अपनों के खून से रंगे हाथ : ताइक्वांडो कोच को मिली सजा – भाग 3

हनुमान और उस के दोनों साथी कपिल और दीपक कमरे से बाहर निकल कर बरामदे में आए. तभी वहां सो रहे संतोष शर्मा के छोटे बेटे हैप्पी के हाथ पर हनी का पैर पड़ गया. बच्चों के जग जाने पर पकड़े जाने के डर से वे उन पर भी टूट पड़े. संतोष के बाकी दोनों छोटे बेटों हैप्पी (15 वर्ष) और अज्जू (12 वर्ष) के साथ ही उस के भतीजे निक्की (10 वर्ष) की भी गला रेत कर हत्या कर दी. हत्यारों ने उन्हें भी चाकुओं से निर्ममतापूर्वक गोद डाला.

संतोष के पति और बच्चों की हत्या करने के बाद हनुमान ने संतोष शर्मा से उस की स्कूटी की चाबी मांगी, तब संतोष शर्मा ने चाभी और 3000 हजार रुपए दिए. तीनों हत्यारे स्कूटी से ही फरार हो गए. उन्होंने अलवर रेलवे स्टेशन के पास मंडी मोड़ के निकट सुनसान जगह पर संतोष शर्मा की स्कूटी खड़ी कर दी.

रात ज्यादा हो जाने के कारण उन्हें ट्रेन नहीं मिली. वे आटो में बैठ कर राजगढ़ चले गए. जहां से बाद में हत्याकांड में शामिल उस के दोनों साथी वापस अलवर लौट गए, जबकि संतोष शर्मा का प्रेमी वहां से बांदीकुई होते हुए जयपुर चला गया. वह जयपुर से उदयपुर भाग गया.

यह हत्याकांड किसी फिल्म की तरह था. इतने भयानक हत्याकांड के बारे में जिस ने भी सुना, दांतों तले अंगुली दबा ली. 5-5 गला कटे परिवार के सदस्यों की लाशों के बीच खून भरे कमरे में संतोष शर्मा कई घंटों तक अकेले बैठी रही. तयशुदा योजना के अनुसार सुबह होने से पहले छोटी बहन के पास जा कर सो गई.

वारदात के बाद फैली सनसनी

सुबह होने पर वह भी रोनेचिल्लाने का नाटक करने लगी. मोहल्ले वाले भी आ गए. रोती हुई संतोष शर्मा ने मोहल्ले वालों पर ससुराल वालों के साथ जमीन विवाद के कारण पूरे परिवार को मार देने का आरोप लगा दिया और थोड़ी देर में बीमार बन कर अस्पताल में भरती हो गई. उस के संदिग्ध आचरण को देख कर पुलिस के शक की सुई उस पर जा कर ठहर गई.

एक ही रात में शिवाजी कालोनी के मकान में एक साथ परिवार के 5 लोगों की हत्या की खबर जंगल की आग की तरह चारों तरफ फैल गई. घटनास्थल पर शिवाजी पार्क थाने के एसएचओ विनोद कुमार सांवरिया, एसपी राहुल प्रकाश सहित अन्य आला अफसर पहुंच गए.

घटनास्थल पर पुलिस डौग्स और एफएसएल टीम के साथ फोटोग्राफर ने आ कर अलगअलग एंगल्स से मृतकों की फोटो खींचे.  मीडियाकर्मियों सहित क्षेत्रवासियों की भारी भीड़ एकत्रित हो गई. जितने मुंह उतनी बातें होने लगीं. लोग यकीन नहीं कर पा रहे थे कि क्या कोई औरत ऐसी भी हो सकती है, जो बहन, पत्नी और मां कुछ भी न बन सकी.

अलवर में गांधी जयंती की रात को घटित इस हत्याकांड से पूरा राजस्थान हिल गया था. पुलिस प्रशासन को जवाब देना भारी पड़ रहा था. इस ब्लाइंड मर्डर केस को ले कर विपक्ष ने खूब हायतौबा मचाई, वहीं मीडिया ने भी राज्य में कानूनव्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो जाने की खबरें प्रचारितप्रसारित कर पुलिस की नींद उड़ा दी.

तत्कालीन एसपी राहुल प्रकाश ने आला अफसरों की बैठक में दिशानिर्देश देने के साथ ही इस ब्लाइंड मर्डर केस की जांच की जिम्मदारी शिवाजी पार्क थाने के एसएचओ विनोद कुमार सांवरिया को सौंप दी. मामला पेंचीदा था. इसे सुलझाने के लिए टीम गठित की. मौकाएवारदात पर पहुंच कर जांचपड़ताल की. सभी लाशों को पोस्टमार्टम के लिए अलवर के सरकारी अस्पताल भेज दिया गया.

काल डिटेल्स से पुलिस पहुंची आरोपियों तक

पूछताछ के लिए संतोष शर्मा को हिरासत में ले लिया गया. उस का मोबाइल कब्जे में ले कर उस की काल डिटेल्स निकाली गई. जल्द ही सुराग मिलने शुरू हो गए. संतोष शर्मा के फोन की काल डिटेल्स में वारदात से पहले उस की हनुमान प्रसाद से कई बार बात हुई थी. सब से ज्यादा फोन पर बातचीत करने के संकेत मिलने से पुलिस को कुछ और सुराग मिले.

पुलिस ने उदयपुर पहुंच कर हनुमान प्रसाद के कमरे पर दबिश दी. उस के कमरे की तलाशी ली गई. वहां से 7 मोबाइल फोन और बैग से खून सने कपड़े बरामद हुए. हनुमान को गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस अहम सबूत के साथ अलवर पहुंची. उच्च अधिकारियों से आवश्यक निर्देश ले कर एसएचओ सांवरिया ने मुलजिम हनुमान से गहन पूछताछ शुरू की.

उस ने अपना जुर्म कुबूल लिया, जिस के बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर तथा रिमांड पर ले कर हनुमान की निशानदेही पर अलवर की तहसील राजगढ़ के रेलवे स्टेशन के पास स्थित नाले से हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद कर लिए. अलवर रेलवे स्टेशन के पास खड़ी संतोष शर्मा की स्कूटी भी बरामद कर ली गई. हनुमान की मदद करने वाले साथी कपिल और दीपक को भी अलवर के मालाखेड़ा गुजुकी के किराए के मकान से पकड़ लिया गया.

पुलिस की सख्त पूछताछ से अय्याशी की गर्त में डूबे हनुमान और संतोष शर्मा की कहानी का खुलासा हो गया. उस ने अपना अपराध कुबूल कर सब कुछ विस्तारपूर्वक बता दिया. यह भी बता दिया कि अलवर के मंडी मोड़ पर स्थित पानी की टंकी पर हत्याकांड को अंजाम देने के बाद तीनों ने रक्तरंजित छुरा और अपने हाथ पैर धोए थे. ट्रेन नहीं मिलने पर अलवर रेलवे स्टेशन के आगे आटो से राजगढ़ के लिए फरार हो गए थे.

हनुमान के नाबालिग साथी दीपक और कपिल वापस अलवर चले गए, जबकि खुद राजगढ़ से बांदीकुई जंक्शन चला गया. वहां से ट्रेन पर बैठ कर उदयपुर चला गया. अलवर से उदयपुर तक की लंबी यात्रा की थकान के कारण वह अपने कमरे पर जा कर सो गया था. इस कारण मोबाइल और खून से सने कपड़े को ठिकाने लगाने का उसे वक्त ही नहीं मिल पाया.

दूसरी तरफ संतोष शर्मा को बताया गया कि उस के प्रेमी हनुमान ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया है. उस के बाद संतोष शर्मा ने भी हत्याकांड में शामिल होने की बात मान ली. पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया. हत्याकांड में शामिल हनुमान के दोनों साथी नाबालिग ही थे. इस कारण उन्हें बाल न्यायालय में पेश कर बाल सुधार गृह भेज दिया गया.

हत्याकांड का फैसला आ जाने पर एक बार फिर हालात का जायजा लेने के लिए लेखक ने महिला ताइक्वांडो कोच के पति बनवारी लाल के गांव गारू पहुंच कर गांव वालों से बातचीत की.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित, कथा में वंदना परिवर्तित नाम हैं

नई नवेली दीपा ने सौतेले बेटे संग रची साजिश – भाग 2

पत्नी दीपा कौर पर हुआ शक

जांच करने वाली टीम को यह बात गले नहीं उतर रही थी कि 5-6 मई की रात को जयदेव की हत्या हुई थी, उस दौरान घर में लगे सीसीटीवी कैमरे क्यों बंद थे? टीम इस जांच में लग गई कि कैमरे किस ने बंद किए? उन्हें सुबह 6 बजे किस ने खोला? इस बारे में भदौरिया ने दीपा से भी सवाल किया. उस से सख्ती से पूछा कि कहीं उसी ने कैमरे तो बंद नहीं किए, इस के पीछे उस की क्या मंशा थी?

पुलिस की सख्ती के सामने दीपा कौर सकपका गई. उस का चेहरा सफेद पड़ गया. वह घबरा गई थी. उस की घबराहट को भांपते हुए भदौरिया ने सीधे लहजे में सवाल किया कि वह सब कुछ सचसच बताए, वरना उस की खैर नहीं. उस पर ही जयदेव सिंह की हत्या का आरोप लग सकता है. उसे जेल हो सकती है. कड़ी सजा मिल सकती है. इस के बाद उस से आगे की पूछताछ के लिए महिला कांस्टेबल के हवाले कर दिया.

जैसे ही महिला सिपाही ने दीपा से दोगुनी उम्र के जयदेव से शादी करने का सवाल किया तो वह और भी परेशान हो गई. शादी के सवाल के जवाब में उस ने जयदेव का सरकारी कर्मचारी होना कारण बताया. जब उस के पतिपत्नी के संबंध और बच्चों वाले परिवार में एडजस्ट करने के बारे में पूछा गया, तब वह बिफर गई. पूछताछ के क्रम में उस ने बोल दिया कि जयदेव शराब के नशे में उस की बातबात पर पिटाई करता था.

पति द्वारा दीपा को पीटे जाने की जानकारी मिलते ही एसपी (सिटी) भदौरिया दीपा से पूछताछ करने लगे. आखिरकार दीपा हत्याकांड से संबंधित पूरा मामला बताने के लिए तैयार हो गई. उस ने पति की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. उस के बाद उस ने शराबी पति की हत्या की जो कहानी सुनाई, उस में उस का भाई और सौतेले बेटों का भी नाम शामिल हो गया. उस की पूरी कहानी इस प्रकार निकली-

जयदेव सिंह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला संभल के गांव मडावली रसूलपुर का रहने वाला था. करिअर बनाने की शुरुआत उस ने मुरादाबाद के टैक्सी स्टैंड से की थी. वह साल 2006 में खन्ना ट्रेवल्स की टैक्सी चलाता था. इस के लिए उस ने एक एंबेसडर कार यूपी-21-9494 किराए पर ले रखी थी. बाद में उस की नौकरी संविदा ड्राइवर के तौर पर मुरादाबाद नगर निगम में लग गई.

बाद में वह यूपी के मुरादाबाद के जिलाधिकारी के यहां काम पर लग गया. वहां उस के आचरण को देखते हुए नौकरी स्थाई हो गई. हत्या के समय उस की पोस्टिंग मुरादाबाद की कांठ तहसील के एसडीएम प्रशासन जगमोहन गुप्ता के ड्राइवर के तौर पर थी.

जयदेव ने 23 साल छोटी दीपा कौर से की दूसरी शादी

उस की शादी 18 साल पहले पुष्पा कौर से हुई थी. उस से वह 3 बच्चों का पिता बन गया था. बड़े बेटे का नाम हरनाम सिंह 17 साल, उस से छोटा हरमिंदर सिंह 14 साल और सब से छोटी बेटी जासमीन 10 साल की है. पिछले साल पुष्पा का निधन हो गया था. दरअसल, वह बीते कुछ सालों से दिल की बीमारी से ग्रसित थी. इस के चलते हार्ट अटैक के कारण 25 जुलाई, 2022 को उस की मृत्यु हो गई थी.

अपनी मां की मौत का बच्चों पर काफी गहरा असर हुआ था. बेटा तो इस कारण अपने पिता से ही नाराज हो गया था. उस की शिकायत थी कि पिता ने मां के इलाज में अनदेखी की और वह उन की वजह से ही मर गई. पुष्पा के निधन के कुछ समय बाद ही जयदेव सिंह ने दूसरी शादी की तैयारी शुरू कर दी थी. उस ने दीपा को पसंद किया था, जिस की उम्र मात्र 22 साल थी, जबकि जयदेव सिंह 45 साल का अधेड़ था.

दीपा और उस के परिवार वाले यह जानते थे कि जयदेव सिंह अधेड़ उम्र का बालबच्चे वाला है, इस के बावजूद भी उन्होंने उस से शादी के लिए हामी भर दी. कारण उस की सरकारी नौकरी का होना था. शादी के कुछ दिनों तक तो सब कुछ ठीकठाक चला, उस के बाद दीपा को उस का असली रूप नजर आने लगा. वह एक नंबर का शराबी था और नईनवेली दुलहन को किसी गैरमर्द से बात करना उसे जरा भी पसंद नहीं था. यहां तक कि उस का जवान बेटे से बात करना भी पसंद नहीं था.

इसे ले कर वह उस से काफी नाराज हो जाता था. डांट दिया करता था. यहां तक कि जब वह शराब के नशे में होता था, तब उस की जम कर पिटाई भी कर देता था. एक दिन उस ने बच्चों के सामने ही उस की बेरहमी से पिटाई कर दी थी. वह अपने कमरे में बैठी आंसू बहा रही थी, तभी बच्चों ने आ कर उसे ढांढस बंधाया. उन से उसे हिम्मत मिली और फिर बच्चों के प्रति उस का प्रेम उमड़ आया. वह उन का विशेष खयाल रखने लगी. उन की पसंद का नाश्ता और उन की पसंद का खाना पका कर खिलाने लगी.

बच्चों से दीपा की बढ़ती नजदीकी भी जयदेव को अच्छी नहीं लगती थी. वह चाहता था कि वह जब तक घर में रहे, दीपा उस की बांहों में पड़ी रहे. जबकि दीपा बच्चों के घर में रहने और उन की जरूरतों को पूरा करने को ले कर ऐसा नहीं कर पाती थी.

सौतेले बेटे से हो गया लगाव

एक दिन किसी बात को ले कर जयदेव दीपा की पिटाई कर रहा था, तब बड़े बेटे हरनाम ने उसे आ कर बचाया और पिता को ही डांटते हुए बोला, “अब इसे भी मार डालोगे क्या, एक को तो मार ही चुके हो.”

वह दीपा को अपने पिता से छुड़ा कर कमरे में ले गया. उस के जख्मों का खून साफ कर उस पर दवाई लगाने लगा. दीपा हरनाम के इस व्यवहार से काफी प्रभावित हो गई. सौतेले बेटे से लिपट कर रोने लगी. निहाल भी मां से गले मिल कर रोने लगा.

तभी जयदेव वहां आ गया. उस ने बेटे को दीपा से गले मिलते देखा तो वह और भी आगबबूला हो गया. जयदेव ने उस की भी पिटाई कर दी. पिटने के बाद हरनाम सिंह गुस्से में रुद्रपुर चला गया. उस के जाने के बाद दीपा को दूसरे बच्चों से मालूम हुआ कि जयदीप उस की मां के साथ भी ऐसा ही बर्ताव करता था.

हरनाम सिंह के रुद्रपुर जाने के बाद दीपा ने फोन पर बात की. उस ने पुष्पा की मौत के बारे में पूछा. उस ने बताया कि घर पर ग्लूकोज चढ़ाए जाने के समय उस ने ग्लूकोज की बोतल में शराब का इंजेक्शन दे दिया था. उस के बाद उस की मां की हालत और भी खराब हो गई थी.

                                                                                                                                         क्रमशः

अपनों के खून से रंगे हाथ : ताइक्वांडो कोच को मिली सजा – भाग 2

अय्याशी के चक्कर में परिजनों से बेरुखी

उसे हनुमान काफी पसंद आता था. उसे उस ने अपने रूपजाल में फांस लिया था. वह उस के इशारे पर कुछ भी कर गुजरने को हरदम तैयार रहता था. इस के एवज में संतोष शर्मा उस पर दिल खोल कर प्रेम सुख लुटा रही थी. वह किसी न किसी स्पोट्र्स टूर्नामेंट के बहाने जबतब घूमने जाने लगी और अपनी यात्राओं को भागवत कथा या धार्मिक आयोजन बता कर घर वालों से झूठ बोल कर चली जाती थी. जबकि वह अपने आशिक के पास उदयपुर में होती थी. वहां दोनों लिवइन में रहने लगे थे. वहां वह जम कर रंगरलियां मनाने लगी थी.

उस के आचरण में एक तरह से मक्कारी और शातिरानापन आ गया था. वह एक मतलबी और अपने सुख की चाहत में रहने वाली महिला बन चुकी थी. साथ ही परिवार पर अपनी दबंगई दिखाती रहती थी. उस के गुस्सैल स्वभाव से छोटी बहन वंदना, जो उस की सगी देवरानी भी थी, डरती थी. संतोष शर्मा डांटफटकार कर उस से घर के काम करवाती रहती थी. यही नहीं, अपने बच्चों के साथ भी काफी तल्खी से पेश आती थी.

जरा सी गलती हो जाने पर उन को बेल्ट से पीट डालती थी. इसलिए बच्चे भी उस से हमेशा खौफजदा रहते थे. उस के घर से बाहर रहने पर बच्चे ज्यादा खुश रहते थे. वह ससुराल वालों को बेवकूफ बनाने में माहिर हो चुकी थी. भागवत कथा वाचक बन कर कथा सुनाने और रामलीला के किरदार निभाने का दिखावा करती थी. इसलिए घर वालों की निगाह में वह धार्मिक महिला थी. यह कहें कि संतोष शर्मा अपने घर वालों की आंख में धूल झोंक कर ऐशमौज कर रही थी.

कहते हैं न कि हर किसी की कोई न कोई कमजोरी रहती है. संतोष शर्मा की भी एक कमजोरी सोशल साइटों पर फोटो पोस्ट करने और उसे शेयर करने की थी. यही शौक उस के लिए एक दिन मुसीबत बन गया. एक बार उस के बच्चों ने सोशल मीडिया पर संतोष शर्मा की बिंदास अदाओं की तसवीरें देख लीं. वे चौंक गए.

उन्हें भरोसा ही नहीं हुआ कि उस की मां की इस तरह की अश्लील तसवीरें भी हो सकती हैं. उन्होंने पापा को भी वे तसवीरें दिखाईं. वह भी उसे देख कर सन्न रह गया. फोटो देख कर उस के 17 साल के बड़े बेटे अमन और पति बनवारी ने घर में हंगामा खड़ा कर दिया. अमन ताइक्वांडो का उभरता खिलाड़ी भी था. समझदार होने लगा था.

पति ने लगा दी पाबंदी

संतोष शर्मा उस पर पाबंदी लगाने लगी, जिस कारण उस ने नारजागी दिखाई. उस की नाराजगी हनुमान को ले कर भी हुई, जो घर भी आने लगा था. उस के साथ संतोष शर्मा के बढ़ता मेलजोल की जानकारी बापबेटों को हो गई थी. हनुमान जब भी अलवर के गुजुकी क्षेत्र में अपने दोस्त कपिल के कमरे पर आता था, तब संतोष शर्मा उस से मिलने पहुंच जाती थी.

इस तरह ढाई साल का समय कब गुजर गया, पता ही नहीं चला. इस बीच संतोष शर्मा पर पति और बेटे ने घर से बाहर जाने पर रोक लगा दी. एक दिन पति से उस की तकरार हो गई. गुस्से में आ कर बनवारी ने संतोष शर्मा की पिटाई कर दी. पति से पिटने के बाद संतोष शर्मा चोट खाई नागिन बन गई. गुस्से में फुंफकार उठी.

उस घटना के बाद प्रेमी युगल का मेलमिलाप बंद हो गया था. संतोष शर्मा मिलन को तड़प उठी थी. एक दिन मौका पा कर संतोष शर्मा हनुमान से मिली और अपनी परेशानी बताने के साथ ही पति और बेटे को रास्ते से हटाने की साजिश भी रच डाली.

दोनों ने योजना बना कर फरजी आईडी पर 2 सिम खरीद लिए. एक सिम संतोष शर्मा को दे कर दूसरी सिम अपने पास रख लिया. इसी सिम से वे साजिश के बारे में बातचीत करने लगे. एक दिन पक्की योजना बन गई. कब और कैसे वारदात को अंजाम देना है, इस का प्रारूप तैयार हो गया. यहां तक कि सबूत कैसे नष्ट करने हैं, फरार कैसे होना है, कहां रहना है, वारदात के बाद फरारी कहां काटनी है और वारदात के सबूत कैसे नष्ट करने हैं? वगैरह वगैरह…!

इसी के साथ संतोष शर्मा के प्रेमी ने 30 सितंबर, 2017 को औनलाइन शौपिंग वेबसाइट से 1,260 रुपए में जानवरों को काटने का एक बड़ा चापड़ (चाकू) भी मंगवा लिया. चापड़ 31 सेंटीमीटर लंबा और 4 सेंटीमीटर चौड़ा था. वह एक तरफ से धारदार तथा दूसरी तरफ से कांटेदार था. इस के अलावा शरीर को छलनी करने के लिए अलवर के केडलगंज से 2 और बड़े चाकू खरीद लिए थे. उन की योजना बापबेटे की एक साथ हत्या करने की थी.

वारदात की रच ली पूरी साजिश

हत्या के बाद पुलिस को कोई निशान और सुराग नहीं मिले, इस के लिए दस्ताने (ग्लव्ज) ला कर भी रख लिए थे. वारदात को अंजाम देने के लिए उन्होंने गांधी जयंती 2 अक्तूबर, 2017 की तारीख तय की थी. उस से 2 दिन पहले ही हनुमान उर्फ हनी उदयपुर से अलवर आ गया था.

संतोष शर्मा अपने प्रेमी से अकसर फरजी कागजात पर लिए गए सिम का ही इस्तेमाल करती थी. जरूरत के अनुसार उसे अपने मोबाइल में लगा लेती थी. तय योजना के मुताबिक संतोष शर्मा का आशिक अपने सीकर वाले दोस्त से नींद की गोलियां भी ले आया था. गोलियां संतोष शर्मा को सौंपते हुए शाम का खाना बनाते समय सिलबट्ïटे पर चटनी बनाते समय उस में पीस देने और रायते में डाल देने के लिए कहा था.

सब कुछ योजना के अनुसार चल रहा था. पहले संतोष शर्मा ने प्रेम से बड़े बेटे को खाना खिलाया. इसी दौरान संतोष शर्मा की बहन वंदना ने उस से कुछ पूछा तो उस ने उसे डांट कर भगा दिया. रात को पौने 10 बजे चुके थे. संतोष शर्मा का प्रेमी उस के घर पहुंच गया था. संतोष शर्मा मुसकराती हुई बोली, ‘‘क्या हनी, इतनी जल्दी कैसे आ गए?’’

हनुमान ने आशिकाना अंदाज में जवाब दिया, ‘‘तुम से दूरी बरदाश्त नहीं हो रही थी.’’

जबाव में हंसती हुई संतोष शर्मा बोली, ‘‘सब्र करो वरना जल्दबाजी में सारा खेल बिगड़ जाएगा. रास्ते के कांटे हटाने के बाद तो मैं हमेशा के लिए तुम्हारी हो जाऊंगी.’’

इसी के साथ संतोष शर्मा ने उसे रात को एक बजे वापस आने को कहा. वह फ्लाइंग किस दे कर वापस चला गया. रात को एक बजे अपने 2 साथियों कपिल और दीपक के साथ संतोष शर्मा के घर जा पहुंचा. संतोष शर्मा छत पर टहल रही थी. उस ने हनी को इशारा किया और नीचे आ कर चुपचाप घर का मेनगेट खोल कर तीनों को घर में बुला लिया. संजना ने इशारे से बता दिया कि उस का पति और बड़ा बेटा कहां सो रहे हैं. हनुमान और उस के दोनों साथी अपनेअपने हाथों में दस्ताने पहन कर उस कमरे में गए, जहां जीरो वाट के बल्ब की हल्की रौशनी थी.

प्यार में 5 जनों का कत्ल

सब से पहले हनुमान ने संतोष शर्मा के पति बनवारी लाल (42 वर्ष) के गले को धारदार बड़े चाकू से काट दिया. जबकि उस के दोनों साथियों ने बनवारी के जिस्म को चाकुओं से गोद डाला. उस की मौत हो जाने के बाद संतोष शर्मा अमन के पास गई. उस दिन उस की तबीयत खराब थी, इसलिए उस ने रायता नहीं पीया था.

आहट पा कर उस की नींद खुल गई और उस ने उठने की कोशिश की, लेकिन तभी हनी और उस के साथियों ने उसे भी दबोच लिया और हनी ने उस का गला रेत दिया. उस के दोनों साथियों ने अमन को भी चाकुओं से गोदगोद कर ठिकाने लगा दिया.

नई नवेली दीपा ने सौतेले बेटे संग रची साजिश – भाग 1

मुरादाबाद हो कर दिल्ली जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-24 से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर कांठ तहसील स्थित खुशहालपुर की बैंक कालोनी में 5 मई की रात 11 बजे के बाद चहलपहल कम हो गई थी. इक्कादुक्का लोगों का ही आवागमन था. इस संभ्रांतकालोनी में ज्यादातर सरकारी कर्मचारियों और रिटायर्ड लोगों के मकान हैं. उन्हीं में एसडीएम के ड्राइवर जयदेव सिंह का भी 2 मंजिला मकान है.

इस कालोनी में सुरक्षा के लिए सभी जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, यहां तक कि लोगों ने अपनेअपने घरों में भी सीसीटीवी कैमरे लगा रखे हैं और उसे मोबाइल से कनेक्ट कर रखा है. उस के जरिए दूर रह कर भी लोग अपनेअपने घरों पर नजर रखते हैं. फिर भी रात के वक्त कालोनी की चौकसी गार्ड को सौंपी हुई है.

5 मई की रात को 12 बजे के करीब कालोनी में गश्त लगाता हुआ सुरक्षा गार्ड जब जयदेव सिंह के मकान के आगे से गुजरा तब मेन गेट खुला देख कर भुनभुनाने लगा, “लोग कितने बेफिक्र हो गए हैं, सीसीटीवी कैमरा लगा लेने का मतलब यह तो नहीं कि घर का मेन गेट ही खुला छोड़ दो.”

इसी के साथ उस ने लोहे के गेट को 3-4 बार डंडे से पीटा. आवाज लगाई, “अरे कोई है घर में? मेन गेट अंदर से बंद कर लो, रात हो चुकी है.”

यह कहता हुआ गार्ड थोड़ी देर वहीं रुका रहा. भीतर से जब कोई आवाज नहीं आई, तब उस ने दोबारा गेट पर 3-4 बार डंडे मारे. पहले से तेज आवाज सुन कर थोड़ी दूरी पर लेटा कुत्ता भौंकने लगा.

“तू क्यों भौंक रहा है?” गार्ड उस की ओर मुंह कर वहीं जमीन पर डंडा पीटता हुआ बोला.

इसी बीच जयदेव सिंह के मकान के भीतर से आवाज आई, “आती हूं… क्या बताऊं, मैं आज गेट बंद करना ही भूल गई थी.”

कुछ सेकेंड में गेट बंद करने आई युवती को गार्ड ने हिदायत दी, “आप यहां नईनई आई हो… गेट अंदर से हमेशा बंद रखा करो… आवारा कुत्ते भीतर घर में भी घुस जाते हैं.”

“जी गार्ड अंकल,” कहती हुई युवती ने भीतर से मेन गेट की सांकल लगा ली और घर के भीतर चली गई. युवती जयदेव सिंह की दूसरी पत्नी दीपा थी, जो पिछले साल उस की पहली पत्नी के हार्ट अटैक से मृत्यु के बाद ब्याह कर आई थी.

घर में जयदेव सिंह के 3 बच्चे भी हैं, लेकिन उन में 17 साल का बड़ा बेटा हरनाम सिंह साथ में नहीं रहता था. वह पढ़ाई के सिलसिले में रुद्रपुर में अपने बड़े चाचा कृष्णपाल के साथ रहता है. पिता से उस की नहीं बनती थी, लेकिन बीचबीच में घर आताजाता रहता है. 2 बच्चों बेटा हरमिंदर व बेटी जासमीन और पति के साथ दीपा घर में रहती थी. वह एक हाउसवाइफ है.

जयदेव सिंह के मकान का गेट बंद हो जाने के बाद गार्ड कालोनी में दूसरे मकानों की निगरानी के लिए आगे बढ़ गया. चहलकदमी करता हुआ वह बीचबीच में जमीन पर डंडे भी पीट देता था. अभी कुछ दूर ही गया होगा कि जयदेव सिंह के मकान से चीखपुकार की आवाजें आने लगीं…

जयदेव का हो गया मर्डर

“मार डाला… मार डाला, मेरे पति को मार डाला… कोई बचाओ! जल्दी अस्पताल ले चलो…” चीखनेचिल्लाने की यह आवाज दीपा की थी. वह चीखती हुई बेतहाशा अपने घर से बाहर सडक़ पर आ चुकी थी. तब तक गार्ड भी उस के पास पहुंच गया था.  पूछने लगा,

“क्या हुआ? किसे मारा? किस ने मारा… ड्राइवर साहब को क्या हुआ?”

शोरगुल सुन कर जयदेव सिंह के दोनों बच्चे भी पहली मंजिल से नीचे भागेभागे आए. आसपास के घरों के कुछ लोग भी निकल आए. दीपा रोती हुई बोली कि किसी ने उस के पति को मार डाला है और वह अपने कमरे में बैड पर बुरी तरह से घायल पड़ा है. कुछ लोग कमरे में गए. वहां जयदेव सिंह खून से लथपथ बेजान पड़ा था.

गार्ड उस की नाक के आगे हथेली ले गया. उस के सांस की गति चैक की. किसी से कुछ बोले बगैर उस ने मझोला थाने में फोन कर इस वारदात की सूचना पुलिस को दे दी. गार्ड के चेहरे के भाव से वहां मौजूद लोग समझ गए कि जयदेव की मौत हो चुकी है.

घर मे कोहराम मच गया. बच्चे और दीपा का रोरो कर बुरा हाल था. उस की एक साल पहले ही शादी हुई थी. दीपा की हालत विक्षिप्तों जैसी हो गई थी. बच्चे उसे पकड़ कर रो रहे थे. गमगीन माहौल को देख कर उपस्थित हर कोई हैरान था. वे स्तब्ध हो गए थे. कुछ लोग भावुकता से दीपा और बच्चों को सांत्वना देने की कोशिश कर रहे थे.

जयदेव सिंह के मर्डर की सूचना पा कर मझोला थाने के एसएचओ विप्लव शर्मा कुछ मिनटों में ही घटनास्थल पर पहुंच गए थे. जांचपड़ताल शुरू करने से पहले उन्होंने घटना की सूचना अपने उच्चाधिकारियों को दे दी. सूचना मिलते ही मुरादाबाद के एसएसपी हेमराज मीणा, एसपी (सिटी) अखिलेश भदौरिया, सीओ (सिविल लाइंस) भी घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया.

घटना की जानकारी पाते ही जयदेव का बड़ा बेटा हरनाम सिंह भी रुद्रपुर से घर आ गया. हरनाम सिंह रुद्रपुर में अपने बड़े चाचा कृष्णपाल सिंह के पास रहता था. वह भी भतीजे के साथ आए. उन्होंने ही अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करवा दिया. पुलिस जांच टीम के साथ आई फोरैंसिक टीम ने भी जयदेव को मृत घोषित कर दिया और लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

सीसीटीवी कैमरे मिले बंद

मुरादाबाद के एसपी (सिटी) अखिलेश भदौरिया को एसडीएम के ड्राइवर की हत्या के इस केस का जल्द से जल्द खुलासा करने के निर्देश जारी किए. जांच की जिम्मेदारी एसएसपी हेमराज मीणा ने उन्हें दी. उन्होंने जांच के शुरुआती दौर में ही अनुमान लगा लिया था कि जयदेव हत्याकांड का राज घर में है. घर के सदस्यों से गहन पूछताछ कर के सफलता मिल सकती है.

अखिलेश भदौरिया ने अपने नेतृत्व में एक टीम का गठन किया, जिस में एसएचओ विप्लव शर्मा और सीओ (सिविल लाइंस) समेत अर्पित कपूर आदि को शामिल किया गया. पूछताछ की शुरुआत जयदेव सिंह की पत्नी दीपा से हुई. इसी बीच पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई.

रिपोर्ट के अनुसार सोते हुए में जयदेव के सिर पर किसी भारी वस्तु से हमला किया जाना बताया गया. हमले से ही जयदेव के सिर की हड्ïडी टूट गई थी. सिर से काफी मात्रा में खून बह गया था, जिस कारण जयदेव सिंह की दम घुटने से मौत हो गई थी.

भदौरिया ने दीपा से पहला सवाल यही किया कि जयदेव की किसी के साथ दुश्मनी तो नहीं थी? इस के जवाब में दीपा ने जयदेव के भाइयों का नाम लिया. साथ ही बताया कि उन से पति का जमीन को ले कर विवाद चल रहा है. पति की महंगी जमीन हड़पना चाहते हैं. एक तरह से दीपा ने जयदेव की हत्या का आरोप सीधे जयदेव के भाइयों पर ही मढ़ दिया. इसी के साथ दीपा ने पासपड़ोस या उन के जानपहचान वालों में किसी से कोई दुश्मनी नहीं होने का दावा किया.

पूछताछ के बाद जांच की अगली कड़ी सीसीटीवी कैमरे की थी. जांच टीम ने घर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकलवाई. जांच टीम तब चौंक गई, जब पाया कि घटना वाले दिन घर में लगे सीसीटीवी कैमरे 5 मई, 2023 की शाम 8 बजे से ही बंद थे. उस दिन जयदेव शाम 6 बजे ही अपने घर आ गया था. दीपा के मुताबिक वह खाना खा कर सो गया था. कैमरे अगले रोज 6 मई की सुबह खुले. हत्याकांड के जांच की सूई घटना के समय बंद कैमरे के कारण और समय पर अटक गई.

                                                                                                                                 क्रमशः

अपनों के खून से रंगे हाथ : ताइक्वांडो कोच को मिली सजा – भाग 1

अलवर के अपर जिला एवं सेशन कोर्ट में काफी गहमागहमी थी. अदालत के कमरे में दरजनों वकील, कोर्ट के कई कर्मचारी, मुकदमे से जुड़े लोगों के अलावा कमरे के बाहर कोर्ट परिसर में मीडियाकर्मी मौजूद थे. उन्हें संभालने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की फौज की भी मौजूदगी थी. कोर्ट में इतनी भीड़ का कारण एक खास मुकदमा था, जिस का फैसला सुनाया जाना था.

दरअसल, मामला 5 जनों की हत्या का था. हत्याकांड भी कोई ऐसावैसा नहीं, बल्कि इस की मुख्य आरोपी एक मां थी. वह पत्नी थी और ताइक्वांडो सीखने वाले किशोर उम्र के बच्चों की गुरु भी. हत्याकांड का यह मामला 5 साल 5 महीना पुराना था. इस मामले में अंक 5 का गजब संयोग था.

हत्याकांड की वारदात 2 अक्तूबर, 2017 के आधी रात की थी, जो अलवर के शिवाजी पार्क कालोनी में घटित हुई थी. उस की तहकीकात में आरोप शादीशुदा महिला ताइक्वांडो कोच संतोष शर्मा पर लगा था. हत्याकांड के पीछे उस से 10 साल छोटे नवयुवक के साथ प्यार का पागलपन बताया गया था. आरोप था कि प्यार में पागल संतोष शर्मा ने प्रेमी और उस के 2 साथियों की मदद से न केवल पति को, बल्कि किशोर उम्र अपने ही 3 बेटों और एक भतीजे की हत्या करवा दी थी.

अदालत की काररवाई शुरू होने से चंद मिनट पहले दोनों मुलजिम, महिला कोच संतोष शर्मा और उस के प्रेमी हनुमान उर्फ हनी को कोर्टरूम में लाया गया. वहां उपस्थित लोग उन्हें देखने के लिए उतावले हो गए. कोई अपनी गरदन उचका कर, कोई गरदन इधरउधर घुमाते हुए टेढ़ी कर तो काई अपना मुंह बिचका कर दोनों को देखने की कोशिश कर रहा था. जबकि संतोष शर्मा ने अपने पतले दुपट्टे से चेहरे को पूरी तरह से ढंक रखा था और हनुमान के चेहरे पर मास्क लगा हुआ था.

तभी अचानक गैवेल (लकड़ी के हथौड़े) की 3-4 ठक..ठक… की आवाज से लोगों के बीच हो रही बातचीत का शोरगुल अचानक थम गया. सभी की निगाहें सामने जज की कुरसी पर जा टिकी. वहां न्यायाधीश महोदय पधार चुके थे. उन के पास ही नीचे की ओर बैठा रीडर 5 लोगों की हत्या से संबधित पूरी हो चुकी सुनवाई की 5 सेट फाइलें बना चुका था. वह फाइलें उस ने न्यायाधीश के सामने रख दी. न्यायाधीश महोदय फाइल को सरसरी निगाह से पढऩे लगे. चैक करने लगे कि उस में वही सब कुछ प्रिंट हुआ है न, जो उन्होंने रीडर को डिक्टेट किया था.

कोर्ट ने सुनाया फैसला

पूरी फाइल पढऩे में करीब एक घंटे का समय लग गया. अंत में आश्वस्त होने के बाद उन्होंने सभी पर बारीबारी से हस्ताक्षर किए और जजमेंट पढऩे की शुरुआत की. दोनों पक्षों के वकील से मामले में किसी नए बदलाव संबंधी जानकारी ली. दोनों पक्ष के वकीलों ने स्पष्ट कर दिया कि मामले से संबंधित किसी भी तरह को कोई बदलाव नहीं आया है और दोनों मुलजिम कोर्ट में हाजिर हैं. तब तक कोर्ट के कमरे में एक सन्नाटा छा गया था. सभी को अब फैसले का इंतजार था.

न्यायाधीश ने अपना फैसला सुनाया कि ताइक्वांडो कोच संतोष शर्मा, उस के प्रेमी हनुमान प्रसाद सहित चारों मुलजिमों को उम्रकैद की सजा दी जाती है. उन्हें तत्काल जेल भेज दिया जाए. इस फैसले के बाद वहां उपस्थित लोग एक सुर में बोल पड़े, ‘जैसी करनी, वैसी भरनी.’

कोर्ट द्वारा सजा सुनाने के बाद कोर्ट के कर्मचारियों और पुलिस द्वारा आगे की काररवाई की जाने लगी. अदालत में कुछ देर खुसरफुसर होने के बाद सन्नाटा छा गया था. पुलिस ने मुजरिमों से अदालत के कागजों पर दस्तखत करवाने की औपचारिकता पूरी की और उन्हें कड़ी निगरानी में ले कर जेल के लिए रवाना हो गई. फैसले की एक फाइल मीडिया को हाथ लग गई. उस के मुताबिक हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार है—

राजस्थान के अलवर जिले से कोई 90 किलोमीटर दूर कठूमर के गारू गांव में पंडित मुरारीलाल शर्मा के बड़े बेटे बनवारी लाल शर्मा की शादी साल 1999 में संतोष शर्मा से हुई थी. संतोष शर्मा सुंदर होने के साथसाथ ताइक्वांडो की कोच भी थी. उस की न सिर्फ उस के परिवार वाले, बल्कि गांव के लोग भी तारीफ करते थे.

संतोष शर्मा में एक और गुण अभिनय का था. वह मोहल्ले की रामलीला में रामायण का अहम किरदार भी निभाया करती थी. शादी के बाद अपने पति बनवारी लाल शर्मा के साथ अलवर के शिवाजी पार्क कालोनी स्थित मकान मेें रहने लगी. बनवारी लाल अलवर के एमआईए स्थित एक फैक्ट्री में औपरेटर का काम करता था. आर्थिक स्थिति साधारण थी.

घरगृहस्थी बहुत अच्छी नहीं होने के बावजूद, बगैर किसी अड़चन के आराम से चल रही थीं. उन के गृहस्थ जीवन के 15 साल आराम से गुजर गए. इस दौरान उन के 3 बेटे हुए. समय के साथ ही बनवारी लाल की व्यस्तता भी बढऩे लगी. खर्च बढऩे लगे, जबकि संतोष शर्मा अय्याशी की जिंदगी का सपना देखने लगी. वह मौजूदा रहनसहन से संतुष्ट नहीं थी.

उस ने घर की आमदनी बढ़ाने के लिए अपनी ताइक्वांडो की प्रैक्टिस जारी रखी और कोचिंग जौइन कर ट्रेनर बन गई. बच्चों को ट्रेनिंग दे कर टूर्नामेंट तथा काम्पटीशन के लिए आसपास के शहरों में भी ले कर जाने लगी. वर्ष 2014 में वह अलवर के साहब जोहड़ा के एक ताइक्वांडो कोच के संपर्क में आई तो उसे इस क्षेत्र में तरक्की और आमदनी बढ़ाने के मौके नजर आने लगे और वह बढ़चढ़ कर अपनी टीम के साथ क्षेत्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने लगी. इसी दौरान संतोष शर्मा एक टूर्नामेंट के लिए उदयपुर गई.

पहली मुलाकात में दे बैठी दिल

वहां उस की मुलाकात हनुमान प्रसाद जाट से हुई, जो एक आकर्षक और गठीले बदन का नवयुवक था. पहली ही मुलाकात में दोनों दोस्त बन गए. कुछ ही समय बाद उन की दोस्ती प्यार में बदल गई. फिर उन के साथ घूमनेफिरने का सिलसिला शुरू हुआ और एक दिन उन की नजदीकियां नाजायज रिश्ते में बदल गईं.

युवा प्रेमी से मिलने वाले जिस्मानी सुख को पाने की चाहत में संतोष शर्मा का दिमाग इस कदर खराब हुआ कि वह अपना घरबार, गृहस्थी, पति, बच्चे सभी कुछ भुला बैठी. संतोष शर्मा खुद से 10 साल छोटे आशिक हनुमान को हनी कह कर बुलाने लगी. हनी एक दोस्त के साथ उदयपुर में किराए के कमरे में रह कर बीपीएड की ट्रेनिंग कर रहा था. वह शारीरिक शिक्षक की नौकरी हासिल करना चाहता था. अविवाहित था.

घर से पैसे मंगा कर उदयपुर में दोस्त के साथ रह कर ट्रेनिंग कर रहा था. साथ ही मार्शल आर्ट का भी उसे शौक था. इसी दौरान कोचिंग में उस की मुलाकात संतोष शर्मा से हुई थी. उम्र में बड़ी हो कर भी उस का फिगर नवयुवतियों को मात करने वाला था. उसे देख कर कोई नहीं कह सकता था कि वह 3 बच्चों की मां है. सलवार सूट में तो वह अभी भी किसी कालेज गर्ल जैसी ही दिखती थी. खूबसूरती और सैक्स अपील की अदाओं पर ही हनुमान मर मिटा था. जल्द ही वह संतोष शर्मा के इशारों पर नाचने लगा था.

अविवाहित हनुमान संतोष शर्मा के शारीरिक आकर्षण से पागल सा हो गया था. संतोष शर्मा एक आधुनिक दौर की युवती थी, जो जिंदगी का भरपूर आनंद लेने में विश्वास रखती थी. उसे अपने तीनों बच्चों से कोई मोह नहीं था और न ही वह अपने पति बनवारी लाल को दिल से पसंद करती थी.

प्यार में जब पति ने अड़ाई टांग – भाग 3

एसएचओ प्रदीप कुमार त्रिपाठी ने उस कमरे को देखा, जहां कपिल के द्वारा खुद को गोली मार लेने की बात शिवानी कह रही थी. जिस बिस्तर पर कपिल 3 मार्च, 2023 की रात को सोया था, उस का सिरहाना खून से भीग गया था. श्री त्रिपाठी ने अनुमान लगाया कि जिस वक्त कपिल सो रहा होगा, तभी उसे गोली मारी गई होगी. सिरहाना इसी बात की चुगली कर रहा था. यदि कपिल ने जागती अवस्था में खुद को गोली मारी होती तो पलंग की चादर भीगी होनी चाहिए थी. क्योंकि यदि आदमी बैठ कर कनपटी में गोली मारेगा खून से चादर जरूर भीगेगी न कि केवल सिरहाना.

श्री त्रिपाठी ने कमरे में नजरें दौड़ाई. उस में टेबल और 2 कुरसियां पड़ी थीं. एक पलंग था, जिस पर कपिल अकेला सोता था. साथ वाले कमरे में उस की पत्नी अपने बेटों के साथ सोती थी. अभी तक शिवानी के प्रेमी का नामपता मालूम नहीं हुआ था, मुखबिर पूरी कोशिश कर रहे थे. आखिर एक मुखबिर को मालूम हो गया कि उस युवक का नाम अंकुश प्रजापति है, जो शिवानी से प्रेम करता है.

उस मुखबिर ने यह भी पता निकाल लिया कि अंकुश नंदग्राम में ही रहता है और कपिल के घर से थोड़ी दूरी पर ही स्थित मोबाइल एक्सेसरीज की दुकान पर काम करता रहा है. पुलिस टीम उस दुकान पर पहुंच गई. दुकान मालिक ने पूछने पर बताया कि अंकुश प्रजापति 3 मार्च के बाद से काम पर नहीं आ रहा है. उस का घर का एड्रैस दुकान पर लिखा मिल गया. अंकुश प्रजापति नंदग्राम में ही 100 फुटा रोड पर रहता है. कपिल मर्डर केस का खुलासा करने के लिए पुलिस ने उस के घर पर दबिश दी, लेकिन वह घर से भी फरार था. इसी से वह पूरी तरह शक के दायरे में आ गया.

पुलिस ने उस के गांव का पता ढूंढ निकाला.  अंकुश ग्राम तरेना, थाना डुमरियागंज, जिला सिद्धार्थनगर का मूल निवासी था. वहां पुलिस की टीम भेजी गई, लेकिन वह गांव में भी नहीं पहुंचा था. पुलिस ने अनुमान लगाया कि वह नंदग्राम में ही कहीं छिपा हुआ होगा.

प्रेमी से कराई हत्या

मुखबिर और पुलिस टीम उस की तलाश में जुट गई. पुलिस को 19 मार्च, 2023 को अंकुश को गिरफ्तार करने में सफलता मिल गई. अंकुश को नंदग्राम में रेत मंडी से दिन में 11 बजे गिरफ्तार कर लिया गया.  थाने ला कर उस से कड़ाई से पूछताछ की गई तो उस ने कपिल की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. हत्या की जो कहानी सामने आई, वह अवैध संबंधों की बुनियाद पर रचीबसी निकली—

अंकुश नंदग्राम में ही एक मोबाइल एक्सेसरीज की दुकान पर काम करता था. शिवानी अपना मोबाइल फोन वहीं रिचार्ज कराने जाती थी. उसी दौरान की अंकुश से जानपहचान हो गई, जो बाद में प्यार में बदल गई. पति के काम पर जाने के बाद शिवानी प्रेमी अंकुश को फोन कर अपने घर बुला लेती थी. इस तरह दोनों के बीच अवैध संबंध बन गए. अंकुश उस के दिल में पूरी तरह समा गया था, इसलिए शिवानी पति को नापसंद करने लगी थी.  बाद में कपिल को उन दोनों के प्रेम संबंधों की जानकारी हो गई तो वह पत्नी से लड़ाईझगड़ा करने लगा था.

रोजरोज की पिटाई से शिवानी तंग आ चुकी थी, इसलिए उस ने प्रेमी अंकुश को पति की हत्या करने के लिए उकसाया. अंकुश इस  के लिए तैयार हो गया. फिर योजना के अनुसार, 3 मार्च, 2023 को शिवानी ने कपिल के खाने में नींद की गोलियां मिला कर खिला दीं. वह बेसुध सो गया तो उस ने फोन कर के अंकुश को घर बुला लिया. कपिल के पास तमंचा रहता था. शिवानी ने संदूक से तमंचा निकाल कर अकुंश को दिया. उस ने बेसुध पड़े कपिल की बाईं कनपटी पर सटा कर गोली मार दी.

पति की हत्या कराने के बाद शिवानी ने प्रेमी अंकुश को घर से बाहर निकाल कर दरवाजा बंद कर दिया. इस के कुछ देर बाद उस ने शोर मचा कर पड़ोसियों को जगा दिया. पड़ोसियों को उस ने पति को सुसाइड करने की जानकारी दी. उन की मदद से वह पति को अस्पताल ले गई. जब जीटीबी (दिल्ली) में कपिल को मरा हुआ घोषित किया गया तो शिवानी ने चैन की सांस ली.

अंकुश से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने शिवानी को भी गिरफ्तार कर लिया. प्रेमी को थाने में देख उस के होश उड़ गए. फिर उस ने भी हत्या में शामिल होने की बात स्वीकार कर ली. शिवानी उर्फ सीमा और अंकुश प्रजापति से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 और 25, 27 आम्र्स एक्ट के खिलाफ गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. केस की तफ्तीश एसएचओ प्रदीप कुमार त्रिपाठी कर रहे थे.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

प्यार में जब पति ने अड़ाई टांग – भाग 2

आत्महत्या की बात पर अड़ी रही शिवानी

पलंग के ऊपर एक देशी तमंचा और पलंग के दाहिनी ओर फर्श पर एक खाली खोखा पड़ा हुआ था. श्री त्रिपाठी ने सावधानी बरतते हुए वह तमंचा रुमाल द्वारा उठाया और खाली कारतूस के खोखे को भी कब्जे में ले लिया. रोने के कारण कपिल की पत्नी शिवानी की आंखें लाल हो गई थीं. वह पास ही खड़ी हो कर अभी भी सुबक रही थी.

“यह घटना कितने बजे की है शिवानी, जब कपिल ने आत्महत्या करने के लिए गोली चलाई?’’ श्री त्रिपाठी ने शिवानी से प्रश्न किया.

“उस वक्त घड़ी में ढाई बज रहे थे साहब. मैं सोई हुई थी. गोली चलने की आवाज से मैं अपनी चारपाई पर उठ कर बैठ गई. पति के कराहने की आवाजें कानों में पड़ी तो मैं चौंक कर इन के कमरे में आई. वो बिस्तर पर गिरे तड़प रहे थे. मैं ने तुरंत अपनी ससुराल फलावदा में इन के भतीजे सचिन को फोन द्वारा इन के आत्महत्या करने की जानकारी दी और मकान मालिक तथा पड़ोसियों की मदद से इन्हें एमएमजी अस्पताल ले कर भागी.’’

“कपिल ने आत्महत्या क्यों की?’’ शिवानी के चेहरे पर नजरें गड़ा कर श्री त्रिपाठी ने पूछा.

“कई दिनों से यह परेशान चल रहे थे, मैं पूछती थी तो कह देते थे कि कामधंधे में सौ प्रकार के टेंशन होते हैं, तुम्हें क्या बताऊं, मैं खामोश हो जाती थी. उसी टेंशन में इन्होंने रात को खुद को गोली मार ली.’’

“तुम पतिपत्नी के बीच सब कुछ ठीक चल रहा था?’’ श्री त्रिपाठी ने पूछा.

“हम खुश थे साहब. कपिल कभी टेंशन नहीं देते थे. काम पर से लौटते थे तो मेरे और बच्चों के लिए खानेपीने का सामान ले कर आते थे. कल भी वह आम ले कर आए थे. हम ने साथ खाना खाया था, वह 10 बजे सोने के लिए अपने पलंग पर आ जाते थे. रात को भी वह 10 बजे अपने पलंग पर सोने के लिए चले गए थे. मैं बच्चों के साथ अपने कमरे में जा कर सो गई थी कि रात को इन्होंने खुद को गोली मार ली.’’

“तुम कैसे कह सकती हो कि गोली कपिल ने खुद चला कर आत्महत्या की है, कोई दूसरा भी तो गोली चला सकता है.’’ श्री त्रिपाठी ने गंभीरता से अपनी बात कही.

“तमंचा तो इन्हीं का ही था साहब. कोई बाहरी व्यक्ति यदि इन्हें मारने आता तो अपना हथियार ले कर आता न कि इन का तमंचा संदूक से निकाल कर इन्हें गोली मारता.’’

“बात तो तुम ठीक कह रही हो.’’ श्री त्रिपाठी ने होंठों को सिकोड़ कर मन ही मन शिवानी के तर्क की प्रशंसा की, लेकिन उन्हें शिवानी के तर्क में एक खामी भी नजर आ गई. वह यह कि कमरे में कपिल की हत्या करने आए व्यक्ति को संदूक से कपिल का तमंचा निकाल कर भी दिया जा सकता है. और यह काम शिवानी ही कर सकती है, क्योंकि उस घर में कपिल के साथ शिवानी ही मौजूद थी.

‘शिवानी ने यदि ऐसा किया है तो क्यों?’ श्री त्रिपाठी को इसी का उत्तर तलाश करना था.

“क्या रात को तुम ने दरवाजा खुला छोड़ा था?’’ श्री त्रिपाठी ने शिवानी के चेहरे पर नजरें जमा कर पूछा.

शिवानी के खिलाफ मिलते गए ठोस सबूत

शिवानी के चेहरे के भाव बदले. वह थोडा घबराई, फिर खुद को संभालते हुए जल्दी से बोली, ‘‘मैं क्यों दरवाजा खुला छोड़ूंगी साहब, मैं ने रात को अच्छे से दरवाजा बंद किया था. मेरे पति ने जब गोली मारी, तब पड़ोसियों की मदद लेने के लिए मैं ने खुद दरवाजा खोला था.’’

“ठीक है,’’ श्री त्रिपाठी ने खून के नमूने और अन्य साक्ष्य एकत्र करने का काम एसआई हरेंद्र सिंह को सौंप कर उन्हें यह भी हिदायत दे दी कि वह आसपास पड़ोसियों से शिवानी के चरित्र की जानकारी भी गुप्त तरीके से एकत्र करें और उन्हें रिपोर्ट करें. हिदायत देने के बाद श्री त्रिपाठी थाना नंदग्राम की ओर लौट गए.

एसएचओ प्रदीप कुमार त्रिपाठी की आंखों में तीखी चमक उभर आई. वह आगे की ओर झुक गए. उन के सामने एसआई हरेंद्र, हैडकांस्टेबल सगीर खान और कांस्टेबल सोनू मावी बैठे हुए थे. एसआई हरेंद्र ने कुछ ही देर पहले श्री त्रिपाठी को कपिल की संभावित हत्या के पीछे की एक खास जानकारी दी थी. एसआई हरेंद्र की आंखों में झांक कर श्री त्रिपाठी ने पूछा, ‘‘तुम ने जो जानकारी जुटाई है, वह सही है न?’’

“बिलकुल सही है सर. कपिल के आसपास हम ने गुप्त तरीके से शिवानी के चरित्र के विषय में पूछताछ की. 2-4 जगह से हमें बताया गया है कि शिवानी का किसी युवक से इश्कविश्क का चक्कर चल रहा है.  मृतक कपिल और शिवानी के बीच उन्होंने उस युवक को ले कर झगडऩे की आवाजें भी सुनी हैं, जो कभीकभी रात के सन्नाटे में उन्हें सुनाई दे जाती थीं. कपिल शायद अपनी इज्जत को डरता रहा है, इसलिए उस ने कभी ऊंची आवाज में उस युवक को ले कर शिवानी से झगड़ा नहीं किया.

“उस युवक का नामपता मालूम हुआ?’’ श्री त्रिपाठी ने पूछा.

“नहीं, लेकिन मैं ने मुखबिरों को यह पता लगाने के काम पर लगा दिया है सर, बहुत जल्द उस युवक का नामपता मालूम हो जाएगा.’’

“शिवानी को फिलहाल अंधेरे में रखना है मिस्टर हरेंद्र. हमें शिवानी के खिलाफ ठोस सबूत मिल जाएं, तभी शिवानी पर हाथ डाला जाएगा.’’

“ठीक है सर.’’ एसआई ने कहा, ‘‘बहुत सावधानी से मैं उस युवक की जानकारी हासिल करूंगा.’’ एसआई हरेंद्र ने कहा और कुरसी छोड़ दी, ‘‘इजाजत चाहूंगा सर.’’

श्री त्रिपाठी ने सिर हिला दिया. एसआई हरेंद्र हेडकांस्टेबल सगीर खान को साथ ले कर कक्ष से बाहर निकल गए. कपिल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई थी, उस से श्री प्रदीप त्रिपाठी के इस शक की पुष्टि हो गई कि कपिल ने आत्महत्या नहीं की है, उस की गोली मार कर हत्या की गई है.

प्रेमी अंकुश तक पहुंच गई पुलिस

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, कपिल को हत्या से पहले नींद की गोलियां खिलाई गई थीं. उस को बाईं कनपटी पर बहुत नजदीक से गोली मारी गई थी, जो खोपड़ी के दाहिनी ओर से निकल गई थी. इसी से कपिल की मौत हुई थी. जिस रात कपिल की हत्या की गई, कमरे में उस की पत्नी शिवानी और छोटे बच्चे ही थे. जाहिर था, कपिल को शिवानी ने ही नशे की गोलियां खाने या दूध में मिला कर दी होंगी.

शिवानी शक के दायरे में थी, लेकिन श्री त्रिपाठी उसपर हाथ डालने से पहले उस युवक तक पहुंचना जरूरी समझते थे ताकि शिवानी को गुनाह कुबूल करवाया जा सके.  एसएचओ प्रदीप त्रिपाठी का सोचना था कि शिवानी ने अपने प्रेमी से पति को गोली मरवाई है. कपिल कुमार की हत्याकी पुष्टि हो जाने के बाद 16 मार्च, 2023 को कपिल के भतीजे सचिन की ओर से भादंवि की धारा 302 के तहत रिपोर्टदर्ज कर ली गई.

प्यार में जब पति ने अड़ाई टांग – भाग 1

गाजियाबाद शहर के नंदग्राम थाने में किसी अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर सूचना दी कि नंदग्राम में एक व्यक्ति ने गोली मार कर खुद को घायल कर लिया है, उसे इलाज के लिए एमएमजी अस्पताल में भरती करवाया गया है. उस वक्त रात के 3 बज रहे थे.  सूचना मिलते ही नंदग्राम थाने के एसएचओ प्रदीप कुमार त्रिपाठी तुरंत 2 कांस्टेबलों को साथ ले कर एमएमजी अस्पताल के लिए खाना हो गए. वह अस्पताल पहुंचे तो मालूम हुआ कि उस घायल व्यक्ति की हालत काफी नाजुक थी, इसलिए उसे यूपी से दिल्ली के जीटीबी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया है. यह घटना 4 मार्च, 2023 की है.

एसएचओ प्रदीप कुमार त्रिपाठी दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में आ गए. यहां उन्हें बताया गया कि उस व्यक्ति की मृत्यु हो गई है. श्री त्रिपाठी भारी मन से उस व्यक्ति की लाश का निरीक्षण किया तो चौंक पड़े. उस व्यक्ति के बाईं कनपटी पर गोली का गहरा जख्म था. गोली बाईं कनपटी पर चलाई गई थी, जो उस के सिर के दाहिनी ओर से निकल गई थी. यह देखने से अनुमान लगाया गया कि यह व्यक्ति लेफ्ट हैंडर रहा है.

कनपटी पर मारी थी गोली

लाश के पास एक युवक और एक महिला बैठे रो रहे थे. एसएचओ त्रिपाठी ने युवक के कंधे पर सहानुभूति से हाथ रख कर सांत्वना देते हुए कहा, ‘‘इस की मौत का मुझे गहरा दुख है. क्या तुम इस के बेटे हो?’’

“जी नहीं.’’ वह युवक उठ कर सुबकते हुए बोला, ‘‘यह मेरे चाचा कपिल कुमार थे.’’

“ओह!’’ श्री त्रिपाठी ने युवक के चेहरे पर नजरें जमा कर पूछा, ‘‘क्या तुम्हारे चाचा लेफ्ट टेंडर थे?’’

“नहीं साहब, मेरे चाचा अपने दाहिने हाथ से सारा काम करते थे.’’

श्री त्रिपाठी के माथे पर बल पड़ गए. उन्होंने फिर से लाश का जख्म देखा. गोली बाईं कनपटी पर ही सटा कर चलाई गई थी. ऐसा कोई दाहिने हाथ से हर काम करने वाला व्यक्ति कभी नहीं कर सकता था. स्पष्ट था कि गोली मृतक ने स्वयं नहीं चलाई है, यानी इसे किसी दूसरे व्यक्ति ने गोली मारी है. सीधेसीधे यह हत्या का केस था.

“अपने चाचा का नाम, पता नोट करवाओ.’’ एसएचओ प्रदीप कुमार त्रिपाठी ने बेभीर स्वर में कहा और साथ आए कांस्टेबल सोनू मावी को नामपता नोट करने का हुक्म दे कर वह कुछ दूरी पर चले गए. उन्होंने इस संदिग्ध घटना की जानकारी डीसीपी निपुण अग्रवाल और एसीपी आलोक दुबे को दे दी. अधिकारियों को यहां आने में समय लग सकता था. श्री त्रिपाठी ने मृतक के भतीजे से घटना की जानकारी लेने के लिए

उस से पूछा, ‘‘तुम्हें इस घटना की जानकारी कैसे हुई?’’

उस युवक का नाम सचिन था. आसू पोंछते हुए उस ने कहा, ‘‘सर, मैं कस्बा फलावदा, मेरठ में रहता हूं. रात को मैं जब अपने कमरे में सो रहा था, मेरे मोबाइल की घंटी बजी तो मेरी नींद टूट गई. इतनी रात को कौन फोन कर रहा है, यह जानने के लिए मैं ने मोबाइल उठाया तो उस पर मेरी चाची शिवानी का नंबर था. चाची शिवानी ने मुझे बताया कि चाचा कपिल ने खुद को गोली मार ली है.

“मैं ने तुरंत घर के लोगों को यह बात बताई और बाइक से नंदग्राम के लिए निकल पड़ा. रास्ते में ही चाची से मालूम हुआ कि चाचा को दिल्ली जीटीबी अस्पताल में रेफर कर दिया गया है, इसलिए मैं सीधा यहां आ गया. यहां डाक्टरों ने चाचा को मृत घोषित कर दिया था.’’

“तुम्हारी चाची शिवानी ने तुम्हें बताया कि तुम्हारे चाचा ने आत्महत्या कर ली है, लेकिन मेरा अनुमान है यह सुसाइड नहीं बल्कि हत्या का मामला है. क्या तुम बता सकते हो, तुम्हारे चाचा को कौन गोली मार सकता है?’’

सच की तलाश में जुटी पुलिस

इस खुलासे से सचिन चौंक पड़ा. उस ने हैरत से एसएचओ त्रिपाठी की ओर देखा और बोला, ‘‘चाचा कपिल तो बहुत सज्जन आदमी थे साहब, उन की तो किसी से दुश्मनी भी नहीं थी.’’

“तुम्हारी चाची और चाचा के बीच कोई अनबन चल रही हो, ऐसा कुछ तुम्हें मालूम है?’’

“पतिपत्नी के बीच हर घर में थोड़ी बहुत खटपट होती ही रहती है साहब. दोनों के बीच कोई बड़ा झगड़ा तो कभी नहीं हुआ और न चाची कभी रूठ कर अपने मायके गईं. मैं अकसर चाचा के घर आताजाता रहता हूं, वहां सब कुछ सामान्य दिखाई देता था. यदि चाचा की हत्या का शक आप को है तो मेरी प्रार्थना है कि आप इस केस की गहराई से जांच करें.’’

“वह तो मैं करूंगा ही, तुम्हारी चाची का भी बयान मुझे लेना पड़ेगा. चूंकि अभी वह बयान देने की स्थिति में नहीं है, उस से बाद में बात की जाएगी.’’ श्री त्रिपाठी ने कहा और दूसरी आवश्यक काररवाई निपटाने में लग गए. करीब एक घंटे बाद गाजियाबाद से डीसीपी निपुण अग्रवाल और एसीपी आलोक दुबे अस्पताल में आ गए. दोनों अधिकारियों ने लाश का निरीक्षण करने के बाद यही शंका प्रकट की कि कपिल ने आत्महत्या नहीं की है, उस की हत्या की गई है.

एसीपी आलोक दुबे ने अपने निर्देशन में इस मामले की गहनता से जांच करने के लिए थाना नंदग्राम के एसएचओ प्रदीप कुमार त्रिपाठी के नेतृत्व में पुलिस टीम का गठन कर दिया. इस में एसआई हरेंद्र सिंह, हैडकांस्टेबल सगीर खान, कांस्टेबल सोनू मावी आदि को शामिल किया गया. कागजी काररवाई पूरी कर के कपिल की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. निर्देश देने के बाद पुलिस अधिकारी वापस चले गए.

कपिल के पैतृक गांव फलावदा से उस के कई रिश्तेदार जीटीबी अस्पताल आ गए थे. सभी कपिल की पत्नी शिवानी को अपने साथ ले कर नंदग्राम लौट गए. उन के साथ एसएचओ श्री त्रिपाठी भी नंदग्राम के लिए निकले. उन्हें उस जगह की जांच करनी थी, जहां कपिल द्वारा गोली मार कर आत्महत्या करने की बात शिवानी ने बताई थी. वह देखना चाहते थे कि कपिल की पत्नी शिवानी की बात में कितनी सच्चाई है.

घटनास्थल पर मिले कुछ सबूत

कपिल कुमार कस्बा फलावदा, जिला मेरठ का मूल निवासी था. उस के पिता बलवीर सिंह की मृत्यु हो चुकी थी. कपिल कुछ साल पहले काम के सिलसिले में उत्तर प्रदेश के शहर गाजियाबाद के नंदग्राम में आ कर रहने लगा था.  नंदग्राम में वह अपनी पत्नी शिवानी उर्फ सीमा और 2 बेटों के साथ कुंदन सिंह रावत के मकान में किराए पर रहता था. कपिल हंसमुख और मिलनसार व्यक्ति था. उस के परिवार में भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं थी. अपनी पत्नी और बच्चों को खुश रखने के लिए वह कोई कमी नहीं छोड़ता था.

एयर फोर्स सार्जेंट ने रची जर, जोरू और जमीन हथियाने की साजिश

मृतक की वीडियो से खुला हत्या का राज़ – भाग 3

बंटू के इस तरह शालेहा के घर बेरोकटोक आनेजाने से मकान मालिक और आसपास के लोगों को ऐतराज था. लोगों ने इस की शिकायत शाहिद से की थी, इस से दोनों के नाजायज रिश्तों की भनक शाहिद को लग गई थी. इसी बात को ले कर शालेहा से उस का अकसर विवाद होता रहता था. शालेहा अकसर अपनी मां और पिता के साथ मिल कर शाहिद के साथ बदसलूकी भी करती थी.

शौहर को रास्ते से हटाने की रची साजिश

शाहिद खान की बीवी शालेहा परवीन का इश्क बंटू खान से परवान चढ़ चुका था. शाहिद को जब शक हुआ तो उस ने पत्नी पर दबाव बनाना शुरू किया, जिस से घर में आए दिन झगड़े होने लगे. शाहिद जब शालेहा के अब्बू और अम्मी से इस की शिकायत करता तो वे उल्टा शाहिद को ही भलाबुरा कहते.

8 मार्च, 2023 को शाहिद और शालेहा दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि उन्हें पुलिस स्टेशन जाना पड़ा. यहां से दोनों को परिवार परामर्श केंद्र भेज दिया गया. यहां पत्नी शालेहा ने पति पर मारपीट करने का आरोप लगाया तो वहीं शाहिद ने अपनी पत्नी पर किसी गैरमर्द के साथ संबंध होने का शक जताया था. इस के बाद दोनों को समझाबुझा कर अच्छे ढंग से रहने की समझाइश दे कर वापस घर भेज दिया गया था.

aropi

इधर एकदूसरे के प्रेम में पागल हो गए बंटू और शालेहा शाहिद से परेशान हो चुके थे. इसी बात से परेशान हो कर शालेहा ने प्रेमी बंटू को योजना बताते हुए कहा, “रोजरोज की किचकिच से मैं तंग आ गई हूं, क्यों न हमारे प्रेम की राह में रोड़ा बन रहे शाहिद को हमेशा के लिए रास्ते से हटा दिया जाए.”

“आखिर शाहिद को कैसे रास्ते से हटाएंगे, उस की हत्या करेंगे तो पकड़े जाने पर जेल की चक्की पीसनी पड़ेगी.” बंटू ने आशंका जताते हुए कहा.

“हम शाहिद को खाने की किसी चीज में जहर मिला देंगे और उस पर खुदकुशी करने का इल्जाम लगा देंगे.” शालेहा ने अपना प्लान समझाते हुए कहा.

“हां, ये आइडिया सही है. पर जहर देने के बाद सावधानी बरतनी है. जब तक उस का काम तमाम न हो जाए, उस पर निगरानी रखनी होगा.” बंटू ने सचेत करते हुए कहा.

जहर दे कर की हत्या

इस तरह योजना के मुताबिक, 18 मार्च, 2023 की शाम पडऱा स्थित किराए के मकान पर शाहिद की पत्नी शालेहा के अलावा उस का आशिक बंटू खान व शालेहा के मांबाप भी मौजूद थे. सभी ने मिल कर शाहिद खान को मारने का प्लान बनाया. शालेहा ने पहले से ही दीमक मारने वाला कीटनाशक खरीद कर रख लिया था.

18 मार्च, 2023 को ड्यूटी के बाद रात के साढ़े 9 बजे शाहिद जैसे ही घर पहुंचा तो शालेहा ने प्यार जताया. फिर उस की खातिरदारी की और पीने का लिए ठंडे पानी का गिलास ले कर आ गई. पानी पीते हुए शाहिद उस के बदले हुए रूप को देख कर हैरत में था, मगर यह सोच कर उस ने कुछ नहीं कहा कि शायद उस ने अपने आप को बदलने का निश्चय कर लिया हो.

कुछ देर बाद शाहिद जैसे ही बाथरूम से फ्रैश हो कर बाहर निकला, शालेहा गर्म चाय का प्याला ले कर हाजिर थी. शालेहा उस की चाय में जहर मिला कर लाई थी. दिन भर की थकान के बाद घर लौटे पति के लिए पत्नी के हाथ से बनी चाय बड़ा सुकून देती है. शाहिद चाय का प्याला हाथों में ले कर चाय की चुस्कियां लेने लगा. उस समय उसे चाय का स्वाद अजीब लग रहा था, मगर बीवी से इस की शिकायत कर वह मूड खराब नहीं करना चाहता था.

चाय पीने के कुछ देर बाद ही शाहिद को बेचैनी और घबराहट होने लगी. कीटनाशक का असर होने पर शाहिद तड़पते हुए इधरउधर न भागे, इसलिए शालेहा और उस के प्रेमी ने बाहर से कमरे का दरवाजा बंद कर दिया था. करीब एक घंटे बाद जब शाहिद को बेचैनी हुई तो अहसास हुआ कि उसे जहर दे दिया गया है. उस ने दरवाजा खोलने की कोशिश की, जब नहीं खुला तो उस ने अपने मोबाइल पर वीडियो बनानी शुरू कर दी. उस की आवाज लडख़ड़ाने लगी थी.  अपने मोबाइल वीडियो में उस ने अपना बयान रिकौर्ड करते हुए कहा—

‘मैं अपने पूरे होशोहवास में बयान देता हूं कि मेरी मौत की जिम्मेदार मेरी बीवी शालेहा, उस का आशिक बंटू खान और बीवी के मांबाप हैं. मेरी बीवी ने अपने प्यार के चक्कर में मुझे धोखे से जहर पिला दिया है. ये लोग पिछले छह महीने से मुझे रास्ते से हटाने की कोशिश कर रहे थे. आज इन लोगों ने इस साजिश को अंजाम दे दिया है.’

इस के बाद उस ने मोबाइल एक तरफ रख दिया और उसे उल्टियां होने लगीं. शालेहा, बंटू और शाहिद के सासससुर बाहर से कमरे का दरवाजा बंद कर उस की मौत का इंतजार कर रहे थे. रात के करीब 11 बजे जब शाहिद के कमरे से आवाज आनी बंद हो गई तो चुपचाप शालेहा कमरे में दाखिल हुई. तब तक शाहिद निढाल हो कर गिर चुका था. शालेहा के पीछे बाकी के लोग भी आए.

इस के बाद किसी को हत्या का शक न हो, इसलिए करीब साढ़े 11 बजे शाहिद को कार से संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इसी दौरान शालेहा ने ससुर सलामत खान को सूचित कर दिया. पुलिस ने पहली नजर में घटना को आत्महत्या मान लिया, लेकिन शाहिद के पिता सलामत खान इसे आत्महत्या मानने को कतई तैयार नहीं थे.

किसी तरह शाहिद की हत्या के सबूत जुटाने में उन की मेहनत रंग लाई और लव मैरिज के बाद जिस बेटे को पिता सलामत खान ने 7 साल पहले घर से निकाल दिया था, उस की मौत के बाद उसी पिता के प्रयास ने कातिलों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में पुलिस की मदद की.

मरने से पहले का वीडियो देखने और फिर पूछताछ के बाद पुलिस ने हत्या की धारा बढ़ा दी. वीडियो की पड़ताल व विवेचना करने के बाद 6 अप्रैल, 2023 को रीवा की सिविल लाइंस थाना पुलिस ने आईपीसी की धारा 328, 302,120-बी, 34 का मामला कायम किया.

jaanch me police

पुलिस टीम ने शाहिद की हत्या के आरोप में उस की बीवी शालेहा और उस के आशिक बंटू खान के साथसाथ सास मोना परवीन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. कथा लिखे जाने तक आरोपी ससुर शमशाद उल हक को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई थी.

—कथा पुलिस सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट पर आधारित