तांत्रिक शक्ति के लिए अपने बच्चों की बलि – भाग 1

बात 22 मार्च, 2023 की है. मेरठ शहर के थाना दिल्ली गेट के एसएचओ ऋषिपाल औफिस में बैठे अखबार देख रहे थे, तभी 2 युवक उन के पास आए. दोनों के चेहरे पर परेशानी साफ झलक रही थी. उन्होंने एसएचओ साहब को सलाम कहा तो ने उन्हें सामने पड़ी कुरसियों पर बैठने का इशारा किया. दोनों बैठ गए. कपड़ों और चेहरों से दोनों मुसलमान दिखाई पड़ रहे थे.

“कहिए, थाने में आप का कैसे आना हुआ?” एसएचओ ऋषिपाल ने पूछा.

“साहब, मेरा नाम शाहिद बेग है.” एक छरहरे बदन का युवक अपना परिचय देते हुए बोला, “मेरे साथ मेरा साला दानिश खान है. मैं आप के पास अपने 2 बच्चों के गुम हो जाने की फरियाद ले कर आया हूं. मुझे शक है कि मेरे दोनों बच्चे कत्ल कर दिए गए हैं.”

कत्ल की बात सुन कर ऋषिपाल चौंक गए, वह कुरसी पर झुकते हुए बोले, “आप को यह शक क्यों और कैसे है कि आप के बच्चों का कत्ल कर दिया गया है?”

“साहब, निशा ने मेरे 3 बच्चों को पहले भी मार डाला था. अब मेरे बेटे मेराब और बेटी कोनेन की भी उस ने हत्या कर दी है.”

“निशा…यह कौन है?”

“मेरी बीवी है साहब, एक नंबर की मक्कार, चालबाज और फरेबी औरत है. ढोंगी तांत्रिक का लबादा ओढ़ कर वह लोगों को बेवकूफ बना रही है, तंत्रमंत्र के नाम पर उस ने अपनी पांचों औलादों की बलि चढ़ा दी है. मेरे बच्चे परसों शाम से गायब हैं…”

मामला काफी संगीन नजर आ रहा था. एसएचओ के चेहरे पर गंभीरता फैल गई. उन्होंने शाहिद बेग के चेहरे को ध्यान से देखा, वह काफी परेशान और दुखी दिखाई पड़ रहा था.

“शाहिद बेग, मुझे सारी बात विस्तार से बताओ.”

“साहब, मेरा निकाह सन 2001 में निशा के साथ हुआ था. वह शुरूशुरू में बहुत नेक और शांत स्वभाव की थी. वह मेरे 5 बच्चों की मां बनी, तब तक सब कुछ सामान्य चलता रहा. बाद में निशा में तेजी से परिवर्तन आ गया. वह खुद को तांत्रिक बताने लगी. उस की बातों में अनेक अनपढ़, गरीब लोग आ गए. मेरे घर पर लोगों का जमावड़ा लगने लगा. मैं ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी. वह कहती, “मैं तुम्हारे घर की खुशहाली के लिए सिद्धि प्राप्त करने की कोशिश कर रही हूं. तुम देखना कि मैं तुम्हें दुनिया का सब से बड़ा अमीर आदमी बना दूंगी.

“वह घर में अजीबअजीब तंत्रमंत्र के टोटके करने लगी, उस की हरकतों से परेशान हो कर मैं ने घर छोड़ दिया. मैं बच्चों को साथ रखना चाहता था, लेकिन निशा ने बच्चे मेरे हवाले नहीं किए. कुछ दिन बाद मुझे पता चला कि मेरे 3 बच्चे गायब हो गए हैं. मै ने निशा से मिल कर बच्चों की बाबत पूछा तो वह तरहतरह के बहाने बनाने लगी. कभी कहती कि वह पीर बाबा के मुरीद बन कर घर से चले गए, कभी कहती कि अजमेर शरीफ में उस से बिछुड़ गए.

“मैं तब चुप लगा गया. अब उस मक्कार औरत ने मेरा बेटा और बेटी को गायब कर दिया है. मुझे किसी ने बताया है कि निशा ने तांत्रिक शक्ति पाने के लिए मेरे बच्चों की बलि चढ़ा दी है. साहब, आप उस सिरफिरी औरत को कोतवाली ला कर पूछताछ कीजिए, सच्चाई सामने आ जाएगी.”

एसएचओ ऋषिपाल ने शाहिद बेग की बातों को गंभीरता से सुना. उन्होंने साथ में आए दानिश खान की तरफ देखा, “दानिश खान, आप को अपने जीजा की बातों में कितनी सच्चाई नजर आती है?”

“यह हकीकत बयां कर रहे हैं साहब. मुझे निशा को अपनी बहन कहते हुए भी शरम आती है. उस ने मेरे मासूम भांजेभांजियों का कत्ल किया है, उसे गिरफ्तार कर के सख्त से सख्त सजा दीजिए.”

“ठीक है. मैं निशा को यहां बुला कर पूछताछ करता हूं. आप अपनी एफआईआर दर्ज करवा दीजिए.” एसएचओ ने बड़ी गंभीरता से इस मामले को लिया. उन्होंने तुरंत निशा को पकड़ कर लाने के लिए एक पुलिस टीम खैर नगर भेज दी. इस की सूचना उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी दे दी.

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दोनों बच्चों की हत्या की

पुलिस टीम निशा को हिरासत में ले कर थाने लौट आई. जब उसे एसएचओ के सामने लाया गया तो वह जरा भी भयभीत नहीं थी. उस ने साड़ी ब्लाउज पहन रखा था, पूरे शृंगार से सजीधजी हुई थी. वह शान से आ कर उन के सामने तन कर खड़ी हो गई. उस ने एसएचओ के चेहरे पर नजरें जमा कर उपेक्षा से पूछा, “मुझे यहां क्यों बुलाया है कोतवाल साहब, आप जानते नहीं, मैं कौन हूं?”

एसएचओ उस की बेबाकी पर चौंके. वह इतनी बेफिक्री से बातें किस दम पर कर रही है, यह जानना जरूरी था. लेकिन उस से पहले वह उस से उस के बच्चों के विषय में जान लेना जरूरी समझते थे. उन्होंने उसे घूरते हुए पूछा, “तेरा बेटा मेराब और बेटी कोनेन कहां है?”

“उन दोनों को तो मैं ने खैरनगर की सलामती के लिए कुरबान कर दिया है.” निशा उसी लापरवाही भरे अंदाज में बोली, “जिस प्रकार युद्ध में अमन (शांति) के लिए मोघ्याल राजा राहिब सिद्ध दत्त ने अपने बच्चे का सिर कलम कर दिया था, उसी तर्ज पर मैं ने भी खैरनगर में अमन के लिए अपने दोनों बच्चों की कुरबानी दी है. यदि मैं ऐसा नहीं करती तो पूरा खैरनगर तबाह और बरबाद हो जाता. वहां लाशों के ढेर लग जाते.” वह बोली.

एसएचओ ऋषिपाल ऊपर से नीचे तक हिल गए. एक मां अपने जिगर के टुकड़ों को अपने हाथों से हलाक कर सकती है, वह सपने में भी नहीं सोच सकते थे. यह औरत बड़ी बेशरमी से अपना गुनाह खैरनगर में अमन लाने के नाम पर थोप रही है. या तो यह अपना दिमागी संतुलन खो चुकी है या फिर जरूरत से ज्यादा शातिर और मक्कार है. कुछ सोच कर उन्होंने पास में खड़ी महिला सिपाही से कहा, “मुझे लगता है, इस का दिमागी पेच ढीला हो गया है. जरा इस का दिमाग दुरुस्त तो करो.”

महिला सिपाही एसएचओ साहब का इशारा समझ गई. एसएचओ उठ कर बाहर आ गए. वह उस कक्ष में आए, जहां उन्होंने शाहिद बेग और उस के साले दानिश खान को बिठाया हुआ था. वे दोनों अमित राय को देख कर खड़े हो गए.

“आप लोग सही कह रहे थे.” ऋषिपाल गंभीर स्वर में बोले, “निशा तुम्हारे दोनों बच्चों की बलि चढ़ा चुकी है. उस ने बताया है कि खैरनगर को तबाह होने से बचाने के लिए उस ने दोनों बच्चों की कुरबानी दी है. हकीकत उगलवाने के लिए उस से पूछताछ चल रही है.”

शाहिद और दानिश खान बच्चों के कत्ल की पुष्टि हो जाने पर सकते में आ गए. शाहिद फूटफूट कर रोने लगा. एसएचओ ने उस का कंधा थपथपा कर कहा, “निशा की सरकारी खातिरदारी की जा रही है. अभी वह बता देगी कि बच्चे कत्ल किए गए हैं तो उन की लाश कहां हैं.”

10 मिनट बाद वह शाहिद बेग और दानिश खान को साथ ले कर उसी कमरे में आ गए, जहां निशा से पूछताछ की जा रही थी. निशा पूरी तरह टूट गई थी, वह चीखते हुए कह रही थी, “रुक जाइए, मुझे मत मारिए, मैं सब बता दूंगी.”

ऋषिपाल ने महिला कांस्टेबल को हाथ रोकने का इशारा किया और निशा को घूरते हुए पूछा, “बोलो, तुम ने दोनों बच्चों का क्या किया?

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“म… मैं ने उन दोनों को अपनी जिंदगी से दूर करने के लिए अपने प्रेमी सऊद फैजी, आरिफ कोसर, मुसर्रत बेगम और उस के बेटे साद को अमनचैन के नाम पर उकसाया. उन लोगों ने दोनों बच्चों मेराब और कोनेन को पहले रजाईगद्ïदे रखने वाले संदूक में हाथपांव बांध कर बंद कर दिया. 2 घंटे तक बंद रखने के बाद भी उन के प्राण नहीं निकले तो सऊद फैजी ने दोनों को जहर के इंजेक्शन लगा दिए. इस से छोटी कोनेन तो मर गई, मेराब नहीं मरा. तब उस का गला घोंटा गया. वह मर गया तो हम लोगों ने उन की लाशें गंगनहर में फेंक दी.”

“तू मां नहीं, मां के नाम पर कलंक है, तूने मेरे पांचों बच्चों की अंधविश्वास में हत्या की है. तुझे फांसी होनी चाहिए.” शाहिदबेग गुस्से से चीख पड़ा.

गंगनहर में हुई लाशों की तलाश

एसएचओ ने उसे शांत करवा कर बाहर भेज दिया. उन्होंने मां द्वारा अंधविश्वास में 2 बच्चों की हत्या करने की सूचनाएसएसपी रोहित सिंह सजवाण, एसपी (सिटी) पीयूष सिंह और सीओ अमित राय को दे दी तो ये तीनों पुलिस अधिकारी भीथाने पहुंच गए.

                                                                                                                                          क्रमशः

फुटबॉल खिलाड़ी शालिनी की अधूरी प्रेम कहानी – भाग 3

रवि पुलिस को बतातेबताते अतीत के झरोखे में चला गया…

उस ने बताया कि अभी हफ्ता भर पहले की ही बात है. उस ने मुझे फोन कर के कहा कि वह मुझ से वैलेंटाइंस डे पर मिलने प्रयागराज आ रही है.

मैं ने उस से चहकते हुए पूछा, ‘‘सच बताओ रोली (शालिनी को रवि प्यार से रोली कहता था), मजाक मत करो. क्या सच में तुम मुझ से मिलने वैलेंटाइंस डे पर प्रयागराज आओगी? इतने दिनों बाद तुम ने फोन किया है, मुझे यकीन ही नहीं हो रहा है कि मेरी तुम से बात हो रही है.’’

‘‘अरे बुद्धू, मैं तुम्हारी रोली ही हूं और तुम्हीं से बात कर रही हूं. तुम किसी भूत या चुड़ैल से बात नहीं कर रहे हो. यकीन नहीं आ रहा तो अपने कान में कस कर चिकोटी काट कर देखो पता चल जाएगा.’’ इतना कह कर  शालिनी बात करतेकरते हंसने लगी.

‘‘हांहां, चलो, यकीन हो गया. अच्छा, अब यह बताओ कि गुड़गांव से तुम आ कब रही हो?’’ रवि ने उत्सुकता से पूछा.

‘‘सुनो, मैं 14 फरवरी को प्रयागराज पहुंच जाऊंगी. उस दिन हम दोनों खूब मौजमस्ती और सैरसपाटा करेंगे. उस के बाद मैं वापस दिल्ली चली जाऊंगी.’’ शालिनी ने कहा.

‘‘क्यों, क्या तुम अपने घर नहीं जाओगी?’’

‘‘अरे नहीं बाबा. और यह बात तुम मेरे घर पर पापा या दीदी किसी से भी नहीं बताना क्योंकि मैं ने पापा से पहले ही कह रखा है कि मैं होली पर घर आऊंगी. मुझे इधर छुट्टी नहीं मिल रही है. समझे?’’ शालिनी ने बताया.

‘‘हां, समझा. ठीक है, मुझे तुम्हारे आने का बेसब्री से इंतजार है.’’ रवि बोला.

इस के बाद हम दोनों के बीच काफी देर तक बातें होती रहीं. अंतत: वह घड़ी भी आ गई जब 14 फरवरी की शाम शालिनी प्रयागराज जंक्शन के प्लेटफार्म पर उतरी. उस के आने से पहले ही रवि ने 10 हजार रुपए का मोबाइल बतौर सरप्राइज गिफ्ट खरीद रखा था. वह शालिनी को वैलेंटाइंस डे पर मोबाइल उपहार में देना चाहता था ताकि उस की प्रेमिका का प्यार और ज्यादा बढ़े.

14 फरवरी को तय समय पर शालिनी का प्रेमी रवि ठाकुर स्टेशन पहुंचा. उसे बाइक पर बिठाया और सीधे रेलवे स्टाफ की लोको कालोनी स्थित अपने आवास पर ले आया.

यहां गौरतलब है कि शालिनी धुरिया को 13 फरवरी को ही प्रयागराज आना था लेकिन ट्रेन मिस हो जाने के कारण वह 14 फरवरी को वहां पहुंची थी.

क्या शालिनी के और भी बौयफ्रैंड थे?

बहरहाल, जब रवि उसे ले कर अपने कमरे पर पहुंचा तो उस समय उस के घर वाले टीवी देख रहे थे. शालिनी फ्रैश होने चली गई. जब वह फ्रैश हो रही थी तो रवि ने शक के आधार पर उस का मोबाइल चैक किया. उसे शक था कि उस की प्रेमिका दिल्ली जा कर बदल गई है. उस के कई लोगों के साथ संबंध बन गए होंगे. मोबाइल की गैलरी में फोटो में शालिनी कई लड़कों के साथ स्टाइल में दिखी. फिर क्या था रवि को उस पर गहरा शक हो गया.

शालिनी जब बाथरूम से निकली तो रवि ने उस से पूछा, ‘‘रोली, तू दिल्ली जा कर बहुत बदल गई है. बेवफा है तू. अब तू पहले वाली रोली नहीं रही.’’

‘‘जुबान संभाल कर बात करो रवि, अगर मैं तुम से सच्चा प्यार न करती तो इतनी दूर तुम से मिलने नहीं आती. अपनी औकात में रह कर बात करो. क्या सबूत है तुम्हारे पास जो मुझ पर इतना बड़ा इलजाम लगा रहे हो.’’

‘‘अरे छिनाल, शरम कर जरा. सबूत है तेरा ये मोबाइल. इस में तेरे यारों के साथ खिंचवाई गई फोटो.’’ रवि गुस्से में बोला.

‘‘क्या कहा, छिनाल? तेरी हिम्मत कैसे हुई, यह कहने की?’’

‘‘एक बार नहीं सौ बार कहूंगा मादर…कहीं कहीं.’’ रवि ने उसे गाली दी.

अब शालिनी से सहा नहीं गया. उस ने एक जोरदार थप्पड़ रवि के गाल पर जड़ दिया. रवि तिलमिला उठा. गुस्से में गाली देते हुए बोला, ‘‘तेरी मां की… साली, तेरी इतनी हिम्मत कि मुझे थप्पड़ मारा…’’

शालिनी भी आपे से बाहर थी, ‘‘और नहीं तो क्या तेरी पूजा करूं. तूने मुझे समझ क्या रखा है अपनी रखैल? साले, अपने भाई के टुकड़ों पर पलने वाला मुझ पर इलजाम लगाता है. मैं इतनी बड़ी कंपनी में काम कर रही हूं. मेरा सभी के साथ उठनाबैठना, खानापीना, घूमनाफिरना है तो सब क्या मेरे यार हो गए. मैं पागल हूं जो इतनी दूर तुझ से मिलने यहां आई.’’

‘‘पता नहीं किसकिस को बयाना दे रखा होगा तूने. कौन जाने क्या खेल खेल रही है मेरे साथ फुटबाल की तरह.’’

रवि का इतना कहना था कि शालिनी ने फिर उसे झन्नाटेदार तमाचा जड़ दिया. फिर क्या था दोनों के बीच ठेठ इलाहाबादी बोली में गालीगलौज और मारपीट होने लगी.

‘‘मादर…बहुत हाथ उठने लगे हैं तेरे. तू ऐसे नहीं मानेगी…’’ कह कर रवि ने जोर से शालिनी की गरदन पकड़ ली. शालिनी गरदन छुड़ाने के लिए तड़पने लगी लेकिन अब रवि के ऊपर शैतान सवार हो चुका था. थोड़ी देर में शालिनी के प्राणपखेरू उड़ चुके थे. गला घोटे जाने से उस की जीभ और आंखें दोनों बाहर आ गई थीं.

रवि ठाकुर को जब होश आया तब तक काफी देर हो चुकी थी. अब उसे लाश ठिकाने लगानी थी. उस ने अकेले ही शालिनी के शव को बोरे में भरा. सूजे और सुतली से बोरे का मुंह सिला और अकेले ही रात के 9 बजे उस की डेडबौडी बाइक पर रख कर पोलो ग्राउंड वाले पुराने कुएं में फेंक आया.

सब कुछ अकेले ही कर डाला उस ने और किसी को पता तक नहीं चला? सेना की गश्ती गाड़ी, क्यूआरटी और हाईकोर्ट पर हमेशा चैकिंग में लगे रहने वाले पुलिस के जवान सभी नदारद रहे उस समय? न शालिनी की लड़ाईझगड़े के दौरान किसी ने चीखें सुनीं? जबकि पीछे वाले कमरे में रवि के घर वाले मौजूद थे. उन्हें भी इस की जरा भी भनक नहीं लगी? सवाल बहुत हैं मगर कोई फायदा नहीं.

इंसपेक्टर वीरेंद्र कुमार यादव ने रवि की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त मोबाइल और आलाकत्ल बरामद कर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

फुटबॉल खिलाड़ी शालिनी की अधूरी प्रेम कहानी – भाग 2

शालिनी ने एलडीसी कालेज से मार्केटिंग का कोर्स किया हुआ था. एक अच्छी फुटबाल खिलाड़ी होने के साथसाथ उसे मार्केटिंग का भी अच्छा अनुभव था. इसलिए उस की नौकरी लगने में कोई परेशानी नहीं हुई. दिल्ली में शालिनी किराए का कमरा ले कर रहती थी.

फरवरी में उस की मकान मालकिन ने हमारे घर फोन कर जब पूछा कि शालिनी प्रयागराज पहुंची कि नहीं तो हम सन्न रह गए. क्योंकि मकान मालकिन ने बताया कि शालिनी 13 फरवरी, 2022 को ही प्रयागराज के लिए रवाना हो गई थी.

पिता ने लिखाई बौयफ्रैंड के खिलाफ रिपोर्ट

जब हम लोगों ने यह सुना तो आश्चर्यचकित रह गए क्योंकि शालिनी ने कुछ ही दिनों पहले फोन कर के हमें बताया था कि वह अभी नहीं आ पाएगी. अभी उसे छुट्टी नहीं मिल रही है. होली के अवसर पर वह प्रयागराज आएगी. मकान मालकिन के अनुसार उसे अब तक दिल्ली वापस आ जाना चाहिए था. तभी से हम लोग परेशान थे.

इस के बाद उस के मोबाइल पर कई बार काल की, लेकिन हर बार उस का मोबाइल स्विच्ड औफ मिला. जब शालिनी की मकान मालकिन ने हमें बताया कि वह कह कर निकली थी कि प्रयागराज अपने घर जा रही है और 2-4 दिन में वापस आ जाएगी. तभी किसी अनहोनी की आशंका के मद्देनजर बिना पुलिस को सूचना दिए उस की खोजबीन कर रहे थे.

उस की तलाश में शालिनी का प्रेमी रवि भी साथसाथ रातदिन उन के साथ एक किए हुए था. शालिनी का मोबाइल भी स्विच्ड औफ था, जिस से हमारी परेशानी और भी बढ़ गई थी. पूरा परिवार उस की चिंता कर रहा था और जब वह हमें मिली भी तो लाश के रूप में. इतना कह कर राजेंद्र प्रसाद रोने लगे. राजेंद्र प्रसाद से रवि के खिलाफ तहरीर ले कर पुलिस ने जांचपड़ताल शुरू कर दी.

आगे की काररवाई के लिए सिविल लाइंस थाना पुलिस को कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि शालिनी का प्रेमी जोकि रेलवे स्टाफ क्वार्टर की लोको कालोनी में अपने बड़े भाई के साथ रहता था. उस समय वह थाने में ही मौजूद था. शालिनी के परिवार के साथ उस की खोजबीन का नाटक वह शुरू से ही कर रहा था.

रवि ठाकुर को फौरन पुलिस ने अपनी कस्टडी में ले लिया और पूछताछ शुरू कर दी. शुरुआत में उस ने पुलिस को काफी बहकाने और भटकाने की कोशिश की लेकिन जब पुलिस ने सख्ती की तो उस ने शालिनी धुरिया की हत्या कर के लाश को बोरे में भर कर कुएं में फेंकने से ले कर सभी जुर्म स्वीकार कर लिए.

वैलेंटाइंस डे पर मिलने इतनी दूर से आई शालिनी की हत्या की जो कहानी सामने उभर कर आई, वह इस प्रकार निकली—

शालिनी धुरिया उर्फ रोली और उस का प्रेमी रवि ठाकुर दोनों ही फुटबाल के अच्छे खिलाड़ी थे. शालिनी के कोच अनिल सोनकर ने ‘मनोहर कहानियां’ को बताया कि शालिनी जब महज 6-7 साल की थी, तभी से उस का रुझान फुटबाल की तरफ था. सदर बाजार फुटबाल ग्राउंड में वह फुटबाल की प्रैक्टिस करती थी.

शालिनी एक अच्छी फुटबाल खिलाड़ी थी. गजब का स्टैमिना था उस के अंदर.  बहुत ही प्रतिभाशाली खिलाड़ी थी वह. तपती दोपहर में भी वह बड़ी ही मेहनत, लगन और ईमानदारी के साथ इतने बड़े फुटबाल मैदान में अकेले दम पर बाउंड्री पर चूने का छिड़काव करती थी.

अपनी मेहनत और लगन से शालिनी धुरिया ने महिला फुटबाल खिलाड़ी के रूप में बेहतरीन खिलाड़ी की छवि बना ली थी. अपनी बेहतरीन परफार्मेंस के चलते स्टेट व नैशनल लेवल पर शालिनी ने सिर्फ उत्तर प्रदेश के जिलों में, बल्कि गोवा, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, समेत विभिन्न राज्यों व जिलों में प्रयागराज जिले का तो नाम रोशन किया ही, साथ ही सदर बाजार फुटबाल एकेडमी का भी परचम फहराया था.

शालिनी ने खेल के साथसाथ अपनी पढ़ाईलिखाई भी जारी रखी थी और गंगापार इलाके से बीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद पर्ल्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, गुरुग्राम में नवंबर 2021 से जौब करने लगी थी. खेल के दौरान ही शालिनी को रवि ठाकुर नाम के फुटबाल खिलाड़ी से प्यार हो गया था. रवि मूलरूप से बिहार के जिला जहानाबाद के गांव मकदूमपुर का रहने वाला था.

उस के पिता दिनेश सिंह रेलवे में नौकरी करते थे. उन की पोस्टिंग प्रयागराज में ही थी, इसलिए सिविल लाइंस की रेलवे कालोनी में उन्हें क्वार्टर मिला हुआ था. उन्होंने करीब 5-6 साल पहले वीआरएस ले लिया और अपनी जगह अपने बड़े बेटे दिनेश ठाकुर को नौकरी पर लगवा दिया था.

रवि इलाहाबाद स्पोर्टिंग फुटबाल एकेडमी का होनहार खिलाड़ी था. वह स्कूल नैशनल से अंडर 17  के तहत सीनियर स्टेट चैंपियनशिप खिलाड़ी भी रहा है. खेल के साथ वह इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बीए सेकेंड ईयर की पढ़ाई भी कर रहा था.

शालिनी और रवि की प्रेम कहानी की शुरुआत लगभग 7-8 साल पहले खेल के दौरान मैदान में हुई थी. दोनों ही फुटबाल के अच्छे खिलाड़ी थे, इसलिए प्रेम परवान चढ़ने में समय नहीं लगा. दोनों के पास एकदूसरे से मिलने का भरपूर समय था. खेल के बहाने रोज मुलाकात स्वाभाविक थी.

इन की प्रेम कहानी के बारे में दोनों के ही परिजन भलीभांति परिचित थे. शालिनी तो रवि के प्यार में ऐसी दीवानी हो गई थी कि उस ने अपने हाथ पर प्रेमी रवि का नाम तक गुदवा लिया था. इस तरह इन का प्यार परवान चढ़ता गया.

लेकिन एक दिन रवि की थोड़ी सी गलतफहमी ने सब कुछ उजाड़ दिया. जब रवि को हिरासत में लिया तो पूछताछ करने पर रवि ने पुलिस को बताया, ‘‘हां सर, मैं ने उस चुड़ैल का गला दबा कर हत्या की है. वह थी ही इसी लायक. मेरी सच्ची मोहब्बत का उस ने गलत फायदा उठाया था बेवफा कहीं की. मोहब्बत तो बेपनाह मैं उस से करता था और उस के मर जाने के बाद भी करता हूं.

‘‘लेकिन क्या करूं उस के बिगड़ैल रवैए और हाईप्रोफाइल लाइफस्टाइल की चाह ने मुझे उस की हत्या करने पर मजबूर कर दिया. हालांकि मैं ऐसा नहीं करना चाहता था लेकिन उस के थप्पड़ से मैं इतना आहत हो गया था कि बरदाश्त नहीं कर पाया. रोक नहीं सका खुद को और…’’

फुटबॉल खिलाड़ी शालिनी की अधूरी प्रेम कहानी – भाग 1

20 फरवरी, 2022 की शाम. समय यही कोई साढ़े 5-6 बजे के आसपास का रहा होगा. जाड़े की शाम थी. वैसे भी जाड़ों में दिन छोटे और रात बड़ी होती हैं. उस समय भी शाम हो चली थी और शाम के धुंधलके ने प्रयागराज हाईकोर्ट के पास स्थित पोलो ग्राउंड और सड़क को अंधेरे में घेर रखा था.

चूंकि यह सड़क वीआईपी है और लोगों का आवागमन लगा रहता है. खासकर सुबह और शाम को वाक करने वालों का. उसी पोलो ग्राउंड में एक बहुत ही पुराना और गहरा कुआं भी है. ठंड के बावजूद उस पुराने कुएं से बदबू आ रही थी, जिस की असहनीय दुर्गंध ने वाक करने वालों और राहगीरों को अपने नथुनों पर रुमाल रख कर चलने पर मजबूर कर दिया था. किसी अनहोनी की आशंका के मद्देनजर कुछ लोगों ने पोलो ग्राउंड का चक्कर लगाया कि आखिर माजरा क्या है.

चूंकि आर्मी एरिया में स्थित पोलो ग्राउंड बहुत बड़े दायरे में फैला हुआ है, इसलिए बदबू कहां से आ रही है, यह जानने के लिए लोग सब से पहले कुएं के पास गए. कुआं मुख्य सड़क से सिर्फ 10 कदम की दूरी पर था. सब से पहले कुएं के पास ही लोगबाग गए. जैसेजैसे लोग कुएं के पास बढ़ते गए, बदबू उतनी ही तेजी से उन के नथुनों में घुस रही थी.

शक होने पर वहां मौजूद एक वकील साहब ने फौरन 112 नंबर व संबंधित थाना सिविल लाइंस को सूचना दी कि कुएं से लगातार असहनीय दुर्गंध उठ रही है. जरूर उस में किसी की लाश हो सकती है. हमेशा उस कुएं से लाश ही बरामद की गई है, इसलिए उसे मौत का कुआं ही कहते थे. इस बात में या यह कहनेसमझने में जरा भी समय नहीं लगा कि उस कुएं में किसी का काम तमाम कर के उस की लाश फेंक दी गई है.

बहरहाल, सूचना मिलते ही प्रयागराज के थाना सिविल लाइंस की पुलिस और गश्ती गाड़ी पोलो ग्राउंड के अंदर घुसे और जब कुएं के अंदर झांका तो पाया कि एक सफेद रंग का बोरा उस कुएं में (लगभग सूख चुका है कुआं फिर थोड़ाबहुत पानी उस में अब भी हमेशा रहता है) पड़ा था. कुछ ही देर में एसएसपी अजय कुमार और सीओ संतोष सिंह भी वहां पहुंच गए.

कुआं काफी गहरा था. बोरे को निकालने के लिए इंसपेक्टर वीरेंद्र यादव ने फायर ब्रिगेड को फोन कर दिया. फायर ब्रिगेड कर्मचारियों ने कुएं के अंदर एक लंबी सीढ़ी डाली और अपनेअपने मुंह ढक कर उस के अंदर उतरे. जैसेतैसे बोरे को कुएं से बाहर लाया गया. उसे उठाने में जवानों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी क्योंकि बोरा काफी वजनी था.

बोरे में निकली लड़की की लाश

जब उस बोरे का मुंह खोला तो उस के अंदर एक युवती की लाश देख कर लोग दंग रह गए. अब जबकि बोरे को कुएं से निकाला जा चुका था तो उस में से और भी तेजी के साथ दुर्गंध चारों तरफ फैलने लगी थी.

युवती ने जींस टीशर्ट और पैरों में जूते पहन रखे थे. उस की लाश देख कर पुलिस ने अंदाजा लगाया कि उस की हत्या कोई एक हफ्ता पहले कर के उस की लाश को ठिकाने लगाने के लिए हाथपैर मोड़ कर उसे बोरे में ठूंसठूंस कर भरा गया था. उस के बाद सुतली और सूजे की मदद से बोरे को सिल कर कुएं में फेंका गया होगा.

पानी में पड़ेपड़े उस युवती की लाश लगभग फूल चुकी थी. चेहरा भी पहचानने में नहीं आ रहा था. सिविल लाइंस पुलिस ने वहां मौजूद लोगों से लाश की शिनाख्त करने को कहा, लेकिन वहां मौजूद कोई भी शख्स उसे पहचान पाने में असमर्थ था.

लड़की कौन थी? कहां की रहने वाली थी? यह सब जानने के लिए जब महिला पुलिस ने उस के कपड़ों की तलाशी ली तो उस में कुछ भी नहीं मिला. हां, मृतका की बाईं कलाई पर एक टैटू बना हुआ था और उस पर रवि नाम लिखा हुआ था.

बहरहाल, लाश का पंचनामा भरने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. एसएसपी अजय कुमार ने हत्या के इस मामले को सुलझाने के लिए सीओ संतोष सिंह के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बनाई. टीम में थाना वीरेंद्र सिंह यादव, एसएसआई इंद्रदत्त द्विवेदी, एसआई वजीउल्लाह खान, अरविंद कुमार कुशवाहा, कांस्टेबल राहुल कुमार गोला, राहुल कुमार, महिला कांस्टेबल इंदु आदि को शामिल किया.

अगले दिन कुएं में मिली जवान युवती की लाश की खबर शहर के सभी अखबारों में छपी और साथ ही उस की कलाई पर बने टैटू पर रवि नाम गुदे होने का जिक्र किया गया तो पुलिस को उस की शिनाख्त के लिए ज्यादा भागदौड़ की जरूरत नहीं पड़ी.

मृतका निकली राष्ट्रीय स्तर की फुटबाल खिलाड़ी

प्रयागराज के ही थाना शिवकुटी के मोहल्ला शिलाखाना में रहने वाले राजेंद्र प्रसाद ने अगले दिन यानी 21 अप्रैल को जब अखबार में यह पढ़ा कि एक जवान युवती की डेडबौडी पोलो ग्राउंड के अंदर पुराने कुएं से थाना सिविल लाइंस पुलिस ने बरामद की है, उस के हाथ पर बने टैटू पर ‘रवि’ नाम लिखा हुआ है तो वह थाने पहुंचे और इंसपेक्टर वीरेंद्र यादव से मिले.

वीरेंद्र यादव से उन्होंने डेडबौडी देखने की इच्छा जाहिर की तो बिना एक पल गंवाए इंसपेक्टर ने उन्हें अपने मातहतों के साथ पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया.

लाश के चेहरे से जब कफन हटाया गया तो उस के पिता और परिजन फफकफफक कर रोने लगे. शव की शिनाख्त हो चुकी थी. मृतका का नाम शालिनी धुरिया उर्फ रोली था. उस के पिता राजेंद्र प्रसाद, मां व भाईबहन ने उसे पहचान लिया. घर वाले यह जान कर हैरान थे कि शालिनी तो गुड़गांव में नौकरी कर रही थी तो प्रयागराज कब आ गई.

शालिनी पूरे परिवार की लाडली थी. उस की हत्या से घर वालों का रोरो कर बुरा हाल था. पेशे से ईरिक्शा ड्राइवर राजेंद्र प्रसाद के 4 बच्चों में सब से बड़ी बेटी श्रद्धा, उस से छोटी शालिनी उर्फ रोली व उस से छोटे भाई बहन अंकित और स्वाति थे.

बहरहाल, उस के अंतिम संस्कार के बाद घर वालों से, खासकर शालिनी के पिता से जब यह पूछा गया कि उस की कलाई पर जो रवि नाम लिखा हुआ है, वह कौन है? शालिनी का उस से क्या संबंध है? शालिनी यहां से पहले कहां रहती थी?

पुलिस को इन सवालों का जवाब मिलना जरूरी था, तभी वह शालिनी के हत्यारों तक पहुंच सकती थी. पूछताछ के दौरान शालिनी के पिता राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि रवि उन की बेटी का दोस्त है.

‘‘उस का आप के घर भी आनाजाना था?’’ इंसपेक्टर वीरेंद्र यादव ने पूछा.

उन्होंने बताया कि शालिनी बहुत होनहार थी. वह राष्ट्रीय स्तर की फुटबाल प्लेयर थी. परिवार की माली हालत को देखते हुए 2021 में दूसरे लौकडाउन के खत्म होने के बाद वह नवंबर महीने में गुड़गांव चली गई थी. और एक प्राइवेट कंपनी में जौब करने लगी थी.