैसेजैसे जानकारियां मिल रही थीं, उस के खिलाफ शक का दायरा बढ़ता जा रहा था.

सोनी हत्याकांड की जांच में अब तक हुई प्रगति के बारे में जब एडीसीपी रणविजय सिंह को साहू के बारे में तमाम जानकारियां मिलीं तो उन्होंने थानाप्रभारी राठी को उस के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाने के लिए कहा.

राठी ने काल डिटेल्स निकलवा कर उस के फोन को ट्रेसिंग पर भी लगवा दिया. एसआई राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में पुलिस की एक टीम लगातार साहू के पीछे लगी थी. पुलिस टीम बुलंदशहर में उस के गांव छतारी पहुंची तो पता चला कि साहू 21 जनवरी को अपने गांव आया तो था लेकिन गांव में कोई नहीं था.

क्योंकि उस का एक भाई दिल्ली के शाहदरा इलाके में रहता है. उस की बेटी की 10 फरवरी को शादी थी. उसी में शरीक होने के लिए मातापिता और परिवार के दूसरे लोग गए हुए थे.

पुलिस की एक टीम रामवीर साहू के भाई अजयवीर के घर का पता ले कर वहां पहुंची तो पता चला कि 23 जनवरी को रामवीर वहां आया जरूर था, लेकिन परिवार को उस का शराब पीना पसंद नहीं था और उस ने खूब शराब पी हुई थी. इसलिए परिवार वालों ने उसे वहां से यह कह कर भगा दिया कि उन के यहां शराबियों के लिए कोई जगह नहीं है.

पुलिस टीम को वहीं से यह जानकारी मिली कि रामवीर की एक मौसी इंद्रवती उत्तरपूर्वी दिल्ली के घड़ौली में रहती है, जिन से उस की खूब पटती भी है. हो सकता है रामवीर उन के यहां गया हो.

मौसी का पता ले कर जब पुलिस टीम घड़ौली में उस की मौसी इंद्रवती के घर पहुंची तो पता चला कि 25 जनवरी को रामवीर उन के यहां आया था, लेकिन वह काफी शराब पिए हुए था और काफी डरासहमा हुआ था.

पति और कातिल, दोनों में से कौन बड़ा हैवान – भाग 1

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-94 में एक गांव है नोरंगाबाद. इस गांव में छलेरा गांव के जिन लोगों की जमीन नोएडा अथारिटी ने अधिग्रहीत की थी, उन्हें इस के बदले में मुआवजे के साथ अलगअलग साइज के प्लौट भी नियम के अनुसार यहां आवंटित किए गए थे.

चूंकि अभी इस इलाके में ज्यादा आबादी और विकास नहीं हुआ है, इसलिए जिन लोगों को यहां प्लौट मिले थे, उन में से कुछ ने अपने प्लौट की घेराबंदी कर के उस में एक या 2 कमरे बना कर उन्हें मजदूर तबके के लोगों को किराए पर दे दिया. सेक्टर 94 के इस इलाके में अभी सिर्फ मजदूर पेशा लोगों के ही 15 से 20 परिवार किराए पर रहते हैं. इस इलाके में बिजली पानी तो है लेकिन घनी आबादी न होने के कारण शाम होते ही यहां सन्नाटा पसर जाता है.

इसी इलाके में छलेरा गांव के रहने वाले चरणसिंह का भी प्लौट था, जिस में उन्होंने बाउंड्री करवा कर उस में एक कमरा, शौचालय, स्नानघर और रसोई बना कर उसे किराए पर दिया हुआ था.

पिछले डेढ़ साल से इस कमरे में मूलरूप से अलीगढ़ का रहने वाला संदीप यादव (24) अपनी पत्नी सोनी यादव (22) के साथ किराए पर रहता था. संदीप की डेढ़ साल पहले ही कासगंज की रहने वाली सोनी से शादी हुई थी.

दोनों की शादी कोरोना के बीच लौकडाउन के दौरान हुई थी. संदीप पहले सेक्टर-94 में ही हिंडन बैराज के पास किराए के किसी दूसरे कमरे में अपने एक दोस्त के साथ रहता था. लेकिन शादी के बाद गृहस्थी होने के कारण उस ने चरण सिंह का मकान किराए पर ले लिया.

संदीप शादी से पहले तो नोएडा में एक बड़े ढाबे पर काम करता था. लेकिन लौकडाउन के बाद जब नौकरी चली गई और शादी हो गई तो पेट पालने और जीवन चलाने के लिए उस ने महामाया फ्लाईओवर के नीचे साइकिल पर ही आलू की सब्जी और खस्ता कचौरी बेचने का काम शुरू कर दिया.

संयोग से काम भी ठीकठाक चलने लगा और संदीप नौकरी से ज्यादा अपने काम से पैसा कमाने लगा. कुल मिला कर घरगृहस्थी मजे से चलने लगी.

अपने घर पर ही पत्नी सोनी की मदद से वह सुबह के वक्त खस्ता कचौरी और सब्जी खुद तैयार करता और फिर साइकिल पर रख कर उसे बेचने के लिए हर सुबह 10 से 11 बजे तक महामाया फ्लाईओवर के नीचे पहुंच जाता और शाम को 5 बजे तक अपना माल बेच कर वापस घर लौट जाता था.

20 जनवरी को भी संदीप यादव हर रोज की तरह सुबह करीब साढ़े 10 बजे साइकिल पर कचौरी और सब्जी ले कर सेक्टर-94 स्थित घर से निकला था और शाम को करीब 7 बजे घर लौटा.

घर के बाहर साइकिल खड़ी करने के बाद हमेशा की तरह संदीप ने सोनी को बाहर से ही दरवाजा खोलने के लिए आवाज लगाई. लेकिन काफी देर तक जब दरवाजा नहीं खुला तो उस ने दरवाजे को धकेलते हुए थोड़ा कड़ी आवाज में कहा क्या बात है महारानी बहरी हो गई है या कान में तेल डाल लिया है.

कमरे में गहन अंधकार और सन्नाटा पसरा हुआ था. अन्य दिनों की अपेक्षा संदीप को इस दिन पत्नी सोनी का यह व्यवहार कुछ अजीब लग रहा था.

संदीप ने अनुमान से दरवाजे के पास लगे बिजली के बोर्ड को टटोल कर कमरे की लाइट जला दी. कमरे में रोशनी होते ही संदीप फर्श पर सोनी की खून से लथपथ लाश पड़ी दिखी.

लाश देखते ही संदीप के गले से चीख निकल गई. सिर को पकड़ कर संदीप गला फाड़ कर रोने लगा. कालोनी के मकान एकदूसरे से काफी दूर बने थे.

लेकिन शाम के सन्नाटे में संदीप के रोने और चीखने की आवाजें इतनी तेज थीं कि चंद समय में ही वहां कालोनी में रहने वाले कई मजदूर परिवार एकत्र हो गए. वैसे भी उस समय ज्यादातर लोग अपने काम से घर लौटते हैं.

सभी ने संदीप को अपनी पत्नी की लाश के पास फूटफूट कर रोते देखा. कालोनी के एकत्रित हुए मजदूरों में से ही किसी ने तब तक निकट की ओखला पुलिस चौकी के इंचार्ज राजेंद्र सिंह को जा कर इस हादसे की सूचना दी तो वह तत्काल ही अपने मातहत पुलिसकर्मियों को ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए.

कालोनी के लोगों ने संदीप की पत्नी सोनी की हत्या के बारे में जो खबर दी थी, वह एकदम सही थी. लिहाजा घटनास्थल का मुआयना कर राजेंद्र सिंह ने सेक्टर-126 थाने के प्रभारी भरत कुमार राठी को हत्या की इस वारदात से अवगत करा दिया.

थानाप्रभारी राठी भी हैडकांस्टेबल मोनू, जगपाल सिंह और कांस्टेबल अमित कुमार के साथ जब तक घटनास्थल पर पहुंचे, तब तक वायरलैस पर जानकारी पा कर नोएडा जोन-1 की एसीपी अंकिता शर्मा और एडिशनल डीसीपी रणविजय सिंह भी मौके पर पहुंच गए.

क्राइम और फोरैंसिक टीमों ने भी घटनास्थल पर पहुंच कर अपना काम शुरू कर दिया. संदीप ने बताया कि सुबह जब वह घर से गया था तब उस की पत्नी एकदम ठीक थी. शाम को 7 बजे लौटा तो पत्नी की लाश घर में पड़ी मिली.

संदीप से पूछताछ में पता चला कि घर में लूटपाट जैसी कोई वारदात नहीं हुई थी. जिस का मतलब साफ था कि किसी ने सोनी की हत्या की नीयत से ही इस वारदात को अंजाम दिया था.

थानाप्रभारी राठी ने जब गहराई से लाश का निरीक्षण किया तो देखा कि कातिल ने बेदर्दी के साथ किसी चीज से सोनी के चेहरे पर वार किया था जिस के कारण नाक पर काफी गहरा जख्म था और वहां से बहने वाला खून जम कर काला पड़ चुका था. एक खास बात यह थी कि कातिल ने बड़ी बेहरमी के साथ सोनी के सिर को शायद कई बार जमीन पर दे कर मारा होगा. क्योंकि सिर के पिछले हिस्से में काफी चोट लगी थी और वहां से काफी खून भी बहा था.

घटनास्थल के निरीक्षण से एक बात यह भी साफ हुई कि सोनी का शायद कातिल के साथ काफी संघर्ष हुआ होगा. क्योंकि उस के बदन के कपड़े काफी अस्तव्यस्त हो चुके थे.

ब्लाउज के आगे का हिस्सा पूरी तरह फटा हुआ था और शरीर पर पहनी हुई साड़ी भी घुटनों से ऊपर तक खिसकी हुई थी, जिससे लग रहा था कि उस के साथ कातिल ने या तो शारीरिक संबंध बनाए होंगे या फिर इस का प्रयास किया होगा.

उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जांच की सभी औपचारिकताएं पूरी कर के थानाप्रभारी राठी ने सोनी यादव के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया. एडिशनल डीसीपी रणविजय सिंह के आदेश पर थानाप्रभारी राठी ने दफा 302 आईपीसी यानी हत्या का मुकदमा पंजीकृत कर के जांचपड़ताल का काम खुद अपने हाथों में ले लिया.

एक बात थी जो पुलिस की समझ से परे थी. वह यह कि संदीप यादव ने बताया था कि उस की न तो किसी से दुश्मनी है न ही घर में लूटपाट हुई है. वैसे भी संदीप के घर में लूटपाट के लिए कोई ऐसी कीमती चीज भी नहीं थी कि उस के लिए बदमाश किसी की जान ले लें.

हां, जिस संदिग्ध हाल में सोनी का शव मिला था, उस से यह जरूर लग रहा था कि कोई ऐसा जरूर है जिस की सोनी के ऊपर नीयत खराब थी.

थानाप्रभारी राठी को एक बार संदीप यादव से कुछ खास बिंदुओं को ले कर पूछताछ करनी जरूरी लगी. लिहाजा उन्होंने अगली सुबह पोस्टमार्टम के बाद जब सोनी के शव का अंतिम संस्कार हो गया तो संदीप को पूछताछ के लिए थाने बुलाया.

इस दौरान सोनी के घर वाले भी अगली सुबह तक उस की हत्या की सूचना पा कर उस के घर पहुंच गए थे. सोनी मूलरूप से उत्तर प्रदेश के कासगंज कस्बे की रहने वाली थी, उस के परिवार में मातापिता के अलावा 2 भाई और 4 बहनें थीं. 2 भाई शैलेश व अखिलेश यादव से बड़ी एक बहन थी, जबकि 3 बहनें छोटी थीं.

परिवार की दोनों सब से छोटी लड़कियों को छोड़ कर सभी की शादी हो चुकी थी. सोनी की शादी 2020 के मध्य में कोरोना लौकडाउन के दौरान करीब डेढ़ साल पहले हुई थी.

hindi-manohar-family-crime-story

जब पुलिस ने सोनी के भाई अखिलेश से उस की बहन के बारे में पूछा तो उस ने अपने बहनोई संदीप पर कोई शक तो नहीं जताया, लेकिन उस की यह शिकायत थी कि जब संदीप के पास रहने का कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं था तो उन्हें सोनी को ऐसे स्थान पर ला कर रखना ही नहीं चाहिए था.

उस ने अपनी बहन सोनी से कहा भी था कि जब तक संदीप रहने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं ले लेता, वह वापस नहीं जाए. लेकिन सोनी ने उस की एक नहीं मानी, जिस का खमियाजा उस की जान के रूप में चुकाना पड़ा.

चौधरी की भूलभुलैया : अपनी ही बनाई योजना में फंसा – भाग 3

उस के जाने के बाद मैं ने मुराद की ओर देखा, वह मेरे इशारों को समझ गया था. उस की उम्र लगभग 25 साल होगी. उस की आंखों में लोमड़ी सी मक्कारी भरी थी. वह बड़ी ढिठाई से बोला, ‘‘थानेदार साहब, मुझे यहां किस अपराध में गिरफ्तार कर के लाया गया है?’’

मैं ने उस की आंखों में आंखें डाल कर कहा, ‘‘तुम्हें बहुत गंभीर अपराध में गिरफ्तार किया गया है. अगर तुम ने अपना अपराध आसानी से स्वीकार कर लिया तो फायदे में रहोगे.’’

वह मेरी बात से थोड़ा डरा, लेकिन कुछ देर बाद बोला, ‘‘जब मैं ने कोई अपराध ही नहीं किया तो किस बात को स्वीकार कर लूं?’’

मैं ने अपनी दराज में से कपड़े में लिपटा एक रिवौल्वर निकाला और उस की एक झलक उसे दिखाते हुए बोला, ‘‘इसे पहचानते हो?’’

रिवौल्वर को देख कर उस की आंखों में लोमड़ी जैसी चमक आ गई. मैं समझ गया कि उस ने रिवौल्वर को पहचान लिया है. उस ने बड़ी ढिठाई से कहा, ‘‘यह तो हथियार है. इस का मुझ से क्या संबंध है?’’

मैं ने उस की आंखों में आंखें डाल कर कहा, ‘‘इस रिवौल्वर का तुम से बहुत गहरा संबंध है. शराफत से मान जाओ, नहीं तो बहुत बड़ी मुसीबत तुम्हारा इंतजार कर रही है.’’

‘‘मैं किस बात को मान लूं?’’ उस ने अकड़ कर जवाब दिया.

‘‘यह मान लो कि तुम ने यह रिवौल्वर बशारत की चारे वाली गाड़ी में घास के अंदर छिपाया था.’’

‘‘यह झूठ है.’’ वह चीखा.

मैं ने कड़क कर कहा, ‘‘यह थाना है, तुम्हारी खाला का घर नहीं, ज्यादा तेज आवाज में बोलोगे तो जबान निकाल कर बाहर फेंक दूंगा.’’

मेरे तेवर बदलते देख कर वह कुछ नरम पड़ते हुए बोला, ‘‘सर, मैं इस रिवौल्वर के बारे में कुछ नहीं जानता.’’

‘‘मैं बताता हूं,’’ मैं ने तीखे स्वर में कहा, ‘‘यह वह रिवौल्वर है, जिस से तुम्हारे साथी मुश्ताक और सुग्गी की हत्या की गई है और यह काम तुम्हारे अलावा कोई नहीं कर सकता.’’

मेरी इस बात से वह और भी नरम हो कर बोला, ‘‘आप के पास इस बात का क्या सबूत है?’’

मैं ने थोड़ा झूठ मिला कर कहा, ‘‘पहला सब से बड़ा सबूत तो यह है कि इस पर तुम्हारी अंगुलियों के निशान हैं, जिन की जांच मैं ने फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट से करवा ली है.’’

वह मेरी चाल में आ गया. उस ने कहा, ‘‘यह नहीं हो सकता, मैं ने तो…’’ वह बोलतेबोलते रुक गया. वह कुछ ऐसी बात कहना चाह रहा था, जो उसे फांसी तक ले जाती.

मैं ने उस की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, ‘‘वह इसलिए न कि तुम ने घास में रिवौल्वर छिपाते वक्त उस पर से अपनी अंगुलियों के निशान मिटा दिए थे.’’

वह बोला, ‘‘आप तो मुझे पागल कर देंगे.’’

‘‘पागल तो तुम हो, मैं तो तुम्हारे पागलपन का इलाज कर रहा हूं. बताओ, पागलपन में तुम ने उन दोनों की हत्या की थी, उन्होंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था?’’

‘‘मैं ने किसी की हत्या नहीं की है.’’ उस की हठधर्मी जाने का नाम नहीं ले रही थी.

‘‘इस का मतलब यह है कि तुम शराफत की जबान नहीं समझते. तुम्हारी जबान खुलवाने के लिए चमन को बुलाना पड़ेगा.’’

‘‘सर, आप से कोई बड़ी गलती हो गई है.’’

मैं ने उसे एक मुक्का मार कर कहा, ‘‘गलती के बच्चे, क्या यह सही नहीं है कि कल दोपहर बाद 3 बजे तुम बशारत से खेतों पर मिले थे और बैलगाड़ी में चारा लदवाने में उस की मदद की थी?’’

वह इस बात से मुकरते हुए बोला, ‘‘मैं ने उस की शक्ल तक नहीं देखी.’’

मैं ने उस की आंखों में झांक कर कहा, ‘‘कल जब तुम उस के पास पहुंचे तो बशारत ने तुम से कहा था कि डेरे से फायरिंग की कैसी आवाज आई थी, इस पर तुम ने कहा था कि मैं तो नहर पार वाले खेतों की ओर से आ रहा हूं, इसलिए फायरिंग का कुछ पता नहीं.’’

‘‘यह बिलकुल झूठ है.’’

‘‘क्या झूठ है, फायरिंग का होना या बशारत का तुम से पूछना और उसे जवाब देना?’’

‘‘मैं बशारत की बात कर रहा हूं, मैं उस से न तो मिला था और न ही उस से कोई बात हुई थी.’’

‘‘तुम्हारा मतलब दूसरी बात ठीक है. फायरिंग वास्तव में हुई थी.’’

‘‘जी हां, फायरिंग की आवाज सुन कर तो मैं डेरे की ओर भागा था.’’

वह मेरे बिछाए जाल में फंस गया था, मैं ने उस से पूछा, ‘‘जब फायरिंग हुई थी, तब तुम कहां थे?’’

‘‘मैं नहर पार वाले खेतों में था.’’

‘‘तुम डेरे से इतनी दूर वहां क्या कर रहे थे?’’

उस ने कहा, ‘‘कल दोपहर में मैं ने और मुश्ताक ने एक साथ खाना खाया था. खाने के बाद मुश्ताक ने मुझ से नहर पार वाली जमीन पर जाने के लिए कहा. उधर कुछ काम था, मैं 2 बजे वहां चला गया और अपने काम में लग गया. कुछ ही देर हुई थी कि डेरे की ओर से फायरिंग की आवाज सुनाई दी. मैं सब काम छोड़ कर डेरे की ओर भागा. जब मैं वहां पहुंचा तो मुश्ताक और सुग्गी को बड़ी खराब हालत में देखा, वे खून में नहाए हुए थे.

‘‘उन की लाशें देख कर मैं तुरंत चौधरी के पास गया और उन्हें पूरी बात बताई. चौधरी मेरे साथ आए और देख कर थूथू करने लगे. बस यही कहानी थी सर.’’

‘‘बहुत अच्छी कहानी गढ़ी है तुम ने. तुम ने बशारत के बयान को तो झूठा बता दिया, बिलकीस के बारे में तुम क्या कहते हो?’’

‘‘क्या बिलकीस ने भी मेरे बारे में कुछ कहा है?’’

‘‘हां, उस ने बहुत कुछ कहा है.’’

‘‘क्या…क्या…’’ वह घबराते हुए बोला.

‘‘बताने का कोई फायदा नहीं, उस के बयान को तो तुम पहले ही झुठला चुके हो.’’

‘‘मैं समझा नहीं थानेदार साहब,’’ वह हैरत से मेरी ओर देखने लगा.

मैं ठहर कर बोला, ‘‘अभी कुछ देर पहले तुम ने कहा था कि मुश्ताक और सुग्गी के अवैध संबंधों का तुम्हें पता नहीं था और दूसरी ओर तुम बिलकीस को यह पट्टियां पढ़ाते रहे हो कि वह अपने पति पर नजर रखे, क्योंकि सुग्गी के साथ उस का कोई चक्कर चल रहा है और वह मुश्ताक से मिलने डेरे पर आती रहती है.’’

‘‘यह बात गलत है, मैं ने कभी बिलकीस से कोई बात नहीं की.’’

उस की बातों से लग रहा था कि वह हार मानने वाला नहीं है. मैं ने उस की आंखों में झांक कर कहा, ‘‘बशारत झूठा है और बिलकीस ने भी तुम्हारे बारे में गलत बयान दिया है. लेकिन एक बात याद रखो, तुम मेरे हत्थे चढ़े हो, मैं तुम्हें सीधा अदालत ले जाऊंगा और साथ में दोनों गवाहों को भी. फिर बिलकीस और बशारत की गवाही तुम्हें सीधा जेल भिजवा देगी.’’

मैं ने चमन शाह को बुला कर कहा कि यह तुम्हारा केस है, इसे ले जाओ और इस की अच्छी तरह खातिर करो. वह उसे अपने साथ ले गया.

अंधेरा होने से पहले चौधरी गनी थाने आया, वह काफी गरम दिखाई दे रहा था. आते ही बोला, ‘‘मलिक साहब, यह आप ने क्या अंधेर मचा रखी है. आप ने हत्यारे को खुला छोड़ कर एक निर्दोष को पकड़ लिया.’’

मैं ने अंजान बन कर कहा, ‘‘आप किस हत्यारे और किस निर्दोष की बात कर रहे हैं?’’

‘‘मैं बशारत और मुराद की बात कह रहा हूं.’’

‘‘अच्छा तो आप यह कहना चाहते हैं कि बशारत हत्यारा और मुराद निर्दोष है.’’

‘‘इस में क्या शक है?’’

‘‘आप के पास इस का कोई सबूत?’’ मैं ने पूछा.

वह मुझे घूरते हुए बोला, ‘‘सबूत तो आप के पास भी नहीं है.’’

‘‘मेरे पास बहुत सबूत हैं, सुबह तक दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा.’’ मैं ने पूरे विश्वास से कहा.

चौधरी बहुत गुस्से में दिखाई दे रहा था. मुराद उस का खास आदमी था. वह उस के बचाव के लिए बोला, ‘‘या तो आप बशारत को भी बंद करें या मुराद को छोड़ दें.’’

मैं ने उसी के स्वर में जवाब दिया, ‘‘अब आप मुझे थानेदारी सिखाएंगे?’’

‘‘आप अच्छा नहीं कर रहे हैं, मलिक साहब.’’ उस की आवाज में धमकी छिपी थी.

‘‘मैं जो कुछ भी कर रहा हूं, सोचसमझ कर रहा हूं. मैं अपने काम में किसी का दखल सहन नहीं कर सकता. अब आप जा सकते हैं.’’ मेरे इस व्यवहार से वह मुझे घूरता रहा, फिर फुफकारते हुए बोला, ‘‘मैं मुराद से कुछ बात करना चाहता हूं.’’

मैं ने इनकार कर दिया.

वह पैर पटक कर जाते हुए कहने लगा, ‘‘मैं तुम्हें देख लूंगा थानेदार.’’

‘‘बता कर देखने आना चौधरीजी, ताकि मैं तैयार हो कर बैठूं.’’

मैं ने चमन शाह को बुलाया और मुराद के बारे में जरूरी निर्देश दिए कि अगर कोई मुराद से मिलने आए तो उसे हवालात के पास फटकने तक नहीं देना.

अगला दिन बड़ा हंगामे वाला गुजरा. मुश्ताक और सुग्गी की लाशें आ गईं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हिसाब से उन की मौत दोपहर 2 और 3 बजे के बीच हुई थी. यह रिपोर्ट मेरे अनुमान की पुष्टि कर रही थी. दोनों को उन की बेखबरी में गोली मारी गई थी. उन्हें संभलने का भी मौका नहीं मिला था.

रिपोर्ट के मुताबिक मुश्ताक को 4 और सुग्गी को 2 गोलियां मारी गई थीं, जिस से दोनों की मौत मौके पर ही हो गई थी. मैं ने जरूरी कागज तैयार कर के लाशें उन के घर वालों को सौंप दीं. फिर मैं ने हवलदार चमन शाह से पूछा कि हवालाती का क्या हाल है, उस ने कुछ कबूला या नहीं.

उस ने मूंछों पर ताव दे कर कहा, ‘‘क्या बात करते हैं सरजी, आप का शिष्य हूं, नाकाम कैसे हो सकता हूं. मैं ने उस से अपराध कबूलवा लिया है.’’

‘‘इस का मतलब है कि वह बयान देने के लिए तैयार है. उसे मेरे पास ले आओ.’’

कुछ देर बाद वह उसे ले आया. मैं समझ रहा था कि उस की हत्या ईर्ष्या की वजह से हुई होगी, लेकिन उस के बयान के मुताबिक दोनों की हत्या चौधरी के कहने पर की गई थी.

मुराद के बयान के मुताबिक चौधरी और सुग्गी के आपस में अवैध संबंध थे. यह चक्कर तब शुरू हुआ था, जब सुग्गी चौधरी की बीमार पत्नी नरगिस की मालिश करने आती थी. उसी दौरान चौधरी ने उस से संबंध बना लिए थे. इन दोनों का मिलन चलता रहा. इसी बीच चौधरी को पता लगा कि सुग्गी के संबंध उस के नौकर मुश्ताक से भी हैं. यह जान कर उसे बहुत गुसा आया. उस ने दोनों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने और पहले से ज्यादा मिलने लगे.

अंत में मजबूर हो कर चौधरी ने मुराद से उन की हत्या करने के लिए कह दिया. घटना के दिन मुराद ने ही खाला मुखतारा को सुग्गी को बुलाने के लिए भेजा था और कहा था कि उसे मुश्ताक ने बुलाया है.

मुराद जानता था कि सुग्गी बशारत को खाना खिलाने के बाद सीधे मुश्ताक से मिलने आएगी. उस ने मुश्ताक से कहा कि वह नहर पार वाले खेतों पर जा रहा है. उस समय मुश्ताक ट्यूबवैल वाले कमरे में था. मुराद उन्हें धोखा देने के लिए वहां से चला गया. फिर उन की आंख बचा कर कमरे के पीछे चला गया और कमरे में आ कर तख्त के पीछे रिवौल्वर तैयार कर के खड़ा हो गया.

सुग्गी जैसे ही आई, मुश्ताक ने उसे कमरे में बुलाया और दरवाजा बंद कर लिया. दोनों मस्ती करने लगे. मुराद चुपके से निकला और दोनों को गोली मार दी. जब उस ने देखा कि दोनों मर गए हैं तो उस ने तख्त को कमरे से निकाल कर कबाड़ वाले कमरे में रख दिया.

जब मैं जांच के लिए वहां पहुंचा तो मुझे उस कमरे में कोई तख्त नहीं दिखाई दिया. दोनों की हत्या कर के चौधरी की योजना के अनुसार मुराद रिवौल्वर को बशारत के सामान में छिपाना चाहता था, जिस से छानबीन के दौरान पुलिस का शक बशारत पर ही जाए.

मुराद का बयान बहुत खास था. उस ने चौधरी के कहने से मुश्ताक और सुग्गी की हत्या की थी, इसलिए चौधरी भी इस अपराध में बराबर का भागीदार था और यह उसे जेल में डालने के लिए काफी था. मैं ने चौधरी को खुद गिरफ्तार करने का फैसला किया और हवलदार चमन से कहा कि मुराद की देखभाल जरूरी है, किसी को हवालात के पास तक आने नहीं देना.

मैं कांस्टेबल आफताब को साथ ले कर हवेली की ओर चल दिया. हमारी जीप चौधरी  की हवेली पहुंची. उस वक्त चौधरी हवेली से निकल रहा था. अगर हमें थोड़ी देर हो जाती तो वह चला जाता. मुझे देख कर चौधरी ठिठका. मेरा दिल तो कर रहा था कि उसे इसी समय हथकड़ी पहना दूं, लेकिन मैं उस से थोड़ी ठिठोली करना चाहता था.

मैं ने कहा, ‘‘चौधरी साहब, सब कुशल तो है? बनठन कर सुबहसुबह कहां चले?’’

‘‘मैं डीएसपी साहब से मिलने जा रहा हूं.’’ उस ने बताया.

‘‘कोई खास समस्या आ गई है क्या?’’

वह कहने लगा, ‘‘मलिक साहब, जिन अधिकारियों के आगे आप लोग सावधान की मुद्रा में खड़े होते हैं, वे मेरे दोस्तों में हैं. आप को पता नहीं चौधरी गनी कितना ताकतवर है.’’

उस ने मुझे हवेली में बैठने के लिए भी नहीं कहा. उसे यह पता नहीं था कि अभी कुछ ही देर में मैं उसे हवालात में डालने वाला हूं. मैं ने उसे और अधिक उल्लू बनाने के लिए कहा, ‘‘चौधरी साहब, मुझे आप की पावर का पता लग गया है. मेरे थाने में बडे़ अधिकारियों के भेजे हुए कुछ लोग आए बैठे हैं. लगता है, आप की पहुंच बहुत ही ऊपर तक है. तभी आप ने मेरी शिकायत ऊपर कर दी है.’’

‘‘आप ने भी तो बहुत अंधेर मचा रखी है.’’

मैं ने कहा, ‘‘जो हुआ, सो हुआ. इस समय आप मेरे साथ थाने चलें. मुराद का केस निपटाना है. मैं ने उसे हवालात में बंद कर के बहुत बड़ी गलती की है. आप डीएसपी साहब से फिर कभी मिल लेना.’’

वह मेरे झांसे में आ गया और बोला, ‘‘अच्छा, थाने में कौन आए हैं, क्या एसपी साहब ने अपने आदमी भेजे हैं?’’

इस बात से यह पता लग गया कि उस ने एसपी तक मेरी शिकायत की है. मैं ने कहा, ‘‘यहां खड़ेखड़े क्या बात होगी. आप मेरे साथ थाने चलें, वहीं चल कर बात करेंगे.’’

वह खुश हो गया और हम लोग थाने पहुंच गए. वहां मैं ने चौधरी को अपने कमरे में बिठाया. उस ने कमरे में चारों ओर देखा. दरअसल, वह यह देखना चाह रहा था कि कौन आया है.

मैं ने उस से कहा, ‘‘टांग के दर्द ने आप की अक्ल भी छीन ली है. मैं वर्दी पहने बैठा हूं और आप को मैं दिखाई नहीं दे रहा, वह बंदा मैं ही हूं.’’

‘‘आप मुझे धोखा दे कर यहां लाए हैं, यह आप ने अच्छा नहीं किया.’’

‘चौधरी साहब, मैं केस की तफ्तीश पूरी कर चुका हूं. मुझे इस केस में आप की बहुत जरूरत है. आप के कहने से मुराद ने सुग्गी और मुश्ताक की हत्या की है.’’ फिर मैं ने उसे पूरी कहानी सुना दी.

वह कुरसी से खड़ा हो कर तैश में बोला, ‘‘यह क्या बदतमीजी है?’’

मैं भी खड़ा हो कर बोला, ‘‘यह बदतमीजी नहीं, बल्कि सच्चाई है. जो कुछ आप ने सुना, वह मुराद का बयान है. आप ही के आदेश पर उस ने सुग्गी और मुश्ताक को निर्दयता से गोलियां मारीं.’’

उस का चेहरा एकदम सफेद पड़ गया, वह बोला, ‘‘क्या उस ने मेरे खिलाफ बयान दे दिया है, उस की इतनी हिम्मत?’’

मैं ने कहा, ‘‘चौधरी साहब, यह आप की हवेली नहीं, थाना है. अब आप भी पुलिस कस्टडी में हैं. आप भी मुराद के साथ जेल की ताजी ठंडी हवा का मजा लोगे.’’

वह बहुत गुस्सा हुआ और पैर पटकते हुए बोला, ‘‘उस की मैं अभी जबान काट लूंगा.’’

कह कर वह दरवाजे की ओर भागा. मैं ने तुरंत हवलदार चमन को आवाज दे कर कहा, ‘‘इसे देखो.’’

चमन शाह पहले से ही तैयार था, लेकिन चौधरी ने तेजी से उसे धक्का दिया, जिस से चमन डगमगा गया. वह संभल कर चौधरी के पीछे भागा. मैं अपने कमरे से निकला तो फायरिंग की आवाज आई.

मैं ने भाग कर देखा तो हवालात के बाहर चमन शाह ने चौधरी को दबोच रखा था और दूसरे कांस्टेबल उस से रिवौल्वर छीनने की कोशिश कर रहे थे. मैं ने हवालात में देखा तो मुराद जमीन पर उल्टा पड़ा था और उस के शरीर से खून बह रहा था. उस ने उस का सीना छलनी कर दिया था.

चौधरी ने मेरा काम आसान कर दिया था, अब किसी तफ्तीश की जरूरत नहीं थी. उसे फांसी के फंदे तक पहुंचाने के लिए यही सबूत काफी थे.

मैं ने कागज तैयार कर के मुराद की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी और चौधरी को अदालत में पेश कर दिया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. मुकदमा चला और उसे फांसी की सजा हो गई.

चौधरी की भूलभुलैया : अपनी ही बनाई योजना में फंसा – भाग 2

मुझे मुखतारा की बात को सच मानना पड़ा. चौधरी बोला, ‘‘मलिक साहब, आप जानते नहीं, सुग्गी किस तरह की औरत थी. छलफरेब उस की नसनस में था. जो औरत अपने पति की नहीं हुई, वह किसी और की कैसे हो सकती है.’’

मैं ने कहा, ‘‘ठीक है चौधरी साहब, आप ने यह तो साबित कर दिया कि सुग्गी को आप ने हवेली पर नहीं बुलाया था, पर मैं ने सुना है कि वह आप की हवेली के अकसर चक्कर लगाती थी.’’

‘‘हां मलिक साहब, वह हफ्ते में 1-2 बार हवेली आती थी.’’ वह थोड़ा रुक कर बोला, ‘‘बात यह है मलिक साहब, मेरी पत्नी का नीचे का हिस्सा पैरलाइज है. सुग्गी को तेल मालिश करने के लिए बुलाया जाता था.’’

उस का बयान सुन कर मैं ने कहा, ‘‘ठीक है चौधरी साहब, अब मैं चलता हूं. लेकिन कल आप मुराद को थाने जरूर भेज दें, उस का बयान लेना है.’’

मैं जीप में बैठ कर गांव के अंदर की ओर जा रहा था, क्योंकि मुझे बशारत के घर के आगे से जाने पर पता लग जाता कि वह आया या नहीं. अभी तांगा चल ही रहा था कि एक औरत जीप के आगे आई. ड्राइवर बोला, ‘‘इस का खसम तो हराम की मौत मारा गया, अब पता नहीं यह क्या चाहती है?’’

मैं ने उस से पूछा, ‘‘क्या यह मुश्ताक की पत्नी बिलकीस है?’’

वह कहने लगा, ‘‘हां, वही है.’’

‘‘मुझे मौत चाहिए दारोगाजी, जब मेरा पति नहीं रहा तो मैं जी कर क्या करूंगी. डायन मेरे पति को खा गई.’’ बोलतेबोलते उस का गला रुंध गया. बिलकीस को देख कर मुझे हैरानी हुई, क्योंकि मुश्ताक बड़ा सुंदर था लेकिन वह छोटे कद की सांवली औरत थी.

मैं ने उस से पूछा, ‘‘बीबी, तुम बिलकीस हो, क्या तुम उस डायन के बारे में कुछ बताओगी?’’

वह बोली, ‘‘आइए थानेदार साहब, मेरे घर आओ, मैं सब कुछ बताऊंगी.’’

मैं ने उस की बात मान ली.

‘‘तुम ने सुग्गी को डायन कहा, वास्तव में वह डायन ही थी.’’ मैं ने उस से हमदर्दी जताते हुए कहा, ‘‘अब मुझे बताओ, उन दोनों के बीच यह चक्कर कब से चल रहा था?’’

‘‘थानेदारजी, मैं बहुत दुखी औरत हूं.’’ वह सिसकते हुए बोली, ‘‘मैं एक कालीकलूटी औरत हूं. मुश्ताक को गोरीचिट्टी औरत चाहिए थी. मैं ने उस से कई बार कहा कि किसी सुंदर सी औरत से निकाह कर ले. मैं नौकरानी बन कर रह लूंगी, लेकिन वह नहीं माना. मुझे क्या पता था कि वह इस तरह घर से बाहर क्या गुल खिलाता फिर रहा है.’’

मैं ने उस से कहा, ‘‘बिलकीस, अगर तुम चाहती हो कि मैं तुम्हारे पति के हत्यारे को पकड़ूं तो मुझे बताओ कि उन दोनों के बीच यह चक्कर कब से चल रहा था?’’

‘‘यह तो पता नहीं. लेकिन मुझे कुछ दिनों पहले ही पता लगा था.’’

‘‘तुम्हें यह बात किस से पता लगी?’’

‘‘मुझे मुराद ने एक महीने पहले बताया था. उस ने कहा था कि अपने पति की देखभाल करो, वह सुग्गी से मिलता है और सुग्गी उस से मिलने डेरे पर जाती है.’’

‘‘तो तुम ने उस पर नजर रखी?’’

‘‘नहीं जी, मैं ने मुश्ताक पर भरोसा किया और समझा कि सुग्गी को ले कर तो किसी को भी बदनाम किया जा सकता है. लेकिन आज की घटना से मुझे पूरा यकीन हो गया कि मुराद की बात सच थी.’’

मैं ने उस से कहा, ‘‘तुम्हें मुश्ताक से इस बात की पुष्टि करनी चाहिए थी.’’

वह बोली, ‘‘दरअसल, मुराद ने मुझे कसम दे रखी थी.’’

मैं ने उस से पूछा, ‘‘अच्छा, यह बताओ तुम्हें किसी पर शक है?’’

वह बोली, ‘‘जब मैं ने देखा ही नहीं तो किस का नाम लूं. लेकिन इस सब का जिम्मेदार मैं सुग्गी को समझती हूं.’’

उठते हुए मैं ने कहा, ‘‘अच्छा बिलकीस, मैं तुम्हारे पति के हत्यारे को जरूर पकड़ूंगा. इस बीच अगर तुम्हें कुछ पता लगे तो मुझे जरूर बताना.’’

उस ने पूछा कि पति की लाश कब मिलेगी. इस पर मैं ने उसे बताया कि जैसे ही लाश अस्पताल से आएगी, मैं खबर कर दूंगा.

वहां से मैं सीधा बशारत के घर पहुंचा. वहां फरमान मिला, उस ने बताया कि वह अभी तक नहीं आया है. मैं ने उस से कहा कि जैसे ही वह आए, मुझे खबर कर देना.

मैं रात का खाना खा कर घर पर बैठा था कि कांस्टेबल आफताब ने आ कर बताया, ‘‘सर, बशारत आया है. उस के साथ उस का साढ़ू भी है. वे चारे से लदी बैलगाड़ी पर आए हैं.’’

मैं थाने पहुंचा और दोनों को अपने कमरे में बुलाया. मैं ने फरमान से पूछा, ‘‘तुम्हारी इस से कोई बात हुई?’’

वह बोला, ‘‘बातें तो बहुत हुई हैं जनाब, लेकिन वही बात जो मैं कह रहा था, उन की हत्या में इस का कोई हाथ नहीं है.’’

मैं ने बशारत की ओर देखते हुए कहा, ‘‘मुझे सचसच बताओ कि तुम ने ये हत्याएं क्यों कीं?’’

उस ने कहा कि इस में उस का कोई हाथ नहीं है.

मैं ने कहा, ‘‘अच्छा तो तुम शराफत की जबान नहीं समझते. तुम्हारे साथ कोई दूसरा तरीका आजमाना पड़ेगा.’’

मैं ने हवलदार को आवाज लगाई. बशारत यह सुन कर कांप गया और रोनी सूरत बना कर कहने लगा, ‘‘जनाब, एक तो मेरी पत्नी की हत्या हो गई और उल्टा आप मुझे ही दबा रहे हैं.’’

‘‘सारे कायदेकानून तुम्हें अभी पढ़ाए जाएंगे, तुम आसानी से छूटने वाले नहीं हो.’’

बशारत की उम्र 40 के लगभग होगी. छोटा कद, चेहरे पर चेचक के दाग, एक टांग से लंगड़ा, पतलादुबला, किसी भी तरह सुग्गी के मेल का नहीं था. ऐसा ही बिलकीस और मुश्ताक का जोड़ था.

हवलदार चमन कमरे में आया तो मैं ने फरमान से कहा कि वह कमरे से बाहर जा कर बैठे. जब जरूरत होगी, बुला लेंगे. वह चला गया तो मैं ने बशारत की ओर देख कर कहा, ‘‘हां भाई, आसानी से बताएगा या सच उगलवाने के लिए हमें मेहनत करनी पड़ेगी.’’

वह कांपते हुए बोला, ‘‘हुजूर, मैं बिलकुल निर्दोष हूं, मैं ने किसी की हत्या नहीं की है.’’

मैं ने उस से कहा, ‘‘चौधरी के डेरे पर जो घटना घटी, वह तुम्हें पता है या मैं बताऊं?’’

‘‘मुझे पता है चौधरी के डेरे पर किसी ने मेरी पत्नी और मुश्ताक की हत्या कर दी है और उस का आरोप मेरे ऊपर लगाया जा रहा है.’’

‘‘स्थिति के हिसाब से शक तो तुम पर ही जाएगा.’’

‘‘हुजून, मुझे क्या पता. मेरे घर से तो दोपहर में वह ठीकठाक गई थी.’’ कहते हुए उस ने गरदन झुका ली.

उस की गरदन झुकी देख कर मैं समझ गया कि वह इस घटना से बहुत दुखी है, इसलिए मैं ने उसे धीरेधीरे कुरेदना शुरू किया. मैं ने उस से पूछा, ‘‘सुग्गी, खाना ले कर तुम्हारे पास कब पहुंची थी?’’

उस ने बताया, ‘‘उस वक्त दोपहर का एक बजने वाला था.’’

‘‘तुम्हारे पास वह कितनी देर रही?’’

उसे कुछ हिम्मत सी हुई, उस ने निर्भीक हो कर कहा, ‘‘यही कोई 20-25 मिनट यानी कोई डेढ़ बजे दोपहर तक.’’

मैं ने उस की आंखों में झांकते हुए कहा, ‘‘तुम रोज सूरज छिपने से पहले घर आ जाते हो, आज इतनी देर कैसे हो गई, कहां थे तुम?’’

‘‘मैं लंगरवाल चला गया था. शफी से अपने पैसे लेने. यह बात मैं ने सुग्गी को भी बता दी थी कि मैं रात तक घर पहुंचूंगा.’’

मैं ने हवलदार चमन को कमरे से बाहर जाने के लिए कहा, क्योंकि वह उस की मौजूदगी में डराडरा बोल रहा था. उस के जाते ही मैं ने उसे बैठने को कहा.

‘‘तुम लंगरवाल कितने बजे गए थे? यह समझ लेना कि मैं आंखें मूंद कर तुम्हारी बातों पर यकीन नहीं कर लूंगा. मैं एक आदमी भेज कर शफी से तुम्हारी बातों की पुष्टि करवाऊंगा.’’

‘‘आप कैसे भी पता कर लें, मैं वहां करीब 4 बजे गया था.’’

मैं ने धीरे से पूछा, ‘‘तुम्हें सुग्गी और मुश्ताक के संबंधों का पता था?’’

वह धीरे से बोला, ‘‘नहीं हुजूर, मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता था.’’

‘‘तुम्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है. मैं तुम्हारी बात किसी से नहीं कहूंगा. सचसच बताओ, तुम्हें कुछ पता था?’’

‘‘थानेदारजी, मैं ने आप से कसम खाई है, मुझे कुछ भी पता नहीं था.’’

‘‘तुम्हारी शादी को कितने दिन हो गए?’’

‘‘कोई 7 साल.’’

‘‘फिर तो तुम अपनी पत्नी को अच्छी तरह समझते होगे?’’

वह कुछ उलझ सा गया और मेरी ओर देख कर बोला, ‘‘जी?’’

‘‘देखो, बुरा मत मानना. हम केस की तफ्तीश बड़ी गहराई से करते हैं और हर तरह के सवाल करते हैं. मैं ने तुम्हारी पत्नी के बारे में कुछ अच्छी बातें नहीं सुनीं.’’

वह पलक झपकते ही मेरी बात की गहराई तक पहुंच गया. वह बोला, ‘‘आप ने ठीक ही सुना है.’’

‘‘तुम तो उस के पति थे, तुम उसे समझाते.’’

उस ने अपना चेहरा दोनों हाथों में छिपा लिया और टूटे हुए दिल से बोला, ‘‘मैं उसे क्या समझाता, उस पर मेरा जोर नहीं चलता था.’’

‘‘क्या मतलब?’’

‘‘हुजूर, दुनिया मुझे उस का पति कहती है, लेकिन यह बात नहीं है.’’ वह रोनी सूरत बना कर कहने लगा, ‘‘असल बात यह है कि आज तक सुग्गी ने मुझे अपने पास तक नहीं आने दिया.’’

‘‘तुम्हारा दिमाग तो खराब नहीं है बशारत, तुम 5 साल के बेटे नवेद के बाप हो.’’

उस ने बड़े दुख से कहा, जैसे उस की आवाज किसी कुएं से आ रही हो, ‘‘थानेदार साहब, भाग्य में अगर औलाद लिखी हो तो मिल ही जाती है, कभी बाप की कोशिश से और कभी मां के जरिए से.’’

बशारत हिचकियों से रोने लगा. वह रोता रहा और अपनी कहानी सुनाता रहा. ऐसी कहानी जो सुग्गी ने उस से जूते की नोक पर लिखवाई थी. जब से उस का विवाह सुग्गी के साथ हुआ था, वह उस की सुंदरता के आगे सिर झुकाए रहता था. जैसा वह कहती थी, वह वही करता था.

मैं ने उस के साढ़ू फरमान को बुलवा कर कहा, ‘‘आज की रात बशारत लौकअप में रहेगा, कल मैं एक सिपाही लंगरवाल भेज कर इस के जाने की पुष्टि कराऊंगा. इस की बात सच हुई तो मैं इसे छोड़ दूंगा.’’

अगले दिन सुबह मैं सरकारी काम से हैडक्वार्टर चला गया. जब दोपहर को वापस थाने आया तो हवलदार चमन ने बताया, ‘‘सरजी, आप के लिए अच्छी खबर है. जिस रिवौल्वर से हत्या की गई थी, वह मिल गया है.’’

मैं उछल पड़ा, ‘‘कहां है रिवौल्वर, कहां से मिला?’’

हवलदार ने बताया कि फरमान दे कर गया है, वह कह रहा था कि यह जानवरों के चारे के ढेर से मिला था. वह अभी कुछ देर में थाने आने के लिए कह कर गया है.

मैं ने जो सिपाही लंगरवाल भेजा था, वह आ गया और उस ने शफी से बशारत के वहां पहुंचने की पुष्टि करा ली थी. मैं ने बशारत को बुला कर कहा, ‘‘बशारत, हत्या में इस्तेमाल रिवौल्वर मिल गया है.’’

उस ने पूछा, ‘‘कहां से मिला?’’

‘‘तुम्हारी बैलगाड़ी पर लदे चारे के ढेर से.’’

वह हकला कर बोला, ‘‘गाड़ी में…किस ने रखा?’’

‘‘यह तो तुम ही बताओगे,’’ मैं ने कपड़े में लिपटे हुए रिवौल्वर की एक झलक उसे दिखाते हुए कहा, ‘‘इसे तुम्हारा साढ़ू चारे के ढेर से लाया है. इसे या तो तुम ने चारे में रखा होगा या फरमान ने.’’

‘‘मैं…मैं ने तो नहीं छिपाया, लेकिन…’’ वह बोलतेबोलते रुक गया, जैसे उसे कोई बात याद आ गई हो.

मैं ने उसे डांटते हुए कहा, ‘‘लेकिन के बाद तुम्हारी जबान को ब्रेक क्यों लग गया?’’

‘‘मुझे लगता है, यह मुराद का कारनामा है.’

मुराद के नाम से मैं चौंक पड़ा. मैं ने उस से पूछा, ‘‘क्या कहना चाहते हो?’’

वह माथे पर हाथ मार कर बोला, ‘‘यह बात मुझे कल रात क्यों याद नहीं आई?’’

‘‘अब याद आ गई है तो बताओ.’’

‘‘हुजूर, नहीं भूलूंगा, अब मुझे याद आया. जब मैं चारा बैलगाड़ी पर लाद रहा था तो मुराद मेरे पास आया था. उस ने कहा, ‘चाचा, लाओ घास बैलगाड़ी पर लादने में तुम्हारी मदद करता हूं.’ फिर वह चारा लादने लगा. मुझे 101 प्रतिशत यकीन है, मेरी नजर बचा कर उसी ने रिवौल्वर चारे में रख दिया होगा.’’

वह आगे बोला, ‘‘वह मेरे पास करीब साढ़े 3 बजे आया था. मैं ने उस से पूछा कि डेरे की ओर से गोलियां चलने की आवाजें आ रही थीं. सब ठीक तो है न. इस पर उस ने बताया कि उसे कुछ नहीं पता, क्योंकि वह नहर पार वाले खेतों से आ रहा है. फिर वह मेरे पास ज्यादा देर नहीं रुका. मैं भी लंगरवाल चला गया.’’

‘‘तुम ने गोलियों की आवाज मुराद के आने से पहले किस समय सुनी थी?’’

‘‘उस के आने से कोई एक घंटा पहले.’’

मैं ने फरमान और बशारत को जाने के लिए कहा, क्योंकि मुझे इस हत्या में उन का हाथ नहीं लग रहा था. उन के जाने के बाद मैं ने हवलदार से पूछा कि क्या मुराद आया था. उस ने इनकार कर दिया.

‘‘नहीं आया तो अब आएगा.’’ हवलदार मेरा इशारा समझ गया.

‘‘अभी आया सर, उसे लाता हूं.’’

‘‘देखो, 2 कांस्टेबलों को साथ ले कर सीधे चौधरी के डेरे पर जाओ. इस समय वह वहीं मिलेगा. उसे गिरफ्तार कर के ले आओ. और हां, मुराद को चौधरी से नहीं मिलने देना और न ही बात करने देना.’’

शाम से कुछ देर पहले हवलदार चमन मुराद को गिरफ्तार कर के ले आया. मैं ने पूछा, ‘‘इस सरकारी सांड को गिरफ्तार करने में कोई परेशानी तो नहीं हुई?’’

वह बोला, ‘‘परेशानी तो नहीं हुई, लेकिन अपने आप को बहुत तीसमारखां समझ रहा है. मुझे डीएसपी, एसपी की धमकियां दे रहा था.’’

‘‘तुम समझे नहीं चमन, राजा का कुत्ता भी प्रजा को बहुत नीच समझता है.’’

‘‘मेरे लिए क्या हुकुम है सर?’’

‘‘अभी तुम इसे मेरे पास छोड़ जाओ, मैं इसे शराफत का पाठ सिखाऊंगा.’’

चौधरी की भूलभुलैया : अपनी ही बनाई योजना में फंसा – भाग 1

उन दिनों मैं नजीबाबाद में तैनात था. एक दिन एक दोहरे हत्याकांड का मामला सामने आया. मैं एक कांस्टेबल को ले कर घटनास्थल पर पहुंच गया. मई का महीना था. तेज गरमी पड़ रही थी. हत्या की वारदात चौधरी गनी के डेरे पर हुई थी, जो गांव टिब्बी का रहने वाला था. उस डेरे में नीची छतों के कमरे थे और एक कमरे में दोनों मृतकों की लाशें चारपाई पर रखी थीं, जो एक चादर से ढंकी थीं.

कमरे में जितने लोग थे, चौधरी ने सब को बाहर कर के दरवाजा बंद कर दिया. इस के बाद उस ने लाशों के ऊपर से चादर खींच दी. मेरी नजर लाशों पर पड़ी तो मैं ने शरम से नजरें दूसरी ओर फेर लीं. लाशें मर्द और औरत की थीं और दोनों नग्न हालत में एकदूसरे से लिपटे हुए थे. चौधरी ने कहा, ‘‘मैं ने इसीलिए सब को बाहर निकाला था.’’

मैं ने पूछा, ‘‘कौन हैं ये दोनों?’’

उस ने मर्द की ओर इशारा कर के कहा, ‘‘यह तो मुश्ताक है, मेरा नौकर और यह औरत बशारत की पत्नी सुगरा है.’’

मैं ने दोनों लाशों का बारीकी से निरीक्षण किया. जांच से पता लगा कि दोनों जब एकदूसरे में खोए हुए थे, तभी किसी ने दोनों पर पूरा रिवौल्वर खाली कर दिया था. दोनों के शरीर का ऊपरी भाग खून में नहाया हुआ था. पहली नजर में यह बदले की काररवाई लगती थी. दोनों जवान और सुंदर थे. देखने के बाद मैं ने लाशों पर चादर डाल दी.

‘‘यह किस का काम हो सकता है?’’ मैं ने चौधरी गनी से पूछा.

वह अपनी एक टांग को दबाते हुए बोला, ‘‘यह आप जांच कर के पता लगा सकते हैं.’’

‘‘लेकिन आप का दिमाग क्या कहता है?’’ मैं ने पूछा.

‘‘मुझे बशारत मतलब सुगरा के पति पर शक है.’’

‘‘क्या आप ने बशारत से पूछताछ की है?’’

‘‘मैं ने एक आदमी उस के घर भेजा था, लेकिन वह घर पर नहीं मिला.’’

‘‘इस का मतलब उसे अभी तक इस घटना का पता नहीं लगा.’’

‘‘मलिक साहब, वह खुद ही इधरउधर निकल गया होगा.’’

चौधरी की बात से मैं समझ गया कि वह बशारत को मुश्ताक और सुगरा का हत्यारा समझ रहा है. मैं ने उस की आंखों में देखते हुए कहा, ‘‘चौधरी साहब, आप इस घटना के बारे में क्या जानते हैं?’’

‘‘कुछ ज्यादा नहीं.’’ उस का एक हाथ फिर अपनी बाईं टांग की ओर गया.

‘‘आप की टांग में क्या हो गया है, जो आप बारबार हाथ लगा रहे हैं.’’

‘‘मेरी टांग में कुछ दिनों से बहुत दर्द हो रहा है.’’ वह कुछ रुक कर बोला, ‘‘मैं तो यहां हवेली में आराम कर रहा था कि मुराद दौड़ते हुए आया. उस ने बताया कि मुश्ताक और सुगरा को किसी ने मार दिया है. मैं ने डेरे पर जा कर लाशों को देखा और एक आदमी बशारत को देखने के लिए भेज दिया. फिर हवेली पहुंच कर मंजूरे को आप के पास थाने भेजा और मुश्ताक की पत्नी को भी खबर कर दी. वह बेचारी रोपीट रही है.’’

मुश्ताक की पत्नी बिलकीस लाशों को देखने के लिए कहती रही, लेकिन मुराद ने उस से कह दिया कि जब तक पुलिस काररवाई नहीं हो जाती, वह उसे देखने नहीं देगा.

मैं ने जरूरी काररवाई कर के लाशों को जिला अस्पताल भिजवा दिया और कमरे की बारीकी से जांच की. कमरे में एक ओर खिड़की थी, खिड़की में कोई जाली या सरिए नहीं लगे थे. वहां एक चारपाई थी, जिस पर दोनों की लाशें रखी थीं.

चारपाई को रंगते हुए खून नीचे फर्श पर गिरा था, जो जम गया था. हत्या करने का कोई भी हथियार अथवा कोई भी ऐसी चीज नहीं मिली, जो हत्या की जांच में मदद कर पाती. कमरे के बाहर कुछ लोग खडे थे. मैं ने उन में से एक समझदार से आदमी की ओर इशारा कर के उसे बुलाया. मैं ने उस से पूछा, ‘‘चाचा, तुम्हारा नाम क्या है?’’

‘‘जी, रहमत…रहमत अली.’’

‘‘क्या तुम भी इसी गांव में रहते हो?’’

उस ने हां में जवाब दिया तो मैं ने उस का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘चाचा, तुम मेरे साथ आओ.’’

मैं उसे एक कमरे में ले गया, जिस में खेती का सामान और कबाड़ रखा था. उस सामान में मैं हत्या करने वाला हथियार देख रहा था, साथ ही चाचा से भी बात कर रहा था.

इस के बाद मैं ने 2 और कमरों की तलाशी ली, लेकिन काम की कोई चीज नहीं मिली. मेरे पास सरकारी ताला था, मैं ने उस कमरे में ताला लगा कर उसे सील कर दिया, जिस में उन दोनों की लाशें मिली थीं.

कुछ और लोगों से बात कर के मैं रहमत को साथ ले कर डेरे से निकल कर टिब्बी गांव की ओर चल दिया. मैं चलतेचलते उस से बात कर रहा था. उस से काम की कई बातें पता लगीं, जो मैं आगे बताऊंगा.

चौधरी गनी ने मुझ से कहा था कि घटनास्थल से सीधा हवेली आऊं, लेकिन मैं ने पहले बशारत से मिलने की सोची. मैं पूछतेपूछते बशारत के घर तक पहुंच गया.

बशारत का घर गांव के बीचोबीच था, लेकिन वह घर में नहीं था. एक आदमी फरमान ने बताया कि वह खेतों में भी नहीं है. हम सब उस का इंतजार कर रहे हैं. उस ने गली में इधरउधर देखते हुए कहा, ‘‘आप अंदर आ जाएं सरकार, कुछ देर और खड़े रहे तो यहां मेला लग जाएगा.’’

‘‘तुम्हारे साढ़ू ने कारनामा ही ऐसा किया है, मेला तो लगेगा ही.’’

वह परेशान सा हो कर बोला, ‘‘समझ नहीं आ रहा, उस ने ऐसा काम कैसे कर दिया.’’

मैं अंदर एक कमरे में बैठ गया, जहां पहले से ही फरमान की पत्नी और बच्चे बैठे थे.

में ने उन्हें अपना परिचय दे कर बताया कि मैं कस्बा नजीबाबाद के थाने का इंचार्ज हूं. गांव टिब्बी मेरे ही थाने में आता है.

फरमान ने सिर हिला दिया, लेकिन उस की पत्नी कुबरा चुप नहीं रही. वह बोली, ‘‘थानेदार साहब, आप ने काररवाई करने में इतनी जल्दी क्यों की? कम से कम बशारत के आने का तो इंतजार कर लेते. लाशों को बाद में भी अस्पताल भिजवाया जा सकता था. हम अपनी बहन का मुंह भी नहीं देख सके.’’ इतना कह कर वह रोने लगी.

‘‘पागलों जैसी बातें न कर कुबरा, ऐसी हालत में उन का मुंह देखती. कुछ शरम है कि नहीं?’’ फरमान ने उसे झिड़का.

‘‘मैं गरमी की वजह से लाशों को अधिक देर तक नहीं रख सकता था.’’ मैं ने कुबरा से कहा, ‘‘तसल्ली रखो, पोस्टमार्टम के बाद लाशों को आप के हवाले कर दिया जाएगा, फिर आप अच्छी तरह अपनी बहन का मुंह देख लेना.’’

वह बोली, ‘‘थानेदार साहब हम चौधरियों के डेरे तक गए थे, लेकिन उस कमीने मुराद ने हमें कमरे के अंदर नहीं जाने दिया.’’

‘‘तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है कुबरा, हालात को समझने की कोशिश करो. तुम्हारी छोटी बहन ने ऐसी हरकत कर के हमारी नाक कटवा दी, अब तुम बाकी की कसर भी पूरी करना चाहती हो.’’ फरमान ने उसे डांटते हुए कहा.

मैं ने कुबरा को तसल्ली देते हुए कहा, ‘‘बीवी, मैं तुम्हारा दुश्मन नहीं हूं, चौधरी गनी ने ही मुराद को वहां खड़ा किया था. मृतक मुश्ताक की पत्नी भी अपने पति का मुंह देखने वहां पहुंची थी, लेकिन मुराद ने उसे भी अंदर नहीं जाने दिया.’’ फरमान ने मेरी ओर देखते हुए कहा, ‘‘मलिक साहब, आप की बातों से लग रहा है कि आप इस हत्या में बशारत पर शक कर रहे हैं.’’

‘‘क्या मैं बशारत पर शक करने के मामले में सही नहीं हूं?’’ मैं ने उसे जवाब देने के बजाय उल्टा सवाल कर दिया.

मेरा सवाल सुन कर वह इधरउधर देखने लगा, फिर बोला, ‘‘मेरा मतलब यह है कि बशारत…इतना हिम्मत वाला नहीं है.’’

सुगरा यानी सुग्गी के बेखौफ व्यवहार के बारे में मुझे रहमत अली ने भी बताया था. अब फरमान की बातों से लग रहा था कि वह अपनी साली के कारनामों से खुश नहीं था.

‘‘फरमान, पत्नी का मामला ऐसा होता है कि कमजोर आदमी भी अपनी इज्जत के लिए टार्जन बन जाता है. अगर उस ने हत्या नहीं की तो गायब क्यों हो गया?’’

‘‘यह बात तो मेरी समझ में भी नहीं आ रही. मैं ने उसे खेतों में भी देखा और गांव में भी, लेकिन उस का कहीं पता नहीं लगा. वह आज बैलगाड़ी भी ले गया था. कह रहा था कि वापसी में अपने और मेरे जानवरों के लिए चारा ले आएगा, लेकिन अभी तक नहीं आया.’’

कुबरा कहने लगी, ‘‘हम भी बशारत के इंतजार में अपना घर छोड़े बैठे हैं, छोटे बच्चे की भी तो समस्या है.’’

‘‘कौन सा छोटा बच्चा?’’

वह बोली, ‘‘सुग्गी का एक ही तो बच्चा है नवेद. उसे किस के पास छोड़ें. फरमान कहते हैं इसे अपने साथ ले चलो, वैसे भी वह हमारे ही घर में रहता है.’’

मैं ने नवेद के बारे में कुरेद कर पूछा तो कुछ बातें सामने आने लगीं. कुबरा ने बताया, ‘‘आज दोपहर सुग्गी जब बशारत के लिए खेतों पर खाना ले कर जाने लगी तो उस ने 5 साल के नवेद को मेरे पास छोड़ दिया था. वह हमारे घर खुशी से रहता है.’’

मैं ने उस से पूछा, ‘‘क्या वह रोज इसी वक्त खाना ले कर जाती थी?’’

‘‘जी हां, वह इसी समय खाना ले कर जाती थी,’’ वह संकोच से बोली, ‘‘और जाते वक्त नवेद को हमारे घर छोड़ जाती थी.’’

‘‘क्या बात है कुबरा, तुम इतनी बेचैन क्यों हो?’’ मैं ने उस के अंदर की उलझन को पहचान कर कहा, ‘‘तुम मुझे उलझी हुई दिखाई दे रही हो. अगर कोई परेशानी हो तो बताओ.’’

‘‘दरअसल, मैं एक बात बताना भूल गई. पता नहीं उस बात का कोई महत्त्व है भी या नहीं.’’

मैं ने जल्दी से कहा, ‘‘बताओ तो सही.’’

‘‘आज सुग्गी ने जाते हुए कहा था कि उसे वापस लौटने में देर हो जाएगी.’’ वह रोते हुए बोली, ‘‘मुझे क्या पता था कि उसे इतनी देर हो जाएगी कि वापस ही नहीं लौटेगी.’’

मैं ने उस से पूछा, ‘‘कुबरा बीबी, यह बताओ सुग्गी ने यह क्यों कहा था कि देर हो जाएगी, क्या उस ने कारण बताया था?’’

उस ने आंसू पोंछते हुए कहा कि सुग्गी ने बताया था कि बशारत को खाना खिलाने के बाद वह चौधरियों की हवेली जाएगी.

मैं ने पूछा, ‘‘वह चौधरियों की हवेली क्यों जाना चाहती थी?’’

‘‘चौधरी गनी ने उसे किसी काम के लिए बुलाया था.’’

मैं ने पूछा, ‘‘कौन सा काम?’’

‘‘यह तो उस ने नहीं बताया, लेकिन चौधरी गनी इस गांव के मालिक हैं, वह किसी को भी तलब कर सकते हैं.’’

मैं सोचने लगा, जब चौधरी गनी से मैं बात कर रहा था तो उस ने सुग्गी को बुलाने के बारे में नहीं बताया था. मुझे लगा कि कहीं कोई गड़बड़ जरूर है. मैं ने उस से पूछा, ‘‘सुग्गी से बुलाने की बात किस ने कही थी?’’

‘‘मासी मुखतारा आई थी.’’

‘‘मासी मुखतारा कौन है और कहां रहती है?’’

‘‘मासी मुखतारा हवेली में काम करती है और वहीं रहती है.’’

मैं ने मुखतारा को भी अपने दिमाग में रखा. इस से पहले 3 और नाम थे चौधरी गनी, बशारत और मुराद. यहां से निपट कर मुझे हवेली जाना था. मैं चौधरी गनी की हवेली की ओर जाने लगा तो फरमान भी मेरे साथ चलने लगा. तभी एक छोटा सा गोराचिट्टा बच्चा घर से निकल कर आया और बोला, ‘‘खालू, मेरे अब्बाअम्मा कब आएंगे?’’

फरमान चौधरी की हवेली तक मेरे साथ आया. मैं ने उस से कहा कि तुम बशारत के घर में ही रहना और जैसे ही वह आए, मुझे खबर कर देना. मैं इधर चौधरी की हवेली में बैठा हूं.

चौधरी ने बड़े तपाक से मेरा स्वागत किया. उस ने अपनी बैठक में बिठाया. उस की बैठक की सजावट देख कर लगा कि वास्तव में वह उस इलाके का राजा था. मैं ने उस से पूछा, ‘‘मुराद कहां है?’’

चौधरी बोला, ‘‘वह डेरे पर गया है, मंजूर भी उस के साथ है. दोनों वहीं रहेंगे, सोएंगे भी वहीं.’’

‘‘डेरे के कमरे पर तो मैं ने ताला डाल दिया है.’’

‘‘वहां 2 कमरे और भी हैं. वैसे आजकल गरमी है, वे अहाते में ही सोते हैं.’’ इतना कह कर चौधरी ने पूछा, ‘‘आप बशारत के घर काफी देर तक रहे हैं, कोई नुक्ता हाथ लगा या नहीं?’’

‘‘हां, एक सिरा हाथ तो लगा है, देखो उस से काम चलता है या नहीं.’’

सुन कर चौधरी के कान खड़े हो गए. वह तुरंत बोला, ‘‘आप कौन से सिरे की बात कर रहे हैं?’’

‘‘चौधरी साहब, जो सिरा मेरे हाथ लगा है, उस के दूसरे किनारे पर आप खड़े हैं.’’

‘‘मतलब?’’ वह चौंका.

मैं ने क हा, ‘‘मुझे पता लगा है कि आप ने सुग्गी को कल दोपहर अपने डेरे पर बुलाया था.’’

उस के चेहरे का रंग फीका पड़ गया. वह बोला, ‘‘आप को यह बात किस ने बताई?’’

‘‘पहले आप इस बात की पुष्टि करें, फिर उस का नाम बताऊंगा.’’

‘‘नहीं, मैं ने उसे नहीं बुलाया था.’’

मैं ने कहा, ‘‘आज दोपहर जब सुग्गी बशारत का खाना ले कर खेतों पर जा रही थी, तो उस ने अपने बेटे नवेद को फरमान के घर छोड़ा और उस की पत्नी कुबरा से कहा कि वापस लौटने में उसे देर हो जाएगी, क्योंकि उसे मासी मुखतारा ने कहा है कि चौधरी की हवेली जाना है.’’

वह गुस्से से बोला, ‘‘उस दुष्ट औरत ने झूठ बोला है, आप उसे जानते नहीं. वह औरत…लेकिन छोड़ो मरने वाले को बुरा नहीं कहना चाहिए.’’

‘‘तो चौधरी साहब आप इस बात से इनकार करते हैं कि मासी मुखतारा उसे बुलाने नहीं गई थी?’’

‘‘हां, बिलकुल मैं इनकार करता हूं. आप को अभी पता लग जाएगा.’’ उस ने मुखतारा को बुलाया तो वह तुरंत आ गई. देखने में वह बहुत तेज औरत लग रही थी. उस ने आते ही कहा, ‘‘नहीं, मैं ने कुछ नहीं कहा, पिछले 3 दिन से तो मैं ने सुग्गी की शक्ल भी नहीं देखी.’’